samacharsecretary.com

सिंहस्थ 2028 की तैयारी शुरू, CM मोहन यादव ने पैतृक मकान में गेती चलाकर किया मेगा प्लान का शुभारंभ

उज्जैन. सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत शहर में सड़क चौड़ीकरण का काम तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को अपने पैतृक मकान पर स्वयं गेती चलाकर सड़क चौड़ीकरण के लिए भवन हटाने की शुरुआत की। इसके साथ ही खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक मार्ग के चौड़ीकरण की कार्यवाही प्रारंभ हो गई। 730 मीटर लंबे मार्ग का होगा चौड़ीकरण करीब 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा। मार्ग चौड़ीकरण एवं विकास कार्य के लिए राज्य शासन द्वारा करीब 9.80 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सिंहस्थ में सुगम यातायात के लिए महत्वपूर्ण कदम यह मार्ग शहर के महत्वपूर्ण और व्यस्त संपर्क मार्गों में शामिल है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान उज्जैन में श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए मार्ग का चौड़ीकरण यातायात व्यवस्था को सुगम और व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमेरिका रोकेगा डीजल निर्यात? मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन के कदम पर दुनिया की नजर

 वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डीजल के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है. दरअसल, अमेरिका में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इससे घरेलू स्तर पर लोगों की परेशानी बढ़ी है. ट्रंप प्रशासन अब कीमतों को कम करने के रास्ते तलाश रहा है।  इसी बीच डीजल निर्यात पर रोक का प्रस्ताव सामने आया है. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी कहा है कि प्रशासन निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका दुनिया में डीजल के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल है. वह वैश्विक डीजल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा उपलब्ध कराता है. ऐसे में अमेरिका से डीजल का निर्यात कम होने पर दुनिया के दूसरे देशों में इसकी कीमत बढ़ सकती है।  इस समय वैश्विक ईंधन बाजार पहले से दबाव में है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल सप्लाई भी प्रभावित हुई है. वहीं, रूस के डीजल निर्यात पर रोक और यूक्रेन के रूसी तेल ठिकानों पर हमलों ने भी स्थिति को मुश्किल बनाया है।  ऑस्ट्रेलिया पर क्यों पड़ेगा ज्यादा असर? ऑस्ट्रेलिया विकसित देशों में प्रति व्यक्ति डीजल की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में है. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया आम तौर पर अमेरिका से डीजल आयात नहीं करता. मार्च में एक इमरजेंसी खेप जरूर अमेरिका से वहां पहुंची थी।  इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया पर असर पड़ सकता है. इसकी वजह वैश्विक बाजार है. अगर अमेरिका डीजल का निर्यात रोकता है तो दुनिया भर में इसकी कीमत तेजी से बढ़ सकती है. इससे ऑस्ट्रेलिया में भी ईंधन महंगा होगा. हालात ज्यादा बिगड़े तो वहां ईंधन की राशनिंग तक की नौबत आ सकती है।  अमेरिका में भी बढ़ सकती है परेशानी डीजल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने से अमेरिका को भी नुकसान हो सकता है. देश में डीजल की सप्लाई जरूरत से ज्यादा हो सकती है. इससे घरेलू कीमतें घट सकती हैं. लेकिन ज्यादा सप्लाई होने पर अमेरिकी रिफाइनरियों को उत्पादन कम करना पड़ सकता है. इसी वजह से व्हाइट हाउस ने फिलहाल पूरी तरह निर्यात रोकने के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार किया है।  ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि अमेरिकी कंपनियों को घरेलू बाजार की ओर ज्यादा ईंधन भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. इसके लिए टैक्स में छूट जैसे वित्तीय उपाय किए जा सकते हैं. इसके अलावा अमेरिका डीजल निर्यात के लिए कोटा भी तय कर सकता है. यानी देश से बाहर जाने वाले डीजल की मात्रा सीमित की जा सकती है. इस फैसले का इस्तेमाल व्यापार वार्ता में भी किया जा सकता है। 

MP-UP में पानी की बड़ी पहल, केन-बेतवा परियोजना पर तेज काम; 7 दशक पुराना जल विवाद भी चर्चा में

छतरपुर   मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट पर काम तीव्र गति से चल रहा है. ये परियोजना 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य. वहीं, एक ऐसी परियोजना भी है, जिस पर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के दो जिलों के किसानों के बीच 7 दशक से तनाव व्याप्त है।  बांध हमारा तो पानी तुम्हारा क्यों? सिंचाई के मौसम में रनगुवां डैम का पानी लेने के लिए छतरपुर व बांदा जिले के किसान आमने-सामने आ जाते हैं. दोनों जिलों के किसानों के बीच ये विवाद करीब 7 दशक से चल रहा है. अब फिर रबी फसल की सिंचाई का मौसम सामने है, ऐसे में दोनों जिलों के किसान फिर आमने-सामने हैं और प्रशासन इनके सामने असहाय की मुद्रा में. ये डैम बना तो छतरपुर जिले में है लेकिन अधिकांश पानी पर हक बांदा जिले का है।  डैम पर पूरा नियंत्रण उत्तर प्रदेश के पास बीते दो साल छोड़ दिए जाएं तो मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका सूखे के लिए बदनाम रहा है. इसलिए यहां पानी को लेकर हमेशा युद्ध जैसी स्थिति रहती है. छतरपुर में आधा दर्जन से अधिक बांध होने के बावजूद सिंचाई साधनों की कमी है. रनगुवां बांध छतरपुर जिले में होने के बावजूद इसका पानी उत्तर प्रदेश के खेतों के लिए अमृत बना हुआ है. छतरपुर जिले के किसान हर साल सिंचाई के पानी के लिए तरसते हैं।  छतरपुर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर राजनगर इलाके से निकली केन की सहायक पर रनगुवां डैम बना है. इस डैम का निर्माण 1957 में एमपी और यूपी के संयुक्त उपक्रम के रूप में किया गया. ये बांध भले ही मध्य प्रदेश के छतरपुर सीमा में है लेकिन इसका प्रशासनिक नियंत्रण और रखरखाव उत्तर प्रदेश का बांदा जिले का सिंचाई विभाग करता है।  किसानों में फिर रोष, आंदोलन की चेतावनी छतरपुर के रनगुवां के किसान कमलेश रैकवार कहते हैं "बांध उनके क्षेत्र में होने के बावजूद उनके हक का पानी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती गांवों में जाता है. यूपी के बांदा जिले को पानी ज्यादा दिया जाता है, जिससे यहां के किसानों की फसलें सूखने लगती हैं. हमारे हिस्से का पानी भी यूपी के किसान निकालते हैं. हम लोगों की खेती समय से नहीं हो पाती।  कम बारिश होने की स्थिति में बांध में पानी का स्तर कम होता है, तब यह विवाद उग्र होने लगता है. छतरपुर जिले के किसान संघ के अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद पटेल कहते हैं "यह विवाद पीढ़ियों से चला आ रहा है. कई बार यह मुद्दा किसानों ने उठाया है. छतरपुर जिले की सीमा में बांध बना है लेकिन यहां किसानों को पानी नहीं मिल रहा. अब किसानों के पास आंदोलन के अलावा कोई चारा नहीं है. किसानों को उनके हक का पानी मिलेगा।  52 साल पहले हुआ था दोनों राज्यों के बीच एग्रीमेंट रनगुवां डैम के पानी के बंटवारे को लेकर एग्रीमेंट 1 अगस्त 1972 को हुआ था. उस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रकाश चंद सेठी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलपति त्रिपाठी ने इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे. अनुबंध के अनुसार रनगुवां डैम का 30 प्रतिशत पानी मध्य प्रदेश के छतरपुर और 70 प्रतिशत पानी यूपी के बांदा को मिल रहा है।  रनगुवां के किसान मुन्ना अहिरवार कहते हैं "जब सिंचाई का सीजन शुरू होता है तो यूपी वाले पानी रोक देते हैं. हम लोगों की फसल चौपट हो जाती है. कई बार आवाज उठाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ." छतरपुर के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री राकेश वर्मा कहते हैं राजनगर इलाके में बने रनगुवां बांध से राजनगर इलाके के 35 गांवों मे सिंचाई होती है. यूपी के बांदा जिले के लगभग 95 गांवों की खेती को रनगुवा बांध पानी देता है. रनगुवा बांध की लंबाई 2 हजार 72 मीटर और ऊंचाई 27.400 मीटर है. इसकी जलभराव क्षमता 155 MCM है।  केन-बेतवा लिंक परियोजना पूरी होने पर खत्म होगा विवाद रनगुवां डैम के पानी वितरण को लेकर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम पूरा होने के बाद खत्म होने की संभावना है. इस परियोजना पर काम तेज गति से चल रहा है. छतरपुर के ADM विनय द्विवेदी कहते हैं " केन-बेतवा लिंक परियोजना से सूखे बुन्देलखंड में पानी के संकट से लोगों को छुटकारा मिलेगा. किसानों के खेतों में हरियाली लहराएगी. परियोजना वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है. परियोजना की कुल लागत ₹44,605 करोड़ रुपये है. परियोजना के तहत केन नदी पर 96.7 मीटर ऊंचा और 2 से 2.5 किमी चौड़ा डैम बनेगा।  सिंचाई के अलावा पेयजल संकट सुलझेगा केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश के 10 जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर और उत्तरप्रदेश के 4 जिलों में 2.51 लाख हेक्टेयर मिलाकर कुल 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी. दोनों राज्यों के करीब 65 लाख लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी. MP के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी, रायसेन और UP जिले बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना वरदान साबित होगी। 

MP में पानी के सफर का बदलेगा सिस्टम! क्रूज-बोट के लिए बनेगी अलग अथॉरिटी

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब पानी के रास्ते सफर का पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी है। बड़े तालाब, नदियों और बांधों में चलने वाले क्रूज, बोट और दूसरे जल परिवहन साधनों के लिए अलग अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके जरिए यह तय होगा कि पानी के जहाजों का रजिस्ट्रेशन कौन करेगा, संचालन के नियम क्या होंगे और जल परिवहन की जिम्मेदारी किस विभाग के पास रहेगी। अभी राज्य में जल परिवहन का इस्तेमाल मुख्य रूप से पर्यटन गतिविधियों के लिए किया जाता है। नई व्यवस्था के बाद इसे पर्यटन से आगे ले जाकर व्यवस्थित इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित करने की तैयारी है। क्रूज-बोट के लिए अलग नियम होंगे अथॉरिटी बनने के बाद क्रूज, बोट और अन्य जलयान मनमाने तरीके से संचालित नहीं होंगे। इनके संचालन और रजिस्ट्रेशन के लिए नियम तय किए जाएंगे। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अलग-अलग जल क्षेत्रों में किस तरह के जलयान चल सकेंगे और उनकी संचालन व्यवस्था किस विभाग के अधीन होगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी अथॉरिटी के गठन और नियमों का खाका तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में वित्त, परिवहन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, विधि और पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यानी नई व्यवस्था तैयार करते समय परिवहन के साथ पर्यटन और जल संसाधन से जुड़े पहलुओं को भी साथ रखा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल. कौन करेगा संचालन? नई अथॉरिटी के सामने अहम काम यह तय करना होगा कि जलयानों का रजिस्ट्रेशन और संचालन किस विभाग के जिम्मे रहेगा। अलग-अलग राज्यों में इसकी व्यवस्था अलग है। उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों में परिवहन विभाग की भूमिका है, जबकि गुजरात और तटीय क्षेत्रों में मरीन विभाग इस तरह की जिम्मेदारी संभालता है। मध्यप्रदेश में किस मॉडल को अपनाया जाए, इस पर कमेटी की सिफारिश के आधार पर आगे फैसला होगा। पर्यटन से ट्रांसपोर्ट तक बढ़ेगा दायरा अभी भोपाल के बड़े तालाब समेत प्रदेश के कई जल क्षेत्रों में बोट और क्रूज मुख्य रूप से पर्यटन का हिस्सा हैं। नई अथॉरिटी का उद्देश्य केवल पर्यटकों के लिए जलयान चलाना नहीं होगा। इसके जरिए इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट को एक अलग परिवहन माध्यम के तौर पर विकसित करने की संभावनाएं भी देखी जाएंगी। इससे भविष्य में जल मार्गों का इस्तेमाल यात्री या अन्य परिवहन गतिविधियों के लिए किए जाने का रास्ता तैयार हो सकता है। दूसरे राज्यों तक भी पहुंच सकता है जल परिवहन नई व्यवस्था का दायरा मध्यप्रदेश की सीमाओं तक सीमित रखने की योजना नहीं है। अथॉरिटी बनने के बाद अंतरराज्यीय जल परिवहन की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है। इसके लिए दूसरे राज्यों के साथ जल मार्गों की कनेक्टिविटी, नियम और संचालन व्यवस्था जैसे पहलुओं पर आगे रूपरेखा तैयार होगी। अब पानी पर भी बनेगा ट्रांसपोर्ट का सिस्टम मध्यप्रदेश में बड़ी नदियों और जलाशयों का नेटवर्क है। ऐसे में नई अथॉरिटी के गठन से पहली बार जल परिवहन को लेकर एक केंद्रीकृत नियामक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ेगा। क्रूज और पर्यटन बोट से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आगे यात्री परिवहन और अंतरराज्यीय जल कनेक्टिविटी तक पहुंचती है या नहीं, यह अथॉरिटी के नियम और सरकार के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।

मध्य प्रदेश में एक्सप्रेसवे का बड़ा नेटवर्क, भोपाल से दिल्ली-आगरा कनेक्टिविटी होगी तेज

सागर  मध्य प्रदेश के रोड प्रोजेक्ट जहां देश के दूसरे राज्यों को बेहतर कनेक्टिवटी के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही मध्य प्रदेश के शहरों को देश के महानगरों से जोड़ने का काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में बन रहे दो एक्सप्रेस वे के चलते देश की राजधानी दिल्ली मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के करीब आ रही है. दरअसल, भोपाल ग्वालियर और ग्वालियर आगरा एक्सप्रेस वे से मध्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली एनसीआर तक हाईस्पीड कनेक्टिवटी मिलने जा रही है।  भोपाल से ग्वालियर तक फोरलेन एक्सेस कंट्रोल्ड कारीडोर बनेगा, तो ग्वालियर से आगरा तक 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनेगा. इन दोनों एक्सप्रेस वे के कम्पलीट होने के बाद भोपाल से दिल्ली के बीच की दूरी में करीब 4 घंटे का फर्क आएगा. फिलहाल इस सफर में 11-12 घंटे लगते हैं. लेकिन इन दोनों प्रोजेक्ट के कम्पलीट होने पर 7-8 घंटे का समय लगेगा. फिलहाल इन प्रोजेक्ट के निर्माण के पहले की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं और एक अनुमान के मुताबिक, 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इनका काम शुरू हो जाएगा।  भोपाल-ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे भोपाल ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे राजधानी भोपाल और ग्वालियर के बीच करीब 320 किमी का प्रोजेक्ट है. जो भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके से शुरू होकर ब्यावरा, गुना, शिवपुरी होते हुए ग्वालियर तक पहुंचेगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर का सफर तय करने में 425 किमी दूरी तय करना होती है, जो सीधे 100 किमी कम हो जाएगी और करीब 320 किमी का सफर तय करना होगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7-8 घंटे का समय लगता है, जो घटकर 5 से 6 घंटे रह जाएगा. मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) इस प्रोजेक्ट का DPR तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया पर काम कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इसका काम शुरू हो जाएगा।  क्या कहते हैं जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते हैं कि, ''ये दोनों प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को दिल्ली से शानदार कनेक्टिवटी देने का काम करेंगे. इन प्रोजेक्ट का काम पूरा होते ही मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर सहित मुरैना, गुना, शिवपुरी, राजस्थान का धौलपुर और यूपी के आगरा मथुरा के साथ बेहतर कनेक्टिविटी होगी, जो दिल्ली एनसीआर को जोड़ने का काम करेगी।  इस प्रोजेक्ट के कारण भोपाल के उत्तरी इलाके की प्रापर्टी में उछाल आएगा.खासकर सागर विदिशा रोड़ पर सूखी सेवनिया से जहां रोड शुरू होगी, वहां रियल एस्टेट से जुड़े प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ेगी. गुना और ग्वालियर बाॅयपास से गुजरने वाले इस फोरलेन पर लाजस्टिक कंपनियां अपने गोदाम, कोल्ड स्टोरेज चैन और ट्रक टर्मिनल जैसे प्रोजेक्ट आ रहे हैं. एक प्रोजेक्ट पर एमपीआरडीसी और एक पर एनएचएआई काम कर रहा है।  ग्वालियर-आगरा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे ग्वालियर से आगरा को जोड़ने के लिए 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो ग्वालियर के सुसेरा बाॅयपास से शुरू होगा. जो राजस्थान के धौलपुर से आगरा, आगरा इनर रिंग रोड से मथुरा और मथुरा से दिल्ली एनसीआर को जोड़ देगा. इसकी लंबाई करीब 90 किमी होगी. इसकी प्रारंभिक लागत 4600 करोड़ आंकी गयी है. इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में करीब 549 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।  फिलहाल भोपाल से आगरा जाने में करीब 11-12 घंटे समय लगता है. इस सिक्स लेन प्रोजेक्ट के पूरा होने पर ये सफर 7 घंटे में पूरा जाएगा. फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. ये प्रोजेक्ट ग्वालियर से मुरैना और मुरैना से धौलपुर, धौलपुर से आगरा और आगरा मथुरा होते हुए दिल्ली एनसीआर से कनेक्ट किया जाएगा।   

युद्ध अभ्यास 2026 में SkyStriker का सटीक वार, ऑपरेशन सिंदूर वाले ड्रोन को अमेरिका ने किया नोटिस

नई दिल्ली युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पर स्काईस्ट्राइकर लोइटिरिंग म्यूनिशन ने सटीक हमला किया. इस प्रदर्शन में उसने निर्धारित लक्ष्यों का पता लगाने, उन पर निशाना साधने और सटीक प्रहार करने की अपनी क्षमता साबित की. यह परीक्षण वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में किया गया।  अभ्यास में भारतीय और अमेरिकी सेनाएं शामिल रहीं और स्काईस्ट्राइकर ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को रेखांकित किया. लोइटिरिंग म्यूनिशन एक ऐसा सिस्टम है जो हवा में मंडराते हुए लक्ष्य की तलाश करता है. फिर सटीक हमला करता है. स्काईस्ट्राइकर ने इस क्षमता को महाजन जैसे कठिन मैदानी इलाके में दिखाया. इससे सेनाओं को यह समझने में मदद मिली कि ड्रोन आधारित हथियार ऑपरेशन में कितने प्रभावी हो सकते हैं।  ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल इस ड्रोन के सफल परीक्षण ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के महत्व को फिर से उजागर किया. आज की सेनाएं पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ बिना चालक वाले सिस्टम पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं. स्काईस्ट्राइकर जैसे प्लेटफॉर्म सटीक प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं. इससे अनावश्यक नुकसान कम होता है और लक्ष्य को ज्यादा असरदार तरीके से निपटाया जा सकता है।  युद्ध अभ्यास 2026 का मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है. स्काईस्ट्राइकर के प्रदर्शन ने दिखाया कि स्वदेशी सिस्टम अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में भी अपनी जगह बना रहे हैं. आधुनिक युद्ध अब सिर्फ बड़े हथियारों तक सीमित नहीं रह गया. छोटी लेकिन सटीक प्रणालियां भी फैसला करने वाली साबित हो सकती हैं।  ड्रोन आधारित युद्धक्षेत्र की चुनौतियां आज के युद्धक्षेत्र में ड्रोन और बिना चालक वाले सिस्टम आम होते जा रहे हैं. सेनाएं मल्टी-डोमेन ऑपरेशन यानी जमीन, हवा और अन्य क्षेत्रों में एक साथ काम करने की तैयारी कर रही हैं. स्काईस्ट्राइकर जैसे लोइटिरिंग म्यूनिशन इन जटिल परिस्थितियों में लक्ष्य का पता लगाने और समय पर प्रहार करने में मदद करते हैं।  महाजन रेंज पर हुए परीक्षण ने वास्तविक माहौल में इसकी क्षमता को परखा. यह प्रदर्शन सिर्फ एक हथियार का परीक्षण नहीं बल्कि भविष्य की युद्ध रणनीति की झलक है. सटीक हमले की क्षमता से सैनिकों को बेहतर विकल्प मिलते हैं. दुश्मन के ठिकानों को दूर से और सुरक्षित दूरी से निशाना बनाया जा सकता है. इससे अपने सैनिकों का जोखिम भी कम होता है।  युद्ध अभ्यास 2026 में स्काईस्ट्राइकर का इस्तेमाल दोनों सेनाओं के लिए सीखने का मौका बना. अमेरिकी और भारतीय जवान एक-दूसरे की तकनीकों और तरीकों को करीब से समझ सके. स्वदेशी सिस्टम का सफल प्रदर्शन भारत की रक्षा क्षमताओं पर भरोसा बढ़ाता है. साथ ही यह दिखाता है कि देश अब आधुनिक और सटीक हथियार विकसित करने में सक्षम है।  महाजन फील्ड फायरिंग रेंज लंबे समय से बड़े अभ्यासों के लिए जानी जाती है. यहां के कठिन हालात में स्काईस्ट्राइकर का काम करना इसकी विश्वसनीयता को साबित करता है. अभ्यास के दौरान लक्ष्य का पता लगाना, ट्रैक करना और फिर सटीक प्रहार करना पूरी प्रक्रिया का हिस्सा था. यह प्रक्रिया आधुनिक युद्ध की जरूरतों से मेल खाती है।  भविष्य की दिशा स्काईस्ट्राइकर जैसे सिस्टम भविष्य के युद्ध की तस्वीर बदल रहे हैं. ड्रोन युद्धक्षेत्र में सटीकता और तेजी सबसे महत्वपूर्ण हो गई है. सेनाएं अब ऐसे हथियारों पर जोर दे रही हैं जो कम लागत में ज्यादा असर डाल सकें. स्वदेशी तकनीक का विकास भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. यह सफल परीक्षण रक्षा अनुसंधान और सेना के सहयोग को भी दर्शाता है।  जब तक नई तकनीक मैदान में साबित नहीं होती तब तक उसका असली मूल्य पता नहीं चलता. स्काईस्ट्राइकर ने महाजन में अपनी उपयोगिता दिखाई है. आने वाले समय में ऐसे और परीक्षण होने की उम्मीद है. कुल मिलाकर युद्ध अभ्यास 2026 में स्काईस्ट्राइकर का प्रदर्शन स्वदेशी क्षमता, सटीक युद्ध और आधुनिक ड्रोन तकनीक की तीनों दिशाओं को मजबूत करता है। 

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बनी सहमति? 90% बातचीत पूरी, जल्द ऐलान संभव

 नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका के संबंधों में सालो से व्‍यापार सबसे बड़ा अड़चन बना हुआ था, लेकिन अब दोनों देश एक निर्णायक मोड़ क करीब दिख रहे हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के सीनियर अधिकारी ने कहा है कि प्रस्‍ताव‍ित समझौता 90 फीसदी से ज्‍यादा पूरा हो चुका है, बस मसले बचे हुए हैं।   अधिकारी ने कहा कि यह डील दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जा सकता है. PTI के इस सवाल- कब डील पर साइन हो सकता है, के जवाब में अधिकार ने कहा कि मैं यही कहूंगा कि देखते रहिए, जैसा कि हम बार-बार कहते हैं, 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है और बस कुछ आखिरी चीजें तय की जा रही हैं. इस कारण मुझे उम्‍मीद है कि आपको इस बारे में बहुत जल्‍द कुछ जानकारी मिलेगी।  अधिकारी ने आगे कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगा. अधिकारी ने यह भी कहा कि और इससे वास्तव में अमेरिका-भारत संबंधों में एक नया आयाम जुड़ेगा, जो व्यापार के मामले में दशकों से हमारे लिए संभव नहीं हो पाया है. यह हमेशा से ही संबंधों में सबसे बड़ी बाधा रही है।  पीयूष गोयल ने कहा- बस ये काम बाकी इससे पहले कमर्शियल और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिया था कि बातचीत लगभग पूरी होने वाली है. गुरुवार को नई दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दे दिया है, जिनमें अमेरिका के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है. उन्होंने आगे कहा कि हमें बस अपने लिए सही लाभ खोजना है ताकि हम समझौते को जल्‍द से लागू कर सकें।  भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे का ऐलान किया था. हालांकि, अमेरिकी टैरिफ में बदलाव के कारण आगे की बातचीत की आवश्यकता पड़ी. गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते वैश्विक जीडीपी के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से वाले बाजारों तक तरजीही पहुंच प्रदान करेंगे।  पीएम मोदी दिसंबर में अमेरिकी यात्रा पर  अमेरिकी अधिकरी ने संबंधों में चल रही व्‍यस्‍तता की ओर भी इशारा किया. विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्‍टूबर में भारी दौरे पर आने वाले हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले G20 शिखर सम्‍मेलन के लिए अमेरिका की यात्रा करेंगे. अधिकारी ने कहा कि संबंधों में बहुत कुछ चल रहा है. अधिकारी ने कहा कि क्वाड देशों के विदेश मंत्री इस साल तीसरी बार मिलने वाले हैं।  

₹250 करोड़ का चमचमाता जेट बनेगा CM का नया सफर साथी, जल्द होगी एंट्री

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के लिए कनाडा से भोपाल आ रहा बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 विमान को लेकर हर दिन नई-नई जानकारी सामने आ रही हैं। डीजीसीए के कड़े नियमों, पायलटों की री-ट्रेनिंग और इस हाई-टेक विमान के प्रोटोकॉल को लेकर यह बात सामने आई है कि फिलहाल भारतीय पायलटों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। जमीनी स्तर पर एक्टिव रहते हैं सीएम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मंत्रालय के वल्लभ भवन में बैठने की बजाए जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने और जायजा लेने अक्सर निकल जाया करते हैं। वे अक्सर ही अलग-अलग जिलों के प्रवास पर रहते हैं, इसलिए त्वरित गति का इस्तेमाल करने के लिए इस विमान का भी उपयोग किया जाएगा। सुपर-मिड साइज है यह बिजनेस जेट 6,297 किलोमीटर की नॉन-स्टॉप रेंज, हवा में उड़ता आलीशान विमान और 250 करोड़ की कीमत वाला सुपर-मिड साइज बिजनेस जेट 'बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500' अब मध्य प्रदेश के आसमान पर उड़ते रहेगा। मुख्यमंत्री जैसे अति-विशिष्ट और संवेदनशील पद की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए राज्य सरकार हर कदम बेहद फूंक-फूंक कर उठा रही है। कनाडा से उड़ान भरने को तैयार यह विमान 30 सितंबर तक भोपाल पहुंचने वाला है, लेकिन इससे पहले इसकी हर तकनीकी बारीकी को परखा जा रहा है। विमानन संचालनालय में नियमित पद पर पदस्थ सीनियर पायलट विश्वास राय इस नए प्लेन को उड़ाने के लिए कनाडा में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्लेन को उड़ाने के लिए तीन पायलटों की व्यवस्था रहेगी, लेकिन एक बार में दो पायलट ही प्लेन उड़ाएंगे। जब तक पायलट की ट्रेनिंग पूरी नहीं हो जाती, तब तक विमान निर्माता कंपनी एक साल के लिए अपने एक पायलट की सेवाएं मध्य प्रदेश सरकार को उपलब्ध कराएगी। तीसरे पायलट की नियुक्ति के लिए निजी एविएशन कंपनियों से दरें मांगी गई हैं। राज्य सरकार ने इस नए स्टेट जेट प्लेन की खरीदी के लिए अपने बजट में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर से अत्याधुनिक चैलेंजर 3500 जेट विमान खरीदा जा रहा है। वर्तमान में, राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर किराए के विमानों पर निर्भर रहती है। नए विमान के आने के बाद यह निर्भरता समाप्त हो जाएगी। सरकार अभी किराए के विमान का उपयोग करने के लिए प्रति घंटा दो से पांच लाख रुपये किराया देती है। इसके अलावा, प्लेन का उपयोग हो या न हो, स्टेट हैंगर पर खड़े रहने का प्रतिदिन 10 लाख रुपये भुगतान करना होता है। इसके लिए अलग-अलग 12 विमान कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया है। पिछले लंबे समय से यही व्यवस्था है, जिस वजह से राज्य का एक बड़ा बजट किराया भरने में ही चला जाता है। यह जेट प्लेन केवल छह शहरों की हवाई पट्टियों पर ही उतरने लायक है। इन शहरों में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और सिंगरौली शामिल हैं। इन शहरों के अलावा मुख्यमंत्री इस प्लेन का उपयोग प्रदेश के अन्य शहरों तक पहुंचने में नहीं कर पाएंगे। इस प्लेन की सीटिंग कैपेसिटी आठ प्लस टू है, जिसका अर्थ है कि प्लेन में आठ यात्री बैठ सकेंगे और दो पायलट रहेंगे। देसी पायलट अटक रहे फिलहाल यह जानकारी सामने आई है कि इस हाई-टेक जेट को आसमान में उतारने के लिए भेजे गए दोनों भारतीय पायलट जब अपनी पहली कोशिश में कठिन टेस्ट पूरी तरह पास नहीं कर पाए, तो सुरक्षा से कोई समझौता न करते हुए उन्हें दोबारा गहन ट्रेनिंग दिलाई गई। अब ये दोनों पायलट सह-पायलट की भूमिका निभाएंगे। जबकि विमान की मुख्य कमान एक अनुभवी विदेशी पायलट के हाथों में होगी। विदेशी पायलट फिलहाल उड़ाएंगे विमानन नियमों के मुताबिक इसके लिए 'फॉरेन एयरक्रू टेम्परेरी ऑथराइजेशन' (FATA) की मंजूरी ली गई है। विमान नियम 1937 और डीजीसीए के कड़े मानकों के तहत 65 वर्ष से कम आयु और बड़े विमानों का कम से कम दो हजार घंटे का अनुभव रखने वाले विदेशी पायलट ही ऐसे विमानों को संभाल सकते हैं, जिसकी वैधता दिसंबर 2026 तक है। टर्बुलेंस को भी देता है मात गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पुराने टर्बोप्रॉप विमान के मुकाबले यह नया विमान लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस यह जेट 45 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़कर टर्बुलेंस को मात देता है। इसकी 870 किमी/घंटा की रफ्तार इसे भोपाल से सीधे टोक्यो तक पहुंचाने में सक्षम है। सुरक्षा और तकनीकी जांच के तमाम कड़े दौर से गुजरने के बाद यह वीवीआईपी जेट मुख्यमंत्री के सुरक्षित और आरामदायक दौरों का नया सारथी बनने जा रहा है। पुराने टर्बोप्रॉप विमान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस इस जेट को उतरने के लिए कम से कम 5,500 फीट लंबे रनवे की जरूरत होगी, जिससे यह भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और खजुराहो सहित चुनिंदा हवाई पट्टियों पर ही संचालित हो सकेगा।  

Smart TV पर FREE चैनल देखने वालों के लिए बड़ी खबर! TRAI कर रहा नए नियम पर विचार

नई दिल्ली TRAI Free Internet TV Regulation Rules: ट्राई एक नया नियम लाने पर विचार कर रहे हैं, जिससे इंटरनेट पर फ्री टीवी देखने वालों को बड़ा झटका लग सकता है। सूत्रों के अनुसार, ट्राई, एप्लीकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) और फ्री ऐड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सर्विसेस को एक फॉर्मल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के दायरे में लाने की सिफारिश कर सकती है। नए नियम लागू होने से स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल वाली सुविधा थोड़ी सिकुड़ सकती है। हालांकि, यह फाइनल नियम नहीं है, बल्कि अभी केवल सुझाव मांगे जा रहे हैं। इसलिए जब तक नियम लागू नहीं होते, स्मार्ट टीवी पर मुफ्त चैनल चलते रहेंगे और इसका असर फिलहाल ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। यह मुद्दा तब उठा, जब सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ट्राई से यह जांचने को कहा कि क्या FAST और ALTD सर्विसेस को लाइसेंसिंग के दायरे में लाया जाना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि ट्राई के अपनी इस बात पर कायम रहने की उम्मीद है कि लीनियर, शेड्यूल वाले चैनल देने वाली ओपन-इंटरनेट टेलीविजन सर्विसेस को पूरी तरह से फॉर्मल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। इंडस्ट्री दो गुटों में बंटी मामला सामने आने के बाद टीवी और ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री दो गुटों में बंट गई है। केबल और DTH ऑपरेटर जैसे पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म का तर्क है कि FAST सर्विसेस टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन की नकल कर रही हैं, जबकि वे लाइसेंस प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटरों पर लागू कई शर्तों का पालन किए बिना काम कर रही हैं। हालांकि, टेक्नोलॉजी कंपनियों, OTT प्लेटफॉर्म, स्मार्ट-TV बनाने वाली कंपनियों और FAST ऑपरेटरों का तर्क है कि इंटरनेट पर आधारित सर्विसेस पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग से बिल्कुल अलग हैं और उन पर पुराने लाइसेंसिंग नियम लागू नहीं होने चाहिए। केबल/DTH वाले कह रहे हैं कि मुफ्त इंटरनेट टीवी उनकी सब्सक्रिप्शन घटा रही है, इसलिए नियम चाहिए। डिजिटल/OTT वाले कहते हैं कि इंटरनेट सर्विसेस पर पुराने ब्रॉडकास्ट नियम न थोपो। इसलिए, रेगुलेटरी बहस अब मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित हो रही है कि किसी सर्विस का स्वरूप उस टेक्नोलॉजी से तय होना चाहिए जिसका इस्तेमाल उसे देने के लिए किया जाता है, या फिर उस टेलीविजन जैसे अनुभव से जो वह ग्राहकों को देती है। ये फ्री इंटरनेट TV क्या है?  Samsung TV Plus, LG Channels, Pluto TV, Xiaomi जैसी स्मार्ट टीवी पर आने वाले ऐप्स/प्लेटफॉर्म। इनमें लीनियर टीवी चैनल (जैसे पारंपरिक टीवी की तरह शेड्यूल पर चलने वाले) मुफ्त दिखते हैं। इसका पैसा विज्ञापन से आता है, इसलिए सब्सक्रिप्शन फीस नहीं ली जाती है। ये इंटरनेट के जरिए स्मार्ट टीवी, ऐप या ब्राउजर पर चलते हैं। ये पारंपरिक केबल/DTH/IPTV की तरह काम करते हैं, लेकिन अभी तक लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन के सख्त नियमों में नहीं थे। ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा अगर ट्राई का प्रस्तावित नियम लागू हो जाता है, तो दर्शकों को खराब सर्विस या किसी तरह का फ्रॉड होने पर शिकायत दर्ज कराने का अधिकार मिलेगा। इससे टीवी की तरह ही इंटरनेट पर चलने वाले चैनलों पर भी अश्लील या भ्रामक विज्ञापनों और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने पर लगाम लगेगी। अभी जितने चैनल इंटरनेट पर फ्री में देखे जा सकते हैं, उन पर लाइसेंस फीस लगने के बाद वे कुछ चार्ज यूजर्स से ले सकते हैं। यानी नए नियम लागू होने से स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल वाली सुविधा थोड़ी सिकुड़ सकती है। इससे इंटरनेट पर टीवी देखना मुफ्त नहीं रहेगा।

उज्जैन में सिटी बस सेवा होगी शुरू, 12 रूट पर चलेंगी AC ई-बसें

उज्जैन   महाकाल की नगरी उज्जैन में सरकारी परिवहन सेवा का इंतजार खत्म हो गया है। दो-तीन दिनों में सिटी 2 बस सेवा फिर शुरू होने वाली है। इसके लिए शुक्रवार-शनिवार को 10 ई-बसें (Ujjain e-buses service) शहर पहुंच जाएंगी। इन बसों को सबसे पहले उज्जैन दर्शन रूट पर उतारकर सिटी बस सेवा की शुरुआत की जाएगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना में शुक्रवार को सीएम डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में भोपाल से कुछ जिलों में संचालन के लिए 351 बसों को झंडी दिखाई। उज्जैन की 10 सिटी बसें भी शामिल थीं। ये बसें शुक्रवार देर रात या शनिवार सुबह तक शहर पहुंच जाएंगी। इन बसों को 27 किलोमीटर से अधिक लंबे उज्जैन दर्शनी रूट पर संचालित किया जाएगा। संभावना है कि दो-तीन दिन में बसों का संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद यात्रियों को आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस इन ई-बसों मैं सुलभ सफर की सुविधा मिल सकेगी। हालांकि, अभी इसका किराया घोषित नहीं किया गया है। जल्द ही किराया और फेरों की संख्या निर्धारित की जाएगी। यूसीटीएसएल को सौंपी संचालन की कमान मप्र में बसों के संचालन के लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड (एमपीवायपीआइएल) नाम से राज्य स्तरीय कंपनी बनाई जा रही है। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री है। परिवहन सचिव मनीष सिंह है। जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत उज्जैन में सिटी बस संचालन के लिए उज्जैन नई व्यवस्था में यूसीटीएसएल अब सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (यूसीटीएसएल) थी। एमपीवायपीआइएल के अधीन सहायक कंपनी के रूप में कार्य करेगी। इसका कार्य क्षेत्र भी बढ़ाया है। अब यूसीटीएसएल के अधीन संभाग के सभी सातों जिलों की बस सेवा रहेगी। उज्जैन से ही संभाग के जिलों की बस सेवा पर नियंत्रण रखा जाएगा। उज्जैन में संचालित ई-सिटी बसों का संचालन यूसीटीएसएल के पूर्व माध्यम से होगा। संचालन के लिए में ही निजी ऑपरेटर का चयन किया जा चुका है। शासन ने उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी को जिम्मेदारी भी सौंपी है। इस रूट पर चलेगी उज्जैन दर्शन सेवा है। उज्जैन दर्शन रूट की लंबाई 27.01 किलोमीटर है। यह सिटी बस के आंतरिक शहर के लिए निर्धारित 12 रूट में तीसरे नंबर का सबसे बड़ा रूट इसमें मेघदूत वन से बस मिलेगी। उज्जैन दर्शन रूट मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगा, जो महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, शिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर, भर्तृहरि गुफाएं, गढ़कालिका, काल भैरव, सिद्धवट मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, चिंतामन गणेश मंदिर से होते हुए पुनः मेघदूत वन पर समाप्त होगा। शुरुआत में इस रूट पर 10 बसें उतारी जाएंगी। कुछ दिनों में इस रूट पर बसों की संख्या 15 भी हो सकती है। तीन महीने में 12 रूट पर दौड़ेंगी 100 बसें शहर को सिटी बस के लिए केंद्र से कुल 100 ई-बसें आवंटित हुई है। मक्सी रोड पुराने डिपो पर ई-बस डिपो तैयार किया जा रहा है। यहां चार्जिग स्टेशन का निर्माण जारी है। एक-दो दिन में 100 में से 20 बसें उज्जैन पहुंच जाएंगी। इससे यूसीटीएसएल उज्जैन दर्शन के बाद एक-दो और रूट पर ई-बस सेवा शुरू कर देगा। संभावना है कि तीन महीने में सभी 100 बसें उज्जैन को उपलब्ध हो जाएंगी। ऐसा होने पर इस वर्ष के अंत या नए साल की शुरुआत में सभी 100 बसें निर्धारित सभी 12 रूट पर दौड़ती नजर आएंगी। ये रूट शहर के एक से दूसरे छोर को जोड़ने के साथ ही आसपास के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों को भी उज्जैन से जोड़ रहे है। जल्द ऑन रोड होंगी बसें बस सुविधा के लिए उज्जैन की बसों को भोपाल में हरी झंडी दिखाई गई है। 10 ई-बसें उज्जैन के लिए रवाना हो गई हैं। दो तीन दिन में इन्हें ऑनरोड कर दिया जाएगा। शुरुआत उज्जैन दर्शन रूट से की जा रही है। चरणबद्ध रूप से सभी 100 ई-बसें ऑनरोड हो जाएंगी।-संदीप सोनी, सीईओ, यूसीटीएसएल 11 रूट पर मिलेंगी बसें  उज्जैन दर्शन के बाद चरणबद्ध रूप से शेष 11 रूट पर सिटी बस सेवा शुरू की जाएगी। बसें इलेक्ट्रिक होंगी. 7 सीसीटीवी कैमरों संग अन्य सुरक्षा से लैस होंगी। रूट-यू1: तपोभूमि से पान बिहार, लंबाई 33.35 किमी। रूट-यू2: रेलवे स्टेशन से कालियादेह महल, लंबाई 9.48 किमी। रूट-यूः कानीपुरा से अभिलाषा कॉलोनी, लंबाई 12.94 किमी। रूट-यू 4: देवासगेट से तपोभूमि, लंबाई 16.78 किमी। रूट-यूडः देवासगेट से ताजपुर, लंबाई 16 किमी। रूट-यू 6: देवासगेट से सांवराखेड़ी नए आरटीओ, लंबाई 8.97 किमी। रूट-यू महाकाल चौराहे से अभिलाषा कॉलोनी, 11.52 किमी। रूट-यू४: देवासगेट से नानाखेड़ा, लंबाई 4.25 किमी। रूट-यू9: अवंतिका विवि जवासिया से नानाखेड़ा, लंबाई 17.84 किमी। रूट-यू 10: देवासगेट से मरलीपुरा, लंबाई 5.03 किमी। रूट-यू11: तपोभूमि से नजरपुर, लंबाई 28.44 किमी। रूट-यू 12: उज्जैन दर्शन, लंबाई 27.01 किमी। (अभी किराया दर व रूट पर बसों की संख्या घोषित नहीं की गई