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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकेत हैलीपेड पर किया प्रधानमंत्री का स्वागत

अयोध्यावासियों ने जयश्रीराम, जय जय हनुमान के जयकारे संग पुष्पवर्षा से प्रधानमंत्री का किया स्वागत  राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकेत हैलीपेड पर किया प्रधानमंत्री का स्वागत  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करने मंगलवार को अयोध्या पहुंचे प्रधानमंत्री  अयोध्या  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के जरिए ‘संकल्प सिद्धि’ के लिए रामनगरी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। जयश्रीराम, जय जय हनुमान के गगनभेदी नारों संग अयोध्यावासियों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर पुष्पवर्षा भी की। श्रीराम की अयोध्या ने प्रधानमंत्री का पूरे रास्ते में अभूतपूर्व स्वागत किया। अयोध्यावासियों के एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे हाथ में तिरंगा फहरा रहा था। वहीं स्वागत से अभिभूत प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। अयोध्या पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।  अयोध्यावासियों के एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे में तिरंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह अयोध्या पहुंचे। साकेत महाविद्यालय पर उनका हेलीकॉप्टर उतरा। वहां से काफिले संग टेढ़ी बाजार होते हुए उन्होंने श्रीराम मंदिर परिसर में प्रवेश किया। इस दौरान अयोध्यावासियों ने जयश्रीराम, जय जय हनुमान के गगनभेदी नारों संग उनका स्वागत किया। अयोध्यावासी एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे हाथ में तिरंगा फहराते हुए प्रधानमंत्री का स्वागत करते रहे। प्रधानमंत्री ने भी पूरे रास्ते में हाथ हिलाकर अयोध्यावासियों का अभिवादन किया।  सप्त मंदिरों में झुकाया शीश, की पूजा-अर्चना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सप्त मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह्य और माता शबरी मंदिर में पहुंचकर प्रधानमंत्री ने शीश झुकाया। प्रधानमंत्री ने शेषावतार मंदिर व माता अन्नपूर्णा मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया।  मुख्यमंत्री व राज्यपाल ने किया प्रधानमंत्री का स्वागत  प्रधानमंत्री अयोध्या में साकेत विश्वविद्यालय हैलीपेड पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की तरफ प्रस्थान किया। प्रधानमंत्री व सर संघ चालक ने रामलला के दरबार में झुकाया शीश  श्री राम मंदिर परिसर में राम दरबार पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दर्शन-पूजन व आरती की। यहां पुजारियों ने तीनों विशिष्टजनों को राम नामी गमछा ओढ़ाया व प्रसाद दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने विधिविधान से पूजन-अर्चन कर रामलला का भी आशीर्वाद प्राप्त किया।

अयोध्या में पीएम मोदी का संबोधन: राम मंदिर पर ध्वजारोहण, धर्म ध्वज बनेगा प्रेरणा

अयोध्या  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या के राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहरा दिया है. इस मौके पर पीएम मोदी के साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे. पीएम मोदी दिल्ली से अयोध्या से महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिये साकेत महाविद्यालय पहुंचे. पीएम मोदी साकेत महाविद्यालय से सड़क मार्ग से रोड शो की शक्ल में सप्त मंदिर पहुंचे.पीएम मोदी सप्त मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राम मंदिर पहुंचे और गर्भगृह के साथ ही मंदिर के प्रथम तल पर निर्मित राम दरबार में भी पूजा-अर्चना की. पीएम मोदी का यह दौरा आध्यात्मिक रूप से भी बेहद खास है. यह ध्वज सदियों के सपने साकार होने का प्रतीक- पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और पल की साक्षी बन रही है. आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है. आज रामभक्तों के दिल में असीम आनंद है. सदियों के घाव भर रहे हैं. सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है. आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति है, जिसकी अग्नि पांच सौ वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही. आज भगवान श्रीराम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा प्रतिष्ठापित हुआ.यह धर्मध्वज इतिहास के सुंदर जागरण का रंग है. इसका भगवा रंग, इस पर लगी सूर्यवंश की थाती रामराज की कीर्ति को. यह ध्वज संकल्प है, यह संकल्प से सिद्धि की भाषा है, यह सदियों के संघर्ष की सिद्धि है, सदियों के सपने का साकार स्वरूप है, राम के आदर्शों का उद्घोष है. संतों की साधना और समाज की सहभागिता की गाथा है. यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के आदर्शों का उद्घोष करेगा, सत्यमेव जयते का उद्घोष करेगा. यह ध्वज 'प्राण जाए पर वचन न जाई' की प्रेरणा है.  राम मंदिर की धर्म ध्वजा की विशिष्टता और महत्व अयोध्या के राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे  शिखर पर फहराई गई यह केसरिया धर्म ध्वजा अनेक मायनों में बेहद खास है. इस 10 फीट ऊंचे और 20 फीट लंबे धर्म ध्वज पर एक तेजस्वी सूर्य की छवि है, जो भगवान श्री राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक है, इस पर कोविदार वृक्ष की छवि के साथ एक 'ॐ' अंकित है. यह विशेष धर्म ध्वजा गुजरात की एक पैराशूट निर्माण कंपनी द्वारा 25 दिनों में तैयार की गई है. इसे टिकाऊ पैराशूट-ग्रेड कपड़े और प्रीमियम सिल्क के धागों से बनाया गया है. यह ध्वज 60 किमी/घंटा तक की हवा, बारिश और धूप का सामना करने में सक्षम है, जो इसकी लंबी आयु सुनिश्चित करता है. ध्वज के आयाम-  लंबाई: 20 फीट चौड़ाई: 10 फीट ध्वजदंड की ऊंचाई: 42 फीट केसरिया रंग का महत्व: केसरिया (भगवा) रंग सनातन परंपरा में त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक है. यह ज्ञान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का भी प्रतिनिधित्व करता है. रघुवंश के शासनकाल में इस रंग का विशेष महत्व था. ध्वज पर अंकित पवित्र चिह्न: ध्वज पर तीन मुख्य चिह्न अंकित हैं: सूर्य, ऊँ, और कोविदार वृक्ष. कोविदार वृक्ष: यह चिह्न रघुवंश की परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. प्राचीन ग्रंथों में इसे पारिजात और मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष बताया गया है, जो आज के कचनार वृक्ष जैसा दिखता है. सूर्यवंश के राजाओं के ध्वज पर सदियों से इसी वृक्ष का प्रतीक अंकित होता रहा है. वाल्मीकि रामायण में भी भरत के ध्वज पर इसका वर्णन मिलता है. ऊँ: सभी मंत्रों का प्राण माना जाने वाला 'ऊँ', ध्वजा पर अंकित होकर संपूर्ण सृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है. सूर्य: सूर्यदेवता को भी ध्वज पर चिह्नित किया गया है, जो विजय का प्रतीक माने जाते हैं. माना जाता है कि यह पूरा ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है.  जैसा सपना देखा था, उससे भी शुभकर मंदिर बन गया है- मोहन भागवत मोहन भागवत ने कहा कि इस दिन के लिए कितने राम भक्तों ने अपने प्राण अर्पण किए. मंदिर बनने में भी समय लगता है. यह धर्म ध्वज है. इसका भगवा रंग है. इस धर्मध्वज पर रघुकूल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है. कोविदार वृक्ष दो देव वृक्षों के गुणों का समुच्चय है. धर्मध्वज को शिखर तक पहुंचाना है. आज हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है. सबको शांति बांटने वाला, सुफल देने वाला भारतवर्ष हमें खड़ा करना है. जैसा सपना देखा था कुछ लोगों ने, बिल्कुल वैसा, उससे भी अधिक शुभकर यह मंदिर बन गया है. अयोध्या धाम में आज हर प्रकार की सुविधा- योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर पर धर्मध्वज के आरोहरण को नए युग का शुभारंभ बताया और कहा कि यह भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर लहराता यह केसरिया ध्वज धर्म का, भारत की संकल्पना का प्रतीक भी है. संकल्प का कोई विकल्प नहीं. योगी आदित्यनाथ ने 'लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे' नारे का भी उल्लेख किया और कहा कि भगवान राम की पावन नगरी एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. हर प्रकार की सुविधा आज अयोध्या धाम में है. उन्होंने अयोध्या में हुए विकास के काम भी गिनाए और जय जय श्रीराम के नारे के साथ अपनी बात पूरी की. राम मंदिर पर लहराया धर्म ध्वज राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज लहराने लगा है. पीएम मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज लहराया.

ज्वालामुखी की राख ने 4500 KM की दूरी तय की, पढ़ें 5 अहम सवालों के जवाब

इथियोपिया        अफ्रीका के एक दूरस्थ कोने में मौजूद एक ज्वालामुखी 12 हजार साल बाद अचानक फट पड़ा. और उसकी राख 4,500 किलोमीटर दूर भारत की राजधानी दिल्ली तक पहुंच रहा है. 23 नवंबर 2025 को इथियोपिया के अफार इलाके में हायली गुबी ज्वालामुखी में विस्फोट हुई. यह ज्वालामुखी इतने सालों से सोया हुआ था, लेकिन अब इसने आसमान में 14 किलोमीटर ऊंची राख की चादर बिछा दी है.  आइए समझते हैं यह राख इतनी दूर कैसे पहुंची? क्या इससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ेगा? अन्य महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजते हैं. पहले घटना की पूरी जानकारी समझते हैं, फिर 5 सवालों पर नजर डालते हैं. हायली गुबी ज्वालामुखी: कौन है यह 'सोया हुआ राक्षस'? हायली गुबी एक शील्ड ज्वालामुखी है, जो इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित है. यह एर्ता अले ज्वालामुखी श्रृंखला का सबसे दक्षिणी हिस्सा है. अफार क्षेत्र को 'पृथ्वी का नर्क' भी कहा जाता है, क्योंकि यहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. यह पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट वैली का हिस्सा है – जहां पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें (प्लेटें जो पृथ्वी की सतह को बनाती हैं) लगातार अलग हो रही हैं. विस्फोट का समय और आकार: 23 नवंबर 2025 को भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजे यह फटा. राख का गुबार समुद्र तल से 14 km ऊपर चला गया. वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पहले 12000 साल (होलोसीन काल) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है. सैटेलाइट डेटा से पता चला कि इसमें सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस की भारी मात्रा थी. वैज्ञानिक कारण: ज्वालामुखी फटने से पहले, एर्ता अले के नीचे 50 किलोमीटर लंबी मैग्मा की दीवार (मैग्मा डैम) टूट गई. इससे घंटों पहले 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था. पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट में सुपर प्लूम (गर्म मैग्मा का विशाल गुबार) का दबाव बढ़ रहा था, जो प्लेटों के अलग होने से पैदा होता है. यह रिफ्ट वैली अफ्रीका महाद्वीप को दो भागों में बांटने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है. स्थानीय प्रभाव: राख पास के गांव अफदेरा पर गिरी. कोई मौत नहीं हुई, लेकिन चरवाहों को चिंता है कि राख से चरागाह खराब हो जाएंगे और पशु बीमार पड़ सकते हैं. दनाकिल रेगिस्तान में कुछ पर्यटक फंस गए. विमानन पर असर: राख लाल सागर पार यमन और ओमान की ओर बढ़ी, फिर पूर्व की ओर पाकिस्तान, उत्तरी भारत और चीन तक. भारत में कई उड़ानें रद्द हुईं – जैसे एयर इंडिया की मुंबई-हैदराबाद और इंडिगो की कन्नूर-अबू धाबी. डीजीसीए ने एयरलाइंस को चेतावनी दी कि राख इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है. अब सवाल आता है – यह राख दिल्ली कैसे पहुंची? और क्या इससे हमारी हवा खराब हो जाएगी? आइए, 5 प्रमुख सवालों के सरल जवाब समझते हैं, वैज्ञानिक कारणों के साथ. 1. साढ़े 4 हजार किलोमीटर दूर से दिल्ली कैसे पहुंची ज्वालामुखी की राख? हायली गुबी से दिल्ली की दूरी लगभग 4,500 किलोमीटर है. राख इतनी दूर पहुंचने का मुख्य कारण है वायुमंडलीय हवाओं की जेट स्ट्रीम.   वैज्ञानिक कारण: ज्वालामुखी विस्फोट से राख बारीक कणों (जैसे कांच और चट्टान के टुकड़े) के रूप में निकलती है. यह इतनी ऊंची (14 किमी) जाती है कि स्ट्रेटोस्फीयर (उपरी वायुमंडल) में पहुंच जाती है. यहां जेट स्ट्रीम नाम की तेज हवाएं (100-130 किमी/घंटा की रफ्तार) चलती हैं, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं.  23 नवंबर को राख लाल सागर पार यमन-ओमान पहुंची, फिर अरब प्रायद्वीप से पाकिस्तान होते हुए राजस्थान में घुसी. 24 नवंबर रात 11 बजे तक यह दिल्ली पर छा गई. सैटेलाइट मैप्स (जैसे टूलूज VAAC) से पता चला कि यह 15,000 से 45,000 फीट ऊंचाई पर बह रही थी. अगर हवाएं न होतीं, तो राख बस 50-100 किमी दूर गिर जाती. याद कीजिए 2010 का आइसलैंड विस्फोट – उसकी राख भी यूरोप भर में फैली थी. 2. क्या इससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ जाएगा? नहीं, ज्यादा चिंता की कोई बात नहीं. राख ऊंचाई पर है, इसलिए सतह पर प्रदूषण का बड़ा असर नहीं पड़ेगा. वैज्ञानिक कारण: दिल्ली का AQI पहले से ही खराब (स्मॉग से) है, लेकिन यह राख स्ट्रेटोस्फीयर में है, जहां हवा साफ रहती है. IMD के निदेशक एम. मोहपात्रा ने कहा कि यह नीचे नहीं उतरेगी, इसलिए PM2.5 या PM10 पर ज्यादा प्रभाव नहीं. हां, आकाश धुंधला दिख सकता है. विजिबिलिटी कम हो सकती है. सल्फर डाइऑक्साइड गैस बादल बनाकर बारिश ला सकती है, जो प्रदूषण धो दे. लंबे समय में, SO₂ एसिड रेन पैदा कर सकती है, लेकिन यहां मात्रा कम है. कुल मिलाकर, स्थानीय प्रदूषण (कारें, फैक्टरियां) से ज्यादा खतरा नहीं. 3. ज्वालामुखी इतने साल बाद क्यों फटा? क्या कारण था? 12,000 साल की नींद टूटने का राज है पृथ्वी के अंदर की उथल-पुथल. वैज्ञानिक कारण: हायली गुबी पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट का हिस्सा है, जहां अफ्रीकी प्लेट दो भागों में बंट रही है. नीचे सुपर प्लूम नाम का गर्म मैग्मा का विशाल भंडार दबाव बना रहा था. विस्फोट से पहले मैग्मा की 50 किमी लंबी दीवार टूटी, जो एर्ता अले से मैग्मा लाई. भूकंप (4.7 तीव्रता) ने इसे ट्रिगर किया. वैज्ञानिक कहते हैं, यह रिफ्ट वैली की नया महाद्वीप बनने की प्रक्रिया है – लाखों साल बाद यहां नया समुद्र बन सकता है. पहले के विस्फोट अनदेखे रह गए क्योंकि इलाका दूरदराज है. 4. स्थानीय लोगों और पर्यावरण पर क्या असर पड़ा? इथियोपिया में तत्काल खतरा कम है, लेकिन लंबे समय के प्रभाव चिंताजनक हैं.     वैज्ञानिक कारण: राख मिट्टी की उर्वरता कम कर देती है, क्योंकि इसमें सिलिका (कांच जैसे कण) होते हैं जो पानी सोख लेते हैं.     चरवाहों के लिए खतरा: पशु राख की वजह से सांस की बीमारी पा सकते हैं. दनाकिल रेगिस्तान में पर्यटक फंस गए, क्योंकि राख से सड़कें फिसलन भरी हो गईं.     पर्यावरण पर: SO₂ से एसिड रेन हो सकती है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाए. लेकिन कोई मौत नहीं हुई, क्योंकि इलाका कम आबादी वाला है. वैज्ञानिक अब राख के नमूने ले रहे हैं ताकि इतिहास की जांच हो सके. 5. क्या यह रिफ्ट वैली में बाढ़ का कारण बन सकता है? सुपर प्लूम का क्या रोल? यह सवाल दिलचस्प है – हायली गुबी रिफ्ट वैली के उत्तरी छोर पर है. सुपर प्लूम से बाढ़ का कनेक्शन हो सकता है, लेकिन सीधा नहीं. वैज्ञानिक कारण: … Read more

रायपुर से दिल्ली तक गूंजा छत्तीसगढ़ का लोक रंग, राजधानी में शानदार प्रस्तुति

रायपुर : देश की राजधानी में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का भव्य प्रदर्शन लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति में भारत मंडपम में दिखी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा रायपुर राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आज छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं का अद्भुत संगम दिखाई दिया। 44वें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले  में छत्तीसगढ़ रजत जयंती वर्ष के अवसर पर  आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य-शैली और विविध लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पूरे वातावरण में उत्साह, ऊर्जा और आनंद भर दिया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, रायपुर लोकसभा सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, जांजगीर-चांपा लोकसभा सांसद मती कमलेश जांगड़े, कांकेर लोकसभा सांसद  भोजराज नाग सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने दीप प्रज्वलन कर की। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया तथा विभिन्न स्टॉलों में प्रदर्शित कला-कृतियों, हस्तशिल्प और उत्पादों को देखा। उन्होंने कलाकारों और उद्यमियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि देश की राजधानी में “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” की गूंज सुनकर प्रत्येक छत्तीसगढ़ वासी गर्व से भर उठता है।   मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा रायपुर में देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय के लोकार्पण का उल्लेख करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कला, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध भूमि है, जहाँ तीज-त्योहार, लोक-नृत्य और पारंपरिक कलाएँ आज भी उसी उत्साह और गरिमा के साथ संरक्षित हैं। उन्होंने मिलेट्स उत्पादन, स्थानीय हस्तशिल्प और जनजातीय परंपराओं को राज्य की असीम संभावनाओं का प्रतीक बताया तथा कहा कि राज्य सरकार कलाकारों के संरक्षण, आर्थिक सहयोग और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को और सशक्त बना रही है। मुख्यमंत्री ने देशवासियों को छत्तीसगढ़ आने तथा इसकी सादगी, सांस्कृतिक संपन्नता और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया। सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक-कलाओं की एक से बढ़कर एक झलक प्रस्तुत की।गौरा-गौरी, भोजली, राउत नाचा, सुआ नृत्य, पंथी और करमा नृत्य जैसी लोक-शैली की सजीव प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मोहित कर लिया। सुआ नृत्य की गीतमय अभिव्यक्ति, राउत नाचा की जोशीली लय, पंथी की आध्यात्मिक छटा और करमा की मनभावन प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की विविधता और लोक परंपराओं की गहराई को प्रभावी रूप से सामने रखा। पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष  राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष  नीलू शर्मा,  छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, विधायक  संपत अग्रवाल,  प्रबोध मिंज, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, मुख्य सचिव  विकास शील,  पर्यटन, संस्कृति एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव  रोहित यादव, सीएसआईडीसी के महाप्रबंधक  विश्वेश कुमार, संस्कृति विभाग के संचालक  विवेक आचार्य, खादी ग्रामोद्योग सचिव  श्याम धावड़े, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर मती ऋतु सैन, आवासीय आयुक्त मती श्रुति सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में CM विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का किया अवलोकन

रायपुर : अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ पेवेलियन का किया अवलोकन हस्तशिल्प, वन-उत्पाद और पारंपरिक कला ने खींचा देश-विदेश के खरीदारों का ध्यान रायपुर भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में आज छत्तीसगढ़ पेवेलियन आकर्षण का केंद्र बना रहा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के पेवेलियन का भ्रमण कर विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने  पेवेलियन में प्रदर्शित उत्पादों और नवाचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ वैश्विक व्यापार मंचों पर लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, वनोपज आधारित उत्पाद और पारंपरिक कला वैश्विक बाजार में अपनी विशेष पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि “देश-विदेश के खरीदारों के बीच छत्तीसगढ़ी उत्पादों की बढ़ती मांग स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और हमारे कारीगरों के सम्मान को नई दिशा दे रही है। यह ‘आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़’ के हमारे संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।” उन्होंने पवेलियन में प्रदर्शित कोसा सिल्क, धातु-शिल्प, ढोकरा कला, प्राकृतिक वन-आधारित उत्पाद, मिलेट-आधारित फूड प्रोडक्ट्स और सूक्ष्म उद्यमों के अभिनव मॉडल की सराहना की।  मुख्यमंत्री ने पेवेलियन में बस्तर की समृद्ध विरासत और कलाकृतियों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने डिजिटल टीवी पर प्रसारित डॉक्यूमेंट्री ‘बदलता बस्तर (आमचो बस्तर)’  का अवलोकन करते हुए कहा कि डॉक्यूमेंट्री में आज का नया बस्तर स्पष्ट दिखाई देता है। बस्तर बदल चुका है, और यह डॉक्यूमेंट्री उसी परिवर्तन का जीवंत अवलोकन कराती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य  सरकार जनजातीय और ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने के लिए विभिन्न योजनाओं और संस्थागत समर्थन को निरंतर मजबूत कर रही है। इस अवसर पर उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन, लोकसभा सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, मती कमलेश जांगड़े एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी उपस्थित थे।

भारत की बेटियों का दमखम: महिला कबड्डी टीम की लगातार दूसरी वर्ल्ड कप जीत पर PM मोदी हुए भावुक

नई दिल्ली  भारतीय महिला कबड्डी टीम ने सोमवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए कबड्डी विश्व कप 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने चीनी ताइपे को 35-28 के अंतर से हराकर लगातार दूसरी बार यह प्रतिष्ठित विश्व कप जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने दी बधाई भारतीय टीम के अजेय प्रदर्शन और ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम को बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हमारी भारतीय महिला कबड्डी टीम को कबड्डी विश्व कप 2025 जीतकर देश का गौरव बढ़ाने के लिए बधाई! उन्होंने शानदार जुझारूपन, कौशल और समर्पण दिखाया है। उनकी जीत अनगिनत युवाओं को प्रेरित करेगी।' गृह मंत्री अमित शाह ने भी टीम की तुरंत सराहना की। उन्होंने कहा, 'हमारे महिला कबड्डी टीम के इतिहास रचने पर मुझे बहुत गर्व है। आपकी शानदार जीत इस बात की पुष्टि करती है कि भारत की खेल प्रतिभा अद्वितीय है।' पूरे टूर्नामेंट में रहा अजेय दबदबा इस टूर्नामेंट में 11 देशों ने हिस्सा लिया था और भारतीय टीम पूरे सफर में अजेय रही। फाइनल से पहले सेमीफाइनल में उन्होंने मजबूत टीम ईरान को 33-21 से हराया था। वहीं, चीनी ताइपे ने सेमीफाइनल में मेजबान बांग्लादेश को मात दी थी। पूर्व भारतीय कप्तान अजय ठाकुर ने टीम की इस जीत को महिला कबड्डी के बढ़ते दबदबे और वैश्विक लोकप्रियता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि यह जीत दिखाती है कि पिछले कुछ सालों में महिला कबड्डी ने कितनी तरक्की की है। यह इस साल भारतीय महिला टीम का दूसरा बड़ा खिताब था, इससे पहले उन्होंने मार्च में एशियाई चैंपियनशिप भी जीती थी। पूर्व भारतीय खिलाड़ी मनप्रीत सिंह ने टीम के आत्मविश्वास और टीम वर्क की सराहना की। ग में भारत ने थाइलैंड, बांग्लादेश, जर्मनी और युगांडा को मात देकर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। भारत ने सेमीफाइनल में ईरान को 33-21 से हराकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया था। दूसरी ओर चीनी ताइपै ने बांग्लादेश को 25-18 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी। मार्च 2025 में एशियाई चैंपियनशिप जीतने के बाद भारत का यह दूसरा बड़ा खिताब है। पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा- देश को गौरवान्वित किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा, ‘भारतीय महिला कबड्डी टीम को विश्व कप 2025 जीतकर देश को गौरवान्वित करने के लिए बधाई। उन्होंने जबर्दस्त कौशल, प्रतिबद्धता और दृढता का प्रदर्शन किया। उनकी जीत से अनगिनत युवाओं को कबड्डी खेलने, बड़े सपने देखने और ऊंचे लक्ष्य तय करने की प्रेरणा मिलेगी।’ ‘टीमवर्क और आत्मविश्वास ने दिलाई जीत’ पूर्व कप्तान अजय ठाकुर ने भारतीय टीम की जीत को खेल में आए बदलाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, ‘फाइनल तक का उनका दबदबा और फिर खिताबी जीत यह दिखाता है कि महिला कबड्डी पिछले कुछ वर्षों में कितनी आगे बढ़ी है। यह खेल की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता का भी प्रमाण है।’ पूर्व भारतीय खिलाड़ी मनप्रीत सिंह ने टीम के आत्मविश्वास और एकजुटता की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘विश्व कप जीतना बेहद कठिन होता है। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ ने बेहतरीन विश्वास और टीमवर्क दिखाया। सभी को बहुत-बहुत बधाई।’ भारत की ‘शेरनियों’ ने दुनिया में फिर बजाया डंका भारतीय महिला कबड्डी टीम ने लगातार दूसरा विश्व कप जीतकर साबित कर दिया है कि इस खेल में दुनिया पर शासन की असली हकदार वही हैं। बेहतरीन फिटनेस, रणनीति और तालमेल की बदौलत टीम इंडिया ने फिर विश्व कबड्डी में स्वर्णिम इतिहास रचा। देश आपको सलाम करता है: राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लिखा, ‘भारतीय महिला कबड्डी टीम को वर्ल्ड कप घर लाने और देश को गौरवान्वित करने के लिए बधाई। आपका धैर्य, अनुशासन और साहस भारत की भावना को दर्शाता है। देश आपको सलाम करता है। जय हिंद।’

INS माहे भारतीय नौसेना में शामिल, जनरल उपेंद्र द्विवेदी बने ऐतिहासिक समारोह के साक्षी

मुंबई मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में माहे-श्रेणी का पहला स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत आज नौसेना में शामिल हो गया। कोचीन शिपयार्ड में निर्मित इस श्रेणी के आठ पनडुब्बी रोधी पोत नौसेना के बेड़े में शामिल होने हैं, जिनमें से यह पहला पोत है। यह माहे-क्लास का पहला पनडुब्बी रोधी (एंटी सबमरीन) और उथले पानी (जहां पानी की गहराई कम हो) में चलने वाला युद्धपोत है, जो तटीय इलाकों के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। मुंबई में हुए समारोह में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे। द्विवेदी ने तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा- सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति सिनर्जी है। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह जहाज उथले पानी में ऑपरेशन, तटीय इलाकों में गश्त, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश जैसे कामों में बड़ी भूमिका निभाएगा। ये काम बिना शोर के करने की काबिलियत के चलते इसे ‘साइलेंट हंटर’ नाम दिया गया है। INS माहे को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने तैयार किया है, जो नौसेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक मजबूत कदम माना जा रहा है। नौसेना ने इसे “नए दौर का तेज, फुर्तीला और आधुनिक भारतीय युद्धपोत” कहा है। INS माहे भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी का युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। यह शैलो वॉटर यानी कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में भी उच्च सटीकता (हाई-प्रिसिजन) के साथ ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसका 80 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बना है। यह एक मल्टी-रोल वॉरशिप है, जो कोस्टल डिफेंस, अंडरवॉटर सर्विलांस और सर्च-एंड-रेस्क्यू जैसे कई महत्वपूर्ण मिशन में तैनात किया जा सकता है। इसमें माइन ले-ड्रॉपिंग की क्षमता भी है, जिससे यह समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने और दुश्मन की गतिविधियों को रोकने में सक्षम है। युद्धपोत निर्माण में भारती की बढ़ती महारत माहे का जलावतरण स्वदेशी उथले पानी के लड़ाकू विमानों की एक नई पीढ़ी के आगमन का प्रतीक है- आकर्षक, तेज और पूरी तरह से भारतीय। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, माहे-श्रेणी युद्धपोत डिजाइन, निर्माण और एकीकरण में भारत की बढ़ती महारत को दर्शाता है। क्या है एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट? एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ऐसे युद्धपोत हैं जिन्हें तटीय क्षेत्रों के उथले पानी में पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये जहाज नौसेना की तटीय सुरक्षा क्षमता को बढ़ाते हैं और उन्नत सोनार, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर जैसी प्रणालियों से लैस होते हैं। ये जहाज दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, खोज और बचाव कार्यों को करने और माइन बिछाने जैसे काम भी कर सकते हैं। देश चैन से सोएगा क्योंकि आप जागते रहेंगे- थलसेनाध्यक्ष मुंबई में भारतीय नौसेना के नए युद्धपोत INS माहे के भव्य कमीशनिंग समारोह में थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह अवसर न सिर्फ गर्व का है, बल्कि देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता और समुद्री शक्ति का सशक्त प्रतीक भी है। उन्होंने सबसे पहले जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और पूरी टीम को ‘ब्रावो जूलू’ कहते हुए शानदार आयोजन के लिए बधाई दी।

भारतीय महिला कबड्डी टीम की विश्व कप जीत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताई खुशी

महिला कबड्डी विश्व कप विजय पर CM डॉ. यादव ने भारतीय टीम को दी बधाई भारतीय महिला कबड्डी टीम की विश्व कप जीत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताई खुशी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला कबड्डी विश्व कप जीतने पर भारतीय टीम को दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय महिला कबड्डी टीम को कबड्डी विश्व कप : 2025 जीतने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह ऐतिहासिक विजय अनगिनत युवा बेटियों की शक्ति, साहस और संभावनाओं को नई उड़ान देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कबड्डी विश्व कप जीतकर देश को विश्व पटल पर गौरवान्वित करने वाली भारतीय महिला टीम की सभी खिलाड़ियों का हार्दिक अभिनंदन है। उल्लेखनीय है कि बंगला देश की राजधानी ढाका में हुई स्पर्धा के अंतिम मुकाबले में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने चीनी ताइपे को 35-28 से शिकस्त दी। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। भारत ने सेमीफाइनल में भी ईरान पर 33-21 से जीत दर्ज की। टूर्नामेंट में 11 देशों ने हिस्सा लिया था। यह निरंतर दूसरा अवसर है जब भारतीय टीम ने यह स्पर्धा जीत कर श्रेष्ठता सिद्ध की है। 

सीएम योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी व राम मंदिर में किया दर्शन पूजन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंच परखीं तैयारियां सीएम योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी व राम मंदिर में किया दर्शन पूजन मुख्यमंत्री ने ध्वजारोहण कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियों के बारे में भी जाना अयोध्या  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के एक दिन पहले सोमवार को ही अयोध्या पहुंच गए। यहां उन्होंने ध्वजारोहण कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियों के बारे में भी जाना। मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी व श्रीराम मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अयोध्या पहुंचने के बाद सबसे पहले वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे। वहां का निरीक्षण किया और अधिकारियों को यहां से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं के बारे में जाना। मुख्यमंत्री वहां से सीधे साकेत डिग्री कॉलेज स्थित हेलीपैड पहुंचे। यहां उन्होंने हेलीपैड से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री हनुमानगढ़ी पहुंचे। यहां उन्होंने संकटमोचन हनुमान के चरणों में शीश झुकाया।  मुख्यमंत्री यहां से श्रीराम जन्म भूमि मंदिर पहुंचे। यहां पर उन्होंने कार्यक्रम की तैयारियों व सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। सीएम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से भी तैयारियों के संदर्भ में जानकारी ली। फिर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित दिशा-निर्देश दिया। उन्होंने सुरक्षा, सफाई, अतिथि स्वागत आदि को लेकर भी प्रशासन की तैयारियों को जाना, फिर दिशा-निर्देश भी दिया।

खैर नहीं अब अवैध कॉलोनियों का, 15 दिन में नोटिस जारी, कब्जा हटाने का आदेश CM मोहन यादव ने अफसरों को दिया

भोपाल   मध्यप्रदेश में सरकार अब नगरों के साथ ग्रामीण क्षेत्र में बन रही अवैध कॉलोनियों पर भी शिकंजा कसने जा रही है। नगरीय विकास विभाग अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने के लिए संशोधित नियमों के ड्राफ्ट में इसका दायरा गांवों में भी बढ़ा रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप इसमें संशोधन कर रहा है। अब नया संशोधित कानून शहरों के साथ गांवों पर भी लागू होगा। इसके लिए राजस्व विभाग ने भी सहमति दे दी है। जल्द नियमों में संशोधन कर शासन को भेजा जाएगा। इस ड्राफ्ट में अवैध कॉलोनियों के विकास पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रावधान किए जा रहे हैं। इसमें पार्षद से लेकर, बिल्डर, डेवलपर, भू-स्वामी, पुलिस और प्रशासन सभी की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। अवैध कॉलोनियां बनाने वालों पर जुर्माना भी 10 से बढ़ाकर 50 लाख किया जा रहा है। रोक लगाने के निर्देश दिए दरअसल, नगरीय विकास विभाग करीब डेढ़ साल से अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने के लिए कानून में संशोधन का ड्राफ्ट बना रहा है। इस बीच कई बार अफसरों के बदलने से यह काम पूरा नहीं हो सका। इसी बीच कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अफसरों को अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय दुबे ने संशोधित नियमों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्र में भी करने के निर्देश दिए। बताते हैं, शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्र के अव्यवस्थित होने से शहरों पर प्रभाव पड़ रहा है। नए नियमों में यह सख्त प्रावधान -संशोधित बिल में पार्षद, सरपंच आदि की जिम्मेदारी तय की जा रही है। प्रावधान हैं, अवैध कॉलोनी की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित निकाय अधिकारी को सूचना देनी होगी। अफसर को सूचना मिलने के 15 दिन में एफआइआर दर्ज करानी होगी। -अवैध कॉलोनी को नगरीय निकाय 15 दिन में जमीन को मूल स्वरूप में लाने के लिए नोटिस देगा। कॉलोनाइजर के ऐसा न करने पर निकाय अवैध कॉलोनी को ढहा कर जमीन कब्जे में लेगा। इसके बाद निकाय वहां विकास कार्य कराएगा। -अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने कलेक्टर टास्क फोर्स बनाएंगे। यह हर सप्ताह क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट देगा। -अभी अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 10 साल कैद की सजा का प्रावधान है। नए नियमों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 7 साल और अधिकतम 10 साल की सजा किया जा रहा है। -अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हर कार्रवाई के लिए समय सीमा तय की जा रही है। अफसरों के कार्रवाई न करने पर शासन उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। पटवारी से लेकर एसडीएम तक की जिम्मेदारी तय की जा रही गांवों में विस्तार के लिए राजस्व विभाग के साथ बैठक कर सहमति ले ली गई है। अब राजस्व विभाग के पटवारी, आरआइ, तहसीलदार, एसडीएम आदि की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। गांवों में अवैध कॉलोनियों का पता लगाने के लिए सर्वे किया जाएगा। यह संशोधित नियम वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजे जाएंगे। समिति की अनुमति मिलने के बाद यह कैबिनेट में पेश किए जाएंगे। ऐसे में यह संशोधन प्रस्ताव विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आने की संभावना नहीं है। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे का कहना है, नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अगले साल नए नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए पड़ी जरूरत अभी कई बड़े शहरों में मास्टर प्लान बरसों से अटके हैं। ऐसे में यहां प्लानिंग एरिया में ज्यादा वृद्धि नहीं हो सकी। नतीजा, शहरों से लगे गांवों में अवैध कॉलोनियां बनाने का सिलसिला चल रहा है। यहां निगरानी तंत्र भी विफल है। पंचायत की अनुमति लेकर कई स्थानों पर कॉलोनियां बन चुकी हैं। इस अनियोजित विकास का खामियाजा भविष्य में शहरों को भुगतना पड़ेगा।