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राजधानी जयपुर में बदलाव की शुरुआत: नई ई-बसें, ट्रैफिक सुधार, ई-रिक्शा QR कोड और मेट्रो विस्तार

 जयपुर  राजधानी जयपुर शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुधारने के लिए चार बड़े काम होने वाले हैं. इनका काम अब तेजी से आगे बढ़ने वाला है. इनमें सबसे पहला काम है जयपुर शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को स्मूथ करने के लिए जल्द ही 500 से 750 ई-बसें मिलने वाली है. दूसरा जयपुर के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए उत्तरी रिंग रोड़ के लिए भूमि अधिग्रहण का काम अब शुरू हो जाएगा. इसके लिए केन्द्र सरकार की मंजूरी मिल गई है. तीसरा जयपुर के ट्रैफिक के लिए आफत बन चुके ई-रिक्शा पर अब अंकुश लगाया जाएगा. इनकी संख्या सीमित कर इनके संचालन के लिए क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया जाएगा. चौथा जयपुर मेट्रो ट्रेन को विस्तार दिया जाएगा. नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि मार्च 2026 तक जयपुर की सड़कों पर 500 से 750 ई-बसें दौड़ने लगेंगी. इन ई-बसों की आपूर्ति भारत सरकार से होनी है. उन्होंने हाल ही में दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के दौरान अपनी यह मांग केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री के सामने रखी थी. मंत्री ने बताया कि बसों के लिए से कार्यादेश जारी हो चुका है. मार्च 2026 तक जयपुर को 500 से 750 ई-बसें मिल जाएंगी. ट्रैफिक का दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी ई-बस निर्माण यूनिट्स की क्षमता कम होने के कारण उत्पादन में देरी हो रही है. इसी वजह से अब उम्मीद है कि मार्च 2026 तक जयपुर को 500 से 750 ई-बसें मिल सकेंगी. इसके साथ ही शहर में जयपुर मेट्रो का तीन गुना विस्तार किया जाएगा. सरकार का दावा है कि मेट्रो विस्तार और नई ई-बसों के आने से जयपुर का सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और बेहतर होगा. इससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी. उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा वहीं राजधानी जयपुर में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. जयपुर की उत्तरी रिंग रोड परियोजना के लिए केंद्र सरकार से भूमि अधिग्रहण की मंजूरी मिल गई है. इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इससे इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है. उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा. यह जयपुर जिले के उत्तरी हिस्से में व्यापक संपर्क मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही चौमूं, आमेर, जमवारामगढ़ और बस्सी समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे और अधिग्रहण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा. अधिकारियों के अनुसार भूमि अधिग्रहण पूरा होते ही निर्माण कार्य भी जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा. राजधानी में आने-जाने वाले भारी वाहनों का दबाव कम होगा इस परियोजना को जयपुर जिले की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा योजनाओं में से एक माना जा रहा है. इसका निर्माण शहर की दीर्घकालिक यातायात समस्याओं को हल करने में अहम भूमिका निभाएगा. उत्तरी रिंग रोड तैयार होने के बाद राजधानी में आने-जाने वाले भारी वाहनों का दबाव शहर के बीचों-बीच न होकर बाहरी मार्ग से होगा. इससे शहर के ट्रैफिक भार में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है. इसके साथ ही क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. उससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी. इससे पहले जयपुर का दक्षिण रिंग रोड संचालन में है. वह अजमेर रोड से टोंक रोड होते हुए आगरा रोड को जोड़ता है. उत्तरी रिंग रोड के बन जाने के बाद जयपुर के चारों ओर एक पूर्ण रिंग संरचना तैयार हो जाएगी जिससे शहर का आवागमन और भी सुगम तथा व्यवस्थित होगा. जब्त किए गए वाहनों के लिए अस्थायी पार्किंग विकसित की जाएगी इससे पहले बीते दिनों जयपुर विकास प्राधिकरण में ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड (टीसीबी) की बैठक आयोजित हुई थी. उसमें शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे. इसमें तय किया गया कि शहर में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे ई-रिक्शा पर रोक लगाने और उनके सुचारू संचालन के लिए क्यूआर कोड प्रणाली लागू की जाएगी. बैठक में यातायात पुलिस की ओर से जब्त किए जाने वाले वाहनों के लिए 22 गोदाम पुलिया, बगराना, जलमहल-कनक घाटी और न्यू ट्रांसपोर्ट नगर के पास अस्थायी पार्किंग विकसित करने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा जेसीटीएसएल बस चालकों को नियमित यातायात प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे निर्धारित बस स्टॉप पर ही बस रोकें और यातायात नियमों का पालन करें. जयपुर शहर में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे ई-रिक्शा पर रोक लगाने और उनके सुचारू संचालन के लिए क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया जाएगा. 150 नए बस शेल्टरों के लिए होगा सर्वे यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से किए गए सर्वे के अनुसार शहर की 77 क्षतिग्रस्त सड़कों में से 52 का मरम्मतीकरण पूरा हो चुका है जबकि 14 पर कार्य जारी है. दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैक स्पॉट) को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं. शहर में अवैध कटों को बंद करने, मुख्य मार्गों पर होटल-ढाबों के अतिक्रमण हटाने और नई पार्किंग विकसित करने सहित 150 नए बस शेल्टरों के लिए संयुक्त सर्वे कराने का निर्णय लिया गया. इसके साथ ही 45 ट्रैफिक पॉइंट पर 130 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी. भारी वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण के लिए हाइट बार लगाने और स्मार्ट सिटी ऐप के जरिए पार्किंग की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. इस बैठक में जेडीए, यातायात पुलिस, परिवहन विभाग, जेसीटीएसएल, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, नगर निगम और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विवाह पंचमी पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में किया ध्वजारोहण

सदियों के घाव भर रहे, वेदना विराम पा रही और संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहाः पीएम मोदी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विवाह पंचमी पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में किया ध्वजारोहण  अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैः प्रधानमंत्री  सदियों और सहस्रशताब्दियों तक यह धर्म ध्वज प्रभु राम के आदर्शों व सिद्धातों का उद्घोष करेगाः प्रधानमंत्री अयोध्या  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या धाम में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज के आरोहण समारोह में अपने विचार रखे। पीएम मोदी ने अपनी भावनाओं का आगाज ‘सियावर रामचंद्र की जय, जय सियाराम’ से किया। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिंदु की साक्षी बन रही है। आज संपूर्ण भारत व विश्व राममय है। हर रामभक्त के हृदय में अद्वितीय संतोष, असीम कृतज्ञता, अपार अलौकिक आनंद है। सदियों के घाव भर रहे हैं। सदियों की वेदना आज विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही। जो यज्ञ एक पल भी आस्था से डिगा नहीं, एक पल भी विश्वास से टूटा नहीं, आज भगवान श्रीराम मंदिर के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा,  श्रीराम का दिव्य प्रताप इस धर्मध्वजा के रूप में दिव्यतम, भव्यतम मंदिर में प्रतिष्ठापित हुआ है।  धर्मध्वज भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धर्मध्वज केवल ध्वज नहीं, यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ओम शब्द व अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। यह ध्वज संकल्प, सफलता और संघर्ष से सृजन की गाथा है। यह ध्वज सदियों से चले आ रहे सपनों का साकार स्वरूप है। यह ध्वज संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। सदियों और सहस्रशताब्दियों तक यह धर्म ध्वज प्रभु राम के आदर्शों व सिद्धातों का उद्घोष करेगा। यह धर्मध्वज आह्वान करेगा कि जीत सत्य की ही होती है, असत्य की नहीं। धर्मध्वज उद्घोष करेगा कि सत्य ही ब्रह्म का स्वरूप है, सत्य में ही धर्म स्थापित है। यह धर्मध्वज प्रेरणा बनेगा ‘प्राण जाय पर वचन न जाई’ अर्थात जो कहा जाए, वही किया जाए। यह धर्मध्वज संदेश देगा कि ‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा’ अर्थात विश्व में कर्म व कर्तव्य की प्रधानता हो। धर्मध्वज कामना करेगा कि भेदभाव, पीड़ा-परेशानी से मुक्ति मिले और समाज में शांति व सुख हो। मंदिर के ध्येय का प्रतीक है धर्म ध्वज  प्रधानमंत्री ने कहा कि धर्मध्वज संकल्पित करेगा कि हम ऐसा समाज बनाएं, जहां गरीबी, दुख या लाचारी न हो। हमारे ग्रंथों में कहा गया है कि जो लोग किसी कारण मंदिर नहीं आ पाते और दूर से ध्वज को प्रणाम कर लेते हैं, उन्हें भी उतना ही पुण्य मिल जाता है। धर्म ध्वज भी मंदिर के ध्येय का प्रतीक है। य़ह ध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा और युगों-युगों तक प्रभु श्रीराम के आदेशों व प्रेरणाओं को मानव तक पहुंचाएगा। पीएम मोदी ने करोड़ों रामभक्तों के साथ ही राम मंदिर निर्माण के लिए सहयोग देने वाले दानवीरों, श्रमवीरों, योजनाकारों, वास्तुकारों का आभार जताया।  अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यही वह नगरी है, जहां से श्रीराम ने जीवनपथ शुरू किया था। इसी अयोध्या ने संसार को बताया कि एक व्यक्ति कैसे समाज की शक्ति व संस्कारों से पुरुषोत्तम बनता है। जब श्रीराम अयोध्या से वनवास गए तो वे युवराज राम थे, लेकिन जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर आए। उनके मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषादराज की मित्रता, मां शबरी की ममता, भक्त हनुमान के समर्पण के साथ ही अनगिनत लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।  भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है राम मंदिर का दिव्य प्रांगण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत बनाने के लिए समाज की सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है। यहां सप्त मंदिर, मां शबरी, निषादराज गुह्य का भी मंदिर है। यहां एक ही स्थान पर मां अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य और संत तुलसीदास हैं। रामलला के साथ-साथ इन ऋषियों के भी दर्शन यहीं होते हैं। जटायु व गिलहरी की मूर्ति भी बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती है।  राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं  पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर आस्था के साथ मित्रता, कर्तव्य व सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को शक्ति देते हैं। हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें मोक्ष नहीं, मूल्य प्रिय है। उन्हें शक्ति नहीं, सहयोग महान लगता है। आज हम भी इसी भावना से आगे बढ़ रहे हैं। 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अतिपिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। जब देश का हर व्यक्ति, वर्ग, क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा। 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, तब सबके प्रयास से ही हमें विकसित भारत का निर्माण करना होगा।  हमें आने वाले दशकों व सदियों को ध्यान में रखकर कार्य करना होगा  पीएम मोदी ने कहा कि रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर राम से राष्ट्र के संकल्प की चर्चा करते हुए मैंने कहा था कि आने वाले एक हजार वर्षों के लिए भारत की नींव मजबूत करनी है। जो सिर्फ वर्तमान की सोचते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। हमें वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के बारे में सोचना है। जब हम नहीं थे, यह देश तब भी था, जब हम नहीं रहेंगे, यह देश तब भी रहेगा। हमें दूरदृष्टि के साथ ही काम करना होगा। हमें आने वाले दशकों, सदियों को ध्यान में रखना ही होगा।  हमें प्रभु राम के व्यवहार को करना होगा आत्मसात   पीएम मोदी ने कहा कि हमें प्रभु राम और उनके … Read more

अयोध्या को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से अनेक परियोजनाएं हो रहीं संचालित

नव्य, दिव्य और अलौकिक अयोध्या : श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद तीव्र गति से हो रहा सर्वांगीण विकास अयोध्या को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से अनेक परियोजनाएं हो रहीं संचालित पर्यटन और विनिर्माण क्षेत्र ने शहर के आर्थिक विकास को दी नई रफ्तार अयोध्या  दिव्य एवं भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में अयोध्या का कायाकल्प अभूतपूर्व गति से हो रहा है। अयोध्या को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से अनेक परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। पर्यटन और विनिर्माण क्षेत्र ने शहर के आर्थिक विकास को नई रफ्तार दी है। नए उद्योगों और व्यवसायों के स्थापित होने से रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। अयोध्या में विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त अयोध्याधाम रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण किया गया है। हनुमानगढ़ी से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक भक्ति पथ का निर्माण पूरा हो चुका है। सुगम्य अयोध्या के तहत महर्षि वाल्मीकि हवाई अड्डे का निर्माण भी पूर्ण हो गया है। सहादतगंज से नयाघाट तक लगभग 13 किलोमीटर लंबी चार लेन सड़क का निर्माण तथा अयोध्या–सुल्तानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 330 और लता मंगेशकर चौक से गोरखपुर राजमार्ग तक धर्मपथ का चार लेन विस्तार पूरा हो चुका है। श्रीराम मंदिर निर्माण के उपरांत अयोध्या में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, हनुमान, गरुण और जटायू नामक छह भव्य प्रवेश द्वार विकसित किए गए हैं। अयोध्या के 11 ब्लॉकों में मियावाकी पद्धति के माध्यम से 55 वैदिक वनों का विकास किया गया है। ‘नव्य अयोध्या’ के अंतर्गत हरित क्षेत्र विस्तार और हाईटेक वेलनेस सिटी के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। लगभग ₹750 करोड़ की लागत से विश्व स्तरीय संग्रहालय का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें ₹650 करोड़ भवन निर्माण पर तथा ₹100 करोड़ आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जाएंगे। यह परियोजना टाटा संस द्वारा CSR पहल के तहत वित्तपोषित की जा रही है। यह संग्रहालय देश की प्रमुख वैष्णव परंपराओं, उनकी मंदिर वास्तुकला, इतिहास और परंपराओं का भव्य प्रतिनिधित्व करेगा। अयोध्या में आवास विकास परिषद द्वारा 550 एकड़ में ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित की जा रही है, जिसे ‘नव्य अयोध्या’ योजना का प्रमुख घटक माना जा रहा है। यह प्रदेश की सर्वाधिक हाईटेक टाउनशिप में से एक होगी। लगभग ₹218 करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम और इलेक्ट्रिक डक्ट का निर्माण हो रहा है। करीब 200 एकड़ क्षेत्र को हरित पट्टी के रूप में विकसित किया जाएगा। टाउनशिप में सुपर स्पेशलिटी मेडिकल ज़ोन और हाईटेक प्रौद्योगिकी पार्क के लिए भी भूखंड तैयार किए जा रहे हैं, जो ‘वेलनेस सिटी’ की अवधारणा को मजबूती प्रदान करते हैं। अयोध्या में ₹750 करोड़ की लागत से म्यूजियम ऑफ टेंपल्स का निर्माण प्रगति पर है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान अयोध्या के लिए 159 एमओयू सम्पन्न हुए हैं। शहर को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। करोड़ों के निवेश के साथ 5-सितारा और 4-सितारा श्रेणी की लगभग 42 होटल श्रृंखलाएं विकसित हो रही हैं। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति–2022 के अंतर्गत अयोध्या को मॉडल सोलर सिटी घोषित किया गया है। सरयू नदी के तट पर माझा रामपुर हलवारा और माझा सरायरासी गांवों में 40 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र NTPC ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा स्थापित किया गया है। लगभग 165 हेक्टेयर सार्वजनिक भूमि 30 वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराई गई है। यह संयंत्र अयोध्या की अनुमानित 198 मेगावाट विद्युत आवश्यकता के 10% के बराबर 40 मेगावाट उत्पादन कर रहा है, जो वर्तमान जरूरतों का लगभग 25–30% पूरा करता है। दिव्य अयोध्या और मेटावर्स पहल ‘अयोध्या यात्रा’ ऐप लॉन्च किया गया है, जो Android और iOS दोनों पर उपलब्ध है। इसके माध्यम से श्रीराम मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और सरयू घाट का 360-डिग्री वर्चुअल दर्शन संभव है। भक्त घर बैठे पूजा भी करवा सकते हैं। ऐप में मेटावर्स तकनीक का प्रयोग किया गया है, जिससे दीपोत्सव जैसे आयोजनों का 3D वर्चुअल अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। मियावाकी वैदिक वन मियावाकी पद्धति से जिले के सभी 11 ब्लॉकों में पाँच–पाँच स्थलों पर कुल 55 वैदिक वन बनाए गए हैं। पौधों की सुरक्षा हेतु GPS टैगिंग की गई है तथा रखरखाव और सिंचाई का कार्य मनरेगा के माध्यम से सुनिश्चित किया जा रहा है।

कोविदार वृक्ष तथा सूर्य से संकल्प लेकर सत्पुरुषों के समान उत्तम जीवन जीने की दुनिया को देनी होगी प्रेरणा : डॉ. मोहन भागवत

संपूर्ण विश्व को अपने आलोक से सुख-शांति प्रदान करने वाला धर्म ध्वज फिर से हुआ शिखर पर विराजमान : डॉ. मोहन भागवत कोविदार वृक्ष तथा सूर्य से संकल्प लेकर सत्पुरुषों के समान उत्तम जीवन जीने की दुनिया को देनी होगी प्रेरणा : डॉ. मोहन भागवत अयोध्या  मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष पंचमी यानी विवाह पंचमी के पावन अवसर पर अयोध्या धाम सहित संपूर्ण विश्व प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पूर्णत्व का साक्षी बना। इस अवसर पर मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज के आरोहण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। उन्होंने कहा कि कितने ही लोगों ने जो सपना देखा, कितने ही लोगों ने जो प्रयास किए, अपने प्राण अर्पित किए, आज उनकी स्वर्गस्थ आत्मा तृप्त हुई होगी। आज वास्तव में अशोक सिंघल जी को शांति मिली होगी। महंत रामचंद्र दास जी महाराज, डालमिया जी समेत कितने ही संत, गृहस्थ एवं विद्यार्थियों ने प्राणार्पण किया, पसीना बहाया। उन्होंने कहा कि जो पीछे रहे, वे भी यही इच्छा व्यक्त करते थे कि मंदिर बनेगा जो अब बन गया है। आज मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। ध्वजारोहण भी हो गया। निश्चित तौर पर यह एक ऐतिहासिक व पूर्णत्व का क्षण है। आज का दिन कृतार्थता का दिवस है। आज हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है, जिसे हमारे पूर्वजों ने हमें दिया है। धर्म का प्रतीक भगवा रंग ही है ध्वज का रंग डॉ. भागवत ने कहा कि रामराज्य का ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख-शांति प्रदान करता था, वह ध्वज आज फिर से नीचे से ऊपर चढ़कर शिखर पर विराजमान हो चुका है। इसे हमने अपनी आंखों से इसी जन्म में देखा है। ध्वज धर्म का प्रतीक होता है। इतना ऊंचा ध्वज चढ़ाने में भी समय लगा, ठीक ऐसे ही मंदिर बनाने में भी समय लगा। 500 साल छोड़ें तो भी 30 साल तो लगे ही। उस मंदिर के रूप में हमने उन तत्वों को ऊपर पहुंचाया है जिनसे संपूर्ण विश्व का जीवन ठीक चलेगा। उसी धर्म का प्रतीक भगवा रंग इस धर्म ध्वज का रंग है। रघुकुल परंपरा से जुड़े प्रतीक चिह्नों से सीखें सत्पुरुष का कर्तव्य उन्होंने कहा कि इस धर्म ध्वज पर कोविदार का प्रतीक रघुकुल की परंपरा से जुड़ा हुआ है। यह कचनार जैसा लगता है। यह मंदार और पारिजात दोनों वृक्षों के गुणों का संयुक्त रूप है। वृक्ष स्वयं धूप में खड़े रहकर सबको छाया देते हैं, फल स्वयं उगाते हैं और दूसरों को बांट देते हैं। “वृक्षाः सत्पुरुषाः इव” अर्थात वृक्ष सत्पुरुषों के समान हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा जीवन जीना है तो चाहे कितनी प्रतिकूलता हो, साधनहीनता हो, दुनिया स्वार्थ में बहती हो फिर भी हमारा संकल्प है कि हमें धर्म के पथ पर चलना है। भागवत बोले, कचनार के औषधीय गुण हैं, खाद्य उपयोग में भी आता है। सब प्रकार से उपयोगी यह प्रतीक धर्म जीवन का पर्याय है। सूर्य भगवान धर्म के तेज और संकल्प के प्रतीक हैं। उनके रथ का चक्र एक है, रास्ता नहीं है, सात घोड़े हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए सर्प की लगाम है, सारथी के पैर नहीं हैं। क्या ऐसी गाड़ी चल सकती है? फिर भी वे बिना थके प्रतिदिन पूरब से पश्चिम जाते आते हैं। कार्य की सिद्धि स्वयं के भरोसे होती है। ओंकार से होता है सत्य का प्रतिनिधित्व डॉ. भागवत के अनुसार, हिंदू समाज ने लगातार 500 वर्षों और बाद के दीर्घ आंदोलन में अपने इस स्वत्व को सिद्ध किया। रामलला आ गए, मंदिर बन गया। यही बात सत्य पर आधारित धर्म को लेकर भी है। सत्य का प्रतिनिधित्व ओंकार से होता है। वही ओंकार संपूर्ण विश्व को देने वाला भारत हमें खड़ा करना है। उन्होंने कहा कि हमारे संकल्प का प्रतीक हम पूरा कर चुके हैं। धर्म, ज्ञान, छाया तथा सुफल संपूर्ण दुनिया में बांटने वाला भारतवर्ष खड़ा करने का काम शुरू हो गया है। इस प्रतीक को ध्यान में रखते हुए सभी विपरीत परिस्थितियों में हमें एकजुट होकर सतत कार्य करना होगा। भारतवर्ष के लोगों से दुनिया सीखे जीवन जीने का तरीका आरएसएस सर संघचालक ने कहा, “एतद्देशप्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः” अर्थात इस देश में जन्मे अग्रजन्मा ऐसा जीवन जिएं कि दुनिया उनसे प्रेरणा लें। “स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्वमानवाः” यानी पृथ्वी के समस्त मानव भारतवासियों के चरित्र से जीवन की विद्या सीखें। उन्होंने कहा कि परम वैभव सम्पन्न, सबके लिए खुशी और शांति बांटने वाला तथा विकास का सुफल देने वाला भारतवर्ष हमें खड़ा करना है। यही विश्व की अपेक्षा और हमारा कर्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि श्रीरामलला विराजमान हैं, उनसे प्रेरणा लेकर कार्य की गति हम आगे बढ़ाएं। इस अवसर पर रामदास स्वामी के श्लोक “स्वप्नी जे देखिले रात्री, तेते तैसेचि होतसे” का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि जैसा सपना उन्होंने देखा था, उससे भी अधिक भव्य और सुंदर मंदिर आज बन गया है। सभी सनातन धर्मावलंबियों और भारतवर्ष के नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारे हृदय में तप का सृजन करे यही कामना है।

MP में बदलती मौसम की तस्वीर: दिन में पारा गिरा, रात में ठंड बढ़ी, चक्रवात का असर जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार नवंबर के महीने में ही कड़ाके की ठंड पड़ी है, हालांकि नवंबर के आखिरी सप्ताह में कड़ाके की ठंड से थोड़ी राहत मिल रही है, क्योंकि साइक्लोनिक सर्कुलेशन यानि चक्रवात की वजह से मध्य प्रदेश में बादल छा रहे हैं, ऐसे में मौसम में थोड़ा बदलाव देखने को मिला है, लगातार कई जिलों में सुबह के वक्त बादल छाए रहे, जिससे तापमान में बदलाव दिखा. हालांकि सुबह और रात के वक्त तापमान में गिरावट का दौर जारी है, जिससे ठंड का असर बना हुआ है. आलम यह है कि 84 साल बाद नवंबर के महीने में ही भोपाल में ठंड का रिकॉर्ड टूट गया, जबकि इंदौर में भी 25 साल बाद ठंड का रिकॉर्ड टूट गया है, वहीं मौसम विभाग का कहना है कि दिसंबर में कड़ाके की ठंड का दौर शुरू होगा. इधर, साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) की वजह से प्रदेश में बादल छा रहे हैं। लगातार तीसरे दिन भोपाल समेत कई जिलों में हल्के बादल रहे। इससे दिन में ठंडक बढ़ गई है। सोमवार को भोपाल में दिन का तापमान 26.4 डिग्री रहा। वहीं, बालाघाट के मलाजखंड में 25 डिग्री, रायसेन में 26.6 डिग्री, श्योपुर में 26.2 डिग्री, दतिया में 26.4 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिक शर्मा ने बताया, बादलों की वजह से दिन के पारे में गिरावट हुई है, लेकिन रात का तापमान फिलहाल स्थिर रहेगा। पहाड़ों में बर्फबारी जल्दी, इसलिए शीतलहर चली बता दें कि प्रदेश में 6 नवंबर से ही कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो गया था। आम तौर पर नवंबर के दूसरे पखवाड़े से तेज ठंड पड़ती है, लेकिन इस बार पहाड़ी राज्य- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में समय से पहले बर्फबारी हो गई। इस वजह से बर्फीली हवाओं से एमपी भी कांप उठा। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, यहां रात का पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। वर्तमान में हवा की दिशा बदल गई है। इस वजह से प्रदेश में उत्तर से ठंडी हवा नहीं आ रही है। इसलिए पिछले 3 दिन से प्रदेश में कहीं भी शीतलहर नहीं चली। ऐसा ही मौसम अगले चार दिन और बना रहेगा। यानी, इस सप्ताह कड़ाके की ठंड पड़ने का अनुमान नहीं है, लेकिन दिसंबर के पहले सप्ताह में कड़ाके की ठंड का दौर फिर से शुरू हो जाएगा। ग्री पर आ गया। इंदौर में 12.8 डिग्री, ग्वालियर में 10.6 डिग्री, उज्जैन में 15 डिग्री और जबलपुर में 14.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। छतरपुर के नौगांव, नरसिंहपुर, राजगढ़ और रीवा में ही पारा 10 डिग्री से नीचे रहा। हालांकि, कोहरे का असर देखने को मिल रहा है। भोपाल में पूरे दिन धुंध छा रही है। इससे 4 से 5 किलोमीटर के बाद कुछ भी देखना मुश्किल है, जबकि सुबह के समय विजिबिलिटी 1 से 2 किमी दर्ज की जा रही है। पचमढ़ी, नर्मदापुरम, रीवा, सतना, शाजापुर समेत कई जिलों में घना कोहरा छा रहा है। सुबह कोहरे का अलर्ट, इसलिए गाड़ी संभलकर चलाने की सलाह कोहरे की वजह से एक्सपर्ट ने लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग करने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने हेल्थ और फसलों को लेकर एडवाइजरी भी जारी की है।     ट्रैफिक – कोहरा होने पर गाड़ी चलाते समय या किसी ट्रांसपोर्ट के जरिए ट्रैवल करते समय सावधान रखें। ड्राइविंग धीरे करें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।     हेल्थ- तेज ठंड होने पर शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए सिर, गर्दन, हाथ-पैर की उंगलियों को अच्छे से ढंके। फ्लू, सर्दी, खांसी-जुकाम होने पर डॉक्टर को दिखाए। विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।     कृषि- जहां मिट्‌टी में पर्याप्त नमी हो, वहां गेहूं, चना, सरसों-मटर की बुआई करें। जहां बुआई हो चुकी है, वहां जरूरत पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें। पिछली फसलों के अवशेष यानी, ठूंठ को कभी न जलाएं। एमपी में ठंड से अब तक दो की मौत कड़ाके की ठंड की वजह से पिछले दो दिन में दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। रीवा के अमहिया थाना क्षेत्र स्थित अस्पताल चौराहा पर सड़क किनारे एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिली थी। इससे पहले रायसेन में भी एक शख्स की मौत हो चुकी है। परिजनों का दावा है कि ठंड की वजह से ही मौत हुई, लेकिन प्रशासन ने ठंड से मौत होने की पुष्टि नहीं की है।

CM मोहन यादव का एलान: मध्य प्रदेश में पर्यटन उद्योग को मिलेगा विशेष दर्जा और आर्थिक छूट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के पास प्राकृतिक सौंदर्य, विरासत और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत खजाना है, जिसे और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से पर्यटन क्षेत्र को राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों का लाभ मिल सकेगा। इससे पर्यटन निवेश को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटन उद्योग का दर्जा मिलने पर होटल, रिसॉर्ट, एडवेंचर टूरिज़्म, ट्रेवल सर्विसेज़ सहित पर्यटन से जुड़े अन्य क्षेत्रों को विभिन्न प्रकार की सब्सिडी (अनुदान सहायता), कर रियायतें और अन्य प्रोत्साहन उपलब्ध होंगे। इससे निजी निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा और पर्यटन ढाँचा और अधिक मजबूत होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में पर्यटन विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए बीते दिनों पर्यटन विभाग के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक ली। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की दिशा में ठोस और त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पर्यटन विकास से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि इस क्षेत्र में इंट्रेस्ट रखने वाले निवेशकों एवं उद्यमियों को सुगमता हो और मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख पर्यटन राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार के इस बड़े निर्णय से राज्य में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि निवेशकों को राज्य की पर्यटन विकास नीति एवं प्रोत्साहन नियमों का भरपूर लाभ मिले।

एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत को निराशा, ‘अमर सिंह चमकीला’ को भी नहीं मिला सम्मान

न्यूयॉर्क     53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स 2025 का शानदार आगाज मंगलवार को न्यूयॉर्क सिटी में हुआ. विनर्स की पूरी लिस्ट रिवील हो गई है. यहां भारत के हाथ थोड़ी निराशा लगी है. दिलजीत दोसांझ की बायोग्राफिल ड्रामा 'अमर सिंह चमकीला' एक भी अवॉर्ड नहीं जीत पाई है. दिलजीत को बेस्ट एक्टर और फिल्म को बेस्ट TV मिनी मूवी/मिनी सीरीज कैटिगरी में नॉमिनेट किया गया था. दोनों ही कैटिगरी में अवॉर्ड जीतने से ये फिल्म चूक गई है. एमी अवॉर्ड जीतने से चूके दिलजीत दिलजीत के बजाय बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड Oriol Pla को फिल्म 'आई, एडिक्ट' के लिए मिला है. वहीं बेस्ट TV मूवी/मिनी सीरीज कैटिगरी में लॉस्ट बॉयज एंड फेयरीज ने जीत हासिल की है. बेस्ट परफॉर्मेंस कैटिगरी में दिलजीत के साथ डेविड मिशेल (लुडविग), Oriol Pla (आई, एडिक्ट) और Diego Vasquez (वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सॉलिट्यूड) नॉमिनेटेड थे. अमर सिंह चमकीला फिल्म के एमी अवॉर्ड्स में चूकने से भारतीय फैंस निराश हैं. उन्हें मूवी की जीत पर भरोसा था क्योंकि इसे ग्लोबल लेवल पर भी काफी पॉपुलैरिटी मिली थी.  क्या बोले इम्तियाज अली? एमी वर्ल्ड टेलीविजन फेस्टिवल के दौरान एक पैनल में बोलते हुए इम्तियाज अली ने कहा- मेरे लिए ये फिल्म एक कलाकार और उसकी कला के बीच की लव स्टोरी थी. एक गायक और उसकी परफॉर्मेंस का रिश्ता प्रेमियों की तरह होता है. एक समय ऐसा आता है जब आप इसे पैसे, शोहरत या चमक-दमक के लिए नहीं, बल्कि उस कला के प्यार में करते हैं. ये एक ऐसा जुनून होता है जो तर्क से परे जाकर दर्शकों से जुड़ने की कोशिश करता है. इसी भाव पर मैंने अमर सिंह चमकीला के कैरेक्टर को गढ़ा.  अली के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म पंजाबी लोक-गायक अमर सिंह चमकीला की जिंदगी पर बेस्ड है. चमकीला को पंजाब के एल्विस के नाम से भी बुलाया जाता था. दिलजीत और परिणीति चोपड़ा लीड रोल में थे. ये फिल्म पिछले साल अप्रैल में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी. फिल्म को क्रिटिक्स ने खूब सराहा था. चमकीला के गाने उस दौर में लोगों के बीच जितने पॉपुलर थे, उतना ही विवाद इनपर हुआ था. सिंगर के गानों को अश्लील का टैग दिया गया था. 8 मार्च 1988 को गोलियों से भूनकर उनकी हत्या कर दी गई थी. देखें विनर्स की पूरी लिस्ट… बेस्ट एक्ट्रेस: ​​एना मैक्सवेल मार्टिन (अनटिल आई किल यू) बेस्ट किड्स: एनिमेशन: ब्लूई इंटरनेशनल एमी फॉर किड्स: लाइव-एक्शन: फॉलन इंटरनेशनल एमी कॉमेडी: 'लुडविग' बेस्ट एक्टर: ओरिओल प्ला [आई, एडिक्ट] इंटरनेशनल एमी फॉर डॉक्यूमेंट्री: हेल जम्पर इंटरनेशनल एमी फॉर टेलीनोवेला: द गुड एंड द बैड इंटरनेशनल एमी फॉर ड्रामा सीरीज: राइवल्स आर्ट्स प्रोग्रामिंग अवॉर्ड: रयुइची साकामोटो: लास्ट डेज़ बेस्ट शॉर्ट-फॉर्म सीरीज: 'ला मेडिएट्रिस' (द मेडिएटर) करंट अफेयर्स फॉर एमीज: 'डिस्पैचेस: किल ज़ोन: इनसाइड गाज़ा' बेस्ट स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री: इट्स ऑल ओवर: द किस दैट चेंज्ड द स्पैनिश फुटबॉल' इंटरनेशनल एमी फॉर न्यूज: 'गाजा, सर्च फॉर लाइफ' बेस्ट टीवी मूवी/मिनी-सीरीज: लॉस्ट बॉयज़ एंड फेयरीज बेस्ट नॉन-स्क्रिप्टेड एंटरटेनमेंट: शाओलिन इन हीरोज: डेनमार्क

जिला प्रभारियों में कांग्रेस ने की नई नियुक्तियां, जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण खाली

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जिला स्तर पर संगठन को फिर से व्यवस्थित करने के लिए व्यापक बदलाव किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लगभग सभी जिलों में नए प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पटवारी के गृह जिले इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल खाली रखी गई है, जबकि बाकी 70 जिलों में प्रभारियों की घोषणा कर दी गई है। पार्टी के इस कदम को आगामी राजनीतिक गतिविधियों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमोट हुए नेताओं की जगह नए प्रभारी     पीसीसी अध्यक्ष ने खासतौर पर खंडवा सिटी, नरसिंहपुर और ग्वालियर सिटी जैसे अहम जिलों के प्रभारी बदले हैं। खंडवा सिटी की पूर्व प्रभारी रीना बौरासी, अब महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं।     इनके स्थान पर खंडवा ग्रामीण के जिला प्रभारी आरके दोगने को प्रभारी बनाया गया है। ये हरदा के विधायक भी हैं। इनको दोनों जिलों का प्रभारी बनाया गया है। ग्वालियर सिटी की प्रभारी हिना कांवरे राष्ट्रीय सचिव बनी हैं। इसके बाद ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों जिलों का जिम्मा पीसी शर्मा को सौंपा गया है। पीसी शर्मा पूर्व मंत्री हैं। वहीं, सुखदेव पांसे को कांग्रेस के संगठन प्रभारी के तौर पर नरसिंहपुर जिले का जिम्मा सौंपा गया था। इनकी जगह नरसिंहपुर की जिम्मेदारी आलोक मिश्रा को दी गई है। जीतू पटवारी का गृह जिला इसलिए खाली पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी अवनीश भार्गव मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठक बनाए गए हैं। भार्गव जैसे सीनियर और समन्वय बनाने वाले नेता का नाम तय नहीं हो पाया। इसलिए फिलहाल इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी को घोषित नहीं किया गया है। अब जिले वार कांग्रेस के प्रभारियों की लिस्ट देखिए     मुरैना सिटी– राम किंकर गुर्जर     मुरैना ग्रामीण– लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष)     श्योपुर– सुनील शर्मा (महासचिव)     भिंड शहर व ग्रामीण– बैजनाथ कुशवाह (महासचिव)     ग्वालियर शहर व ग्रामीण– पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री)     अशोकनगर– रोशनी यादव (महासचिव)     दतिया- गुड्डू राजा (महासचिव)     शिवपुरी- देवेंद्र शर्मा     गुना- दिनेश गुर्जर (महासचिव)     सागर सिटी- मनोज कपूर (सचिव)     सागर ग्रामीण- घनश्याम सिंह (महासचिव)     छतरपुर- सुरेश राजे (महासचिव)     दमोह- हर्ष यादव (महासचिव)     पन्ना- राजभान सिंह (सचिव)     टीकमगढ़- राव यादवेंद्र सिंह यादव (महासचिव)     निवाड़ी– रामलखन दंडोतिया     रीवा शहर व ग्रामीण- संजय शर्मा (महासचिव)     मऊगंज– मकसूद अहमद     सतना सिटी– सुनील सर्राफ (सचिव)     सतना ग्रामीण- विनय सक्सेना (महासचिव)     मैहर– गुरमीत सिंह (मंगू) (महासचिव)     सीधी– दिलीप मिश्रा     सिंगरौली शहर व ग्रामीण- कविता पांडे (महासचिव)     शहडोल– नारायण पट्टा (महासचिव)     अनूपपुर– सुखेन्द्र सिंह बन्ना     उमरिया – नीरज बघेल (सचिव)     डिंडोरी – फुंदेलाल मार्को (महासचिव)     जबलपुर सिटी – राजकुमार खुराना     जबलपुर ग्रामीण- रजनीश सिंह (महासचिव)     कटनी शहर व ग्रामीण – वीरेंद्र द्विवेदी (महासचिव)     बालाघाट – लखन घनघोरिया (उपाध्यक्ष)     छिंदवाड़ा सिटी – सुनील जायसवाल (महासचिव)     पांढुर्ना – रामू टेकाम (महासचिव)     मंडला – किरण अहिरवार (महासचिव)     नरसिंहपुर – आलोक मिश्रा     सिवनी – सोहन वाल्मीकि (महासचिव)     नर्मदापुरम – ओम पटेल     बैतूल – सुनील उइके     हरदा – रचना जैन (संयुक्त सचिव)     भोपाल सिटी – रवि जोशी (उपाध्यक्ष)     भोपाल ग्रामीण – विनय बाकलीवाल (महासचिव)     रायसेन – शैलेन्द्र पटेल (महासचिव)     राजगढ़ – सुरेंद्र सिंह हनी बघेल (उपाध्यक्ष)     सीहोर – जयश्री हरिकिरण (महासचिव)     विदिशा – प्रभु सिंह ठाकुर (महासचिव)     उज्जैन सिटी – अमित शर्मा (महासचिव)     उज्जैन ग्रामीण – चंदर सौंधिया (महासचिव)     देवास सिटी – सुरेंद्र सिंह (शेरा)     देवास ग्रामीण – सदाशिव यादव     रतलाम शहर व ग्रामीण- प्रताप ग्रेवाल (महासचिव)     शाजापुर – निर्मल मेहता     मंदसौर – मनोज राजानी     नीमच – अरविंद बागड़ी     आगर–मालवा – आतिफ अकील (महासचिव)     इंदौर सिटी – संजीव सक्सेना (महासचिव)     इंदौर ग्रामीण- (रिक्त)     खंडवा शहर व ग्रामीण- आरके दोगने (महासचिव)     बुरहानपुर शहर व ग्रामीण- ग्यारसीलाल रावत (महासचिव)     धार – रघु परमार (महासचिव)     झाबुआ – अमन बजाज     खरगोन – जय सिंह ठाकुर (महासचिव)     अलीराजपुर – रामवीर सिकरवार (महासचिव)     बड़वानी – झूमा सोलंकी (उपाध्यक्ष) पदाधिकारियों के प्रमोशन से खाली हुई जगह कुछ जिलों में प्रभारी इसलिए बदले गए क्योंकि मौजूदा पदाधिकारी प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट हो चुके हैं। खंडवा सिटी की प्रभारी रीना बौरासी महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं। उनकी जगह खंडवा ग्रामीण के प्रभारी आरके दोगने को खंडवा शहर और ग्रामीण दोनों की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह ग्वालियर शहर की प्रभारी हिना कांवरे के राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद ग्वालियर ग्रामीण के प्रभारी पीसी शर्मा को शहर और ग्रामीण दोनों का प्रभार सौंपा गया है। नरसिंहपुर में भी बदलाव हुआ है। यहां संगठन प्रभारी सुखदेव पांसे के पास जिले का प्रभार था, जिसे अब आलोक मिश्रा को सौंप दिया गया है। गृह जिले इंदौर ग्रामीण का प्रभार खाली क्यों रखा गया इंदौर ग्रामीण के प्रभारी अवनीश भार्गव को मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल का मुख्य संगठक नियुक्त किया गया है। पार्टी अंदरूनी तौर पर ऐसे वरिष्ठ और सर्वमान्य नेता की तलाश में है, जो इस महत्वपूर्ण जिले में समन्वय कायम रख सके। इसी वजह से इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल रिक्त रखी गई है। जिलों के हिसाब से नियुक्त किए गए नए प्रभारी मुरैना जिले में राम किंकर गुर्जर (सिटी) और लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष, ग्रामीण) को प्रभार मिला है। श्योपुर में सुनील शर्मा (महासचिव), भिंड में बैजनाथ कुशवाह (महासचिव), ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों में पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री) की नियुक्ति की गई है। अशोकनगर में रोशनी यादव (महासचिव), दतिया में गुड्डू राजा (महासचिव), शिवपुरी में देवेंद्र शर्मा और गुना में दिनेश गुर्जर (महासचिव) को दायित्व दिया गया है। सागर सिटी में मनोज कपूर (सचिव) और सागर ग्रामीण में घनश्याम सिंह (महासचिव) को जिम्मेदारी … Read more

सनातन गौरव का क्षण, धर्मध्वज से आलोकित हुआ अयोध्या धाम

सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में धर्मध्वज का आरोहण, संत समाज भावविभोर सनातन गौरव का क्षण, धर्मध्वज से आलोकित हुआ अयोध्या धाम योगी मोदी नेतृत्व में धर्म संस्कृति का पुनर्जागरण, मंदिरों में लौट रहा वैभव अयोध्या  सनातन परंपरा और आस्था के प्रतीक धर्मध्वज का आज राम मंदिर के शिखर पर प्रतिष्ठापन अयोध्या के संत समाज के लिए भावपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बन गया। 500 वर्षों की प्रतिक्षा, संघर्ष और तपस्या के उपरांत प्रभु श्रीराम के दिव्य मंदिर पर धर्मध्वजा का आरोहण केवल एक धार्मिक क्षण ही नहीं बल्कि सनातन आस्था की वैश्विक प्रतिष्ठा का साक्ष्य बन रहा है। अवधपुरी के संत समाज श्रद्धा और भावनाओं से अभिभूत होकर इस पल को सनातन गौरव का क्षण बता रहे हैं। वे इसे उस संघर्षपूर्ण यात्रा का फल मानते हैं जिसमें संतों, भक्तों और समाज ने सैकड़ों वर्षों में अदम्य धैर्य और आस्था का परिचय दिया। साधु संतों का कहना है कि आज वह क्षण साकार हो रहा है जिसकी कल्पना उनके पूर्वजों ने सदियों पूर्व की थी। धर्म ध्वजा का आरोहण भारतवर्ष की आध्यात्मिक विरासत को और भी मजबूत करता है तथा संपूर्ण विश्व में सनातन आस्था की महिमा को प्रखरता से स्थापित करता है। संत समाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका को इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार मानता है। उनका कहना है कि डबल इंजन सरकार ने सनातन परंपराओं के संरक्षण और मंदिर संस्कृति के पुनरुद्धार का जो कार्य किया है वह देश की आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ कर रहा है। मठ मंदिरों का संवर्धन, धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार और संतों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण को नई दिशा प्रदान की गई है। राम वैदेही मंदिर के प्रतिष्ठित संत दिलीप दास ने कहा कि अयोध्या मिशन के अंतर्गत सनातन संस्कृति का जिस प्रकार पुनरुद्धार हुआ है वह प्रशंसनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धर्म की रक्षा और स्थापना के उद्देश्य से सतत संलग्न बताते हुए कहा कि वह केवल एक मुख्यमंत्री नहीं बल्कि धर्म परंपरा की रक्षा के प्रहरी हैं। विवाह पंचमी के अवसर पर आयोजित इस प्रतिष्ठा समारोह में साधु संतों द्वारा प्रभु श्रीराम और माता जानकी के विवाह पर्व का पूजन अर्चन भी किया गया। संत समाज का विश्वास है कि यह क्षण भारत के उज्ज्वल भविष्य की आस्था को और अधिक मजबूत करेगा तथा सनातन समाज के आत्मगौरव का शंखनाद साबित होगा।

अयोध्या में उमड़ा आस्था का सागर, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

ध्वजारोहण के क्षण भक्तिमय हुई अयोध्या, चारों दिशाओं में गूंजा जय श्रीराम अयोध्या में उमड़ा आस्था का सागर, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु   आधुनिक और त्रेतायुगीन अयोध्या का अद्भुत संगम, संत समाज ने सराहा अयोध्या  श्रीराम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराए जाने के ऐतिहासिक क्षण ने संपूर्ण अयोध्या को भक्ति भाव से ओतप्रोत कर दिया। धर्मपथ सहित शहर की सभी प्रमुख सड़कों पर जयघोष करते श्रद्धालु उमड़ पड़े और राम नाम की गूंज से नगर भक्तिरस से सराबोर हो गया। लता मंगेशकर चौक पर हजारों की संख्या में भक्त एकत्रित होकर ध्वजारोहण का सीधा प्रसारण देखते रहे। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर शिखर पर धर्मध्वजा स्थापित की, उपस्थित जनसमूह भावविभोर होकर जय श्रीराम के उद्घोष में डूब गया। श्रद्धालुओं में अपार उमंग, कहा त्रेता युग जैसा वैभव अयोध्या के पड़ोसी जिलों सुल्तानपुर, बस्ती, अंबेडकर नगर और बाराबंकी सहित उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रावस्ती से आए राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि वह 17 नवंबर को ही अयोध्या पहुंच गए थे और आज स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और योगी ने अयोध्या का गौरव वापस दिलाया है और शहर को स्वस्थ व सुंदर बनाया है। श्रावस्ती के ही विश्वनाथ जायसवाल ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का कार्य ऐतिहासिक रहा है और मोदी-योगी ने वह किया है जो पूर्व में कोई नहीं कर सका। सांस्कृतिक और भावनात्मक उत्सव में बदला समारोह बिहार के गोपालगंज से हनुमान जी की वेशभूषा में पहुंचे एक रामभक्त ने अपने नृत्य और गायन से माहौल को भक्ति रस में रंग दिया। दिल्ली से आई श्रद्धालु महिलाएं मधु, धारणा, संतोष और पूजा ने कहा कि राम मंदिर परिसर पहुंचते ही उन्हें देवलोक जैसी अनुभूति हुई। संत रमाकांत शर्मा, जो पिछले 25 वर्षों से अयोध्या आते रहे हैं, ने कहा कि अयोध्या आधुनिक भी हुई है और अपनी त्रेतायुगीन झलक भी पा चुकी है। ढोल और मंजीरों के मधुर स्वरों के बीच संतों की टोली ने इस आयोजन को एक दिव्य सांस्कृतिक पर्व में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि आस्था, इतिहास और आधुनिकता के संगम का जीवंत प्रतीक बनकर उदित हुआ, जिसमें अयोध्या ने अपनी आध्यात्मिक प्रतिष्ठा विश्व के सामने पुनः स्थापित की।