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किसानों के लिए खुशखबरी: शिवराज सिंह ने वीडियो संदेश में बताई नई राहत

भोपाल   केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शुक्रवार को किसानों को लेकर एक बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) अब जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान और ज्यादा बारिश के चलते बाढ़ या जलभराव को भी कवर करेगी. किसानों को एक वीडियो मैसेज में चौहान ने कहा कि मैं आज आपको अच्छी खबर दे रहा हूं. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दो नुकसान कवर नहीं किए गए थे और इनकी मांग लंबे समय से की जा रही थी. एक, जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान और दूसरा, ज्यादा बारिश से बाढ़ या पानी भरने से फसलों को नुकसान. मैं आपको बताना चाहूंगा कि ये दोनों नुकसान अब फसल बीमा योजना के तहत कवर किए जा रहे हैं. अगर जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उसका मुआवजा दिया जाएगा. अगर पानी भरने से फसलों को नुकसान होता है, तो उसका भी मुआवजा अब से किसानों को मिलेगा. इस घोषणा से उन हजारों किसानों को फायदा होगा जिन्हें पहले इन प्राकृतिक वजहों से नुकसान हुआ था, लेकिन वे इंश्योरेंस क्लेम के लिए पात्र नहीं थे. इससे पहले गुरुवार को शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया 'X' पर एक पोस्ट शेयर किया और बताया कि 2024-25 में फसल उत्पादन का फाइनल अनुमान बढ़कर 357.73 मिलियन टन हो गया है, जो पिछले साल से लगभग 8 प्रतिशत ज्यादा है. चौहान ने आगे लिखा कि यह बहुत खुशी की बात है कि हमारे किसान भाई-बहनों ने अपनी मेहनत से अनाज उत्पादन में एक नया रिकॉर्ड बनाया है. 2024-25 में फसल उत्पादन के अंतिम अनुमान बताते हैं कि देश का कुल अनाज उत्पादन बढ़कर 357.73 मिलियन टन हो गया है, जो पिछले साल से लगभग 8 फीसदी ज्यादा है. यह उपलब्धि किसानों की कड़ी मेहनत, आधुनिक टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल और केंद्र सरकार की खेती के अनुकूल नीतियों का मिलाजुला नतीजा है. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दस सालों में अनाज उत्पादन में 106 मिलियन टन से ज़्यादा की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने आगे लिखा कि पिछले दस सालों में अनाज के प्रोडक्शन में 106 मिलियन टन से ज्यादा की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चावल, गेहूं, मक्का और बाजरा समेत सभी मुख्य फसलों में जबरदस्त बढ़ोतरी देश की खेती की मजबूती और केंद्र सरकार की नीतियों के असर का सबूत है. चौहान ने आगे लिखा कि फसलों में बढ़ोतरी 'तिलहन मिशन' और 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' की सफलता को दिखाती है. उन्होंने आगे लिखा कि केंद्र सरकार की कोशिशों की वजह से दालों और तिलहनों में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. तिलहन का प्रोडक्शन बढ़कर 42.989 मिलियन टन हो गया है, और कुल दालों का प्रोडक्शन 25.683 मिलियन टन तक पहुंच गया है. मूंगफली, सोयाबीन, चना और मूंग जैसी फसलों में अच्छी बढ़ोतरी 'तिलहन मिशन' और 'दाल आत्मनिर्भरता मिशन' की सफलता को दिखाती है. केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की तूर, उड़द, चना और मूंग के लिए MSP पर खरीद की गारंटी ने किसानों को एक सुरक्षित बाजार दिया है और MSP पर पक्की खरीद से बड़ी संख्या में किसानों को फायदा हो रहा है, और दालों के उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. 

मतदाता सूची ‘SIR’ रिव्यू पर रीवा प्रशासन ने पेश किया अनोखा ऑफर, सरकारी कर्मचारियों को मुफ्त सुविधाएं

रीवा   जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण 'SIR' का कार्य तेजी से जारी है. मतदाता के सत्यापन के लिए गणना पत्रक का शत-प्रतिशत वितरण कर दिया गया है. सभी बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से इसे भरवाकर रिकॉर्ड पर ले रहे हैं. इसी बीच रीवा जिला प्रशास ने SIR के कार्य को तेज गति देने के लिए खास ऑफर दिया है. जिला कलेक्टर कार्यालय से जारी हुए आदेश के मुताबिक प्रोत्साहन बीएलओ फ्री मूवी टिकट डिनर या टाइगर सफारी टिकट की हकदार होंगे बस उन्हें एक शर्त पूरी करनी होगी. रीवा में SIR को लेकर BLO के लिए खास ऑफर रीवा के सभी विधानसभा क्षेत्रों में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया तेजी से जारी है. इसी कड़ी में प्रशासन ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को प्रोत्साहित करने के लिए नई पहल की है. योजना के तहत जिस बीएलओ द्वारा अपने बूथ के मतदाताओं की जानकारी का 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा किया जाएगा, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा. ऐसे बीएलओ को परिवार सहित फिल्म देखने के लिए मुफ्त टिकट दिए जाएं अपर कलेक्टर ने सभी SDM को जारी किया ऑफर वाला पत्र 19 नंवबर को इस संबंध में अपर कलेक्टर ने जिले के सभी एसडीएम को पत्र लिखा और कहा है कि वह सभी बीएलओ को प्रोत्साहित करें. पत्र जारी करते हुए उल्लेख किया गया कि SIR का कार्य प्रचलन में है. प्रत्येक विधानसभा के प्रथम बूथ लेवल ऑफिसर 'BLO' जो 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण करेंगे उन्हें प्रोत्साहन के रूप में एक बार परिवार सहित निम्नानुसार सुविधाएं जिला प्रशासन की ओर से मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएंगी.  BLO के लिए रीवा जिला प्रशासन का ये है ऑफर     फ्री मूवी टिकट विथ फैमली     फ्री डिनर विथ फैमली     फ्री टिकट गेम जोन फॉर चिल्ड्रेन     फ्री मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी एंड जू विथ फैमली     फ्री थीम कार्निवल मेला रीवा विथ फैमली रीवा में गणना पत्रक के डिजिटाइजेशन में जुटे BLO रीवा जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में इन दिनों 'SIR' यानी मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है. मतदाता के सत्यापन के लिए गणना पत्रक का शत-प्रतिशत वितरण कर दिया गया है. अब सभी BLO ब्लॉक लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना पत्रक भरवाकर उसे रिकॉर्ड पर ले रहे हैं. कई बीएलओ ने अपने सभी मतदाताओं के गणना पत्रक एकत्रित कर डिजिटाइजेशन कर दिया है. अन्य बीएलओ गणना पत्रक संकलित करक बीएलओ ऐप के माध्यम से डिजिटाइज कर रहे हैं. 4.59 लाख गणना पत्रक प्राप्त करके किया गया डिजिटाइज: कलेक्टर इस संबंध में कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिभा पाल ने बताया, '' 20 नवम्बर को शाम 5 बजे तक मतदाताओं से 4 लाख 59 हजार 046 गणना पत्रक प्राप्त कर इसे डिजिटाइज कर लिया गया है. बीएलओ घर-घर जाकर गणना पत्रक संकलित कर रहे हैं. अब तक गुढ़ विधानसभा क्षेत्र में 72261, मनगवां में 76960, रीवा में 73443, सेमरिया में 84549, सिरमौर में 83662 तथा विधानसभा क्षेत्र त्योंथर में 78741 गणना पत्रक डिजिटाइज किए जा चुके हैं.'' रीवा जिले में 2 BLO ने सौ फीसदी लक्ष्य किया पूरा सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के बीएलओ चंद्रमौली सिंह ने समय से पहले लक्ष्य हासिल कर लिया है. उन्होंने SIR मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के तहत सभी कार्य समय से पहले समाप्त कर डिजिटाइजेशन कर लिया है. इसी तरह से मनगवां विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 73 के मतदान केन्द्र क्रमांक 125 ग्राम हकरिया के बीएलओ रामलोचन कुशवाहा ने भी समय से पूर्व डिजिटाइजेशन कार्य पूर्ण किया है.   

मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना होगी और मजबूत, बहनें होंगी मालामाल

भोपाल  प्रदेश की 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों को और सशक्त बनाने के लिए मोहन सरकार नया प्लेटफार्म लेकर आ रही है। यह लाड़ली बहना योजना के तहत ही आएगा। इसमें बहनों को उद्योग धंधे लगाने में अतिरिक्त छूट मिलेगी। वे चाहेंगी तो उन्हें मासिक किस्त का एक मुश्त भुगतान किया जाएगा। रोजगार व स्वरोजगार में योग्यता के आधार पर अतिरिक्त छूट दी जाएगी। ये सभी बदलाव उच्चस्तरीय समिति की सिफारिश के आधार पर होंगे। दरसअल, मप्र से लेकर अन्य राज्यों में भाजपा और एनडीए को चुनाव में संजीवनी देने का मूल आधार मानी जा रही लाड़ली बहना योजना में मोहन सरकार पहली बार बड़ा बदलाव करने जा रही है। योजना के मूल स्वरूप में बदलाव किया जाएगा। यह काम महिला मंत्रियों की उच्च स्तरीय समिति के सुझावों के आधार पर होगा। समिति बनाने पर पिछली कैबिनेट में सहमति बन चुकी है। ये होगी समिति राज्य सरकार अब तक लागू की जा चुकी महिला सशक्तीकरण आधारित योजनाओं की समीक्षा करने जा रही है। यह काम महिलाओं और विशेषज्ञों को करना है। इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया को अध्यक्ष बनाया जा रहा है। मंत्री संपत्तिया उइके, मंत्री कृष्णा गौर, प्रतिमा बागरी व राधा सिंह को शामिल किया जाएगा। समिति गठित करने संबंधी प्रस्ताव बनाया जा रहा है। यह समिति लाड़ली बहना योजना का सूक्ष्मतम अध्ययन करते हुए आवश्यक प्रस्ताव तैयार करेगी। बदलाव की वजह है विजन डॉक्यूमेंट- 2047 के लक्ष्य विजन डॉक्यूमेंट-2047 के तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार 2029 तक 27.7 लाख करोड़ और 2047 तक 250 लाख करोड़ करने का लक्ष्य है। अभी प्रति व्यक्ति आय 1.6 लाख है। इसे सरकार 2029 तक 3 लाख से अधिक और 2047 तक 22 लाख से अधिक करना चाहती है। सीएम डॉ. मोहन यादव का कहना है कि महिलाओं के आर्थिक रूप से संपन्न होने पर ही यह हो सकेगा। इसलिए उन्हें आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। यही वजह है कि सरकार महिला कल्याण और सशक्तीकरण से जुड़ी सभी योजनाओं (Ladli Behna Yojana) की समीक्षा करने जा रही है। इसमें मुख्य तौर पर लाड़ली बहना योजना भी है। योजना में ये बदलाव संभव अभी 1500 रुपए प्रति माह दिए जा रहे हैं। यह राशि हर माह न देकर कुछ वर्षों की राशि एक मुश्त दी जा सकती है। ताकि यह उद्योग-धंधे लगाने में काम आए। आगे योजना में शामिल करने के लिए शेष बहनों के लिए पंजीयन को खोला जा सकता है। योजना को पूरी तरह बहनों की आर्थिक समृद्धि में बदला जा सकता है। ताकि मासिक किस्त से ज्यादा वे खुद कमा सकें। इसके लिए बहनों को जनकल्याण की लगभग सभी योजनाओं में अतिरिक्त छूट मिल सकती है। यदि कोई बहना मासिक किस्त की बजाए, अन्य मदद चाहेंगी और वे उसके लिए योग्य होंगी तो उन्हें प्राथमिकता मिलेगी। लाड़ली बहना योजना में ऐसे बढ़ी राशि -लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की शुरुआत मार्च 2023 में हुई। तब हर माह 1.29 करोड़ बहनों को 1000 रुपए दिए जाते थे। -तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने राशि में 250 रुपए की वृद्धि की और सितंबर 2023 से 1250 रुपए मिलने लगे। -मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 250 रुपए और बढ़ाने का ऐलान किया। 11 नवंबर को 2025 को कैबिनेट में मंजूरी मिली और इसी माह 1.26 करोड़ बहनों को 1500 रुपए ट्रांसफर किए। अब तक लाड़लियों को 45 हजार करोड़ दिए मध्य प्रदेश सरकार अब तक लाड़ली बहनों को 45 हजार करोड़ से अधिक की राशि दी जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुमानित खर्च 20,450.99 करोड़ है। इसमें से भी आधी दी जा चुकी है। नवंबर 2025 से 250 रुपए बढ़ाने के बाद यह खर्च और बढ़ेगा। राज्य हर महीने लाड़लियों पर 1600 करोड़ खर्च कर रही है। इधर, किस्त 3 हजार करने पर राजनीति लाड़ली बहनों को दी जा रही किस्त (Ladli Behna Yojana) पर राजनीति जारी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी कई बार मंचों से कह चुके हैं कि भाजपा ने बहनों को प्रति माह 3000 रुपए देने का वादा किया था। जवाब में भाजपा चरणवार बढ़ोतरी की बात करती रही है।

हिडमा एनकाउंटर विवाद: दिग्विजय सिंह ने उठाए प्रश्न, बीजेपी विधायक ने शहीद इंस्पेक्टर की सराहना की

भोपाल  18 नवंबर को छत्तीसगढ़ के इनामी नक्सली माड़वी हिडमा का सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर कर दिया। कुख्यात नक्सली के एनकाउंटर पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए हैं। आदिवासी एक्टिविस्ट सोनी सोरी का एक वीडियो पूर्व सीएम ने शेयर किया है।  इधर, बीजेपी विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने हिडमा के एनकाउंटर को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, नरसिंहपुर के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा, जो नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुए, उनके लिए दिग्विजय सिंह ने संवेदना तक व्यक्त नहीं की। पढ़िए दिग्विजय सिंह ने नक्सली हिडमा के एनकाउंटर पर क्या लिखा दिग्विजय सिंह ने लिखा, मैं नक्सली द्वारा की जा रही हिंसा का घोर विरोधी हूं। उनके साथ कोई समझौता हो कर उन्हें आत्म समर्पण कराया जाता है, मैं उसके पक्ष में हूं। विषय कुछ और है। उन्हें सामाजिक आर्थिक रूप से मेनस्ट्रीम में लाया जाना चाहिए। देश के सभी शेड्यूल एरिया विशेष कर बस्तर संभाग आदिवासी क्षेत्र में भारत सरकार PESA कानून लागू करना चाहिए? बस्तर के खनिज संपत्ति में स्थानीय आदिवासी की भागीदारी देना चाहिए ? बीजेपी विधायक ने कहा- शहीद इंस्पेक्टर के लिए एक शब्द नहीं निकला दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर बीजेपी विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने वीडियो जारी कर कहा, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जिस प्रकार से खूंखार नक्सली के एनकाउंटर का समर्थन किया और उसे एसआईआर से जोड़ा है। वहीं, नरसिंहपुर के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा जो नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुए, उनके पक्ष में एक शब्द उनके मुंह से नहीं निकला। कम से कम संवेदना के तौर पर उनको श्रृद्धांजलि अर्पित कर देते। लेकिन, उनके मुंह से एक शब्द नहीं कहा। एसआईआर से नक्सल को न जोड़ें पूर्व सीएम कालापीपल विधायक ने कहा, हमारे मुख्यमंत्री जी आशीष शर्मा को श्रृद्धांजलि देने पहुंचे थे। कांग्रेस के नेता भी नरसिंहपुर में पहुंचे थे। दिग्विजय सिंह हमेशा नक्सलियों आतंकियों के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने एसआईआर को इस विषय से जोड़ने का प्रयास किया है। मैं कहना चाहता हूं कि एसआईआर अलग विषय है, इस देश से नक्सलियों का सफाया होकर रहेगा। हमारी सरकार ने जो संकल्प लिया है वो पूरा होकर रहेगा। देश विरोध में खड़े होना बंद करें दिग्विजय बीजेपी विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने कहा, आदिवासियों के हितों की आप बात करना बंद करिए। आदिवासियों के हितों में जितना काम हमारी मप्र और देश की सरकार कर रही है वो शायद आपकी सरकारों ने 70 साल में नहीं किया होगा। दिग्विजय सिंह जी आप नक्सलियों आतंकवादियों के साथ खड़ा होना बंद कर दीजिए। अब आपका समय हो चुका है। आपको राजनीतिक हार स्वीकार नहीं हो रही है। बिहार में हार इसीलिए हुई है क्योंकि आप हमेशा देश विरोधी मुद्दों पर आतंकवादियों, नक्सलियों के साथ खड़े होते हैं इसलिए आपकी पार्टी गर्त में गई है। भगवान आपको सद्बुद्धि दें।

CM योगी का संदेश: न्याय प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करे

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज लखनऊ में आयोजित विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 26वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए, उन्होंने कहा वसुधैव कुटुम्बकम् यानी ‘पूरा विश्व एक परिवार है’ ( ‘The whole world is one family’ has been a basic philosophy of India for thousands of years.) यह हजारों वर्षों से भारत का मूल दर्शन रहा है। उन्होंने विश्व भर से आये मुख्य न्यायाधीशों का स्वागत करते हुए कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति के अनुरूप ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भाव को फिर से पूरी दुनिया में मूर्त रूप से प्रस्तुत करने में सफल होगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा ये सम्मेलन दुनिया के न्यायविदों के बीच दुनिया की मानवता के लिए संवाद का एक माध्यम है, जिन लोगों ने अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए और दुनिया में अशांति और अराजकता का वातावरण पैदा करना का सहस किया है उनके लिए भी एक माध्यम है। विश्व के न्यायाधीशों के सम्मेलन में बोले सीएम योगी, न्याय प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, स्वावलंबन और उनके उन्नत भविष्य का आधार बनना चाहिए योगी ने कहा हमें हमें UN की उस घोषणा को कभी भूलना नहीं चाहिए की दुनिया की वास्तव में समस्या क्या है? और जब हम इसकी गहराई में जाते हैं तो हमें लगता है कि संवाद एक दूसरे के बीच में नहीं है, किन्हीं कारणों से स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए उस संवाद को बाधित किया गया। दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है, समाधान संवाद से संभव  सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा हमने इस युग की सबसे बड़ी महामारी कोविड को झेला है , एक पुरानी कहावत है कि कहीं आग लगी हो और व्यक्ति उससे अपने आप को निश्चिन्त पाता है तो याद रखना वो आग एक दिन आपको भी नुकसान पहुंचा सकती है दुनिया आज जिस चुनौती से जूझ रही है चाहे जलवायु परिवर्तन हो , साइबर सुरक्षा हो या फिर आतंकवाद हो  यदि कोई भी देश कोई भी समाज इन मुद्दों से आँखें बंद कर दुनिया की मानवता के सामने संकट खड़ा करता है तो यह मानकर चलें कि ये संकट उसको भी एक दिन अवश्य निगल सकता है। मानवता की समस्या के समाधान का सन्देश यहां से देन संभव है   कोविड ने बता दिया कि आज की कोई भी समस्या एक देश की समस्या  ये दुनिया की समस्या होती है इसलिए दुनिया को मिलकर ही इसके समाधान का रास्ता निकालना पड़ेगा। दुनियाभर के न्यायविद जब यहाँ एकत्रित हुए हैं तो मानवता की समस्या के समाधान का रास्ता कैसे निकले इसका वे सन्देश इस सम्मेलन से दे सकते हैं  न्याय न केवल समता का, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा का उनके स्वावलंबन का और उनके उन्नत भविष्य का आधार बनना चाहिए।

84 साल का रिकॉर्ड टूटा: मध्यप्रदेश में शीतलहर, पचमढ़ी और अन्य शहरों में तापमान बेहद गिरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस नवंबर का मौसम अब तक रिकॉर्ड तोड़ रहा है। 6 नवंबर से शुरू हुई कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने प्रदेशवासियों की सांसें रोक रखी थीं। पचमढ़ी जैसे हिल स्टेशन में पारा 5.8 डिग्री तक गिर गया, जबकि बड़े शहरों जैसे भोपाल, इंदौर और जबलपुर में भी तापमान लगातार 10 डिग्री के नीचे बना रहा।हालांकि, हवाओं का रुख बदलने के साथ अब प्रदेश में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। लगातार गिरावट के बाद तापमान में हल्की वृद्धि होने लगी है, जिससे ठंड और शीतलहर से राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार, रात में भोपाल में 9.6 डिग्री, इंदौर में 8.4 डिग्री, ग्वालियर में 12.8 डिग्री, उज्जैन में 11.5 डिग्री और जबलपुर में तापमान 11.1 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, छतरपुर के नौगांव में 8.5 डिग्री, खरगोन में 8.8 डिग्री, नरसिंहपुर में 9 डिग्री और खंडवा में 9.4 डिग्रीर दर्ज किया गया। बाकी शहरों में भी पारे में गिरावट देखने को मिली है। इस बार प्रदेश में 6 नवंबर से ही कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो गया। प्रदेश का मालवा-निमाड़ सबसे ठंडा है। भोपाल में तो पिछले 10 दिन से कोल्ड वेव यानी, शीतलहर चल रही है। यहां अगले 2 दिन भी ऐसा ही मौसम बना रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को इंदौर, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर और सीहोर में शीतलहर का अलर्ट है। कई जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को इंदौर, भोपाल, राजगढ़, सीहोर और शाजापुर में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, खंडवा और खरगोन में तेज शीतलहर का प्रभाव देखा गया। गुरुवार की रात का सबसे कम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस राजगढ़ में रिकॉर्ड किया गया। भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 12 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज हुआ। हिल स्टेशन पचमढ़ी में रात का तापमान 7.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो राज्य में दूसरा सबसे कम तापमान है। नवंबर के पहले सप्ताह में ही कड़ाके की ठंड इस बार नवंबर के पहले सप्ताह से ही प्रदेश में कड़ाके की ठंड है। स्थिति यह है कि रात का पारा लगातार नीचे जा रहा है। इस वजह से भोपाल में नवंबर की सर्दी का पिछले 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। वहीं, इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा सर्दी है। मौसम विभाग ने पूरे नवंबर में तेज ठंड का दौर बरकरार रहने का अनुमान जताया है। अगले दो दिन तक प्रदेश में शीतलहर का अलर्ट है। फिर शीतलहर से थोड़ी राहत मिल सकती है। 22 नवंबर को लो प्रेशर एरिया एक्टिव होगा 22 नवंबर से देश के दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दबाव का क्षेत्र) एक्टिव हो रहा है। इससे पहले प्रदेश में अगले 2 दिन तक शीतलहर का अलर्ट है। इस बार नवंबर में पहले सप्ताह में ही तेज ठंड प्रदेश में नवंबर में पिछले 10 साल से ठंड के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। आम तौर पर दूसरे सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ती है, लेकिन इस बार पहले सप्ताह से ही तेज ठंड का असर है। वहीं, बारिश के लिहाज से अक्टूबर का महीना उम्मीदों पर खरा उतरा है। इस महीने औसत 2.8 इंच पानी गिर गया, जो सामान्य 1.3 इंच से 121% ज्यादा है। जानिए, नवंबर में 5 बड़े शहरों का मौसम… भोपाल: इस बार टूट गया ओवरऑल रिकॉर्ड नवंबर में भोपाल में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। पिछले 10 साल से ऐसा ही ट्रेंड रहा है। इस बार पहले सप्ताह से ही तेज ठंड का असर रहा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल में नवंबर में रात का तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंच चुका है। यह 30 नवंबर 1941 को दर्ज किया गया था, लेकिन इस साल 16 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री रहा। इस तरह नवंबर की सर्दी का ओवरऑल रिकॉर्ड बन गया है। यहां इस महीने बारिश होने का ट्रेंड भी है। 10 साल में तीन बार बारिश हो चुकी है। साल 1936 में महीने में साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। दिन का तापमान और कोहरा दिन में अधिकतम तापमान उज्जैन में 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, जबलपुर के भेड़ाघाट में घना कोहरा छाया रहा। इस तरह, प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बेहद बदलता रहा। लो प्रेशर एरिया और भविष्य का पूर्वानुमान मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 22 नवंबर से दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया सक्रिय होने जा रहा है। भोपाल मौसम केंद्र के मुताबिक, मलक्का जलडमरूमध्य के ऊपर 5.8 किलोमीटर तक ऊपरी हवा चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है। इसके प्रभाव से 22 नवंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह डिप्रेशन 24 नवंबर तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी के मध्य भागों में विकसित हो सकता है। इसके बाद यह पश्चिम-उत्तरी-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए अगले 48 घंटों में और अधिक तीव्र होने की संभावना है। इस प्रभाव के चलते अगले 3-4 दिन प्रदेश में तापमान में हल्की वृद्धि देखने को मिलेगी। उसके बाद फिर से ठंड और शीतलहर का सिलसिला शुरू होने की संभावना है। इंदौर: 5.6 डिग्री तक जा चुका न्यूनतम पारा इंदौर में नवंबर में ठंड का असर रहता है। खासकर दूसरे सप्ताह से पारा तेजी से गिरता है। इस वजह से रातें ठंडी हो जाती हैं और टेम्प्रेचर 10 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 25 नवंबर 1938 को पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। इंदौर में कभी-कभार बारिश भी हो जाती है। दिन में 31 से 33 डिग्री के बीच तापमान रहता है।   MP के शहरों में तापमान एमपी के इन शहरों में इतना टेम्प्रेचर शहर रात का तापमान राजगढ़ 7.5 पचमढ़ी (नर्मदापुरम) 7.6 गिरवर (शाजापुर) 7.8 शिवपुरी 8.0 नौगांव (छतरपुर) 8.3 खंडवा 8.4 नरसिंहपुर 8.8 खरगोन 9.0 उमरिया 9.0 रायसेन 9.6 छिंदवाड़ा 10.0 रतलाम 10.1 रीवा 10.1 मलाजखंड (बालाघाट) 10.7 मंडला 10.8 बैतूल 11.0 दतिया 11.3 गुना 11.4 खजुराहो (छतरपुर) 11.8 दमोह 12.0 धार 12.1 श्योपुर 12.4 सतना 12.4 सिवनी 12.6 सीधी 12.6 सागर 13.9 नर्मदापुरम 14.1 नोट: 19-20 नवंबर की रात का, डिग्री सेल्सियस में … 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नई बिहार सरकार में बीजेपी ने जेडीयू को पीछे छोड़ा, मंत्रियों की संख्या में हासिल बढ़त

 नई दिल्ली बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए सरकार बन गई है. नीतीश कुमार ने सीएम, तो सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. नीतीश कैबिनेट में दोनों डिप्टी सीएम सहित 26 मंत्री बनाए गए हैं, जिसमें जेडीयू से ज्यादा बीजेपी कोटे से मंत्री बने हैं. इस तरह मंत्रिमंडल के नंबर गेम में फिलहाल बीजेपी आगे निकल गई है. क्या मंत्रियों को विभागों के बंटवारे में भी बीजेपी अपनी गठबंधन सहयोगी जेडीयू पर भारी पड़ेगी या फिर नीतीश कुमार का रहेगा होल्ड? नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार में फिलहाल 26 मंत्री बनाए गए हैं. बीजेपी कोटे से 14 मंत्री, जेडीयू से 8 मंत्री, एलजेपी (आर) के 2, आरएलएम और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से एक-एक मंत्री बने हैं. ऐसे में कैबिनेट के गठन में जेडीयू से करीब दोगुना मंत्री बीजेपी के बनाए गए हैं. हालांकि, नीतीश सरकार में 9 मंत्री पद अभी भी खाली है, जिन्हें बाद में भरा जाएगा. बिहार में एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद अब बारी मंत्रालय के विभागों के बंटवारे की है. नीतीश सरकार में कौन सा मंत्रालय किस मंत्री को मिलेगा, इस पर लोगों की निगाहें लगी हुई हैं. खासकर गृह, वित्त, ऊर्जा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण जैसे मंत्रालय को हाईवेट माना जाता है. बीजेपी मंत्रियों के नंबर गेम में जिस तरह से आगे निकली है, क्या उसी तरह से विभागों के बंटवारे में भी उसका वर्चस्व बरकरार रहेगा? अध्यक्ष पद के लिए जेडीयू और बीजेपी के बीच खींचतान कई दिनों तक चलती रही. बाद में स्पीकर पोस्ट बीजेपी के हिस्से में जाने की बात सामने आई है. माना जा रहा है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार को स्पीकर बनाया जा सकता है, क्योंकि उन्होंने गुरुवार को मंत्री पद की शपथ नहीं ली. अब बारी मंत्रालय के विभागों के बंटवारे की है. ऐसे में सबसे ज्यादा निगाहें गृह और वित्त मंत्रालय पर है. नीतीश क्या गृह मंत्रालय अपने पास रखेंगे नीतीश कुमार बिहार की सत्ता जब से संभाल रहे हैं, तब से गृह मंत्रालय अपने पास रखे हुए हैं. विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से ही गृह विभाग को लेकर बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दावे कर रही हैं. 2024 में नीतीश महागठबंधन से नाता तोड़कर दोबारा से एनडीए के साथ आए थे तो उस समय शपथ ग्रहण के पांच दिनों के बाद तक विभागों का बंटवारा नहीं हो सका था. बीजेपी की लाख कोशिश के बावजूद नीतीश कुमार गृह विभाग अपने पास रखने में कामयाब रहे थे. गृह मंत्रालय के जरिए ही नीतीश कुमार ने सुशासन बाबू वाली अपनी छवि बनाने में कामयाब रहे. नीतीश कुमार इसी यूएसपी के सहारे आरजेडी के जंगल राज के तिलिस्म को तोड़ा. कानून-व्यवस्था,पुलिस प्रशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण जैसे मामलों पर सीधी पकड़ रखने के लिए गृह विभाग को छोड़ना नहीं चाहते हैं. बीजेपी की नजर लंबे समय से इसी गृह विभाग पर है, जिसे लेकर 2024 में जेडीयू के साथ कई दिनों तक बार्गेनिंग करती रही. उस समय बात नहीं बनी, लेकिन अब देखना है कि इस बार गृह मंत्रालय किसे मिलता है. स्वास्थ्य, वित्त और शिक्षा मंत्रालय पर नजर गृह मंत्रालय ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य, वित्त, शिक्षा और लोक निर्माण जैसे हाईवेट मंत्रालय पर भी लोगों की नजर है. नीतीश कुमार 2005 से ही गृह मंत्रालय अपने पास रखते हैं तो वित्त मंत्रालय बीजेपी कोटे से बनने वाले डिप्टीसीएम को देती रही है. पहले सुशील मोदी के पास रहा और उसके बाद तारकिशोर प्रसाद और फिर सम्राट चौधरी को मिला. हालांकि, महागठबंधन सरकार के दौरान वित्त मंत्री का जिम्मा जेडीयू के विजय चौधरी के पास रहा. 2024 में नीतीश दोबारा से एनडीए में वापसी किए तो माना जा रहा है था कि वित्त जेडीयू के खाते में रहेगा और बदले में शिक्षा बीजेपी के पास रहेगी. बीजेपी ने वित्त विभाग को प्राथमिकता दी और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को वित्त मंत्रालय मिला था. ऐसे में वित्त मंत्रालय पर बीजेपी और जेडीयू दोनों की नजर है, लेकिन सियासी पैटर्न देखें तो बीजेपी के हिस्से में जा सकता है. बीजेपी-जेडीयू के पास कौन-कौन मंत्रालय थे बिहार की एनडीए सरकार में बीजेपी के पास वित्त, नगर विकास और आवास, स्वास्थ्य, खेल, पंचायती राज, उद्योग, पशु एवं मत्सय संसाधन,विधि, सहकारिता, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पर्यटन, कृषि, पथ निर्माण, भूमि सुधार, गन्ना उद्योग, खान एवं भूतत्व, श्रम संसाधन, कला, संस्कृति और युवा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण जैसे विभाग थे. वहीं, जेडीयू के पास फिलहाल सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण और परिवहन, शिक्षा, सूचना और जन संपर्क, ऊर्जा, योजना और विकास, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, ग्रामीण कार्य, अल्पसंख्यक कल्याण, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्रालय थे. जीतनराम मांझी की पार्टी को सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग मिला था. कैबिनेट में किसे मिलेगा कौन सा विभाग नीतीश कुमार ने अपनी सरकार में जेडीयू कोटे से भी पुराने और अनुभवी चेहरों को मंत्री बनाया है जबकि बीजेपी ने अपने कई पुराने चेहरे को ड्राप करके उनकी जगह नए फेस को मंत्री बनाया है. ऐसे में हाई प्रोफाइल मंत्रालय पर जेडीयू अपना दावा करेगी. अभी तक के पैटर्न के लिहाज से राजस्व, सहकारिता, पशु एवं मत्स्य संसाधन, विधि, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण,उद्योग, पर्यटन और पथ निर्माण बीजेपी को मिल सकता है. जेडीयू के खाते में कृषि, खान एवं भूतत्व, जल संसाधन, संसदीय कार्य, ऊर्जा, योजना एवं विकास, विज्ञान एवं प्रावैधिकी, तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण विकास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे मंत्रालय मिल सकते हैं. हालांकि, बीजेपी चाहती है कि गृह और शिक्षा उसके पास आ जाए, इसके बदले वह स्वास्थ्य और वित्त जैसे विभाग छोड़ने को तैयार है. ऐसे में देखना होगा कि बिहार के बदले हुए माहौल में कौन मंत्रालय का जिम्मा किसे मिलता है?

सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश: लग्ज़री पेट्रोल-डीजल वाहनों पर पाबंदी, EV नीति होगी सख्ती से लागू

नई दिल्ली Ban on Luxury Petrol-Diesel Cars: दिल्ली की हवा जब नवंबर आते-आते धुएँ की चादर ओढ़ लेती है, तब सिर्फ इंसान नहीं, नीतियों की भी सांस फूलने लगती है. ऐसे वक्त में सुप्रीम कोर्ट का एक सुझाव ने देश के लग्जरी कार के मालिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. अदालत का कहना है अब समय आ गया है कि लग्ज़री पेट्रोल-डीजल लग्जरी कारें धीरे-धीरे सड़क से हटाई जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव देते हुए कहा है कि, पेट्रोल और डीजल से चलने वाली लग्जरी कारों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाने पर विचार होना चाहिए. यह सुझाव उस समय आया है जब देश इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की दिशा में तेज़ी से बढ़ तो रहा है, लेकिन लग्ज़री सेगमेंट में अब भी ज़्यादातर लोग पारंपरिक इंजन वाली (पेट्रोल-डीजल) कारों को ही प्राथमिकता देते हैं. यह सुझाव सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसका प्रतिनिधित्व वकील प्रशांत भूषण कर रहे थे. याचिका में मांग की गई है कि सरकार की मौजूदा ईवी नीतियों को ज़मीन पर सख्ती से लागू किया जाए, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को वास्तव में बढ़ावा मिल सके. क्या है कोर्ट का सुझाव? 13 नवंबर 2025 को हुई सुनवाई में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने कहा कि, शुरुआत लग्ज़री इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों पर पाबंदी से हो सकती है. अदालत के मुताबिक, बड़ी इलेक्ट्रिक कारें अब आसानी से उपलब्ध हैं और उन्हीं सुविधाओं के साथ आती हैं जिन्हें VIP और बड़े कॉरपोरेट घराने अपने वाहन चुनते समय देखते हैं. ऐसे में इन लग्जरी मॉडलों को चरणबद्ध तरीके से हटाने से आम जनता प्रभावित नहीं होगी. बेंच ने यह भी सुझाव दिया कि बड़े महानगरों में पायलट प्रोजेक्ट चलाकर लोगों को पेट्रोल-डीजल वाहनों के बजाय EV की ओर प्रोत्साहित किया जा सकता है. बेंच का कहना है कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी वैसे ही चार्जिंग स्टेशनों की मांग भी बढ़ेगी. साथ ही चार्जिंग इंफ्रा को बेहतर होनी शुरू हो जाएगी. क्या समीक्षा लायक हो चुकी है EV पॉलिसी सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों पर केंद्र सरकार के 13 मंत्रालय काम कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सभी नीतियों, नोटिफिकेशन और डेवलपमेंट की एक विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी पूछा कि क्या मौजूदा EV पॉलिसी, जो 5 साल से अधिक पुरानी हैं, अब समीक्षा लायक हो चुकी हैं. अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी, जिसमें विस्तृत रिपोर्ट पेश की जानी है. लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों की मांग भारत में लग्जरी सेगमेंट में इलेक्ट्रिक (EV) की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि आम बाजार में यह सिर्फ 2–3 प्रतिशत है. यही वजह है कि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में BMW और Mercedes-Benz जैसी कंपनियों ने जबरदस्त इलेक्ट्रिक कार बिक्री दर्ज की है. दिलचस्प बात यह है कि 1 करोड़ रुपये से ऊपर की इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ भी अब पहले से कहीं तेज़ी से बिक रही हैं. यानी ऐसे लोग जो वाहन पर ज्यादा पैसा खर्च करने में सक्षम है वो इलेक्ट्रिक कारों को एक बेहतर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं.  टॉप 5 लग्ज़री कार ब्रांड्स की सालाना बिक्री (यूनिट में) क्रम         ब्रांड            वित्त वर्ष 24                 वित्त वर्ष 25 1.     मर्सिडीज-बेंज        18,123                    18,928 2.       बीएमडब्ल्यू           15,420                15,995 3.     जगुआर लैंडरोवर      4,436                   6,183 4.      ऑडी                    7,049                  5,993 5.     वोल्वो                    2,150                   1,750 इन आंकड़ों से साफ दिखता है कि वित्त वर्ष 25 में मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है, जबकि ऑडी और वोल्वो की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है. जगुआर लैंडरोवर ने सबसे अधिक तेजी दिखाई है और FY24 के मुकाबले FY25 में अच्छी ग्रोथ हासिल की है. कुल मिलाकर, मार्केट में जर्मन ब्रांड्स का दबदबा कायम है और Mercedes-Benz अभी भी लग्ज़री सेगमेंट की सबसे अधिक बिकने वाली कार ब्रांड बनी हुई है. कितनी कारों पर पड़ेगा असर भारत में पैसेंजर व्हीकल सेग्मेंट में लग्ज़री कारों का मार्केट शेयर बहुत ही कम है. ये देश में बेची वाली कुल कारों का तकरीबन 1% है. जो साल 2030 तक बढ़कर 4-5% पहुंचने की उम्मीद है. लग्ज़री कारों की मार्केट प्रेजेंस का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि, बीते अक्टूबर में टाटा नेक्सन बेस्ट सेलिंग कार बनी और इसके कुल 22,083 यूनिट बेचे गए थे. जो मर्सिडीज-बेंज की सालान बिक्री (18,928) से भी ज्यादा है. खैर, 37-38.8%. मार्केट शेयर के साथ मर्सिडीज-बेंज लग्ज़री कार सेग्मेंट की लीडर बनी हुई है. दूसरी ओर तकरीबन 32% बाजार पर बीएमडब्ल्यू का कब्ज़ा है. जगुआर और ऑडी के बीच थर्ड पोजिशन को लेकर खींचतान जारी है, जिसमें FY25 में जगुआर आगे है. वाहनों के इस बिक्री के आंकड़ों में इन ब्रांड्स के इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल हैं.  ये कार ब्रांड्स होंगे प्रभावित अगर यह प्रतिबंध लागू होता है तो इसका सीधा असर उन लग्ज़री कार ब्रांड्स के खरीदारों पर पड़ेगा जो इलेक्ट्रिक विकल्प होने के बावजूद पेट्रोल या डीजल वाली लग्जरी कारें चुनते हैं. भारत में कई लग्जरी ब्रांड अपने इलेक्ट्रिक मॉडल बेच रहे हैं, लेकिन ग्राहकों का बड़ा हिस्सा अब भी पुराने पावरट्रेन को ही तरजीह देता है. ऐसे में यह बदलाव पूरी तरह इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर धकेल सकता है और कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने पड़ सकते हैं. इस सुझाव पर अमल किया जाता है तो, इससे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, जगुआर लैंडरोवर और ऑडी जैसे ब्रांड्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. हालांकि इन ब्रांड्स ने भी इंडियन मार्केट में इलेक्ट्रिक कारों का पोर्टफोलियो बढ़ाना शुरू कर दिया है. लेकिन अभी भी महंगी और लग्ज़री कार खरीदारों के बीच पेट्रोल-डीजल … Read more

रायपुर: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसकला ब्रांड और डिजिटल फाइनेंस बुकलेट का किया शुभारंभ

रायपुर : केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने किया छत्तीसकला ब्राण्ड एवं डिजिटल फाइनेंस बुकलेट का किया विमोचन रायपुर छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में  दिन ग्रामीण आजीविका, महिला उद्यमिता और वित्तीय समावेशन को नई ऊर्जा देने वाला दिन रहा। जहां प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त के राज्य स्तरीय वितरण कार्यक्रम के अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और हजारों ग्रामीण महिलाओं की उपस्थिति में बहुप्रतीक्षित एकीकृत राज्य ब्राण्ड छत्तीसकला तथा डिजिटल फाइनेंस बुकलेट का विमोचन किया। केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने किया छत्तीसकला ब्राण्ड एवं डिजिटल फाइनेंस बुकलेट का किया विमोचन ग्रामीण महिला उत्पादों को मिला राज्य का पहला एकीकृत ब्राण्ड ‘छत्तीसकला’       राज्य की ग्रामीण गरीब महिलाओं द्वारा निर्मित गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को एक ही पहचान और एकीकृत बाजार मंच प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) ने 'छत्तीसकला' ब्राण्ड की शुरुआत की है। इस ब्रांड के अंतर्गत वर्तमान में मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पाद, चाय, अचार, स्नैक्स, हैंडलूम एवं हस्तशिल्प निर्मित ढोकरा आर्ट, बांस शिल्प, मिट्टी एवं लकड़ी उत्पाद, अगरबत्ती एवं पूजा सामग्री जैसे विविध उत्पादों पर मानकीकरण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की योजना है। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने कहा कि छत्तीसकला ब्रांड ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनेगा। यह ब्राण्ड उनके उत्पादों को राज्य से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक ले जाएगा। 48 बीसी सखियों की सफलता की गाथा का डिजिटल फाइनान्स बुकलेट का हुआ विमोचन          कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री  चौहान ने डिजिटल फायनान्स बुकलेट का भी विमोचन किया गया,  जिसमें राज्यभर की 48 बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट सखियों (बीसी सखियों) की प्रेरणादायक सफलताओं को दर्ज किया गया है।  3775 बीसी सखियाँ सक्रिय रूप  बैंकिंग सेवाएँ दे रही        वर्तमान छत्तीसगढ़ में कुल 3775 बीसी सखियाँ सक्रिय रूप से घर-घर बैंकिंग सेवाएँ दे रही हैं और पिछले चार वर्षों में 3033.48 करोड़ से अधिक का वित्तीय लेन-देन कर चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो महिलाएँ कभी घरों से बाहर निकलने में संकोच करती थीं, आज वही महिलाएँ गाँव-गाँव वित्तीय सेवाएँ पहुँचाकर सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन की राह बना रही हैं। हजारों स्व-सहायता समूह को मिला वित्तीय सशक्तिकरण      इस भव्य कार्यक्रम से ग्रामीण महिला समूहों को बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। जिसके अंतर्गत 1080 स्व-सहायता समूहों को 1.62 करोड़ रुपए की रिवॉल्विंग निधि एवं 8340 स्व-सहायता समूहों को 50.04 करोड़ रूपए की सामुदायिक निवेश निधि, बैंक लिंकेज के रूप में 229.74 करोड़ रूपये प्रदान किये गए। इसके साथ ही 1533 महिला उद्यमियों को 6.23 करोड़ रुपए का उद्यमिता ऋण भी प्रदान किया गया है। इन वित्तीय प्रावधानों से ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि एवं नए उद्यमों की स्थापना और आर्थिक स्वावलंबन को मजबूती मिलेगी। ग्रामीण समृद्धि, महिला नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की नई दिशा         धमतरी में हुआ यह आयोजन न केवल आर्थिक सहायता का वितरण था, बल्कि ‘आत्मनिर्भर ग्रामीण छत्तीसगढ़’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। 'छत्तीसकला' ब्राण्ड, बीसी सखी मॉडल और व्यापक वित्तीय समर्थन तीनों मिलकर ग्रामीण आजीविका की दशा और दिशा बदलने वाले साबित होंगे।

मध्यप्रदेश में बड़े बदलाव की तैयारी: इंदौर से लॉन्च होगी 10,000 बसों की सुगम परिवहन योजना

भोपाल मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत मध्य प्रदेश के सभी जिलों में सरकारी नियंत्रण वाली यात्री बसें अप्रैल, 2027 तक संचालन में आ जाएंगी। इस योजना के अंतर्गत कुल 10,879 बसें चलाई जाएंगी। ये बसें निजी ऑपरेटरों की होंगी, लेकिन इनके संचालन, प्रबंधन और किराया संरचना पर पूरा नियंत्रण शासन के पास रहेगा। योजना की शुरुआत अप्रैल, 2026 से इंदौर के आठ अंतर्शहरी और 24 उपनगरीय मार्गों पर की जाएगी। संचालन कार्य में देरी न हो, इसलिए हर चरण और गतिविधि की स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी गई है। बसों का किराया शुरुआती एक किलोमीटर के लिए सात रुपये तथा उसके बाद प्रति किमी 1.25 रुपये निर्धारित है। इसी दर से 50 किमी का किराया 70 रुपये बनता है, जबकि वर्तमान में निजी बस संचालक 50 प्रतिशत तक अधिक किराया वसूल रहे हैं।   CM की अध्यक्षता में हुई बैठक मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में बस सेवा को चरणबद्ध ढंग से पूरे प्रदेश में लागू करने की रूपरेखा तय की गई। तय कार्यक्रम के अनुसार सेवा शुरू होने के एक वर्ष के भीतर सभी जिलों में सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध होगी। फिलहाल इंदौर, उज्जैन, सागर और जबलपुर के लिए यात्रियों की संख्या एवं मार्ग सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया गया है। परिवहन विभाग ने इंदौर संभाग के जिलों के मार्ग 15 दिसंबर, 2025 तक और उज्जैन क्षेत्र के मार्ग 26 नवंबर से पहले निर्धारित करने का लक्ष्य रखा है। बसों के व्यवस्थापन के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिसमें व्हीकल लोकेशन, ट्रैकिंग, किराया संग्रहण और अलर्ट जैसे 18 मॉड्यूल शामिल हैं। हालांकि ITMS सॉफ्टवेयर का पूर्ण निर्माण मई, 2026 तक संभव होगा। किराया संरचना (रुपये में)     10 किमी – 19 रुपये     20 किमी – 32 रुपये     30 किमी – 45 रुपये     40 किमी – 57 रुपये     50 किमी – 70 रुपये किस चरण में कहां शुरू होगी सेवा: प्रथम चरण – इंदौर शहर से 50 किमी दायरे के शहरी व अंतर्शहरी रूट रूट: 32 बसें: 310 समय सीमा: अप्रैल, 2026 द्वितीय चरण – इंदौर संभाग के सभी जिले रूट: 771 बसें: 1706 समय सीमा: जून, 2026 तृतीय चरण – भोपाल व उज्जैन शहर से 50 किमी दायरे वाले रूट रूट: भोपाल 50, उज्जैन 23 बसें: भोपाल 152, उज्जैन 127 समय सीमा: जुलाई, 2026 चौथा चरण – उज्जैन संभाग के सभी जिले रूट: 386 बसें: 1318 समय सीमा: नवंबर, 2026 पांचवां चरण – सागर एवं जबलपुर संभाग रूट: 1228 बसें: 2635 समय सीमा: दिसंबर, 2026 छठा चरण – भोपाल व नर्मदापुरम संभाग रूट: तय नहीं बसें: 1843 समय सीमा: अप्रैल, 2027 सातवां चरण – रीवा एवं शहडोल संभाग रूट: निर्धारित नहीं बसें: 1470 समय सीमा: अप्रैल, 2027 आठवां चरण – ग्वालियर एवं चंबल संभाग रूट: निर्धारित नहीं बसें: 1318 20 वर्ष बाद फिर शुरू होगी सरकारी परिवहन सेवा साल 2005 में 700 करोड़ रुपये से अधिक घाटे के कारण मप्र राज्य सड़क परिवहन निगम बंद हो गया था। इसके बाद से बस संचालन पूरी तरह निजी क्षेत्र पर निर्भर था, जिससे मनमाना किराया, वाहनों की खराब फिटनेस और क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जाने जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही थीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पदभार ग्रहण करने के बाद दोबारा सरकारी सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद यह योजना लागू की जा रही है।