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खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम से धमकी भरा मेल, दिल्ली जाने वाली ट्रेन में धमाके की चेतावनी

लुधियाना  महानगर में एक बार फिर बम धमाके की धमकी मिलने से सनसनी फैल गई है। बुधवार को नगर निगम (MC) और डिप्टी कमिश्नर (DC) दफ्तर की आधिकारिक ईमेल आई.डी. पर आए एक धमकी भरे मेल के बाद प्रशासनिक हलकों और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस बार शातिर ईमेल भेजने वाले ने किसी लावारिस बैग या टाइमर बम की नहीं, बल्कि 'ह्यूमन बम' (मानव बम) के जरिए इन दफ्तरों को उड़ाने की खौफनाक धमकी दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईमेल भेजने वाले सिरफिरे ने लुधियाना मेयर के दफ्तर, नगर निगम कार्यालय, डी.सी. दफ्तर और शहर के व्यस्त रेलवे ट्रैक पर बम धमाके करने की चेतावनी दी है। जैसे ही इसकी भनक उच्च अधिकारियों को लगी, तुरंत पुलिस के आला अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं। चंडीगढ़ और दिल्ली तक की खुफिया एजेंसियां अलर्ट, खंगाले जा रहे डिजिटल फुटप्रिंट्स  धमकी भरे ईमेल की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम की टीमें और देश की खुफिया एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गई हैं। इस मेल के ओरिजिन (कहाँ से भेजा गया) का पता लगाने और भेजने वाले शातिर को बेनकाब करने के लिए हाई-लेवल जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी पहलुओं, आई.पी. एड्रेस (IP Address) और डिजिटल फुटप्रिंट्स की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके। सर्च ऑपरेशन में नहीं मिला कुछ संदिग्ध, एडिशनल DCP बोले- घबराएं नहीं  मामले की पुष्टि करते हुए एडिशनल डी.सी.पी. (ADCP) देव सिंह ने बताया कि बम की धमकी वाला ईमेल मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष टीमों और बम निरोधक दस्ते ने तुरंत दोनों दफ्तरों के परिसरों की सघन चेकिंग की। पूरे इलाके को खंगालने के बाद पुलिस को वहां कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने जनता से अपील की है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। मेल आने के बाद पुलिस व प्रशासन ने डीसी दफ्तर, नगर निगम दफ्तर में हर आने जाने वाले पर नजर रखनी शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की मेल पहले भी आई थी। हालांकि तब भी कुछ नहीं निकला था। फिर भी प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। जानकारी के अनुसार प्रशासन को 17 जून 2026 को सुबह करीब 9:34 बजे मेल मिली। ईमेल भेजने वाले ने खुद को खालिस्तान नेशनल आर्मी' का सदस्य बताया है। ईमेल में बेहद आपत्तिजनक और डराने वाली बातें लिखी गई हैं। इस ईमेल के बाद लुधियाना मेयर दफ्तर, डीसी कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुट गई है कि यह ईमेल कहाँ से जनरेट हुआ है और इसके पीछे किसी शरारती तत्व का हाथ है या वाकई कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। प्रशासन को मिली मेल में लिखी अहम बातें… मेयर और DC ऑफिस पर फिदायीन हमला: आज दोपहर 1:11 बजे लुधियाना मेयर और डीसी ऑफिस को 'मानव बम' से उड़ाने की धमकी दी गई थी। CM भगवंत मान को निशाना बनाने का दावा: ईमेल में लिखा गया है कि 2027 तक पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पूर्व सीएम बेअंत सिंह की तरह आत्मघाती हमला किया जाएगा। रेलवे ट्रैक और आम जनता को चेतावनी: ईमेल में साफ लिखा गया है कि 18 जून से 30 सितंबर के बीच अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के रेलवे ट्रैक को निशाना बनाया जाएगा। भेजने वाले ने खुलेआम चेतावनी दी है अपने बच्चे बचाओ, कोई भी 18 जून से 30 सितंबर के बीच दिल्ली वाली रेल से सफर न करे। गृह मंत्री अमित शाह को धमकी: ईमेल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाने और हरदीप सिंह निज्जर की मौत का बदला लेने की बात भी कही गई है। पहले भी आ चुकी हैं फर्जी धमकियां, सिंगर दिलजीत दोसांझ का घर भी था निशाने पर  काबिलेगौर है कि लुधियाना में बम धमाकों की धमकी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे करीब तीन हफ्ते पहले भी एक ऐसा ही फर्जी ईमेल आया था, जिसमें लुधियाना के मेयर दफ्तर और मशहूर पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के घर को बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, लुधियाना में पिछले समय के दौरान आए ऐसे सभी बम थ्रेट ईमेल महज एक 'होक्स' (अफ़वाह या फर्जी कॉल) ही साबित हुए हैं। पुलिस का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व का काम है, जिसे जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

शिवसेना (UBT) में बड़ी टूट, 6 सांसदों ने चुनी अलग राह; राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस से बढ़ा सियासी घमासान

 मुंबई महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से उद्धव ठाकरे को बड़ा सियासी झटका लगा है. शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अलग अपना गुट बनाने का फैसला किया है. शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अलग समूह माना जाए।  शिवसेना (यूबीटी) के जिन सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखा है, उसमें संजय जाधव , संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर , ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। वहीं, शिवेसना (यूबीटी) के टिकट पर जीतकर आए 9 सांसदों में से छह सांसद एक साथ आए गए हैं तो तीन सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं।  महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के अनुसार, छह सांसदों ने शिंदे गुट की शिवसेना में विलय के लिए बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी भेजी है। सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी भेजने वाले सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल का नाम शामिल है। संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज किया था। उन्होंने कहा- मैं उद्धव ठाकरे की पार्टी का सांसद हूं और इसी पार्टी में रहूंगा। इधर, शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने गाली देते हुए कहा- ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। बाद में मीडिया से उन्होंने कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। उद्धव और अन्य पार्टी लीडर्स अपने सांसदों से लगातार संपर्क करने और उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। पार्टी ने गुरुवार को दिल्ली में संसदीय समिति की बैठक बुलाई है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, पार्टी ने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया है। जो सांसद बैठक में नहीं आएंगे, पार्टी उनके खिलाफ डिस्क्वालिफिकेशन की कार्रवाई कर सकती है। उद्धव के सांसद एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे के साथ खेला हो गया है. शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों ने बुधवार सुबह साढ़े 9 बजे स्पीकर को पत्र देकर एकनाथ शिंदे की पार्टी में विलय करने की मांग की है. उद्धव के 6 सांसदों ने अपना गुट बनाकर शिवसेना में विलय कर दिया है।  उद्धव की पार्टी के 6 बागी सांसद बुधवार सुबह  नांदेड़, पुणे और मुंबई से प्राइवेट प्लेन से दिल्ली पहुंचे. इस दौरान उनके साथ में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के एक सीनियर नेता मौजूद थे, जिनके साथ दिल्ली आए और स्पीकर को अपने समर्थन का पत्र सौंपा है।  उद्धव के साथ सिर्फ 3 सांसद ही बचे यूबीटी में बगावत की अटकलों के बीच दिल्ली में संजय राउत के आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद सावंत और चीफ व्हिप अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ मौजूद थे. इस तरह शिवेसना (यूटीबी) के 9 में से 3 लोकसभा सांसद ही पहुंचे थे, 6 सांसद नहीं थे. इसके मतलब साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा बना हुई है।  वहीं, शिवेसना (यूबीटी) के टिकट पर जीतकर आए 9 सांसदों में से छह सांसद एक साथ आए गए हैं तो तीन सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा था कि सभी 9 सासंद हमारी पार्टी के टिकट पर जीतकर आए हैं. उद्धव ठाकरे ने उन्हें जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिया. हमने उन्हें जितना हो सका, संसाधन दिए।  राउत ने कहा कि हमारे सांसद शिवसेना के चुनाव चिह्न मशाल पर चुने गए थे, जिसके नेता उद्धव ठाकरे हैं. वे पीएम मोदी के नाम पर नहीं जीते हैं. ऐसे में अगर अब कोई पाला बदलता है, तो हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, अगर जिन्हें जाना है, वो इस्तीफा देकर जा सकते हैं. इससे साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा टला नहीं है। 

रेड रोड बंदी पर बढ़ा विवाद! योग दिवस की तैयारियों के बीच हाईकोर्ट पहुंचा मामला

कलकत्ता कलकत्ता हाईकोर्ट ने इंटरनेशनल योग दिवस के मौके पर कोलकाता के रेड रोड पर 7 दिनों तक वाहनों की आवाजाही रोकने के सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है. एडवोकेट शमीम अहमद ने जस्टिस सौगत भट्टाचार्य (कोर्ट-5) के सामने ये मामला उठाया है।  रेड रोड पर PM मोदी के साथ शामिल होंगे 35 हजार लोग अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इस बार पश्चिम बंगाल देश को एक अनूठी तस्वीर दिखाने की तैयारी में है। 21 जून को हुगली नदी में 500 से अधिक नौकाओं पर हजारों लोग एक साथ योग करेंगे, जबकि कोलकाता के रेड रोड पर राष्ट्रीय स्तर का मुख्य योग कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों के साथ योग करेंगे। पहली बार पश्चिम बंगाल इस आयोजन की मेजबानी कर रहा है और इसे लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग रखी गई है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि अभी भारत दुनिया में सबसे ज्यादा युवाओं वाला देश है, लेकिन अगले 25-50 वर्षों में यह सबसे ज्यादा बुजुर्गों वाला देश हो सकता है। ऐसे में सभी बुजुर्ग स्वस्थ्य रहें, इसके लिए प्रधानमंत्री ने इस बार का थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” तय किया है। राज्य सरकार और आयुष मंत्रालय की योजना के तहत हुगली नदी में सैकड़ों नौकाओं पर प्रतिभागी सामूहिक रूप से योगासन और प्राणायाम करेंगे। सुरक्षा और समन्वय के लिए नदी पुलिस, आपदा प्रबंधन बल और स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें तैनात रहेंगी।  रेड रोड पर मोदी करेंगे योग 21 जून को मुख्य आयोजन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में किया जा रहा है। इस मौके पर खास रूप से  मोदी यहां करीब 35 हजार लोगों के साथ योग करेंगे। योग दिवस कार्यक्रम को देखते हुए कोलकाता के रेड रोड पर सुरक्षा और मंच निर्माण की तैयारियां जोरों पर प्रशासन ने रेड रोड को सात दिनों के लिए आम यातायात के लिए बंद कर दिया है।    योग दिवस कार्यक्रम से पहले रेड रोड एक सप्ताह तक बंद रहेगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस प्रमुख सड़क पर आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने तक, रेड रोड एक सप्ताह के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से यातायात के लिए बंद रहेगी।पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सड़क रविवार तक बंद रहेगी और उस पर यातायात की अनुमति "आवश्यकतानुसार" ही दी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि रेड रोड पर यह अब तक का सबसे लंबा बंद रहेगा।“यह निर्णय लिया गया है कि 21 जून तक रेड रोड के दोनों किनारों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, यातायात की मात्रा के आधार पर एक किनारा खुला रखा जा सकता है,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। “जमीनी अधिकारी आवश्यकतानुसार निर्णय लेंगे।” सोमवार को राजभवन की ओर जाने वाली रेड रोड की एक तरफ को बंद कर दिया गया था और सड़क के बीचोंबीच एक विशाल चबूतरा बनाया गया था। वाहनों को दूसरी तरफ से, लेकिन राजभवन की ओर जाने की अनुमति दी गई थी। रेड रोड को इतने लंबे समय तक यातायात के लिए शायद ही कभी बंद किया गया हो। 23 से 29 मई, 2016 के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों के लिए इसे पांच दिनों तक बंद रखा गया था। इसे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस की परेड और ममता बनर्जी के दुर्गा पूजा उत्सव के लिए भी बंद किया गया था, लेकिन ये प्रतिबंध केवल कुछ घंटों या एक दिन तक ही चले। राज्य की भाजपा सरकार ने इससे पहले रेड रोड पर यातायात सुचारू रखने के महत्व पर जोर दिया था और मई में वहां ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी थी, बल्कि उसे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में स्थानांतरित कर दिया था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तब कहा था कि कोई भी धर्म कानून से ऊपर नहीं है।कई मार्गों से आने वाले वाहनों की भारी संख्या के कारण रेड रोड शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "एजेसी बोस रोड फ्लाईओवर, डीएल खान रोड, विद्यासागर सेतु और हेस्टिंग्स से काफी संख्या में वाहन रेड रोड के राजभवन की ओर जाने वाले हिस्से में प्रवेश करते हैं।" वैकल्पिक मार्ग की योजना तैयार कर ली गई है, लेकिन अगले सप्ताह यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।इस योजना के तहत, रेड रोड होते हुए राजभवन की ओर जाने वाले वाहनों को जेएन आइलैंड से आउट्राम रोड-जवाहरलाल नेहरू रोड चौराहे या डफरिन रोड-मेयो रोड क्रॉसिंग की ओर मोड़ दिया जाएगा। अलीपुर में जीरत ब्रिज से होकर आने वाली डलहौजी और हावड़ा जाने वाली बसें बेलवेडियर रोड और एजेसी बोस रोड के चौराहे से एजेसी बोस रोड, टर्फ व्यू रोड, एजेसी बोस रैंप और सेंट जॉर्ज गेट रोड-स्ट्रैंड रोड की ओर मोड़ दी जाएंगी ताकि वे आगे हावड़ा और डलहौजी की ओर जा सकें। रेड रोड के रास्ते जेके द्वीप की ओर जाने वाले वाहनों को रेड रोड-मेयो रोड चौराहे से मेयो रोड-डफरिन रोड के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा।  

प्रदूषण पर चंडीगढ़ का बड़ा कदम! 2×2 KM ग्रिड में मापा जाएगा कार्बन फुटप्रिंट, हॉटस्पॉट्स की होगी पहचान

चंडीगढ़ पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में चंडीगढ़ प्रशासन बड़ा कदम उठाने जा रहा है। शहर में पहली बार व्यापक और वैज्ञानिक कार्बन फुटप्रिंट एवं कार्बन स्टॉक असेसमेंट किया जाएगा। इस अध्ययन के जरिए यह पता लगाया जाएगा। प्रशासन पूरे शहर को 2×2 किलोमीटर के ग्रिड में बांटकर अध्ययन करेगा। हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी और जीआईएस मैपिंग के जरिए इलाकेवार प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की पहचान की जाएगी। इस आधार पर भविष्य की पर्यावरण और जलवायु संबंधी नीतियां तैयार की जाएंगी। 2030 तक क्लाइमेट प्लान तैयार:-     सात प्रमुख क्षेत्रों का होगा मूल्यांकन: अध्ययन के दौरान ऊर्जा खपत, परिवहन, भवन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर, कचरा प्रबंधन, उद्योग, कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही शहर के हरित क्षेत्रों की कार्बन अवशोषण क्षमता का भी वैज्ञानिक मूल्यांकन होगा।     पेड़ों के साथ मिट्टी और जड़ों का भी होगा सर्वे: अध्ययन में केवल पेड़ों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी जड़ों के बायोमास और मिट्टी में मौजूद ऑर्गेनिक कार्बन की भी गणना की जाएगी। शहर के लगभग 4,500 हेक्टेयर ग्रीन कवर, जिसमें 3,200 हेक्टेयर अधिसूचित वन क्षेत्र और 26 वर्ग किलोमीटर में फैली सुखना वाइल्डलाइफ सेंचुरी शामिल है, का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। सुखना सेंचुरी के लिए अलग से कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन डेटाबेस तैयार होगा।     2030 तक का तैयार होगा जलवायु रोडमैप: यह अध्ययन पिछले 5 से 10 वर्षों के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के रुझानों का विश्लेषण करेगा। इसके आधार पर 2030 और उससे आगे के लिए कार्बन उत्सर्जन का अनुमान लगाया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, साइकिलिंग और कचरा प्रबंधन से जुड़ी नई रणनीतियां तैयार की जाएंगी।     सौर ऊर्जा से हर साल बच रहे 57,960 टन CO₂: प्रशासन के अनुसार शहर में सरकारी गैर-आवासीय भवनों पर बड़े स्तर पर सोलर पैनल लगाए गए हैं।  वर्तमान में 377 सरकारी इमारतों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित है, जिससे हर वर्ष करीब 8.4 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है। इससे सालाना लगभग 57,960 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हो रहा है।     EV और साइकिलिंग से भी घटा कार्बन उत्सर्जन: चंडीगढ़ में पिछले पांच वर्षों के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में 16 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।  इससे वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है और कार्बन बचत 26 गुना तक बढ़ी है। वहीं, पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग सिस्टम के जरिए प्रतिवर्ष लगभग 36 हजार किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम हो रहा है, जो करीब 1,600 पेड़ लगाने के बराबर माना जाता है। 4 साल में कार्बन बचत में बड़ा उछाल प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में शहर की कुल कार्बन बचत करीब 5.65 किलोटन CO₂ समतुल्य थी, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर लगभग 150 किलोटन CO₂ समतुल्य पहुंच गई है। प्रशासन का मानना है कि नया वैज्ञानिक अध्ययन चंडीगढ़ को देश के अग्रणी लो-कार्बन शहरों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार : मुख्यमंत्री

चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना से छत्तीसगढ़ के विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी नई शक्ति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ₹755 करोड़ की परियोजना को मंजूरी देने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति जताया आभार डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार : मुख्यमंत्री मोदी सरकार के विशेष फोकस से छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को मिली नई ऊंचाई : रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से साकार हो रहा विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प – मुख्यमंत्री साय रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय रेल द्वारा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत ₹755 करोड़ की लागत से चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ के विकास, औद्योगिक प्रगति और देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में रेल अधोसंरचना का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे विकास को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि परियोजना के पूरा होने पर यात्री सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी तथा भविष्य में अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल सेवाएं प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरबा देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण पहचान रखता है और यहां से देश के विभिन्न हिस्सों तक कोयले की आपूर्ति होती है। चांपा-कोरबा रेल खंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) तथा महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस परियोजना के पूर्ण होने से कोयला परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक आधार और अधिक मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में  तीसरी रेल लाइन का निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया दूरदर्शी निर्णय है। इससे अतिरिक्त माल परिवहन को सुगम बनाया जा सकेगा और रेल परिचालन अधिक दक्ष एवं प्रभावी होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परियोजना केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से उद्योगों को मजबूती मिलेगी, निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार होगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे कोरबा, जांजगीर-चांपा सहित आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मजबूत रेल नेटवर्क, सुदृढ़ लॉजिस्टिक व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से छत्तीसगढ़ देश के विकास में और अधिक प्रभावी योगदान देने के लिए निरंतर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ को रेल अधोसंरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। प्रदेश के रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, तीसरी-चौथी लाइन और आधुनिक रेलवे स्टेशनों के विकास के माध्यम से कनेक्टिविटी को लगातार सशक्त किया जा रहा है। हाल ही में धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया जाना भी इसी विकास दृष्टि का प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में स्वीकृति मिलना जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुरांचल को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है। इससे पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल एवं शहरी परिवहन अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विकास पर 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। वर्ष 1853 से 2014 तक 161 वर्षों में छत्तीसगढ़ में लगभग 1100 रूट किलोमीटर रेल लाइन बिछाई गई थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में  प्रदेश का रेल नेटवर्क बढ़कर  2200 रूट किलोमीटर से अधिक होने जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रदेश की रेल परियोजनाओं के लिए जहां लगभग 300 करोड़ रुपये का बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये हो गया है। साथ ही प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों को 1,680 करोड़ रुपये की लागत से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

उज्जैन दौरे पर CM मोहन यादव, 207 करोड़ रुपए से ज्यादा के विकास कार्यों का करेंगे शुभारंभ

उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को उज्जैन जिले की झारड़ा तहसील में 188.42 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सामाकोटा बैराज का लोकार्पण करेंगे। छोटी कालीसिंध नदी पर बने इस बैराज से क्षेत्र के 18 गांवों के करीब 11 हजार से अधिक किसान परिवारों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। परियोजना की जल संग्रहण क्षमता 17.57 मिलियन घन मीटर है और इससे 7236 हेक्टेयर कृषि भूमि में पाइप लाइन पद्धति से सिंचाई हो सकेगी। सामाकोटा बैराज परियोजना से नलखेड़ा, पनोडिया, नीमखेड़ा, घट्टियाजस्सा, मेलाखेड़ी, खोरियापदमा, खेरला, लसूड़ियानहाटा, नागपुरा, छज्जुखेड़ी, देलाखेड़ी, डूंगरखेड़ी, खेड़ामद्दा, कसोन, महिदपुरिया, सोमचिड़ी और झारड़ा सहित कई गांवों के किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। मुख्यमंत्री इस दौरान 19 करोड़ रुपए से अधिक लागत के अन्य विकास कार्यों का भी लोकार्पण करेंगे। इनमें उच्च शिक्षा विभाग के 4.35 करोड़ रुपए लागत के महाविद्यालय भवन, लोक शिक्षण विभाग के तहत सेमलिया, महिदपुर रोड और कुंडीखेड़ा में कन्या स्कूल भवन, मोचीखेड़ा में 33/11 केवी उपकेंद्र तथा झारड़ा क्षेत्र के 13 उप स्वास्थ्य केंद्र भवन शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 207 करोड़ रुपए के विकास कार्य जनता को समर्पित किए जाएंगे।

मोहन सरकार का बड़ा ऐलान! मानसून सत्र में पेश होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार कॉमन सिविल कोड की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इसे पारित कराया जाए। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात की पुष्टि करते हुए बड़ा बयान दिया है। सीएम ने कहा कि इसी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जा रहा है और महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में यह प्रस्ताव पारित भी हो जाएगा। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस कानून को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। बता दें कि मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। विधानसभा में यूसीसी प्रस्ताव लाने को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह पूरे हिंदुस्तान की डिमांड है और यह कानून देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस कानून के लागू होने से जनसंख्या पर भी नियंत्रण लगेगा। उन्होंने आगे कहा कि देश के कई राज्यों ने इसे लागू करने की पहल की है और अब मध्य प्रदेश में भी इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। मध्य प्रदेश में यूसीसी कमेटी का गठन और प्रस्तावों की समय-सीमा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की व्यवहारिकता जांचने और इसका मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। मध्य प्रदेश सरकार के विधि और विधायी कार्य विभाग द्वारा इस 6 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी का गठन इसी वर्ष 27 अप्रैल को किया गया था। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जबकि समिति में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह को शामिल किया गया है। राज्य का दौरा कर लोगों से ली राय कमेटी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर समाज के सभी वर्गों से राय ली और आम नागरिकों के सुझाव ऑनलाइन दर्ज करने के लिए एक आधिकारिक वेब पोर्टल भी शुरू किया था। जनता और विभिन्न संगठनों से यूसीसी को लेकर प्रस्ताव और सुझाव लेने की अवधि 15 मई से शुरू होकर 15 जून तक तय की गई थी। हालांकि, अभी भी पब्लिक को एसएसएम भेजकर ऑनलाइन सुझाव मंगाए जा रहे हैं कमेटी को गठन के बाद 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया था। जनता के सुझावों और अलग-अलग वर्गों से संवाद के बाद अब इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी मानसून सत्र में इसे विधानसभा पटल पर रखकर पारित कराया जाए और इस साल दिवाली तक मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को पूरी तरह लागू कर दिया जाए। 20 जुलाई से शुरू होगा पांच दिवसीय मानसून सत्र मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही विधायकों द्वारा प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य संसदीय सूचनाएं देने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। सत्र का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट माना जा रहा है। सरकार अधोसंरचना विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों का प्रस्ताव सदन में रख सकती है। इससे विभिन्न विभागों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित स्वामित्व योजना भी इस सत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बन सकती है। सरकार इस योजना से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों में आवश्यक संशोधनों पर विचार कर रही है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।  इस पांच दिवसीय सत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों का संपादन किया जाएगा। सत्र के लिए अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं 24 जून 2026 तक तथा अशासकीय संकल्पों की सूचनाएं 9 जुलाई 2026 तक विधानसभा सचिवालय में प्रस्तुत की जा सकेंगी। वहीं, स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तथा नियम 267-क के अंतर्गत सूचनाएं 14 जुलाई 2026 से विधानसभा सचिवालय में प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 4 बजे तक प्राप्त की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का यह 11वां सत्र होगा।  सदन में यूसीसी को लेकर हो सकती है चर्चा  समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सत्र के दौरान चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति प्रदेशभर से सुझाव प्राप्त कर रही है। सुझावों के परीक्षण के बाद समिति अपना प्रारूप (ड्राफ्ट) सरकार को सौंपेगी। इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। हालांकि यूसीसी विधेयक इसी सत्र में आएगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। वहीं प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण को लेकर तैयार किए जा रहे मसौदे को भी सदन के समक्ष रखा जा सकता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बड़ी संख्या में नागरिकों को राहत मिलने की संभावना है।  वहीं, विपक्ष इस सत्र में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मुद्दे के साथ-साथ किसानों की समस्याओं, बिजली-पानी की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाने पर काम कर सकती है। दूसरी ओर सरकार अपनी विकास योजनाओं, निवेश, रोजगार सृजन और जनकल्याणकारी उपलब्धियों को सदन में प्रमुखता रखने की योजना बना सकती है। इस मानसून सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा, बहस और महत्वपूर्ण निर्णय देखने को मिल सकते हैं।    यूसीसी पर अंतिम तैयारी में सरकार प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति लगातार विभिन्न जिलों में जाकर लोगों और … Read more

मस्जिद से मदरसे तक प्रशासन की सख्ती, वाराणसी-गाजियाबाद-आगरा में क्या-क्या हुआ?

लखनऊ यूपी में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई मामले एक साथ चर्चा में हैं. कहीं मस्जिद को नोटिस मिला है, कहीं मदरसे पर बुलडोजर चला है, तो कहीं सड़क के बीच स्थित मजार को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है. वहीं बहराइच में हाईवे किनारे स्थित एक मस्जिद को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है. चारों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं. वाराणसी में रेलवे स्टेशन के विस्तार का मामला है, गाजियाबाद में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का आरोप है, आगरा में सड़क सुरक्षा और यातायात का मुद्दा सामने आया, जबकि बहराइच में प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक कार्रवाई रोकने का फैसला लिया है।  वाराणसी: काशी रेलवे स्टेशन के पास मस्जिद को मिला नोटिस न्यूज एजेंसी के मुताबिक सबसे ज्यादा चर्चा वाराणसी की हो रही है. यहां काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद पर रेलवे प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया है. नोटिस में संबंधित पक्षों को 20 जून तक परिसर खाली करने के लिए कहा गया है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कदम काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना के तहत उठाया गया है. स्टेशन का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाना है, जिसके लिए रेलवे अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है. स्टेशन अधीक्षक अर्पित गुप्ता के मुताबिक प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता है और इसी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया गया है।  कुछ दिन पहले भी हुई थी कार्रवाई गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस दिए जाने का मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर स्थित अजगैब शहीद मजार और एक मस्जिद को हटाया गया था. 3 जून को हुई इस कार्रवाई के पीछे भूमि स्वामित्व विवाद में न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया था. रेलवे अधिकारियों का कहना था कि पुनर्विकास परियोजना के लिए कराए गए सर्वे में संबंधित ढांचे रेलवे भूमि पर पाए गए थे. इसके बाद नोटिस जारी किए गए और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर कार्रवाई की गई।  गाजियाबाद: 30 साल पुराने मदरसे पर चला बुलडोजर उधर गाजियाबाद में प्रशासन ने कुशालिया गांव में स्थित एक मदरसे को ध्वस्त कर दिया. प्रशासन का दावा है कि यह मदरसा सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर बना हुआ था. कार्रवाई से पहले कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं. मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के तहत रैपिड रिस्पांस फोर्स (आरआरएफ) और चार थानों की पुलिस तैनात की गई थी. कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध या तनाव सामने नहीं आया. सदर एसडीएम अरुण दीक्षित के अनुसार यह मदरसा लगभग 30 वर्षों से संचालित हो रहा था. जिस भूमि पर यह बना था उसका क्षेत्रफल करीब 880 वर्ग मीटर था और उसकी बाजार कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. जांच में पाया गया कि भूमि राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ते और खाद निस्तारण स्थल के रूप में दर्ज थी. प्रशासन का कहना है कि अभिलेखों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण का फैसला लिया गया।  आगरा: बातचीत से निकला रास्ता, दूसरी जगह पहुंची मजार आगरा का मामला बाकी दोनों मामलों से कुछ अलग रहा. यहां प्रशासन ने किसी प्रकार का ध्वस्तीकरण नहीं किया, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला. आगरा कॉलेज के निकट व्यस्त एमजी रोड पर स्थित एक मजार को उसकी प्रबंधन समिति की सहमति से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया. प्रशासन का कहना है कि मजार सड़क के बीच स्थित थी, जिससे यातायात प्रभावित होता था और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी पैदा हो रही थीं. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हिमांशु गौरव के मुताबिक मजार प्रबंधन समिति के साथ कई दौर की बातचीत हुई. इसके बाद आपसी सहमति से मजार को वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया. पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई और कहीं किसी प्रकार का तनाव नहीं देखा गया. आगरा प्रशासन इस मॉडल को संवाद आधारित समाधान के तौर पर देख रहा है।  बहराइच: फिलहाल रुकी कार्रवाई वहीं बहराइच में स्थिति कुछ अलग है. यहां बहराइच-नेपाल राजमार्ग के किनारे स्थित एक मस्जिद को लेकर कार्रवाई की चर्चा जरूर हुई, लेकिन प्रशासन ने फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. मामला तब चर्चा में आया जब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पत्र में कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था. पत्र वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. मामले को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए कोई कार्रवाई नहीं होगी. उन्होंने कहा कि पहले संबंधित पक्षों को नोटिस दिया जाए, जमीन की पैमाइश कराई जाए और सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए. इसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा. प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। 

No Hug, Only Handshake! मोदी-ट्रंप की मुलाकात ने बटोरी सुर्खियां, समझिए भारत का कूटनीतिक मैसेज

नई दिल्ली आखिरकार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हो ही गई. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में अमेरिका में हुई थी. उस मुलाकात के 16 महीने बाद फ्रांस में G7 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई. इस मुलाकात में हैंडशेक भी हुआ, बातचीत भी हुई लेकिन Hug नहीं हुआ. यानी दोनों नेताओं के बीच पहले की तरह गर्मजोशी वाला हग नहीं दिखा. हैंडशेक और हग (गले लगना) के बीच पिछले 16 महीने के भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर संबंधों में आई खटास शायद सामने थी।  जी-7 के आउटरीच सत्र में जाने से पहले ग्रुप फोटो के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच में सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो खड़े थे लेकिन ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेता दो मिनट से अधिक वक्त तक एक दूसरे के आसपास रहे. हालांकि, न तो दोनों के बीच आई कॉन्टैक्ट हुआ और न ही दोनों एक दूसरे के तरफ बढ़ते हुए दिखे जबकि इस दौरान दोनों नेताओं की बाकी कई नेताओं के साथ बातचीत हुई।  पीएम मोदी के मन में क्या चल रहा था प्रधानमंत्री मोदी का रुख बहुत ही संतुलित दिखा और ट्रंप से मिलने की कोई बहुत उत्सुकता उन्होंने नहीं दिखाई. शायद पीएम के मन में हाल में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत से लेकर ट्रेड टैरिफ, भारत पाकिस्तान मध्यस्थता के दावे और दूसरे वो तमाम विषय रहे होंगे, जिससे भारत और अमेरिका के संबंध पिछले 20 वर्षों में सबसे कमजोर दौर से गुजरे हैं. पीएम मोदी ने इशारों में ट्रंप को मैसेज दे दिया।  कैसे दोनों की हुई मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी के G7 आउटरीच सत्र की शुरुआत से पहले के ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेताओं के बीच में कोई मुलाकात नहीं हुई. दोनों नेता जब आउटरीच सत्र में पहुंचे तो ट्रंप अपनी जगह ले चुके थे. दूसरी तरफ से अपनी सीट पर मोदी आ रहे थे. क्योंकि ट्रंप और मोदी का सत्र में बैठने का स्थान अगल बगल ही था, इसलिए पीएम मोदी की नजर ट्रंप पर पड़ी और दोनों के बीच हैंडशेक हुआ और संक्षिप्त बातचीत हुई. बातचीत कुछ ऐसी थी कि ट्रंप ने पीएम मोदी की बाजू थपथपाई…लेकिन दोनों की मुलाकात हैंडशेक और संक्षिप्त बातचीत तक ही रही।  मोदी ने पब्लिकली बर्थडे विश भी नहीं किया अभी तीन दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून को अपना 80वा जन्मदिन मनाया था. इस दौरान दुनिया के कई देशों के नेताओं ने ट्रंप को शुभकामनाएं भेजी लेकिन पीएम मोदी की तरफ से कोई सार्वजनिक बधाई संदेश सामने नहीं आया. खासकर ऐसी पृष्ठभूमि में जब पीएम मोदी के 75 साल पूरे होने और भारत में निर्वाचित पीएम का रिकॉर्ड बनाने पर ट्रंप ने मोदी को शुभकामनाएं दी थी।  पीएम मोदी स्टार्मर से मिले गले, ट्रंप से सिर्फ हैंडशेक जी-7 शिखर सम्मेलन में पहुंचते ही मैक्रों ने पीएम मोदी का ग्रैंड वेलकम किया. इसके बाद वो मीटिंग हॉल में पहुंचे, दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं से खचाखच भरे हॉल में पीएम मोदी और ट्रंप की सीट अगल-बगल थी. जिस पर बैठने से पहले औपचारिक तौर पर पीएम मोदी और ट्रंप ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, दोनों के बीच थोड़ी-बहुत बातचीत हुई. हालांकि, ये बातचीत काफी फॉर्मल दिखाई दी. दोनों पहले की तरह एक-दूसरे से गले नहीं मिले।  इसके बाद जब जी7 फैमिली फोटो के लिए सभी नेता लॉन में गए तो ऐसा मालूम हुआ कि पीएम मोदी ने ट्रंप से दूरी बना ली है. फ्रंट लाइन में एक तरफ ट्रंप और दूसरी तरफ पीएम मोदी नजर आए और दोनों के बीच में मैक्रों खड़े हुए. इस फोटो सेशन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पीएम मोदी से गले मिले, कई और नेता हाथ मिलाते, बात करते दिखे लेकिन ट्रंप से दूरी बनी रही।  मोदी के नो हग का मैसेज हालांकि, पिछले 16 महीने में दोनों नेताओं की फोन पर कई बार बात हुई है लेकिन भारत और पीएम मोदी ने ट्रंप और अमेरिका से अपनी कूटनीति को संतुलित रखा है. ट्रंप और मोदी की मंगलवार की द्विपक्षीय बातचीत से पहले मोदी ने कूटनीति को हैंडेशक तक ही ही सीमित रखकर शायद ये बताने की कोशिश की हो कि हैंडशेक से Hug तक पहुंचने में अब ट्रंप और अमेरिका को भारत की बहुत सारी भावनाओं का ध्यान रखना होगा. तब तक हेंडेशेक से ही काम चलेगा।  पीएम मोदी ने उन्‍हीं की भाषा में समझाया कैसे न‍िभाते हैं र‍िश्ते कहते हैं क‍ि क‍िसी को कोई बात समझ न आए, तो उसे उसकी भाषा में समझाना चाह‍िए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्‍कुल वही क‍िया. ज‍िस रोनाल्‍ड रीगन को डोनाल्‍ड ट्रंप अपना आइकॉन मानते हैं, ज‍िनका नारा Make America Great Again चुराकर वे सत्‍ता में आए हैं, उन्‍हीं की भाषा में पीएम मोदी ने समझाया क‍ि जो दुन‍ियाभर में जो आप कर रहे हैं, वो ठीक नहीं है. भारत का उदाहरण देकर बताया क‍ि दूसरे देशों के साथ र‍िश्ते कैसे न‍िभाते हैं।  मौका G7 सम‍िट का था. पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही ‘भरोसे में कमी’ से की. उन्‍होंने कहा- आज दुन‍िया इंटरकनेक्‍टेड है. एक दूसरे पर ड‍िपेंडेंट है. ऐसे में पार्टनरश‍िप का महत्‍व बढ़ जाता है. लेकिन ऐसी पार्टनरश‍िप तभी सफल होती है, जब उनके केंद्र में व‍िश्वास हो. यह भरोसा हो क‍ि सप्‍लाई चेन का इस्‍तेमाल हथ‍ियार के रूप में नहीं होगा. इसके बाद पीएम मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का उदाहरण द‍िया. उन्‍होंने कहा, रोनाल्‍ड रीगन कहते थे क‍ि Trust but Verify. यह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप ट्रस्‍टेड रूल बेस्‍ड ऑर्डर का न‍िर्माण करें. यह उस ट्रंप को सीधा जवाब था, जो क‍िसी रूल बेस्‍ड ऑर्डर को नहीं मानते. सप्‍लाई चेन को हथ‍ियार बना रहे हैं. कभी टैर‍िफ लगा द‍िया तो कभी धमकी दी, तेल लोगो को ये कर देंगे, वो कर देंगे।  भारत का उदाहरण देकर समझाया पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देकर दोस्‍ती के मायने समझाए. मोदी ने कहा, भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है. हमारे सभी प्रयास सर्वजन हिताय, सर्वजन … Read more

बस्तर में नक्सलियों का काल बने सुंदरराज पी को मिली नई जिम्मेदारी, NIA में बने IG

 नई दिल्ली केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लंबे समय तक नक्सल विरोधी अभियानों को लीड करने वाले सीनियर आईपीएस अफसर सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है. गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार को इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र जारी कर उनके प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) की जानकारी दी।  गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी सुंदरराज पी की नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद NIA में की गई है. मंत्रालय ने राज्य सरकार से उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने को कहा है, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।  बस्तर में लंबे समय तक की है सर्विस 46 वर्षीय सुंदरराज पी को बस्तर क्षेत्र में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले आईपीएस अधिकारियों में गिना जाता है. उन्होंने नक्सल हिंसा से प्रभावित बस्तर संभाग में करीब 12 वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. इनमें से लगभग सात वर्ष उन्होंने लगातार बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) या पुलिस प्रमुख के रूप में बिताए. बस्तर रेंज में दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात जिले शामिल हैं, जो लंबे समय तक देश में नक्सल हिंसा के सबसे बड़े केंद्र माने जाते रहे हैं।  कई नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की अपने कार्यकाल के दौरान सुंदरराज पी ने सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की. उन्होंने राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बीच तालमेल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बस्तर में नक्सल नेटवर्क को कमजोर करने और कई शीर्ष माओवादी नेताओं के खिलाफ सफल अभियानों में उनका योगदान अहम रहा।  पिछले कुछ वर्षों में जब भी सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियानों में बड़ी सफलता मिली या किसी अभियान में नुकसान हुआ, तब मीडिया से संवाद करने के लिए सुंदरराज पी ही प्रमुख चेहरा रहे. बस्तर में सुरक्षा स्थिति, अभियान और रणनीति से जुड़ी जानकारी अक्सर उन्हीं के माध्यम से साझा की जाती थी।  तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं सुंदरराज पी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने के लिए 31 मार्च तक का लक्ष्य तय किया था. अधिकारियों का मानना है कि इस दिशा में बस्तर क्षेत्र में मिली सफलताओं में सुंदरराज पी के नेतृत्व और रणनीतिक भूमिका का बड़ा योगदान रहा है. इसी कारण उनकी सेवाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है।  पीटीआई से बातचीत में एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि गृह मंत्रालय ने सुंदरराज पी को NIA में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए विशेष सिफारिश की है. अधिकारी के अनुसार, यह फैसला बस्तर में माओवादियों के खिलाफ अभियानों में उनके नेतृत्व, समर्पण और उत्कृष्ट कार्य के प्रति सम्मान स्वरूप लिया गया है।  तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले सुंदरराज पी ने कृषि विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया. अब NIA में IG के रूप में उनकी नियुक्ति को नक्सल विरोधी अभियानों में उनके अनुभव और विशेषज्ञता की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादी नेटवर्क और आतंकी गतिविधियों से निपटने के उनके व्यापक अनुभव का लाभ अब देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी NIA को भी मिलेगा।