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पंजाब में गर्मी से मिलेगी राहत! 19 जून से बारिश और तेज हवाओं के आसार, मानसून की एंट्री में देरी संभव

चंडीगढ़  पंजाब, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन तथा 18 जून से सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पंजाब में मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है।  मौसम विभाग ने 19 जून से अगले चार दिनों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग चंडीगढ़ केंद्र के निदेशक सुरिंदर पाल के अनुसार इस प्री-मानसून गतिविधि के चलते तापमान में चार डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह प्री-मानसून बारिश है और मानसून के आगमन को लेकर अभी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। मानसून की रफ्तार धीमी, पंजाब में देरी के संकेत मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद इसकी प्रगति बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी धीमी हो गई है। ऐसे में पंजाब में मानसून जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में पहुंच सकता है। पहले इसके 20 से 25 जून के बीच आने की संभावना जताई जा रही थी। 16 जिलों में अलर्ट, मंगलवार को गिरा पारा मंगलवार को कुछ क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण अधिकतम तापमान में 0.9 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और यह सामान्य से 2.2 डिग्री नीचे पहुंच गया। रूपनगर 37.2 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा। बुधवार के लिए अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, मोहाली, बठिंडा, मानसा समेत 16 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई है। 

इंदौरवासियों के लिए बड़ी सौगात, मेट्रो का सफर अब शहीद पार्क तक पहुंचने के करीब

इंदौर मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर मेट्रो के व्यावसायिक संचालन को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। सुपर कॉरिडोर से शहीद पार्क (मालवीय नगर) स्टेशन तक मेट्रो के कमर्शियल रन की तारीख पर आज फैसला हो सकता है। माना जा रहा है कि, एसीएस और मेट्रो परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी संजय दुबे के इंदौर दौरे के दौरान होने वाली बैठक में शुभारंभ की तारीख को अंतिम रूप दिया जा सकता है। मेट्रो प्रबंधन और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सुपर कॉरिडोर से मालवीय नगर स्टेशन तक के कॉरिडोर को पहले ही कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) की हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बाद उम्मीद थी कि, जून के मध्य में ही यात्रियों के लिए मेट्रो का संचालन शुरू हो जाएगा, लेकिन तारीख को लेकर लगातार असमंजस बना रहा। 20 जून को कमर्शियल रन की संभावना सूत्रों के मुताबिक, पहले 18 जून को कमर्शियल रन का प्रस्ताव निर्धारित था। बाद में संभावित राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तताओं को देखते हुए इसे आगे बढ़ाकर 20 जून करने पर विचार किया गया। अब एक बार फिर अंतिम तारीख को लेकर मंथन चल रहा है। हालांकि, मेट्रो अधिकारियों ने 20 जून को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। शासन स्तर पर होगी तारीख की घोषणा अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन, सुरक्षा व्यवस्था, परिचालन स्टाफ और यात्री सुविधाओं से जुड़े सभी इंतजाम तय समय सीमा के अनुसार किए जा रहे हैं। जैसे ही शासन स्तर से तारीख की औपचारिक घोषणा होगी, उद्घाटन कार्यक्रम और संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी। सुपर कॉरिडोर तक ही चल रहा संचालन अब आज होने वाली बैठक पर नजरें टिकी हैं। शहर की बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजना का पहला चरण सुपर कॉरिडोर पर टीसीएस चौराहा तक चल रहा है। आगे चलने से विजय नगर और मालवीय नगर क्षेत्र के यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा। 12 घंटे मिलेगी इंदौर में मेट्रो ट्रेन की सुविधा इंदौर में मेट्रो ट्रेन का 17 किलोमीटर हिस्से में संचालन 20 जून से होने जा रहा है। शहरवासियों को भी मेट्रो के संचालन का इंतजार है। हर दिन मेट्रो में 50 हजार से ज्यादा यात्री सफर कर सकेंगे। मेट्रो का संचालन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक 12 घंटे के लिए होगा और दिनभर में 50 से ज्यादा फेरे लगाए जाएंगे। सुपर कॉरिडोर से रेडिसन चौराहे तक के रूट के लिए अलग-अलग किराया रहेगा। न्यूनतम किराया 20 रुपये निर्धारित किया गया है। दूरी के अनुसार किराया भी बढ़ेगा। अधिकतम किराया 80 रुपये तक हो सकता है। गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक इतनी कीमत चुकानी होगी। पहले दो स्टेशनों तक 20 रुपये, जबकि अधिक दूरी के लिए 30, 40 रुपये और उससे अधिक का किराया होगा। 20 जून को केंद्रीय मंत्री मोहन लाल खट्टर और मुख्यमंत्री मोहन यादव मेट्रो के दूसरे चरण के संचालन का शुभारंभ करेंगे। यह होगा रूट अभी तक मेट्रो ट्रेन गांधी नगर डिपो से टीसीएस चौराहा तक जाती थी, लेकिन इस रूट पर काफी कम यात्री मिलते थे। अब मेट्रो गांधी नगर, एमआर-10 स्टेशन, चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा, बापट चौराहा, मेघदूत चौराहा, विजय नगर चौराहा और रेडिसन चौराहे के बीच चलेगी। यह दूरी 20 से 30 मिनट में तय होगी। मेट्रो ट्रेन के चलने से कॉलेज और आईटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि सुपर कॉरिडोर पर फिलहाल लोक परिवहन के ज्यादा विकल्प नहीं हैं। 80 की स्पीड से चलेगी मेट्रो ट्रेन 17 किलोमीटर लंबे रूट पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मेट्रो चलेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक आने में मेट्रो को 30 मिनट का समय लगेगा। ट्रेन छह स्टेशनों पर रुकेगी। पहले चरण में मेट्रो ट्रेन का संचालन खजराना चौराहा तक होगा। उसके बाद मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। उसका काम भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। साढ़े चार सौ यात्रियों की क्षमता 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेनों का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई हैं, जिन्हें यात्री पकड़कर सफर कर सकते हैं। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आंतरिक रूप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी। मेट्रो की खास बातें     मेट्रो की अधिकतम गति 80 किमी/घंटा होगी।     ट्रेनें छह स्टेशनों पर रुकेंगी।     सभी कोच अंदर और बाहर से CCTV कैमरों से लैस होंगे।     खड़े यात्रियों की सुविधा के लिए पोल पर चार-चार ग्रिप उपलब्ध होंगी।

अमेरिका-ईरान समझौते से टूटी नाकाबंदी, होर्मुज जलडमरूमध्य से बहने लगा ईरानी तेल

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जंग खत्म हो गई है और अमेरिका-ईरान में शांति समझौता हो गया है. इसके तहत जहां ईरान होर्मुज खोलने को राजी हो गया, तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की तेल गैस जरूरत को पूरा करने के लिए अहम इस जरूरी समुद्री रूट से अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी हटा दी. इसका असर भी देखने को मिल रहा है, करीब दो महीने की नाकाबंदी के बाद अब जहाजों में भरकर ईरानी कच्चा तेल निकलने लगा है।  4.8 मिलियन बैरल ईरानी तेल निकला टैंकरट्रैकर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी (NITC) के दो VLCC सुपरटैंकर – DIONA (9569695) और HERO2 (9362073) तेल लेकर निकले हैं और इनमें 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल भरा हुआ है. ये सुपरटैंकर अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी वाली सीमा से बाहर निकले हैं।  बता दें कि पिछले दो महीनों में यह ऐसा पहला एक्सपोर्ट है, जिसकी पुष्टि 15 जून, 2026 के AIS डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है. इसके बाद एक तीसरा स्वेजमैक्स (Suezmax) टैंकर 1 मिलियन बैरल तेल लेकर निकला।  एक टैंकर बढ़ रहा पाकिस्तान की ओर रिपोर्ट में पोस्ट किए गए मैप में ये तेल के जहाज और STREAM अरब सागर में ओमान की खाड़ी के पास दिखाई दे रहे हैं. ये उस नाकेबंदी वाली लाइन को पार कर रहे हैं जो अप्रैल 2026 में US-ईरान टकराव के दौरान बनाई गई थी।  मैप में ये भी देखा जा सकता है कि नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का STREAM (9569633) पाकिस्तान के EEZ से नाकेबंदी वाली लाइन की ओर बढ़ रहा है, जहां यह जहाज ईरान में प्रवेश करने के इंतजार में पिछले 7 हफ्तों से रुका हुआ था।  डील के बाद क्रैश हुआ कच्चा तेल  गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान में शांति समझौता होने से दुनिया ने राहत की सांस ली है. इसका सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल है, जो डोनाल्ड ट्रंप के इस समझौते वाली डील के ऐलान के बाद से लगातार क्रैश हो रहा है. लंबे समय तक 100-110 डॉलर के आसपास रहकर दुनिया के डराने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अब 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुकी है।  अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil Price 79.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो इसके तीन महीने का लो लेवल है. वहीं दूसरी ओर WTI Crude Oil Price 76.15 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. इसके अलावा मर्बन क्रूड का भाव भी 7 फीसदी से ज्यादा फिसलकर अब 71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. तेल सस्ता होने से महंगाई का जोखिम कम हुआ है।   

राखी के त्योहार पर ग्रहण की छाया, क्या बदलेगा रक्षाबंधन मनाने का तरीका?

इंदौर  रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार 28 अगस्त दिन शुक्रवार को सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा. लेकिन इस दिन साल 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है. यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होने वाला है. ऐसे में रक्षाबंधन के पर्व को लेकर लोगों के मन में बड़ा सवाल आ रहा है कि जब रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है तो क्या राखी बांधने को लेकर नियम और तिथि बदल जाएगी. ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान कई शुभ कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसकी मान्यता ग्रहण की दृश्यता पर भी निर्भर करती है. आइए जानते हैं रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण होने से क्या राखी बांधने में कोई बाधा आएगी… इस समय लगेगा चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 53 मिनट से होगी और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट को ग्रहण का समापन होगा. ग्रहण की कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट बताई जा रही है और यह एक गहरा आंशिक ग्रहण होगा. इस दौरान चंद्रमा का बड़ा पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा. इस दौरान चंद्रमा गहरा लाल या तांबे के रंग जैसा नजर आएगा, इसी वजह से इसे ब्लड मून भी कहा जाएगा. यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर में पूरी तरह दिखाई देने वाला है।  इस राशि और नक्षत्र में लग रहा है चंद्र ग्रहण ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होने वाला है. हालांकि, ग्रहण से जुड़े नियमों का पालन करने वाले कुछ लोग ग्रहण काल के दौरान भोजन ना करने, गर्भवती महिलाओं को घर पर रहने की सलाह, मंत्र जाप करने और भगवान का स्मरण करने जैसी परंपराओं का पालन करते हैं. लेकिन जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां इन नियमों को अनिवार्य नहीं माना जाता।  किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण ज्योतिषीय नजरिए से देखा जाए, तो यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में होगा, जिससे यह इस राशि के जातकों के लिए खास रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि ग्रहण का असल प्रभाव हर व्यक्ति की कुंडली के मुताबिक भिन्न होता है, जिसका मतलब है कि, इसका प्रभाव सार्वभौमिक नहीं है। रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव विशेषज्ञों के मुताबिक, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण का असर सिर्फ उन्हीं हिस्सों में पड़ता है, जहां इसे देखा जा सकता है। इसलिए ग्रहण के दौरान अशुभ माने जाने वाला सूतक काल भी भारत में लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि रक्षा बंधन बिना किसी बाधा के मनाया जा सकता है। बहनें अपने भाइयों को शुभ अवसर पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि भाद्र काल में राखी बांधने से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यह काल राखी के लिए काफी अशुभ माना जाता है। साल का दूसरा चंद्र कहां दिखाई देगा? साल का दूसरा चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत एवं अटलांटिक महासागरों के आसपास के हिस्सों में दिखाई दे सकता है। इन स्थानों पर दर्शक चंद्रमा को एक अलग रंग में देखेंगे, जिससे इस खगोलीय घटना का आकर्षण और भी बढ़ जाएगा। कुल मिलाकर इस साल रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का साया रहने वाला है, लेकिन भारत में यह नहीं दिखाई देगा इसलिए इसके नकारात्मक प्रभाव मान्य नहीं होंगे। इस तरह भाई-बहन का त्योहार खुलकर मनाया जा सकेगा। भारत में दिखाई नहीं देगा चंद्र ग्रहण ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस बार लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ऐसे में देश के अधिकांश हिस्सों में रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं माना जाएगा. बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी और पर्व की पारंपरिक रस्में सामान्य रूप से संपन्न की जा सकेंगी. चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. जानकारी के लिए बता दें कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।  श्रद्धालु अनावश्यक भ्रम से बचें रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, बिना किसी संशय के आप भाई-बहन के इस पावन पर्व को मनाएं. लेकिन भद्राकाल का ध्यान जरूर रखें क्योंकि भद्रा के समय राखी बांधना अशुभ माना जाता है. रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं, जबकि भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं. ऐसे में ग्रहण को लेकर फैली शंकाओं के बीच विद्वानों का कहना है कि श्रद्धालुओं को अनावश्यक भ्रम से बचना चाहिए। 

एथेनॉल फ्यूल से होगी बचत या बढ़ेगा खर्च? E85 और E100 का पूरा गणित समझें

नई दिल्ली  भारत में अब E85 पेट्रोल मिलना शुरू हो गया है. E85 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. फिलहाल यह कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है, जिनमें दिल्ली जैसे शहर भी शामिल हैं. सरकार का लक्ष्य अगले साल तक इसे देशभर के करीब 5,000 पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने का है. दिल्ली में जहां सामान्य पेट्रोल की कीमत करीब 102 रुपये प्रति लीटर है, वहीं E85 करीब 82 रुपये प्रति लीटर में बेचा जा रहा है. यानी इसकी कीमत लगभग 20 रुपये कम रखी गई है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि आज देश में मिलने वाले सामान्य पेट्रोल में भी लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल पहले से मिलाया जा रहा है, जिसे E20 कहा जाता है।  E20 पेट्रोल लगभग सभी पेट्रोल वाहनों के लिए उपलब्ध है, लेकिन E85 हर गाड़ी में नहीं डाला जा सकता. इसके लिए फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली कार या मोटरसाइकिल होना जरूरी है. ऐसी गाड़ियों की खासियत यह है कि इनमें E20, E85 या भविष्य में आने वाला E100 यानी 100 प्रतिशत एथेनॉल वाला ईंधन भी इस्तेमाल किया जा सकता है. भारत में अब फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली कारें और दोपहिया वाहन बाजार में आने लगे हैं. सरकार का उद्देश्य लोगों को धीरे धीरे ऐसे वाहनों की ओर प्रोत्साहित करना है ताकि पेट्रोल पर निर्भरता कम हो और देश का आयात बिल घट सके।  सरकार एथेनॉल को बढ़ावा क्यों दे रही है एथेनॉल का उत्पादन भारत में ही किया जाता है, जबकि कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है. अगर अधिक लोग एथेनॉल आधारित ईंधन अपनाते हैं तो देश को कम कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी. इसी सोच के तहत सरकार ने तेल कंपनियों से E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखने को कहा है।  क्या 20 रुपये सस्ता ईंधन सच में सस्ता साबित होगा पहली नजर में 20 रुपये प्रति लीटर कम कीमत काफी आकर्षक लगती है, लेकिन असली सवाल माइलेज का है. एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम होती है, इसलिए एक लीटर एथेनॉल पर गाड़ी उतनी दूरी तय नहीं कर पाती जितनी एक लीटर पेट्रोल पर करती है. यही वजह है कि केवल प्रति लीटर कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा. वास्तविक खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि गाड़ी एक लीटर ईंधन में कितने किलोमीटर चलती है।  ब्राजील का अनुभव क्या कहता है एथेनॉल आधारित परिवहन की बात करें तो ब्राजील दुनिया के सबसे पुराने और सफल उदाहरणों में शामिल है. वहां 1975 से एथेनॉल को बढ़ावा देने की नीति लागू है और 2003 के बाद फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का तेजी से विस्तार हुआ. आज वहां अधिकांश गाड़ियां ऐसी हैं जिनमें पेट्रोल और एथेनॉल दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।  ब्राजील में एक मशहूर सिद्धांत है जिसे 70 प्रतिशत नियम कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि एथेनॉल वाला ईंधन तभी आर्थिक रूप से फायदेमंद माना जाता है जब उसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की कीमत के लगभग 70 प्रतिशत या उससे कम हो, यानी करीब 30 प्रतिशत सस्ती हो. इसका कारण यह है कि वहां के अनुभव के अनुसार एथेनॉल पर माइलेज पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम मिलती है. अगर कोई गाड़ी एक लीटर शुद्ध पेट्रोल पर 10 किलोमीटर चलती है तो वही गाड़ी एक लीटर शुद्ध एथेनॉल पर लगभग 7 किलोमीटर चलती है।  भारत के E20 और E85 का गणित अगर मान लिया जाए कि कोई वाहन 100 प्रतिशत पेट्रोल पर 10 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है, तो E20 में मौजूद 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल के आधार पर उसकी अनुमानित माइलेज करीब 9.4 किलोमीटर प्रति लीटर बैठती है. इसी तरह E85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. उसी गणना के आधार पर इसकी अनुमानित माइलेज करीब 7.5 किलोमीटर प्रति लीटर हो सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि E20 की तुलना में E85 पर माइलेज लगभग 20 प्रतिशत कम हो सकती है. इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है।  क्या उपभोक्ता को फायदा होगा मौजूदा गणना के आधार पर ऐसा लगता है कि कम कीमत और कम माइलेज लगभग एक दूसरे को संतुलित कर देते हैं. यानी E85 इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता को कोई बड़ा अतिरिक्त आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन उसे कोई खास नुकसान भी नहीं होना चाहिए।  देश को हो सकता है बड़ा लाभ अगर बड़ी संख्या में लोग फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां अपनाते हैं और E85 या भविष्य में E100 जैसे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा देश को होगा. इससे पेट्रोल और कच्चे तेल के आयात में कमी आ सकती है, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और डॉलर पर निर्भरता घट सकती है. लंबे समय में इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की स्थिति को भी मजबूती मिल सकती है. कुल मिलाकर, मौजूदा आंकड़ों के आधार पर E85 उपभोक्ता के लिए कोई चमत्कारी बचत का साधन नहीं दिखता, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम जरूर साबित हो सकता है।   

मध्य प्रदेश में बन रहे 6 मेगा कॉरिडोर, जानिए आपके जिले को क्या होगा फायदा

 भोपाल  ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे।   मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश को रफ्तार देने वाले ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर कौन से हैं और इनसे प्रदेश को क्या लाभ होगा: 1. मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई: 450 किमी) मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए इस कॉरिडोर को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा। 2. विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई: 676 किमी) करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा। 3. बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई: 330 किमी) बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 330 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी। 4. अटल प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 299 किमी) चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे। 5. नर्मदा प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 867 किमी) नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर इस पूरी योजना का सबसे लंबा (867 किलोमीटर) हिस्सा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा। 6. मध्यभारत विकासपथ (कुल लंबाई: 746 किमी) यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।  

‘महा-भूकंप’ का खतरा? 1000 वर्षों से जमा हो रहा तनाव लॉस एंजेलिस के लिए बन सकता है चुनौती

 कैलिफोर्निया वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में चेतावनी दी है कि दक्षिणी कैलिफोर्निया की दो सबसे प्रमुख फॉल्ट लाइनों सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो  में पिछले 1000 सालों की तुलना में इस समय सबसे अधिक दबाव जमा हो चुका है. यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किए गए इस स्टडी ने भूकंपीय खतरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।  शोधकर्ताओं ने एक आधुनिक 'फिजिक्स-बेस्ड मॉडल' का उपयोग करके साल 1000 ईस्वी (CE) से लेकर वर्तमान समय तक इन फॉल्ट्स पर बढ़ते दबाव को ट्रैक किया है. इस स्टडी के परिणाम बताते हैं कि लॉस एंजेलिस और रिवरसाइड जैसे घने बसे हुए महानगरीय क्षेत्रों के नीचे जमीन के भीतर एक बहुत बड़ा खतरा पनप रहा है, जो कभी भी एक बड़े विनाशकारी भूकंप का रूप ले सकता है।  क्या है यह नया शोध और कैसे मापा गया दबाव? इस ऐतिहासिक शोध में वैज्ञानिकों ने पारंपरिक तरीकों से हटकर एक खास कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया है, जो पृथ्वी के भीतर होने वाली भौतिक हलचलों और टेक्टोनिक प्लेटों के दबाव को समझता है. इस मॉडल की मदद से पिछले एक हजार साल के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे यह पता चल सके कि समय के साथ इन फॉल्ट्स के अलग हिस्सों पर कितना दबाव बढ़ा या घटा है।  स्टडी में पाया गया कि सैन एंड्रियास फॉल्ट के 'मोजावे साउथ' हिस्से पर दबाव बढ़कर 2.8 मेगापास्कल (MPa) तक पहुंच गया है. वहीं दूसरी ओर, सैन जैसिंटो फॉल्ट की 'बरनार्डिनो स्ट्रैंड' पर यह दबाव और भी अधिक यानी 3.6 मेगापास्कल (MPa) दर्ज किया गया है।  वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 1000 वर्षों के इतिहास में इन दोनों जगहों पर दबाव का यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. यह दबाव इस बात का संकेत है कि धरती के नीचे की चट्टानें अब अपनी सहनशीलता की आखिरी सीमा पर हैं।  कजोन पास: महा-भूकंप का संभावित केंद्र इस पूरे शोध में सबसे चिंताजनक बात 'कजोन पास' को लेकर सामने आई है. कजोन पास वह भौगोलिक स्थान है जहां सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट्स एक-दूसरे के बेहद करीब आते हैं. वैज्ञानिक इस जगह को एक मुख्य 'जंक्शन' या संपर्क बिंदु मान रहे हैं।  कजोन पास के कारण दोनों फॉल्ट्स आपस में इस तरह जुड़ सकते हैं कि यदि किसी एक फॉल्ट पर भूकंप की शुरुआत होती है, तो उसका कंपन या दरार दूसरे फॉल्ट को भी सक्रिय कर देगी.अगर ऐसा होता है, तो यह कई दरारों का एक साथ टूटना होगा, जो इतिहास के किसी भी सामान्य भूकंप से कहीं ज्यादा बड़ा और विनाशकारी हो सकता है।  दो बड़ी फॉल्ट लाइनों के एक साथ मिलने से पैदा होने वाला भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.5 या उससे भी अधिक तीव्रता का हो सकता है, जिससे दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक बहुत बड़े हिस्से में भारी तबाही मच सकती है।  दशकों की शांति बढ़ा रही है बड़ा खतरा कैलिफोर्निया के इतिहास पर नजर डालें तो सैन एंड्रियास के मोजावे साउथ हिस्से में साल 1857 के बाद से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है. वहीं सैन जैसिंटो की बरनार्डिनो शाखा में आखिरी बार साल 1968 में हलचल देखी गई थी. पिछले कई दशकों या कहें तो सदियों की यह शांति वास्तव में कोई राहत की बात नहीं है, बल्कि यह एक बड़े खतरे की दस्तक है।  जब दो टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में रगड़ खाती हैं और उनके बीच की फॉल्ट लाइन हिलती नहीं है, तो वहां लगातार ऊर्जा और दबाव जमा होता रहता है. इसे सिस्मिक गैप कहा जाता है. चूंकि पिछले 150 से अधिक सालों से मोजावे साउथ सेगमेंट पूरी तरह शांत है, इसलिए वहां इतनी भारी मात्रा में दबाव जमा हो चुका है कि जब भी यह फॉल्ट टूटेगा, तो इससे निकलने वाली ऊर्जा अकल्पनीय होगी।  यह भविष्यवाणी नहीं, बल्कि तैयारी की चेतावनी है इस शोध की मुख्य लेखिका लिलियन बर्कहार्ड ने स्पष्ट किया है कि उनके इस स्टडी का उद्देश्य किसी निश्चित तारीख या समय पर भूकंप आने की भविष्यवाणी करना बिल्कुल नहीं है. वर्तमान विज्ञान के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो यह बता सके कि भूकंप ठीक किस दिन या किस समय आएगा।  बर्कहार्ड के अनुसार, इस रिसर्च का असली मकसद प्रशासन और आम जनता को आने वाले कल के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है. यह डेटा लॉस एंजेलिस, रिवरसाइड और सैन बर्नार्डिनो जैसे शहरों के लिए आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में बेहद मददगार साबित होगा।  इस जानकारी का उपयोग करके स्थानीय सरकारें अपने बिल्डिंग कोड को और सख्त बना सकती हैं, ताकि भविष्य में बनने वाली इमारतें इतने ऊंचे दबाव से पैदा होने वाले झटकों को झेल सकें. इसके अलावा, पुराने बुनियादी ढांचे, जैसे कि पुल, पानी की पाइपलाइनें और बिजली ग्रिड को मजबूत करने के लिए भी इस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

लुधियाना-हलवारा एयरपोर्ट की बढ़ी लोकप्रियता, 49% सीटें रहीं फुल; एयरलाइंस उत्साहित

लुधियाना लुधियाना के हलवारा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 15 मई से 10 जून तक का यात्री डेटा जारी किया है।  एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अनुसार, नए एयरपोर्ट के लिहाज से यह आंकड़ा संतोषजनक माना जा रहा है। यात्रियों के क्रेज से एयरलाइंस की उम्मीदें जगी हैं। इस एयरपोर्ट ने शुरुआती 26 दिनों यानि 15 मई से 10 जून तक उम्मीद से कई ज्यादा यात्री आए हैं। यात्रियों के क्रेज को देखते हुए कुछ दिन पहले एयर इंडिया ने लुधियाना से कनेक्टिंग फ्लाइट का शेड्यूल भी जारी किया था।     कुल उड़ानें और सीटें: हलवारा एयरपोर्ट से फिलहाल रोजाना औसतन 4 उड़ानें (आने और जाने वाली मिलाकर) संचालित हो रही हैं। हलवारा एयरपोर्ट पर उतरने वाले एयर इंडिया के जहाज में यात्रियों के लिए 138 सीटें हैं। इस लिहाज से हर दिन एयरपोर्ट पर कुल 552 सीटों (आने जाने की) की उपलब्धता रहती है। 26 दिनों के संचालन के दौरान एयरलाइंस के पास कुल 14352 सीटें उपलब्ध थीं।     सीटें बुक होने का प्रतिशत: इन 14352 उपलब्ध सीटों में से 7,008 यात्रियों ने सफर किया। इस हिसाब से पहले ही महीने में हलवारा एयरपोर्ट पर लगभग 49% सीटें बुक हुईं, जिसे एविएशन इंडस्ट्री में नए एयरपोर्ट के लिए एक बेहतरीन शुरुआत माना जाता है।     हर फ्लाइट में औसतन 68 यात्री कर रहे सफर: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के आंकड़ो की केलकुलेशन करें तो 26 दिनों में 4 उड़ानों के हिसाब से कुल 104 फ्लाइट्स ने टेकऑफ और लैंडिंग की। इसमें 7,008 यात्रियों ने सफर किया, यानी हर फ्लाइट में औसतन 67 से 68 यात्री सफर कर रहे हैं। इस तरह एक दिन में औसतन 272 यात्री फ्लाइट्स से आ जा रहे हैं।     समर वेकेशन में मिला उछाल: समर वेकेशन पर जाने वाले लोगों ने हलवारा एयरपोर्ट का खूब इस्तेमाल किया। हवाई अड्डे के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 10 जून के बीच 1,368 यात्री हलवारा हवाई अड्डे पर पहुंचे, जो प्रतिदिन औसतन लगभग 137 यात्री हैं। यह 15 मई से 31 मई के बीच की अवधि की तुलना में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।     1,921 यात्रियों ने हवाई अड्डे से यात्रा की: इसी तरह, 1 से 10 जून के दौरान प्रस्थान (जाने वाले यात्रियों) में 67 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई, जिसमें 1,921 यात्रियों ने हवाई अड्डे से यात्रा की, जो दैनिक औसतन लगभग 192 यात्री हैं। मई में, जब उड़ान संचालन शुरू हुआ था, प्रति दिन औसत आगमन 105 यात्री था जबकि औसत प्रस्थान 115 यात्री प्रति दिन था। एयर इंडिया इसे मान रही है बेहद पॉजिटिव साइन हलवारा से मुख्य रूप से उड़ानें संचालित कर रही एयर इंडिया और एयरपोर्ट अथॉरिटी इस रिस्पॉन्स से बेहद गदगद हैं। एयर इंडिया के सूत्रों के मुताबिक, किसी भी नए घरेलू या इंटरनेशनल रूट पर शुरुआती महीने में 49% की ऑक्यूपेंसी मिलना और हर फ्लाइट में औसतन 67+ यात्रियों का होना एक बेहद पॉजिटिव साइन है। बिजनेस ट्रैवलर्स व कॉर्पोरेट बुकिंग बढ़ने की उम्मीद लुधियाना पंजाब का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर (इंडस्ट्रियल हब) है। यहां के कारोबारियों और एनआरआई (NRI) को पहले दिल्ली या अमृतसर जाना पड़ता था। एयर इंडिया का मानना है कि आने वाले दिनों में जैसे ही बिजनेस ट्रैवलर्स और कॉर्पोरेट बुकिंग्स बढ़ेंगी, यह ऑक्यूपेंसी 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने की समीक्षा हाल ही में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी खुद दिल्ली से हवाई मार्ग से हलवारा पहुंचे और उन्होंने एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने इस शानदार शुरुआत के लिए टीम की तारीफ की।

Monsoon 2026 Update: मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक तय, कई जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर करवट ली है। IMD ने अगले 5 दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और उसके प्रभाव से प्रदेश में व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। MP में मानसून का इंतजार अब अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है। आईएमडी के अनुसार सोमवार को प्रदेश का वातावरण तेजी से मानसूनी स्वरूप ग्रहण कर रहा है। रात के तापमान में गिरावट, हवा में बढ़ती नमी और अधिकांश क्षेत्रों में हो रही बारिश संकेत है कि मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री कम है। राजगढ़, दमोह, शिवपुरी और ग्वालियर जैसे जिलों में भी रात का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे दर्ज हुआ। यह स्थिति बताती है कि बादलों और नमी की उपस्थिति के कारण वातावरण में शीतलता बनी हुई है। शिवपुरी में सबसे अधिक बारिश दर्ज पिछले 24 घंटों में शिवपुरी में 20.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक रही। इसके अलावा मालांजखंड, ग्वालियर, जबलपुर और गुना में भी बारिश रिकॉर्ड की गई। हालांकि वर्षा अभी पूरे प्रदेश में एक समान नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि वातावरण में पर्याप्त नमी और अस्थिरता मौजूद है।     अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं तेज हवाएं।     भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा समेत कई जिले अलर्ट पर।     ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में भी मौसम बदलेगा।     मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। प्रदेश के किन इलाकों में रहेगा ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार 16 से 20 जून के बीच भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और आसपास के जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। दिन-रात के तापमान में 2 से 5 डिग्री गिरावट बारिश की गतिविधियों के चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में मौसम सुहावना बना हुआ है। खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित होगी बारिश मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ दिनों तक समुद्री नमी का प्रवाह इसी तरह बना रहता है तो मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का तेजी से विस्तार हो सकता है। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की निगाहें अब उस पहली व्यापक मानसूनी बारिश पर टिकी हैं, जो गर्मी से राहत देने के साथ खरीफ फसलों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। मौसम विभाग की सलाह     खराब मौसम के दौरान पेड़ों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें।     बिजली चमकने पर खुले मैदान में न जाएं।     किसान फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करें।     तेज हवा और बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।

चार गुना मुआवजे और ऋण अदायगी की तिथि बढ़ाने के निर्णय प्रशंसनीय कृषकों ने माना मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर किसान कल्याण के निर्णयों के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों के कल्याण के कार्य निरंतर होंगे। अन्नदाता को सम्मान के साथ उन्हें अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से प्रतिनिधि मंडल ने गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश की उपलब्धि के लिए हर्ष व्यक्त करते हुए किसानों के लिए की गई बेहतर व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया। मध्यप्रदेश ने समर्थन मूल्य पर 13.42 लाख किसानों से 104.36 लाख मे.टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। किसान संख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत में प्रथम है। उपार्जन की दृष्टि से पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में 9अप्रैल से 28 मई की अवधि में उपार्जन किया गया। समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल के साथ ही 40रुपए बोनस राशि मिलाकर किसान को प्रति क्विंटल 2625 रुपए प्रति क्विंटल के भुगतान की व्यवस्था करवाई गई। किसानों को 27 हजार 196.48 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान प्रदेश में किया जा चुका है। किसानों ने ऋण अदायगी के लिए 31 मार्च की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 मई किए जाने और विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा देने का प्रावधान करने के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने कहा कि राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में लिए गए निर्णय प्रशंसनीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर किसानों ने कृषक हित से संबंधित कुछ सुझाव भी दिए। इनमें मूंग खरीद व्यवस्था और मूंग-उड़द के लिए पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण करवाने, नहरों को तालाबों से जोड़ने के सुझाव शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में  कमल सिंह आंजना,  चंद्रकांत गौर के साथ  सर्वज्ञ दीवान,  लक्ष्मी नारायण पटेल,  प्रह्लाद पटेल आदि शामिल थे।