samacharsecretary.com

मध्य प्रदेश पुलिस का नया आदेश: हर बड़े क्राइम में होगा सीन रिक्रिएशन, आरोपियों के बचने की राह बंद

भोपाल  मध्य प्रदेश में होने वाले अब हर बड़े अपराध की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस क्राइम सीन का रिक्रिएशन करती दिखाई देगी. अभी तक सिर्फ बड़े शहरों में और किसी बड़े मामले में ही पुलिस इस तरह के रिक्रिएशन करती थी, लेकिन अब हर गंभीर मामले में पुलिस को यह प्रक्रिया अपनानी होगी. मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए सभी जिलों में सीन ऑफ क्राइम यूनिट गठित करने के आदेश दिए हैं. एफएसएल ने इसके लिए एसओपी भी जारी की गई है. क्राइम ऑफ सीन बेहद महत्वपूर्ण एफएसएल के डायरेक्टर शशिकांत शुक्ला ने बताया कि "किसी भी अपराध में सीन ऑफ क्राइम बेहद अहम होता है. यहां अपराध से जुड़े तमाम सबूत होते हैं, इसके मदद से पुलिस को आरोपी तक पहुंचने और उसे कोर्ट से सजा दिलाने तक में काफी मदद मिलती है. खासतौर से पेचीदा मामलों में पुलिस को अपराधी तक पहुंचने में कई बार यहीं से महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगता है. जैसे किसी अपराध में घटनास्थल पर दरवाजे, अन्य किसी सामान या फिर हथियार पर मिलने वाले फिंगर प्रिंट की पहचान करनी होती है. इसी तरह डीएनए के लिए स्वैब के नमूने लेने होते हैं और अन्य सामान को पैकेजिंग करने के अलावा वहां के फोटोग्राफ और वीडियो लेने पड़ते हैं. इसके बाद एक डिटेल रिपोर्ट तैयार होती है. इसलिए करना होता है रिक्रिएशन वे बताते हैं कि कई मामलों में शुरूआती जांच में पुलिस के पास कोई सुराग नहीं होता. ऐसी स्थिति में मौजूदा साक्ष्यों और फोटोग्राफ आदि को देखने के बाद पूरी घटना का रिक्रिएशन किया जाता है. इससे घटना के तह तक पहुंचने में मदद मिलती है. यही वजह है कि अब हर जिले के पुलिस अधिकारियों और एफएसएल अधिकारियों को एसओपी भेजी गई है. इसमें भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत नए आपराधिक कानूनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए सीन ऑफ क्राइम यूनिट का गठन का निर्णय लिया गया है. इसके तहत सीन ऑफ क्राइम यूनिट को हर जिले में अलग स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा. इस यूनिट में फोटो यूनिट, फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट, डॉग स्क्वॉड की ज्वाइंट टीम होगी. विशेष तौर से 7 साल और उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में इस यूनिट को अनिवार्य रूप से घटनास्थल की जांच करनी होगी." सबूतों के अभाव में नहीं बचेंगे अपराधी रिटायर्ड डीजी अरुण गुर्टू सभी जिलों में सीन ऑफ क्राइम यूनिट गठित किए जाने के फैसले का स्वागत करते हैं. उनके मुताबिक बड़े अपराधों में यह होना ही चाहिए. इससे पुलिस जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगते हैं. खासतौर से ब्लाइंड मर्डर जैसे मामलों में पुलिस को घटनास्थल से मिलने वाले सबूत न सिर्फ अपराधी तक पहुंचने बल्कि कोर्ट में अपराधी से अपराध की कड़ी जोड़ने में काफी मदद मिलती है. बड़े मामलों में रिक्रिएशन होने से सजा दिलाने में मदद मिलेगी और सबूतों के अभाव में अपराधी बच नहीं पाएंगे. रिक्रिएशन से चला था पता कहां से आई थी गोली राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में अक्टूबर 2025 में गणेश उत्सव के दौरान एक झांकी में खेल रही बच्ची की गोली लगने से मौत हो गई थी. एक्स-रे रिपोर्ट से पता चला कि बच्ची की मौत गोली लगने से हुई. शुरूआती जांच में पुलिस को पता नहीं चल सका कि गोली किस दिशा से आई थी. बाद में पूरे घटनाक्रम का रिक्रिएशन किया गया और बारीकी से एनालिसिस किया गया तो पुलिस आरोपी तक पहुंच गई.

प्रदूषण पर सख्ती: दिल्ली-NCR में पारंपरिक वाहनों पर प्रतिबंध की संभावना, सुप्रीम कोर्ट का झुकाव ईवी की ओर

दिल्ली-NCR दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट लगातार चिंता जता रहा है। सरकार की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब बाजार में बड़े इलेक्ट्रिक वाहन (EV) आसानी से उपलब्ध हैं, इसलिए समान आकार के आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। कोर्ट ने सरकार को इस दिशा में ठोस नीति तैयार करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। अदालत पहले भी कई बार पेट्रोल-डीजल वाहनों के उपयोग पर सख्ती दिखा चुकी है, खासकर जब दिल्ली-एनसीआर में AQI लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि पेट्रोल-डीजल से चलने वाले महंगे लग्जरी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सरकार की EV खरीद और उपयोग को बढ़ावा देने वाली नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन की मांग की गई है। पीठ ने कहा कि अब बड़े आकार के इलेक्ट्रिक वाहन भी बाजार में उपलब्ध हैं, इसलिए सरकार धीरे-धीरे ऐसे ICE वाहनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकती है। अदालत ने साफ किया कि बढ़ते प्रदूषण के बीच EV को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। कई VIP और बड़ी कंपनियां कर रहीं EV का इस्तेमाल न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ मामलों से जुड़े अनुभवों के आधार पर यह विचार सामने आया है कि अब इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में भी बड़ी और प्रीमियम श्रेणी की कारें बाजार में उपलब्ध हैं। ये वाहन उतनी ही सुविधाजनक हैं जितनी कि परंपरागत ईंधन पर चलने वाली लग्जरी गाड़ियां, जिनका उपयोग कई VIP और बड़ी कंपनियों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा, “मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता क्योंकि इससे कोई पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है। लेकिन शुरुआत में महंगे वाहनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा सकता है। इससे आम आदमी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश की आबादी का बहुत छोटा हिस्सा ही ऐसे वाहनों को खरीदने में सक्षम है।” EV नीति की फिर से समीक्षा की जरूरत न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी संकेत दिया कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति की दोबारा समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है। अदालत ने कहा कि इस नीति को लागू हुए पाँच साल हो चुके हैं, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसे पुनः परखा जाना चाहिए। सुनवाई के अंत में अटॉर्नी जनरल ने पीठ को सूचित किया कि अब तक जारी की गई अधिसूचनाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। कोर्ट के सुझाव से सरकार सहमत अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव से सहमति जताते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के संबंध में अभी भी कई महत्वपूर्ण कार्य बाकी हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के भीतर इस विषय पर कई बैठकों का आयोजन हो चुका है, और अब इसे गहनता से देखा जाना चाहिए। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर विस्तार से विचार करके EV नीति की सम्पूर्ण रूपरेखा तैयार की जाएगी।

US से आ रही है बड़ी डील: सीनियर अधिकारी के मुताबिक बातचीत में कई पॉजिटिव डेवलपमेंट

नई दिल्‍ली भारत और संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका में व्‍यापार डील जल्‍द होने जा रही है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने संकेत दिया है कि भारत के साथ लंबे समय से पेंडिंग व्‍यापार समझौते पर बातचीत तेजी से बढ़ी है. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के बीच हालिया चर्चा में काफी पॉजिटिव डेवलपमेंट हुए हैं.  अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीद पर अपने पहले के टकराव वाले रुख से पीछे हटते हुए, महीनों के टकराव और रुकी हुई वार्ता के बाद व्यापार पर रचनात्मक रूप से जुड़ने की इच्छा का संकेत दिया है.  गुरुवार को सीनियर अधिकारी ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ दो 2 समानांतर मुद्दों पर काम कर रहा है. पहला- एक पारस्‍परिक व्‍यापार समझौता और दूसरा- भारत द्वारा रूसी तेल के आयात पर जारी चिंताएं. ANI के मुताबिक, सीनियर अधिकारी ने कहा कि मुझे लगता है कि अमेरिका के साथ हमारी कई साकारात्‍मक तेजी हुई है. उनके साथ हमारी दो बातें चल रही हैं. बेशक हम एक पारस्‍परिक व्‍यापार वार्ता कर रहे हैं, लेकिन रूसी तेल का मुद्दा भी हमारे सामने है, जिसपर हमने बाजार में सुधार देखा है. अभी डील को लेकर बहुत काम बाकी अधिकारी ने आगे कहा कि चर्चाओं से साल के अंत से पहले नतीजे मिल सकते हैं, हालांकि अभी बहुत काम बाकी है. उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि हम थोड़ा आराम कर सकते हैं, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है. पारस्‍परि व्‍यापार समझौते से टैरिफ में संतुलन स्‍थापित होगा और दोनों अर्थव्‍यवस्थाओं के बीच बाजार पहुंच बढ़ेगा.  अमेरिका और  भारत के बीच डील से सुलझेंगे ये मसले अधिकारी ने कहा कि इस डील से अमेरिकी एग्रीकल्‍चर और इंडस्‍ट्रीज वस्‍तुओं पर टैरिफ, भारत के लिए बड़ा व्‍यापार मार्केट और अमेरिका में भारतीय कारोबारियों के लिए अधिक पहुंच संबंधी कई समाधान होंगे. ध्‍यान देने वाली बात है कि यह खबर ऐसे समय में आई है, जब व्हाइट हाउस ने चार लैटिन अमेरिकी देशों – अर्जेंटीना, अल सल्वाडोर, इक्वाडोर और ग्वाटेमाला के साथ शुरुआती व्‍यापार समझौतों का ऐलान किया है. यह अमेरिका में उपलब्‍ध न होने वाली वस्‍तुओं पर टैरिफ में की की पेशकश करेंगे.  कई अन्‍य देशों से भी व्यापार को लेकर पॉजिटिव बातचीत अधिकारी ने वियतनाम, इंडोनेशिया और स्विट्ज़रलैंड के साथ हाल के सहयोग का भी जिक्र किया, जो व्यापक बहुपक्षीय व्यापार ढांचों के बजाय लक्षित समझौतों की ओर बदलाव का संकेत देता है. अधिकारी ने कहा कि हम कई क्षेत्रों में काफी पॉजिटिव बातचीत कर रहे हैं. नए दूत गोर व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाएंगे यह नई गति तब आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी सर्जियो गोर ने भारत में नए राजदूत का पदभार संभाला है. सोमवार को गोर के शपथ ग्रहण समारोह में ट्रंप ने संकेत दिया कि भारतीय आयातों पर टैरिफ में कटौती आगामी व्यापार सफलता का हिस्सा हो सकती है. ट्रंप ने कहा कि हम ऐसी चीज के बहुत करीब हैं जो वास्तविक अंतर ला सकती है.   

जनजातीय गौरव दिवस: स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने नायक को किया नमन

• कैलाश विजयवर्गीय भोपाल 15 नवंबर को पूरा देश जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। मध्यप्रदेश, जहां देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है, इस दिवस को और भी गौरवपूर्ण तरीके से मना रहा है। यह सिर्फ उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत आदिवासी नायकों के अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष को याद करने का अवसर है, जिन्हें स्वतंत्रता इतिहास में वह स्थान लंबे समय तक नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। बिरसा मुंडा: जिनका संघर्ष समय से आगे था बिरसा मुंडा एक ऐसे जननायक थे, जिन्होंने भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और गांधी जी से भी बहुत पहले अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष का प्रारंभ किया। भारत में जब संगठित स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तब झारखंड के दूरस्थ इलाकों और जंगलों में—जहां संचार के साधन नगण्य थे—उन्होंने आदिवासियों को संगठित किया और अंग्रेजी शासन को खुली चुनौती दी। आदिवासी समाज उन्हें ‘धरती आबा’ यानी धरती पिता की उपाधि से सम्मानित करता है। उन्होंने “अबुआ राज एते जाना, महारानी राज टुंडू जाना” का नारा देकर स्वराज की अवधारणा को जंगलों, घाटियों और गांवों तक पहुंचाया। वर्ष 1900 में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में आंदोलन के तेज फैलाव से घबराकर, तत्कालीन जिला मैजिस्ट्रेट ने पुलिस और सेना बुलवाई और डोंबिवाड़ी हिल पर हो रही सभा पर गोलीबारी करवा दी, जिसमें लगभग 400 लोग मारे गए। यह घटना 19 साल बाद हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के समान थी, परंतु इस घटना को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया। बिरसा मुंडा को पकड़ने के बाद अंग्रेजों ने निर्णय लिया कि उन्हें बेड़ियों में जकड़कर अदालत ले जाया जाए ताकि आमजन को पता चले कि अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत करने का क्या नतीजा होता है। परंतु यह दांव उल्टा पड़ गया—बिरसा को देखने के लिए रोड के दोनों ओर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए। उन्हें तीन माह तक सोलिटरी कन्फाइनमेंट में रखा गया और यह भी कहा जाता है कि उन्हें स्लोपॉयज़न दिया गया। अंततः मात्र 25 वर्ष की आयु में वो शहीद हो गए। आदिवासी वीर: जिन्हें इतिहास ने कम याद किया अंग्रेजों ने भारत में अपनी जड़ें मजबूत करते ही यहां की प्राकृतिक संपदा, विशेषकर वन संपदा के दोहन की राह पकड़ी। जो आदिवासियों के साथ संघर्ष का कारण बना। 1857 की क्रांति से लगभग 25 साल पहले,शहीद बुधु भगतने छोटा नागपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के जल, जमीन और वनों पर कब्जे की नीति के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजाया। इसे लकड़ा विद्रोह के नाम से जाना जाता है। वीर बुधु भगत का विद्रोह इतना तीव्र था कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनके नाम पर उस समय 1000 रुपये का इनाम रखा था। सिदू और कान्हू मुर्मूने वर्ष 1855–56 में संथाल विद्रोह / हूल आंदोलन का नेतृत्व किया। जून 1855 में भोगनाडीह में 400 गांवों के 50,000 संथालों की सभा हुई, जिसमें संथाल विद्रोह की शुरुआत हुई। इसका नारा था—“करो या मारो… अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो।” अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों का सामना संथालों ने तीर-कमान से किया। कार्ल मार्क्स ने “ नोट्स ऑन इंडियन हिस्ट्री” में संथाल क्रांति को भारत की पहली जनक्रांति कहा। मध्यप्रदेश के निमाड़ का नाम आते ही टांट्या मामा या टांट्या भील का स्मरण होता है। उन्हें निमाड़ का शेर कहा जाता हे वे लगभग पोने 7 फीट ऊंचे, तेजस्वी व्यक्तित्व वाले योद्धा थे। वे अंग्रेजों से लूटा धन और अनाज गरीबों तक पहुंचाते थे। उन्हें ‘भारत का रॉबिन हुड’ कहा जाता था। उनका आतंक अंग्रेजों की छावनियों तक फैला रहता था, जहां अतिरिक्त सुरक्षा इसलिए रहती थी कि “कहीं टांट्या न आ जाए।” अंततः अंग्रेजों ने छल से उन्हें पकड़ा, जबलपुर में फांसी दी और उनका शव पातालपानी क्षेत्र में लाकर रख दिया, ताकि आम लोगों को पता चले कि अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने का क्या नतीजा होता है। उनके पकड़े जाने की खबर अंतर्राष्ट्रीय अखबारों में, विशेषकर अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स समाचार पत्र में नवंबर 1889, में छापी। आप सोच सकते हे कि निमाड़/मालवा के छोटे से क्षेत्र में रहने वाले इस जननायक ने भारत में अंग्रेजों की कितनी नाक में दम कर रखी होगी कि उसके बारे में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया बात कर रहा था। इसी तरह राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह भारत के पहले ऐसे रजवाड़े थे जिन्हें वर्ष 1857 की क्रांति को कुचलने की कड़ी में अंग्रेजों द्वारा तोप के मुंह से बांधकर उड़ाया गया। न्याय आयोग, जिसके सामने उन्हें पेश किया गया था, ने उनके सामने जान बचाने के लिए धर्मांतरण सहित कई विकल्प रखे, दोनों ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें जबलपुर में “ब्लोइंग फ्रॉम ए गन” की सजा दी गई। बड़वानी क्षेत्र के भीमा नायकभीलों के योद्धा थे, जिन्होंने वर्ष 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। शहीद भीमा नायक का कार्य क्षेत्र बड़वानी रियासत से महाराष्ट्र के खानदेश तक फैला था। उन्हें आदिवासियों का पहला योद्धा माना जाता है, जिसे अंडमान के ‘काला पानी’ में फांसी दी गई। वर्ष 1857 के संग्राम के समय अंबापावनी युद्ध में भीमा नायक की महत्वपूर्ण भूमिका थी। कहा जाता है कि जब तात्या टोपे निमाड़ आए थे, तो उनकी भेंट भीमा नायक से हुई थी और भीमा नायक ने उन्हें नर्मदा पार करने में सहयोग दिया था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को लोहे के चने चबवाने वाले पचमढ़ी के आदिवासी राजा भभूत सिंह नर्मदांचल के शिवाजी कहलाते थे। जंगलों में रहकर अंग्रेजों को तीन साल तक परेशान करने वाले राजा भभूत सिंह गोरिल्ला युद्ध के साथ-साथ मधुमक्खी के छत्ते से हमला करने में भी माहिर थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तात्या टोपे की मदद भी की थी। मढ़ई और पचमढ़ी के बीच घने जंगलों में आज भी भभूत सिंह के किले का द्वार और लोहारों की भट्टियां मौजूद हैं, जिससे पता चलता है कि वे न केवल किला बनाकर लड़ रहे थे, बल्कि बड़े पैमाने पर हथियार बनाने की क्षमता भी रखते थे। आदिवासी संघर्ष: स्वतंत्रता की रीढ़ भारतीय इतिहास में आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। चाहे कोल क्रांति हो, उलगुलान हो, संथाल क्रांति हो, महाराणा प्रताप के साथ देने वाले वीर आदिवासी योद्धा हों या सह्याद्री के घने जंगलों में छत्रपति शिवाजी महाराज को ताकत … Read more

मध्य प्रदेश में फ्री राशन घोटाला: 1.41 लाख लखपति उठा रहे गरीबों का हक

बुरहानपुर  मध्य प्रदेश में मुफ्त राशन योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. मुफ्त राशन योजना के तहत मध्य प्रदेश में 12 लाख ऐसे हितग्राही हैं जो मर चुके हैं. लेकिन विभाग उनको हर महीने पीडीएस का राशन दे रहा है. और जो वाकई में गरीब हैं वह राशन योजना से वंचित हैं. वहीं मध्य प्रदेश में 5 करोड़ से अधिक हितग्राही पीडीएस का राशन ले रहे थे. अब इनकी ई-केवायसी कराई जा रही है. जो बीपीएल कार्ड के लिए पात्र नहीं हैं, उनके नाम काटे जा रहे हैं. 141,000 से ज्यादा अमीर लोग खा रहे गरीबों का हक खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारी जारी सूची के मुताबिक, पूरे मध्य प्रदेश में 1 लाख 41 हजार 249 लखपति लोग फ्री राशन का लाभ उठा रहे थे. अब नोटिस के बाद 37 हजार 484 अपात्र लोगों के नाम हटा दिए हैं. बात की जाए बुरहानपुर जिले की तो यहां केंद्र सरकार ने खाद्य आपूर्ति विभाग को 1297 अमीर हितग्राहियों की सूची भेजी है. साथ ही पोर्टल डेटा से मिली सूचना ने बुरहानपुर जिले में चल रही गरीब कल्याण योजना की असलियत उजागर कर दी है. चौंकाने वाली बात यह है कि 10 से 20 लाख रुपये की संपत्ति रखने वाले लोग भी बीपीएल राशन कार्ड पर मुफ्त अनाज उठा रहे थे. 1297 लोगों को नोटिस जारी किए खाद्य आपूर्ति विभाग ने बुरहानपुर में 1297 लोगों को नोटिस जारी किए थे, उनसे जवाब मांगा गया था, लेकिन 282 बीपीएल कार्ड धारकों ने ही अब तक जवाब पेश किया है. फिलहाल विभाग ने 1015 लोगों के नाम हटा दिए हैं. हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इनके लोगों के भी नाम हटा दिए जाएंगे. जांच में सामने आया है कि पेटेंट से बंद किए गए 1297 कार्डधारियों के पास लाखों की संपत्ति, पक्के मकान, जमीन-जायदाद और आय के बेहतर स्रोत मौजूद हैं. कंपनी के डायरेक्टर ले रहे गरीबों का राशन इनमें से कई दुकानदार, व्यापारी और कंपनी के डायरेक्टर हैं, जो अच्छी खासी संपत्ति के मालिक हैं, फिर भी ये खुद को गरीब बताकर सरकारी खजाने पर बोझ बने हुए थे. विभाग ने 1015 के बीपीएल परिवारों की सूची से बेदखल कर दिया है. शेष ने नोटिस का जवाब दिया है, लेकिन इन्हें भी बेदखल कर दिया जाएगा, क्योंकि यह भी टेक्स भुगतान करते हैं, बावजूद इसके योजनाओं का लाभ और फ्री राशन के लिए गरीब बनकर लाभ उठा रहे थे. 282 लोगों ने स्वीकार की गलती विभाग की कार्रवाई के बाद 1297 में से केवल 282 लोगों ने अपनी गलती स्वीकार की है. इसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने 1015 लोगों की पात्रता पत्री सरेंडर कराई है, बाकी कार्डधारी अभी भी अपने को सही ठहराने की कोशिश में लगे हैं. सूत्रों के अनुसार, इन लोगों ने गलत जानकारी देकर बीपीएल कार्ड बनवा लिए थे, आधार डेटा और सरकारी योजनाओं की लापरवाही का फायदा उठाकर सालों से मुफ्त राशन और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे. बुरहानपुर की खाद्य आपूर्ति अधिकारी अर्चना नागपुरे ने बताया, ''केंद्र सरकार ने ऐसे लोगों की सूची दी है जिनकी आय 6 लाख से ज्यादा होने पर भी उनके द्वारा फ्री राशन का लाभ लिया जा रहा था. शासन ने ऐसे लोगों की जांच करने के निर्देश दिए थे. अधिकतर उनमें अपात्र हैं, जिन्होंने इनकम टैक्स भरा. ऐसे लोगों को 15 दिन का टाइम दिया था. इनमें से 282 लोगों ने ही गलती स्वीकार की है. अभी तक हमने 1015 लोगों को पोस्टल से हटा दिया है.'' खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब ऐसे सभी फर्जी लाभार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. दुकानदारों और कंपनियों के डेटाबेस की भी जांच शुरू कर दी गई है, सरकारी योजनाओं का लाभ अब केवल वास्तविक पात्र लोगों को ही मिलेगा.

CM परिवार का बड़ा आयोजन: सामूहिक विवाह सम्मेलन में बेटे-बहू के फेरे, खास मेहमानों को निमंत्रण

उज्जैन  ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव फिर चर्चा में हैं. वजह है उनके छोटे बेटे की शादी. वे सादगी का संदेश देने के लिए बेटे की शादी को भव्य आयोजन की बजाय सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल कर रहे हैं. शादी 30 नवंबर को उज्जैन में होगी. दूल्हा हैं डॉ. अभिमन्यु यादव, जो सीएम के छोटे बेटे हैं. वे अभी सर्जरी में मास्टर्स कर रहे हैं और सामाजिक कामों में भी सक्रिय रहते हैं. दुल्हन हैं खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी डॉ. इशिता यादव. इशिता ने एमबीबीएस पूरा कर लिया है और अब पीजी की पढ़ाई कर रही हैं. खास बात यह है कि इशिता, सीएम की बड़ी बेटी डॉ. आकांक्षा की ननद भी हैं. यानी दोनों परिवार पहले से रिश्तेदार हैं. शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं होगी सीएम मोहन यादव ने खुद ट्वीट करके बताया कि शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं, बल्कि उज्जैन के होटल अथर्व में होगी. इसमें सिर्फ सीमित मेहमानों को बुलाया जाएगा. दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, बड़े अधिकारी और भाजपा के प्रमुख नेता शामिल होंगे.यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं होगा. इसमें पारंपरिक रस्मों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों की भी पहल होगी. जैसे गरीब कन्याओं की मदद या अन्य समाजसेवा के काम. इससे सामाजिक समरसता का संदेश जाएगा. अभिमन्यु-इशिता की शादी की कुछ रस्में उज्जैन स्थित सीएम हाउस जबकि कुछ अथर्व होटल में होंगी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की शादी खरगोन की डॉ. इशिता से सामूहिक विवाह समारोह में होगी। करीब 5 दिन तक चलने वाले कार्यक्रम के लिए उज्जैन में दो होटल बुक किए गए हैं। कुछ रस्में उज्जैन स्थित सीएम हाउस में ही होंगे।  अभिमन्यु-इशिता के फेरे 30 नवंबर को अथर्व होटल के पास मैदान में हो रहे सामूहिक सम्मेलन में होंगे। रिसेप्शन अथर्व होटल में होगा।परिवार से जुड़े सूत्रों की मानें तो नवंबर महीने की 30 तारीख को उज्जैन में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में सीएम यादव के छोटे बेटे डॉक्टर अभिमन्यु यादव खरगोन की रहने वाली डॉक्टर इशिता यादव के साथ शादी के बंधन में बंधेंगे. इस सम्मेलन में करीब 21 जोड़े शादी करेंगे, जिनमें से एक मुख्यमंत्री के बेटे और बहू हो सकते हैं.  शादी समारोह में प्रदेश के कुछ खास लोगों को ही आमंत्रित किया गया है। इसमें दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, वरिष्ठ अफसर और भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव के 26 नवंबर को ही उज्जैन पहुंचने की संभावना है। यह पहला मौका होगा, जब किसी मुख्यमंत्री के बेटे के फेरे की रस्में सामूहिक विवाह समारोह में पूरी होंगी। इसमें डॉ. अभिमन्यु और डॉ. इशिता के अलावा 20 अन्य जोड़ों की शादी होगी। दोनों परिवारों की बेटियां एक-दूसरे के घर की बहू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की सगाई करीब 5 महीने पहले खरगोन के किसान दिनेश पटेल की बेटी डॉ. इशिता से हुई है। अभिमन्‍यु भोपाल के एलएनसीटी मेडिकल कॉलेज से मास्‍टर्स इन सर्जरी कर रहे हैं। वे सेकेंड ईयर में हैं। डॉ. इशिता भी एमबीबीएस के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं। सीएम की बेटी डॉ. आकांक्षा यादव, दिनेश यादव की बहू हैं। अब दिनेश यादव की बेटी इशिता डॉ. मोहन यादव के परिवार की बहू बनने जा रही हैं।एक और खास बात ये है कि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, दिनेश यादव के मामा के बेटे हैं। यानी एमपी के पूर्व डिप्टी सीएम स्वर्गीय सुभाष यादव दिनेश यादव के मामा थे। सीएम ने शेयर की थी सगाई की फोटो सीएम डॉ. मोहन यादव और सीमा यादव के दो बेटे और ए‍क बेटी हैं। बड़े बेटे और बेटी की शादी पहले ही हो चुकी है।सीएम ने बेटे की सगाई की फोटो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर करते हुए लिखा था- बाबा श्री महाकाल और श्री गोपाल कृष्ण की परम कृपा, पूज्य पिता और माताश्री के आशीर्वाद से पुत्र चिरंजीवी डॉ. अभिमन्यु यादव की सगाई, खरगोन के दिनेश यादव जी की सुपुत्री डॉ. इशिता यादव के साथ संपन्न हुई।

NDA की जीत के बाद जनता की नजर इन 10 बड़े वादों पर, जिन्हें पूरा करना जरूरी

पटना /नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव के दो चरणों में हुए मतदान के बाद अब मतगणना हो रही है. अभी तक के रुझानों में एनडीए ने बढ़त बनाए रखते हुए 199 सीटें बरकरार रखी हैं. वहीं विरोधी महागठबंधन 38 सीटों पर ही सिमटी हुई है. एनडीए ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया. बीजेपी 90 सीटों पर आगे है, जेडीयू 81, एलजेपी 21 और अन्य ने 7 सीटों पर बढ़त बनाई हुई है. अभी तक के रुझानों में एनडीए ही जीत की तरफ बढ़ती नजर आ रही है.  अब जब एनडीए की जीत साफ-साफ दिखने लगी है तो इस पर भी बात होना लाजिमी है कि गठबंधन यानी नीतीश-मोदी की जोड़ी ने ऐसे कौन से वादे किए थे जिसने जनता को लुभाया और उसने अपने विश्वास को वोट के जरिए जीत में बदला. नजर डालते हैं उन 10 वादों पर जिन्हें बंपर जीत के बाद नीतीश-मोदी को पूरा करना होगा.  बता दें कि पहले चरण की वोटिंग से करीब हफ्तेभर पहले सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपना घोषणा पत्र जारी किया था. एनडीए के घोषणा पत्र में शिक्षा और रोजगार से लेकर महिलाओं और गरीब-किसान, सामाजिक न्याय तक, हर वर्ग के लिए लुभावने वादे शामिल किए गए थे. 1. पंचामृत गारंटी: सत्ताधारी एनडीए ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों के लिए 'पंचामृत गारंटी' का वादा किया है. इसके तहत वादा किया गया है कि गरीबों को मुफ्त राशन, 125 यूनिट मुफ्त बिजली, पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देंगे.  2. 50 लाख नए पक्के मकान और सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी दी जाएगी. 3. एक करोड़ से अधिक नौकरी और रोजगार का वादा किया है. यह वादा किया गया है कि हर युवा को नौकरी और रोजगार देंगे.  4. हर जिले में अत्याधुनिक मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने, 10 नए औद्योगिक पार्क विकसित करने, कौशल जनगणना कराकर कौशल आधारित रोजगार देने का वादा भी एनडीए ने किया है.  5. हर जिले में मेगा स्किल सेंटर से बिहार को ग्लोबल स्किलिंग सेंटर के रूप में स्थापित किया जाएगा. 6. कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को 3000 रुपये वार्षिक दिया जाएगा. सभी प्रमुख फसलों की पंचायत स्तर पर एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी और प्रखंड स्तर पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के साथ ही एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर में एक लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा. दुग्ध मिशन शुरू कर चिलिंग और प्रोसेसिंग सेंटर प्रखंड स्तर पर स्थापित किए जाएंगे. 7. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को दो लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी. एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य लेकर काम करेंगे. मिशन करोड़पति के जरिये चिह्नित उद्यमियों को करोड़पति बनाने की दिशा में काम करेंगे. 8. केजी से पीजी तक मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देंगे. स्कूलों में मिड-डे-मिल के साथ पौष्टिक नाश्ता और स्कूलों में आधुनिक स्किल लैब की व्यवस्था करेंगे. गरीबों को पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देंगे. 9. सात एक्सप्रेसवे बनाए जाएंगे. 3600 किलोमीटर रेल ट्रैक का आधुनिकीकरण किया जाएगा. चार नए शहरों में मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी. अमृत भारत एक्सप्रेस और नमो रैपिड रेल सेवा का विस्तार करेंगे.  10. 10 नए शहरों से घरेलू उड़ानें भी शुरू की जाएंगी. पटना के करीब ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने के साथ ही दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उपार्जन केन्द्रों में किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए

रायपुर : प्रदेश में 15 नवम्बर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर तैयारियां पूरी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उपार्जन केन्द्रों में किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए रायपुर :धान के अवैध परिवहन एवं विक्रय के मामले में होगी कड़ी कार्रवाई रायपुर राज्य में 15 नवम्बर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर सभी खरीदी केन्द्रों में आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को धान विक्रय में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। उन्होंने उपार्जन केंद्रों में किसानों की सुविधा हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। जिलों में कलेक्टरों के मार्गदर्शन में सहकारिता, मार्कफेड एवं खाद्य विभाग द्वारा धान खरीदी की व्यवस्था को लेकर सभी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। राज्य के सभी उपार्जन केन्द्रों में किसानों की सुविधा के लिए बारदानों की व्यवस्था, फड़, चबूतरा, पीने का पानी, किसानों के बैठने की छायादार व्यवस्था की जा रही हैं। कलेक्टर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने जिलों में दौरा कर धान खरीदी केन्द्रों की व्यवस्था का मुआयना कर रहे हैं। राज्य में इस साल किसानों से धान खरीदने के लिए 2739 उपार्जन केंद्रों बनाए गए हैं। सभी केन्द्रों में धान खरीदी के साथ-साथ क्रय धान के उठाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि किसानों को असुविधा न हो। राज्य में धान के अवैध परिवहन को रोकने के लिए अन्य राज्यों के सीमा में चेक पोस्ट स्थापित कर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। धान की सुरक्षा हेतु खरीदी केन्द्रों में आवश्यकतानुसार ड्रेनेज एवं तारपोलिन आदि की व्यवस्था और उचित स्थानों पर सीसीटीव्ही कैमरे लगाने भी लगाए जा रहे हैं, ताकि धान खरीदी परिसर और वहां की व्यवस्था पर निगरानी रखी जा सके।  धान खरीदी से जुड़े अधिकारियों को स्टेक लगाने, सभी समितियों को उचित संख्या में ही टोकन जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम खराब होने अथवा बारिश होने की स्थिति में किसी तरह की अव्यवस्था उत्पन्न न हो, इसको ध्यान में रखते हुए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि समितियों में माइक्रो एटीएम की व्यवस्था की गई है, ताकि धान बेचने आने वाले किसान तात्कालिक खर्चे के लिए आवश्यक राशि का आहरण कर सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा के प्रतिबद्ध राज्य सरकार

प्रधानमंत्री मोदी ने बढ़ाया जनजातीय समुदाय का गौरव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार जनजातीय समुदाय के जल, जंगल जमीन संबंधी अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पेसा कानून के माध्यम से जनजाति क्षेत्र की ग्राम सभाओं को सशक्त बनाया गया है। भगवान बिरसा मुंडा ने इन्हीं अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदाय को गौरव और सम्मान मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति कल्याण के लिए राज्य सरकार ने 47,296 करोड़ रुपए का बजट रखा है जो पिछले साल से 15 प्रतिशत ज्यादा है। तेंदूपत्ता संग्राहकों का संग्रहण पारिश्रमिक 3 हजार रुपये प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 4 हजार रुपये किया। वन अधिकार अधिनियम में 2 लाख 89 हजार व्यक्तिगत और 28754 सामुदायिक दावे मान्य कर पीएम आवास, कपिल धारा, डीजल पंप, पीएम किसान सम्मान निधि, केसीसी आदि योजनाओं का लाभ दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं में भी मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पीएम जनमन योजना में 98 करोड़ 30 लाख और धरती आबा योजना में 401 करोड़ 56 लाख से अधिक के लोकार्पण- शिलान्यास हुए है। इसके अंतर्गत 21 जिलों में 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित है। प्रधानमंत्री वन-धन केंद्र योजना में 20 जिलों में 126 वन-धन केंद्र स्थापित है। प्रदेश के 18,338 घरों के विद्युतीकरण के लिए 78 करोड़ 94 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा की पूरी व्यवस्था की गई है। उन्हें निःशुल्क किताबें, निःशुल्क गणवेश और निःशुल्क साइकिल दी जा रही है। बच्चों को प्री मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। वर्ष 2024-25 में 40 लाख से अधिक छात्रों को 1 हज़ार 566 करोड़ रूपये छात्रवृत्ति दी गई है। जनजातीय विद्यार्थियों को आकांक्षा योजना के अंतर्गत NEET, CLAT, JEE प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग दी जा रही है। राष्ट्रीय संस्थानों जैसे IIT, AIIMS, NIT, NLIU में प्रवेश लेने पर 50 हजार रुपए तक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। विदेश में उच्च अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा योजना में अनुसूचित जनजाति छात्रों के लिए 210 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। राज्य के 3 एकलव्य पॉलीटेक्निक कॉलेज मंडला, झाबुआ और हरसूद में अनुसूचित जनजाति वर्ग के 1,040 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। संघ लोक सेवा आयोग तथा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षाओं में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। क्षमता एवं कौशल उन्नयन करते हुए 18 हजार से अधिक जनजातीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है। भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना, टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना के माध्यम से पिछले 4 वर्षों में 9,065 जनजातीय युवाओं को स्वरोजगार व आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगभग 418.67 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। सिकलसेल हीमोग्लोबिनोपैथी मिशन सभी 89 जनजातीय विकासखंडों में लागू किया गया है। अब तक 1.17 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। बैगा, सहारिया और भारिया जनजाति की महिलाओं के लिए वरदान बनी आहार अनुदान योजना में प्रतिमाह बहनों को 1500 रुपये मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय गरिमा का पूरा मान सम्मान रखा गया है। रानी दुर्गावती एवं जनजातीय राजा भभूत सिंह की स्मृति में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। जबलपुर एयरपोर्ट और मदन महल फ्लायओवर रानी दुर्गावती के नाम पर और पचमढ़ी अभयारण्य का नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर किया गया है। विशेष पिछड़ी जनजाति के युवाओं को पुलिस, सेना एवं होमगार्ड में भर्ती के लिये प्रशिक्षण के लिए बैगा, भारिया एवं सहरिया बटालियन गठित होगी। छिंदवाड़ा में श्री बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय एवं जबलपुर में राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण किया गया। भगोरिया को राजकीय उत्सव के रूप में मनाया गया। 

भोपाल मेट्रो को मिली रफ्तार: CMRs टीम ने अचानक शुरू की अंतिम परीक्षा का तीसरा पड़ाव

भोपाल भोपाल में मेट्रो संचालन से पहले सुरक्षा की अंतिम परीक्षा गुरुवार से शुरू हो गई है। दिल्ली से अचानक पहुंची कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम ने सुबह सुभाष नगर मेट्रो डिपो पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने डिपो में ट्रेन संचालन, सुरक्षा प्रोटोकाल और तकनीकी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। इसके बाद दोपहर एक बजे टीम ने ट्रैक कार से मेट्रो ट्रैक का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण भोपाल मेट्रो की अंतिम परीक्षा का तीसरा पड़ाव है। इस पड़ाव को पार करने के बाद सीएमआरएस की टीम ओके टू रन यानी संचालन की रिपोर्ट देगा। इसके बाद शासन तय करेगा कि भोपाल मेट्रो को कब शुरू किया जाना है। माना जा रहा है कि लगातार देरी के कारण हो रही आनन-फानन में सीएमआरएस टीम का निरीक्षण शुरू हो रहा है ताकि मेट्रो का संचालन जल्द से जल्द हो। हालांकि अधूरी तैयारियों व काम के बीच यह जल्दबाजी कहीं आमजन पर भारी न पड़ जाए।   मेट्रो के लिए अंतिम परीक्षा गौरतलब है कि सीएमआरएस का भोपाल मेट्रो का यह तीसरा निरीक्षण है। इससे पहले दो बार टीम निरीक्षण कर चुकी है, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों के कारण संचालन की अनुमति नहीं मिल सकी थी। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार यदि इस बार सभी मानक सही पाए गए तो भोपाल मेट्रो को ओके टू रन रिपोर्ट मिल जाएगी। अन्यथा संचालन की तारीख एक बार फिर आगे बढ़ सकती है। हालांकि ऐसी उम्मीद कम है। यह निरीक्षण मेट्रो के लिए अंतिम परीक्षा माना जा रहा है। उधर, मेट्रो कंपनी के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य मेट्रो संचालन में हो रही देरी पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उन्होंने पूरी तरह इस मामले में चुप्पी साध रखी है। सुभाष नगर एम्स तक देखी संचालन व्यवस्था निरीक्षण के दौरान सुभाष नगर डिपो के पास टीम केंद्रीय विद्यालय (केवी) मेट्रो स्टेशन पर पांच मिनट रुकी और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया। इसके बाद वे बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन पर करीब आधा घंटा रुके। यहां से एम्स मेट्रो स्टेशन तक टीम ने पहुंचकर ट्रैक की तकनीकी खामियों और संचालन व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता भी टीम के साथ मौजूद रहे। आज से होगी आठ मेट्रो स्टेशन की जांच तीन दिवसीय इस दौरे में सीएमआरएस टीम 15 नवंबर तक पूरे प्रायोरिटी कॉरिडोर की जांच करेगी। शुक्रवार को टीम आठ मेट्रो स्टेशनों का निरीक्षण करेगी, जबकि 15 नवंबर को प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलों की परखा जाएगा।