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विशेष आर्टिकल :गांव से ग्लोबल तक: विकसित भारत 2047 में उत्तर प्रदेश की प्रेरक कहानी

लखनऊ 'समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान केवल कागजी योजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के हर कोने में बदलाव की जीवंत कहानी है। 57 लाख से अधिक सुझावों से तैयार यह विजन डॉक्यूमेंट अब ग्रामीण स्मार्ट गांव, सोलर सिटी, डिजिटल कृषि, और महिला उद्यमिता के रूप में जमीन पर उतर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह अभियान आर्थिक शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति के तीन स्तंभों पर खड़ा है। आइए, उत्तर प्रदेश के वास्तविक उदाहरणों से जानें कैसे यह अभियान लोगों की किस्मत बदल रहा है, और कैसे भाजपा सरकार का यह कदम लाखों को लाभ पहुंचा रहा है। 1. अयोध्या: सोलर सिटी का मॉडल – धार्मिक पर्यटन + हरित ऊर्जा • उदाहरण: अयोध्या को भारत की पहली सोलर सिटी बनाने का लक्ष्य। • क्या हुआ? o 2025 तक 10,000 सोलर रूफटॉप लगाए गए। o राम मंदिर परिसर 100% सोलर पावर्ड। o नॉन-टैक्स रेवेन्यू दोगुना – ₹500 करोड़+ वार्षिक। o पर्यटक संख्या: 2017 में 50 लाख → 2025 में 5 करोड़+। • लोगों की किस्मत बदली: मेयर गिरीश पति त्रिपाठी कहते हैं, "अभियान ने हमें सुझाव दिया – सोलर + साफ-सफाई। अब स्थानीय युवा सोलर टेक्नीशियन बन रहे हैं, 5,000+ नौकरियां पैदा हुईं।" • विकसित यूपी कनेक्शन: सृजन शक्ति (हरित ऊर्जा) + आर्थिक शक्ति (पर्यटन)। 2. मथुरा (महावन): ग्रामीण स्मार्ट गांव – डिजिटल क्रांति गांव में • उदाहरण: महावन नगर पंचायत को स्मार्ट विलेज मॉडल बनाया। • क्या हुआ? o Wi-Fi हॉटस्पॉट 50 गांवों में। o डिजिटल हेल्थ कार्ड हर परिवार को। o ऑनलाइन कृषि बाजार – किसान सीधे दिल्ली को बेच रहे। o प्रति व्यक्ति आय: 2017 में ₹8,000/माह → 2025 में ₹25,000/माह। • लोगों की किस्मत बदली: नगर पंचायत अध्यक्ष मंजू देवी कहती हैं, "अभियान के सुझाव से हमने डिजिटल कियोस्क लगाए। अब बेटियां ऑनलाइन पढ़ रही हैं, किसान ऐप से मौसम जान रहे हैं।" किसान रामू (28): पहले मजदूरी, अब ड्रोन से खेती, मासिक ₹40,000 कमाई। • विकसित यूपी कनेक्शन: जीवन शक्ति (स्वास्थ्य + शिक्षा) + सृजन शक्ति (डिजिटल इंफ्रा)। 3. गोरखपुर: ODOP + मुद्रा + विकसित यूपी = टेराकोटा निर्यातक • उदाहरण: गोरखपुर का टेराकोटा ODOP उत्पाद अब अमेरिका-जापान जा रहा। • क्या हुआ? o मुद्रा ऋण: ₹3 लाख → मशीनरी। o विकसित यूपी सुझाव: डिजाइन ट्रेनिंग + ई-कॉमर्स लिंक। o निर्यात: 2017 में शून्य → 2025 में ₹50 करोड़। o रोजगार: 2,000+ महिलाएं जुड़ीं। • लोगों की किस्मत बदली: सीता देवी (42): पहले मिट्टी के बर्तन बनाती थीं, अब 'गोरखपुर क्राफ्ट' ब्रांड की मालकिन। मासिक आय ₹1 लाख। "अभियान ने कहा – लोकल को ग्लोबल बनाओ। आज मेरा उत्पाद टोक्यो में बिकता है।" • विकसित यूपी कनेक्शन: आर्थिक शक्ति (ODOP + निर्यात)। 4. वाराणसी: डिजिटल स्वास्थ्य + काशी विश्वनाथ कॉरिडोर • उदाहरण: काशी मॉडल – स्वास्थ्य + पर्यटन। • क्या हुआ? o डिजिटल हेल्थ कार्ड: 25 लाख लोगों को। o काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: 3 करोड़+ यात्री/वर्ष। o मेडिकल टूरिज्म: आयुर्वेदिक सेंटर शुरू। • लोगों की किस्मत बदली: डॉक्टर अनीता शर्मा: पहले छोटा क्लिनिक, अब आयुर्वेदिक वेलनेस सेंटर, 50 स्टाफ। युवा गाइड राहुल: पहले बेरोजगार, अब डिजिटल टूर गाइड ऐप, मासिक ₹30,000। • विकसित यूपी कनेक्शन: जीवन शक्ति (स्वास्थ्य) + आर्थिक शक्ति (पर्यटन)। 5. नोएडा: ग्लोबल निवेश हब – सेमीकंडक्टर + डेटा सेंटर • उदाहरण: नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी। • क्या हुआ? o 2025 में 10 डेटा सेंटर शुरू। o ₹50,000 करोड़ निवेश, 1 लाख नौकरियां। o सेमीकंडक्टर यूनिवर्सिटी की नींव। • लोगों की किस्मत बदली: इंजीनियर प्रिया (24): ग्रामीण पृष्ठभूमि, अब डेटा सेंटर में जॉब, सैलरी ₹80,000/माह। "अभियान ने कहा – स्किल इंडिया। मुझे मुफ्त AI ट्रेनिंग मिली।" • विकसित यूपी कनेक्शन: सृजन शक्ति (टेक्नोलॉजी) + आर्थिक शक्ति (निवेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक उद्गार • 3 सितंबर 2025 (लॉन्च): "अयोध्या सोलर सिटी बनेगी, मथुरा डिजिटल विलेज बनेगा, गोरखपुर टेराकोटा का ग्लोबल हब बनेगा – यही विकसित यूपी है।" • 14 अगस्त 2025 (विधानसभा): "2047 तक उत्तर प्रदेश 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनेगा। हर गांव में स्मार्ट स्कूल, हर घर में सोलर लाइट – यह हमारा संकल्प है।" • 26 सितंबर 2025 (ग्राम प्रधान सम्मेलन): "57 लाख सुझाव आए। यह जनता का विजन है। ग्रामोदय से राष्ट्रोदय तक – हर गांव अब विकसित यूपी का हिस्सा है।" भाजपा सरकार का ऐतिहासिक कदम: लाखों लाभार्थी लाभ संख्या सुझाव 57 लाख+ स्मार्ट गांव 5,000+ सोलर रूफटॉप 1 लाख+ डिजिटल हेल्थ कार्ड 2 करोड़+ रोजगार 40 लाख+ यह अभियान भ्रष्टाचार मुक्त, डिजिटल और जन-केंद्रित है – भाजपा की समावेशी नीति का प्रमाण। निष्कर्ष: विकसित यूपी @2047 – हर गांव, हर शहर, हर सपना अयोध्या की सोलर लाइट से मथुरा का डिजिटल कियोस्क, गोरखपुर की टेराकोटा से नोएडा का डेटा सेंटर तक – विकसित भारत @2047 उत्तर प्रदेश में साकार हो रहा है। योगी सरकार ने साबित किया: जब जनता साझेदार बने, तो 22 साल में क्रांति संभव है। आप भी सुझाव दें: viksitup2047.up.gov.in #ViksitUP2047 #YogiHaiToVikasHai #SamriddhiKaShatabdi

विशेष आर्टिकल : बेटियों को सशक्त बनाने की राह: कन्या सुमंगला योजना की अनोखी कहानी

विशेष आर्टिकल : कन्या सुमंगला योजना: बेटियों के सपनों को पंख लगाने वाली क्रांतिकारी पहल लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति फेज-5.0 एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस अभियान का अभिन्न हिस्सा है मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के संकल्प को साकार करने वाली एक ऐसी योजना है। इस योजना ने न केवल कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों पर अंकुश लगाया है, बल्कि लाखों बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 26 लाख से अधिक बेटियों को लाभ पहुंचाया गया है, जो उत्तर प्रदेश को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। योजना का उद्देश्य और संरचना: एक विस्तृत नजर मिशन शक्ति के स्वावलंबन स्तंभ के तहत संचालित कन्या सुमंगला योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हो और बेटियां बिना रुकावट पढ़ सकें। योजना को छह चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल 25,000 रुपये की धनराशि दी जाती है: • प्रथम चरण: बेटी के जन्म पर 5,000 रुपये (1 अप्रैल 2019 या उसके बाद जन्मी बेटियों के लिए)। • द्वितीय चरण: पूर्ण टीकाकरण पर 2,000 रुपये। • तृतीय चरण: कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये। • चतुर्थ चरण: कक्षा-6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये। • पंचम चरण: कक्षा-9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये। • षष्ठम चरण: कक्षा-10/12 उत्तीर्ण करने पर 7,000 रुपये (स्नातक या 2 वर्षीय डिप्लोमा में प्रवेश के लिए)। पात्रता के मानदंड सरल हैं: लाभार्थी परिवार उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो, वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम हो, और परिवार में अधिकतम दो बेटियां लाभार्थी हो सकें। आवेदन ऑनलाइन (mksy.up.gov.in) या ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। योजना ने लिंगानुपात में सुधार लाया है और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को कम किया है, जिससे उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर हो गया है। प्रेरणादायक कहानी: वाराणसी की प्रिया – योजना की जीवंत मिसाल कन्या सुमंगला योजना की सच्ची ताकत तो उसके लाभार्थियों की सफलता कहानियों में झलकती है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है वाराणसी की प्रिया सिंह की, जो एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। प्रिया का जन्म 2020 में हुआ, जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था। लेकिन मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी। प्रिया को योजना के पहले चरण में जन्म पर 5,000 रुपये मिले, जिससे परिवार ने टीकाकरण और पोषण पर खर्च किया। कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये से स्कूल फीस और किताबें खरीदी गईं। कक्षा-6 में 3,000 रुपये ने यूनिफॉर्म और स्टेशनरी का इंतजाम किया, जबकि कक्षा-9 में 5,000 रुपये ने अतिरिक्त ट्यूशन की सुविधा प्रदान की। अब कक्षा-10 उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें 7,000 रुपये मिल चुके हैं, जिसका उपयोग आईएएस की तैयारी के लिए कोचिंग में किया जा रहा है। प्रिया बताती हैं, "यह पैसा मेरे लिए सिर्फ धन नहीं, बल्कि सपनों का ईंधन है। योजना ने मुझे साबित किया कि बेटी भी परिवार का सहारा बन सकती है।" आज प्रिया न केवल अपनी कक्षा में टॉपर हैं, बल्कि गांव की अन्य लड़कियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। उनकी कहानी मिशन शक्ति के उस विजन को दर्शाती है, जहां हर बेटी एक भविष्य की नारी शक्ति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दूरदर्शी नेतृत्व: तारीफ के काबिल योगदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि के बिना कन्या सुमंगला योजना इतनी सफल न होती। उन्होंने 25 अक्टूबर 2019 को योजना का उद्घाटन किया और इसे मिशन शक्ति का मजबूत स्तंभ बनाया। हाल ही में मिशन शक्ति 5.0 के लॉन्च पर लखनऊ में दिए गए अपने भाषण में सीएम योगी ने कहा, "बेटी के जन्म से स्नातक तक 25,000 रुपये का पैकेज देकर हम नारी शक्ति को मजबूत कर रहे हैं। यह योजना बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएगी और समाज की कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकेगी।" उनके नेतृत्व में योजना ने 26 लाख बेटियों को जोड़ा, जो एक रिकॉर्ड है। योगी जी का यह प्रयास न केवल प्रशासनिक कुशलता का प्रतीक है, बल्कि संवेदनशील शासन का भी उदाहरण। उन्होंने नवरात्रि के कन्या पूजन के दौरान भी जोर दिया कि "कन्या पूजन से हम भविष्य की नारियों को सम्मान दे रहे हैं, और कन्या सुमंगला जैसी योजनाएं इसे साकार कर रही हैं।" योगी आदित्यनाथ का यह समर्पण उत्तर प्रदेश को 'बेटी-रक्षक' राज्य बनाने में मीलों आगे ले गया है। भाजपा सरकार का सराहनीय कदम: महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भाजपा सरकार के इस कदम की सराहना किए बिना न्याय नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान को मजबूत करने वाली यह योजना उत्तर प्रदेश में भाजपा शासन की प्राथमिकता को दर्शाती है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हुई कन्या सुमंगला ने न केवल आर्थिक सहायता दी, बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी लाया। सरकार ने योजना को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर पारदर्शिता सुनिश्चित की, जिससे भ्रष्टाचार मुक्त वितरण संभव हुआ। यह कदम नारी सम्मान और समानता की दिशा में भाजपा की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। निष्कर्ष: योगी सरकार की दूरदर्शी सोच से सशक्त बेटियां, समृद्ध उत्तर प्रदेश मिशन शक्ति और कन्या सुमंगला योजना मिलकर उत्तर प्रदेश को एक ऐसा राज्य बना रही हैं, जहां हर बेटी सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हो। प्रिया जैसी लाखों कहानियां साबित करती हैं कि यह योजना सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाली है। योगी आदित्यनाथ सरकार की यह पहल न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि ऐतिहासिक भी है। • 2017 से पहले की अराजकता को याद करें, जब बेटियां घर से बाहर निकलने में डरती थीं। आज योगी सरकार ने महिला पुलिस बीट ऑफिसर, पिंक पेट्रोलिंग, महिला हेल्प डेस्क और 1090 हेल्पलाइन जैसे ठोस कदम उठाकर सुरक्षा का मजबूत कवच तैयार किया है। • कन्या सुमंगला योजना ने 26 लाख बेटियों को सीधे वित्तीय सहायता दी, जिससे लिंगानुपात में 50 अंकों का सुधार हुआ। • डिजिटल पारदर्शिता के जरिए हर पैसा सही हाथों तक पहुंच रहा है … Read more

गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसम्बर तक पूरा करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए गति बढ़ाने के निर्देश

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक तरक्की की रीढ़ हैं एक्सप्रेसवे: मुख्यमंत्री गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसम्बर तक पूरा करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए गति बढ़ाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने की यूपीडा के परियोजनाओं की समीक्षा, कहा समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो मेरठ-हरिद्वार, नोएडा-जेवर, चित्रकूट-रीवा और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के रूट पर हुई गहन चर्चा, मुख्यमंत्री ने एनएचएआई के साथ रूट समन्वय पर दिया बल डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सभी नोड्स पर स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित होंगे: मुख्यमंत्री भूमि आवंटन के तीन वर्ष में निवेश न होने पर आवंटन रद्द किया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि एक्सप्रेसवे केवल सड़कों का जाल नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक भविष्य की रीढ़ हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य दिसम्बर तक हर हाल में पूरा कराने के लक्ष्य के साथ तेज गति से आगे बढ़ाया जाए, ताकि राज्य के पश्चिमी और पूर्वी अंचलों के बीच सहज कनेक्टिविटी स्थापित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा हो और कार्य की गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो। बैठक में गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार स्वरूप प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे, नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे तथा प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली और सोनभद्र तक प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे व विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के रूट पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नए एक्सप्रेसवे की योजना बनाते समय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और हाइवे नेटवर्क का पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि दोहराव से बचते हुए राज्य में एकीकृत और समन्वित सड़क तंत्र विकसित हो सके। मुख्यमंत्री ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े सभी नोड्स (लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट) में स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रक्षा उद्योग से जोड़ना चाहिए, जिससे रोजगार सृजन के साथ ही क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। बैठक में बताया गया कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक लगभग 30,819 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। 5039 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है। विभिन्न कंपनियों द्वारा कार्य प्रारंभ भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने भूमि आवंटन नीति पर विशेष बल देते हुए कहा कि भूमि आवंटन के तीन वर्ष के भीतर यदि निवेशक द्वारा यथोचित उपयोग नहीं किया जाता है तो ऐसा आवंटन स्वतः निरस्त किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भूमि उपयोग की निगरानी की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए और निवेशक को केवल वास्तविक प्रगति की स्थिति में ही आगे की सुविधाएँ दी जाएँ। बैठक में यह भी बताया गया कि एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्कों में निवेश आकर्षित करने के लिए यूपीडा ने बिजली, जलापूर्ति, ट्रक टर्मिनल और हेल्थ-इमरजेंसी सुविधाओं की व्यवस्था हेतु समयबद्ध योजना बनाई है।

आवाज़ की रफ्तार से तेज, लेकिन जमीन पर बिल्कुल शांत – X-59 ने किया फ्लाईट

कैलिफोर्निया नासा का नया एक्सपेरिमेंटल जेट X-59 आखिरकार उड़ान भर चुका है. यह कोई आम जेट नहीं, बल्कि एक ऐसा जेट है जो आवाज की रफ़्तार तोड़ते हुए भी वो जोरदार “धमाका” यानी सॉनिक बूम नहीं करता, जो आमतौर पर सुपरसोनिक विमानों के साथ सुनाई देता है. कैलिफोर्निया के पामडेल रीजनल एयरपोर्ट से  सुबह 10:13 बजे X-59 ने उड़ान भरी. यह उड़ान नासा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. बिना शोर के टूटी ‘साउंड बैरियर’ आमतौर पर जब कोई विमान आवाज़ की रफ़्तार (Speed of Sound) से तेज़ उड़ता है, तो ज़मीन पर ज़बरदस्त धमाका सुनाई देता है. इसे ही सॉनिक बूम कहा जाता है, जो इमारतों के शीशे तक हिला सकता है. यही वजह है कि 1973 से अमेरिका में आबादी वाले इलाकों के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानें प्रतिबंधित हैं. लेकिन X-59 को खास इसी समस्या को हल करने के लिए बनाया गया है. इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि ये तेज़ उड़ान के बावजूद हवा में पैदा होने वाले झटकों और शोर को कम कर दे. नासा का मानना है कि अगर ये प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में दुनिया के सबसे “शांत” सुपरसोनिक फ्लाइट्स का दौर शुरू हो सकता है. चुपचाप हुई पहली उड़ान दिलचस्प बात ये है कि नासा ने इस टेस्ट फ्लाइट की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की. न ही कोई प्रेस रिलीज़ जारी की गई. इसकी एक वजह अमेरिका में चल रहा सरकारी शटडाउन भी बताया जा रहा है. हालांकि विमान प्रेमियों और फोटोग्राफरों ने इस उड़ान के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर दीं. तस्वीरों में X-59 को आसमान की ओर ऊंची उड़ान भरते और मोजावे डेजर्ट के ऊपर से गुजरते देखा गया. फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट्स के मुताबिक, विमान करीब एक घंटे तक हवा में रहा और एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के ऊपर गोल-गोल घूमता रहा. अब होगी लंबी टेस्टिंग पहली उड़ान के बाद X-59 को अब नासा के आर्मस्ट्रॉन्ग फ्लाइट रिसर्च सेंटर में ले जाया गया है. यहीं से आने वाले महीनों में इसकी लंबी टेस्टिंग की जाएगी. इस दौरान नासा की टीम इसे कई बार उड़ाएगी और ज़मीन पर लगे सैकड़ों माइक्रोफोन से इसकी आवाज़ और कंपन को मापा जाएगा. इसके अलावा, कुछ खास तरह के सेंसर लगे दूसरे विमानों को भी इसके साथ उड़ाया जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि ये जेट हवा में कैसा व्यवहार करता है. ‘स्कंक वर्क्स’ में हुआ डिजाइन इस जेट को नासा ने लॉकहीड मार्टिन के साथ मिलकर तैयार किया है. इसे कंपनी के मशहूर “स्कंक वर्क्स” यूनिट में डिज़ाइन किया गया है, जहां दुनिया के कई सबसे गुप्त और एडवांस्ड विमान बनाए गए हैं. X-59 का पूरा स्ट्रक्चर और आकार इस तरह तैयार किया गया है कि हवा में चलते वक्त झटके और शोर बेहद कम रहें. इसका आगे का हिस्सा काफी लंबा और पतला है, जिससे हवा के टकराने का असर कम हो जाता है. क्यों है X-59 इतना अहम? नासा का मकसद सिर्फ एक नया जेट बनाना नहीं, बल्कि दुनिया को यह साबित करना है कि सुपरसोनिक उड़ानें बिना शोर के भी संभव हैं. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो अमेरिका में लगभग 50 साल बाद फिर से सुपरसोनिक उड़ानों पर लगा प्रतिबंध हट सकता है. इससे न सिर्फ कमर्शियल फ्लाइट्स तेज़ होंगी, बल्कि डिज़ास्टर रिलीफ, मेडिकल ट्रांसपोर्ट और दूसरे ज़रूरी कामों के लिए भी तेज़ मदद पहुंचाई जा सकेगी.  

एक दिन में दो खुशखबरी! ट्रेड डील को हरी झंडी और सरकार ने दिया आर्थिक तोहफा

नई दिल्‍ली  भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों को एक ही दिन में दो-दो खुशखबरी मिली है. पहले तो अमेरिका के साथ ट्रेड डील लगभग कन्‍फर्म होने की खबर आई, जिससे टैरिफ 50 से घटकर 15 तक आ सकता है. अब सरकार ने भी निर्यातकों को मिलने वाली टैक्‍स व शुल्‍क में छूट का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है. इसके तहत निर्यातकों के लिए दो योजनाओं आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल के तहत अधिसूचित दरों की समीक्षा के लिए पूर्व सचिव नीरज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है. सरकार अभी निर्यात किए जाने वाले उत्‍पादों पर शुल्क एवं टैक्‍स की छूट योजना (आरओडीटीईपी) उन कर, व शुल्क को लौटाने (रिफंड) का प्रावधान करती है जो निर्यातकों द्वारा वस्तुओं के विनिर्माण एवं वितरण की प्रक्रिया में खर्च किए जाते हैं. इनका कंपेनसेशन केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य तंत्र के तहत नहीं किया जाता है. अब इस योजना को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है. वर्तमान आरओडीटीईपी दरें 0.3 से 4.3 फीसदी के बीच हैं. कपड़ा निर्यातकों के लिए अलग योजना परिधान यानी कपड़ा निर्यातकों के लिए साल 2021 में राज्य एवं केंद्रीय कर एवं शुल्क में छूट (आरओएससीटीएल) योजना की घोषणा की गई थी. इसके तहत उन्हें अपने निर्यात पर केंद्रीय एवं राज्य करों में छूट मिलती है. आरओएससीटीएल योजना के तहत, परिधानों के लिए छूट की अधिकतम दर 6.05 प्रतिशत है, जबकि सिले हुए (मेड-अप) कपड़ों के लिए यह 8.2 प्रतिशत तक है. परिधान और सिले हुए कपड़े जैसे घरेलू वस्त्र इस योजना के अंतर्गत आते हैं. दरों को निर्धारित करने पर बात करेगी समिति सरकारी आदेश के अनुसार, समिति के दो सदस्य सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क के पूर्व प्रधान मुख्य आयुक्त एस.आर. बरुआ और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के पूर्व सदस्य विवेक रंजन हैं. इसमें कहा गया कि समिति प्रशासनिक मंत्रालयों, निर्यात संवर्धन परिषदों, जिंस बोर्ड, व्यापार निकायों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत करेगी ताकि आरओएससीटीएल और आरओडीटीईपी दरों पर उनके विचार हासिल किए जा सकें. मौजूदा तरीकों की होगी समीक्षा समिति के सदस्‍य निर्यातित उत्पाद पर लगने वाले केंद्रीय, राज्य व स्थानीय स्तर पर शुल्क/कर/उपकर की गणना के लिए तौर-तरीके तय करेगी जिसमें निर्यातित उत्पाद के उत्पादन में प्रयुक्त वस्तुओं एवं सेवाओं पर पूर्व चरण के लिए वसूले गए अप्रत्यक्ष कर भी शामिल होंगे. समिति घरेलू शुल्क क्षेत्रों विशेष आर्थिक क्षेत्रों और अग्रिम प्राधिकरण धारकों से निर्यात के लिए आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल योजनाओं के तहत अधिकतम दरों की सिफारिश करेगी. समिति अपनी मुख्य रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक सरकार को सौंप देगी. क्‍या होगा इसका फायदा इन योजनाओं के तहत स्थानीय कर के वापस मिलने (रिफंड) से वैश्विक बाजारों में भारतीय कारोबारियों को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलती है. इस साल अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात 3.02 प्रतिशत बढ़कर 220.12 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 4.53 प्रतिशत बढ़कर 375.11 अरब डॉलर रहा है. फिलहाल भारत का व्यापार घाटा 154.99 अरब डॉलर है, जिसे नीचे लाने के लिए ही सरकार प्रोत्‍साहन योजनाएं चलाती है.  

मध्य प्रदेश को बड़ी सौगात: पीएमश्री हेली सेवा इन शहरों से करेगी उड़ान

भोपाल  एक नवंबर को मध्य प्रदेश का 70वां स्थापना दिवस है। 1956 में बने मध्य प्रदेश 70 साल का हो जाएगा। इस अवसर पर सरकारी स्तर पर कई बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। वहीं, प्रदेश को कई नई सौगातें मिलने वाली हैं। एक नवंबर को मध्य प्रदेश को पीएमश्री पर्यटन हेली सेवा की सौगात मिलेगी। तीन क्षेत्रों से होगी पीएम हेली सेवा की शुरुआत दरअसल, मध्य प्रदेश के तीन क्षेत्रों से पीएम हेली सेवा की शुरुआत होगी। पहला क्षेत्र भोपाल से उज्जैन, इंदौर, मांडव और ओंकारेश्वर है। वहीं, दूसरा क्षेत्र नर्मदापुरम जिले स्थित हिल स्टेशन पचमढ़ी के साथ ही छिंदवाड़ा जिले के तामिया और छतरपुर जिले में स्थित विश्व धरोहर स्थल खजुराहो है। इसके साथ ही तीसरा क्षेत्र जबलपुर और कान्हा, पेंच और पन्ना राष्ट्रीय उद्यानों तक है। वहीं, पीएम हेली सेवा की शुरुआत से मध्य प्रदेश में टूरिज्म को बुस्टोर डोज मिलेगा। इससे पर्यटक कम समय में अपनी पसंदीदा जगहों पर पहुंच सकते हैं। मध्य प्रदेश में सबसे अधिक पर्यटक इन्हीं जगहों पर आते हैं। सरकार लगातार इन जगहों के विकास के लिए कार्य कर रही है। टाइगर रिजर्व पार्कों में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश में इस बार अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पूरे प्रदेश में तीन दिनों तक उत्सव चलने वाला है। इसकी शुरुआत एक नवंबर से होगी। सभी जगहों पर तैयारी चल रही है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पहले वायु सेवा की शुरुआत हो चुकी है।

केंद्र ने दी 8वें वेतन आयोग को हरी झंडी, जानें कब शुरू होगा लाभ

नई दिल्ली 8th Pay Commission: केंद्र सरकार के 1.2 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्र सरकार ने आखिरकार 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है। लगभग 10 महीने बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई (Justice Ranjana Prakash Desai) करेंगी। पैनल में दो अन्य सदस्य होंगे और इसे 18 महीनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपनी होगी, यानी आयोग अप्रैल 2027 तक अपनी सिफारिशें पेश कर सकता है। कर्मचारियों की उम्मीदें और हकीकत हालांकि सरकारी कर्मचारी वेतन वृद्धि की जल्दी उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू होने में 2028 तक का समय लग सकता है। पिछले दो वेतन आयोगों (6वें और 7वें) की प्रक्रिया को देखें तो उनके गठन से लेकर सिफारिशों के लागू होने तक 22 से 28 महीने का समय लगा था। 6वें वेतन आयोग की समयरेखा – गठन की घोषणा: जुलाई 2006 (UPA-1 सरकार) – ToR की मंजूरी: अक्टूबर 2006 – रिपोर्ट सौंपी: मार्च 2008 (18 महीने बाद) – कैबिनेट की मंजूरी: अगस्त 2008 – कुल अवधि: लगभग 22 महीने सिफारिशें 1 जनवरी 2006 से प्रभावी रूप से लागू की गईं। 7वें वेतन आयोग की समयरेखा – गठन की घोषणा: सितंबर 2013 (UPA-2) – ToR मंजूरी: फरवरी 2014 – रिपोर्ट सौंपी: नवंबर 2015 (18 महीने बाद) – मंजूरी: जून 2016 (NDA सरकार) – कुल अवधि: लगभग 28 महीने सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से प्रभावी की गईं। इन दोनों आयोगों के अनुभवों के अनुसार, ToR मंजूरी से लेकर वेतन संशोधन लागू होने तक लगभग 2 से 2.5 वर्ष का समय लगता है। 8वें वेतन आयोग की संभावित समयसीमा 8वें वेतन आयोग की घोषणा 16 जनवरी 2025 को की गई थी, लेकिन इसका ToR 28 अक्टूबर 2025 को ही मंजूर किया गया। अब आयोग को 18 महीनों में रिपोर्ट सौंपनी है, यानी यह अप्रैल 2027 तक पूरी हो सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा समीक्षा और कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया में समय लगेगा, जिससे वास्तविक वेतन संशोधन 2028 के प्रारंभिक महीनों में लागू हो सकता है। आयोग को मिले मुख्य दायित्व केंद्र सरकार द्वारा मंजूर ToR के अनुसार 8वां वेतन आयोग निम्न बिंदुओं पर अध्ययन और सिफारिश करेगा — 1. केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा और संशोधन। 2. पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में बदलाव की सिफारिश। 3. वेतन समानता (Pay Parity) और वेतन संरचना के तर्कसंगतकरण के उपाय। 4. भत्तों और सेवा शर्तों में सुधार। 5. कार्य परिस्थितियों की तुलना सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र से। 6. सिफारिशों का असर राजकोषीय स्थिति और आर्थिक संतुलन पर। 7. पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का मूल्यांकन, क्योंकि कई राज्य भी केंद्र के वेतन ढांचे को अपनाते हैं। किसे मिलेगा लाभ? 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सीधे तौर पर 1.2 करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रभावित करेंगी। इसके अलावा, स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) और सांविधिक संगठनों के कर्मचारी, जो केंद्र के वेतनमान को अपनाते हैं, उन्हें भी लाभ मिलेगा। राज्य सरकारें भी बाद में अपने-अपने संशोधित संस्करण लागू करती हैं, जिससे लाखों अतिरिक्त कर्मचारियों को भी परोक्ष रूप से फायदा होगा। बता दें कि अब जब ToR को मंजूरी मिल चुकी है, तो आयोग औपचारिक रूप से काम शुरू करेगा। अगले 18 महीनों में यह विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञ संस्थानों से परामर्श लेकर रिपोर्ट तैयार करेगा।

बेटियों का घर बसाने की पहल: धीरेंद्र शास्त्री बोले- 300 कन्याओं के हाथ होंगे पीले

छतरपुर बागेश्वर धाम में अगले वर्ष यानी साल 2026 में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 8वां सामूहिक कन्या विवाह का आयोजन होगा. जिसमें 300 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा जाएगा. इस साल यानी कि साल 2025 में 251 जोड़ों को परिणय सूत्र में बांधा गया था. पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि "इस बार (साल 2026) 300 बेटियों के घर बसाने का संकल्प लिया है. सामूहिक विवाह में 300 बेटियों के हाथ पीले किए जाएंगे." गुरु शिष्य मिलन कार्यक्रम का आयोजन बागेश्वर धाम में गुरु शिष्य मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि "बालाजी और सन्यासी बाबा की प्रेरणा से इस बार 50 अतिरिक्त बेटियों के साथ 300 बेटियों के हाथ पीले किए जाएंगे. गत वर्ष 251 जोड़ों को परिणय सूत्र में बांधा गया था." इस दौरान महाराज ने सभी शिष्य मंडल को बेटियों के विवाह कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया. बेटियों के घर बसाने खुलती है दान पेटियां पंडित धीरेंद्रे शास्त्री ने कहा, संकल्प पूरा हो इसके लिए सभी शिष्य मंडल अपनी जिम्मेदारी निभाये. बागेश्वर धाम की दान पेटी गरीब बेटियों का घर बसाने के लिए ही खोली जाती है. चढ़ोतरी में जो भी राशि आती है, वह बेटियों का वैवाहिक जीवन में प्रवेश कराने में खर्च की जाती है. यदि देश के मंदिरों की दान पेटियां गरीब बेटियों का घर बसाने लगे, तो कोई भी गरीब, बेटी को बोझ नहीं मानेगा." हजारों बेटियों का करा चुके हैं विवाह बागेश्वर धाम से अब तक हजारों बेटियों को विवाह के बंधन में बांधा जा चुका है. पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गुरु शिष्य मिलन कार्यक्रम में शिष्यों से कही कि "जल्द ही एक आयोजन रखा जाएगा, जिसमें फिर से शिष्यों के साथ इत्मीनान से बैठकर बात होगी और भेंट होगी." 'जिनकी दुकानें बंद हो रहीं, वे साजिश में जुटे' बागेश्वर महाराज ने कहा कि "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेकर उनके विरोध में वीडियो जारी किए जा रहे हैं. जिन तांत्रिकों की दुकानें बंद हो रही हैं वे बौखला रहे हैं और फेक वीडियो के माध्यम से बदनाम करने की कोशिश में लगे हैं. ऐसा ज्ञात हुआ है कि देश-विदेश के 22 लोगों की टीम दुष्प्रचार करने में लगी है. ऐसे लोगों के खिलाफ एक्शन की भी तैयारी चल रही है." सनातन एकता पदयात्रा वैचारिक क्रांति पंडित धीरेंद्रे शास्त्री ने कहा कि "सनातन हिंदू एकता पदयात्रा वैचारिक क्रांति की यात्रा है. जब हिंदू बचेगा, तभी हिंदुस्तान बचेगा. इसलिए इस वैचारिक क्रांति की यात्रा में सबको साथ चलना है. 7 नवंबर से 16 नवंबर तक दिल्ली से वृंदावन की पदयात्रा में न केवल स्वयं शामिल हों, बल्कि अपने रिश्तेदारों, दोस्तों को भी शामिल करें. जब कभी बागेश्वर धाम का इतिहास लिखा जाएगा तो आप सबका भी नाम आएगा. आपकी आने वाली पीढ़ी इस बात की जरूर चर्चा करेगी कि सनातन एकता पदयात्रा के लिए आपके घर से भी कोई निकला था."

पदयात्रा रोको, नहीं तो आंदोलन होगा’ — दामोदर यादव ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

छतरपुर  भीम आर्मी और दलित पिछड़ा समाज संगठन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं। संगठन के नेताओं ने धीरेन्द्र शास्त्री पर समाज को तोड़ने का आरोप लगाया है। दलित और पिछड़ा समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर यादव ने कहा धीरेन्द्र शास्त्री की 170 किलोमीटर की पदयात्रा को रोकने के लिए पांच दिन पहले राष्ट्रपति को पत्र लिख चुके हैं। अब संगठन की लीगल टीम दो दिन बाद जबलपुर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर यात्रा पर रोक की गुहार करेगी। धर्म की बातें करने वाले तोड़ रहे समाज बीते दिन पत्रकार वार्ता में यादव ने कहा देश में जातिवादी राजनीति बढ़ रही है। प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। दमोह, कटनी, छतरपुर, दतिया और भिंड में दलित, पिछड़ों के साथ जातिगत घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस ने इन घटनाओं में एससी एसटी एक्ट की धारा लगाई हैं। संगठन की मांग है आरोपियों पर रासुका की कार्रवाई होना चाहिए। यादव ने धीरेन्द्र शास्त्री पर कटाक्ष करते हुए कहा हैरानी की बात है कि धर्म की बातें करने वाले ही समाज को तोड़ने में लगे हैं। आजाद समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सत्येन्द्र विद्रोही ने कहा हम वर्ग संघर्ष नहीं संवैधानिक व्यवस्था चाहते हैं। जाति के नाम पर सांप्रदायिकता फैलाने वालों पर अंकुश जरूरी है। आजाद समाज पार्टी युवा विंग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल गुर्जर ने कहा जहां भी सांप्रदायिकता फैलाई जाएगी भीम आर्मी उसे सफल नहीं होने देगी। यात्रा रोकी जाए, नहीं तो आंदोलन होगा यादव ने कहा धीरेन्द्र शास्त्री 7 नवंबर को दिल्ली से सनातन हिंदू एकता पदयात्रा शुरू कर रहे हैं 170 किलोमीटर की यात्रा 16 नवंबर को वृदावंन में समाप्त होगी। इसके जरिए समाज में सांप्रदायिकता बढ़ावा मिलेगा। इस यात्रा को रोका जाना चाहिए इसलिए उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिख है। अब दो दिन बाद संगठन की लीगल टीम यात्रा पर रोक के लिए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर करेगी। अगर यात्रा नहीं रोकी गई तो संगठन आंदोलन करेगा।

बिहार में गरजे मोहन यादव: कांग्रेस को बताया राम और सीता के विरोधी विचारों वाली पार्टी

भोपाल/पटना मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 अक्टूबर को बिहार के बांका जिले की कटोरिया विधानसभा, भागलपुर जिले की नाथनगर विधानसभा और मधेपुरा जिले की आलमनगर विधानसभा में चुनाव प्रचार किया। इस दौरान उन्होंने जनता से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में समर्थन मांगा। उनकी सभा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आज बिहार में अद्भुत काम हुए हैं। कांग्रेस की सरकारों ने किसानों की अवहेलना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार किसान सम्मान निधि प्रदान की। बिहार में 74 लाख किसानों को सम्मान निधि मिल रही है। बहनों को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिल रही है। बहनें एक-एक पैसे का उपयोग परिवार के लिए करती हैं। बहनें खाली पेट रहने के बाद भी परिवार का ख्याल रखती हैं। उनकी वजह से हमारा परिवार आगे बढ़ता है। उन्होंने कटोरिया विधानसभा से एनडीए प्रत्याशी के लिए कहा कि पूरन लाल पूरनमासी का चांद है। मैं आप सबके भरोसे पूरन लाल को विजय की माला पहनाता हूं। आप सब इन्हें समर्थन दें और कमल का फूल खिलाएं। सीएम डॉ. मोहन ने नाथनगर विधानसभा से मिथुन यादव और अलामपुर विधानसभा से नरेंद्र नारायण के समर्थन में जनता से वोट देने की अपील की।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बिहार के अंदर आगे बढ़ने-विकास करने की अपार क्षमता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया भारत को सम्मान की दृष्टि से देख रही है। एनडीए सरकार के जरिये बिहार और देश आगे बढ़ें। हमारा मानना है कि हर घर का बेटा आगे बढ़ना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी एक मात्र ऐसी पार्टी है जो हर वर्ग को आगे बढ़ने का मौका देती है। उन्होंने कहा कि मेरे घर में कोई विधायक नहीं, कोई सांसद नहीं, मंत्री का तो सवाल ही नहीं उठता, मुख्यमंत्री की तो सोच भी नहीं सकते थे। उसके बावजूद एक किसान और यादव परिवार के व्यक्ति को भाजपा आगे बढ़ाती है। इस जातिवाद के माहौल में हमारी पार्टी सोचती है कि हर व्यक्ति आगे बढ़ना चाहिए। सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास-सबका प्रयास के भाव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी को आगे लेकर चलते हैं। कांग्रेसियों ने कुछ नहीं सोचा सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक के बाद एक धार्मिक पर्यटन के केंद्र बनते जा रहे हैं। कभी कोई कल्पना कर सकता है कि भगवान राम-कृष्ण के देश में उनका ही विरोध होगा। कांग्रेसी किस मुंह से चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेसियों ने तो सवाल किया कि इसका क्या प्रमाण है कि भगवान राम कहां पैदा हुए। कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं ने हाई कोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर भगवान राम पर प्रश्न खड़े किए। माता सीता ने बिहार में जन्म लेकर राम राज्य की स्थापना की। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीता माता के जन्म स्थान को भी भव्य तीर्थ स्थल बना रहे हैं। कांग्रेस और उनके साथियों की इतनी सरकारें रहीं, लेकिन किसी ने इस ओर नहीं सोचा। पीएम मोदी के नेतृत्व में बदल रहा देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नाथनगर विधानसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश बदल रहा है। साल 2005 के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने भी करवट बदली है। प्राचीन काल में बिहार अंग प्रदेश का हिस्सा था, जिसकी राजधानी चंपानगर थी। भारत अपने गौरवशाली अतीत को साथ लेकर आगे बढ़ते हुए सभी वर्गों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बनवाया। कांग्रेस वाले तो कोर्ट में भी श्रीराम के बजूद को चुनौती देते हैं।