samacharsecretary.com

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग को कैबिनेट की हरी झंडी, अध्यक्ष नियुक्त

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. 8वें वेतन आयोग को लागू करने के लिए अध्‍यक्ष को चुन लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को आठवें वेतन आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है. साथ ही कैबिनेट ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सभी टर्म और कंडीशन की मंजूरी भी दे दी है.  इस आयोग के गठन के बाद वेतन आयोग 18 महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगा, जिसके आधार पर 8वें वेतन आयोग को लागू कर दिया जाएगा. केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2026 से लागू किए जाने की हैं.  8वां केंद्रीय वेतन आयोग एक अस्थायी निकाय होगा, जिसमें  एक अध्यक्ष , एक पार्ट टाइम सदस्य एक सदस्य-सचिव होंगे. यह आयोग अपने गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें पेश करेगा. इन सिफारिशों के आधार पर 8th Pay Commission देश में लागू किया जाएगा. किन बातों का ध्‍यान रखेगा आयोग?      8वां केंद्रीय वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट पेश करते वक्‍त तमाम बातों का खास ख्‍याल रखेगा.      देश की आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence) की आवश्यकता कितनी होगी?      यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता कि विकासात्मक व्यय (Developmental Expenditure) और कल्याणकारी उपायों (Welfare Measures) के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों.     गैर-योगदान आधारित पेंशन योजनाओं (Non-Contributory Pension Schemes) की अवित्तपोषित लागत (Unfunded Cost).     आयोग की सिफारिशों का राज्य सरकारों के वित्त (State Governments finances) पर संभावित प्रभाव, जो आमतौर पर इन सिफारिशों को कुछ संशोधनों के साथ अपनाती हैं.     केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (Central Public Sector Undertakings) और निजी क्षेत्र (Private sector) के कर्मचारियों को उपलब्ध वेतन संरचना (Emolument Structure), लाभ (Benefits) और कार्य स्थितियां (Working Conditions). गौरतलब है कि केंद्रीय वेतन आयोग समय-समय पर गठित किए जाते हैं, ताकि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को महंगाई के हिसाब से वेतन, रिटायरमेंट बेनिफिट्स और अन्य सर्विस का लाभ मिल सके. अभी देश में 7वां वेतन आयोग लागू है, जिसके आधार पर साल में दो बार महंगाई भत्ता दिया जाता है. केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अभी 58 फीसदी है.  कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?  आम तौर पर वेतन आयोगों की सिफारिशें हर 10 साल के अंतराल पर लागू की जाती हैं. इस हिसाब से देखा जाए तो 8वें वेतन आयोग जनवरी 2026 से लागू हो सकता है. वहीं केंद्रीय मंत्री अश्‍विनी वैष्‍णव ने भी जनवरी से सिफारिशें लागू होने की उम्‍मीद जताई हैं. सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था, ताकि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभों में आवश्यक परिवर्तन की समीक्षा कर सिफारिशें दी जा सकें.      गौरतलब है कि केंद्रीय वेतन आयोग समय-समय पर गठित किए जाते हैं, ताकि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को महंगाई के हिसाब से वेतन, रिटायरमेंट बेनिफिट्स और अन्य सर्विस का लाभ मिल सके. अभी देश में 7वां वेतन आयोग लागू है, जिसके आधार पर साल में दो बार महंगाई भत्ता दिया जाता है. केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अभी 58 फीसदी है. 

प्रोजेक्ट्स और कम्युनिटी डेवलपमेंट के लिए मोहन सरकार ने लिया कर्ज, चालू वित्त वर्ष का ऋण 42600 करोड़ तक

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार आज ₹5200 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है, जिसका भुगतान 29 अक्टूबर को सरकार को होगा। भाईदूज पर प्रदेश की 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के खाते में ₹250 जमा करने से चूकने के बाद, सरकार यह कर्ज 1 नवंबर को होने वाले मध्य प्रदेश स्थापना दिवस, लाड़ली बहना योजना और अन्य सरकारी परियोजनाओं के भुगतान के लिए ले रही है। चालू वित्त वर्ष का कुल कर्ज ₹42600 करोड़ हुआ आज लिए जा रहे कर्ज की पहली राशि ₹2700 करोड़ और दूसरी ₹2500 करोड़ की होगी। ये चालू वित्त वर्ष के क्रमशः बीसवें और इक्कीसवें कर्ज हैं। इस नए लोन के बाद, चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज बढ़कर ₹42600 करोड़ हो जाएगा। इसके साथ ही, एमपी सरकार पर मौजूदा कुल कर्ज ₹4,64,340 करोड़ तक पहुंच जाएगा। लंबी अवधि के लिए लिया जा रहा है कर्ज पहला कर्ज ₹2700 करोड़ का है, जो 21 साल की अवधि के लिए लिया जा रहा है और इसका ब्याज भुगतान अक्टूबर 2046 तक होगा। दूसरा कर्ज ₹2500 करोड़ का है, जो 22 साल की अवधि के लिए होगा और इसका भुगतान अक्टूबर 2047 तक ब्याज के रूप में किया जाएगा। एमपी का चालू वित्त वर्ष का कर्ज बढ़कर पहुंच जाएगा 42,600 करोड़ गौरतलब है ताजा 5200 करोड़ रुपए लोन के बाद एमपी सरकार का कुल चालू वित्त वर्ष का कर्ज बढ़कर 42,600 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा. इससे पहले, मोहन सरकार ने दशहरे से पहले 3000 करोड़ रुपए का लोन लिया था. नए 5200 करोड़ रुपए के लोन से एमपी सरकार का कुल सरकारी कर्ज बढ़कर 4 लाख 64 हजार 340 करोड़ रुपए हो जाएगा.  कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए केंद्र की मंजूरी सरकार ने बताया है कि केंद्र सरकार ने आरबीआई के माध्यम से लिए जाने वाले कर्ज की यह राशि कैपिटल एक्सपेंडिचर ऑन प्रोडक्टिव स्कीम के लिए मंजूर की है। इन योजनाओं में मुख्य रूप से सिंचाई परियोजनाएं, सिंचाई और पावर प्रोजेक्ट्स, और कम्युनिटी डेवलपमेंट्स प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। सरकार देव उठनी एकादशी (1 नवंबर) से पहले यह कर्ज ले रही है। पिछले कर्जों का ब्यौरा इससे पहले मोहन सरकार ने दशहरा पर्व के ठीक पहले 1 अक्टूबर को ₹3000 करोड़ का कर्ज लिया था, जिसके लिए 30 सितंबर को ऑक्सन किया गया था। सितंबर माह में 9 सितंबर को ₹4000 करोड़ के तीन कर्ज और 23 सितंबर को ₹1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए गए थे। सरकार ने अपनी राजस्व स्थिति को संतोषजनक बताया है और कहा है कि लिया जा रहा यह कर्ज लोन की लिमिट के भीतर है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ₹12487.78 करोड़ के राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) में थी, जबकि 2024-25 में यह आय ₹1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है। क्यों ले रही कर्ज? सूत्रों के मुताबिक यह राशि कई प्रोजेक्ट्स और कम्युनिटी डेवलपमेंट स्कीम्स के लिए ली जा रही है। वहीं, आगामी 1 नवंबर को स्थापना दिवस, लाड़ली बहना योजना और अन्य सामाजिक योजनाओं के भुगतान के लिए भी इस धनराशि का उपयोग किया जाएगा। पहले लिया था 3 हजार करोड़ का कर्ज  आपको बता दें कि इससे पहले भी सरकार ने 1 अक्टूबर को दशहरा से पहले 3000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। और अब 5200 करोड़ कर्ज के साथ मध्यप्रदेश सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 4 लाख 64 हजार 340 करोड़ रुपए हो जाएगा।  लोन लेने की लिमिट बरकरार सरकार ने अपनी रेवेन्यू को लेकर कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12487.78 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस में थी। इसमें आमदनी 234026.05 करोड़ और खर्च 221538.27 करोड़ रहा। इसके विपरीत वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार की रिवाइज्ड आमदनी 262009.01 करोड़ और खर्च 260983.10 करोड़ बताया है। इस तरह पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार की आय 1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है। जो भी लोन लिया जा रहा है वह लोन की लिमिट के भीतर है। मोहन सरकार ने कब-कब लिया कर्ज     30 सितंबर को 1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए गए थे जिसका भुगतान एक अक्टूबर को हुआ। यह कर्ज 20 साल और 23 साल की अवधि के लिए हैं।     23 सितंबर को 1500-1500 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए गए हैं जो 18 साल और 21 साल की अवधि के हैं।     नौ सितंबर को तीन कर्ज लिए गए थे जो 1500-1500 करोड़ तथा एक हजार करोड़ रुपए के थे। यह कर्ज 17 साल, 19 साल और 20 साल की अवधि के लिए हैं।     26 अगस्त को मोहन सरकार ने 2500 करोड़ और 2300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए थे। यह लोन 20 साल और 18 साल की अवधि के लिए हैं।     5 अगस्त को 3 कर्ज लिए थे, जिसका भुगतान छह अगस्त को हुआ। इसमें पहला कर्ज 18 साल के लिए 1600 करोड़ का था। दूसरा कर्ज 20 साल के लिए 1400 करोड़ और तीसरा कर्ज 23 साल के लिए 1000 करोड़ रुपए का था। इस तरह कुल 4000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था।     30 जुलाई को 4300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए। दोनों ही कर्ज 17 साल और 23 साल के लिए आरबीआई के माध्यम से लिए गए, जिसका भुगतान सालभर में दो बार कूपन रेट के जरिए ब्याज के रूप में किया जाएगा। ये दोनों ही कर्ज चालू वित्त वर्ष में लिए 7वें और 8वें कर्ज रहे हैं। अप्रैल के बाद ये कर्ज भी लिए     8 जुलाई को 2500 और 2300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए थे। दोनों ही कर्ज 16 साल और 18 साल के लिए आरबीआई के माध्यम से लिए, जिसका भुगतान सालभर में दो बार कूपन रेट के जरिए ब्याज के रूप में किया जाएगा।     आरबीआई के माध्यम से 2 लोन 4 जून को लिए। पहला लोन 16 साल के लिए 2000 करोड़ रुपए का था। सरकार ब्याज के साथ इसकी अदायगी 4 जून 2041 तक करेगी। दूसरा लोन 18 साल के लिए 2500 करोड़ रुपए का था। यह 4 जून 2043 तक ब्याज के साथ चुकाया जाएगा।     सरकार ने चालू वित्त वर्ष का पहला कर्ज 7 मई को लिया था। इस दिन दो कर्ज ढाई-ढाई हजार करोड़ रुपए के लिए … Read more

भव्य आयोजन के लिए तैयार राज्योत्सव, 1 लाख लोगों के जुटने का अनुमान, BJP नेता करेंगे भीड़ इकट्ठा

रायपुर  छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में आयोजित होने जा रहे राज्योत्सव 2025 को इस बार बेहद भव्य बनाने की तैयारी चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 नवंबर को नवा रायपुर में आयोजित मुख्य समारोह में शामिल होंगे। कार्यक्रम स्थल पर इस बार अस्थायी पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) भी बनाया गया है, जहां से पीएम विजिट की मॉनिटरिंग की जाएगी। पीएम इसी अस्थाई कार्यालय में लंच भी लेंगे। बताया जा रहा है कार्यक्रम में करीब 1 लाख लोगों की भीड़ जुटेगी। इसकी जिम्मेदारी भाजपा नेताओं को दी गई है। PM साढ़े तीन लाख परिवारों को देंगे घर की चाबी इस बार राज्योत्सव में पीएम मोदी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत साढ़े तीन लाख परिवारों को घर की चाबी सौंपेंगे। साथ ही करीब 1250 करोड़ रुपए हितग्राहियों के खातों में अंतरित करेंगे। बस्तर, सरगुजा और अन्य जिलों के 5 से 10 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री मंच से खुद चाबी प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न स्थलों का किया निरीक्षण मुख्यमंत्री साय ने सबसे पहले नवा रायपुर स्थित श्री सत्य साईं हॉस्पिटल का निरीक्षण किया. उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा, सभागार व्यवस्था, मंच और आमंत्रित अतिथियों के बैठने की व्यवस्था का जायजा लिया. इसके पश्चात मुख्यमंत्री साय प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ध्यान केंद्र पहुंचे, जहांउन्होंने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की बिंदुवार समीक्षा की. उन्होंने ध्यान केंद्र के सभागार, मेडिटेशन रूम एवं बाहरी परिसर का निरीक्षण करते हुए सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए. ट्राइबल म्यूज़ियम बनेगा जनजातीय अस्मिता का अमर प्रतीक मुख्यमंत्री साय ने शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय जनजातीय समाज की वीरता, बलिदान और अस्मिता का अमर प्रतीक बनेगा. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संग्रहालय के प्रत्येक अनुभाग को इस प्रकार तैयार किया जाए कि वह आगंतुकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली अध्याय से गहराई से परिचित करा सके. उन्होंने प्रदर्शनी दीर्घाओं, मल्टीमीडिया गैलरी, स्मृति कक्ष और बाहरी परिसर की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की. राज्य स्थापना दिवस समारोह को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। कार्यक्रम की निगरानी की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और वन मंत्री केदार कश्यप को दी गई है। वहीं पार्टी संगठन की ओर से प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी और क्रेडा चेयरमैन भूपेंद्र सिंह सवन्नी को कार्यकर्ताओं की व्यापक उपस्थिति सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है। अनुमान है कि इस आयोजन में करीब एक लाख लोग शामिल होंगे। राज्योत्सव स्थल बनेगा छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का दर्पण मुख्यमंत्री साय ने नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल का भी दौरा किया और तैयारियों की जानकारी ली. उन्होंने मुख्य मंच, पार्किंग क्षेत्र, विभागीय डोम, प्रदर्शनी दीर्घा, वीआईपी दीर्घा और आमजन के लिए बनाए गए मार्गों का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, संस्कृति और आत्मविश्वास का उत्सव है, इसलिए यह आयोजन उत्कृष्टता की नई मिसाल बने. मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं और सुरक्षा, स्वच्छता तथा आमजन की सुविधा से जुड़े सभी बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए. इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, सचिव श्री राहुल भगत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे. सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सख्त प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। एडीजी दीपांशु काबरा को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके साथ 5 से अधिक आईजी, 12 डीआईजी, और करीब 2000 पुलिस जवान तैनात रहेंगे। 29 अक्टूबर से फोर्स नवा रायपुर में तैनाती शुरू करेगी। 1 नवंबर से भारी वाहनों की नो एंट्री 1 नवंबर को भारी वाहनों और बसों की नो-एंट्री रहेगी। आम लोगों के मार्ग भी बदले जाएंगे। प्रधानमंत्री का रूट एयरपोर्ट से सेक्टर-24, फिर सत्य साईं अस्पताल, विधानसभा भवन और ट्राइबल म्यूजियम तक रहेगा। एयरपोर्ट का मुख्य द्वार बंद रहेगा और यात्रियों को पुराने टर्मिनल से आवाजाही करनी होगी। 16 पार्किंग स्थल बनाए गए भीड़ और जाम से बचने के लिए प्रशासन ने 16 पार्किंग स्थल बनाए हैं, जो मेला स्थल से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर होंगे। यहां 10 हजार बाइक, 5 हजार बसें और 3 हजार कारें पार्क की जा सकेंगी। पार्किंग से लोगों को लाने-ले जाने 100 ई-रिक्शे लगेंगे राज्योत्सव समारोह में आने वाले लोग कहीं भी ट्रैफिक जाम न फंसे और आने-जाने वालों को कोई दिक्कत न हो। इसलिए नवा रायपुर में 16 जगहों पर पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। ये सभी पार्किंग मेला स्थल से एक से सवा किमी दूरी पर हैं। पार्किंग से मेला स्थल पहुंचने के लिए लोगों को किसी भी तरह की तकलीफ न हो इसलिए वहां हर दिन 100 ई-रिक्शों के साथ ही बसें भी तैनात की जाएंगी। लोग इन पर निशुल्क यात्रा कर मेला स्थल में पहुंच सकेंगे। 30 स्टॉलों में सरकारी योजनाओं की झलक राज्योत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ शासन की अलग-अलग योजनाओं और उपलब्धियों को दर्शाने के लिए 30 आकर्षक स्टॉलों की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। शिल्पग्राम में झलकेगी लोकसंस्कृति की पहचान राज्योत्सव मेला ग्राउंड के दूसरे हिस्से में शिल्पग्राम और प्रदर्शनी क्षेत्र का निर्माण किया जा रहा है। यहां प्रदेश के कई जिलों से आए शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे और हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री भी कर सकेंगे। शिल्पग्राम में प्रवेश से लेकर निकास तक आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपरा की झलक देखने मिलेगी। नवा रायपुर की दिशा से आने वाले दर्शक पहले गेट से सीधे शिल्पग्राम में प्रवेश कर पाएंगे। फन पार्क बनेगा आकर्षण का केंद्र राज्योत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ फन पार्क और मीनाबाजार दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण रहेंगे। फन पार्क में मनोरंजक गेम जोन बनाए गए हैं, जबकि मीनाबाजार में पारंपरिक झूले और खेलों का आनंद लिया जा सकेगा। दर्शकों की सुविधा के लिए इनके समीप फूड कोर्ट तैयार किया गया है, जहां लोग स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद ले सकेंगे। इनमें सभी प्रमुख विभागों की योजनाएं प्रदर्शित होंगी। कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और संबंधित विभागीय मंत्रियों के बड़े कटआउट्स भी लगाए जाएंगे। सरकारी विभागों के … Read more

स्थापना दिवस पर दो वर्ष में अर्जित विशेष उपलब्धियां दिखेंगी विकास प्रदर्शनी में

मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर होंगे विशेष कार्यक्रम दो वर्ष में अर्जित विशेष उपलब्धियां दिखेंगी विकास प्रदर्शनी में राजधानी भोपाल सहित जिलों में भी होंगे कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि परिषद की बैठक प्रारंभ होने से पहले किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रिपरिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले मंत्रीगण को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्थापना दिवस पर राजधानी और जिलों में विशेष कार्यक्रम होंगे। प्रदेश में गत 2 वर्ष में अर्जित महत्वपूर्ण उपलब्धियों की जानकारी विकास प्रदर्शनी के माध्यम से दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि लाल परेड ग्राउंड और रवीन्द्र भवन परिसर इन कार्यक्रमों के केंद्र होंगे। एक नवंबर को रवीन्द्र भवन में जहां 2 वर्ष में निवेश संवर्धन सहित अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित की जाएंगी वहां ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्राप्त निवेश से अर्जित उपलब्धियों की जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी। इस अवसर पर डिजिटल सेवाओं, मध्यप्रदेश ई-सेवा और इन्वेस्ट एमपी 3.0 पोर्टल का लोकार्पण होगा। उद्योग एवं रोजगार वर्ष 2025 के तहत हुए कार्यों का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। वर्ष 2026 के लिए आगामी वर्ष की थीम की घोषणा भी की जाएगी। समृद्ध मध्यप्रदेश@ 2047 दृष्टि पत्र का विमोचन भी होगा। यह दृष्टिपत्र सुखद मध्यप्रदेश, संपन्न मध्यप्रदेश और सांस्कृतिक मध्यप्रदेश की परिकल्पना पर आधारित है। लाल परेड मैदान भोपाल में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंथन एवं प्रसिद्ध पार्श्वगायक जुवैन नोटियाल का गायन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि यह दृष्टि पत्र मिशन "ज्ञान" अर्थात गरीब, युवा ,अन्नदाता और नारी सहित प्रदेश के सर्वांगीण विकास पर केन्द्रित है। अंगदान से मिल रहा लोगों को नया जीवन, देहदान करने वालों को गार्ड ऑफ ऑनर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश में अंगदान और देहदान की भावना विकसित हो रही है। हाल ही में भोपाल के एक ऑटो चालक गणेश की दो किडनियां और दिल तीन लोगों को प्रत्यारोपित किया गया। साथ ही उनके कार्निया से भी दो लोगों को रोशनी मिलेगी। ऑटो ड्राइवर के परिवार का यह योगदान सराहनीय है। इस भावना को प्रोत्साहित करने के लिए अंगदान करने वाले व्यक्तियों के अंतिम संस्कार में गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा है। हाल ही में उज्जैन के किशन सिंह भाटिया के परिवार और अन्य कई परिवारों द्वारा देहदान की पहल की गई है जो समाज के लिए प्रेरक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से आग्रह किया कि अपने प्रभार के जिलों में देहदान की भावना के प्रचार प्रसार में सहयोग करें ताकि अपने किसी परिजन की मृत्यु के बाद दिवंगत व्यक्ति के अंग अन्य जरूरतमंद लोगों को प्रत्यारोपित करने की प्रेरणा मिलेगी। जीवनकाल में ही अंगदान या देहदान के संकल्प को सार्वजनिक कर ऐसे दान के माध्यम से व्यक्ति जीवन के बाद भी परिवार सहित समाज में याद रखा जाता है। भगवान बिरसा मुंडा जयंती पर मनाएंगे जनजातीय गौरव दिवस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जानकारी दी कि आगामी 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस भव्य रूप से मनाया जाएगा। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती के समापन पर प्रदेश में एक से 15 नवंबर तक राजधानी से ग्राम पंचायत तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। स्वतंत्रता के संघर्ष में भगवान बिरसा मुंडा के योगदान पर शिक्षण संस्थानों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा।

महागठबंधन का घोषणापत्र जारी, बिहार में नए एजेंडे के तहत ‘तेजस्वी प्रण’

पटना  महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया है. इसका नाम 'तेजस्वी प्रण' रखा गया है. इस घोषणापत्र के कवर फोटो पर तेजस्वी यादव का ही फोटो छपा है. बता दें कि तेजस्वी यादव ही महागठबंधन की ओर से सीएम फेस हैं. महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव, पवन खेड़ा, दीपांकर भट्टाचार्य, मुकेश सहनी मौजूद हैं. 'हमें बिहार को पटरी पर लाना है' कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, 'महागठबंधन ने सबसे पहले अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा की. हमने अपना घोषणापत्र भी सबसे पहले जारी किया. इससे पता चलता है कि बिहार को लेकर कौन गंभीर है. हमने पहले दिन से ही तय कर लिया था कि हम बिहार के लिए क्या करेंगे. हमें बिहार को पटरी पर लाना है. आज का दिन बहुत ही शुभ है क्योंकि बिहार राज्य इस 'प्रण' का इंतजार कर रहा था.' तेजस्वी का प्रण नाम से घोषणा पत्र जारी किए जाने के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि महागठबंधन ने सबसे पहले सीएम फेस घोषित किया और सबसे पहले मेनिफेस्टो भी किया जारी. उन्होंने कहा कि आज बहुत पावन दिन है जिसमें हम यह संकल्प पत्र जारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिहार 20 साल पीछे चला गया है. सीपीआई राज्य सचिव रामनरेश पांडेय ने बयान दिया कि बिहार के इतिहास में पहला घोषणा पत्र है जिसमें सरकार हर परिवार के सदस्य को नौकरी और 5 डिसमिल जमीन देगी. महागठबंधन के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने बयान दिया कि ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग इस घोषणा पत्र में है. युवाओं को नौकरी, रोजगार समेत सभी वायदों को हम पूरा करेंगे. शिक्षकों,स्वास्थ्यकर्मियों समेत सभी की मांगे पूरी होंगी. पहले दिन से ही हम घोषणा पत्र के हिसाब से काम करेंगे. '30-35 वर्ष बिहार की सेवा करेंगे' इस मौके पर वीआईपी प्रमुख और महागठबंधन के डिप्टी सीएम चेहरे मुकेश सहनी ने कहा, '…आज हमने एक नए बिहार के लिए संकल्प पत्र लॉन्च किया है. अगले 30-35 वर्षों तक हम बिहार के लोगों की सेवा के लिए काम करेंगे. हम जनता की सभी आकांक्षाओं को पूरा करेंगे. हम जनता से किए गए सभी वादों को पूरा करेंगे. राज्य की जनता महागठबंधन के समर्थन में खड़ी है और हम बिहार में सरकार बना रहे हैं. दूसरी ओर, एनडीए के पास कोई 'संकल्प' नहीं है.'

CM डॉ. यादव बोले – मार्ग चौड़ीकरण में सहयोग करने वाले पात्र नागरिकों को मिलेगा आवास योजना का लाभ

स्वप्रेरणा से मार्ग चौड़ीकरण के लिए स्वत: निर्माण हटाने वाले पात्र नागरिकों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केडी गेट से निकास चौराहा मार्ग चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत उज्जैन के केडी गेट से निकास चौराहा मार्ग के प्रगतिरत चौड़ीकरण कार्य का खजूरवाली मस्जिद के समीप मंगलवार को निरीक्षण किया। स्वप्रेरणा से विकास के लिए नागरिकों द्वारा मार्ग चौड़ीकरण के लिए अपने घरों के कुछ हिस्से को हटाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों द्वारा प्रस्तुत अनुपम उदाहरण पर प्रसन्नता व्यक्त कर नागरिकों का अभिनन्दन किया। उन्होंने कहा कि मार्ग चौड़ीकरण से शहर के इस पुराने बाजार को पुनः नई दिशा मिलेगी और व्यापार बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां नागरिकों से चर्चा कर उनकी कुशलक्षेम जानी और सिंहस्थ कार्यों की व्यवस्थाओं की चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए कि शहर के विकास के लिए स्वप्रेरणा से मार्ग चौड़ीकरण के लिए मकान तोड़ने का कार्य करने वाले पात्र नागरिकों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जाए। कार्य तीव्र गति से हो और नागरिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाएं। निरीक्षण के दौरान विधायक  अनिल जैन कालूहेड़ा,  संजय अग्रवाल,  रवि सोलंकी आदि उपस्थित रहें।  

माता और बहनों का त्याग ही हमारे देश को अखंडता और अनेकता में एकता के सूत्र में पिरोता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सरलता, निश्चलता, क्षमता और योग्यता के बल पर संपूर्ण भारत में बिहारवासीयों ने बनाई अपनी पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव माता और बहनों का त्याग ही हमारे देश को "अखंडता" और "अनेकता में एकता" के सूत्र में पिरोता है बिहार भारत की दिशा तय करता है, बिहार पर परमात्मा का है विशेष आशीर्वाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के विक्रम सरोवर पर छठ पूजन में हुए सम्मिलित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्वांचल और पूर्वोत्तर के अद्भुत छठ महापर्व की प्रदेशवासियों को मंगलकामनाएं और बधाइयां देते हुए कहा कि छठ मैया का महापर्व वैज्ञानिक पद्धति आधारित होकर सूर्य और जल की उपासना का पर्व है। भगवान सूर्यनारायरण सम्पूर्ण सृष्टि को ऊर्जा देकर सृष्टि का संचालन करते है, वही जल से ही जीवन की उत्पत्ति हुई है। छट व्रत हमें आत्म नियंत्रण, संयम और आत्मबल प्रदान करता है। अस्त और उदय होते हुए सूर्य का पूजन करने वाले इस पर्व की बात ही निराली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय स्थित विक्रम सरोवर पर मंगलवार को आयोजित छठ पूजन में शामिल होने के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की बिहार भारत की दिशा तय करता है। बिहार पर परमात्मा का विशेष आशीर्वाद है। बिहार बुद्ध और महावीर की भूमि भी है, जिन्होंने अपने ज्ञान से देश ही नहीं संपूर्ण दुनिया को दिशा प्रदान है। सबसे ज्यादा आईएएस, आईपीएस किसी राज्य से निकलते हैं तो वह बिहार है। सरलता, निश्चलता, क्षमता और योग्यता के बल पर संपूर्ण भारत में बिहारवासी अपनी पहचान बनाते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की मध्यप्रदेश से बिहार का संबंध आदिकाल से रहा है। मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा गया है। शिप्रा मैया का जल बिहार तक चंबल मैया, यमुना मैया और गंगा मैया के माध्यम से पहुंचता है। अमरकंटक से निकली सोन नदी गंगा मैया के माध्यम से बिहार पहुंचकर वहां समृद्धि फैलाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की माताओं और बहनों द्वारा देश , प्रदेश और परिवार की समृद्धि के लिए छठी मैया का व्रत रखा जाता है। माताओं और बहनों का त्याग कुटुंब और परिवार की एकता को कायम रखता है। हमारी संस्कृति मातृ शक्ति आधारित संस्कृति है, हमारे देश को "भारत माता" माना गया है। माताएं और बहनें अपने परिवार में सभी कष्ट सहकर भी पूरे परिवार की सेवा कर मंगल की कामना करती है। माताएं और बहने सबसे बड़ी योद्धा होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की एकता में सभी पर्व और त्यौहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माता और बहनों का त्याग ही हमारे देश को "अखंडता" और "अनेकता में एकता" के सूत्र में पिरोता है। कुटुंब परंपरा का यह पर्व लाखों सालों से चलता आया है। छठ मैया का यह पर्व माता सीता से भी जुड़ता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य राम मंदिर बना है। वही सीतामढ़ी में भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 800 करोड़ की लागत से भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। माता सीता का जीवन संपूर्ण भारत के लिए प्रेरणा स्त्रोत है वो राजकुमारी होकर भी वन में गई। राम राज्य की अवधारणा भी माता सीता के संकल्प से पूर्ण हुई। उज्जैन स्थित विक्रम सरोवर पर मिथिला घाट निर्माण की दी सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव विक्रम सरोवर पर छठ पूजन किया और श्रद्धालुओं से चर्चा कर छठ महापर्व की मंगलकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की विक्रम सरोवर सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रम सरोवर पर मिथिला घाट के निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिल रही उड़ान, घरेलू यात्रियों में 15.7% और एयर कार्गो में 19.1% का आया उछाल

आसमान में नई ऊंचाइयां छू रहा उत्तर प्रदेश, हवाई यात्री और कार्गो ट्रैफिक में रिकॉर्ड वृद्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिल रही उड़ान, घरेलू यात्रियों में 15.7% और एयर कार्गो में 19.1% का आया उछाल वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहर बने उत्तर प्रदेश की हवाई ग्रोथ के इंजन अप्रैल से अगस्त 2025 की अवधि में उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों से 60 लाख से अधिक यात्रियों ने किया सफर इन तीन महीनों में भारत के कुल हवाई यातायात में राज्य की हिस्सेदारी 3.52% तक पहुंची 2016-17 में 59.97 लाख यात्रियों की तुलना में 2024-25 में 142.28 लाख तक पहुंचे एयर पैसेंजर्स नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ से प्रदेश और अन्य राज्यों के पैसेंजर्स को मिलेगी और भी बेहतर कनेक्टिविटी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब न केवल सड़क पर, बल्कि आसमान में भी विकास की उड़ान भर रहा है। राज्य की हवाई कनेक्टिविटी और यात्री संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे प्रदेश अब भारत की हवाई ग्रोथ स्टोरी में एक अहम किरदार बन गया है। अप्रैल से अगस्त 2025 की अवधि में उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 14.6% बढ़कर 60.02 लाख हो गई है। वहीं इस अवधि में भारत के कुल हवाई यातायात में राज्य की हिस्सेदारी 3.52% तक पहुंच गई, जो 2024 की तुलना में 34 बेसिस पॉइंट्स अधिक है। इससे साफ है कि अब देश के हर 30 में से एक हवाई यात्री उत्तर प्रदेश से यात्रा कर रहा है। राज्य में हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ‘कनेक्टेड यूपी, समृद्ध यूपी’ विजन के तहत पेश की थी। उनका लक्ष्य रहा है कि हर क्षेत्र, हर जिला आधुनिक परिवहन से जुड़े ताकि पर्यटन, व्यापार और रोजगार में नई गति आए। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ के साथ इस रफ्तार में और भी वृद्धि होगी और सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी कनेक्टिविटी के नए अवसर प्राप्त होंगे। 2017 से 2025 तक यूपी की हवाई यात्रा का सफर साल 2016-17 में जहां उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों से 59.97 लाख यात्री यात्रा करते थे, वहीं FY2024-25 में यह संख्या बढ़कर 142.28 लाख तक पहुंच गई। इनमें 129.29 लाख घरेलू और 12.99 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री शामिल रहे। इस दौरान राज्य का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 10.1% रहा, जो एविएशन सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग को दर्शाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान FY2020-21 में यात्री संख्या 48.35 लाख तक गिर गई थी, लेकिन यूपी ने सबसे तेज रिकवरी दिखाई। महज दो वर्षों में यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई, जो राज्य की मजबूत हवाई नीति और बेहतर प्रबंधन का प्रमाण है। 2023-24 की तुलना में 2024-25 में हवाई यात्रियों की संख्या में 25.9 प्रतिशत का ग्रोथ दर्ज किया गया है, जबकि 2023-24 और 2024-25 में अप्रैल-अगस्त माह के बीच कंपैरिजन करें तो यह ग्रोथ 14.6% रही। इस दौरान डॉमेस्टिक एयर पैसेंजर्स में 15.7% और इंटरनेशनल पैसेंजर्स की संख्या में 4.3% ग्रोथ दर्ज की गई। अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी बने स्टार परफॉर्मर राज्य के कई शहरों ने इस ग्रोथ में अहम योगदान दिया है। 2023-24 से 2024-25 के बीच वाराणसी में 34.4%, प्रयागराज में 76.4%, गोरखपुर में 27.6% और कानपुर में 13.3% की वृद्धि दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी ने यात्री संख्या को तेजी से बढ़ाया है। खासतौर पर अयोध्या एयरपोर्ट, जिसे मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के नाम पर समर्पित किया था, अब उत्तर भारत के सबसे तेजी से बढ़ते टर्मिनल्स में शामिल है। 2023-24 में जहां 2 लाख से ज्यादा पैसेंजर्स ने यहां से हवाई उड़ान भरी थी तो वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 लाख से अधिक पहुंच गया। वहीं प्रयागराज और वाराणसी से भी धार्मिक और व्यावसायिक उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रयागराज में 2023-24 में 6 लाख से अधिक एयर पैसेंजर्स ने यात्रा की तो वहीं 2024-25 में यह संख्या 10.77 लाख से अधिक पहुंच गई। इसी तरह वाराणसी में 2023-24 में करीब 30 लाख एयर पैसेंजर्स यात्रा कर रहे थे तो वहीं 2024-25 यह संख्या 40 लाख का आंकड़ा पार कर गई। गोरखपुर में 2023-24 में 6.8 लाख की तुलना में 2024-25 में 8.67 लाख से अधिक हवाई यात्रियों ने सफर किया। लखनऊ ने भी अपनी रफ्तार में इजाफा किया है, जहां 2023-24 की तुलना में 2024-25 में 4.1% की वृद्धि हुई है। कार्गो ट्रैफिक में भी जबरदस्त वृद्धि उत्तर प्रदेश अब व्यापार और निर्यात के लिए भी एयर कनेक्टिविटी का बड़ा केंद्र बन रहा है। FY2016-17 से FY2024-25 तक राज्य के एयर कार्गो में 19.1% का CAGR दर्ज किया गया है। यह 5.89 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 28.36 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो कि अब तक का सर्वाधिक है। FY2024-25 में लखनऊ एयरपोर्ट ने 22,099 मीट्रिक टन कार्गो हैंडल किया, जबकि वाराणसी में 27.7% और प्रयागराज में 50% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2023-24 से 2024-25 के बीच टोटल ग्रोथ 9.4% रही और इस दौरान एयर कॉर्गो 25,915 मीट्रिक टन से 28,356 मीट्रिक टन पहुंच गया। अप्रैल-अगस्त 2025 में कानपुर (165%) और आगरा (247%) में रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज हुई जो बताता है कि राज्य के इंडस्ट्रियल क्लस्टर अब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जुड़ रहे हैं। अप्रैल-अगस्त 2025 में राज्य का भारत के कुल एयर कार्गो में हिस्सा 0.79% हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1 बेसिस पॉइंट अधिक है। साकार हो रहा योगी सरकार का विजन उत्तर प्रदेश सिविल एविएशन के डायरेक्टर ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि हवाई कनेक्टिविटी सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, पर्यटन और निवेश की नई शक्ति है। जब हर जिले से उड़ान संभव होगी, तो हर नागरिक का जीवन स्तर ऊंचा होगा। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में अयोध्या, कुशीनगर और जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) जैसे नए हवाई अड्डों का तेजी से विकास किया गया है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश उत्तरी भारत का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की ओर अग्रसर होगा। इसी क्रम में प्रदेश सरकार कई नए एयर … Read more

9.36 लाख किसानों ने किया पंजीयन, मध्य प्रदेश में भावांतर योजना से सोयाबीन की बड़ी खरीद

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए अच्छी खबर है। भावांतर योजना के तहत 24 अक्टूबर से प्रदेश की सभी मंडियों में सोयाबीन की खरीदी शुरू हो गई है, जो 15 जनवरी 2026 तक चलेगी।  अभी तक 14 हजार 727 किसानों से 25 हजार 999 टन सोयाबीन खरीदी गई है।प्रदेश में सोयाबीन की बिक्री के लिए लागू की गई भावांतर योजना में 9 लाख 36 हजार 352 किसानों ने पंजीयन कराया है। सोयाबीन के लिए एमएसपी प्रति क्विंटल 5328 रुपए घोषित की गई है। खास बात ये है कि किसान पहले की भांति मंडियों में सोयाबीन का विक्रय करेगा। योजना के तहत सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार भाव के बीच का अंतर सरकार द्वारा दिया जाएगा।फसल बिक्री के 15 दिन के भीतर भावमें अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में अंतरित कर दी जाएगी। अबतक 14 हजार 727 किसानों से 25 हजार 999 टन सोयाबीन की खरीदी प्रदेश में भावांतर योजना के तहत 27 अक्टूबर को 7 हजार 981 किसानों से 14 हजार 214 टन सोयाबीन की खरीदी हुई। कृषि उपज मंडी उज्जैन में सर्वाधिक 529, देवास में 512, ताल में 486, इंदौर में 455, खातेगांव में 425, बैरसिया में 396, आगर में 376, सागर में 368, आष्टा में 339 और शाजापुर में 335 टन सोयाबीन की खरीदी हुई। प्रदेश में सोयाबीन की बुवाई का रकवा वर्तमान में 53.20 लाख हेक्टेयर है। इस वर्ष 55.54 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ है। सोयाबीन खरीदी के प्रथम मॉडल भाव की घोषणा 7 नवंबर 2025 को की जाएगी। 9.36 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों ने कराया है पंजीयन सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए लागू की भावान्तर योजना के तहत 3 से 17 अक्टूबर तक शुरू हुए रजिस्ट्रेशन में 9.36 लाख किसानों ने पंजीयन करवाया है। प्रदेश में सात जिले उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सीहोर, विदिशा और सागर ऐसे हैं जहां 50-50 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन करवाया है। इसी तरह 21 जिलों से 10-10 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन करवाया है। प्रदेश में 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक सोयाबीन की विक्रय अवधि रहेगी। अगर एमएसपी से कम कीमत पर सोयाबीन बिकता है तो किसानों के घाटे की भरपाई भावान्तर योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। फसल के विक्रय मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP के अन्तर की राशि सीधे राज्य सरकार देगी। सीएम ने अधिकारियों को दिए है ये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि किसानों के हित में भावांतर योजना प्रारंभ की गई है, प्रदेश में तीन गुना से अधिक पंजीयन योजना में हुए हैं। जिलों में किसानों को मंडियों और उपमंडियों में सोयाबीन विक्रय के लिए आवश्यक तैयारियां पूर्ण की जाएं।ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से किसानों के पंजीकृत बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भावांतर राशि का भुगतान निर्धारित अवधि में किया जाए।भुगतान के संबंध में किसान को एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाए। ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन के बाद मंडी पोर्टल में ई-मंडी पोर्टल पर सभी कार्य इलेक्ट्रानिक माध्यम से किए गए हैं। प्रवेश गेट और प्रांगण की सीसीटीवी मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक मंडी में हेल्प डेक्स भी बनाई गई है। कृषि मंत्री ने दी ये जानकारी कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा केन्द्र सरकार को 26 लाख 49 हजार मीट्रिक टन का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे भारत सरकार द्वारा यथावत स्वीकृत करने की सहमति व्यक्त की  है। जब मण्डियों एवं बाजारों में किसानों को उनकी फसल का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से ना मिले ये सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने भावांतर योजना लागू की है। इस वर्ष खरीफ-2025 में सोयाबीन का मण्डी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम है इसलिये किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश में भावांतर योजना लागू की गई, ताकि किसानों को किसी प्रकार की हानि न हो और उन्हें उपज का वाजिब दाम प्राप्त हो सके। प्रदेश में सोयाबीन में भावांतर योजनांतर्गत किसानों का पंजीयन 3 से 17 अक्टूबर तक किया गया है, जिसमें 9 लाख 36 हजार कृषकों ने पंजीयन कराया। पंजीकृत किसानों की भूमि का रकबा 22 लाख 64 हजार हेक्टेयर है।

कुआलालंपुर में साइन हुआ चीन-ASEAN FTA 3.0, व्यापार पर अमेरिकी टैरिफ का दबाव घटेगा

नई दिल्ली अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के असर को कम करने के लिए तमाम देश अपने-अपने तरीके से प्रयास कर रहे हैं. इस बीच दुनिया के लिए टेंशन की सबसे बड़ी वजह US-China Tariff War बना दिखाई दिया. हालांकि, दुनिया की इन दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तनाव घटने के संकेत भी मिले हैं और इसी हफ्ते के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं. लेकिन इससे पहले ही China ने एक बड़ी डील कर डाली है और उसने आसियान के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते पर साइन किए हैं. US Tariff के असर को कम करने के लिए ये डील कुआलालंपुर में हुई है.  चीन-आसियान के बीच बड़ा कारोबार रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशियाई ब्लॉक आसियान और चीन ने मंगलवार को अपने मुक्त व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने के लिए हस्ताक्षर किए. इसमें डिजिटल, ग्रीन इकोनॉमी और अन्य नए उद्योगों पर फोकस किया जाएगा. आसियान के आंकड़ों के अनुसार, 11 सदस्यीय दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. बीते साल दोनों देशों के बीच कुल 771 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ. चीन लगातार बढ़ा रहा व्यापारिक संबंध अमेरिका के टैरिफ अटैक के बीच चीन लगातार आसियान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो 3.8 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद वाला क्षेत्र है. ऐसा इसलिए ताकि दुनिया भर के देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा लगाए गए भारी आयात शुल्क का मुकाबला किया जा सके. गौरतलब है कि रेयर अर्थ मिनरल्स और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्यात प्रतिबंधों को लेकर प्रमुख शक्तियों की आलोचना के बावजूद चीन खुद को अधिक एक ओपन इकोनॉमी के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है. 2022 में बात शुरू, अब हो गई डील ASEAN के साथ चीन के FTA 3.0 पर मलेशिया में इस समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षर किए गए. इसमें ट्रंप ने रविवार को एशिया की अपनी यात्रा की शुरुआत में भाग लिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, इस उन्नत आसियान-चीन समझौते पर बातचीत नवंबर 2022 में शुरू हुई थी और इस साल मई में समाप्त हुई. ये वो समय था जबकि डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ के साथ आक्रामक रुख अपनाए नजर आए. इससे पहले दोनों के बीच पहला मुक्त व्यापार समझौता 2010 में लागू हुआ था. क्यों खास हैं चीन-ASEAN?  चीन और आसियान दोनों क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) का हिस्सा हैं, जो दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक समूह है. दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी और वैश्विक GDP के लगभग 30% को ये कवर करता है. मलेशिया ने सोमवार को कुआलालंपुर में आरसीईपी शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जो पिछले पांच सालों में पहली बार थी. चीन ने इससे पहले कहा था कि यह समझौता चीन और आसियान के बीच कृषि, डिजिटल अर्थव्यवस्था और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में बेहतर बाजार पहुंच की राह आसान बनाएगा.  कुछ एनालिस्ट इस ब्लॉक को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के विरुद्ध एक संभावित बफर के रूप में देखते हैं, लेकिन इसके सदस्यों के बीच प्रतिस्पर्धी हितों के कारण इसके प्रावधानों को कुछ अन्य क्षेत्रीय व्यापार समझौतों की तुलना में कमजोर माना जाता है.