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मतदाता सूची अपडेट: छत्तीसगढ़ में SIR की तैयारी पूरी, फरवरी तक रहेगी खुली प्रक्रिया

रायपुर  बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) का काम पूरा होने के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार को उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर के दूसरे चरण की घोषणा की। यहां एसआइआर का काम मंगलवार यानी आज 28 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा और सात फरवरी तक चलेगा। प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की तैयारी पूरी कर ली गई है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मंगलवार से प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्रदेश में 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार मतदाता हैं। प्रदेश में पंचायत चुनाव में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने 1 जनवरी 2025 की तिथि में मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 11 लाख 5,391 बताई थी। इसमें 1 करोड़ 4 लाख 27,834 पुरुष, 1 करोड़ 6 लाख 76,821 महिला और 736 तृतीय जेंडर मतदाता शामिल हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर को लेकर पुरानी और वर्तमान लिस्ट का मिलान किया जा चुका है। प्रदेश के सभी जिलों में एसआईआर एक साथ लागू किया जाएगा। सर्वे को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। एसआईआर में नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे और लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा। बीएलओ घर-घर जाकर 2003 की लिस्ट से मिलान करेंगे और कमियों को दूर करेंगे। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किया निर्णय का स्वागत उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के एसआईआर के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जो पात्र और देश के नागरिक हो, उनके ही नाम मतदाता सूची में होने चाहिए। एसआईआर का निर्णय स्वागत योग्य है। भूपेश बघेल ने सरकार पर साधा निशाना पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केद्रीय निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए अवैध प्रवासियों की पहचान पर स्पष्टता की मांग की है। दिल्ली रवाना होने से पहले सोमवार को राजधानी के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि एसआईआर की घोषणा हो गई है, लेकिन चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि बिहार में कितने बांग्लादेशी चिन्हित किए गए और उनमें से कितने की सूची केंद्र सरकार को दी गई है। इनमें कितने लोग बाहर हुए हैं क्योंकि एसआईआर से विदेशी नागरिक भगाने की बात कही गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय अभी तक यह नहीं बता पाया है कि छत्तीसगढ़ में कितने पाकिस्तानी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिया था कि तीन दिनों के भीतर जितने भी पाकिस्तानी हैं, उन्हें बाहर किया जाए। लेकिन, राज्य सरकार अभी तक पाकिस्तानी लोगों की पहचान नहीं कर पाई है। 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता जिन 12 राज्यों में दूसरे चरण में एसआइआर का काम होने जा रहा है, उनमें मतदाता की संख्या करीब 51 करोड़ है। इनमें सबसे अधिक 15.44 करोड़ मतदाता अकेले उत्तर प्रदेश में है, जबकि बंगाल में 7.66 करोड़, तमिलनाडु में 6.41 करोड़, मध्य प्रदेश में 5.74 करोड़, राजस्थान में 5.48 करोड़ व छत्तीसगढ़ में 2.12 करोड़ मतदाता हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस दौरान साफ किया है कि जिन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर की घोषणा की गई है, उन सभी राज्यों की मतदाता सूची में तत्काल प्रभाव से फेरबदल पर रोक लगा दी है। इस बीच इनमें न तो कोई नाम जोड़ा जा सकेगा और न ही हटाया जा सकेगा। एसआइआर के दौरान प्रत्येक मतदाता को एक यूनिक फॉर्म दिया जाएगा। इसमें पुराना पता, फोटो आदि छपा हुआ होगा। यदि मतदाता उस पते पर नहीं रह रहा है तो वह उसमें संशोधन कर सकता है। आयोग ने इस दौरान मतदाताओं को सुझाव दिया है कि गणना फार्म में अपने रंगीन फोटो लगाएं ताकि जो पहचान पत्र जारी किए जाने हैं, उनमें चेहरे उभरकर सामने आ सकें। इन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में होगा एसआइआर उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, राजस्थान, केरल, गुजरात, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार। इनमें से बंगाल, तमिलनाडु, केरल व पुडुचेरी में अगले साल यानी 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, गोवा में 2027 में विधानसभा होने हैं। यह रहेगा मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम     गणना पत्रों की छपाई व बीएलओ को प्रशिक्षण: 28 अक्टूबर से तीन नवंबर तक।     घर-घर जाकर पुनरीक्षण का काम- चार नवंबर से चार दिसंबर तक।     मतदाता सूची के मसौदे का प्रकाशन- नौ दिसंबर दावे और आपत्तियों का समय- नौ दिसंबर से आठ जनवरी 2026 तक।     दस्तावेजों की जांच के लिए नोटिस, सुनवाई, सत्यापन : नौ दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक ।     अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन- सात फरवरी 2026। अब तक आठ बार एसआइआर मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण का काम देश में कोई पहली बार नहीं हो रहा है। 1951 से 2004 तक यह आठ बार हो चुका है। अंतिम बार यह 21 साल पहले 2002 से 2004 के बीच देश के अधिकांश राज्यों में हुआ था। आयोग ने कहा कि एसआइआर का यह काम राजनीतिक दलों की ओर से लगातार मतदाता सूची की गडबड़ियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बाद शुरू किया गया है। इसके जरिए मतदाता सूची को पूरी तरह से शुद्ध और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य है। आखिर, एसआइआर क्यों जरूरी? आयोग ने बताया कि एसआइआर क्यों जरूरी है? उसके मुताबिक, बदलते शहरीकरण में लोगों का तेजी से विस्थापन हो रहा है। यह इसकी एक बड़ी वजह है। दूसरा इसके चलते काफी लोगों के मतदाता सूची में दो-दो जगह नाम दर्ज हैं। तीसरा मतदाता सूची में मतदाताओं के मृत होने के बाद भी नामों का हटाया नहीं जाना है। चौथी वजह देश के तमाम हिस्सों में गलत तरीके से घुसपैठ करके बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जुड़वा लिया है। एसआइआर के दौरान इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच हो सकेगी। सभी राज्य सरकारें सहयोग के लिए प्रतिबद्ध, किसी दल से कोई मनमुटाव नहीं बंगाल में एसआइआर को लेकर सत्ताधारी दलों की ओर से की जा रही विरोधी टिप्पणियों से जुड़े सवाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने कहा कि एसआइआर एक संवैधानिक प्रक्रिया है। संविधान के तहत … Read more

सिंहस्थ से पहले उज्जैन को मिलेगा विज्ञान की सौगात, इंटरनेशनल पैरामीटर्स वाली लैब होगी तैयार

उज्जैन  उज्जैन अब प्रदेश के हेल्थ सेक्टर में नई पहचान बनाने जा रहा है। शहर में इंटरनेशनल पैरामीटर्स वाली फूड एंड ड्रग टेस्टिंग लैब की स्थापना की तैयारी जोरों पर है। यह अत्याधुनिक लैब लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी, जिसका निर्माण कार्य मार्च 2026 से शुरू होने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार, इस लैब में खाद्य पदार्थों, दवाओं और पेय पदार्थों की गुणवत्ता की जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों (International Standards) के अनुसार की जाएगी। इससे प्रदेश को सुरक्षित खाद्य एवं औषधि आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। फूड एंड ड्रग विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेश में कई नमूने जांच के लिए भोपाल या दिल्ली भेजने पड़ते थे, जिससे रिपोर्ट आने में काफी समय लगता था। उज्जैन में इस नई सुविधा के शुरू होने से पूरे मालवा क्षेत्र को त्वरित जांच सेवा उपलब्ध हो सकेगी। यह लैब अत्याधुनिक उपकरणों, हाई-स्पीड एनालाइज़र, और डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम से सुसज्जित होगी। इसमें प्रशिक्षित वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम कार्य करेगी। परियोजना का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 से पहले इस लैब को पूरी तरह संचालन में लाना है ताकि आयोजन के दौरान खाद्य और दवा सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। इस परियोजना से उज्जैन को औद्योगिक और स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि यह लैब न केवल उज्जैन बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी एक रीजनल रेफरेंस सेंटर के रूप में काम करेगी। भोपाल लैब में होती थी जांच, रिपोर्ट आने में लगते थे महीनों अब तक प्रदेश भर से जहरीली कफ सिरप के अलावा कई दवाइयों, मिलावटी खाद्य सामग्री के जो सैंपल लिए जाते थे. उनकी जांच भोपाल स्थित राज्य प्रयोगशाला के जरिए होती थी. जिसमें जांच रिपोर्ट आने में सप्ताह से लेकर कई महीने तक लग जाते थे. ऐसी स्थिति में ना तो मिलावटखोरों पर प्रभावी कार्रवाई हो पाती थी, ना ही समय रहते मिलावट पर ही अंकुश लगा पता था. यही वजह है कि लंबे समय से राज्य सरकार अब इंदौर में एक समानांतर लैब स्थापित करने के प्रयासों में थी. फूड एंड ड्रग लैब का सीएम ने किया शुभारंभ 5 साल पहले कमलनाथ सरकार द्वारा चलाए गए शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के दौरान इंदौर में जिस फूड एंड ड्रग लैब की आधारशिला रखी गई थी. उसका शुभारंभ सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया गया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने मिलावटखोरों को चेतावनी देते हुए कहा अब "लैब से तत्काल रिपोर्ट प्राप्त होगी. जिसके आधार पर मिलावट करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकेगी." मिलावटी दवाई और खाद्य उत्पादों की होगी जांच वहीं स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया "मध्य प्रदेश में अब फूड एंड ड्रग की जांच के तमाम संसाधनों के अपग्रेड होने के साथ मिलावटी दवाई के अलावा खानपान में मिलावट की जांच क्षमता में 200% वृद्धि हुई है. इंदौर की लैब तैयार हो जाने से 6000 की तुलना में अब करीब 20,000 जांच हो सकेगी. इसके अलावा अब जल्द से जल्द जहरीली सिरप और अन्य मिलावटी सामग्री की रिपोर्ट भी तत्काल प्राप्त हो जाएगी. मध्य प्रदेश में होगी औषधी प्रयोगशालाएं स्थापित उन्होंने कहा 8 करोड़ रुपए की लागत से मध्य प्रदेश की दूसरी आधुनिक लैब स्थापित किए जाने के बाद जल्द ही संभाग स्तर पर खाद एवं औषधी प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएगी. जिसमें ग्वालियर जबलपुर के बाद उज्जैन में सेहत के लिहाज से एक आधुनिक लैब स्थापित होगी. जहां इंटरनेशनल पैरामीटर के हिसाब से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप होगा. इसके अलावा मध्य प्रदेश में होने वाले तमाम टेस्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर सके इसके लिए भी प्रयास हो रहे हैं.

योगी सरकार के प्रयास से देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य और लोक कलाओं की सुनाई देगी गूंज

काशी गंगा महोत्सव में भजनों से भक्ति रस की सरिता बहाएंगे हंसराज रघुवंशी योगी सरकार के प्रयास से देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य और लोक कलाओं की सुनाई देगी गूंज नामो घाट व राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की सांस्कृतिक परंपरा को बनाएंगे भव्य व समृद्ध लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी पद्मश्री मालिनी अवस्थी, पद्मश्री गीता चन्द्रन देंगी भरतनाट्यम की प्रस्तुति -1 से 4 नवम्बर तक माँ जान्हवी के पावन तट पर होगा भव्य आयोजन, काशी गंगा महोत्सव बनेगा माध्यम -नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी देंगे विभिन्न प्रकार की प्रस्तुति वाराणसी  देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य व लोक कलाओं की संगीतमय सरिता बहेगी। माँ जान्हवी के पावन तट पर इस वर्ष गंगा महोत्सव का आयोजन 1 से 4 नवम्बर तक किया जाएगा। योगी सरकार के प्रयास से राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की इस सांस्कृतिक परंपरा को और भव्य बनाएंगे जिनमें शास्त्रीय, भक्ति तथा लोक संगीत का अद्भुत संगम दिखाई देगा। इस महोत्सव में गायक हंसराज रघुवंशी अपने भजनों से श्रोताओं को भक्ति रस से ओत-प्रोत करेंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी अपने लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी। पद्मश्री गीता चन्द्रन का भरतनाट्यम नृत्य भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहेगा। वहीं, नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। कई मायनों में विशिष्ट होगा आयोजन संयुक्त निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार ने बताया कि चार दिवसीय इस उत्सव में गीत, संगीत, नृत्य और वादन की गंगा बहेगी। गंगा महोत्सव के मंच पर लोक और शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी तो साथ ही पारंपरिक नृत्य शैलियों की झलक भी देखने को मिलेगी। महोत्सव में विशेष रूप से गायक हंसराज रघुवंशी आयोजन के अंतिम दिन अपने भजनों से श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाएंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी 3 अक्टूबर को लोक गायन से काशी की धरती पर उत्तर भारत की लोक परंपराओं को सजीव करेंगी। इसके अतिरिक्त, 2 अक्टूबर को पद्मश्री गीता चंद्रन भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी। गंगा महोत्सव के अंतर्गत होने वाली प्रस्तुतियां शाम 4 बजे से शुरू होंगी।  काशी गंगा महोत्सव ये प्रमुख कलाकार देंगे प्रस्तुति… प्रथम दिन, 1 नवंबर पं० माता प्रसाद मिश्र एवं पं० रविशंकर मिश्र–कथक युगल नृत्य कविता मोहन्ती–ओडिसी नृत्य विदुषी श्वेता दुबे–गायन विदुषी कमला शंकर–स्लाइड गिटार डॉ० रिपि मिश्र–शास्त्रीय गायन डॉ० दिवाकर कश्यप एवं डॉ० प्रभाकर कश्यप–उपशास्त्रीय गायन रवि शर्मा एवं समूह–ब्रज लोक नृत्य एवं संगीत पं० नवल किशोर मल्लिक–शास्त्रीय गायन दूसरा दिन, 2 नवंबर शिवानी शुक्ला–गायन प्रवीण उद्भव–तालयात्रा राजकुमार तिवारी उर्फ राजन तिवारी–गायन डॉ० अर्चना आदित्य महास्कर–गायन सवीर, साकार कलाकृति–पारम्परिक लोक नृत्य वन्दना मिश्रा–गायन प्रो० पं० साहित्य नाहर एवं डॉ० पं० संतोष नाहर–सितार एवं वायलिन जुगलबन्दी ओम प्रकाश–भजन गायन पद्मश्री गीता चन्द्रन–भरतनाट्यम तीसरा दिन 3 नवंबर मीना मिश्रा–गायन विशाल कृष्ण–कथक नृत्य दिव्या शर्मा–हिन्दुस्तानी खयाल गायकी  राकेश कुमार–जनजातीय लोक नृत्य  इन्दु गुप्ता–लोक गायन चेतन जोशी–बांसुरी वादन  विदुषी कविता द्विवेदी–ओडिसी नृत्य  पद्मश्री मालिनी अवस्थी–लोक गायन  चौथा दिन, 4 नवंबर डॉ० शुभांकर डे–गायन डॉ० प्रेम किशोर मिश्र एवं साथी-सितार, सरोद जुगलबन्दी व गायन राहुल रोहित मिश्र–शास्त्रीय गायन रूपन सरकार समन्ता–शास्त्रीय गायन वासुमती बद्रीनाथन–शास्त्रीय गायन शिवानी मिश्रा–कथक समूह नृत्य मानसी रघुवंशी–गायन हंसराज रघुवंशी–भजन गायन

विकसित यूपी @2047 : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महा अभियान

विकसित यूपी @2047 2047 का विजन बना जनआंदोलन, 60 लाख सुझावों से सजे ‘समर्थ यूपी’ के सपने – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महा अभियान – छात्रों, शिक्षकों, उद्यमियों, महिलाओं और किसानों ने रखी अपनी राय – कृषि और शिक्षा रहे सबसे ज्यादा चर्चा के विषय – ग्रामीण युवाओं ने रोजगार और स्किल डेवलपमेंट पर दिया जोर – एमएसएमई को सशक्त बनाने, महिला सुरक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण पर मिल रहे सुझाव – पर्यटन स्थलों के विकास को लेकर नागरिकों ने जताई अपेक्षा – खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों के स्थानीय विस्तार की मांग – साफ-सुथरे प्रशासन और बेहतर कानून व्यवस्था की मांग – शिक्षा को व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाने की अपील – महिला उद्यमिता और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के सुझाव – आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी बढ़ती रुचि दिखी – अभियान बना जनता और शासन के बीच संवाद का सेतु लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने के लक्ष्य को लेकर चल रहा “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 : समृद्धि का शताब्दी पर्व महा अभियान” जनभागीदारी का प्रतीक बनता जा रहा है। मंगलवार तक प्रदेश के 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा भ्रमण कर विभिन्न लक्षित समूहों छात्र, शिक्षक, उद्यमी, कृषक, स्वयंसेवी संगठन, श्रमिक संगठन, मीडिया एवं आम नागरिकों से संवाद स्थापित किया गया। इस दौरान लोगों से प्रदेश की विकास यात्रा और भविष्य के रोडमैप पर सुझाव लिए गए। अब तक पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर करीब 60 लाख फीडबैक प्राप्त हुए हैं। इनमें से 75 फीसदी से ज्यादा सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से मिले हैं। ग्रामीण जन से लेकर उद्यमियों तक सभी ने रखी राय बुलंदशहर के रिकेश कुमार ने कहा कि गांव में उद्योग और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। यदि सरकार निजी साझेदारी (पीपीपी मॉडल) के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को प्राथमिकता दे, तो पलायन की समस्या खत्म हो सकती है। वहीं, शकील खान ने कहा कि राज्य को औद्योगिक शक्ति बनाने के लिए एमएसएमई को आसान ऋण, तकनीकी सहयोग और जिला-आधारित उद्योग पार्क की जरूरत है। निगार फातिमा ने निवेश आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और महिला स्किल मिशन पर जोर दिया। सीमा कुमारी ने कढ़ाई, सिलाई और अगरबत्ती निर्माण जैसे कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही। जोगिंदर सिंह ने कहा कि स्कूल स्तर से ही शिक्षा को व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाया जाए ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें। नागरिकों ने पर्यटन विकास पर जोर दिया अंकित गुप्ता ने मां बेला देवी धाम व शनिदेव मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों के विकास की बात की, डॉ. सुनील शाह ने बेल्हा देवी मंदिर के आसपास कॉरिडोर निर्माण का सुझाव दिया, जबकि रीता जायसवाल और रामेन्द्र त्रिपाठी ने पर्यटन स्थलों पर सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था और सांस्कृतिक पुनर्जीवन की जरूरत बताई। खेलो इंडिया और डिजिटल लाइब्रेरी के लिए सुझाव बलिया से गीता देवी ने खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर पर विस्तार देने का सुझाव दिया, जबकि प्रदीप कुमार ने गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी और रोजगार सृजन केंद्र खोलने की मांग रखी। साफ-सुथरा प्रशासन, बेहतर कानून व्यवस्था पर जोर बरेली के राजकुमार सिंह ने भिखारियों व साधुओं की पहचान प्रणाली, फलदार वृक्षारोपण अनिवार्यता और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की बात कही। बस्ती की शाइस्ता फिरोज ने महिला सुरक्षा, स्किल मिशन, डीबीटी व्यवस्था और बाल विकास योजनाओं को सशक्त करने पर जोर दिया। गाजियाबाद के राजेश अग्निहोत्री ने साफ-सुथरा प्रशासन, बेहतर कानून व्यवस्था और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार की मांग की। युवाओं ने दिखाई सबसे अधिक भागीदारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 30 लाख सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग के युवाओं ने दिए हैं, जबकि 26 लाख से अधिक सुझाव 31-60 वर्ष आयु वर्ग से और 3 लाख से अधिक सुझाव वरिष्ठ नागरिकों से प्राप्त हुए हैं। कृषि और शिक्षा सबसे बड़े फोकस सेक्टर विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों में कृषि (16 लाख) और शिक्षा (15 लाख) सबसे आगे हैं। इसके अलावा ग्रामीण विकास (12 लाख), समाज कल्याण (5 लाख), स्वास्थ्य (4 लाख), पशुधन (3 लाख), इंडस्ट्री (2.5 लाख) और आईटी-टेक (2 लाख) से भी भारी संख्या में सुझाव मिले हैं। जनपदवार आंकड़ों में जौनपुर पहले, संभल दूसरे, गाजीपुर तीसरे, प्रतापगढ़ चौथे और बिजनौर पांचवें स्थान पर हैं। वहीं, इटावा, महोबा, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर और ललितपुर में सुझाव अपेक्षाकृत कम प्राप्त हुए हैं। जन-जागरूकता बैठकों से बढ़ा संवाद महाभियान के तहत राज्यभर में व्यापक जनसंवाद अभियान चलाया गया है। अब तक 214 नगर पालिकाओं, 18 नगर निगमों, 63 जिला पंचायतों, 556 नगर पंचायतों, 751 क्षेत्र पंचायतों और करीब 50 हजार ग्राम पंचायतों में बैठकों व गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है। इन आयोजनों से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विभागों के बीच संवाद को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047' के अनुरूप प्राप्त सुझावों के आधार पर अब विजन डॉक्यूमेंट निर्माण प्रक्रिया जारी है। यह अभियान न केवल विकास का खाका तैयार कर रहा है, बल्कि साझा भागीदारी के माध्यम से जन-जन तक संवाद का सशक्त सेतु बनता जा रहा है।    

पश्चिम बंगाल में अधिकारी तबादलों के 24 घंटे बाद चुनाव आयोग हुआ सक्रिय, SIR पर बड़ी मीटिंग

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) की घोषणा के ठीक पहले ममता बनर्जी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा ‘खेला’ खेला है. राज्य सरकार ने 527 अधिकारियों का एक साथ स्थानांतरण कर दिया, जिसमें 67 आईएएस और 460 राज्य सिविल सेवा अधिकारी शामिल हैं. यह कदम चुनाव आयोग के SIR अभियान से ठीक पहले उठाया गया, जिसे विपक्ष ने चुनावी हेरफेर का प्रयास करार दिया. अब आयोग ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी जिलाधिकारियों (DM) के साथ बैठक बुलाई है, जबकि सभी राजनीतिक दलों के साथ भी चर्चा मंगलवार से ही होनी है. ये बैठकें मंगलवार सुबह 10 बजे ही शुरू हो गई . सीनियर उप चुनाव आयुक्त सभी जिलाधिकारियों के साथ सुबह 10 बजे से मीटिंग शुरू करेंगे. यह मीटिंग वर्चुअल होगी और इसमें राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी और सभी जिलों के डीएम शामिल होंगे. इसके बाद आज ही सभी राजनीतिक दलों के साथ मीटिंग होगी. इस कवायद ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट की सफाई को लेकर तनाव को बढ़ा दिया है. चुनाव आयोग ने सोमवार को SIR के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं. SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना, मृत वोटरों को डिलीट करना, दोहरी एंट्री को दूर करना और प्रवासी वोटरों को अपडेट करना है. प्रक्रिया 28 अक्टूबर से तीन नवंबर तक ट्रेनिंग और प्रिंटिंग के साथ शुरू होगी, जबकि घर-घर सर्वे चार नवंबर से चार दिसंबर तक चलेगा. ड्राफ्ट लिस्ट नौ दिसंबर को जारी होगी, दावा-आपत्ति आठ जनवरी 2026 तक और अंतिम लिस्ट सात फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यह एक्सरसाइज हर योग्य वोटर को शामिल करने और अयोग्य को हटाने के लिए है. बंगाल में कोई विवाद नहीं है, राज्य सरकार अपना सहयोग देगी. ममता बनर्जी ने किया विरोध हालांकि, ममता बनर्जी ने SIR को ‘NRC जैसा अभ्यास’ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि आयोग के अधिकारी हमारे अधिकारियों को धमकियां दे रहे हैं. यह ‘लॉलीपॉप सरकार’ का खेल है. बंगाल में दंगे भड़क सकते हैं. जुलाई से ही ममता का रुख आक्रामक रहा है. उन्होंने बीएलओ की मीटिंग पर नाराजगी जताई कि यह राज्य सरकार को सूचित किए बिना हुई. अक्टूबर में उन्होंने कहा कि आयोग आग के साथ खेल रहा है. उत्तर बंगाल में बाढ़ प्रभावित परिवार दस्तावेज कैसे देंगे. टीएमसी का दावा है कि SIR से 1.2 करोड़ वोटरों को हटाने की साजिश है, जो उनके वोट बैंक को नुकसान पहुंचाएगी. इन आरोपों के बीच राज्य सरकार ने 14 जिलाधिकारियों समेत प्रमुख अधिकारियों का तबादला कर दिया. प्रभावित जिलों में उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कूच बिहार, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, दार्जिलिंग, मालदा, बीरभूम, झारग्राम और पूर्व मिदनापुर शामिल हैं. कई अधिकारी ढाई से चार साल से पद पर थे, जो ECI के तीन साल के नियम का उल्लंघन कर रहे थे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह रूटीन तबादला है, लेकिन SIR शुरू होने के बाद जटिल हो जाता. भाजपा ने इसे ‘अवैध हेरफेर’ बताते हुए आयोग से शिकायत की है. प्रदेश बीजेपी नेता सिसिर बाजोरिया ने कहा कि आयोग की अनुमति के बिना 235 अधिकारियों का तबादला SIR का उल्लंघन है. 17 डीएम, 22 एडीएम, 45 एसडीओ और 151 बीडीओ का तबादला किया गया है. इसे रद्द किया जाए.

‘युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहें’, सीमाओं पर सतर्कता बरतने की दी सलाह – राजनाथ सिंह

नईदिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को 'युद्ध जैसी स्थिति' के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि मई में पाकिस्तान के साथ चार दिनों के सैन्य संघर्ष ने दिखा दिया कि सीमाओं पर कभी भी कुछ भी हो सकता है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को 'कड़ा जवाब' दिया था, लेकिन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भविष्य की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने और सीखने के लिए एक केस स्टडी के रूप में काम करना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि 7-10 मई के अभियान के दौरान स्वदेशी निर्मित सैन्य उपकरणों के प्रभावी उपयोग से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। सिंह ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जहां युद्ध भी 'हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा' था। उन्होंने कहा, 'हालांकि हमने दृढ़ संकल्प के साथ जवाब दिया और हमारी सेनाएं देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी हमें आत्मचिंतन करते रहना होगा।' मंत्री ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर एक केस स्टडी के रूप में काम करेगा जिससे हम सीख सकें और अपना भविष्य तय कर सकें। इस घटना ने हमें एक बार फिर दिखाया है कि हमारी सीमाओं पर, कहीं भी, कभी भी कुछ भी हो सकता है।' उन्होंने कहा, 'हमें युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और हमारी तैयारी हमारी अपनी बुनियाद पर आधारित होनी चाहिए।' रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताएं प्रत्येक क्षेत्र का गहन मूल्यांकन करने की मांग करती हैं, तथा चुनौतियों से निपटने के लिए 'स्वदेशीकरण' ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा, 'स्थापित विश्व व्यवस्था कमजोर हो रही है और कई क्षेत्रों में संघर्ष क्षेत्र बढ़ रहे हैं। इसलिए, भारत के लिए अपनी सुरक्षा और रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करना आवश्यक हो गया है।' सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने आकाश मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस, आकाशतीर वायु रक्षा नियंत्रण प्रणाली और अन्य स्वदेशी उपकरणों और प्लेटफार्मों की शक्ति देखी। इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय बहादुर सशस्त्र बलों के साथ-साथ 'उद्योग योद्धाओं' को भी जाता है, जिन्होंने नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण के क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में काम किया। उन्होंने भारतीय उद्योग को थलसेना, नौसेना और वायुसेना के साथ रक्षा के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक बताया। सिंह ने बताया कि सरकार रक्षा विनिर्माण को बढ़ाने और घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समान अवसर उपलब्ध करा रही है और उद्योग को इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि रक्षा उपकरण न केवल देश में तैयार किए जाएं, बल्कि ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ की भावना को मूर्त रूप देने वाले उपकरण बनाने के लिए एक वास्तविक विनिर्माण आधार स्थापित किया जाए।' उन्होंने कहा, 'नवाचार और अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति विकसित करने के लिए क्वांटम मिशन, अटल नवाचार मिशन और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन जैसी अनेक पहल की गई हैं। हमारे उद्योग को वह हासिल करना होगा जो देश में अभी तक हासिल नहीं हुआ है।' रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 से पहले भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर था, लेकिन आज वह अपनी धरती पर ही रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारा रक्षा उत्पादन, जो 2014 में केवल 46,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें से 33,000 करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र का है।' उन्होंने कहा, 'हमारा रक्षा निर्यात, जो 10 साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब लगभग 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मुझे विश्वास है कि मार्च 2026 तक रक्षा निर्यात 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।' स्वदेशीकरण को और बढ़ाने के लिए, सिंह ने उद्योग से आग्रह किया कि वे आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास करें, तथा केवल सम्पूर्ण प्लेटफॉर्म पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत उप-प्रणालियों और घटकों के स्वदेशी विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करें। रक्षा मंत्री ने कहा कि विदेशों से प्रमुख उपकरणों की खरीद से रखरखाव और जीवन-चक्र लागत के मामले में भारत के संसाधनों पर दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा, 'चूंकि किसी भी प्रणाली में बड़ी संख्या में घटक और इनपुट होते हैं, इसलिए इन उप-प्रणालियों का स्वदेशी निर्माण हमारी स्वदेशी सामग्री को बढ़ाने में मदद कर सकता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘हमारी मिट्टी, हमारा कवच’ हमारी पहली पसंद बने।' रक्षा मंत्री ने कहा कि उद्देश्य केवल भारत में संयोजन करना नहीं होना चाहिए, बल्कि देश के भीतर प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रभावी हो और हमारे स्वदेशी उद्योगों को सशक्त बनाने का साधन भी बने।'

छत्तीसगढ़ के माओवादी नेता बंडी प्रकाश ने समर्पण किया, DGP के सामने हथियार सौंपे

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के माओवादी पार्टी के प्रमुख नेता बंदी प्रकाश ने तेलंगाना DGP के सामने सरेंडर कर दिया है। बंदी प्रकाश नक्सलियों के तेलंगाना स्टेट कमेटी का मेम्बर और स्पेशल जोनल कमेटी मेम्बर भी है। बंदी प्रकाश पर छत्तीसगढ़ में 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बंदी प्रकाश का नाम माओवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल है। बंदी प्रकाश उर्फ ​​प्रभात, अशोक, क्रांति मंचेरियल जिले के मंदामरी से हैं। प्रकाश के पिता सिंगरेनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 1982-84 के बीच "गाँव चलो" आंदोलन के माध्यम से रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) के लिए संघर्ष किया। इसके बाद वे माओवादी पार्टी से संबद्ध सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष बने और वहाँ से राज्य समिति के सदस्य बने। छात्र नेता से बना माओवादी नेता संगठन में ‘प्रभात’, ‘अशोक’ और ‘क्रांति’ जैसे नामों से पहचाने जाने वाला बंडी प्रकाश तेलंगाना के मंचेरियल जिले के मंदामरी क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पिता सिंगरेनी कोलियरी में कर्मचारी हैं। छात्र जीवन में ही वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और 1982–84 के बीच हुए गांव चलो आंदोलन के दौरान रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ गया। इसके बाद सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के रूप में काम किया और धीरे-धीरे संगठन की ऊंची कमेटियों तक पहुंच गया। हाल के महीनों में माओवादियों पर बढ़ते दबाव और शीर्ष नेताओं के मारे जाने व मुख्यधारा में लौटने के बाद उसने भी मुख्यधारा का रास्ता चुन लिया। यहां बता दें कि कुछ दिन पहले पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो प्रमुख भूपति और केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश के नेतृत्व में 271 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके एक दिन बाद कांकेर क्षेत्र में 20 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। बताया जा रहा है कि बंडी प्रकाश के आत्मसमर्पण से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इकाई की गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। इससे पहले भूपति की पत्नी तारक्का, उसकी भाभी सुजाता, और माओवादी नेता सुधाकर की पत्नी ककराला सुनीता भी आत्मसमर्पण कर चुकी हैं। लगातार आत्मसमर्पण की यह श्रृंखला माओवादी संगठन में तेजी से घटते मनोबल और आंतरिक असंतोष की ओर संकेत करती है। सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से नक्सलियों में दहशत ज्ञात हो कि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में पुलिस शहीद दिवस के अवसर पर माओवादियों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि कुछ माओवादी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं और बाकी भी जन-जीवन में शामिल होकर देश के विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के प्रभाव से पार्टी के प्रमुख सदस्य एक के बाद एक अपनी सेना के साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं। पिछले 45 वर्षों से नक्सल संगठन में थे सक्रिय बंदी प्रकाश माओवादी पार्टी में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण संगठनकर्ता हैं। पिछले 45 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे उनके आत्मसमर्पण को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका कहा जा सकता है।

लखनऊ में मुख्यमंत्री ने किया चरण सुहावे गुरु चरण (जोड़े साहिब) यात्रा का स्वागत

गुरु परंपरा ने भारत को दिया त्याग और बलिदान का संदेश- सीएम योगी  लखनऊ में मुख्यमंत्री ने किया चरण सुहावे गुरु चरण (जोड़े साहिब) यात्रा का स्वागत  जहां गुरु के चरण पड़ते हैं, वह स्थान रामराज्य की तरह पवित्र बन जाता है- सीएम योगी   यह यात्रा हमें उस गौरवशाली गुरु परंपरा से जोड़ती है, जिसने भारत की संस्कृति, साहस और बलिदान की भावना को नई दिशा दी- सीएम योगी सिख गुरुओं का भारत की सनातन परंपरा में योगदान अविस्मरणीय है- मुख्यमंत्री – यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है- मुख्यमंत्री लखनऊ  सिख समुदाय की आस्था का प्रतीक 'चरण सुहावे गुरु चरण  यात्रा' के पवित्र जोड़ा साहिब का लखनऊ में भव्य स्वागत हुआ। यह यात्रा सिख समुदाय के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी और माता साहिब कौर के पवित्र जोड़ा साहिब से जुड़ी है, जो सिख आस्था का अत्यंत पवित्र प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु परंपरा ने भारत को केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा, सेवा और बलिदान का आदर्श भी दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस विरासत को अक्षुण्ण रखें और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी प्रेरणा पहुंचाएं। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहे। लखनऊ के यहियागंज गुरुद्वारे में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवाणी सुनी और यात्रा सदस्यों को पटुका पहनाकर सम्मानित किया। गुरुद्वारा कमेटी ने सीएम योगी को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी परंपरा में यह कहा गया है, ‘जिथे जाए बहे मेरा सतगुरु, सो थान सुहावा राम राजे।’ अर्थात जहां भी गुरु महाराज के पावन चरण पड़ते हैं, वह स्थान रामराज्य की तरह पवित्र और पुण्यभूमि बन जाता है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा हमें उस गौरवशाली गुरु परंपरा से जोड़ती है, जिसने भारत की संस्कृति, साहस और बलिदान की भावना को नई दिशा दी। यह त्याग, बलिदान और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा देने वाली यात्रा है- सीएम सीएम योगी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर शुरू हुई है। यह केवल श्रद्धा की यात्रा नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा देने वाली यात्रा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं का भारत की सनातन परंपरा में योगदान अविस्मरणीय है। गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी महाराज और उनके चार साहिबजादों ने जिस प्रकार धर्म, देश और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, वह भारत के इतिहास को नई प्रेरणा देता है। यहियागंज गुरुद्वारा हमारी साझा आस्था और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है- मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग ढाई सौ वर्षों से गुरु महाराज के पावन चरण पादुकाएं, जो पहले अखंड भारत के हिस्से पाकिस्तान में थीं, अब पटना साहिब में स्थापित की जा रही हैं। दिल्ली से शुरू हुई यह यात्रा पूरे देश में गुरु परंपरा के प्रति सम्मान और गौरव का भाव जगाती जा रही है। उन्होंने कहा कि लखनऊ का यहियागंज गुरुद्वारा इसलिए भी विशेष है क्योंकि गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की स्मृतियां इस स्थान से जुड़ी हैं। यह गुरुद्वारा हमारी साझा आस्था और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है- मुख्यमंत्री सीएम योगी ने सिख समुदाय के प्रति आदर व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु परंपरा ने भारत को केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा, सेवा और बलिदान का आदर्श भी दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस विरासत को अक्षुण्ण रखें और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी प्रेरणा पहुंचाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख समाज की यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इस “गुरु चरण यात्रा” को राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक जागरण के संदेश के रूप में आगे बढ़ाएं। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, यूपी कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परबिंदर सिंह के अलावा गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारी व कई जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए महाअभियान, मिशन शक्ति फेज-5.0 की शुरुआत

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति एक क्रांतिकारी पहल है, जो महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। फेज-5.0 का शुभारंभ 20 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया, यह एक माह लंबा अभियान है, जो महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने पर केंद्रित है। मिशन शक्ति की आधिकारिक वेबसाइट (upmissionshakti.in) के अनुसार, यह पहल जागरूकता बढ़ाने, सुरक्षित वातावरण बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखती है। अब तक के चरणों में लाखों महिलाओं को लाभ पहुंचाने वाली यह योजना फेज-5.0 में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है, जिसमें स्वास्थ्य हेल्पलाइन, ड्राइविंग प्रशिक्षण और मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता जैसे नवीन आयाम जोड़े गए हैं। मिशन शक्ति फेज-5.0 का उद्देश्य- मिशन शक्ति फेज-5.0 का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को हिंसा, शोषण और असमानता से मुक्त समाज प्रदान करना है। यह तीन प्रमुख स्तंभों—सुरक्षा (Safety), सम्मान (Dignity) और स्वावलंबन (Self-Reliance)—पर आधारित है। • सुरक्षा: अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, जैसे कि अभियान के दौरान 2,500 से अधिक FIR और 3,900 गिरफ्तारियां। • सम्मान: सामाजिक जागरूकता के माध्यम से महिलाओं को समाज का अभिन्न अंग मानना। • स्वावलंबन: कौशल विकास, उद्यमिता और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉन्च के दौरान कहा, "मिशन शक्ति महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता का मार्ग दिखा रहा है, और इसके सकारात्मक परिणाम हर जगह दिखाई दे रहे हैं।" यह अभियान न केवल सरकारी योजना है, बल्कि पूरे समाज को जोड़ने वाला जन आंदोलन बन चुका है। सरकार द्वारा महिलाओं को जागरूक करने के तरीके: उत्तर प्रदेश सरकार मिशन शक्ति फेज-5.0 के तहत बहुआयामी जागरूकता अभियान चला रही है, जो ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। यह अभियान स्कूलों, पंचायतों, पुलिस स्टेशनों और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से संचालित हो रहा है। यहां कुछ प्रमुख उदाहरण दिए जा रहे हैं: 1. बाइक रैलियां और सड़क नाटक: 21 सितंबर 2025 को सभी जिलों में विशाल बाइक रैलियां आयोजित की गईं, जिसमें हजारों महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं। इसके अलावा, 45,000 से अधिक स्कूलों में छात्राओं द्वारा नौ दुर्गा रूपों पर आधारित स्ट्रीट प्ले (नुक्कड़ नाटक) प्रस्तुत किए गए, जो महिलाओं की शक्ति और सुरक्षा पर केंद्रित थे। ये कार्यक्रम जागरूकता फैलाने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। 2. महिला बीट ऑफिसर तैनाती: अभियान के दौरान 44,177 महिला पुलिसकर्मियों को 57,000 ग्राम पंचायतों और 14,000 शहरी वार्डों में तैनात किया गया। ये अधिकारी घर-घर जाकर महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, हेल्पलाइन नंबरों (जैसे 1090, 181) और सेल्फ-डिफेंस तकनीकों के बारे में जागरूक कर रही हैं। 3. स्वास्थ्य और स्वच्छता जागरूकता कार्यशालाएं: 10 अक्टूबर 2025 को मासिक धर्म स्वच्छता पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जहां विशेषज्ञों ने सैनिटरी पैड के सुरक्षित उपयोग और निपटान पर चर्चा की। मिथकों को दूर करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया गया, जिससे हजारों महिलाओं को लाभ हुआ। इसके अलावा, 'ड्राइविंग माय ड्रीम्स' पहल के तहत 3,000 से अधिक लड़कियों को मुफ्त ड्राइविंग ट्रेनिंग दी जा रही है, जो उनकी स्वावलंबन को बढ़ावा दे रही है। 4. कन्या पूजन और सम्मान समारोह: नवरात्रि के दौरान 5 लाख से अधिक बालिकाओं का कन्या पूजन किया गया, जो शिक्षा, सम्मान और आर्थिक सहायता (कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से) पर जोर देता है। झांसी जैसे जिलों में विशेष आयोजनों में महिलाओं को सम्मानित किया गया, जहां मिशन शक्ति की सफलताओं पर चर्चा हुई। ये अभियान न केवल जागरूकता फैला रहे हैं, बल्कि महिलाओं को सक्रिय भागीदार बना रहे हैं, जिससे अपराध दर में कमी आ रही है। महिलाओं के सम्मान की प्रेरणादायक कहानियां मिशन शक्ति फेज-5.0 ने कई महिलाओं को नई दिशा दी है, जो अब समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। यहां कुछ चुनिंदा कहानियां हैं: • जौनपुर की रानी देवी: मत्स्य पालन की 'लाखपति दीदी': जौनपुर जिले की रानी देवी एक साधारण गृहिणी थीं, लेकिन मिशन शक्ति और ब्लू रेवोल्यूशन योजना के तहत 15 लाख रुपये की अनुदान राशि और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने मत्स्य पालन व्यवसाय शुरू किया। आज वे न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी सशक्त बना रही हैं। उनकी सफलता उत्तर प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र में लहरें पैदा कर रही है। • लखपति दीदी कार्यक्रम की लाभार्थी: आशा और उद्यमिता की मिसाल: नवंबर 2024 तक लाखपति दीदी योजना के तहत हजारों महिलाओं ने स्वरोजगार अपनाया। लखनऊ की एक महिला, जिन्होंने मिशन शक्ति के कौशल विकास केंद्र से सिलाई प्रशिक्षण लिया, आज अपना बुटीक चला रही हैं और 10 अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। यह योजना महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी दिला रही है। • कन्या सुमंगला की कहानी: शिक्षा से सशक्तिकरण: नवरात्रि के कन्या पूजन में सम्मानित एक बालिका, वाराणसी की प्रिया, ने योजना की सहायता से अपनी पढ़ाई पूरी की और अब आईएएस की तैयारी कर रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा, "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं उत्तर प्रदेश को महिलाओं के सशक्तिकरण में अग्रणी बना रही हैं।" ये कहानियां साबित करती हैं कि मिशन शक्ति केवल योजना नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाला आंदोलन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषणों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन शक्ति फेज-5.0 के लॉन्च और विभिन्न आयोजनों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर गहन चर्चा की है। उनके भाषण समाज को दिशा दे रहे हैं: • लॉन्च समारोह (20 सितंबर 2025): लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा, "महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन एक मजबूत समाज और समृद्ध राष्ट्र की नींव हैं। मिशन शक्ति केवल अभियान नहीं, बल्कि जन आंदोलन है। 2017 से पहले बेटियां असुरक्षित महसूस करती थीं, लेकिन आज अंगनवाड़ी केंद्रों से लेकर पुलिस स्टेशनों तक परिवर्तन आया है।" उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की भी प्रशंसा की। • झांसी सम्मान समारोह (27 सितंबर 2025): "उत्तर प्रदेश ने महिलाओं को सशक्त करने में मजबूत उदाहरण स्थापित किया है। मिशन शक्ति के माध्यम से हम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं को मजबूत कर रहे हैं। महिलाओं को शक्ति देना राष्ट्र निर्माण का मूल मंत्र है।" • नवरात्रि कन्या पूजन (अक्टूबर 2025): "कन्या पूजन से हम न … Read more

छठ पर्व: सीएम ने सूर्य को दिया अर्घ्य, कहा- पर्व से मजबूत होती है सनातन संस्कृति की आस्था

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में सूर्य को अर्ध्य देकर छठ पूजा का समापन किया गया. विक्रम सरोवर पर हुए आयोजन में सीएम डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए. इस दौरान खास बात यह रही कि बादल छाए रहने के कारण सूर्य उदय नहीं होन पर भी सीएम ने व्रतियों के साथ अर्घ्य अर्पित कर प्रदेशवासियों के लिए मंगल कामना की. दरअसल, चार दिन तक चलने वाला छठ महापर्व मंगलवार को संपन्न हो गया. सुबह 7.30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विक्रम सरोवर पर आयोजित छठ पूजन में शामिल हुए. उन्होंन व्रती महिलाओं के साथ पूजा कर प्रदेशवासियों की तरक्की और खुशहाली की मंगल कामना की.इसके अलावा बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने शिप्रा नदी और तालाबों पर पहुंचकर भी सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मइया की पूजा-अर्चना की.  मुख्यमंत्री ने विक्रम सरोवर पर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना कर सूर्य देव से जनता की खुशहाली, संतान की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि की कामना की। उन्होंने छठ मैया की आराधना करते हुए प्रदेशवासियों और मिथिलांचल के लोगों को इस महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।चार दिनों तक चलने वाले इस लोकपर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है और समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है। इस वर्ष 26 अक्टूबर को खरना, 27 अक्टूबर को सायंकालीन अर्घ्य और 28 अक्टूबर को प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ छठ व्रत की पूर्णता हुई।   पर्व के तीसरे दिन डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान महिलाएं जल में खड़े होकर बांस के सूप में फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू, गन्ना और अन्य प्रसाद रखकर सूर्य देव की आराधना करती हैं।रामघाट और विक्रम विश्वविद्यालय परिसर स्थित विक्रम सरोवर पर हजारों श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बने। पूजा-अर्चना के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. यादव कालिदास अकादमी पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा नगर द्वारा आयोजित ‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान’ संगोष्ठी में भाग लिया। सीएम बोले- छठ पूर्वांचल का प्रमुख पर्व छठ पूजन में शामिल हुए सीएम यादव ने कहा कि छठ पूर्वांचल का प्रमुख पर्व है, जिसमें महिलाएं परिवार के लिए कठोर व्रत रखती हैं. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश नदियों का मायका है. यहां चढ़ाया गया जल क्षिप्रा नदी से होकर चंबल, यमुना और फिर गंगा नदी तक पहुंचता है. चार दिन चला छठ पर्व  चार दिवसीय छठ पूजन पर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर को ‘नहाय-खाय' के साथ हुई. इसके बाद 26 को ‘खरना', 27 को निर्जल उपवास कर सायंकालीन अर्घ्य दान दिया गया और आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन हो गया. इस दिन महिलाओं और परिवार के लोगों ने सूर्य को अर्घ्य देकर संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की.  तीसरे दिन डूबते, चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य पर्व के तीसरे दिन, डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन महिलाएं बांस के सूप में फल, गन्ना, चावल के लड्डू, ठेकुआ और अन्य सामग्री रखकर जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इस तरह चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व का समापन होता है। इस दौरान शिप्रा नदी के रामघाट और विक्रम विश्वविद्यालय परिसर स्थित विक्रम सरोवर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन-अर्चन के लिए पहुंचते हैं। पूजन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कालिदास अकादमी में भाजपा नगर द्वारा आयोजित आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान संगोष्ठी में शामिल होंगे।