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CMRS टीम भोपाल मेट्रो के निरीक्षण पर, OK रिपोर्ट के बाद आम जनता कर सकेगी सफर

भोपाल  कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम भोपाल पहुंच गई है। गुरुवार और शुक्रवार को टीम निरीक्षण करेगी। कमिश्नर जनक कुमार गर्ग भी साथ हैं। इसके बाद एक और टीम भोपाल पहुंचेंगी। मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि 'ओके' रिपोर्ट का फाइनल होना।  मेट्रो अफसरों की माने तो ये टीमें ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल, इंट्री-एग्जिट गेट, डिपो तक देखेगी। निरीक्षण में यदि सबकुछ पैमाने और सुरक्षा के लिहाज से परफेक्ट मिलता है तो सीएमआरएस की टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। इसके बाद कमर्शियल रन की तारीख तय कर दी जाएगी। मुंबई से आई है टीम सीएमआरएस की टीम मुंबई से आई है। इस टीम के जिम्मे डिपो और गाड़ी है। डिपो में मेट्रो की सभी जरूरतें जानी जाएगी। वहीं, मेट्रो के अंदर फंक्शन, सॉफ्टवेयर के बारे में जानेगी। यदि कहीं कोई खामी मिलती है तो उसे तुरंत सुधरवाएगी। यह टीम डिपो के अंदर ही रहेगी।इसके बाद दूसरी टीम ट्रैक का निरीक्षण करेगी। हर वो बात जानेगी, जो मेट्रो के संचालन के लिए जरूरी है। टीम ट्रैक के नट-बोल्ट तक देखती है, क्योंकि यह मामला आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा होता है। इसलिए हर पैमाने पर जांच होती है। अक्टूबर में कमर्शियल रन प्रस्तावित बता दें कि अक्टूबर में मेट्रो का कमर्शियल रन प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे। वहीं, वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। 31 मई को इंदौर मेट्रो को भोपाल से हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद से भोपाल मेट्रो को लेकर तेजी से काम शुरू हो गया। मेट्रो के जिन 3 स्टेशन के काम बचे हैं, उन पर फोकस किया जा रहा है। आरडीएसओ से मिल चुकी ओके रिपोर्ट भोपाल मेट्रो के लिए सबसे पहले रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) की टीम आ चुकी है। इस टीम की रिपोर्ट ओके आई। इसके निरीक्षण के बाद सीएमआरएस को डॉक्युमेंट्स सबमिट किए गए। फिर निरीक्षण की तारीख 25-26 सितंबर फाइनल हुई। साल 2018 से शुरू हुआ था मेट्रो का काम भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर पर प्राथमिकता कॉरिडोर के तौर पर 2018 में काम शुरू किया गया था। सुभाष नगर से आरकेएमपी स्टेशन तक काम पूरा हो चुका है। इसके आगे अलकापुरी, एम्स और डीआरएम मेट्रो स्टेशन के कुछ काम बाकी है, जो पूरे किए जा रहे हैं। रेल ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं। दो साल पहले हुआ था पहला ट्रायल राजधानी में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था।

जब मुख्यमंत्री खुद बने ग्राहक : घरेलू सामान की शॉपिंग कर उठाया जीएसटी दरों में कटौती का लाभ

रायपुर : मुख्यमंत्री अचानक पहुंचे मार्ट,ग्राहकों से की मुलाकात,ग्राहक बोले जीएसटी रिफॉर्म्स, बचत क्रांति जब मुख्यमंत्री खुद बने ग्राहक : घरेलू सामान की शॉपिंग कर उठाया जीएसटी दरों में कटौती का लाभ जीएसटी बचत उत्सव को लेकर जनभावनाओं से रूबरू होने "के मार्ट" पहुंचे मुख्यमंत्री मंथली बजट में आई कमी, कम कीमत में लिया ज्यादा सामान, जीएसटी कटौती नहीं यह "बचत क्रांति" है, मोदी जी ही ले सकते हैं ऐसा साहसिक निर्णय – लोगों ने मुख्यमंत्री को दी ऐसी प्रतिक्रिया जीएसटी दरों में हुए ऐतिहासिक सुधार से बाजारों में बढ़ी रौनक जीएसटी दरों में कमी से रोज़मर्रा के सामान हुए सस्ते प्राइस टैग में सूचित की जा रही है जीएसटी दरों में कमी के बाद नई कीमत रायपुर राजधानी रायपुर के सरोना स्थित शुभम "के मार्ट" में रोजमर्रा की ज़रूरत का सामान खरीद रहे लोग उस समय सुखद आश्चर्य से भर उठे, जब उन्होंने देखा कि जीएसटी बचत का लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं उसे देखने स्वयं प्रदेश के मुखिया आए है। दरअसल, आज जीएसटी बचत उत्सव को लेकर जनभावनाओं से रूबरू होने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय "शुभम के मार्ट" पहुंचे। उन्होंने खुद ग्राहक बनकर 1,645 रुपये के घरेलू सामान की शॉपिंग की एवं यूपीआई से भुगतान भी किया।इस दौरान उन्होंने खरीदारी कर रहे लोगों से बातचीत की और जीएसटी दरों में कटौती से घरेलू सामानों के मूल्य में आए फर्क के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मार्ट पहुंचकर ज़रूरत के सामान खरीदे और जीएसटी दरों में कमी का लाभ लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आत्मीयता से लोगों का हालचाल जाना। उन्होंने खरीदारी कर रही गृहिणियों से घरेलू बजट पर आए असर की जानकारी ली, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से उनकी दिनचर्या के बारे में पूछताछ की। इस बीच उन्होंने रोजमर्रा का सामना खरीदते हुए अन्य ग्राहकों से आत्मीयतापूर्वक वार्तालाप किया। मुख्यमंत्री का यह आत्मीय व्यवहार देखकर मौजूद लोग गदगद हो उठे और कहा कि प्रदेश का मुखिया आज हमारे बीच एक आम आदमी की तरह शामिल है। इस दौरान उन्होंने खरीददारों से चर्चा करते हुए जीएसटी सुधारों पर लोगों के विचार सुने। लोगों ने बताया कि दवाइयों और राशन की कीमत घटने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मुस्कुराते हुए बोले—"यही तो असली मकसद है कि सुधार की गूंज आम जनता तक पहुंचे।" इसके बाद उन्होंने खुद भी सामान खरीदा और नई कीमतें देखकर कहा—"यह सुधार केवल कागज पर नहीं, बल्कि हर परिवार की ज़िंदगी में दिखाई देने वाला परिवर्तन है।" मुख्यमंत्री  साय ने  सभी को स्वदेशी की मुहिम का साथ देने का आग्रह भी किया, जिस पर लोगों ने कहा आप आगे बढ़े ,हम आपके साथ है। जीएसटी कटौती नहीं, यह "बचत क्रांति" है मुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए खरीदारी कर रहे रिटायर्ड एयरफोर्स अधिकारी  टी. पी. सिंह ने कहा कि आने वाले समय में जब इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा, तब प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए जीएसटी सुधार को ऐतिहासिक बजट क्रांति के रूप में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा—"पहले हम जितने पैसों में 30 दिन का राशन लेते थे, अब उन्हीं पैसों से 40 दिन से अधिक का राशन ले पा रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री ही इतना बड़ा साहसिक निर्णय ले सकते थे, कोई और ऐसा नहीं कर पाता।" स्टेशनरी में 12 प्रतिशत था टैक्स, अब हो गया जीरो राजधानी रायपुर के अवंती विहार निवासी  लद्दाराम नैनवानी ने बताया कि जीएसटी सुधार का सकारात्मक प्रभाव शिक्षा से भी जुड़ा है। शुभम "के मार्ट" में मुख्यमंत्री को नोटबुक दिखाते हुए उन्होंने कहा—"पहले इस पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसे शून्य कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम से कॉपियाँ और आवश्यक स्टेशनरी सस्ती हो गई हैं। ऐसा निर्णय हमारे प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं।" उन्होंने आगे बताया—"पहले मैं बच्चों के लिए सालाना लगभग 2,000 रुपये की स्टेशनरी लेता था और अब इसमें लगभग 240 रुपये की बचत हो रही है।" चार जरूरी समान खरीदने आए, जीएसटी छूट से खरीदा 4 गुना अधिक सामान मार्ट में खरीदारी करने पहुंचे  मुरलीधर ने मुख्यमंत्री से बातचीत में बताया—"मैं आज केवल 4 ज़रूरी सामान खरीदने आया था, लेकिन जीएसटी दरों में कमी देखकर 4 गुना अधिक सामान खरीद लिया। जीएसटी में व्यापक सुधार से रोजमर्रा की सामग्रियाँ सस्ती हुई हैं और हमें सीधा लाभ मिल रहा है।" देवांगन दंपति ने बताया मंथली बजट में 10 प्रतिशत की कमी शुभम "के मार्ट" में खरीदारी करने पहुंचे चंगोराभाटा निवासी दंपति  जितेंद्र और मती पद्मा देवांगन ने कहा—"हमारे मासिक बजट में 10 प्रतिशत की कमी आई है।" गृहिणी मती पद्मा ने नए प्राइस टैग देखकर कहा—"पहले यही डिटर्जेंट और मसाले मैं ज्यादा कीमत में खरीदती थी। अब दरों में कटौती के बाद कम दाम देखकर सचमुच खुशी हो रही है। त्योहारी खरीदारी में काफी बचत हो रही है।" बजट से ज्यादा खरीदारी का मिला मौका मती सविता मौर्य और अनीता साकार नवरात्रि में आयोजित होने वाले कन्या भोज के लिए श्रृंगार सामग्री खरीदने आईं थीं। उन्होंने कहा—"श्रृंगार सामग्री के दाम पहले से कम हो गए हैं। जीएसटी दरों में कटौती ने हमें निर्धारित बजट से अधिक खरीदारी करने का अवसर दिया है। पहली बार लगता है कि त्योहारी सेल केवल विज्ञापन नहीं, बल्कि असल में राहत है।" उल्लखेनीय है कि जीएसटी दरों में हुए ऐतिहासिक सुधारों के बाद बाजारों में रौनक बढ़ी है और लोग लगातार खरीदारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में त्योहारी सीजन में लोगों को जीएसटी दरों में कटौती का बड़ा उपहार मिला है और इससे रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएँ सस्ती हुई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह में हुए शामिल

रायपुर व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर किया गया हर कार्य सेवा और राष्ट्र निर्माण का कार्य होता है। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य स्तरीय स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत देशभर में 4 लाख से अधिक विद्यार्थी स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर रहे हैं। हमारे प्रदेश में भी एक लाख से अधिक विद्यार्थी सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभा रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। आज जिन स्वयंसेवकों को उनके श्रेष्ठ कार्यों के लिए सम्मानित किया जा रहा है, उन्हें हम हार्दिक बधाई देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के समय यह माना जाता था कि स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग देना ही राष्ट्रसेवा है। आज जब देश स्वतंत्र हो चुका है, तो राष्ट्रसेवा का अर्थ है सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में अपना समग्र योगदान देना। एनएसएस के स्वयंसेवक इस दिशा में बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयंसेवकों को राष्ट्रसेवा का स्वरूप समझाते हुए कहा कि जब हम एक पेड़ लगाते हैं तो राष्ट्रसेवा करते हैं। जब हम किसी को अस्पताल तक पहुँचाते हैं तो राष्ट्रसेवा करते हैं। किसी की आर्थिक मदद करना, किसी को पढ़ने-लिखने में सहयोग करना भी राष्ट्रसेवा ही है। हर कार्य जो हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से परे होकर करते हैं, वही सेवा और राष्ट्र निर्माण का कार्य है। उन्होंने कहा कि एनएसएस के स्वयंसेवक पूरे मनोयोग से सेवा करते रहें और शिक्षा के प्रचार-प्रसार में योगदान दें ताकि कोई भी शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। नई औद्योगिक नीति के तहत उद्योगों में रोजगार देने वाले उद्यमियों को सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। पिछले 10 महीनों में लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस निवेश से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि सेवा केवल दूसरों की मदद करना ही नहीं है, बल्कि यह चरित्र, सोच और जिम्मेदारी की भावना को आकार देने का माध्यम भी है। युवाओं की ऊर्जा और उत्साह ही समाज और राष्ट्र की असली पूंजी है। एनएसएस स्वयंसेवक जिस लगन और समर्पण से सेवा कार्य कर रहे हैं, वह हमारी युवा शक्ति का परिचायक है। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता में एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना की पत्रिका ‘समर्पण’ और विकसित भारत क्विज कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन किया। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य कर रही संस्थाओं, अधिकारियों और स्वयंसेवकों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर सीएसआईडीसी के अध्यक्ष  राजीव अग्रवाल, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. एस. भारतीदासन, आयुक्त उच्च शिक्षा  संतोष कुमार देवांगन, एनएसएस उप कार्यक्रम सलाहकार डॉ. अशोक कुमार श्रोती, राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. नीता बाजपेयी, सभी जिलों के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक और प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आए स्वयंसेवक उपस्थित थे।

आरक्षण सीमा पार: किन राज्यों ने किया लागू और एमपी में OBC कोटा 27% करने की तैयारी

भोपाल भारत में आरक्षण की अधिकतम सीमा को लेकर लगातार बहस चलती रहती है। मौजूदा दौर में मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण को 27% किए जाने का मामला चल रहा है। इस मामले में आज से सुप्रीम कोर्ट में रोजना सुनवाई की जाएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संविधान के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं दिया जा सकता। इसके बावजूद कई राज्य 50% से ज्यादा आरक्षण दे रहे हैं। ऐसे में आज बात करेंगे कि ये राज्य आखिर क्यों 50% से ज्यादा आरक्षण दे रहे हैं। दरहअसल सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार (1992) केस में साफ कहा था, कि सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण 50% से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद कई राज्यों ने इस सीमा को पार कर दिया है और अपने सामाजिक ढांचे व राजनीतिक समीकरणों के आधार पर 50% से ऊपर का कोटा लागू कर रखा है। इन राज्यों में 50% से ज्यााद आरक्षण… तमिलनाडु – 69%     1990-94 में कानून बना और इसे संविधान की नौंवीं अनुसूची में शामिल किया गया। तेलंगाना – 67%  शिक्षा और सरकारी नौकरियों में SC/ST/OBC/EWS को मिलाकर कुल आरक्षण। बिहार – 75%     हाल ही में राज्य ने आरक्षण को 65% तक बढ़ाया और EWS मिलाकर कुल लगभग 75% हो गया। गुजरात – 58-60%     EWS को शामिल करने के बाद कुल आरक्षण दर 50% से ऊपर चली गई। केरल – लगभग 60%     राज्य में SC/ST/OBC/EWS को मिलाकर कुल आरक्षण दर 60 %। 50% से ज्यादा आरक्षण देने पर क्या कहता है कानून .. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि 50% से ज्यादा आरक्षण असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर मान्य नहीं होगा। लेकिन कई राज्यों ने सामाजिक न्याय और जातिगत समीकरणों का हवाला देकर इसे बढ़ाया। खासतौर पर तमिलनाडु का 69% आरक्षण इसलिए बचा हुआ है क्योंकि इसे नौंवीं अनुसूची में डाल दिया गया, जिससे अदालत में इसकी वैधता चुनौती देना मुश्किल हो जाता है। भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि सामान्य स्थिति में जाति-आधारित आरक्षण 50% से ज़्यादा नहीं हो सकता। लेकिन कुछ राज्यों ने इस सीमा को पार करते हुए 50% से अधिक आरक्षण की नीति लागू कर रखी है। MP में OBC आरक्षण बढ़ने पर क्या होगा समीकरण? आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में मौजूदा दौर में आरक्षण कि स्थिति कुछ इस प्रकार है…     SC (अनुसूचित जाति) – 16%     ST (अनुसूचित जनजाति) – 20%     OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) – पहले 14%, जिसे बढ़ाकर 27% करने का प्रस्ताव है​​​ क्या 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण देना संवैधानिक है? ऐसे में अगर 27% आरक्षण लागू होता है तो मध्यप्रदेश में कुल आरक्षण बढ़कर 63% पहुंच जाएगा। लेकिन संवैधानिक रूप से यह तभी टिक पाएगा जब सरकार विशेष परिस्थितियों का ठोस तर्क कोर्ट में साबित करे। वरना इसकी वैधता सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।  

सहकारी समितियों को आवास संघ का सदस्य बनने पर निर्माण कार्यों में मिलेगी प्राथमिकता

मंत्री  सारंग की अध्यक्षता में म.प्र. राज्य सहकारी आवास संघ एवं बीज संघ की साधारण सभा संपन्न सहकारी समितियों को आवास संघ का सदस्य बनने पर निर्माण कार्यों में मिलेगी प्राथमिकता एमपी चीता ब्रांड बनेगा म.प्र. बीज संघ की पहचान – किसानों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण बीज भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग की अध्यक्षता में आज समन्वय भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित एवं मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्यादित की वार्षिक साधारण सभाएं आयोजित की गईं। इस अवसर पर सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न समितियों के सदस्य एवं संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे। आवास संघ की 47वीं साधारण सभा सभा की शुरुआत मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ की 47वीं वार्षिक साधारण सभा से हुई। इस दौरान आवास संघ का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना और नवीन प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रस्तावित बजट भी रखा गया। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि आवास संघ को प्रदेश में एक सशक्त निर्माण एजेंसी के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि संघ द्वारा कराए जाने वाले सभी निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हों और उन्हें समय-सीमा में पूरा करना सुनिश्चित किया जाए। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश की सभी प्राथमिक सहकारी समितियों को आवास संघ की सदस्यता प्रदान करने की कार्यवाही की जाएगी। इसके लिए सदस्यता शुल्क राशि को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया जा रहा है, जिससे संघ का कॉर्पस फंड सुदृढ़ होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सांसद एवं विधायक निधि से होने वाले विकास कार्यों को भी आवास संघ के माध्यम से कराने की दिशा में पहल की जाए। बीज संघ की 20वीं साधारण सभा- ‘एमपी चीता ब्रांड’ की पहचान मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्यादित की 20वीं साधारण सभा संपन्न हुई। इस अवसर पर मंत्री श्री सारंग ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है और इसमें सहकारिता आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बीज उत्पादन और वितरण को लेकर गंभीर है। इसी दिशा में “एमपी चीता” नामक ब्रांड विकसित किया गया है, जो बीज संघ की पहचान बनेगा। इस ब्रांड के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि समितियां ही “एमपी चीता” ब्रांड की ब्रांड एंबेसडर होंगी। इसके लिए पांच वर्षों का एक्शन प्लान तैयार किया गया है तथा व्यापक प्रचार-प्रसार कर इसे राष्ट्रीय स्तर तक स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज किसानों की उपज और आमदनी दोनों बढ़ाते हैं। “एमपी चीता” ब्रांड का उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाना, सहकारी संस्थाओं को लाभ पहुँचाना और प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना है। वरिष्ठ अधिकारी एवं सदस्यों की उपस्थिति सभा में सहकारिता आयुक्त श्री मनोज पुष्प, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता, बीज संघ के प्रबंध संचालक श्री महेंद्र दीक्षित, आवास संघ के प्रबंध संचालक श्री आर.एस. विश्वकर्मा सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं विभिन्न समितियों के सदस्य उपस्थित रहे।

झारसुगुड़ा दौरे पर पीएम मोदी, 27 सितंबर को युवाओं से करेंगे संवाद

झारसुगुड़ा (ओडिशा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 सितंबर को ओडिशा के झारसुगुड़ा दौरे पर आएंगे। इस दौरान वे युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे। साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। संबलपुर के राजस्व प्रभागीय आयुक्त (आरडीसी) सचिन रामचंद्र जाधव ने पीएम मोदी के दौरे के बारे में जानकारी दी। दरअसल, पीएम मोदी का यह दौरा मूल रूप से ब्रह्मपुर में होना था, लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश की संभावना के कारण इस कार्यक्रम को झारसुगुड़ा में स्थानांतरित कर दिया गया। कार्यक्रम का नया स्थान झारसुगुड़ा का अमलीपल्ली मैदान होगा। संबलपुर के राजस्व प्रभागीय आयुक्त (आरडीसी) सचिन रामचंद्र जाधव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 27 सितंबर को झारसुगुड़ा में एक भव्य आयोजन किया जाएगा। हमें जानकारी मिली है कि इस कार्यक्रम में पीएम मोदी भी शामिल होंगे और वे युवाओं को संबोधित भी करेंगे। उन्होंने कहा, “ये कार्यक्रम झारसुगुड़ा के अमलीपल्ली मैदान में आयोजित होगा। पीएम मोदी इस अवसर पर विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। हमें परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास से संबंधित सूचना के जल्द मिलने की उम्मीद है, जिसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा। साथ ही, प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।” मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री बड़ी संख्या में युवाओं को संबोधित करेंगे। इस दौरे के दौरान वे रेलवे पर विशेष जोर देते हुए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं की कुल लागत 1,700 करोड़ रुपए से अधिक है, जो क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित हैं। यह दौरा देशव्यापी ‘सेवा पर्व’ पहल का हिस्सा है। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस उच्च स्तरीय आयोजन के लिए जोरदार तैयारियां शुरू कर चुकी हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 6.69 लाख धान उत्पादक किसानों के खाते में 337 करोड़ बोनस राशि अंतरित की

धान उत्पादक किसानों को दीपावली से पहले ही बोनस के रूप में दिया तोहफा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 6.69 लाख धान उत्पादक किसानों के खाते में 337 करोड़ बोनस राशि अंतरित की किसानों की आर्थिक मजबूती से ही प्रदेश बनेगा समृद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 245 करोड़ लागत के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण बालाघाट जिले के 4000 से अधिक युवाओं को दिए नियुक्ति-पत्र कटंगी में नया सामुदायिक अस्पताल और कटंगी-सिवनी राजमार्ग पर बनेगा नया सेतु हाईस्कूल को हायर सेकेंड्री स्कूल में किया जाएगा प्रोन्नत नेशनल पार्क से लगे खेतों की फसलों को जंगली जानवरों से बचाने कराई जाएगी सोलर फेंसिंग राजीव सागर परियोजना से नहलेसरा बांध के इंटरलिंक के लिए कराया जाएगा परीक्षण जंगली जानवरों के हमले में 5 मृतकों के परिजन को दिए जाएंगे 17-17 लाख रुपए मुख्यमंत्री डॉ. यादव कटंगी में आयोजित राज्यस्तरीय किसान सम्मेलन में हुए शामिल   बालाघाट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश का उदर-पोषण करने वाले अन्नदाताओं की खुशहाली में ही हम सबकी खुशहाली है। अन्नदाताओं की आर्थिक मजबूती ही देश और प्रदेश के विकास और समृद्धि का आधार है। हमारी सरकार ने किसानों के सभी हितों का विशेष ध्यान रखा है। हमारी विकास नीतियों के मूल में किसान ही हैं। गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी कल्याण के लिए हम मिशन मोड में आगे बढ़ रहे हैं। किसानों को उनके हर वाजिब हक के साथ-साथ हमारी सरकार किसान सम्मान निधि भी दे रही है। यह निधि किसानों के प्रति हमारे सम्मान की अभिव्यक्ति है। किसानों के कल्याण और इनकी समृद्धि के लिए हमारी सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को बालाघाट जिले के कटंगी तहसील मुख्यालय में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 6 लाख 69 हजार 272 धान उत्पादक किसानों के खाते में 337 करोड़ 12 लाख रुपये की प्रोत्साहन (बोनस) राशि सिंगल क्लिक से उनके बैंक खातों में अंतरित की। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जित करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 4 हजार अधिकतम 10 हजार रूपये की बोनस राशि देने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले में करीब 245 करोड़ रुपये की लागत वाले 78 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया। इसमें 39 करोड़ रूपए लागत से बालाघाट में सरेखा आर.ओ.बी. एवं परसवाड़ा में 31 करोड़ रूपए की लागत से नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय भवन का लोकार्पण भी शामिल है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित ग्रामों के 850 युवाओं को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए। इन सभी युवाओं को गृह विभाग के विशेष सहयोगी दस्ते में नियुक्ति दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले में हुए रोजगार महोत्सव के जरिए चुने गए 3700 से अधिक युवाओं को प्रतिष्ठित निजी कंपनियों में नियुक्ति पत्र भी दिए। इन चयनितों में लगभग 1000 युवतियां भी शामिल हैं, जिन्हें बेंगलुरु की निजी कंपनियों में नियुक्ति दी जा रही है। किसानों को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सम्मेलन न केवल किसानों की समृद्धि, बल्कि युवाओं के लिए भी नए अवसरों से भरपूर है। किसान और युवा विकास के सेतु की तरह हैं। प्रदेश के समग्र विकास के लिए हमारी सरकार इन दोनों के परिश्रम और असीम ऊर्जा को नई दिशा देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के आशीर्वाद से ही किसान का बेटा आज मुख्यमंत्री है। किसानों को कोई तकलीफ नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गेहूं और सोयाबीन पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की अतिरिक्त बोनस राशि भी दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बालाघाट जिले के जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर का चावल और जैविक गुड़ भेंट किया गया। मुख्यमंत्री ने दी अनेक सौगातें किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि कटंगी में नया सामुदायिक अस्पताल बनाया जाएगा। हाईस्कूल को हायर सेकेंड्री स्कूल में प्रोन्नत किया जाएगा। कटंगी से सिवनी राजमार्ग पर नया सेतु बनाया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के किसानों की बड़ी समस्या का निदान करते हुए कहा कि पेंच नेशनल पार्क की परिधि क्षेत्र से लगे खेतों की फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए चारों ओर सोलर फेंसिंग कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि राजीव सागर सिंचाई परियोजना से नहलेसरा बांध को इंटरलिंक कराने के लिए परीक्षण कराकर कार्ययोजना तैयार कराई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जंगली जानवरों के हमले में जान गंवाने वाले क्षेत्र के 5 मृतकों स्व.  सुखराम, स्व.  प्रकाश, स्व.  अनिल, स्व.  मंगरू एवं स्व.  सेवकराम के परिजनों को मुआवजे की शेष राशि के रूप में 17-17 लाख रूपए देने की घोषणा की। इन सभी मृतकों के परिजन को 25-25 लाख रुपए मुआवजा मिलना था इसमें से 8-8 लाख रूपए परिजनों को पहले ही दिए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां चंद्रघंटा के साथ ज्वाला मैया का आशीर्वाद भी कटंगी में मिला है। बालाघाट ने विकास का लंबा रास्ता तय किया है और आज विकास की अहम धुरी बन चुका है। यहां के किसानों और जवानों ने अपने परिश्रम से क्षेत्र का माहौल ही बदल दिया है। यहां के जीआई टैग वाले चिन्नौर के चावल की खुशबू दूर-दूर तक फैली हुई है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अभाव में बालाघाट के कुछ युवा पथ भ्रमित हो गए थे, लेकिन प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने नक्सल उन्मूलन के लिए 31 मार्च 2026 की तारीख तय कर दी है। उन्होंने कहा कि आज बालाघाट के 850 जवानों को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं। अब यहीं के युवा यहीं पर प्रशिक्षण लेकर अपने गांव, कस्बे, जल, जंगल, जमीन और वन्य प्राणियों की रक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार अपने सभी संकल्पों को पूरा करते हुए तेजी से आगे बढ़ रही है। किसानों को सम्मान निधि के साथ-साथ प्रोत्साहन राशि का लाभ मिल रहा है। राज्य सरकार ने लाड़ली बहनों से किया वादा भी निभाया है। रक्षाबंधन पर उन्हें 1500 रुपए दिए, अब दीपावली की भाईदूज से हर माह 1500 रुपए देंगे। हम धीरे-धीरे यह राशि बढ़ाकर 3000 रुपए कर देंगे। गौमाता को संरक्षण और सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य … Read more

ICC की चौखट पर पहुंचा IND vs PAK विवाद, रऊफ-फरहान-SKY सबकी होगी सुनवाई

नई दिल्ली एश‍िया कप 2025 में भारत और पाक‍िस्तान के बीच तल्खी का दौर जारी है. भारत के ख‍िलाफ सुपर-4 मुकाबले में गन सेल‍िब्रेशन करने वाले साह‍िबाजादा फरहान के ख‍िलाफ ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल) में BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने श‍िकायत की है. वहीं पाकिस्तानी गेंदबाज हार‍िस रऊफ भी इसमें शाम‍िल हैं . रऊफ ने भी मैच के दौरान उकसाने वाले इशारे किए थे. जिसकी वजह से BCCI ने उनकी भी श‍िकायत की. वहीं पाक‍िस्तान भी म‍िनम‍िनाता हुआ ICC के दरबार में पहुंच गया है, उसने भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव को लेकर व‍िरोध दर्ज कराया है.  दरअसल, BCCI  ने रऊफ और साहिबजादा के खिलाफ आईसीसी से शिकायत की है. वहीं PCB ने सूर्या के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है. भारत ने पिछले रविवार को एशिया कप सुपर 4 मैच के दौरान पाकिस्तानी क्रिकेटरों हारिस रऊफ और साहिबजादा फरहान के भड़काऊ हावभाव के लिए आईसीसी से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है.  सूत्रों के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ और बल्लेबाज साहिबजादा फरहान के खिलाफ आईसीसी (ICC) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. यह शिकायत दोनों खिलाड़ियों के कथित उकसाने वाले इशारों (provocative gestures) को लेकर है, जो उन्होंने पिछले रविवार को हुए सुपर-4 मुकाबले के दौरान किए थे. जानकारी के मुताबिक, BCCI ने बुधवार को यह शिकायत ईमेल के जर‍िए दर्ज कराई है. अगर रऊफ और फरहान लिखित में इन आरोपों से इनकार करते हैं, तो उन्हें ICC एलीट पैनल रेफरी रिची रिचर्डसन के सामने पेश होकर सुनवाई का सामना करना पड़ सकता है. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने भी पलटवार करते हुए भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव के खिलाफ औपचारिक विरोध दर्ज कराया है. PCB का आरोप है कि सूर्या ने मैच के दौरान ऐसा बर्ताव किया जो "स्पोर्ट्समैनशिप" के खिलाफ था. अब देखना दिलचस्प होगा कि ICC इस मामले में क्या रुख अपनाती है, क्योंकि दोनों देशों के बोर्डों के बीच यह विवाद अब गंभीर मोड़ लेता दिख रहा है. PCB ने सूर्या की श‍िकायत  BCCI की श‍िकायत पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने भी भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव  के खिलाफ श‍िकायत की है. सूर्या ने पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना जताते हुए और ऑपरेशन 'सिंदूर' में शामिल भारतीय सशस्त्र बलों को जीत समर्पित करते हुए बयान दिया था. उनका यह बयान 14 सितंबर के मैच के बाद आया था. PCB का आरोप है कि सूर्या की टिप्पणी "पॉल‍िट‍िकल" है. हालांकि, यह देखना बाकी है कि PCB ने शिकायत सात दिन की निर्धारित समय सीमा में दर्ज करवाई है या नहीं.  रऊफ और साहिबजादा ने किए घट‍िया इशारे  सुपर-4 में 21 सितंबर के मैच के दौरान रऊफ ने ऐसा इशारा किया, जिससे लगता था जैसे किसी विमान को गिराया जा रहा हो, ताकि भारत की सैन्य कार्रवाई का मजाक उड़ाया जा सके. यह उस समय हुआ जब भारतीय फैन्स उनको देखकर "कोहली, कोहली" के नारे लगा रहे थे. 2022 टी20 वर्ल्ड कप में विराट कोहली ने रऊफ की गेंदों पर दो छक्के लगाए थे. मैच के दौरान रऊफ ने भारतीय ओपनर शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा को गालियां भी दीं, जिसका दोनों ने बल्ले से जवाब दिया. वहीं साहिबजादा फरहान ने भी अर्धशतक पूरा करने के बाद "गन फायरिंग" वाला सेल‍िब्रेशन किया. उन्होंने बल्ले को मशीनगन बनाकर अपने अर्धशतक का जश्न मनाया था. इसे  लेकर वो खूब ट्रोल हुए थे.  साहिबजादा फरहान ने बाद में कहा, "वो जश्न उस वक्त अचानक दिमाग में आ गया था. मैं आम तौर पर ज्यादा सेलिब्रेशन नहीं करता. मैंने सोचा आज कुछ अलग करें. मैंने वो किया, अब लोग इसे कैसे लेंगे, मुझे फर्क नहीं पड़ता." अब कुल म‍िलाकर दोनों ही खिलाड़ियों को ICC सुनवाई में अपने इशारों की सफाई देनी होगी, और अगर वे पैनल को संतुष्ट नहीं कर पाए, तो उन्हें आचार संहिता के तहत सजा का सामना करना पड़ सकता है. नकवी ने शेयर किया 'CR7' वीडियो वहीं एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नक़वी ने बुधवार को 'X' (पूर्व ट्विटर) पर क्रिस्टियानो रोनाल्डो का एक स्लो-मोशन वीडियो पोस्ट किया. इसमें रोनाल्डो ऐसा इशारा करते दिख रहे हैं जैसे कोई विमान अचानक गिर गया हो. ठीक वैसा ही जैसा रऊफ ने मैच के दौरान किया था. नकवी PCB के चेयरमैन होने के साथ-साथ अपने देश के गृह मंत्री भी हैं, अक्सर भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देते रहते हैं. हालांकि वीडियो में रोनाल्डो शायद यह दिखा रहे थे कि उनका फ्री-किक कैसे डिप होकर गोल में गया. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत की टीम, जो अब एशिया कप फाइनल में पहुंच चुकी है, ACC चेयरमैन के साथ मंच साझा करेगी या नहीं. यह मामला BCCI और ICC दोनों के उच्च अधिकारियों की नजर में है. आने वाले समय में ही पता चलेगा कि नकवी के खिलाफ कोई एक्शन होगा या नहीं… 

मध्यप्रदेश के बाघ अब राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जंगलों में रौनक बढ़ाएंगे

भोपाल  टाइगर स्टेट का गौरव हासिल कर चुके मध्यप्रदेश के बाघ अब पड़ोसी राज्यों के जंगलों की शोभा बढ़ाएंगे। बांधवगढ़, कान्हा और पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघों का ट्रांसलोकेशन राजस्थान, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में किया जाएगा। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के निर्देश पर इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। खर्च संबंधित राज्य उठाएंगे। कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के क्षेत्र संचालक रविंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि कान्हा से से दो बाघों का ट्रांसलोकेशन होना है। अन्य नेशनल पार्क से भी बाघ भेजे जाएंगे। इसकी तैयारियां शुरू की जा रही है। कान्हा के बाघ कहां भेजे जाएंगे यह आने वाले एक दो दिन में तय हो जाएगा। अक्टूबर में होगा प्रशिक्षण बाघों के नए ठिकाने वाले टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को अक्टूबर में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें बाघों की देखभाल, ट्रैकिंग और संरक्षण की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद बाघों को सीसीटीवी युक्त विशेष ट्रक से भेजा जाएगा। ट्रक के साथ पशु चिकित्सक और अन्य विशेषज्ञ भी रहेंगे। रास्ते में भोजन, पानी और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था रहेगी। छत्तीसगढ़ को सबसे ज्यादा बाघ मप्र से राजस्थान को 3 छत्तीसगढ़ को 4 और ओडिशा को 3 बाघ भेजे जाएंगे। इनमें नर-मादा की जोड़ियां भी शामिल हैं। वर्तमान में मप्र में 785 बाघ हैं। संख्या के लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा टाइगर स्टेट है। बाघों की बढ़ती संख्या से टेरेटरी को लेकर आपसी संघर्ष बढ़ रहे हैं। मप्र के अलग-अलग टाइगर रिजर्व से कम घनत्व वाले क्षेत्रों में बाघों को भेजा जाएगा। कान्हा से ट्रांसलोकेशन के लिए दो बाघ तैयार रखने को कहा गया है। वे कहां जाएंगे, यह दो दिन बाद तय होगा।- रविंद्रमणि त्रिपाठी, क्षेत्र संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व

बचत और स्वच्छ ऊर्जा के लिए एमपी सरकार ने दिया निर्देश, हर शहर में सोलर प्लांट होंगे स्थापित

भोपाल   प्रदेश में नगरीय निकायों के अनावश्यक खर्चों को कम करने के लिए अब नगरीय विकास विभाग नकेल कसने की तैयारी में है। सभी निकायों को मितव्ययिता अपनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अनावश्यक खर्च रोकने के लिए सभी निकायों का अब एनर्जी ऑडिट भी होगा। इसमें आवश्यक लोड के अनुसार ही कनेक्शन लिया जाएगा। सभी निकायों के अस्थायी बिजली कनेक्शन भी बंद कराए जा रहे हैं। इनके स्थान पर सोलर पावर प्लांट(Solar Plant) लगेंगे, जिससे बिजली व्यय कम हो सके। इसके अलावा डीजल वाहनों की बजाय अब इलेक्ट्रिक वाहन ही खरीदे जाएंगे। निकायों को राजस्व वसूली बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे साल भर में होने वाली बचत नगर में जनता से जुड़े हुए विकास संबंधी कामों में खर्च होगी। हर निकायों में लगेंगे सोलर प्लांट हर नगरीय निकाय को सोलर पॉवर प्लांट(Solar Plant) लगाने के लिए निर्देश दिए हैं। जिन निकायों में स्थान उपलब्ध है वे अपने यहां यह प्लांट लगा सकते हैं। जिनके पास जमीन उपलब्ध नहीं है वे प्रदेश में अन्य स्थानों पर यह प्लांट लगा सकते हैं। भोपाल निगम ने नीमच में सोलर प्लांट लगाया है। वहां जितनी बिजली बनेगी उतनी यहां नगर निगम को बिल में छूट मिलेगी। इससे बिजली बिल काफी कम होगा। कचरा वाहन भी ईवी होंगे विभाग ने तय किया है कि अब निकायों में जो नए वाहन खरीदे जाएंगे वे ईवी ही होंगे। फिलहाल डीजल वाहनों का संचालन बंद नहीं किया जाएगा। लेकिन एक बार डीजल वाहन खटारा होने के बाद उसकी जगह दूसरा डीजल वाहन नहीं खरीदा जाएगा। उसकी जगह इलेक्ट्रिक वाहन लेंगे। कचरा परिवहन के लिए जो वाहन उपयोग किए जाएंगे वे भी ईवी ही होंगे। इसके लिए चार्जिंग पॉइंट की भी व्यवस्था की जाएगी। 15000 करोड़ बचत का अनुमान नगरीय विकास विभाग ने छोटे-छोटे बचत के उपायों को प्रभावी करने की योजना बनाई है। विभाग का अनुमान है कि सिर्फ फिजूलखर्ची पर रोक लगा कर ही प्रदेश की निकायों में 15 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। महापौरों ने रखी सुरक्षा और वित्तीय मांगें  मंत्रालय में हुई बैठक में नगर निगमों के महापौरों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के बाद बढ़ते खतरों को देखते हुए गनमैन की तत्काल मांग की। महापौरों ने कहा कि पिछली बैठक में सुरक्षा का आश्वासन मिला था, पर अब तक व्यवस्था नहीं हुई। साथ ही सरकारी जमीन निगमों के नाम दर्ज करने की मांग की ताकि विकास कार्य सुचारू हो सकें। महापौरों ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि सीधे उपलब्ध कराने की भी मांग की, ताकि वे बिजली बिल स्वयं चुका सकें। इंदौर महापौर ने अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही, वहीं भोपाल महापौर ने विसर्जन घाटों सहित कई जगहों पर निगम के नाम जमीन न होने से जनसुविधाएं प्रभावित होने का मुद्दा उठाया। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि निगम खर्च कम करें और शुल्क बढ़ाने जैसे सख्त फैसले लेकर राजस्व बढ़ाएं। एसीएस संजय दुबे ने संपत्ति किराए की दरें बढ़ाने, सोलर प्लांट लगाने और खर्चों की समीक्षा कर आय-व्यय संतुलन सुधारने के सुझाव दिए। कहा, बिजली, ईंधन और स्थापना व्यय की समीक्षा कर इनमें कमी की जा सकती है। सोलर प्लांट से बिजली बिल कम किया जा सकता है। बीते वर्ष चुंगी क्षतिपूर्ति से चुकाए बिजली के 60 करोड़ रुपए बता दें, प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा पेयजल, स्ट्रीट लाइट आदि के लिए विद्युत वितरण कंपनियों से बिजली की आपूर्ति की जाती है, लेकिन स्थानीय निकायों द्वारा रहवासियों से शुल्क की वसूली में कमी आई है। इसलिए बिल नहीं चुका पाते। इसे देखते हुए वर्ष 2024 में नगरीय विकास विभाग ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि से लगभग 60 करोड़ बिजली बिल चुकाने के लिए जारी किए थे। प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, कटनी, सागर, सतना, देवास, खंडवा और रतलाम के निकायों के बिजली बिल एक करोड़ रुपए से अधिक थे। सोलर प्लांट लगने के बाद बिजली बिलों में जरूर राहत मिलेगी।