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मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत स्वदेशी संकल्प विषयक प्रदेश स्तरीय कार्यशाला को किया संबोधित

2047 में विकसित होगा भारत, स्वदेशी व आत्मनिर्भर संकल्प अभियान के माध्यम से बढ़ेगा इसका रास्ताः सीएम योगी  2017 के पहले बीमारू था यूपी, यदि 8 वर्ष में बीमारी हट सकती है तो 22 वर्ष में यूपी विकसित भी हो सकता हैः मुख्यमंत्री  स्वदेशी व आत्मनिर्भर का सबसे अच्छा मॉडल है यूपीआईटीएस, यहां होगा यूपी की ताकत का अहसासः योगी अयोध्या दीपोत्सव में प्रज्ज्वलित होंगे रिकॉर्डतोड़ दीप, दीप भी भारत का स्वदेशी मॉडलः सीएम  योगी की अपीलः देश का पैसा भारत के कारीगरों, हस्तशिल्पियों व युवाओं के हाथों में ही जाए, यह भारत के अंदर लगेगा तो समृद्धि का कारण बनेगा  बोले-जिन लोगों ने वाद के आधार पर बांटा, वे आज भी समाज को बांट और काट रहे हैं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपदों में स्वदेशी मेले लगाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसमें एमएसएमई विभाग सहयोग करेगा। दीपावली के पहले हर जनपद में 10 से 18 के बीच एक सप्ताह तक ओडीओपी व स्थानीय उत्पादों का मेला लगे। यह कार्यक्रम बहुत अच्छा हो सकता है। इससे स्थानीय उद्यमियों व व्यापारियों को बहुत लाभ होता है और लोग विदेशी उत्पाद खरीदने से भी बचते हैं। सीएम ने कहा कि 2017 से पहले चीन का झालर बाजार में छा जाता था, लेकिन अब लोग मिट्टी के दीप जला रहे हैं। 2017 में दीपोत्सव के आयोजन में 51 हजार दीप अयोध्या मंडल में नहीं मिल पाए थे। इसे पूरे प्रदेश से जुटाना पड़ा था परंतु गत वर्ष जितने दीप प्रज्ज्वलित कराए गए थे, यह सभी अयोध्या में बने थे। इस बार भी दीपोत्सव में रिकॉर्डतोड़ दीप प्रज्ज्वलित होंगे और यह मिट्टी व गाय के गोबर से बनेंगे। लोकल लोगों को तैयार करना होगा। हर घऱ में दीप जले,  दीप भी भारत का स्वदेशी मॉडल है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को आत्मनिर्भर भारत स्वदेशी संकल्प विषयक प्रदेश स्तरीय कार्यशाला को संबोधित किया।  स्वदेशी व आत्मनिर्भर का सबसे अच्छा मॉडल है यूपीआईटीएस सीएम योगी ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में यूपीआईटीएस का आयोजन होगा। 25 को इसके तीसरे चरण का शुभारंभ सुबह 9.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह स्वदेशी और आत्मनिर्भर का सबसे अच्छा मॉडल है। यूपी के अंदर बने उत्पाद को केवल शोकेस ही नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे बड़ा भी मंच मिलेगा। 500 विदेशी समेत पूरे देश से व्यापारी भी खरीदारी करने आ रहे हैं। दिल्ली, नोएडा, ग्रेनो, यमुना अथॉरिटी समेत आसपास के सभी होटल फुल हो चुके हैं। पिछले साल चार दिन में 2200 करोड़ की बिक्री हुई थी। इस सफलतम आयोजन से यूपी के कारीगरों, उद्यमियों व हस्तशिल्पियों को प्लेटफॉर्म मिलता है। सभी से अनुरोध किया कि एक दिन आईटीएस का अवलोकन करें। यहां यूपी की ताकत का अहसास होगा। स्वदेशी विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने और उसकी आधारशिला को सुदृढ़ करने का अभियान  सीएम ने कहा कि स्वदेशी आत्मनिर्भर भारत के अभियान का हिस्सा बनने वाला है। यह विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने और उसकी आधारशिला को सुदृढ़ करने का अभियान है। स्वदेशी केवल नारा नहीं है और न ही यह खादी वस्त्रों तक सीमित है। भाजपा नेतृत्व की सरकार देश में सुई से लेकर समुद्री मालवाहक जहाजों और फाउंटेन पेन से लेकर एरोप्लेन का निर्माण कर रही है। पीएम मोदी ने स्वदेशी की इस अवधारणा को व्यापक व विराट रूप दिया है। जो भारत में निर्मित हो, जिसमें भारत के श्रमिकों का पसीना और यहां के युवा शक्ति की प्रतिभा लगी हो। वह स्वदेशी है। मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड यानी दुनिया के लिए भारत के द्वारा बनाया गया उत्पाद हमारे लिए स्वदेशी है। हम स्वदेशी को जीवन का हिस्सा बनाएं।   भारत का कोई सानी नहीं था सीएम योगी ने सीपी जोशी के वक्तव्य की चर्चा की और कहा कि दो हजार वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 40 फीसदी था। आज से 300 वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 25 फीसदी था। औद्योगिकीकरण से होने वाले उत्पादन में भारत का योगदान नंबर एक (अकेले 25 फीसदी) था। वृहत्तर भारत मतलब आज का भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश। 300 वर्ष तक भारत दुनिया की नंबर एक की आर्थिक ताकत और नंबर एक का उत्पादक राष्ट्र था और कृषि में भारत का कोई सानी नहीं था।  विदेशी शासकों ने स्वार्थ के लिए बंगाल के कारीगरों के हाथ काट दिए थे  मुख्यमंत्री ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से भारत दुनिया में सातवें नंबर पर है। बृहत्तर भारत से पहले रूस, चीन, अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया है। भारत, पाकिस्तान व बांग्लादेश के पास कुल भूभाग साढ़े 42 करोड़ हेक्टेयर का भौगोलिक क्षेत्रफल था, जबकि रूसी संघ के पास 1 अरब 70 करोड़ हेक्टेयर लैंड है। इन देशों में केवल 20 फीसदी भूमि पर कृषि हो सकती है, लेकिन भारत अकेले 60 फीसदी भूभाग पर कृषि करता है। भारत के पास सबसे उर्वरा भूमि और सबसे अच्छा जल संसाधन है। भारत कपड़े का सबसे बड़ा उत्पादक था। भारत दुनिया में कपड़ा बेचता था। मुख्यमंत्री ने बंगाल के इतिहास का जिक्र किया और कहा कि विदेशी शासकों ने स्वार्थ के लिए वहां के कारीगरों के हाथ काट दिए थे। सीएम ने कहा कि होली से दीवाली के बीच हर गांव में गाय, बकरी, भैंस खेतों में बांधे जाते थे। वह उसी हिसाब से खेती को उर्वरक को बनाते थे। हम जितनी खेती का दोहन करते थे, उससे दोगुना रिटर्न करते थे। पीएम मोदी जिसे नेचुरल फॉर्मिंग और सुभाष पालेकर जीरो बजट खेती कहते हैं। हमारा किसान जीरो बजट खेती ही करता था। गाय का गोबर, मूत्र व उससे जुड़े उत्पाद, खुर धऱती को मुलायम करते थे और उर्वरकता को बढ़ाए रखते थे। इससे खूब अन्न उत्पादन होता था।  जिन लोगों ने वाद के आधार पर बांटा, वे आज भी समाज को बांट और काट रहे हैं  सीएम योगी ने कहा कि भारत पर इस्लाम के पहले हमले का जिक्र किया और कहा कि सन 1100 तक भारत में हिंदुओं की आबादी 60 करोड़ थी, लेकिन आजादी के समय 1947 तक यह घटकर सिर्फ 30 करोड़ रह गई। 800-900 वर्ष में हमारी आबादी घटी और खेती के उत्पादन को भी कम कर दिया गया। सिर्फ आक्रांताओं ने ही नहीं मारा, बल्कि भूख, बीमारी, यातनाओं से भी … Read more

सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारणी की 11 हजार 678 करोड़ 74 लाख रुपये की पुनरीक्षित लागत का अनुमोदन

13 स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में सीनियर रेसीडेंट के 354 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत निजी ऑपरेटर के सहयोग से राज्य के भीतर हैलीकॉप्टर सेवा संचालन की स्वीकृति प्रदान गई है। संपूर्ण प्रदेश के हवाई अड्डों, हैलीपेड एवं हवाई पट्टियों के बीच निजी ऑपरेटर द्वारा चयनित स्थानों पर हैलीकॉप्टर सेवा प्रदाय की जायेगी। हैलीकॉप्टर का संचालन तीन सेक्टरों में किया जाएगा। सेक्टर-1 में इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू, महेश्वर, गांधीसागर, मंदसौर, नीमच, हनुवंतिया, खंडवा, खरगौन, बुरहानपुर, बड़वानी, अलीराजपुर, रतलाम, झाबुआ, नलखेड़ा, भोपाल और जबलपुर शामिल होंगे। सेक्टर-2 में भोपाल, मढ़ई, पचमढ़ी, तामिया, छिंदवाड़ा, सांची, इंदौर, दतिया, दमोह, ग्वालियर, शिवपुरी, कूनो (श्योपुर), ओरछा, गुना, राजगढ़, सागर, होशंगाबाद, बैतूल, टीकमगढ़ और जबलपुर शामिल होंगे। सेक्टर-3 में जबलपुर, बांधवगढ़, कान्हा, चित्रकूट, सरसी, परसिली, मैहर, सतना, पन्ना, खजुराहो, कटनी, रीवा, सिंगरौली, अमरकंटक, सिवनी, सीधी, मंडला, पेंच, डिंडौरी, भोपाल और इंदौर के बीच हेलीकाप्टर सेवा का संचालन किया जायेगा। इस सेवा का उद्देश्य प्रमुख शहरों, धार्मिक स्थलों, राष्ट्रीय उद्यानो और पर्यटक स्थलों के मध्य निजी ऑपरेटर के सहयोग से किफायती एवं स्थायी हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराना है। इस सेवा से यात्रियों, पर्यटकों, व्यवसाइयों, निवेशकों एवं प्रदेश के रहवासियों का प्रदेश में आवागमन सुगम हो सकेगा। इससे प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक शहरों एवं पर्यटक स्थलों के बीच व्यवसाय एवं पर्यटन गतिविधियों में अभिवृद्धि होगी और रोजगार के नये अवसरों का सृजन भी होगा। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह , सारणी की पुनरीक्षित लागत का अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की 660 मेगावाट की सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारणी की पुनरीक्षित लागत 11 हजार 678 करोड़ 74 लाख रुपये (नॉन EPC सहित) का अनुमोदन प्रदान किया गया है। परियोजना का वित्त पोषण 20:80 अंशपूँजी एवं ऋण के अनुपात में किया जायेगा। राज्य शासन द्वारा 20 प्रतिशत अंशपूँजी में से 684 करोड़ 53 लाख रूपये की राशि प्रदान की जायेगी और शेष राशि की व्यवस्था म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा स्वयं के स्त्रोत से की जायेगी। राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 तक प्रदान/आवंटित की गई 431 करोड़ 45 लाख रुपये की राशि के अतिरिक्त शेष राज्यांश वित्तीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक की अवधि में 50 करोड़ 62 लाख रूपये विभागीय बजट के माध्यम से प्रत्येक वर्ष म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड को उपलब्ध कराई जायेगी। अमरकंटक ताप विद्युत गृह , चचाई की पुनरीक्षित लागत का अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की 660 मेगावाट की अमरकंटक ताप विद्युत गृह, चचाई की पुनरीक्षित लागत 11 हजार 476 करोड़ 31 लाख रूपये का अनुमोदन प्रदान किया गया है। परियोजना का वित्त पोषण 20:80 अंशपूँजी एवं ऋण के अनुपात में किया जायेगा। राज्य शासन द्वारा 20 प्रतिशत अंशपूँजी में से 699 करोड़ 90 लाख रुपये की राशि प्रदान की जायेगी और शेष राशि की व्यवस्था मप्र पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड दवारा स्वयं के स्त्रोत से की जायेगी। राज्य शासन दवारा वित्तीय वर्ष 2025-26 तक प्रदान/आवंटित की गई 365 करोड़ रुपये की राशि के अतिरिक्त शेष राज्यांश वित्तीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक की अवधि में 66 करोड़ 98 लाख रुपये विभागीय बजट के माध्यम से प्रत्येक वर्ष म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड को उपलब्ध कराई जायेगी। सीनियर रेसीडेंट के 354 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा 13 स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के मापदण्डों अनुसार मान्यता प्राप्त करने के लिए नॉन क्लीनिकल एवं पैरा क्लीनिकल संकायों में सीनियर रेसीडेंट के 354 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति प्रदान की गई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना, विदिशा, रतलाम, खण्डवा, शहडोल, शिवपुरी, दतिया और छिंदवाड़ा में स्थित स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में इन पदों का सृजन किया गया हैं। इससे राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के मापदण्डों अनुसार चिकित्सा महाविद्यालयों का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सकेगा एवं चिकित्सा महाविद्यालयों से उत्तीर्ण स्नातकोत्तर छात्र सीनियर रेसीडेंटशिप चिकित्सा महाविद्यालय में ही कर पायेंगे और नॉन क्लीनिकल एवं पैरा क्लीनिकल संकायों में भी प्रदेश को चिकित्सा शिक्षक प्राप्त हो सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में गूंजी जोजरी नदी की पुकार, प्रदूषण से ग्रामीण परेशान

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को राजस्थान की जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। नदी में प्रदूषण की वजह से यहां की कृषि योग्य भूमि बंजर हो गई है। इसके चलते स्थानीय लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और कहा था कि नदी में औद्योगिक कचरे से सैकड़ों गांव प्रभावित हो रहे हैं। आरोप है इनसे निकलने वाला औद्योगिक कचरा नदी में डाला जा रहा है। इसका असर सैकड़ों गांवों पर पड़ा है। कचरे की वजह से जहरीले हो चुके जोजरी नदी के पानी ने पर्यावरण और आम जनमानस को नुकसान पहुंचाया है। नदी का पानी जानवरों के लिए भी जहरीला हो गया है, जिससे न केवल स्वास्थ्य बल्कि पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा कही जाने वाली जोजरी नदी आज जहरीली हो गई है। जोधपुर से पाली और बालोतरा तक बहने वाली इस नदी में लगभग 400 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी और कचरा डाला जा रहा है। इसकी वजह से नदी का पानी पीने योग्य नहीं है। जोजरी नदी राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित 83 किलोमीटर लंबी मौसमी नदी है। इसका उद्गम नागौर जिले से होता है। यह उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहते हुए जोधपुर जिले के खेड़ालदा खुर्द के पास लूनी नदी में मिलती है। नदी का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 3,600 वर्ग किलोमीटर तक में फैला हुआ है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

मुख्यमंत्री साय ने 244 करोड़ 43 लाख रूपए के विकास कार्यों की दी सौगात

रायपुर : धमतरी के कुरूद विधानसभा क्षेत्र को मिला विकास का महा-उपहार मुख्यमंत्री  साय ने 244 करोड़ 43 लाख रूपए के विकास कार्यों की दी सौगात 74 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज धमतरी जिला के मगरलोड विकासखंड के ग्राम करेली बड़ी में 244 करोड़ 43 लाख रूपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया।  साय ने धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र में आयोजित राज्य स्तरीय महतारी सदन शुभारंभ कार्यक्रम में 51 महतारी सदनों का लोकार्पण किया और जिले को विकास का महा उपहार दिया। उन्होंने कुरूद विधानसभा क्षेत्र में 74 कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। यह सभी विकास कार्य जिले में महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़क, पेयजल, उद्योग, विज्ञान, पर्यटन और सामाजिक विकास जैसे विविध क्षेत्रों को नई दिशा देने वाले हैं। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, लोकसभा सांसद मती रूप कुमारी चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष  अरूण सार्वा, धमतरी नगर निगम के महापौर  रामू रोहरा पूर्व मंत्री एवं कुरूद के विधायक  अजय चन्द्राकर सहित सचिव मती निहारिका बारीक और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण जन एवं गणमान्य नौगरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री  साय ने 245 करोड़ 80 लाख रूपए के विकास कार्यों की दी सौगात महिला सशक्तिकरण – नए भवनों का शिलान्यास   साय ने महतारी सदन योजना के तहत 51 महतारी सदन भवनों का लोकार्पण किया। लगभग 2 करोड़ 10 लाख रूपए की लागत से निर्मित ये भवन महिलाओं के लिए सम्मान और आत्मनिर्भरता के नए केंद्र बनेंगे। यह महतारी सदन छत्तीसगढ़ की माताओं-बहनों की शक्ति और क्षमता को समाज में नई पहचान देंगे। मुख्यमंत्री  साय ने 245 करोड़ 80 लाख रूपए के विकास कार्यों की दी सौगात औद्योगिक विकास ग्राम करेली बड़ी और भालूझूलन में औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 16 करोड़ 61 लाख रूपए की लागत से आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा मुख्यमंत्री ने इसके लिए भूमिपूजन भी किया। इसके अलावा जी-जामगांव औद्योगिक क्षेत्र में 6 करोड़ रूपए की राशि से निर्मित विभिन्न आधारभूत संरचनाओं का लोकार्पण भी किया। इन कार्यों से उद्योग और रोजगार की नई संभावनाएँ खुलेंगी। शिक्षा एवं कौशल विकास मुख्यमंत्री  साय ने शिक्षा और कौशल उन्नयन के लिए 27 करोड़ 67 लाख रूपए की लागत से आईटीआई भवन, शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज और लाइवलीहुड कॉलेज भवन के लिए शिलान्यास भी किया।  साय ने 7 करोड़ 53 लाख रूपए से बने कृषि महाविद्यालय भवन एवं छात्रावास का लोकार्पण भी किया। ये संस्थान युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और कौशल विकास के प्रमुख केंद्र बनेंगे। सड़क और अधोसंरचना मुख्यमंत्री ने धमतरी जिले में 9 सड़कों के निर्माण और सुधार कार्यों का शिलान्यास भी किया। इन सड़कों पर 119 करोड़ 79 लाख रूपए खर्च किए जायेंगे। उन्होंने इसके साथ ही गौरव पथ योजना के तहत 1 करोड़ 70 लाख रूपए से बने गातापार और बकली मार्ग का भी किया। यह सभी नई सड़कें गाँवों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।  स्वास्थ्य सुविधाएँ मुख्यमंत्री  साय ने मगरलोड विकासखंड के भेण्ड्री में 75 लाख रूपए की लागत से बनने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का लोकार्पण भी किया। इससे ग्रामीण अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाएँ और अधिक सुलभ होंगी। पेयजल एवं सिंचाई  साय ने धमतरी जिले में जल जीवन मिशन के तहत लगभग 30 करोड़ रूपए की लागत के 39 कार्य का लोकार्पण किया। जिससे जिले की हर बस्ती ‘हर घर जल’ प्रमाणित होगी। उन्होंने कोडेबोड़ में सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 26 करोड़ 37 लाख रूपए से निर्मित योजना का लोकार्पण किया। और महानदी नहर पर 4 करोड़ 29 लाख रूपए से क्रॉस रेग्युलेटर निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। इससे किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा और ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। विज्ञान एवं पर्यटन मुख्यमंत्री ने गंगरेल में साइंस पार्क बनाने के लिए शिलान्यास किया। इस साइंस पार्क के बन जाने से बच्चों और युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ पर्यटन की नई संभावनाओं को भी बढ़ावा देगा। सामाजिक विकास आज के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  साय ने 50 लाख की लागत से बनने वाले कंवर समाज भवन (मधुबन धाम, राकांडीह) की आधारशिला भी रखी। यह भवन जिले में सामुदायिक विकास को नई ऊर्जा देगा। इन सभी विकास कार्यों से धमतरी जिले के कुरूद क्षेत्र में न केवल आधारभूत संरचना मजबूत होगी, बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में भी नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक दिन जिले की प्रगति और जनकल्याण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज़, मंत्री विजयवर्गीय ने अधिकारियों को दिए नियमित निरीक्षण के निर्देश

विजयवर्गीय का निर्देश: सिंहस्थ की तैयारियों में लापरवाही नहीं, अधिकारी करें नियमित निरीक्षण गुणवत्ता के साथ तय समय पर पूरे हों निर्माण कार्य-  मंत्री  विजयवर्गीय मंत्रालय में विभागवार सिंहस्थ कार्यों की हुई समीक्षा भोपाल  नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने विभागीय अधिकारियों को सिंहस्थ के निर्माण कार्यों का उज्जैन पहुँचकर निरीक्षण करने के निर्देश दिये हैं। मंत्री  विजयवर्गीय सोमवार को मंत्रालय में बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में ही पूरा किया जाये। बैठक में बताया गया कि करीब 11 हजार 909 करोड़ रुपये के विभिन्न विभागों के 132 कार्यों को मंत्रि-मण्डलीय समिति की अनुशंसा दी जा चुकी है। यह कार्य सिंहस्थ और विभिन्न विभागों की मद से किये जा रहे हैं। इन कार्यों के लिये करीब 673 करोड़ रुपये की राशि भी जारी की जा चुकी है। वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ कार्यों में संस्कृति और नगरीय विकास एवं आवास विभाग के पीपीपी मोड पर होने वाले कार्यों को भी मंजूरी दी गयी है। मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि सिंहस्थ में आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिये राज्य सरकार की ओर से संसाधनों की कमी नहीं होने दी जायेगी। उन्होंने आयोजन की बेहतर व्यवस्था के लिये विभिन्न विभागों के साथ लगातार बैठक करने के भी निर्देश दिये। बैठक में रेलवे द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की गयी। मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि मेला क्षेत्र में ट्रेन से पहुँचने वाले यात्रियों की सुविधा के लिये रेलवे स्टेशन के पास ही पर्याप्त मात्रा में स्नान-गृह एवं सुलभ कॉम्पलेक्स की व्यवस्था हो। नगरीय विकास मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि उज्जैन से जुड़े धार्मिक क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कों के चौड़ीकरण कार्य को प्राथमिकता दी जाये। उन्होंने आकस्मिक सेवा, जिनमें अग्निशमन, स्वास्थ्य, पेयजल आदि की भी जानकारी प्राप्त की। मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि निर्माण कार्यों के साथ मेला क्षेत्र की मेपिंग का कार्य भी किया जाये, जिससे आवागमन सुविधाजनक हो सकेगा। उन्होंने कान्ह नदी के डायवर्सन, सिंहस्थ में क्षिप्रा नदी में जल की निरंतर प्रवाह योजना, घाट निर्माण के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। मंत्री  विजयवर्गीय ने उज्जैन संभाग के बस स्टैण्ड के उन्नयन की योजना के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान रेलवे की बेहतर व्यवस्था के लिये आकलन कर जरूरी प्रस्ताव रेलवे मंत्रालय को भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों को मंजूरी मिल गयी है, संबंधित एजेंसी को डीपीआर तैयार कर जल्द काम शुरू करने के लिये कहा गया है। निर्माण कार्य और व्यवस्था से जुड़े सभी काम दिसम्बर-2027 तक हर हाल में पूरे किये जायेंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने बताया कि ऊर्जा विभाग के 329 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी दी जा चुकी है। इंदौर-उज्जैन मार्ग का 6 लेन में चौड़ीकरण का कार्य 1692 करोड़ रूपये और इंदौर-उज्जैन वैकल्पिक मार्ग 4 लेन लम्बाई 49 किलोमीटर के लिये 950 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। बैठक में संस्कृति, पर्यटन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की गयी।  

अब सस्ता हुआ सीमेंट! देश की सबसे बड़ी कंपनी अल्ट्राटेक ने कीमतों में की बड़ी कमी

नई दिल्ली सीमेंट सेक्‍टर की दिग्‍गज कंपनी अल्‍ट्राटेक ने जीएसटी कटौती का तोहफा अपने कस्‍टमर्स को दिया है. कंपनी ने सीमेंट की कीमतों में कटौती का ऐलान किया है, जो 22 सितंबर से प्रभावी हैं. अब 1 बोरी सीमेंट पहले से काफी सस्‍ता हो चुका है. कंपनी ने अपने सर्कुलर में कहा कि 22 सितंबर से ग्रे सीमेंट और सफेद सीमेंट सभी पर GST 18% लागू होगा, जो पहले 28 फीसदी था.  कंपनी ने कहा कि एक जिम्मेदार संगठन के तौर पर अल्ट्राटेक इस कटौती का पूरा लाभ अपने डीलर्स और कस्‍टमर्स तक पहुंचाएगा. जिस कारण ग्रे और सफेद सीमेंट की कीमतों में जीएसटी संशोधन किया जा रहा है. कंपनी ने सभी डीलर्स को इसका लाभ कस्‍टमर्स को देने के लिए निर्देश दिया.  कंपनी ने कहा कि 22 सितंबर से नई जीएसटी दर सभी सीमेंट बैग पर लागू होंगे. अपने 17 सितंबर को जारी सर्कुलर में कंपनी ने कहा कि अबसे 21 सितंबर, 2025 के बीच, प्लांट से भेजे जाने वाले सभी सीमेंट बैगों पर पुराना और संशोधित एमआरपी दोनों दर्ज किया जाएगा. पुराना स्‍टॉक खत्‍म होने के बाद ही नई कीमत पर नया स्‍टॉक दिया जाएगा. कितने कम हुए सीमेंट के दाम  Ultratech ने अलग-अलग कैटेगरी के सीमेंट की कीमतों में कटौती की है. कंपनी ने एक बोरी सीमेंट पर करीब 50 रुपये घटाए हैं. PPC सीमेंट के एक बोरी की कीमत पहले 550 रुपये थी, जो अब घटकर 500 रुपये हो चुकी है. PCC Premium LPP के एक बोरी की कीमत पहले 600 रुपये थी, जो अब कम होकर 550 रुपये हो चुकी है. बाकी कैटेगरी के सीमेंट पर भी इसी तरह दाम घटे हैं.  सीमेंट पर कितना घटा जीएसटी जीएसटी काउंसिल की बैठक में सीमेंट पर जीएसटी को 28 फीसदी से घटकार 18 फीसदी कर दिया गया, यानी सीमेंट की कीमतों में 10 फीसदी जीएसटी रेट कम किए गए. यह कटौती 22 सितंबर से देश मे लागू हो चुकी है.  अब स‍िर्फ 2 मुख्‍य स्‍लैब  गौरतलब है कि 3 सितंबर को हुए जीएसटी काउंसिल की बैठक में अबतक के सबसे बड़ा जीएसटी सुधार किया गया. इसके तहत 4 स्‍लैब को हटाकर सिर्फ 2 मुख्‍य स्‍लैब 5% और 18% कर दिया गया. वहीं लग्‍जरी और सिन प्रोडक्‍ट पर जीएसटी दर को बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया. जीएसटी में इतने बड़े सुधार के बाद 22 सितंबर से तमाम चीजें सस्‍ती हो गई हैं. एसी-कार से टीवी, कपड़ा और जूता तक सस्‍ते हो चुके हैं. हालांकि अभी कस्‍टमर्स नए स्‍टॉक का इंतजार कर रहे हैं. 

₹49,999 में Ola की S1 X और Roadster बाइक, जानें ऑफर की पूरी डिटेल

मुंबई  अगर आप इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकल बनाने वाली देसी कंपनी ओला इलेक्ट्रिक ने ओला सेलिब्रेट्स इंडिया नाम से एक शानदार फेस्टिव ऑफर शुरू किया है, जिसके तहत इसकी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की शुरुआती कीमत ₹49,999 हो गई है। यह ऑफर मुहूर्त महोत्सव के नाम से शुरू किया गया है जो अगले नौ दिनों तक चलेगा। इस दौरान रोजाना सीमित संख्या में स्कूटर और मोटरसाइकिल 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर उपलब्ध होंगी। ओला रोज सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इन खास मुहूर्तों की घोषणा करेगा। ₹49,999 में मिलेंगे ये स्कूटर और मोटरसाइकल इस ऑफर के तहत ओला S1 X का 2 kWh बैटरी वाला मॉडल मात्र ₹49,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। इसकी कीमत 81,999 रुपये है। इसके अलावा ओला रोडस्टर X का 2.5 kWh बैटरी वाला वेरिएंट सिर्फ ₹49,999 में मिलेगा। इस मोटरसाइकल की कीमत 99,999 रुपये है। ₹99,999 में दमदार मॉडल जो लोग ज्यादा पावर वाले मॉडल लेना चाहते हैं उनके लिए ओला का S1 प्रो+ (5.2 kWh) और रोडस्टर X+ (9.1 kWh) की कीमत अब ₹99,999 है। ये दोनों ही टॉप-स्पेसिफिकेशन वाले मॉडल हैं, जिनमें 4680 भारत सेल बैटरी पैक लगे हैं। वैसे इनकी कीमत 1,69,999 रुपये और 1,89,999 रुपये है। ओला की अन्य गाड़ियों की कीमतें सीमित समय के इस ऑफर के अलावा ओला अपनी अन्य गाड़ियों को भी बेचती रहेगी। S1 प्रो+ और S1 प्रो – इनकी बैटरी 3 kWh से 5.2 kWh तक की है, और इनकी कीमत ₹1.20 लाख से ₹1.69 लाख के बीच है। S1 X – यह इलेक्ट्रिक स्कूटर आम लोगों के लिए बना है और इसकी शुरुआती कीमत ₹81,999 है। पुराने मॉडल – दूसरी जनरेशन के पुराने मॉडल अभी भी ₹97,999 और ₹1,18,999 में उपलब्ध हैं। मोटरसाइकिलों की कीमतें ओला ने अपनी रोडस्टर सीरीज को भी कई कॉन्फिगरेशन में पेश किया है। रोडस्टर X+ – इसमें 4.5 kWh की बैटरी है और इसकी कीमत ₹1,27,499 है। रोडस्टर X – यह 2.5 kWh, 3.5 kWh और 4.5 kWh के विकल्पों में आती है और इसकी कीमत ₹99,999 से ₹1,24,999 के बीच है। स्पोर्ट्स स्कूटर सेगमेंट में एंट्री करेगा ओला ओला ने हाल ही में अपने सालाना संकल्प इवेंट में यह भी बताया कि 4680 भारत सेल वाली S1 प्रो+ (5.2 kWh) और रोडस्टर X+ (9.1 kWh) की डिलीवरी नवरात्रि से शुरू हो जाएगी। इनकी कीमत ₹1.69 लाख और ₹1.89 लाख है। इसके साथ ही ओला ने स्पोर्ट्स स्कूटर सेगमेंट में भी एंट्री की घोषणा की है। S1 प्रो स्पोर्ट नाम का यह स्कूटर जनवरी 2026 में ₹1.49 लाख की शुरुआती कीमत पर लॉन्च होगा। ओला इलेक्ट्रिक इस फेस्टिव सीजन में ग्राहकों को अपनी तरफ खींचने के लिए कई आकर्षक छूट और फायदे दे रहा है।  

दिवाली-छठ पर बढ़ाई गई 12,000 स्पेशल ट्रेनें, अब हर मार्ग पर सफर होगा तेज़ और सुविधाजनक

नई दिल्ली देश में दिवाली की तैयारियां जोरों पर हैं और साथ ही लोग छठ पूजा पर भी अपने घर जाने के लिए निकलने की के लिए ट्रेन-बस बुकिंग करने में लगे हैं. इन त्योहारों लोग अपने घर आराम से और सुरक्षित पहुंचें इसके लिए भारतीय रेलवे ने भी बड़ी तैयारी की है और इसके तहत पिछले साल के मुकाबले इस साल और ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इससे जुड़ी जानकारी शेयर की है.  पिछले साल से 4500 ट्रेनें ज्यादा छठ और दिवाली के लिए ट्रेन संचालन पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि इन पर्वों पर पिछले साल हमने 7,500 स्पेशल ट्रेनें संचालित की थीं और इस बार हम अपनी क्षमता को और भी बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस बार छठ और दिवाली पर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए इंडियन रेलवे का लक्ष्य करीब 12000 स्पेशल ट्रेनें चलाने का है. गौरतलब है कि दिवाली और छठ पूजा के मौके पर दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े मेट्रो शहरों से उत्तर प्रदेश और बिहार समेत अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में लोग जाते हैं और इस दौरान ट्रेनों में भारी भीड़ नजर आती है. स्टेशनों पर उमड़ने वाली इस भीड़ को देखते हुए ही रेलवे ने इस साल बीते साल से ज्यादा ट्रेनें चलाने की तैयारी की है.  1 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चलेंगी ट्रेनें अश्विनी वैष्णव ने आगे इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इंडियन रेलवे की ओर से अभी तक 10,000 स्पेशल ट्रेनों की अधिसूचना जारी की जा चुकी है. छठ-दिवाली के लिए चलाई जाने वाली इन स्पेशल ट्रेनों में 150 ट्रेनें पूरी तरह से अनारक्षित कैटेगरी की होंगी और ये ट्रेनें अंतिम समय में चलाई जाएंगी. टाइमलाइन के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 अक्टूबर से शुरू होगा और 15 नवंबर तक किया जाएगा. वंदे भारत स्लीपर पर बड़ा अपडेट रेल मंत्री ने देश भर में भारतीय रेलवे के संचालन में तमाम प्रयासों के चलते आए सुधारों के बारे में बात करते हुए बताया कि अब देश के 70 में से 29 डिवीजनों में हमारी समयपालनता 90% से ज्यादा है. इसके साथ ही उन्होंने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पर भी बड़ा अपडेट दिया है और बताया कि इसे लेकर काम कहां तक आगे बढ़ा है.  अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर तैयार है और उसका परीक्षण भी पूरा हो चुका है. उन्होंने आगे कहा कि हम एक साथ दो Vande Bharat Sleeper रेक शुरू करेंगे और हम दूसरे रेक का ही इंतजार कर रहे हैं, जो 15 अक्टूबर तक आ जाएगा. इन रूट पर वंदे भारत और अमृत भारत रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने एक्स अकाउंट पर लखनऊ जंक्शन और सहारनपुर के बीच नई वंदे भारत एक्सप्रेस को लेकर कहा कि ये यात्रा के समय को कम करेगी और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं भी प्रदान करेगी, जिससे यात्रा अधिक सुविधाजनक और आरामदायक होगी. इसके अलावा मदार जंक्शन (अजमेर) और दरभंगा के बीच नई साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस को लेकर उन्होंने कहा कि ये निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए सहायक होगी.

सिनेमा प्रेमियों के लिए राहत या झटका? हाई कोर्ट ने कर्नाटक के टिकट दाम नियम पर लगाया ब्रेक

बेंगलुरु  मूवी टिकट के दाम अधिकतम 200 रुपये तक सीमित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस रवि वी होसमानी ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए मल्टीप्लेक्स के मालिकों को राहत दी है। मल्टीप्लेक्स असोसिएशन ने एक याचिका फाइल कर कर्नाटक सिनेमा रेग्युलेशन रूसल 2025 को चुनौती दी थी। इस नियम में कहा गया था कि फिल्म के टिकट की कीमत 200 रुपये से ज्यादा नहीं बढ़ाई जा सकती। फिल्म प्रड्यूसर्स, मल्टीप्लेकस एसोसिएशन ऑफ इंडिया औ पीवीआर आईनॉक्स के शेयरहोल्डर्स ने मिलकर हाई कोर्ट में अपील की थी। याचिका में कहा गया था कि सभी थिएटर में इस तरह से टिकट की कीमतों को सीमित कर देने से नुकसान होगा। याचिका में कहा गया कि सिंगल स्क्रीन थिएटर के मुकाबले मल्टीप्लेक्सेज में सुविधाएं ज्यादा होती हैं। ऐसे में वहां फिल्म दिखाने का खर्च भी ज्यादा आता है। याचिका में कहा गया था कि कि ओटीटी प्लैटफॉर्म, सैटलाइट टीवी और मनोरंजन के अन्य साधनों पर कड़े नियम नहीं हैं। वहीं इस तरह के नियम केवल थिएटर पर ही लगाए जा रहे हैं। एसोसिएशन ने कहा कि सरकार के ये नियम संविधान के आर्टिकल 19 (1) (g) का उल्लंघन करते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मल्टीप्लेक्स में टेक्नॉलजी, इनवेस्टमेंट, फॉर्मेट पर ज्यादा खर्च होता है और इसका बिना ध्यान दिए ही नियम बनाना गलत है। नियम में 75 सीट या उससे कम सीट वाले मल्टी स्क्रीन प्रीमियम सिनेमा को छूट दी गई थी। हालांकि इसको पारिभाषित नहीं किया गया था। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि सभी को मनोरंजन का अधिकार है और ऐसे में जनता के हित में यह फैसला लिया गया है। एसोसिएशन की तरफ से पेश हुए वकील अदया होला ने कहा कि इस तरह से 200 रुपये का कैप निर्धारित कर देना मनमाना रवैया है। उन्होंने कहा कि ग्राहक ज्यादा पैसे खर्च करके भी लग्जरी सिनेमा देखना चाहता है। ऐसे में एग्जिबिटर्स को भी लग्जरी चीजें उपलब्ध करवाने के लिए कीमत निर्धारित करने की छूट मिलनी चाहिए। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि इसी तरह का मामला एक अन्य राज्य में भी था। कर्ट में जाने के बाद नियम बदलना पड़ा था। एक अन्य वकील ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार को पड़ना ही नहीं चाहिए। यह मामला ग्राहकों और थिएटर मालिकों के बीच का है।  

राम मंदिर के बदले मिलने वाली जमीन पर मस्जिद निर्माण की योजना रद्द, RTI में खुलासा

अयोध्या  अयोध्या में सदियों पुराने मंदिर-मस्जिद विवाद खत्म हो चुका है। विवादित स्थल पर राम मंदिर बन चुका है, जिसे लगातार भव्य रूप दिया जा रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मुस्लिम पक्ष को जहां मस्जिद के लिए जमीन दी गई, वहां विकास की एक ईंट तक नहीं रखी गई है। और अब तो आरटीआई आवेदन के तहत निर्माण योजना ही खारिज होने की जानकारी मिली है, जो चौंकाने वाली है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक RTI (सूचना का अधिकार) के जवाब से पता चला है कि अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में बनने वाले मस्जिद के लेआउट प्लान को खारिज कर दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र (NoC) जारी नहीं किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर, 2019 को अयोध्या के अहम फैसले में मस्जिद और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था। 3 अगस्त, 2020 को तत्कालीन अयोध्या डीएम अनुज कुमार झा ने अयोध्या के पास धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दी। मस्जिद ट्रस्ट ने 23 जून, 2021 को योजना की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। तब से, मंजूरी पर कोई अपडेट नहीं आया है। विभाग ने बताया ये है दिक्कत अखबार ने आरटीआई कार्यकर्ता के हवाले से लिखा है कि मस्जिद के लेआउट प्लान को मंजूरी न मिलने का कारण विभिन्न सरकारी विभागों से आवश्यक एनओसी का नहीं मिलना है. इन प्रमाणपत्रों के बिना प्राधिकरण ने योजना को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया. यह खुलासा उस समय हुआ है जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के उसी फैसले के तहत मंजूरी दी गई थी. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. अयोध्या विकास प्राधिकरण ने इस मामले में आगे की प्रक्रिया या समयसीमा के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है. यह स्थिति तब और जटिल हो जाती है, जब यह देखा जाता है कि राम मंदिर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि मस्जिद परियोजना अभी तक प्रारंभिक चरण में ही अटकी हुई है. इस खुलासे के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और संबंधित पक्ष इस मामले में आवश्यक कदम उठाएंगे ताकि परियोजना को गति मिल सके. मस्जिद ट्रस्ट ने कही ये बात अखबार ने मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन के हवाले से लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें वह भूखंड आवंटित किया. मैं हैरान हूं कि सरकारी विभागों ने एनओसी क्यों नहीं दी और प्राधिकरण ने मस्जिद के लेआउट प्लान को क्यों खारिज कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, अग्निशमन विभाग द्वारा की गई साइट जांच के दौरान यह पाया गया कि मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊंचाई के अनुसार अप्रोच रोड की चौड़ाई 12 मीटर होनी चाहिए. लेकिन मौके पर दोनों अप्रोच मार्ग 6 मीटर से अधिक नहीं थे और मुख्य अप्रोच मार्ग की चौड़ाई केवल लगभग 4 मीटर थी. ट्रस्ट सचिव ने बताया कि उन्हें एनओसी या खारिज किए जाने के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. अग्निशमन विभाग की आपत्ति के अलावा मुझे किसी अन्य विभाग द्वारा उठाई गई किसी भी आपत्ति की जानकारी नहीं है. NOC आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं मिली? 16 सितंबर 2025 को स्थानीय पत्रकार ओम प्रकाश सिंह की तरफ से दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में एडीए ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने आवेदन और जांच शुल्क के रूप में 4 लाख रुपये का भुगतान किया था। एडीए की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार- पीडब्ल्यूडी, प्रदूषण नियंत्रण, नागरिक उड्डयन, सिंचाई और राजस्व विभाग और नगर निगम, जिला मजिस्ट्रेट और अग्निशमन सेवा से एनओसी मांगी गई थी। मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन अनिवार्य कर दी है और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें भूखंड आवंटित किया है। मैं इस बात से अवाक हूं कि सरकारी विभागों ने अपनी एनओसी क्यों नहीं दी और प्राधिकरण ने मस्जिद के लेआउट प्लान को क्यों खारिज कर दिया।" उन्होंने बताया कि "हालांकि अग्निशमन विभाग द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण के दौरान यह पाया कि मस्जिद और अस्पताल की इमारत की ऊंचाई के अनुसार यह जरूरी था कि पहुंच मार्ग 12 मीटर चौड़ा होना चाहिए। जबकि मौके पर दोनों पहुंच मार्ग छह मीटर से अधिक नहीं थे। और मुख्य पहुंच मार्ग की चौड़ाई केवल चार मीटर थी। ट्रस्ट सचिव ने कहा कि उन्हें किसी एनओसी या अस्वीकृति के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा, "अग्निशमन विभाग की आपत्ति के अलावा, मुझे किसी अन्य विभाग की आपत्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।" उन्होंने कहा, "अब जब आरटीआई जवाब से हमें स्थिति स्पष्ट हो गई है, तो हम अपनी आगे की कार्रवाई तय करेंगे।"