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बीजेपी ने बिहार चुनाव के लिए खोले पत्ते, पहली लिस्ट में 71 नाम, सम्राट चौधरी को तारापुर से मैदान में उतारा

पटना.  बिहार चुनाव को लेकर बीजेपी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. बीजेपी उम्मीदवारों की पहली सूची में रामकृपाल यादव को भी टिकट मिला है. रामकृपाल यादव को दानापुर से टिकट दिया गया है. बीजेपी उम्मीवारों की पहली सूची के अनुसार सम्राट चौधरी को तारापुर से टिकट मिला है. वहीं नीरज बबलू छातापुर से चुनाव लड़ेंगे. तारापुर से सम्राट तो दानापुर से राम कृपाल को मिला टिकट बीजेपी की तरफ से जारी किए गए लिस्ट के मुताबिक, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को तारापुर, विजय सिन्हा को लखीसराय, सिवान से मंगल पांडेय, दानापुर से राम कृपाल यादव को और गया शहर से डॉ प्रेम कुमार को पार्टी ने मैदान में उतारा है. वहीं, पार्टी ने अपने सीनियर नेता नंद किशोर यादव का टिकट काट दिया है.  बीजेपी की पहली लिस्ट में प्रमुख उम्मीदवार     विजय कुमार सिन्हा – सीट: लखीसराय     सम्राट चौधरी – सीट: तारापुर     रामकृपाल यादव – सीट: दानापुर     डॉ. प्रेम कुमार – सीट: गया टाउन     तारकिशोर प्रसाद – सीट: कटिहार     आलोक रंजन झा – सीट: सहरसा     मंगल पांडेय – सीट: सीवान यह सूची केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद जारी की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे. बीजेपी की पहली लिस्ट में 9 महिलाओं को टिकट: 1.बेतिया से रेणु देवी 2. परिहार से गायत्री देवी 3. नरपतगंज से देवंती यादव 4. किशनगंज से स्वीटी सिंह 5. प्राणपुर से निशा सिंह 6. कोढा से कविता देवी 7. औराई से रमा निषाद 8. वारसलीगंज से अरुणा देवी 9. जमुई से श्रेयसी सिंह

रूस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, नेपाल और श्रीलंका के कलाकार पेश करेंगे श्रीराम की लीला

दीपोत्सव 2025: अयोध्या में पांच देशों के कलाकारों द्वारा अंतरराष्ट्रीय रामलीला का भव्य मंचन रूस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, नेपाल और श्रीलंका के कलाकार पेश करेंगे श्रीराम की लीला नेपाल और श्रीलंका की पहली बार होगी लक्ष्मण और रावणेश्वरा की प्रस्तुति – दीपोत्सव 2025: लाखों दीपों की रोशनी में सांस्कृतिक महोत्सव का अनोखा अनुभव – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से अयोध्या बना अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र अयोध्या इस वर्ष नौवें संस्करण के दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच बनकर उभर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार अयोध्या में एक अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय रामलीला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें रूस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, नेपाल और श्रीलंका के कलाकार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की लीला का मंचन करेंगे। अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की भागीदारी अयोध्या को न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र भी बनाएगी। इस बार कुल 90 विदेशी कलाकार अयोध्या की पावन भूमि पर अपनी कला और सांस्कृतिक धरोहर के माध्यम से रामकथा को जीवंत रूप में पेश करेंगे। अयोध्या के राम कथा पार्क में इस वर्ष विभिन्न राज्यों की प्रसिद्ध रामलीलाओं का मंचन किया जाएगा। रूस के कलाकार स्वयंवर की महिमा का अद्भुत मंचन रूस से आए 15 कलाकार रामलीला के दौरान स्वयंवर का दृश्य प्रस्तुत करेंगे। उनके मंचन में रूस की पारंपरिक रंगमंचीय तकनीक और भारतीय कथा का अनूठा मिश्रण दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगा। रूस के कलाकारों ने इस प्रस्तुति के लिए महीनों की तैयारी की है और वे दर्शकों को राम और सीता के दिव्य मिलन की अनुभूति देंगे। थाईलैंड : तीन प्रमुख युद्धों का दृश्य थाईलैंड से आए 10 कलाकार रामलीला में शूर्पणखा और राम-लखन संघर्ष, मारीच से संघर्ष और राम-रावण युद्ध का मंचन करेंगे। इन युद्धों के माध्यम से राम और रावण के बीच धर्म और अधर्म की कहानी दर्शकों के सामने प्रस्तुत होगी। थाईलैंड के कलाकारों की पारंपरिक नृत्य-नाट्य शैली इस प्रस्तुति को और भी जीवंत बनाएगी। इंडोनेशिया : लंका दहन और अयोध्या वापसी इंडोनेशिया के 10 कलाकार रामलीला में लंका दहन और अयोध्या वापसी के दृश्य को अद्भुत ढंग से प्रस्तुत करेंगे। यह प्रस्तुति दर्शकों को राम के जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ों का अनुभव कराएगी और अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाएगी। नेपाल : लक्ष्मण पर शक्ति प्रदर्शन की पहली प्रस्तुति नेपाल से आए 33 कलाकार इस बार रामलीला में पहली बार लक्ष्मण पर शक्ति प्रदर्शन प्रस्तुत करेंगे। इससे पहले नेपाल की रामलीला मुख्य रूप से मां सीता पर केंद्रित होती थी। इस बार की प्रस्तुति अयोध्या में रामलीला के अंतरराष्ट्रीय स्तर को और भी प्रतिष्ठित बनाएगी और दर्शकों को रामकथा का नया दृष्टिकोण दिखाएगी। श्रीलंका : के रावणेश्वरा का अद्भुत दृश्य श्रीलंका से आए 22 कलाकार में से दो कलाकार पहले ही अयोध्या पहुंच चुके हैं। यह टीम रामेश्वर की भूमि पर रावणेश्वरा का दृश्य प्रस्तुत करेगी। श्रीलंका वासी आज भी रावण को ईश्वर की भूमिका में मानते हैं और इस भाव को मंच पर जीवंत रूप से दिखाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की भूमिका अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के संस्थान के सलाहकार और विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय रामलीला 17 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चलेगी। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य न केवल रामलीला की परंपरा को जीवंत रखना है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्कृति और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करना है। दीपोत्सव और अयोध्या की परंपरा अयोध्या के 56 घाटों और मंदिरों पर लाखों दीपों की रोशनी में यह रामलीला देखने वालों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बनेगी। दीपोत्सव के दौरान रंग-बिरंगी रोशनी, पारंपरिक और आधुनिक सजावट और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों का मंचन अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को और भी उजागर करेगा। दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण इस अंतरराष्ट्रीय रामलीला का अंतरराष्ट्रीय कलाकारों का मंचन, पारंपरिक भारतीय वेशभूषा, लाइटिंग और सेट डिजाइन, सभी दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव होगा। विदेशी कलाकारों की प्रस्तुति से न केवल भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान बढ़ेगी, बल्कि अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव की भव्यता और आकर्षण भी दोगुना होगा।

नामांकन से पहले हंगामा! रेलवे फाटक पर फंसे अनंत सिंह, समर्थकों ने इंजन तक पहुंचकर खोला गेट

पटना  जेडीयू के उम्मीदवार अनंत सिंह का नामांकन के लिए निकला रोड शो उस समय कुछ देर के लिए रुक गया, जब बाढ़ रेलवे गुमटी का फाटक बंद हो गया. ट्रेन क्रॉसिंग के कारण फाटक गिरा तो अनंत सिंह का काफिला रास्ते में फंस गया और उन्हें वहीं रुकना पड़ा. घटना के दौरान अनंत सिंह ओपन जीप में सवार थे और तेज धूप के बीच समर्थकों के साथ आगे बढ़ रहे थे. फाटक बंद होने के कारण जब ट्रेन काफी देर तक नहीं गुजरी, तो उनके समर्थक परेशान होकर रेल इंजन के पास पहुंच गए और ट्रेन को जल्दी निकलवाने की कोशिश करने लगे. मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि अनंत सिंह काफी देर तक इंतजार करते रहे. उनके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी, क्योंकि नामांकन दाखिल करने का समय नजदीक आ रहा था. कुछ देर बाद जब ट्रेन को आगे बढ़ाया गया, तब जाकर रेलवे गुमटी का फाटक खोला गया और अनंत सिंह का काफिला आगे बढ़ सका. फाटक बंद होते ही रुक गया अनंत सिंह का काफिला यह मामला बाढ़ रेलवे स्टेशन के पास का बताया जा रहा है. वहां मौजूद लोगों ने बताया कि जैसे ही फाटक बंद हुआ, अनंत सिंह का पूरा काफिला, जिसमें कई गाड़ियां और समर्थक शामिल थे रुक गया. समर्थक लगातार "छोटे सरकार जिंदाबाद" के नारे लगा रहे थे, जबकि अनंत सिंह अपनी जीप से हालात का जायजा लेते नजर आए. जेडीयू की टिकट पर लड़ रहे चुनाव, सबसे पहले भरा नामांकन अनंत सिंह इस बार मोकामा विधानसभा सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और सोमवार को नामांकन दाखिल करने निकले थे. बताया जा रहा है कि वे इस चुनाव में जेडीयू के टिकट पर नामांकन करने वाले पहले प्रत्याशी हैं. घटना के दौरान मीडिया कर्मी और स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद रहे. कुछ मिनटों की इस रुकावट के बाद जैसे ही फाटक खुला, काफिले में लोगों राहत की सांस ली और रोड शो दोबारा शुरू हो गया.

गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम

यूपी में 'काऊ टूरिज्म' की संभावनाएं तलशेगी योगी सरकार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई पहचान  गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम दीपावली पर गोबर से बने दीपों और मूर्तियों के उपयोग को मिलेगा बढ़ावा  हर जिले में बनेगी एक आदर्श गोशाला, उन्हें बनाया जाएगा पर्यटन स्थल  गाय आधारित उत्पादों से बढ़ेगा स्वरोजगार, महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा सहयोग – मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभागों को मिली कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी – आत्मनिर्भर गोशालाओं के जरिए “वोकल फॉर लोकल” को मिलेगा बल लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। प्रदेश की सभी गोशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने यह भी तय किया है कि प्रत्येक जनपद में एक आदर्श गोशाला स्थापित की जाएगी, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत 'काऊ टूरिज्म' की संभावनाओं को भी तलाशा जाएगा, जिससे गोशालाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकें बल्कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार और आय का साधन उपलब्ध हो सके। सरकार की मंशा है कि गाय से प्राप्त पदार्थों, गोबर, गोमूत्र, दूध, घी और मूत्रजनित उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देकर राज्य की गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए। इस दिशा में महिला स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर गोबर से बने उत्पादों का उत्पादन और विपणन किया जा सके। इसके तहत सरकार ने निर्देश दिए हैं कि दीपावली पर्व पर गाय के गोबर से बने दीपों, मूर्तियों और अन्य उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए और इनके प्रचार-प्रसार के लिए जनमानस में जागरूकता अभियान चलाया जाए।  पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के अनुसार दीपावली के अवसर पर गोबर से बने दीप, मूर्तियां और सजावटी सामग्री के उपयोग को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन उत्पादों की बाजारों में उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी ताकि आम नागरिक भी इनका उपयोग कर ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा दे सकें।  प्रमुख सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश मेश्राम के अनुसार अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोशालाओं में गोबर और गोमूत्र के व्यवसायिक उपयोग के लिए स्थानीय स्तर पर योजनाएं तैयार की जाएं। उनके अनुसार, गोशालाओं की आत्मनिर्भरता के साथ-साथ यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू की गई इस योजना से उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में न केवल गोवंश संरक्षण को नई गति मिलेगी, बल्कि गौ-आधारित उत्पादों के माध्यम से स्वदेशी उद्योगों को भी नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में ‘सुशासन संवाद’, जिलों के नवाचारों पर हुई गहन चर्चा

रायपुर,   मंत्रालय महानदी भवन के पंचम तल स्थित ऑडिटोरियम में आज मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में ‘सुशासन संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, विभागीय सचिव, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ सहित राज्य के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।   नवाचार जनसेवा के केंद्र में हो – मुख्यमत्री साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवाचार ऐसे हों जो दीर्घकालिक रूप से व्यवहारिक हों, नागरिकों की सुविधा बढ़ाएं, और शासन की फ्लैगशिप योजनाओं को सहयोग दें। राज्य सरकार नवाचारों का स्वागत करती है, परंतु यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बुनियादी प्रशासनिक कार्य इससे प्रभावित न हों।  उन्होंने कहा कि नवाचार तुगलकी प्रयोग न बनें, बल्कि नागरिक जीवन को सरल बनाने का माध्यम बनें। स्थायी और व्यावहारिक नवाचारों पर जोर मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जो भी नवाचार हों, उनमें लोगों की राय अवश्य शामिल की जाए और उनके प्रभाव का फीडबैक लिया जाए। उन्होंने कहा कि कई बार जिले में किए गए नवाचार आने वाले अधिकारियों की प्राथमिकता में नहीं रहते, इसलिए इनकी स्थायित्व और उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए। नवाचार का उद्देश्य जनता की सेवा और पारदर्शिता में वृद्धि होना चाहिए। लोक सेवा गारंटी अधिनियम पर सख्त रुख मुख्यमंत्री साय ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम को सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी सेवाएं निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण ढंग से दी जाएं और यदि देरी होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अगली समीक्षा में यह देखा जाएगा कि कितने मामलों का समय पर निराकरण हुआ और कितने अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। कार्यालयीन अनुशासन और स्वच्छता पर विशेष बल सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आरंभ किए गए ‘पुराने दस्तावेज हटाओ’ अभियान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यालयों में वर्षों पुराने अनुपयोगी फाइलें न केवल जगह घेरती हैं, बल्कि नागरिकों में गलत छवि भी बनाती हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी कलेक्टर अपने कार्यालयों को व्यवस्थित करें ताकि पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ सके। ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम ई-ऑफिस प्रणाली है। उन्होंने सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा में इसे पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता घटाना आवश्यक है और सभी लंबित फाइलों को डिजिटल माध्यम में लाना होगा ताकि पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो सके। ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डिजिटल गवर्नेंस का युग है। सभी कलेक्टर सुनिश्चित करें कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर अधिकाधिक सेवाएं उपलब्ध हों और जनता ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सके। उन्होंने निर्देश दिया कि नागरिकों में डिजिटल सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक सेवा को डिजिटल करना ही पारदर्शी शासन की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। शिकायतों के समाधान में पारदर्शी व्यवस्था मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनता की शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी निराकरण प्रशासन की जिम्मेदारी है। सभी कलेक्टर शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करें और डिजिटल माध्यम में उनके समाधान की स्थिति उपलब्ध कराएं। इससे नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा और भ्रष्टाचार की संभावनाएं समाप्त होंगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में मैनुअल गवर्नेंस से भ्रष्टाचार बढ़ा, जबकि डिजिटल प्रणाली जवाबदेही सुनिश्चित करती है। फील्ड विजिट और निरीक्षण की स्थायी प्रणाली बने मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केवल आकस्मिक निरीक्षण से प्रशासन नहीं सुधरता। फील्ड विजिट को स्थायी प्रक्रिया के रूप में अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि जैसे पानी की गहराई का अंदाजा पानी में उतरे बिना नहीं होता, वैसे ही योजनाओं की सच्चाई फील्ड में जाकर ही पता चलती है। नियमित निरीक्षण से न केवल सुधार होता है बल्कि आंकड़ों की बाजीगरी पर भी नियंत्रण रहता है। मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी को ट्रांसफॉर्म करने का समय आ गया है। नई कार्य संस्कृति और तकनीक को अपनाए बिना सुशासन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जनता में विश्वास बढ़ाना है, तो उच्चाधिकारियों को खुद उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि जब हम स्वयं समय पर दफ्तर पहुंचेंगे, तभी नीचे तक अनुशासन की संस्कृति बनेगी। जिलों के नवाचारों की प्रस्तुति और कॉफी टेबल बुक का विमोचन कार्यक्रम में रायपुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर और उदंती वन अभयारण्य के नवाचारों की विस्तृत प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री ने जिलों में हो रहे नवाचारों पर आधारित ‘कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन किया और अधिकारियों को सराहा जिन्होंने जमीनी स्तर पर योजनाओं को परिणाममुखी बनाया। कार्यक्रम के दौरान ‘जशप्योर’ ब्रांड के स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की सफलता का उल्लेख किया गया। महुआ को सुपरफूड के रूप में स्थापित करने वाला भारत का पहला ‘महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ जशपुर में संचालित है। जशप्योर उत्पाद अब पाँच राज्यों में बिक रहे हैं और विक्रय में 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। नारायणपुर जिले के 'डेटा प्लेटफॉर्म’ द्वारा नक्सल गतिविधियों की ट्रैकिंग और दंतेवाड़ा में ब्लॉकचेन तकनीक से 7 लाख भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन को मुख्यमंत्री ने अत्यंत सराहनीय बताया। उन्होंने अबूझमाड़ और दंतेवाड़ा में प्रशासन के हाई-टेक सिस्टम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यही आधुनिक छत्तीसगढ़ की दिशा है। सुशासन संवाद में रायपुर जिले में जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त पहल ‘टीम प्रहरी’ के कार्यों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस पहल के तहत अवैध अतिक्रमणों को हटाने, यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। नारायणपुर जिले में ‘इंटिफाई’ डेटा मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुतिकरण दिया गया, जिसके माध्यम से नक्सल गतिविधियों की प्रभावी ट्रैकिंग की जा रही है तथा शासकीय योजनाओं से संबंधित सभी आंकड़ों को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकत्रित किया गया है। वहीं दंतेवाड़ा जिले में ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करते हुए 7 लाख भूमि अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया गया है, जिससे भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता और त्वरित समाधान सुनिश्चित हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन कोई एक दिन का लक्ष्य नहीं, बल्कि निरंतर सुधार की प्रक्रिया है। इसके लिए हर अधिकारी को अपने … Read more

वेस्टइंडीज पर भारत का दबदबा कायम, 2-0 से सीरीज जीत कर किया सूपड़ा साफ

नई दिल्ली  तीन दिन में पहला टेस्ट हारने के बाद किसी को उम्मीद नहीं थी कि दूसरे टेस्ट में वेस्टइंडीज पांच दिन तक लड़ाई कर पाएगी, लेकिन दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए दूसरे टेस्ट में भारत ने पांचवें दिन आठ विकेट से जीत हासिल की. इसी के साथ टेस्ट सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली. मैच में आठ विकेट (5+3) लेने वाले कुलदीप यादव को प्लेयर ऑफ द मैच तो रवींद्र जडेजा को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया. वेस्टइंडीज ने रखा था 121 रन का लक्ष्य पारी की हार टालते हुए वेस्टइंडीज ने चमत्कारिक रूप से वापसी करते हुए भारत के सामने 121 रन का लक्ष्य रखा था, जिसके बाद केएल राहुल ने नाबाद 58 रन बनाने हुए भारत को सात विकेट से जीत दिलाई. कप्तान शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल ने पहली पारी में शतक बनाए थे. गिल की कप्तानी में पहली टेस्ट सीरीज जीत रोहित शर्मा के संन्यास के बाद नवनियुक्त टेस्ट कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में भारत की ये पहली टेस्ट सीरीज जीत है. भारत ने अहमदाबाद में खेला गया पहला टेस्ट मैच पारी और 140 रन से अपने नाम किया था. वेस्टइंडीज के खिलाफ ये भारत की लगातार 10वीं जीत है. इसी के साथ अब दिल्ली का अरुण जेटली स्टेडियम भारतीय टेस्ट टीम का अभेद्द किला बन चुका है. 1993 से लेकर अब तक भारत यहां लगातार 14 मैच जीत चुका है. इससे पहले ये रिकॉर्ड मोहाली के मैदान पर लगातार 13 जीत का था. आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप पॉइंट्स टेबल सात मैच में चार जीत के साथ भारत के पास सबसे ज्यादा 52 पॉइंट हैं. मगर कम PCT के चलते भारत तीसरे नंबर पर है. टॉप पर ऑस्ट्रेलिया है, जिसने अपने तीनों टेस्ट जीतते हुए 100 PCT के साथ नंबर वन पोजिशन बरकरार रखी है. दूसरे नंबर पर श्रीलंका, चौथे पर इंग्लैंड, पांचवें पर बांग्लादेश और छठे नंबर पर वेस्टइंडीज है. अन्य टीम का अभी खाता नहीं खुला है. भारत ने वेस्टइंडीज को दिया फॉलोऑन यशस्वी जायसवाल के 175 और कप्तान शुभमन गिल की 129 रन की शतकीय पारी के बूते भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए 518/5 पर अपनी पहली पारी घोषित की. जवाब में कुलदीप यादव के पांच और रवींद्र जडेजा के तीन विकेट वाली कातिलाना गेंदबाजी के बूते वेस्टइंडीज की टीम 248 रन पर ही सिमट गई और उसे फॉलोऑन खेलना पड़ा था. कैम्पबेल और शाई होप का शतक इसके बाद वेस्टइंडीज ने जबरदस्त लड़ाई की. सलामी बल्लेबाज जॉन कैम्पबेल ने 115 और शाई होप ने 103 रन की पारी खेलने के साथ तीसरे विकेट के लिए 177 रन की साझेदारी कर टीम को पारी की हार से बचा लिया. इसके बाद आखिरी विकेट के लिए जस्टिन ग्रीव्स (50) और जायडेन सील्स (32) ने 79 रन की साझेदारी कर भारतीय फील्डर्स को थकाते हुए अपनी दूसरी पारी में 390 रन बना लिए. दूसरी पारी में भारत के लिए कुलदीप यादव और जसप्रीत बुमराह ने तीन-तीन विकेट लिए. 121 रन के लक्ष्य को हासिल करने में यशस्वी जायसवाल, साई सुदर्शन और शुभमन गिल का विकेट गिर गया.  

विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाएं अधिक से अधिक रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय कोर्सेस : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विश्वस्तरीय बनें उच्च शिक्षा के सभी संस्थान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाएं अधिक से अधिक रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय कोर्सेस अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में अगले सत्र से प्रारंभ करें कृषि संकाय विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक विषय प्रारंभ करने संबंधी बैठक में दिए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की उच्च शिक्षा गतिविधियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के सभी यूनिवर्सिटी कैंपस एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय बनाए जाएं। यह सभी संस्थान आईआईटी, आईआईएम और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की तर्ज पर विकसित किए जाएं। सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय विषय एवं कोर्सेस प्रारंभ किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग और प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रोजगारपरक नवीन विषय प्रारंभ करने के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन, प्रमुख सचिव पशुपालन  उमाकांत उमराव, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  संदीप यादव, प्रमुख सचिव खेल एवं युवक कल्याण  मनीष सिंह सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, उच्च शिक्षाविद् एवं विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में अगले सत्र से कृषि संकाय और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में बीटेक में डेयरी टेक्नॉलाजी का पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों में इन कोर्सेस का प्रचार करें जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थी इस विषय की पढ़ाई के लिए आगे आएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विमानन क्षेत्र में बड़ा स्कोप है, इसलिए विश्वविद्यालयों में इसके पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का भी समग्र अध्ययन कराया जाए। इसके लिए इस विश्वविद्यालय को आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय बनाने पर भी गंभीरता से विचार कर निर्णय के लिए रखा जाए। उन्होंने कहा कि पाणिनी विश्वविद्यालय को आयुर्वेद विश्वविद्यालय बनाने से इस विश्वविद्यालय का परिधि क्षेत्र बढ़ेगा और प्रदेश के करीब 50 से अधिक आयुर्वेदिक महाविद्यालय इसके दायरे में आ जाएंगे। यह एक बड़ा कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि विश्वविद्यालयों में सभी प्रकार की भर्तियों को टाईम-फ्रेम में लाएं और जल्द से जल्द सभी प्रकार की भर्तियां एवं नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएं। इस पर अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। वर्तमान में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 364 पद भरे हुए हैं और इन्हीं श्रेणी के 1585 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रचलित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्सिंग एवं पैरामेडिकल महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी ली। अपर मख्य सचिव  राजन ने बताया कि सत्र 2025-26 में नर्सिंग कॉउंसिल द्वारा प्रवेश प्रकिया आरम्भ कर दी गई है। पैरामेडिकल कॉउंसिल द्वारा सत्र 2025-26 की मान्यता संबंधी प्रक्रिया एक माह में प्रारम्भ करने की बात कही गई है। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को एनओसी उच्च शिक्षा विभाग के संचालनालय स्तर पर एवं मान्यता क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए ग्राम कल्याणपुरा में 70 एकड़ भूमि उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवंटित की जा चुकी है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर द्वारा जिला अस्पताल झाबुआ में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हास्पिटल के रूप में अनुमति देने के लिए आवेदन कर दिया गया है। सभी विश्वविद्यालय अगले पांच साल का रोड-मैप तैयार करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरूओं को निर्देशित किया कि वे सभी अपने विश्वविद्यालयों का अगले पांच साल का रोड-मैप तैयार करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कुलगुरू अपने विश्वविद्यालयों में कृषि, उद्यानिकी, फ्लोरीकल्चर, टूरिज्म, माइनिंग, विमानन, दुग्ध उत्पादन के प्रोत्साहन के लिए पशुपालन (एनिमल हस्बेंड्री) जैसे रोजगारपरक विषय एवं डिग्री पाठ्यक्रम प्रारंभ करें। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को ज्ञान देने के अलावा उनकी उद्यमशीलता को भी प्रोत्साहित करें। कृषि विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रवृत करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय यह बताएं कि उन्होंने कितने रोजगारपरक विषय खोले हैं, उनमें कितने विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया और विश्वविद्यालयों ने अपने स्तर पर कितने विद्यार्थियों को रोजगार/प्लेसमेंट उपलब्ध कराए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपने-अपने क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक प्रक्षेत्रों की जरूरतों को समझें और उनकी जरूरत के अनुसार अपने यहां नए-नए एडवांस कोर्सेस प्रारंभ करें। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही अध्ययन के साथ-साथ रोजगार भी मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के सभी यूनिवर्सिटी कैंपस एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय बनाए जाएं। यह सभी संस्थान आईआईटी, आईआईएम और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की तर्ज पर विकसित किए जाएं। सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय विषय एवं कोर्सेस प्रारंभ किए जाएं। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने बताया कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में बीबीए एविएशन का तीन वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसमें करीब 30 बच्चों ने प्रवेश लिया है। इसके अतिरिक्त बीएसी एविएशन पाठ्यक्रम बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन और चित्रकूट विश्वविद्यालय, चित्रकूट में प्रारंभ किया गया है। अपर मुख्य सचिव  राजन ने बताया कि प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में 384 शोध केंद्र संचालित हैं। सौ नए शोध केंद्रो की स्थापना की जानी है। सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की स्थापना कर दी गई है। शासकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का भ्रमण कराने की योजना को महाविद्यालयों के वार्षिक कैलेण्डर में नियमित गतिविधि के रूप में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नैक की तर्ज पर राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (सैक) का गठन हो गया है। वर्तमान वित्त वर्ष से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों एवं शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों में उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन का कार्य प्रारंभ कराया जा रहा है। विश्वविद्यालयों में सभी रिक्त पदों पर भर्ती एवं … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदान करेंगे स्वच्छता सम्मान

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा आज भोपाल के रवीन्द्र भवन हंसध्वनि सभागार में 5वां राज्य स्तरीय स्वच्छता सम्मान समारोह एवं कार्यशाला “स्वच्छता समग्र” का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर 1 बजे समारोह में उल्लेखनीय कार्य करने वाले नगरीय निकायों को स्वच्छता सम्मान प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव अमृत योजना के अंतर्गत 5 हजार 364 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। इन कार्यों में जल-प्रदाय, सीवरेज परियोजनाएं, हरित क्षेत्र विकास और मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास के विभिन्न कार्य शामिल हैं। समारोह में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय एवं राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी भी मौजूद रहेंगी। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि कार्यक्रम में स्वच्छता पखवाड़ा पर आधारित विशेष फिल्म एवं स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के डिजिटल पोस्टर का लोकार्पण भी किया जायेगा। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, स्वच्छ भारत मिशन एवं प्रदेश के शहरी विकास के रोडमेप की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। कार्यशाला के विषय कार्यशाला में सुबह 9 बजे से समानान्तर सत्र के रूप में चर्चा होगी। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री भोंडवे का प्रारंभिक उद्धबोधन प्रदेश में लीगेसी वेस्ट, वायु गुणवत्ता और शहरी स्वच्छता की चुनौतियां विषय पर होगा। कार्यशाला में समानान्तर सत्र होंगे। इनमें प्रमुख रूप से नर्मदा बेसिन, धार्मिक और पर्यटन महत्व के शहरों में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की चुनौतियां विषय रहेगा। इस सत्र में महापौर उज्जैन श्री मुकेश टटवाल, जबलपुर महापौर श्री जगत बहादुर सिंह, एमडी पर्यटन विकास निगम श्री इलैया राजा और डारेक्टर रेंस्पांसिबल ट्यूरिज्म मिशन श्री डीपी सिंह शामिल होंगे। एक अन्य सत्र में शहरों में लीगेसी अपशिष्ट की वर्तमान स्थिति एवं चुनौती विषय पर इंदौर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, छिंदवाड़ा महापौर श्री विक्रम सिंह अहाके, ग्वालियर महापौर श्रीमती शोभा सिकरवार, आयुक्त नगर निगम इंदौर श्री दिलीप कुमार यादव, आयुक्त ग्वालियर श्री संघ प्रिय और सचिव मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विचार व्यक्त करेंगे। समानान्तर सत्र में ही शहरों की कार्य योजना का प्रस्तुतिकरण, शहरों की सफाई, सौंदर्यीकरण और छोटे शहरों में विकास की संभावनाएं विषय पर महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, आयुक्त उज्जैन श्री अभिलाष मिश्रा, आयुक्त भोपाल श्रीमती संस्कृति जैन, आयुक्त सागर श्री राजकुमार खत्री अपने विचार व्यक्त करेंगे। सफाई मित्रों से संवाद नगरीय निकायों में कार्यरत सफाई मित्रों की कुशलता वृद्धि के संबंध में नगर निगम महापौर, आयुक्तों और संबंधित विषय-विशेषज्ञों के बीच संवाद होगा। इस सत्र में सफाई मित्रों को राज्य शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर चर्चा होगी।  

सेवा, संवेदना और सम्मान के भाव से दिव्यांगजनों के समग्र सशक्तिकरण के लिए कृतसंकल्पित है सरकार: मुख्यमंत्री

सभी मंडल मुख्यालयों पर स्थापित होंगे दिव्यांग पुनर्वास केंद्र: मुख्यमंत्री सेवा, संवेदना और सम्मान के भाव से दिव्यांगजनों के समग्र सशक्तिकरण के लिए कृतसंकल्पित है सरकार: मुख्यमंत्री प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय जिला या सरकारी अस्पतालों के परिसर में स्थापित होंगे दिव्यांग पुनर्वास केंद्र लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालयों पर दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा से वंचित न रहे। प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर अत्याधुनिक पुनर्वास केंद्र विकसित किए जाएं, जहां दिव्यांग व्यक्तियों को चिकित्सकीय, शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावसायिक सहायता एक ही स्थान पर मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 'सेवा, संवेदना और सम्मान' के भाव से दिव्यांगजनों के समग्र सशक्तिकरण के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में पहले से दिव्यांग पुनर्वास केंद्र संचालित हैं, उनकी सेवाओं को और सशक्त करते हुए मॉडल केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। वहीं जहां केंद्र नहीं हैं, वहां उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय जिला या सरकारी अस्पतालों के परिसर में स्थापित किया जाए ताकि चिकित्सकीय सुविधाओं के साथ इनका सहज समन्वय बन सके। यदि सरकारी अस्पताल में स्थान पर्याप्त नहीं है तो अलग भवन की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन केंद्रों में फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, मनोवैज्ञानिक परामर्श, ऑर्थोटिक व प्रॉस्थेटिक सेवाएं, उपकरण वितरण आदि सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हों। बैठक में यह जानकारी दी गई कि वर्तमान में प्रदेश के 37 जिलों में दिव्यांग पुनर्वास केंद्र कार्यरत हैं, इनमें 11 मंडल मुख्यालयों पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन केंद्रों में तकनीकी संसाधन और विशेषज्ञ मानवबल को सुदृढ़ किया जाए। प्रत्येक केंद्र में प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट, क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट, प्रॉस्थेटिस्ट, ऑर्थोटिस्ट, स्पीच थैरेपिस्ट और काउंसलर की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही दिव्यांगजनों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल पंजीकरण, और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए ताकि सेवाओं की पारदर्शिता और निगरानी बनी रहे। बैठक में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में केंद्र संचालन समिति के स्वरूप पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन केवल सहानुभूति के पात्र बनकर न रहें, बल्कि आत्मनिर्भर और योगदानकारी नागरिक के रूप में समाज की मुख्यधारा में शामिल हों। बैठक में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कुमार कश्यप सहित विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति रही।

विकास और संस्कृति का संगम बनेगा दीपोत्सव, झांकियों में दिखेगा नया उत्तर प्रदेश

अयोध्या भगवान राम की नगरी अयोध्या में इस बार नौवां दीपोत्सव न केवल दीपों की जगमगाहट से, बल्कि प्रदेश के विकास और भारतीय संस्कृति की जीवंत झांकियों से भी सजेगा। योगी सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए सूचना विभाग द्वारा 15 आकर्षक झांकियां निकाली जाएंगी, जबकि पर्यटन संस्कृति विभाग रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीम पर झांकियां प्रस्तुत करेगा। जिसमें 22 झांकियां साकेत महाविद्यालय में तैयार हो रही हैं। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य दीपोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे। जिला सूचना अधिकारी संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि सूचना विभाग की झांकियां योगी सरकार के विकास कार्यों को दर्शाएंगी। इनमें उत्तर प्रदेश में हुए बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास जैसे क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। ये झांकियां प्रदेश की प्रगति और समृद्धि का प्रतीक होंगी। दूसरी ओर, संस्कृति विभाग द्वारा रामायण के सात कांडों बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड पर आधारित झांकियां तैयार की जा रही हैं। ये झांकियां भगवान राम के जीवन और रामायण की शिक्षाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी।   झांकियों को आकर्षक व तकनीकी बनाने के लिए दिया जा रह विशेष ध्यान संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि सूचना विभाग द्वारा नामित की गई कम्पनी ने झांकियों को आकर्षक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए विशेष ध्यान दिया है। ये झांकियां न केवल दृश्यात्मक रूप से प्रभावशाली होंगी, बल्कि इनमें आधुनिक तकनीक का उपयोग भी किया जाएगा ताकि दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्राप्त हो। इसके अतिरिक्त, दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या को दीपों से सजाया जाएगा। रामपथ, भक्ति पथ और अन्य प्रमुख स्थानों पर लाखों दीप जलाए जाएंगे, जो विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में एक और कदम होगा। इस आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी शामिल होंगे। जानिए, कौन कौन से राज्य की दिखेंगी लोककलाएं इस बार दीपोत्सव में सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगे। हरियाणा का फाग, केरल का कथककली, राजस्थान का झूमर, पंजाब का भांगड़ा, ओडिशा का संबलपुरी, गाजीपुर का डिबिया और पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश की लोक कलाएं अयोध्या के रामपथ पर अपनी छटा बिखेरेंगी। ये प्रस्तुतियां न केवल सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेंगी, बल्कि देश की एकता और विविधता को भी रेखांकित करेंगी। इस भव्य आयोजन में लगभग 500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगे। सरकार की उपलब्धियों को ये झांकियां करेंगी प्रस्तुत इवेंट के लिए जिम्मेदार कंपनी विविद इंडिया के एक प्रतिनिधि के अनुसार दीपोत्सव में प्रयागराज महाकुंभ, काशी कॉरिडोर, कृषि पशु पालन, आयुष्मान कैशलेस, डिफेंस कॉरिडोर, उत्तर प्रदेश को बेहतर बनाना हमारी प्रतिबद्धता, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसितअ भारत, उत्तर प्रदेश पुलिस सुरक्षा, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना, आत्मनिर्भर नारी, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा कराए गए कार्यों की झलक दिखाई पड़ेगी।