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अवैध कॉलोनियों को लेकर महापौरों की चेतावनी: सख्त कानून नहीं बना तो बढ़ेगी परेशानी

भोपाल   देर रात तक पहली बार मंत्रालय में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे और आयुक्त संकेत भौंडवे की मौजूदगी में बैठक हुई।इंदौर की सड़कों पर हो रहे गड्ढों को लेकर बड़ी चर्चा है। इंदौर के अलावा प्रदेश के अन्य शहरों में भी यह मुद्दा गरमाया हुआ है। इसे लेकर भोपाल में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश के नगरीय निकाय मेयरों के साथ बैठक की। तय हुआ कि बारिश के बाद जो पेंचवर्क सड़कों पर किए जाते हैै। उनकी गुणवत्ता की भी जांच की जाना चाहिए। इसकी जांच एक राज्य स्तरीय दल करेगा। जिसका गठन भी हो चुका है। इस बैठक में इंदौर के मेयर पुष्य मित्र भार्गव भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि चुंगी का पैसा समय पर और पूरा मिले। इससे नगर निगम के संचालन में मदद मिलेगी और विकास कार्य तेजी से होंगे। बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली को और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। नगरीय निकायों को आधुनिक तकनीकों और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी। बैठक में तय हुआ कि प्रदेश के सभी नगर निगमों द्वारा एनर्जी ऑडिट कराया जाएगा।प्रत्येक सप्ताह महापौर-परिषद (एमआईसी) की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित होगी। शहर की सड़कों की रिस्टोरेशन की गुणवत्ता की सघन जांच होगी, जिसके लिए राज्यस्तरीय दल निरीक्षण करेगा।बिल्डिंग परमिशन से संबंधित डेटा फॉर्मेट को सरल बनाकर सीधे निर्देश जारी होंगे। इसके अलावा  प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।डीजल बचत के लिए डिजिटलाइजेशन और कर्मचारियों के लिए फेस अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाएगा।नगरीय निकायों का खर्च कम करने और आकलन की नई व्यवस्था तकनीक के माध्यम से विकसित की जाएगी। निकाय स्तर पर रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएगी। बैठक में राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी एसीएस संजय दुबे और विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे। अवैध कॉलोनियों पर सख्ती से कार्रवाई हो बैठक में जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह ने कहा, अवैध कॉलोनियां जिस तरह से बढ़ रहीं हैं वो हम सबके लिए चिंता का विषय है। यदि समय रहते अवैध कालोनियों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाकर कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में ये बहुत बड़ी मुसीबत बन जाएगी। जबलपुर मेयर यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा, अवैध कॉलोनियों पर जिस तरह की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए वैसा एक्शन नहीं होता। ये सुनकर दूसरे महापौरों ने भी कहा इस मुद्दे पर वास्तव में कड़े फैसले लेने की जरूरत है। गरीब लोग सस्ते रेट के लालच में प्लॉट या मकान खरीद लेते हैं। कॉलोनी काटने वाला वहां कोई सुविधाएं विकसित नहीं करता। बाद में निगम और सरकार से मूलभूत सुविधाएं देने की मांग होने लगती है। और ये अवैध कॉलोनियां काटने की परंपरा बढ़ती चली जाती है। महापौर बोले- आयुक्त सुनते नहीं बैठक में सिंगरौली महापौर रानी अग्रवाल ने कहा कि जनता की समस्याएं हमारे पास आतीं हैं। कई बार ऐसा होता है कि निगम आयुक्त हमारी सुनते नहीं, ऐसे में काम कैसे हों। रानी की बात में दूसरे महापौरों ने भी हामी भरी। फिर मंत्री विजयवर्गीय ने कहा- ऐसी व्यवस्था बनाएंगे कि 10 दिन में महापौर और निगम आयुक्त नियमित रूप से बैठकर निगम से जुडे़ विषयों पर चर्चा करें और समस्याओं का त्वरित समाधान हो। छिंदवाड़ा मेयर बोले- राजस्व की भूमि निगम के अधिपत्य में हो बैठक में छिंदवाड़ा मेयर विक्रम अहके ने कहा, नगर निगम क्षेत्र में राजस्व की कई ऐसी जमीनें हैं। जो निगम जनोपयोगी कामों उपयोग कर सकता है। लेकिन वे जमीनें नजूल के नाम पर दर्ज होने की वजह से निगम को शासन की परमिशन लेनी पड़ती है। राजस्व की ऐसी जमीनों का अधिपत्य नगर निगम के पास होना चाहिए। रतलाम महापौर ने कहा- अमृत परियोजना के फेज 1 में कराए गए कामों में कई गड़बडियों की शिकायतें लगातार आ रहीं हैं। अमृत 1 में कराए गए कामों की बारीकी से जांच करानी चाहिए। कॉमर्शियल बिल्डिंग से आश्रय शुल्क लेना बंद हो जबलपुर मेयर ने कहा रेजिडेंशियल बिल्डिंग में तो बिल्डर ईडब्यूल्एस के मकान बनाकर देता है। उससे आश्रय शुल्क लेना ठीक भी है लेकिन, कॉमर्शियल बिल्डिंग में जो 7% आश्रय शुल्क लिया जाता है वहां ये ठीक नहीं हैं। इस शुल्क को खत्म किया जाना चाहिए। खत्म न हो सके तो कुछ कम होना चाहिए। कर्मचारियों की भर्ती के अधिकार मिलें एक महापौर ने कहा कि नगर निगम में कर्मचारियों की भर्तियों के अधिकार महापौर को मिलने चाहिए। बैठक में ये निर्णय लिए गए     चुंगी का पैसा समय पर और पूरी तरह से मिले।     प्रदेश के सभी नगर निगमों द्वारा एनर्जी ऑडिट कराया जाएगा।     प्रत्येक हर हफ्ते महापौर-परिषद (एमआईसी) की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित होगी।     शहर की सड़कों की रेस्टोरेशन की गुणवत्ता की बारीकी से जांच होगी, जिसके लिए राज्यस्तरीय दल निरीक्षण करेगा।     बिल्डिंग परमिशन से संबंधित डेटा फॉर्मेट को सरल बनाकर सीधे निर्देश जारी होंगे।     लीज से जुड़े लंबित प्रकरणों को सूचीबद्ध कर शीघ्र निराकरण किया जाएगा।     प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।     डीजल बचत के लिए डिजिटलाइजेशन और कर्मचारियों के लिए फेस अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाएगा।     नगरीय निकायों का खर्च कम करने और आकलन की नई व्यवस्था तकनीक के माध्यम से विकसित की जाएगी।     निकाय स्तर पर रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

जीएसटी सुधार से आर्थिक गतिविधियों में आएगी तेजी, स्थानीय रोजगार को भी मिलेगा फायदा – मुख्यमंत्री साय

रायपुर : जीएसटी बचत उत्सव का जायजा लेने बाजार पहुंचे मुख्यमंत्री  साय जीएसटी बचत उत्सव का जायजा लेने बाजार पहुंचे मुख्यमंत्री  साय जीएसटी सुधार से आर्थिक गतिविधियों में आएगी तेजी, स्थानीय रोजगार को भी मिलेगा फायदा – मुख्यमंत्री  साय जीएसटी बचत उत्सव को लेकर व्यापारियों में दिखा भारी उत्साह रायपुर शहर के जयस्तंभ चौक से लेकर गुरुनानक चौक तक मुख्यमंत्री  साय का गर्मजोशी से हुआ अभूतपूर्व स्वागत नवरात्रि पर्व पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया बाजार भ्रमण – जीएसटी 2.0 से व्यापारियों और उपभोक्ताओं में उत्साह रायपुर नवरात्रि पर्व के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के एम.जी. रोड एवं आसपास के प्रमुख बाजारों का भ्रमण कर व्यापारियों और उपभोक्ताओं से आत्मीय संवाद किया। यह अवसर इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लागू जीएसटी 2.0 ने कर प्रणाली को नई सरलता और पारदर्शिता प्रदान की है। मुख्यमंत्री के आगमन से पूरे बाजार का वातावरण उल्लास और उत्साह से भर गया। जगह-जगह व्यापारियों और नागरिकों ने उनका स्वागत किया और “मोदी जी को धन्यवाद” के नारे गूंजते रहे। मुख्यमंत्री ने दुकानदारों से प्रत्यक्ष संवाद करते हुए जाना कि नई कर व्यवस्था से व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को कितना बड़ा लाभ मिला है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने शाम को राजधानी रायपुर स्थित जयस्तंभ चौक से महात्मा गांधी मार्ग होते हुए गुरुनानक चौक तक पैदल बाजार भ्रमण किया और जीएसटी बचत उत्सव का जायजा लेने विभिन्न प्रतिष्ठानों में पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री  साय ने दुकानों में बचत उत्सव के स्टीकर भी लगाए और स्थानीय दुकानदारों एवं ग्राहकों से आत्मीय चर्चा की। बाजार भ्रमण के दौरान व्यापारियों में खासा उत्साह देखने को मिला। विभिन्न व्यापारी संगठनों एवं संचालकों ने मुख्यमंत्री  साय का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जीएसटी सुधार से देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा हाल में किए गए व्यापक जीएसटी सुधारों से टैक्स में कमी आई है और ग्राहकों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने शारदा चौक स्थित  शंकर हनुमान मंदिर में दर्शन कर बाजार भ्रमण की शुरुआत की। मुख्यमंत्री से बातचीत में लीला राम इलेक्ट्रॉनिक्स में खरीददारी करने आई समता कॉलोनी निवासी सु ऋचा ठाकुर ने कहा कि जीएसटी में कटौती से उनकी बड़ी चिंता दूर हुई है। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने हॉस्टल के लिए 5 एसी खरीदने थे। पहले 35,000 रुपये प्रति एसी की कीमत वाले उत्पाद अब कटौती और डिस्काउंट के बाद 30,000 रुपये में मिले, जिससे एक बार में ही 25,000 रुपये की बचत हुई। ऋचा ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को इस निर्णय के लिए धन्यवाद दिया। इसी प्रकार एम.एस. ट्रेडर्स के प्रोप्राइटर  मोहन नेभानी ने बताया कि बचत उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं उनकी दुकान पर आए और ग्राहकों के लाभ की जानकारी ली। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि जीएसटी में कटौती से ग्राहकों की खरीददारी बढ़ी है और हर सामान पर 1,000 से 2,000 रुपये तक की बचत हो रही है। मुख्यमंत्री  साय ने महात्मा गांधी मार्ग स्थित विभिन्न दुकानों में भ्रमण कर दुकानदारों और ग्राहकों से आत्मीय बातचीत की। बाजार में पैदल भ्रमण के दौरान आमजन ने मुख्यमंत्री पर पुष्पवर्षा कर स्वागत और अभिनंदन किया। जयस्तंभ चौक पर मुख्यमंत्री का स्वागत चैम्बर ऑफ कॉमर्स और पार्टी पदाधिकारियों ने किया। इसके बाद वे शारदा चौक पहुंचे और वहाँ देवी प्रतिमा के दर्शन कर भक्तों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान नवरात्रि की शुभकामनाएँ दीं। इसके पश्चात मुख्यमंत्री पूनम होटल से लेकर मंजू ममता होटल तक पैदल भ्रमण करते हुए आगे बढ़े। सड़क किनारे खड़े छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक, सभी ने मुख्यमंत्री से संवाद करने की उत्सुकता दिखाई। मुख्यमंत्री ने भी आत्मीयता के साथ सभी की बातें सुनीं और जीएसटी 2.0 के लाभों पर उनकी प्रतिक्रियाएँ जानीं। मुख्यमंत्री  साय ने टिनी टीज़र और किड्स ऑन व्हील साइकिल स्टोर जैसे प्रतिष्ठानों पर जाकर बच्चों से जुड़ी वस्तुओं और घरेलू सामग्री पर घटे कर दरों की जानकारी ली। इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में जाकर उन्होंने जाना कि उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में कितनी सस्ती दरों पर सामान मिल रहा है। दुकानदारों ने बताया कि नए प्रावधानों से व्यापार करना आसान हुआ है और ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ा है। मुख्यमंत्री  साय ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि नवरात्रि पर्व और जीएसटी दरों में ऐतिहासिक कटौती का यह संयोग व्यापार और उपभोक्ताओं दोनों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में कर प्रणाली और अधिक पारदर्शी एवं सरल बनी है। इससे न केवल व्यापारियों को सुविधा होगी बल्कि आम उपभोक्ताओं की जेब में भी प्रत्यक्ष बचत होगी। मुख्यमंत्री ने विस्तार से कहा कि अब केवल दो स्लैब रह गए हैं। आवश्यक वस्तुएँ जैसे साबुन, टूथपेस्ट, साइकिल और रसोई सामग्री अब मात्र 5 प्रतिशत कर पर उपलब्ध होंगी, जिससे हर परिवार को सालाना 3,000 से 5,000 रुपये की बचत होगी। इसी प्रकार ब्रेड, दूध, पैक्ड नमकीन और चना जैसी खाद्य वस्तुएँ पूरी तरह करमुक्त हो गई हैं, जिससे सालाना ढाई से साढ़े तीन हजार रुपये तक की बचत होगी। स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर भी कर हटने से लोगों को 25,000 रुपये की पॉलिसी पर लगभग 4,500 रुपये और वरिष्ठ नागरिक बीमा पर 8 से 10 हजार रुपये सालाना की बचत होगी। मुख्यमंत्री  साय ने अंत में कहा कि जीएसटी 2.0 से व्यापार जगत को भी बड़ा लाभ होगा।  यह सुधार उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार सभी क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और व्यापारियों से आग्रह किया कि वे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दें और उपभोक्ताओं से भी आह्वान किया कि वे गर्व से कहें – “मैं स्वदेशी खरीदता हूँ और स्वदेशी बेचता हूँ।” उन्होंने इसे भारत के आर्थिक भविष्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला मंत्र बताया। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री  केदार कश्यप, विधायक  सुनील सोनी,  पुरंदर मिश्रा,  मोती लाल साहू, नान के अध्यक्ष  संजय वास्तव, अमित  चिमनानी, रमेश ठाकुर, नंदन जैन सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न व्यापारी संगठन एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

जल समृद्धि रणनीति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्री पाटिल के बीच अहम बैठक

जल समृद्धि रणनीति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्री पाटिल के बीच अहम बैठक मुख्यमंत्री और जल शक्ति मंत्री की मुलाकात: जल समृद्धि को लेकर बनी रणनीति गुजरात के मुख्यमंत्री  पटेल भी हुए बैठक में शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली प्रवास के दौरान राज्य हित के विषयों पर उच्च स्तरीय बैठक में मंत्रणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल एवं गुजरात के मुख्यमंत्री  भूपेन्द्र पटेल के साथ बैठक में सहभागिता कर विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। जलशक्ति मंत्री ने मध्यप्रदेश के कार्यों को सराहा केंद्रीय मंत्री  पाटिल ने मध्यप्रदेश द्वारा केंद्रीय योजनाओं का लाभ लेने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में मध्यप्रदेश ने अच्छा काम किया है। प्रदेश में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था और हर घर जल पहुंचाने का भी प्रशंसनीय कार्य हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जल समृद्धि बढ़ाने के मध्यप्रदेश के प्रयासों को पूरा सहयोग देने की बात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की नई रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की और केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक में जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की गई। इस अवसर पर संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

11 साल पहले ट्रेन हादसे के बाद लोगों की मदद के लिए योगी ने नवरात्र तोड़ी थी पीठ की परंपरा

लोक कल्याण के आगे गोरक्षपीठ ने कभी नहीं की परंपरा की परवाह 11 साल पहले ट्रेन हादसे के बाद लोगों की मदद के लिए योगी ने नवरात्र तोड़ी थी पीठ की  परंपरा बतौर सीएम बार बार नोएडा और अयोध्या जाकर भी दी परंपरा को चुनौती  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में थे। इस दौरान उन्होंने एक्सपोमार्ट जाकर  25 से 29 सितंबर तक आयोजित यूपी ट्रेड शो की तैयारियों का निरीक्षण किया। चंद रोज बाद भी वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नोएडा में होंगे। अवसर होगा एशिया के सबसे बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लोकार्पण का। मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से योगी विकास परियोजनाओं के शिलान्यास, लोकार्पण, समीक्षा बैठकों के लिए करीब 20 बार नोएडा जा चुके होंगे। यह वही नोएडा है जिसे तीन दशक तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने अभिशप्त शहर मान लिया था। मान्यता थी कि जो बतौर सीएम नोएडा गया, उसे कुर्सी से हाथ धोनी पड़ी। कुर्सी को ही सब कुछ मानने वालों के दिलोदिमाग में यह डर इतना बैठ गया कि कोई नोएडा जाता ही नहीं था। दरअसल, योगी गोरखपुर स्थित जिस गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं वह शुरू से ऐसी मान्यताओं का विरोधी रही है। अस्पृश्यता के दौर में योगी के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का काशी के डोमराजा के घर भोजन इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। बाद में तो सामाजिक समरसता के लिए सहभोज पीठ ने इसकी परंपरा ही शुरू कर दी। ग्यारह साल पूर्व नवरात्र में जब योगी ने तोड़ी थी पीठ की परंपरा बात करीब 11 साल पुरानी है। सितंबर खत्म होने को था। गुलाबी सर्दी की शुरुआत हो चुकी थी। शारदीय नवरात्र के दिन चल रहे थे। साल के दोनों नवरात्र गोरक्षपीठ के लिए बेहद खास होते है। मंदिर स्थित मठ पर ही सारे अनुष्ठान और पूजन होते हैं। परंपरा के मुताबिक इस दौरान पीठ के पीठाधीश्वर या उनके उत्तराधिकारी मठ की पहली मंजिल से नीचे नहीं उतरते। न जाने कबसे प्रचलित पीठ की इस परंपरा को योगी ने 30 सितंबर 2014 को तोड़ दिया। क्यों तोड़ी थी परंपरा परंपरा तोड़ने की वजह एक ट्रेन हादसा बनी। हुआ यह कि गोरखपुर स्थित नंदानगर क्रासिंग पर कृषक एक्सप्रेस ने बरौनी एक्सप्रेस में पीछे से टक्कर मार दी। दोनों यात्री ट्रेनें। हजारों की संख्या में यात्री। इसमें बच्चे, बुजुर्ग, बीमार, महिलाएं और चोटिल सभी शामिल थे। सबके साथ सामान अलग से। वक्त भी रात का था। वहां से रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन की दूरी करीब 6 से 7 किलोमीटर थी। मदद के संसाधन कम थे। लोग चर्चा करते सुने गए छोटे महाराज (योगीजी) आ जाते तो लोगों की समय से प्रभावी मदद हो जाती। मुंहों मुंह बात उन तक पहुंची। स्थित की गंभीरता का उनको अहसास हुआ। परंपरा तोड़ वह मठ से नीचे उतरे और दुर्घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। जानकारी मिलते ही हजारों  समर्थक भी वहां पहुंच गए। प्रशासन भी अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय हो गया। कुछ देर में सभी यात्रियों को सुरक्षित रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन पहुंचा दिया गया था। जिस अयोध्या का नेता नाम नहीं लेते थे वहां भी बार-बार गये योगी यही नहीं जिस अयोध्या के नाम से राजनीतिक दलों को करंट लगता था, वहां बार-बार जाकर योगी ने साबित किया कि पहले की तरह वह अयोध्या के हैं और अयोध्या उनकी। और, अब तो उनके ही कार्यकाल में उनके गुरु के सपनों के अनुसार अयोध्या में जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर बनकर लगभग तैयार है। मंदिर निर्माण के साथ विभिन्न परियोजनाओं के जरिए अयोध्या का कायाकल्प भी हो रहा है। आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का शुमार धार्मिक लिहाज से दुनिया के सबसे खूबसूरत धार्मिक पर्यटन स्थलों में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यही मंशा भी है। वह बार बार इसकी चर्चा भी करते हैं।

मुख्यमंत्री की एक और घोषणा पर अमल, 6.69 लाख धान उत्पादक किसान होंगे लाभान्वित

बालाघाट के कटंगी में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के धान उपार्जित करने वाले किसानों को बालाघाट जिले के तहसील मुख्यालय कटंगी से बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा समर्थन मूल्य पर धान उपार्जित करने वाले किसानों के लिये प्रति हेक्टेयर 4 हजार रूपये बोनस देने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा को अमल में लाने के लिये बालाघाट जिले के तहसील मुख्यालय कटंगी में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले किसानों को बोनस वितरण के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम आज होगा। कृषि उपज मंडी प्रांगण में होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले 6 लाख 69 हजार धान उत्पादक किसानों को 337 करोड़ 12 लाख रुपये की बोनस राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से उनके खातों में अंतरित करेंगे। 4315 युवाओं को प्रदान किए जाएंगे नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में 4315 युवाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान करेंगे और बालाघाट जिले में 244 करोड़ रुपये की लागत के 75 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करेंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान-बंधु सहित युवा शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय करने वाले किसानों को 04 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अधिकतम 10 हजार रूपये बोनस देने की घोषणा की थी। बोनस राशि से बालाघाट जिले के एक लाख से अधिक किसान लाभांवित होंगें।  

मोदी सरकार 25 लाख परिवारों को देगी मुफ्त LPG कनेक्शन, हर कनेक्शन पर खर्च होंगे 2,050 रुपये

नई दिल्ली  केंद्र सरकार नवरात्र के अवसर पर महिलाओं को उपहार स्वरूप प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत 25 लाख मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित करेगी. इससे देशभर में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की कुल संख्या 10.6 करोड़ तक पहुंच जाएगी. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने सोमवार को बताया कि सरकार प्रत्येक कनेक्शन पर 2,050 रुपये खर्च करेगी, जिसमें एक मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, गैस चूल्हा, रेगुलेटर और अन्य संबंधित उपकरण शामिल हैं.     हरदीप पुरी ने इसे महिलाओं के लिए नवरात्र का विशेष उपहार बताया और कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी देवी दुर्गा की तरह महिलाओं का सम्मान करते हैं. यह निर्णय माताओं और बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण के हमारे संकल्प को और मजबूत करता है.” मंत्री ने यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बताते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं की जीवनशैली में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. मुफ्त एलपीजी कनेक्शन से घर में स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ेगा और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. जीएसटी सुधारों से बढ़ेगा GDP केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि नए जीएसटी सुधारों से देश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने बताया कि जीएसटी सुधारों से देश की GDP में लगभग 0.8 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है. नए सुधार सोमवार से लागू हो गए हैं. पुरी ने कहा कि जीएसटी दरों में कमी से सभी वर्गों को लाभ मिलेगा, विशेषकर निम्न मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग. विभिन्न उपभोग वस्तुओं पर लागू कम दरें जनता की खरीदारी क्षमता बढ़ाएंगी और देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाएंगी. मंत्री ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत की ओर बढ़ते कदमों में उज्ज्वला योजना और जीएसटी सुधार दोनों ही महत्वपूर्ण हैं. इन पहलों से न केवल महिलाओं का सशक्तिकरण होगा बल्कि घरेलू ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, जीवन स्तर में सुधार होगा और देश की आर्थिक वृद्धि को मजबूती मिलेगी. इस नवरात्र पर 25 लाख मुफ्त एलपीजी कनेक्शन का वितरण और जीएसटी सुधार देश में समग्र विकास और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

मध्यप्रदेश को एक और सोने की सौगात: कटनी में जल्द शुरू होगा खनन, इमलिया गोल्ड ब्लॉक तैयार

कटनी   मध्य प्रदेश की धरती बहूमूल्य खनिज तत्वों से भरी पड़ी है. पन्ना में हीरे की खदानें कई सालों से चल रही हैं. पन्ना से सटे छतरपुर जिले में बहुतायत मात्रा में हीरे के भंडार मिले हैं. अब मध्य प्रदेश में सोने के भंडार भी लगातार मिल रहे हैं. हाल ही में सिंगरौली में सोने का खनन करने के लिए सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. अब कटनी में सोने का भंडार मिला है. सिंगरौली के साथ ही कटनी में सोने के खनन का काम शुरू किया जा रहा है. मुंबई की कंपनी से कटनी प्रशासन का एमओयू कटनी जिले के स्‍लीमनाबाद क्षेत्र में इमलिया गोल्‍ड ब्‍लॉक की माइनिंग से जल्‍दी ही स्‍वर्ण खनन का कार्य शुरू हो जाएगा. इसके लिए  शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन कलेक्‍टर आशीष तिवारी और मुंबई की खनिज पट्टा धारक कंपनी प्रोस्‍पेक्‍ट रिसोर्स मिनरल्‍स कंपनी के डायरेक्‍टर अविनाश लांडगे के बीच गोल्‍ड ब्‍लॉक की माइनिंग लीज का एग्रीमेंट हुआ. निजी कंपनी को 50 साल के लिए खदान लीज पर कटनी कलेक्‍टर आशीष तिवारी ने बताया "ई-नीलामी प्रक्रिया के माध्‍यम से मुंबई की प्रोस्‍पेक्‍ट रिसोर्स मिनरल्‍स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 50 वर्ष की अवधि के लिए स्‍लीमनाबाद क्षेत्र के ग्राम इमलिया में 6.510 हेक्टेयर क्षेत्र का पट्टा दिया गया है. सोने की खदान शुरू होने से जहां राज्य सरकार का खजाना भरेगा तो वहीं, कटनी जिले में रोजगार की भी संभावना बढ़ गई है." सोने की खदान शुरू होने से कटनी के युवाओं में खुशी की लहर है. कटनी में 14 लाख टन मिनरल्स मिलने की उम्मीद कटनी जिले के खनिज विभाग के उपसंचालक रत्‍नेश दीक्षित ने बताया "कटनी जिले में नये खनिज स्त्रोतों के रूप में स्‍वर्ण (सोना) की खदान में सोने के साथ-साथ बेसमेटल, चांदी, जिंक, लेड (सीसा) और कॉपर भी निकलेगा. जल्‍दी ही कंपनी इमलिया से सोना निकालने के लिये यहां अपना पूरा मशीनरी सिस्‍टम लगाएगी. भू-गर्भशास्त्रियों के प्राथमिक रिपोर्ट में इमलिया गोल्‍ड माइन में करीब 14 लाख टन मिनरल मिलना संभावित है." कटनी जिले में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर कटनी जिले के स्‍लीमनाबाद के इमलिया गोल्‍ड माइंस से उत्‍खनन कार्य शुरू होने के बाद यहां बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बनंगे. सरकार को भी राजस्‍व से खासी आय प्राप्ति होगी. इससे जिले और समूचे क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी. अभी तक केवल कर्नाटक से ही गोल्‍ड की माइनिंग हो रही थी. लेकिन अब मध्‍यप्रदेश के सिंगरौली व कटनी जिले में भी सोने का खनन शुरू होने जा रहा है. कटनी जिले में चूना, बॉक्साइट, लाइमस्‍टोन व क्रिटिकल मिनरल्‍स बहुतायत में उपलब्‍ध है. सिंगरौली जिले में भी सोने का खनन शुरू सिंगरौली जिले में भी चकरिया गोल्ड ब्लॉक के स्वर्ण खनन पर काम शुरू हो गया है. इससे उत्साहित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा ''मध्य प्रदेश के खनन क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है और प्रदेश मिनरल प्रदेश ऑफ इंडिया बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.'' सिंगरौली में सोने के भंडार के खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है. चकरिया गोल्ड ब्लॉक का ई-नीलामी के जरिए प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है. चकरिया गोल्ड ब्लॉक में 23.57 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां 1 लाख 33 हजार 785 टन सोने के भंडार का अनुमान लगाया गया है. 

सरकारी कर्मचारियों को दिवाली गिफ्ट! DA बढ़ोतरी और GST राहत से बढ़ेगी जेब की चमक

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए इस दिवाली (Diwali 2025) खुशखबरी आ सकती है. सरकार अक्टूबर 2025 में महंगाई भत्ता (Dearness Allowance/DA) में बढ़ोतरी का एलान कर सकती है. खबरों के अनुसार, जुलाई-दिसंबर 2025 की पीरियड के लिए डीए में 3 प्रतिशत की वृद्धि तय हो गई है, जिससे मौजूदा 55% डीए बढ़कर 58% हो जाएगा. यह 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत अंतिम DA रिवीजन होगा, क्योंकि जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने वाला है. इस बढ़ोतरी से करीब 1.2 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधे लाभ मिलेगा. विशेषकर त्योहारों के मौसम में सैलरी बढ़ने से खर्च करने की क्षमता भी बढ़ेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा. सरकार हर साल अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के डीए में दो बार बढ़ोतरी करती है – जनवरी और जुलाई में. हालांकि, इसका आधिकारिक एलान कुछ माह बाद किया जाता है. मार्च 2025 में जनवरी-जून पीरियड के लिए सरकार ने पहले ही डीए में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जिससे यह 53% से बढ़कर 55% हो गया. अब जुलाई-दिसंबर 2025 के लिए 3% की वृद्धि के बाद यह बढ़कर 58 प्रतिशत हो जाएगा. महंगाई भत्ता (DA) कैसे तय होता है? महंगाई भत्ते का कैलकुलेशन औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर किया जाता है. यह डेटा हर महीने लेबर ब्यूरो द्वारा जारी किया जाता है. पिछले 12 महीनों के CPI-IW औसत को लेकर एक फॉर्मूला लागू किया जाता है, जो 7वें वेतन आयोग के तहत बनाया गया है: DA (%) = [(12 माह का औसत CPI-IW – 261.42) ÷ 261.42] × 100 इस फॉर्मूले के आधार पर कोई भी सरकारी कर्मचारी या पेंशनर अपने महंगाई भत्ते की गणना कर सकता है. जुलाई 2025 में कितना बढ़ा था DA लेबर ब्यूरो ने जून 2025 के CPI-IW डेटा के अनुसार सूचकांक 145.0 दर्ज किया, जो मई 2025 की तुलना में एक अंक अधिक है. इसके आधार पर जुलाई 2025 से DA बढ़कर 58% तय किया गया है. हाल ही में सरकार और कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन, Government Employees National Confederation (GENC), के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई. मंत्री ने बताया कि राज्य सरकारों के साथ भी बातचीत जारी है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा की संभावना है. त्योहारों के मौसम को देखते हुए यह कदम कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी साबित हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग के साथ ही महंगाई भत्ते (DA) में 3 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है. इससे देशभर के 1.2 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारकों को सीधा लाभ मिलेगा. GST राहत के बाद यह कदम उन्हें और वित्तीय राहत प्रदान करेगा. महंगाई भत्ते का महत्व महंगाई भत्ता सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स को इसलिए देती है ताकि वे महंगाई के प्रभाव को कम कर सकें. रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और DA सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन का मूल्य स्थिर रहे. इस बढ़ोतरी का असर न सिर्फ कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब पर पड़ेगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी लाएगा. दशहरा और दिवाली के आसपास DA वृद्धि का ऐलान आम तौर पर इसलिए किया जाता है ताकि लोग त्योहारों के मौसम में अपने खर्चों को संभाल सकें और उत्सवों का आनंद ले सकें. कितने लोगों को मिलेगा लाभ इस DA वृद्धि से लगभग 48 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 66 लाख पेंशनर्स को फायदा मिलेगा. इससे उनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी और महंगाई से राहत भी मिलेगी. इसके अलावा, पहले ही सरकार ने लोगों को जीएसटी में कटौती के रूप में अच्छी-खासी राहत दी है. 7वें वेतन आयोग के तहत यह अंतिम DA वृद्धि है, और जनवरी 2026 से लागू होने वाला 8वां वेतन आयोग नए नियम और दरों के साथ लागू होगा. इस वृद्धि का फायदा कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधे मिलेगा और यह दिवाली उनके लिए और खास बना देगा. न्यूनतम मूल वेतन में संभावित बड़ा इजाफा 8वीं वेतन आयोग की संभावित सिफारिशों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) में वृद्धि है. वर्तमान में यह ₹18,000 है, और नई संरचना इसे ₹26,000 तक बढ़ा सकती है. इस बदलाव से कर्मचारियों को मुद्रास्फीति और बढ़ती जीवनयापन लागत के बीच राहत मिलेगी. कर्मचारियों का मानना है कि यह वृद्धि लंबे समय से लंबित थी, क्योंकि पिछली वेतन आयोग की सिफारिश कई सालों पहले लागू हुई थी. न्यूनतम वेतन में यह बड़ा इजाफा सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करेगा. महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) में सुधार की संभावना 8वीं वेतन आयोग के साथ महंगाई भत्ता (DA) में भी संशोधन की उम्मीद है. वर्तमान में कर्मचारियों और पेंशनरों को 55% DA मिलता है. हाल ही में मुद्रास्फीति दरों के अनुसार 2% की वृद्धि की गई थी. विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून-दिसंबर 2025 की अवधि के लिए अगली DA वृद्धि 3% हो सकती है. यह संशोधित DA अक्टूबर या नवंबर में घोषित किया जा सकता है, जिससे त्योहारों के मौसम में कर्मचारियों और पेंशनरों को वित्तीय राहत मिलेगी. कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत का पैकेज अगर 8वीं वेतन आयोग और DA में सुधार दोनों लागू होते हैं, तो यह सरकारी वेतन पर निर्भर लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय राहत साबित होगी. लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ये कदम कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि यह दोहरी राहत, वेतन वृद्धि और DA इजाफा. न केवल शॉर्ट टर्म वित्तीय राहत देगा बल्कि कर्मचारियों की लॉन्ग टर्म आर्थिक स्थिरता में भी योगदान करेगा. हालांकि, इस पूरे पैकेज की वास्तविक तिथि इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग का गठन कब होता है और सरकार की वित्तीय स्थिति क्या रहती है.  

मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूलों का बड़ा फैसला: RTE के तहत पढ़ रहे 10 हजार बच्चों की पढ़ाई 1 अक्टूबर से बंद

भोपाल   मध्यप्रदेशके प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत दर्ज बच्चों की पढ़ाई पर संकट गहरा गया है। प्राइवेट स्कूलों ने आरटीई के तहत दर्ज बच्चों को न पढ़ाने राज्य शिक्षा केन्द्र को अल्टीमेटम दिया है। फीस विवाद इसका कारण बना है। निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि 30 सितंबर तक विभाग फीस चुकाए। तीन साल की फीस बकाया है। भोपाल शहर में करीब 12 सौं निजी स्कूलों में करीब 10 हजार बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। एसोसिएशन ने कहा कि फीस न मिली तो बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ होंगे। ये है पूरा मामला निजी स्कूल एसोसिएशन के अजीत सिंह के मुताबिक प्राइवेट स्कूलों में सरकार ने आरटीई के तहत बच्चों का दाखिला(RTE School Admission) कराया गया है। प्रदेश में हर साल एक से ज्यादा एडमिशन कराए जा रहे है। इन बच्चों की फीस सरकार देती है। लेकिन करीब तीन साल हो गए। प्रदेश के अधिकांश स्कलों में आरटीई के दाखिलों की फीस की प्रतिपूर्ति नहीं की गई है। स्कूल संचालकों ने कहा त्योहारी सीजन, शिक्षकों का वेतन फीस के भरोसे स्कूल एसोसिएशन के मुताबिक प्राइवेट स्कूल में शिक्षको का वेतन फीस के भरोसे है। प्रतिपूर्ति न होने से त्योहारी सीजन में परेशानी होगी। स्कूलों को आर्थिक परेशानी आ रही है। एसोसिएशन के मुताबिक स्कूल इससे पहले भी फीस की मांग कर चुके है। राज्य शिक्षा केन्द्र को ज्ञापन दिए लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एक नजर में     शहर में 1200 निजी स्कूल     आइटीई में 10000 बच्चों का हुआ प्रवेश।     तीन साल से फीस की नहीं हुई प्रतिपूर्ति।     (एसोसिएशन के मुताबिक) 3 साल की फीस बकाया तीन साल की फीस बकाया है। स्कूलों की आर्थिक स्थिति खराब है। तीस सितंबर तक फीस की प्रतिपूर्ति नहीं हुई तो आरटीई के तहत दर्ज(RTE School Admission) बच्चों को प्राइवेट स्कूल पढ़ाने में असमर्थ रहेंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र को इसका पत्र दे चुके हैं। – अजीत सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

स्वास्थ्य चेतावनी! अत्यधिक दुबलेपन से 3 गुना बढ़ जाता है असमय मौत का जोखिम

नईदिल्ली  अक्सर सभी ने सुना ही होगा कि अधिक वजन के कारण लोगों को कई समस्याएं होती हैं और आगे चलकर यही समस्याएं जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन सकती हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च में दावा किया गया है कि थोड़ा अधिक वजन होना आपकी जिंदगी को छोटा नहीं कर सकता लेकिन बहुत ज़्यादा पतला होना आपकी जिंदगी को कम जरूर कर सकता है. दरअसल, शरीर के वजन और आपकी सेहत के बीच का संबंध अक्सर हम जितना समझ पाते हैं, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है. 85,000 से अधिक वयस्कों पर की गई डेनिश स्टडी में पाया गया है कि आसान भाषा में समझें तो 18.5 से कम बीएमआई वाले लोगों की समय से पहले मृत्यु होने की संभावना 22.5 और 24.9 के बीच बीएमआई वाले लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थी. पतले लोगों में समय से पहले मौत का खतरा आमतौर पर 18.5 से 24.9 बीएमआई को हेल्दी माना जाता है लेकिन रिसर्च में यह भी सामने आया कि इस रेंज के नीचे आने वाले लोगों की जान भी जोखिम में होती है. दरअसल, जिनका BMI 18.5 से 19.9 था, उनमें मौत का खतरा दोगुना पाया गया और वहीं जिनका बीएमआई 20 से 22.4 था, उनमें रिस्क 27 फीसदी तक था. हालांकि ये निष्कर्ष आश्चर्यजनक लगते हैं क्योंकि 18.5 और 24.9 के बीच बीएमआई को आमतौर पर स्वस्थ्य माना जाता है. ओवरवेट लोग अधिक खतरे में नहीं स्टडी में सामने आया है कि ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त (BMI 25 से 35) लोग जिनके बारे में माना जाता था कि उन्हें वजन के कारण जोखिम अधिक है, उन्हें मौत का खतरा अधिक नहीं था. सिर्फ जिनका बीएमआई 40 से अधिक था, उनमें ही मौत का जोखिम 2 गुना पाया गया था. यानी जिनका वजन थोड़ा ज्यादा है, उन्हें यह नहीं मान लेना चाहिए कि वे मौत के खतरे में है. रिसर्च के नतीजे इस बात को चैलेंज करते हैं कि पतला होना हमेशा सेहतमंद होता है और मोटापा हमेशा जोखिम में डालता है. क्यों खतरनाक है बहुत दुबला होना? एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत दुबले लोगों के शरीर में फैट स्टोर काफी कम होता है और जब कोई गंभीर बीमारी या ट्रीटमेंट (जैसे कि कैंसर की कीमोथेरेपी के दौरान वजन गिरता है) होता है तब शरीर को रिकवरी के लिए स्टोर किए गए फैट की जरूरत होती है. जिन लोगों के पास पर्याप्त फैट नहीं होता, उनका शरीर जल्दी कमजोर पड़ जाता है और जरूरी अंग सही से काम नहीं कर पाते. इस कारण अधिक पतला होना भी सेहतमंद नहीं बल्कि जानलेवा साबित हो सकता है. BMI हमेशा सही पैमाना नहीं रिसर्चर्स का कहना है कि BMI सिर्फ हाइट और वेट पर आधारित एक केल्कुलेशन है. यह शरीर की फैट डिस्ट्रिब्यूशन, डाइट, लाइफस्टाइल या जेनेटिक फैक्टर्स को शामिल नहीं करता और यही कारण है कि BMI हर व्यक्ति के लिए सटीक पैमाना नहीं हो सकता. डेनिश रिसर्चर्स का मानना है कि अब सेफ BMI रेंज 22.5 से 30 तक मानी जा सकती है. यानी थोड़ा-बहुत ओवरवेट होना उतना नुकसानदायक नहीं जितना पहले माना जाता था. रिसर्च का मुख्य संदेश यही है कि बहुत दुबला होना खतरनाक है और पतलापन हमेशा सेहतमंद नहीं होता. थोड़ा ज्यादा वजन होना हमेशा जानलेवा नहीं है. सेहत का असली पैमाना हेल्दी डाइट, एक्टिव लाइफस्टाइल और मेडिकल चेकअप होना चाहिए. BMI को सिर्फ एक इंडिकेटर मानना चाहिए.