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चिराग को सीटें तो मिलीं, लेकिन क्या पसंदीदा इलाके भी मिलेंगे? NDA में खींचतान तय!

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए में रविवार को सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया गया है. बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर-बराबर सीटों पर लड़ने का फॉर्मूला तय हुआ है, तो चिराग पासवान की मन की मुराद पूरी हो गई है. चिराग की पार्टी एलजेपी (आर) को 29 सीटें मिली हैं. चिराग पासवान को एनडीए में मन के मुताबिक सीटों की संख्या तो मिली, लेकिन क्या पसंदीदा सीटें भी मिल पाएंगी? एनडीए में अभी यह पूरी तरह से तय नहीं हुआ है कि एलजेपी किन 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. 2020 के चुनाव में चिराग एनडीए का हिस्सा नहीं थे, उस समय जेडीयू 115 सीट पर चुनाव लड़ी थी और बीजेपी ने 110 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. जेडीयू और बीजेपी चिराग को सीटें देने के लिए कम सीटों पर लड़ने को राज़ी हो गई हैं, लेकिन असली मामला अब उन सीटों पर फंसा है, जहां पर जेडीयू, बीजेपी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का कब्ज़ा है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और बीजेपी दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. बाकी सीटें छोटे सहयोगी दलों को दी गई हैं. इनमें सबसे ज़्यादा फ़ायदा चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) को हुआ. एनडीए में चिराग की पार्टी को 29 सीटें मिली हैं. चिराग की पार्टी लगातार 30 से 35 सीटें मांग रही थी और उसी लिहाज़ से उसे 29 सीटें मिली हैं. चिराग पासवान का एनडीए में बढ़ता क़द अब किसी से छिपा नहीं है. बिहार की राजनीति में उन्हें अब 'किंगमेकर' के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल ये है कि चिराग पासवान में ऐसी क्या ख़ास बात है कि बीजेपी और जेडीयू दोनों अपनी सीटों का नुक़सान उठाकर भी उन्हें ज़्यादा महत्व देने का काम किया है.  चिराग को पसंदीदा सीटें भी मिलेंगी? एनडीए में सीट शेयरिंग के मामले में चिराग पासवान 30-35 सीटों पर दावेदारी कर रहे थे, लेकिन बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के दख़ल के बाद चिराग पासवान 29 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हुए हैं. इसका ऐलान भी रविवार को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कर दिया, ऐसे में मामला उन सीटों पर फंस सकता है, जहां पर बीजेपी और जेडीयू ने 2020 में कब्ज़ा जमाया था. चिराग पासवान ने जिन 29 सीटों पर चुनाव लड़ने का अभी तक प्लान बनाया है, उनमें से कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर जेडीयू और बीजेपी का कब्ज़ा है. बीजेपी और जेडीयू क्या अपनी जीती हुई सीटें एलजेपी के लिए छोड़ने को तैयार होंगी? जेडीयू ने जिस तरह से पिछले चुनाव में सीटें जीती थीं, उनमें से छोड़ना उसके लिए आसान नहीं है. माना जा रहा है कि एलजेपी की दावे वाली चार सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है तो तीन सीटों पर जेडीयू के विधायक हैं. इसके अलावा एक सीट पर जीतनराम मांझी की पार्टी का कब्ज़ा है. चिराग का बढ़ता सियासी क़द चिराग पासवान अपने पिता और बिहार के दिग्गज दलित नेता राम विलास पासवान की सियासी विरासत को संभाल रहे हैं. राम विलास पासवान का बिहार में गहरी जड़ें वाला दलित वोट बैंक था. दलितों में ख़ासकर दुसाध समुदाय में है, यह समुदाय राज्य में एक बड़ा जनसमूह है. एनडीए के लिए इनका साथ जीत में बड़ी भूमिका निभा सकता है.  2020 में चिराग पासवान की पार्टी एनडीए से बाहर रहकर 135 सीटों पर लड़ी थी और सिर्फ़ 1 सीट जीत पाई थी. चिराग पासवान भले ही सीटें जीतने में सफल नहीं रहे, लेकिन एनडीए से बाहर जाकर लड़ने पर नीतीश कुमार की पार्टी को गहरा झटका दिया था. एनडीए में पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.  2025 के विधानसभा चुनाव में चिराग को लेकर 2020 से बिल्कुल अलग रणनीति है। चिराग की पार्टी एनडीए के साथ ही चुनाव लड़ रही है. गठबंधन में उन्हें लड़ने के लिए 29 सीटें मिली हैं, जिस पर वह ख़ुश हैं. चिराग की कैसे बढ़ी अहमियत 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था. वह पांच सीटों पर चुनाव लड़े थे और सभी पांचों पर जीत दर्ज किए थे. यह नतीजा उनके संगठन और जनाधार की मज़बूती दिखाता है. इसी के बाद से बीजेपी और जेडीयू दोनों को यह समझ में आ गया कि चिराग पासवान अब केवल सहयोगी दल के नेता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक बड़ी ताक़त बन चुके हैं. बीजेपी को बिहार में जहां सवर्ण और शहरी वोटरों का समर्थन मिलता है तो जेडीयू को कुर्मी और पिछड़े वर्ग का. ऐसे में चिराग की पार्टी दलित समुदाय को जोड़ती है, जिससे गठबंधन की सामाजिक पकड़ और मज़बूत होती है. यही वजह है कि उन्हें 29 सीटें तो मिल गई हैं, लेकिन क्या मनमर्ज़ी वाली सीटें भी मिलेंगी? चिराग की सियासी महत्वाकांक्षा चिराग पासवान की सियासी महत्वाकांक्षा अब सिर्फ़ कुछ सीटें जीतने तक सीमित नहीं है. वह ख़ुद को बिहार की अगली पीढ़ी के नेताओं में स्थापित करना चाहते हैं. वह बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं, जिससे बीजेपी के साथ उनका रिश्ता और मज़बूत हुआ है. इस बार किंगमेकर बनने का सपना लेकर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, जिसके लिए एक-एक सीट पर नज़र गड़ाए हुए हैं. बिहार में इस बार के सीट बंटवारे ने यह साफ़ कर दिया है कि एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान अब छोटे सहयोगी नहीं, बल्कि मुख्य चेहरा बन गए हैं. चिराग की पार्टी की मज़बूती और दलित वोट बैंक पर पकड़, आने वाले चुनावों में एनडीए के लिए चिराग कितनी रोशनी साबित होते हैं या फिर अपनी सियासी उम्मीदों को उजाला करेंगे?

केंद्र से 3% पीछे मप्र का डीए-डीआर, कर्मचारी बोले—बढ़े महंगाई भत्ता और मिले फेस्टिवल बोनस

भोपाल  केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) दे दी है। इसे लेकर मध्यप्रदेश के कर्मचारी भी सक्रिय हो गए हैं। कर्मचारियों ने दीपावली से पहले 3% डीए एवं डीआर और बोनस देने की मांग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि दीपावली से पहले ये लाभ दे दिया जाए, ताकि कर्मचारियों के परिवार त्योहार खुशियों के साथ मना सकें। प्रदेश के कर्मचारियों ने फेस्टिवल एडवांस की राशि बढ़ाने की भी मांग की है। उधर, माना जा रहा है कि राज्य सरकार जल्द ही कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। प्रदेश में मिल रहा 55% डीए, केंद्र में बढ़कर हुआ 58% वर्तमान में मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का डीए अब 3% बढ़कर 58% हो गया है। राज्य के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2025 से ड्यू है, जिसे अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि उन्हें हमेशा केंद्र के बाद देरी से डीए वृद्धि मिलती है। 29 साल से बंद है बोनस कर्मचारी संगठनों ने याद दिलाया कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है। उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में दिया जाता था। केंद्र सरकार और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस देती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सुविधा वर्षों से बंद है। कर्मचारी संगठनों ने कहा- सरकार कहती है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना उनकी ‘कथनी और करनी’ में फर्क दिखाता है। केंद्र सरकार अक्टूबर में फिर बढ़ा सकती है डीए सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अक्टूबर माह में अपने कर्मचारियों का डीए 3% बढ़ाने की घोषणा कर सकती है। इससे डीए 58% से बढ़कर 61% तक पहुंच जाएगा। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी का कहना है- आमतौर पर मध्यप्रदेश सरकार केंद्र के बाद ही डीए वृद्धि का ऐलान करती है। इसलिए उम्मीद है कि केंद्र के फैसले के बाद राज्य सरकार भी जल्द घोषणा करेगी। अक्टूबर में आएगी एरियर की आखिरी किस्त प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2025 में कर्मचारियों का डीए 5% बढ़ाया था, जिससे दर 55% हो गई थी। इसके साथ ही सरकार ने एरियर का भुगतान 5 किस्तों में करने का निर्णय लिया था। अब अक्टूबर में एरियर की अंतिम किस्त कर्मचारियों के खातों में आने वाली है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि उसी समय डीए वृद्धि और बोनस का ऐलान भी किया जाएगा। 10 हजार फेस्टिवल एडवांस की मांग राज्य कर्मचारी संघ के महामंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा- केंद्रीय कर्मचारियों को कभी डीए क मांग नहीं करनी पड़ती, लेकिन मध्यप्रदेश में बार-बार आग्रह करना पड़ता है। इस बार उम्मीद है कि सरकार दीपावली से पहले समय पर डीए और बोनस देगी। उन्होंने साथ ही यह मांग भी रखी कि कर्मचारियों को 10 हजार रुपए का फेस्टिवल एडवांस दिया जाए, ताकि वे त्योहार के दौरान आर्थिक रूप से सहज रह सकें। 10 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स होंगे प्रभावित तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दीपावली से पहले महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने की मांग की है। प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रहा 55% डीए वर्तमान में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारी अब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 58% डीए प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश के कर्मचारियों का जुलाई 2025 से डीए ड्यू है। 29 साल से बंद बोनस देने की मांग कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है, जबकि उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में मिलता था। केंद्र और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस दे रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। यह फिर से शुरू किया जाना चाहिए। संगठनों ने कहा कि सरकार एक ओर दावा करती है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना “कथनी और करनी में अंतर” दर्शाता है। कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दीपावली से पहले कर्मचारियों को राहत देने का फैसला लेकर त्योहार की खुशियां दो गुनी करेंगे। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कर्मचारियों को दीपावली के पहले 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद अब राज्य के कर्मचारी भी मोहन सरकार से महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहा है कि एमपी में काम कर रहे कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देकर बोनस दिया जाए ताकि कर्मचारी त्यौहार खुशियों के साथ मना सकें। इसके साथ ही फेस्टिवल एडवांस भी बढ़ी हुई राशि के साथ देने की मांग की जा रही है। उधर माना जा रहा है कि जल्दी ही राज्य सरकार भी कर्मचारियों के लिए डीए देने का ऐलान कर सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जिस प्रकार से केंद्र एवं रेलवे द्वारा दीपावली के अवसर पर बोनस एवं 3% महंगाई भत्ता, महंगाई राहत एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों को प्रदान कर दी गई है उसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार भी दीपावली के त्योहार पर कर्मचारियों को आर्थिक रूप से खुशियां दे। प्रदेश में वर्ष 1996 से बोनस बंद है। वर्ष 1996 तक 1079 रुपए बोनस के रूप में कर्मचारियों को प्राप्त होते थे। वर्तमान में प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा आज भी अपने कर्मचारियों को बोनस दिया जा रहा है वहीं मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को बोनस से वंचित कर दिया गया है। संगठनों के अनुसार एक तरफ प्रदेश सरकार द्वारा कहा जाता है कि केंद्र के समान … Read more

गौ-शालाओं और पशुपालकों को आयोजन में बनायें सहभागी: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाए गोवर्धन पर्व : मुख्यमंत्री डॉ.यादव गौ-शालाओं और पशुपालकों को आयोजन में बनायें सहभागी: मुख्यमंत्री डॉ.यादव दुग्ध उत्पादन तथा पशुपालन में विशेष उपलब्धियां दर्ज कराने और नवाचार करने वाले उद्यमियों को करें सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवर्धन पर्व संबंधी बैठक में दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 21 अक्टूबर को गोवर्धन पर्व लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाए। आयोजन में गौशालाओं तथा पशुपालकों को विशेष रूप से सहभागी बनाया जाए। साथ ही गोवर्धन पर्व पर पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां दर्ज करने और नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित भी किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव गोवर्धन पर्व आयोजन के संबंध में सोमवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्य सचिव  अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की गौ-शालाओं में गोवर्धन पर्व का सामुदायिक आयोजन होगा। गोवर्धन पर्व का मुख्य आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में किया जाएगा, जिसमें गोवर्धन पूजन, परिक्रमा, अन्नकूट भोग मुख्य होगा। इस अवसर पर पशुचारक समुदायों की कला, बरेदी और ठाट्या नृत्य आदि का प्रस्तुतीकरण होगा। कार्यक्रम में जैविक उत्पादक, दुग्ध उत्पाद, गोबर आधारित शिल्प के स्टॉल लगाए जाएंगे, साथ ही पशुपालन, कृषि, सहकारिता विभाग की योजनाओं की जानकारी देने के लिए विशेष व्यवस्था होगी। इसके साथ ही ग्रामीण आजीविका के लिए दुग्ध उत्पादन और वृंदावन ग्राम योजना के विस्तार के लिए भी गतिविधियों का संचालन होगा। गोवर्धन पर्व पर सभी जिलों में गतिविधियां संचालित की जाएंगी। आंगनवाड़ी केंद्रों में पंचगव्य उत्पाद जैसे घी, दूध, पनीर और दही से बनी सामग्री का वितरण किया जाएगा।  

इंडियन एयरफोर्स को मिलने वाले हैं 114 बवंडर’ फाइटर जेट, राफेल F-4 पर फ्रांस से डील फाइनल!

नई दिल्ली इंडियन एयरफोर्स को जिस लड़ाकू विमान का इंतजार था. वो घड़ी बेहद करीब आ चुकी है. वर्तमान में भारत अपनी स्क्वाड्रन संख्या बढ़ाना चाहता है. इसी कड़ी में 114 लड़ाकू विमानों की खरीद का महत्वाकांक्षी MRFA प्रोजेक्ट अब एक अहम चरण में पहुंच चुका है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत इस टेंडर में फ्रांस के दसॉल्ट राफेल के सबसे एडवांस वर्जन F4 स्टैंडर्ड पर अपनी रुचि और सहमति लगभग पक्की कर चुका है. आपको बता दें, राफेल F4 मौजूदा राफेल विमानों का एडवांस और डिजिटल रूप है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित कई नई और अत्याधुनिक फीचर्स हैं. IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में इस सौदे पर हस्ताक्षर होने की संभावना है . ऐसे में स्पष्ट है कि भारत अपनी वायुसेना की स्क्वाड्रन ताकत की कमी को जल्द से जल्द दूर करना चाहता है. क्या है राफेल F4 वेरिएंट की खासियत? राफेल F4, मौजूदा राफेल लड़ाकू विमानों से कई मायनों में आगे है. यह भारतीय वायुसेना को तकनीकी ताकत प्रदान करेगा. F4 में AI-आधारित उन्नत संचार प्रणालियाँ हैं जो विमानों को आपस में और ज़मीनी कमांड सेंटरों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद करती हैं. यह वेरिएंट नई पीढ़ी के हथियार और सेंसर ले जाने में सक्षम होगा, जिससे उसकी मारक क्षमता और सटीक वार करने की क्षमता बढ़ेगी. इतना ही नहीं, F4 को रखरखाव के मामले में भी कम समय लेने वाला और अधिक कुशल बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे विमान ज्यादा समय तक ऑपरेशनल रह सकेगा. क्यों पड़ी MRFA टेंडर की जरूरत? IAF को अपनी स्क्वाड्रन ताकत को बनाए रखने के लिए इन 114 मल्टी-रोल विमानों की तत्काल जरूरत है. IAF की स्वीकृत स्क्वाड्रन ताकत 42 है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या उससे काफी कम है. जिसे करीब 29 बताया जा रहा है. MRFA इस अंतर को भरने के लिए बेहद जरूरी है. IAF के पास पहले से ही राफेल का अनुभव है. राफेल F4 को चुनना पायलटों की ट्रेनिंग और रखरखाव के बुनियादी ढांचे के लिए एक आसान विकल्प होगा, क्योंकि मौजूदा ज्ञान का इस्तेमाल किया जा सकेगा. मेक इन इंडिया के तहत होगी खरीदारी यह डील केवल विमानों की खरीद नहीं है, बल्कि भारत के रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा फैसला है. MRFA सौदे में यह शर्त है कि अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. राफेल F4 को चुनने पर फ्रांस से बड़े पैमाने पर तकनीकी हस्तांतरण (ToT) की उम्मीद है. साथ ही, यह सौदा भारत और फ्रांस के बीच पहले से मजबूत रणनीतिक भागीदारी को और गहरा करेगा, जो कि भारत के लिए एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार है. 2026 तक कॉन्ट्रैक्ट साइन करने की संभावना का मतलब है कि भारत ने अब अपनी हवाई ताकत बढ़ाने के लिए समय-सीमा तय कर ली है और वह राफेल F4 को एक सबसे मजबूत विकल्प के रूप में देख रहा है.

रेलवे का फेस्टिव सरप्राइज! दिवाली पर चलाई जाएंगी स्पेशल ट्रेनें, अपनों से मिलने का सफर होगा आसान

मुंबई  दीपावली का त्यौहार नजदीक है, और हर कोई अपने परिवार के पास जाकर इस पावन पर्व को मनाने की इच्छा रखता है. मगर दूर मेट्रो सिटी या अन्य राज्यों में काम करने वाले लाखों लोगों के लिए घर पहुंचना हमेशा एक बड़ी चुनौती भरा रहा है. त्योहारों के मौसम में कंफर्म ट्रेन टिकट मिलना किसी लॉटरी से कम नहीं होता, जिसके चलते कई लोग चाहकर भी अपने अपनों से नहीं मिल पाते. लेकिन इस बार यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा और भावनात्मक तोहफा दिया है. त्योहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट को देखते हुए रेलवे ने भगत की कोठी–हुबली फेस्टिवल वीकली एसी स्पेशल ट्रेन (07360/07359) के संचालन की घोषणा की है. यह ट्रेन विशेष रूप से दीपावली सीजन में उन यात्रियों को बड़ी सुविधा देगी जो पाली, मारवाड़ जंक्शन, फालना समेत आस-पास के इलाकों से पुणे, मुंबई या दक्षिण भारत की ओर यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन जिन्हें सामान्य ट्रेनों में टिकट नहीं मिल पा रहा है. संचालन की तारीख और समय रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह स्पेशल ट्रेन अपने दूसरे ट्रिप के लिए मंगलवार, 14 अक्टूबर को भगत की कोठी से सुबह 7:50 बजे रवाना होगी. ट्रेन संख्या 07360 भगत की कोठी से हुबली तक साप्ताहिक रूप से चलेगी. यह ट्रेन हर मंगलवार को 28 अक्टूबर तक यात्रियों को सुविधा देगी. इसी प्रकार, वापसी में ट्रेन संख्या 07359 हुबली से हर सोमवार को 27 अक्टूबर तक चलेगी. इस एसी स्पेशल सेवा से यात्रियों को आरामदायक सफर सुनिश्चित होगा. इन प्रमुख स्टेशनों पर होगा ठहराव यह फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन राजस्थान के प्रमुख स्टेशनों जैसे लूनी, पाली, मारवाड़ जंक्शन, फालना, पिंडवाड़ा, आबूरोड पर रुकेगी. इसके बाद यह गुजरात के पालनपुर, महेसाना, वडोदरा होते हुए मुंबई मार्ग पर सूरत, वापी, वसई रोड, कल्याण जैसे व्यस्त स्टेशनों पर रुकेगी. दक्षिण भारत की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन पुणे, सतारा, कराड, सांगली, मिरज, घटप्रभा, बेलगांव और धारवाड़ स्टेशनों पर रुकेगी. बुधवार दोपहर करीब 3:15 बजे यह ट्रेन अपने गंतव्य हुबली पहुंचेगी, जिससे यह यात्रा करने वालों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन जाएगा. रेलवे अधिकारी का आश्वासन सीनियर डीसीएम विकास खेड़ा ने बताया कि मुंबई रूट पर पहले से 2 दैनिक और 8 साप्ताहिक ट्रेनें चल रही हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान यात्रियों का अतिरिक्त दबाव होता है. इसी को देखते हुए इस एसी स्पेशल ट्रेन की शुरुआत की गई है ताकि कोई भी यात्री दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर अपने परिवार से दूर न रह जाए. यह पहल सिर्फ एक ट्रेन सेवा नहीं, बल्कि रिश्तों की डोर को मजबूत करने का रेलवे का एक प्रयास है.  

EPFO पेंशन में इज़ाफे की तैयारी, दिवाली से पहले प्राइवेट कर्मचारियों को मिल सकती है सौगात

नई दिल्ली इस दिवाली प्राइवेट कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी मिलने की उम्मीद है. अनुमान है कि EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कर्मचारियों की बेहतरी के लिए चलाए जाने वाली एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम के तहत मिनिमम पेंशन राशि को बढ़ा सकता है. दरअसल, 10 और 11 अक्टूबर को EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक बेंगलुरु में होनी थी. इस मीटिंग में कर्मचारियों की पेंशन में बढ़ोतरी को लेकर गुड न्यूज मिलने की संभावनाएं लग रही है. कर्मचारी अब भी ईपीएफओ की तरफ से जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं. कितनी है मौजूदा पेंशन राशि? कर्मचारियों के मुताबिक, एम्पलॉयी पेंशन स्कीम में मिनिमम पेंशन राशि काफी कम है. साल 2014 में तय की गई एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) की मिनिमम पेंशन राशि 1000 रूपये पर मंथ है, जिसे एम्प्लॉयी लगातार बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बीते दिनों हुई बैठक में इसे 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये करने के अनुमान है. ऐसे में इस पेंशन राशि के बढ़ने से कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी और उनकी कई साल की मांग पूरी हो जाएगी.   क्यों हो रही पेंशन बढ़ाने की मांग? एम्पलॉयीज का कहना है कि बदलते समय के साथ अब बाजार में हो रही महंगाई के हिसाब से पेंशन स्कीम से मिलने वाले 1000 रुपये काफी कम हैं. ऐसे में ट्रेड यूनियन और पेंशन का लाभ लेने वाले लोगों के यूनियंस काफी लंबे समय से इस राशि को बढ़ाकर 7500 रुपये करने की डिमांड कर रहे हैं. हालांकि, रिपोर्टस के अनुसार CBT ने पेंशन में सीधे 7.5 गुना की बढ़ोतरी से साफ इनकार कर दिया है.   कैसे डिसाइड होती है EPFO पेंशन? EPS स्कीम के तहत पेंशन को कैलकुलेट करने का भी अपना एक तरीका है. इसका फॉर्मूला (पेंशन = पेंशनेबल सैलरी × पेंशनेबल सर्विस)÷ 70 होता है. इसमें पेंशनेबल सैलरी यानी आपके आखिरी 60 महीनों का सैलरी एवरेज और पेंशनेबल सर्विस यानी सर्विस के कितने साल EPS में कॉन्ट्रीब्यूट किया. पेंशन पाने के लिए मैक्सिमम सैलरी लिमिट 15000 रुपये पर मंथ होती है. साथ ही, इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए कम से कम 10 साल की नौकरी जरूरी होती है. 

सिंहस्थ की तैयारी में तेजी लाएं, समय-सीमा में काम पूरा करें: मंत्री तोमर का निर्देश एम.पी. ट्रांसको को

सिंहस्थ के कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करें एम.पी. ट्रांसको : मंत्री  तोमर सिंहस्थ-2028 के लिये एम.पी. ट्रांसको के कार्यों की समीक्षा की जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मुख्यालय जबलपुर में मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा सिंहस्थ-2028 के लिये किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में ऊर्जा मंत्री  तोमर को एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने वर्तमान कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। मंत्री  तोमर ने निर्देश दिये कि सिंहस्थ-2028 प्रदेश सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है, सिंहस्थ के कार्यों की नियमित निगरानी रखी जायें और तय समय सीमा व उच्च गुणवत्ता के साथ सभी कार्य पूरे किये जाये। एम.पी. ट्रांसको उज्जैन में कर रही है यह कार्य मंत्री  तोमर ने सिंहस्थ-2028 में उज्जैन में निर्वाध विद्युत आपूर्ति के लिये पहले चरण में निर्माणधीन 132 के.व्ही. सब स्टेशन चिंतामन एवं 132 के.व्ही. सब स्टेशन त्रिवेणी बिहार के निर्माण कार्यों की प्रगति जानी। इसके अलावा एम.पी. ट्रांसकों 220 के.व्ही. सब स्टेशन शंकरपुरा में वर्तमान 20 एम.व्ही.ए. क्षमता के अपग्रेड कर 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का तथा अपने 400 के.व्ही. सब स्टेशन ताजपुर में 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर रही है। जिनकी कार्य प्रगति के बारे मे भी ऊर्जा मंत्री ने जानकारी प्राप्त कर आवश्यक निर्देश दिये।  

मंत्री सिलावट ने कहा- जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर कराएं विकास कार्य

भोपाल  जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि अधिकारी शासकीय विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर कार्य करें। उन्हें कार्यों की जानकारी दें तथा उनके सुझावों पर भी अमल किया जाए। जल संसाधन मंत्री सोमवार को मंत्रालय में पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत कुंभराज परियोजना संबंधी बैठक ले रहे थे। बैठक में सांसद राजगढ़ श्री रोडमल नागर, विधायक चाचौड़ा श्रीमती प्रियंका पेंची, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन श्री राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता श्री विनोद देवड़ा एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर गुना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना के रूप में मध्यप्रदेश को एक बड़ी सौगात दी है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व.श्री अटल बिहारी वाजपेयी का नदी जोड़ो का सपना मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में साकार हो रहा है। यह अनूठी परियोजना है जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 90% राशि दी जा रही है, राज्य सरकारों को केवल 10% राशि वहन करनी है। इसके पूरा होने पर क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी। हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना हमारी सरकार का संकल्प है। बैठक में बताया गया कि संशोधित पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना से मध्यप्रदेश में 6 लाख 11 हज़ार 50 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा के साथ 40 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। इस परियोजना के एक घटक के रूप में कुंभराज परियोजना सबसे बड़ी परियोजना है। परियोजना से सबसे ज्यादा लाभ गुना जिले की विधानसभा क्षेत्र चाचौड़ा के किसानों को होगा। बैठक में तकनीकी रूप से उपयुक्त स्थल पर ही निर्माण कार्य किये जाने के निर्देश दिये गये। मंत्री श्री सिलावट ने बैठक में निर्देश दिए कि कुंभराज परियोजना अंतर्गत प्रभावित परिवारों का भू अर्जन एवं पुनर्वास आदि के कार्य शासन के नियम अनुसार और निर्धारित समय अवधि में किए जाएं। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए विशेष पैकेज का आग्रह किया, इस पर मंत्री श्री सिलावट ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से इस सम्बन्ध में चर्चा करने का आश्वासन दिया।  

MP High Court ने जोड़ा फासला खत्म किया: अलग होना चाहते थे ये दंपति, फिर हुआ ऐसा

ग्वालियर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में युगल पीठ ने चार साल से विवादों में उलझे एक दंपती को फिर से मिला दिया है। न्यायालय के निर्देश पर 30 दिन साथ रहने के बाद दोनों ने आपसी मतभेद सुलझा लिए और अब उन्होंने तलाक नहीं लेने का फैसला किया है। दंपती ने एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और पत्नी द्वारा पति को दी गई भरण-पोषण राशि लौटाने पर भी सहमति जताई है। पीठ ने कहा कि जब पति-पत्नी आपसी सहमति से साथ रहना चाहते हैं, तो न्यायालय का उद्देश्य भी पारिवारिक जीवन में शांति, स्थायित्व और समरसता स्थापित करना है।   2022 से थे अलग, अब फिर बने एक-दूसरे का सहारा भिंड निवासी राहुल और श्वेता (परिवर्तित नाम) के बीच जरा-जरा सी बातों पर विवाद शुरू हुआ था, जिसके चलते दोनों 2022 से अलग रह रहे थे। वर्ष 2023 में भिंड कुटुंब न्यायालय में तलाक का आवेदन खारिज कर दिया था, लेकिन इसके बाद राहुल ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत हाईकोर्ट में दोबारा तलाक की याचिका दायर की। इन बातों पर हुआ समझौता     पति के खिलाफ दायर सभी आपराधिक और दीवानी प्रकरण पत्नी 15 दिनों में वापस लेंगी।     पति द्वारा दी गई स्थायी भरण-पोषण राशि पत्नी लौटाएंगी।     दोनों एक-दूसरे के प्रति सम्मान और शांति के साथ साथ रहेंगे।     किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या उत्पीड़न नहीं करेंगे। साथ रहने के दिए निर्देश सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने दंपती को 30 दिन साथ रहने का निर्देश दिया, ताकि वे आपसी मतभेद सुलझा सकें। एक माह बाद दोनों दोबारा कोर्ट में उपस्थित हुए और बताया कि वे अब साथ रहना चाहते हैं। पत्नी ने कुछ मामूली शिकायतें रखीं, जिन पर न्यायालय ने कहा कि वैवाहिक जीवन में ऐसे मुद्दे समझदारी और सहनशीलता से सुलझाए जा सकते हैं।अदालत ने शासकीय अधिवक्ता अंजलि ग्यानानी को मामले में ‘शौर्या दीदी’ नियुक्त किया है। वे अगले 6 माह तक पत्नी का मार्गदर्शन और सहयोग करती रहेंगी, ताकि दाम्पत्य जीवन में स्थायी शांति और विश्वास बना रहे।

MP Transco ने व्हाट्सएप को कहा अलविदा, अब स्वदेशी ऐप ‘अराताई’ का सफल प्रयोग

भोपाल “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने भारत में निर्मित स्वदेशी मैसेजिंग ऐप अराताई का प्रयोग शुरू कर दिया है। ज़ोहो कॉर्प द्वारा विकसित यह ऐप विदेशी प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप का सुरक्षित और मजबूत विकल्प माना जा रहा है। एम.पी. ट्रांसको में सबसे पहले शहडोल डिवीजन के कार्यपालन अभियंता चंद्रभान कुशवाहा ने कार्यालयीन संवाद और फाइल शेयरिंग के लिए स्वदेशी अराताई का उपयोग प्रारंभ किया है। उन्होंने बताया कि “अराताई पूरी तरह भारत में विकसित सुरक्षित और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म है, जिससे विभागीय संवाद को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाया जा सकेगा।” इस ऐप में उच्च स्तरीय डेटा सुरक्षा, ग्रुप मैसेजिंग, मल्टी-डिवाइस सपोर्ट और तेज़ फ़ाइल शेयरिंग जैसी सुविधाएं हैं। इसका डेटा भारत के सर्वरों पर सुरक्षित रहता है। श्री कुशवाहा की पहल से शहडोल डिवीजन का संपूर्ण आंतरिक संचार अब अराताई के माध्यम से हो रहा है। एम.पी. ट्रांसको की यह पहल डिजिटल आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में सराहनीय कदम है।