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डिजिटल गवर्नेंस को नई उड़ान, चंडीगढ़ में स्थापित होगा AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

चंडीगढ़. प्रशासन द्वारा आईटी पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने की तैयारी की जा रही है । इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा, क्योंकि इससे सरकारी सेवाएं अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बन सकेंगी। प्रशासन के अनुसार, एआई तकनीक के उपयोग से जन्म प्रमाणपत्र, शिकायत निवारण, ट्रैफिक प्रबंधन और नगर सेवाओं जैसी सुविधाओं में सुधार आएगा । शहरवासियों की शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह बनेगी।ट्रैफिक जाम, सफाई व्यवस्था, पानी और बिजली जैसी सेवाओं की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। यह केंद्र युवाओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा। यहां एआई, साइबर सुरक्षा, ब्लाकचेन और अन्य उभरती तकनीकों पर शोध, प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह पहल चंडीगढ़ को देश के प्रमुख एआई और स्मार्ट गवर्नेंस हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रशासन ने क्या कहा? प्रशासन के अनुसार, यह सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इंडिया एआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग पिलर योजना के तहत स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान लागू कर सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। यह केंद्र सरकार, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाएगा। यहां शहरी और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावहारिक एआई आधारित तकनीकों का विकास किया जाएगा। साथ ही स्टार्टअप्स को को-वर्किंग स्पेस, इन्क्यूबेशन सपोर्ट, मेंटरशिप और निवेशकों से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्ताव के अनुसार, सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग और इंटरनेट आफ थिंग्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर भी काम किया जाएगा। इसके लिए हाई-परफार्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, उन्नत प्रयोगशालाएं और रिसर्च एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए विशेष सैंडबॉक्स वातावरण तैयार किए जाएंगे । साझा फंडिंग मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट परियोजना के वित्तपोषण के लिए साझा मॉडल अपनाया जाएगा। इसमें लगभग 40 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार के इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयद्वारा, 40 प्रतिशत चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा और शेष 20 प्रतिशत उद्योग एवं शैक्षणिक साझेदारों के सहयोग से जुटाई जाएगी। प्रशासन पहले शहर के विभिन्न विभागों में ऐसी समस्याओं और जरूरतों की पहचान करेगा, जिन्हें एआई आधारित समाधानों के माध्यम से दूर किया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल चंडीगढ़ को देश के अग्रणी एआई और टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।प्रशासन पहले से ही स्टार्टअप पालिसी के जरिए उद्यमियों और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।

धोखाधड़ी मामले के बाद बड़ा फैसला, खिलाड़ियों की कारतूस खरीद पर नजर; गन लाइसेंस पर लगी सीमा

भोपाल. भोपाल की फिजाओं में शूटिंग रेंज से आने वाली गोलियों की गूंज अक्सर देश के लिए मेडल जीतने वाले होनहारों की कहानी बयां करती थी। लेकिन, इसी गूंज के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच छिपा था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया। दरअसल स्पोर्ट्स कोटे के तहत मिलने वाले कारतूस, जो देश का मान बढ़ाने के लिए चलने चाहिए थे, वे चंद रुपयों के लालच में अपराधियों की बंदूकों की खुराक बन रहे थे। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। जांच बैठी तो सच सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी कारतूस जारी हो रहे थे, जिन्होंने कभी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा तक नहीं लिया था। भोपाल के 135 शूटर्स की जांच हुई, जिसमें 69 के लाइसेंस रद और 10 के निलंबित कर दिए गए। इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद भोपाल जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' शुरू करते हुए नियमों के पेंच कस दिए हैं। अब तक जो शूटर सालभर में 15 हजार से लेकर 1 लाख तक कारतूस आसानी से ले लेते थे, उनके लिए अब नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब नए नियमों के तहत एक शूटर को एक बार में अधिकतम सिर्फ 500 और सालभर में केवल 1000 कारतूस ही जारी किए जाएंगे। अगर किसी खिलाड़ी को इससे ज्यादा की जरूरत होगी, तो उसे खेल संचालक से बाकायदा सत्यापन कराना होगा। यही नहीं, प्रशासन ने हथियारों की संख्या पर भी कैंची चला दी है। अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी भी केवल दो गन के लाइसेंस रख सकेंगे, जबकि पहले उन्हें 8 से 10 बंदूकें रखने की छूट थी। प्रशासन अब हर एक गोली का हिसाब रखने की तैयारी में है। राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें कानून बदलकर कारतूस के 'खोखों' (खाली शेल) का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। अब शूटर्स को यह भी लिखित में देना होगा कि कारतूस किस प्रतियोगिता के लिए खरीदे जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल किस शूटिंग रेंज में होगा। 

डील से पहले ईरान में बढ़ता विरोध आखिर क्या संकेत दे रहा है?

तेहरान  अमेरिका से शांति समझौता करने के खिलाफ ईरानी लोगों का एक वर्ग सड़क पर उतर गया है। ईरान के कई शहरों में डील के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरानी हितों के खिलाफ जाकर डील की जा रही है, जो नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के निशाने पर खासतौर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ हैं। अमेरिका से समझौते में ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार गालिबाफ और अराघची के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई है। तेहरान के इब्न सिना स्क्वायर में शनिवार को रैली हुई है। मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के सामने भी दर्जनों लोग अब्बास अराघची के विरोध में जमा हुए। फार्स न्यूज एजेंसी ने वीडियो जारी किया है, जिसमें मशहद में प्रदर्शनकारी अराघची के खिलाफ नारे लगाते दिख रहे हैं। विरोध करने वालों का मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव कमजोर होगा। अराघची और गालिबाफ निशाने पर मशहद में महिलाओं को झंडे लहराते हुए और 'बेईमान घुसपैठिए अराघची मुर्दाबाद और अराघची हाय हाय' के नारे लगाते हुए देखा गया है। एक और वीडियो में प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि अराघची का समझौता ईरान को बेइज्जत करने वला है। उन्होंने उस समझौते में अमेरिका को बहुत ज्यादा और गैरजरूरी रियायतें दी हैं। ऐसे में गालिबाफ और अराघची इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि समझौते से ईरान के हितों की रक्षा नहीं होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर देश अपनी पकड़ खो देगा। शुक्रवार को एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा था कि प्रस्तावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की बात कही गई है। साथ ही समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का दावा भी किया जा रहा है। ईरान अमेरिका समझौता ईरान लोग ऐसे समय प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे हैं, जब अमेरिका से उनके देश का समझौता बेहद करीब है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर रविवार को दस्तखत हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने कहा है कि दोनों पक्ष रविवार को डील साइन कर सकते हैं। ईरानी नेताओं ने रविवार को समझौते पर दस्तखत होने की बात नहीं कही है लेकिन माना है कि अमेरिका के साथ समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है। ईरान ने संकेत दिया है कि डील में अभी कुछ समय लग सकता है। ईरानी पक्ष के बयानों से रविवार को समझौता होना मुश्किल नजर आ रहा है लेकिन जल्दी ही डील होने की उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि 24 घंटे के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। उन्होंने इशारा किया कि रविवार को दस्तखत हो सकते हैं।  

अयोध्या में उठे सवाल, अब जांच के लिए मैदान में उतरी SIT

अयोध्या   अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी और उनके पास से लाखों रुपये बरामद होने के बाद जांच तेज कर दी गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. ऐसे में जानिए, इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब तक क्या-क्या घटनाक्रम सामने आए हैं? ऐसे हुई विवाद की शुरुआत जून की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई. इसके बाद मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. फुटेज में एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी, जिसके आधार पर आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की गई. शुरुआत में मामले को गोपनीय रखा गया. 7 जून को अखिलेश यादव की एंट्री से सुर्खियों में आया मामला राम मंदिर चंदा चोरी मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को योगी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके का कि अयोध्या में मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो जानकारी सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यदि डबल इंजन सरकार की निगरानी व्यवस्था इतनी प्रभावी होती और दूरबीन व ड्रोन सही तरीके से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि चढ़ावे में चोरी होगी तो उसकी शिकायत भी होगी. इसके बाद अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा. संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में दान राशि की कथित चोरी बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात कही. 10 जून को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कही जांच कराने की मांग अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी की बात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मानी. कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच सरकार करा रही है. सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है. 13 जून को CM योगी के आदेश के बाद SIT गठित 13 जून को अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है. अधिकारियों के मुताबिक SIT का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया. यह कदम 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अनुरोध पर उठाया गया, जिसने इसे "गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने" के लिए ज़रूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं. SIT में लखनऊ के डिविज़नल कमिश्नर IAS विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) IPS किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. राज्य सरकार के अनुसार मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या मंदिर परिसर में दान पेटियों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. 13 जून को मामले में हुई 2 कर्मचारियों की गिरफ्तारी जांच के दौरान 13 जून को मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. बताया जा रहा है कि कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी. बरामद धनराशि के स्रोत को लेकर फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है. मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी. बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में असामान्य वृद्धि की चर्चा जांच एजेंसियों के रडार पर है. जानकारी के मुताबिक एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि खरीदी, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है. 5 दिनों के भीतर दो बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र इधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है. फिलहाल राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित SIT जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं.

MP की लाड़ली बहनों को बड़ा तोहफा, CM मोहन यादव आज ट्रांसफर करेंगे 37वीं किस्त की रकम

भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार, 14 जून को सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र के केसली से राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त (Ladli Behna Yojana 37th Installment) जारी करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। 190.85 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दौरे के दौरान केसली क्षेत्र में 190.85 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात भी देंगे। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। महिलाओं को आर्थिक सहायता का लाभ लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और घरेलू जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें। 37वीं किस्त के अंतर्गत एक बार फिर 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में राशि प्राप्त होगी। क्या है लाड़ली बहना योजना? लाड़ली बहना योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलता है जो मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी हों। परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए और पांच एकड़ से अधिक भूमि या चारपहिया वाहन नहीं होना चाहिए। विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं, जिनकी आयु 21 से 60 वर्ष के बीच है, योजना के लिए पात्र हैं। ऐसे चेक करें किस्त का स्टेटस लाड़ली बहना योजना की किस्त का स्टेटस चेक करने के लिए महिलाएं आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाकर “आवेदन व भुगतान की स्थिति” विकल्प पर क्लिक कर सकती हैं। इसके बाद समग्र आईडी या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद भुगतान की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी।

बैरागीवाला गांव में दो समुदायों की झड़प का CCTV आया सामने, एक की मौत से बढ़ा तनाव

उत्तराखंड उत्तराखंड के विकासनगर स्थित बैरागीवाला गांव में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प में युवक की मौत के बाद बवाल बढ़ता जा रहा है. यहां आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घरों पर ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में पत्थराव कर दिया. आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया गया. वहीं प्रशासन ने मामले को देखते हुए इंटरनेट बंद कर दिया है. अब इस मामले को लेकर 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. वहीं इस घटना के बाद बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें कई लोग लाठी-डंडों के साथ एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं. बैरागीवाला गांव से सामने आए CCTV फुटेज ने घटना के खौफनाक मंजर को कैमरे में कैद कर लिया है. वीडियो में लाठी-डंडों से लैस लोग सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं. कुछ लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, तो कहीं चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है. इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया. पुलिस का कहना है कि विवाद की शुरुआत खेत में पानी लगाने को लेकर हुई थी, लेकिन कुछ ही देर में मामूली कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई. अब सामने आए CCTV फुटेज में वो हिंसा दिखाई दे रही है. वीडियो में देखा जा सकता है कि गांव की गलियों में अचानक हलचल बढ़ जाती है. कुछ लोग हाथों में लाठियां लेकर दौड़ते नजर आते हैं. इसके बाद हमला शुरू हो जाता है. लोग इधर-उधर भागने लगते हैं. महिलाएं और बच्चे भी डर के साये में सुरक्षित जगह तलाशते दिखाई देते हैं. इस हिंसक झड़प में एक हिंदू युवक की मौत हो गई, जबकि महिला समेत तीन लोग घायल हुए हैं. युवक की मौत की खबर फैलते ही गांव का माहौल और ज्यादा गर्म हो गया. देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए. घटना के बाद गुस्साए हिंदूवादी संगठन के लोगों ने गांव में पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के एनकाउंटर समेत उनके घरों पर बुलडोजर एक्शन की मांग की और हाइवे जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समुदाय विशेष देवभूमि को कश्मीर बनाना चाहता है. यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है कि यह एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग की गई. गुस्साए लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नेशनल हाइवे जाम कर दिया. कई घंटों तक सड़क पर प्रदर्शन चलता रहा. लोगों का कहना था कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को पूरे इलाके को छावनी में बदलना पड़ा. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और हर गतिविधि पर नजर रखी जाने लगी. प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. घटना के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा विधायक घटना के बाद भाजपा विधायक मुन्ना चौहान पहले घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे. फिर वहां से सीधे बैरागीवाला गांव पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए मौके पर मौजूद पुलिस के आला अधिकारियों को सख्त एक्शन के निर्देश दिए. विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने पीड़ित परिवार से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया. इस मामले में सहसपुर कोतवाली पुलिस के मौजूदा थाना प्रभारी को सख्त लहजे में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया. अब इस पूरे मामले में CCTV फुटेज पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बन गया है. वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. हालांकि गांव में माहौल अब भी संवेदनशील बना हुआ है. एक तरफ परिवार अपने बेटे की मौत का इंसाफ मांग रहा है, दूसरी तरफ पूरा गांव CCTV में कैद उस हिंसा को देखकर सहमा हुआ है. घटना को लेकर एसपी ग्रामीण ने क्या कहा? इस घटना को लेकर एसपी देहात पंकज गैरोला ने कहा कि खेत में पानी लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुए मामूली विवाद के बाद कुछ युवकों ने विनोद नाम के युवक को पीट-पीटकर मार डाला. वहीं तीन लोगों पर जानलेवा हमला कर उन्हें घायल कर दिया. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रदर्शनकारियों से बात की जा रही है, आरोपियों की धड़पकड़ के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है. जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

PF Interest 2026: 8.25% ब्याज कब होगा खाते में क्रेडिट, EPFO सदस्यों के लिए अहम खबर

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के सदस्य अपने पीए खाते में ब्याज का पैसा जमा होने का इंतजार कर रहे हैं. FY2025-26 के लिए पीएफ की ब्याज दर (PF Interest Rate) को यथावत रखा गया है, जो 8.25% है. इसे स्थिर रखने का फैसला लिए गए दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पैसा ईपीएफओ सदस्यों के खाते में जमा नहीं हुआ है. अब इसे लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है।  बीते मार्च 2026 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा पर 8.25% की वार्षिक ब्याज दर की सिफारिश की. श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा 2 मार्च को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीटी ने सिफारिश की कि ब्याज को सदस्यों के ईपीएफ खाते में वित्तीय वर्ष के लिए जमा किया जाए।    कब तक PF खाते में जमा होगा पैसा?  EPFO Interest के खाते में जमा करने का इंतजार कर रहे सदस्यों के लिए बता दें कि अभी तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है और न ही कोई संभावित तारीख घोषित की गई है. लेकिन अगर, पीएफ में ब्याज का पैसा आने के पिछले रुझानों पर नजर डालें, तो संकेत मिल रहा है कि ये जून और सितंबर के बीच किसी भी समय डाला जा सकता है।  ब्याज की राशि ईपीएफओ सदस्यों के खातों में तभी जमा की जाती है जब केंद्र सरकार से सिफारिश को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है और इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया जाता है. ऐसे में इस प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, इसलिए राशि जमा करने की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।  पिछले वर्ष, कई ग्राहकों को जून और जुलाई में खाते में ब्याज मिला था. हालांकि, इसे लेकर सटीक समय अलग-अलग हो सकता है. सदस्यों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि पीएफ ब्याज की जानकारी सभी ईपीएफ पासबुक में एक साथ दिखाई नहीं देती है, मतलब कुछ सदस्यों को यह अपडेट दूसरों की तुलना में पहले दिखाई दे सकता है और कुछ को बाद में।  क्या देरी से ब्याज पर असर पड़ेगा? इस उत्तर है नहीं, पासबुक अपडेट में देरी होने पर भी, ग्राहकों को उनका पूरा ब्याज मिलता है. EPF Scheme 1952 के अनुच्छेद 60 के तहत पीएफ खाते पर ब्याज की गणना मासिक चालू शेष पर होती है, जिसपर सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाता है. इसलिए, पासबुक में ब्याज दर्शाने में किसी भी प्रशासनिक देरी से सदस्यों को मिलने वाली रकम पर कोई असर नहीं पड़ता है।  PF खाते में आया ब्याज, ऐके करें चेक EPFO द्वारा अपने सदस्यों को कई ऑप्शन दिए गए हैं, जिनके जरिए वे अपने पीएफ खाते में ब्याज की रकम आने पर इसे आसानी से चेक कर सकते हैं. इसके लिए उमंग ऐप (Umang App), ईपीएफओ सदस्य ई-सेवा पोर्टल (EPFO E-Service Portal), मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service) या एसएमएस सुविधाएं (EPFO SMS Service) के जरिए स्टेटस जांच सकते हैं।   

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को उद्यमियों को देंगे प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को करेंगे उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ का वितरण "समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में भोपाल  प्रदेश में उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ रोजगार सृजन को गति प्रदान कर "विकसित मध्यप्रदेश" बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए रविवार 14 जून को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में वृहद कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभिन्न जिलों के एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे। इस दौरान उद्यमियों को भू-आवंटन पत्र, स्टार्टअप नीति अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न लाभ और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत युवाओं को हितलाभ भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एमएसएमई उद्यमियों एवं स्टार्टअप प्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी करेंगे। संवाद के माध्यम से उद्यमी अपने अनुभव साझा करेंगे तथा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों और योजनाओं के प्रभाव के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही वे उद्यमिता को और अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव और अपेक्षाएं भी प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से विभाग द्वारा प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देंगे। प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह द्वारा विभाग की प्रमुख उपलब्धियों, योजनाओं एवं भावी कार्ययोजना का उल्लेख किया जाएगा। कार्यक्रम की थीम समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" रखी गई है। सूक्ष्म लघु,उद्यम विभाग कार्यक्रम में प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित करेगा। यह कार्यक्रम प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को नई ऊर्जा प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मानते हुए निरंतर ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिले और युवाओं में स्वरोजगार की भावना विकसित हो तथा नवाचार को प्रोत्साहन प्राप्त हो। राज्य की नई औद्योगिक एवं निवेशोन्मुखी नीतियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को उद्यम स्थापना के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। संवाद से प्राप्त सुझाव प्रदेश की औद्योगिक एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी को और अधिक सुदृढ़ बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, बैंकिंग संस्थानों के पदाधिकारी, निवेशक, स्टार्टअप संस्थापक, युवा उद्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन केवल हितलाभ वितरण तक सीमित न रहकर उद्यमिता को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर एवं विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में सामूहिक संकल्प का अवसर भी बनेगा। मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनाना तथा नवाचार, कौशल और उद्यमिता के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना भी है। "समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" कार्यक्रम इसी व्यापक सोच और दूरदृष्टि को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

जुलाई में बढ़ सकती है कर्मचारियों की सैलरी, DA 63% पहुंचने की संभावना; जानिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी बातें

नईदिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. जल्‍द ही इन कर्मचारियों को लेकर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है. इनकी सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है और केंद्रीय कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में जुलाई से बढ़ी हुई सैलरी आ सकती है।  महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट       दरअसल, केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की करीबी नजरें 8वें वेतन आयोग पर लगी हैं. कर्मचारी संघों द्वारा ज्‍यादा फिटमेंट फैक्‍टर रखने और मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाने को कह रहे हैं. इस बीच, महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट आया है।  किस आधार पर होगा डीए कैलकुलेशन         कहा जा रहा है कि जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ सकता है. जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ने की उम्‍मीद की वजह इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) है. डीए का कैलकुलेशन इसी इंडेक्स के आधार पर किया जाता है. यह इंडेक्स इस साल मार्च में 149.1 था, जो अप्रैल में बढ़कर 149.9 हो गया।  रिटेल महंगाई में इजाफा इंडस्‍ट्रियल वर्कर्स के लिए रिटेल महंगाई दर भी बढ़ा है. यह 4.27 से बढ़कर 4.46 फीसदी हो गया है. अप्रैल 2026 तक उपलब्ध  AICPI-IW डेटा के आधार पर 12 महीने का एवरेज 147.51 है।  3 फीसदी बढ़ सकता है डीए  ऐसे में 2016 की बेस सीरीज को 2001 के बेस में कनवर्ट करने के लिए 2.88 लिंकिंग फैक्टर का यूज करते हैं तो डीए कैलकुलेशन के बाद करीब 62.51 फीसदी हो जाएगा. इसी कारण डीए में 3 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद की जा रही है।  जुलाई की सैलरी में हो सकती है बढ़ोतरी  साल में दो बार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी की जाती है. सरकार ने जनवरी के महंगाई भत्ता को बढ़ा दिया है और अब जुलाई में होने वाले डीए में बढ़ोतरी की उम्‍मीद की जा रही है. अगर जुलाई से ही इसमें बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई महीने की सैलरी के साथ ही बढ़े हुए महंगाई भत्ता भी भेजा जा सकता है।  अभी 60 फीसदी महंगाई भत्ता अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी का महंगाई भत्ता 60 फीसदी है. ऐसे में अगर सरकार जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला करती है तो यह बढ़कर 63 फीसदी तक पहुंच सकता है।  केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब … Read more