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सिंहस्थ 2028 में तकनीक बनेगी सुरक्षा कवच, AI आधारित मौसम अलर्ट और स्मार्ट सिक्योरिटी पर जोर

उज्जैन  सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2028 की तैयारियां जोरो पर हैं. वर्ष 2016 सिंहस्थ के दौरान आए भीषण आंधी तूफान और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र से सांसद अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई है. सांसद अनिल फ़िरोजिया ने चर्चा में कहा, ''मैंने मौसम विभाग दिल्ली मुख्यालय को एक लेटर लिखा है।  2016 में आई थी प्राकृतिक आपदा अनिल फिरोजिया ने लिखा, ''सभी के संज्ञान में है कि, पिछली बार सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2016 के दौरान उज्जैन में प्राकृतिक आपदा आई थी और कई टिन शेड, पेड़ धराशाई हो गए थे. लोग घायल भी हुए थे, जिससे प्रशासन और श्रद्धालु दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी. आने वाला समय 2028 में सिंहस्थ का है, और हम चाहते हैं कि उस वक़्त ऐसी परिस्थितियां नहीं बने।  अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था की उठाई मांग सांसद ने कहा, ''सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए विभाग को पत्र लिखते हुए संज्ञान में लाया कि, उज्जैन में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान उपकरण की अभी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. आधुनिक यंत्र लगाए जाएं ताकि पूर्वानुमान लग जाए मौसम की क्या स्थिति रहेगी. जिससे प्रशासन पहले से सतर्क हो जाए और उससे निपटने की तैयारी कर सके. देश विदेश से आने वाले लाखों करोड़ों दर्शनार्थियों को सुरक्षित किया जा सके. वर्ष 2028 में दर्शनार्थियों की संख्या पिछली बार से 3 गुना अधिक होने की संभावना है. ऐसे में मौसम संबंधी सटीक और समय पर पूर्वानुमान उपलब्ध होना बेहद आवश्यक है।  सिंहस्थ 2016 बनाम 2028 मौसम प्रबंधन और व्यवस्थाओं में क्या होगा अंतर मौसम विशेषज्ञ बताते हैं, यदि केंद्र और राज्य समय पर स्वीकृति देता है तो वर्ष 2028 तक उज्जैन में कई तरह से व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।  पहला रियल टाइम वेदर स्टेशन– सिंहस्थ क्षेत्र में कई स्वचलित मौसम केंद्र लगाए जाते हैं, जो हर कुछ मिनट में हवा की गति, तापमान, नमी और वर्षा की जानकारी दें।  दूसरा डॉप्लर रडार कवरेज– इंदौर उज्जैन क्षेत्र के लिए उन्नत रडार कवरेज मिलने पर 30 मिनट से 3 घण्टे तक आंधी और तूफान की चेतावनी संभव हो सकेगी।  तीसरा AI आधारित पूर्वानुमान- वर्ष 2028 तक AI आधारित मौसम पूर्वानुमान से स्थानीय स्तर पर बेहतर सटीक चेतावनियां जारी की जा सकती हैं।  चौथा श्रद्धालुओं के लिए अलर्ट सिस्टम- मोबाइल संदेश, एलईडी स्क्रीन, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से तत्काल चेतावनी, पांचवा मजबूत अस्थाई ढांचे 2016 के अनुभव के बाद टेंट, शेड, विद्युत पोल और घाट क्षेत्र की संरचनाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। 

चौंकाने वाला खुलासा! हेलमेट-सीटबेल्ट की अनदेखी बनी हजारों मौतों की वजह, रिपोर्ट में बड़ा दावा

 नई दिल्ली  केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट से 2024 में हजारों जानें बचाई जा सकती थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में सड़क हादसों में मारे गए लोगों में से 40 हजार से अधिक जिंदगियों को केवल स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट के इस्तेमाल से बचाया जा सकता था। साल 2024 में सड़क हादसों में मारे गए 81,780 टू-व्हीलर सवारों में से 40% से ज्यादा अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनकर बच सकते थे, जबकि सीटबेल्ट कार में सवार लोगों की 21,988 मौतों में से लगभग आधी मौतों को रोक सकती थी। यानी दोपहिया वाहनों पर जान गंवाने वाले 40% से ज्यादा लोग और कार हादसों में मारे गए करीब आधे लोग सुरक्षा उपकरणों के अभाव का शिकार हुए। बाइक सवारों के मरने की संभावना सबसे अधिक संयुक्त राष्ट्र (UN) की मोटरसाइकिल हेलमेट स्टडी के अनुसार, कार चालकों की तुलना में मोटरसाइकिल सवारों के सड़क हादसों में मरने की संभावना 26 गुना ज्यादा होती है, और अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनने से उनके बचने की संभावना 42% बढ़ जाती है और बाइक सवारों को होने वाली 69% चोटों से बचा जा सकता है।" इसी तरह, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि सीटबेल्ट उन हादसों में मौत को रोकने में लगभग 50% असरदार हैं, जिनमें सीटबेल्ट न होने पर ड्राइवर या यात्री की मौत हो सकती थी। किन-किन राज्यों में हुईं सबसे अधिक मौतें? राज्य पुलिस विभागों से मिले डेटा पर आधारित सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट से पता चलता है कि हेलमेट न पहनने के कारण तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 7,744 मौतें हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र (5,946) और मध्य प्रदेश (5,543) का नंबर आता है। सीटबेल्ट न पहनने के कारण हुई मौतों के मामले में, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,816 मौतें हुईं, इसके बाद मध्य प्रदेश (1,929) और महाराष्ट्र (1,427) का स्थान रहा। हालांकि. सेफ्टी गियर न पहनना और तेज रफ्तार या गलत साइड से गाड़ी चलाने जैसे जानलेवा हादसों के अन्य कारण सड़क इस्तेमाल करने वालों के व्यवहार से जुड़े हैं, लेकिन सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट यह भी बताती है कि सड़क बनाने और देखरेख करने वाली एजेंसियों की बढ़ती लापरवाही ने भी कुल मौतों की संख्या बढ़ाई है। उदाहरण के लिए, 2024 में गड्ढों के कारण होने वाली मौतें बढ़कर 2,384 हो गईं, जो 2023 की तुलना में 10.4% ज़्यादा हैं, और निर्माणाधीन साइटों पर मौतों की संख्या 5,389 रही, जो पिछले साल की तुलना में 19.4% ज़्यादा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024 में भारतीय सड़कों पर मारे गए लोगों में से लगभग 67% टू-व्हीलर सवार या पैदल चलने वाले थे। सड़क हादसों में कुल 1.28 लाख दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की जान चली गई। टक्कर रोकने वाली तकनीक के लिए रेडियो स्पेक्ट्रम लाइसेंस-मुक्त केंद्र सरकार ने सड़क हादसों को रोकने और वाहन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऑटोमोटिव रडार और 'व्हीकल-टू-एवरीथिंग' (V2X) कम्युनिकेशन में इस्तेमाल होने वाले रेडियो स्पेक्ट्रम को पूरी तरह लाइसेंस-मुक्त (Delicensed) कर दिया है। इस कदम से देश में उन्नत सड़क सुरक्षा तकनीकों और टक्कर रोधी प्रणालियों को बड़े पैमाने पर लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने जारी की अधिसूचना इस संबंध में दूरसंचार विभाग (DoT) ने दो महत्वपूर्ण अधिसूचनाएं जारी की है- 77-81 GHz बैंड- इसे ऑटोमोटिव रडार सिस्टम के लिए लाइसेंस-मुक्त किया गया है। 5.9 GHz बैंड- इसे V2X कम्युनिकेशन के लिए मुक्त किया गया है। V2X (Vehicle-to-Everything) एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसकी मदद से गाड़ियां न सिर्फ आपस में संपर्क साध सकती हैं, बल्कि सड़क के किनारे मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैफिक सिग्नल और स्मार्ट पोल्स) के साथ भी डिजिटल संवाद कर सकती हैं। इससे ड्राइवर को संभावित दुर्घटनाओं, ट्रैफिक जाम और सड़क की स्थिति की जानकारी पहले ही मिल जाएगी, जिससे सड़क हादसों में भारी कमी आने की उम्मीद है।  

इंदौर मेट्रो का विस्तार: 21 जून से नए कॉरिडोर पर शुरू होगा संचालन, जल्द तय होगा किराया

इंदौर  इंदौर मेट्रो की येलो लाइन के दूसरे फेज के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। आगामी 20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक के नए रूट का लोकार्पण करेंगे। इसके अगले दिन, यानी 21 जून से यह ट्रैक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। वर्तमान में भोपाल स्थित मेट्रो कार्यालय में किराए, फेरों और शेड्यूल को लेकर बैठकों का दौर जारी है, जिस पर अगले तीन-चार दिनों में अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। 6 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा सीधा फायदा सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का यह नया कॉरिडोर इंदौर मेट्रो का सबसे व्यस्त और अधिक यात्री घनत्व वाला रूट बनने जा रहा है। इस रूट के शुरू होने से सीधे 4 से 6 लाख लोगों को सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।यदि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक साधनों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 8 से 10 लाख तक पहुंच सकती है। इस रूट पर कई बड़ी कंपनियों के ऑफिस इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस हैं। इसके अलावा एसईजेड, आईटी पार्क, एयरपोर्ट, शैक्षणिक संस्थान, होटल और कई कॉर्पोरेट कार्यालय भी इसी कॉरिडोर के आसपास हैं। केवल टीसीएस और इंफोसिस के कैंपस ही हजारों कर्मचारियों की क्षमता रखते हैं। एक्सपर्ट के अनुमान के अनुसार, मेट्रो संचालन के शुरुआती चरण में इस कॉरिडोर पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्री सफर कर सकते हैं, वहीं सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्रों के विकसित होने के बाद यह संख्या 60 हजार से लेकर एक लाख यात्रियों रोज तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का मेट्रो रूट इंदौर के आईटी हब, एयरपोर्ट क्षेत्र और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर साबित होगा, जिससे लाखों लोगों को तेज, सुगम और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। भोपाल में हर रोज बैठकें लोकार्पण से पहले भोपाल के सुभाष नगर स्थित डिपो में हर रोज एमडी एस. कृष्ण चैतन्य बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने इंदौर में तीन दिन तक दौरा भी किया। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, मार्च में कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने इंदौर मेट्रो के संचालन को लेकर दौरा किया था। इसके बाद अगले ट्रैक पर मेट्रो को दौड़ाने की हरी झंडी भी दे दी थी। नियम के मुताबिक, सीएमआरएस की रिपोर्ट मिलने के 3 महीने के अंदर मेट्रो का संचालन शुरू करना होता है, वरना फिर से दौरा किया जाता है। पहले 15 जून थी तारीख, अब 20 जून फाइनल मेट्रो प्रबंधन सूत्रों की मानें तो पहले 15 जून को इंदौर में येलो लाइन के सेकंड फेज का लोर्कापण किया जाना था, लेकिन राज्यसभा चुनाव के चलते यह तारीख आगे बढ़ गई थी। अब 20 जून की तारीख फाइनल हुई है। इन कामों पर मंथन मेट्रो के सेकंड फेज के लोकार्पण से पहले मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) शेड्यूल, किराए और फेरे को लेकर मंथन कर रहा है। दरअसल, अभी मेट्रो सिर्फ 1 घंटा ही दौड़ रही है। नए शेड्यूल में गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक कुल 16 स्टेशनों की टाइमिंग, कहां-कितना किराया रहेगा और कितने फेरे लगेंगे? यह सब शामिल रहेगा। 15 जून तक पूरा शेड्यूल सामने आ सकता है। मेट्रो प्रबंधन 17 किलोमीटर पर मेट्रो चलाएगा। शुरुआती चरण में इस रूट पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्रियों के सफर करने का अनुमान है, जो भविष्य में बढ़कर एक लाख तक पहुंच सकता है। कई आवासीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा यह एलिवेटेड कॉरिडोर गांधी नगर, लवकुश, सुखलिया, विजय नगर, स्कीम-78 और रेडिसन चौराहे जैसे प्रमुख आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस, आईटी पार्क, सेज (SEZ), शैक्षणिक संस्थान और एयरपोर्ट शामिल हैं, जिससे हजारों कामकाजी पेशेवरों और छात्रों को तेज व आधुनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। भोपाल के मुकाबले इंदौर मेट्रो आगे मेट्रो विकास के मामले में इंदौर, भोपाल से आगे चल रहा है। इंदौर मेट्रो के पहले फेज का संचालन 31 मई 2025 को ही शुरू हो गया था, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर (सुभाष नगर से एम्स) का लोकार्पण 20 दिसंबर 2025 को हुआ था। भोपाल के मुकाबले इंदौर में ऐसे आगे काम इंदौर मेट्रो की येलो लाइन है। इसके पहले फेज में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक मेट्रो 31 मई 2025 को चलाई गई थी, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रॉयोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो का 20 दिसंबर-25 को लोकार्पण हुआ था। 21 दिसंबर से लोग मेट्रो में सफर करने लगे, यानी भोपाल मेट्रो से इंदौर मेट्रो 7 महीने आगे रही। अब सेकंड फेज का लोकार्पण हो रहा है, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन का सेकंड फेज साल 2028 तक पूरा होगा। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इंदौर में दोनों फेज में एलिवेटेड कॉरिडोर है, जबकि भोपाल में सेकंड फेज में करीब 3 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रूट भी है। इसलिए सेकंड फेज 2028 में पूरा होगा। इंदौर मेट्रो फेज-2 के यह स्टेशन सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भौंरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)। भोपाल में दो रूट पर चल रहा काम बता दें कि भोपाल में इस समय ऑरेंज लाइन का सुभाष नगर से करोंद और ब्लू लाइन का भदभदा से रत्नागिरि के बीच काम चल रहा है। ऑरेंज लाइन के ही सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो पिछले साल दिसंबर से दौड़ने लगी थी। इसके बाद बाकी कामों पर फोकस शुरू हो गया है। 30 मार्च को टीबीएम को जमीन के अंदर 24 मीटर गहराई में उतारा गया था। इसके बाद कुल 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई की जा रही है। इसमें दो स्टेशन भी बनेंगे। मेट्रो अफसरों की मानें तो अगले 2 साल में अंडरग्राउंड रूट का काम पूरा कर लिया जाएगा। हाल ही में मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अंडरग्राउंड रूट पर भी बात की थी। वहीं इंदौर मेट्रो के अब तक के काम और सेकंड फेज के लोकार्पण पर भी … Read more

Amarnath Yatra 2026: यात्रियों की हर पल की लोकेशन पर रहेगी नजर, भोपाल से होगा मॉनिटरिंग कंट्रोल

भोपाल अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। पिछले साल अमरनाथ यात्रा के पहले पहलगाम हमले के बाद यात्रियों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम श्राइन बोर्ड द्वारा किए जा रहे हैं। यात्रा के लिए पंजीयन कराने वाले यात्रियों को आरएफआईडी कार्ड रेडियो फिक्वेंसी पहचान पत्र यात्रा शुरू करने से पहले लेना होगा। साथ ही घोड़े, खच्चर, पालकी वालों के लिए भी इस बार श्राइन बोर्ड ने क्यूआरकोड बनाए हैं, जिससे यात्री इसे स्केन कर संबंधित की पूरी जानकारी ले सकेंगे। इस क्यूआर कोड के जरिए जत्थे की रियल टाइम लोकेशनस भी मिल सकेगी। इसी प्रकार भोपाल से जाने वाले मंडल भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम कर रहे है। इसके लिए यात्रियों का एक वाट्सऐप क्यूआरकोड बनाया जाएगा, जिससे स्केन करते ही ग्रुप से जुड़कर यात्री की जानकारी ले सकेंगे। यात्रियों के लिए कंट्रोल रूम, क्यूआर कोड तैयार करेंगे ओम शिव शक्ति सेवा मंडल के सचिव रिंकू भटेजा ने बताया कि हमारे मंडल की ओर से 15 जत्थे अलग-अलग तारीखों में रवाना होंगे। पहला जत्था 29 जून को रवाना होगा। हर जत्थे का नेतृत्व करने के लिए पांच लोगों की टीम रहेगी। भोपाल में भी एक कंट्रोल रूम मंडल का रहेगा, जहां सभी यात्रियों की जानकारी रहेगी। बालटाल, पहलगाम सहित यात्रा मार्ग से जत्थे के लोग यहां संपर्क में रहेंगे। साथ ही हर जत्थे के लिए एक वाट्सऐप क्यूआरकोड बनाया जाएगा, यह हर यात्री को दिया जाएगा। अगर यात्रा के दौरान घर परिवार के लोगों का किसी यात्री से संपर्क नहीं हो रहा है, तो परिजन सीधे क्यूआर कोड स्कैन कर ग्रुप से जुड़ जाएंगे और संबंधित यात्री के बारे में जानकारी ले सकेंगे। कई बार यात्रा के दौरान बारिश सहित अन्य कारणों से मोबाइल बंद हो जाते हैं, ऐसे में परिवार के लोग परेशान हो जाते हैं। ऐसे में ग्रुप से जुड़कर परिजन यात्री की जानकारी ले पाएंगे। ग्रुप के जिस सदस्य को जानकारी रहेगी, वह संबंधित यात्री का परिजनों से संपर्क करा पाएगा। युवाओं का ग्रुप निभाएगा भागीदारी जय बाबा अमरनाथ बर्फानी यात्रा मंडल के युवा राम मालवीय ने बताया कि इस बार अधिकांश फ्रेशर्स लोग जा रहे हैं, जो पहली बार यात्रा करेंगे। इसमें कुछ ऐसे यात्री भी रहेंगे जो पहले भी यात्रा कर चुके हैं। सभी एक दूसरे से कनेक्ट रहेंगे। जो फ्रेशर्स जा रहे है, उन्हें रोजाना योग, प्राणायाम, सैर आदि कराई जा रही है। जत्थे में मंडल की कार्यकारिणी के सदस्य भी रहेंगे। पहला जत्था 5 और दूसरा 14 जुलाई को रवाना होगा। आरएफआईडी कार्ड लेना जरूरी होगा अमरनाथ यात्रा के लिए श्राइन बोर्ड ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से पंजीकृत भक्तों को यात्रा के दौरान आरएफआईडी लेना जरूरी होगा। यह कार्ड जम्मू, पहलगाम, बालटाल सहित अन्य सेंटरों से मिलेगा। इस कार्ड में जीपीएस ट्रैकिंग की क्षमता रहेगी, जिससे तीर्थयात्रियों की आवाजाही, ट्रेक, आपात स्थिति पर उनके संपर्क, निगरानी में मदद मिलेगी। बिना कार्ड के किसी भी तीर्थयात्री को अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही स्थानीय ड्राइवर, दुकानदारों और यात्रा मार्ग में सहायक पिट्टू, खच्चर वालों को पुलिस वेरिफिकेशन करने के बाद क्यूआर कोड जारी किए जाएंगे।

केंद्र सरकार ने परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में किया अधिसूचित

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से जशपुर के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुर जिले को इस परियोजना के माध्यम से पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे क्षेत्र की जनता को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक वैभव से समृद्ध जशपुर इस रेल परियोजना के माध्यम से देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक केंद्रों से बेहतर रूप से जुड़ सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। रेल, सड़क, ऊर्जा और अन्य आधारभूत अधोसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री  साय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना जशपुर और आसपास के क्षेत्रों की प्रगति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की बेटी पर अभद्र टिप्पणी करने वालों को सीएम की कड़ी चेतावनी, मामला संज्ञान में आते ही कराई गई एफआईआर

आजमगढ़  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की बेटी पर टिप्पणी करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पिछले दिनों कुछ लोगों ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ गलत टिप्पणी की थी। जैसे ही यह मेरे संज्ञान में आया, मैंने तत्काल पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्प्णी स्वीकार नहीं होनी चाहिए। हर बेटी का सम्मान होना चाहिए। हम उन संस्कार में पले-बढ़े हैं, जहां कहा जाता है कि गांव की बेटी-बहन, सबकी बेटी-बहन। अखिलेश यादव दूसरों को उपदेश देते हैं, वह अपने चेलों-चपाटों को भी उपदेश दें कि भाषा संयमित कर लें। उनके लोग बहन-बेटियों, बुजुर्गों, दिवंगत लोगों व वरिष्ठ नेताओं के प्रति कैसी टिप्पणी करते हैं, उन्हें अपने लोगों को संस्कारित करने की आवश्यकता है। अच्छा होगा कि उन्हें समझाएं, नहीं समझा सकते तो हमारे हवाले कर दें, हम समझा देंगे।  सीएम योगी शनिवार को आजमगढ़ में 955 करोड़ से अधिक लागत की 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की मांग पर सीएम ने घोषणा की कि महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में उनकी भव्य अश्वारोही प्रतिमा लगेगी। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को पुरानी जेल को कन्वेंशन सेंटर के रूप में तैयार करने के लिए कार्ययोजना बनाने का भी निर्देश दिया।  बार-बार वोट पाने वाले भी आपके हितैषी नहीं  मुख्यमंत्री ने कहा कि आजमगढ़ का गौरवशाली इतिहास रहा है। ऋषि-मुनियों की साधना से पवित्र यह धरती साहित्यिक साधना का केंद्रबिंदु रही है। देश को स्वतंत्र कराने का जज्बा इस जनपद में रहा है। जिस जनपद में हस्तशिल्प, कारीगर, किसान, ऊर्जावान युवा हैं, वह जनपद पहचान के लिए क्यों मोहताज हुआ। यह प्रश्न/पीड़ा लेकर मैं बार-बार आजमगढ़ आता हूं। जिन्होंने हमें बांटा और विभाजित किया, वे लगातार आपका समर्थन पाते थे, लेकिन वे कभी आपके हितैषी नहीं थे। पहचान को मोहताज था आजमगढ़, आज सबका सम्मान सीएम ने कहा कि 2017 के पहले आजमगढ़ पहचान के लिए मोहताज था। तब यहां विश्वविद्यालय, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय नहीं था। एयरपोर्ट भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा था। आजमगढ़ की साड़ी और मुबारकपुर की ब्लैक पॉटरी को मंच नहीं मिल पा रहा था। अभी प्रदर्शनी में सबने अपने नई कहानी सुनाई। ब्लैक पॉटरी और साड़ी से जुड़े कारीगरों ने कहा कि जबसे यूपी में डबल इंजन की भाजपा सरकार आई,  तबसे हमारा कारोबार कई गुना बढ़ा है। हम भी पैसा कमा रहे हैं, परिवार और हमसे जुड़े लोग भी सम्मान का जीवनयापन कर रहे हैं। 2014 के पहले भ्रष्टाचार था भारत की पहचान  सीएम ने कहा कि नया भारत दुनिया को लोहा मनवा रहा है, जबकि 2014 के पहले भारत की पहचान भ्रष्टाचार के नाम पर होती थी। दुनिया में सम्मान नहीं था। लोग देश की सुरक्षा में सेंध लगाते थे, सरकार मौन रहती थी और दुश्मन आंख दिखाता था। नक्सलवाद था, गरीब की सुनवाई नहीं थी लेकिन आज पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारी पीढ़ी नए भारत का दर्शन कर रही है। महाराजा सुहेलदेव ने आक्रांताओं को नाकों चने चबवाए सीएम ने कहा कि राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। भयभीत आक्रांता भारत की धरती पर नहीं आते थे,  लेकिन जब हम जाति, क्षेत्र, भाषा व परिवारवाद के नाम पर बंटने लगे तो मोहम्मद गोरी का हमला हुआ। महाराजा पृथ्वीराज चौहान ने उस कायर आक्रांता को 17 बार परास्त किया, वह हर बार माफी मांगता था। एक बार चूक हुई तो उसने धोखे से पृथ्वीराज चौहान को बंधक बना दिया, फिर उनके साथ जो व्यवहार किया, वह सबके सामने है। विश्वविद्यालय में महाराज सुहेलदेव की लगेगी अश्वारोही प्रतिमा  सीएम ने चेताया कि हम वह गलती बार-बार करते थे, जिसका परिमार्जन महाराज सुहेलदेव ने 1000 वर्ष पहले किया था, लेकिन बाद की पीढ़ी उनसे प्रेरणा नहीं ले पाई। बहराइच में आक्रांता सालार मसूद गाजी मियां के नाम पर आयोजन होता था, लेकिन हमने कहा कि किसी विदेशी आक्रांता को सम्मान नहीं मिलना चाहिए। आयोजन महाराजा सुहेलदेव के नाम पर होना चाहिए। नया भारत गुलामी के किसी भी प्रतीक को स्वीकार नहीं करेगा। अब बहराइच में महाराजा का भव्य स्मारक बन गया है। जब आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की बात आई तो मैंने कहा कि यह जरूर बनेगा। पीएम मोदी ने कहा कि आजमगढ़ में महाराज सुहेलदेव के नाम पर विश्वविद्यालय बने तो अति उत्तम होगा। मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की मांग पर सीएम ने कहा कि विश्वविद्यालय में महाराज सुहेलदेव की भव्य अश्वारोही प्रतिमा भी लगेगी।  जितनी तेज गति, उतनी तेज प्रगति सीएम योगी ने कहा कि आजमगढ़ में आज एयरपोर्ट, पूर्वांचल एक्सप्रेस है। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज कहीं भी जाना हो फोरलेन की कनेक्टिविटी है। आज आजमगढ़ से एक घंटे में गोरखपुर, डेढ़ से दो घंटे में वाराणसी और ढाई घंटे में लखनऊ पहुंचते हैं। प्रगति का आधार गति होती है, जितनी तेज गति, उतनी तेज प्रगति। आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी व वाराणसी की साड़ी को एक जनपद-एक उत्पाद के माध्यम से मंच मिला है।  हरिहरपुर का संगीत घराना बढ़ा रहा शास्त्रीय संगीत की परंपरा मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिहरपुर का संगीत घराना शास्त्रीय संगीत की परंपरा को फिर से मंच प्रदान कर रहा है। निरहुआ जैसे कलाकार भोजपुरी की मिठास को दुनिया में पहुंचा रहे हैं। इस धरा पर वीर कुंवर सिंह ने 1857 में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे। यह साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की धरती है।  हर गलत काम के लिए बदनाम किया जाता था आजमगढ़ सीएम ने पूछा कि हर आतंकी घटना में क्यों संजरपुर का नाम आता था। हर गलत काम के लिए आजमगढ़ को क्यों बदनाम किया जाता था, क्योंकि तब सरकार नकारात्मक सोच रखती थी, स्वार्थ के लिए युवाओं का दुरुपयोग करती थी। गरीब के लिए स्वास्थ्य, आवास, शौचालय, राशन की सुविधा नहीं थी। युवाओं की नौकरी को लेकर सौदेबाजी होती थी। बेटी की सुरक्षा, पढ़ाई, शादी के लिए सरकार की कोई स्कीम नहीं थी। निराश्रित महिलाओं, बुजुर्गों व दिव्यांगजनों को महज 300 रुपये पेंशन मिलती थी। वह भी छह महीने में एक बार आती थी और उसमें आधा पैसा कमीशनखोरी में चला जाता था। आज सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर स्नातक की … Read more

विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया आह्वान

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से नवाचार व अनुसंधान को राष्ट्र निर्माण तथा जनकल्याण से जोड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विज्ञान, कृषि, चिकित्सा, उद्यम, आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। शनिवार को विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि कोई भी अनुसंधान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य आर्थिक उन्नयन, लोककल्याण और भारत को शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करना होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि विज्ञान भारती का सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन ज्ञान की पावन धरा काशी में आयोजित हो रहा है, जिसमें 1300 से अधिक प्रतिनिधि पंजीकरण करा चुके हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय महामना मदन मोहन मालवीय की साधना का परिणाम है और इसकी स्थापना का उद्देश्य काशी को उसकी प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की पहचान दिलाना था। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का समन्वय भारत को विकसित राष्ट्र बनाने तथा विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विज्ञान की प्रभावी यात्रा लगभग 400-500 वर्षों की है, जबकि भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र रहा है। 2000 वर्ष पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत थी। विदेशी आक्रमणों के कठिन दौर में भी यह 24-25 प्रतिशत बनी रही, लेकिन स्वतंत्रता के समय घटकर 1.5 से 2 प्रतिशत रह गई। भारत का किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इन्वेंटर और नवाचारी भी था। प्राकृतिक खेती, पशुपालन और भूमि की उर्वरता बनाए रखने की पारंपरिक व्यवस्थाएं उसकी वैज्ञानिक सोच का प्रमाण थीं। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य भारतीय अर्थव्यवस्था की परस्पर जुड़ी हुई व्यवस्थाएं थीं। लेकिन समय के साथ हम रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भर हो गए और अपनी मूल परंपराओं से दूर होते चले गए। विदेशी आक्रांताओं, वामपंथियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कमतर दिखाया सीएम योगी ने कहा कि भारतीय व्यापारी केवल व्यापार नहीं करता था, बल्कि देश को जोड़ने का कार्य करता था। भारतीय कारीगर भी केवल शिल्पकार नहीं बल्कि उद्यमी था, जिसने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया। आज भी आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए वही मॉडल प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयोगों ने यह सिद्ध किया था कि पौधों में भी संवेदनशीलता और चेतना होती है। यदि एक पौधा सकारात्मक और नकारात्मक व्यवहार का प्रभाव समझ सकता है तो समाज पर नकारात्मक सोच के प्रभाव का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। विदेशी आक्रांताओं, वामपंथी विचारधाराओं और भारत-विरोधी प्रवृत्तियों ने लंबे समय तक भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरव को कमतर दिखाने का प्रयास किया, जिससे समाज अपनी जड़ों से दूर होता गया। भारतीय जीवन पद्धति का हर पक्ष विज्ञान से जुड़ा हुआ मुख्यमंत्री ने अपने बचपन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड के गांव में उनकी माता छोटी-छोटी क्यारियों में सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित करती थीं। भारतीय जीवन पद्धति का हर पक्ष विज्ञान से जुड़ा हुआ है। रसोई में हल्दी और मसालों के उपयोग से लेकर दैनिक जीवन की अनेक परंपराओं तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है। कोविड महामारी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने 140 करोड़ की आबादी के बावजूद महामारी का प्रभावी मुकाबला किया। यह भारतीयों की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता और पारंपरिक जीवनशैली का परिणाम था। गांवों में मार्च से अक्टूबर तक पशुओं को खेतों में बांधने की परंपरा प्राकृतिक और गो-आधारित खेती का उत्कृष्ट उदाहरण थी। इस व्यवस्था के कमजोर होने के साथ खेती की लागत बढ़ी, भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई और कृषि संकट गहराया। एमएसएमई के कारण घटी बेरोजगारी दर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में परंपरागत उद्यमों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया गया। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के माध्यम से कारीगरों को तकनीक, डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा गया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग तीन करोड़ लोग कार्यरत हैं तथा बेरोजगारी दर तीन प्रतिशत से नीचे आ गई है। प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और अनुसंधान की संभावनाएं अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय के आयुर्वेदाचार्य जीवक का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा पूर्ण होने के बाद गुरु ने जीवक को ऐसी वनस्पति खोजने का निर्देश दिया जिसमें औषधीय गुण न हों। लंबे समय तक खोज के बाद जीवक ने बताया कि उन्हें ऐसी कोई वनस्पति नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का प्रमाण है, जिसमें प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और अनुसंधान की संभावनाएं देखी जाती हैं। विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के अनगिनत अवसर युवा वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, चिकित्सा, तकनीक, एमएसएमई, उद्यम और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के अनगिनत अवसर मौजूद हैं। उन्होंने विज्ञान भारती को सुझाव दिया कि प्रत्येक अधिवेशन के साथ नवाचार प्रदर्शनी आयोजित की जाए, अधिवेशन से पहले नवाचार प्रतियोगिताएं कराई जाएं और उत्कृष्ट शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को मंच पर सम्मानित किया जाए। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों तथा अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शोधकर्ताओं को अपने नवाचारों का प्रस्तुतीकरण करने का अवसर उपलब्ध कराया जाए। इस अवसर पर विज्ञान भारती के अखिल भारतीय पालक अधिकारी सुनील आंबेडकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शेखर सी माण्डे, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत चतुर्वेदी, आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

ज्ञान भारतम् मिशन में हो रहा है पाण्डुलिपियों का डिजिटल संरक्षण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मठ मंदिरों के साथ-साथ कई घरों में भी प्राचीन पाण्डुलिपियां सुरक्षित हैं। हमारी सांस्कृतिक स्मृतियां, ज्ञान, परम्पराएं, विज्ञान और दर्शन पाण्डुलिपियों के रूप में अभी तक विद्यमान हैं। इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस अमूल्य विरासत के संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण के लिए ज्ञान भारतम् मिशन की पहल राष्ट्रीय स्तर पर आरंभ की गई है। जिसके अंतर्गत वर्ष 1950 से पहले की पाण्डुलिपियों का डिजिटल रूप से संरक्षण किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत मंदिरों, मठों, आश्रमों, पुस्तकालयों और शैक्षणिक व शोध संस्थाओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों में ताड़पत्र, ताम्रपत्र, प्रस्तर, भोजपत्र, पोथियों आदि के रूप में विद्यमान पाण्डुलिपियों का संरक्षण होना है। प्रदेश के एतिहासिक और सांस्कृतिक व धार्मिक रूप से समृद्ध है। यहां के धार्मिक स्थलों के साथ-साथ कई परिवारों तथा व्यापारिक संस्थानों के पास भी पर्याप्त मात्रा में पाण्डुलिपियां विद्यमान हैं। भारत की ज्ञान परम्परा को सुरक्षित रखने के इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रदेशवासियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स वीसी में ज्ञान भारतम् मिशन के संबंध में यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई और अपर मुख्य सचिव संस्कृति  शिव शेखर शुक्ला उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि प्रदेश के जिलों में उपलब्ध पाण्डुलिपियों की अनुमानित संख्या 10 लाख 24 हजार 571 हैं। पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति द्वारा ज्ञान भारतम् मोबाइल एप के माध्यम से पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण और उनकी अपलोडिंग की जा रही है। इस मिशन के लिए भारत सरकार और प्रदेश के पुरातत्व विभाग द्वारा प्रत्येक जिले के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पाण्डुलिपि संरक्षण अभियान के लिए पाण्डुलिपि धारकों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें अभियान से जोड़ने के लिए जिला स्तर पर गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन गतिविधियों में शैक्षणिक संस्थानों और शोधार्थियों के भागीदारी सुनिश्चित की जाए।    

200 बेड व अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ बुजुर्गों को मिलेगा समर्पित इलाज, मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता व समयबद्ध निर्माण के दिए निर्देश

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान परिसर में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 200 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का स्थलीय निरीक्षण किया। सात मंजिला इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को युद्धस्तर पर अभियान चलाकर निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने बीएचयू प्रशासन के अधिकारियों को भी परियोजना की नियमित निगरानी करने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बुजुर्गों को समर्पित यह अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ देश का तीसरा तथा उत्तर भारत का प्रमुख जरा (वृद्धावस्था) चिकित्सा केंद्र होगा। इसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। केंद्र में बुजुर्गों के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी जेरिएट्रिक (वृद्धावस्था चिकित्सा) ओपीडी संचालित की जाएगी। इसके अलावा मेमोरी क्लीनिक, गठिया (अर्थराइटिस) क्लीनिक समेत वृद्धावस्था से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के उपचार हेतु विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस केंद्र में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, अत्याधुनिक रेडियोलॉजी एवं जांच सुविधाएं, पुनर्वास सेवाएं, डे-केयर सेंटर, आईसीयू तथा प्राइवेट वार्ड की व्यवस्था भी होगी। इसके साथ ही यह संस्थान जरा चिकित्सा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा। शैक्षणिक गतिविधियों के तहत यहां जेरिएट्रिक मेडिसिन विभाग में डॉक्टरों और नर्सों को बुजुर्गों की विशेष देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। वरिष्ठ चिकित्सकों एवं सीनियर रेजिडेंट की सीटों में वृद्धि के साथ-साथ एमडी जेरिएट्रिक मेडिसिन की स्नातकोत्तर सीटें भी बढ़ाई जाएंगी। वृद्धावस्था संबंधी रोगों पर अनुसंधान, उपचार पद्धतियों का विकास तथा बुजुर्गों के लिए विशेष चिकित्सा दिशानिर्देश तैयार करने का कार्य भी इस केंद्र में किया जाएगा। नेशनल सेंटर फॉर एजिंग के शुरू होने के बाद पूर्वांचल सहित उत्तर भारत के लाखों बुजुर्ग मरीजों को एक ही छत के नीचे आधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

स्वयं को सुरक्षित रखते हुए आग पर काबू पाने की ली ट्रेनिंग

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी तारतम्य में शनिवार शाम पुलिस मुख्यालय के भूतल पर सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों को स्वयं को सुरक्षित रखते हुए आग पर काबू पाने का प्रशिक्षण दिया गया। अग्नि नियंत्रण संबंधी प्रशिक्षण में आधुनिक उपकरणों द्वारा आग बुझाने की मॉकड्रिल भी की गई। मॉकड्रिल के दौरान तरल पदार्थों में लगी आग को पुलिस के जवानों ने अग्निशमन यंत्रों के प्रयोग से किस तरह आसानी से बुझाई जा सकती है, इसका प्रशिक्षण प्राप्त किया। सुरक्षाकर्मियों ने आग को धुएं और लपटों से बचकर बुझाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर आग बुझाने का अभ्‍यास भी किया। मॉकड्रिल में प्रमुख रूप से पुलिस मुख्यालय के सुरक्षा इंचार्ज  मुकेश सैनी, निरीक्षक विजय नागले, पुलिस फायर स्टेशन भोपाल के एसआई  शिवनारायण शर्मा व उनकी टीम उपस्थित थी। इन उपकरणों का दिया प्रशिक्षण मॉकड्रिल के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को आग बुझाने में प्रयोग किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों के संबंध में जानकारी दी गई। आग बुझाने के दौरान प्रयोग में आने वाले कलेक्टिंग ब्रिज, डिवाइडिंग ब्रिज, फायर मेन हेलमेट, फोम नोजल, अग्निशमन सिलेंडर एवं कॉर्टेज, टॉर्च, रिवॉल्विंग नोजल, यूनिवर्सल ब्रांच, न्यू लाइट(ब्रांच), ऑर्डनरी ब्रांच, एडॉफ्टर, जाली, फायर मेन एक्स, लॉक कटर, प्रॉक्सीमेटी सूट, एल्यूमिनियम सूट, कैमिकल सूट, ब्रीदिंग ऑपरेटर सेट, लाइफ जैकेट, हौज पाइप, फायर ब्लैंकेट, अग्निशमन यंत्र आदि की जानकारी दी गई। 5 तरह की होती है आग- बुझाने में बरतें सावधानी प्रशिक्षण के दौरान एसआई  शिवनारायण शर्मा ने बताया कि आग पांच तरह की होती है, जिन्हें बुझाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। उन्होंने बताया कि इन्हें ए से इ तक की श्रेणी में रखा गया है। लकड़ी-कोयला में लगी छोटी आग को ए क्लास में रखा गया है। तरल पदार्थों में लगी आग को बी क्लास, गैसों में लगी आग को सी क्लास, मेटल में लगी आग को डी क्लास और इलेक्ट्रिक आग को ई क्लास की श्रेणी में रखा गया है। इन सभी आग को पानी या कैमिकल की मदद से बुझाया जाता है। अग्नि दुर्घटना होने पर यह करें         फायर ब्रिगेड, पुलिस कंट्रोल रूम, पुलिस थाना, विद्युत विभाग एवं चिकित्सालय को सूचना दें।         फायर फायटिंग दल फायर एक्सटिंग्यूशर अथवा पानी या रेत से अग्नि को प्रारंभिक स्थिति में बुझाएं। भवन के विद्युत प्रवाह को मेन स्विच से तत्काल कट-ऑफ करें।         फायर अलार्म दल सभी को अग्नि दुर्घटना की चेतावनी अलार्म बजाकर दें।         बचाव दल (इवेक्युएशन टीम) बिल्डिंग के व्यक्तियों को पूर्व निर्धारित योजना अनुसार सुरक्षित रास्तों से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाएं।         भगदड़ नहीं करें।         लिफ्ट का प्रयोग कतई न करें।         संपत्ति बचाव दल महत्वपूर्ण व मूल्यवान सम्पत्ति को बाहर निकालें।         अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों जैसे-पैट्रोल, कैरोसिन, प्लास्टिक, आदि को अग्नि दुर्घटना स्थल से दूर करें। इन नंबरों पर करें सूचित आग की सूचना देने के लिए भोपाल में एमपीईबी के हेल्पलाइन नंबर 0755-2678251, 0755-2678369 पुलिस का हेल्पलाइन नंबर 0755-2555922, पुलिस फायर स्टेशन का हेल्पलाइन नंबर 0755-2441008 और नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 0755-2542222 पर कॉल कर किया जा सकता है।