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रेल यात्रियों को बड़ी राहत: वेटिंग टिकट होने पर भी सफर के दौरान मिल सकेगी कन्फर्म सीट

नई दिल्ली ट्रेन में वेटिंग टिकट लेकर सफर करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे की ओर से एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत अब यात्री चलती ट्रेन में भी अपने लिए कंफर्म बर्थ बुक करा सकेंगे। बता दें कि अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना हो चुकी है, अगर ट्रेन के भीतर कोई सीट खाली है, तो यात्री उसे सफर के दौरान ही तुरंत बुक कर सकेंगे। रेलवे का यह नया नियम आने वाले दिनों में वेटिंग और आरएसी (RAC) के झंझट से जूझने वाले यात्रियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं साबित होने वाला है। CRIS अपग्रेड कर रहा है टीटीई का हैंड हेल्ड टर्मिनल दरअसल, भारतीय रेलवे आने वाले दिनों में टिकट बुकिंग से आरएसी (RAC) की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की एक बहुत बड़ी तैयारी कर रहा है। इसके लिए रेलवे का टेक्निकल विंग यानी रेल सूचना प्रणाली केंद्र टीटीई को दिए गए हैंड हेल्ड टर्मिनल सॉफ्टवेयर को नए फीचर्स के साथ अपग्रेड कर रहा है। इस अपग्रेडेशन के तहत टीटीई के इस डिवाइस में 'कंफर्म बर्थ बुकिंग' का एक नया और सीधा ऑप्शन जोड़ने की तैयारी चल रही है। इस नई और हाईटेक व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए रेलवे प्रशासन ने अपने वाणिज्य विभाग के आला अधिकारियों और कई टीटीई को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दे दिया है, ताकि जमीन पर काम शुरू करने में कोई दिक्कत न आए। यात्री के न आने पर तुरंत वेबसाइट पर दिखने लगेगी सीट इस पूरी व्यवस्था को समझाते हुए एक सीनियर टीटीई ने बताया कि मान लीजिए अगर सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस में कंफर्म टिकट होने के बावजूद कोई यात्री अपनी सीट पर नहीं आता है, तो टीटीई चेकिंग के दौरान उस बर्थ को अपने एचएचटी डिवाइस में तुरंत खाली दिखाएगा। टीटीई द्वारा यह जानकारी भरते ही वह बर्थ सीधे रेलवे के बुकिंग पोर्टल और आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर लाइव दिखने लगेगी। इसके बाद अगर कोई अन्य यात्री बेतिया, नरकटियागंज या रास्ते के किसी भी अन्य स्टेशन से सप्तक्रांति में सीट बुक कराना चाहता है, तो वह आसानी से ऑनलाइन बुकिंग कर सकता है। फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में ऐसी खाली सीटों को टीटीई केवल ट्रेन के भीतर ही बुक कर पाते हैं और ये वेबसाइट पर नहीं दिखती हैं, लेकिन इस नए बदलाव के बाद पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी।

मध्यप्रदेश पुलिस ने ढाई साल के कार्यकाल में हासिल कीं कई ऐतिहासिक उपलब्धियां

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बनाए रखना पुलिस का पहला कर्तव्य है। पीड़ित व्यक्तियों के साथ विनम्र व्यवहार और उनके हितों की सुरक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सिंहस्थ-2028, करोड़ों श्रद्धालुओं का आस्था पर्व है। इस आयोजन में संवेदनशीलता, सक्रियता, सतर्कता और सेवा भाव से मध्यप्रदेश पुलिस, आदर्श व्यवस्था का उदाहरण देश-दुनिया में प्रस्तुत कर सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित आईजी कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका अभिवादन किया गया। कॉन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा, अपर मुख्य सचिव  संजय शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आईजी स्तर के बाद संभाग स्तर पर भी समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और वे स्वयं इन बैठकों में शामिल होंगे। साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरूकता को दी जाए सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया कि साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरूकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, नशामुक्ति, मानव तस्करी पर नियंत्रण, महिला और बच्चों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संबंध में न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा तथा सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को पुलिस विभाग की प्रमुख प्राथमिकताएं बताते हुए अधिकारियों को प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, संगठित अपराध, माफिया गतिविधियां, भूमि संबंधी अपराध, सामाजिक चुनौतियों के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी दक्षता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ कार्य करना होगा। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए संचालित किया जाए जनजागरण अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादवने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यवाहियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। मध्यप्रदेश पुलिस के अथक प्रयासों से मंडला और बालाघाट जिले नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हुए। मध्यप्रदेश की धरती से लाल सलाम को आखिरी सलाम किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश की धरती से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने सुशासन की मिसाल प्रस्तुत की है। मध्यप्रदेश, नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने वाला देश का पहला राज्य बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसी अनेकों उपलब्धियों के लिए आज प्रदेशवासी मध्यप्रदेश पुलिस और सुरक्षाबलों पर गर्व करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में संचालित नशामुक्ति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आमजन की सहभागिता से व्यापक जनजागरण अभियान संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखने के लिए जागरूकता, संवाद और सामुदायिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार हर साल भर्ती के लिए कर रही है आवश्यक प्रबंधन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार भारत सरकार के नए आपराधिक कानूनों को लागू करते हुए और सभी जरूरी संसाधन जुटाते हुए पुलिस भर्ती प्रक्रिया को जारी रख रही है। अब तक पुलिस विभाग में 22 हजार अलग-अलग पदों पर भर्ती की जा चुकी है। राज्य सरकार हर साल भर्ती करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंधन कर रही है। हमारा प्रयास है कि स्वीकृत पदों में से कोई भी पद खाली न रहे। विकास के क्रम में पुलिस अपनी पूरी क्षमता से सुशासन और प्रदेशवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कार्य करे। सिंहस्थ : 2028 के लिए प्रशिक्षण और आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय प्रबंधन की बड़ी चुनौती भी है। इसके लिये अभी से प्रशिक्षण, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, आपदा प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। इससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित वातावरण तथा आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था के प्रशिक्षण से प्रदेश में आयोजित होने वाले अन्य बड़े मेलों के प्रबंधन को भी बेहतर बनाया जा सकेगा। साम्प्रदायिक ताकतों पर नियंत्रण के लिए निरंतर सजग रहना जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार में भोजशाला से संबंधित न्यायालय के निर्णय को मध्यप्रदेश पुलिस ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर लागू कराया। भोजशाला में वसंत पंचमी के अवसर पर शांति पूर्ण स्थिति कायम रखने में भी पुलिस की अहम भूमिका रही। इसके लिए धार प्रशासन और पुलिस बल बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को निरंतर सजग रहना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश     पेट्रोलिंग के लिए छोटी और तंग गलियों में उपयुक्त व्यवस्था हो, यह सुनिश्चित किया जाए कि पेट्रोलिंग में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए।     थानों में शुचिता का माहौल बने।     वरिष्ठ अधिकारी आकस्मिक निरीक्षण सुनिश्चित करें।     वर्षाकाल से पहले नगरीय निकायों के सहयोग से खतरनाक बिल्डिंगों को चिन्हित कर आवश्यक कार्यवाही की जाए।     यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बाजार देर रात तक संचालित न हो। मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था आरंभ : डीजीपी  मकवाणा कॉन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था प्रारंभ की गई है, जिससे शासन की प्राथमिकताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पुलिस कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया प्रदेश में डायल-112 सेवा, अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण तथा नई आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न स्तरों पर बड़ी संख्या में भर्ती प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं तथा लंबित पदोन्नति संबंधी मामलों के निराकरण की दिशा में भी … Read more

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सतत प्रयासों से साकार हुआ दशकों पुराना सपना

रायपुर जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने के साथ ही जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है। लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। परियोजना के क्रियान्वयन से जशपुर जिला सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा और क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी। यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों का परिणाम है। वर्षों से क्षेत्रवासियों द्वारा उठाई जा रही रेल संपर्क की मांग अब साकार होने की दिशा में निर्णायक चरण में पहुंच गई है। रेल मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को अधिसूचित किया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही परियोजना औपचारिक रूप से प्रभावशील हो गई है। विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा वनांचल क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं से समृद्ध जशपुर जिला अब तक रेल संपर्क से वंचित था। परिवहन के लिए मुख्यतः सड़क मार्ग पर निर्भरता के कारण आम नागरिकों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई रेल लाइन के निर्माण से जिले की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा और लोगों को सुरक्षित, सुलभ तथा किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। किसानों और उद्यमियों के लिए खुलेगी नई संभावनाएं रेल संपर्क स्थापित होने से जशपुर के कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। जैविक खेती, सुगंधित धान, मक्का, दलहन, सब्जियां और बागवानी उत्पादों के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही व्यापार और लघु उद्योगों को विस्तार का नया अवसर मिलेगा। पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने वन क्षेत्रों, जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन स्थलों के लिए विशेष पहचान रखता है। रेल संपर्क स्थापित होने के बाद पर्यटकों की पहुंच अधिक आसान होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ेगी पहुंच नई रेल लाइन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंच को सुगम बनाएगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ उनकी उपलब्धता और पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा क्षेत्र रेल परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे। बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। क्षेत्रवासियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन केवल यातायात सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। दशकों की प्रतीक्षा के बाद जशपुर का रेल मानचित्र पर स्थान सुनिश्चित होना जिले के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा रेल परियोजना जशपुर के विकास को नई दिशा देने वाली आधारभूत संरचना साबित होगी, जो आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती है।

26 लाख परिवारों को आवास योजना का लाभ, बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर लगाया काम रोकने का आरोप

रायपुर  छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘डबल इंजन सरकार’ के लाभों पर जोर देते हुए मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्र-राज्य समन्वय की सराहना की। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, “मैं छत्तीसगढ़ में डबल-इंजन सरकार के दो बड़े फायदे बताऊंगा। डबल-इंजन सरकार की वजह से छत्तीसगढ़ दोगुनी रफ्तार से तरक्की कर रहा है। राज्य को केंद्र सरकार की योजनाओं का पूरा फायदा मिल रहा है। 26 लाख आवास का काम पूरा अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना को पिछली कांग्रेस सरकार ने रोक दिया था, जिससे 18 लाख गरीब लोग घर से वंचित रह गए। राज्य में हमारी सरकार के आने के बाद केंद्र सरकार के सहयोग और विशेष समर्थन से प्रधानमंत्री आवास योजना को मंजूरी मिली और इस योजना के तहत 26 लाख घरों को स्वीकृति दी गई है। पीएम मोदी को दी बधाई पीएम मोदी द्वारा देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बनाने पर अरुण साव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यभार संभालने के बाद देश में राजनीति का स्वरूप और दिशा बदल गई है। राजनीति अब प्रदर्शन-आधारित हो गई है। विकास की राजनीति शुरू हो गई है। एनडीए की बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए और मजबूत हुआ है।” कांग्रेस सरकार ने रोक दी थी योजना 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी थी। इस दौरान राज्य में पीएम आवास योजना के कार्य को गति नहीं मिली थी। डेप्युटी सीएम टीएस सिंहदेव के पास इस विभाग की जिम्मेदारी थी। पीएम आवास का काम रुकने के बाद उन्होंने विभाग से इस्तीफा दे दिया था।     छत्तीसगढ़ के डेप्युटी सीएम ने दी पीएम मोदी को बधाई     कहा- बीजेपी सरकार में 26 लाख आवास मंजूर हुए     कांग्रेस के कार्यकाल में राज्य में रोक दी थी योजना     कांग्रेस के समय टीएस सिंहदेव के पास थी जिम्मेदारी पहली कैबिनेट में हुआ कैबिनेट छत्तीसगढ़ में 2023 में बीजेपी की सरकार बनी थी। सीएम पद की शपथ लेने के बाद छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने पहले ही मीटिंग में पीएम आवास योजना के काम को मंजूरी दी थी। इसके बाद राज्य में पीएम आवास का काम शुरू हुआ। राज्य में पीएम आवास के निर्माण का काम तेजी से हो रहा है।  

Monsoon Pattern Change: जून-जुलाई में कमजोर पड़ रहा मानसून, छत्तीसगढ़ में बारिश का नया ट्रेंड सामने आया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुकमा और दंतेवाड़ा के किसान बारिश ज्यादा होने से परेशान है। जबकि जशपुर और बलरामपुर के किसान बारिश कम होने से चिंता में है। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के किसान हर साल आसमान देखकर यही सोचते हैं कि इस बार जून साथ देगा या नहीं। पिछले 40 से 50 साल के बारिश के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में मानसून अब पहले जैसा नहीं रहा। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उसकी चाल बदल रही है। बस्तर में बारिश बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि सरगुजा संभाग के कई जिलों में बारिश घट रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि खेती की शुरुआत तय करने वाला जून अब सबसे ज्यादा अनिश्चित महीना बनता जा रहा है। ये केवल मौसम की कहानी नहीं है। इसका मतलब है कि किसान कब बुआई करेगा, तालाब में कितना पानी भरेगा, शहरों को कितना पानी मिलेगा, भूजल कितना रिचार्ज होगा और गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत कितनी बढ़ेगी। यानी बदलता मानसून सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ मामला है। दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय में दिख रहा है जब छत्तीसगढ़ एक और मानसून सीजन के मुहाने पर खड़ा है। इस साल भी किसानों की नजर पहली अच्छी बारिश पर टिकी है। मौसम विभाग सामान्य मानसून की संभावना जता रहा है, लेकिन पिछले दशकों के आंकड़े बताते हैं कि अब केवल यह जानना काफी नहीं है कि कितनी बारिश होगी। असली सवाल यह है कि बारिश कब होगी और कहां होगी। पहले पूरी तस्वीर समझिए छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। राज्य की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लाखों किसान आज भी बारिश के भरोसे खेती करते हैं। प्रदेश में सिंचाई का दायरा बढ़ा जरूर है, लेकिन अब भी बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित खेती पर टिका है। यही वजह है कि मानसून यहां सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का इंजन है। बारिश अच्छी हुई तो फसल अच्छी होगी, बाजार चलेगा, गांवों में नगदी आएगी। बारिश बिगड़ी तो असर खेत से लेकर मंडी और घर की रसोई तक दिखाई देता है। पिछले कई दशकों के आंकड़ों का एनालिसिस बताता है कि राज्य में औसत बारिश भले बहुत ज्यादा नहीं बदली हो, लेकिन उसका पैटर्न बदल गया है। यही सबसे बड़ा संकेत है। बस्तर भीग रहा, सरगुजा सूख रहा एक समय था जब पूरे छत्तीसगढ़ को एक जैसी बारिश वाला राज्य माना जाता था। अब तस्वीर बदल रही है। दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग के कई जिलों में बारिश बढ़ने का रुझान दिखाई देता है। सुकमा, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे जिलों में लंबे समय के आंकड़े वर्षा बढ़ने की ओर इशारा करते हैं। सुकमा में बारिश बढ़ने का ट्रेंड राज्य में सबसे ज्यादा पाया गया है। इसके उलट सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर और जशपुर जैसे जिलों में बारिश घटने का रुझान दिखाई देता है। जशपुर में गिरावट सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। यानी एक तरफ राज्य का दक्षिणी हिस्सा ज्यादा पानी की ओर बढ़ रहा है, दूसरी तरफ उत्तरी हिस्सा कम बारिश की ओर बढ़ता दिख रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किया गया वर्षा का आकलन और लंबे समय के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 50 सालों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून के पैटर्न में बदलाव दर्ज किया गया है। यह बदलाव आने वाले सालों में जल प्रबंधन और खेती की रणनीति को पूरी तरह बदल सकता है। खेती की शुरुआत तय करने वाला जून सबसे ज्यादा अनिश्चित जून के महीने में खेत तैयार होते हैं। धान की नर्सरी डाली जाती है। बुआई की योजना बनती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यही महीना सबसे ज्यादा अनिश्चित होता जा रहा है। कुछ सालों में जून में अच्छी बारिश हुई। कुछ सालों में बारिश बहुत कम रही। यानी किसान के लिए सबसे बड़ा जोखिम सीजन की शुरुआत में ही खड़ा हो जाता है। यही वजह है कि कई बार किसान जल्दी बुआई कर देते हैं और बाद में बारिश रुक जाती है। दूसरी ओर कुछ सालों में मानसून देर से सक्रिय होता है और पूरा कृषि कैलेंडर पीछे खिसक जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में खेती की सबसे बड़ी चुनौती कुल बारिश नहीं, बल्कि जून की अनिश्चितता होगी। मानसून पीछे खिसक रहा है? आंकड़ों में एक और दिलचस्प पैटर्न दिखाई देता है। जून और जुलाई की बारिश में गिरावट के संकेत मिलते हैं, जबकि अगस्त और सितंबर में बढ़ोतरी का रुझान दिखाई देता है। सरल भाषा में समझें तो मानसून का वजन अब शुरुआती महीनों से हटकर बाद के महीनों की ओर जाता दिख रहा है। पहले किसान जून और जुलाई के भरोसे खेती शुरू करते थे। अब कई बार अगस्त और सितंबर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं। इस बदलाव का असर धान की फसल पर पड़ता है। शुरुआती समय में पर्याप्त पानी नहीं मिला तो पौध कमजोर होती है। वहीं कटाई के आसपास ज्यादा बारिश होने पर तैयार फसल को नुकसान हो सकता है। क्या कहते हैं मौसम एक्सपर्ट मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर की डायरेक्टर गायत्री वाणी के मुताबिक, मानसून के सीजन में सबसे ज्यादा बारिश जुलाई और अगस्त महीने में होती है। जून में बारिश को लेकर सबसे ज्यादा अनिश्चितता रहती है, क्योंकि यह पूरी तरह मानसून के प्रदेश में पहुंचने और उसकी प्रगति पर निर्भर करता है। सबसे ज्यादा बारिश कहां, सबसे कम कहां? छत्तीसगढ़ के अंदर भी बारिश का अंतर काफी बड़ा है। सुकमा आज भी राज्य का सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। इसके बाद बस्तर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर आते हैं।दूसरी ओर दुर्ग, बलौदाबाजार, मुंगेली, कबीरधाम और बेमेतरा अपेक्षाकृत कम बारिश वाले जिलों में शामिल हैं। ज्यादा बारिश भी हमेशा अच्छी खबर नहीं आमतौर पर माना जाता है कि जहां ज्यादा बारिश होती है वहां किसानों को फायदा होता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। यदि 4 महीने में धीरे-धीरे बारिश हो तो खेती को फायदा मिलता है। लेकिन यदि कुछ दिनों में बहुत ज्यादा पानी गिर जाए तो उसका बड़ा हिस्सा बह जाता है। इससे खेतों में कटाव बढ़ता है। छोटी नदियां और नाले उफान पर आ जाते हैं। गांवों का संपर्क टूटता है। फसलें जलभराव से प्रभावित होती हैं। यानी समस्या सिर्फ कम … Read more

बेहतर नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समान नागरिक संहिता के संबंध में नीति निर्माण जनसामान्य के सुझावों के आधार पर किया जाएगा। बेहतर नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक है। प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या सुझाव आमंत्रित करने के लिए सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्राम स्तर तक नागरिकों को अपना अभिमत देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। नगरीय स्तर पर स्कूल-कॉलेजों में गतिविधियां संचालित करें, सामाजिक-व्यापारिक संस्थाओं, बार कॉउंसिल आदि में चर्चा के सत्र आयोजित कर जनसामान्य से अपनी राय प्रकट करने के लिए कहा जाए। शासकीय अधिकारी-कर्मचारी भी समान नागरिक संहिता के संबंध में भी अपने सुझाव दें। ग्राम स्तर पर रोजगार सहायक, पंचायत सचिव आदि इस विषय पर चर्चा को प्रोत्साहित करें। इस संबंध में विशेष ग्राम सभा की बैठक भी आयोजित की जा सकती है। सभी जिला कलेक्टर इस गतिविधि को प्राथमिकता पर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश शनिवार को समान नागरिक संहिता जागरूकता अभियान पर जिला कलेक्टर्स की वीसी में दिए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई,  अनुपम राजन और शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे। वेबसाइट पर देना है सुझाव : सरल है प्रक्रिया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में 22 जून तक सुझाव आमंत्रित हैं। इसके लिए विशेष रूप से वेबसाइट ucc.mp.gov.in का विमोचन किया गया है, जिस पर सुझाव देने की प्रक्रिया बहुत सरल है। वेबसाइट के फॉर्म में केवल नाम, लिंग, धर्म, संभाग, जिला, पता और मोबाइल नंबर अंकित करना है। कुल 12 प्रश्नों का उत्तर हाँ या ना में दिया जाना है। मोबाइल ओटीपी से सत्यापित करने से सुझाव जमा हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संबंध में जिला स्तर पर संचालित गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की। जागरूकता बढ़ाना आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समान नागरिक संहिता के उद्देश्य और प्रक्रिया की जानकारी का विस्तार करने के लिए जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई। उन्होंने स्व-सहायता समूहों, महिला मंडलों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विभिन्न व्यक्तिगत तथा पारिवारिक विधियों के अंतर्गत विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार आदि विषयों से संबंधित पृथक-पृथक प्रावधानों का समग्र परीक्षण कर विधिक संरचना विकसित करने की आवश्यकता अनुभव की जा रही है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य शासन द्वारा विषय के विधिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर समान नागरिक संहिता के संबंध में अनुशंसाओं को प्रस्तुत करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति द्वारा जिलों का भ्रमण कर लोगों को अपने सुझाव प्रेषित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल होकर एनएचएम कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एनएचएम कर्मियों के 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन दिए जाने की घोषणा की।  उन्होंने एनएचएम कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की “रीढ़ की हड्डी” बताते हुए कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।  साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण में एनएचएम कर्मियों का योगदान अतुलनीय है और सरकार उनके कार्यों का सम्मान करती है।       मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निभाई गई भूमिका को याद करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब एनएचएम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में स्वास्थ्य कर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश की, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों में, जहां सड़कें और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, स्वास्थ्य कर्मी पैदल चलकर, नदी-नाले पार कर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में संचालित “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही है और अब तक लगभग 90 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है।                 मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के साहसिक प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद का उन्मूलन हुआ है। अब वहां विकास और जनकल्याण की नई संभावनाएं खुल रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोलने से लेकर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी है और सभी के सहयोग से विकसित एवं स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।               इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि जशपुर से लेकर सुकमा तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में एनएचएम कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि “स्वस्थ बस्तर अभियान” का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कर्मचारियों के लिए की गई विभिन्न घोषणाओं और सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगें पूरी की जा चुकी हैं तथा स्थानांतरण नीति भी जारी कर दी गई है।उन्होंने कहा कि अब एनएचएम कर्मचारी भी कैशलेस उपचार योजना के दायरे में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि एनएचएम कर्मियों के लिए जीवन बीमा सुविधा लागू की गई है, जिसके तहत सामान्य मृत्यु की स्थिति में 6 लाख रुपये, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 1 करोड़ 40 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।  जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी आई है और नर्सों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के लिए विशेषीकृत 116 नए स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्थानों का चयन किया जा चुका है।                     सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा के बाद एनएचएम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने गजमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी तथा एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों से किया संवाद, बढ़ाया उत्साह

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों से किया संवाद नई शिक्षा नीति से खेल और शिक्षा को मिल रही नई दिशा 2036 ओलंपिक और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य मंत्री सारंग ने मध्यप्रदेश में खेल उन्नयन में दी जानकारी भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भोपाल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग के साथ शूटिंग अकादमी का दौरा किया और खिलाड़ियों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पहली बार कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल डिग्री आधारित शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें कौशल, खेल और नवाचार से जोड़ने का कार्य किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलों को मिला विशेष स्थान केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से खेल और शारीरिक शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। अब विद्यार्थियों को खेल और पढ़ाई में से किसी एक का चयन करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि दोनों क्षेत्रों में समान रूप से आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों और विद्यार्थियों के लिए विशेष कोर्स वर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे खेल गतिविधियों और शैक्षणिक उपलब्धियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। एपीएआर आईडी से जुड़ेंगी खिलाड़ियों की उपलब्धियां केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि एपीएआर (APAAR) आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों और खिलाड़ियों की शैक्षणिक तथा खेल संबंधी उपलब्धियों को एक मंच पर जोड़ा जाएगा। इससे उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों का समग्र रिकॉर्ड तैयार होगा, जो भविष्य में शिक्षा और करियर दोनों क्षेत्रों में लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि इंटर-स्पोर्ट्स गतिविधियों को क्रेडिट स्कोर से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि खेलों में सक्रिय भागीदारी को भी अकादमिक मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जा सके। आईआईटी सहित उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ रहा खेलों का महत्व केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी स्पोर्ट्स कोटा की व्यवस्था की गई है। यह कदम खेल प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने और खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। 2036 ओलंपिक और विकसित भारत 2047 का संकल्प केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना है। उन्होंने 2036 ओलंपिक को देश का महत्वपूर्ण लक्ष्य बताते हुए कहा कि खेलों के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने के लिए युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब भारत को विकसित राष्ट्र, आत्मनिर्भर राष्ट्र और विश्व की अग्रणी महाशक्ति के रूप में स्थापित करना हमारा सामूहिक लक्ष्य होगा। मंत्री सारंग ने दी शूटिंग अकादमी की जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान को मंत्री सारंग ने मध्यप्रदेश की खेल उपलब्धियों एवं राज्य शूटिंग अकादमी की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भोपाल स्थित शूटिंग अकादमी देश की ही नहीं बल्कि विश्वस्तरीय खेल अकादमियों में शामिल है। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खिलाड़ियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। मंत्री सारंग ने बताया कि हाल ही में ओलंपिक चयन प्रक्रिया (ट्रायल्स) का आयोजन भी इसी शूटिंग अकादमी में किया गया था, जो इसकी उत्कृष्ट अधोसंरचना और व्यवस्थाओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देखने को मिल रहे हैं। खिलाड़ियों की उपलब्धियों से कराया अवगत मंत्री सारंग ने अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्जित पदकों और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, पोषण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध करा रही है।  

दान चोरी के आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा कदम, मुख्यमंत्री योगी से निष्पक्ष जांच की गुहार

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में जो पैसा भक्त दान करते हैं, उसकी कथित तौर पर चोरी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में विवाद इतनी तेजी से फैलीं कि अब खुद राम मंदिर का ट्रस्ट मैदान में आ गया है. ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की जांच एक SIT यानी विशेष जांच दल से करवाई जाए।  राम मंदिर में श्रद्धालु जो पैसे दान करते हैं, उन्हें दान पात्रों में डाला जाता है. ये दान पात्र यानी वो बक्से या डिब्बे जिनमें भक्त पैसे डालते हैं. इन्हीं दान पात्रों से पैसे चोरी होने की बात कही जा रही है।  अब इस कथित चोरी को लेकर बाजार में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं. कोई कुछ कह रहा था, कोई कुछ. इन अफवाहों ने मामले को और उलझा दिया और लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई।  इसी वजह से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जो राम मंदिर की देखरेख करने वाला सरकारी ट्रस्ट है, उसने तय किया कि अब चुप रहना ठीक नहीं है. ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अनुरोध किया।  ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से क्या अनुरोध किया? ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से तीन बातें मांगी हैं. पहली – इस पूरे मामले की जांच एक SIT यानी से करवाई जाए. SIT एक खास जांच दल होती है जो किसी बड़े मामले की गहराई से, बिना किसी दबाव के जांच करती है।  दूसरी – यह जांच निष्पक्ष हो यानी बिना किसी की तरफदारी के हो और पूरी तरह से सच सामने आए. तीसरी – जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. ट्रस्ट ने साफ कहा कि दोषियों को बख्शा न जाए. SIT जांच की मांग क्यों? ट्रस्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है. राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला सिर्फ पैसों की चोरी नहीं है, बल्कि यह भक्तों की आस्था और भरोसे का सवाल भी है. करोड़ों लोग इस मंदिर में श्रद्धा से दान करते हैं. ऐसे में अगर उस दान की चोरी होती है और उस पर अफवाहें भी फैलती हैं, तो यह बेहद संवेदनशील मामला बन जाता है।  ट्रस्ट चाहता है कि SIT जांच से यह बात एकदम साफ हो जाए कि आखिर हुआ क्या था, कितनी चोरी हुई, कौन जिम्मेदार है और इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाने चाहिए।  मुख्यमंत्री योगी से अनुरोध क्यों? उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी का राम मंदिर से गहरा जुड़ाव है. अयोध्या और राम मंदिर उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक रही है. SIT का गठन करना राज्य सरकार के अधिकार में आता है, इसलिए ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी से यह अनुरोध किया। 

भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार! इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल रोकने की क्षमता से बढ़ी सैन्य ताकत

 नई दिल्ली भारत की सामरिक सुरक्षा और सैन्य इतिहास में 10 और 11 जून, 2026 की तारीखें सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO ने लगातार तीन ऐतिहासिक फ्लाइट-टेस्ट करके देश की 'नेक्स्ट-जेनरेशन' की रक्षा क्षमताओं का लोहा मनवाया है।  इन सफल परीक्षणों के माध्यम से भारत ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' और समुद्र में मध्यम दूरी की एंटी-शिप मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है. इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई देते हुए कहा कि इन परीक्षणों ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा 'एलीट' देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी हवा में नष्ट करने की तकनीक मौजूद है।  इसके साथ ही, भारत ने पहली बार अपनी स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल पहला परीक्षण किया है, जो देश की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।  क्या है मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता? मिसाइल डिफेंस की भाषा में 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' का मतलब एक ऐसे अभेद्य सुरक्षा चक्र से है, जो दुश्मन की मिसाइल को आसमान की अलग-अलग ऊंचाइयों पर ही ढूंढकर पूरी तरह नष्ट कर देता है. मान लीजिए कि किसी दुश्मन देश ने भारत पर कोई लंबी दूरी की घातक मिसाइल दागी है, तो भारत का यह नया डिफेंस सिस्टम उसे दो स्तरों पर निशाना बनाएगा…     एक्सो-एटमॉस्फेरिक: इसके तहत इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर (अंतरिक्ष की सीमा पर) ही मार गिराती है।      एंडो-एटमॉस्फेरिक: यदि कोई मिसाइल पहले सुरक्षा चक्र को पार कर जाती है, तो वायुमंडल के भीतर मौजूद दूसरा इंटरसेप्टर उसे धरती पर गिरने से पहले ही हवा में उड़ा देता है।  DRDO द्वारा 10 और 11 जून को किए गए इन लगातार तीन परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों (टारगेट्स) को बेहद सटीकता के साथ एंगेज किया और उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर दिया. ये डिफेंस सिस्टम्स उभरते हुए आधुनिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए सबसे लेटेस्ट और स्वदेशी तकनीकों के आधार पर डिजाइन की गई हैं।  ICBM को रोकने वाला 'एलीट क्लब': भारत की बड़ी वैश्विक छलांग इस सफल परीक्षण के बाद भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरों को निष्क्रिय करने की तकनीक है. ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक (5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी) मार कर सकती हैं और इनकी स्पीड बहुत तेज होती है।  अब तक ऐसी मिसाइलों को रोकने और हवा में ही मार गिराने की तकनीक केवल अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल जैसी महाशक्तियों के पास ही प्रमुख रूप से मानी जाती थी. भारत ने इस परीक्षण के जरिए साबित कर दिया है कि उसका 'बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस'सुरक्षा कवच अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. यह तकनीक आने वाले समय में देश के प्रमुख महानगरों, परमाणु प्रतिष्ठानों और सामरिक ठिकानों को दुश्मन के किसी भी अचानक होने वाले मिसाइल हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।     नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण इन तीन परीक्षणों की कड़ी में भारत को एक और बड़ी कामयाबी समुद्र में मिली. DRDO ने अपनी अत्याधुनिक नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का 'मेडन फ्लाइट-टेस्ट' यानी पहला आधिकारिक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।    यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तथा हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए तैयार किया गया है. मध्यम दूरी की इस एंटी-शिप मिसाइल का मुख्य काम समुद्र में भारतीय सीमाओं की तरफ बढ़ रहे दुश्मन के बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को पलक झपकते ही नष्ट करना है. इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है।  वैज्ञानिकों और भारतीय उद्योग की साझी कूटनीतिक जीत इन बेहद जटिल और संवेदनशील परीक्षणों की कमान रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के हाथों में थी. उन्होंने खुद इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की और इसे देश की रक्षा सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़े बदलाव वाला मोड़ बताया।  इन परीक्षणों को भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, वायुसेना और नौसेना) के शीर्ष अधिकारियों ने भी अपनी आंखों से देखा और इसकी मारक क्षमता को देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी बताया।   भले ही भारत के पड़ोसी देश अपनी मिसाइल क्षमताओं का लगातार आधुनिकीकरण कर रहे हों, लेकिन DRDO के इस नेक्स्ट-जेन सुरक्षा कवच ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब किसी भी आसमानी या समुद्री खतरे को सीमा पार ही ढेर करने के लिए पूरी तरह तैयार है।