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खुशखबरी! बदल गई कीमतें, देखें आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा

नई दिल्ली भारत के इनडायरेक्ट टैक्सेशन सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव कल 22 सितंबर से लागू होने जा रहा है। यह बदलाव गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सुधार के रूप में सामने आया है। जीएसटी काउंसिल (जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर रही हैं) ने सितंबर की शुरुआत में इस सुधार को मंजूरी दी थी। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाना, उपभोग को बढ़ावा देना और दरों का तार्किकरण करना है। इससे आम आदमी को बड़ी राहत मिलने वाली है। आइए जानते हैं डिटेल में… क्या है नया बदलाव? 1. दो मुख्य स्लैब – अब जीएसटी को सरल करते हुए दो प्रमुख दरें तय की गई हैं- 5% और 18% 2. विशेष स्लैब – तथाकथित सिन वस्तुओं जैसे तंबाकू, शराब, एरेटेड ड्रिंक्स इत्यादि पर 40% जीएसटी लगेगा। कल से आपके लिए क्या हो रहा है सस्ता? रोजमर्रा की जरूरी चीजें वो घरेलू सामान जिन पर अभी 12% जीएसटी लगता है, अब 5% स्लैब में आ सकते हैं। इनमें शामिल हैं: • टूथपेस्ट, साबुन और शैम्पू • पैकेज्ड फूड जैसे बिस्किट, स्नैक्स और जूस • डेयरी उत्पाद जैसे घी और कंडेंस्ड मिल्क • साइकिल और स्टेशनरी • निश्चित कीमत तक के कपड़े और जूते 2. घरेलू उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स जिन वस्तुओं पर अभी 28% टैक्स है, उन्हें घटाकर 18% किया जा सकता है। इससे कीमतें लगभग 7–8% तक कम हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं: • एयर कंडीशनर • रेफ्रिजरेटर और डिशवॉशर • बड़े स्क्रीन वाले टेलीविजन • सीमेंट (निर्माण और हाउसिंग के लिए महत्वपूर्ण) ऑटोमोबाइल ऑटो सेक्टर को भी इस बदलाव से बड़ा फ़ायदा मिलने की उम्मीद है: • छोटे कार (1,200cc से कम इंजन वाली) पर जीएसटी 28% से घटकर 18% हो सकता है। • टू-व्हीलर (भारत की मोबिलिटी की रीढ़) भी कम स्लैब में आ सकते हैं। • बड़ी लग्जरी कार और एसयूवी पर ऊंचा टैक्स जारी रहेगा। बीमा और वित्तीय सेवाएं अभी बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी लगता है, जिससे यह महँगा हो जाता है। जीएसटी 2.0 में इन्हें कम स्लैब में लाया जा सकता है या कुछ मामलों में पूरी तरह छूट दी जा सकती है। बता दें कि बीमा सस्ता होने से मिडिल इनकम परिवारों में कवरेज बढ़ेगा, जिससे वित्तीय सुरक्षा और स्वास्थ्य/जीवन से जुड़े जोखिमों में कमी आएगी। कल से क्या होगा महंगा? जीएसटी 2.0 के बाद भी सब कुछ सस्ता नहीं होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कुछ वस्तुओं पर 40% ‘सिन टैक्स’ लागू रहेगा। • तंबाकू उत्पाद, शराब और पान मसाला • ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म • पेट्रोलियम उत्पाद अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, इसलिए ईंधन की कीमतों में कोई राहत नहीं मिलेगी। • लग्जरी सामान जैसे हीरे और कीमती रत्नों पर भी ऊंचा टैक्स जारी रहेगा।  

PM मोदी आज देंगे देश को तोहफ़ा, शाम 5 बजे करेंगे खास घोषणा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फिर एकबार देश को संबोधित करने जा रहे हैं। पीएम मोदी आज शाम पांच बजे राष्ट्र को संबोधित कर सकते हैं। कल नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। इसके बाद लोगों की जरूरत कई चीजें सस्ती हो जाएंगी। पीएम मोदी के संबोधन के विषय को लेकर जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। इस बात की संभावना है कि वह इस मौके पर वह देशवासियों के लिए कुछ बड़ी घोषणा कर सकते हैं। आपको बता दें कि इससे पहले 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से उन्होंने कहा था कि यह दिवाली लोंगों के लिए डबल गिफ्ट वाली होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले कई मौकों पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं। उन्होंने नोटबंदी और कोरोना काल में लॉकडाउन की घोषणा अपने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ के माध्यम से की थी। पीएम मोदी ने कब-कब किया है राष्ट्र को संबोधित 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए सेना की वीरता पर गर्व व्यक्त किया और देशवासियों को एकजुट रहने का आह्वान किया। 8 नवंबर 2016 को उन्होंने अचानक राष्ट्र को संबोधित कर 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने की घोषणा की। यह उनके सबसे ऐतिहासिक और चर्चित संबोधनों में से एक माना जाता है। कोरोना महामारी के दौरान कई बार राष्ट्र को संबोधित किया। 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया। बाद में ताली-थाली बजाने और दीया जलाने की अपील की, जिससे जनता को मनोबल और सामूहिक एकजुटता का संदेश मिला। वैक्सीन अभियान शुरू होने पर उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बताया। आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा 12 मई 2020 को राष्ट्र के नाम संबोधन में की गई। स्टार्टअप्स, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं को भी कई बार संबोधनों के माध्यम से जनता तक पहुंचाया।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पर नशामुक्त भारत के लिए नमो मैराथन का किया शुभारंभ

बोले, जीएसटी रिफॉर्म से नए रोज़गार का सृजन होगा और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने में मिलेगी मदद मिलेगी  गरीब को राहत देने के साथ हर उपभोक्ता को सभी सुविधाओं से आगे बढ़ाते हुए व्यापारी के कल्याण के मार्ग से भी जुड़ा है जीएसटी रिफॉर्म  लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के उपहार के रूप में हर देशवासी और प्रदेशवासी को जीएसटी रिफॉर्म का गिफ्ट दिया है। इससे जहां एक ओर जरूरी चीजें छात्रों के लिए शिक्षण सामग्री, दूध, दही, घी, पनीर, खाने की वस्तुओं में भारी छूट दी गयी है, वहीं दूसरी ओर नशे और फिजूलखर्ची पर भारी टैक्स लगाया गया है। युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए बाइक, कार, घर, घर पर लगने वाले स्टील, सीमेंट आदि पर भी छूट दी गयी है। यह घोषणा 3 सितंबर को जीएसटी काउंसिल ने की थी, जिसे 22 सितंबर से पूरे देश में लागू किया जा रहा है। वहीं विजयदशमी पर हर गांव, हर कस्बे और हर जिले में युवाओं को बुराई के प्रतीक पाप, अत्याचार, भ्रष्टाचार, अन्याय और नशे का पुतला जलाना होगा। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पर रविवार को नशामुक्त भारत के लिए नमो युवा रन का शुभारंभ करते हुए कही। नमो मैराथन कालिदास मार्ग से शुरू होकर 1090 चौराहे तक जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत माता की जय के जयकारों से युवाओं को हौसला बढ़ाया।  जीएसटी रिफॉर्म से हर व्यक्ति की खरीद की क्षमता और बाजार की ताकत बढ़ेगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म से देश और प्रदेश का हर गरीब महंगाई से मुक्त और युवा सस्ते में शिक्षण सामग्री खरीद सकेगा। वहीं हर व्यक्ति की खरीद की क्षमता बढ़ेगी, बाज़ार की ताकत बढ़ेगी, नए रोज़गार का सृजन होगा, व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी और रोज़गार के नये अवसर पर भी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह गरीब को राहत के साथ सामान्य उपभोक्ता को हर प्रकार की सुविधा से आगे बढ़ाते हुए व्यापारी के कल्याण के मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में हर प्रदेशवासी को जीएसटी रिफॉर्म से अवगत कराना होगा। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 2 अक्टूबर यानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती तक भारतीय जनता पार्टी पूरे देश भर में 'सेवा पखवाड़ा' मना रही है। इस सेवा पखवाड़ा का शुभारंभ प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य प्रदेश के धार से “स्वस्थ नारी, सशक्त समाज” थीम के साथ किया। प्रधानमंत्री का स्पष्ट मानना है कि यदि नारी स्वस्थ होगी तो परिवार सशक्त होगा, समाज सशक्त होगा और राष्ट्र भी सशक्त बनेगा। इसी सोच के आधार पर सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम पूरे देश में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इस अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने हर जनपद में रक्तदान शिविर आयोजित कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई प्रदान की। रक्तदान के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूरे देशभर में स्वच्छता अभियानों को भी गति दी। स्वास्थ्य शिविरों और स्वच्छता कार्यक्रमों के जरिए सेवा पखवाड़ा को “विकसित भारत” की संकल्पना से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। युवा शक्ति सेवा पखवाड़ा के तहत नमो मैराथन से जुड़ रही सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के अवसर पर देशवासियों से “विकसित भारत” का संकल्प लेने और पंच प्रण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि गुलामी के अंशों को समाप्त करना होगा, अपनी विरासत का सम्मान करना होगा, सेना व वर्दीधारी बलों के प्रति आदर रखना होगा, सामाजिक समता के निर्माण के लिए कार्य करना होगा और अपने नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा। यही पंच प्रण भारतवासियों को विकसित भारत की यात्रा का सारथी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इसी प्रेरणा से उत्तर प्रदेश ने 'विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश' अभियान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। अभियान को प्रदेश में युवाओं, किसानों, श्रमिकों, व्यापारियों और बुद्धिजीवियों का अपार समर्थन मिल रहा है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में योगदान देने को तैयार है। आत्मनिर्भरता को विकसित होने की कुंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर समाज स्वस्थ समाज से ही बनता है और ऐसे आयोजनों जैसे 'नमो मैराथन' से समाज को नई दिशा मिलती है।  वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री ने देश में स्वास्थ्य और युवा कल्याण से जुड़े कई अभियानों को गति दी। विश्व योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, ‘खेलो इंडिया’, ‘फिट इंडिया मूवमेंट’, ‘सांसद खेलकूद प्रतियोगिताएं’ जैसे अभियानों से युवाओं को प्रेरणा मिली। साथ ही ‘मिशन रोजगार’ के जरिए युवाओं के लिए अवसर सुनिश्चित किए गए। आज वही युवा शक्ति सेवा पखवाड़ा के तहत 'नमो मैराथन' से जुड़ रही है। युवा शक्ति आगे बढ़ती है तो राष्ट्र के लिए गौरव और यदि नशे की आेर बढ़ती है तो उसका पतन मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति अपार ऊर्जा का प्रतीक है। यदि यह सकारात्मक दिशा में बढ़ेगी तो राष्ट्र के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगी, लेकिन यदि नशे की ओर मुड़ेगी तो उसका पतन निश्चित है। ‘नमो मैराथन’ के जरिए युवाओं से नशामुक्ति का आह्वान भी किया जा रहा है। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती और 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन होंगे। इसी क्रम में नमो मैराथन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें युवा मोर्चा के कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं। इस बार संयोग से 2 अक्टूबर को ही विजयादशमी भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर बुराइयों को समाप्त कर एक सशक्त और समर्थ भारत की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रतीक होगा। उन्होंने युवाओं से अनुशासन और शालीनता के साथ कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया और कहा कि अनुशासन ही युवा की सबसे बड़ी ताकत है। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव, मेयर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ला, डॉ. नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।   

वन्यजीव संरक्षण में नई पहल: मध्य प्रदेश से 10 टाइगर की ट्रांसलोकेशन शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के 10 टाइगर उड़ीसा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भेजे जाएंगे। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के निर्देश पर मध्य प्रदेश के टाइगर की अनुवांशिकता और कुनबा बढ़ाने यह निर्णय लिया गया। मध्य प्रदेश ने उड़ीसा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ टाइगर भेजने की तैयारी तेज कर दी है। इन राज्यों के अधिकारियों को टाइगरों की सुरक्षा और प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के लिए पत्र लिखा है। बांधवगढ़, पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व से करीब 10 टाइगरों का चयन कर छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा भेजा जाएगा। इनमें नर-मादा टाइगरों की जोड़ी भी शामिल होगी, ताकि इन राज्यों में टाइगरों की संख्या बढ़ने के साथ ही जीन पूल भी सशक्त हो सके। बांधवगढ़, पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व में टाइगर की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में संख्या बढ़ने से क्षेत्र कम पढ़ रहा है, जिससे टाइगरों का टेरेटरी को लेकर संघर्ष भी बढ़ रहा हैं।  एनटीसीए के निर्देश पर हो रहा है ट्रांसलोकेशन नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। खास बात यह है कि ट्रांसलोकेशन पर आने वाला पूरा खर्च संबंधित राज्य ही वहन करेंगे। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश एक साथ इतने बड़े स्तर पर टाइगरों को बाहर भेजेगा। वर्तमान में प्रदेश में 785 टाइगर हैं, जो देश में सबसे अधिक है और यही कारण है कि यहां से अन्य राज्यों को टाइगर उपलब्ध कराना संभव हो पाया है।  चयनित टाइगरों को अत्याधुनिक वाहनों में सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में अधिकृत पशु चिकित्सक मौजूद रहेंगे और हर चरण पर निगरानी रखी जाएगी, ताकि बाघों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। एमपी में होगी अधिकारियों की ट्रेनिंग ट्रांसलोकेशन को सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश अक्टूबर 2025 में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। इसमें छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा के वन अधिकारी मध्य प्रदेश आकर टाइगरों की देखभाल, ट्रैकिंग और संरक्षण से जुड़ी बारीकियां सीखेंगे। यह ट्रेनिंग सेशन भविष्य में भी इन राज्यों को अपने बाघों के बेहतर प्रबंधन में मददगार साबित होगा।

श्रीकृष्ण-कुब्जा मंदिर में राष्ट्रपति के दर्शन, धर्मस्थल की अनोखी मान्यता बनी चर्चा का विषय

मथुरा  राष्ट्रपति के मथुरा दाैरे के दाैरान सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रहेगी। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही जगह-जगह जैमर लगाए जाएंगे। पूरे क्षेत्र की ड्रोन कैमरे से निगरानी की जाएगी। घरों की छतों पर भी पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। श्रीबांकेबिहारी और जन्मभूमि के साथ-साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 सितंबर को होलीगेट के अंतापाड़ा में स्थित श्रीकृष्ण-कुब्जा मंदिर में भी दर्शन करेंगी। उनके आगमन पर अधिकारियों ने शुक्रवार को मंदिर की व्यवस्थाएं परखीं। मंदिर के महंत आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि श्रीकृष्ण-कुब्जा मंदिर परिक्रमा मार्ग पर स्थित है, जहां भगवान कृष्ण राधा के स्थान पर कुब्जा के साथ विराजमान हैं। प्राचीन मंदिर की मान्यता है कि कुब्जा का उद्धार करने के बाद कृष्ण ने उन्हें सुंदर रूप दिया था। उनका शरीर टेढ़ा था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने उनके कुरूप को समाप्त कर सुंदर बनाया था। हालांकि वर्तमान में मंदिर खस्ता हाल में है। राष्ट्रपति के आने की सूचना के बाद शुक्रवार को डीएम चंद्रप्रकाश सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार और नगर निगम के अधिकारी मंदिर की व्यवस्थाएं देखने पहुंचे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मंदिर की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए और परिसर का सौंदर्यीकरण कराने को कहा है।  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 सितंबर को वृंदावन में श्रीबांकेबिहारी के दर्शन कर निधिवन और सुदामा कुटी जाएंगी। फिर मथुरा में कुब्ज कृष्णा मंदिर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि जाएंगी। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे से पूर्व ही वृंदावन नगरी को छावनी में तब्दील कर दिया जाएगा। प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। संभावना जताई जा रही है कि राष्ट्रपति की अगुवानी के लिए केंद्र और प्रदेश के शीर्ष स्तर के नेता भी आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति 25 सितंबर को सुबह 10 बजे वृंदावन पहुंचेंगी। अपने वृंदावन दौरे के दौरान वे श्रीबांकेबिहारी मंदिर, निधिवन, सुदामा कुटी तथा मथुरा स्थित कुब्ज कृष्णा मंदिर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन करेंगी। राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही जगह-जगह जैमर लगाए जाएंगे। पूरे क्षेत्र की ड्रोन कैमरे से निगरानी की जाएगी। घरों की छतों पर भी पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। साथ ही गोल्फ कार्ट को विशेष रूप से सजाकर राष्ट्रपति के भ्रमण हेतु तैयार किया जाएगा। राष्ट्रपति के आगमन से पूर्व ही खुफिया एजेंसियां पूरी तरह एक्टिव हो चुकी हैं। एसपीजी, एटीएस, स्थानीय पुलिस और बम डिस्पोजल यूनिट सहित तमाम एजेंसियां संयुक्त रूप से दौरे की तैयारी में जुटी हैं। राष्ट्रपति के दौरे के लिए जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तैयारियों में जुट गए हैं। रूट प्लान, यातायात नियंत्रण, आपातकालीन मेडिकल सुविधा और वीवीआईपी मूवमेंट से जुड़े हर पहलू पर मंथन किया जाएगा। एसएसपी श्लोक कुमार का कहना है कि पुलिस प्रशासन अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोडे़गा। जहां उनका आगमन है, वहां सुरक्षा का ऐसा घेरा होगा कि कोई परिंदा भी पर न मार सके। 

चौंकाने वाले आंकड़े: MP में बच्चों की दिल की बीमारी से मौतें 403% से 2250% तक बढ़ीं

भोपाल  देश के दिल कहलाने वाले मध्य प्रदेश के लोगों का दिल लगातार कमजोर होता जा रहा है। यह बात मह नहीं कह रहे हैं, बल्कि केंद्रीय महापंजीयक कार्यलय की एमसीसीडी की 2022 तक की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।  राज्य में खेल-कूद की उम्र के बच्चों और युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। जून 2025 में जारी भारत के महापंजीयक की रिपोर्ट-2022 के अनुसार, कोविड-19 के बाद दिल की बीमारियों से मौतों में अचानक वृद्धि देखी गई है। यह आंकड़ा राज्य में चिंता का विषय बन चुका है, क्योंकि पहले के मुकाबले इन मौतों की संख्या में भारी वृद्धि हो रही है कोविड से पहले वर्ष 2018 में 1 से 4 आयु वर्ग में ऐसी मौतें केवल 0.6% थीं, जो कोविड बाद 2022 में 14.1% हो गईं। इन चार वर्षों में 2250% की अविश्वसनीय वृद्धि दर्ज हुई। 5 से 14 आयु वर्ग में इन्हीं चार साल में यह आंकड़ा 3.7 से बढ़कर 18.6 हो गया, यानी 403% की वृद्धि। 15 से 24 आयु वर्ग में ऐसी मौतें 39.64% बढ़ी हैं। प्रदेश में हर तीसरी मेडिकल सर्टिफाइड मौत दिल संबंधी बीमारियों से हो रही है। संकेत है- दिल को संभालिए। कोरोना के बाद से युवा पीढ़ी में भी बढ़ी हार्ट संबंधी समस्या -डॉ.गौरव कवि भार्गव, कार्डियोलॉजिस्ट, जेएएच ग्वालियर और चंबल संभाग के मरीजों में यह देखने में आ रहा है कि युवा पीढ़ी में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। कोरोना से पहले युवाओं में हार्ट संबंधी परेशानी 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखने आती है, लेकिन कोरोना के बाद युवा पीढ़ी में इन मामलों भी तेजी से देखी जा रही है। स्थिति यह है कि अब 18 वर्ष के युवा में भी देखने में आ रही है। इसके बचाव के लिए नियमित व्यायाम करें,ध्रूम्रपान नहीं करें। सीने में दर्द और घबराहट हो तो विशेषज्ञ को दिखाएं।  मध्य प्रदेश में कोविड के बाद आयु-वर्ग के अनुसार मृत्यु दर (प्रति लाख) मेडिकल सर्टिफाइड प्रति 100 के हिसाब से प्रतिशत में आयु वर्ग 2018 2022 वृद्धि/कमी (%) 1-4 0.6 14.1 +2250% 5-14 3.7 18.6 +403% 15-24 16.9 23.6 +39.64% 25-34 32.8 28.7 -12.8% 35-44 48.2 32.2 -33.19% 45-54 56.4 38.5 -31.73% 55-64 62.3 43.3 -30.39% 65-69 66.3 48.3 -27.15% 70+ 65.7 48.6 -26.03% कुल 42 33.9 -19.28% हृदय रोगों से होने वाली मौतों का प्रतिशत (राज्य और वर्ष के अनुसार) राज्य 2008 2013 2022 मध्य प्रदेश 19.2% 24.6% 33.9% छत्तीसगढ़ 20.7% 50.7% 27.2% बिहार 34.8% 29.7% 44.9% गुजरात 21.2% – 45.2% हरियाणा 28.3% – 26.3% राजस्थान 20.6% 18.5% 24.4% पंजाब 23.9% 24.7% 40.8% देश में कुल औसत 27% 29% 47.1% मप्र में हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि  मध्यप्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में युवा पीढ़ी में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से पहले 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोग हार्ट अटैक का शिकार होते थे, लेकिन कोविड के बाद अब 18 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। रिपोर्ट से साफ हो गया है कि एमपी में कोविड के बाद दिल की बीमारी से मौतें बढ़ीं हैं। बच्चे को हार्ट अटैक आना बढ़ा है। साथ ही, युवाओं में हार्ट अटैक के केस बढ़े हैं।  जेएएच कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. गौरव कवि भार्गव ने कहा कि यह स्थिति अब चिंता का विषय बन चुकी है। युवाओं में बढ़ती दिल की समस्याओं के कारण नियमित व्यायाम, धूम्रपान से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जा रही है। हार्ट अटैक के कारण और जोखिम  हार्ट अटैक का मुख्य कारण जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं जैसे गलत आहार, मानसिक तनाव, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी हो सकती है। कोविड-19 के बाद की स्थिति में मानसिक तनाव और अनियमित जीवनशैली ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल से जुड़ी बीमारियों का पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। कई बार इसके कुछ दिनों पहले कोई संकेत नहीं मिलता और अचानक ही यह समस्या उत्पन्न हो जाती है।  दिल की बीमारियों से बचाव के उपाय नियमित व्यायाम: शारीरिक गतिविधि दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है और रक्त संचार को बेहतर बनाती है। स्वस्थ आहार: दिल को स्वस्थ रखने के लिए सही आहार जैसे फल, हरी सब्जियां, ओमेगा-3 से भरपूर आहार और कम वसा वाला आहार लेना चाहिए। धूम्रपान से बचाव: धूम्रपान दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है, इसलिए इससे बचना चाहिए। मानसिक तनाव से बचना: मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग, प्राणायाम और ध्यान जैसी गतिविधियां अपनानी चाहिए।  बच्चों और युवाओं के लिए सुझाव विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और युवाओं को अपनी जीवनशैली को सुधारने की जरूरत है। कोविड-19 ने हमें यह सिखाया है कि सही आहार और व्यायाम से हम कई बीमारियों से बच सकते हैं। बच्चों को खेलने और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इसके अलावा मानसिक तनाव को कम करने के लिए बच्चों को खेलों में हिस्सा लेने और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।  एम्स भोपाल के कार्डियोलॉजिस्ट ने क्या कहा एम्स भोपाल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह ने कहा कि 2023 से 2024 के बीच कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और चलते-चलते गिरने के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। हालांकि, अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं और अब सामान्य आयु के मरीज भी सामने आ रहे हैं। डॉ. शाह के अनुसार, हार्ट अटैक का पूर्वानुमान लगाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसके एक या दो दिन पहले कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिलते। उन्होंने बताया कि यदि किसी को सीने में दर्द महसूस हो और यह दर्द गले तथा हाथों तक फैल जाए, तो तुरंत जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी होता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हार्ट अटैक से बचाव के लिए सही जीवनशैली और पूरी नींद लेना सबसे प्रभावी तरीका है।  विभिन्न राज्यों में हृदय रोग से मृत्यु का प्रतिशत (2022) स्त्रोत- केंद्र के महापंजीयक कार्यलय की एमसीसीडी की 2022 तक की रिपोर्ट राज्य प्रतिशत (%) लक्षद्वीप 70.3 असम 62.7 आंध्र प्रदेश 60.3 तमिलनाडु 52.9 उत्तर प्रदेश … Read more

भोपाल मेट्रो सेवा शुरू: पहले 7 दिन फ्री यात्रा, फिर ₹20 से शुरू होगा किराया

भोपाल  अगला स्टेशन है…दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों। इंदौर को मेट्रो की सौगात मिलने के बाद भोपाल के यात्रियों के मन में भी कुछ इस तरह के ख्यालात आ रहे होंगे। लोग पिछले एक साल से मेट्रो ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। अब ऐसे लोगों के लिए अक्टूबर का महीना खुशखबरी लेकर आ सकता है। दरअसल, मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चरण की मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को पहले 7 दिन तक फ्री में सफर करने का मौका मिलेगा। वहीं, कुछ दिनों तक किराए में डिस्काउंट में टिकट मिलने के बाद 20 रुपये की शुरूआती कीमत में लोग यात्रा कर पाएंगे। सीएमआरएस टीम पहुंची भोपाल मेट्रो ट्रेन शुरू करने से पहले कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी। मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे खास होता है। इसकी 'ओके' रिपोर्ट मिलने के बाद कमर्शियल रन शुरू होती है। यह टीम डिपो और गाड़ी को जांचेगी। साथ ही ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल तक देखेगी। यह टीम 25 और 26 सितंबर को निरीक्षण करेगी। यह शेड्यूल आने के बाद एमपी मेट्रो के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। इस जांच के बाद एक और केंद्रीय टीम भी आएगी। फाइनल रिपोर्ट के बाद मेट्रों को दौड़ाया जा सकता है। ऐसा रहेगा मेट्रो किराया भोपाल मेट्रो के अफसरों के अनुसार शुरुआती 7 दिन तक यात्री मेट्रो में फ्री सफर कर पाएंगे। इसके बाद 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। यह छूट खत्म होते ही 20 रुपए का टिकट लेकर लोग मेट्रो का सफर कर पाएंगे। भोपाल के सभी चरण प्रारंभ होने के बाद अधिकतम किराया 80 रुपए रखने का विचार है। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। फिलहाल यह बाधा बताया जाता है कि जिस लाइन पर पहले मेट्रो चलेगी उसके एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम अधूरे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट तय किया गया है। पहला चरण ही पूरा हुआ आपको बता दें कि राजधानी भोपाल में पहले चरण के तहत ऑरेंज लाइन में एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी की लाइन बनाई गई है। इसके बाद दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक के लिए कार्य चल रहा है। इसमें करीब 2 से 3 वर्ष लगने का अनुमान है। फिलहाल भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन ट्रैक पर मेट्रो दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। आनलाइन नहीं मिलेगा टिकट भले ही दिल्ली सहित कई शहरों में टिकट प्रणाली आनलाइन हो गई है। लेकिन भोपाल में आपको मैन्युअल टिकट से यात्रा करना पड़ेगा। बता दें कि ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ का टेंडर सरकार ने निरस्त कर दिया है। इसकी वजह है तुर्किए ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन देकर मदद की थी।

मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा, नौरादेही से बांधवगढ़ तक बनेगा टाइगर कॉरिडोर

सागर  वन्यजीव संरक्षण के लिए तरह-तरह के संरक्षित वन स्थापित किए जाते हैं. जिनमें टाइगर रिजर्व, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और नेशनल पार्क जैसे संरक्षित वन क्षेत्र की स्थापना की जाती है. लेकिन वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नये आयाम के तौर पर तेजी से उभरा है. वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि वन्य प्राणियों के संतति विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें लंबे समय तक संरक्षित वन क्षेत्र में न रखा जाए. किसी भी प्राकृतिक क्षेत्र को लंबे समय तक बांधकर नहीं रखा जा सकता है. क्योंकि इससे कई तरह के नुकसान होते हैं. ऐसे में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का नया कॉन्सेप्ट सामने आया है. इसके तहत संरक्षित वन क्षेत्र को आपस में इस तरह से जोड़ा जाता है कि वन्य प्राणी एक दूसरे संरक्षित वन में आसानी से आ जा सकते हैं. मध्य प्रदेश में पिछले 2 सालों के भीतर 2 नए टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आने से वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनने की संभावना बढ़ी है. दरअसल नौरादेही, रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद 4 टाइगर रिजर्व को जोड़कर वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की संभावना है. जिसमें रातापानी, नौरादेही, पन्ना और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व शामिल हैं. संरक्षित वन क्षेत्र की समस्याएं वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बांध के रखने से उसमें रहने वाले वन्यजीवों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. साथ ही साथ वन्य जीव संरक्षण के उद्देश्य भी फलीभूत नहीं हो पाते हैं. क्योंकि लंबे समय तक एक ही तरह के माहौल और वातावरण में रहने के कारण वन्य जीवों की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है. वन्य जीवों के बीच में जेनेटिक फ्लो रुकता है, जिससे वन्य जीव की संतति विकास पर असर पड़ता है. इसके साथ ही वन्य जीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आने के साथ-साथ वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष बढ़ता है.  वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नया आयाम संरक्षित वन क्षेत्र की इन समस्याओं के चलते वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का तेजी से नाम सामने आया है. विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित वन क्षेत्र को इस तरह है आपस में जोड़ा जाए कि उनमें रहने वाले वन्य जीव एक दूसरे संरक्षित वन क्षेत्र में आसानी से विचरण कर सके. एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में जाने से जहां वन्य क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ रही संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा, वहीं वन जीवन की संतति विकास में मदद मिलने के साथ-साथ एक संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों के बीच होने वाले आपकी संघर्ष को रोकने में मदद मिलती है. जानकारों की मानें तो वाइल्ड लाइफ लाइफ कॉरिडोर से इन समस्याओं पर काबू करने में मदद मिलती है. अंतः प्रजनन अवसाद दूर करता है कॉरिडोर  कोई भी जीव लगातार निकट संबंधियों से प्रजनन करके अपनी संतति का विकास करता है तो भावी पीढ़ी पर कई तरह के दुष्परिणाम को देखने मिलते हैं. उनके जीवन जीने की क्षमता पर असर पड़ता है. उनसे जो संतति पैदा होती है, वह कमजोर होती है. इसके अलावा प्रजनन क्षमता भी गिरती है. लेकिन अगर जीव एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में विचरण करते हैं, तो अपने ही तरह के दूसरे अनुवांशिक गुणों वाले जीवों से प्रजनन करके संतति विकास करते हैं. कॉरिडोर जीन प्रवाह में करता है मदद  अनुवांशिकी में जेनेटिक फ्लो यानि जीन प्रवाह का विशेष महत्व है. कोई भी जीव जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करता है तो भले ही एक ही संतति के जीव हो लेकिन उनकी आनुवंशिकी में अंतर पाया जाता है. ऐसे में जब वन्य जीव दूसरे वन क्षेत्र में जाकर प्रजनन करते हैं, तो उनकी संतति विविधता लिए होती है और नई पीढ़ी अच्छी और तंदुरुस्त नस्ल की होती है. वन्यजीव संघर्ष पर काबू  संरक्षित वन क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आती है और वन्यजीवों के बीच में आपसी संघर्ष बढ़ता है. ऐसी स्थिति में वाइल्डलाइफ कॉरिडोर काफी मददगार साबित होता है. क्योंकि किसी संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ती है तो उन्हें दूसरे संरक्षित क्षेत्र में वहां विस्थापित किया जा सकता है. जहां उनके लिए जीवन यापन की पर्याप्त व्यवस्था हो. 'कॉरिडोर बनाने की कोशिश में लगा है वन विभाग' नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए ए अंसारी कहते हैं कि "ये वन्य जीव संरक्षण का नया आयाम है. वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से वन्यजीवों को कई तरह के फायदे हैं और उनके संरक्षण में काफी मदद मिलती है. क्योंकि किसी संरक्षित क्षेत्र को अनंत काल तक बांधकर नहीं रख सकते हैं. जब जानवर एक संरक्षित क्षेत्र से दूसरे संरक्षित क्षेत्र में आसानी से बिना बाधा के आ जा सकते हैं तो पॉपुलेशन मैनेजमेंट में आसानी होती है और जेनेटिक फ्लो में मदद मिलती है. इसके अलावा इनब्रीडिंग डिप्रेशन कम होता है. अच्छे और तंदुरुस्त नस्ल के जानवर हमें मिलते हैं. सबसे बड़ा फायदा ये है कि वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष कम होता है. यदि हमारे संरक्षित वन क्षेत्र आपस में जुड़े रहेंगे तो जानवर इधर से उधर प्राकृतिक तरीके से आ जा सकेंगे. लेकिन किसी संरक्षित वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बंद रखा जाएगा तो एक समय के बाद डिप्रेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आएगी." उन्होंने आगे कहा, "नौरादेही टाइगर रिजर्व के कारण संभावित कॉरिडोर अस्तित्व में आया है. नौरादेही के एक तरफ रातापानी, दूसरी तरफ पन्ना टाइगर रिजर्व हैं. इसके अलावा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भी कनेक्टिविटी है. वन विभाग इसको आईडेंटिफाई करने में लगा हुआ है. जब यह अस्तित्व में आ जाएगा तो वन्यजीव प्रबंधन आसान हो जाएगा."

शारदीय नवरात्रि में खास योग, रवि-अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ मां दुर्गा का भव्य आगमन

इस साल शारदीय नवरात्रि बेहद खास रहने वाली है। आमतौर पर नवरात्रि 9 दिनों की होती है, लेकिन 2025 में यह पर्व पूरे 10 दिनों तक चलेगा। यह अद्भुत संयोग करीब 9 साल बाद बन रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास बताते हैं कि इस बार नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलेगी। खास बात यह है कि इस बार तृतीया तिथि की वृद्धि हुई है, जिसकी वजह से नवरात्रि में एक अतिरिक्त दिन जुड़ गया है। किस देवी की होगी दो दिन पूजा? तृतीया तिथि दो दिन होने से इस बार मां चंद्रघंटा की पूजा लगातार 24 और 25 सितंबर को होगी। यानी भक्तों को मां के तृतीय स्वरूप की उपासना के लिए दो दिन का अवसर मिलेगा। नवरात्रि में वैसे तो नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। लेकिन इस साल भक्तों को एक अतिरिक्त दिन का सौभाग्य मिलेगा। नवरात्र में नौ दिन शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी सिद्धिदात्री नौ देवियों की पूजा हाेती हैं। 10 विधाओं में काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छित्रमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला की आराधना करते हैं। मंदिर में होगा श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन शारदीय नवरात्रों के अवसर पर श्री दुर्गा कीर्तन महिला मंडल रानियां की ओर से श्री दुर्गा कीर्तन मंदिर में श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। मंदिर कमेटी उप प्रधान संजय आहूजा ने बताया कि 22 सितंबर को कथा का प्रारंभ होगा और 30 सितंबर तक चलेगी। कथा का समय शाम 5 बजे से 7 बजे तक रहेगा। रवि, अमृत व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग संकल्प विशेष की साधना के लिए योग-संयोग का बड़ा महत्व होता है। इस बार नवरात्रि पर्व के दौरान रवि योग, अमृत सिद्धियोग, सर्वार्थ सिद्धि योग सभी रात्रि में आएंगे जो साधना उपासना की दृष्टि से विशेष माने जाते हैं। 24 व 25 सितंबर की मध्य रात में अमृत सिद्धियोग व रवि योग बनेगा। 26 और 27 सितंबर को रवि योग और 28 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि जब बढ़ते क्रम में हो तो वह शुभ मानी जाती है। इस दौरान आदि शक्ति की कृपा प्राप्त करने के लिए उपासना करनी चाहिए। मां दुर्गा का आगमन हाथी पर नवरात्रि के प्रारंभ में मां दुर्गा किस वाहन पर आती हैं, यह भी बहुत शुभ संकेत देता है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है, और मान्यता है कि जब नवरात्रि रविवार या सोमवार से शुरू होती है तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। हाथी को समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इसका मतलब है कि इस साल नवरात्रि देश और समाज में सुख-समृद्धि और उन्नति लेकर आएगी। नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त अमृत मुहूर्त : सुबह 6:19 से 7:49 बजे तक शुभ मुहूर्त : सुबह 9:14 से 10:49 बजे तक अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:55 से 12:43 बजे तक  कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसे घट स्थापना भी कहते हैं, और इसी से नवरात्रि व्रतों की शुरुआत होती है। सही समय पर की गई कलश स्थापना को मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का मुख्य साधन माना जाता है। क्यों है यह नवरात्रि खास? इस बार 9 नहीं बल्कि पूरे 10 दिन तक मां दुर्गा की पूजा होगी। खासकर मां चंद्रघंटा की उपासना दो दिन तक करने का यह अद्वितीय संयोग भक्तों को दुगुना आशीर्वाद देगा। इसके साथ ही 2 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाकर नवरात्रि का समापन होगा। शारदीय नवरात्रि तिथि     22 सितंबर, सोमवार : प्रतिपदा तिथि     23 सितंबर, मंगलवार : द्वितीय तिथि     24 सितंबर, बुधवार : तृतीया तिथि     25 सितंबर, गुरुवार : तृतीया तिथि     26 सितंबर, शुक्रवार : चतुर्थी तिथि     27 सितंबर, शनिवार : पंचमी तिथि     28 सितंबर, रविवार : षष्ठी तिथि     29 सितंबर, सोमवार : सप्तमी तिथि     30 सितंबर, मंगलवार : अष्टमी तिथि     01 अक्टूबर, बुधवार : नवमी तिथि     02 अक्टूबर, गुरुवार : दशहरा हरसिद्धि मंदिर में नवरात्रि में नहीं होगी शयन आरती देश के 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में नवरात्रि पर्व की तैयारी हो गई है। देवी आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से शुरू होगा। शक्ति पीठ हरसिद्धि मंदिर में परंपरा अनुसार नवरात्र के दौरान मंदिर में शयन आरती नहीं होती है। वहीं मंदिर के गर्भगृह में दर्शनार्थियों का प्रवेश बंद रहेगा। शहर में देवी के प्रसिद्ध मंदिर गढ़कालिका माता मंदिर, हरसिद्धि मातामंदिर व भूखी माता मंदिर में नवरात्रि में प्रतिदिन भक्तों के सहयोग से मंदिर के आंगन में लगी दीप मालिका प्रज्ज्वलित की जाएगी। 10 दिन रहेगी गरबों की धूम शारदीय नवरात्रि पर्व इस बार 10 दिन होने से शहर में गरबा पंडालों में दस दिन गरबा आयोजन होगा। शहर में कई स्थानों पर गरबा पंडाल बनाए गए हैं। कुछ बड़े मैदान में बने पंडाल पर भी नवरात्रि पर्व के दौरान गरबा का आयोजन प्रतिदिन होगा। गरबा प्रशिक्षण का दौर पिछले 15 दिनों से कई स्थानों पर चल रहा है।

मध्यप्रदेश को मिलेगा सड़क विकास का बड़ा तोहफा, 2 लाख करोड़ में सुधरेंगी 35,000 KM सड़कें

भोपाल   प्रदेश में करीब ढाई करोड़ की आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। राज्य में लगभग 35 हजार किलोमीटर सड़कें हैं। शहर की सड़कें हाइवेज से अलग हैं। उन पर यातायात का काफी दबाव होता है। इसलिए जरूरी है कि नगरीय सड़कों को बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाया जाए। नगरीय विकास विभाग अगले 5 वर्षों में 2 लाख करोड़ से सड़क विकास के काम कराएगा। यह जानकारी आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे ने  सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर आयोजित कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा, इंजीनियर्स सड़क निर्माण तकनीकों को समझें, इसलिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 600 इंजीनियर्स जुड़े सड़क निर्माण तकनीक पर आधारित कार्यशाला में प्रदेशभर की निकायों के 600 इंजीनियर्स जुड़े। इसमें आइआइटी इंदौर और रुड़की के अलावा अन्य रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने सड़क की गुणवत्ता को लेकर नई तकनीकों और सुधार पर जानकारी दी। शहर में बिछेगा नया सीवेज नेटवर्क वहीं बारिश में पूरा भोपाल शहर जल प्लावन ग्रस्त होने के बाद नगर निगम ने शहर में नया सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए 545 करोड रुपए का फंड मंजूर किया है। इससे नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जाएंगे ताकि बड़ा तालाब, छोटा तालाब, शाहपुरा झील जैसे जल स्रोत में गंदा पानी मिलने से बचाया जा सके। गुरुवार को महापौर परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर किया गया है।