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रायपुर में ट्रैफिक से राहत का रोडमैप: पाँच मुख्य सड़कों को 6 और 8 लेन तक किया जाएगा चौड़ा

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी में सिक्स लेन सिर्फ रायपुर से सिगमा तक है. बाकी राजधानी को जोड़ने वाली ज्यादातर सड़कें 4 लेन है. इसलिए राजधानी को रफ्तार देने के लिए करीब 5 सिक्स लेन और आठ लेन सड़क बनेगी, इसमें रायपुर-विशाखापट्टनम, रायपुर- लखनादौन, रायपुर – बलौदाबाजार, दुर्ग-आरंग बाइपास सिक्स लेन और सिगमा से बिलासपुर सड़क 8 लेन चौड़ी होगी. ये सड़कें न केवल यात्रियों की दूरी कम करेंगी, बल्कि समय, ईंधन और ट्रैफिक जाम से भी निजात दिलाएंगी. छत्तीसगढ़ में इन सड़कों के प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है. ये प्रोजेक्ट राज्य की परिवहन व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाएंगे. राजधानी से जुड़े होने के कारण उक्त प्रोजेक्ट पूरे होने पर यात्री सुविधा के साथ माल ढुलाई आसान होगी. सड़क विस्तार से कारोबार बढ़ेगा. रायपुर से सारंगढ़ 186 किमी लंबी फोरलेन रायपुर से सारंगढ़ तक की 186 किलोमीटर लंबी सड़क को फोरलेन किया जा रहा है. इसमें रायपुर से धनेली 0 प्वाइंट से 53.1 किमी तक प्रथम चरण में, फिर 85.6 किमी तक दूसरे चरण में और अंत में 186 किमी तक तीसरे चरण में काम किया जाएगा. एनएच ने इस सड़क के एलाइन्मेंट की जानकारी जिला प्रशासन को सौंप दी है. लगभग 35 गांवों की जमीन पर पहले लगी खरीदी-बिक्री की रोक हटा ली गई है. एनएचएआई की टीम ने भूमि अभिलेखों का मिलान भी पूरा कर लिया है. अध्ययन में यह पाया गया कि अधिकतर भूमि पहले से ही नेशनल हाईवे की है, इसलिए मात्र 10% भूमि ही अधिग्रहित की जानी है. डीपीआर लगभग तैयार है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. यह फोरलेन रायपुर से बलौदाबाजार होते हुए सारंगढ़ जाएगी. इससे न केवल ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह एक नई लाइफलाइन बनेगा. इसका निर्माण दो चरणों में होगा. पहले चरण में ग्राम धनेली (रायपुर) से और वहां से ग्राम बिनौरी तक 72 किमी बनाई जाएगी. रायपुर – लखनादौन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे रायपुर से लखनादौन (मध्यप्रदेश) तक करीब 300 किमी लंबे छह लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे की योजना पर भी काम तेजी से चल रहा है. यह सड़क बालाघाट, सिवनी, छपारा और लखनादौन होते हुए रायपुर को जोड़ेगी और करीब 12 जिलों को इससे फायदा होगा. इस परियोजना की लागत करीब 15,000 करोड़ रुपए आंकी गई है. एनएचएआई ने इसके लिए तीन संभावित रूटों का सर्वे शुरू कर दिया है. इनमें से एक रूट कान्हा और पेंच नेशनल पार्क के पास से होकर गुजरता है, जिससे पर्यावरणीय बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं. रायपुर-बिलासपुर मार्ग 8 लेन रायपुर से बिलासपुर तक नेशनल हाईवे का नए सिरे से चौड़ीकरण होगा. एनएचएआई ने इसकी चौड़ाई बढ़ाकर 8 लेन करने जा रहा है. विभाग ने डीपीआर के लिए टेंडर डाक्यूमेंट्स बनाकर दिल्ली मुख्यालय भेज दिया है. रायपुर से सिमगा तक 8 लेन और सिमगा से बिलासपुर तक सिक्स लेन सड़क बनाई जाएगी. अभी ये सड़क रायपुर से सिमगा तक 6 लेन और सिमगा से बिलासपुर तक 4 लेन है. इसी सड़क को रायपुर से बिलासपुर तक 8 लेन बनाने की योजना पर काम हो रहा है. अफसरों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष तक टेंडर जारी कर काम शुरू कर दिया जाएगा. मुंबई-कोलकाता लिंक : दुर्ग – रायपुर होते हुए आरंग तक निर्माण भारतमाला परियोजना के तहत दुर्ग से आरंग के बीच 92.5 किमी लंबे सिक्स लेन इकॉनोमिक कॉरिडोर का भी निर्माण चल रहा है. यह राजनांदगांव, दुर्ग, पाटन, अभनपुर और आरंग तहसीलों से होकर गुजरेगा. यह दुर्ग से रायपुर होते हुए नई राजधानी तक जाने के मौजूदा 70-75 किलोमीटर के सफर को घटाकर 55 किलोमीटर कर देगा. इससे 20 किलोमीटर दूरी घटेगी, बल्कि समय और ईंधन की भी बचत होगी. यह कॉरिडोर मुंबई-कोलकाता आर्थिक कॉरिडोर में शामिल होगा. यह 6 लेन प्रोजेक्ट है. इसकी अनुमानित लागत 2297 करोड़ रुपए है.

13 अक्टूबर को आत्मनिर्भर भारत थीम पर तैयार होंगे प्रोजेक्ट

भोपाल भारत विल्डाथोन-2025 के लिए मध्यप्रदेश के 4 स्कूलों को चयन स्पॉटलाइट स्कूलों के रूप में किया गया है। जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उनमें शासकीय कमला नेहरू – सांदीपनि कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीटी नगर भोपाल, शासकीय सुभाष उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर भोपाल, शासकीय सांदीपनि विद्यालय रतलाम, शासकीय सांदीपनि विद्यालय नौगांव जिला छतरपुर शामिल हैं।इस कार्यक्रम के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। इन विद्यालयों के द्वारा 13 अक्टूबर 2025 को प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:00 तक स्वदेशी, लोकल फॉरर वोकल, आत्मनिर्भर भारत और समृद्ध भारत की थीम पर प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे। इन विद्यालयों से केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान नई दिल्ली से वर्चुअली जुड़कर चर्चा करेंगे। यह स्पॉटलाइट विद्यालय प्रदेश के अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा का केंद्र होंगे तथा 13 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलने वाले कार्यक्रम के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के 15 हजार से अधिक विद्यालय इस आयोजन में सहभागिता कर रहे हैं। इन सभी विद्यालयों के द्वारा 13 से 31 अक्टूबर के मध्य चार थीमों पर प्रोजेक्ट/प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। तैयार किये गये प्रोजेक्ट को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। अपलोड किये गये प्रोजेक्ट का मूल्यांकन केन्द्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जायेगा। मूल्यांकन के बाद उन्हें पुरस्कृत किया जायेगा। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पुरस्कार के लिये चयनित विद्यालयों को एक करोड़ रूपए के पुरस्कार वितरित किये जाने का निर्णय लिया है। विकसित भारत बिल्डाथोन-2025 में देश के करीब 3 लाख स्कूल सहभागिता कर रहे हैं। प्रत्येक स्कूल में 4 शिक्षकों की टीम भी तैयार की गई है। शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर प्रोजेक्ट तैयार करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों की प्रतिभा को सामने लाना है।  

पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने कहा- पर्यटन का भविष्य साझेदारी में निहित है

राम वन पथ गमन से टाइगर कॉरिडोर तक, मध्यप्रदेश की क्षेत्रीय पहल से मध्य भारत बनेगा पर्यटन हब : एसीएस श्री शुक्ल म.प्र. ट्रेवल मार्ट के दूसरे दिन महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के अधिकारियों के बीच इन्टर स्टेट टूरिज्म कोलेबरेशन विषय पर हुई चर्चा भोपाल पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने कहा है कि पर्यटन का भविष्य साझेदारी में निहित है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पारिस्थितिक ताने-बाने से जुड़े हमारे राज्य मिलकर ऐसे संयुक्त पर्यटन परिपथ और अनुभव गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं, जो न केवल घरेलू बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्य भारत को एक नई पहचान देंगे। पर्यटन मंत्री श्री लोधी मध्यप्रदेश ट्रेवल मार्ट के दूसरे दिन फॉस्टरिंग इन्टर स्टेट टूरिज्म कोलेबरेशन विषय चर्चा कर रहे थे। मध्यप्रदेश न केवल भौगोलिक रूप से, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी भारत का केंद्र है। हमें यह समझना होगा कि अकेले आगे बढ़ने की बजाय मिलकर चलना ज्यादा प्रभावी होता है। अपर मुख्य सचिव पर्यटन व संस्कृति एव प्रबंधन संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिवशेखर शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश अब एक विविधतापूर्ण, बहुआयामी और ऑफबीट पर्यटन गंतव्य के रूप में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां विरासत, वन्यजीवन, रोमांच, संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और पाक-परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सीमा से लगे अन्य राज्य जैसे छत्तीसगढ़ से राम वन पथ गमन सर्किट, महाराष्ट्र के साथ ज्योर्तिलिंग सर्किट जैसे संयुक्त कार्यों पर काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त टाइगर कॉरिडोर, फिल्म पर्यटन और ईको टूरिज्म के साझा विकास की संभावना भी तलाशी जा सकती है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के उप संचालक श्री युवराज पड़ोले ने बताया कि मध्यप्रदेश में राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित 498 स्मारक हैं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित 290 स्मारक, स्थायी यूनेस्को विश्व धरोहर 3 स्थल, यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल 15 स्थल हैं। यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त रचनात्मक शहर की श्रेणी में संगीत के लिए – ग्वालियर, साहित्य के लिए भोपाल का चुना गया है। मांडू, ओरछा, चंदेरी, बुरहानपुर और खजुराहो जैसे ऐतिहासिक शहरों की मध्यकालीन भव्यता दर्शकों को मंत्रमुग्ध करती है। राजस्थान के साथ संयुक्त पर्यटन की संभावनाएं मध्यप्रदेश और राजस्थान को एक संयुक्त इनबाउंड पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। इसके अंतर्गत सीमा-पार पर्यटन ढांचे को मजबूत करने और सतत गंतव्य विकास को बढ़ावा देने की योजना है। हेरिटेज धरोहर परियोजना के अंतर्गत दोनों राज्यों की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को जोड़ते हुए उनका संयुक्त प्रचार-प्रसार किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के साथ सहयोग के अवसर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि दोनों राज्यों की जनजातीय संस्कृति, वन्यजीवन, धरोहर और हस्तशिल्प को उजागर करने के लिए को-ब्रांडेड अभियान शुरू किए जाएंगे। यह सहयोग न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित करेगा। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के एमडी श्री विवेक आचार्य ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य 7 राज्यों के साथ बार्डर साझा करता है। उन्होंने कहा कि इन्टरस्टेट बाडर्स में पर्यटकों को सबसे बड़ी समस्या टोल प्लाजा पर आती है। इसके समाधान के लिये राज्यों के मध्य एमओयू होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अलग-अलग राज्यों के टूरिज्म बोर्ड का व्हाटसऐप ग्रुप बनाया जाना चाहिए। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच हो टूरिज्म कॉरिडोर पुनर्स्थापित महाराष्ट्र टूरिज्म डेवलपमेंट के जनरल मैनेजर श्री चंद्रशेखर जायसवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच टूरिज्म कॉरिडोर पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच एक्सचेंज ऑफ टूरिज्म स्टडी टू और बेस्ट प्रेक्टिसेस एक्सचेंज किये जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर वाइल्ड लाइफ सर्किट बनाने पर विचार जाना चाहिए। कस्टमाइज्ड टूरिज्म पर जोर तेलंगाना प्रोजेक्ट कन्सल्टेन्ट प्राइवेट लिमिटेड के एमडी श्री श्रीनिवास बंदा ने कहा कि मध्यप्रदेश और तेलंगाना मिलकर मेडिकल टूरिज्म, वाइल्ड और रिलिजीयस टूरिज्म पर बेहतर काम कर सकते हैं। तेलंगाना सरकार में पीएमयू कसंलटेंट श्री फ्राज मलिक ने कहा कि वर्तमान में हमें कस्टमाइज्ड टूरिज्म पर विचार करना चाहिए, जिसके तहत मेडिकल, धार्मिक, वाइल्ड लाइफ आदि टूरिज्म शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हम टूरिज्म कॉलेज खोलने पर भी विचार कर सकते हैं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश स्टेट काउंसिल फिक्की के अध्यक्ष श्री प्रतीक हीरा, मध्यप्रदेश टूरिज्म कमेटी फिक्की के चेयरमेन श्री महेन्द्र प्रताप सिंह ने भी अपने विचार रखे।  

उद्योगों को भूमि आबंटन पत्र और उद्यम क्रांति योजना के युवाओं को होगा ऋण वितरण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार 13 अक्टूबर को होटल ताज फ्रंट में एमएसएमई सम्मेलन 2025 में शामिल होंगे। सम्मेलन एमएसएमई के विकास एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सम्मेलन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमएसएमई विकास नीति के अंतर्गत प्रदेश के 48 जिलों की 700 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को सिगंल क्लिक के माध्यम से ₹200 करोड़ से अधिक की अनुदान राशि अंतरित करेंगे। इसी तरह स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत प्रदेश के 80 से अधिक स्टार्टअप को ₹1 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण भी किया जाएगा। सम्मेलन दोपहर डेढ़ बजे प्रारंभ होगा। इस दौरान स्टार्टअप और निर्यात प्रोत्साहन पर दो विषयगत सत्र होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बालाघाट और टीकमगढ़ के उद्यमियों और उद्योग संघों से वर्चुअली संवाद करेंगे। उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र कुमार सिंह भी उपस्थित रहेंगे। औद्योगिक भूखंड आशय पत्र और उद्यम क्रांति ऋण वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमएसएमई विभाग के आधिपत्य के औद्योगिक क्षेत्रों में विभिन्न उद्यमों को 200 से अधिक भूखण्डों के आवंटन का आशय पत्र वितरित करेंगे। मुख्यमंत्री ₹113.78 करोड़ की लागत के 03 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों का वर्चुअली शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा सेवा पखवाड़ा अंतर्गत अभियान चलाया जाकर मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत 350 से अधिक हितग्राहियों को ऋण उपलब्ध कराया गया है। कार्यक्रम में 100 से अधिक हितग्राहियों को हितलाभ वितरण भी किया जाएगा। सम्मेलन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग एवं ओएनडीसी के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। 7.57 करोड़ रूपये की परियोजना लागत के तीन नवीन कार्यालय भवनों का शिलान्यास किया जाएगा। विभाग की एमएसएमई और स्टार्टअप गतिविधियों के अंतर्गत उद्यमियों व स्टार्टअप द्वारा अपने अनुभव भी साझा किये जाएंगे। शाम को विशेष रूप से स्वदेशी एवं स्वावलंबन पर विशेष परिचर्चा सत्र भी होगा।  

मानसून के बाद अब सर्दी ने मचाई दस्तक, जानें कब आएगी असली ठंड!

ग्वालियर मानसून ने इस बार अंचल में सात दिन पहले दस्तक दी थी। इसी तरह अब ठंड ने भी कुछ समय से पहले आ गई है। लोगों को गुलाबी सर्दी का एहसास सुबह शाम में होना शुरू हो गया है। साथ ही रात व दिन का तापमान भी कम हो रहा है। केंद्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की माने तो इस बार दिसंबर व जनवरी माह में कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है। इसकी वजह यह है कि यह ला नीना के असर की वजह से होगा। यानि इस बार कड़ाके की ठंड के लिए तैयार रहना होगा। यहां बता दें कि ला नीना प्रशांत महासागर में होने वाली समुद्री सतह के तापमान में असामान्य ठंडक की स्थिति है, जिसके कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में औसत से अधिक ठंडे पानी और तेज़ पूर्वी हवाएं होती हैं।   केंद्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने तो पूरे देश को लेकर संभावना व्यक्त है, लेकिन अंचल सर्दी व गर्मी के लिहाज से संवेदनशील है। यहां पर सर्दी के दिनों के सर्दी भी अधिक पड़ती है और गर्मी के दिनों में गर्मी भी। चूंकि उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं शहर व जिले में जल्द पहुंचती हैं और अधिक ठंडा करती हैं। ऐसे में अंचल में और अधिक कड़ाके की ठंड पड़ने का अंदेशा है। कितना कम हो जाता है तापमान अंचल में सर्दियाें में न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों में यह तापमान 0.4 और 05 तक ही गिरा है। लेकिन दिसंबर 1961 को तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था। इसलिए ला नीना इफेक्ट की वजह से अंचल में ठंड में न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड तोड़ सकता है। स्थानीय मौसम वैज्ञानिक हुकुम सिंह के मुताबिक यदि आगामी दिनों में पश्चिमी विक्षोभ जैसे सिस्टम अधिक नहीं बने तो फिर ठंड अधिक पड़ सकती है। लगातार कम हो रहा है रात का तापमान, बढ़ रही है ठंड ग्वालियर अंचल के रात के तापमान में लगातार कमी हो रही है। हालांकि तापमान धीमी गति से गिर रहा है। लेकिन इससे ठंड बढ़ रही है। तापमान में गिरावट पिछले चार दिन से हो रही है। शनिवार को न्यूनतम तापमान 18.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। हालांकि शुक्रवार की तुलना में 0.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दिन में धूप निकलने की वजह से तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिन का तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रहा। यह कल के मुकाबले 0.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। मौसम विभाग की माने वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय है। इसका प्रभाव खत्म होते ही अंचल में और तेजी से तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। यहां बता दें कि शुक्रवार को करीब बीस साल में पहली बार अक्टूबर माह में सबसे कम तापमान दर्ज किया गया था।

त्योहारों पर यात्रा मुश्किल! रेलवे ने कैंसिल की कई स्पेशल ट्रेनें

लखनऊ उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी जंक्शन पर इंजीनियरिंग कार्य के चलते 29 नवंबर से 4 जनवरी तक मेगा ब्लॉक लगाया जाएगा। इस अवधि में कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे ने छह स्पेशल ट्रेनों को रद्द करने और आठ ट्रेनों का रूट परिवर्तन करने की घोषणा की है। ये स्पेशल ट्रेनें रहेंगी रद्द 05559 रक्सौल–उधना स्पेशल – 29 नवंबर से 3 जनवरी तक 05560 उधना–रक्सौल स्पेशल – 30 नवंबर से 4 जनवरी तक 09043 बांद्रा–बढ़नी स्पेशल – 30 नवंबर से 4 जनवरी तक 09044 बढ़नी–बांद्रा स्पेशल – 1 दिसंबर से 5 जनवरी तक 07075 हैदराबाद–गोरखपुर स्पेशल – 28 नवंबर से 2 जनवरी तक 07076 गोरखपुर–हैदराबाद स्पेशल – 30 नवंबर से 4 जनवरी तक कानपुर–इटावा होकर चलेंगी ये ट्रेनें 09466 दरभंगा–अहमदाबाद स्पेशल – 1 दिसंबर से 5 जनवरी तक 09064 अहमदाबाद–दरभंगा स्पेशल – 28 नवंबर से 2 जनवरी तक 11123 ग्वालियर–बरौनी एक्सप्रेस – 25 नवंबर से 8 जनवरी तक 11124 बरौनी–ग्वालियर एक्सप्रेस – 24 नवंबर से 7 जनवरी तक 04137 ग्वालियर–बरौनी स्पेशल – 26 नवंबर से 7 जनवरी तक 04138 बरौनी–ग्वालियर स्पेशल – 24 नवंबर से 5 जनवरी तक गोंविंदपुरी–भीमसेन–ओहान–सतना होकर चलेंगी ये ट्रेनें 06529 सर एम. विश्वेश्वरैय्या टर्मिनल बेंगलुरु–गोमतीनगर स्पेशल – 24 नवंबर से 5 जनवरी तक 06530 गोमतीनगर–सर एम विश्वेश्वरैय्या टर्मिनल बेंगलुरु स्पेशल – 28 नवंबर से 2 जनवरी तक।

मुख्यमंत्री ने कहा- भगवान श्रीराम ने संबंधों को जाति, वर्ग या रूप से नहीं, हृदय की शुद्धता से जोड़ा

महर्षि वाल्मीकि की वाणी से जो रामायण निकली वह केवल ग्रंथ नहीं भारत की है आत्मा  सामाजिक समरसता ही राष्ट्र की सच्ची शक्ति सफाईकर्मियों का कल्याण हमारी जिम्मेदारी, सरकार है आपके साथ मानस भवन में मनाया गया महर्षि वाल्मीकि जयंती प्रकटोत्सव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के चरित्र 'रामायण' के रूप में मानवता को अनुपम उपहार दिया है। महार्षि वाल्मीकि की वाणी से जो रामायण निकली वह केवल ग्रंथ नहीं भारत की आत्मा है। उनकी रामायण में समरसता केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीता-जागता संदेश है। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन के माध्यम से दिखाया कि ईश्वर की दृष्टि में सब समान हैं। भगवान श्रीराम ने निषादराज को मित्र बनाया, शबरी माता के झूठे बेर प्रेम से खाए, श्री हनुमान और वानर सेना को परिवार की तरह गले लगाया और धर्म युद्ध में सबको साथ लेकर चले। मुख्यमंत्री ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का आचरण हमें सिखाता है कि सच्ची समरसता वही है, जहां सबमें परमात्मा का अंश देखा जाए। उनका जीवन इसी भावना का मूर्त रूप है। भगवान श्रीराम के चरित्र को शब्दों में पिरोने वाले आदि कवि महर्षि वाल्मीकि अजर-अमर रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती प्रकटोत्सव के अवसर पर भोपाल के मानस भवन में ‘समरसता सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्यसभा सांसद एवं पीठाधीश्वर श्री क्षेत्र वाल्मीकि धाम, उज्जैन श्री बालयोगी उमेशनाथ महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का विधिवत् शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि समाज के सतत् विकास की पहली जरूरत सामाजिक समरसता है, जो साहचर्य और भाईचारे की भावना से जन्म लेती है। समरसता केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। जब समाज आपसी सौहार्द, प्रेम और अपनत्व की भावना से मिल-जुलकर चलता है, तभी कोई राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सच्ची समरसता वहीं है, जहां सबमें परमात्मा का अंश देखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति को अनादिकाल से अविरल करने में महर्षि वाल्मीकि जी के योगदान को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने रामायण जैसी अमर कृति के माध्यम से न केवल मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का चित्रण किया, बल्कि उस समय की सामाजिक व्यवस्था और मानवीय मूल्यों को भी प्रतिबिंबित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम का उलटा नाम निरंतर जपते-जपते वाल्मीकि महर्षि हो गए। डाकू रत्नाकर से ज्ञानी वाल्मीकि बनने तक की उनकी संघर्ष यात्रा तपस्या और आत्मसुधार की मिसाल है। महर्षि वाल्मीकि ने केवल श्रीराम का चरित्र नहीं लिखा, बल्कि उन्होंने मानवता का लेखन किया। रामायण सिर्फ एक ग्रंथ नहीं, सेवा, समरसता और करुणा का उत्तम उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने पिता-पुत्र संबंधों से लेकर अनुसूईया माता, शबरी माता, निषादराज, हनुमान, बाली-सुग्रीव जैसे चरित्रों के माध्यम से समाज में करुणा, निष्ठा, सेवा, सामाजिक समरसता, समानता और आत्मीयता का संदेश मंत्र दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि और उनकी रामायण आज एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। रामायण ने न केवल राम कथा को अमर किया, बल्कि भारतीय संस्कृति के आदर्शों को भी अमरत्व प्रदान किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता भारतीयों के लिए कोई बाध्यता नहीं, बल्कि यह हमारी आत्मा में, हमारे संस्कारों में और हमारे जीवनधारा में रक्त की तरह प्रवाहित होती है। उन्होंने कहा कि हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा, हमारे साधु-संतों, ऋषि-मुनियों, महर्षि-मनीषियों ने यही सिखाया है। यही वाक्य समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वाल्मीकि समाजजनों ने सभी सफाईकर्मियों को नियमित करने सहित समाज विकास से जुड़ी अन्य मांगें प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी सफाईकर्मियों और स्वच्छता मित्रों का समग्र कल्याण हमारी जिम्मेदारी है। हमारा प्रयास है कि वाल्मीकि समाज के बच्चे पढ़-लिखकर उद्योगपति, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और बड़े अधिकारी बनें। सरकार इन्हें हर जरूरी प्रोत्साहन देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर घड़ी आपके साथ है, वाल्मीकि समाज के विकास और कल्याण में हम कोई कमी नहीं रखेंगे। राज्यसभा सांसद एवं पीठाधीश्वर श्री क्षेत्र वाल्मीकि धाम उज्जैन श्री बालयोगी उमेशनाथ महाराज ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने पवित्र ग्रंथ ‘रामायण’ की रचना की, जिसके माध्यम से उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन को जन-जन तक पहुँचाया। भगवान श्रीराम ने केवट को गले लगाकर और शबरी के झूठे बेर खाकर सामाजिक समरसता का उच्चतम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी सामाजिक समरसता के भाव को सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। उनके द्वारा शुरू किया गया ‘स्वच्छ भारत मिशन’ इसका जीवंत प्रमाण है, जिसमें उन्होंने स्वयं झाड़ू उठाकर स्वच्छता का संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामाजिक समरसता के इस भाव को निरंतर गति प्रदान कर रहे हैं। वे समाज के हर वर्ग की छोटी से छोटी समस्या का समाधान पूर्ण पारदर्शिता और निष्ठा के साथ कर रहे हैं, जो सामाजिक एकता और समरसता भाव को और भी सुदृढ़ करता है। सम्मेलन के आरंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अखिल भारतीय वाल्मीकि सनातन धर्मसभा एवं मध्यप्रदेश वाल्मीकि एकता संघ द्वारा महर्षि वाल्मीकि जी का चित्र, रामायण एवं अभिनंदन पत्र भेंटकर आत्मीय स्वागत किया। सम्मेलन के मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाल्मीकि समाज के नागरिकों के साथ सहभोज भी किया। स्वागत उद्बोधन में श्री सुनील वाल्मीकि ने आयोजन की रूपरेखा के बारे में बताया।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- तमिलनाडु की दवा कंपनी में हुई लापरवाही पर दोषियों पर होगी कठोर कार्यवाही

कफ सिरप निर्माताओं की करें सघन जांच मध्यप्रदेश सरकार के अनुरोध पर डीईजी और ईजी परीक्षण जनरल मोनोग्राफ में शामिल दवा निर्माण में रसायनों की अनिवार्य जांच होगी सुनिश्चित औषधि निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने ड्रग मॉनिटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन का मसौदा शीघ्र होगा तैयार खाद्य एवं औषधि प्रशासन व्यवस्था की वृहद समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने निवास कार्यालय भोपाल में खाद्य एवं औषधि प्रशासन व्यवस्था की वृहद समीक्षा की। उन्होंने छिंदवाड़ा की दुखद घटना पर की जा रही कार्रवाई की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु शासन एवं प्रशासन से सतत संपर्क में रहकर दोषियों सख्त कार्यवाही चिन्हांकन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर अपराध है जिसमें मध्यप्रदेश ने अपने अनमोल चिराग़ों को खोया है। इस घटना में लिप्त निजी कंपनी के कर्मचारियों के साथ-साथ ऐसे अधिकारी जिन्होंने जांच में कोताही बरती है, उन पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि घटना में तथ्यात्मक और प्रक्रियात्मक त्रुटियों को स्पष्ट करते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका का स्पष्ट चिन्हांकन कर तमिलनाडु शासन को पत्राचार कर अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में कठोर कार्यवाही नितांत आवश्यक है जिससे दोषियों पर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित हो। साथ ही अन्य ड्रग मैन्युफैक्चरर सजग हों और नियमों का पालन सुनिश्चित हो। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने व्यापक पैमाने पर अभियान चलाकर सीडीएससीओ के साथ संयुक्त रूप से मध्यप्रदेश के कफ सिरप निर्माताओं की सघन जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि औषधियों की गुणवत्ता, विक्रय व्यवस्था और कोडीन आधारित दवाओं के दुरुपयोग के नियंत्रण के लिए नियमों का सख्त पालन सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की संयुक्त जांच में कोल्ड्रिफ़ सिरप, रिलाइफ़ सिरप और रिस्पीफ़्रेश टीआर सिरप की गुणवत्ता संदिग्ध पाई गई है। इन उत्पादों की बिक्री, स्टॉक और जब्ती संबंधी कार्यवाही की दैनिक मॉनिटरिंग करें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने डायथाइलीन ग्लाइकोल और इथिलीन ग्लाइकोल के परीक्षण को इंडियन फार्माकोपिया के जनरल मोनोग्राफ में शामिल कर लिया है, जिससे दवा निर्माण में इन रसायनों की अनिवार्य जांच सुनिश्चित होगी। कोडीन आधारित औषधियों की बिक्री पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब सी एंड एफ एजेंसी से होलसेलर को अधिकतम 1000 बॉटल्स और होलसेलर से रिटेलर को अधिकतम 50 बॉटल्स प्रति माह से अधिक बिक्री की सूचना औषधि निरीक्षक को देना अनिवार्य होगा। साथ ही, कोडीन युक्त दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के पर्चे पर ही की जा सकेगी। शेड्यूल औषधियों की बिक्री केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि शेड्यूल औषधियों की बिक्री केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति में ही की जाए। बिना फार्मासिस्ट के बिक्री पाए जाने पर कठोर कार्रवाई करें। सभी दवा विक्रेता बिक्री रजिस्टर में चिकित्सक का नाम, पर्चे की तिथि, रोगी का विवरण और अन्य प्रावधानों का पालन करें। उन्होंने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना, दुरुपयोग पर रोक लगाना और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। औषधि निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने ड्रग मॉनिटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन का मसौदा शीघ्र करें तैयार उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि औषधि गुणवत्ता नियंत्रण आधारभूत संरचनाओं, लैब और मैनपावर को सशक्त किया जाये जिससे शीघ्र टेस्टिंग सुनिश्चित की जा सके। राज्य में औषधि निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ड्रग मॉनिटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन योजना के मसौदे को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक कार्यवाही करें। इस योजना में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर स्थित राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन और सभी प्रयोगशालाओं में माइक्रोबायोलॉजी व स्टरलिटी लैब स्थापित की जाएंगी। प्रयोगशालाओं में अत्याधुनिक उपकरण जैसे एचपीएलसी, जीएलसी, जीसीएमएसएम, एलसीएमएस, आईआर, यूवी, डिसॉलूशन टेस्टर और डिज़िंटीग्रेशन टेस्टर लगाए जाएंगे। सभी प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता की कार्यवाही भी जाएगी। संपूर्ण राज्य में डेटा एंट्री ऑपरेटर, सैंपलिंग असिस्टेंट, एनालिस्ट, केमिस्ट, लैब असिस्टेंट आदि नए पद सृजित किए जाएंगे। साथ ही कानूनी एवं प्रोजेक्ट प्रबंधन इकाई और एन्फोर्समेंट सेल की स्थापना की जाएगी, जिससे प्रवर्तन, निगरानी और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ेगी। फील्ड स्तर पर पोर्टेबल हैंडहेल्ड डिवाइसेस से औषधियों की गुणवत्ता की त्वरित जांच सुनिश्चित होगी, जबकि नियमित प्रशिक्षण और ई-लर्निंग प्रोग्राम से अधिकारियों की दक्षता में वृद्धि होगी।  

अन्नदाताओं ने भव्य रैली निकालकर अहिल्या माता की नगरी को किया धन्य

भावांतर योजना से किसानों के जीवन में आयेगी खुशहाली हजारों की संख्या में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर भावांतर योजना के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभार देपालपुर, इंदौर और उज्जैन में किसानों के साथ जनप्रतिनिधि भी हुए शामिल भोपाल किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए लागू की गई भावांतर योजना के लिए इंदौर जिले के देपालपुर और उज्जैन के किसानों ने रविवार को भव्य ट्रैक्टर रैली निकालकर राज्य सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार माना। ट्रैक्टर रैली में हजारों की संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के किसान इंदौर के सुपर कॉरिडोर में एकत्रित हुए, जहां मुख्यमंत्री डॉ. यादव का किसानों के हित में लिये गये निर्णय के लिये आभार व्यक्त किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्योपुर जिले से किसान रैली में वर्चुअली शामिल हुए और किसानों के स्नेहपूर्ण आभार प्रदर्शन के प्रति कृतज्ञता जाहिर की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की खुशहाली ही हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भावांतर योजना के माध्यम से हमने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी फसल का पूरा मूल्य मिले। बाजार में यदि दाम घटते भी हैं तो सरकार किसानों की आय में कोई कमी नहीं आने देगी। किसानों के चेहरे पर लौटती मुस्कान हमारे प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। भावांतर योजना किसानों की आर्थिक सुरक्षा का है कवच मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज इंदौर में चारों तरफ ट्रैक्टर नजर आ रहे है। अन्नदाताओं ने भव्य रैली निकालकर माता अहिल्या की नगरी को धन्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिये निरंतर कार्य कर रही है। सिंचाई, बीज, खाद, भंडारण और विपणन की व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाया जा रहा है, जिससे कृषि एक लाभकारी व्यवसाय बन सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भावांतर योजना केवल एक भुगतान व्यवस्था नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का कवच है। किसानों को उनकी मेहनत और हक का दिलाया जायेगा पूरा पैसा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सोयाबीन के एमएसपी दर में 500 रूपये की वृद्धि कर 5328 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। किसानों की सुविधा के लिये पूरे प्रदेश में लगभग 1700 पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं। इसमें अब तक 5 लाख से अधिक किसानों ने अपनी फसल का पंजीयन कराया है। अकेले इंदौर जिले में ही अब तक 35 हजार से अधिक किसानों ने सोयाबीन फसल के लिये अपना पंजीयन कराया है। पंजीयन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर रखी गई है। किसानों को फसल बेचने के 15 दिवस के भीतर राशि वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। सभी किसानों को उनकी मेहनत और हक का पूरा पैसा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि प्रदेश के किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं और खुश हैं। किसानों के चेहरे पर मुस्कान देखना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। किसान भावांतर योजना में अपनी सोयाबीन फसल के लिये करायें पंजीयन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा पंजीयन से लेकर फसल बेचने तक किसानों के लिए हर संभव सुविधाएं उपलब्ध करायी गई हैं। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि मंडियों में उपस्थित रहकर किसानों के लिये सभी व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक सोयाबीन फसल के लिये अपना पंजीयन करायें। उन्होंने जैविक खेती के लिए भी पंजीयन कराने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता अटूट है और यह योजना उनकी मेहनत का पूरा मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी। इंदौर में आयोजित ट्रेक्टर रैली कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, विधायकगण श्री मनोज पटेल, श्री मधु वर्मा, श्री गोलू शुक्ला, सुश्री उषा ठाकुर, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सावन सोनकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय, श्री सुमित मिश्रा, श्री श्रवण चावड़ा सहित जनप्रतिनिधि एवं हजारों की संख्या में कृषक मौजूद रहे। देपालपुर में स्थानीय विधायक श्री मनोज पटेल के नेतृत्व में ट्रेक्टर रैली प्रारंभ हुई और इंदौर पहुंची। भावांतर योजना पर किसानों ने जताया हर्ष ट्रेक्टर रैली में शामिल किसानों ने बताया कि भावांतर योजना से उन्हें फसलों के घटते बाजार मूल्य से बड़ी राहत मिली है। योजना के माध्यम से उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त होगा और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। भावांतर योजना से अब वे फसलों को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर नहीं हैं। मंडी में बिक्री के बाद सरकार द्वारा दी जाने वाली भावांतर राशि उनकी आर्थिक स्थिति को मज़बूती प्रदान करेगी। हातोद के किसान श्री महेश चौधरी, श्री भारत ठाकुर और श्री धर्मेन्द्र भदौरिया ने कहा कि भावांतर योजना ने हमें बाजार की अनिश्चितता से राहत दी है। पहले उपज का दाम गिरने पर बहुत नुकसान होता था, लेकिन अब सरकार के इस कदम से हमें न्यूनतम लाभकारी मूल्य मिल रहा है। इससे खेती में भरोसा बढ़ा है।” हम इस योजना के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शुक्रगुजार है। देपालपुर के ग्राम बरोदापंथ के किसान श्री संदीप पटेल और श्री रतन पटेल ने कहा कि “पहले हमें अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती थी, लेकिन अब भावांतर की वजह से हमें उचित भाव मिलना सुनिश्चित हुआ है, इससे हमारी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। हम मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हैं।  

रक्षा में बड़ा कदम: खमरिया फैक्ट्री तैयार कर रही अत्याधुनिक बम, 2280 करोड़ का लक्ष्य तय

जबलपुर ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के लिए सबसे आधुनिक बम के तीन नए वर्जन पर कार्य कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर में मिली सफलता के बाद एल-70 के प्रमुख एम्युनेशन के साथ यह नए वर्जन की श्रृंखला जुड़ गई है। बता दें कि बीएमपी-2 सीरीज में अनेक खूबियों के साथ इसको और शक्तिशाली बनाया गया है। निर्माणी को 2280 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य हासिल हुआ है। जिसमें 900 करोड़ रुपये का कार्य पूरा हो चुका है। मार्च तक लक्ष्य पूरा है। निर्माणी को पिछले साल 1800 करोड़ रुपये का उत्पादन लक्ष्य मिला था और सफल लक्ष्य के साथ पूरे आयुध निर्माणियों में अव्वल रही। यह एक रिकॉर्ड है।   महत्वपूर्ण है कि ओएफके अपने शानदार रक्षा उत्पादन के लिए देश की सभी 41 आयुध निर्माणी में अव्वल बनी हुई है। एमआइएल की यह इकाई भी पूरे ग्रुप में आगे है। पिछले सत्र में रिकॉर्ड उत्पादन के बाद इस बार में वह कीर्तिमान बनाने की अग्रसर है। जिसमें भारतीय वायुसेना के लिए अनेक प्रमुख उत्पादों की श्रृंखला पर कार्य चल रहा है। आपरेशन सिंदूर में ओएफके में बने उत्पादों ने शानदार छाप छोड़ी थी। एल-70 की सफलता में उसके बने एम्युनेशन काफी सफल साबित हुए और दुश्मन पर प्रहार करने में आगे बने रहे। रशियन विशेषज्ञ कार्य में दे रहे सहयोग इसी के साथ रशिया के मैंगो बम प्रोजेक्ट पर भी टीम कार्य कर रही है। यह प्रोजेक्ट दोनों देशाें के साझा सहयोग से आगे बढ़ रहा है। रूस के विशेषज्ञ का इन दिनों निर्माणी में डेरा है। वे इस प्रोजेक्ट से संबंधित विशेष प्रशिक्षण के लिए यहां आए हुए हैं और निर्माणी की तकनीकी टीम को प्रशिक्षण देने के साथ इसके प्रमुख बिंदुओं से अवगत कराने का प्रयास भी कर रही है। पिकोरा बम का उत्पादन रूका सूत्रों के अनुसार इस बीच रशिया निर्मित पिकोरा बम की री-फीलिंग का कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। पिछले साल इस बम की रि-फीलिंग के दौरान दो कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई थी। फिलहाल उच्च स्तरीय जांच का काम चल रहा है। जिसकी प्रक्रिया लंबी है, जिसके बाद इसके उत्पादन पर कोई अंतिम निर्णय संभव है।