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ACC AGM में हंगामा: एशिया कप ट्रॉफी कहां रखी गई, BCCI और मोहसिन नकवी की बयानबाज़ी

दुबई  भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंगलवार को एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में भारत को एशिया कप 2025 की विजेता ट्रॉफी प्रदान न किए जाने पर ‘कड़ा ऐतराज’ जताया, लेकिन एसीसी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी अपने रुख पर बरकरार हैं। भारत को रविवार को ट्रॉफी नहीं दी गई थी क्योंकि भारतीय टीम ने पाकिस्तान सरकार में मंत्री और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। इस एजीएम में बीसीसीआई का प्रतिनिधित्व बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और पूर्व कोषाध्यक्ष आशीष शेलार ने किया। एशिया कप की ट्रॉफी दुबई स्थित एसीसी के कार्यालय में ही रखी हुई है और यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि इसे विजेता टीम के पास कब तक पहुंचाया जाएगा।   ‘नकवी अब भी ट्रॉफी देने पर सहमत नहीं’ एसीसी के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, ‘‘ट्रॉफी न सौंपे जाने और मैच के बाद पुरस्कार समारोह के दौरान एसीसी अध्यक्ष (नकवी) द्वारा किए गए कारनामों पर भारत ने आज की बैठक में कड़ा ऐतराज जताया।’’ सूत्र ने आगे कहा, ‘‘शुक्ला ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रॉफी विजेता टीम को सौंपी जानी चाहिए। यह एसीसी की ट्रॉफी है और किसी एक व्यक्ति की नहीं है।’’ उन्होंने बताया कि नकवी हालांकि अब भी ट्रॉफी देने पर सहमत नहीं हुए हैं। सूत्र कहा, ‘‘शुक्ला और शेलार ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रॉफी विजेता टीम को सौंप दी जानी चाहिए। यह एसीसी की ट्रॉफी है और किसी एक व्यक्ति की नहीं है। नकवी ने इससे मना नहीं किया, लेकिन वह जिम्मेदारी टाल रहे थे।’’ ‘नकवी को करनी पड़ी भारत की तारीफ’ उन्होंने कहा, ‘‘नकवी इस बात पर अड़े रहे कि इस मामले पर एजीएम में चर्चा नहीं होनी चाहिए और इसे किसी और समय अलग से उठाया जाना चाहिए। बैठक का एकमात्र एजेंडा उपाध्यक्ष का चुनाव करना था, लेकिन उसे भी टाल दिया गया।’’ यह पता चला है कि नकवी ने एशिया कप जीतने के लिए बीसीसीआई सदस्यों को बधाई नहीं दी लेकिन शेलार द्वारा जोर दिए जाने पर उन्हें सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व वाली अजेय टीम की औपचारिक रूप से प्रशंसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सूत्र ने कहा, ‘‘जब बैठक शुरू हुई, तो अध्यक्ष (नकवी) ने अपनी संक्षिप्त शुरुआती टिप्पणी में वेस्टइंडीज के खिलाफ नेपाल को जीतने और एसीसी सदस्य बनने के लिए मंगोलिया को बधाई देकर अपनी बात समाप्त कर दी।’’ BCCI इस मामले को ICC के पास ले जाएगा उन्होंने कहा, ‘‘तभी शेलार ने यह सवाल उठाया कि ‘आप एशिया कप खिताब के लिए भारत को बधाई क्यों नहीं दे रहे हैं?’ उन्होंने नकवी को बधाई देने के लिए मजबूर किया और पीसीबी प्रमुख सहमत हुए और विधिवत बधाई दी।’’ बीसीसीआई अब इस मामले को आईसीसी के पास ले जाएगा, जिसकी बैठक नवंबर में होनी है। सूत्र ने कहा, ‘‘शुक्ला और शेलार ने तर्क दिया कि एसीसी को ट्रॉफी कार्यालय में रखनी चाहिए और बीसीसीआई उसे वहां से एकत्र करवा लेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम वैध विजेता के रूप में ट्रॉफी चाहते हैं।' नकवी इसके लिए मना नहीं कर रहे थे, लेकिन साथ ही जिम्मेदारी भी टाल रहे थे।’’ 'कार्टून जैसा महसूस कर रहे थे नकवी' सूत्र ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट कर दिया गया था कि बीसीसीआई आईसीसी से शिकायत करेगा और शेलार संक्षेप में बैठक छोड़कर चले गए।’’ सूत्र ने यह भी बताया कि नकवी ने कहा कि वह विजयी भारतीय टीम का मंच पर इंतजार करते समय ‘एक कार्टून जैसा’ महसूस कर रहे थे और शर्मिंदा थे। दोनों टीमों ने टूर्नामेंट में एक-दूसरे के खिलाफ तीन बार खेला और फाइनल सहित हर बार भारत जीता। इस आयोजन के दौरान भारतीय टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ ‘हाथ न मिलाने की नीति’ अपनाई, जिससे पीसीबी नाराज हो गया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच शत्रुता चरम पर है, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 भारतीय पर्यटकों को गोली मार दी थी। भारत ने इसके बाद सीमा पार आतंकी ढांचों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।  

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास

रायपुर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 27 अगस्त 2024 को शुरू किए गए “बाल विवाह मुक्त भारत” राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। राज्य का बालोद जिला पूरे देश का पहला जिला बन गया है, जिसे आधिकारिक रूप से बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा सकता है। बालोद जिले की सभी 436 ग्राम पंचायतों और 09 नगरीय निकायों को विधिवत प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। बालोद बना राष्ट्रीय उदाहरण विगत दो वर्षों में बालोद जिले से बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया। दस्तावेजों के सत्यापन और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जिले के सभी पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त का दर्जा मिल गया है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के साथ बालोद जिला पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है। बालोद जिला कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और समुदाय की सामूहिक भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने सभी पंचायतों और नगरीय निकायों को इस प्रयास में सक्रिय सहयोग देने के लिए धन्यवाद भी दिया। सूरजपुर की 75 ग्राम पंचायतें भी बाल विवाह मुक्त प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के 75वें जन्मदिवस के अवसर पर सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत घोषित किया गया। विगत दो वर्षों में इन पंचायतों से भी बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। इसे राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। बाल विवाह उन्मूलन केवल सरकारी अभियान नहीं, सामाजिक परिवर्तन का संकल्प – मुख्यमंत्री श्री साय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बाल विवाह उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हमारा लक्ष्य है कि चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2028-29 तक पूरे राज्य को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाए। यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संकल्प है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अन्य जिलों में भी पंचायतों और नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जिन जिलों में पिछले दो वर्षों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, वहां शीघ्र ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। समाज और सरकार की साझेदारी से संभव हुआ बाल विवाह उन्मूलन: महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि बालोद की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि समाज और सरकार मिलकर कार्य करें तो बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। सूरजपुर की उपलब्धि भी इस दिशा में एक मजबूत कदम है। इस अभियान में यूनिसेफ का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। संगठन ने तकनीकी सहयोग, जागरूकता कार्यक्रम और निगरानी तंत्र को मजबूत करने में मदद की। छत्तीसगढ़ की इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर एक मील का पत्थर माना जा रहा है। “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” को गति देने में यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा को केंद्र में रखकर काम किया जाए तो देश से बाल विवाह जैसी कुप्रथा का पूर्ण उन्मूलन संभव है। राज्य सरकार अब चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों को भी बाल विवाह मुक्त बनाने की तैयारी कर रही है। 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य न केवल राज्य, बल्कि देश को बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प के और निकट ले जाएगा।

फाइनल वोटर लिस्ट हुई जारी, बिहार में चुनावी माहौल गहराया – तारीख का बेसब्री से इंतजार

पटना भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है। हाल ही में कराए गए वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद यह अंतिम मतदाता सूची तैयार की गई है। फाइनल वोटर लिस्ट को आयोग की वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया गया है। इसी के आधार पर बिहार में विधानसभा चुनाव होंगे। आयोग 6 अक्टूबर के बाद कभी भी बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से कहा गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। कोई भी मतदाता चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://voters.eci.gov.in/ पर जाकर मतदाता सूची में अपने नाम का विवरण देख सकताे हैं। बताया जा रहा है कि प्रकाशित मतदाता सूची में बिहार के 7.24 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। इतने मतदाताओं की ओर से अपना गणना फॉर्म भरकर जमा किया गया था। वहीं, दावा-आपत्ति के दौरान 16 लाख 58 हजार 886 पात्र नागरिकों ने फॉर्म-6 भरकर जमा कराया। चुनाव आयोग के अनुसार 36,475 मतदाताओं ने नाम जोड़ने के लिए दावा पेश किया जबकि 2,17,049 मतदाताओं ने नाम हटाने के लिए आवेदन किए। हालांकि, फाइनल वोटर लिस्ट में मतदाताओं की कुल संख्या की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। वहीं, राज्य के करीब तीन लाख मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए जाने को लेकर नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया। अंतिम रूप से प्रकाशित मतदाता सूची में एसआईआर के दौरान मृतक, स्थानांतरित एवं दोहरी प्रवृष्टि वाले मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। बिहार चुनाव का ऐलान अगले सप्ताह संभव फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अब चुनाव आयोग बिहार में तैयारियों का जायजा लेने के लिए 4 और 5 अक्टूबर को पटना का दौरा करेगा। इसके बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा। अगले सप्ताह बिहार विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने की संभावना है। संभावना है कि पहले चरण का मतदान दिवाली और छठ महापर्व के बाद अक्टूबर महीने के अंत में या फिर नवंबर के पहले सप्ताह में होगा। 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। इससे पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। पिछली बार की तरह इस बार भी 3 चरणों में मतदान होने की संभावना जताई जा रही है।  

लाड़ली बहना आवास योजना की पहली लिस्ट जारी, 5 लाख महिलाओं को मिलेगा घर का सपना

भोपाल  मध्य प्रदेश की 1.27 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों के लिए प्रदेश की सीएम मोहन यादव सरकार ने बड़ी राहत दी है। इस योजना से जुड़ी महिलाओं को लाड़ली बहना आवास योजना के तहत आवास दिए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने ऐसी 5 लाख महिलाओं की सूची जारी कर दी है। आइए जानते हैं कि इस योजना का लाभ कैसे मिलेगा, आवेदन कैसे करें, अपना नाम कैसे चेक करें और कैसे नाम जोड़वाएं। कौन कर सकता है आवेदन?  इस योजना का लाभ उन्हें मिलेगा जो मध्यप्रदेश के निवासी हैं और जो कच्चे मकान में रह रही हैं। इसके अलावा, जो महिलाएं प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं प्राप्त कर पाईं, वे भी लाड़ली बहना आवास योजना का लाभ ले सकेंगी। योजना में पात्र महिलाएं वे हैं जिनके खातों में हर महीने 1250 रुपये की किस्त आती है। लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। मोहन सरकार का मानना है कि जब महिला के पास पक्का मकान होगा, तो उसे न केवल सुरक्षा मिलेगी बल्कि उसका आत्मसम्मान भी बढ़ेगा। इससे वह आत्मनिर्भर बन सकेगी और अपनी स्थिति को सशक्त रूप से सुधार सकेगी। लाड़ली बहनों को मिलेगा पक्का मकान मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना की पात्र महिलाएं अब खुद के घर का सपना सच होते देख सकेंगी। सीएम मोहन यादव ने घोषणा की है कि सभी पात्र महिलाओं को सरकार की ओर से पक्का घर दिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सरकार लाड़ली बहनों को छत का आसरा देने के लिए उन्हें आर्थिक सहायता देगी। जानें किन्हें मिलेगा इस योजना का लाभ? मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार पक्के घर के लिए आर्थिक सहायता राशि देने की इस योजना का लाभ उन महिलाओं को दे रही है, जो पहले से ही इस योजना (Ladli Behna Yojana) से जुड़ी हुई हैं। उनके खातों में हर महीने आने वाली किस्त के 1250 रुपए आते हैं। इसके लिए मध्यप्रदेश का निवासी होना जरूरी है। जो कच्चे मकान में रह रही हैं या फिर जिन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिला हो, वे ही इस योजना का लाभ ले सकेंगी। आवेदन प्रक्रिया और नाम चेक करने का तरीका  आवेदन प्रक्रिया बहुत सरल है। महिला को अपनी पात्रता की पुष्टि करने के लिए अपने गांव या नगर निगम कार्यालय में आवेदन करना होगा। इसके अलावा, वे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने नाम की जांच कर सकती हैं और नाम जुड़वाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त कर सकती हैं। मोहन सरकार का ऐतिहासिक कदम इस योजना का नाम है लाड़ली बहना आवास योजना (Ladli Behna Awas yojana)। ये योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में मोहन सरकार का ऐतिहासिक कदम है। सरकार का मानना है कि जब महिला के पास पक्का मकान होगा, तो वह सुरक्षा के साथ ही आत्मसम्मान भी महसूस करेगी। आत्मनिर्भरता में उसकी भागीदारी बढ़ेगी। बताया जा रहा है किमध्य प्रदेश की लाड़ली बहना आवास योजना (Ladli Behna Awas yojana) के लिए ग्रामीण सूची भी जारी की गई है। इस योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश की 5 लाख महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा। जल्द ही अन्य महिलाओं के नाम की लिस्ट में इस आवास योजना के लिए जारी किए जाएंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल सके। पहले चरण के तहत पक्के मकानों का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होने जा रहा है। हितग्राही महिलाएं अपना नाम आधिकारिक वेबसाइट cmladlibehnayojana.com पर जाकर चैक कर सकती हैं। इसके लिए लाभार्थी सूची (cmladlibehnamp.gov.in list) का विकल्प चुनें। इसके बाद ब्लॉक और ग्राम पंचायत का चयन करना होगा। अब बॉक्स में अपना नाम टाइप करें, पति का नाम और कैप्चा कोड को फिल करें। इस जानकारी को भरते ही लिस्ट आपके सामने होगी, आप देख सकेंगी की लाभार्थियों की सूची में आपका नाम है या नहीं। जिनके पास नहीं इंटरनेट या स्मार्ट फोन, उन्हें भी मिलेगा लाभ योजना का लाभ उन महिलाओं को भी मिल सकेगा, जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है या स्मार्ट फोन उपलब्ध नहीं है। अगर आप भी ऐसी ही महिलाओं में से एक हैं, तो अपने गांव के जनसेवा केंद्र, पंचायत कार्यालय और ग्राम सचिवालय में जाकर लाभार्थी सूची की जानकारी प्राप्त कर सकती हैं। वहां अधिकारी आपकी हर संभव मदद करेंगे। लिस्ट में नहीं नाम, तो करें ये काम अगर किसी महिला का नाम सूची (ladli behna awas yojana list) में नहीं आता है, जबकि उसने आवेदन दिया है, तो वह ग्राम पंचायत सचिव या जनसेवा केंद्र से संपर्क कर सकती है। इसके साथ ही आधिकारिक पोर्टल पर भी महिला सूची में अपना नाम देख सकती है। वह अपने द्वारा दिए गए आवेदन की स्थिति की जानकारी भी ले सकती है।

दशहरे पर बारिश का अलर्ट: MP में अगले 4 दिन हल्की बरसात और तेज हवा का अनुमान

भोपाल  विदाई के बीच इस सप्ताह मध्यप्रदेश में मानसूनी बारिश की एक और झड़ी लगेगी। मौसम विभाग के अनुसार, 1 अक्टूबर से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। इससे दशहरे के दिन भी कई जिलों में बारिश हो सकती है। दक्षिणी हिस्से में ज्यादा असर रहेगा। फिलहाल हल्की बारिश का अलर्ट।  मध्यप्रदेश में इस बार बारिश के बीच रावण दहन होगा। नए सिस्टम की वजह से मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस वजह से वाटरप्रूफ पुतलों की डिमांड बढ़ गई है। भोपाल में सजे रावण के पुतलों की मंडी यानी, बाजार में वाटरप्रूफ पुतले की मांग की जा रही है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, अगले 4 दिन तक प्रदेश में हल्की बारिश होने का अनुमान है। गरज-चमक और तेज हवा की स्थिति भी बनी रही। पांचवें दिन से तेज बारिश का दौर फिर से शुरू हो सकता है। इससे पहले सोमवार को भी बारिश का दौर जारी रहा। ग्वालियर से मानसून लौट गया है, लेकिन सोमवार को यहां 9 घंटे में सवा इंच पानी बरस गया। भोपाल, दतिया, खरगोन, बड़वानी, नर्मदापुरम, मंडला, सागर में भी हल्की बारिश दर्ज की गई। साल 2022 में भी यही स्थिति बनी थी। भोपाल में पेट्रोल छिड़ककर पुतले जलाने पड़े थे। हालांकि, ग्वालियर-उज्जैन समेत प्रदेश के 12 जिलों से मानसून पूरी तरह से लौट चुका है, लेकिन 1 अक्टूबर से एक्टिव हो रहे नए सिस्टम का असर इन जिलों में भी देखने को मिल सकता है। पिछले 3 दिन से यहां हल्की बारिश हो रही है। इधर, लिंक रोड नंबर-2 पर ही वन विभाग का मुख्यालय भी है। इसके ठीक सामने रावण के पुतलों का बाजार सजा है। ऐसे में सोमवार दोपहर में बाजार हटाने को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। कई कारीगर ऑफिस के बाहर पहुंचे और दुकान हटाने का विरोध करने लगे। पुलिस भी मौके पर पहुंची। हालांकि, बाद में मामला शांत हो गया। बड़वानी जिला मुख्यालय से 11 किलोमीटर दूर तलवाड़ा बुजुर्ग गांव के खेतों में बारिश का पानी घुस गया। स्थानीय किसान राकेश मुकाती ने कहा- तीन हेक्टेयर खेत में लगी भिंडी और मक्के की फसल खराब हो गई है। करीब 80 हजार रुपए का नुकसान हुआ। वहीं, खरगोन में नमी की वजह से कपास की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। मंडी में नीलामी एक सप्ताह के लिए रोक दी गई है। किसान अपने घरों में तो जिनिंग संचालक फैक्ट्री परिसर में कपास सुखा रहे हैं। केके फायबर्स के संचालक प्रितेश अग्रवाल ने कहा- जिनिंग फैक्ट्री में सूखने के लिए रखा 700 क्विंटल कपास गीला होकर बह गया। बारिश के कारण किसान खेतों से कपास की चुनाई नहीं करा पा रहे हैं। गीला कपास पौधों से टूटकर गिर रहा है।  भोपाल में 40 फीट तक ऊंचे पुतले भोपाल के बांसखेड़ी, तुलसी नगर, ईंटखेड़ी समेत कई स्थानों पर करीब 300 कारीगर पुतले तैयार कर रहे हैं। बाजार में 5 फीट से लेकर 40 फीट तक ऊंचे पुतले हैं। जिनकी कीमत 50 हजार रुपए तक है। शहर में छोटे-बड़े करीब 7 हजार पुतलों का दहन होगा। कारीगर वैदिक कुमार वंशकार ने बताया, बारिश की वजह से मार्केट धीमा है। अभी 10 से 12 ऑर्डर ही आए हैं। पिछले साल ज्यादा आए थे। वॉटरप्रूफ पुतले की डिमांड तो है, लेकिन उसकी लागत अधिक आती है। पुतलों पर प्लास्टिक पेंट भी कर रहे हैं। कारीगर प्रेम बंसल ने बताया, बारिश की वजह से पुतलों को सहेजना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि अब तक लोग पुतले लेकर नहीं गए हैं। दशहरे को सिर्फ 3 दिन बचे हैं। यदि बारिश होती है तो ज्यादा दिक्कतें होंगी। इस बार महंगे हैं पुतले कारीगर प्रेम ने बताया कि इस बार पुतले की लागत बढ़ी है। बांस, कपड़ा, धागा समेत अन्य सामग्री के रेट बढ़ गए हैं। जो पुतले हम ग्राहक को देते हैं, वे बिना पटाखों के होते हैं। यदि कोई पुतलों में पटाखे रखवाना चाहेंगे तो उसकी कीमत बढ़ जाएगी। दो साल से दशहरे पर बारिश का दौर बता दें कि 2022 में 5 अक्टूबर को दशहरा था। इस समय प्रदेश से मानसून की वापस हो रही थी। इस वजह से कई जिलों में तेज बारिश हुई थी। इससे मध्यप्रदेश में दशहरे पर रावण के पुतले को श्रीराम के बाण से पहले ही इंद्र के बाणों का सामना करना पड़ा था। बारिश की वजह से राजधानी में भी रावण के पुतले भीग गए थे। बांसखेड़ी इलाके में कारीगरों को पुतले बस स्टॉप में रखना पड़े थे। इससे उन्हें खासा नुकसान हुआ था। एक सप्ताह बाद से विदाई शुरू होगी नया सिस्टम बनने की वजह से प्रदेश में मानसून की विदाई फिलहाल नहीं होगी। एक सप्ताह के बाद मानसून लौटने लगेगा। बता दें कि अब तक प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम भी शामिल हैं। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग की माने तो मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है। बता दें कि इस साल मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है, लेकिन नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे भी बढ़ सकती है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश बता दें, प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 45.1 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है।

पहला ड्रोन अभ्यास तैनात — सेना की करवाई से मिले संकेत, तनाव प्रबंधित करने की तैयारी

नई दिल्ली भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सेना खुद को ड्रोन युद्ध के लिए तैयार कर रही है। अंबाला के पास नारायणगढ़ फील्ड फायरिंग रेंज में सेना का वायु समन्वय युद्धाभ्यास चल रहा है। यह अभ्यास पांच दिन चलने वाला है। पश्चिमी और दक्षिणी कमांड इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इसमें कई तरह के ड्रोन के संचालन और ड्रोन हमले से बचने पर फोकस है। वेस्टर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के मुताबिक, सेना अब ड्रोन का काफी इस्तेमाल कर रही है। खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में सप्लाई के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है। ड्रोन ऑपरेशन को लेकर ऑपरेशन सिंदूर से काफी सबक मिला है। ऐसे में ड्रोन के निर्माण और सेना को उसकी ट्रेनिंग पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा अगर फिर से किसी दु्श्मन के साथ भिड़ंत होती है तो उसे और बड़ी सजा दी जाएगी। इस युद्धाभ्यास में जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है वे स्थानीय स्तर पर ही बनाए गए हैं। इनकी रेंज पांच किलोमीटर तक है और ये 5 किलो वजन ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्मी के पास ज्यादा रेंज और ज्यादा पेलोड ले जाने वाले ड्रोन भी मौजूद हैं। कटियार ने कहा कि आने वाले समय में लॉजिस्टिक जरूरतों को पूरा करने के लिए हजारों ऐसे ड्रोन की जरूरत पड़ेगी। वहीं इन ड्रोन से हमला करने के लिए जिन हथियारों का इस्तेमाल होगा, उन्हें देश में ही तैयार किया जाएगा। बता दें कि ना सिर्फ युद्ध के समय में बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के समय भी सेना ड्रोन का इस्तेमाल करतीहै। बाढ़ के दौरान भी उत्तर और पश्चिमी कमांड ने राहत सामग्री पहुंचाने में ड्रोन का खूब इस्तेमाल किया गया। इस युद्धाभ्यास में दोनों कमांड को अलग-अलग नाम दिया गया है। एक का नाम सूर्यादेश और दूसरे का चंद्रादेश है। दोनों अलग-अलग देशों के तौर पर एक दूसरे के साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं। इन ड्रोन से बम बरसाए जा रहे हैं और उनसे बचने में भी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हमें समझ में आ गया है कि कैसे दुश्मन के ड्रोन से निपटा जा सकता है और कैसे दुश्मन को ड्रोन से पस्त किया जा सकता है। इस अभ्यास में शामिल अधिकारियों ने कहा कि सेना के अलावा अब ड्रोन का इस्तेमाल खेती में भी किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने 'ड्रोन दीदी' स्कीम भी चलाई है जिसके तहत महिलाओं को ड्रोन की ट्रेनिंग दी जाती है।

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 को दिव्य और भव्य बनाने में यूपी पुलिस की रही अहम भूमिका

पुलिस की मुस्तैदी और स्मार्ट पुलिसिंग से जीरो इंसिडेंट इवेंट बना यूपीआईटीएस 2025 उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 को दिव्य और भव्य बनाने में यूपी पुलिस की रही अहम भूमिका यूपी पुलिस ने ड्रोन, सीसीटीवी और कंट्रोल कमांड सेंटर की मदद से पूरे आयोजन को जीरो-इंसिडेंट इवेंट बनाया 9 जोन और 20 सेक्टर में रहा सख्त सुरक्षा कवच, 550 सीसीटीवी कैमरों और 24×7 एक्टिव कंट्रोल रूम ने आयोजन स्थल और आसपास की सुरक्षा को बनाया अभेद्य महिला सुरक्षा पर रहा खास ध्यान, 150 महिला कांस्टेबल और 40 महिला सब-इंस्पेक्टर की तैनाती ने महिला सुरक्षा सुनिश्चित की हैसल-फ्री ट्रैफिक मैनेजमेंट किया एक्टिव, ट्रैफिक इंस्पेक्टर, टीएसआई और 450 ट्रैफिक कांस्टेबल की तैनाती से आगंतुकों को बिना जाम परेशानी के पहुंचने का मिला अवसर एंटी-ड्रोन सिस्टम और डिजिटल डायवर्जन प्लान से विदेशी डेलीगेट्स और लाखों आगंतुकों के लिए बनी सुरक्षित और व्यवस्थित व्यवस्था ग्रेटर नाेएडा   उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 (UPITS-2025) को सफल, सुरक्षित और भव्य बनाने में उत्तर प्रदेश पुलिस का योगदान भी काफी सराहनीय रहा। इस आयोजन के दौरान सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और जन सुरक्षा सुनिश्चित करने में यूपी पुलिस की स्मार्ट पुलिसिंग की व्यवस्था ने एक नई मिसाल कायम की। पुलिस अधिकारियों की तैनाती और आधुनिक सुरक्षा उपायों ने इस कार्यक्रम को न सिर्फ व्यवस्थित बल्कि दिव्य और भव्य भी बना दिया। इस बड़े आयोजन में आने वाले फॉरेन और वीआईपी डेलीगेट्स की सुरक्षा हो या फिर प्रतिदिन लाखों की संख्या में पहुंच रहे आगंतुकों की सुरक्षा और ट्रैफिक की जिम्मेदारी, हर मोर्चे पर पुलिस चौकन्नी रही। किसी तरह की मिसहैपनिंग न हो, इसके लिए 24 घंटे कंट्रोल कमांड सेंटर से पूरे वेन्यू की मॉनीटरिंग की गई। अत्याधुनिक तकनीक से लैस ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और अन्य माध्यमों से आयोजन को जीरो इंसिडेंट इवेंट बनाने में सफलता प्राप्त की गई। बड़े पैमाने पर तैनात की गई फोर्स एडिशनल पुलिस कमिश्नर ग्रेटर नोएडा राजीव नारायण मिश्र ने आयोजन के दौरान सुरक्षा के लिए किए गए व्यापक इंतजामों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए, पुलिस विभाग ने सुरक्षा के लिए सात डीसीपी (डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस), चौदह एडीसीपी (एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस), 38 एसीपी (असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस), 80 इंस्पेक्टर, तीन सौ सब इंस्पेक्टर, चालीस महिला सब इंस्पेक्टर, कुल एक हजार चार सौ कांस्टेबलों को तैनात किया। इसके साथ ही, महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, एक सौ पचास महिला कांस्टेबल भी तैनात की गई थीं। सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए, सात कंपनियां पीएसी (प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी) और एक कंपनी आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) को भी तैनात किया गया था। ट्रैफिक रहा चुस्त दुरुस्त यूपी पुलिस के इस बड़े प्रयास में ट्रैफिक प्रबंधन का विशेष ध्यान रखा गया था। ट्रैफिक जाम और भीड़-भाड़ से बचने के लिए, दस ट्रैफिक इंस्पेक्टर, बीस टीएसआई (ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर), चार सौ पचास ट्रैफिक कांस्टेबल और तीन एसीपी ट्रैफिक को नियुक्त किया गया। इन सभी कर्मचारियों ने सुनिश्चित किया कि ट्रैफिक सुचारु रूप से चले और यात्री बिना किसी परेशानी के इवेंट स्थल तक पहुंच सकें। इसका असर भी देखने को मिला और हर कोई हैसल फ्री ट्रैफिक के माध्यम से आयोजन स्थल पर पहुंच सका।  9 जोन और 20 सेक्टर्स में बांटा गया आयोजन स्थल आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने के लिए शहर को नौ जोन और बीस सेक्टरों में बांट दिया गया था। इसके अलावा, एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया था, जो पूरे समय 24 घंटे एक्टिव था और सुरक्षा के सभी पहलुओं की निगरानी करता था। इस कंट्रोल रूम में 550 सीसीटीवी कैमरों द्वारा पूरे क्षेत्र की पल-पल की निगरानी की जाती थी, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। 15 हजार की रही पार्किंग क्षमता पार्किंग की व्यवस्था भी इस इवेंट की अहम जरूरत थी। इसके लिए सात पार्किंग स्थल बनाए गए, जहां पंद्रह हजार से अधिक गाड़ियों की पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। इसमें सर्वाधिक क्षमता नासा पार्किंग की रही, जहां 10 हजार वाहन एक साथ खड़े किए जा सकते थे। यही नहीं, यहां से लोगों को आयोजन स्थल तक ले जाने के लिए शटल बसों की भी व्यवस्था की गई थी। यह व्यवस्था इवेंट में आने वाले आगंतुकों को आसानी से पार्किंग का विकल्प प्रदान कर रही थी। फिर दिखी स्मार्ट पुलिसिंग  स्मार्ट पुलिसिंग के तहत पुलिस ने एक डिजिटल दृष्टिकोण अपनाया था। इवेंट में आने वाले लोगों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डायवर्जन प्लान की जानकारी दी गई, ताकि वे इवेंट स्थल तक सही मार्ग पर पहुंच सकें। यह स्मार्ट पुलिसिंग की प्रणाली दर्शाती है, जहां टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर जनता तक सटीक जानकारी पहुंचाई गई और यातायात व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया गया। शहर भर में लगाए गए साइन बोर्ड  आगंतुकों, विशेषकर विदेशी डेलीगेट्स और गेस्ट्स के लिए उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। उन्हें इवेंट स्थल तक पहुंचने के लिए होटल से यूपीआईटीएस स्थल तक सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन की व्यवस्था की गई। साथ ही, इवेंट स्थल और शहरभर में साइन बोर्ड लगाए गए, ताकि लोग आसानी से इवेंट स्थल तक पहुंच सकें। एंटी ड्रोन भी किया गया तैनात  इसके अलावा, सुरक्षा के और भी कड़े उपाय किए गए थे। ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया था ताकि आसमान से भी सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। यह आधुनिक तकनीकी उपाय इस बात का प्रमाण हैं कि यूपी पुलिस ने स्मार्ट पुलिसिंग को पूरी तरह से अपनाया और इस इवेंट को एक सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव बनाने में अहम भूमिका निभाई।

पश्चिमी यूपी में 1 अक्टूबर से शुरू होगी धान खरीद, 23,500 से ज्यादा किसानों ने किया रजिस्ट्रेशन

पश्चिमी यूपी में पहली अक्टूबर से होगी धान खरीद, साढ़े 23 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में की जाएगी खरीद  लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में भी बुधवार से की जाएगी खरीद  धान (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल एमएसपी तय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2026 तक चलेगी खरीद 3300 क्रय केंद्रों के माध्यम से 60 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य   48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान कराएगी योगी सरकार लखनऊ खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत पहली अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में धान खरीद प्रारंभ होगी। पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश और लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में खरीद होगी। मंगलवार (30 सितंबर) सुबह 11 बजे तक साढ़े 23 हजार से अधिक किसानों ने पंजीकरण करा लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2026 तक धान खरीद होगी। सरकार ने इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि भी की है। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। योगी सरकार ने 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान का निर्देश दिया है। क्रय केंद्र सुबह 9 से शाम पांच बजे तक खुले रहेंगे।  fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण अनिवार्य  धान बिक्री के लिए किसानों का पंजीकृत होना अनिवार्य है। किसानों को खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट fcs.up.gov.in या मोबाइल ऐप UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण कराना होगा। खरीद पंजीकृत किसानों से ही होगी। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक किसान किसी भी सहायता या जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 नंबर पर कॉल याा अपने जनपद के जिला खाद्य विपणन अधिकारी, तहसील के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी व ब्लॉक के विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं।  पश्चिम उत्तर प्रदेश व लखनऊ के इन जनपदों में पहली अक्टूबर से होगी खरीद पश्चिम उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली अक्टूबर से धान खरीद शुरू होगी, जो 31 जनवरी 2026 तक चलेगी। यह खरीद पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली,आगरा, अलीगढ़, झांसी संभाग में होगी। वहीं लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में भी धान खरीद इसी अवधि में होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के इन जनपदों में पहली नवंबर से शुरू होगी खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवम्बर से धान खरीद शुरू होगी। यह खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर व प्रयागराज संभाग में होगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में भी पहली नवंबर से खरीद होगी, जो 28 फरवरी 2026 तक चलेगी।   साढ़े 23 हजार से अधिक किसानों ने करा लिया पंजीकरण  30 सितंबर (सुबह 11 बजे) तक साढ़े 23 हजार से अधिक किसानों ने धान विक्रय के लिए पंजीकरण कर लिया है। विभाग के मुताबिक धान की बिक्री के लिए ओटीपी आधारित सिंगल पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। किसान मोबाइल पर एसएमएस से मिले ओटीपी को भरकर पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं किसानों को भुगतान सीधे आधार लिंक्ड बैंक खाते में किया जाएगा। बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर धान की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों के बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी। 

47 साल बाद सहारा का साम्राज्य संकट में, लखनऊ में प्रशासन की सख्ती से मचा हलचल

लखनऊ  लखनऊ में कभी शहर की पहचान रहा सहाराश्री सुब्रत रॉय का साम्राज्य अब ढहने की कगार पर है. सुब्रत रॉय के निधन के बाद सरकारी एजेंसियों ने समूह की संपत्तियों पर कार्रवाई तेज कर दी है. इसी कड़ी में अब नगर निगम सहारा शहर की 130 एकड़ जमीन को सील करने की तैयारी में है.  आपको बता दें कि लखनऊ में सहारा इंडिया का साम्राज्य अब अंत की तरफ बढ़ रहा है. सुब्रत रॉय के निधन के बाद सरकारी एजेंसियां सहारा समूह की संपत्तियों पर तेजी से कार्रवाई कर रही हैं. इसी क्रम में लखनऊ नगर निगम जल्द ही गोमती नगर में स्थित सहारा शहर की 130 एकड़ जमीन को सील करेगा.  नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि सहारा ने लाइसेंस डीड की शर्तों का उल्लंघन किया है, जिस कारण यह कार्रवाई की जा रही है. नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट भी दायर करने की तैयारी की है.  क्या है मामला? नगर निगम ने 1994-95 में मुलायम सिंह यादव सरकार के समय सहारा को 170 एकड़ जमीन लीज पर दी थी, जिसमें से 130 एकड़ जमीन लाइसेंस डीड के तहत आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए थी. लेकिन सहारा समूह ने नियमों का उल्लंघन करते हुए यहां लग्जरी बंगले, ऑडिटोरियम, स्टेडियम और हेलीपैड जैसी सुविधाएं बना लीं. नगर निगम ने सहारा के नोटिस का जवाब खारिज कर दिया है और अब कार्रवाई शुरू हो गई है.  कार्रवाई के दौरान क्या होगा? सीलिंग की कार्रवाई के दौरान सहारा शहर के सभी गेट सील कर दिए जाएंगे. फिलहाल परिसर में रह रहे कर्मचारियों, सुरक्षा गार्डों और केयरटेकर को बाहर निकाला जाएगा. केवल एक गेट आवाजाही के लिए खुला रहेगा, जिसे बाद में बंद कर दिया जाएगा. इसके बाद नगर निगम पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेकर अपनी सुरक्षा तैनात करेगा. 

मुख्यमंत्री साय रायपुर शहर के विभिन्न गरबा महोत्सव में हुए शामिल, मातारानी का दर्शन कर लिया आशीर्वाद

रायपुर : उत्साह, उमंग और सद्भावना बढ़ाने का पर्व है नवरात्रि : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  साय रायपुर शहर के विभिन्न गरबा महोत्सव में हुए शामिल, मातारानी का दर्शन कर लिया आशीर्वाद रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय नवरात्रि के पावन पर्व पर विगत रात्रि राजधानी रायपुर स्थित विभिन्न गरबा समारोहों में शामिल हुए। उन्होंने मातारानी का दर्शन कर प्रदेश की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर रायपुर शहर गरबा के रंग में सराबोर दिखाई दिया और हर तरफ़ उत्सव का उल्लास वातावरण में व्याप्त था। मुख्यमंत्री  साय भानपुरी स्थित  कच्छ कड़वा पाटीदार समाज, आशीर्वाद भवन में  गुजराती लोहाणा महाजन समाज द्वारा आयोजित "झणकारो 2025", इनडोर स्टेडियम में "रंगीलो रास 2025" तथा ओमाया पार्क में "रास गरबा उत्सव" में सम्मिलित हुए। इन आयोजनों में समाजजनों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक कच्छ पगड़ी पहनाकर और तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया। गरबा की धुनों और रंगारंग माहौल में मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने जनसमूह में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्र की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नवरात्रि उत्साह, उमंग और सद्भावना बढ़ाने का पर्व है। यह पर्व सामाजिक समरसता को और मजबूत करता है तथा जन-जन में ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में देवी को विभिन्न स्वरूपों में पूजा जाता है और मातृशक्ति के आशीर्वाद से प्रदेश निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी, धमतरी में मां अंगारमोती एवं बिलईमाता, सरगुजा और रतनपुर में मां महामाया, डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी जैसे अनेक स्वरूपों में माता प्रदेश में विराजमान हैं। इन सभी शक्तिपीठों का आध्यात्मिक महत्व न केवल प्रदेश की आस्था को मजबूत करता है बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि नवरात्र के प्रथम दिन ही यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने जीएसटी रिफॉर्म लागू कर देश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान की है। यह सुधार न केवल व्यापार को सुगम बनाएगा बल्कि उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष लाभ भी देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘बचत उत्सव’ के माध्यम से आम नागरिकों की जेब में पैसों की उल्लेखनीय बचत हो रही है और यह अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने लोगों से आह्वान किया कि जब भी बाजार जाएँ तो स्वदेशी वस्तुओं की खरीदी को प्राथमिकता दें। स्वदेशी से न केवल देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है बल्कि स्थानीय स्तर पर उत्पादन और स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को अपनाना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है और यही देश की समृद्धि का आधार बनेगा। इस अवसर पर रायपुर सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, विधायक  मोतीलाल साहू,  पुरंदर मिश्रा,  सुनील सोनी, आरंग विधायक  अनुज शर्मा, पूर्व विधायक  देवजी भाई पटेल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित कच्छ कड़वा पाटीदार समाज और  गुजराती लोहाणा महाजन समाज के वरिष्ठजन एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।