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मध्य प्रदेश में राम वनगमन पथ के जिलों में मनाया जाएगा दीपोत्सव, सरकार ने किया ऐलान

भोपाल  मध्य प्रदेश में राज्य सरकार ने भगवान श्रीराम वनगमन पथ पर दीपोत्सव का निर्णय लिया है। दीपावली के पहले राम वनगमन पथ वाले जिलों में दीपोत्सव होगा। दिन और स्थान का चयन संबंधित जिलों के कलेक्टर करेंगे। संस्कृति विभाग ने इसकी तैयारी प्रारंभ कर दी है। इस दीपोत्सव का आयोजन 11 जिलों में चित्रकूट से लेकर छत्तीसगढ़ सीमा के करीब स्थित अनूपपुर तक किया जाएगा। राज्य सरकार राम वनगमन पथ को विकसित कर रही है बता दें कि राज्य सरकार राम वनगमन पथ को विकसित कर रही है। इसके लिए स्थल चयन को अंतिम रूप देने के लिए सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है, जो लगभग डेढ़ माह में पूरा हो जाएगा। इन स्थलों को धार्मिक पर्यटन की ²ष्टि से विकसित किया जाएगा। सभी को एक सर्किट से जोड़ा जाएगा। संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दीपोत्सव के पहले संबंधित जिलों में लोगों की सहभागिता बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों के अतिरिक्त ऐसे स्थान चिह्नित होंगे, जहां लोग आसानी से पहुंच सकते हैं। लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे अपने घरों में भी उस दिन दीप जलाएं। इससे आमजन को इस बात का गर्व होगा कि भगवान श्रीराम उनके जिले से होकर गुजरे थे। हालांकि दीपोत्सव के दौरान दीपक कितनी-कितनी दूरी पर जलाए जाएंगे, इसे लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। 11 जिलों के इन स्थलों को किया गया है चिह्नित     सतना जिले के चित्रकूट में स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी, अत्रि आश्रम, शरभंग आश्रम, अश्वमुनि आश्रम, सिलहा गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, सिद्धा पहाड़, रक्सेला गांव में सीता रसोई और रामसेल     पन्ना के पहाड़ी खेरा गांव में बृहस्पति कुंड, सारंगधर गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, बड़े गांव में अग्निजिह्वा आश्रम और सलेहा में अगस्त्य आश्रम     मैहर जिले में राम जानकी मंदिर- कटनी के भरभरा में शिव मंदिर     जबलपुर में पिपरिया के पास रामघाट- नर्मदापुरम में पासी घाट और माच्छा के राम मंदिर     बालाघाट जिले में राम पायली- मंडला में सीता रपटन- उमरिया जिले में राम मंदिर दशरथ घाट और मार्कंडेय आश्रम     शहडोल के गंधिया- अनूपपुर के कनवाई में स्थित सीतामढ़ी कुछ और जिलों के स्थलों को खोजने के लिए हो रहा सर्वेक्षण राज्य सरकार राम वनगमन पथ में पहले से चिह्नित स्थलों के अतिरिक्त नए को खोजने के लिए सर्वेक्षण करा रही है। इस मामले में देश के जाने-माने शोधकर्ता डा.रामअवतार शर्मा को यह जिम्मेदारी दी गई है। डॉ.शर्मा ने बताया कि उनकी टीम नए स्थलों को खोज रही है। उन्होंने संभावना जताई कि 10 से 15 स्थल और जुड़ सकते हैं। लगभग डेढ़ माह में सर्वेक्षण का काम पूरा हो जाएगा। राम वनगमन पथ के स्थलों पर दीपोत्सव कराया जाएगा। इसकी तैयारी की जा रही है। दिन और समय का निर्धारण अभी नहीं किया गया है। – शिव शेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति  

वैष्णो देवी यात्रा 14 सितंबर से संभावित, मौसम ठीक रहा तो यात्रियों को मिलेगी हरी झंडी

कटरा  खराब मौसम और ट्रैक की आवश्यक मरम्मत कार्यों के चलते अस्थायी रूप से स्थगित की गई श्री माता वैष्णो देवी यात्रा के फिर से शुरू होने की खबर सामने आ चुकी है। अब जल्द ही फिर से 'जय माता दी' के नारों से पूरा मार्ग गूंज उठेगा। आपको बता दें कि हाल ही में पहाड़ों पर हुई जोरदार बारिश के कारण भूस्खलन की बड़ी घटना हुई। कई यात्रियों की जान भी चली गई। अब मौसम में बदलाव देखने को मिला है। बारिश के दौरान खराब हुआ ट्रैक की मरम्मत हो चुकी है। अब 14 सितंबर से पुनः यात्रा शुरू होगी। अगर मौसम विपरीत होती है तो श्राइन बोर्ड आगे निर्णय लेगा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनों यात्रा को रोकना पड़ा था। ट्रैक पर मरम्मत और रखरखाव के कार्य पूरे कर लिए गए हैं। श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की स्थिति और बोर्ड की ताजा एडवाइजरी अवश्य देखें। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के कटरा से श्री माता वैष्णो देवी यात्रा 26 अगस्त से स्थगित है। तीर्थयात्रा मार्ग पर भूस्खलन के कारण यात्रा स्थगित की गई है। उल्लेखनीय है कि 26 अगस्त को अर्धकुंवारी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के निकट भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 34 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर तीर्थयात्री शामिल थे जबकि कई अन्य घायल हुए थे। व्यापारियों की मांग थी कि श्राइन बोर्ड कम से कम यात्रा को पुनः शुरू करने के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करे, क्योंकि 22 सितंबर से नवरात्र भी शुरू होने वाले हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने 26 अगस्त को हुए भूस्खलन के कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। जम्मू-कश्मीर जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा की अध्यक्षता वाली समिति में जम्मू संभागीय आयुक्त रमेश कुमार और जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक बीएस टूटी शामिल हैं और यह दो सप्ताह के भीतर उपराज्यपाल सिन्हा को एक व्यापक रिपोर्ट सौंपेगी।

अधूरी चार्जशीट के आधार पर सोनम रघुवंशी ने जमानत याचिका दायर करने की तैयारी

इंदौर  इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी राजा की पत्नी सोनम रघुवंशी सोहरा उप-मंडल के न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने आज (12 सितंबर) जमानत याचिका दायर कर सकती हैं. सोनम के वकील इस मामले में मेघालय पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट की खामियों को आधार बनाकर जमानत की मांग करेंगे. चार्जशीट में खामियों का हवाला देकर वकील जमानत की याचिका पेश करेंगे. उन्होंने कहा, "चार्जशीट में औपचारिक और कानूनी खामियों के कारण जमानत याचिका दायर की जाएगी." इस तरह के हवाले आम तौर पर न्यायालय में आरोपी के पक्ष में काम कर सकते हैं. 790 पेज की चार्जशीट की गई थी दाखिल पिछले हफ्ते, पूर्वी खासी हिल्स पुलिस ने इस मामले में 790 पेज की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी. इस रिपोर्ट में कुल 5 मुख्य आरोपियों के नाम शामिल हैं. जांचकर्ताओं ने इस मामले को एक सुनियोजित और भयावह साजिश के रूप में बताया है. चार्जशीट में औपचारिक रूप से राजा की पत्नी सोनम, उनके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और 3 किराए के हमलावर विशाल सिंह चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को आरोपी बनाया गया है. इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1), 238(a) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है. राजा रघुवंशी की हत्या की कहानी पूरी तरह से सनसनीखेज रही है. पुलिस ने इसे गंभीर और सुनियोजित मामला बताया है, जिसमें सभी आरोपियों की भूमिका अलग-अलग साबित की गई है. इस हत्या के पीछे क्या वजह थी और किस तरह से यह साजिश रची गई, यह भी चार्जशीट में विस्तार से बताया गया है. सोनम की जमानत याचिका आज शुक्रवार (12 सितंबर) को पेश होने वाली है. उसके बाद अदालत सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर फैसला करेगी. क्या था पूरा मामला? बता दें इंदौर के साकार नगर के रहने वाले दंपती, 29 वर्षीय राजा रघुवंशी और 27 वर्षीय सोनम, हनीमून के लिए मेघालय गए थे. 23 मई को वे लापता हो गए. 11 दिन बाद, 2 जून को ईस्ट खासी हिल्स में वेइसाडोंग फॉल्स के पास 150 फीट गहरी खाई में राजा का शव मिला, लेकिन सोनम का अब तक कोई पता नहीं चला.

टेक्नोलॉजी के सहारे आकार लेगा नया यूपी, एआई व डीप टेक सेक्टर बनेगा भविष्य की रीढ़

विकसित यूपी@2047 : यूपी का नया अवतार – AI से जुड़े कारोबार टेक्नोलॉजी के सहारे आकार लेगा नया यूपी, एआई व डीप टेक सेक्टर बनेगा भविष्य की रीढ़  यूपी बनेगा AI और डीप टेक का ग्लोबल हब : सीएम योगी का विजन – लखनऊ और कानपुर में बनेंगी अत्याधुनिक AI सिटी – सेमीकंडक्टर और ईवी मैन्युफैक्चरिंग में यूपी अग्रणी बनने की तैयारी – टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर – साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन हब बनेगा यूपी – ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए एनसीआर, लखनऊ और नोएडा शीर्ष गंतव्य – 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य लखनऊ  उत्तर प्रदेश अगले 22 वर्षों में देश और दुनिया के लिए एक टेक्नोलॉजी पॉवरहाउस के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन “विकसित यूपी @2047” प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाने का है। उनका मानना है कि तकनीक के सहारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाकर न सिर्फ युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि यूपी भारत के डिजिटल भविष्य की धुरी बनेगा। योगी सरकार का स्पष्ट मत है कि यूपी का नया अवतार तकनीक और नवाचार से ही बनेगा। साथ ही प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का भी माध्यम बनेगा। बीते 8 सालों में डिजिटल बदलाव 2017 से पहले की तस्वीर बेहद निराशाजनक थी। साल 2015-16 में प्रदेश के विद्यालयों में कम्प्यूटर की उपलब्धता मात्र 13.3 प्रतिशत थी। लेकिन बीते साढ़े आठ सालों में इस स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ। 2023-24 तक यह आंकड़ा बढ़कर 40.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। आज प्रदेश के 25,790 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़, 880 ब्लॉक रिसोर्स सेंटरों में आईसीटी लैब्स और शिक्षकों के लिए 2.61 लाख से अधिक टैबलेट उपलब्ध हैं। वहीं स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत करीब 50 लाख युवाओं को टैबलेट-स्मार्टफोन वितरित किए गए हैं, जबकि 2 करोड़ युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य तय किया गया है। यह पहल डिजिटल शिक्षा और स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है। 2030 तक डिजिटल प्रदेश का खाका मुख्यमंत्री योगी ने 2030 तक यूपी को टेक्नोलॉजी हब बनाने का रोडमैप तैयार किया है। इसमें कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य शामिल हैं। लखनऊ और कानपुर में बनने वाली एआई सिटी प्रदेश को वैश्विक रिसर्च और इनोवेशन का हब बनाएगी। एनसीआर, लखनऊ और नोएडा को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए देश के शीर्ष गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही, हर मंडल में इनोवेशन इनक्यूबेटर स्थापित होंगे, जिससे जमीनी स्तर के युवाओं को अपने इनोवेशन को आगे ले जाने का मौका मिलेगा। इसके अलावा, यूपी सेमीकंडक्टर  के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में काम कर रहा है। 2047 तक डीप टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी का विजन है कि 2047 तक उत्तर प्रदेश डीप टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाए। इसमें एआई, क्वांटम कम्प्यूटिंग, ब्लॉकचेन, एडवांस्ड रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और जीन एडिटिंग, नैनोटेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और ग्रीन टेक जैसी तकनीकें शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन सेक्टरों में महारथ हासिल करने से न केवल प्रदेश को रोजगार और निवेश मिलेगा, बल्कि यूपी भारत की डिजिटल क्रांति की धुरी बनेगा। रणनीतिक स्तंभ और फोकस एरिया योगी सरकार ने अपने विजन को तीन रणनीतिक स्तंभों पर आधारित किया है। इनमें एआई सिटी, ग्रीन आईटी और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी तथा स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल है। इन स्तंभों को मजबूती देने के लिए प्रदेश का फोकस एआई और डीप टेक इनोवेशन, टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी एवं डेटा प्रोटेक्शन हब बनाने पर होगा। साथ ही, योगी सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में पांच गुना वृद्धि हासिल की जाए। 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि एआई, डीप टेक्नोलॉजी और उभरते सेक्टर ही 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचने की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। ‘विकसित यूपी @2047’ के तहत लखनऊ और कानपुर में बनने वाली एआई सिटी, सेमीकंडक्टर और ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब, ग्लोबल डेटा सेंटर, इनोवेशन इनक्यूबेटर और साइबर सिक्योरिटी हब जैसे कदम प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे, जिससे न सिर्फ युवाओं को ग्लोबल स्किल्स और रोजगार मिलेगा, बल्कि प्रदेश की जीडीपी को लगातार 16 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर पर बनाए रखने की मजबूती भी मिलेगी। यही विजन 2047 तक यूपी को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की आधारशिला है।  

दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट को बम की धमकी, ई-मेल के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

नई दिल्ली/मुंबई  दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार दोपहर के दौरान मिली बम-धमकी की सूचना से हड़कंप मच गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक  एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ जिसमें दिल्ली हाईको कोर्ट परिसर में तीन बम रखे होने और दोपहर 2 बजे तक हाईकोर्ट खाली कराने का आदेश दिया गया था. इस धमकी के तुरंत बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में भी बम की धमकी का मेल आया जिसके बाद तुरंत ही कोर्ट परिसर को खाली कराया गया और जजों तथा वकीलों को बाहर निकाला गया. पुलिस ने फौरन सुरक्षा-प्रोटोकॉल लागू करते हुए सभी जजों को कक्षों से बाहर निकाला और वकीलों, स्टाफ तथा लोगों को कोर्ट परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया. मौके पर बम निरोधक दस्ते (Bomb Squad), स्पेशल सेल और दिल्ली पुलिस की कई यूनिट तैनात कर दी गईं और परिसर की बारी-बारी तलाशी चल रही है. पुलिस ने आसपास के इलाकों को भी सील कर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन के सचिव विक्रम सिंह पंवार ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा, 'सुरक्षा तंत्र स्थिति का आंकलन कर रहा है. ईमेल को गंभीरता से लिया जा रहा है. फिलहाल घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है.' मेल की मुख्य बातें दिल्ली हाईकोर्ट को लेकर भेजे गए धमकी वाले मेल में दावा किया गया है कि हाईकोर्ट परिसर में 3 बम रखे गए हैं और सभी को दोपहर 2 बजे तक वहां से हटा लिया जाना चाहिए. मेल में एक असामाजिक/आक्रामक राजनीतिक संदेश भी था जिसमें कुछ नेताओं को निशाना बनाने जैसी कड़वी बातें लिखी गईं; कुछ विशिष्ट नामों का भी जिक्र था. अधिकारियों का कहना है कि मेल की भाषा और संदर्भ इस घटना को “इंसाइड जॉब” जैसा बताने की कोशिश करते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मेल में तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी डीएमके (DMK) का भी जिक्र है. मेल में कहा गया है, "हम प्रस्ताव करते हैं कि डॉ. एझिलान नागनाथन को डीएमके की कमान संभालनी चाहिए." इसके साथ ही, मेल में यह भी धमकी दी गई है कि उदयनिधि स्टालिन के बेटे इनबानिधि उदयनिधि को तेजाब से जलाया जाएगा. मेल में कहा गया है, 'एजेंसियों को इस बात की भनक तक नहीं लगेगी कि यह कोई अंदरूनी साजिश है.उदाहरण के तौर पर, आपके दिल्ली हाईकोर्ट में आज का धमाका पिछले झांसों के संदेह को दूर कर देगा. दोपहर की इस्लामी नमाज़ के तुरंत बाद जज चैंबर में धमाका होगा.' जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने मेल को गंभीर मानते हुए उसकी फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है. मेल किस आईपी एड्रेस/सर्वर से भेजा गया, क्या मेल-हेडर में छेड़छाड़ हुई है, और मेल भेजने वाले की पहचान कैसे की जाए, इन पहलुओं पर काम चल रहा है. साथ ही मेल में जिन नामों का जिक्र था, उन पर भी सुरक्षा बढ़ाई जा रही है और सम्बंधित चैनलों को सूचित कर प्रतिक्रिया मांगी गई है.

कांग्रेस सरकार गिरने के बाद भी दिग्विजय-कमलनाथ में सुलह, मनभेद से इनकार

नई दिल्ली  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ तस्वीर शेयर की। इसके साथ ही लिखा कि कमल नाथ जी और मेरे लगभग 50 वर्षों के पारिवारिक संबंध रहे हैं। हमारे राजनैतिक जीवन में उतार चढ़ाव आते रहे हैं और ये स्वाभाविक भी है। हमारा सारा राजनैतिक जीवन कांग्रेस में रहते हुए विचारधारा की लड़ाई एकजुट हो कर लड़ते हुए बीता है और आगे भी लड़ते रहेंगे। छोटे मोटे मतभेद रहे हैं, लेकिन मनभेद कभी नहीं। उन्होंने आगे लिखा कि कल उनकी मुलाकात हुई। हम दोनों को कांग्रेस पार्टी ने नेतृत्व खूब अवसर दिए और जनता का प्यार सदैव मिलता रहा है। आगे भी हम मिल कर जनता के हित में कांग्रेस के नेतृत्व में सेवा करते रहेंगे।  2020 का विवाद और अब का संदेश मार्च 2020 में जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिरी थी, तब पार्टी के भीतर गहरी खींचतान रही। हाल ही में इसको लेकर दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। दिग्विजय और कमलनाथ ने एक-दूसरे को सरकार गिराने के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था। अब दिग्विजय सिंह की पोस्ट ने संकेत दिया है कि पार्टी आने वाले समय में पुराने विवादों को पीछे छोड़कर एकजुटता की नई तस्वीर पेश करना चाहती है। दोनों नेता एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित का मानना है कि कांग्रेस के नेता अपनी खोई हुई साख वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। सबको पता है कि आपसी टकराव और अहंकार की राजनीति ने ही 2020 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को गिरा दिया था। अब भले ही दोनों नेता एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा बनी हुई है कि उनकी लड़ाई ने ही पार्टी को सत्ता से बाहर किया। दीक्षित का कहना है कि आज दोनों ही नेता राजनीतिक तौर पर हाशिए पर हैं। कांग्रेस को जो नुकसान होना था, वह हो चुका है। सरकार गिरने पर विवाद  कुछ दिन पहले दिए गए एक इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच गहराते मतभेद ही 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने का कारण बने, इसके जवाब में कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा कि सिंधिया को लगता था दिग्विजय सिंह सरकार चला रहे हैं, इसलिए उन्होंने बगावत की. इस बयानबाजी ने फिर से पुराने घाव हरे कर दिए थे और यह चर्चा जोर पकड़ने लगी थी कि क्या कांग्रेस में भीतर ही भीतर सब कुछ ठीक नहीं है.  सियासी एकजुटता  कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दोनों ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के आज भी सबसे बड़े और सीनियर चेहरे हैं, उनके बीच सार्वजनिक रूप से एक सकारात्मक संवाद और तस्वीर सामने आना पार्टी कार्यकर्ताओं में एकता का संदेश दे सकता है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मुलाकात 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद 2028 की तैयारी और पुनर्गठन की शुरुआत हो सकती है. क्योंकि कांग्रेस पार्टी भी यह जानती है कि दोनों की राजनीतिक जड़ें आज भी एमपी में सबसे ज्यादा मजबूत हैं. दिग्विजय और कमलनाथ की मुलाक़ात से यह साफ है कि कांग्रेस अब 2020 की बगावत से उबरकर आंतरिक मतभेदों को सुलझाने और नया जनाधार तैयार करने में जुट गई है.   नई नेतृत्व का एकजुटता से काम करने पर ही होगा फायदा  पत्रकार दीक्षित ने आगे लिखा कि अब केवल तस्वीरें साझा करने या बयान देने से पार्टी को लाभ नहीं मिलने वाला। कांग्रेस का फायदा तभी होगा जब नई नेतृत्व टीम पूरी एकजुटता के साथ काम करेगी और व्यक्तिगत अहंकार को किनारे रखेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, जिन्हें राहुल गांधी ने जिम्मेदारी दी है, उनका सबसे अहम काम टीम बनाना और कार्यकर्ताओं को जोड़ना है। लेकिन, इस दिशा में ठोस प्रयास दिखाई नहीं दे रहे। जब कमांडर कमजोर होता है तो पूरी फौज बिखर जाती है। 

उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली सीपी राधाकृष्णन ने, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के 53 दिन बाद दिखे सार्वजनिक रूप से

नई दिल्ली   सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भारत के उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन को उप राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। इस दौरान पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। राधाकृष्णन के शपथ के बाद धनखड़ लगातार ताली बजाकर स्वागत करते दिखे। पूर्व उपराष्ट्रपति कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के साथ बैठे हुए थे। धनखड़ के बाई तरफ उनकी पत्नी बैठी थीं। लंबे समय बाद सार्वजनिक कार्यक्रम में हुए शामिल पूर्व उपराष्ट्रपति लंबे समय बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से वह लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इसके साथ ही उनका किसी भी तरह का कोई बयान सामने नहीं आया था। विपक्ष ने धनखड़ के नजरबंद होने के भी आरोप लगाए थे। धनखड़ की चुप्पी पर उठाए थे सवाल कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी जगदीप धनखड़ की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को कहा था कि देश पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे पर उनके बयान का इंतजार कर रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा था कि पिछले 50 दिनों से जगदीप धनखड़ ने अपनी असामान्य चुप्पी साध रखी है। वेणुगोपाल का कहना था कि जब उनके उत्तराधिकारी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो रही है, तब भी देश उनके ऐतिहासिक और अप्रत्याशित इस्तीफे पर बयान का इंतजार कर रहा है। जब उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से किसानों की घोर उपेक्षा, सत्ता में बैठे लोगों के 'अहंकार' से पैदा होने वाले खतरों और अन्य मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी। NDA उम्मीदवार को कितने वोट मिले? एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति के प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन को 452 मत प्राप्त हुए। वहीं, विपक्षी उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 मत मिले। 9 सितंबर को ही वोटिंग के बाद परिणामों में घोषणा की गई। उपराष्ट्रपति परिणामों की घोषणा के बाद पीएम मोदी ने सीपी राधाकृष्णन को बधाई दी। पीएम मोदी में विश्वास जताया कि नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति भारत के संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत करेंगे तथा संसदीय संवाद में सकारात्मक योगदान देंगे। महाराष्ट्र के राज्यपाल थे सीपी राधाकृष्णन बता दें कि सीपी राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल थे। अब चूंकि वह देश के उपराष्ट्रपति बन गए हैं। इस स्थिति में महाराष्ट्र में गवर्नर का पद खाली हो गया। नए राज्यपाल की नियुक्ति तक गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को अपने कर्तव्यों के अतिरिक्त, महाराष्ट्र के राज्यपाल के कार्यों का भी कार्यभार सौंपा गया है। राष्ट्रपति ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान भी जारी किया है। राधाकृष्णन ने एक दिन पहले राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया अपनी नई जिम्मेदारी की तैयारी में राधाकृष्णन ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई है। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। राधाकृष्णन को उम्मीद से ज्यादा 14 वोट ज्यादा मिले राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी के मुताबिक 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाले, वोटिंग 98.2% हुई। इनमें से 752 मत वैलिड और 15 इनवैलिड थे। एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन YSRCP के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन का समर्थन किया। 13 सांसदों ने चुनाव में मतदान से परहेज किया। इनमें बीजू जनता दल (BJD) के सात सांसद, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के चार, शिरोमणि अकाली दल का एक सांसद और एक निर्दलीय सांसद शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि एनडीए उम्मीदवार को उम्मीद से 14 वोट ज्यादा मिले, जिससे विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग की अटकलें हैं।  

80 साल के पूर्व राष्ट्रपति को खाली करना पड़ा सरकारी महल, श्रीलंका में बदला नियम

 कोलंबो  श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के पॉश इलाके सिनामैन गार्डेन में मौजूद भव्य और महल जैसे दिखने वाले एक घर में सामान समेटे जा रहे हैं. यहां हलचल है. 10 सालों से ये घर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का निवास था. महिंदा राजपक्षे आने वाले नवंबर में 80 साल के हो जाएंगे, लेकिन बुढ़ापे में उन्हें अपना घर खाली करना पड़ रहा है. ये श्रीलंका में हाल ही में पास हुए एक कानून का असर है.  श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों की सारी सुविधाएं छीन लेने वाला नया कानून Presidents' Entitlement (Repeal) Act पास हो गया है. इसके बाद पूर्व राष्ट्रपतियों और उनकी विधवाओं को आधिकारिक आवास, मासिक भत्ता, सुरक्षा स्टाफ, वाहन, सचिवालय सुविधाएं और अन्य लाभ मिलने बंद हो गए हैं. अब देश के सभी पूर्व राष्ट्रपतियों को सरकारी आवास खाली करना पड़ रहा है.  ऐसा ही माहौल पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा के घर भी है. हालांकि उन्होंने मौजूदा सरकार से कुछ मोहलत मांग ली है. वे अपना घर 2 महीने में खाली करेंगी. दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका में जब पिछले साल चुनाव हुए थे तो राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे अनुरा कुमारा दिसानायके ने देश के लोगों से वादा किया था कि वे पूर्व राष्ट्रपतियों की शाहखर्ची पर लगाम लगाएंगे. महंगाई और नेताओं के मनमानी खर्चे से त्रस्त श्रीलंका की जनता ने अनुरा दिसानायके के इस चुनावी वादे को सपोर्ट किया.  राष्ट्रपति बनने के बाद अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस बिल पर काम शुरू किया. श्रीलंका सरकार का एक आंकड़ा कहता है कि 2024 में पूर्व राष्ट्रपतियों के ताम-झाम में सरकारी खजाने से 11 अरब श्रीलंकाई रुपये खर्च हुए.  यह विधेयक जुलाई 2025 में कैबिनेट ने मंजूर किया और 31 जुलाई को गजट में प्रकाशित हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने राजपक्षे परिवार की चुनौती को खारिज करते हुए 9 सितंबर को इसे साधारण बहुमत से पारित करने की मंजूरी दी. संसद ने 10 सितंबर को 151-1 के मतों से इसे पारित किया.  अब श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों को सिर्फ पेंशन मिला करेगी. उनके सभी लाभ समाप्त हो गए हैं.   इसी के साथ पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 11 सितंबर को कोलंबो का आधिकारिक निवास खाली कर दिया है. महिंदा राजपक्षे अब कोलंबो से 190 किलोमीटर दूर तंगाल्ले में रहेंगे. तंगाल्ले स्थित कार्लटन हाउस ही वह जगह है जहां राजपक्षे ने 1970 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. श्रीलंका की पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा ने नया कानून लागू होने के बाद कहा है कि उन्हें कोलंबो में एक घर मिल गया है. इस घर का अभी नवीनीकरण चल रहा है. उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार सरकारी घर में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को घर खाली करने से पहले तीन महीने का नोटिस देना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है.  हालाकि उन्होंने कहा कि उन्हें घर खाली करने में दो महीने से ज़्यादा समय नहीं लगेगा.  चंद्रिका कुमार तुंगा ने कहा है कि तीन हफ्ते पहले वे गिर गई थीं और इस दौरान उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई. उन्होंने श्रीलंका के अंग्रेजी अखबार डेली मिरर से बात करते हुए कहा, "मेरे कूल्हे की सर्जरी हुई. यह एक गंभीर सर्जरी है. मुझे दिन में दो-तीन बार फ़िज़ियोथेरेपी करवानी पड़ती है. इसलिए मैं इस समय उस नए घर में न तो जा सकती हूँ और न ही कोई काम कर सकती हू." चंद्रिका कुमार तुंगा ने नए कानून के लागू होने तक राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को पत्र लिखकर सरकार द्वारा निर्धारित किराया देकर जीवन भर इसी जगह रहने की अनुमति मांगी थी. लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया.  तब तुंगा ने कहा था कि वह नई व्यवस्था के तहत उसी जगह पर और रहने की इच्छा रखती है क्योंकि बुढ़ापे में और 15 सालों में दो बार कैंसर से जूझने के बाद उनके लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल था.  श्रीलंका में वर्तमान में पांच जीवित पूर्व राष्ट्रपति हैं. हालांकि जब सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया था तब उनमें से केवल तीन ही इन सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे. 

मनरेगा में मध्य प्रदेश की बड़ी छलांग, सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मिली ऐतिहासिक सफलता

वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जनजाति वर्ग को रोजगार दिलाने में देश में मध्यप्रदेश प्रथम भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अनुसूचित जनजाति वर्ग को रोजगार उपलब्ध कराने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में प्रदेश ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2025-26 में मनरेगा अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग को अब तक सर्वाधिक रोजगार देने वाला राज्य मध्यप्रदेश बना है। वर्तमान में मध्यप्रदेश देशभर में पहले पायदान पर है। प्रदेश में 62 लाख 56 हजार परिवार जॉबकार्ड धारी प्रदेश में कुल 62 लाख 56 हजार परिवार जॉबकार्ड धारी परिवारों के 1 करोड़ से अधिक श्रमिक सक्रिय रूप से पंजीकृत हैं। 32 लाख से अधिक परिवारों को मिला रोजगार वर्ष 2025-26 में मनरेगा अंतर्गत प्रदेश में 32 लाख से अधिक परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। इस अवधि में 47 लाख 38 हजार श्रमिकों ने विभिन्न कार्यों में भाग लिया, जिनमें से 10 लाख 37 हजार परिवारों के 15 लाख 81 हजार श्रमिक अनुसूचित जनजाति वर्ग से थे। प्रदेश में कुल सृजित मानव दिवस 11 करोड़ 55 लाख में से 3 करोड़ 53 लाख मानव दिवस आदिवासी परिवारों द्वारा सृजित किया गया, जो कि अन्य प्रदेशों की तुलना में अधिक है और योजना की सफलता का स्पष्ट प्रमाण हैं। मनरेगा के अंतर्गत प्रदेश में किए जाने वाले कार्य मनरेगा के माध्यम से प्रदेश में विभिन्न प्रकार के सामुदायिक एवं हितग्राही मूलक विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें खेत तालाब, अमृत सरोवर, डगवेल रिचार्ज जैसे संरचनाओं का निर्माण, ग्रामीण सड़कों का निर्माण व मरम्मत, व्यापक स्तर पर पौधरोपण, बोरी बंधान, मेड़ बंधान, चेक-डैम, भूमि समतलीकरण, बागवानी, पशुशेड निर्माण एवं अन्य ग्रामीण विकास कार्य शामिल हैं। रोजगार के साथ अनुसूचित जनजाति वर्ग को आर्थिक रूप से बनाया जा रहा समृद्ध मनरेगा आयुक्त श्री अवि प्रसाद ने बताया कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य अनुसूचित जनजाति वर्ग के परिवारों को केवल रोजगार देना ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना भी है। प्रदेश में वर्ष 2025-26 में मनरेगा योजना के अंतर्गत अब तक देशभर में सबसे अधिक अनुसूचित जनजाति वर्ग के जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।  

मार्केट में जोरदार उछाल, JBM और Lupin के शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

नई दिल्ली शेयर बाजार आज भी तेजी पर खुला, लेकिन इसमें बड़ी उछाल नहीं देखी जा रही है. 9.23 बजे सुबह सेंसेक्‍स 155.26 अंक चढ़कर 81,703.99 पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 51.80 अंक चढ़कर 25,057.30 पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी बैंक में तेज गिरावट आई है, ये अभी 54.95 अंक गिरकर 54,614.65 पर कारोबार कर रहा है.  बीएसई टॉप 30 शेयरों की बात करें तो 9 शेयरों में गिरावट आई है, जबकि 21 शेयर तेजी दिखा रहे हैं. इंफोसिस के शेयर में 2 फीसदी और मारुति, टाटा मोटर्स जैसे शेयर्स में 1 फीसदी की तेजी आई है. हिंदुस्‍तान लीवर और HDFC Bank के शेयर में आज 1 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है.  FMCG, मीडिया और पीएसयू बैंक सेक्‍टर में गिरावट है. ऑटो, आईटी, मेटल और फार्मा के शेयर में अच्‍छी तेजी है.  क्‍यों नहीं चल रहा शेयर बाजार?  शेयर बाजार में तेजी तो आ रही है, लेकिन निवेशकों के उम्‍मीद के मुताबिक उतनी उछाल नहीं देखी जा रही है. एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि टैरिफ पर अन‍िश्चितता बने रहने के कारण भारतीय मार्केट को मोमेंटम नहीं मिल पा रहा है. टैरिफ के कारण ग्‍लोबल स्‍तर पर मार्केट भी प्रभावित हुआ है. रुपये में भी गिरावट देखी जा रही है. वहीं अमेरिका और भारत के रिश्‍तों में अभी सुधार नहीं आई है. इसके अलावा, विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से लगातार बिकवाली कर रहे हैं.  94 शेयरों में अपर सर्किट  बीएसई के 3,187 शेयरों में से सिर्फ 1,947 शेयरों में तेजी आई है. 1055 शेयरों में गिरावट आई है और 185 शेयर अनचेंज हैं. 43 शेयरों ने आज लोअर सर्किट लगाया है, जबकि 94 शेयरों ने अपर सर्किट लगाया है. 20 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर और 56 शेयर 52 सप्‍ताह के उच्‍चतम स्‍तर पर है.  इन शेयरों में अच्‍छी तेजी JBM Auto के शेयर में आज 8 फीसदी की तेजी है. शक्ति पम्‍प के शेयर में 7.30 फीसदी की उछाल है. धानी सर्विस के शेयर में 6 फीसदी, लक्ष्‍मी ऑर्गेनिक के शेयर में 4%, एमसीएक्‍स और बीएसई के शेयर में 2 फीसदी से ज्‍यादा की उछाल आई है. Infosys और Lupin के शेयरों में भी 2 फीसदी से ज्‍यादा की तेजी आई है.