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एशिया कप में भारतीय तूफान: 27 गेंद में UAE ढेर, इंग्लैंड का बड़ा रिकॉर्ड बाल-बाल बचा

दुबई  एशिया कप 2025 के दूसरे मैच में टीम इंडिया ने यूएई को 9 विकेट से रौंदकर विजयी आगाज किया है. ये मुकाबला दुबई के दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया. मुकाबले में टॉस जीतकर भारत ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. यूएई की टीम पहले बैटिंग करते हुए महज 57 के स्कोर पर ढेर हो गई थी. कुलदीप यादव को 4 तो शिवम दुबे को 3 सफलता मिली. इसके जवाब में उतरी भारतीय टीम ने इस टोटल को 5वें ओवर में ही चेज कर लिया. यूएई की टीम जब पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी तो उसका पहला विकेट 26 के स्कोर पर गिरा. लेकिन अगले 31 रन बनाने में यूएई ने 9 विकेट गंवाए. कुलदीप ने इस मैच में 4 तो शिवम दुबे ने एक विकेट झटका. 58 रनों के जवाब में उतरी भारतीय टीम ने अभिषेक शर्मा के 16 गेंद में 30 और गिल के नाबाद 9 गेंद में 20 रनों और कप्तान सूर्या के नाबाद 7 रनों के दम पर ये मैच 4.3 ओवर में ही चेज कर लिया. भारत का अगला मैच 14 सितंबर को पाकिस्तान से होना है. T20 में इंग्लैंड का ये रिकॉर्ड टूटने से बचा टीम इंडिया के नाम जुड़ा ये खास रिकॉर्ड इस जीत के साथ भारत ने एक शानदार रिकॉर्ड अपने नाम किया है. किसी फुल मेंबर टीम द्वारा सबसे अधिक गेंदें शेष रहते टी20 जीत दर्ज करने के मामले में भारत अब दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. यहां देखें सबसे ज्यादा गेंद रहते जीत वाले मैच… 101 गेंद शेष: इंग्लैंड बनाम ओमान, नॉर्थ साउंड, 2024 93 गेंद शेष: भारत बनाम यूएई, दुबई, 2025 90 गेंद शेष: श्रीलंका बनाम नीदरलैंड, चटगांव, 2014 90 गेंद शेष: ज़िम्बाब्वे बनाम मोज़ाम्बिक, नैरोबी, 2024 भारत का पिछला रिकॉर्ड 2021 में स्कॉटलैंड के खिलाफ दुबई में था, जब टीम ने 81 गेंद शेष रहते जीत दर्ज की थी. इस मुकाबले में अभिषेक शर्मा ने भी एक शानदार उपलब्धि हासिल की. इस मैच में अभिषेक शर्मा ने पारी की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा. ऐसा करने वाले वो कुछ चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हो गए. भारतीय बल्लेबाज़ जिन्होंने T20I की पहली गेंद पर छक्का जड़ा रोहित शर्मा– आदिल राशिद (इंग्लैंड) के खिलाफ, अहमदाबाद, 2021 यशस्वी जायसवाल– सिकंदर रज़ा (ज़िम्बाब्वे) के खिलाफ, हरारे, 2024 संजू सैमसन– जोफ्रा आर्चर (इंग्लैंड) के खिलाफ, मुंबई WS, 2025 अभिषेक शर्मा- हैदर अली (यूएई) के खिलाफ, दुबई, 2025 ऐसा रहा ये मुकाबला मुकाबले में टॉस जीतकर भारत ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. यूएई की टीम पहले बैटिंग करते हुए महज 57 के स्कोर पर ढेर हो गई थी. कुलदीप यादव को 4 तो शिवम दुबे को 3 सफलता मिली. इसके जवाब में उतरी भारतीय टीम ने इस टोटल को 5वें ओवर में ही चेज कर लिया. यूएई की टीम जब पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी तो उसका पहला विकेट 26 के स्कोर पर गिरा. लेकिन अगले 31 रन बनाने में यूएई ने 9 विकेट गंवाए. कुलदीप ने इस मैच में 4 तो शिवम दुबे ने एक विकेट झटका. 58 रनों के जवाब में उतरी भारतीय टीम ने अभिषेक शर्मा के 16 गेंद में 30 और गिल के नाबाद 9 गेंद में 20 रनों और कप्तान सूर्या के नाबाद 7 रनों के दम पर ये मैच 4.3 ओवर में ही चेज कर लिया. भारत का अगला मैच 14 सितंबर को पाकिस्तान से होना है. सूर्या ने प्लेइंग इलेवन में संजू सैमस को मौका दिया था. तिलक वर्मा भी टीम में थे. लेकिन जितेश और रिंकू को मौका नहीं मिला था.   ऐसी रही यूएई की बल्लेबाजीः पहले बल्लेबाजी करने उतरी यूएई के लिए पारी का आगाज कप्तान मुहम्मद वसीम और शराफू ने किया. पहले दो ओवर में यूएई ने धारदार बल्लेबाजी की. लेकिन चौथे ओवर में यूएई को पहला झटका लगा जब बुमराह ने शराफू को बोल्ड किया. शराफू के बल्ले से 22 रन आए. इसके बाद 5वें ओवर में वरुण चक्रवर्ती ने जोहैब को बाहर का रास्ता दिखाया. 5 ओवर के बाद यूएई का स्कोर 32-2 था. इसके बाद मुहम्मद वसीम से बड़ी उम्मीदें थीं. लेकिन कुलदीप यादव कहर बनकर बरपे. उन्होंने एक के बाद एक यूएई को झटके दिए, जिससे यूएई की पारी लड़खड़ा गई. कुलदीप के बाद शिवम दुबे ने भी गेंदबाजी से कहर बरपाया और यूएई की टीम महज 57 के स्कोर पर ढेर हो गई. यूएई का विकेट पतनः 26-1 (अलीशान शराफू, 3.4), 29-2 (मुहम्मद जोहैब, 4.4), 47-3 (राहुल चोपड़ा, 8.1), 48-4 (मुहम्मद वसीम, 8.4), 50-5 (हर्षित कौशिक, 8.6), 51-6 (आसिफ खान, 10.3), 52-7 (सिमरनजीत सिंह, 11.2), 54-8 (ध्रुव पाराशर, 12.1), 55-9 (जुनैद सिद्दीकी, 12.4), 57-10 (हैदर अली, 13.1)

चार साल में पड़ोसी देशों में उथल-पुथल, भारत के चार पड़ोसी देशों में हुए तख्तापलट

नई दिल्ली पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक हलचल ने अस्थिरता की नई परिभाषा गढ़ दी है। पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक हलचल ने ऐसा तूफान खड़ा किया है कि अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल—सबकी सत्ता हिल गई। काबुल में तालिबान का कब्जा, श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनकारियों का ‘स्विमिंग पूल पार्टी’, और नेपाल में युवा-जनरेशन का जबरदस्त Gen-Z क्रेज—ये सब घटनाएं साबित करती हैं कि सत्ता अब किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं रही।    नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन इतने तेज़ी से फैल गए कि संसद और सुप्रीम कोर्ट तक आंदोलन की लहर पहुंच गई। पांच मंत्रियों के इस्तीफे, विपक्षी सांसदों की सामूहिक बगावत और राष्ट्रपति के घर तक प्रदर्शनकारियों का घेराव—प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा महज एक शुरुआत थी; विरोध की आग अब भी धधक रही है। अफगानिस्तान: तालिबान की वापसी 2021 में अफगानिस्तान का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह उलट-पुलट गया। अमेरिकी मदद से स्थापित अशरफ गनी सरकार धराशायी हो गई और तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया। अगस्त के महीने में शहर में दाखिल होते ही तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर नियंत्रण जमा लिया, जबकि एयरपोर्ट पर भगदड़ में 170 से अधिक लोग मारे गए। भ्रष्टाचार, कमजोर सेना और अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने विद्रोह को हवा दी। आज भी तालिबान का शासन कायम है, महिलाओं के अधिकारों पर पाबंदियाँ हैं और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की धमक लगातार बनी हुई है। श्रीलंका: आर्थिक संकट से राजनीति तक अफगानिस्तान के संकट के ठीक एक साल बाद, 2022 में श्रीलंका आर्थिक तूफ़ान की चपेट में आ गया। महंगाई, ईंधन और दवाइयों की किल्लत ने राजधानी कोलंबो की सड़कों को जलते हुए अंगारों में बदल दिया। लाखों लोग प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को रातोंरात देश छोड़ना पड़ा और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा देना पड़ा। विरोध इतना उग्र था कि राष्ट्रपति भवन और संसद तक प्रदर्शनकारियों के कदमों की आवाज गूंज उठी। बांग्लादेश: छात्र आंदोलन और सत्ता परिवर्तन 2024 में बांग्लादेश के छात्र आंदोलनों ने ऐसा तूफ़ान खड़ा कर दिया कि शेख हसीना की सरकार सत्ता की कुर्सी से खिसक गई। भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और आरक्षण नीति के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों ने पूरे देश की राजनीति हिला कर रख दी। हिंसक झड़पों और गोलीबारी में 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा बैठे। इसके बाद सेना ने अंतरिम सरकार बना दी, लेकिन आम चुनाव अब तक नहीं हो पाए हैं और देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल अब भी गरम है। बांग्लादेश आज भी संघर्ष और आंदोलन की ज्वाला में झुलस रहा है। पाकिस्तान में चार बार तख्तापलट पाकिस्तान में 1947 से ही सेना का हस्तक्षेप सत्ता में रहा है. पाकिस्तान ने एक दो नहीं बल्कि चार बार तख्तापलट का दंश झेला है. पहला तख्तापलट 1953-54 में हुआ. इसके बाद 1958 में सत्ता बदली जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर अली मिर्जा ने पाकिस्तान की संविधान सभा और तत्कालीन फिरोज खान नून की सरकार को बर्खास्त किया था. फिर आया 1977 का दौर. तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे. चुनावों में धांधली के विवाद के बीच सेना प्रमुख जिया उल हक ने तख्तापलट किया. 1999 में फिर वही कहानी दोहराई गई जब सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट कर नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल किया था.  अन्य पड़ोसी देश: पाकिस्तान और मालदीव पाकिस्तान में इमरान खान के हटने के बाद राजनीति का पारा लगातार उँचा है। इमरान समर्थकों की रैलियां, हिंसक झड़पें और देशभर में तनाव ने सरकारी तंत्र को हिला कर रख दिया है। वहीं, बलूचिस्तान में अलगाववादी गुट सत्ता के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। दूसरी तरफ़ मालदीव में नव निर्वाचित राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के ‘भारत विरोधी’ रुख़ और उनकी रूढ़िवादी नीतियों ने द्विपक्षीय संबंधों में खटास पैदा कर दी है। घरेलू स्तर पर भी उनका प्रशासन पिछली सरकार की तुलना में कड़ा और जुझारू नजर आ रहा है।  यहां लगा अमेरिका पर आरोप भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश भी 2024 में इसी तरह की आग में जल उठा था. शेख हसीना की सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और दमन के आरोप थे. जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में 30% कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ. जल्दी ही यह आंदोलन व्यापक हो गया. सड़कों पर उतरे लाखों युवाओं ने शेख हसीना के खिलाफ नारे लगाए और देखते ही देखते बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना घटी. बता दें कि बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना से अमेरिका पर आरोप लगा था. शेख हसीना के बेटे ने तख्तापलट के लिए अमेरिका पर शक जताया था. श्रीलंका की घटना  इसके अलावा साल 2022 में श्रीलंका में भी तख्तापलट की घटन देखी गई. श्रीलंका की अर्थव्यवस्था चरम संकट में थी. ईंधन, दवा, भोजन की भारी किल्लत थी. श्रीलंका ऋणों के बोझ तले दबा था लोगों का मानना था कि राजपक्षे परिवार की भ्रष्ट शासन ने जनता को तंग कर दिया. भारी संख्या में परेशान जनता सड़क पर उतरी. राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद के बाहर डेरा डाला 'गोटा गो गोटा' यानी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे सत्ता छोड़ो के नारे लगे. जुलाई 2022 तक आंदोलन इतना उफान मार गया कि गोटाबाया को देश छोड़कर भागना पड़ा.   अफगानिस्तान भी झेल चुका है तख्तापलट का दंश अफगानिस्तान में भी तख्तापलट की घटना घट चुकी है. अगस्त 2021 में अमेरिका की सेना हटने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो गया. तालिबान ने 2021 में अफगानिस्तान की गनी सरकार का तख्तापलट किया था, जिसके बाद से यहां तालिबानी शासन है.

2040 तक भारत की युद्ध शक्ति में जबरदस्त इजाफा, दुश्मन देशों में खलबली

नई दिल्ली दुनिया इस समय खतरनाक दौर से गुजर रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है, गाजा में इजरायल और हमास के बीच खूनखराबा थमने का नाम नहीं ले रहा और कुछ ही महीने पहले भारत-पाकिस्तान भी पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के बाद जंग के मुहाने पर आ गए थे. ऐसे हालात में भारत के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं जैसी क्षमता होना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि मजबूरी भी है. इसी को ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्रालय ने आने वाले 15 सालों के लिए अपनी ‘टेक्नोलॉजी विजन एंड कैपेबिलिटी रोडमैप’ पेश की है. यह रोडमैप साफ बताता है कि 2040 तक भारत की थल सेना, नौसेना और वायुसेना कैसी दिखेगी और किन हथियारों से लैस होगी. यही नहीं सेना 50,000 टैंक-माउंटेड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें, 700 से ज्यादा रोबोटिक IED-रोधी सिस्टम और 6 लाख तोप के गोले खरीदने जा रही है. ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (UAS) भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे, जिससे जमीनी ऑपरेशन और भी तेज और सटीक बन सकेंगे. नौसेना को न्यूक्लियर वॉरशिप और नया एयरक्राफ्ट कैरियर भारतीय नौसेना (Navy) आने वाले 15 सालों में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करेगी. 2022 में INS विक्रांत के शामिल होने के बाद यह दूसरी बड़ी छलांग होगी. नौसेना 10 नेक्स्ट-जनरेशन फ्रिगेट, 7 एडवांस्ड कॉर्वेट्स और 4 लैंडिंग डॉक्स खरीदेगी. सबसे अहम बात न्यूक्लियर पावर से चलने वाले वॉरशिप को मंजूरी मिल गई है. यानी आने वाले वक्त में भारत के जहाज न सिर्फ ताकतवर होंगे, बल्कि लंबे वक्त तक समुद्र में तैनात रह पाएंगे. नौसेना को 100 नए फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और 150 टॉरपीडो भी मिलेंगे, जिनकी मारक क्षमता 25 किमी से ज्यादा होगी. आसमान में अब होंगे स्टेल्थ ड्रोन और हाई-एल्टीट्यूड सैटेलाइट वायुसेना (Air Force) की ताकत अगले 15 सालों में और भी विस्फोटक होने वाली है. योजना के तहत 75 हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट, 150 स्टेल्थ बॉम्बर ड्रोन और सैकड़ों प्रिसिजन-गाइडेड हथियार शामिल किए जाएंगे. साथ ही 100 से ज्यादा रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट तैनात होंगे. इससे भारत की स्काई-डिफेंस मल्टी-लेयर हो जाएगी… जमीन से हवा और हवा से हवा तक हर मोर्चे पर दुश्मन को कड़ी टक्कर मिलेगी. लेजर और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन- भविष्य के युद्ध का असली हथियार रक्षा मंत्रालय की योजना में सबसे खास बात है… लेजर वेपन और डायरेक्टेड एनर्जी सिस्टम. ये ऐसे हथियार हैं जो पारंपरिक गोलियों या मिसाइलों की बजाय ऊर्जा किरणों से दुश्मन को ध्वस्त करते हैं. चीन पहले ही इन्हें अपनी परेड में दिखा चुका है, और अब भारत भी इन्हें तेजी से विकसित करेगा. इसके अलावा सेना को 500 हाइपरसोनिक मिसाइलें भी मिलेंगी, जिनकी स्पीड इतनी तेज होगी कि दुश्मन का कोई भी डिफेंस सिस्टम उन्हें रोक नहीं पाएगा. साथ ही भारत दुश्मन के हाइपरसोनिक हथियारों को पहचानने और नष्ट करने की तकनीक भी खरीदेगा. साइबर डिफेंस और स्पेस सिक्योरिटी नई योजना में साइबर डिफेंस और सैटेलाइट सिक्योरिटी को भी प्राथमिकता दी गई है. आने वाले समय में सैटेलाइट कम्युनिकेशन को ‘साइबर-हार्डनिंग’ से लैस किया जाएगा और स्पेस-बेस्ड लेजर रेंज फाइंडर लगाए जाएंगे. यानी दुश्मन अगर सैटेलाइट्स को निशाना बनाने की कोशिश करेगा तो भारत के पास उसका तोड़ पहले से होगा. ऑपरेशन सिंदूर के बाद आई चेतावनी यह विजन डॉक्यूमेंट ऐसे समय आया है जब कुछ ही महीने पहले अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. इसमें 26 नागरिकों की जान गई थी और भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक वार किए थे. जवाब में पाकिस्तान ने हजारों ड्रोन और रॉकेट भारत की ओर दागे, लेकिन ज्यादातर भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिए. यानी भविष्य की जंग अब सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि हवा, समुद्र, साइबर और स्पेस में भी लड़ी जाएगी. क्यों अहम है यह रोडमैप? रक्षा मंत्रालय का साफ कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और नई टेक्नोलॉजी के बिना आने वाले वक्त में कोई भी युद्ध नहीं जीता जा सकता. यही वजह है कि यह 15 साल की योजना सिर्फ हथियारों की लिस्ट नहीं है, बल्कि भारतीय प्राइवेट इंडस्ट्री और R&D सेक्टर को भी संकेत है कि उन्हें किस दिशा में काम करना होगा. मंत्रालय के मुताबिक, यह रोडमैप देश की निजी कंपनियों और उद्योग जगत को इस काबिल बनाएगा कि वे भविष्य के युद्ध के लिए जरूरी हथियार और तकनीक भारत में ही बना सकें. संक्षेप में कहें तो आने वाले 15 सालों में भारत की सेना टैंक से लेकर लेजर वेपन और हाइपरसोनिक मिसाइलों तक से लैस होगी. दुश्मन चाहे जमीन से हमला करे, आसमान से आए, समुद्र से घुसे या साइबर-स्पेस से चोट करे. भारत की तीनों सेनाएं हर मोर्चे पर तैयार खड़ी होंगी.

ट्रंप का टिम कुक से दो-टूक सवाल, मेहमानों से जानना चाहा इन्वेस्टमेंट प्लान

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलेनिया ने व्हाइट हाउस में टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों को खाने पर बुलाया. ट्रंप ने इस दावत को हाई आईक्यू लोगों का जमावड़ा कहा. इस दावत में खाने के साथ-साथ पॉलिटिक्स, इकोनॉमी, निवेश और नौकरियों पर चर्चा हुई.  डिनर के दौरान ट्रंप ने टेक कंपनियों के मालिकों और सीईओ से पूछा कि वे अमेरिका में कितना निवेश कर रहे हैं.  ट्रंप के दाहिनी ओर बैठे मेटा के मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं. इसके बाद ट्रंप ऐपल के सीईओ टिम कूक की ओर मुखातिब हुए. उन्होंने टिम कूक से पूछा, "और टिम… ऐपल अमेरिका में कितना पैसा लगाएगा? क्योंकि मुझे पता है कि यह बहुत ज़्यादा होने वाला है. और आप जानते ही हैं, आप कहीं और थे, और अब आप सचमुच बड़े पैमाने पर वापस लौट रहे हैं. आप कितना पैसा लगाएंगे?" ट्रंप ने टिम कुक से पूछा, “टिम, आप अमेरिका में कितने पैसे निवेश करने जा रहे हैं? मुझे पता है यह बहुत बड़ी रकम है। आप पहले कहीं और थे, अब आप बड़े पैमाने पर घर लौट रहे हैं। कितना निवेश होगा?” कुक ने जवाब दिया, “600 अरब डॉलर।” साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा, “मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने ऐसा माहौल बनाया जिससे हम अमेरिका में बड़ा निवेश कर सकें। यह आपकी नेतृत्व क्षमता और नवाचार पर ध्यान को दर्शाता है।” भारत पर ट्रंप की आपत्ति हाल ही में ट्रंप ने टिम कुक से नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्हें एप्पल का भारत में प्रोडक्शन बढ़ाना पसंद नहीं है। ट्रंप ने कहा, “मैंने टिम कुक से कहा, मेरे दोस्त, मैंने तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार किया है। अब तुम यहां 500 अरब डॉलर का निवेश करने आ रहे हो, लेकिन सुन रहा हूं कि तुम भारत में भी निर्माण कर रहे हो। मैं नहीं चाहता कि तुम भारत में बनाओ।” एप्पल ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाना शुरू किया है। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में दुनिया भर में बिकने वाले 25 प्रतिशत iPhone भारत में बने। भारत में 6 करोड़ आईफोन बनाने की योजना टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल भारत में अपनी उत्पादन क्षमता को 4 करोड़ यूनिट्स से बढ़ाकर 6 करोड़ यूनिट्स करने के लिए करीब 2.5 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। ट्रंप ने Meta प्रमुख जुकरबर्ग से भी यही सवाल किया, जिस पर उन्होंने कहा, “600 अरब डॉलर।” Google के सुंदर पिचाई ने जवाब दिया, “हम 100 अरब डॉलर से ऊपर हैं। अगले दो वर्षों में यह 250 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।” Microsoft प्रमुख सत्या नडेला ने कहा, “इस साल अमेरिका में हम करीब 75 से 80 अरब डॉलर निवेश करेंगे।” ट्रंप ने सभी की सराहना करते हुए कहा, “बहुत बढ़िया, हम आप पर गर्व करते हैं। बहुत सारी नौकरियां आएंगी।” इस पर टिक कूक ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं.  ट्रंप ने आगे कहा- 600 अरब डॉलर, बढ़िया है, बहुत सारी नौकरियां आएंगी. हमें ऐसा करके बहुत गर्व महससू होगा. आपका बहुत धन्यवाद, मैं इसकी सराहना करता हूं.  इसके बाद ट्रंप गूगल के सुंदर पिचाई से बात की और उनसे पूछा कि वे कितना पैसा अमेरिका में लगा रहे हैं.  सुंदर पिचाई ने कहा, "हम 100 बिलियन डॉलर से काफी ऊपर हैं. अगले दो वर्षों में अमेरिका में यह 250 बिलियन डॉलर हो जाएगा." इस पर ट्रंप ने कहा, "यह बहुत बढ़िया है, यह बहुत बढ़िया है. हमें आप पर गर्व है. शुक्रिया, ढेर सारी नौकरियां." फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला से पूछा कि उनकी कंपनी कितना पैसा अमेरिका में लगा रही है.  अमेरिका के लिए अपना निवेश प्लान बताते हुए सत्या ने कहा कि इस साल हम संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 75 से 80 अरब डॉलर के करीब निवेश करेंगे. ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को भी थैंक्यू कहा. व्हाइट हाइस के स्टेट डाइनिंग रूम में जमी टेक दिग्गजों की इस मीटिंग का सबसे हैरान करने वाला पहलू था- इस डिनर से दुनिया के सबसे अमीर और टेक दुनिया के टायकून एलॉन मस्क का गायब रहना. कभी ट्रंप के खास मित्रों में शामिल रहने वाले एलॉन मस्क और डोनाल्ड के संबंध अब बिगड़ गए हैं और दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते.  इस डिनर में ट्रंप ने मस्क के विरोधी और टेक दुनिया के दूसरे बड़े बिजनेसमैन ओपन एआई के सीईओ सैम अल्टमैन को बुलाया और उन्हें काफी तरजीह दी.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्हाइट हाउस में आयोजित टेक डिनर में भारतीय मूल के सीईओ का जलवा रहा. इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के सत्या नडेला, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोन टेक्नोलॉजीज के सीईओ संजय मेहरोत्रा, TIBCO के चेयरमैन और पैलंटिर के सीटीओ श्याम शंकर शामिल थे.   

भारत ने ट्रंप की टैरिफ धमकी का मुंहतोड़ जवाब दिया, अमेरिका और ईयू के डबल स्टैंडर्ड को उजागर किया

नई दिल्ली पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक कूटनीति और व्यापार के मंच पर एक नया तूफान खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल और हथियार खरीदने के लिए 25% टैरिफ और अतिरिक्त पेनल्टी की धमकी दी है। उनका दावा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुनाफे के लिए बेच रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद मिल रही है। लेकिन यह कहानी उतनी सीधी नहीं है, जितनी दिखाई देती है। भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी का एक बयान फिर से वायरल हो रहा है जिससे इस कहानी में अमेरिका का पाखंड साफ दिख रहा है। गार्सेटी ने पिछले साल कहा था कि अमेरिका खुद चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीदे ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे। तो फिर अब यह पलटवार और धमकियां क्यों? क्या यह अमेरिका का पाखंड है या ट्रंप का कूटनीतिक दोगलापन? आइए, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं। अमेरिका का दोहरा चेहरा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए। इसके परिणामस्वरूप, रूस ने अपने तेल को रियायती दरों पर बेचना शुरू किया। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करता है, उसने इस अवसर का लाभ उठाया। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने में भी योगदान दिया। उस समय अमेरिका ने भारत के इस कदम को न केवल स्वीकार किया, बल्कि इसे प्रोत्साहित भी किया। भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने स्पष्ट कहा था कि भारत का रूस से तेल खरीदना वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए जरूरी है। पिछले साल 2024 में 'कॉन्फ्रेंस ऑन डायवर्सिटी इन इंटरनेशनल अफेयर्स' में बोलते हुए गार्सेटी ने कहा, "भारत ने रूसी तेल इसलिए खरीदा क्योंकि हम चाहते थे कि कोई रूसी तेल को मूल्य सीमा (प्राइस कैप) पर खरीदे। यह कोई उल्लंघन नहीं था, बल्कि यह नीति का हिस्सा था, क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि तेल की कीमतें बढ़ें, और भारत ने इसे पूरा किया।" लेकिन अब वही अमेरिका भारत पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा है। उन्हें यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन के कारण होने वाली मानवीय त्रासदी की कोई परवाह नहीं।" यह बयान न केवल भारत की ऊर्जा नीति को गलत ठहराता है, बल्कि यह भी भूल जाता है कि भारत का यह कदम अमेरिका की सहमति से ही उठाया गया था। भारत की ऊर्जा नीति और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, और रूस उसका सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। 2022 के बाद से भारत की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 35-40% रूस से आता है। यह सस्ता तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हुआ है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पास रूस के अलावा भी तेल आपूर्ति के विकल्प हैं, जैसे सऊदी अरब, इराक, यूएई और ब्राजील। लेकिन रूस से सस्ता तेल खरीदना भारत के राष्ट्रीय हित में है, क्योंकि इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और महंगाई पर अंकुश लगता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत की ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की मजबूरियों पर आधारित है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना अनुचित है, खासकर तब जब ये देश स्वयं रूस से व्यापार कर रहे हैं।" भारत ने आंकड़ों के साथ दिखाया कि 2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच 67.5 अरब यूरो का व्यापार हुआ, जो भारत-रूस व्यापार से कहीं ज्यादा है। यह सवाल उठता है कि जब यूरोप और अमेरिका खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, तो भारत को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? ट्रंप का दोगलापन: भारत बनाम चीन ट्रंप की धमकियों में एक और विरोधाभास साफ दिखता है। वह भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए टैरिफ और पेनल्टी की धमकी दे रहे हैं, लेकिन चीन के मामले में उनकी आवाज अपेक्षाकृत नरम है। चीन रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो रूस के कुल तेल निर्यात का 47% खरीदता है। फिर भी, ट्रंप ने चीन के खिलाफ उतनी सख्ती नहीं दिखाई, जितनी भारत के खिलाफ। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका के लिए चीन एक बड़ा व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी है और ट्रंप शायद चीन के साथ व्यापार युद्ध को और तीव्र नहीं करना चाहते। दूसरी ओर, भारत को एक आसान निशाना माना जा रहा है, क्योंकि भारत-अमेरिका संबंधों में मित्रता का तत्व मजबूत है। अपने मुनाफे के लिए भारत पर निशाना अमेरिका ने यूक्रेन के साथ हाल ही में एक रेयर अर्थ मिनरल्स डील की है, जिसके तहत वह यूक्रेन के विशाल खनिज संसाधनों, जैसे लिथियम, टाइटेनियम और रेयर अर्थ तत्वों, का दोहन करना चाहता है। यह डील अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये खनिज हाई-टेक उद्योगों, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं। अमेरिका का मानना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते इन संसाधनों का खनन मुश्किल हो रहा है, इसलिए वह युद्ध को जल्द खत्म करने की दिशा में कदम उठा रहा है। इस डील के जरिए अमेरिका न केवल अपनी खनिज आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है, बल्कि चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर निर्भरता को भी कम करना चाहता है, जो इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि, जब अमेरिका रूस को सीधे तौर पर प्रभावित करने में असमर्थ रहा, तो उसने रणनीति बदलकर रूस के करीबी सहयोगियों, जैसे भारत, को निशाना बनाना शुरू किया। टैरिफ का भारत पर असर ट्रंप की धमकी अगर हकीकत बनती है, तो भारत को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत हर साल अमेरिका को 83 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात करता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और आईटी सेवाएं … Read more

रूस से तेल पर भारत अडिग, टैरिफ वॉर के बीच ट्रंप को मिला करारा जवाब

नई दिल्ली भारत ने अमेरिका की टैरिफ वाली कार्रवाईयों को नजरअंदाज करते हुए अपने पुराने और भरोसेमंद सहयोगी रूस से तेल की खरीद जारी रखने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत की तेल रिफाइनरियां रूसी कंपनियों से तेल प्राप्त करना जारी रखे हुए हैं। उनके आपूर्ति संबंधी निर्णय कीमत, कच्चे तेल की गुणवत्ता, भंडार, रसद और अन्य आर्थिक कारकों पर निर्भर होते हैं। सूत्रों के अनुसार, रूसी तेल पर कभी कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इसके बजाय, G7 और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा एक मूल्य सीमा व्यवस्था लागू की गई थी ताकि रूस की आय को सीमित करते हुए वैश्विक आपूर्ति को जारी रखा जा सके। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने इस फ्रेमवर्क के तहत 60 डॉलर प्रति बैरल की अधिकतम सीमा का सख्ती से पालन किया है। अब EU ने इसे घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल करने की सिफारिश की है, जिसे सितंबर से लागू किया जाएगा। भारत ने वैश्विक तेल संकट को टाला मार्च 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में अफरातफरी मची थी, तब ब्रेंट क्रूड की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इसी दौरान भारत ने रणनीतिक निर्णय लेते हुए रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद शुरू की, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलन बना रहा और महंगाई को काबू में रखने में मदद मिली। सूत्रों के अनुसार, अगर भारत ने रूसी तेल न खरीदा होता और OPEC+ देशों की उत्पादन कटौती (5.86 mb/d) भी जारी रहती, तो तेल की कीमतें 137 डॉलर से भी ऊपर जा सकती थीं। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और ऊर्जा संकट और गहरा जाता। भारत ने सिर्फ अपने ऊर्जा हितों की रक्षा नहीं की बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाई। इस दौरान भारत ने ईरान और वेनेज़ुएला जैसे उन देशों से तेल नहीं खरीदा, जिन पर वास्तव में अमेरिका के प्रतिबंध लागू हैं।

UK के बाजार में बढ़ेगी भारतीय उत्पादों की मांग, FTA से भारत को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच द्विपक्षीय व्यापर को लेकर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन हो चुकी है. इस समझौते के बाद UK का बड़ा बाजार भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए खुल जाएंगे, जबकि ब्रिटिश प्रोडक्ट्स की भारत में मौजूदगी और बिक्री दोनों बढ़ जाएगी. लेकिन अब अनुमान ये लगाया जा रहा है कि इस डील से किस देश को ज्यादा फायदा होने वाला है, जबकि अभी तो केवल दस्तावेजों पर ही साइन हुए हैं. दरअसल, UK के बीच यह समझौता दोनों देशों के लिए 'Win-Win' वाला सिचुएशन है. लेकिन भारत को दीर्घकालिक लाभ अधिक हो सकता है, क्योंकि इसके एक्सपोर्ट सेक्टर में खासकर MSME और कृषि को वैश्विक बाजार में मजबूती मिलेगी. साथ ही भारतीय प्रोफेशनल के लिए ब्रिटेन में अवसर बढ़ेंगे. अगर यूके की बात करें तो उसे तत्काल आर्थिक राहत और भारतीय बाजार में पहुंच का फायदा होने वाला है. दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 120 अरब डॉलर तक बढ़ाना है, जो इस समझौते का पहला टारगेट है. ब्रिटेन पहले से ही भारत में 36 अरब डॉलर का निवेशक है. इस समझौते से मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में और निवेश की संभावना है.  दोनों देशों के बीच व्यापार टारगेट बता दें, दोनों देशों के बीच साल 2023-24 में व्यापार 4.74 लाख करोड़ रुपये (लगभग 60 अरब डॉलर) का था, और इस समझौते से भारत का निर्यात 60% तक बढ़ सकता है. अनुमान है कि अगले 5 साल में भारतीय गारमेंट्स, चमड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में ब्रिटेन को निर्यात में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस समझौते से 95% से अधिक कृषि और इससे जुड़े खाद्य प्रोडक्ट्स पर शून्य शुल्क लगेगा, जिससे कृषि निर्यात बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी. अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 20% से अधिक की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 2030 तक भारत के 100 अरब डालर के कृषि-निर्यात के लक्ष्य को पूरा करने में योगदान देगा. ब्रिटेन के 90% उत्पादों पर भारत में शुल्क हटाया जाएगा या कम किया जाएगा. ब्रिटेन में भारतीय मसाले, फल-सब्जियां, और हस्तशिल्प सस्ते और अधिक उपलब्ध होंगे. स्कॉच व्हिस्की (150% से 75%, फिर 10 वर्षों में 40%), कारें (100% से 10%), कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन मछली, और मेडिकल डिवाइसेज जैसे उत्पाद भारत में सस्ते होंगे.   किसान के लिए बड़े मौके इससे भारतीय किसानों के लिए प्रीमियम ब्रिटिश बाजार के दरवाजे खुलेंगे, जो जर्मनी, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय संघ के देशों को मिलने वाले फायदे के बराबर या उससे भी अधिक होगा. हल्दी, काली मिर्च, इलायची, अचार और दालों को भी शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. जबकि ब्रिटेन का भारत को निर्यात (व्हिस्की, कारें, मेडिकल उपकरण) भी 60% तक बढ़ सकता है. लक्ष्य ये भी है कि दोनों देशों के बीच व्यापार प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाए, जिससे व्यापार लागत कम होगी. इस डील एक हिस्सा ये भी है कि भारत में कपड़ा, चमड़ा, और रत्न-आभूषण जैसे उद्योगों नौकरिकों के अवसर बढ़ेंगे. MSME सेक्टर विशेष रूप से क्षेत्रीय हस्तशिल्प जैसे कोल्हापुरी चप्पल और बनारसी साड़ी, को ब्रिटेन के बाजार में बढ़त मिलेगी. ब्रिटेन में भी हजारों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर व्हिस्की, ऑटोमोबाइल, और चिकित्सा उपकरण सेक्टर में.  भारत के 99% निर्यात पर ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिसपर फिलहाल 4-16% शुल्क लिए जाते हैं. इससे वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा. विशेष रूप से कृषि और समुद्री उत्पादों (जैसे झींगा, टूना, मसाले, हल्दी, कटहल, बाजरा) पर 95% से अधिक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे अगले 5 वर्षों में कृषि निर्यात में 20% की वृद्धि की उम्मीद है.  मेक इन इंडिया की ताकत उम्मीद की जा रही है कि 5 साल के बाद यह समझौता भारत में 'मेक इन इंडिया' और महिला उद्यमिता को मजबूती देगा, क्योंकि समझौते में लैंगिक समानता और श्रम अधिकारों पर जोर दिया गया है. डील के तहत भारतीय प्रोफेशनल (जैसे आईटी, हेल्थ, योग प्रशिक्षक) को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा और सामाजिक सुरक्षा अंशदान में तीन साल की छूट से लाभ होगा. जबकि 5 साल के बाद करीब 100 अतिरिक्त वार्षिक वीजा और बढ़ी हुई श्रम गतिशीलता से भारतीय युवाओं को ब्रिटेन में अधिक अवसर मिलेंगे. 60,000 से अधिक आईटी पेशेवरों को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा के माध्यम से काम करने में आसानी होगी. आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. साल 2030 तक यानी 5 साल के बाद भारत और ब्रिटेन 'UK-India Vision 2035' के तहत रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, जलवायु, और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे. हालांकि फिलहाल ये यह कहना कि किसे ज्यादा फायदा होगा, ये जटिल है, क्योंकि दोनों देशों को अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे. 

कूटनीति में भारत का संतुलन: अमेरिका की चाहत पर रूस से दूरी नहीं

नई दिल्ली  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध की आड़ में भारत पर निशाना साधा है और खुली धमकी भी दे डाली है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रेसीडेंट ट्रंप चाहते हैं कि जो देश रूस से तेल खरीदेंगे, उन पर पाबंदी लगाई जा सकती है। इससे पहले अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य गठबंधन नाटो यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के महासचिव मार्क रुट ने भारत, ब्राजील और चीन को खुली धमकी दे डाली थी। इससे पहले भारत ने अपना रुख एकदम साफ कर दिया था। भारत ने कहा था कि इस मामले में दोहरा मापदंड नहीं चलेगा। रूस ने हमेशा से ही भारत का साथ दिया है। वह आजादी के समय से ही भारत का साथ देता है। भारत के विकास में रूस का काफी योगदान है। आइए-समझते हैं। भारत ने कहा-दोहरा मापदंड नहीं चलेगा, हमें कोई टेंशन नहीं इन धमकियों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे लोगों के लिए ऊर्जा की जरूरतें पूरी करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हमें इस मामले में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड से बचना चाहिए। वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध संघर्ष और मध्य-पूर्व में तनाव जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवधानों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए सक्रिय रूप से कच्चे तेल के आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक कर दिया है। इसीलिए रूस पर पाबंदी जैसी किसी कार्रवाई से हम चिंतित नहीं हैं। रूस तो फाइटर भी दे रहा है और सोर्स कोड भी WIKIPEDIA के अनुसार, रूस यानी पूर्व सोवियत संघ भारत की स्वतंत्रता के समय से कई मौकों पर भारत के लिए मददगार रहा है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया था, जिससे भारत की स्थिति मजबूत हुई थी। साथ ही शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ भारत का एक प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश था। इससे भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिली। जबकि इन दोनों ही मौकों पर अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया था। ये भारत को भूलना नहीं चाहिए। इसीलिए आज भी भारत अमेरिका के मुकाबले रूस पर ज्यादा भरोसा करता है। हाल ही में रूस ने अपना SU-57 फाइटर जेट देने की पेशकश भी की है और उसका सोर्स कोड भी। वहीं, अमेरिका और फ्रांस कभी भी अपना इंजन और सोर्स कोड देने से कतराते रहे हैं। 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध में दिया साथ विकीपीडिया के मुताबिक, पूर्व सोवियत संघ ने 1971 के युद्ध में भारत का समर्थन किया। उस वक्त भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को पाकिस्तान से आजादी दिलाने में मदद की थी। सोवियत संघ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ किसी भी प्रस्ताव पर वीटो कर दिया, जिससे भारत को अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने में मदद मिली। वहीं, अमेरिका ने 71 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान की मदद के लिए समंदर में अपना जंगी बेड़ा उतार दिया था। शीत युद्ध के दौरान रूस ने दिए हथियार तत्कालीन सोवियत संघ ने शीत युद्ध के दौरान भारत को खूब हथियार दिए। वह भारत के लिए प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश था। इसने भारत को टैंक, विमान, मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरण प्रदान किए, जिससे भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिली। देश के आर्थिक विकास में भी रूसी झलक सोवियत संघ ने भारत को आर्थिक विकास में भी मदद की, विशेष रूप से भिलाई और बोकारो जैसे स्टील फैक्ट्रियों की स्थापना में। इसके अलावा, रूस की योजनाओं की ही तर्ज पर पंचवर्षीय योजनाएं भी शुरू की गई थीं। जो अब जारी नहीं हैं। भारत के विकास में रूसी समाजवाद की झलक भी दिखाई देती है। अंतरिक्ष में भी रूस ने मजबूती से बढ़ाया हाथ पूर्व सोवियत संघ ने 1984 में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा को अंतरिक्ष में भेजने में भी मदद की थी। इसके अलावा, भारत के कई अंतरिक्ष मिशनों के लिए अपने रॉकेट भी दिए। सैटेलाइट विकास में भी जमकर सहयोग किया। दोनों देशों के बीच आज है बहुपक्षीय सहयोग भारत और रूस आज भी संयुक्त राष्ट्र, जी20, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे कई बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का भी समर्थन किया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच संबंध बीच में असहज भी रहे, मगर वो जल्द ही पटरी पर लौट आए। ट्रंप ने क्यों बौखलाए, पहले इसे समझिए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को कहा, अगर 50 दिनों में रूस ने युद्धविराम या शांति समझौते की शर्तें नहीं मानीं, तो उस पर बेहद सख्त टैरिफ और सेकंडरी सैंक्शन लगाए जाएंगे। भारत जैसे देशों की ओर साफ इशारा करते हुए लैविट ने कहा कि जो देश रूसी तेल खरीदेंगे, वो भी इन प्रतिबंधों की चपेट में आएंगे। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि युद्ध का अंत कूटनीतिक समाधान से हो। दरअसल, भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 फीसदी विदेशों से मंगाता है। वह रूस से अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 35.10 प्रतिशत आयात करता है। जबकि यूक्रेन से युद्ध के पहले वह रूस से केवल 2.10 फीसदी कच्चा तेल मंगाता था। नाटो चीफ ने क्यों दी थी ऐसी धमकी इससे पहले NATO के महासचिव मार्क रुटे ने भी भारत, चीन और ब्राजील को खुली चेतावनी दी थी। अगर रूस से व्यापार जारी रहा तो 100 फीसदी टैरिफ और सेकेंडरी सैंक्शन तय हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राजील के राष्ट्रपति हैं और आप रूस के साथ व्यापार करना और उनका तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं, तो आपको यह पता होना चाहिए। अगर मॉस्को में बैठे व्यक्ति ने शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं लिया, तो मैं 100% सेकंडरी सैंक्शन लगाऊंगा।  

टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर फेल, 5 कारणों में छिपी भारत की हार की कहानी

लॉर्ड्स   लॉर्ड्स टेस्ट में टीम इंडिया को रोमांचक मैच में हार का सामना करना पड़ा है. भारत के सामने 193 रनों का लक्ष्य था. लेकिन शुभमन गिल की सेना महज 170 के स्कोर पर ही ढेर हो गई. जडेजा एक छोर पर टिके रहे और नाबाद 61 रनों की पारी खेली लेकिन भारत ये मैच 22 रन से हार गया. इस जीत के साथ इंग्लैंड की टीम 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में अब 2-1 से आगे है. पांचवे और आखिरी दिन भारत को 135 रनों की दरकार थी. जबकि 6 विकेट हाथ में थे. लेकिन पंत, राहुल और रेड्डी समेत कोई भी बल्लेबाज अंग्रेजों के सामने टिक नहीं सका और भारत को हार का सामना करना पड़ा. दोनों टीमों के बीच सीरीज का चौथा मुकाबला 23 जुलाई से मैनचेस्टर में होगा.  भारत की दूसरी पारी की हाइलाइट्स टारगेट का पीछा करते हुए दूसरी पारी में भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही. उसने यशस्वी जायसवाल का विकेट दूसरे ही ओवर में गंवा दिया, जो अपना खाता भी नहीं खोल सके. फिर भारतीय टीम ने खेल के चौथे दिन करुण नायर (14 रन), कप्तान शुभमन गिल (6 रन) और नाइवॉचमैन आकाश दीप (1 रन) का भी विकेट गंवाया. पांचवें दिन भी भारत की खराब लय जारी रही और जडेजा के अलावा कोई भी बल्लेबाज ज्यादा देर तक नहीं टिक सका. इन 5 कारणों में छिपी है लॉर्ड्स में भारत की हार की पूरी कहानी दूसरी पारी में टॉप ऑर्डर रहा फेल लीड्स और बर्मिंघम टेस्ट में शानदार बल्लेबाज़ी करने वाले शुभमन और यशस्वी इस बार दोनों पारियों में सिर्फ 39 रन ही बना सके. करुण नायर, जो पहले दो टेस्ट में एक भी अर्धशतक नहीं बना पाए, इस टेस्ट में 40 और 16 रन बनाकर आउट हुए. ऐसे में राहुल, पंत और जडेजा पर ही सारी उम्मीदें टिकी रहीं. राहुल ने 100 और 39 और जडेजा ने 72 और 61 रन की पारियां खेलीं, लेकिन उन्हें किसी भी बल्लेबाज़ से समर्थन नहीं मिला. पहली पारी की गलतियां पड़ी भारी पहली पारी में भारत 376/6 पर था लेकिन अगले 4 विकेट सिर्फ 11 रन में गिर गए. दूसरी पारी में टीम 193 रन के आसान लक्ष्य का पीछा कर रही थी, लेकिन पहले दिन का अंत 58/4 पर हुआ. पांचवें दिन पहले सत्र में तीन और विकेट सिर्फ 24 रन में गिर गए. 112 रन पर 8 विकेट गिरने के बाद भारत की हार तय हो गई थी. जोफ्रा आर्चर ने बाएं हाथ के बल्लेबाजों को किया परेशान 4 साल बाद टेस्ट क्रिकेट में लौटे जोफ्रा आर्चर ने भारत के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कीं. पहली पारी में उन्होंने यशस्वी को पहली ही गेंदों में आउट किया. दूसरी पारी में उन्होंने यशस्वी, पंत और सुंदर को आउट कर दिया. बाए हाथ के बल्लेबाजों के लिए आर्चर मुश्किल बनते गए. उन्होंने इस मैच में कुल 5 विकेट लिए और कमाल की बात रही की वो सभी विकेट बाए हाथ के बल्लेबाजों के थे. कठिन होती गई पिच लॉर्ड्स की पिच मैच के दौरान लगातार मुश्किल होती गई. पहले दिन जहां 251 रन बने और 4 विकेट गिरे (प्रत्येक 63 रन पर एक विकेट), वहीं पांचवें दिन पहले सत्र में 54 रन पर 4 विकेट गिरे, यानी प्रत्येक 14 रन पर एक विकेट. इसलिए टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करना इंग्लैंड के लिए फायदेमंद साबित हुआ. सिराज का बैडलक एक समय टीम इंडिया का स्कोर 112-8 था. इसके बाद बुमराह और जडेजा के बीच कमाल की साझेदारी हुई. बुमराह ने जडेजा का पूरा साथ दिया. बुमराह ने 54 गेंद खेली और केवल 5 रन बनाए. 147 पर जब बुमराह का विकेट गिरा तो सिराज ने उनका रोल निभाया. सिराज बी 30 गेंद खेल गए. लेकिन आखिर में सिराज का बैडलक उनपर भारी पड़ा और गेंद उनके पैर से टकराने के बाद स्टंप पर लग गई.   शोएब बशीर बचे दोनों टेस्ट से बाहर हो गए  लॉर्ड्स टेस्ट में मिली जीत के बाद मेजबान इंग्लैंड को एक बड़ा झटका लगा है. भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के पहले तीन मैचों में सबसे ज्यादा ओवर फेंकने वाले शोएब बशीर बचे दोनों टेस्ट से बाहर हो गए हैं. बशीर ने सबसे ज़्यादा 140.4 ओवर (844 गेंदें) डाले, जो किसी भी गेंदबाज़ द्वारा सबसे अधिक हैं. हालांकि इंग्लैंड सीरीज में 2-1 से आगे है, लेकिन अधिकतर पहलुओं में भारत ने मेज़बानों को पीछे छोड़ा है, खासकर स्पिन डिपार्टमेंट में. 20 वर्षीय ऑफ स्पिनर, जिन्होंने धीरे-धीरे इंग्लैंड के प्रमुख स्पिनर के रूप में अपनी जगह बनाई थी, को लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट के दौरान बाएं हाथ की उंगली में फ्रैक्चर हो गया. जाने क्यों बाहर हुए शोएब बशीर यह चोट तब लगी जब बशीर ने तीसरे दिन रविंद्र जडेजा का कैच पकड़ने की कोशिश की. गेंद पकड़ते वक्त उनकी उंगली पर चोट लगी और वह मैदान छोड़कर चले गए. इसके बाद वे भारत की पहली पारी में गेंदबाज़ी के लिए नहीं लौटे. शुरुआत में इंग्लैंड टीम प्रबंधन को उम्मीद थी कि वे अगला मैच खेल सकेंगे, क्योंकि भारत की दूसरी पारी में उन्होंने आखिर में गेंदबाजी की और सिराज का आखिरी विकेट भी झटका. लेकिन अब यह पुष्टि हो गई है कि बशीर इस सप्ताह सर्जरी करवाएंगे और सीरीज के बाकी मैचों में हिस्सा नहीं लेंगे. फ्रैक्चर के बावजूद बशीर पूरी तरह मैच से बाहर नहीं रहे. इंग्लैंड की दूसरी पारी में उन्होंने बल्लेबाज़ी की और 9 गेंदें खेलीं. इसके बाद वे पांचवें दिन के अंत में गेंदबाज़ी के लिए भी लौटे. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने ही मैच का अंतिम विकेट लिया. ऐसा रहा है बशीर का प्रदर्शन तीन टेस्ट मैचों में बशीर ने 54.1 की औसत से 10 विकेट लिए. यह प्रदर्शन शानदार तो नहीं रहा, लेकिन वे इंग्लैंड के सबसे अधिक इस्तेमाल किए गए गेंदबाज़ रहे. उन्होंने सीरीज में सबसे ज़्यादा रन (541) भी दिए. अब बशीर की अनुपस्थिति ने इंग्लैंड की योजनाओं को मुश्किल में डाल दिया है. जैक लीच, जो बशीर के आने के बाद प्लेइंग इलेवन से बाहर हुए थे, यदि फिट हैं तो उन्हें वापस लाया जा सकता है. अन्य विकल्पों में रेहान अहमद, टॉम हार्टली और लियाम डॉसन शामिल हैं. वहीं, जैकब बेटेल, जो पहले से स्क्वॉड में … Read more

भारत का बांग्लादेश दौरा टला, श्रीलंका-भारत बोर्डों के बीच बातचीत जारी; अगस्त में 3 वनडे और 3 टी20 मैच हो सकते

मुंबई  भारत और बांग्लादेश (IND vs BAN) के बीच खेली जाने वाली व्हाइट बॉल क्रिकेट को हाल में एक करारा झटका लगा है। 17 अगस्त से दोनों देशों के बीच सफेद गेंद से तीन मैच की वनडे और टी20 सीरीज की शुरुआत होनी थी, लेकिन बांग्लादेश में बिगड़े हालातों को देखते हुए इस सीरीज को अगले साल सितंबर तक स्थगित कर दिया है। अब भारत बांग्लादेश की बजाय श्रीलंका के खिलाफ भारत वनडे और टी20 सीरीज खेलने की प्लानिंग कर चुका है। इसके लिए बीसीसीआई बोर्ड ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड से बातचीत भी शुरू कर दी है।  बांग्लादेश के शेड्यूल पर श्रीलंका के साथ खेलेगी भारतीय टीम! भारतीय टीम (Team India) को 17 अगस्त से बांग्लादेश का दौरा करना था, लेकिन अब इसे आगामी समय के लिए टाल दिया गया है। ऐसे में भारत के पास काफी समय मौजूद है। वहीं, दूसरी तरफ श्रीलंका में खेली जाने वाली प्रीमियर लीग को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। दरअसल, जुलाई और अगस्त में श्रीलंका में श्रीलंका प्रीमियर लीग खेली जाती है जो इस साल यह नहीं होगी, जिसके चलते श्रीलंकाई खिलाड़ी खाली रहेंगे। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच तीन मैच की वनडे और टी20 सीरीज आयोजित करवाई जा सकती है। उम्मीद की जा रही है कि 10 अगस्त से दोनों देशों के बीच टी20 सीरीज खेली जा सकती है। बता दें कि 29 अगस्त से श्रीलंका को जिम्बाब्वे के खिलाफ पहला वनडे मैच खेलना है। Team India को बोर्ड की सहमति का इंतजार टीम इंडिया बनाम श्रीलंका वनडे और टी20 सीरीज का शेड्यूल पहले से तय नहीं था, लेकिन बांग्लादेश दौरा रद्द होने के बाद इस सीरीज का आयोजन करवाया जा सकता है। हालांकि, बीसीसीआई या फिर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की ओर से इसपर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन न्यूज वायर की रिपोर्ट के अनुसार, टीम इंडिया (Team India) श्रीलंका का दौरा कर सकती है। हालांकि, अभी तक इस दौरे का शेड्यूल सामने नहीं आया है, लेकिन अगस्त के अंत में श्रीलंकाई टीम को जिम्बाब्वे का दौरा करना है, जिससे पहले इस सीरीज का आयोजित करवाया जा सकता है और अगस्त से पहले इस सीरीज को खत्म किया जा सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि दोनों बोर्ड के बीच इस व्हाइट बॉल श्रृंखला को लेकर सहमति बनती है या फिर नहीं। 2024 में खेली थी आखिरी सीरीज रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने आखिरी बार श्रीलंकाई सरजमीं पर वनडे सीरीज और टी20 सीरीज खेली थी। जहां टी20 टीम इंडिया (Team India) की कमान सूर्यकुमार यादव संभाल रहे थे और भारत ने उन श्रृंखला को अपने नाम किया था तो रोहित शर्मा की कप्तानी वाली वनडे टीम को सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था। खास बात यह है कि इस सीरीज से ही टीम इंडिया (Team India) के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अपने कार्यकाल की शुरुआत की थी। अब अगर इस दोनों टीमों के टीम सीरीज खेली जाती है तो भारत के पास उस हार का बदला लेने का शानदार मौका होगा। जबकि एक बार फिर वनडे टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली की वापसी होती नजर आएगी। जो फैंस बांग्लादेश दौरे पर रोहित और विराट कोहली को एक बार फिर टीम इंडिया (Team India) में साथ खेलते देखने की चाह रख रहे थे अब उनकी चाहत श्रीलंका टूर पर पूरी हो सकती है। वनडे का संभावित शेड्यूल: मैच तारीख वेन्यू पहला वनडे 19 अगस्त 2025 कोलंबो दूसरा वनडे 22 अगस्त 2025 कोलंबो तीसरा वनडे 25 अगस्त 2025 कोलंबो T20I का संभावित शेड्यूल: मैच तारीख वेन्यू पहला टी20 10 अगस्त 2025 कोलंबो दूसरा टी20 13 अगस्त 2025 कोलंबो तीसरा टी20 16 अगस्त 2025 कोलंबो