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न्याय हुआ पूरा! डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी दोषी, 10 साल की जेल

बड़वानी बड़वानी की तृतीय जिला एवं सत्र न्यायालय ने महिला पटवारी के साथ दुष्कर्म और प्रताड़ना के गंभीर मामले में तत्कालीन एसडीएम (सेंधवा) और वर्तमान उज्जैन डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी अफसर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1 लाख 1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। फैसले के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी डिप्टी कलेक्टर को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस मामले में एफआईआर के बाद फरार होने पर 4 मई 2024 को बड़वानी पुलिस ने खराड़ी को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने उन्हें सस्पेंड किया था। तभी से वह सस्पेंड थे। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अभय सिंह खराड़ी वर्ष 2016 से 2024 के बीच महिला का लगातार यौन शोषण करता रहा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने पद का रसूख दिखाकर 4 से 5 बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। दिसंबर 2023 में आरोपी ने पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी थी। ब्लैकमेलिंग और सिंदूर भरकर तस्वीरें लीं न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी अफसर महिला को मानसिक रूप से भी प्रताड़ित करता था। वह महिला के आने वाले रिश्तों को तुड़वा देता था और फोन पर तेजाब डालने और अपहरण करने की धमकी देता था। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसे बेहोश कर उसकी मांग में सिंदूर भर फोटो खींची थी, ताकि समाज में उसे अपनी पत्नी बताकर बदनाम और ब्लैकमेल कर सके। पत्नी को जान से मारने के आरोप भी लग चुके 31 अक्तूबर 2017 में खराड़ी पर पत्नी को बेहोशी का इंजेक्शन देकर जान से मारने के आरोप भी लगे थे। खराड़ी उस वक्त झाबुआ डिप्टी कलेक्टर थे और पत्नी सुनीता खराड़ी धार जिले के दीनदयालपुरम में रहती थीं। कोतवाली पुलिस ने खराड़ी को बेहोशी की हालत में मिलने पर इलाज करवाया था। सुनीता खराड़ी ने पुलिस को बताया उनके पति ने गुंडे बुलाकर उनके साथ मारपीट की और उसको बेहोशी का इंजेक्शन लगाया। घटना के दिन रात 3 बजे उनके पति ने उनकी दूसरी पत्नी के तीन भाइयों के साथ दो और लोगों को बुलाया। दूसरी पत्नी का मुंह दबा दिया और अपने साथियों के साथ मिलकर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया, जिसके बाद जान से मारने की कोशिश की। कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।  

अयोध्या जेल की सुरक्षा फेल, दो गंभीर आरोपी फरार, 7 अधिकारियों पर कार्रवाई

अयोध्या यूपी के अयोध्या में जिला कारागार से दो बंदी फरार हो गए। दोनों बंदियों ने बैरक मे लगी ग्रिल काट कर बाहर निकले, उसके बाद बांस के सहारे जिला कारागार के पीछे जहां कैमरे का सर्विलांस नहीं था उस क्षेत्र से चारदीवारी फांद कर भाग गए। सूचना पर जिला पुलिस ने तीन टीमों को बनाकर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए। इसमें अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरी पुत्र साधु राम निवासी, मुसाफिरखाना और सुल्तानपुर निवासी शेर अली नाम के बंदी शामिल हैं। दोनों बंदियों के फरार होने की जानकारी पर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली उन्होंने मौका का मुआयना किया। उन लोगों ने जेल के पिछले हिस्से जिस तरफ हरियाली ज्यादा है वहां बांस के ऊंचे पेड़ों के सहारे दीवार फान गए। हमने उनकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमों को लगा दिया है जल्द सफलता मिलेगी। इनमें एक बंदी हत्या के प्रयास के मामले में व दूसरा बलात्कार के आरोप में जेल में निरुद्ध थे। जेल अधीक्षक समेत 7 सस्पेंड अयोध्या जिला कारागार अयोध्या से दो बंदियों के फरार होने पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। डीजी जेल पीसी मीणा ने ऐक्शन लेते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक यूसी मिश्रा को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही जेलर जेके यादव,डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी को भी निलंबित कर दिया है। यही नहीं ड्यूटी पर तैनाती के दौरान लापरवाही पर हेड जेल वॉर्डर व 3 जेल वॉर्डर को भी सस्पेंड कर दिया है। उधर मामले की जांच के लिए डीआईजी जेल ए के मैत्रेय अयोध्या पहुंच गए हैं । कुछ देर पहले ही जिलाधिकारी निखिल टीकाराम एवं एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर भी जेल पहुंच गए। जिला जेल से दो बंदियों के फरार होने के मामले में जांच करने पहुंचे डीआईजी जेल मैत्रीए ने कहा कि दोनों बंदी विशेष चार नंबर बैरक में बंद थे। रोशनदान की ईंट तोड़कर दोनों बाहर निकले थे। मौके से 25 फीट का बांस, 30 फुट की सरिया व कंबल बरामद हुआ है। कंबल की रस्सी बनाकर बाउंड्री वाल कूदे थे दोनों।

भयानक हत्या का खुलासा: चार अपराधियों को उम्रकैद, शिकार का शव निर्मम तरीके से प्रदर्शित

पटना बिहार के रोहतास जिले में प्रेम-प्रसंग में हुई एक बेहद नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने सात साल बाद कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मन्नू कुमार हत्याकांड में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी है। अदालत ने सभी दोषियों पर 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। मृतक की प्रेमिका और उसके परिजन दोषी दरअसल, यह फैसला जिला जज-IV अनिल कुमार की अदालत ने सुनाया है। जिन लोगों को सजा मिली है, उनमें मृतक की प्रेमिका सुमन देवी उर्फ चुमन देवी, उसका पति प्रभाकर सिंह उर्फ प्रकाश चौधरी, उसका भाई फूलचंद और पिता दुधेश्वर चौधरी शामिल हैं। कोर्ट ने इस वारदात को ऑनर किलिंग से जुड़ा, पूर्व नियोजित और अत्यंत क्रूर अपराध बताया। फोन कर बुलाया गया, फिर की गई हत्या अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 मार्च 2019 की शाम सुमन देवी ने मन्नू कुमार को फोन कर घर से बाहर बुलाया। मन्नू बिना बताए घर से निकला लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। अगले दिन 5 मार्च को उसका शव गांव के पास एक सरसों के खेत में मिला, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। फिर मृतक के पिता अशोक चौधरी ने अगरेर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। पोस्टमॉर्टम में सामने आई निर्ममता पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि मन्नू का पेट चाकू से चीर दिया गया था। हत्या के बाद उसके निजी अंग काटकर सरसों के पौधे पर लटका दिए गए थे। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।   ‘इज्जत’ के नाम पर रची गई साजिश अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि प्रेम संबंधों को लेकर पहले गांव में पंचायत भी हुई थी और दोनों को संबंध खत्म करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद मन्नू और सुमन देवी का मिलना जारी रहा। इसे परिवार ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए हत्या की साजिश रची। हत्या से पहले बनी थी पूरी योजना कोर्ट में यह भी साबित हुआ कि हत्या से दो दिन पहले सुमन देवी अपने पति के साथ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से अपने मायके भगवानपुर आई थी। इसके बाद पूरे परिवार ने मिलकर मन्नू को फोन कर बुलाने और उसकी हत्या करने की योजना बनाई। ट्रायल के दौरान कुल नौ गवाहों ने अभियोजन पक्ष के समर्थन में गवाही दी। कोर्ट की सख्त टिप्पणी सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को संदेह से परे साबित किया है। अतिरिक्त लोक अभियोजक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट ने माना कि हत्या का तरीका अत्यंत क्रूर था और इससे समाज में भय, असुरक्षा और अमानवीयता का संदेश गया। इसी कारण दोषियों को अधिकतम सजा दी गई।  

महिला अपराधियों की संख्या में वृद्धि, जानिए दुनिया भर के जेलों में कितनी महिलाएं बंद हैं

 नई दिल्ली  पुरुषों की तुलना में कम संख्या में महिलाओं को जेल भेजा जाता है. इसके बावजूद दुनियाभर के जेलों में महिला कैदियों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में जानते हैं कि मौजूदा समय में दुनिया भर के जेलों में बंद महिला कैदियों की कुल संख्या कितनी है और इस मामले में सबसे आगे कौन सा देश है. साथ ही ऐसा होने के पीछे क्या वजहें हैं, इसे जानने की कोशिश करेंगे.  गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में महिला कैदियोंकी संख्या बढ़ रही है.  महिलाओं को  ज्यादातर मामलों में गैर-हिंसक अपराधों के लिए जेल भेजा जाता है. महिलाओं द्वारा किए गए अपराध अक्सर गरीबी से  जुड़े होते हैं. महिलाएं अक्सर अपने परिवार और बच्चों का भरण-पोषण और जीवित रहने के लिए गैर हिंसक अपराधों में संलग्न हो जाती हैं. इनमें तस्करी से लेकर देह व्यापार तक शामिल होता है.  विश्वभर में कितनी महिलाएं जेल में बंद हैं? अपराध और न्याय नीति अनुसंधान संस्थान (Institute for Crime and Justice Policy Research)के अनुसार, विश्व स्तर पर 733,000 से अधिक महिलाएं और लड़कियां जेलों में बंद हैं. इनमें से कईयों या तो मुकदमे से पहले हिरासत में लिया गया है, कई विचाराधीन कैदी हैं, कुछ दोषी ठहराई गई हैं और कईयों को सजा सुनाया जा चुका है.  माना जाता है कि जेलों में बंद महिलाओं की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि पांच देशों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और चीन के आंकड़े अपुष्ट हैं.राष्ट्रीय जेलों में बंद कैदियों की कुल संख्या में महिलाएं हमेशा अल्पसंख्यक रही हैं.   जेल में तेजी से बढ़ रही है महिलाओं की संख्या जेलों में बंद महिला और पुरुषों की संख्या में  महिलाओं का औसत केवल 2-9% रहा है. यह आंकड़ा 2024 में वैश्विक रूप से बढ़ा. क्योंकि पिछले साल जेल में बंद लोगों में महिलाओं और लड़कियों की हिस्सेदारी मात्र 6.8% पहुंच गई है. जेल जाने के मामले में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक तेजी से बढ़ रही है. वर्ष 2000 से लेकर अब तक, जेल में बंद महिलाओं और लड़कियों की संख्या में लगभग 60% की वृद्धि हुई है – जो पुरुषों की जेल आबादी में लगभग 22% की वृद्धि की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. 2020 के अंत तक पिछले 10 वर्षों में विश्वस्तर पर जेल में बंद महिलाओं की संख्या में 100,000 से अधिक की वृद्धि हुई है. किन देशों में सबसे अधिक महिलाएं जेल में हैं? अगर देश की बात करें तोअमेरिका में महिला कैदियों की संख्या सबसे अधिक है, जो 174,607 है. इसके बाद चीन में 145,000 महिलाएं और लड़कियां जेल में बंद हैं. साथ ही मुकदमे से पहले की हिरासत और प्रशासनिक हिरासत (जब किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के हिरासत में रखा जाता है) में अज्ञात संख्या में महिलाएं और लड़कियां हैं. अमेरिका और चीन के बाद बाद ब्राजील में 50,441, रूस में 39,153, थाईलैंड में 33,057, भारत में 23,772, फिलीपींस में 17,121, तुर्की में 16,581, वियतनाम 15,152, मैक्सिको में 13,841 और इंडोनेशिया में 13,044 महिला कैदी हैं.  इंग्लैंड और वेल्स में 3,566 महिलाएं जेल में हैं – जो कुल कैदियों की संख्या का 4% है , लेकिन अनुमान है कि 2027 तक यह संख्या बढ़कर 4,200 हो जाएगी. यूरोप में 94,472 महिलाएं हिरासत में हैं , जबकि ऑस्ट्रेलिया में 3,473 महिलाएं जेल में हैं, जो कुल कैदियों की संख्या का लगभग 8% है. महिलाओं के जेल जाने के पीछे गरीबी है बड़ी वजह पेनल रिफॉर्म इंटरनेशनल, वीमेन बियॉन्ड वॉल्स और ग्लोबल कैंपेन टू डिक्रिमिनलाइज़ पॉवर्टी एंड स्टेटस द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि कानून जीवनयापन के लिए किए जाने वाले कुछ कृत्यों को अपराध मानते हैं और महिलाएं इससे असमान रूप से प्रभावित होती हैं.  कुछ देशों में, गर्भपात, व्यभिचार, यौन दुराचार और वेश्यावृत्ति को अपराध मानने वाले कानून  महिलाओं को ही प्रभावित करते हैं. इसके अलावा महिलाओं को  कारावास की सजा मिलने की एक वजह आर्थिक रूप से असमर्थता भी है. क्योंकि छोटे-मोटे अपराधों के लिए जुर्माना भरने या जमानत राशि का भुगतान करने में गरीबी की वजह से महिलाएं असमर्थ होती हैं. इस वजह से उन्हें जेल में डाल दिया जाता है.

वीरेंद्र तोमर को पांच दिन की रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा, पुलिस ने जेल भेजने की अर्जी तैयार की

रायपुर पांच महीने की फरारी के बाद ग्वालियर में गिरफ्तार हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर से पुलिस की पूछताछ पूरी हो गई है. पुलिस शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश करगी और न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आग्रह किया जाएगा. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दर्ज दो केस आर्म्स एक्ट और सूदखोरी, ब्लैकमेल और वसूली केस में पूछताछ की है. घर के लॉकर में मिले हथियार को आरोपी ने अपने सुरक्षा गार्ड का बताया है जबकि क्षत्रिय करणी सेना से जुड़े लोगों द्वारा फरारी के दौरान मदद करने की जानकारी उसने दी है. दूसरी तरफ हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर समेत अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है. पीड़ित अब भी डरे हुए हैं इसलिए नहीं कराया आमना-सामना पुलिस ने पूछताछ के दौरान रिपोर्टकर्ता पीड़ितों और आरोपी का आमना-सामना नहीं कराया. बल्कि जब्त एग्रीमेंट, चेक और प्रॉपर्टी के एक-एक दस्तावेजों को लेकर आरोपी से पूछताछ की. पुलिस ने दिए गए कर्ज की राशि, तय ब्याज और वसूली गई राशि से संबंधित दस्तावेजों की भी जानकारी ली है. ताकि उन्हें कोर्ट में पेश किया जा सके. पुलिस का दावा है कि पीड़ित लोग हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर की फरारी के दौरान भी भयभीत रहे हैं. अभी रोहित सिंह तोमर फरार है. उसके खिलाफ चार मामले दर्ज हैं. रोहित तोमर और केस में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज की गई है. पुलिस वालों के घर घुसकर आंदोलन की चेतावनी क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर का जुलूस निकालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई को गलत बताया गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ आकर रायपुर में आंदोलन करने की चेतावनी दी है. साथ ही कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने गलत किया, उनके घर में घुसकर आंदोलन किया जाएगा.

झारखंड HC का आदेश: वासेपुर गैंगस्टर फहीम खान की रिहाई की तैयारी शुरू

रांची वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। पिछले 22 वर्षों से भी अधिक समय से 75 वर्षीय फहीम खान जेल में कैद है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए 6 सप्ताह के भीतर उसे जेल से रिहा करने को कहा है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि छह सप्ताह के भीतर फहीम खान को जेल से रिहा किया जाए। गैंगस्टर फहीम खान की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने पैरवी करते हुए दलील दी कि फहीम की उम्र अब 75 वर्ष से अधिक हो चुकी है। वह 22 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद है। इस दौरान वह दिल और गुर्दे की गंभीर बीमारियों से पीड़ित रहा है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि उसकी उम्र और सेहत को ध्यान में रखते हुए उसे रिमिशन सेंटेंस (सजा में छूट) के तहत रिहा किया जाए। वहीं, अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हेमंत सरकार को यह आदेश पारित किया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद फहीम खान के परिवार में खुशी का माहौल है। उनके बेटे इकबाल खान ने पिता की रिहाई की खबर मिलते ही परिवार के सदस्यों के साथ मिठाई बांटकर जश्न मनाया। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज उन्हें न्याय मिला है। वहीं, बता दें कि फहीम खान इस समय जमशेदपुर स्थित घाघीडीह जेल में बंद है। उसने 29 नवंबर 2024 को झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रिहाई की मांग की थी, लेकिन राज्य सरकार ने इस मामले में एक रिव्यू बोर्ड गठित किया था, जिसमें फहीम खान को 'समाज के लिए खतरा' बताते हुए उसके रिहाई से इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि 1989 में सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या के मामले में फहीम खान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 2009 से वे जेल में बंद थे। 10 मई 1989 की रात सगीर हसन सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में पुलिस ने फहीम खान सहित तीनों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था। इसके बाद 15 जून 1991 को सेशन कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, लेकिन बिहार सरकार ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए फहीम खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी 21 अप्रैल 2011 को हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। गवाहों के अनुसार, सगीर अपने दोस्त आलमगीर के घर के बाहर बैठा था, तभी फहीम खान अपने साथी छोटना उर्फ करीम खान और अरशद के साथ वहां पहुंचा और इसके बाद फहीम ने सगीर के सिर में गोली मार दी थी।  

कफ सिरप की तस्करी का खुलासा: 495 शीशी के साथ 3 आरोपी गिरफ्तार, जेल में होगी दिवाली

बलरामपुर जिले में पुलिस लगातार नशे के अवैध कारोबार और तस्करी पर शिंकजा कस रही है. इसी कड़ी में वाड्रफनगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. यूपी से आ रही लग्जरी कार की चेकिंग के दौरान प्रतिबंधित कफ सिरप और कैश बरामद किया गया है. 3 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है. जानकारी के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली की यूपी के बनारस की ओर से एक लग्जरी इनोवा कार (UP 70 ED 7121) में प्रतिबंधित कफ सिरप परिवहन किया जा रहा है. जिसके बाद नाकेबंदी कर कार को रोका गया, चेकिंग के दौरान 5 कार्टून में 495 शीशी प्रतिबंधित कफ सिरप (मात्रा 49.5 लीटर) मिला. वहीं 73,755 नगद कैश भी बरामद किया गया. पुलिस ने तीन युवकों पर कार्रवाई करते हुए एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 21(ख) के तहत मामला दर्ज किया. सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है. गिरफ्तार आरोपी — नागेश्वर यादव, अतुल यादव, और सुशीत उर्फ पिंटू यादव. सभी सरगुजा के निवासी हैं.

जेल के बाहर युवक की पिटाई का विवादित वीडियो, जेलर और आरक्षक दोषी?

सक्ती उप जेल के बाहर एक युवक के साथ मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में जेलर और तीन आरक्षकों द्वारा युवक की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है. मामले में जेलर ने बताया कि युवक आदतन अपराधी है और नशे की हालत में जेल परिसर पहुंचा था. वह जेल में बंद अपने साथी कैदी से मिलने की जिद कर रहा था. कई बार समझाने के बावजूद जब उसने बात नहीं मानी, तो उसने जेलर पर हमला कर दिया, जिसके बाद जेल प्रबंधन को कार्रवाई करनी पड़ी. घटना की सूचना मिलते ही थाना पुलिस और 112 की टीम मौके पर पहुंची और युवक को थाने ले गई. फिलहाल मामले की जांच जारी है, वहीं वीडियो वायरल होने के बाद जेल प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठने लगे हैं.

दुबई में ट्रॉफी चोरी का मामला तूल पकड़ता गया, नकवी पर गिर सकती है जेल की गाज

दुबई / नई दिल्ली भारत ने मैदान में पसीना बहाकर एशिया कप 2025 जीता, लेकिन ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमा बैठे हैं मोहसिन नकवी! एशियन क्रिकेट काउंसिल के चीफ पर सनसनीखेज़ आरोप है कि उन्होंने विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपने की बजाय उसे होटल ले जाकर ‘हथिया’ लिया. यह हरकत ना सिर्फ खेल भावना के खिलाफ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट की साख पर भी सवाल खड़े कर रही है. बीसीसीआई इस बेशर्मी से तिलमिलाई हुई है और अब दुबई पुलिस में चोरी का मामला दर्ज करवाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सवाल अब ये खड़ा होता है कि क्या एशिया कप की ट्रॉफी अब खेल का सम्मान है या सियासी मोहरा बन चुका है जहां व्यक्तिगत अहम् एक दूसरे पर भारी पड़ रहा है. मोहसिन नकवी पर पुलिस केस! भारत के फाइनल जीते अब 72 घंटे से ज़्यादा हो चुके हैं और मोहसिन नकवी ने ना तो ट्रॉफी भारत को सौंपी है और ना ही उसको एशियन क्रिकेट काउंसिल के दफ़्तर भेजा है.  ACC की बैठक में ज़ोर-शोर से ये विवाद उठा और कई देशों के प्रतिनिधियों ने इसका विरोध भी किया पर मोहसिन नकवी अपनी ज़िद पर अड़े रहे और ट्राफ़ी उनके होटल के कमरे में पड़ी रही. अब बीसीसीआई ने सख़्त क़दम उठाने का मन बना लिया है और वो मोहसिन नकवी पर ट्रॉफी चोरी और जबरन क़ब्ज़ा की शिकायत लिखित रूप से दुबई पुलिस को करने का मन बना चुके हैं . सूत्रों की मानें तो बोर्ड ने मोहसिन नकवी के 72 घंटे का समय दिया है और इस दौरान वे ट्रॉफ़ी ACC के आफिस नहीं पहुँचाते तो अधिकारिक रूप से दुबई पुलिस में केस दर्ज कराया जाएगा और ऐसा होता है तो मोहसिन नकवी कीं गिरफ़्तारी होना तय है और उनको जेल भी जाना पड़ सकता है . मोहसिन नकवी दुबई छोड़कर कर ट्रॉफी के साथ पाकिस्तान ना भाग पाएँ इसके लिए भी बीसीसीआई यूएई में लगातार बात कर रही है. दुबई का क़ानून सख्त है दुबई में अपराध दर कम है और यहाँ के कानून हर तरह की आपराधिक गतिविधि पर सख्त सज़ा का प्रावधान करते हैं.एक कर्मचारी द्वारा नियोक्ता की संपत्ति चुराने पर भी 5 से 7 साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है, और इस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. दुबई में चोरी या जबरन कब्ज़े के लिए सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है, और इसमें कम से कम 6 महीने की कैद से लेकर 3 साल तक की कैद के साथ जुर्माना शामिल हो सकता है. कुछ गंभीर चोरी के मामलों में 3 से 15 साल तक की कैद हो सकती है. यानि यूएई के क़ानून के हिसाब से जाए और मोहसिन नकवी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उनको लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है.

जगदलपुर : केंद्रीय जेल के बंदियों को दी गई स्वरोजगार संबंधी जानकारी

जगदलपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर रजत महोत्सव के तहत विशेष कार्यक्रम के तौर पर जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र जगदलपुर द्वारा केन्द्रीय जेल जगदलपुर में सोमवार को बढ़ई, दर्जी, लोहारी, जूट बैग, मूर्तिकार, प्रिटिंग प्रेस का कार्य सीख रहे बंदियों को भविष्य में स्वरोजगार के क्षेत्र में स्वयं का कुछ व्यवसाय प्रारंभ करने हेतु विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। क्षेत्रीय व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के मुख्य महाप्रबंधक श्री अजीत सुंदर बिलुंग के द्वारा योजनाओं की जानकारी देने सहित भविष्य में आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर समाज के विकास में चलने बंदियों को प्रेरित किया गया। इस दौरान केन्द्रीय जेल के अधिकारी-कर्मचारियों सहित उद्योग विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।