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‘गलतफहमी नहीं होनी चाहिए’—पुतिन के दौरे पर थरूर ने दिया चीन और अमेरिका को सख्त संदेश

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बृहस्पतिवार शाम दो दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। पुतिन करीब चार साल बाद भारत दौरे पर आए हैं। इस अवसर पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत-रूस संबंधों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, रक्षा और सामरिक क्षेत्रों में रूस भारत का विश्वसनीय साझेदार रहा है। थरूर ने कहा कि पुतिन का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारत के लिए अपने पुराने और भरोसेमंद साझेदारों के साथ संबंधों को और मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा- यह बहुत महत्वपूर्ण दौरा है। रूस के साथ हमारा रिश्ता काफी पुराना है और हाल के वर्षों में इसकी अहमियत और बढ़ी है। तेल और गैस के क्षेत्र में रूस हमारे लिए बड़ी आपूर्ति का स्रोत रहा है। वहीं रक्षा सहयोग का महत्व हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आया, जब S-400 सिस्टम ने पाकिस्तान से दागी गई कई मिसाइलों से दिल्ली सहित हमारे शहरों की सुरक्षा की। ‘भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार’ शशि थरूर ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित है और रूस के साथ मजबूत संबंध किसी अन्य देश- चाहे अमेरिका हो या चीन, किसी के साथ संबंधों को प्रभावित नहीं करते। उन्होंने साफ शब्दों में कहा- भारत स्वतंत्र रूप से अपने हितों और साझेदारियों का चुनाव करता है। हमारी संप्रभु स्वायत्तता हमारी नीति की आधारशिला है। किसी को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि रूस के साथ हमारी करीबी किसी अन्य राष्ट्र के साथ संबंधों के खिलाफ जाएगी। दौरे से संभावित समझौते और नई दिशा आज यानी 5 दिसंबर को राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे, जिसमें रक्षा उत्पादन, व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, संस्कृति और मानवीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौते होने की संभावना है। थरूर ने उम्मीद जताई कि यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि अगर इस दौरे में कोई समझौते होते हैं, तो वे इस महत्वपूर्ण साझेदारी को और मजबूत करेंगे। पूर्व राजनयिकों ने भी बताई साझेदारी की अहमियत पूर्व भारतीय राजनयिक अरुण सिंह ने भी भारत-रूस संबंधों की निरंतर प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दशकों से मॉस्को ने राजनीतिक और रक्षा क्षेत्र में भारत का समर्थन किया है और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भी रूस भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों में नई ऊर्जा भर सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक ध्रुवीकरण के बीच नई साझेदारियों और संतुलित कूटनीति की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। रूसी राष्ट्रपति 5 दिसंबर तक भारत में रहेंगे और इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण वार्ताएं और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट

पुतिन–मोदी मुलाकात: वेपन, मिसाइल और S-500 पर क्या बड़ी घोषणाएँ हो सकती हैं? पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट पुतिन–मोदी मीटिंग: न्यूक्लियर रिएक्टर से आर्थिक साझेदारी तक कई अहम मुद्दों पर बात होगी  नई दिल्ली    आज भारत और रूस के बीच 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हो रही है. यह मुलाकात सिर्फ दोस्ती की नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में बड़े सौदों की उम्मीद जगाने वाली है. हथियार, मिसाइलें, फाइटर जेट्स और खासतौर पर रूसी Su-57 फाइटर जेट तथा S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर डिफेंस कंपनियों और विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं.  अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत रूस के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को मजबूत करने को तैयार है. आइए, जानते हैं कि इस सम्मेलन से क्या-क्या उम्मीदें हैं. सम्मेलन का बैकग्राउंड: पुरानी दोस्ती, नई चुनौतियां रूसी राष्ट्रपति पुतिन 4 दिसंबर को दिल्ली पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. यह चार साल बाद पुतिन का भारत दौरा है. सम्मेलन का मुख्य फोकस रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर है. रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, 2024 में भारत के 36 फीसदी हथियार रूस से आए थे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूसी S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन्स को 95 फीसदी नष्ट कर दिया था, जिससे भारत को इसकी ताकत का पता चला. अब भारत और पांच और S-400 यूनिट्स खरीदने की योजना बना रहा है, साथ ही उन्नत S-500 पर बातचीत हो सकती है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि रूस के साथ हमारी रक्षा साझेदारी लंबे समय से चली आ रही है. इस सम्मेलन से सहयोग गहरा होगा. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी पुष्टि की कि S-400 और Su-57 पर चर्चा होगी.  मुख्य ऐलान जिन पर नजरें टिकीं डिफेंस सेक्टर की कंपनियां जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इन ऐलानों से फायदा उठाने को बेताब हैं. यहां हैं प्रमुख मुद्दे… Su-57 फाइटर जेट्स: भारत की पांचवीं पीढ़ी की ताकत रूस का Su-57 (नाटो नाम: फेलॉन) एक स्टील्थ फाइटर जेट है, जो अमेरिकी F-35 का मुकाबला कर सकता है. इसमें सुपरक्रूज, एडवांस्ड रडार और लंबी दूरी की मिसाइलें लगी हैं. भारत को कम से कम दो स्क्वाड्रन (लगभग 84 जेट्स) चाहिए, ताकि वायुसेना की कमी पूरी हो सके. कीमत: प्रति जेट करीब 30 करोड़ डॉलर. रूस 100 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार है, ताकि भारत में ही इन्हें बनाया जा सके. HAL नासिक में प्रोडक्शन हो सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं- यह भारत के स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट का स्टॉप-गैप होगा. क्रेमलिन ने कहा कि यह दुनिया का सबसे अच्छा फाइटर है. हम भारत के साथ जॉइंट प्रोडक्शन चाहते हैं. अगर डील हो गई, तो यह 74 अरब डॉलर का सौदा हो सकता है. S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम: हाइपरसोनिक हमलों का जवाब S-500 'प्रोमिथियस' S-400 से भी आगे है. यह हाइपरसोनिक मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और लोअर ऑर्बिट के सैटेलाइट्स को नष्ट कर सकता है. रेंज: 600 किलोमीटर. भारत को 5.4 अरब डॉलर का सौदा चाहिए, जिसमें 60 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हो. रूस की अल्माज-एंटे कंपनी के साथ जॉइंट प्रोडक्शन की बात चल रही है. अगर यह ऐलान हुआ, तो भारत की एयर डिफेंस सबसे मजबूत हो जाएगी. बीईएल जैसी कंपनियां इससे फायदा उठाएंगी. अन्य हथियार और अपग्रेड: ब्रह्मोस से लेकर टैंक्स तक       S-400 अपग्रेड: बाकी डिलीवरी पर बात, साथ ही 280 अतिरिक्त मिसाइलें (3 अरब डॉलर का डील).       ब्रह्मोस मिसाइल: रेंज बढ़ाकर 800 किलोमीटर, नई जनरेशन ब्रह्मोस-एनजी. दो और रेजिमेंट्स.       Su-30MKI अपग्रेड: 100 जेट्स का बड़ा ओवरहॉल, 7.4 अरब डॉलर. HAL के साथ रूस पार्टनरशिप.       R-37 मिसाइलें: 200 किलोमीटर रेंज वाली एयर-टू-एयर मिसाइलें.       अन्य: स्प्रूट लाइट टैंक्स, पंतसिर सिस्टम, तलवार क्लास फ्रिगेट्स (ब्रह्मोस से लैस) और अकुला क्लास सबमरीन की डिलीवरी (2028 तक).  ये सौदे मेक इन इंडिया को बढ़ावा देंगे, क्योंकि ज्यादातर में लोकल प्रोडक्शन होगा.  डिफेंस सेक्टर पर असर: शेयर बाजार में उछाल की उम्मीद ये ऐलान डिफेंस स्टॉक्स को बूस्ट देंगे. HAL, BDL, मझगांव डॉक और एलएंडटी जैसी कंपनियों के शेयर पहले से ही 5-10 फीसदी ऊपर हैं. विशेषज्ञों का कहना है, अगर Su-57 और S-500 पर डील हुई, तो सेक्टर में 20-30 फीसदी ग्रोथ हो सकती है. भारत की वायुसेना को 42 स्क्वाड्रन चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ 30 हैं. ये डील्स कमी पूरी करेंगी. अमेरिका का दबाव, भारत की आजादी अमेरिका ने CAATSA सैंक्शंस की चेतावनी दी है, लेकिन भारत ने कहा है कि वह अपनी जरूरतें खुद तय करेगा. पुतिन ने कहा कि मोदी ने अमेरिकी दबाव नहीं माना. यह डील चीन और पाकिस्तान को भी संदेश देगी. ऊर्जा क्षेत्र में भी बात होगी: रूस भारत को सस्ता तेल देगा. रुपे-मीर पेमेंट सिस्टम को लिंक किया जाएगा.  मजबूत साझेदारी का नया अध्याय पुतिन-मोदी मुलाकात भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगी. यह सिर्फ हथियारों का सौदा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप है. विशेषज्ञ कहते हैं कि ये ऐलान दक्षिण एशिया की सैन्य संतुलन बदल देंगे. पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली में हैं. भारत के दौरे में पुतिन कई अहम समझौतों पर पीएम मोदी के साथ बात करेंगे. जिसमें दुनिया के बदलते पावर बैलेंस, यूरोप और अमेरिका के साथ तनाव और भारत के साथ मजबूत संबंधों के फ्यूचर ब्लूप्रिंट सबपर पुतिन ने खुलकर बात की. रूस की राजधानी मॉस्को के क्रेमलिन में  इंटरव्यू में व्लादिमीर पुतिन ने हर एक सवाल का बेबाकी से जवाब दिया. दुनिया के लिए सख्त संदेश और भारतीयों को दोस्ती का पैगाम देते पुतिन ने इस इंटरव्यू में ये 10 मैसेज दिए. बदलते वैश्विक समीकरण और भारत का महत्व 1. दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और वक्त के साथ उसके बदलने की रफ्तार तेज होती जा रही है. ये बात सब जानते हैं. नये समीकरण और नये पावर सेंटर बन रहे हैं. इन समीकरणों पर प्रभाव डालने वाली शक्तियां भी समय के साथ बदल रही हैं. ऐसे हालात में … Read more

इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)

अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा है- लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)     महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   गोरखपुर गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी जी (से.नि.) शामिल हुए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी  वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और  स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।   उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ही महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की। यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं।  अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि देशभक्ति केवल देश की सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, इमानदारी से अपने कर्यव्यों का निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनान सच्ची देशभक्ति हैं। अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे नौजवानों को चुनती है जो जीवन में अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरी मानते हैं। अनुशासन ही सफलात की सीढ़ी है। उन्होंने शिक्षा परिषद की प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं को भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया और कहा की हार और जीत निर्णायक नहीं है प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना सबसे जरूरी है। असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है, असफलता ही हमें सफलता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन का प्रसंग और परिणाम की चिंता किए बगैर कर्व्यपालन करने के भागवत् गीता के श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीकि, एआई, रोबोटिक्स के प्रति भी छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में केवल एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी। लेकिन हमें ये याद रखना है कि विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।

पुतिन दिल्ली में करेंगे बड़ी डील, पश्चिम से टकराव पर चर्चा, पांच लेयर सुरक्षा के बीच भारत पहुंचे राष्ट्रपति

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा आज से शुरू हो रही है और दिल्ली इस हाई-प्रोफाइल विजिट के लिए पूरी तरह तैयार है. यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है, इसलिए कूटनीतिक, सुरक्षा और लॉजिस्टिक स्तर पर बेहद सख्त व्यवस्थाएं की गई हैं. शहर के कई हिस्सों में उनके स्वागत के लिए फ्लेक्स बोर्ड और रूसी झंडे लगा दिए गए हैं, जबकि ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा कवच पहले से लागू कर दिए गए हैं. पुतिन की यात्रा के कारण ट्रैफिक डायवर्जन पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सीधे सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल जाएंगे. इस दौरान एनएच–S, धौला कुआं और दिल्ली कैंट के आसपास ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है. शाम को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें प्राइवेट डिनर पर होस्ट करेंगे, जिसके कारण सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग और शांति पथ के आसपास भी वाहनों की आवाजाही धीमी रहेगी. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन दावा किया है कि ट्रैफिक को लंबी अवधि तक ब्लॉक नहीं रखा जाएगा. शुक्रवार को हालात और चुनौतीपूर्ण होंगे क्योंकि पुतिन का पूरा दिन लगातार कार्यक्रमों से भरा है. सुबह वह राजघाट जाएंगे, इसके बाद हैदराबाद हाउस में औपचारिक बैठकें होंगी. दोपहर में भारत मंडपम् में कार्यक्रम तय है, जबकि शाम को राष्ट्रपति भवन में स्टेट बैंक्वेट का आयोजन होगा. इन गतिविधियों के चलते राजघाट, आईटीओ, रिंग रोड, तिलक मार्ग, इंडिया गेट, भैरो रोड, मथुरा रोड, मंडी हाउस और दिल्ली गेट जैसे इलाकों में ट्रैफिक रुक-रुक कर चलता रह सकता है. जरूरत पड़ने पर कुछ मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है. पुतिन की सिक्योरिटी कैसी होगी? इधर सुरक्षा इंतजाम भी अपनी चरमसीमा पर हैं. पुतिन की हर विदेश यात्रा की तरह इस दौरे में भी उनकी सुरक्षा के लिए मल्टी-लेयर कवच तैयार किया गया है. पांच-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में NSG कमांडो, स्नाइपर्स, जैमर, ड्रोन सर्विलांस और AI आधारित निगरानी तकनीक तैनात की गई है. महत्वपूर्ण जगहों पर हाई-टेक फेशियल रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं. 40 से ज्यादा रूसी सुरक्षा अधिकारी दिल्ली पहुंचकर NSG और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर काफिले की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं. पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान एसपीजी का विशेष सुरक्षा घेरा भी सक्रिय रहेगा. इस यात्रा को भारत-रूस संबंधों के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है. शुक्रवार को होने वाली 23वीं वार्षिक शिखर बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी है. राजधानी में तैयारियों की रफ्तार और सुरक्षा का स्तर बताता है कि यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है. रूस को 10 लाख मजदूरों की जरूरत, पुतिन दिल्‍ली में करेंगे बड़ी डील इस दौरे पर पुतिन भारत के साथ मजदूरों को लेकर इजरायल की तरह से ही बड़ी डील कर सकते हैं। दोनों देश सामाजिक और मजदूरों से जुड़े मुद्दे पर सहयोग करेंगे। रूस की योजना है कि 10 लाख विदेशी मजदूरों की भर्ती की जाए। इसमें भारत भी शामिल है। रूस लेबर म‍िनिस्‍ट्री का मानना है कि साल 2030 तक देश में मजदूरों की यह कमी 31 लाख तक पहुंच सकती है। विश्‍लेषकों का कहना है कि रूसी के हजारों युवा यूक्रेन युद्ध में मारे जा चुके हैं और देश के फिर से निर्माण के लिए अब लाखों लोगों की जरूरत है। वह भी तब जब रूस में आबादी कम हो रही है और लोग बच्‍चे कम पैदा कर रहे हैं। रूसी राष्‍ट्रपति ने देश में बच्‍चे पैदा करने पर भारी आर्थिक सहायता मुहैया कराने का ऐलान किया है। रूस में अब तक मध्‍य एशिया के देशों से लाखों रूसी बोलने वाले लोग काम करने जाते रहे हैं लेकिन इससे मास्‍को को सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस होता रहा है। यही वजह है कि रूस अब 7 लाख से ज्‍यादा मध्‍य एशिया के विदेशी मजदूरों से मुक्ति पाना चाहता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत तब तेज हुई जब मास्‍को में मार्च 2024 में आतंकी हमला हुआ। पश्चिम से टकराव गहरा होगा? PM Modi से इन मुद्दों पर होगी चर्चा अमेरिका का दबाव और रूस के साथ मजबूरी यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत पर अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल आयात घटाए और अमेरिकी उत्पादों व रक्षा उपकरणों के लिए अपने बाजार खोले. वहीं दूसरी तरफ रूस भारत के लिए सस्ता तेल, हथियारों की सप्लाई और रणनीतिक सुरक्षा का बड़ा स्रोत बना हुआ है. GTRI के मुताबिक, “पुतिन की यह यात्रा शीत युद्ध की याद में की जा रही कोई औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि यह जोखिम, सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा को लेकर सीधी बातचीत है. यह किसी एक पक्ष को चुनने की नहीं, बल्कि टूटती वैश्विक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की रणनीति है.” भारत-रूस रिश्तों की ऐतिहासिक मजबूती भारत और रूस की दोस्ती की जड़ें शीत युद्ध के दौर तक फैली हैं. 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया और USS एंटरप्राइज भेजा. तब सोवियत संघ ने भारत को हथियार, कूटनीतिक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र में समर्थन दिया. 1962 के चीन युद्ध के बाद भी रूस भारत के साथ खड़ा रहा. 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद जब पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तब भी रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बना रहा. आज भी भारत के 60 से 70% सैन्य प्लेटफॉर्म रूसी तकनीक पर आधारित हैं। तीन स्तंभों पर टिका भारत-रूस रिश्ता GTRI के अनुसार, आज भारत-रूस संबंध तीन मुख्य स्तंभों पर टिके हैं— 1- ऊर्जा (Energy)     रूस अब भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है.     2024 में रूस से भारत की कुल तेल खरीद का हिस्सा 37% से ज्यादा रहा.     2021 में जहां भारत ने रूस से सिर्फ 2.3 अरब डॉलर का तेल खरीदा था.     वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 52.7 अरब डॉलर पहुंच गया.     यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल सस्ते दामों पर एशियाई बाजारों की ओर मुड़ गया, जिससे भारत को भारी फायदा हुआ.  2- रक्षा (Defence) … Read more

मुख्यमंत्री ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती पतये हर हर महादेव से सम्बोधन की शुरुआत की

मुख्यमंत्री ने वाराणसी में ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का शुभारम्भ किया, शुभारम्भ कार्यक्रम में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती  पतये हर हर महादेव से सम्बोधन की शुरुआत की प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में तमिल पावन कार्तिक मास में काशी  तमिल संगमम् के चतुर्थ संस्करण का आयोजन ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’  के उनके संकल्प को सुदृढ़ करने और जीवन्त बनाने वाला : मुख्यमंत्री  काशी तमिल संगमम् भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बना काशी तमिल संगमम् की थीम ‘लर्न तमिल’ अर्थात ‘तमिल करकलाम, आओ तमिल सीखें’ यह पहल प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ज्ञान, संस्कृति और भाषा के  माध्यम से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को और सुदृढ़ करेगी  उ0प्र0 सरकार ने वोकेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में तमिल, कन्नड़, मलयालम,  तेलुगू , मराठी और बंगाली भाषाओं को पढ़ाए जाने की व्यवस्था की श्री रामेश्वरम धाम, मदुरई और कन्याकुमारी का दर्शन करने के लिए प्रदेश के  श्रद्धालुओं के लिए विशेष यात्रा का आयोजन उ0प्र0 का पर्यटन विभाग करेगा त्रिवेणी संगम के जल से रामेश्वरम के श्री रामनाथ स्वामी और कोडीतीर्थम के जल  से श्री काशी विश्वनाथ के अभिषेक की परम्परा हर माह नियमित रूप से आगे बढ़ रही आई0आई0टी0 मद्रास और बी0एच0यू0 की संयुक्त शिक्षा योजनाएं  बौद्धिक और राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरक कदम अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर परिसर में महर्षि अगस्त्य का  मन्दिर बनकर तैयार, उनकी भव्य प्रतिमा की स्थापना हो चुकी  दक्षिण भारत में श्रीराम की भक्ति का गान करने वाले सन्त त्यागराजा, सन्त पुरन्दर दास और सन्त अरुणाचल कवि की प्रतिमाएं बृहस्पति कुण्ड, अयोध्या में स्थापित हुईं विगत 04 वर्षों में 26 करोड़ से अधिक श्रद्धालु काशी में पधारे भारत एक बहुभाषी देश, हमें एक दूसरे की सांस्कृतिक  विविधताओं का सम्मान करना चाहिए : केन्द्रीय शिक्षा मंत्री मुख्यमंत्री तथा केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने श्री काशी विश्वनाथ  मन्दिर एवं श्री काल भैरव मन्दिर में दर्शन-पूजन किया लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज वाराणसी के नमो घाट पर ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान भी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी0पी0 राधाकृष्णन का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। मुख्यमंत्री जी ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों से युक्त दण्डक्रम पारायण को बिना किसी रुकावट के 50 दिनों में पूरा करने वाले 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। ज्ञातव्य है कि ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का आयोजन केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों की भागीदारी से किया जा रहा है। आई0आई0टी0 मद्रास तथा बी0एच0यू0 संगमम् के नॉलेज पार्टनर हैं।  मुख्यमंत्री जी ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के साथ अपने सम्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने उनगालाई काशीयिल वरावेरकिरोम अर्थात काशी में सभी का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में तीनों लोकों में न्यारी, मोक्षदायिनी भगवान शिव की पावन नगरी, आनन्द कानन और सर्वविद्या की राजधानी अविमुक्त क्षेत्र काशी में तमिल कार्तिक मास की पावन अवधि में काशी तमिल संगमम् के चतुर्थ संस्करण का आयोजन हो रहा है। यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के उस संकल्प को सुदृढ़ करने और जीवन्त बनाने वाला है, जो प्रधानमंत्री जी ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर देशवासियों को दिया था। मुख्यमंत्री जी ने रामेश्वरम की पावन धरा से पधारे सभी तमिल भाइयों और बहनों का प्रदेश सरकार की ओर से अभिनन्दन किया।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि काशी और तमिल के पुराने सम्बन्धों के केन्द्र में भगवान शिव हैं। इस सम्बन्ध सेतु को आदि शंकराचार्य जी ने भारत के चार कोनों में पवित्र पीठ स्थापित कर आगे बढ़ाया। उत्तर प्रदेश में आपका यह प्रवास काशी की शिव भक्ति, प्रयागराज के पवित्र संगम और अयोध्या में धर्म ध्वजा आरोहण के उपरान्त प्रभु श्रीराम के दिव्य दर्शन का अद्वितीय और आध्यात्मिक सौभाग्य प्रदान करने वाला होगा। यह आयोजन उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक, शैक्षिक, आर्थिक और आध्यात्मिक साझेदारी को सशक्त करते हुए भारत के उज्ज्वल भविष्य के नए द्वार खोल रहा है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस बार काशी तमिल संगमम् की थीम ‘लर्न तमिल’ अर्थात ‘तमिल करकलाम, आओ तमिल सीखें’ है। यह पहल प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ज्ञान, संस्कृति और भाषा के माध्यम से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को और सुदृढ़ करेगी। तमिल करकलाम कार्यक्रम तमिल भाषा सीखने के लिए हमारे छात्रों को एक नया प्लेटफार्म उपलब्ध करा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश सरकार ने वोकेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में तमिल, कन्नड़, मलयालम, तेलुगू , मराठी और बंगाली भाषाओं को पढ़ाए जाने की व्यवस्था की है। राज्य के वोकेशनल एजुकेशन के छात्र अपनी रुचि के अनुसार किसी एक भाषा का चयन करेंगे, सरकार उसका पूरा खर्च उठाएगी।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस आयोजन का महत्व इस वर्ष तेनकाशी, तमिलनाडु से प्रारम्भ हो रही उस यात्रा से और बढ़ जाता है, जो सड़क मार्ग से कार रैली के माध्यम से 2000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा तय करते हुए काशी की पवित्र धरती पर पहुंचने वाली है। यह यात्रा पांड्य वंश के महान शासक हरिकेसरी परिक्किराम पांड्यिम की यात्रा की पुनःस्मृति है। शिव मन्दिर और तेनकाशी की कथा सांस्कृतिक इतिहास में अंकित है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में चल रहा काशी तमिल संगमम् अभियान ज्ञान, साधना, सांस्कृतिक एकता और हमारी साझा भारतीय सभ्यता को एक नई ऊंचाई पर स्थापित करेगा। ‘अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवन्तिका। पुरी द्वारावती चैव सप्तैते मोक्षदायकाः।’ यह सभी तीर्थ स्थल मोक्ष प्रदान करने वाले पावन तीर्थ हैं। महर्षि अगस्त्य द्वारा रचित आदित्य हृदय स्त्रोत भगवान सूर्य की स्तुति है, जिसे उन्होंने रावण से युद्ध करने से पहले भगवान श्री राम को सुनाया था। महर्षि अगस्त्य, आदि गुरु शंकराचार्य, संत तिरुवल्लुवर, जगतगुरु रामानुजाचार्य, सर्वपल्ली डॉ0 राधाकृष्णन ने दक्षिण की धरा से निकलकर सम्पूर्ण भारत में ज्ञान का प्रकाश स्थापित किया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नयनार और अलवार की शैव-वैष्णव भक्ति परम्परा तमिल सभ्यता की आध्यात्मिक समृद्धि को दर्शाती है। कैलाश, काशी तथा चिदम्बरम अपराजित शिव भक्ति के प्रतीक … Read more

India Plan-B on Tariff: ट्रंप की चाल हुई फेल, मोदी सरकार की रणनीति ने किया बड़ा असर

ट्रंप टैरिफ की हवा निकाल दी! मोदी सरकार के प्लान-B ने बचाई भारतीय अर्थव्यवस्था—जानें कैसे हुआ कमाल India Plan-B on Tariff: ट्रंप की चाल हुई फेल, मोदी सरकार की रणनीति ने किया बड़ा असर मोदी सरकार का प्लान-B आया काम, ट्रंप टैरिफ का असर किया बेअसर—भारत ने ऐसे पलट दिया खेल   नई दिल्ली यह कहना कि अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव पूरी तरह असफल हो गया, थोड़ी जल्दबाजी होगी. लेकिन ये तो अब कहा ही जा सकता है कि भारत ने अमेरिकी टैरिफ का तोड़ निकाल लिया है. दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े बता रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर ट्रंप की दबाव नीति काम नहीं आई.  दरअसल, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.2% रही, जो कि उम्मीद से बढ़कर है. क्योंकि RBI ने 6 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया था. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने भी 7.0-7.6 फीसदी के बीच जीडीपी ग्रोथ रहने का भरोसा जताया था, यानी हर पैमाने पर भारतीय अर्थव्यवस्था में बेहतर करती दिख रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग में 9.1% और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7.2% उछाल देखने को मिली है. सर्विस-सेक्टर का भी शानदार प्रदर्शन रहा है. अमेरिका ने थोपा एकतरफा टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रणनीति अब फेल होती नजर आ रही है, ट्रंप ने भारत में एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोप दिया, उन्हें लगा है कि टैरिफ के दबाव में भारत झुक जाएगा, और वो अपनी बातें मनवाने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और अब उसका परिणाम भी दिख रहा है कि ट्रंप की दबाव नीति की हवा निकल चुकी है. बड़ेबोले ट्रंप ने तो भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डैड इकोनॉमी' तक करार दे दिया था.  लेकिन हकीकत में भारतीय अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए ट्रंप ने चाल चली थी, उसे सरकार ने अपने प्लान-बी से फ्लॉप कर दिया, और भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ती जा रही है. इसी कड़ी में दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े ट्रंप की दबाव नीति को करारा जवाब है. कहा तो ये भी जा रहा है कि तीसरी तिमाही में और बेहतर जीडीपी के आंकड़े आ सकते हैं.  क्या है भारत का प्लान-B अब आइए जानते हैं कि आखिर भारत ने ऐसा क्या किया, जिससे ट्रंप टैरिफ बेअसर हो गया. दुनिया जानती है कि खपत के लिहाज भारत आज के दौर में सबसे बड़ा बाजार है, हर कोई इस बाजार में प्रवेश करना चाहता है. क्योंकि भारत में डिमांड बनी हुई है. यही देश की सबसे बड़ी ताकत है.  दरअसल, बात बेनतीजा होने के बाद अमेरिका ने जिस तरह से भारत पर रूसी तेल खरीदने का बहाना बनाकर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया, उसी दिन से भारत ने अपना प्लान-B को जमीन पर उतारने के लिए काम करना शुरू कर दिया. टैरिफ के शुरुआत असर को कम करने के लिए भारत ने काफी हद तक घरेलू मांग, निवेश और नीतियों पर फोकस किया. इसी कड़ी में आयकर में छूट (12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं) की व्यवस्था लागू की गई.  टैरिफ से विदेशी मांग थोड़ी मंद पड़ी, लेकिन इस बीच घरेलू खपत, निर्माण और सेवाएं तेज हो रही हों, जिससे GDP में कम असर दिखना स्वाभाविक है. टैरिफ को बेअसर करने के लिए सरकार ने खपत, कैपेक्स और रिफॉर्म पर जबरदस्त काम किया, जिसे आप Plan-B कह सकते हैं.  एकसाथ उठाए गए कई कदम सरकार की रणनीति दोतरफा रही, एक घरेलू मांग को बरकरार रखना और निवेश को प्रोत्साहित करना. अमेरिकी टैरिफ से निर्यात सेक्टर प्रभावित हुआ, जो अभी भी कुछ हद तक जूझ रहे हैं. लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस की ताकत से GDP मजबूत बनी हुई है. अमेरिकी टैरिफ का इकोनॉमी पर कम प्रभाव के लिए ब्याज दरों में कटौती, और जीडीपी दरों में बदलाव जैसे भी कदम उठाए गए, जिससे घरेलू डिमांड को ताकत मिली.  बता दें, सितंबर महीने में भारत का कुल निर्यात 6.75% बढ़ा, जबकि अमेरिका को भेजे गए सामान में 11.9% की गिरावट दर्ज की गई. यह दर्शाता है कि भारत ने अमेरिका-व्यापार निर्भरता को कम कर दूसरे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है. रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) की रिपोर्ट को मानें, तो अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक के टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अपना एक्सपोर्ट को बढ़ाने में सफल रहा है.  अमेरिकी विकल्प के तौर पर करीब 50 नए देशों से भारत की बातचीत चल रही है.  

प्रधानमंत्री मोदी ने गोवा में दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम प्रतिमा का किया अनावरण

कनकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा के पर्तगाली (कनकोण) स्थित श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में भगवान श्रीराम की 77 फीट ऊंची विश्व की सबसे बड़ी राम प्रतिमा का अनावरण किया. यह भव्य प्रतिमा मशहूर मूर्तिकार राम सुतार ने बनाई है, जिन्होंने 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' भी डिजाइन किया था. यह कांस्य प्रतिमा 77 फीट ऊंची है, जो इसे भगवान राम की अब तक की सबसे ऊंची स्थापित प्रतिमा बनाती है. अनावरण के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ अपनी स्थापना की 550वीं वर्षगाठ मना रहा है. बीते 550 वर्षों में इस संस्था ने समय के कितने ही चक्रवात झेले हैं. युग बदला, दौर बदला, देश और समाज में कई परिवर्तन हुए लेकिन बदलते युगों और चुनौतियों के बीच इस मठ ने अपनी दिशा नहीं खोई, बल्कि मठ लोगों को दिशा देने वाला केंद्र बनकर उभरा और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है.' इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह के दौरान मठ परिसर में स्थित मंदिर के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. यह मठ भारत के सबसे पुराने मठवासी संस्थानों में से एक है, जो अपने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान के लिए जाना जाता है और सारस्वत समुदाय में एक प्रमुख स्थान रखता है. मठ का जीर्णोदार श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ, गौड़ सारस्वत ब्राह्मण समुदाय का पहला वैष्णव मठ माना जाता है. यह मठ 13वीं शताब्दी में जगद्गुरु माधवाचार्य द्वारा स्थापित द्वैत वेदांत परंपरा का अनुयायी है. इसका मुख्यालय दक्षिण गोवा के पर्तगाली कस्बे में, शांत कुशावती नदी के किनारे स्थित है, जहां यह सदियों से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है. गोवा लोक निर्माण विभाग मंत्री दिगंबर कामत ने बताया कि सदियों से आध्यात्मिक केंद्र के रूप में कार्यरत मठ परिसर का पूरी तरह से जीर्णोद्धार किया गया है और इसे आधुनिक रूप दिया गया है. समारोह में गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विवाह पंचमी पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में किया ध्वजारोहण

सदियों के घाव भर रहे, वेदना विराम पा रही और संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहाः पीएम मोदी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विवाह पंचमी पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में किया ध्वजारोहण  अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैः प्रधानमंत्री  सदियों और सहस्रशताब्दियों तक यह धर्म ध्वज प्रभु राम के आदर्शों व सिद्धातों का उद्घोष करेगाः प्रधानमंत्री अयोध्या  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या धाम में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज के आरोहण समारोह में अपने विचार रखे। पीएम मोदी ने अपनी भावनाओं का आगाज ‘सियावर रामचंद्र की जय, जय सियाराम’ से किया। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिंदु की साक्षी बन रही है। आज संपूर्ण भारत व विश्व राममय है। हर रामभक्त के हृदय में अद्वितीय संतोष, असीम कृतज्ञता, अपार अलौकिक आनंद है। सदियों के घाव भर रहे हैं। सदियों की वेदना आज विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही। जो यज्ञ एक पल भी आस्था से डिगा नहीं, एक पल भी विश्वास से टूटा नहीं, आज भगवान श्रीराम मंदिर के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा,  श्रीराम का दिव्य प्रताप इस धर्मध्वजा के रूप में दिव्यतम, भव्यतम मंदिर में प्रतिष्ठापित हुआ है।  धर्मध्वज भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धर्मध्वज केवल ध्वज नहीं, यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ओम शब्द व अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। यह ध्वज संकल्प, सफलता और संघर्ष से सृजन की गाथा है। यह ध्वज सदियों से चले आ रहे सपनों का साकार स्वरूप है। यह ध्वज संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। सदियों और सहस्रशताब्दियों तक यह धर्म ध्वज प्रभु राम के आदर्शों व सिद्धातों का उद्घोष करेगा। यह धर्मध्वज आह्वान करेगा कि जीत सत्य की ही होती है, असत्य की नहीं। धर्मध्वज उद्घोष करेगा कि सत्य ही ब्रह्म का स्वरूप है, सत्य में ही धर्म स्थापित है। यह धर्मध्वज प्रेरणा बनेगा ‘प्राण जाय पर वचन न जाई’ अर्थात जो कहा जाए, वही किया जाए। यह धर्मध्वज संदेश देगा कि ‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा’ अर्थात विश्व में कर्म व कर्तव्य की प्रधानता हो। धर्मध्वज कामना करेगा कि भेदभाव, पीड़ा-परेशानी से मुक्ति मिले और समाज में शांति व सुख हो। मंदिर के ध्येय का प्रतीक है धर्म ध्वज  प्रधानमंत्री ने कहा कि धर्मध्वज संकल्पित करेगा कि हम ऐसा समाज बनाएं, जहां गरीबी, दुख या लाचारी न हो। हमारे ग्रंथों में कहा गया है कि जो लोग किसी कारण मंदिर नहीं आ पाते और दूर से ध्वज को प्रणाम कर लेते हैं, उन्हें भी उतना ही पुण्य मिल जाता है। धर्म ध्वज भी मंदिर के ध्येय का प्रतीक है। य़ह ध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा और युगों-युगों तक प्रभु श्रीराम के आदेशों व प्रेरणाओं को मानव तक पहुंचाएगा। पीएम मोदी ने करोड़ों रामभक्तों के साथ ही राम मंदिर निर्माण के लिए सहयोग देने वाले दानवीरों, श्रमवीरों, योजनाकारों, वास्तुकारों का आभार जताया।  अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यही वह नगरी है, जहां से श्रीराम ने जीवनपथ शुरू किया था। इसी अयोध्या ने संसार को बताया कि एक व्यक्ति कैसे समाज की शक्ति व संस्कारों से पुरुषोत्तम बनता है। जब श्रीराम अयोध्या से वनवास गए तो वे युवराज राम थे, लेकिन जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर आए। उनके मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषादराज की मित्रता, मां शबरी की ममता, भक्त हनुमान के समर्पण के साथ ही अनगिनत लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।  भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है राम मंदिर का दिव्य प्रांगण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत बनाने के लिए समाज की सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है। यहां सप्त मंदिर, मां शबरी, निषादराज गुह्य का भी मंदिर है। यहां एक ही स्थान पर मां अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य और संत तुलसीदास हैं। रामलला के साथ-साथ इन ऋषियों के भी दर्शन यहीं होते हैं। जटायु व गिलहरी की मूर्ति भी बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती है।  राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं  पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर आस्था के साथ मित्रता, कर्तव्य व सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को शक्ति देते हैं। हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें मोक्ष नहीं, मूल्य प्रिय है। उन्हें शक्ति नहीं, सहयोग महान लगता है। आज हम भी इसी भावना से आगे बढ़ रहे हैं। 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अतिपिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। जब देश का हर व्यक्ति, वर्ग, क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा। 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, तब सबके प्रयास से ही हमें विकसित भारत का निर्माण करना होगा।  हमें आने वाले दशकों व सदियों को ध्यान में रखकर कार्य करना होगा  पीएम मोदी ने कहा कि रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर राम से राष्ट्र के संकल्प की चर्चा करते हुए मैंने कहा था कि आने वाले एक हजार वर्षों के लिए भारत की नींव मजबूत करनी है। जो सिर्फ वर्तमान की सोचते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। हमें वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के बारे में सोचना है। जब हम नहीं थे, यह देश तब भी था, जब हम नहीं रहेंगे, यह देश तब भी रहेगा। हमें दूरदृष्टि के साथ ही काम करना होगा। हमें आने वाले दशकों, सदियों को ध्यान में रखना ही होगा।  हमें प्रभु राम के व्यवहार को करना होगा आत्मसात   पीएम मोदी ने कहा कि हमें प्रभु राम और उनके … Read more

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकेत हैलीपेड पर किया प्रधानमंत्री का स्वागत

अयोध्यावासियों ने जयश्रीराम, जय जय हनुमान के जयकारे संग पुष्पवर्षा से प्रधानमंत्री का किया स्वागत  राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकेत हैलीपेड पर किया प्रधानमंत्री का स्वागत  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करने मंगलवार को अयोध्या पहुंचे प्रधानमंत्री  अयोध्या  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के जरिए ‘संकल्प सिद्धि’ के लिए रामनगरी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। जयश्रीराम, जय जय हनुमान के गगनभेदी नारों संग अयोध्यावासियों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर पुष्पवर्षा भी की। श्रीराम की अयोध्या ने प्रधानमंत्री का पूरे रास्ते में अभूतपूर्व स्वागत किया। अयोध्यावासियों के एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे हाथ में तिरंगा फहरा रहा था। वहीं स्वागत से अभिभूत प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। अयोध्या पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।  अयोध्यावासियों के एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे में तिरंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह अयोध्या पहुंचे। साकेत महाविद्यालय पर उनका हेलीकॉप्टर उतरा। वहां से काफिले संग टेढ़ी बाजार होते हुए उन्होंने श्रीराम मंदिर परिसर में प्रवेश किया। इस दौरान अयोध्यावासियों ने जयश्रीराम, जय जय हनुमान के गगनभेदी नारों संग उनका स्वागत किया। अयोध्यावासी एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे हाथ में तिरंगा फहराते हुए प्रधानमंत्री का स्वागत करते रहे। प्रधानमंत्री ने भी पूरे रास्ते में हाथ हिलाकर अयोध्यावासियों का अभिवादन किया।  सप्त मंदिरों में झुकाया शीश, की पूजा-अर्चना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सप्त मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह्य और माता शबरी मंदिर में पहुंचकर प्रधानमंत्री ने शीश झुकाया। प्रधानमंत्री ने शेषावतार मंदिर व माता अन्नपूर्णा मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया।  मुख्यमंत्री व राज्यपाल ने किया प्रधानमंत्री का स्वागत  प्रधानमंत्री अयोध्या में साकेत विश्वविद्यालय हैलीपेड पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की तरफ प्रस्थान किया। प्रधानमंत्री व सर संघ चालक ने रामलला के दरबार में झुकाया शीश  श्री राम मंदिर परिसर में राम दरबार पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दर्शन-पूजन व आरती की। यहां पुजारियों ने तीनों विशिष्टजनों को राम नामी गमछा ओढ़ाया व प्रसाद दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने विधिविधान से पूजन-अर्चन कर रामलला का भी आशीर्वाद प्राप्त किया।

मोदी सरकार का बड़ा कदम: साउथ राज्यों की मांगों को ध्यान में रखते हुए परिसीमन पर बनाया जा रहा प्लान

 नई दिल्ली देश में लोकसभा और विधानसभा की सीटों के राष्ट्रव्यापी परिसीमन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस परिसीमन के आधार पर लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा महिला आरक्षण भी इसी के आधार पर लागू होगा। परिसीमन के लिए भौगोलिक क्षेत्र के साथ ही आबादी को भी आधार माना जाता रहा है और उसके अनुसार ही सीटों का आवंटन होता रहा है। लेकिन बीते कुछ सालों से तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल समेत दक्षिण भारत के सभी राज्यों की ओर से चिंता जताई जाती रही है कि उनकी सीटों का अनुपात कम हो सकता है। इसकी बजाय यूपी, बिहार जैसे राज्यों की लोकसभा सीटों का अनुपात और बढ़ सकता है, जो पहले ही अधिक है। दक्षिण भारत के राज्यों की ओर से यह चिंता जताई जाती रही है कि यदि आबादी के अनुपात को आधार मानते हुए सीटों का आवंटन हुआ तो हमें नुकसान होगा। यही नहीं उत्तर भारत से तुलना करते हुए साउथ के कई नेता कहते रहे हैं कि हमने यदि फैमिली प्लानिंग को अच्छे से लागू किया और आबादी पर नियंत्रण पाया तो उसके लिए परिसीमन में सीटों का अनुपात घटाकर सजा नहीं मिलनी चाहिए। अब जानकारी मिल रही है कि केंद्र सरकार ने दक्षिण भारत के राज्यों की इन चिंताओं पर विचार किया है। खबर है कि सीटों की संख्या भले ही परिसीमन के बाद बढ़ेगी, लेकिन उसके अनुपात में बदलाव नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ है कि साउथ के राज्यों की राजनीतिक शक्ति जस की तस रहेगी। परिसीमन को लेकर जिन प्रस्तावों पर विचार चल रहा है, उनमें से एक यह है कि विधानसभा की सीटों को जनगणना के आंकड़ों के अनुसार बढ़ा दिया जाए। लेकिन राज्यसभा के सदस्यों की संख्या अभी जैसी ही रखी जाए। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस प्रस्ताव को लेकर सरकार का मानना है कि विधानसभा की सीटें बढ़ाना किसी राज्य का आंतरिक मामला है। इसके अलावा राज्यसभा की सीटें तो संसद में सभी राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए ही हैं। ऐसे में लोकसभा की सीटों का अनुपात सही रखना होगा ताकि किसी राज्य को बढ़त मिलती ना दिखे और कोई राज्य कमजोर भी ना नजर आए। अब तक हुए 4 परिसीमन, 23 साल में क्या-क्या बदल गया इस पर विचार करते हुए कुलदीप नैयर बनाम भारत सरकार वाले केस का भी जिक्र अधिकारियों ने किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्यसभा का मुख्य काम लोकसभा द्वारा लिए गए फैसलों को चेक करना है। इसका एकमात्र अर्थ प्रतिनिधित्व से नहीं है। फिलहाल इस संबंध में एक ऐक्ट बनेगा और फिर परिसीमन होगा। इससे पहले देश में 1952, 1962, 1973 और 2002 में परिसीमन हो चुके हैं। तब से अब तक परिसीमन नहीं हुआ है और इस बीच देश की आबादी और उसके अनुपात में बड़ा बदलाव है। एक अहम चीज यह है कि बीते 23 सालों में शहरी आबादी कहीं ज्यादा हो गई है। इसे लेकर भी सरकार विचार कर रही है कि ग्रामीण इलाकों का प्रतिनिधित्व प्रभावित ना हो।