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सूत्रों का दावा: CM नीतीश कुमार 30 तारीख को विधान परिषद से इस्तीफा दे सकते हैं

पटना  बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने की अटकलें तेज हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं. बताया जा रहा है कि 29 मार्च तक विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही अवकाश पर है, जिसके बाद 30 मार्च सोमवार को वे अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।  बिहार में कौन होगा अगला मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार नालंदा के बिहारशरीफ स्थित सर्किट हाउस पहुंचे और मीडिया से बातचीत में कहा कि 9 अप्रैल तक का समय है, उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. उन्होंने यह भी कहा कि नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला एनडीए की बैठक में लिया जाएगा और नीतीश कुमार की इच्छा के अनुसार ही अगला मुख्यमंत्री चुना जाएगा. हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर केवल अटकलें ही लगाई जा रही हैं।  नियम क्या कहते हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद राज्यसभा जा रहे हैं. सवाल यह है कि वह राज्यसभा में कब शपथ लेंगे. राज्यसभा का मौजूदा सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा. उम्मीद है कि वह इसी दौरान शपथ ले सकते हैं. ऐसे में उनका दिल्ली जाना भी तय माना जा रहा है. संविधान के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति राज्यसभा का सदस्य बनता है, तो उसे 14 दिनों के अंदर अपनी राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से माना जा रहा है कि नीतीश कुमार को 30 मार्च तक विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।  कब सामने आएगा अगले मुख्यमंत्री का नाम नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. 14 दिनों के अंदर इस्तीफा नहीं देने पर नियमानुसार राज्य सभा की सदस्यता खुद खत्म हो जाती है. नए सीएम की बात की जाए तो, माना जा रहा है कि खड़मास खत्म होने के बाद, यानी 14 अप्रैल के बाद ही नई सरकार को लेकर फैसला हो सकता है. फिलहाल मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. हालांकि, पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार इशारों में सम्राट चौधरी का नाम आगे बढ़ाते नजर आए हैं। 

नीतीश कुमार की यात्रा ने बढ़ाई सियासी हलचल: राज्यसभा चुनाव से पहले निशांत की अलग राह क्यों?

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब से राज्यसभा जाने का एलान किया है, तब से बिहार की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार चर्चा के केंद्र बिन्दु में हैं। जनता दल यूनाईटेड में शामिल होने के बाद निशांत कुमार बिहार की यात्रा पर निकलेंगे। वह अपनी यात्रा की शुरुआत चंपारण से करेंगे। वह अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए बिहार भ्रमण करने की तैयारी में हैं। 10 से 13 मार्च तक कोसी-सीमांचल की यात्रा इधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 से 13 मार्च तक कोसी-सीमांचल की यात्रा पर निकलने की तैयारी में है। शनिवार को वह बख्तियारपुर गए थे। उनके बॉडी लैंग्वेज से एक बार भी नहीं लगा कि बिहार से दूर होना चाहते हैं। ऐसे में उनके दौरे से सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गए हैं। सीएम 10 मार्च को सुपौल में समृद्धि यात्रा पहुंचेंगे। इसके बाद मधेपुरा, किशनगंज, अररिया, कटिहार, पूर्णिया में कार्यक्रम करेंगे। इसके बाद सहरसा और खगड़िया में कार्यक्रम का प्लान बना है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान ने बढ़ाई टेंशन जनता दल यूनाईटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि जदयू के सभी नेताओं की भारी मांग पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जदयू ज्वाइन कर रहे हैं। सभी विधायकों, कार्यकर्ताओं की इच्छा से मुख्यमंत्री से आग्रह किया। लंबी मांग के बाद सहमति दी उन्होंने। भाजपाई सीएम के लिए तैयार हैं आप? इस सवाल के जवाब में उमेश कुशवाहा ने कहा कि एनडीए के नेता हमारे नेता नीतीश कुमार हैं। नीतीश कुमार को जनादेश मिला है। नई सरकार का गठन कब होगा? इस सवाल के जवाब में उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार ने इस्तीफा तो दिया नहीं है। नई सरकार की गठन की चर्चा अभी कहां! जब समय आएगा, तब जनादेश हासिल करने वाले नीतीश कुमार तय करेंगे कि सीएम कौन होगा? कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार ने कुछ सोच-समझ कर राज्यसभा के लिए नामांकन किया है। 

नीतीश चले दिल्ली: बिहार की सियासत में बड़ा मोड़, क्या भाजपा संभालेगी सीएम की कुर्सी?

पटना बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का समापन होने जा रहा है। महज 105 दिन पहले 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का बिहार की सत्ता छोड़ना राज्य में पीढ़ीगत बदलाव का अंतिम चरण है। उनके इस फैसले ने न केवल जदयू के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी- भाजपा के लिए बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके खुद यह जानकारी दी है। नीतीश के राज्यसभा जाने का मतलब है राज्य की सत्ता में बहुत कुछ बदलने जा रहा है। राज्य में नई सरकार बनेगी। महज 105 दिन पहले दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं नीतीश के कुर्सी छोड़ने से बिहार के लिए और क्या-क्या बदल जाएगा? 1. पहली बार बिहार की सत्ता की बागडोर संभाल सकती है भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन की बात कहने के साथ ही यह तय हो गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। बीते नवंबर राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली थी। 89 सीटें जीतकर भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद भी चुनाव पूर्व किए वादे के मुताबिक, राज्य की बागडोर 85 सीटें जीतने वाले जदयू के नीतीश कुमार के हाथ में आई। नीतीश के सत्ता संभालने के महज 105 दिन बाद यह तय हो गया है कि बिहार में नीतीश राज का अंत होने जा रहा है। इसके साथ ही इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।   2. हिंदी हार्टलैंड का आखिरी किला फतह करेगी भाजपा 1980 में अपने जन्म के साथ ही भाजपा को हिंदी भाषी राज्यों की पार्टी के रूप में पहचना मिली। बीते साढ़े चार दशक में पार्टी दो लोकसभा सीट से 300 से अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बन चुकी है। एक समय देश के 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार रही। अभी भी पार्टी 20 राज्यों की सत्ता में हिस्सेदार है। इन सबके बावजूद हिंदी हार्टलैंड की पार्टी कही जाने वाली भाजपा देश के दूसरे सबसे बड़े हिंदी भाषी राज्य में अब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है। इसके अलावा अन्य हिंदी भाषी राज्यों की बात करें तो यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश की सत्ता में भाजपा दो या दो से ज्यादा बार से सत्ता में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी ने पांच साल बाद फिर से सत्ता में वापसी की है। राजधानी दिल्ली में भी 27 साल बाद पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, झारखंड में भी पार्टी अपना मुख्यमंत्री बना चुकी है।  बिहार इकलौता हिंदी भाषी राज्य है जहां भाजपा अब तक अपना मुख्यमंत्री बनने का इंतजार कर रही है। 3. नौवीं बार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे नीतीश नीतीश कुमार बीते दो दशक के बिहार की सत्ता का पर्याय बने हुए हैं। इस दौरान उनकी पार्टी राज्य की पहले नंबर की पार्टी रही हो या तीसरे नंबर की मुख्यमंत्री नीतीश ही बनते रहे। 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले नीतीश का पहला कार्यकाल महज सात दिन का रहा था। इसके बाद 2005 में राज्य के मुख्यमंत्री बने नीतीश ने अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया। 2010 में उन्होंने प्रचंड जीत के साथ तीसरी बार शपथ ली, लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। दरअसल, भाजपा ने जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किया तो नीतीश ने अपनी राह बदल ली। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी अकेले उतरी और बुरी तरह हारी। पार्टी को राज्य की 40 में से महज दो सीटों पर जीत मिली। इस हार के बाद नीतीश ने कुर्सी छोड़ दी और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। महज नौ महीने बाद नीतीश ने फिर से सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले ली। इसके बाद 2015 का विधानसभा चुनाव नीतीश ने अपने धुर विरोधी लालू यादव के साथ मिलकर लड़ा और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 2017 में उन्होंने फिर से भाजपा का दामन थाम लिया और एक बार फिर राज्य की बागडोर संभाली। 2020 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद फिर से नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, जबकि उनकी पार्टी सीटों के लिहाज से राज्य में तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। 2022 में नीतीश ने फिर से लालू का साथ पकड़ा और फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2024 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले नीतीश फिर से भाजपा के साथ आ गए और फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2025 में विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश ने 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने महज 105 दिन बाद यह तय हो गया कि नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। शायद ये आखिरी बार भी होगा। 4. बिहार की सियासत में पीढ़ीगत बदलाव आपातकाल के दौर में बिहार की सियासत में कई युवा चेहरे उभरे। ये चेहरे दशकों तक बिहार की सियासत का पर्याय रहे। लालू प्रसाद यादव, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, शरद यादव, नीतीश कुमार इनमें सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे। इन चेहरों में से रामविलास पासवान, सुशील मोदी और शरद यादव का निधन हो चुका है। लालू यादव चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने के बाद से सक्रिय सियासत से दूर हैं। अब इस पीढ़ी के आखिरी बड़े चेहरे नीतीश के दिल्ली जाने के साथ ही बिहार की सियासत में एक पीढ़ी का लगभग अंत हो जाएगा। 5. बीस साल से बिहार की सत्ता में काबिज जदयू पहली बार बैक सीट पर होगी पिछले बीस साल और चार चुनाव से बिहार की सत्ता की बागडोर जदयू के हाथ में है। अब अगर राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है तो जदयू के गठन के बाद यह पहली बार होगा जब जदयू सहयोगी के रूप में बिहार की सत्ता में होगी। 6. दूसरी बार जदयू का शीर्ष नेता बिहार की सत्ता का हिस्सेदार नहीं होगा ये दूसरा मौका होगा जदयू सत्ता की … Read more

मुख्यमंत्री नितीश ने नववर्ष की दी शुभकामनाएँ

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश एवं देशवासियों को नये वर्ष 2026 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें दी हैं। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि वर्ष 2026 समस्त बिहारवासियों एवं देशवासियों के लिए सुख, शान्ति, सद्भाव, समृद्धि एवं अनंत सफलताओं का वर्ष होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया है कि आनेवाले वर्ष में बिहार देश ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकेगा। उन्होंने कहा है कि नववर्ष में सबके सम्मिलित प्रयास से सुखी, समृद्ध एवं गौरवशाली बिहार के निर्माण का संकल्प पूरा होगा।

नीतीश कुमार ने किए विभागों का वितरण, सुनील को मिला उच्च शिक्षा, संजय टाइगर को रोजगार कौशल

 पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में गठित किए गए तीन नए विभागों का कैबिनेट में बंटवारा कर दिया है। सीएम ने सिविल विमानन अपने पास रखा है। वहीं, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। श्रम संसाधन मंत्री संजय सिंह टाइगर को रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। राज्य में नई सरकार के गठन के बाद नीतीश सरकार ने इन तीन नए विभागों का गठन किया था। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने नए विभागों के मंत्रियों के बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। नीतीश सरकार में जेडीयू कोटे से मंत्री सुनील कुमार के पास अब कुल 3 विभाग हैं। शिक्षा के अलावा वे विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री का जिम्मा पहले से संभाल रहे हैं। उन्हें उच्च शिक्षा विभाग भी मिल गया है। वहीं, भाजपा कोटे से मंत्री संजय सिंह टाइगर के पास अब कुल दो विभाग हो गए हैं। उनके पास श्रम संसाधन विभाग पहले से था, जिसका हाल ही में नाम बदलकर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग किया गया है। अब उन्हें युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का मंत्री भी बना दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी और निर्वाचन विभाग पहले से है। अब उनके पास सिविल विमानन विभाग भी आ गया है। साथ ही ऐसे सभी विभाग जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं हैं, उनकी जिम्मेदारी भी सीएम के पास ही है। बता दें कि पिछले महीने राज्य में एनडीए की नई सरकार के गठन के बाद नीतीश कुमार ने अपने सबसे अहम माने जाने वाला गृह विभाग छोड़कर भाजपा को दे दिया था। भाजपा ने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को बिहार का नया गृह मंत्री बनाया था। बीते दो दशक से यह विभाग सीएम के पास ही रहा था।

बिहार में औद्योगिक और तकनीकी विकास की तैयारी, नीतीश सरकार का बड़ा रोजगार योजना

पटना  बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के युवाओं के लिए एक बड़े लक्ष्य की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि सरकार ने अगले पांच वर्षों, यानी 2025 से 2030 के बीच, 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराना शुरू से ही उनकी सरकार की प्राथमिकता रही है। उन्होंने दावा किया कि सात निश्चय-2 के तहत 2020-25 के बीच 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार दिया गया है। अब इस लक्ष्य को दोगुना करते हुए नई कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। ‘नीतीश सरकार का प्लान विकसित बिहार’ अगले 5 साल में 1 करोड़ नौकरी, औद्योगिक विकास और टेक्नोलॉजी हब बनाने का खाका किया तैयार टेक्नोलॉजी और उद्योग पर फोकस नीतीश कुमार ने बताया कि राज्य में ‘न्यू ऐज इकोनॉमी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रौद्योगिकी और सेवा आधारित नवाचारों पर केंद्रित होगी। इस विजन को साकार करने के लिए बिहार को पूर्वी भारत के नए ‘टेक्नोलॉजी हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत राज्य में कई बड़ी परियोजनाओं की स्थापना की योजना है, जिनमें शामिल हैं:     डिफेंस कॉरिडोर     सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क     ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स     मेगा टेक सिटी     फिनटेक सिटी सरकार का लक्ष्य बिहार को एक ‘वैश्विक बैक-एंड हब’ और ‘ग्लोबल वर्क प्लेस’ के रूप में स्थापित करना है, जिसके लिए विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की मदद से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।     “बिहार की जनसंख्या में युवाओं की भागीदारी काफी अधिक है। इसको सार्थक दिशा देने पर बिहार देश का सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्य बन सकता है।” — नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की भी जानकारी दी। यह समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में काम करेगी। समिति का मुख्य कार्य उद्योगों को बढ़ावा देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, समिति योजनाओं को तेजी से लागू करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेगी। चीनी मिलों से लेकर AI मिशन तक औद्योगिक विकास के साथ-साथ सरकार ने पारंपरिक उद्योगों को भी पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। इसके लिए राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना और पुरानी बंद पड़ी मिलों को फिर से चालू करने के लिए एक नई नीति और कार्ययोजना बनाई गई है। इसके अलावा, राज्य के प्रमुख शहरों को सुंदर बनाने और नई तकनीकों का उपयोग कर बिहार को अग्रणी बनाने हेतु ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन’ की भी स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में कहा, “बिहार की नवनिर्वाचित नई सरकार दुगुनी ताकत से राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग लगाने हेतु कृतसंकल्पित है। जो काम हमलोग शुरू करते हैं, उसे पूरा करते हैं।”     राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार मिले, ये शुरू से ही हमलोगों की प्राथमिकता रही है। सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020-25 के बीच राज्य में 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दिया गया है। अगले 5 वर्षों (2025-30) में हमलोगों ने 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं…

नई बिहार सरकार में बीजेपी ने जेडीयू को पीछे छोड़ा, मंत्रियों की संख्या में हासिल बढ़त

 नई दिल्ली बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए सरकार बन गई है. नीतीश कुमार ने सीएम, तो सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. नीतीश कैबिनेट में दोनों डिप्टी सीएम सहित 26 मंत्री बनाए गए हैं, जिसमें जेडीयू से ज्यादा बीजेपी कोटे से मंत्री बने हैं. इस तरह मंत्रिमंडल के नंबर गेम में फिलहाल बीजेपी आगे निकल गई है. क्या मंत्रियों को विभागों के बंटवारे में भी बीजेपी अपनी गठबंधन सहयोगी जेडीयू पर भारी पड़ेगी या फिर नीतीश कुमार का रहेगा होल्ड? नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार में फिलहाल 26 मंत्री बनाए गए हैं. बीजेपी कोटे से 14 मंत्री, जेडीयू से 8 मंत्री, एलजेपी (आर) के 2, आरएलएम और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से एक-एक मंत्री बने हैं. ऐसे में कैबिनेट के गठन में जेडीयू से करीब दोगुना मंत्री बीजेपी के बनाए गए हैं. हालांकि, नीतीश सरकार में 9 मंत्री पद अभी भी खाली है, जिन्हें बाद में भरा जाएगा. बिहार में एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद अब बारी मंत्रालय के विभागों के बंटवारे की है. नीतीश सरकार में कौन सा मंत्रालय किस मंत्री को मिलेगा, इस पर लोगों की निगाहें लगी हुई हैं. खासकर गृह, वित्त, ऊर्जा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण जैसे मंत्रालय को हाईवेट माना जाता है. बीजेपी मंत्रियों के नंबर गेम में जिस तरह से आगे निकली है, क्या उसी तरह से विभागों के बंटवारे में भी उसका वर्चस्व बरकरार रहेगा? अध्यक्ष पद के लिए जेडीयू और बीजेपी के बीच खींचतान कई दिनों तक चलती रही. बाद में स्पीकर पोस्ट बीजेपी के हिस्से में जाने की बात सामने आई है. माना जा रहा है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार को स्पीकर बनाया जा सकता है, क्योंकि उन्होंने गुरुवार को मंत्री पद की शपथ नहीं ली. अब बारी मंत्रालय के विभागों के बंटवारे की है. ऐसे में सबसे ज्यादा निगाहें गृह और वित्त मंत्रालय पर है. नीतीश क्या गृह मंत्रालय अपने पास रखेंगे नीतीश कुमार बिहार की सत्ता जब से संभाल रहे हैं, तब से गृह मंत्रालय अपने पास रखे हुए हैं. विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से ही गृह विभाग को लेकर बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दावे कर रही हैं. 2024 में नीतीश महागठबंधन से नाता तोड़कर दोबारा से एनडीए के साथ आए थे तो उस समय शपथ ग्रहण के पांच दिनों के बाद तक विभागों का बंटवारा नहीं हो सका था. बीजेपी की लाख कोशिश के बावजूद नीतीश कुमार गृह विभाग अपने पास रखने में कामयाब रहे थे. गृह मंत्रालय के जरिए ही नीतीश कुमार ने सुशासन बाबू वाली अपनी छवि बनाने में कामयाब रहे. नीतीश कुमार इसी यूएसपी के सहारे आरजेडी के जंगल राज के तिलिस्म को तोड़ा. कानून-व्यवस्था,पुलिस प्रशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण जैसे मामलों पर सीधी पकड़ रखने के लिए गृह विभाग को छोड़ना नहीं चाहते हैं. बीजेपी की नजर लंबे समय से इसी गृह विभाग पर है, जिसे लेकर 2024 में जेडीयू के साथ कई दिनों तक बार्गेनिंग करती रही. उस समय बात नहीं बनी, लेकिन अब देखना है कि इस बार गृह मंत्रालय किसे मिलता है. स्वास्थ्य, वित्त और शिक्षा मंत्रालय पर नजर गृह मंत्रालय ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य, वित्त, शिक्षा और लोक निर्माण जैसे हाईवेट मंत्रालय पर भी लोगों की नजर है. नीतीश कुमार 2005 से ही गृह मंत्रालय अपने पास रखते हैं तो वित्त मंत्रालय बीजेपी कोटे से बनने वाले डिप्टीसीएम को देती रही है. पहले सुशील मोदी के पास रहा और उसके बाद तारकिशोर प्रसाद और फिर सम्राट चौधरी को मिला. हालांकि, महागठबंधन सरकार के दौरान वित्त मंत्री का जिम्मा जेडीयू के विजय चौधरी के पास रहा. 2024 में नीतीश दोबारा से एनडीए में वापसी किए तो माना जा रहा है था कि वित्त जेडीयू के खाते में रहेगा और बदले में शिक्षा बीजेपी के पास रहेगी. बीजेपी ने वित्त विभाग को प्राथमिकता दी और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को वित्त मंत्रालय मिला था. ऐसे में वित्त मंत्रालय पर बीजेपी और जेडीयू दोनों की नजर है, लेकिन सियासी पैटर्न देखें तो बीजेपी के हिस्से में जा सकता है. बीजेपी-जेडीयू के पास कौन-कौन मंत्रालय थे बिहार की एनडीए सरकार में बीजेपी के पास वित्त, नगर विकास और आवास, स्वास्थ्य, खेल, पंचायती राज, उद्योग, पशु एवं मत्सय संसाधन,विधि, सहकारिता, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पर्यटन, कृषि, पथ निर्माण, भूमि सुधार, गन्ना उद्योग, खान एवं भूतत्व, श्रम संसाधन, कला, संस्कृति और युवा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण जैसे विभाग थे. वहीं, जेडीयू के पास फिलहाल सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण और परिवहन, शिक्षा, सूचना और जन संपर्क, ऊर्जा, योजना और विकास, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, ग्रामीण कार्य, अल्पसंख्यक कल्याण, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्रालय थे. जीतनराम मांझी की पार्टी को सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग मिला था. कैबिनेट में किसे मिलेगा कौन सा विभाग नीतीश कुमार ने अपनी सरकार में जेडीयू कोटे से भी पुराने और अनुभवी चेहरों को मंत्री बनाया है जबकि बीजेपी ने अपने कई पुराने चेहरे को ड्राप करके उनकी जगह नए फेस को मंत्री बनाया है. ऐसे में हाई प्रोफाइल मंत्रालय पर जेडीयू अपना दावा करेगी. अभी तक के पैटर्न के लिहाज से राजस्व, सहकारिता, पशु एवं मत्स्य संसाधन, विधि, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण,उद्योग, पर्यटन और पथ निर्माण बीजेपी को मिल सकता है. जेडीयू के खाते में कृषि, खान एवं भूतत्व, जल संसाधन, संसदीय कार्य, ऊर्जा, योजना एवं विकास, विज्ञान एवं प्रावैधिकी, तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण विकास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे मंत्रालय मिल सकते हैं. हालांकि, बीजेपी चाहती है कि गृह और शिक्षा उसके पास आ जाए, इसके बदले वह स्वास्थ्य और वित्त जैसे विभाग छोड़ने को तैयार है. ऐसे में देखना होगा कि बिहार के बदले हुए माहौल में कौन मंत्रालय का जिम्मा किसे मिलता है?

चिराग और नीतीश की बैठक ने बढ़ाई हलचल: सत्ता संरचना को लेकर चर्चाएँ तेज

पटना बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को प्रचंड बहुमत के बाद नीतीश कुमार का दसवीं बार मुख्यमंत्री बनना परिणाम आने के साथ ही स्पष्ट हो गया था। शुक्रवार दोपहर जैसे ही रुझान आना शुरू हुआ, एनडीए में खुशी की लहर दौड़ गई। शाम होते-होते सीएम आवास में चहलकदमी बढ़ गई। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के अलावा भारतीय जनता पार्टी के भी कई नेताओं ने सीएम आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी। दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी। इसके बाद भाजपा सहित एनडीए के बाकी दलों ने भी एक-एक कर सीएम नीतीश को बधाई दी और नई पारी की शुभकामनाएं भी। आज, यानी शनिवार सुबह से ही गहमागहमी है। चिराग पासवान सीएम नीतीश कुमार को बधाई देने पहुंचे। मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लिखा कि बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के पश्चात आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उन्हें एनडीए के प्रचंड बहुमत की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इसलिए, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की और उन्हें बधाई दी। पटना में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बताया कि लोजपा (रा.) के प्रतिनिधियों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर सरकार गठन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 2020 में लोजपा (रा.) की चुनावी हार के लिए कई लोग ज़िम्मेदार थे और पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने संघर्ष किया। चिराग पासवान ने यह भी कहा कि बिहार चुनाव अभियान के दौरान यह झूठा नैरेटिव तैयार किया गया था कि जदयू और लोजपा (रा.)) के बीच मतभेद हैं। कुछ लोग जदयू और लोजपा (रा.) के बारे में भ्रम फैला रहे थे, वे सिर्फ एक गलत कहानी सेट कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए में शामिल हर गठबंधन सहयोगी की भूमिका की सराहना की है, और उन्होंने जदयू और लोजपा (रा.) के बीच "गलत कहानी" बनाने वाले विपक्ष पर निशाना साधा। मैं बहुत खुश हूं कि मुख्यमंत्री ने एनडीए में शामिल हर गठबंधन सहयोगी की भूमिका की सराहना की। जब वह वोट देने गए तो उन्होंने लोजपा (रा.)  उम्मीदवार का समर्थन किया। आलाउली, जहां मैं वोट देता हूं, मैंने जदयू उम्मीदवार का समर्थन किया।   प्रचंड बहुमत के बाद अब होगा नई सरकार का गठन बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में 125 सीटें लाने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का आंकड़ा इस चुनाव में 202 पहुंच गया। शुक्रवार को आए चुनाव परिणाम में एनडीए के घटक दल- भारतीय जनता पार्टी ने 89, जनता दल यूनाईटेड ने 85, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने चार सीटें जीतीं। दूसरी तरफ, विपक्ष का नेता बनाने लायक परिस्थिति भी महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय जनता दल को नहीं मिल सका। महागठबंधन में राजद ने 25, कांग्रेस ने छह, भाकपा माले ने दो, इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने एक-एक सीटें जीतीं। मतलब, कुल 35 सीटें महागठबंधन के पास आईं। अन्य में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, यानी AIMIM ने पांच और बहुजन समाज पार्टी ने एक सीट हासिल की है। बहुमत के आंकड़े से 80 अधिक सीटें जीतने के साथ ही एनडीए सरकार की वापसी हो गई। मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण की तैयारी तेज हो गई। मांझी-कुशवाहा-प्रधान से बात करने के बाद आगे की तैयारी भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के साथ ही आज केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा आदि के साथ भी आगे की बात होनी है। इस बातचीत में संजय झा के अलावा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय के मौजूद रहने की बातें सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि आज ही शपथ ग्रहण की तारीख तय होने की उम्मीद है। इसके साथ ही अगली सरकार के मंत्रियों का कोटा भी आज तय होगा। इसमें विधायकों के हिसाब से प्रतिनिधित्व तय करने की सहमति बाहर-बाहर हो चुकी है।

ओवैसी की पार्टी का बड़ा दावा: पाँच सीटों के सहारे सरकार बनाने में मदद को तैयार, नीतीश–तेजस्वी से बातचीत के संकेत

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) बेहद उत्साहित है। सीमांचल में 5 सीटों को जीतने के बाद ओवैसी की पार्टी बिहार में सरकार बनाने का सपना भी देखने लगी है। इसके लिए उसने नया समीकरण गढ़ते हुए आरजेडी और जेडीयू को अपने साथ आने का ऑफर दिया है। इतना ही नहीं पार्टी ने मुख्यमंत्री पर पर भी दावेदारी पेश की है और बदले में नीतीश कुमार को 2029 में पीएम उम्मीदवार बनाने का वादा किया गया है। एआईएमआईएम बिहार के एक्स हैंडल पर यह पेशकश की गई है। एआईएमआईएम बिहार के आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया कि अभी भी सरकार बनाने का मौका है। पार्टी का कहना है कि जेडीयू, राजद, कांग्रेस, आईएमआईएम, सीपीआईएमएल, सीपीआईएम मिल जाएं तो सरकार बन सकती है। गौरतलब है कि जेडीयू के पास 85 तो आरजेडी के पास 25 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस और एआईएमआईएम ने क्रमश: 6 और 5 सीटों पर कब्जा जमाया है। सीपीआई-एमएल और सीपीआई एम ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है। इनका योग 124 होता है, जोकि बिहार में बहुमत के जादुई आंकड़े 122 से दो अधिक है। एआईएमआईम ने कल्पना के घोड़े इतने तेज दौड़ाए कि कैबिनेट की तस्वीर तक बना डाली। पार्टी ने कहा कि उसका मुख्यमंत्री होगा जबकि जेडीयू के कोटे से दो डिप्टी सीएम और 20 मंत्री बनाए जा सकते हैं। राजद को 6 मंत्री दिए जा सकते हैं तो कांग्रेस के पास दो मंत्री पद होगा। सीपीआईएमएल और सीपीआईएम से एक-एक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार को 2029 में प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया जाएगा ओवैसी की पार्टी ने कहा, 'हम, हमेशा जोड़ने की राजनीति करते हैं, तोड़ने की नहीं। इसीलिए अभी भी मौका है।'

तेजस्वी का बीजेपी पर वार, नीतीश पर प्यार, बोले- बिहार को चलाने का हक सिर्फ बिहारी को

पटना आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव प्रचार का शंखनाद किया। सलखुआ उच्च विद्यालय मैदान में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश कुमार और एनडीए गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। हालांकि इस दौरान नीतीश कुमार पर तेजस्वी नरम दिखे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बीस साल में भी बिहार से पलायन नहीं रोक पाए। हमारी सरकार आएगी तो नया बिहार बनाएंगे। मेरी उम्र भले ही कच्ची है, लेकिन जुबान पक्की है। मेरा सपना भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने का है। तेजस्वी ने कहा कि एनडीए ने अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। अमित शाह ने खुद कह दिया कि चुनाव के बाद सीएम तय करेंगे। तेजस्वी ने तंज कसते हए कहा कि एक बात तय है कि नीतीश जी अब मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। जबकि हमने तय कर लिया है। उन्होंने वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री बनाने की बात कही। तेजस्वी ने सीएम नीतीश कुमार के प्रति हमदर्दी भी जताई और कहा, हमारे चाचा नीतीश कुमार को भाजपा ने हाइजैक कर लिया है। उनके साथ नाइंसाफी की जा रही है। तेजस्वी ने कहा कि बिहार को बाहरी ताकतें नियंत्रित नहीं करेंगी। बिहार को बिहारी ही चलाएगा, कोई बाहरी नहीं। हम बिहारी डरने वाले नहीं हैं। इस दौरान वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आईपी गुप्ता, खगड़िया के पूर्व सांसद एवं राजद नेता चौधरी महबूब अली केसर, युसूफ सलाहउद्दीन, सरिता पासवान, गौतम कृष्ण मौजूद रहे।