samacharsecretary.com

ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा: SU-30, राफेल और ब्रह्मोस की ताकत ने किया किराना हिल्स पर भारी हमला

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को किस तरह रणनीतिक रूप से झटका दिया, इस पर लंबे समय से बहस होती रही है. अब जाने-माने एरियल वॉरफेयर विश्लेषक और इतिहासकार टॉम कूपर ने दावा किया है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स पर सटीक हमला कर उसकी कमर तोड़ दी थी. टॉम कूपर के मुताबिक यही वह निर्णायक वार था, जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था और सीजफायर की भीख मांगने लगा. हालांकि भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर किराना हिल्स को निशाना बनाने से इनकार किया है, लेकिन टॉम कूपर का कहना है कि सबूत साफ हैं. टॉम कूपर ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें मिसाइलों के धुएं के निशान पहाड़ियों की ओर जाते और टकराते दिखाई देते हैं. इसके अलावा एक अन्य वीडियो में पाकिस्तानी वायुसेना के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से धुआं उठता दिखा. कूपर के मुताबिक भारत ने पहले इन रडार स्टेशनों को निशाना बनाकर पाकिस्तान की जवाबी क्षमता को निष्क्रिय किया और फिर अंडरग्राउंड स्टोरेज सुविधाओं के कम से कम दो प्रवेश द्वारों पर हमला किया. पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भी मारे गए?     टॉम कूपर ने दावा किया कि उस समय पाकिस्तान का ऑपरेशन ‘बुनियान-उन-मार्सूस’ फेल हो चुका था. भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को बड़े पैमाने पर नाकाम कर दिया.     कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए गए. इसके बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में 12-13 एयरबेस पर हमला किया. अंत में किराना हिल्स पर स्ट्राइक ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से घेर लिया.     हमले के समय कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज थी. पाकिस्तान, अमेरिका और भारत से संपर्क कर युद्धविराम के रास्ते तलाश रहा था. कूपर के शब्दों में यह साफ संकेत था कि पाकिस्तान अब आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था. क्यों पाकिस्तान की कमजोर नस है किराना हिल्स? किराना हिल्स को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है. यहां 20 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में हार्डन शेल्टर व भूमिगत सुरंगें मौजूद हैं. टॉम कूपर का तर्क है कि ऐसी जगह पर हमला तभी किया जाता है जब स्पष्ट संदेश देना हो- ‘हम जब चाहें, जहां चाहें, जितनी ताकत से चाहें, वार कर सकते हैं.’ कूपर ने यह भी सवाल उठाया कि जब सबूत इतने स्पष्ट हैं तो भारत आधिकारिक तौर पर हमले से इनकार क्यों करता है. वो इसे लेकर इतने आश्वस्त हैं कि बोलते हैं कि इससे इनकार करना वैसा ही जैसे कोई कहे कि सूरज पूरब से नहीं उगता. रूसी फाइटर जेट और ब्रह्मोस ने किया तांडव हथियारों की बात करें तो कूपर के अनुसार भारत को किसी विशेष गुप्त तकनीक की जरूरत नहीं पड़ी. सुखोई-30 विमानों से ब्रह्मोस और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं, जगुआर ने रैम्पेज लॉन्च किए और राफेल ने स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया. इतना पाकिस्तान के लिए काफी था. उन्होंने भारत की इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम की खास तारीफ की, जिसने रक्षात्मक और आक्रामक दोनों मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई. कुल मिलाकर टॉम कूपर का आकलन है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्पष्ट रणनीतिक जीत थी. किराना हिल्स पर कथित हमले ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि भारत की सैन्य क्षमता और एडवांस तकनीक के सामने उसकी जवाबी ताकत सीमित है.

पॉज मोड में ऑपरेशन सिंदूर, डीके त्रिपाठी ने रांची में दी हुंकार

रांची  नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी (DK Tripathi) ने अपने झारखंड दौरे के दौरान राजधानी रांची में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि पॉज (विराम) मोड में है. इस युद्ध में भारतीय सेना ने पराक्रम का परिचय दिया. हम युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार थे. जरूरत पड़ने पर अपनी ताकत दिखाने में भी सक्षम थे, लेकिन प्रतिद्वंदी ने लड़ने का मौका ही नहीं दिया. एडमिरल त्रिपाठी शुक्रवार को सीसीएल सभागार में आयोजित विकसित भारत-2047 संवाद कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे. सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं डीके त्रिपाठी (DK Tripathi) ने कहा कि भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. बिना सुरक्षा के कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता. इसमें वर्दी और बिना वर्दी वाले, दोनों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है. सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं. अगले दो दशकों की यात्रा से ही विकसित भारत का सपना पूरा होगा. इसके कई लक्ष्य हैं. ये लक्ष्य बहुत कठिन हैं, लेकिन सरकार की मंशा स्पष्ट है. इसके लिए शत-प्रतिशत शिक्षा का लक्ष्य पूरा करना होगा. सभी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देनी होंगी. इनोवेशन (नवाचार) में ग्लोबल लीडर बनना होगा. दूसरों पर निर्भरता को कम करना होगा. विकसित भारत कमजोरी से रेसिलिएंस (लचीलापन) की ओर बढ़ने का मार्ग है. यह केवल नीति-निर्माताओं से संभव नहीं होगा. आम लोगों की भागीदारी जरूरी है. इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. भारत की ओर गलत नजर उठी, तो जवाब होगा सख्त इससे पहले नौसेना प्रमुख ने रजप्पा में प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिके के दर्शन किए और वहां पूजा की. रजरप्पा में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा है कि भारत के खिलाफ किसी तरह की गलत सोच या मंशा बर्दाश्त नहीं की जायेगी. भारत की ओर गलत नजर उठी, तो सख्त जवाब दिया जायेगा. देश की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्षम है. किसी भी चुनौती का सामना मजबूती के साथ करने के लिए तैयार है. आवश्यक होने पर कठोर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी. एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि देश की सुरक्षा आज मजबूत हाथों में है. समुद्री सीमाओं की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. भारत के खिलाफ किसी प्रकार की गतिविधि का तत्काल और प्रभावी जवाब दिया जायेगा.

जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले— ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने स्थापित किया नया सुरक्षा न्यू नॉर्मल

जयपुर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया है। इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को दर्शाया। यह एक परिपक्व, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बल की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। सेना प्रमुख ने सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में एक स्पष्ट बदलाव आया है। हम केवल वर्तमान चुनौतियों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसी दिशा में नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार लैस और ट्रेन किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के अंतर्गत भैरव बटालियन, अशनि प्लाटून, शक्तिबान रेजीमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक चुस्त, तत्पर एवं मिशन-केंद्रित सेना के निर्माण को दर्शाती हैं।'' सेना प्रमुख ने कहा, "हमारे इस परिवर्तन की आधारशिला आत्मनिर्भरता है। इसकी झलक आपको परेड के दौरान 'मेड इन इंडिया' उपकरणों द्वारा देखने को मिली होगी। भारतीय सेना को भविष्य में भी ऐसे हथियार प्रणालियों और उपकरण चाहिए, जो भारत में ही डिजाइन और डेवलप किए गए हों। स्वदेशी अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। हम द्वि-उपयोगी संसाधनों पर भी विशेष जोर दे रहे हैं, ऐसे संसाधन जो सेना और सिविलियन दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी हों। जो इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेना के लिए विकसित हो, वह देश के समग्र विकास में भी योगदान दे।" सेना प्रमुख ने कहा कि वह सेना दिवस पर भारतीय सेना के सभी सैनिकों, हमारे सिविलियन कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। इस पावन अवसर पर उन वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं जिन्होंने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने राजस्थान सरकार और जयपुर के नागरिकों का दिल से धन्यवाद किया। सेना प्रमुख के मुताबिक, जयपुर में सेना दिवस का आयोजन सेना को नागरिकों के और करीब लाने का प्रयास है। सेनाध्यक्ष का कहना है कि भारतीय सेना एक फ्यूचर-रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है, जहां बेहतरीन प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक सिस्टम और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मौजूद है। टेक्नोलॉजी का उपयोग जवानों को रिप्लेस करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है। अब तक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, अगले दो वर्षों को नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता के वर्ष घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को एक डेटा-आधारित, नेटवर्क-सक्षम और सभी हितधारकों के साथ पूर्णत: एकीकृत बल में रूपांतरित करना है। जयपुर में हुई सेना दिवस की परेड में परंपरा और ट्रांसफॉर्मेशन का सुंदर संगम देखने को मिला। नेपाल आर्मी बैंड ने हमारे पुराने और मजबूत संबंधों को दर्शाया, जबकि नई इकाइयों की भागीदारी ने सेना की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित किया।

ऑपरेशन सिंदूर का कहर: पाकिस्तानी सेना फुल-स्केल वॉर के डर से कांपी, जरदारी को मिली बंकर में जाने की सलाह

इस्लामाबाद   पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान अब तक उबर नहीं पा रहा है। समय-समय पर उसे ऑपरेशन सिंदूर में भारत द्वारा किए गए हमलों की याद आ जाती है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने माना है कि 10 मई की सुबह भारत ने उसके नूर खान एयरबेस पर हमला किया था। भारत ने पाकिस्तान पर कितने करारे हमले किए थे, इसकी भी डार ने खुद जानकारी दी। डार ने बताया कि 36 घंटे में भारत ने 80 ड्रोन से हमले किए थे। डार ने यह भी कहा कि मई के संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद ने पाकिस्तान और भारत के बीच मीडिएशन के लिए रिक्वेस्ट नहीं की थी, लेकिन दावा किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने नई दिल्ली से बात करने की इच्छा जताई थी। भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें पहलगाम हमले के बदले में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।  पाक‍िस्‍तान के राष्‍ट्रपत‍ि आस‍िफ अली जरदारी ने एक द‍िन पहले कहा क‍ि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. वे अपनी शेखी बघार रहे थे क‍ि इतने विकट हालात के बावजूद वे बंकर में नहीं गए. लेकिन इसी बीच उन्‍होंने पाक‍िस्‍तान के डर का भी खुलासा कर द‍िया. तो आख‍िर ऐसा हुआ क्‍या?. इससे साफ पता चलता है क‍ि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सेना को भारत की ओर से एक बड़े और चौतरफा (Full-scale) हमले का डर सता रहा था. इस खौफ के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (GHQ) में हड़कंप मच गया था. पाकिस्तानी सेना को आशंका थी कि पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ आतंकी कैंपों तक सीमित नहीं रहेगा. उन्हें डर था कि यह हवाई ताकत, साइबर ऑपरेशन, गुप्त कार्रवाई और जमीनी हमलों के साथ एक बड़े युद्ध में बदल सकता है. यह घबराहट पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व तक में महसूस की गई थी. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खुद खुलासा किया है कि मई में तनाव बढ़ने पर उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, जरदारी ने बताया कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें स्थिति की गंभीरता के बारे में बताया था और चेतावनी दी थी कि “जंग शुरू हो चुकी है” क्योंकि भारतीय बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सटीक हमले शुरू कर दिए थे.     जरदारी ने कहा, मेरे मिलिट्री सेक्रेटरी ने मुझसे कहा कि युद्ध शुरू हो गया है और सुझाव दिया कि हम बंकरों में चले जाएं. मैंने मना कर दिया. अगर शहादत लिखी है, तो यहीं होगी. नेता बंकरों में नहीं मरते. मुझे कई दिन पहले ही इस संघर्ष का आभास हो गया था. सेना का सरकार पर अविश्वास राष्ट्रपति को किसी सुरक्षित ठिकाने पर भेजने की सलाह पाकिस्तान के सत्ता ढांचे के उस जाने-पहचाने पैटर्न को दिखाती है, जहां सरकार को छिपा द‍िया जाता है और सारे फैसले आर्मी करती है. जरदारी का बंकर में जाने से मना करना केवल व्यक्तिगत साहस नहीं, बल्कि नागरिक सत्ता की धमक के तौर पर देखा गया. राष्ट्रपति को कभी-कभी सेना की सलाह के खिलाफ फैसले लेने के लिए जाना जाता है, जो पाकिस्तान के इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है. एटॉमिक ‘रेड-लाइन’ और आर्थिक तबाही का डर     सिर्फ जवाबी हमले का ही डर नहीं था, पाकिस्तानी सेना आंतरिक अस्थिरता को लेकर भी चिंतित थी. उन्हें डर था कि देश की इकॉनमी बर्बाद हो सकती है. जनता विद्रोह कर सकती है और राज्‍यों में फूट पड़ सकती है. इस सैन्य कार्रवाई ने रावलपिंडी को अपनी न्‍यूक्‍ल‍ियर रेड लाइन की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि भारत पाकिस्तान की परमाणु सीमा से ठीक नीचे रहकर भी बड़ी कार्रवाई कर सकता है.     पाकिस्तानी आर्मी लीडरश‍िप इस बात से सबसे ज्‍यादा डरा हुआ था क‍ि कहीं भारत अटैक के साथ साथ इंफॉर्मेशन वॉरफेयर न करने लगे. क्‍योंक‍ि इससे निपटने के ल‍िए उसके पास कोई इंतजाम नहीं थे.     बंकर वाली घटना ने यह साबित कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पाक सेना के अंदर रणनीतिक डर पैदा किया, बल्कि दबाव के समय देश की राजनीतिक व्यवस्था में उनके भरोसे की कमी को भी उजागर कर दिया. क्या था ऑपरेशन सिंदूर? 7 मई की सुबह, इंडियन आर्मी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए थे. यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. पहला चरण: अपने शुरुआती चरण में, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया. इन हमलों में जैश प्रमुख मसूद अजहर के 10 परिवार वालों और चार करीबी सहयोगियों सहित 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. दूसरा चरण: लेकिन जब पाकिस्तान ने भारतीय शहरों और प्रमुख प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना सहित जवाबी सैन्य कार्रवाई का प्रयास किया, तो भारत ने हमले तेज कर दिए. 9-10 मई की रात को अंजाम दिए गए दूसरे निर्णायक चरण में, भारतीय बलों ने नूर खान, सरगोधा, जैकोबाबाद, मुरीद और रफीकी सहित कई प्रमुख पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला बोल दिया. इसमें पाकिस्तान को इतना नुकसान हुआ कि इस्लामाबाद आज भी सार्वजनिक रूप से उसका हिसाब देने में संघर्ष कर रहा है. यह संघर्ष चार दिनों तक चला था, जिसमें फाइटर जेट, मिसाइल और तोपखाने का जमकर इस्तेमाल हुआ था.

ऑपरेशन सिंदूर से दहला पाकिस्तान, जरदारी का स्वीकार– हालात ऐसे बने कि बंकर में जाना पड़ा

नई दिल्ली  वैश्विक मंच पर पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हुआ है। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा की गई त्वरित सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) के घातक प्रभाव को आखिरकार पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उप प्रधानमंत्री इशाक डार के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय सेना के ड्रोन हमलों ने रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालयों तक को हिला कर रख दिया था। बंकर में शरण लेने की दी गई थी सलाह एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शनिवार को खुलासा किया कि मई में भारतीय जवाबी हमलों के दौरान पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व में भारी खौफ था। जरदारी ने बताया, "मेरे सैन्य सचिव ने मुझसे कहा था कि युद्ध शुरू हो चुका है और मुझे तुरंत सुरक्षा के लिए बंकर में चले जाना चाहिए।" हालांकि, जरदारी ने शेखी बघारते हुए कहा कि उन्होंने बंकर में जाने से इनकार कर दिया था, लेकिन उनके इस बयान ने उस समय पाकिस्तानी सत्ता के गलियारों में व्याप्त डर की पुष्टि कर दी है। नूर खान एयरबेस पर भारत का सटीक प्रहार पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी साल के अंत में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय कार्रवाई की सटीकता को स्वीकार किया। डार ने पुष्टि की कि भारत ने रावलपिंडी के चकाला स्थित नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया था। डार ने बताया, "भारत ने 36 घंटों के भीतर हमारे क्षेत्र में लगभग 80 ड्रोन भेजे थे। हालांकि हमने अधिकांश को रोकने का दावा किया, लेकिन एक ड्रोन ने सीधे हमारे सैन्य प्रतिष्ठान को भारी नुकसान पहुंचाया और वहां तैनात कई सैन्य कर्मी घायल हुए।" यह बयान भारतीय ड्रोन तकनीक और सामरिक सटीकता (Strategic Precision) की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला राज रक्षा विशेषज्ञों और सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत भारत ने न केवल आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तान के मुख्य वायुसेना अड्डों को भी निशाना बनाया। सैटेलाइट तस्वीरों में इन बेस को हुए नुकसान की पुष्टि हुई है:     नूर खान एयरबेस (रावलपिंडी)     पीएएफ बेस मुशफ (सरगोधा)     पीएएफ बेस शाहबाज (जैकबबाद)     भोलारी एयर फोर्स स्टेशन इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थित नौ आतंकी लॉन्च पैड्स को भी भारतीय सशस्त्र बलों ने नेस्तनाबूद कर दिया था। पहलगाम हमले का प्रतिशोध यह पूरी कार्रवाई मई 2025 में पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के प्रतिशोध में की गई थी, जिसमें 26 निर्दोष भारतीय नागरिकों की जान गई थी। भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि नई दिल्ली अब आतंकी हमलों के खिलाफ 'शून्य सहनशीलता' (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है और वह सीमा पार दुश्मन के गढ़ में घुसकर हमला करने में सक्षम है।

PAK ने LoC के पास लगाया काउंटर-ड्रोन सिस्टम, ऑपरेशन सिंदूर का असर अभी भी महसूस

 नई दिल्ली भारत की ऑपरेशन सिंदूर में हुई सटीक ड्रोन हमलों से घबराया पाकिस्तान अब नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के आगे के इलाकों में बड़े पैमाने पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात कर रहा है. पाकिस्तान को 'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' का डर सता रहा है, इसलिए उसने रावलाकोट, कोटली और भिंबर सेक्टरों के सामने नए एंटी-ड्रोन उपकरण लगाए हैं. 30 से ज्यादा एंटी-ड्रोन यूनिट तैनात LoC के साथ पाकिस्तान ने 30 से अधिक विशेष एंटी-ड्रोन यूनिट तैनात की हैं. यह काम मुख्य रूप से 12वीं इन्फैंट्री डिवीजन (मुर्री मुख्यालय) और 23वीं इन्फैंट्री डिवीजन के सैनिक कर रहे हैं. कोटली-भिंबर इलाके में 23वीं डिवीजन की ब्रिगेड काम संभाल रही हैं. इसका मकसद LoC के पास हवाई निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर को मजबूत करना है. सेक्टर के हिसाब से तैनाती     रावलाकोट सेक्टर: यहां 2nd आजाद कश्मीर ब्रिगेड जिम्मेदार है, जो पूंछ सेक्टर के सामने भारतीय चौकियों को देखती है.     कोटली सेक्टर: 3rd आजाद कश्मीर ब्रिगेड संभाल रही है, जिसका इलाका राजौरी, पूंछ, नौशेरा और सुंदरबनी के सामने है.     भिंबर सेक्टर: 7th आजाद कश्मीर ब्रिगेड यहां तैनात है. पाकिस्तान ने लगाए ये हथियार पाकिस्तान ने इलेक्ट्रॉनिक और हथियारों वाले दोनों तरह के काउंटर-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं…     स्पाइडर काउंटर-UAS सिस्टम: यह रेडियो फ्रीक्वेंसी से ड्रोन का पता लगाता है. 10 किलोमीटर तक छोटे-बड़े ड्रोन को डिटेक्ट कर सकता है.     सफरा एंटी-UAV जैमिंग गन: यह कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली बंदूक है, जो 1.5 किलोमीटर दूर तक ड्रोन का कंट्रोल, वीडियो और GPS सिग्नल जाम कर देती है. इसके अलावा पुराने हवाई रक्षा हथियार भी इस्तेमाल हो रहे हैं…     ओर्लिकॉन GDF 35 mm ट्विन बैरल एंटी-एयरक्राफ्ट गन (रडार के साथ).     अंजा Mk-II और Mk-III MANPADS – ये धीमे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को मार गिरा सकते हैं. तुर्की और चीन से नई खरीदारी की कोशिश पाकिस्तान तुर्की और चीन से नए ड्रोन और रक्षा सिस्टम खरीदने की बातचीत कर रहा है. लेकिन अभी भारत की आक्रामक सैन्य तैयारी से डरा हुआ है. भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना पश्चिमी सीमा पर लगातार युद्धाभ्यास कर रही हैं, जिससे पाकिस्तान में घबराहट बढ़ गई है. यह तैनाती साफ बताती है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अब भारतीय ड्रोन हमलों से बेहद डरा हुआ है. LoC पर अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में जुट गया है.  

भारत की सख्ती से सहमा पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर के डर से बॉर्डर पर लगाए एंटी-ड्रोन उपकरण

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान पर कई हवाई हमले करते हुए उसे बुरी तरह पराजित किया था। उस हार का भय पाकिस्तान के मन से जा नहीं रहा है। अब उसने एलओसी के पास एंटी ड्रोन सिस्टम की तैनाती बढ़ा दी है, जिससे भारत अगली बार हवाई हमले करता है तो उसे कुछ सोचने-समझने का समय मिल सके। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान के चीनी एंट्री ड्रोन सिस्टम बिल्कुल काम नहीं किए थे और भारत ने जहां चाहा था, वहां हमला किया था। मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान ने एलओसी के पास पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के आगे वाले इलाकों में एंट्री ड्रोन की तैनाती को बढ़ाया है। उसने रावलकोट, कोटली, भीमबर सेक्टर पर नए काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) लगाए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने 30 डेडीकेटेड एंटी-ड्रोन सिस्टम्स लगाए हैं। इसके जरिए पाकिस्तान अपने एयरस्पेस को बेहतर करने में लगा हुआ है। पाकिस्तानी सेना ने इलेक्ट्रॉनिक और काइनेटिक काउंटर यूएएस सिस्टम का मिक्स लगाया है। इसको लेकर दावा किया जाता है कि यह दस किलोमीटर की रेंज में आने वाले छोटे या फिर बड़े ड्रोन का पता लगा सकता है। हालांकि, यह युद्ध के समय कितना काम आएगा, यह तो समय पर ही पता चलेगा। वहीं, पाकिस्तान सफराह एंटी यूएवी जैमिंग गन का भी इस्तेमाल करता है, जिसे कंधे से चलाया जाता है और आसानी से डेढ़ किलोमीटर की रेंज में आने वाले ड्रोन को मार गिराया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है अप्रैल महीने में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला करके कई पर्यटकों की जान ले ली थी। इसके बाद भारत ने मई के शुरुआत में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया और पीओके से लेकर पाकिस्तान तक, लश्कर, जैश जैसे आतंकियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की और जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक बॉर्डर के इलाकों में तुर्की ड्रोन के जरिए हमले की नाकाम कोशिश की। भारत ने फिर जवाब देते हुए पाकिस्तान के कई एयरबेस को तबाह कर दिया था। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा हो गई, लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है और यह अब भी जारी है। अगर पाकिस्तान की ओर से आगे कोई भी हमला किया गया तो उसे 'एक्ट ऑफ वॉर' माना जाएगा।

देशभक्ति की मिसाल बना नन्हा ‘योद्धा’: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों की सेवा, अब राजधानी दिल्ली में सम्मान

फिरोजपुर  पंजाब के सरहदी जिले फिरोजपुर के चक तरां वाली गांव के रहने वाले 10 साल के श्रवण सिंह को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा. श्रवण को भारत की राष्ट्रपति के द्वारा 26 दिसंबर 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ मिलेगा. इसके लिए वह अपने पिता के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं. श्रवण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान असाधारण साहस का परिचय निस्वार्थ सेवा दिखाया था. ​श्रवण सिंह को मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनके असाधारण साहस, सूझबूझ और निस्वार्थ सेवा के लिए पहचाना गया. भारत-पाकिस्तान सीमा पर अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच, श्रवण सिंह ने तैनात सैनिकों को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की थी. दुश्मन के ड्रोनों की निरंतर घुसपैठ और भारी तनाव के माहौल में, देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत होकर श्रवण प्रतिदिन अग्रिम चौकियों तक जाते थे. वे सैनिकों के लिए पानी, दूध, लस्सी, चाय और बर्फ जैसी आवश्यक सामग्री पहुंचाते थे. श्रवण ने सैनिकों को पहुंचाई थी मदद दुश्मन की सीधी निगरानी और हमले के निरंतर खतरे के बावजूद, उनके अटूट संकल्प ने लंबे समय से तैनात सैनिकों के लिए जल-आपूर्ति और मनोबल बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन के रूप में काम किया. ​श्रवण ने अपने परिवार को भी सशस्त्र बलों के पूर्ण समर्थन के लिए प्रेरित किया. उन्होंने सैनिकों के आराम और लॉजिस्टिक के लिए अपने घर और संसाधनों के दरवाजे खोल दिए, जिससे संवेदनशील सीमा क्षेत्र में नागरिक-सैन्य सहयोग की भावना को मजबूती मिली. अब मिलेगा पीएम बाल पुरस्कार उनके इस साहसी और करुणामयी आचरण ने स्थानीय समुदाय को एकजुट किया और देश भर के बच्चों के लिए एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है. उनके इस नेक और बहादुर कार्य के लिए ‘गोल्डन एरो डिवीजन’ ने उनकी शिक्षा को स्पॉन्सर किया है. ​उनकी असाधारण वीरता, निरंतर समर्पण और प्रेरणादायक देशभक्ति को स्वीकार करते हुए, भारत सरकार ने मास्टर श्रवण सिंह को बच्चों को दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 के लिए चुना है. उनका अनुकरणीय साहस और सेवा की गहरी भावना भारतीय समाज के बेहतरीन मूल्यों को दर्शाती है और राष्ट्र के युवाओं के लिए एक चमकते प्रकाश स्तंभ के समान है. वही परिवार में और इलाके में खुशी का माहौल है. परिवार ने कहा कि श्रवण को अवार्ड मिल रहा है हमें बड़ी खुशी है.  

पाकिस्तानी नेवी क्यों रह गई निष्क्रिय? भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन सिंदूर का राज खोला

नई दिल्ली  नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बल के आक्रामक रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों के करीब रहने पर मजबूर होना पड़ा। भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद 7 मई को ऑपरेश सिंदूर के तहत जवाबी कार्रवाई की थी। एडमिरल त्रिपाठी ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद पिछले सात-आठ महीनों में पश्चिमी अरब सागर सहित अन्य स्थानों पर उच्च पैमाने पर अपने जहाजों और पनडुब्बियों को तत्परता के साथ तैनात रखा है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानवाहक पोत की तैनाती समेत आक्रामक रुख और तत्काल कार्रवाई ने पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों या मकरान तट के पास रहने के लिए मजबूर कर दिया।' नौसेना प्रमुख ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' से पाकिस्तान पर वित्तीय दबाव पड़ा है, क्योंकि संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाजों ने पाकिस्तान की यात्रा करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाने वाले जहाजों के बीमा की लागत भी बढ़ गई है। सीजफायर में नौसेना की भूमिका वाइस एडमिरल के स्वामीनाथन ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना के आक्रामक कार्रवाई के रुख के कारण पाकिस्तान संघर्ष विराम का अनुरोध करने पर मजबूर हुआ। नौसेना दिवस से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहुत ही कम समय में 30 से अधिक जहाजों और पनडुब्बियों को अभूतपूर्व तरीके से तैनात किया गया। नौसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख ने कहा, 'हमारे अग्रिम पंक्ति के जहाज, विमानवाहक पोत विक्रांत के ‘कैरियर बैटल ग्रुप’ के साथ में मकरान तट पर युद्ध के लिए तैयार थे।' कैरियर बैटल ग्रुप एक नौसैनिक समूह है जिसमें एक या अधिक विमान वाहक के साथ-साथ अन्य युद्धपोत जैसे विध्वंसक, फ्रिगेट और पनडुब्बियां शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की आक्रामक तैनाती और रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को अपने तट के करीब रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, 'वास्तव में, भारतीय नौसेना द्वारा आक्रामक कार्रवाई करने के रुख को पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम का अनुरोध करने के महत्वपूर्ण कारकों में से एक माना जा सकता है।'  

जनरल द्विवेदी बोले सतना में: ऑपरेशन सिंदूर जारी, धार्मिक स्थलों पर हमले से हमेशा बचते हैं

सतना  थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी शनिवार को सतना के कृष्ण नगर स्थित सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे. यहां पर वह छात्र-छात्राओं के परिचर्चा कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उनका विद्यालय प्रबंधन द्वारा शॉल, श्रीफल और मोमेंटो देकर सम्मान किया गया. जनरल उपेंद्र द्विवेदी इसी विद्यालय के पूर्व छात्र भी हैं. यहां उन्होंने कक्षा चौथी तक पढ़ाई की. उनकी यादें इस विद्यालय से जुड़ी हैं. स्कूल पहुंचकर अपने बचपन को याद किया थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को बड़ा और कामयाब अभियान बताया. उन्होंने विद्यालय में अध्ययन करने का अनुभव साझा किया. इसके साथ ही सतनावासियों के लिए संदेश दिया "आप चाहे वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में हों, राष्ट्रप्रेम और देश निर्माण के लिए लगातार कार्य करते रहिए. विकसित भारत में हम सबको साथ मिलकर मेहनत करनी है. तब जाकर विकसित भारत का सपना 2047 में साकार हो सकेगा. " ऑपरेशन सिंदूर से देश एकजुट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा "ऑपरेशन सिंदूर का नाम ही पूरे देश को एक साथ जोड़ देता है. भारतीय संस्कृति में सिंदूर का बहुत महत्व है. जब बहन या बेटी सिंदूर लगाती है तो वह हमेशा अपने सैनिकों को याद करती है. जो सरहद पर दिन-रात तैनात रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर इसलिए सफल हुआ, क्योंकि हमने सैद्धांतिक और टेक्निकल कंबाइंड करके लड़ाई की. इस दौरान हमने ये भी तय किया कि किसी नागरिक का नुकसान न हो. केवल आतंकियों के खिलाफ ये मुहिम थी."  आर्मी चीफ बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने देश को बांधा आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा, इस अभियान ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधा। सिद्धांत और तकनीक के संयोजन से मिशन सफल हुआ। पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि हम धर्म युद्ध के अनुयायी हैं और आगे भी यही नीति अपनाएंगे। 'स्कूल से मिली निर्णय लेने की क्षमता' उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में सीखी निर्णय क्षमता ने उन्हें सेना में कई सफलताएं दिलाईं। चौथी कक्षा में यहीं से निर्णय लेने की क्षमता मिली, इसी ने ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक सफलता दिलाई। उन्होंने आगे बताया कि यह वही स्कूल है, जिसने उनके व्यक्तित्व और राष्ट्र सेवा के संकल्प को मजबूत किया। आर्मी चीफ ने छात्रों को सफलता का मंत्र दिया जनरल द्विवेदी ने छात्रों से कहा, सफलता की नींव विद्यार्थी जीवन में ही रखी जाती है। उन्होंने सफलता का मंत्र Three-A (Attitude, Adaptibility, Ability) बताया। उन्होंने कहा कि Attitude से सकारात्मक दृष्टिकोण और पॉजिटिविटी आती है। Adaptibility से आप अपने अंदर समय के साथ बदलाव ला सकते हैं और Ability आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाएगी। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम करने वाला ही भविष्य में देश का निर्माण करता है। आप वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में, राष्ट्र सेवा में अपना योगदान दें। यह देश हमारा है। जब हम सब मिलकर काम करेंगे तभी 2047 का विकसित भारत बनेगा। सरस्वती स्कूल के अनुभव शेयर किए अपने स्कूल सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन करने के अनुभव के बारे में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया "जब आप बालक होते हैं और छोटे होते हैं तो आप उस उम्र में जो भी सीखते हैं, वह आपके साथ जिंदगी भर रहता है. यह स्कूल किस तरीके से आगे बढ़ गया है, यहां से कितने आईपीएस, आईएएस, फौजी और कितने डॉक्टर और इंजीनियर निकले हैं, ये सब देख रहे हैं." वहीं, थल सेनाध्यक्ष के दौरे को देखते हुए सेना की टीमों ने डॉग स्क्वाड सहित अत्याधुनिक मशीनरी के साथ सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान उनके बारे में महापौर योगेश ताम्रकार ने भी उन्हें सहपाठी बताया.