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भारत को सलाम, पाकिस्तान के आगे गिड़गिड़ाने वालों को सीख: ED की जमकर तारीफ

नई दिल्ली मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने वाली इंटरनेशनल संस्‍था फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) ने भारतीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) की तारीफ की है. FATF ने कहा कि दुनिया के अन्‍य देशों को ईडी से सीखना चाहिए कि किस तरह से मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाई जाए और क्रिमिनल केस में में एसेट्स की रिकवरी की जाए. यह वही FATF है, जिसके सामने पाकिस्‍तान की हेकड़ी गुम रहती है. पाकिस्‍तान मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के लिए पूरी दुनिया में कुख्‍यात है. FATF ऐसे देशों को विभिन्‍न क्‍लासीफाइड कैटेगरी में डालता रहता है, जिससे संबंधित देशों की इकनॉमी पर बुरा असर पड़ता है. विदेशी निवेश प्रभावित होता है. FATF के कड़े प्रतिबंधों से बचने के लिए पाकिस्‍तान इस ग्‍लोबल ऑर्गेनाइजेशन के सामने मेमियाता रहता है. अब उसी संस्‍था ने भारत की जांच एजेंसी ईडी की तारीफ की है. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने बुधवार 5 नवंबर 2025 को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती और उन्हें पीड़ितों को वापस दिलाने में भारत के प्रयासों की सराहना की है. FATF की यह रिपोर्ट ‘Asset Recovery Guidance and Best Practices’ के नाम से प्रकाशित हुई है, जिसमें खासतौर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तेज और प्रभावी कार्रवाई को प्रमुख उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है. विश्व स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्त पोषण पर नजर रखने वाली FATF ने कहा कि भारत ने आपराधिक मामलों में अवैध संपत्तियों का पता लगाने, उन्हें फ्रीज़ करने, जब्त करने और समाज के हित में उपयोग करने के लिए एक मजबूत व्यवस्था विकसित की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ED ने घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक अपराधों के मामले में देश से भागे अपराधियों के खिलाफ विशेष सक्रियता दिखाई है. 340 पेज की रिपोर्ट ED की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि FATF की 340 पृष्ठों वाली इस रिपोर्ट में व्यावहारिक उपाय सुझाए गए हैं, जिनसे विभिन्न देशों को अपराध से जुड़े धन की पहचान करने, उसे ट्रैक करने और पीड़ितों को वापस संबंधित संपत्तियां लौटाने में सहायता मिलेगी. बयान के मुताबिक, यह गाइडेंस नीति निर्माताओं और प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक मानक है, जिससे वे अपनी राष्ट्रीय रणनीति को बेहतर बना सकें और वैश्विक बेस्ट प्रैक्टिस के अनुसार कार्य कर सकें. रिपोर्ट में कहा गया है कि ED ने क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी, साइबर अपराध और पोंजी स्कीम जैसे मामलों में बेहद तेजी से कार्रवाई की है. FATF ने बताया कि कई मामलों में अपराधी विदेश भाग गए थे, लेकिन ED ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उनकी संपत्तियों को या तो जब्त कर लिया या फ्रीज़ किया.

ट्रंप ने बताया बड़ा राज, पाकिस्तान कर रहा परमाणु परीक्षण

इस्लामाबाद  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि निश्चित रूप से  उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि हम भी परीक्षण करेंगे क्योंकि दूसरे देश परमाणु परीक्षण करते हैं.  ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया के कई देश परमाणु बम की टेस्टिंग कर रहे हैं. लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इस बारे में बात नहीं करते. वे इसे बताते नहीं हैं. हम एक खुला समाज हैं. हम अलग हैं. हम इस बारे में बात करते हैं. हमें इस बारे में बात करनी ही होगी क्योंकि वरना आप लोग कल को रिपोर्ट कर देंगे. उनके पास ऐसे पत्रकार नहीं हैं जो इस बारे में लिखें."  ट्रंप ने आगे कहा कि अब अमेरिका भी न्यूक्लियर टेस्ट करेगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया और पाकिस्तान भी परमाणु बम का परीक्षण कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम परीक्षण करेंगे क्योंकि वे परीक्षण करते हैं और दूसरे भी परीक्षण करते हैं. और निश्चित रूप से उत्तर कोरिया परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी परमाणु परीक्षण कर रहा है." गौरतलब है कि पाकिस्तान की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक 1998 में परमाणु परीक्षण किया था. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को माने तो पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करता आ रहा है. और ऐसी ही स्थिति रूस और चीन की है. ट्रंप के मुताबिक दोनों ही देश लंबे समय से परमाणु परीक्षण करते आ रहे हैं.  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूज चैनल सीबीएस के 60 मिनट्स कार्यक्रम पर एक साक्षात्कार में कहा कि रूस और उत्तर कोरिया भी अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं.  ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने 33 साल के प्रतिबंध के बाद अमेरिकी सेना को परमाणु हथियार परीक्षण करने के अपने आदेश को उचित ठहराया. ट्रंप के खुलासे के मुताबिक अगर पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है तो ये भारत के लिए चिंताजनक सूचना है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "परमाणु हथियार संपन्न देश आपको इसके बारे में बताने नहीं जाते… वे जमीन के नीचे परीक्षण करते हैं जहां लोगों को ठीक से पता ही नहीं चलता कि परीक्षण में क्या हो रहा है. बस आपको थोड़ा कंपन महसूस होता है." 33 सालों बाद न्यूक्लियर टेस्ट क्यों कर रहा है अमेरिका बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका 33 वर्षों के अंतराल के बाद परमाणु परीक्षण शुरू करने जा रहा है. अमेरिका ने आखिरी बार परीक्षण 1992 में किया गया था. इसके बाद शीत युद्ध के अंत की घोषणा की गई थी.  सोशल मीडिया पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पेंटागन को "हमारे परमाणु हथियारों का समान आधार पर परीक्षण शुरू करने" का निर्देश दिया है, जो रूस द्वारा नई न्यूक्लियर सिस्टम के परीक्षण और चीन द्वारा नए बैलिस्टिक मिसाइल साइलो की तैनाती के जवाब में है.

पाकिस्तान युद्ध की ओर? तालिबान से न बनने वाली वार्ता में भारत को दोषी ठहराया

इस्लामाबाद  अफगानिस्तान के साथ तनाव का ठीकरा पाकिस्तान अब भारत पर फोड़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के आरोप हैं कि अफगानिस्तान भारत के लिए काम कर रहा है। हालांकि, इसे लेकर भारत या अफगानिस्तान सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तुर्की में हुई शांति वार्ता बगैर किसी समाधान के खत्म हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आसिफ के आरोप हैं कि काबुल का नेतृत्व भारत की धुन पर नाच रहा है। उन्होंने कहा, 'काबुल में बैठे लोग जो कठपुतली का तमाशा कर रहे हैं, उनका नियंत्रण दिल्ली से किया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि भारत पश्चिमी सीमा पर अपनी हार की भरपाई के लिए अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है। आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान के चार या पांच बार पलटने के बाद तुर्की में हुई शांति वार्ता असफल हो गई। उन्होंने कहा, 'जब भी हम समझौते के करीब होते हैं और वार्ताकार काबुल को खबर करते हैं, तो बीच में कोई दखल होती है और समझौता वापस ले लिया जाता है।' उन्होंने कहा, 'भारत पाकिस्तान के साथ धीमा युद्ध लड़ना चाहता है। इसे पूरा करने के लिए वह अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रहे हैं।' अफगानिस्तान की तरफ से दी जा रही जवाबी कार्रवाई की धमकी पर आसिफ ने कहा, 'अगर अफगानिस्तान ने इस्लामाबाद की तरफ देखा, तो हम उनकी आंखें निकाल लेंगे।' उन्होंने कहा, 'इस बात में कोई शक नहीं है कि पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए काबुल जिम्मेदार है।' साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत से बात नहीं बनती है, तो अफगानिस्तान के साथ युद्ध छिड़ सकता है। वार्ता बेनतीजा, बढ़ सकता है तनाव अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में चल रही वार्ता किसी नतीजे के खत्म हो गयी। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की गहरी खाई और परस्पर शत्रुता के कारण यह वार्ता बेनतीजा रही। एजेंसी वार्ता ने पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया, क्षेत्रीय मध्यस्थता प्रयासों के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव गहराने और क्षेत्रीय अस्थिरता की चिंताएं और बढ़ी हैं। तुर्की और कतर ने दोनों पक्षों के नेताओं से संवाद बनाए रखने और तनाव को कम करने का आग्रह किया है ताकि पहले से अस्थिर क्षेत्र में हिंसा और न बढ़े। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थों ने स्वीकार किया है कि किसी भी पक्ष के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। दोनों देशों की प्राथमिकताएं और अपेक्षाएं एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत रहीं, जिससे वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई। अफगान तालिबान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह किसी गंभीर वार्ता के लिए प्रतिबद्ध नहीं है। एजेंसी के अनुसार, इस सहयोग की कमी ने आगे संभावित तनाव बढ़ने की आशंका को जन्म दिया है। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) की गतिविधियों को रोकना और इस समूह के लड़ाकों को अफगानिस्तान में पनाह लेने से रोकना किसी भी समझौते की मुख्य शर्त है। पाकिस्तान टीटीपी विद्रोह को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। हाल में सीमा पर हुई झड़पों के बाद पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि यदि टीटीपी के हमले जारी रहे तो वह अफगान क्षेत्र में लक्षित सैन्य अभियान चलाना जारी रखेगा। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती नागरिकों और सैन्य चौकियों की सुरक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने काबुल क्षेत्र में कोई हमला किया तो वह इस्लामाबाद के प्रमुख ठिकानों पर 'गंभीर जवाबी कार्रवाई' करेगा। अफगानिस्तान पक्ष ने यहां तक कहा कि उसकी सेना 'पाकिस्तान के महत्वपूर्ण इलाकों तक वार करने की क्षमता रखती है।'

गाजा के लिए चंदा जुटाने के बाद पाकिस्तान की अगली योजना: फिलिस्तीन में सैनिक तैनात

 इस्लामाबाद गाजा में इजरायली हमलों को लेकर चिंतित रहने वाला पाकिस्तान अब वहां अपने सैनिक भेजेगा। पाकिस्तान की सरकार ने गाजा में बड़े पैमाने पर मदद भेजी थी। इसके अलावा इस्लामिक संगठनों ने गली-गली से चंदा और सहायता सामग्री जुटाई थी। अब पाकिस्तान की ओर से वहां सेना भेजने की भी तैयारी है, जो इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा होगी। फिलहाल सरकार इसे लेकर विचार कर रही है। फिलहाल पाकिस्तान की सेना और सरकार के बीच इसे लेकर चर्चा चल रही है। फिलहाल खबर यही है कि पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि हमारी सेना गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा बने। गाजा जाने वाली फोर्स में ज्यादातर सैनिक मुस्लिम बहुल देशों के ही रहेंगे। इस फोर्स की जिम्मेदारी होगी कि आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखे। इसके अलावा यह भी तय किया जाए कि हमास निरस्त्रीकरण हो। वहीं बॉर्डर क्रॉसिंग की सुरक्षा और मानवीय सहायता को लोगों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा गाजा में तमाम इमारतों को दोबारा से बनाने करने की तैयारी है। इनकी निगरानी भी स्टेबिलाइजेशन फोर्स करेगी। अहम बात यह है कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने सैनिकों को गाजा भेजने से इनकार किया है। फिलहाल अमेरिका की सलाह पर इंडोनेशिया, यूएई, मिस्र, कतर, तुर्की और अजरबैजान की ओर से सेनाएं भेजी जा रही हैं। हालांकि इजरायल ने तुर्की के इस फोर्स में शामिल होने पर ऐतराज जताया है। इजरायल का कहना है कि यह सीधे तौर पर हमारे खिलाफ खड़े होना और चैलेंज करना है। रविवार को तो बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा ही था कि हम तय करेंगे कि किन देशों को गाजा में जाने की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने तुर्की के सुरक्षा बलों की भूमिका का विरोध करने की बात भी कही थी। ऐसे में देखना होगा कि तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों की ओर से गाजा में सेना भेजे जाने पर इजरायल का क्या रिएक्शन रहता है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस बहाने इस्लामिक दुनिया में खुद को एक मजबूत मुल्क के तौर पर स्थापित करना चाहता है। सालों से पाकिस्तान इस्लामिक मुद्दों पर आक्रामक रहा है और गाजा एवं कश्मीर के मसले को यही रंग देने की उसकी कोशिश रही है।

पुलवामा जैसे हमले की साजिश नाकाम, TTP के 3 आतंकवादी मारे गए

पाकिस्तान पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले में आत्मघाती हमले की कथित साजिश में शामिल तीन आतंकियों को मार दिया। ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (ISPR) द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने जिले के झल्लार क्षेत्र में खुफिया सूचना पर आधारित ऑपरेशन (IBO) के तहत एक ‘बड़ी आतंकवादी घटना को नाकाम कर दिया और एक संभावित विनाशकारी हमले को टाल दिया।’ यह अभियान ‘फितना अल-खवारिज’ से संबंधित आतंकवादियों की उपस्थिति के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित था। ये आतंकी एक बड़ी आतंकवादी गतिविधि के लिए वाहन पर बम लगाकर आत्मघाती हमला करने की तैयारी कर रहे थे। ‘फितना अल-खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तान सरकार प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े आतंकवादियों के लिए करती है। बयान में कहा गया है कि सैनिकों ने आतंकवादियों के ठिकानों पर उनका प्रभावी ढंग से मुकाबला किया और आत्मघाती हमले के लिए तैयार किए जा रहे वाहन को नष्ट कर दिया तथा मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को मार गिराया।आईएसपीआर ने कहा कि इलाके में तलाश अभियान जारी है ताकि इलाके में यदि कोई और आतंकवादी हैं तो उन्हें भी खत्म किया जा सके। बता दें कि टीटीपी को लेकर ही इन दिनों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। पाकिस्तान के आरोप है कि अफगानिस्तान टीटीपी को पनाह देता है और पाकिस्तान में दहशतगर्दी में समर्थन करता है। वहीं अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के आरोपो को शिरे से खारिज किया है। तुर्की में पाक और अफगान के बीच बातचीत के दौरान पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुली जंग में उतरने की धमकी तक दे डाली। गौरतलब है कि इससे पहले दोनों देश दोहा वार्ता कर चुके हैं और तब संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया गया था।  

सरहद पर ऑपरेशन त्रिशूल की धमक, पाकिस्तानी सेना में मचा हड़कंप

नई दिल्ली भारत पश्चिमी सीमा पर 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक त्रि-सेवा (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) सैन्य अभ्यास करने वाला है। इसे लेकर पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। तीनों सेना का संयुक्त अभ्यास त्रिशूल के नाम से होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक्सरसाइज सर क्रीक-सिंध-कराची अक्ष पर केंद्रित होगी, जिसे पाकिस्तानी 'पाकिस्तान का गहरा दक्षिण' बताते हैं। इसे देखते हुए इस्लामाबाद अपनी दक्षिणी कमांड में सतर्कता बढ़ाने के लिए मजबूर हो गया है और पूरी तरह से चौकसी बरती जा रही है। पाकिस्तान के रक्षा सूत्रों ने बताया कि सिंध और पंजाब में दक्षिणी कमांड के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही, वायुसेना और नौसेना को किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब देने के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है। सीएनएन-न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, बहावलपुर स्ट्राइक कोर और कराची कोर को विशेष तैयारियों के लिए चुना गया है। शोरकोट, बहावलपुर, रहीम यार खान, जैकोबाबाद, भोलारी और कराची जैसे हवाई अड्डे भी स्टैंडबाय हैं। इसके अलावा, अरब सागर में गश्त और नौसैनिक गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सैन्य अभ्यास का क्या है मकसद सूत्रों के अनुसार, भारत का यह अभ्यास थार रेगिस्तान और सर क्रीक क्षेत्र के बीच होगा। इसे दक्षिणी क्षेत्रों में नौसेना, वायुसेना और थलसेना के बीच समन्वय जांचने के लिए डिजाइन किया गया है। पाकिस्तानी अधिकारियों को डर है कि इस एक्सरसाइज का इस्तेमाल समुद्री चोकपॉइंट्स और कराची से जुड़े तटीय ढांचे को खतरे में डालने के लिए हो सकता है। ध्यान रहे कि कराची बंदरगाह और बिन कासिम के माध्यम से पाकिस्तान का लगभग 70 प्रतिशत व्यापार होता है, जो इन सुविधाओं को रणनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है।  

पाकिस्तान के लिए FATF का कड़ा संदेश, ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने का मतलब नहीं मिलेगा टेरर फंडिंग की छूट

इस्लामाबाद  ग्लोबल टेरर फंडिंग वॉचडॉग संस्था FATF ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि भले अक्टूबर 2022 में उसे 'ग्रे लिस्ट' से बाहर कर दिया गया था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को लेकर पूरी तरह सुरक्षित हो गया है. FATF की अध्यक्ष एलिसा डे एंडा मद्राजो ने कहा कि सभी देशों को, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, अपराधों को रोकने और उन्हें टालने के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए. 'टेरर फंडिंग रोकने के लिए काम करते रहें' FATF अध्यक्ष ने फ्रांस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'कोई भी देश जो ग्रे लिस्ट में है या पहले ग्रे लिस्ट में था, वह अपराधियों- चाहे मनी लॉन्ड्रर हों या आतंकवादी- की गतिविधियों को लेकर पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. इसलिए हम सभी देशों से, जिनमें डिलीस्टेड देश भी शामिल हैं, आग्रह करते हैं कि वे अपराधों को रोकने के अपने अच्छे प्रयास जारी रखें.' पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में FATF की 'ग्रे लिस्ट' से हटा दिया गया था और अब यह सुनिश्चित करने के लिए फॉलो-अप किया जा रहा है कि वह टेरर फंडिंग विरोधी उपाय लागू कर रहा है. हालांकि, पाकिस्तान FATF का सदस्य नहीं है, इसलिए एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) इस फॉलो-अप का संचालन कर रहा है. डिजिटल वॉलेट से आतंकी कैंपों को फंड कर रहा पाकिस्तान FATF अध्यक्ष ने कहा कि ग्रे लिस्ट में शामिल देशों और क्षेत्रों की निगरानी इसलिए की जाती है क्योंकि वहां टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में गंभीर कमियां पाई गई हैं. इन टिप्पणियों के बीच ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर आतंकवादी कैंपों को फंड कर रहा है, जिससे वित्तीय लेन-देन को छुपाया जा रहा है.  भारत की नेशनल रिस्क असेसमेंट 2022 ने पाकिस्तान को टेरर फंडिंग के 'उच्च जोखिम वाले' स्रोत के रूप में चिन्हित किया था. भारत के योगदान वाली एक अध्ययन रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स से पैदा होने वाले जोखिमों पर चिंता जताई. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान क्षेत्र में प्रोलिफरेशन फाइनेंसिंग के लिए उच्च जोखिम वाला देश बना हुआ है.  

पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव: अफगानिस्तान भी रोकेगा पानी, कुनार नदी पर बांध का ऐलान

काबुल  भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान की जल आपूर्ति को प्रतिबंधित कर सकता है. तालिबान के उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने ऐलान किया है कि जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को तालिबान के सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा से कुनार नदी पर बिना किसी देरी के बांधों का निर्माण शुरू करने के निर्देश मिले हैं. यह नदी पाकिस्तान में बहती है और पाकिस्तान के लिए पानी का एक बड़ा सोर्स है.  मुजाहिद फाराही के मुताबिक, अमीर अल-मुमिनीन ने मंत्रालय को विदेशी फर्मों का इंतजार करने के बजाय घरेलू अफगान कंपनियों के साथ अनुबंध करने का आदेश दिया है. इस बीच, जल एवं ऊर्जा मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने जोर देते हुए कहा, "अफगानों को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है." घरेलू कंपनियों से जल्द अनुबंध करने का निर्देश उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने कुनार नदी पर बांधों का निर्माण तुरंत शुरू करने के लिए जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिए हैं. इन निर्देशों में यह भी शामिल है कि विदेशी कंपनियों के बजाय घरेलू अफगान कंपनियों के साथ अनुबंध किए जाएं, जिससे काम में देरी न हो. अफगानों को अपने जल पर अधिकार जल एवं ऊर्जा मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने इस कदम का सपोर्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ किया है कि अफगानों को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है.  काबुल और कुनार नदी, जो पाकिस्तान में बहती है, पाकिस्तान में पानी का एक बड़ा स्रोत रही है. जब भारत ने रोका पानी… पिछले दिनों पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने भी पाकिस्तान के साथ हुई जल संधि रद्द कर दी और जल आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने की बातें की गई थीं. कश्मीर में 26 नागरिकों के मारे जाने के तुरंत बाद, सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी सस्पेंड कर दी थी, जो सिंधु नदी सिस्टम के इस्तेमाल को कंट्रोल करती है. इनमें से एक मुख्य योजना चिनाब नदी पर रणबीर नहर की लंबाई को दोगुना करके 120 किमी करने की है, जो भारत से होकर पाकिस्तान के पंजाब के कृषि क्षेत्र तक जाती है. 

बगावत की ओर बढ़ती पाक टीम? आगा का पत्ता कट सकता है, नया कप्तान तय!

कराची  अनुभवी ऑलराउंडर शादाब खान को सलमान अली आगा की जगह पाकिस्तान की टी-20 टीम का कप्तान नियुक्त किया जा सकता है. पाकिस्तान की तरफ से अब तक 70 एकदिवसीय और 112 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में हिस्सा ले चुके शादाब ने इस साल के शुरू में लंदन में अपने कंधे की सर्जरी कराई थी इसके बाद वह खेल से बाहर हैं. शादाब हालांकि अब फिट हैं और वह अगले महीने वापसी कर सकते हैं. उनकी वापसी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि वह सलमान की जगह राष्ट्रीय टी-20 कप्तान बन सकते हैं. सर्जरी से पहले वह इस प्रारूप में उप-कप्तान थे. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि शादाब 11 से 15 नवंबर के बीच श्रीलंका के खिलाफ द्विपक्षीय घरेलू श्रृंखला में वापसी करेंगे, क्योंकि उनका रिहैब अच्छा चल रहा है. अगले साल होने वाले विश्व कप को ध्यान में रखते हुए उन्हें खेल के सबसे छोटे प्रारूप का कप्तान नियुक्त किया जा सकता है. पाकिस्तान सलमान की अगुवाई में एशिया कप में खेला था, जहां उसे फाइनल में भारत से हार का सामना करना पड़ा था.दूसरी ओर गद्दाफी स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के दौरान बाबर आजम से मिलने ड्रेसिंग रूम में घुसे फैन को पुलिस ने फटकार लगाने के बाद रिहा कर दिया. ओवेस नाम के इस युवक ने सोशल मीडिया पर तब सबका ध्यान खींचा जब उसे बुधवार को सुरक्षा बैरियर तोड़कर पाकिस्तान ड्रेसिंग रूम की बालकनी पर चढ़ते देखा गया. यह घटना उस समय हुई जब मेजबान टीम ने पहले टेस्ट मैच में विश्व चैंपियन दक्षिण अफ्रीका को हराया था.

पाकिस्तान पर जीत का एलान? तालिबान के दावों और अफगानों के प्रचंड नारे से बढ़ी कड़वाहट

काबुल  पाकिस्तान के साथ खूनी जंग में तालिबानी लड़ाकों ने खुद को विजेता घोषित कर दिया है. अफगानिस्तान के कई शहरों में जनता तालिबानी लड़ाकों के साथ सड़क पर जश्न मना रही है. अफगानिस्तान के आम शहरियों ने कहा है कि अफगानिस्तान की सरजमीं पर पाकिस्तानियों की बुरी नजर बर्दाश्त नहीं है. अफगानिस्तान के खोस्त, नंगरहार, पकीता, पंजशीर और काबुल में इस लड़ाई को पाकिस्तानियों को अफगानियों का जवाब बताया जा रहा है.  अफगानिस्तान की अंग्रेजी वेबसाइट टोलो न्यूज के अनुसार अफगानिस्तान की अवाम का कहना है कि पाकिस्तान के साथ टकराव में उनकी सेना की बहादुरी सराहनीय है और अफ़ग़ानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाली पाकिस्तान की कार्रवाई उनके लिए असहनीय है. अफगानी सेना और तालिबानी लड़ाकों का समर्थन करने के लिए कई शहरों में युवा और कबीलाई नेता जमा हुए. कुनार निवासी दाऊद खान हमदर्द ने कहा, "अगर पाकिस्तान ने हमारे क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया होता, तो अफगानिस्तान को उनके खिलाफ इस तरह के हमले करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता." नंगरहार निवासी मोहम्मद नादेर ने कहा, "हमारी सीमाएं अन्य पड़ोसियों के साथ भी लगती हैं, फिर भी उनके साथ हमारे संबंध खराब नहीं हुए हैं. इससे पता चलता है कि समस्या हमारे साथ नहीं, बल्कि पाकिस्तान के साथ है, क्योंकि वह हमेशा से समस्याओं का स्रोत रहा है." कबायली बुज़ुर्गों,मजहबी विद्वानों ने घोषणा की कि मुल्क के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन उन्हें बर्दाश्त और वे इसके विरुद्ध कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं. कुनार के एक कबायली बुज़ुर्ग तवोस खान अखुंदज़ादा ने कहा, "अफगानिस्तान साम्राज्यों का कब्रिस्तान है. पाकिस्तान को अफगानिस्तान के इतिहास से सीख लेनी चाहिए और अफगानों को परेशान करना बंद करना चाहिए."पक्तिया निवासी मुस्लिम हैदरी ने कहा, "इस्लामिक अमीरात और अफगानिस्तान के लोगों का अपनी जमीन और क्षेत्र के एक-एक इंच की रक्षा करना वैध अधिकार है." अफगान की सुरक्षा पर कमेंट करने वाले एक हैंडल ने लिखा, "डूरंड रेखा पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ हालिया "बदला" अभियान में तालिबान बलों की जीत का जश्न मनाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं. तालिबान लड़ाके झड़पों के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों से कथित तौर पर ज़ब्त किए गए हथियार भी दिखाते नजर आ रहे हैं.  अफगान डिफेंस के एक हैंडल ने लिखा, "अफगान फोर्सेज द्वारा पाकिस्तान को करारी शिकस्त दिए जाने के बाद अफगानी लोग अपने सैनिकों के सम्मान में एकत्रित होकर खुशी का जश्न मना रहे हैं." तालिबान के हमले में 58 सैनिक हुए ढेर, बौखलाए मुनीर ने बुलाई इमर्जेंसी मीटिंग अफगान तालिबान के एक के बाद एक हमलों ने पाकिस्तान की सेना को हिला दिया है. इन हमलों के बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में सोमवार देर रात आपातकालीन उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई. सीएनएन-न्यूज18 को शीर्ष खुफिया सूत्रों ने बताया कि यह बैठक डूरंड लाइन (Durand Line) के पास पाकिस्तानी चौकियों पर हुए तालिबान के हमलों के बाद बुलाई गई थी. इन हमलों ने पाक सेना की खुफिया और सीमा सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर दिया है. बैठक में कॉर्प्स कमांडर पेशावर लेफ्टिनेंट जनरल उमर अहमद बुखारी, दक्षिणी कमांड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम अहमद खान, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद अवाइस, DG ISI आसिम मलिक, DGMI मेजर जनरल वाजिद अजीज और DGMO मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्लाह सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. खुफिया सूत्रों के मुताबिक आसिम मुनीर बेहद नाराज नजर आए और उन्होंने अपने कमांडरों से सख्त लहजे में पूछा, ‘पहले से खुफिया जानकारी क्यों नहीं थी? यह इंटेलिजेंस फेल्योर कैसे हुआ? कंटिजेंसी प्लान कहां था?’ मुनीर ने दिया बड़ा आदेश सूत्रों के मुताबिक, मुनीर ने इसे बड़ी रणनीतिक विफलता बताते हुए हर अधिकारी से जवाब मांगा कि तालिबान की इस व्यापक कार्रवाई का कोई पूर्व संकेत क्यों नहीं मिला और फौरन जवाबी कार्रवाई की तैयारी क्यों नहीं थी? उन्होंने सभी वरिष्ठ कमांडरों को निर्देश दिया कि सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपें, जिसमें सभी कमियां, कारण और सुधारात्मक कदम स्पष्ट रूप से बताए जाएं. साथ ही, उन्होंने आदेश दिया कि सीमा क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाए और ‘किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए हर मोर्चे पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय’ किए जाएं. तालिबान के हमले से थर्राया पाकिस्तान मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान अब ‘युद्ध की स्थिति में है. अंदरूनी और बाहरी दोनों मोर्चों पर.’ उन्होंने सवाल किया- ‘हम कब तक एक ‘सॉफ्ट स्टेट’ बने रहेंगे जबकि हमारे जवान और नागरिक लगातार कुर्बान हो रहे हैं? अब वक्त है सख्त कदम उठाने का.’ खुफिया सूत्रों के अनुसार, तालिबान ने सात अलग-अलग मोर्चों अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, दिर, चितराल, वजीरिस्तान (खैबर पख्तूनख्वा) और बहराम चाह व चमन (बलूचिस्तान) से भारी आर्टिलरी से हमला किया. इन हमलों ने पाकिस्तानी चौकियों को अचानक निशाना बनाया और सेना को चौंका दिया. क्यों भिड़े 'बिरादर' अफगानिस्तान और पाकिस्तान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल की भिड़ंत डुरंज लाइन पर 11-12 अक्टूबर 2025 की रात हुई. इसका मुख्य कारण पाकिस्तान द्वारा 9-10 अक्टूबर को काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में हवाई हमले थे. अफगानिस्तान पर राज कर रहे तालिबान ने अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया. पाकिस्तान ने इन हमलों को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों पर कार्रवाई कहा. पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि इन्हें अफगानिस्तान में पनाह मिलता है.  पाकिस्तानी हमले के जवाब में तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में 25 पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला किया. पाकिस्तान ने कहा कि इस हमले में उन्होंने 200 तालिबान लड़ाकों को मार गिराया और उसके 23 सैनिक मारे गए. जबकि तालिबान का दावा है कि 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. अभी दोनों देशों के बीच व्यापार बंद है और टेंशन चरम पर है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि दोनों देशों के बीच लड़ाई कभी भी शुरू हो सकती है.