samacharsecretary.com

वाहन चालकों के लिए अलर्ट! दिल्ली में बिना PUCC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली जब भी गाड़ी चलाते हैं तो हमें सड़क एवं यातायात नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो हमारी गाड़ी का चालान कट सकता है। इसमें कई नियम होते हैं जिनका पालन करना जरूरी है। इसी क्रम में दिल्ली में आज से PUCC सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। अगर आपकी गाड़ी की PUCC नहीं है तो आपको दिल्ली में पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। इसको लेकर सरकार ने न सिर्फ नियम जारी किया है बल्कि, इसका सख्ती से पालन करने को भी कहा गया है। इसलिए अगर आपकी गाड़ी की PUCC (NO PUCC NO Fuel) नहीं हुई है तो आप इसे तुरंत करवा लें। आप यहां आखिरी तारीख से लेकर नए नियम के बारे में और PUCC करवाने का तरीके के बारे में भी जान सकते हैं। अगली स्लाइड्स में आप इस बारे में सबकुछ जान सकते हैं… क्या है नया नियम?     दरअसल, अगर आप दिल्ली में रहते हैं या दिल्ली में अपनी गाड़ी लेकर जाते हैं और आप दिल्ली के पेट्रोल पंप से पेट्रोल-डीजल लेते हैं, तो आपको बिना PUCC पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर सरकार ने ये सख्त कदम उठाने का फैसला किया। बस आज और कल का समय     अगर आपकी गाड़ी PUCC सर्टिफिकेट नहीं है, तो आपके लिए आज से पेट्रोल-डीजल लेने में दिक्कत होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये नया नियम दिल्ली में आज यानी 18 दिसंबर 2025 से लागू हो गया है जिसके बाद आपको बिना PUCC पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। कैसे करवाएं PUCC? स्टेप 1     अगर आपकी गाड़ी की PUCC यानी प्रदूषण नियंत्रण (पोल्यूशन अंडर कंट्रोल) नहीं है, तो आपको अब ये करवाना अनिवार्य होगा     इसके लिए आपको सबसे पहले पेट्रोल पंप या अन्य जगहों पर बने हुए PUCC सेंटर पर जाना होगा     यहां पर जाकर आपको अपनी गाड़ी की आरसी दिखानी होती है स्टेप 2     इसके बाद आपकी आरसी से आपकी गाड़ी की जानकारी सिस्टम में फीड की जाती है     फिर आपकी गाड़ी की टेस्टिंग होती है यानी उसका प्रदूषण नियंत्रण चेक होता है     सबकुछ सही पाए जाने पर आपकी गाड़ी की PUCC कर दी जाती है जिसके लिए आपसे निर्धारित शुल्क लिया जाता है     इसके बाद आपको प्रदूषण नियंत्रण का सर्टिफिकेट दिया जाता है  

बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती: दिल्ली में बिना वैध PUCC वाहनों को पेट्रोल पर रोक

 नई दिल्ली दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बीजेपी सरकार ने कई सख्त फैसलों का ऐलान किया है, जिनका असर आम लोगों से लेकर वाहन चालकों और निर्माण क्षेत्र तक पड़ेगा. दिल्ली के पर्यावरण संरक्षण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इन कदमों का मकसद राजधानी की हवा को साफ करना और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है. पर्यावरण मंत्री मनजींदर सिंह सिरसा ने घोषणा की है कि 18 दिसंबर से पेट्रोल पंपों पर उन वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा, जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) सर्टिफिकेट नहीं होगा. इस नियम की निगरानी कैमरों के जरिए की जाएगी, ताकि कोई उल्लंघन ना हो सके. नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी. इसके अलावा दिल्ली के बाहर से आने वाले निजी वाहनों को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं. दूसरे राज्यों में रजिस्टर, बीएस-VI उत्सर्जन मानकों से नीचे के निजी वाहनों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह फैसला खासतौर पर उन वाहनों पर लागू होगा, जो अधिक धुआं छोड़कर वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं. दिल्ली की सीमाओं पर तैनात एजेंसियों को इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है. दिल्ली में ईंट, रेत, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्रियों के ​परिवहन पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने दिल्ली वालों से मांगी माफी पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए मंत्री सिरसा ने कहा कि मौजूदा सरकार को 'प्रदूषण की बीमारी विरासत में मिली है'. उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने दिल्ली में प्रदूषण फैलाया, वही आज विरोध कर रहे हैं.' बीजेपी सरकार द्वारा दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि राजधानी के लैंडफिल साइट्स की ऊंचाई में करीब 15 मीटर की कमी आई है और लगभग 8,000 उद्योगों को कड़े प्रदूषण नियंत्रण मानकों के दायरे में लाया गया है. प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर अब तक 9 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है. उन्होंने कहा कि लकड़ी जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने 10,000 हीटर वितरित किए हैं. इसके अलावा, बैंक्वेट हॉल्स में डीजे के उपयोग को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं. मंत्री सिरसा ने स्वीकार किया कि दिल्ली में प्रदूषण पर पूरी तरह काबू पाना इतने कम समय में संभव नहीं है. उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली के लोगों से माफी मांगता हूं, लेकिन सात-आठ महीनों में प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है.' साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी तंज कसते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्ष इसी अवधि में उन्होंने मास्क नहीं पहने थे, लेकिन अब मास्क पहनकर घूम रहे हैं. प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने उठाए कई कदम पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि शहर में 62 पॉल्यूशन हॉटस्पॉट की पहचान की है, जिनमें से 13 क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में प्रदूषण का स्तर कम दर्ज किया गया है. इसके अलावा, 3,427 इलेक्ट्रिक बसों को डीटीसी में शामिल किया गया है ताकि वाहनों से होने वाले ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम किया जा सके. सिरसा ने यह भी बताया कि वैज्ञानिकों की एक समिति गठित की गई है, जो नियमित रूप से बैठक कर प्रदूषण के रुझानों का अध्ययन कर रही है और आगे के उपायों की सिफारिश कर रही है. दिल्ली में इस समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में बना हुआ है. 16 दिसंबर 2025 को सुबह के समय AQI 380 से ऊपर दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है. सर्दियों का मौसम आते ही धुंध और स्मॉग की मोटी चादर छा जाने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों से उड़ती धूल प्रदूषण को बढ़ाने में सहयोग कर रही है. सरकार का मानना है कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा को खराब करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है. इसलिए PUCC चेक को अनिवार्य बनाकर पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाई जा रही है. लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग करने की अपील दिल्ली सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें. दिल्ली सरकार का कहना है कि ये कदम अस्थायी जरूर हैं, लेकिन जनता के स्वास्थ्य को देखते हुए बेहद जरूरी हैं. आने वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा कर आगे और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि ये कदम दिल्ली को स्वच्छ हवा देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि ये उपाय 18 दिसंबर से लागू हो रहे हैं. उन्होंने नगारिकों से नियमों का पालन करने का अनुरोध किया.

हेलमेट नियम : इंदौर में बिना हेलमेट मिलने लगा पेट्रोल, आदेश की अवधि पूरी

इंदौर इंदौर जिले में दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता का आदेश अब समाप्त हो गया है। यह आदेश 30 जुलाई को जारी किया गया था और एक अगस्त से 29 सितंबर के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब इसे आगे नहीं बढ़ाया गया है। नए कलेक्टर ने इस आदेश को समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिसके चलते अब प्रशासन हेलमेट पहनने के लिए जागरूकता फैलाने पर जोर देगा। पेट्रोल पंपों पर हेलमेट न पहनने वालों को ईंधन देने की सख्ती अब समाप्त हो गई है। पहले, जब यह आदेश लागू था, तो पेट्रोल पंपों पर हेलमेट न पहनने वाले चालकों की कतारें लग गई थीं। लोग हेलमेट मांगकर या खरीदकर ईंधन लेने आते थे। इस आदेश का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि सड़क हादसों में सिर में चोट लगने से मृत्यु का मुख्य कारण बनता है। सुप्रीम कोर्ट की समिति ने दिया था सुझाव सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने 29 जुलाई को इंदौर में आयोजित एक बैठक में हेलमेट की अनिवार्यता की बात की थी। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने पेट्रोल पंप संचालकों के लिए आदेश जारी किया था कि वे हेलमेट न पहनने वाले चालकों को ईंधन न दें। इस आदेश के बाद कई पंपों पर कार्रवाई की गई और बगैर हेलमेट के पेट्रोल देने पर पांच पंपों को सील किया गया था। हालांकि अब प्रशासन ने इस सख्ती को समाप्त कर दिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि अब लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत लोगों को हेलमेट पहनने के लाभ और इसका महत्व बताया जाएगा। हेलमेट को लेकर विवाद भी हुए सरकारी आदेश की अवधि के दौरान हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर कुछ विवाद भी हुए हैं। चंदन नगर क्षेत्र में लक्की पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पेट्रोल न देने पर एक युवक ने पंप कर्मचारी के साथ मारपीट की थी। इसी तरह छोटा बांगड़दा क्षेत्र में भी एक युवक ने कर्मचारियों से हाथापाई की और माचिस की जलती हुई तीली फेंकी थी। इन घटनाओं के बाद पुलिस में शिकायतें दर्ज की गई थीं। सरकारी कार्यालयों में भी की गई थी सख्ती सरकारी कार्यालयों में भी हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर सख्ती की गई थी। कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी कार्यालयों में हेलमेट पहनकर आने वाले कर्मचारियों को गुलाब के फूल दिए जाते थे, जबकि बिना हेलमेट आने वालों को कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाता था। हालांकि, अब इस सख्ती को भी समाप्त कर दिया गया है। इस प्रकार, इंदौर में हेलमेट की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद अब प्रशासन ने जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया है। यह कदम सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि लोग अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें और हेलमेट पहनने को अपनी आदत बना लें। इस बदलाव के साथ यह देखना होगा कि क्या लोग अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे या फिर प्रशासन को फिर से सख्ती बरतने की आवश्यकता पड़ेगी। सड़क पर सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की भी जिम्मेदारी है। जागरुक किया जाएगा     पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल भरवाने के लिए हेलमेट होने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। सभी पंपों पर अब लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसके लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। – शिवम वर्मा, कलेक्टर

अब इंदौर में बिना हेलमेट भी मिलेगा पेट्रोल, कलेक्टर बोले – सख्ती नहीं, समझदारी जरूरी

इंदौर क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट पहनकर गाड़ियों में पेट्रोल डलवाना जरूरी नहीं है, बल्कि हेलमेट को लेकर जागरूकता ज्यादा जरूरी है. इसी तरह के एक आदेश के बाद क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट लगाना स्वैच्छिक कर दिया गया है. बीते 1 अगस्त को इंदौर जिला प्रशासन ने दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना जरूरी किया था. इस आदेश को वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने जारी रखने से इनकार कर दिया है. पूर्व कलेक्टर ने अनिवार्य किया था हेलमेट इंदौर में आए दिन होने वाले टू व्हीलर गाड़ियों के एक्सीडेंट में लोगों की सर पर चोट लगने से मौत एक बड़ी वजह है. लिहाजा पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने पिछले महीने एक आदेश निकालकर शहर में दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य किया था. इतना ही नहीं बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने के भी आदेश दिए थे. नए कलेक्टर ने स्वैच्छिक किया हेलमेट लगाना उस दौरान इसी आदेश के उल्लंघन के कारण कई पेट्रोल पंप को सील भी किया गया था. 1 अक्टूबर को फिर इस आदेश को सुचारू रखने के लिए नया आदेश किया जाना था, लेकिन वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने उसे सुचारू नहीं रखते हुए शहर में हेलमेट लगाना एक बार फिर स्वैच्छिक कर दिया है. इतना ही नहीं अब बिना हेलमेट के भी वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर अपने वाहनों में पेट्रोल डलवा पाएंगे. हालांकि नए कलेक्टर के इस फैसले से शहर के उन वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है जिन्हें ट्रैफिक पुलिस द्वारा हेलमेट के नाम पर लगातार परेशान किया जा रहा था. पेट्रोल डलवाने के लिए भी पहनना पड़ता था हेलमेट वहीं, वाहनों में पेट्रोल डलवाने के लिए भी लोगों को हेलमेट लेकर पेट्रोल पंप पर पहुंचना पड़ता था. इधर इस आदेश को सुचारू नहीं रखने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अधिकांश वाहन चालक पेट्रोल डलवाते समय ही हेलमेट लगा रहे थे. जबकि वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने वाले लोगों की संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हुई थी. इधर इस आदेश का स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी विरोध किया था. मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में इंदौर अव्वल लोगों को हेलमेट न लगाना पड़े इसको लेकर एक जनहित याचिका भी कोर्ट में प्रस्तुत की थी, लेकिन कोर्ट से भी हेलमेट लगाने संबंधी फैसले पर लोगों को राहत नहीं मिल पाई थी. अब जबकि खुद जिला प्रशासन ने ही अपने आदेश को सुचारू नहीं रखा तो पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के पेट्रोल दिए जाने की पुरानी व्यवस्था फिर शुरू हो गई है. एक्सीडेंट के मामले में इंदौर पहले नंबर पर है, जहां पिछले साल ही करीब 6075 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं जो तुलनात्मक रूप से भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर से सर्वाधिक थी. इन दुर्घटनाओं में अधिकांश वाहन चालक टू व्हीलर थे, जो हेलमेट नहीं लगाए थे.  

ईंधन पर GST लाना अभी संभव नहीं, सरकार ने साफ किए संकेत

नई दिल्ली पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल इन्हें जीएसटी के अंतर्गत लाना संभव नहीं है। मिडिया की ओर से सवाल पूछे जाने पर कि क्या पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए, अग्रवाल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर फिलहाल केंद्रीय उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) लगता है और इन दोनों पेट्रोलियम पदार्थों से राज्यों को वैट के रूप में और केंद्र सरकार को केंद्रीय उत्पाद शुल्क के रूप में अच्छा-खासा राजस्व प्राप्त होता है। उन्होंने आगे कहा, "राजस्व संबंधी प्रभावों को देखते हुए, इन वस्तुओं को फिलहाल जीएसटी के दायरे में लाना संभव नहीं है।" सीबीआईसी चेयरमैन ने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते कहा था कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी परिषद के प्रस्ताव में शामिल नहीं किया है। उस दौरान वित्त मंत्री ने कहा था कि कानूनी तौर पर हम तैयार हैं, लेकिन यह फैसला राज्यों को लेना होगा। वित्त मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी लागू होने के समय ही शामिल किया जाना तय था, "मुझे याद है कि मेरे दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बात की थी।" वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, "राज्यों की सहमति के बाद, उन्हें परिषद में कराधान की दर तय करनी होगी। एक बार यह फैसला हो जाने के बाद, इसे कानून में शामिल कर लिया जाएगा।" जुलाई 2017 में लागू हुए जीएसटी में पेट्रोल, डीजल और मादक पेय पदार्थों जैसे उत्पादों को तब से इसके दायरे से बाहर रखा गया था। ये वस्तुएं केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों के लिए उत्पाद शुल्क और वैट के माध्यम से राजस्व का प्रमुख स्रोत हैं। कई राज्यों के लिए, ये उनके कर राजस्व में 25-30 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।

कम पेट्रोल देने पर राजधानी पेट्रोल पंप के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज

 भोपाल  राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद स्थित राजधानी पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को कम पेट्रोल दिए जाने की शिकायत पर खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान गड़बड़ी पकड़ते हुए पंप संचालक पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि सोमवार को शिकायत मिली थी कि *राजधानी पेट्रो पाइंट पेट्रोल-डीजल पंप (बीपीसीएल)* पर ग्राहकों को तय मात्रा से कम पेट्रोल दिया जा रहा है। इसके बाद विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और शिकायतकर्ता को भी बुलाकर बयान दर्ज किए। निरीक्षण में पेट्रोल के नोजल से प्रदाय की मात्रा की जांच की गई और पेट्रोल-डीजल का भौतिक सत्यापन हुआ। इस दौरान *स्पीड पेट्रोल 528 लीटर अधिक भंडारित* पाया गया, जिसे जब्त कर लिया गया। टीम ने पाया कि पंप पर मशीनों की संख्या भी लाइसेंस के अनुसार नहीं है। इसके अलावा मौके पर पेट्रोल-डीजल में पानी की जांच की गई और यह भी पाया गया कि पंप पर बिना हेलमेट उपभोक्ताओं को पेट्रोल दिया जा रहा था। पूरी कार्रवाई पंप मालिक के बेटे आमिर खान की मौजूदगी में की गई।  

जीपीएम जिले के सभी पंप संचालक बने रेडक्रॉस के आजीवन सदस्य, शुरू की हेलमेट मुहिम

रायपुर : अब बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं: जीपीएम जिले के पंप संचालकों ने उठाया कदम जीपीएम जिले के सभी पंप संचालक बने रेडक्रॉस के आजीवन सदस्य, शुरू की हेलमेट मुहिम बिना हेलमेट पेट्रोल बंद, जीपीएम पंप संचालकों ने बढ़ाया सुरक्षा और समाजसेवा का कदम रायपुर गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में सड़क हादसों को कम करने और लोगों की जान बचाने के लिए अब प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी और पुलिस अधीक्षक श्री एस.आर. भगत की मौजूदगी में कलेक्ट्रेट के अरपा सभा कक्ष में हुई बैठक में तय किया गया कि अब जिले के सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर “नो हेलमेट-नो पेट्रोल” नियम सख्ती से लागू किया जाएगा। बैठक में सभी पंप संचालकों ने इस फैसले का स्वागत किया और सहमति जताई। तय हुआ कि आने वाले एक हफ्ते तक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समझाया जाएगा कि पेट्रोल लेने के लिए हेलमेट पहनना जरूरी है। इसके लिए सभी पंपों पर चेतावनी वाले फ्लैक्स लगाए जाएंगे और चौक-चौराहों पर भी घोषणाएं की जाएंगी। इसके बाद प्रशासन हेलमेट की अनिवार्यता को सख्ती से लागू करेगा। बैठक में मानवता की सेवा के लिए जिला रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्यता लेने पर भी चर्चा हुई। इसमें सभी पंप संचालकों ने 1000 रुपये शुल्क जमा कर आजीवन सदस्यता ली। इसके साथ ही, गौरेला के मथुरा पेट्रोल पंप संचालक उमेश अग्रवाल और पेंड्रा के काव्या पेट्रोल पंप संचालक आदित्य साहू ने 25 हजार रुपये सेवा शुल्क देकर संरक्षक सदस्यता भी ग्रहण की। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा सहित जिले के सभी प्रमुख पेट्रोल पंप संचालक और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम से जुड़े विभिन्न पंप संचालकों ने भी भाग लिया और इस जनहितकारी निर्णय का समर्थन किया। इस तरह प्रशासन और पंप संचालकों के संयुक्त प्रयास से जिले में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और हेलमेट पहनने की आदत से कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।

Petrol के बाद Diesel में बदलाव: Isobutanol ब्लेंडिंग से क्या होंगे फायदे?

नई दिल्ली  बीते कुछ हफ्तों से देश भर में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल (E20 Petrol) की खूब चर्चा हो रही है. पेट्रोल के आयात और उस पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल को मिक्स करना शुरू किया, जो इस समय देश के कई फ्यूल स्टेशन पर बिक्री के लिए उपलब्ध है. जिसके बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज और परफॉर्मेंस में कमी आने की शिकायत की. अब सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) मिलाने की तैयारी कर रही है.  हाल ही में पुणे में प्राज इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, "एथेनॉल हमारे लिए एक शुरुआत है, ये कोई अंत नहीं है. मैं विशेष रूप से प्राज इंडस्ट्री और ARAI को धन्यवाद दूंगा कि, उन्होनें एथेनॉल के बाद आइसोब्यूटेनॉल पर काम करना शुरू किया है. और अभी वो डीजल में 10% आइसोब्यूटेनॉल डालकर प्रयोग कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने किर्लोस्कर के साथ मिलकर 100% आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाला इंजन भी तैयार किया है. आइसोब्यूटेनॉल वैकल्पिक जैव ईंधन है."  नितिन गडकरी ने आगे कहा कि, "आइसोब्यूटेनॉल डीजल का एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है. हमारे देश में पेट्रोल के तुलना में डीजल का प्रयोग ढाई से तीन गुना ज्यादा होता है. प्रदूषण की मुख्य समस्या पेट्रोल और डीजल के कारण ज्यादा है. आने वाले समय में आइसोब्यूटेनॉल हमारे देश के लिए एक वरदान साबित हो सकता है. रिसर्च, ट्रायल और स्टैंडर्ड निश्चित होने के बाद जब इसका प्रस्ताव पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को जाएगा और मंत्रालय से इसको मान्यता मिलेगी तब इसका मार्केट और भी बढ़ेगा."  क्या है आइसोब्यूटेनॉल आइसोब्यूटेनॉल मूल रूप से एल्केनॉल (अल्कोहल) ग्रुप से आने वाला एक कलरलेस, फ्लेमेबल ऑर्गेनिक लिक्विड है. इसका केमिकल फार्मूला (C₄H₁₀O) है. ये व्यापक रूप से पेंट और कोटिंग्स के लिए सॉलवेंट यानी विलायक के रूप में काम में लिया जाता है. इसके अलावा अपने हाई एनर्जी डेंसिटी और ऑक्टेन रेटिंग के कारण फ्यूल ऐडिटिव्स के तौर पर भी उपयोग में लाया जाता है. इसे प्रोपिलीन कार्बोनिलीकरण के माध्यम से पेट्रोलियम या बायोमास जैसे स्रोतों से बनाया जा सकता है. डीज़ल में आइसोब्यूटेनॉल का उपयोग फ्यूल ब्लेंडिंग: आइसोब्यूटेनॉल को डीज़ल के साथ मिक्स कर उपयोग किया जा सकता है. यह उत्सर्जन को कम करने और फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाने में मदद कर सकता है. क्लीन बर्निंग फ्यूल: इसमें सल्फर और अन्य हानिकारक तत्व कम होने के कारण डीज़ल इंजन में स्वच्छ दहन (Clean Combustion) होता है. ग्रीनहाउस गैस में कमी: आइसोब्यूटेनॉल फ्यूल से CO₂ और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम होता है. इंजन कम्पैटिबिलिटी: शोध से पता चला है कि डीज़ल इंजनों में आइसोब्यूटेनॉल-डीज़ल मिश्रण बिना किसी बड़े बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है. बेहतर प्रदर्शन: इससे इंजन परफॉर्मेंस बनी रहती है और ईंधन की खपत भी थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि अभी डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिक्स्चर पर शोध जारी है. लेकिन माना जा रहा है कि, भविष्य में आने वाले नए डीजल इंजन फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के ही सिद्धांत पर काम करेंगे. जो संभवतः पूरी तरह से आइसोब्यूटेनॉल पर चलने में सक्षम होंगे. क्या कहते हैं अब तक हुए शोध? सोसायटी ऑफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स (SAE) की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 4-स्ट्रोक सिंगल-सिलेंडर डीज़ल इंजन में 5% और 10% वॉल्यूम आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी (BTE) में वृद्धि देखी गई है. ब्रेक स्पेसिफिक फ्यूल कंजम्प्शन (BSFC) में सुधार हुआ है, यानी ईंधन की खपत प्रति यूनिट ऊर्जा कम हुई. कार्बन उत्सर्जन और धुएँ की तीव्रता (Smoke Opacity) में काफी कमी आई है, जबकि NOₓ उत्सर्जन में मामूली कमी देखने को मिली है. बहरहाल, डीजल में आइसोब्यूटेनॉल को मिलाने को लेकर शोध अभी चल रही है. जैसा कि नितिन गडकरी ने भी बताया कि, इससे जुड़ी एजेंसियां इस पर प्रयोग कर रही हैं. यानी अभी इस डीजल ब्लेंडिंग पर अंतिम रिपोर्ट आने में थोड़ा समय लगेगा. अभी इस बात की भी जानकारी नहीं मिली है कि, सरकार डीजल में इसका प्रयोग कब शुरू करेगी. अभी ये प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है और रिसर्च/प्रयोग में सफलता मिलने के बाद इसका प्रस्ताव संबंधित मंत्रालय को भेजा जाएगा, जहां से इसे आखिरी मंजूरी मिलेगी.  भारत में डीजल की खपत पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार भारत की कुल कच्चे तेल की खपत में डीज़ल का योगदान लगभग 40% है. 2024-25 में डीज़ल की खपत 2% बढ़कर 91.4 मिलियन टन हो जाएगी. पीपीएसी ने 2025-26 के लिए डीज़ल के उपयोग में 3% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 94.1 मिलियन टन हो जाएगा.

मंत्री पटेल की अगुवाई में हुई श्रम विभागीय समीक्षा, नीतियों पर हुआ मंथन

भोपाल  पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में श्रम विभागीय परार्मशदात्री समिति की बैठक सम्पन्न हुई।  बैठक में श्रमिक हित में किये जाने वाले नवाचारों के संबंध में सदस्यों को अवगत कराया गया। श्रम विभाग की नई पहल, SHREE (श्रमिक हेल्थ रेजुवेशन एजुकेशन एण्ड इंटरप्राइज) पहल का उ‌द्देश्य विभिन्न सरकारी निकायों के संसाधनों का उपयोग करके मध्यप्रदेश में श्रमिकों की स्थिति को समग्र रूप से बेहतर बनाना है। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्‌यम और कार्यस्थल के वातावरण में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर मानव संसाधन का कायाकल्प और सशक्तिकरण करना है, जिससे सतत् सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके। स्वास्थ्य, शिक्षा, उ‌द्यम और कार्यस्थल सुधार को एकीकृत करके SHREE न केवल राज्य में बल्कि पूरे भारत में श्रमिक कल्याण और विकास के लिए एक आदर्श स्थापित करेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रम स्टार रेटिंग सूचकांक भी प्रस्तावित किया गया है, जिसके संबंध में सचिव श्रम विभाग ‌द्वारा अवगत कराया गया कि यह रेटिंग सूचकांक वैश्विक स्तर पर श्रम कल्याण मानकों को उत्कृष्ट बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वैश्विक बाजार ‌द्वारा नैतिक स्त्रोतों, निष्पक्ष श्रम प्रथाओं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने की प्रणाली को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है। विनिर्माण और सेवा उ‌द्योगों में श्रम कल्याण के महत्व को समझते हुए विभिन्न कार्यप्रणाली के आधार पर व्यवसायों को रेटिंग दिये जाने से उपभोक्ता तथा परिचालन उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकेगी। बैठक में विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस, देवेन्द्र रामनारायण सखवारे, बृजेन्द्र सिंह यादव, श्रीमती अनुभा मुंजारे, विष्णु खत्री और श्रम विभाग के सचिव रघुराज राजेन्द्रन, अपर सचिव श्रम बसंत कुर्रे और आयुक्त श्रीमती रजनी सिंह उपस्थित थी।  

हेलमेट न खरीदो, किराए पर पहन लो! इंदौर में चालान से बचने का नया तरीका वायरल

इंदौर   इंदौर में 1 अगस्त से प्रशासन के आदेश के बाद बिना हेलमेट पेट्रोल देने पर सख्त रोक लगा दी गई है। अब पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट आए दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है, जिससे शहर में ऐसे कई नजारे दिखने लगे, जो प्रशासन के नियम को धता बता रहे है। लोग इसकी हेलमेट उसके सिर की तर्ज पर पेट्रोल भरवा रहे है। बांगड़दा के पेट्रोल पंप पर हेलमेट नहीं पहन कर आए एक दोपहिया वाहन चालक ने पेट्रोल नहीं देने पर कर्मचारियों से विवाद भी किया।  कई लोग पेट्रोल भरवाने के लिए दूसरों से हेलमेट उधार मांग रहे हैं या आसपास खड़े लोगों का हेलमेट पहनकर केवल नियम पूरा कर रहे हैं।कुछ पेट्रोल पंपों के पास लोग 10-15 रुपये किराए पर हेलमेट देने लगे हैं ताकि ग्राहक पेट्रोल भरवा सकें। कई पंपों पर बेरिकेडिंग की गई है।सिर्फ जिनके पास हेलमेट है, उन्हें ही पेट्रोल पंप परिसर में जाने दिया जा रहा है।इस नए नियम के चलते हेलमेट की बिक्री अचानक बढ़ गई है, लोग फुटपाथों पर हेलमेट बेचने लगे हैं। यह बात भी सामने आई कि सायकल हेलमेट, खिलौना हेलमेट, किराए की हेलमेट जुगाड़ अपना पर भी कई जगह पेट्रोल भरवाने लोग जा रहे है। इंदौर में छोटी ग्वालटोली क्षेत्र में पेट्रोल पंप के बाहर एक व्यक्ति हेलमेट पहने खड़ा था। वह बगैर हेलमेट पेट्रोल भरवाने आने वाले लोगों से पूछ रहा था कि हेलमेट चाहिए क्या। लोग लोग हेलमेट लेने के लिए तैयार हो रहे थे, वह उनसे दस रुपये मांग रहा था। परदेशीपुरा पेट्रोल पंप पर संचालक ने बेरिकेड लगवा दिए। जिनके पास हेलमेट है। उन्हें भी बेरिकेड के भीतर जाने दिया जा रहा है। इस पंप से कुछ दूरी पर दो युवक हेलमेट दस रुपये में किराए पर दे रहे है, लेकिन वे पैसे नकद ले रहे है, ताकि कोई अधिकारी पकड़े तो उनके पास पैसे लेने के सबूत न रहे। इस पंप पर एक युवक सायकल के साथ पहनी जाने वाली हेलमेट पहन कर आ गया, लेकिन वह उसके सिर से बार-बार गिर रही थी। उसे भी कर्मचारियों ने पेट्रोल नहीं दिया।   भाई हेलमेट देना जरा, पेट्रोल भरवाने जाना है पेट्रोल भरवाने के लिए वाहन चालक अपने आस पड़ोसियों से, रिश्तेदारों से हेलमेट उधार मांग रहे है। वे यह बोलते नजर आ रहे है कि भाई हेलमेट देना जरा, पेट्रोल भरवा कर लाना है। ज्यादातर ई स्कूटर वाले बगैर हेलमेट के घूम रहे इंदौर में 40 हजार से ज्यादा ई बाइक व स्कूटर है। वे घर से ही अपना वाहन चार्ज करते है,हालांकि शहर में भी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन है, लेकिन वहां के लिए प्रशासन की तरफ से स्पष्ट आदेश नहीं है। इस कारण बगैर हेलमेट के दोपहिया वाहन चालक अपने वाहन चार्ज कर रहे है।