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CBI का बड़ा एक्शन: MP के दो पुलिसकर्मियों पर कस रहा शिकंजा, इनाम घोषित

गुना  सीबीआई ने मध्य प्रदेश के गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में देव पारधी की हिरासत में मौत के मामले में दो फरार पुलिसकर्मियों संजीत सिंह मावई और उत्तम सिंह कुशवाहा की घेरेबंदी तेज कर दी है। सीबीआई ने इन दोनों की जानकारी देने वालों को दो-दो लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। सीबीआई का यह कदम इस केस में सुप्रीम कोर्ट की कठोर टिप्पणियों के बाद सामने आया है। अधिकारियों ने बताया कि मावई घटना के समय नगर निरीक्षक और कुशवाहा सहायक उप निरीक्षक के पद पर थे। दोनों को देव पारधी की हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी बनाया गया है। बता दें कि देव पारधी को चोरी के आरोप में हिरासत में लिया गया था। सीबीआई पहले ही इस मामले में उप निरीक्षक देवराज सिंह परिहार, नगर निरीक्षक जुबैर खान और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार कर चुकी है। इन आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया जा चुका है। मावई और कुशवाहा अब भी फरार हैं। सीबीआई की प्रवक्ता ने कहा कि इन दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं। इन दोनों को भगोड़ा अपराधी घोषित किया जा चुका है। देव पारधी को चोरी के आरोप में उसके चाचा गंगाराम के साथ हिरासत में लिया गया था। देव पारधी की मां का आरोप है कि उसके बेटे को आरोपियों ने टॉर्चर कर के मार डाला। वहीं पुलिस का दावा है कि आरोपी की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में फरार पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं करने पर CBI को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने एजेंसी से पूछा कि अप्रैल से फरार चल रहे संजीव सिंह मावई और उत्तम सिंह कुशवाहा को गिरफ्तार करने में क्या दिक्कत आ रही है। अदालत ने CBI को चेतावनी दी थी कि यदि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं की गई तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

तांत्रिक क्रिया के लिए कब्रों से छेड़छाड़ करने वाला बदमाश गिरफ्तार

खंडवा  खंडवा से निकलकर प्रदेशभर में सनसनी फैलाने वाला कब्रिस्तान छेड़छाड़ कांड आखिरकार सुलझ गया है। पुलिस ने इस घिनौने कृत्य के आरोपी तांत्रिक प्रवृत्ति के अपराधी अयूब खान (50) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मूलतः जावर थाने के अंतर्गत आने वाले मुंडवाड़ा गांव का रहने वाला है और पहले से ही निगरानी शुदा बदमाश है। पुलिस पूछताछ में अयूब ने स्वीकार किया कि वह कब्रों को खोदकर तंत्र क्रिया करता था। जानकारी मिली है कि इंदौर सेंट्रल जेल में सजा काटते समय उसने कुछ अपराधियों से तांत्रिक मंत्र-क्रियाएं सीखीं। इसी झूठी धारणा के चलते वह कब्रों पर छेड़छाड़ कर अपनी "शक्ति" बढ़ाने की कोशिश करता था। इसी साल 15 मई 2025 को वह जेल से बाहर आया था, जहां वह अपनी दोनों पत्नियों की हत्या के मामले में सजा काट रहा था। जेल से छूटने के महज चार दिन बाद यानी 19 मई की रात उसने खंडवा के बड़ा कब्रिस्तान और सिहाड़ा गांव में कब्रें खोदी थीं। हाल ही में 21 सितंबर को फिर से बड़ा कब्रिस्तान में कब्रों को नुकसान पहुंचाया गया। जब मुस्लिम समुदाय ने शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और उसी में आरोपी की पहचान हुई। अयूब खान के खिलाफ पहले से ही हत्या, चोरी और दहेज प्रताड़ना समेत करीब 13 गंभीर प्रकरण दर्ज हैं। दो पत्नियों की हत्या के मामलों में उसे उम्रकैद की सजा मिल चुकी थी और इसी दौरान वह जेल में तांत्रिक क्रियाओं से प्रभावित हुआ। खंडवा पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय ने जानकारी दी कि आरोपी को हरसूद इलाके से गिरफ्तार किया गया। आरोपी का जुर्म स्वीकार करने के बाद अब उसके खिलाफ न केवल आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी का आपराधिक इतिहास और कब्रिस्तान में की गई वारदातें समाज में भय और असुरक्षा का कारण हैं, इसलिए उस पर कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई जरूरी है।

इंदौर पुलिस की नई पहल: विजय नगर और लसुड़िया थानों में दो-दो प्रभारी तैनात

इंदौर  शहर में लगातार हो रहीं आपराधिक घटनाओं को देखते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर ने एक थाने में 2 थाना प्रभारियों की पोस्टिंग की है. इसको लेकर एक आदेश में जारी किया गया है ताकि शहर में आपराधिक गतिविधियों पर रोकथाम लगाई जा सके. इंदौर में कमिश्नर सिस्टम लागू हुए 2 साल से अधिक हो चुके हैं. लेकिन अभी भी शहर में आपराधिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. जिससे एक थाने में 2 थाना प्रभारियों की पोस्टिंग की गई है. 2 थानों में 2 टीआई की नियुक्ति इंदौर शहर में अपराध के ग्राफ को कम करने के लिए करीब 2 साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया गया था. लेकिन 2 साल बीतने के बाद भी इंदौर में अपराध के ग्राफ में लगातार इजाफा हो रहा है. इसी कड़ी में इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने आपराधिक घटनाओं पर लगाम कसने के लिए इंदौर के 2 स्थानों पर 2 थाना प्रभारी की नियुक्ति की है. काफी बड़ा है इन दोनों थाना क्षेत्र का एरिया इसको लेकर एक आदेश भी जारी किया गया है कि, शहर में अपराध पर रोक लगाने के लिए 2 थाना प्रभारी नियुक्त किए गए हैं. जिसमें इंदौर के लसूडिया और विजयनगर थाने पर 2 थाना प्रभारी को तैनात किया गया है. इंदौर के विजय नगर और लसुड़िया थाने का एरिया काफी बड़ा है. इन क्षेत्रों में काफी रहवासी क्षेत्र आते हैं. इसी के चलते दोनों थानों पर सबसे पहले 2 थाना प्रभारी को इंदौर पुलिस कमिश्नर के द्वारा तैनात किया गया है. इन थानों के टीआई बदले गए इंदौर के विजय नगर और लसुड़िया थाना के अलावा द्वारकापुरी, आजाद नगर, हीरानगर, छत्रीपुरा, और सराफा समेत कई थानों के टीआई बदले गए हैं. विजयनगर में टीआई चंद्रकांत पटेल की पोस्टिंग है. वहीं, उनकी मदद के लिए मीना बौरासी को भी विजयनगर थाने में नियुक्त किया गया है. वहीं, लसूड़िया थाना में नीतू सिंह की नियुक्ति हुई है. तारेफ सोनी पहले से यहां टीआई हैं. लॉ एंड ऑर्डर पर रखेंगे निगरानी इन दोनों थाने का मूल काम क्षेत्र में लॉ एंड ऑर्डर पर निगरानी रखने और आपराधिक घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से करवाई करना रहेगा. 2 थाना प्रभारी की तैनाती होने के बाद क्षेत्र में अपराध के ग्राफ में कमी आने की पूरी संभावना है. इसके साथ ही इंदौर प्रदेश का ऐसा जिला बन गया है, जहां एक थाने पर 2 थाना प्रभारियों को नियुक्त किया गया है.  

फर्जी दस्तावेज़ से भर्ती: इंदौर पीटीसी में बड़ा खुलासा, 14 नवआरक्षक हिरासत में

इंदौर   पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (पीटीसी) इंदौर में प्रशिक्षण ले रहे 14 नवआरक्षकों ने परीक्षा देने की अनुमति लेने के लिए फर्जीवाड़ा किया। इनमें 13 महिलाएं शामिल हैं। नवआरक्षकों ने किसी और के स्वीकृत आवेदन में फर्जी तरीके से अपना नाम जोड़कर प्रस्तुत किया, जो मंजूर भी हो गया। यह मामला लगभग डेढ़ माह पहले सामने आया, जब पीटीसी प्रभारी एसपी ने गड़बड़ी पकड़ी और इसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी। जांच एडीजी प्रशिक्षण राजाबाबू सिंह के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय के एआइजी से कराई गई। जांच में गड़बड़ी साबित होने पर सभी 14 नवआरक्षकों को प्रशिक्षण से बाहर कर उनके संबंधित जिलों में भेज दिया गया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज कर सेवा समाप्त भी की जा सकती है। विभागीय जांच इधर, ट्रेनिंग स्कूल में पदस्थ दो डीएसपी समेत पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी विभागीय जांच की जा रही है। इन पर आरोप है कि उन्होंने इस फर्जीवाड़े को अनदेखा किया। जांच में यह साफ होगा कि उन्होंने किस स्तर पर लापरवाही की।

SC-ST के खिलाफ अपराध रोकने MP पुलिस का बड़ा एक्शन: 23 जिलों में कड़ी निगरानी, 63 थाना क्षेत्र सेंसिटिव घोषित

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने 23 जिलों के 63 थाना क्षेत्रों और लगभग 100 वार्डों एवं गांवों को अत्याचार प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। इन क्षेत्रों में अब विशेष सतर्कता और निगरानी रखी जाएगी। सरकार का मानना है कि प्रदेश के कुछ हिस्से ऐसे हैं, जहां SC-ST वर्ग के लोगों पर अत्याचार की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक सामने आती हैं। ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित कर कड़ी निगरानी की जरूरत है। इसी उद्देश्य से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 एवं उसके नियमों के तहत यह अधिसूचना जारी की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चिह्नित थाना क्षेत्रों में SC-ST वर्ग के लोगों के साथ होने वाले अत्याचार पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेष निगरानी के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें पुलिस चौकियों की स्थापना, जागरूकता के कार्यक्रम, पुराने विवादों को हल कराने जैसे प्रयास होंगे। घटनाओं को लेकर पुलिस को त्वरित कार्यवाही करने के लिए भी कहा गया है। गृह विभाग ने केंद्र सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया है। जिन थाना क्षेत्रों को संवेदनशील माना गया है उनमें मंडला जिले का कोतवाली, बालाघाट का कोसमी, भरवेली, विदिशा का कोतवाली, गंज बासौदा, सिविल लाइन, धार का कोतवाली, खंडवा का पदम नगर, मांधाता, पंधाना, इंदौर का सिमरोल, मुरैना कोतवाली, स्टेशन रोड, सिविल लाइन, बामनोर, भिंड में देहात, देवास में औद्योगिक क्षेत्र, पिपलावा, शाजापुर में शुजालपुर सिटी, शुजालपुर मंडी, मंदसौर का वायडीनगर, नर्मदापुरम के देहात, इटारसी, कोतवाली, पिपरिया और शिवपुर, बैतूल में सारणी, आमला, रायसेन में औबेदुल्लागंज, जबलपुर में गोराबाजार, गुना में कोतवाली, कैंट, विजयपुर, आरोन, मधुसूदनगढ़, शिवपुरी में सिरसोद, दिनारा, आमोला, इंमदौर, भौंती, अशोकनगर में कोतवाली, देहार, बहादुरपुर, ग्वालियर में जनकगंज, झांसी रोड, विश्वविद्यालय, ठाठीपुर, बहोड़ापुर, ग्वालियर, डबरा, सागर में कैंट, बहेरिया, बंडा, राहतगढ़, दमोह में कोतवाली, छतरपुर में सिविल लाइन, लवकुशनगर, जुझारपुर और टीकमगढ़ जिले का कोतवाली थाना क्षेत्र शामिल है। 4 केस से समझिए थाना क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित करने की वजह केस-1: सागर दलित युवक हत्या, मां को निर्वस्त्र कर पीटा ये मामला 24 अगस्त 2023 का है। सागर जिले के खुरई देहात थाना क्षेत्र के बरोदिया नौनागिरी गांव में दबंगों ने दलित युवक लालू उर्फ नितिन अहिरवार की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बेटे को बचाने गई मां को भी निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया। दरअसल, लालू की बहन से दबंगों के छेड़छाड़ की थी। जिसकी शिकायत थाने में की गई थी। दबंग पीड़ित परिवार पर राजीनामा करने का दबाव बना रहे थे। जब परिवार ने इनकार किया, तो इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में 9 नामजद और 4 अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, मारपीट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। खास बात ये है कि नितिन अहिरवार के इस केस में घटना के चश्मदीद उसके चाचा और बहन की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। जिसकी जांच अभी भी चल रही है। केस-2: 30 हमलावरों ने महिला की गोली मारकर हत्या की ये मामला मंदसौर जिले के गरोठ थाना क्षेत्र के ढाकनी गांव का है। 6 दिसंबर 2024 को करीब 30 हमलावर 5 गाड़ियों में सवार होकर गांव में ही रहने वाले बलराम के घर पहुंचे थे। यहां पहुंचकर उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें बलराम की पत्नी 45 साल की सुगना बाई की मौत हो गई, जबकि बलराम सहित 3 लोग घायल हो गए थे। ये विवाद सरकारी जमीन पर गाय बांधने को लेकर हुआ था। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और गांववालों ने शव रखकर बोलिया, शामगढ़ भानपुरा और खड़ावदा रोड पर करीब 5 घंटे तक चक्काजाम किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के बाद ही प्रदर्शन खत्म हुआ। उस समय पुलिस ने 7 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए तीन लोगों की गिरफ्तारी भी की थी। केस-3: गैंगरेप के बाद आरोपियों ने घर में लगाई आग भिंड जिले के आरोली गांव में इसी साल 13 जनवरी 2025 को गांव के दबंगों ने दलित युवती के साथ गैंगरेप किया था। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने गैंगरेप के आरोपी सोनी गुर्जर और धर्मेंद्र गुर्जर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मगर, कोर्ट में बयान दर्ज कराने से पहले ही आरोपियों ने पीड़िता और उसके परिवार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। समझौते से इनकार करने पर आरोपी बड़ी संख्या में अपने साथियों के साथ पीड़िता के घर पहुंचे और परिवार से मारपीट की। इसके बाद घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। इस आगजनी में परिवार के दो लोग झुलस गए थे। केस-4 : गैंगरेप पीड़िता की आंत-बच्चेदानी बाहर थी खंडवा जिले में एक आदिवासी महिला के साथ दरिंदगी हुई। घटना 23 मई की रात हुई जब महिला शादी समारोह से लौट रही थी। आरोपी हरी और सुनील ने शराब के नशे में महिला के साथ बर्बरता की थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि महिला की आंत 6 फीट शरीर से बाहर निकली थी। उसके प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें भी थीं। इन्हीं चोटों की वजह से महिला की मौत हो गई थी। महिला का पोस्टमॉर्टम करने वाली डॉक्टर सीमा सूटे के मुताबिक उसके गर्भाशय और रेक्टम तक को गंभीर चोटें लगी थीं।। उन्होंने कहा, "मैंने अपने पूरे करियर में इतनी क्रूरता नहीं देखी।" रिपोर्ट के अनुसार, महिला के शरीर से खून बहुत अधिक बहा और इसके कारण उसकी मौत हो गई। पीड़िता ने मरने से पहले अपने बेटे को आरोपियों के नाम बताए थे, जिन्होंने पुलिस को बयान भी दिया। क्या होगा आइडेंटिफाई एरिया में.. गृह विभाग के नोटिफिकेशन के मुताबिक ये कदम केंद्र सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत उठाया है। 23 जिलों के 63 थानों को संवेदनशील घोषित किया है और इन थानों के तहत आने वाले क्षेत्र को 'आइडेंटिफाई एरिया' के रूप में चिह्नित किया गया है। एक्सपर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार किसी थाना क्षेत्र को आइडेंटिफाई एरिया घोषित करती है तो इसका मतलब है कि वहां और ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। वहां की … Read more

अवैध ‘नॉनवेज’ होटल पर बुलडोजर, विरोध में उतरा मालिक बोला – लाठीचार्ज कर लो, नहीं हटूंगा

संभल  उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने एक अवैध रूप से संचालित 'नॉनवेज' होटल को ध्वस्त कर दिया. मोहम्मद सईदुद्दीन का यह होटल बिना नक्शा पास कराए चलाया जा रहा था. प्रशासन ने पहले नोटिस दिया था, लेकिन जब अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, तो बुलडोजर से इसे गिरा दिया गया. इस दौरान होटल संचालक और स्थानीय लोग विरोध करने के लिए इकट्ठा हो गए, जिससे मौके पर तनाव फैल गया.  क्यों चला बुलडोजर? बताया जा रहा है कि हयातनगर के सरायतरीन में मोहम्मद सईदुद्दीन द्वारा संचालित इस होटल का नक्शा पास नहीं था. संबंधित विभाग ने 12 जुलाई 2025 को होटल संचालक को अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया था. इसके बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो नायब तहसीलदार और विनिमय क्षेत्र कार्यालय के अधिकारी बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे. उन्होंने आरबी एक्ट की धारा 10 के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया.  संचालक और प्रशासन में हुई तीखी बहस जब प्रशासन ने बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की, तो होटल संचालक और वहां मौजूद भीड़ ने विरोध करना शुरू कर दिया. संचालक ने आरोप लगाया कि प्रशासन सत्ता के दबाव में काम कर रहा है और उनकी दुकान का मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है. उसने यह भी कहा कि वह पुलिस से पिटने, मरने और जेल जाने के लिए तैयार है, लेकिन अपनी जगह नहीं छोड़ेगा. इसके बाद हयातनगर थाने की पुलिस और पीएसी को बुलाया गया ताकि हालात को संभाला जा सके.  प्रशासन ने दी कार्रवाई की जानकारी संभल के एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी है. उन्होंने कहा कि आरबी एक्ट की धारा 10 के तहत अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया है. एसडीएम ने यह भी बताया कि नोटिस पहले ही जारी कर दिया गया था और सुनवाई के बाद ही यह कदम उठाया गया. वहीं, होटल संचालक का आरोप है कि 50 साल से उस जमीन पर उसका कब्जा है और प्रशासन उसे पलायन करने के लिए मजबूर कर रहा है.  होटल संचालक का बयान  होटल संचालक ने कहा कि 50 साल से मेरा इसी जमीन पर कब्जा है. प्रशासन के द्वारा गलत तरीके से सत्ता के दबाव में जाकर कार्रवाई की गई है, जबकि मेरी दुकान का मुकदमा भी कोर्ट में विचार अधीन है. मौके पर मेरा जायज कब्जा है. नाजायज तरीके से बुलडोजर लेकर यहां पर अधिकारी आए हैं. लेकिन अब मैं पुलिस से पिटने के लिए, मरने के लिए और जेल जाने के लिए तैयार हूं, मगर यह जगह नहीं छोडूंगा.

पशु चिकित्सक रिश्वत लेते धरा गया! उज्जैन में लोकायुक्त ने 9 हजार की रिश्वत लेते किया गिरफ्तार

उज्जैन मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद घूसखोरी के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहें हैं। ताजा मामला उज्जैन से सामने आया है। यहां पशु चिकित्सक को गाय का पोस्टमार्टम करने के लिए घूस लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा है। 9 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को उज्जैन के इंगोरिया में पदस्थ पशु चिकित्सा मनमोहन सिंह पवैया को 9 हजार रुपये की रिश्वत लेते लोकायुक्त पुलिन ने रंगें हाथ पकड़ा है। दरअसल, पशु चिकित्सा कार्यालय पर गाय का पोस्टमार्टम करने के एवज में मनमोहन सिंह पवैया ने 10 हजार की रिश्वत मांगी थी। उसी रिश्वत राशि में 9000 लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने डॉ मनमोहन सिंह पवैया को गिरफ्तार किया। शिकायत के बाद कार्रवाई बता दें कि, ग्राम सरसाना बड़नगर तहसील के रहने शख्स ने लोकायुक्त कार्यालय में मामले की शिकायत की थी। फरियादी की शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्ट चिकित्सक के खिलाफ एक्शन लिया। फिलहाल भ्रष्टाचार के विभिन्न अधिनियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस विभाग में हलचल: जहानाबाद के 47 अधिकारियों का स्थानांतरण

जहानाबाद जहानाबाद जिले में आगामी दशहरा पूजा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार के आदेश पर जिले के 47 पुलिस पदाधिकारियों का स्थानांतरण किया गया, जिनमें 19 थानाध्यक्ष शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यह कदम जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और थानों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि सभी थाना अध्यक्षों का निरीक्षण किया गया और जिन अधिकारियों ने अपने कार्यों में पर्याप्त सजगता नहीं दिखाई, उन्हें नए पदों पर स्थानांतरित किया गया। इस फेरबदल के बाद उम्मीद है कि सभी थाना अध्यक्ष अपने कार्य के प्रति अधिक सजग रहेंगे और जिले में पुलिसिंग में पारदर्शिता और गति बढ़ेगी। तबादले के प्रमुख विवरण इस प्रकार हैं:     सदर थाना प्रभारी दिवाकर कुमार विश्वकर्मा को मखदुमपुर थाना का प्रभारी बनाया गया।     मखदुमपुर थाना प्रभारी ओम प्रकाश को सदर अंचल निरीक्षक बनाया गया।     शकुराबाद थाना प्रभारी मोहन प्रसाद को सदर थाना, हुलासगंज थाना प्रभारी पंकज कुमार को टेहटा, टेहटा थाना प्रभारी सुमन को कड़ौना, और कड़ौना थाना प्रभारी पवन कुमार दास को ओकरी स्थानांतरित किया गया।     घोषी थाना प्रभारी ददन प्रसाद को कल्पा, सदर अंचल निरीक्षक परमानंद लाल करण को घोसी का प्रभारी बनाया गया।     अन्य स्थानांतरण में काको, परसबिगहा, अनुसूचित जनजाति थाना, भेलावर, उमता, वाणावर, सिकरिया, विष्णुगंज और पाली थाना शामिल हैं। इस बड़े फेरबदल के बाद जिले में पुलिस महकमे में हलचल मची हुई है। सभी स्थानांतिरत अधिकारियों को तुरंत नए पदों पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इस कदम से जिले में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही पुलिसिंग में गति और पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

पुलिस ने किया बड़ा एनकाउंटर, शिवपुरी में 30 किलो चरस और तस्कर पकड़ाए, संपत्ति की जांच होगी

शिवपुरी  शिवपुरी पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 किलो 295 ग्राम चरस जब्त की है। बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 6 करोड़ 21 लाख रुपए बताई गई है। मामले में आरोपी संदीप सिंह सिख (38), निवासी रमतला की किया गिरफ्तार।  एसपी अमन सिंह राठौड़ के मुताबिक, गुरुवार को देहात थाना प्रभारी जितेंद्र मावई को सूचना मिली कि मझेरा गांव, कोटा-झांसी फोर लेन पर एक युवक बड़ी खेप लेकर पहुंचने वाला है। पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ा। उसके पास से दो बैगों में रखे 60 पैकेट चरस और एक नई किओ कार जब्त की गई। जांच में सामने आया कि संदीप सिंह ने यह खेप नेपाल से मंगवाई थी। नेपाल से टमाटर का व्यापार करने वाला मोहन ठाकुर यह खेप ट्रक में छुपाकर लाया और संदीप को सौंप दी। राजस्थान की पार्टी से सौदा तय हुआ था, लेकिन पुलिस की दबिश से आरोपी पहले ही पकड़ लिया गया। ऐसे आया पुलिस की पकड़ में पुलिस के मुताबिक, कुछ महीने पहले गुना की केंट पुलिस ने आरोपी संदीप सिंह को 650 ग्राम अफीम के साथ पकड़कर जेल भेज दिया था। यहीं जेल में उसकी मुलाकात बंटी नाम के कैदी से हुई। बंटी ने संदीप को भरोसा दिलाया कि वह उसे राजस्थान की बड़ी पार्टी से मिलवा सकता है, जो चरस की भारी खेप खरीदने को तैयार है। करीब एक माह पहले जब दोनों जेल से बाहर आए, तब बंटी ने संदीप की मुलाकात उस राजस्थान की पार्टी से कराई। इसके बाद संदीप सिंह ने नेपाल से चरस की यह खेप मंगवाई। मोहन ठाकुर नाम का टमाटर व्यापारी यह खेप नेपाल से ट्रक में छुपाकर अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार करके शिवपुरी लाया और संदीप सिंह को सौंप दी। डील तय हुई कि राजस्थान की पार्टी चरस लेने शिवपुरी आएगी और मझेरा गांव (कोटा-झांसी फोर लेन) पर डिलीवरी पॉइंट तय किया गया। लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने दबिश देकर संदीप सिंह को पकड़ लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने सिर्फ 7 दिन पहले ही नई किओ कार खरीदी थी, जिससे वह चरस की डिलीवरी देने पहुंचा था। ढाबे से होटल तक- 7 साल का काला सफर संदीप सिंह के माता-पिता मूलतः पंजाब के रहने वाले हैं। कई साल पहले वे कोलारस आकर बस गए और 10 बीघा जमीन लेकर खेती करने लगे। संदीप दो भाइयों में से एक है। कोरोना काल के दौरान संदीप ने कोलारस बायपास पर एक छोटी झोपड़ी में ढाबा खोला। इसी ढाबे से उसने अवैध नशे का कारोबार शुरू किया। धीरे-धीरे वह अफीम, गांजा और चरस बेचने और सप्लाई करने लगा। सिर्फ 7 साल में जिस झोपड़ी में ढाबा था, वहां अब दो मंजिला होटल खड़ा है। इसके अलावा उसने काली कमाई से कई जमीनें और मकान खरीदे हैं। एसपी अमन सिंह राठौड़ ने यह भी कहा है कि आरोपी ने अचानक ही पैसा बनाया और प्रॉपर्टी खड़ी कर ली। अब उसकी संपत्ति की जांच भी होगी। आरोपी का नेटवर्क और आपराधिक रिकॉर्ड मोहन ठाकुर लखनऊ का रहने वाला है। वही नेपाल से टमाटर की खेप ले जाने वाला व्यापारी है, जिसने नेपाल से चरस लाकर संदीप को देता था। बंटी कैदी साथी जिससे जेल में मुलाकात, जिसने राजस्थान की बड़ी पार्टी से संदीप का कनेक्शन कराया। संदीप सिंह का रिकॉर्ड, पहले भी कई मामले दर्ज, जिनमें एनडीपीएस, आबकारी एक्ट और गुना-कोलारस थानों में अपराध शामिल हैं। पिछले वर्ष उससे 03 करोड़ 49 लाख रुपए की 17 किलो चरस भी जब्त हुई थी।

नाबालिग पीड़िता को आरोपी के घर भेजा, फिर हुई दरिंदगी – पन्ना DPO समेत 10 के खिलाफ केस

छतरपुर/पन्ना   पन्ना जिले की बाल कल्याण समिति, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और वन स्टॉप सेंटर के स्टाफ ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की जिंदगी से खिलवाड़ किया. दरअसल, पन्ना जिले की नाबालिग को एक युवक भगाकर ले गया. बाद में नाबालिग को छतरपुर जिले से बरामद किया गया. दुष्कर्म के आरोपी को जेल भेज दिया गया. पीड़िता को वन स्टॉप सेंटर पर रखा गया. जब आरोपी जेल से छूटकर आया तो पीड़िता को जिम्मेदारों ने उसी के घर भेज दिया. इसके बाद आरोपी ने नाबालिग को लगातार हवस का शिकार बनाया. जांच के बाद छतरपुर पुलिस का एक्शन इस मामले का खुलासा होने पर पन्ना जिला प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया. इसके बाद हुई जांच के आधार पर छतरपुर पुलिस ने बाल कल्याण समिति पन्ना के अध्यक्ष, समिति के पांचों सदस्य, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, वन स्टॉप सेंटर के तीनों कर्मचारी और एक अन्य महिला के खिलाफ अपराध दर्ज किया है. एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. अन्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है. पुलिस ने जांच में पाया कि नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में बाल कल्याण समिति ने घोर लापरवाही की. 15 साल की लड़की को साथ ले गया युवक छतरपुर के जुझारनगर थाने में पन्ना के डीपीओ सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. मामले के अनुसार पन्ना जिले के एक गांव में रहने वाली 15 साल की नाबालिग 16 जनवरी 2025 को स्कूल जाने के लिए घर से निकली, फिर लौटी नहीं. परिजनों ने थाना में गुमशुदुगी दर्ज कराई. पुलिस ने मामला दर्ज कर नाबालिग को 17 फरवरी 2025 को छतरपुर जिले के एक गांव से दस्तयाब किया. नाबालिग को भगा ले जाने वाले आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया. पीड़िता को आरोपी के ही घर भेजा नाबालिग को बाल कल्याण समिति पन्ना के समक्ष प्रस्तुत किया गया. बाल कल्याण समिति ने अस्थाई आश्रय के लिए वन स्टॉप सेंटर पन्ना भेज दिया. बताया गया कि बच्ची के परिवार वाले उससे नाराज थे. इस कारण उन्होंने अपने साथ ले जाने से मना कर दिया. इसलिए उसे महिला बाल विकास की समिति और वन स्टॉप सेंटर को सौंप दिया. इसी बीच बाल कल्याण समिति ने 29 मार्च 2025 को पीड़िता को आरोपी के घर भेज दिया. जनसुनवाई में मामला पहुंचने से हड़कंप कुछ दिनों बाद नाबालिग के परिजनों ने बेटी को सुपुर्द करने कलेक्ट्रेट पन्ना जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई. कलेक्टर ने शिकायत को संज्ञान में लेकर बाल कल्याण समिति को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने निर्देश दिए. गलत और मनमाने निर्णय का खुलासा न हो, इसलिए नाबालिग को 29 अप्रैल 2025 को दोबारा वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया. वन स्टॉप सेंटर की काउंसलिंग में खुलासा हुआ कि उसके साथ कई बार दुष्कर्म हुआ. एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश इस मामले में छतरपुर पुलिस ने बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष भानुप्रताप जड़िया पिता मनीराम जड़िया निवासी किशोरगंज पन्ना, सदस्य अंजली भदौरिया पति योगेंद्र भदौरिया निवासी सिविल लाइन पन्ना, आशीष बॉस पिता एनएन बॉस निवासी सिविल लाइन पन्ना, सुदीप श्रीवास्तव पिता सरमन लाल श्रीवास्तव निवासी किशोरगंज पन्ना और प्रमोद कुमार सिंह पिता मोहन सिंह निवासी ललार जिला पन्ना के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 17 के तहत कायमी की है. छतरपुर पुलिस ने आशीष बॉस को गिरफ्तार किया है. बाकी आरोपियों के घर पुलिस ने दबिश दी जा रही है. इनके खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस इसके अलावा वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक कविता पाण्डेय, काउंसलर प्रियंका सिंह, केस वर्कर शिवानी शर्मा के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत अपराध कायम किया गया है. जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अवधेश सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 21, एससीएसटी एक्ट की धारा 4, बीएनएस की धारा 199, 239 सहित एक अन्य महिला अंजली कुशवाहा के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 के तहत अपराध दर्ज किया गया है. इस मामले में लवकश नगर SDOP नवीन दुबे ने बताया "मामले को गंभीरता से लेते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. पहली गिरफ्तारी महिला बाल कल्याण समिति के सदस्य आशीष बॉस की हुई है. उसे जेल भेज दिया गया है. बाकी सदस्य अभी फरार हैं. जल्द ही सभी को गिरफ्तार किया जाएगा."