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चाचा की हत्या कर गैंगस्टर बना, हरियाणा का बदमाश बादली अब पुलिस के हत्थे चढ़ा

गुरुग्राम गैंगस्टर मैनपाल बादली को कंबोडिया से भारत प्रत्यर्पित कर बुधवार सुबह दिल्ली लाया गया, जहां हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बादली पर सात लाख का इनाम घोषित था और वह साल 2018 में पैरोल पर बाहर आने के बाद से फरार था। विदेश से चला रहा था गैंग एसटीएफ के अनुसार बादली पिछले कई सालों से विदेश में बैठकर अपने आपराधिक गिरोह को चला रहा था। वह रंगदारी, हत्या और अन्य संगीन अपराधों में शामिल था। एसटीएफ ने इंटरपोल की मदद से उसे कंबोडिया में हिरासत में लिया था और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भारत डिपोर्ट किया गया है। सात साल से विदेश में था मैनपाल बादली मैनपाल 29 अगस्त 2018 को पैरोल पर जेल से बाहर आया था। जिसके बाद वह विदेश चला गया। उस पर हत्या समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। जेल में रहते हुए भी हत्या करने का आरोप है। मैनपाल शुरुआत में ट्रैक्टर रिपेयर का काम सीखता था, लेकिन साल 2000 में अपने चाचा की हत्या के बाद अपराध की दुनिया में उसने कदम रखा। नंबर वन मोस्टवांटेड है मैनपाल हरियाणा पुलिस की सूची में मैनपाल बादली नंबर-1 मोस्ट वांटेड बदमाश है। इसी के चलते पुलिस इसको दबोचने के लिए लगी हुई थी। हाल ही में इसको कंबोडिया में पकड़ा गया। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब उसके गैंग के बाकी सदस्यों और नेटवर्क पर भी नजर रख रही हैं। साथ ही एसटीएफ ने इस ऑपरेशन को गुप्त रखा था। इसके बाद कम्बोडिया की स्थानीय अधिकारियों के सहयोग से मैनपाल को हिरासत में लिया गया। ड्रग्स सिंडीकेट से भी संपर्क पुलिस के अनुसार मैनपाल का गैंग ड्रग्स की तस्करी और अवैध हथियारों के कारोबार में भी शामिल है। कंबोडिया में उसकी लोकेशन ट्रैक करने के लिए हरियाणा एसटीएफ ने इंटरपोल और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया। 20 अगस्त के आसपास कंबोडिया पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और डिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत लाया गया है। गैंगस्टर बनने से पहले ट्रैक्टर मिस्त्री था शुरुआत में मैनपाल ट्रैक्टर रिपेयर का काम सीख रहा था, लेकिन चाचा की हत्या के बाद उसने अपराध की राह पकड़ ली। धीरे-धीरे वह हरियाणा के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में शामिल हो गया। उसका गैंग कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा, जिसमें हत्या, फिरौती और संगठित अपराध शामिल हैं। 2018 में हुआ था फरार बादली को साल 2018 में एक मामले में पैरोल मिली थी, जिसके बाद वह वापस जेल नहीं लौटा और फरार हो गया था। एसटीएफ उसकी तलाश में थी और आखिरकार उसे पकड़ने में सफलता मिली। गिरफ्तारी के बाद, बादली से आगे की पूछताछ की जा रही है ताकि उसके गैंग के अन्य सदस्यों और गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

शराब पीकर वाहन चलाना पड़ा भारी, रायपुर पुलिस ने 1200 से अधिक चालकों को पकड़ा

रायपुर  नशे की हालत में वाहन चलाने वालों पर रायपुर पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। यातायात पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर सिर्फ पिछले एक हफ्ते में 90 से अधिक वाहन चालकों पर कार्रवाई की है। वहीं जनवरी 2025 से अब तक 1200 से अधिक चालकों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत कार्यवाही की जा चुकी है। एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत पुलिस शहर के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर बेरिकेटिंग कर ब्रीथ एनालाइज़र मशीन से जांच कर रही है। नशे की हालत में वाहन चलाते पाए जाने पर मौके पर ही वाहन ज़ब्त कर चालान बनाकर कोर्ट पेश किया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में कार्रवाई के आंकड़े     मोटरसाइकल/स्कूटी : 20     कार : 56     टाटा एस/पिकअप : 08     ट्रक : 02     ट्रैक्टर : 02     ई-रिक्शा : 02 भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन न्यायालय में पेश किए जाने पर इन चालकों पर 10 हजार से 15 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया भी की जाती है। त्योहारी सीजन में विशेष अभियान त्योहारों के दौरान अपराध और सड़क हादसों पर रोकथाम के लिए पुलिस रोज़ाना रात 11 बजे से तड़के 2 बजे तक विशेष चेकिंग अभियान चला रही है। पुलिस की अपील पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि नशे की हालत में वाहन न चलाएं। ऐसा करने पर चालक न सिर्फ खुद की बल्कि दूसरे लोगों की जान को भी खतरे में डालता है। पकड़े जाने पर वाहन ज़ब्त करने के साथ ही कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां भारी जुर्माने से दंडित होना तय है। 

गाजा पीड़ित बनकर मस्जिदों से पैसा वसूलने वाले सीरियाई गैंग को पुलिस ने पकड़ा

अहमदाबाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक सीरियाई गिरोह का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह गाजा पीड़ितों के रूप में मस्जिदों से पैसे वसूल रहा था. मामले में पुलिस ने अली मेघात अलजाहर नाम के एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है. वह टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था. पूछताछ के दौरान पता चला कि वह पैसों का इस्तेमाल ऐशो-आराम की ज़िंदगी जीने में कर रहा था. पुलिस कार्रवाई के बाद उसके तीन साथी फरार हैं. जिनकी तलाश की जा रही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही तीनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. ऐसी गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए हैं खतरा: पुलिस क्राइम ब्रांच ने कहा है कि ये गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं. वे वीजा नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं. हालांकि एकत्रित धन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था, इसका पता लगाने के लिए जांच चल रही है.  मामले की जांच राज्य और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है. फिलहाल अली को हिरासत में लेकर ब्लैकलिस्ट करने और डिपोर्ट करने की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस द्वारा ऐसे अन्य गैंग का भी पता लगाया जा रहा है.  मेधात अल-ज़हर दमास्क्स का रहने वाला है अली मेधात पुलिस ने बताया कि क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़ा गया अली मेधात, अल-ज़हर दमास्क्स का रहने वाला है और खुद को सीया मुस्लिम बता रहा है. वह अहमदाबाद की एक होटल में रुका था, जहां से उसे पकड़ा गया. क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि आरोपी के शरीर पर घाव के निशान हैं, जिसे वह युद्ध में लगे चोट होने का दावा कर रहा है.  आरोपी के गैंग में शामिल झकरीया अलजर, अहमदा अल्हबश, युसेफ अलजहर अभी फरार हैं. पुलिस उन्हें ढूंढ रही है. यह लोग लेबनान में एकत्रित हुए और फिर वहां से भारत आए थे.

3 साल में 22,500 पुलिसकर्मी भर्ती होंगे, CM यादव की घोषणा पर तेज हुई प्रक्रिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के पुलिस थानों में खाली पड़े हजारों पद जल्दी भर लिए जायेंगे, सरकार ने इसकी तैयारियां तेज कर दी है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बीते 15 अगस्त को घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन साल में ये भर्तियाँ हो जायेंगी इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने भर्तियों के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन की भी घोषणा की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के बाद से प्रदेश के युवा उत्साहित हैं, विशेष रूप से उन युवाओं में बहुत उत्साह है जो लंबे समय से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे और खाकी वर्दी पहनने का सपना दिल में संजोये बैठे हैं, उनके सपने जल्दी ही हकीकत में बदलने वाले हैं। सीएम डॉ मोहन यादव ने 15 अगस्त को पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी जानकारी में आया है हमने  7500 पदों पर भर्ती की अनुमति दी है लेकिन अभी भी 20 हजार पद पुलिस विभाग में खाली है, उन्होंने कहा कि हम अगले तीन सालों में सभी खाली पदों को भर देंगे। सीएम ने की पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा  सीएम ने पुलिस के आला अधिकारियों की तरफ देखते हुए कहा कि पहले ये भर्तियाँ कर्मचारी चयन मंडल करता था  जिसमें कई तरह की परेशानियाँ आती थी इसलिए आप इसके लिए बोर्ड बनाइये मैं पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा करता हूँ, जिससे आप अपने हिसाब से भर्ती कर सकेंगे।  इससे पुलिस भर्ती में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। तीन वर्ष तक हर साल होगी 7500 पदों पर भर्ती  मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 के लिए पुलिस में स्वीकृत पदों की भर्ती मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल करेगा। वर्ष 2026 से ये भर्तियां पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा ही की जाएंगी। प्रतिवर्ष पुलिस के रिक्त 7500 पदों पर भर्ती की जाएगी और इस प्रकार आगामी 3 वर्ष में पुलिस विभाग के सभी रिक्त 22,500 पद भर दिए जाएंगे। वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात अफसरों के लिए ये घोषणा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस, जेल और नगर सेवा एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियां में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिये जाने की घोषणा भी की है। वीवीआइपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी पात्रता अनुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिये जाने का निर्णण भी लिया गया है।

राज्य स्तर के बाद हर जिले में होगा पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन, हरियाणा सरकार का ऐलान

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार पुलिस विभाग में सुधार को लेकर लगातार प्रयासरत है। हरियाणा में राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित किए जाने के बाद अब सरकार ने सभी जिलों में पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन करने का फैसला किया है। जिला स्तर पर गठित प्राधिकरण के समक्ष इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की शिकायत की जा सकेंगी। वहीं सरकार की ओर से गठित राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में महिला सदस्यों की नियुक्ति भी जल्द ही की जाएगी। गौरतलब है कि 1989 बैच के सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी डॉ. आरसी मिश्रा को हाल ही में राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का चेयरपर्सन और 2014 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ललित सिवाच को सदस्य बनाया गया है।   अब करीब 11 वर्षों के बाद जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण के गठन पर काम शुरू हो गया है। इससे आमजन इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत कर सकेंगे। जिला स्तरीय पुलिस कंप्लेंट अथारिटी का चेयरमैन सेवानिवृत्त जिला जज हो सकता है। सदस्यों के तौर पर सेवानिवृत्त आइएएस और आइपीएस अधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं।   राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के पास 500 से अधिक शिकायतें लंबित हैं, जिन पर सुनवाई होनी है। इसके अलावा प्राधिकरण ने 70 मामलों में इंस्पेक्टर और उससे नीचे रैंक के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सुनवाई के बाद गृह विभाग को कार्रवाई के लिए लिख दिया है।

माइक्रो फाइनेंस बैंक पर डकैतों का धावा, 12 किलो सोना और ₹5 लाख कैश गायब

 जबलपुर जबलपुर जिले के सिहोरा के खितौला में सोमवार की सुबह पांच बदमाशों ने कट्टे की नोक पर स्माल फायनेंस बैंक (इसाफ बैंक) को लूट लिया। बदमाशों ने बैंक के स्ट्रांग रूम को खुलवाया और उसमें रखा 12 किलो सोना और नकदी लूट कर ले गए। प्रारंभिक जानकारी है कि चार बदमाश बैंक के अंदर गए और उनका एक साथी बैंक के बाहर पहरेदारी कर रहा था। पूरी प्लानिंग से घटना को अंजाम दिया गया। आरोपियों को पकड़ने के लिए आस-पास के सभी थानों को सूचना भेज दी है। जगह-जगह नाकेबंदी की गई है। सिहोरा के खितौला स्थित इसाफ बैंक सुबह 9.30 बजे खुल गया था। कामकाज शुरू हुआ था, उसी समय दो बाइक पर पांच बदमाश पहुंचे। बैंक के भीतर प्रवेश करने के साथ ही चारों बदमाशों ने कट्टा निकाल लिया था। बैंक कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को धमकाते हुए बैंक में एक कमरे में बंद कर दिया। बैंक के मैनेजर की कनपटी पर कट्टा रख दिया था और जान से मार देने की धमकी देते हुए स्ट्रांग रूम खोलने का दबाव बनाया था। स्ट्रांग रूम खुलवाकर उसमें रखा करीब 12 किलो ग्राम सोना आरोपी ने अपने थैले में भर लिया, सोने के साथ लगभग पांच लाख से अधिक के नोट भी थैले में रख लिए। इसके बाद आरोपी कट्टा लहराते हुए भाग गए। कैसे हुई वारदात? जबलपुर जिले के खितौला (सिहोरा) में यह घटना सुबह करीब 9:30 बजे हुई है। पुलिस के मुताबिक, बदमाश दो बाइकों पर सवार होकर बैंक पहुंचे थे। चार लोग बैंक में घुसे और एक बाहर पहरेदारी करता रहा। बदमाशों ने बैंक में मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों को डरा धमकाकर कमरे में बंद कर दिया और मैनेजर की कनपटी पर कट्टा रखकर स्ट्रांग रूम खोलने को कहा। वहां से 12 किलो सोना और ₹5 लाख नकदी थैलों में भरकर फरार हो गए। पुलिस की कार्रवाई घटना के बाद पुलिस ने बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। आसपास के थानों को अलर्ट कर जगह-जगह नाकेबंदी शुरू कर दी है। लुटेरों के भागने के रूट पर चेकिंग की जा रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में खुलासे पुलिस का मानना है कि वारदात पूरी तरह से प्री-प्लान्ड थी। बदमाशों को बैंक के खुलने का समय और स्ट्रांग रूम का लोकेशन पहले से पता था। उनके पास बैंक की रूटीन गतिविधियों की भी पूरी जानकारी थी। यही कारण है कि इतनी आसानी से वह वारदात कर निकल गए। स्थानीय लोगों में दहशत दिनदहाड़े हुई इस डकैती से इलाके में दहशत और आक्रोश है। बैंक के ग्राहकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। शुरुआत में जावकारी सामने आई थी कि, अज्ञात डकैतों ने बैंक से करीब 12 किलो सोना और 5 लाख 70 हजार नकद की लूट की है। लेकिन अब मामले में पुलिस ने पुष्टि करते हुए बताया है कि, 12 नहीं 14 किलो 800 गराम सोना और कुल पांच लाख की लूट हुई है। इस प्रकार बैंक से लूटे गए सोने की अनुमानित कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि, सभी आरोपी अलग-अलग बइकों पर सवार होकर बैंक परिसर तक आए थे। सभी ने हेलमेट लगा रखा था। साथ ही, चेहरे को भी मास्क लगे थे, साथ ही उनके हाथ तक कवर थे। फिलहाल, पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है। पुलिस कार्यप्रणाली पर उठे सवाल वारदात की जानकारी लगते ही मौके पर खितौला और सिहोरा पुलिस की टीमें पहुंची और छानबीन शुरू कर दी है। वहीं बैंक में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। खास बात ये है कि, किसी को ये नहीं पता कि, वारदात को अंजाम देकर पांचों बदमाश किस तरफ भागे हैं। लूट की इस सॉनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्योंकि, जिले के खितौला या सिहोरा में लगभग हर महीने चोरी की एक न एक वारदात होती रहती है। हाल ही में सिहोरा के बड़े धार्मिक के रूप में पहचान रखने वाले ज्वालामुखी मंदिर में दो दिन पहले ही चोरी की वारदात हुई है, जिसकी जांच अभी चल रही है।  

राजधानी में फर्जी पुलिस भर्ती का खुलासा, सस्ते में मिल रही नकली वर्दी

 नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस से महज आधा किलोमीटर दूर, जीटीबी नगर के पास न्यू किशोर मार्केट की गलियों में एक अलग ही दुनिया बसती है। यहां की सादगी भरी दुकानें कमला नगर मार्केट की चमक-दमक से कोसों दूर हैं, लेकिन इनका धंधा कुछ खास है। यहां दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बलों के लिए खाकी वर्दियां सिलती हैं। हैरानी की बात यह है कि कोई भी आकर इन्हें बनवा सकता है। बिना किसी जांच और सवाल-जवाब के। बस पैसे दो और पुलिस वाले बन जाओ। इस साल दिल्ली में कम से कम छह मामले सामने आए, जिनमें 17 लोग नकली पुलिसवाले बनकर अपराध करते पकड़े गए। अपहरण, उगाही, हनी-ट्रैपिंग से लेकर महिलाओं का पीछा करने तक ये नकली खाकीधारी हर तरह की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। आसानी से मिल जाती है वर्दी एक टीम ने न्यू किशोर मार्केट का दौरा किया और सच का पर्दाफाश किया। दो बार, अलग-अलग बहाने बनाकर, उन्होंने पुलिस की वर्दियां सिलवाईं। एक बार नाटक के लिए, तो दूसरी बार सब-इंस्पेक्टर बनकर। हैरानी की बात यह है कि दोनों बार वर्दी आसानी से मिल गई। दुकान नंबर 1: सवाल तो बनता है, पर… किंग्सवे कैंप मेट्रो स्टेशन के पास एक छोटी-सी दुकान। तीन दर्जी खाकी कपड़ों के बीच फर्श पर बैठे, सिलाई मशीनों की खटपट के बीच काम में डूबे हुए। दुकानदार काले खान ने बताया, “हां, हम दिल्ली पुलिस की वर्दियां सिलते हैं।” जब हेड कांस्टेबल की वर्दी मांगी गई, तो उन्होंने आईडी कार्ड मांगा। नाटक का बहाना सुनकर बोले, 'थाने से लिखित पत्र लाओ।' सख्ती दिखी, लेकिन अगली दुकान ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं। दुकान नंबर 2: पैसा बोलता है सड़क के उस पार एक और दुकान। यहां जवान दर्जी ने 'नाटक के लिए' कांस्टेबल की वर्दी मांगने पर पलक भी नहीं झपकी। उसका सहायक बोला, 'पुलिस से पत्र मांगना चाहिए,' लेकिन मालिक ने उसे चुप करा दिया। नाप लिया गया, 2,800 रुपये का बिल थमा दिया गया और डिलीवरी की तारीख दे दी गई। दुकान नंबर 3: सब-इंस्पेक्टर का रौब तीसरी दुकान में तो कमाल ही हो गया। एक पत्रकार ने सब-इंस्पेक्टर बनकर दस्तक दी। दुकानदार ने झट से कपड़े के सैंपल पेश किए। बोला- 2,000 रुपये में पूरी वर्दी मिल जाएगी अगर प्रीमियम कपड़ा चाहिए तो 3,500 रुपये लगेंगे। जब नाप लिया जा रहा था, तब दर्जी ने PSI नंबर पूछा। पत्रकार ने अनजान बनते हुए पूछा, 'PSI नंबर क्या होता है?' दर्जी को शक हुआ, लेकिन पत्रकार ने रौब झाड़ते हुए कहा, 'अब आईडी भी चाहिए तुमको?' इतना कहते ही बात बन गई। दुकानदार बोला, 'नहीं साहब, जरूरत नहीं।' इंडिया गेट का प्रतीक या कोई और डिजाइन का बैज चुनने को कहा गया। इसके बाद एक हफ्ते में वर्दी तैयार हो गई। अपराध की खाकी कहानियां नकली वर्दी का यह खेल कोई मजाक नहीं। इस महीने की शुरुआत में, दो लोग दिल्ली पुलिस और ईडी के अधिकारी बनकर सम्राट होटल के बेंटले शोरूम के मैनेजर से 30 लाख रुपये लूट ले गए। जून में, लक्ष्मी नगर में आठ नकली पुलिसवालों ने एक इंश्योरेंस ऑफिस पर रेड मारी और कीमती सामान लूट लिया। जुलाई में, IGI हवाई अड्डे पर एक 23 साल का लड़का नकली नियुक्ति पत्र और जाली आईडी के साथ सब-इंस्पेक्टर बनकर पकड़ा गया। उसने किंग्सवे कैंप से वर्दी खरीदी थी। मई में, भजनपुरा में एक नकली ट्रैफिक पुलिसवाला उगाही करते पकड़ा गया। फरवरी में, रोहिणी में हनीट्रैप रैकेट ने पुलिस वर्दी का इस्तेमाल कर लोगों को डराया और ब्लैकमेल किया। उसी महीने, तीन कॉलेज छात्र नकली पुलिसवाले बनकर एक सिक्योरिटी गार्ड को लूटते पकड़े गए। जून में, मुनीरका में पांच लोगों ने पुलिसवाले बनकर बंदूक की नोक पर एक व्यक्ति को किडनैप कर लिया। पुलिस की मुश्किल, दर्जी का पेंच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने माना, 'यह एक बड़ी समस्या है। हम इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अमल में दिक्कत है।' पुलिस ने दर्जियों को मौखिक रूप से आईडी, बेल्ट नंबर, या थाने से संपर्क करने की हिदायत दी है, लेकिन लिखित नियमों के अभाव में यह सख्ती ढीली पड़ जाती है। दर्जी भी अपनी मजबूरी बताते हैं। 18 साल से दुकान चलाने वाले काले खान कहते हैं, “मैं हमेशा आईडी मांगता हूं। बड़े अधिकारियों से सीधे बात करता हूं। लेकिन कोई झूठ बोले तो हम क्या करें? कोई रूलबुक तो है नहीं।' 30 साल से पुलिसवालों की वर्दी सिलने वाले 59 साल के राजिंदर कुमार कहते हैं, 'मैं बातचीत से समझ जाता हूं कि सामने वाला असली है या नकली। नाटक के लिए वर्दी सिलने से पहले लिखित अनुमति जरूरी है।' असली-नकली का फर्क पुलिस के मुताबिक, असली और नकली वर्दियों में फर्क दिखता है, लेकिन सिर्फ वही समझ सकता है जो जानता हो। कांस्टेबल की वर्दी में सिर्फ बाएं कंधे पर निशान होता है। हेड कांस्टेबल की वर्दी में लाल-नीली तीर की पट्टी भी होती है। असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) के दोनों कंधों पर एक-एक तारा, नीचे नीली-लाल पट्टी और 'DP' लिखा होता है। सब-इंस्पेक्टर के दो तारे, इंस्पेक्टर के तीन, लेकिन लाल-नीली पट्टी नहीं। नेमप्लेट, बैज की जगह, और कंधों की पाइपिंग में भी अंतर होता है। IPS अधिकारियों की वर्दी में राज्य का बैज नहीं होता, बल्कि अशोक प्रतीक, तलवार और तारे होते हैं। लेकिन आम जनता को ये बारीकियां कहां पता? नकली पुलिसवाले इन्हीं कमियों का फायदा उठाते हैं। कोई कांस्टेबल की कमीज पहनकर ASI बन जाता है, तो कोई रैंक मार्किंग्स ही भूल जाता है। एक चुराया हुआ बेल्ट, बैज, या टोपी भी रौब को पूरा कर देता है।

दफ्तरों में टिके पुलिसकर्मियों की होगी छंटनी, थानों में भेजने के आदेश जारी

भोपाल  पुलिस मुख्यालय द्वारा व्यवस्था के बदलाव की दिशा में लगातार बड़े फैसले लिए जा रहे है। अब अधिकारियों के कार्यलयों में बरसों से अटैच पुलिसकर्मियों को मूल पदस्थापना में भेजने के डीजीपी कैलाश मकवाना द्वारा निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी ने कहा है कि अतिरिक्त या अटैच स्टाफ को वापस थानों में भेजा जाए। इसी के साथ अधिकारियों को अपने अधीनस्थ स्टाफ की समीक्षा यानी कार्यों का मूल्यांकन कर सूची तैयार करने के लिए भी कहा गया है। कर्मचारियों का होगा रोटेशन बता दें, कुछ दिन पूर्व पीएचक्यू में ऐसे भी पुलिसकर्मी अटैच रहे, जोकि कई महीनों से दफ्तर ही नहीं आते थे। विदिशा और फिर सीहोर जिले में ऐसे दो पुलिसकर्मियों को जांच के दौरान लापता पाया गया। इस बात को लेकर भी पुलिस विभाग का मजाक बना था। डीजीपी मकवाना ने नियम के अनुसार मुयालय में अटैच और पदस्थ कर्मचारियों का रोटेशन करने को कहा है। ऐसे अधिकारी जो लंबे समय से दफ्तर में मौज काट रहे हैं अब उन्हें थानों में वापस लौटाया जाएगा। अफसरों के चालकों का होगा रोटेशन पुलिस मुख्यालय की कई शाखाओं में जरूरत से ज्यादा लोग हैं। लिहाजा दफ्तर का प्रबंधन बेहतर करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों के नियमानुसार रोटेशन करने के लिए निर्देशित किया गया है। खासतौर पर उन वाहन चालकों का रोटेशन किया जाए, जो लंबे समय से एक ही अधिकारी के साथ या थानों पर कार्यरत हैं।

लाल किला बना सुरक्षा अलर्ट का केंद्र, चूक पर 7 पुलिसकर्मी नपे

नई दिल्ली स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा से जुड़ी दिल्ली से बड़ी खबर आई है। दिल्ली के लाल किले की सुरक्षा में तैनात एक हेड कांस्टेबल समेत 7 पुलिसकर्मियों को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि लाल किले में स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाला कार्यक्रम को लेकर हर रोज पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मॉक ड्रिल करती है। शनिवार को भी एक ड्रिल की गई। इसमें दिल्ली पुलिस स्पेशल स्टाफ की एक टीम सिविल ड्रेस में डमी बम के साथ लाल किला परिसर में दाखिल हुई। लेकिन लाल किले की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी बम का पता नहीं लगा सके जिसके बाद सुरक्षा में तैनात सभी 7 पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया। तत्काल प्रभाव से पुलिसकर्मी सस्पेंड स्पेशल सेल की एक टीम शनिवार को सादे कपड़ों में डमी बम के साथ लाल किले परिसर में दाखिल हुई। उस समय, सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी बम का पता नहीं लगा सके। इसलिए उन पर एक्शन हुआ है। लाल किले की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक का मामला होने से सात पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। साथ ही बाकी जवानों को डीसीपी राजा बांठिया ने सख्त हिदायत दी।  तत्काल प्रभाव से संबंधित सभी पुलिसकर्मी लाइन हाजिर इस चूक के बाद तत्काल प्रभाव से संबंधित सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है. डीसीपी का कहना है कि ये सुरक्षा में नहीं है, इस तरह हम अपनी तैयारी को और पुख्ता कर रहे हैं. वहीं, सोमवार को लाल किले में घुसपैठ कर रहे पांच बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया, जिनको बांग्लादेशी दूतावास को सौंपकर डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पूछताछ में फिलहाल कोई संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आई है. सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. 15 अगस्त को लेकर लाल किले की सुरक्षा अभूतपूर्व -डीसीपी राजा बांठिया डीसीपी राजा बांठिया का कहना है कि 15 अगस्त को लेकर लाल किले की सुरक्षा अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दी गई है. रात-दिन पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं. किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति की आवाजाही सख्ती से प्रतिबंधित है. खासकर आईआईटी गेट, नेटा गेट, लोहे वाले गेट समेत सभी प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर ट्रिपल लेयर सुरक्षा व्यवस्था की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा घेरा और सतर्कता आने वाले दिनों में और बढ़ाई जाएगी. उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, जिससे त्योहार शांतिपूर्ण व सुरक्षित तरीके से मनाया जा सके. लाल किला में जबरन घुसने की कोशिश कर रहे थे 6 बांग्लादेशी वहीं लाल किले की सुरक्षा से जुड़ी एक और खबर सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने लाल किला परिसर में जबरन घुसने के आरोप में 6 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनकी उम्र करीब 20-25 साल बताई जा रही है। ये सभी अवैध बांग्लादेशी हैं जो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में मजदूरी करते हैं। आरोपियों के पास से बांग्लादेशी दस्तावेज मिले  पुलिस को इनके पास से बांग्लादेशी दस्तावेज मिले हैं। फिलहाल पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इनका लाल किले में घुसने का मकसद क्या था।

‘साड़ी गुरु’ बनी यूपी पुलिसवाली, विदेशी महिलाओं को सिखाई भारतीय परंपरा

आगरा  ताजमहल का पश्चिमी गेट. पर्यटकों की भीड़, संगमरमर की चमक, और उसके बीच नीली-गुलाबी साड़ी में इटली से आईं दो महिलाएं एलिसिया और ब्रूना. हवा तेज़ थी, साड़ी उड़ रही थी. पल्लू बार-बार नीचे गिर रहा था. उन्होंने कई बार कोशिश की, प्लेट्स बनाईं, लेकिन साड़ी सही नहीं हो रही थी. आसपास मौजूद लोग वीडियो बनाने , लोग लेकिन किसी ने पास आकर मदद नहीं की. तभी सामने आई यूपी पुलिस की महिला सिपाही लक्ष्मी देवी. लक्ष्मी न तो घबराईं, न झिझक दिखी. एक प्यारी-सी मुस्कान के साथ उन्होंने कहा May I help you? इसके बाद शुरू हुआ वो लम्हा, जो उन दोनों विदेशी मेहमानों की पूरी इंडिया ट्रिप का सबसे यादगार हिस्सा बन गया. लक्ष्मी देवी ने बड़े ही आत्मीय ढंग से दोनों की साड़ी संभाली. प्लेट्स बनाईं, पल्लू को सलीके से कंधे पर टिकाया और उन्हें सिखाया कि चलना कैसे है, बैठना कैसे है ताकि साड़ी पैर में न आए, और पूरे वक्त आरामदायक भी रहे. दोनों ने खूब सवाल भी किए  एलिसिया ने पूछा, आप रोज साड़ी पहनती हैं इस पर लक्ष्मी मुस्कराईं और कहा कि त्योहारों पर, घर में, और कभी-कभी ड्यूटी पर भी. हमारी वर्दी में भी साड़ी होती है. लक्ष्मी ने जब बताया कि पल्लू का मतलब गरिमा से है, और प्लेट्स अनुशासन की तरह होती हैं तो एलिसिया और ब्रूना की आंखों में जिज्ञासा और सम्मान साथ दिखा. ब्रूना ने कहा कि अब समझ में आया, भारतीय महिलाएं साड़ी में इतनी सहज और सुंदर कैसे लगती हैं. यह कपड़ा नहीं, एक संस्कृति है. लोग देखते रहे, पर लक्ष्मी ने जो किया, वो दिल छू गया इस पूरी प्रक्रिया को कोई रिकॉर्ड कर रहा हो या नहीं, फर्क नहीं पड़ता. जो दृश्य था, वो सीधे विदेशी मेहमानों के दिल में दर्ज हो चुका था. ताजमहल की छाया में, दो विदेशी सैलानी और एक भारतीय महिला पुलिसकर्मी तीनों के बीच भाषा अलग थी, लेकिन भाव और सम्मान एकदम एक से. सिर्फ स्मारक नहीं, अनुभव था ये एलिसिया और ब्रूना भारत भ्रमण पर थीं. दिल्ली देख चुकी थीं, अब आगरा आईं और आगे उनका रुख जयपुर की ओर था. लेकिन उनके मुताबिक, “ताजमहल सुंदर है, लेकिन हमें जो सबसे प्यारा अनुभव मिला, वो लक्ष्मी के साथ था. लक्ष्मी देवी ने इस पूरी घटना पर कहा, मैंने वही किया जो मेरी मां करतीं, मेरी बहन करतीं, या कोई भारतीय महिला करती. साड़ी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और वो हमारी मेहमान हैं. आखिर में एलिसिया ने कहा Thank you, Lakshmi.