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सरकारी हवाई जहाज के इस्तेमाल पर उठे सवाल, ‘शास्त्री’ के सफर को लेकर बैज ने साधा निशाना

रायपुर  पं धीरेंद्र शास्त्री के सरकारी हवाई जहाज के निजी इस्तेमाल पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार फिजूल खर्च कर बाबाओं को घूमा रही है. सरकारी हवाई जहाज हवाई टैक्सी बन चुका है. बैज ने पूछा कि सरकारी हवाई जहाज का उपयोग क्या किसी साधु संत के लिए करना चाहिए? ये भी बताया जाए सतना में कौन से कार्यक्रम में शामिल हुए थे. केवल चाय पी कर वह से वापिस आ गए? सरकारी हवाई जहाज को हवाई टैक्सी बना दिया है. रेल किराए की वृद्धि पर बैज ने कसा तंज रेल मंत्रालय द्वारा रेल किराया बढ़ाए जाने को लेकर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने तंज कसा है. कहा कि भारतीय रेलवे भगवन भरोसे है. 8 से 12 घण्टे ट्रेने लेट चल रही है. कोई सुविधा नहीं है फिर भी किराया बढ़ाया गया. सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी जनता की जेब को लूटने का काम कर रही है. किसानों के मुद्दे पर बैज मुखर किसानों के मुद्दे को लेकर एक बार फिर पीसीस चीफ दीपक बैज ने बीजेपी पर साधा निशाना है. उन्होंने कहा कि किसान परेशान है. डीएपी यूरिया की कमी और रकबा काटना जैसी परेशानियों से किसान जूझ रहे हैं. धान खरीदी नहीं हो पा रही है. मॉल तोड़फोड़ मामले पर सरकार मूकदर्शक बनी रही : बैज राजधानी के मैग्नेटो मॉल में तोड़फोड़ मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में बजरंग दल ने शनिवार को प्रदर्शन और चक्काजाम किया था. इस मामले पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म की आस्था को ठेस पहुचना गलत है. मैग्नेटो मॉल में तोड़ फोड़ हुई. सरकार को तत्काल FIR करनी थी. लेकिन वह इस बात को टालती रही. बजरंग दल ने पुरे राजधानी में उत्पात मचाया, सड़कों को जाम किया और सरकार मूकदर्शक बनी रही.

टीपू-अकबर से ‘ग्रेट’ हटाने पर सियासी घमासान, CM हिमंता का बयान सुर्खियों में

  एनसीईआरटी ने इतिहास के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। एनसीईआरटी ने बादशाह अकबर और टीपू सुल्तान  जैसे महत्वपूर्ण मुगल शासकों  के सामने से महान (ग्रेट) शब्द को हटा दिया है। यह फैसला लंबे समय से चल रही उस बहस को आगे बढ़ाता है, जिसमें भारतीय इतिहास को सही और संतुलित नजरिए से दिखाने की मांग की जा रही थी। एनसीईआरटी के इस फैसले का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेता सुनील आंबेकर और असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने स्वागत किया है। वहीं एनसीईआरटी के इस फैसले का विपक्ष ने विरोध किया है। हालांकि अभी ये सिर्फ दावा किया जा रहा है। एनसीईआरटी ने फिलहाल इसपर कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी खुशी जताते हुए कहा कि बहुत अच्छा हुआ है… मैंने अभी देखा नहीं है कि ऐसा हुआ। लेकिन अगर ये काम कर दिया गया है तो NCERT को मेरी ओर से धन्यवाद। आगे वह बोले- “टीपू-इपू को मारो एकदम, जहाँ भेजना है उधर भेज दो। समुद्र में फेंक दो। वहीं RSS नेता सुनील आंबेकर ने कहा कि कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में ये संशोधन अगले साल से लागू होंगे। इन बदलावों से नई पीढ़ी को इतिहास की पूरी सच्चाई बताने में मदद मिलेगी। RSS नेता ने साफ किया कि किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति को किताबों से पूरी तरह हटाया नहीं गया है। इसके बजाय उनके अच्छे और बुरे.. यानी सकारात्मक और क्रूर, दोनों कामों का सही मूल्यांकन पेश किया गया है।   इतिहास की किताबों में सकारात्मक बदलाव RSS नेता सुनील आंबेकर के दावे के अनुसार, NCERT की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से अब मुगल शासक अकबर और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के नाम के साथ जुड़े ‘महान’ जैसे विशेषण हटा दिए गए हैं। यह फैसला इस विचार पर आधारित है कि किसी भी शासक को ‘महान’ कहने से पहले उसके सभी तरह के कामों और भारतीय समाज पर पड़े उनके प्रभाव का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए। किस क्लास की किताबों में हुआ बदलाव? दावा किया गया है कि NCERT ने कुल 15 कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में से 11 कक्षाओं की किताबों में ये सकारात्मक बदलाव लागू कर दिए हैं। कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में ये संशोधन अगले शैक्षणिक वर्ष से पूरी तरह से लागू किए जाएंगे। यह बदलाव धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। इससे छात्रों और शिक्षकों को नए सिलेबस के साथ तालमेल बिठाने में आसानी होगी।

हलफनामे पर उठे सवाल: कसबा विधानसभा में नया राजनीतिक बवाल

पूर्णिया पूर्णिया जिले के 058-कसबा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी हलचल के बीच एनडीए उम्मीदवार और नव निर्वाचित विधायक नितेश कुमार सिंह के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है। उनके चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर गलत या अधूरी जानकारी दिए जाने को लेकर एक गंभीर शिकायत दर्ज की गई है, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। भूभूमि सुधार उप समाहर्ता सह 58-कसबा की निर्वाची पदाधिकारी प्रीति कुमारी ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए इसे तात्कालिक प्रभाव से उप निर्वाचन पदाधिकारी, पूर्णिया को विस्तृत जांच के लिए अग्रसारित कर दिया है। डीसीएलआर कार्यालय द्वारा 12 नवंबर को जारी पत्रांक-87 में उप निर्वाचन पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे शिकायत पर गहन जांच करते हुए निष्कर्ष के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस पूरे मामले पर विधायक नितेश कुमार सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस शिकायत की जानकारी नहीं थी। एक एप्लीकेशन आया जिसमें कहा गया कि कुछ डिटेल्स पर्याप्त नहीं हैं। हम अपने हलफनामे में दी गई सभी जानकारी पर पूरी तरह आश्वस्त हैं, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।” यह शिकायत जिला अधिवक्ता संघ, पूर्णिया के अधिवक्ता अनिल कुमार झा द्वारा दर्ज कराई गई है। हालांकि शिकायत के विस्तृत बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन पत्र के विषय से स्पष्ट होता है कि यह मामला नितेश कुमार सिंह के नामांकन के साथ संलग्न शपथ पत्र में दी गई सूचनाओं की सत्यता से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, जांच में हलफनामे में अंकित संपत्ति, देनदारियों या आपराधिक विवरण जैसी जानकारियों की सत्यता की पुष्टि की जाएगी। जांच रिपोर्ट के परिणाम का कसबा सीट की चुनावी राजनीति पर सीधा असर पड़ सकता है।

धान खरीदी विवाद गर्माया: डिप्टी CM साव ने कांग्रेस की समिति को लेकर साधा निशाना

रायपुर राज्य में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू हो चुकी है और इसके साथ ही राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। धान खरीदी प्रक्रिया को सुचारू रखने और किसानों की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने एक राज्यस्तरीय निगरानी समिति गठित की है। इस फैसले को उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस पर किसानों को बोनस न देने, भुगतान में देरी करने और वादे पूरा न करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने बिहार चुनाव में कांग्रेस की हार का ज़िक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ‘पनौती’ तक कह दिया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस की निगरानी समिति बनाए जाने को लेकर कहा कि “कांग्रेस क्या निगरानी करेगी? वही कांग्रेस जिसने किसानों से बोनस का वादा किया था और कभी पूरा नहीं किया। किसानों को धान का पैसा चार-चार किस्तों में दिया गया। इनके वादों की विश्वसनीयता ही खत्म हो चुकी है।” साव ने बताया कि धान खरीदी के पहले दिन ही 20 हजार क्विंटल धान खरीदा गया है और सभी खरीद केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। बिहार चुनाव में कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर भी सियासत अरुण साव यहीं नहीं रुके। उन्होंने बिहार चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘पनौती’ कहा। साव ने आरोप लगाया कि “जहां-जहां भूपेश बघेल प्रचार करने जाते हैं, वहां कांग्रेस की हार तय हो जाती है। बिहार में भी यही हुआ।” अरुण साव ने यह भी कहा कि “बिहार में जाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नकारा नेताओं ने प्रचार किया था। जिन पर अपने राज्य में भरोसा नहीं, उन पर बिहार वाले कैसे भरोसा करेंगे? कांग्रेस के साथ सहयोगी दल भी डूब जाते हैं।” उन्होंने हाल ही में बेगूसराय में मछुआरा समुदाय से मुलाकात के दौरान राहुल गांधी के तालाब में कूदने वाले वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि “राहुल गांधी जहां डुबकी लगा दें, वहां से कांग्रेस का डूबना तय है।” साव ने यह भी दावा किया कि बिहार संगठन की मदद छत्तीसगढ़ BJP के नेताओं ने की, न कि कांग्रेस नेताओं ने जैसा कांग्रेस दावा कर रही है।

बिहार चुनाव परिणाम: डॉ. रमन सिंह ने कहा—नीतीश कुमार संभालेंगे नेतृत्व

रायपुर बिहार विधानसभा चुनाव में NDA को मिले जनादेश के बाद अब मुख्यमंत्री के शपथ और मंत्रिमंडल गठन की चर्चा तेज है. इस बीच छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्य योजना बनाकर काम किया है. बिहार में जंगल राज को खत्म कर लोगों के जीवन में परिवर्तन लाया है. बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है. बिहार चुनाव में भूपेश बघेल की भूमिका पर टिप्पणी बिहार चुनाव में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीनियर ऑब्ज़र्वर बनाया गया था. उनके चुनावी प्रभाव को लेकर पूछे गए सवाल पर विधानसभा स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि भूपेश बघेल को जब-जब जिम्मेदारी मिली है, तब सभी जानते हैं कि क्या होता है. नीतीश कुमार की ईमानदारी और उनके नीतियों की यह जीत है. 28 से 30 नवंबर तक डीजी कॉन्फ्रेंस डीजी कॉन्फ्रेंस को लेकर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि डीजी कॉन्फ्रेंस में पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ अन्य राज्य के डीजी शामिल होंगे. नक्सल समस्या को लेकर एक निर्णायक दौर आया है. नक्सलवाद से देश आगे बढ़ चुका है. 2026 मार्च तक नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन तय हो चुकी है. शत प्रतिशत नक्सल समाप्ति करने में सफलता मिलेगी. 18 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के 18 नवंबर को बुलाए गए विशेष सत्र को लेकर जानकारी दी कि पुराने विधानसभा में एक दिन का सत्र होगा. जहां 25 साल बिताए उसका यह सत्र है. पुराने विधानसभा में सभी की यादें है. पुराने विधानसभा में यह अंतिम सत्र रहेगा. उन्होंने यह भी बताया कि शीतकालीन सत्र नए विधानसभा में आयोजित होगा.

धान खरीदी को लेकर राजनीति तेज: डिप्टी सीएम बोले—‘ठगने और लूटने वाली पार्टी कांग्रेस है’

रायपुर छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी की शुरुआत होने वाली है. लेकिन इसकी शुरुआत से पहले ही विपक्ष और सरकार के बीच सियासत तेज हो गई है. डिप्टी सीएम अरुण साव ने आज मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व सीएम भूपेश बघेल के दावों को खारिज करते हुए जमकर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि “ठगने और लूटने वाली पार्टी कांग्रेस है. हमारी सरकार किसान हितैषी है और सभी वादों को पूरा कर रही है. बता दें, पूर्व सीएम बघेल ने धान खरीदी को लेकर दावा किया है कि धरातल पर धान खरीदी की कोई तैयारी नहीं है. इधर एग्री स्टैक पोर्टल में पंजीयन की दिक्कतों से पंजीयन के लिए 7 लाख किसान परेशान हैं. पंजीयन के लक्ष्य से ही समझ आ रहा है कि सरकार ही नहीं चाहती कि पूरे किसान धान बेचें, इसलिए पेचीदगियां पैदा की गई हैं. डिप्टी सीएम अरुण साव ने पूर्व सीएम बघेल के इस बयान का पलटवार करते हुए कहा कि “कांग्रेस ने बोनस देने का वादा किया था, लेकिन उसे 5 साल तक निभाया नहीं. किस्तों में पैसा दिया और चौथी किस्त में कटौती कर पैसा खा गई.” उन्होंने आगे कहा कि धान खरीदी निर्धारित तिथि पर सुचारू रूप से शुरू होगी, किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी. देर रात हुई मंत्रियों की बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में बीती रात मंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई गई. बैठक को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी के कई कार्यक्रम लगातार जारी हैं और कार्यकर्ताओं व नेताओं का कार्यालय आना-जाना नियमित रूप से चलता रहता है. SIR पर कांग्रेस की निगरानी को लेकर कसा तंज इस बीच, SIR प्रक्रिया को लेकर आज कांग्रेस की निगरानी समिति की बैठक प्रस्तावित है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुण साव ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी को न संविधान पर भरोसा है, न संवैधानिक संस्थाओं पर. उनका भरोसा सिर्फ एक परिवार और उसके आदेशों पर है. SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, पहले भी होती रही है. कांग्रेस अपने ही जनाधार पर सवाल उठा रही है.” उन्होंने आगे कहा- “कांग्रेस अब वोट चोरी, मतदाता सूची और EVM में गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठाकर जनता को गुमराह कर रही है. कांग्रेस अब जनता से कट चुकी है, उसके अपने कार्यकर्ता भी उससे दूर जा रहे हैं,”

‘चुनाव आयोग BJP का पाप धो रहा’ — तेजस्वी का तीखा हमला, कहा बिहार बदलेगा अब की बार

पटना दूसरे चरण के मतदान से पहले तेजस्वी यादव ने एनडीए और डबल इंजन सरकार पर जोरदार हमला किया है। सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। कल दूसरे चरण का मतदान होगा। हमने 171 जनसभा की। हर जगह लोगों में बदलाव का मूड दिखा। बेरोजगारी, पलायन से लोग परेशान हैं। 20 साल राज करने पर भी एनडीए ने बिहार को अंतिम पायदान पर कर दिया। अब बिहार के लोगों को बिहार में ही सुविधा चाहिए। कोई छठ और दीपावली में ही घर न आये, हमेशा साथ रहे। उन्होंने नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी पर बिहार की जनता को पीछे रखने का आरोप लगाया और कहा कि 14 नवम्बर के बाद सब बदल जाएगा। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार इस बार इतिहास रचेंगे। कलम राज ला रहे हैं। विकसित राज्य बनेगा। बीस सालों में मुख्यमंत्री केवल सुर्खियों में रहे। लेकिन अब बिहार केवल सुर्खियों में नहीं रहेगा। पढ़ाई, दवाई, कमाई, सिंचाई की सुविधा होगी। दूसरे राज्य न जाना पड़े, ऐसा बिहार बनाएंगे। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी गंभार आरोप लगाया। कहा कि बीजेपी पाप करती है और इलेक्शन कमीशन उसे धोने का काम करता है। नाव आयोग पहले चरण के मतदान के 4 दिन बाद भी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किये कि कितने महिला और पुरुषों ने मतदान किया। यह मजाक है। तकनीक के इस युग में ये हाल है। भाजपा के पाप को आयोग धो रहा है। आयोग मर चुका है। चुनाव आयोग बताए कि समस्तीपुर में इतनी वीवीपैट परचियां कहाँ से आई। कहा कि सत्ता में बैठे लोग घबराये हुए हैं। गृह मंत्री अमित शाह पटना में अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं। यह बता रहे हैं कि किन किन को उठाना है। जिला को रिटायर्ड अधिकारी निर्देश दे रहे हैं। लेकिन हमारी पैनी नजर है। तेजस्वी यादव ने का कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में उद्योग-धंधों की बात नहीं करते,बस नकारात्मक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी अपराधियों के साथ मंच साझा कर रहे हैं, जिनमें आनंद मोहन, अनंत सिंह और हुलास पांडे जैसे नाम शामिल हैं। ये लोग कोई संत हैं क्या। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी में शामिल हो जाने पर किसी के भी सारे पाप धुल जाते हैं।  

सियासी भूचाल: BJP ने एक झटके में 4 नेताओं को दिखाया दरवाज़ा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अनुशासनहीनता का बम फट पड़ा है। पार्टी ने अपने चार वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित कर यह साफ कर दिया है कि NDA के साझा उम्मीदवारों के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। चुनावी मौसम में यह कार्रवाई बीजेपी के अंदर बढ़ती असंतोष की आवाज़ों को शांत करने की रणनीति मानी जा रही है। पार्टी लाइन से हटे, तो हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, जिन चार नेताओं पर गाज गिरी है, उनमें वरुण सिंह, अनूप कुमार, पवन यादव और सूर्य भान सिंह शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये चारों नेता NDA समर्थित उम्मीदवारों के विरुद्ध अलग-अलग सीटों से स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए थे। पार्टी नेतृत्व ने इसे सीधी अवज्ञा मानते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। कहां-कहां से थे उम्मीदवार वरुण सिंह बहादुरगंज, अनूप कुमार गोपालगंज, पवन यादव कहलगांव और सूर्य भान सिंह बड़हरा विधानसभा सीट से चुनावी अखाड़े में थे। इन चारों पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के फैसले और अनुशासन का उल्लंघन करते हुए गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ ताल ठोंकी। JDU ने भी की सख्ती इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यू) ने भी बागी सुर अपनाने वाले 16 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया था। पार्टी के प्रदेश महासचिव चंदन कुमार सिंह ने उनके निष्कासन की घोषणा की थी। JDU का कहना था कि गठबंधन के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ना या संगठन को कमजोर करना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। कौन-कौन हुए बाहर जिन नेताओं पर कार्रवाई हुई, उनमें कई पूर्व विधायक, मंत्री और एमएलसी शामिल हैं — जैसे मुंगेर के पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, सीवान के श्याम बहादुर सिंह, भोजपुर के रणविजय सिंह, शेखपुरा के सुदर्शन कुमार, और गोपालपुर के विधायक नरेन्द्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल आदि। इन सभी को पार्टी से बाहर कर गठबंधन में एकता का संदेश देने की कोशिश की गई है। चुनावी रणनीति पर बड़ा असर बीजेपी और जेडीयू दोनों की यह सख्ती इस बात का संकेत है कि NDA इस बार बगावती सुरों को किसी भी कीमत पर दबाना चाहता है। अमित शाह के हालिया बिहार दौरे के बाद यह स्पष्ट है कि पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करने और विरोधी खेमे को एकजुटता का संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है।  

चुनावी रणभूमि की पहली लड़ाई: कौन कितनी सीटों पर दावेदार, लालू-नीतीश की ताकत का हाल

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान छह नवंबर को है। पहले चरण में 18 जिले के 121 सीटों पर चुनाव होना है। अब तक 1698 विभिन्न दलों के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन किया है। 20 अक्टूबर तक नाम वापसी की अंतिम तिथि है। खास बात यह है कि पहले चरण में राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाईटेड की सबसे अधिक सीटें दांव पर लगी है। इस बार महागठबंधन की ओर से राजद ने 71, कांग्रेस ने 25, भाकपा माले 13, वीआईपी और सीपीआई छह-छह, सीपीएम और आईआईपी ने दो प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं एनडीए से जदयू ने 57 उतारे हैं। भाजपा के 48, लोजपा (राम) के 14 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो से दो प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।   पहले चरण में 36 सीटों पर राजद और जदयू के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। वहीं राजद और भाजपा के बीच 23 सीटों पर आमने सामने हैं। कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों के बीच 23 सीटों पर मुकाबला है। वहीं कांग्रेस और जदयू  12 सीटों पर आमने-सामने हैं। वहीं चिराग और तेजस्वी के बीच 10 सीटों पर मुकाबला होना है। पहले यह संख्या 11 थी। लेकिन, मढ़ौरा से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) सीमा सिंह का नामांकन रद्द होने के कारण यह संख्या अब 10 रह गई। महागठबंधन में पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्यादा चर्चा में रहे मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी का मुकाबला पहले चरण की छह में से चार सीटों पर भाजपा और दो सीटों पर जदयू से है। इन दिग्गजों की किस्मत पहले चरण में दांव पर पहले चरण में राजद से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राघोपुर और छपरा से भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह चुनाव लड़ रहे हैं।  भाजपा से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा लखीसराय, सम्राट चौधरी तारापुर से, मंत्री मंगल पांडेय सीवान से, जिवेश मिश्रा जाले से, संजय सरावगी दरभंगा सदर से, राजू सिंह राजू कुमार सिंह,  नितिन नवीन बांकीपुर और लोकगायिका मैथिली ठाकुर अलीनगर सीट, पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा से चुनावी मैदान में हैं। वहीं जदयू से मंत्री विजय कुमार चौधरी सरायगंज से, महेश्वर हजारी कल्याणपुर से चुनावी मैदान में हैं। 

बिहार में सियासी दिलचस्पी बढ़ी: महागठबंधन की आठ सीटों पर कांग्रेस-राजद में सीधी टक्कर

पटना विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 121 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया खत्म हो गई। अब तक केवल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सीट बंटवारे की घोषणा की है। महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अब तक तय नहीं हुआ है। सभी दलों ने पहले चरण की सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी उतार दिए। इनमें राजद ने 72, कांग्रेस ने 26, वामदल ने 21 और वीआईपी ने छह सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आठ ऐसी सीटें हैं, जहां महागठबंधन के ही घटक दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे को चुनौती देंगे। इनमें वैशाली, लालगंज, राजापाकड़, बछवाड़ा, रोसड़ा, बछवाड़ा, तारापुर और कहलगांव विधानसभा सीट है। इन सीटों पर फ्रेंडली फाइल से स्पष्ट हो गया है कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है। तारापुर विधानसभा सीट     यहां पर राजद और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रत्याशी आमने सामने हैं। राजद से अरुण शाह ने नामांकन पर्चा दाखिल किया है। वहीं वीआईपी की ओर से सकलदेव सिंह ने अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया है। बछवाड़ा विधानसभा सीट     यहां पर कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। कांग्रेस से प्रकाश दास ने नामांकन पर्चा दाखिल किया है। वहीं सीपीआई से अवधेश कुमार राय ने नामांकन किया है। बिहारशरीफ विधानसभा सीट     यहां पर भी कांग्रेस और सीपीआई के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। कांग्रेस से उमैर खान ने नामांकन किया है। वहीं सीपीआई के शिव प्रसाद यादव ने नामांकन किया है। रोसड़ा विधानसभा सीट     यहां पर कांग्रेस और सीपीआई के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। कांग्रेस से बीके रवि ने नामांकन किया है। वहीं सीपीआई से लक्ष्मण पासवान ने नामांकन दाखिल किया है। राजपाकर विधानसभा सीट     यहां से कांग्रेस और सीपीआई के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। कांग्रेस से प्रतिमा कुमारी ने नामांकन किया है। वहीं सीपीआई से मोहित पासवाान ने नामांकन किया है। वैशाली विधानसभा सीट     यहां राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। राजद से अजय कुशवाहा ने नामांकन किया है। वहीं कांग्रेस से ई.संजीव सिंह ने नामांकन किया है। लालगंज विधानसभा सीट     सबसे ज्यादा चर्चित यही सीट है। यहां राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। राजद पूर्व विधायक बाहुबली मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला को टिकट दिया। उन्होंने अपना नामांकन पर्चा दाखिल कर दिया। वहीं कांग्रेस से आदित्य कुमार राजा ने भी अपना नामांकन कर दिया है। जानिए, महागठबंधन के अंदर कलह पर किसने क्या कहा? भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार चुनाव के लिए सीट बंटवारे और उम्मीदवारों की घोषणा में हो रही देरी महागठबंधन के टूटने का संकेत नहीं, बल्कि इसके विस्तार का परिणाम है। कांग्रेस सांसद अखिलेश सिंह ने कहा कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है। अंदर-अंदर काम चल रही है। महागठबंधन में कोई विवाद नहीं हैं। हमलोगों के बीच सबकुछ ठीक है। वहीं मुकेश सहनी की नाराजगी दूर हो गई है। उन्हें सम्मान देने कुछ तो इधर-उधर करना पड़ा। हमलोगों ने अपनी सीटें पिछली बार की तुलना में कम कर ली। वहीं सीएम फेस को लेकर उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे हैं। सीट बंटवारे की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सबकुछ फाइनल हो जाएगा। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि महागठबंधन में सबलोग एकजुट हैं। विरोधी की अफवाहों पर आपलोग ध्यान नहीं दें। किसी सीट फ्रेंडली फाइट नहीं हो रही है। जहां पर कंफ्यूजन में महागठबंधन के घटन दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपना नामांकन भर दिया है। वहां वापस लिया जा रहा है।