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ट्रैफिक और प्रदूषण पर काबू के लिए महाराष्ट्र सरकार ने नए ऑटो परमिट पर लगाई रोक

मुंबई महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नए ऑटो रिक्शा परमिट जारी करने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में पहले से ही बहुत बड़ी संख्या में ऑटो परमिट जारी हो चुके हैं, जिससे शहरों में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या गंभीर रूप से बढ़ गई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में अब तक करीब 14 लाख ऑटो रिक्शा परमिट जारी किए जा चुके हैं. इनकी अधिकता के कारण मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहरों में यातायात का बोझ बढ़ गया है. सड़कों पर भीड़-भाड़ से वाहनों की गति कम हो रही है, ईंधन की खपत बढ़ रही है और  प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है. मौजूदा ऑटो परमिट धारकों ने भी सरकार से शिकायत की थी कि नए परमिट जारी होने से रिक्शा चालकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और उन्हें पर्याप्त सवारी नहीं मिल पा रही हैं. जिससे आय पर भी बुरा असर पड़ रहा है. सरकार ने इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ये महत्वपूर्ण कदम उठाया है. महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नए ऑटो रिक्शा परमिट जारी करने पर फिलहाल पूरी तरह रोक लगा दी है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विधानसभा के बाहर ये घोषणा करते हुए बताया कि ट्रैफिक जाम, बढ़ता प्रदूषण और अवैध परमिट धारकों की शिकायतों के बाद ये कड़ा कदम उठाया गया है. इसके अलावा जांच में ये भी सामने आया है कि कुछ मामलों में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को भी ऑटो परमिट मिल गए थे. इस मामले की भी जांच की जा रही है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. ऑटो रिक्शा की अधिकता के कारण मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहरों में यातायात का बोझ बढ़ गया है. सड़कों पर भीड़-भाड़ से वाहनों की गति कम हो रही है, ईंधन की खपत बढ़ रही है और  प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है. सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राज्य में नए ऑटो परमिट जारी करने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है.

सावधान दिल्ली-एनसीआर! आपकी सोचने-समझने की क्षमता पर मंडरा रहा है एक खतरनाक खतरा

लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के साथ बढ़ती पर्यावरणीय समस्याएं कई तरह की बीमारियां बढ़ाती जा रही हैं। कम उम्र में ही दिल की बीमारी-हार्ट अटैक का खतरा हो या बढ़ते डायबिटीज और कैंसर के मामले, ये सभी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता का कारण बने हुए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि हाल के वर्षों में याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर करने वाली बीमारियों जैसे अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। आमतौर पर ये समस्याएं उम्रदराज लोगों, विशेषकर 60 साल के बाद वालों में अधिक देखी जाती रही हैं। हालांकि कई रिपोर्ट्स अलर्ट करते हैं कि अब 50 की उम्र में भी लोगों में अल्जाइमर के लक्षण देखे जा रहे हैं। कहीं आपकी भी  याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता कमजोर न हो जाए? दिल्ली जैसे शहरों में रहने वाले लोगों में इसका खतरा और भी देखा जा रहा है, आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? आइए जान लेते हैं। वायु प्रदूषण के कारण अल्जाइमर रोग का खतरा अध्ययनकर्ताओं की एक टीम ने अलर्ट किया है कि जो लोग वायु प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहते हैं, उनमें अल्जाइमर रोग होने का खतरा भी अधिक हो सकता है। अल्जाइमर एक गंभीर मस्तिष्क विकार है जो याददाश्त, सोचने की क्षमता और व्यवहार के तरीके को प्रभावित करती है। ऐसे लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम भी अधिक देखा जाता रहा है। यह मस्तिष्क कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है, जिससे सोचने-समझने में कठिनाई, दैनिक कार्यों में असमर्थता और व्यवहार में बदलाव जैसे गुस्सा या उलझन जैसे लक्षण होते हैं। यूएस में 27.8 मिलियन (2.78 करोड़) से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से सीधे तौर पर अल्जाइमर रोग का खतरा बढ़ सकता है।       हाइपरटेंशन और स्ट्रोक जैसी पुरानी बीमारियों की तुलना में वायु प्रदूषण के संपर्क को इस बीमारी के लिए ज्यादा खतरनाक माना गया है।      जिन लोगों को पहले से ब्रेन स्ट्रोक की समस्या रही है, ऐसे लोगों में  एयर पॉल्यूशन का असर और भी गंभीर हो सकता है।     भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण, विशेषतौर पर दिल्ली जैसे शहरों में देखा जा रहा प्रदूषण का खतरा इस बीमारी की चिंता को और बढ़ाने वाला हो सकता है। अध्ययन में क्या पता चला? प्लस वन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रकाशित रिपोर्ट से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग के खतरे कम को करने के लिए वायु प्रदूषण से बचाव जरूरी है। जॉर्जिया स्थित एमोरी यूनिवर्सिटी की टीम ने कहा कि एयर क्वालिटी में सुधार डिमेंशिया को रोकने का एक जरूरी तरीका हो सकता है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने साल 2000-2018 के दौरान 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों को शामिल किया।       शोधकर्ताओं ने कहा, इस दौरान लगभग 30 लाख अल्जाइमर रोग के मामलों की पहचान की गई।     लेखकों ने कहा कि पीएम 2.5 के अधिक संपर्क वाली आबादी में अल्जाइर रोग और डिमेंशिया का खतरा ज्यादा देखा गया।     पीएम 2.5 जैसे प्रदूषकों के प्रति 3.8 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की बढ़ोतरी से दिमाग की बीमारियों का खतरा और भी बढ़ता देखा गया है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण (पीएम2.5) के अधिक संपर्क में रहने से हाइपरटेंशन, डिप्रेशन और स्ट्रोक होने का खतरा भी समय के साथ बढ़ता जाता है। ऐसे लोगों में मेंटल हेल्थ की समस्या जैसे स्ट्रेस और डिप्रेशन होने का जोखिम भी ज्यादा देखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा, ब्रेन की सेहत पर प्रदूषक तत्वों का गहरा असर होता है। अगर व्यापक उपाय अपनाकर प्रदूषण को कम कर लिया जाए तो इससे कई तरह की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।  

रांची में वायु प्रदूषण रोकने एंटी स्माग गन और स्प्रिंकलर तथा मशीनों की होगी खरीदी

रांची. शहर की परिवेशी वायु गुणवत्ता को सुदृढ़ और नियंत्रित बनाए रखने के उद्देश्य से गठित सिटी लेवल इंप्लीमेंटेशन कमिटी की 11वीं बैठक शुक्रवार को रांची नगर निगम सभागार कक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रशासक सुर्शात गौरव ने की। इस दौरान एविएंट एयर क्वालिटी इंप्रूवमेंट के तहत अब तक किए गए कार्यों, व्यय और प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में रांची जैसे शहरी क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए गैप असेसमेंट कराने का निर्णय लिया गया। इसके आधार पर एंटी-स्माग गन, स्प्रिंकलर और मैकेनिकल स्विपिंग मशीन की खरीद के लिए नए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया, ताकि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्य को प्रभावी रूप से हासिल किया जा सके। निर्माण स्थलों से फैलने वाले धूल प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए सभी निर्माणाधीन भवनों और कंस्ट्रक्शन साइट्स को ग्रीन शॉट से ढकना अनिवार्य किया गया। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम की गाइडलाइंस के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करने और उल्लंघन की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। हरित आवरण बढ़ाने पर जोर हरित आवरण बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए प्रशासक ने हार्टिकल्चर शाखा को निगम क्षेत्र में उपयुक्त स्थलों की पहचान कर अधिकतम वृक्षारोपण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में वैज्ञानिक पद्धति से वायु गुणवत्ता की जांच के लिए रूट प्लान तैयार करने और एंबिएंट एयर क्वालिटी मानिटरिंग के लिए टीम गठन करने का निर्णय लिया गया। बैठक में ई-व्हीकल को प्रोत्साहन देने, स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने तथा उपलब्ध फंड्स का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार करने पर भी बल दिया गया। वायु प्रदूषण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों, कालेजों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक आइईसी गतिविधियां आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में उप प्रशासक गौतम प्रसाद साहू, सहायक प्रशासक, नगर प्रबंधक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रांची वन प्रमंडल, बीआईटी मेसरा के प्रतिनिधि सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। रांची नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास करें, अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और शहर को स्वच्छ, सुंदर एवं रमणीय बनाए रखने में सक्रिय सहयोग दें।

सांस लेना हुआ मुश्किल: जहरीली हवा का कहर जारी, फिलहाल राहत नहीं

नई दिल्ली राजधानी में स्थानीय कारकों के चलते प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में हवा की गति धीमी होने के चलते लगातार छठे दिन भी हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार है। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, रविवार सुबह राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 393 दर्ज किया गया है। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इससे पहले शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 398 दर्ज किया गया। रविवार को यानी आज हवा के गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सुबह आठ बजे के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली के अलीपुर में एक्यूआई 375, आनंद विहार में एक्यूआई 426, अशोक विहार में 425, आया नगर में 309, बवाना में 439, बुराड़ी में 378, चांदनी चौक इलाके में 448 एक्यूआई दर्ज किया गया है। वहीं, डीटीयू में 433, द्वारका सेक्टर 8 इलाके में 408, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 इलाके में 332, आईटीओ में 393, जहांगीरपुरी में 438, लोधी रोड 357, मुंडका 433, नजफगढ़ में 371, पंजाबी बाग में 420,  आरकेपुरम 394, रोहिणी 433, सोनिया विहार 410, विवेक विहार 413,  वजीरपुर में 443 दर्ज किया गया है। बीते आठ साल में सबसे प्रदूषित रहा दिसंबर दिल्ली में दिसंबर की ठंड के साथ इस बार जहरीली हवा ने भी लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि राजधानी में सांस लेना भी चुनौती जैसा महसूस हो रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि दिसंबर की शुरुआत से ही दिल्ली की हवा लगातार खराब बनी हुई है और पहले 18 दिनों में ही इसने बीते आठ साल की सबसे खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दर्ज किया। महीने की शुरुआत से ही हालात ऐसे रहे कि ज्यादातर दिनों में हवा बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में बनी रही। दिसंबर के पहले आठ दिनों तक लगातार एक्यूआई 300 से ऊपर रहा जिससे पूरे महीने का औसत एक्यूआई करीब 343 तक पहुंच गया। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 14 दिसंबर को एक्यूआई 461 दर्ज किया गया, जो बीते आठ वर्षों में दिसंबर महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। हवा के बिगड़ते हालात को देखते हुए 13 दिसंबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) का सबसे सख्त चरण, यानी स्टेज-चार लागू करना पड़ा।

ठंड के साथ बढ़ा प्रदूषण का प्रकोप, दिल्ली में घने कोहरे से उड़ान सेवाएं प्रभावित; सरकार अलर्ट

नई दिल्ली दिल्ली-NCR समेत उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में आज भी घना कोहरा छाया हुआ है। कोहरे के कारण विज़िबिलिटी घटने से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार सुबह 100 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं। इस बीच, सरकार ने एयरलाइंस के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनमें यात्रियों को उड़ान की वास्तविक स्थिति की सही जानकारी देने और देरी की स्थिति में उनकी सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश शामिल हैं। दिल्ली एयरपोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, अब तक प्रस्थान करने वाली 50 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और आने वाली लगभग इतनी ही उड़ानों के रद्द होने की सूचना है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली समेत उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में इन दिनों तड़के और सुबह के समय घना कोहरा बन रहा है, जिससे उड़ान सेवाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।  कोहरे और प्रदूषण से परेशान राजधानी दिल्ली अब ठंड की चपेट में भी आ गई है। शनिवार, 20 दिसंबर की सुबह मौसम ने अचानक करवट ली, जिसमें कड़ाके की ठंड, बर्फीली हवाओं और घने कोहरे ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 21 और 22 दिसंबर के लिए घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान दिल्ली का अधिकतम तापमान गिरकर 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं प्रदूषण के मोर्चे पर हालात और गंभीर होते नजर आ रहे हैं। नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 410 तक पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। मौसम और प्रदूषण दोनों के स्तर पर यह बदलाव अहम चिंता का विषय बना हुआ है। सर्द हवाएं और गिरता तापमान दिल्ली-NCR में सर्दी अब केवल रात तक सीमित नहीं रही, बल्कि दिन के समय भी ठंड का असर साफ महसूस किया जा रहा है। बीते 3-4 दिनों में अधिकतम तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। जहां कुछ दिन पहले तक अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास था, अब यह घटकर 21 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। दिन में धूप कमजोर पड़ रही है और बादलों की आवाजाही बनी हुई है, जिससे ठंड और बढ़ रही है। हवाओं की रफ्तार भी मौसम को और सर्द बना रही है, जो बीते 24 घंटों में 11 किलोमीटर प्रति घंटे रही और अब लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे चलने की संभावना है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार रात एक निर्देश जारी किया है, जिसमें विमान सेवा कंपनियों को यात्रियों को उड़ानों में देरी, समय में बदलाव या रद्द होने की जानकारी अग्रिम और सही-सही देने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि अंतिम समय में देरी की घोषणा होने पर यात्रियों को तुरंत सूचित करना अनिवार्य होगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि निर्धारित सीमा से अधिक देरी होने पर यात्रियों के लिए जलपान की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा, रीशेड्यूलिंग की स्थिति में किसी भी अतिरिक्त शुल्क की मांग नहीं की जा सकती। यदि रात में उड़ान निर्धारित समय से अधिक विलंबित होती है, तो यात्रियों के लिए होटल में ठहरने की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि यदि उड़ान रद्द होने की जानकारी तय समय सीमा के बाद दी जाती है, तो यात्रियों को पूरा रिफंड प्रदान करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, मार्ग परिवर्तन या रीशेड्यूलिंग की स्थिति में किसी भी अतिरिक्त शुल्क की मांग नहीं की जा सकती। मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि यात्री समय पर चेक-इन करता है, तो उसे बोर्डिंग से नहीं रोका जा सकेगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि पैसेंजर चार्टर के सभी नियमों का पालन अनिवार्य होगा, जिसमें डायवर्जन, रिफंड, हर्जाना और प्राथमिकता के आधार पर चेक-इन के नियम शामिल हैं। प्रदूषण ने भी किया जीना मुश्किल दिल्ली-NCR में प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। प्रमुख इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है। दिल्ली का AQI 580, शाहदरा 784, दरियागंज 736 और शास्त्री नगर 643 रिकॉर्ड किया गया है। पूरे दिल्ली-NCR में AQI 700 से 800 के बीच बना हुआ है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बीते 24 घंटों में कई इलाकों में दृश्यता 100 मीटर से भी कम दर्ज की गई, जो घने कोहरे और प्रदूषण के संयुक्त असर को दर्शाता है। अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। अभी कुछ दिन छाए रहेंगे बादल मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में मौसम में ज्यादा राहत की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के मुताबिक, पहाड़ों पर एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ पहुंच रहा है, जिससे 20 से 22 दिसंबर के बीच अच्छी बर्फबारी होगी। इसका असर मैदानी इलाकों में बादलों और कोहरे के रूप में देखने को मिलेगा। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बादल छाए रह सकते हैं, और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में कोहरे का असर बना रहेगा।

बढ़ते प्रदूषण में खांसी ने किया बेहाल? अपनाएं गले की खराश दूर करने के 5 अचूक उपाय

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। राजधानी को चारों ओर से धुंध की चादर घेरे हुए है, जिसके कारण लोगों को सांस लेने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण के कारण गले में खराश और खांसी की समस्या आम हो गई है। घर के अंदर भी गले में खराश, जलन और खांसी की समस्या बनी रहती है। ऐसे में इन समस्याओं से राहत पाने के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपाय कारगर साबित हो सकते हैं। ये उपाय न सिर्फ गले की तकलीफ से राहत दिलाएंगे, बल्कि इम्युनिटी भी बढ़ाते हैं, जिससे प्रदूषण के दुष्प्रभावों से लड़ने में मदद मिलती है। आइए जानें गले की खराश दूर करने के 5 नेचुरल उपाय। गर्म पानी और नमक के गरारे यह सबसे पुराना और भरोसेमंद उपाय है। एक कप गर्म पानी में एक चौथाई चम्मच नमक मिलाकर दिन में 2-3 बार गरारे करें। नमक में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो गले की सूजन कम करते हैं और हानिकारक कणों को साफ करते हैं। गर्म पानी गले की ऐंठन में आराम देता है और बलगम को पतला करता है। शहद और अदरक का कॉम्बो शहद प्राकृतिक एंटीबायोटिक है, तो अदरक एंटी-इंफ्लेमेटरी। एक छोटा टुकड़ा अदरक पीसकर उसे एक चम्मच शहद में मिलाएं और दिन में दो बार खाएं। इसके अलावा, अदरक की चाय बनाकर शहद मिलाकर पी सकते हैं। यह कॉम्बो गले की खराश को शांत करता है और प्रदूषण के कारण जमे हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। हल्दी वाला दूध रात को सोने से पहर एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पिएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी है। यह गले में जलन कम करता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा 10-12 तुलसी के पत्ते, 5-6 काली मिर्च के दाने और एक चम्मच मुलेठी को दो कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं। तुलसी इम्युनिटी बूस्ट करती है, काली मिर्च बलगम कम करती है और मुलेठी गले की खराश में आराम देती है। प्रदूषण के कारण होने वाली जलन में यह काढ़ा रामबाण की तरह काम करता है। भाप लेना एक बर्तन में गर्म पानी लें, उसमें पुदीने का तेल की 2-3 बूंदें डालकर भाप लें। सिर पर तौलिया रखकर 5-10 मिनट तक भाप लेने से गले और नाक के मार्ग खुलते हैं, जिससे प्रदूषण के फंसे कण बाहर निकलते हैं। यह सूखी खांसी और गले की खराश में तुरंत आराम देता है। इन बातों का रखें ध्यान     दिनभर में भरपूर मात्रा में गर्म पानी पिएं ताकि गले की अंदरुनी परत नरम रहे।     बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें।     विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे, संतरा, आंवला आदि खाएं।     बिना जरूरत के घर से बाहर निकलने से बचें।  

जहरीली हवा + कड़ाके की ठंड: दिल्ली की सांसें थमीं, AQI फिर खतरे के स्तर पर

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ठंड के कहर के साथ-साथ प्रदूषण की मार भी जारी है। बीता दिन शनिवार (6 दिसंबर) भी दिल्लीवासियों के लिए बेहद प्रदूषित रहा जहां 24 घंटे का औसत AQI 330 दर्ज किया गया जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम प्रयासों के बावजूद राजधानी पिछले डेढ़ महीने से ज़हरीली हवा की गिरफ़्त से बाहर नहीं निकल पाई है। CPCB के समीर ऐप के अनुसार दिल्ली के 40 में से 31 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में दर्ज हुआ। मुंडका में AQI 387 और नेहरू नगर में 369 तक पहुंच गया। शनिवार सुबह 9 बजे तक भी औसत AQI 335 बना रहा। शनिवार शाम को दिल्ली-NCR की हवा में PM10 का स्तर 275.7 और PM2.5 का स्तर 157.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा जो मानक से करीब तीन गुना ज़्यादा है। 14 अक्टूबर के बाद एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब AQI 200 से नीचे आया हो। अगले 3-4 दिन सुधार के आसार नहीं वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों तक AQI इसी खराब स्तर के आसपास बना रहेगा। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक रविवार सुबह हल्की धुंध का अनुमान है और आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहेगा। सरकारी एजेंसियों का कहना है कि प्रदूषण को कम करने के लिए बारिश या तेज़ हवा ही चाहिए लेकिन फिलहाल ऐसी किसी मौसमी गतिविधि की संभावना कम है। सेहत पर बढ़ता सीधा खतरा राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा असर लोगों की सेहत पर दिख रहा है। सबसे अधिक समस्या अस्थमा मरीजों और बुजुर्गों को हो रही है। लोगों में आंखों में जलन, संक्रमण, गले में खराश, खांसी और दर्द की शिकायत बढ़ रही है। फेफड़ों पर बुरा असर पड़ रहा है और लोगों में थकान, घबराहट, सिरदर्द जैसे लक्षण भी बढ़े हैं। ठंड का सितम भी जारी प्रदूषण के साथ-साथ दिल्ली के लोगों को ठंड का सितम भी झेलना पड़ रहा है। न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस पर बना हुआ है जबकि अधिकतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। पहाड़ों में बर्फबारी जारी रहने के कारण इसका असर मैदानी इलाकों में देखा जा रहा है। 10 से 12 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं ने शहर की सिहरन और बढ़ा दी है। वहीं मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए शीतलहर के लिए अलर्ट भी जारी कर दिया है।  

दिल्ली की हवा में सुधर के संकेत, AQI गिरा—एनसीआर का प्रदूषण स्तर कैसा?

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 222 दर्ज किया गया, जिसे 'खराब' श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह, आईटीओ में भी एक्यूआई 269 तक पहुंच गया है, जो गंभीर वायु प्रदूषण का संकेत है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए इन आंकड़ों ने राजधानीवासियों की चिंता बढ़ा दी है। सर्दियों के आगमन के साथ ही दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या हर साल गहराती जाती है। विभिन्न कारकों, जैसे वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल, और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के कारण हवा की गुणवत्ता तेजी से गिरती है। इस वर्ष भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ जैसे पर्यटक आकर्षणों और सरकारी प्रतिष्ठानों वाले क्षेत्रों में जहरीले स्मॉग की चादर बिछ जाना, इस बात का प्रमाण है कि समस्या कितनी विकट हो चुकी है। 7 दिन बाद 8 डिग्री के नीचे गिरेगा पारा, बढ़ेगी ठिठुरन राजधानी में आने वाले दिनों में न्यूनतम पारा 8 डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंचेगा। मौसम विभाग के अनुसार, इस बीच मौसम साफ रहने का अनुमान है। हालांकि, सुबह में हल्की से मध्यम धुंध या कोहरा देखने को मिल सकता है। 4 से 5 दिसंबर तक तापमान में बदलाव आएगा, जो 7 से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। राजधानी में खिली धूप के बाद भी ठिठुरन बढ़ गई है। ऐसे में न्यूनतम के साथ-साथ अब अधिकतम तापमान में भी गिरावट है। शनिवार को सुबह से ही मौसम में ठंडक थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे दिन में सूरज की गर्मी का हल्का अहसास हुआ। इसी बीच अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.5 डिग्री अधिक रहा। भारत के मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो मौसम के औसत से 0.1 डिग्री अधिक है। दिल्ली में अधिकतम आर्द्रता 100 प्रतिशत और न्यूनतम आर्द्रता 36 प्रतिशत रही। वहीं, रिज सबसे ठंडा इलाका रहा। यहां न्यूनतम पारा 9.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी का अनुमान है कि रविवार को सुबह धुंध व कोहरे के साथ आसमान साफ रहेगा। तेज बयार से प्रदूषण में आया कुछ सुधार राजधानी में हवा की तेज गति से वायु प्रदूषण में कुछ कमी आई है। शनिवार सुबह की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे के बीच आसमान में स्मॉग की हल्की चादर भी दिखाई दी। कम दृश्यता के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 305 दर्ज किया गया जो यह हवा की बेहद खराब श्रेणी में रही। इसमें शुक्रवार की तुलना में 64 सूचकांक की गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को एनसीआर में इतना रहा प्रदूषण का स्तर एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 310 दर्ज किया गया। ग्रेटर नोएडा में 288, गाजियाबाद में 299 और गुरुग्राम में 262 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 212 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 18.78 फीसदी रहा। इसके अलावा पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण 1.26, निर्माण गतिविधियों से 2.88, पेरिफेरल उद्योग से 4.38 और आवासीय इलाकों की भागीदारी 4.83 फीसदी रही। सीपीसीबी के अनुसार, शनिवार को हवा उत्तर से उत्तर पश्चिम दिशा से 15 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 1250 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 6900 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, दोपहर तीन बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 257.6 और पीएम2.5 की मात्रा 140.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि मंगलवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में ही बरकरार रहेगी। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

AQI रिपोर्ट में गाजियाबाद ने Delhi को छोड़ा पीछे, वैज्ञानिक ने बताई प्रदूषण की वजह

गाजियाबाद गाजियाबाद एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है. सीपीसीबी के हालिया आंकड़े बताते हैं कि इस शहर ने दुनिया में सबसे प्रदूषित शहर का तमगा हासिल कर चुके दिल्ली को भी खराब एक्यूआई के मामले में पीछे छोड़ दिया है. गाजियाबाद की हवा इस कदर जहरीली हो चुकी है कि यहां रहने वाले स्वस्थ लोग भी इस हवा में सांस लेने के बाद बीमार हो रहे हैं, जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि 20 नवंबर को एक बार फिर गाजियाबाद का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में पहुंचकर 430 हो गया. जो कि दिल्ली और नोएडा से कहीं ज्यादा रहा. इससे पहले गाजियाबाद 17 और 19 नवंबर को भी प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप पर पहुंच गया था. 17 नवंबर को प्राइवेट एक्यूआई मॉनीटर एजेंसियों ने यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स 800 से भी ऊपर दर्ज किया था. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि यह शहर सबसे प्रदूषित शहर क्यों बन गया. गाज‍ियाबाद में सड़कों पर धूल और वाहनों से प्रदूषण स्‍तर लगातार बढ़ रहा है. इस बारे में भारतीय मौसम विभाग के पूर्व डीजीएम और दिल्ली के जाने-माने वैज्ञानिक के जे रमेश ने बताया कि गाजियाबाद का हाल बेहद खराब है. तीन दिन पहले भी यह प्रदूषित शहरों में टॉप पर था, एक बार फिर यहां प्रदूषण स्तर सबसे ज्यादा रिकॉर्ड हुआ है. यहां पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा हवा में बहुत ज्यादा है. इसके सबसे प्रदूषित शहर बनने की कई वजहें हैं. धूल है सबसे बड़ा प्रदूषक गाजियाबाद में धूल सबसे प्रमुख प्रदूषक है. इस शहर के किसी भी इलाके, यहां तक कि मेट्रो स्टेशनों के अंदर तक धूल का अंबार लगा होता है. यहां बड़ी संख्या में सड़कें टूटी हुई हैं. चाहे रिहाइशी हो या कमर्शियल यहां लगातार कंस्ट्रक्शन चलता रहता है. पूरे दिन बड़े और छोटे वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं और धूल उड़ाते हैं. बारिश न होने और हवा की गति सर्दियों में सुस्त पड़ने के चलते ये धूल हवा में घूमती रहती है, जो प्रदूषण स्तर को बढ़ाती है. औद्योगिक इलाके और उनसे उत्सर्जन गाजियाबाद में बड़ी संख्या में फैक्ट्रीज हैं. इसके साहिबाबाद, भोपुरा और लोनी जैसे इलाकों पूरी तरह इंस्ट्रीज के लिए ही बने हैं. यहां कारखानों से खतरनाक गैसों का उत्सर्जन होता रहता है. ग्रैप की पाबंदिया लागू जरूर होती हैं लेकिन कितनी सफलता से ये काम करती हैं, इसका कोई व्हाइट पेपर कभी नहीं आया है. वाहनों और कूड़े को जलाने से निकलने वाला धुआं गाज‍ियाबाद में खुले में कूड़ा जलाने से हवा की गुणवत्‍ता पर असर पड़ रहा है. इस शहर में छोट से लेकर बड़े वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है. इलेक्ट्रिक के मुकाबले पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां काफी हैं, साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की मॉनिटरिंग और उन पर सख्ती भी कम है, लिहाजा ये हवा की गुणवत्ता में जहर घोलते रहते हैं. इस शहर में खुले में कूड़ा जलाने से धुआं होने के भी मामले देखे गए हैं, जिनसे हवा में जहरीली गैसें बढ़ती हैं. दिल्ली से नजदीकी और उपायों की कमी गाजियाबाद दिल्ली और नोएडा के नजदीक है, जिसका असर भी इसकी जलवायु पर पड़ता है. इन शहरों में जब प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तो वह आगे बढ़कर गाजियाबाद को भी गिरफ्त में लेता है. इसके अलावा इस शहर में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए स्थाई तो दूर अस्थाई उपाय भी नहीं किए जाते हैं, जैसे सड़कों पर पानी का छिड़काव, पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाना, ग्रैप को सख्ती से लागू करना आदि. वैज्ञानिक के जे रमेश कहते हैं कि जब तक गाजियाबाद के स्थानीय कारणों को जानकर वहां के लिए अलग नियम नहीं बनाए जाएंगे, सभी अथॉरिटीज मिलकर प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक रूप से काम नहीं करेंगी, गाजियाबाद क्या किसी भी शहर की हवा को साफ कर पाना मुश्किल है. इस शहर में फैक्ट्री और कारखानों से उत्सर्जन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए. यहां कूड़ा जलाने को भी प्रतिबंधित करने की जरूरत है, साथ ही सड़कों की मरम्मत एक बड़ा मुद्दा है.

SC की केंद्र को फटकार: WHO 50 को खतरनाक कहता है, दिल्ली-NCR 450 पर कैसे?

नई दिल्ली दिल्ली-NCR में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट  ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया और केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ जिसमें जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया भी शामिल थे ने समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक और व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।  सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी CJI गवई ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट सलाह दी कि वह सभी हितधारकों को एक साथ बुलाकर इस गंभीर समस्या का समाधान निकाले। CJI ने कहा, "अल्पकालिक कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी। हमें व्यापक दीर्घकालिक समाधान चाहिए।" कोर्ट ने निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे अल्पकालिक उपायों पर चिंता व्यक्त की। CJI ने कहा, "हम निर्माण पूरी तरह बंद नहीं कर सकते… इससे यूपी-बिहार के मजदूरों पर सीधा असर पड़ता है। हम सिर्फ एक पक्ष को देखकर आदेश नहीं दे सकते। जमीन पर ऐसे निर्देशों से कई लोग प्रभावित होते हैं।" सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और अन्य NCR राज्यों को शामिल करके एक संयुक्त रणनीति तैयार करे।