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आचरण के लिए माफी मांगें— राहुल गांधी को 200 से अधिक पूर्व अफसरों की खुली चिट्ठी

नई दिल्ली संसद भवन परिसर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के हालिया विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। 204 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, पूर्व नौकरशाहों, पूर्व राजनयिकों और वकीलों ने राहुल गांधी से उनके आचरण के लिए देश से माफी मांगने की मांग की है। मंगलवार को पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी के नाम लिखी एक खुली चिट्ठी जारी की जिसमें कहा गया है कि 12 मार्च को संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी और अन्य सांसदों का व्यवहार संसदीय मर्यादा और संस्थागत गरिमा के खिलाफ था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश के बावजूद संसद परिसर में प्रदर्शन किया गया, जो “अध्यक्ष के आदेश की अवहेलना” और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है। चिट्ठी में राहुल गांधी के व्यवहार को मर्यादा और संस्थागत गरिमा का उल्लंघन बताया गया है। खुले पत्र में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि 12 मार्च को संसद भवन परिसर के भीतर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी के कार्यों को 'पीठ' (Chair) की जानबूझकर अवहेलना माना जा सकता है, और यह संसदीय अधिकार के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। “राजनीतिक नाटक का मंच नहीं संसद” पत्र में कहा गया है, “संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान है, इसे राजनीतिक नाटक का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।” हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सांसदों का संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट खाना और प्रदर्शन करना “जनप्रतिनिधियों के आचरण के अनुरूप नहीं” है। खुले पत्र में कहा गया कि इस तरह का व्यवहार न केवल संसदीय प्रक्रियाओं को कमजोर करता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है। माफी और आत्ममंथन की मांग उन्होंने लिखा है, "संसद के हर हिस्से, सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी की समान गरिमा है। जनप्रतिनिधियों का आचरण इन स्थानों पर भी उसी स्तर का होना चाहिए।" पत्र में यह भी कहा गया है कि बार-बार इस तरह की घटनाएं सार्वजनिक संवाद के स्तर को गिराती हैं। पूर्व अधिकारियों ने नेता प्रतिपक्ष से अपील की है कि वे देश से माफी मांगें और अपने व्यवहार पर आत्ममंथन करें, ताकि संसद की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे। पत्र में कहा गया है, “एक संवैधानिक संस्था के संरक्षक के रूप में, जो एक अरब से अधिक लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक है, सांसदों को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि उनके कार्यों का प्रतीकात्मक और संस्थागत महत्व होता है।” पत्र का नेतृत्व इस पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने किया। हस्ताक्षरकर्ताओं में 100 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारी, कई पूर्व नौकरशाह, राजनयिक और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से संसदीय आचरण और लोकतांत्रिक परंपराओं पर एक नई बहस छिड़ सकती है।  

बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की अपील, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को भेजा लेटर

लखनऊ लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सामाजिक न्याय आंदोलन के महान नेता कांशीराम को मरणोपरांत 'भारत रत्न' देने की मांग की है। गांधी ने रविवार को अपने पत्र में कहा कि मान्यवर कांशीराम ने भारतीय राजनीति की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बहुजन समाज तथा गरीब वर्गों में राजनीतिक चेतना जगाई थी। उनका कहना था कि उनके इन प्रयासों से भारतीय लोकतंत्र की नींव मजबूत हुई और राजनीतिक व्यवस्था अधिक प्रतिनिधिक तथा न्यायपूर्ण बनी। कांग्रेस नेता ने कहा, “आज जब हम कांशीराम जी की जयंती मना रहे हैं और उनके जीवन तथा योगदान को याद कर रहे हैं। मैं आपसे अनुरोध करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं कि उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। उन्होंने लोगों को बताया था कि उनका वोट,उनकी आवाज और उनका प्रतिनिधित्व है और यह देश सभी का समान रूप से है। उनके प्रयासों के कारण कई ऐसे लोग, जिन्होंने कभी सार्वजनिक जीवन में आने के बारे में नहीं सोचा था, उन्होंने राजनीति को न्याय और समानता प्राप्त करने का माध्यम मानना शुरू किया।” गांधी ने लिखा कि हमारा संविधान प्रत्येक भारतीय को समानता, गरिमा और भागीदारी का वादा करता है और कांशीराम जी ने अपना जीवन समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों के लिए इन वादों को सार्थक बनाने में समर्पित किया। कांग्रेस नेता ने कहा, "कई वर्षों से दलित बुद्धिजीवी, नेता और सामाजिक कार्यकर्ता कांशीराम जी को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करते रहे हैं। उनकी यह मांग लगातार और गहरी भावना के साथ उठती रही है। हाल ही में मैं लखनऊ में एक कार्यक्रम में शामिल हुआ था, जहां नेताओं और प्रतिभागियों ने इस मांग को जोरदार तरीके से दोहराया, जो व्यापक जनभावना को दर्शाता है। उन्हें भारत रत्न प्रदान करना हमारे राष्ट्र के प्रति उनके महान योगदान को मान्यता देगा। यह उन लाखों लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान भी होगा, जो आज भी उन्हें सशक्तीकरण और उम्मीद के प्रतीक के रूप में देखते हैं।"

राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत, सावरकर बयान पर दर्ज मानहानि केस खत्म

मुंबई महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक आपराधिक अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को बुधवार, 11 मार्च को बड़ी राहत दी है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आर.एल. नरवाडे की अदालत ने गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के एक मामले को बंद कर दिया है। यह मामला उनके द्वारा हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़ा था, जो उन्होंने 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की थीं। अकोला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावरकर से जुड़े कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज दिखाते हुए टिप्पणी की थी। राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत नासिक स्थित निर्भया फाउंडेशन के अध्यक्ष देवेंद्र भुटाडा ने दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 15 और 16 जून, 2022 को हिंगोली और अकोला में रैलियों में गांधी की टिप्पणियां मानहानि करने वाली और अपमानजनक थीं। किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ था भुटाडा की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) और 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया गया था। सितंबर 2024 में नासिक अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में समन भी जारी किया था। बाद में राहुल गांधी को अदालत से जमानत मिल गई और उन्हें कार्यवाही में वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति भी दी गई। सुनवाई के दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था। शिकायतकर्ता ने वापस ली शिकायत बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 202 के तहत जांच के आदेश दिए थे। पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में आवेदन देकर मामला वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद ट्रायल जज ने मानहानि से जुड़ी पूरी कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया।  

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला: LPG संकट के बीच बोले- संसद में नरेंद्र नहीं, घरों में सिलेंडर नहीं

नई दिल्ली कांग्रेस सहित विपक्ष के कई दलों ने आज ईरान युद्ध के कारण देश में गहराए एलपीजी संकट को लेकर संसद भवन के बाद प्रदर्शन किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस संकट के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया। संसद के मकर द्वार के निकट कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद एकत्र हुए और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्षी सांसदों ने गुरुवार को संसद भवन के बाद ''मोदी जी एलपीजी'' के नारे लगाए। इसके बाद राहुल गांधी ने एक्स पर तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम पर कटाक्ष किया। राहुल लिखते हैं, ‘संसद से नरेंदर गायब, देश से सिलेंडर गायब’ आपको बता दें कि संसद के बाहर विपक्षी सांसदों ने गैस सिलेंडर की आकृति वाली तख्तियां भी ले रखी थीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि ईंधन संकट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन वह ख़ुद अलग कारणों से घबराए हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि रसोई गैस की किल्लत को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोगों से नहीं घबराने की अपील कर रहे हैं, जबकि वह खुद अलग कारणों से घबराए हुए हैं। राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से कहा, ''प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन खुद प्रधानमंत्री बिल्कुल अलग वजहों से घबराए हुए हैं। वह अदाणी मामले, 'एप्सटीन फाइल' के कारण घबराए हुए हैं।'' उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री सदन के अंदर नहीं आ पा रहे हैं और देश से कह रहे हैं कि घबराओ मत, जबकि वह खुद घबराए हुए हैं। आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण रसोई गैस की किल्लत के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को लोगों से नहीं घबराने की अपील की थी और जनहित की रक्षा का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था, ''मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि हम केवल सही और सत्यापित जानकारी ही फैलाएं।''  

‘जलेबी की फैक्ट्री’ वाले बयान से संसद में गर्मागर्मी, राहुल गांधी पर सत्ता पक्ष का पलटवार

नई दिल्ली लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट चल रही है। इस दौरान कांग्रेस ने प्रस्ताव को लेकर कहा कि ओम बिरला ने नेता विपक्ष को समय ही नहीं दिया। उन्हें 20 बार बोलने से रोका दिया गया। इस मामले पर अब सरकार ने जवाब दिया है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी को ना बोलने की शिकायत की जाती है, लेकिन सवाल है कि वे आखिर बोलते क्या हैं। उन्होंने कहा कि मैं हरियाणा में चुनाव प्रचार में गया था तो किसी ने बताया कि राहुल गांधी ने कहा कि जलेबी की फैक्ट्री लगाएंगे। मुझे यकीन नहीं हुआ तो वीडियो दिखाया गया। भाजपा नेता ने कहा कि मैं हैरान रह गया कि आखिर ऐसा कैसे कहा जा सकता है। देश के गांव-गांव में जलेबी छनती है। इसे फैक्ट्री में नहीं बनाया जाता। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से यह भी कह दिया कि भारत में इस्लामिक कट्टरपंथ से ज्यादा चिंता की बात हिंदू रैडिकल हैं। उन्होंने कहा कि इन्होंने क्या-क्या बोला, सब कुछ मेरे पास है। यहां बताऊंगा तो लंबी लिस्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव है, वह किसी के अहंकार की संतुष्टि का प्रयास है। 'इंदिरा गांधी के पोते के ज्ञान पर मैं तो सन्न रह गया' रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी आरोप लगाते हैं कि मुझे बोलने नहीं दिया। आखिर वह बोलते क्या हैं। इनका कहना है कि तपस्या से गर्मी आती है। मैं तो सन्न रह गया कि आत्मा से परमात्मा का मिलन है तपस्या। आखिर इंदिरा जी के पोते का इस पर क्या ज्ञान है। इस पर मुझे हैरानी हुई। प्रधानमंत्री जी की कुर्सी के पास जिस तरह से विपक्ष के लोग आए थे, वह सबने देखा था। राहुल गांधी इस सदन को अराजकता में बदल देना चाहते हैं। यह संसद सर्वोच्च है और इसकी गरिमा बनी रहनी चाहिए। यदि स्पीकर के खिलाफ बेबुनियाद प्रस्ताव लाया गया है तो हम उसका विरोध करते हैं। बीच में बोलने लगे राहुल गांधी, नियमों का दिया गया हवाला इस दौरान राहुल गांधी ने बीच में बोलने का भी प्रयास किया, जिस पर रविशंकर प्रसाद ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आप बाद में बोल सकते हैं। इस डिबेट में सपा सांसद आनंद भदौरिया ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि स्पीकर ओम बिरला भले आदमी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ने उनसे जबरदस्ती ऐसा व्यवहार कराया। यह दुख की बात है कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। गौरतलब है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ आए प्रस्ताव पर आज होम मिनिस्टर अमित शाह भी स्पीच देंगे।  

INDIA मीटिंग में राहुल गांधी बने निशाने पर, वामपंथी दल बोले– गठबंधन ऐसे नहीं चलेगा

नई दिल्ली सोमवार को अलायंस की मीटिंग में दिल्ली में थी, जिसमें संसद सत्र को लेकर चर्चा होनी थी। लेकिन इस दौरान लेफ्ट पार्टियों ने सीधे राहुल गांधी पर ही हमला बोल दिया। इन दलों ने ऐतराज जताया कि राहुल गांधी केरल में जिस तरह से लेफ्ट पार्टियों पर हमला बोल रहे हैं, वह ठीक नहीं है। केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और मुकाबले में लेफ्ट के नेतृत्व में एलडीएफ गठबंधन है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस का यूडीएफ है। चुनाव से पहले बयानबाजी का दौर तेज है, लेकिन इसका असर दिल्ली तक दिख रहा है और INDIA गठबंधन में भी तनाव पैदा हो रहा है। सोमवार को अलायंस की मीटिंग में दिल्ली में थी, जिसमें संसद सत्र को लेकर चर्चा होनी थी। लेकिन इस दौरान लेफ्ट पार्टियों ने सीधे राहुल गांधी पर ही हमला बोल दिया। इन दलों ने ऐतराज जताया कि राहुल गांधी केरल में जिस तरह से लेफ्ट पार्टियों पर हमला बोल रहे हैं, वह ठीक नहीं है। इससे INDIA अलायंस की एकता प्रभावित होगी और संबंध में कड़वाहट आ जाएगी। वामपंथी दलों के सांसद जॉन ब्रिट्स और पी. संतोष कुमार ने मीटिंग में आपत्ति जताई कि राहुल गांधी कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा के बीच गठजोड़ की बात कैसे कर सकते हैं। दरअसल राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि केरल में भाजपा और कम्युनिस्ट दलों के बीच तालमेल है। यही नहीं उन्होंने आरोप लगाते हुए एक टर्म भी दी थी- कम्युनिस्ट जनता पार्टी। वामपंथी दलों के नेताओं को सबसे ज्यादा यह टर्म ही चुभी है, जिसमें उन्हें कम्युनिस्ट जनता पार्टी कहा गया। वामपंथी नेताओं ने कहा कि इस तरह सहयोगी दलों पर टिप्पणियां करने से गठबंधन कैसे चल पाएगा। वहीं वामपंथी नेताओं की शिकायत पर कुछ और दलों के नेताओं ने दखल दिया। उन्होंने कहा कि यह मीटिंग तो संसद सत्र के एजेंडे को लेकर बुलाई गई है। ऐसे में इस फोरम पर दो दलों के आपसी संबंधों को लेकर बात नहीं करनी चाहिए। यही नहीं कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी मीटिंग के दौरान लेफ्ट सांसदों के रुख पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस मसले पर बाद में बात की जाएगी और हम बताएंगे कि आखिर राहुल गांधी के कहने का क्या मतलब था। उन्होंने कहा कि मीटिंग में इस तरह राहुल गांधी की स्पीच के एक हिस्से को मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। राहुल गांधी भी बैठक में थे मौजूद, वामपंथी नेताओं की आपत्ति पर क्या बोले इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद थे और उन्होंने भी यही कहा कि इस पर बाद में बात की जाएगी। इस दौरान ज्यादातर नेताओं ने यही कहा कि हमें फिलहाल बैठक में संसद के एजेंडे पर फोकस करना चाहिए। गौरतलब है कि अगले कुछ महीनों में ही केरल में इलेक्शन होने वाले हैं। बीते लगातार दो कार्यकाल से वामपंथी नेतृत्व वाली सरकार केरल की सत्ता पर काबिज है। यहां भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी है, जबकि कांग्रेस मुकाबले में रही है। ऐसे में कांग्रेस को लगता है कि इस बार वह सत्ता हासिल कर लेगी। केरल की ही वायनाड लोकसभा सीट से राहुल गांधी सांसद रहे हैं। फिलहाल यहां का प्रतिनिधित्व उनकी बहन प्रियंका वाड्रा करती हैं।

राहुल गांधी का पीएम पर निशाना: भारत की विदेश नीति को बताया समझौतावादी

नई दिल्ली लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की है। राहुल गांधी के आधिकारिक सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर 11 फरवरी को लोकसभा में दिए गए भाषण का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया है, "भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की सामूहिक इच्छा से उत्पन्न होती है। यह हमारे इतिहास, हमारी भौगोलिक स्थिति और सत्य एवं अहिंसा पर आधारित हमारी आध्यात्मिक विचारधारा में निहित होनी चाहिए। आज हम जो देख रहे हैं, वह नीति नहीं है। यह एक भ्रष्ट व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।" राहुल गांधी ने जो वीडियो पोस्ट किया है, उस पर लिखा है, "11 फरवरी 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के खतरे में होने की चेतावनी दी। अमेरिका ही तय करेगा कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं और किससे नहीं। चाहे रूस से खरीदना हो या ईरान से, अमेरिका ही फैसला करेगा। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री फैसला नहीं करेंगे।” एक दिन पहले 5 मार्च को भी राहुल गांधी ने कहा था, "विश्व एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुका है। आगे भयंकर संकट मंडरा रहा है। भारत की तेल आपूर्ति खतरे में है, क्योंकि हमारे आयात का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। एलपीजी और एलएनजी के लिए स्थिति और भी बदतर है। संघर्ष हमारे पड़ोस तक पहुंच गया है, हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डूब गया है। फिर भी प्रधानमंत्री ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ऐसे समय में हमें एक स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है। इसके विपरीत भारत के पास एक ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो समझौतावादी हैं और रणनीतिक स्वायत्तता को त्याग दिया है।" हालांकि पिछले सप्ताह इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 15 प्रतिशत से अधिक उछाल देखा गया था, लेकिन शुक्रवार सुबह तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह यह रही कि अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है।

यूथ कांग्रेस पर कार्रवाई से सियासत गरम, राहुल गांधी ने कहा— ‘हम डरने वाले नहीं’

नई दिल्ली एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान 20 फरवरी को भारत मंडपम में हुए विरोध प्रदर्शन के मामल में दिल्ली पुलिस ने भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत कुल 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिसिया कार्रवाई की आलोचना की है और भारतीय युवा कांग्रेस के साथ एकजुटता जताई है। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने युवा कांग्रेस के सदस्यों को निडर बताया और उनके शांतिपूर्ण विरोध की सराहना की है। एक्स पर राहुल गांधी ने लिखा कि शांतिपूर्ण विरोध हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। यह हमारे खून में है और हर भारतीय का लोकतांत्रिक अधिकार है। मुझे युवा कांग्रेस के अपने बब्बर शेर साथियों पर गर्व है, जिन्होंने ‘COMPROMISED PM’ के खिलाफ निडर होकर देश के हित में आवाज उठाई है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील में देश के हितों से समझौता किया गया है। यह समझौता हमारे किसानों और टेक्सटाइल उद्योग को नुकसान पहुंचाएगा तथा हमारे डेटा को अमेरिका के हाथों में सौंप देगा। इस सच्चाई को देश के सामने रखने के लिए युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब और IYC के अन्य साथियों की गिरफ्तारी तानाशाही प्रवृत्ति और कायरता का प्रमाण है। कांग्रेस पार्टी और मैं अपने बब्बर शेर साथियों के साथ मजबूती से खड़े हैं। सत्ता को सच का आईना दिखाना अपराध नहीं, बल्कि देशभक्ति है। राहुल गांधी ने कहा कि डरो मत, सच और संविधान हमारे साथ हैं। क्या बोले मल्लिकार्जुन खरगे? दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि युवा आज नौकरी के लिए तड़प रहे हैं और देश का माहौल इतना खराब हो चुका है, उसके कारण मोदी जी के प्रति लोगों में भारी रोष है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने घुटने टेक दिए तथा उनकी सारी शर्तों को मान लिया, जिससे पूरा देश शर्मिंदा हो गया। खरगे ने कहा कि जो काम हमारे किसानों की भलाई और मदद के लिए किया जाना चाहिए था, उसकी बजाय किसानों का नुकसान करने की बातचीत की गई। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इससे यह भी साफ हो गया कि लोग समझते थे कि मोदी जी देश के हित में ट्रंप से बात कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में ट्रंप हमें गुलाम बना रहा है और हमें बंधुआ मजदूर बनाने की दिशा में धकेला जा रहा है। यह काम मोदी जी कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस डरने वाली नहीं है और न ही डरपोक है। खरगे ने दावा किया कि मोदी साहब खुद डरपोक हैं। डर के कारण वह संसद में आकर अपनी नीतियों का बचाव भी नहीं कर पाते। इसलिए वह हमें डराने की कोशिश कर रहे हैं, हमारे युवाओं को, हमारे युवा नेताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं। यह नहीं चलेगा। मैं इसकी निंदा करता हूं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जो भी त्याग करना पड़ेगा, हम करेंगे। हम लड़ते रहेंगे और देश को गिरवी रखने वाले लोगों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।  

राहुल गांधी का अनोखा अंदाज: ‘मोहम्मद दीपक’ से बातचीत, फिटनेस को लेकर किया दिलचस्प वादा

देहरादून/दिल्ली उत्तराखंड के कोटद्वार में 'मोहम्मद दीपक' से देशभर में चर्चा बटोरने वाले दीपक कुमार ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है। राहुल गांधी ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। मुलाकात पर अपनी एफबी पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, "हर इंसान, एक समान यही है भारतीयता, यही है मोहब्बत की दुकान। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद दीपक कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें साथ देने का भरोसा दिया है। साथ ही कोटद्वार आकर उनके जिम की मेंबरशिप लेने का वादा भी किया है। बीते 26 जनवरी को कोटद्वार में मुस्लिम बुजुर्ग की दुकान के बाबा नाम को लेकर विवाद उठा था। हिंदू संगठन बजरंग दल ने नाम आपत्ति जताई थी और बुजुर्ग को दुकान का नाम बदलने की चेतावनी दी थी। इस पर बुजुर्ग के समर्थन में दीपक कुमार अकेले बजरंग दल से भिड़ गए। उन्होंने कथित तौर पर खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बुलाया था। दीपक के ये शब्द देशभर में वायरल हुए थे और सुर्खियां बटोरी। राहुल गांधी ने तब भी सोशल मीडिया पर दीपक कुमार की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि दीपक देश के हीरो हैं। राहुल गांधी की एफबी पोस्ट कोटद्वार में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करने वाले जिम मालिक दीपक कुमार ने हाल ही में दिल्ली स्थित '10 जनपथ' पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी ने दीपक के साहस की सराहना करते हुए उनकी पत्नी से फोन पर बात की। राहुल गांधी ने दीपक कुमार से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा है, "हर इंसान, एक समान यही है भारतीयता, यही है मोहब्बत की दुकान। उत्तराखंड के भाई 'मोहम्मद दीपक' से मुलाकात – एकता और साहस की ऐसी ही लौ हर भारतीय युवा में जलनी चाहिए।" राहुल गांधी पहले भी दीपक कुमार की जमकर तारीफ कर चुके हैं। राहुल के अलावा एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी दीपक की तारीफ में कहा था कि देश को उत्तराखंड के दीपक जैसे और दीपक चाहिए। राहुल कोटद्वार आएंगे और मेरे जिम की मेंबरशिप लेंगे- दीपक दीपक कुमार ने कहा कि "राहुल गांधी ने उनके परिवार से बात की है। कहा कि आपने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने वादा किया कि वे जल्द कोटद्वार आएंगे और उनके जिम की मेंबरशिप लेंगे। राहुल गांधी ने मुझसे कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है। आप सही कदम पर हैं। मुझे बहुत खुशी मिली है कि राहुल जी अगर आएंगे और मेरे जिम की मेंबरशिप लेंगे।" सुप्रीम कोर्ट के 12 वकील भी ले चुके जिम की मेंबरशिप गौरतलब है कि कोटद्वार में दीपक कुमार का 'हल्क' नाम से जिम सेंटर है। यह कभी 150 से अधिक सदस्यों से भरा रहता था। दीपक कुमार ने हाल ही में आरोप लगाया था कि बाबा दुकान को लेकर हुए हंगामे के बाद उनकी एकमात्र आजिविका पर संकट छा गया है। उन्होंने कहा कि मारे डर के कई लोगों ने उनके जिम से मेंबरशिप हटा दी है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के लगभग 12 वरिष्ठ वकीलों ने 10000 रुपये का शुल्क चुकाकर एक साल के लिए जिम की सदस्यता ली है।

24 फरवरी को भोपाल में कांग्रेस का महा आंदोलन: राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का संयुक्त दौरा

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 24 फरवरी को कांग्रेस का बड़ा किसान आंदोलन आयोजित किया जाएगा। इसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हिस्सा लेंगे। कांग्रेस ने यह आंदोलन भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किया है। पार्टी का कहना है कि यह डील देश के किसानों के हितों के खिलाफ है और मध्यप्रदेश के कपास, सोयाबीन, मक्का और फल उत्पादक किसानों पर इसका खास असर पड़ेगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि किसानों के लिए लड़ाई की शुरुआत मध्यप्रदेश से होगी। उन्होंने बताया कि यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन छह राज्यों में किया जाएगा। राष्ट्रव्यापी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत मध्य प्रदेश से पार्टी ने तय किया है कि ट्रेड समझौते के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत मध्य प्रदेश से होगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि इस डील का सीधा असर सोयाबीन, कपास और मक्का उत्पादक किसानों पर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह समझौता किसानों के आर्थिक हितों पर चोट करता है, इसलिए पार्टी इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करेगी। किसानों के हक और अधिकारों के समर्थन में अभियान की शुरुआत जीतू पटवारी ने कहा है कि भोपाल का यह सम्मेलन केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहीं से देशभर में किसानों के हक और अधिकारों के समर्थन में अभियान की शुरुआत की जाएगी। कांग्रेस नेतृत्व इसे किसानों के भविष्य और कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ा निर्णायक संघर्ष बता रहा है।  इस फैसले की घोषणा नई दिल्ली में कांग्रेस की उच्चस्तरीय बैठक में हुई, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मौजूद थे।कांग्रेस का यह कदम किसानों के हितों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।