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रेलवे का मास्टरस्ट्रोक! एक ऐप में समाएंगी यात्रा से जुड़ी सभी सुविधाएं

भोपाल रेल यात्रियों की दैनिक जरूरतों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एकीकृत मोबाइल एप के माध्यम से यात्रा से जुड़ी अनेक सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध करा दी हैं। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा के दौरान जरूरी जानकारियों तक, हर सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें अलग-अलग एप्स और रेलवे काउंटरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस एकीकृत एप के जरिए यात्री आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफार्म टिकट की बुकिंग कर सकते हैं। लाइव स्टेटस से लेकर भोजन बुकिंग तक की सुविधा इसके अलावा पीएनआर स्टेटस, लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस, ट्रेन सर्च, कोच और सीट लोकेशन की जानकारी भी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। यात्रा के दौरान ट्रेन में भोजन बुकिंग की सुविधा भी इसी प्लेटफार्म पर उपलब्ध है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। एक ही एप पर इतनी सुविधाएं मिलने से यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान जानकारी जुटाना सरल हो गया है।   डिजिटल पेमेंट पर मिलेगी 3% की छूट तो वहीं डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेलवे द्वारा अनारक्षित टिकटों की बुकिंग पर तीन प्रतिशत की छूट दी जा रही है। यह छूट 14 जनवरी से 14 जुलाई तक प्रभावी रहेगी और यूपीआई, मोबाइल वालेट, नेट बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड सहित सभी स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू होगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

रेलवे ने शुरू की डिजिटल व्यवस्था, अब ट्रेनों में बैठे-बैठे मिलेगा स्वादिष्ट खाना

भोपाल  ट्रेन के सफर के दौरान यात्रियों को अब गर्म ताजा भोजन, मिनरल वाटर या जरूरी यात्रा जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोपाल मंडल (Bhopal Rail Division) में एकीकृत मोबाइल ऐप सेवा को एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म सर्विस प्रोवाइडर सर्वर से कनेक्ट कर दिया है। इस आधुनिक डिजिटल पहल से रेल यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक हो गई है। सीट पर बैठे-बैठे मिलेगी सुविधा सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यात्रा से जुड़ी अनेक सेवाओं को एक ही मोबाइल ऐप प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया है। इस ऐप के माध्यम से यात्री अपनी सीट पर बैठे-बैठे ट्रेन की लाइव लोकेशन, रिजर्वेशन चार्ट, टिकट विवरण, पीएनआर स्टेटस और ट्रेन के रनिंग स्टेटस की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मिलेगा गर्म भोजन एकीकृत मोबाइल ऐप के जरिए यात्री आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग भी आसानी से कर सकते हैं। इसके साथ ही ट्रेन सर्च, कोच और सीट लोकेशन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे स्टेशन पर अनावश्यक पूछताछ और भीड़ से राहत मिलती है। यात्रा के दौरान भोजन की समस्या को दूर करने के लिए इस ऐप में ई-कैटरिंग सेवा को भी शामिल किया गया है। यात्री अब अपनी पसंद का गर्म और ताजा भोजन, साथ ही मिनरल वाटर, सीधे अपनी सीट पर ऑर्डर कर सकते हैं। यह सेवा समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करती है, जिससे यात्रियों का सफर अधिक आरामदायक बनता है। 

नौ महीने में 30 करोड़ की वसूली, भोपाल रेल मंडल में बेटिकट यात्रियों से बढ़ा राजस्व

भोपाल  अगर आप ट्रेन में बिना टिकट या अनियमित टिकट पर सफर करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने टिकट चेकिंग अभियान के जरिए बिना टिकट सफर करने वाले मुसाफिरों की जेब पर बड़ी स्ट्राइक की है। चालू वित्तीय वर्ष के पिछले 9 महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025) में मंडल ने जुर्माने के रूप में 30.48 करोड़ रुपए का भारी-भरकम राजस्व वसूल किया है। 4.75 लाख यात्री धरे गए भोपाल मंडल के टिकट निरीक्षकों ने स्टेशनों और चलती ट्रेनों में सघन जांच अभियान चलाकर कुल 4 लाख 75 हजार ऐसे मामले पकड़े, जो बिना टिकट, अनियमित टिकट या अनबुक्ड लगेज के साथ यात्रा कर रहे थे। खास बात यह है कि इस बार रेलवे ने पिछले साल की तुलना में 4.45 प्रतिशत अधिक राजस्व अर्जित कर अपनी मुस्तैदी का परिचय दिया है। कुल आंकड़ा 100 करोड़ पार महाप्रबंधक के मार्गदर्शन में भोपाल सहित जबलपुर और कोटा मंडल में भी यह अभियान जोरों पर रहा। पूरे पश्चिम मध्य रेल की बात करें तो 9 महीनों में कुल 14.65 लाख मामले पकड़े गए, जिनसे 101 करोड़ 16 लाख रुपये का राजस्व मिला। यह पिछले साल की तुलना में करीब 15.80 प्रतिशत की बड़ी छलांग है। रेलवे की सख्त चेतावनी रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे हमेशा उचित टिकट लेकर ही यात्रा करें। वाणिज्य विभाग और आरपीएफ के समन्वय से यह चेकिंग अभियान आने वाले दिनों में और भी तेज किया जाएगा। गौरतलब है कि बेटिकट यात्रियों को पकड़ने के लिए समय-समय पर रेलवे की तरफ से किलाबंदी चेकिंग अभियान चलाया जाता है। इस दौरान ही बड़ी संख्या में यात्री पकड़े जाते हैं। यह रेलवे के लिए बड़ी सफलता है।  

भारतीय रेलवे में हलाल मीट पर विवाद, सिख संगठन की याचिका पर NHRC ने जारी किया नोटिस

  नई दिल्ली     भारतीय रेलवे की थाली में परोसे जाने वाले नॉनवेज भोजन को लेकर झटका बनाम हलाल विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है. सिख संगठनों की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने रेलवे बोर्ड, FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है. NHRC ने अपने नोटिस में कहा है कि अगर रेलवे में केवल हलाल मांस परोसा जा रहा है, तो यह उपभोक्ताओं के भोजन के विकल्प के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है. साथ ही, इसे सिख धर्म की आचार संहिता यानी सिख रहत मर्यादा के खिलाफ भी बताया गया है. NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर कहा, "सिख रहत मर्यादा सिखों को हलाल मांस के सेवन से रोकती है. अगर सिख उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं दी जा रही कि उन्हें किस तरह का मांस परोसा जा रहा है, तो यह उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है." आयोग ने संस्कृति मंत्रालय से यह भी कहा है कि वह सभी खाने-पीने की दुकानों और संस्थानों को निर्देश दे कि वे स्पष्ट रूप से यह दिखाएं कि परोसा जाने वाला मीट हलाल है या झटका. NHRC का मानना है कि पारदर्शिता न होना धार्मिक स्वतंत्रता और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है. FSSAI को भेजे गए नोटिस में आयोग ने कहा है कि नॉनवेज फूड के सर्टिफिकेशन में इसका साफ तौर पर जिक्र होना चाहिए कि मीट झटका है या हलाल. इससे उपभोक्ता अपनी धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार निर्णय ले सकेंगे. प्रियंक कानूनगो ने रोजगार से जुड़े पहलू पर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल वही माना जाता है जिसमें पशु बलि केवल मुसलमान द्वारा दी गई हो. इससे हिंदू दलित समुदायों को रोजगार के अवसरों से वंचित किया जाता है, जो परंपरागत रूप से पशु बलि और मांस बिक्री से जुड़े रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उन्हें किस तरह का नॉनवेज परोसा जा रहा है. अपने बयान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा, "यहां तक कि मुस्लिम देश की एविएशन कंपनी एतिहाद एयरलाइंस भी यात्रियों को हलाल और हिंदू झटका भोजन का विकल्प देती है." क्यों है विवाद? कानूनगो ने बताया कि हमने उन्हें एक नोटिस के माध्यम से पूछा है कि रेलवे में जो ठेकेदार भोजन बेचते हैं या सप्लायर मांस की सप्लाई करते हैं, वह हलाल पद्धति से है या झटका पद्धति से. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल पद्धति से जानवर का वध सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं. उन्होंने कहा, सरकारी एजेंसी होने के नाते रेलवे जो खाना बेच रही है, उसमें मांस किस पद्धति से तैयार किया जा रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए. झटका पद्धति से मांस का वध हिंदू तथा अन्य दलित समुदाय करते हैं. सभी वर्गों के लोगों के जीविका के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के मांस की बिक्री होनी चाहिए. ट्रेन के खाने पर लगेगा स्टिकर? प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि रेलवे के साथ-साथ FSSAI को भी नोटिस जारी कर पूछा गया है कि ऐसी संभावनाओं पर विचार किया जाए, जहां भारत में बिकने वाली मांसाहारी सामग्री पर यह स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जाए कि यह सभी धर्मों के लोग खा सकते हैं या नहीं. किसी के लिए प्रतिबंध है तो उसे स्पष्ट रूप से बता दिया जाए. उन्होंने कहा कि भारत में एक अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सिख समुदाय है. सिख धर्म मानने वालों के लिए पवित्र नियम पुस्तिका है, जिसमें आर्टिकल 24 में स्पष्ट लिखा है कि सिखों को इस्लामी हलाल पद्धति से तैयार किया गया मीट नहीं खाना चाहिए. यह उनके लिए प्रतिबंधित है. यदि एक विशेष पद्धति से तैयार मीट सिख समुदाय के लिए प्रतिबंधित है, तो अंजाने में उन्हें वही भोजन देना धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है और मानवाधिकार का उल्लंघन है.

100+ वैगन के साथ WCR ने चलायी सबसे लंबी अनब्रोकन मालगाड़ी, रचा नया रिकॉर्ड

इंदौर   देश के रेलवे नेटवर्क में अब लॉन्ग हॉल वाली एक और मालगाड़ी जुड़ गई है, जिससे एक ही बार में हजारों टन माल देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचा जा सकेगा. पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने इस क्षेत्र में इतिहास रच दिया है. रतलाम मंडल ने अब तक की सबसे लंबी दूरी वाली अनब्रोकन लॉन्ग हॉल मालगाड़ी का सफल ट्रायल किया है. 10 जनवरी को यह लॉन्ग हॉल ट्रेन वटवा से बकानियां भौरी के बीच सफलतापूर्वक चलाई गई है, जिसने लगभग 585 किलोमीटर की दूरी तय की. क्या होती है अनब्रोकन लॉन्ग हॉल ट्रेन? लॉन्ग हॉल ट्रेन उन मालगाड़ियों को कहा जाता है जो भारी से भारी लोड के साथ सबसे लंबी दूरी तय करती हैं और इन्हें कनेक्ट करके दौड़ाय़ा जाता है. ऐसी मालगाड़ियों की लंबाई 3 से 4 किलोमीटर तक हो सकती है. इससे पहले देश में पहली लॉन्ग हॉल ट्रेन रुद्रास्त्र चलाई गई थी जो 4.50 किलोमीटर लंबी थी. इसमें 6 मालगाड़ियों को 7 इंजन लगाकर जोड़ा गया था, जिसमें 354 डिब्बे थे. वहीं, अब मध्य प्रदेश में पश्चिम रेलवे ने दूसरी लॉन्ग हॉल ट्रेन चलाई है, जिसमें दो रैक्स को जोड़ा गया और इसमें 100 से ज्यादा डिब्बे थे. रेलवे के मुताबिक ऐसी ट्रेनों में इंजन की संख्या 7 तक हो सकती है और 350 तक डब्बे लगाए जा सकते हैं. वहीं, अनब्रोकन का अर्थ है बिना रुके या बिना स्टॉपेज वाली ट्रेन, जो इसे रूद्रास्त्र से अलग बनाता है. मध्य प्रदेश में पमरे ने रचा इतिहास मध्य प्रदेश में पहली बार पश्चिम रेलवे ने अपनी पहली अनब्रोकन लॉन्ग हॉल ट्रेन का सफल संचालन किया है. पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया, '' देश के रेलवे इतिहास में माल परिवहन क्षमता में वृद्धि की दिशा में ये एक महत्वपूर्ण कदम है. लॉन्ग हॉल ट्रेन 2 ईबॉक्सतएन (EBOXN) रेक की संरचना में चलाई गई, जिसकी अधिकतम अनुमत गति 70 किमी प्रति घंटा थी. ट्रेन ने वटवा से बकानियां भौरी तक की दूरी 12 घंटे 58 मिनट में पूर्ण की और इसकी औसत गति 46.98 किमी प्रति घंटा रही, कुल मिलाकर लगभग 11 घंटे की समय बचत सुनिश्चित की गई. इस लॉंग हॉल ट्रेन के सफल परिचालन विभिन्न विभागों के बीच उत्कृष्ट समन्वय, सटीक योजना व प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है.'' रेलवे पीआरओ ने कहा, '' कई किलोमीटर लंबी इन ट्रेनों को लंबी दूरी तक चलाने से चालक दल के अलावा अन्य संसाधनों की बचत होती है. वहीं, भारतीय रेलवे की ढुलाई क्षमता भी बढ़ जाती है.

नई रेलवे परियोजना के लिए 277 पेड़ों की कटाई, MP प्रशासन ने तय की शर्तें

इंदौर  इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण किया जाना है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने तेजी से प्रक्रिया करने में लगा है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत डकाच्या और सांवेर में आने वाले गांव से रेलवे लाइन गुजरना है। निर्माण के दौरान बाधक पेड़ों को चिन्हित कर लिया है। 35 प्रजातियों के 277 पेड़ों को काटा जाएगा। जिला प्रशासन की तरफ से सशर्त पेड़ों की कटाई को लेकर निर्देश दिए है। यह अनुमति रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) भोपाल के मुख्य परियोजना प्रबंधक के आवेदन पर दी गई है। रेल लाइन प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई जमीन नहीं आ रही है, बल्कि पटरियां राजस्व भूमि में बिछाई जाना है। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने इंदौर वनमंडल के दायरे में आने वाले गांवों में पेड़ काटने के लिए वन विभाग को दिए है। डाकच्या, लसूडिया परमार, मेलकलमा, डकाच्या, कदवाली बुजुर्ग, कदवाली खेर्द, बीसाखेडी सहित अन्य गावों में लाइन निकलेगी। यहां 35 प्रजातियों के 277 से अधिक पेड़ है। मार्च 2025 में जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन को पत्र दिया गया। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सांवेर ने पहले वन विभाग से राय मांगी गई थी, लेकिन समय-सीमा में कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे मौन स्वीकृति माना गया। इसके बाद नायब तहसीलदार के माध्यम से प्रकरण आगे बढ़ाया गया और सभी पहलुओं पर विचार के बाद अनुमति प्रदान की गई। वनमंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई भूमि नहीं है। सिर्फ पेड़ों को काटने के लिए विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी दी। इन शर्तों पर दी अनुमति प्रशासन ने पेड़ों की कटाई को लेकर कड़ी शर्तें लगाई हैं ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो सके। इसके लिए वन विभाग को निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है। पेड़ काटते समय वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे और केवल चिन्हित पेड़ ही काटे जाएंगे। पहले ट्रांसप्लांट की कोशिश पेड़ों को काटने से पहले उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित (ट्रांसप्लांट) करने का प्रयास किया जाएगा। असफल होने पर ही कटाई होगी। इस बारे में वन विभाग को निगरानी करना है। उचित मूल्यांकन और नीलामी पेड़ों का मूल्यांकन संबंधित विभाग से कराया जाएगा और तय मूल्य से कम पर नीलामी नहीं होगी। कटाई का खर्च अलग से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक जितने पेड़ काटे जाएंगे। उनसे तीन गुना अधिक नए पेड़ रेलवे मार्ग के दोनों ओर लगाए जाएंगे। वहीं लगाए जाने वाले पेड़ कम से कम 3 साल पुराने होंगे। उन्हें ट्री गार्ड या वायर फेंसिंग से सुरक्षित किया जाएगा और 5 साल तक उनकी देखभाल की जाएगी। बकायादा हर साल वीडियोग्राफी कर रिपोर्ट वन समिति और एसडीएम कार्यालय को दी जाएगी। अन्य पेड़ों की कटाई पर रोक बबूल, नारियल, खजूर, आम, जाम, नीम, इमली सहित 35 प्रजातियों के पेड़ों को चिन्हित किया है। इनकी सूची बनाई गई है। इन पेड़ों के अलावा कोई भी अन्य पेड़ नहीं काटा जाएगा। जबकि निजी जमीन के पेड़ों और सागौन (टीक) के पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। वहीं यदि भूमि या पेड़ों से जुड़ा कोई मामला कोर्ट में लंबित है, तो न्यायालय का आदेश सर्वोपरि होगा। जबकि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर यह अनुमति अपने आप रद्द मानी जाएगी। यह होगा फायदा इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन से इंदौर और भोपाल के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। यहां तक कि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।माल परिवहन आसान होगा। क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

होली पर ट्रेनों में सीटें फुल, दिल्ली, मुंबई और गुजरात से यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल

लखनऊ  भारतीय रेलवे त्योहारी सीजन में लगातार स्पेशल ट्रेनों का परिचालन करता है. अपने घरों से दूर रहकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोग होली, दिवाली, दशहरा और छठ पूजा जैसे त्योहारों पर अपने घर तक पहुंच सकें, इसके लिए खास इंतजाम किए जाते हैं. लेकिन तमाम स्पेशल ट्रेनों के परिचालन के बावजूद रेगुलर ट्रेनों में इन सभी त्योहारों के दौरान जबरदस्त भीड़ दिखाई देती है और कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल होता है. इस बार होली में भी यही हालत नजर आ रहे हैं. रंगों का त्योहार होली इस साल 4 मार्च को मनाया जाएगा लेकिन 2 महीने पहले ही दिल्ली, मुंबई और गुजरात की तरफ से चलकर यूपी-बिहार आने वाली ट्रेनों में सीटें अभी से फुल हो चुकी हैं. कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल लग रहा है. गौरतलब है कि छठ महापर्व की तरह होली भी एक ऐसा त्योहार है, जब दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे शहरों में रहकर नौकरी व्यवसाय करने वाले यूपी, बिहार, झारखंड और बंगाल के तमाम लोग अपने घरों को लौटते हैं. लंबी दूरी के लिए अपने घर तक पहुंचाने का सबसे सुविधाजनक साधन ट्रेन ही होता है लेकिन इस बार होली के दौरान ट्रेनों में कंफर्म टिकट की जबरदस्त मारामारी दिखाई दे रही है. दिल्ली-यूपी होते हुए बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों का हाल अगर हम दिल्ली से यूपी होते हुए बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों की बात करें तो फरक्का एक्सप्रेस, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, दुरंतो एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस सहित तमाम ट्रेनों में स्लीपर क्लास के सभी टिकट बुक हो चुके हैं. इन सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग दिखाई दे रही है. यही हाल थर्ड और सेकंड एसी का भी है. कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं अगर हम मुंबई से यूपी, बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों की बात करें तो इन ट्रेनों में भी होली के दौरान कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है. लोकमान्य तिलक पाटलिपुत्र एक्सप्रेस, एलटीटी गोड्डा एक्सप्रेस, एलटीटी गुवाहाटी एक्सप्रेस, एलटीटी डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस भागलपुर एक्सप्रेस, एलटीटी राजगीर एक्सप्रेस, बांद्रा टर्मिनस पटना एक्सप्रेस, वास्कोडिगामा पटना एक्सप्रेस और एलटीटी अगरतला एक्सप्रेस सहित तमाम ट्रेनों में सभी सीटें फुल दिखाई दे रही हैं. यही नहीं कई ट्रेनों में तो वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं है, यानी नो रूम दिखाई दे रहा है. फरवरी के आखिरी हफ्ते से होली तक बुकिंग फुल इसी तरह अगर हम गुजरात से यूपी बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों की बात करें, तो अहमदाबाद सिलचर एक्सप्रेस, अजीमाबाद एक्सप्रेस, अहमदाबाद आसनसोल एक्सप्रेस, अहमदाबाद पटना एक्सप्रेस, उधना दानापुर एक्सप्रेस और सूरत भागलपुर एक्सप्रेस देसी ट्रेनों में सभी फरवरी के आखिरी सप्ताह से 4 मार्च होली तक सभी सीटें फुल हैं. इस रूट की भी कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट तक उपलब्ध नहीं है. यही हाल दिल्ली से मुंबई, लखनऊ और वाराणसी की तरफ जाने वाली ट्रेनों का भी है. इन रेल रूट पर चलने वाली तमाम ट्रेनों में स्लीपर और एसी क्लास की सभी टिकट अभी से बुक हो चुके हैं. हालांकि, इन रूट की ट्रेनों में राहत की बात यह है कि वेटिंग बहुत लंबी दिखाई नहीं दे रही है. फिलहाल होली के दौरान यूपी, बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग दिखाई दे रही है. ऐसे में अब लोगों की नजरें रेलवे की तरफ टिक गई हैं कि भारतीय रेलवे कब इन रेल रूट्स पर होली स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा करता है.

केंद्र का फैसला: अगले 5 सालों में लुधियाना, अमृतसर, चंडीगढ़ समेत 10 रेलवे स्टेशनों की क्षमता दोगुना की जाएगी

फिरोजपुर  फिरोजपुर रेलवे डिवीजन की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि अगले 5 सालों में नई ट्रेनें शुरू करने के लिए बड़े शहरों की क्षमता को मौजूदा लैवल से दौगुना करने की जरूरत है। साल 2030 तक बेसिक क्षमता को दोगुना करने के कामों में ये काम शामिल होंगे। मौजूदा टर्मिनलों को एक्स्ट्रा प्लेटफॉर्म के साथ बढ़ाना, लाइनों, पिट लाइनों और सही शंटिंग सुविधाओं को ठीक करना, शहरी इलाकों में और उसके आसपास नए टर्मिनलों की पहचान और कंस्ट्रक्शन आदि। उत्तर रेलवे के 10 स्टेशनों के बुनियादी ढांचे के उन्नयन की भी योजना बनाई गई है जिसमें दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर, जम्मू, हरिद्वार और बरेली शामिल हैं। यह उम्मीद की जाती है कि अगले 5 वर्षों में क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा ताकि क्षमता वृद्धि के लाभों को तुरंत महसूस किया जा सके। इससे वर्षों में धीरे-धीरे यातायात की आवश्यकता को पूरा करने में मदद मिलेगी। उत्तर रेलवे ने जिन 10 रेलवे स्टेशनों का इंफ्रॉस्ट्रक्चर अपग्रेड करने के लिए चुना है। लुधियाना समेत तीनों रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने का काम चल रहा है। हर रेलवे स्टेशन पर अभी जितने प्लेटफार्म हैं, उन्हें बढ़ाकर डबल कर दिया जाएगा। रेलवे स्टेशनों पर मॉडर्न स्टेशन बिल्डिंग तैयार की जा ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो। रेल मंत्रालय ने जारी की स्टेशनों की सूची रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने एक दिन पहले देश के रेलवे स्टेशनों की क्षमता को डबल करने की घोषणा करते हुए स्टेशनों की सूची जारी की है। उत्तर रेलवे के दस स्टेशनों को उसमें शामिल किया गया है। इस सूची में अमृतसर, लुधियाना व चंडीगढ़ के अलावा जम्मू, दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, हरिद्वार और बरेली के नाम शामिल हैं। एयरपोर्ट टर्मिनल की तर्ज पर मिलेंगी सुविधाएं लुधियाना, अमृतसर व चंडीगढ़ के रेलवे स्टेशनों का काम पूरा होते ही वहां पर यात्रियों को एयरपोर्ट टर्मिनल की तर्ज पर सुविधाएं मिलेंगी। रेलवे परिसर में मल्टी-लेवल पार्किंग, एलिवेटेड कॉनकोर्स, नए एंट्री-एग्जिट पॉइंट, फूड कोर्ट, एस्केलेटर और लिफ्ट शामिल हैं, ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिले और ट्रैफिक सुगम हो सके, जिससे ये स्टेशन पंजाब में प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब बन सके। रेल गाड़ियों के संचालन का मैकेनिज्म भी होगा अपग्रेड उत्तर रेलवे के मुताबिक रेल गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इसलिए रेलवे स्टेशनों पर संचालन का मैकेनिज्म भी अपग्रेड किया जाएगा। रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, सिग्नल सिस्टम, मल्टीट्रैकिंग सिस्टम को भी 2030 तक डबल करने की योजना है। रेल मंत्री का अश्वनी वैष्णव का दावा है कि 2030 तक रेल नेटवर्क दुनिया के बेहतरीन नेटवर्क में से एक हो जाएगा। पंजाब को मिलेगा विशेष फायदा केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू का कहना है कि पंजाब में रेलवे स्टेशनों की क्षमता डबल होने से रेल गाड़ियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब के लोगों को देश के अलग-अलग कोनों तक पहुंचने के लिए रेल की उपलब्धता बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि लुधियाना में मुख्य रेलवे स्टेशन के अलावा ढंडारी रेलवे स्टेशन को भी डेवलप किया जा रहा है। मुख्य विशेषताएं और कार्य:     आधुनिक इंफ्रॉस्ट्रक्चर: स्टेशन को एयरपोर्ट जैसा लुक देने के लिए नया डिज़ाइन, AC कॉनकोर्स (प्रतीक्षालय) और फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं।     बेहतर पार्किंग: मल्टी-लेवल पार्किंग की सुविधा, जिसमें 1,30,000 वर्ग फीट का पार्किंग क्षेत्र भी शामिल है।     ट्रैफिक मैनेजमेंट: एंट्री व एग्जिट के लिए अलग-अलग रास्ते, एक नया प्रवेश द्वार और एलिवेटेड रोड्स से सीधा जुड़ाव, जिससे यातायात सुगम हो सके।     यात्री सुविधाएं: लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड कोर्ट, वीआईपी लाउंज और स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाएँ जोड़ी जा रही हैं.     पर्यावरण अनुकूल: स्टेशन को ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन दिलाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

कोयलांचल से भोपाल का सफर होगा आसान, धनबाद–भोपाल एक्सप्रेस ट्रेन को मिली मंजूरी

रांची झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र, खासकर धनबाद के यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ी सौगात दी है। रेलवे बोर्ड ने भोपाल और धनबाद के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन को हरी झंडी दे दी है। जारी आदेश के अनुसार 11631/11632 भोपाल-धनबाद एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन जल्द शुरू किया जाएगा। इस फैसले से झारखंड और मध्य प्रदेश के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी स्थापित होगी, जिससे हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी। अब तक धनबाद से भोपाल की यात्रा करने वाले यात्रियों को कई ट्रेनों में बदलाव करना पड़ता था या फिर लंबा समय लगता था। नई एक्सप्रेस ट्रेन के शुरू होने से यह यात्रा सीधी, आरामदायक और समय की बचत वाली हो जाएगी। खासकर कोयला उद्योग से जुड़े कर्मचारी, अधिकारी, व्यापारी और छात्र इस ट्रेन से सीधे लाभान्वित होंगे। रेलवे द्वारा जारी जानकारी के अनुसार 11631 भोपाल-धनबाद एक्सप्रेस भोपाल से रात 8:55 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 8:30 बजे धनबाद पहुंचेगी। यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन सोमवार, गुरुवार और शुक्रवार को चलेगी। वहीं, 11632 धनबाद-भोपाल एक्सप्रेस धनबाद से सुबह 7:20 बजे रवाना होकर शाम 7:00 बजे भोपाल पहुंचेगी। इसका संचालन रविवार, बुधवार और शनिवार को किया जाएगा। ट्रेन का रखरखाव भोपाल में किया जाएगा यह ट्रेन अपने मार्ग में सिंगरौली, चोपन, रेनुकूट, डाल्टनगंज, गढ़वा रोड, बरकाकाना, रांची रोड, बोकारो थर्मल, चंद्रपुरा और कतरासगढ़ जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी। इससे झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों का आपसी संपर्क और मजबूत होगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे न सिर्फ यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। भोपाल-धनबाद एक्सप्रेस आधुनिक आईसीएफ कोचों के साथ चलाई जाएगी, जिसमें स्लीपर और जनरल कोच शामिल होंगे। ट्रेन का रखरखाव भोपाल में किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि इस ट्रेन को जल्द से जल्द सुविधाजनक तिथि से शुरू किया जाए। जरूरत पड़ने पर पहली यात्रा को विशेष ट्रेन के रूप में चलाकर बाद में इसे नियमित सेवा में बदला जा सकता है।  

ट्रेन से सफर हुआ महंगा: लंबी दूरी का किराया बढ़ा, ज्यादा सामान ले जाना पड़ेगा भारी

नई दिल्‍ली.  भारतीय रेलवे ने यात्रियों को दोहरा झटका दिया है. एक तरफ लंबी दूरी की ट्रेनों में किराया बढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ तय वजन से ज्यादा सामान ले जाने पर एक्‍शन की तैयारी कर ली गयी है. यानी इस साल के अंत में सफर करना और तय वजन से ज्‍यादा सामान ले जाना दोनों भारी पड़ने जा रहा है. हालांकि 215 किमी. से कम दूरी की जनरल टिकट से यात्रा और एमएसटी में कोई बढ़ोत्‍तरी नहीं हुई है. दोनों ही तरह से भारतीय रेलवे को राजस्‍व में इजाफा होगा. भारतीय रेलवे ने 26 दिसंबर से किराए में बढ़ोतरी का फैसला किया है. जनरल क्लास में 215 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर 1 पैसा प्रति किलोमीटर अतिरिक्त लगेगा, जबकि मेल या एक्सप्रेस की स्लीपर और सभी एसी क्लास में 2 पैसे प्रति किलोमीटर इजाफा होगा. उदाहरण के लिए, 500 किमी की स्लीपर यात्रा पर करीब 10 रुपये ज्यादा देने होंगे. रेलवे अतिरिक्‍त राजस्‍व से क्‍या करेगा रेल मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक (सूचना एवं प्रसार) दिलीप कुमार ने कहा कि 215 किमी से कम दूरी की जनरल क्लास, सबअर्बन ट्रेनें और मासिक सीजन टिकट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस बढ़ोतरी से रेलवे को करीब 600 करोड़ रुपये अतिरिक्त आएंगे, जो स्टेशनों और ट्रेनों में सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने पर खर्च होंगे. रेलवे का मकसद है कि रोजाना सफर करने वाले यात्रियों और कम व मध्यम आय वाले परिवारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और उनकी यात्रा सस्ती बनी रहे. तय सामान से ज्‍यादा ले जाने पर छह गुना अधिक जुर्माना देना होगा. क्यों करनी पड़ी बढ़ोत्‍तरी रेल मंत्रालय के अनुसार पिछले दस वर्षों में रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है और अब सेवाएं दूर-दराज इलाकों तक पहुंच रही हैं. यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है. इससे कर्मचारियों पर खर्च बढ़कर 1.15 लाख करोड़ रुपये और पेंशन पर खर्च करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का कुल खर्च 2.63 लाख करोड़ रुपये हो गया है. ज्‍यादा लगेज में क्‍या होगी सख्‍ती ट्रेनों में तय लगेज से ज्‍यादा सामान ले जाने पर एक्‍शन की तैयारी की रही है. यहां पर फ्लाइट जैसा एक्‍स्‍ट्रा सामान ले जाने पर ज्‍यादा चार्ज देना पड़ेगा. रेलवे के अनुसार अभी ट्रेन में तय वजन से ज्‍यादा सामान ले जाने पर आपके सहयात्री को परेशानी हो सकती है. इसी को ध्‍यान में रखते हुए ऐसे यात्रियों पर एक्‍शन लिया जा सकता है, जो तय वजन से ज्‍यादा सामान लेकर सफर कर रहे हैं. इस तरह यह फैसला यात्रियों की सुविधाजनक सफर के लिए लिया जा रहा है. रेल मंत्रालय के एडीजी धर्मेन्‍द्र तिवारी के अनुसार रेलवे के अनुसार एक्‍स्‍ट्रा चार्ज को लेकर कोई नया आदेश नहीं है, पुराना आदेश ही है. इसी को ओर प्रभावी बनाया जा रहा है. हर क्‍लास के लिए क्‍या है नियम ट्रेनों हर क्‍लास के लिए अलग वजह का नियम है, जनरल, स्‍लीपर और एसी के लिए वजन तय है. अगर आप ऐसी फर्स्‍ट क्‍लास से सफर कर रहे हैं तो एक यात्री 70 किलो तक वजह ले जा सकता है. इसके साथ ही 15 किलो अतिरिक्‍त सामान की छूट होती है. इसके अलावा अधिकतम बुकिंग कराकर 65 किलो लगेज पार्सल वैन में ले जा सकता है. इसी तरह सेंकेड ऐसी में 50 किलो के साथ 10 किलो की एक्‍स्‍ट्रा की छूट रहती है और 30 किलो बुक कराकर पार्सल वैन से ले जाया जा सकता है. थर्ड ऐसी या एसी चेयरकार में 40 किलो लगेज के साथ 10 किलो की छूट रहती है. पार्सल वैन में 30 किग्रा. बुकिंग कराकर साथ ले जा सकते हैं. स्‍लीपर क्‍लास के लिए क्‍या है नियम स्‍लीपर क्‍लास में 40 किग्रा. के साथ 10 किलो और लगेज ले जाने की छूट होती है. बुकिंग कराकर अतिरिक्‍त 70 किलो वजन तक ले जा सकते हैं. वहीं सेकेंड क्‍लास में 35 किग्रा. के साथ 10 किग्रा तक ले जा सकते हैं. वहीं बुक कराकर 60 किग्रा. अतिरिक्‍त लगेज पार्सल वैन से ले जा सकते हैं. रेलवे की नई गाइडलाइंस के अनुसार यात्री तय सीमा से अधिक और बिना बुक किया गया सामान ले जाते हुए कोई पकड़ा जाता है तो उसे सामान की बुकिंग का छह गुना भुगतान करना होगा.