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MP में बारिश का कहर: नदी के उफान से ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, युवकों का रेस्क्यू

बैतूल ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरण और रस्सियों का इस्तेमाल कर नदी के बीच करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंचकर तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।  ट्रैक्टर में सवार पांच लोगों में से दो युवक तैरकर बाहर निकल आए, जबकि तीन युवक ट्रैक्टर-ट्रॉली के सहारे नदी के बीच फंसे रह गए। सूचना मिलते ही थाना चोपना से पुलिस टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरणों और रस्सियों का उपयोग कर पुलिस टीम ने अपनी जान जोखिम में डालते हुए करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंच बनाई। साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ग्राम गुवाड़ी निवासी सुरेश उइके, आदित्य उइके, आयुष उइके, पीयूष उइके एवं शर्मा भलावी ने पुलिस को बताया कि वे अपने पिता के सेवानिवृत्त होने पर उनका सामान सारणी से लेकर गांव लौट रहे थे। रात होने के कारण रपटे पर पानी के बहाव का अंदाजा नहीं लगा पाए और हादसे का शिकार हो गए। बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम की वजह से अगस्त महीने के आखिरी दिनों में पूरा मध्यप्रदेश भीगेगा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में ज्यादा असर देखने को मिलेगा। यहां 21 अगस्त से अति भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भारी बारिश हो सकती है। यहां साढ़े 4 इंच तक पानी गिरने का अनुमान है। इसके बाद सिस्टम और स्ट्रॉन्ग होगा। 21 और 22 अगस्त को दक्षिणी और पूर्वी हिस्सा तरबतर हो जाएगा। नदी में ट्रॉली पलटी, चट्टान में फंसे 3 युवक बैतूल के चोपना थाना क्षेत्र में भड़ंगा नदी में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे बटकीडोह-नारायणपुर के बीच भड़ंगा नदी के रपटे पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी के तेज बहाव में पलट गई। ट्रॉली पर सवार 5 युवकों में से 2 तैरकर बाहर निकल आए, जबकि 3 युवक नदी के बीच चट्टान पर फंस गए। सूचना मिलते ही चोपना टीआई नरेंद्र सिंह परिहार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू कराया। ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरण और रस्सियों का इस्तेमाल कर नदी के बीच करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंचकर तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 

मध्य प्रदेश में बारिश का असमान बंटवारा: इंदौर संभाग में सूखा, ग्वालियर-जबलपुर में राहत

इंदौर   मध्य प्रदेश के किस जिले में अब तक सबसे ज्यादा बारिश हुई है और कहां पर सबसे कम? मानसूनी सीजन को करीब ढाई महीना बीतने को है। मध्यप्रदेश में अब तक औसत 29.3 इंच बारिश हो चुकी है, जो कोटे की 79 प्रतिशत है। ग्वालियर समेत 10 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है, जबकि इंदौर संभाग के 8 में से 6 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। आइए इस रिपोर्ट में देखते हैं इस मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश के किस जिले में कितना पानी गिरा है…. कई जिले बाढ़ की चपेट में दरअसल, जब मध्य प्रदेश में मानसून ने दस्तक दी थी, तो प्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में खूब बारिश हुई. इस दौरान  छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में भयंकर बाढ़ आ गई.  इन जिलों में बारिश का कोटा पूरा ग्वालियर-चंबल के जिलों में भी इस बार खूब बारिश हुई है. ग्वालियर-चंबल संभाग के 8 में से 6 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया. मौसम विभाग के मुताबिक,   ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है. मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के 10 जिले- ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। इनमें से कुछ जिले ऐसे भी हैं, जहां आंकड़ा डेढ़ सौ प्रतिशत तक पहुंच गया है। हालांकि, अगस्त का पहला पखवाड़ा सूखा ही बीत रहा है। कुछ जिलों को छोड़ दें तो प्रदेश के बाकी हिस्से में तेज बारिश नहीं हुई है। दूसरे पखवाड़े में ही तेज बारिश होने के आसार है। बता दें कि प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 29.3 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 22.5 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 6.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मौसम विभाग ने अबकी बार सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। इन जिलों में सूखे जैसे हालात वैसे तो इस मानसूनी सीजन में प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश हुई है. लेकिन कुछ जिले ऐसे भी हैं, जहां पानी का अकाल है. इंदौर संभाग के 8 में से 6 जिलों में सूखे जैसी स्थिति देखने को मिल रही है. वहीं, उज्जैन संभाग भी पिछड़ा हुआ है.  इंदौर और उज्जैन संभाग में मानसून की एक्टिविटी कम देखने को मिलीं. इसलिए इन दोनों संभागों के 15 में से 9 जिलों में अभी तक सामान्य के आधी भी बारिश नहीं हुई है. जिसके कारण यहां सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न है. गुना में सबसे ज्याता बारिश इस मानसूनी सीजन में अब तक सबसे ज्यादा बारिश गुना जिले में हुई है. यहां करीब 46 इंच पानी गिर चुका है. वहीं,  मंडला में 44.1 इंच, टीकमगढ़ में करीब 44.2 इंच, निवाड़ी में 45.2 इंच और अशोकनगर में 42.1 इंच पानी गिर चुका है. इन जिलों में 30 इंज से अधिक बारिश वहीं, नर्मदापुरम, सिंगरौली, सीधी, रीवा, पन्ना, सागर, ग्वालियर, डिंडौरी, बालाघाट, नरसिंहपुर, राजगढ़ और विदिशा में इस मानसूनी सीजन में 30 इंच से अधिक पानी गिर चुका है. इन जिलों 20 से 30 इंच तक हुई बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, भोपाल, सीहोर, अलीराजपुर, झाबुआ, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, दतिया, दमोह, रतलाम, नीमच, भिंड, मुरैना, हरदा, बैतूल, शहडोल और अनूपपुर जिलों में इस मानसूनी सीजन में अब तक औसत 20 से 30 इंच के बीच पानी गिरा है. इन जिलों में सबसे कम पानी इंदौर, धार, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर और आगर-मालवा जिलों में इस सीजन में सबसे कम बारिश हुई है. इन जिलों में औसतन बारिश 10 से 19 इंच के बीच हुई है. 

13 अगस्त से नया मौसम तंत्र, इंदौर-उज्जैन में धूप और पूर्वी-उत्तरी जिलों में बारिश का अनुमान

भोपाल मध्यप्रदेश में रक्षाबंधन के दिन मौसम के दो रंग देखने को मिलेंगे। इंदौर और उज्जैन संभाग के 15 में से 13 जिलों में तेज धूप खिलेगी। वहीं, पूर्वी और उत्तरी हिस्से के 9 जिलों में तेज बारिश हो सकती है। भोपाल, ग्वालियर-जबलपुर में भी हल्के बादल छाए रह सकते है।  मौसम विभाग ने शनिवार को श्योपुर, मुरैना, पन्ना, कटनी, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट में तेज बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर, इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, धार, बड़वानी, अलीराजपुर और झाबुआ में मौसम साफ रहेगा। बाकी जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिश का यलो अलर्ट है। मंडला-सीधी में सवा इंच से ज्यादा पानी गिरा प्रदेश में शुक्रवार को मौसम ने फिर करवट बदली और हल्की बारिश का दौर रहा। मंडला और सीधी में सवा इंच बारिश हुई। छतरपुर के नौगांव में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा। भोपाल में बादल छाए रहे। वहीं, बैतूल, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, रीवा, सतना, उमरिया, डिंडौरी, मऊगंज में हल्की बारिश हुई। एमपी में अब तक 28.8 इंच बारिश मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 28.8 इंच बारिश हो चुकी है, जो कुल बारिश का 78 प्रतिशत है। जून-जुलाई में स्ट्रॉन्ग सिस्टम की वजह से अब तक 34 प्रतिशत बारिश ज्यादा हो चुकी है। इसमें भी पूर्वी हिस्सा जैसे- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग ठीक है। इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। इंदौर संभाग के 8 में से 5 जिले ऐसे हैं, जहां 13 इंच से कम पानी गिरा है। सिर्फ अलीराजपुर और झाबुआ में ही 20 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। दूसरी ओर, ग्वालियर में सबसे ज्यादा 35 इंच बारिश हो चुकी है। यहां कुल बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। जबलपुर और भोपाल की तस्वीर भी बेहतर है। 13 अगस्त से नया सिस्टम सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, शुक्रवार को देश में दो टर्फ की एक्टिविटी रही, जो मध्यप्रदेश से काफी दूर है। शनिवार को कुछ जिलों में बारिश होने का अनुमान है। वहीं, 13 अगस्त के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) के एक्टिव होने का अनुमान है। इससे प्रदेश में बारिश का दौर फिर से शुरू हो सकता है। दो महीने में गिरा 28 इंच, अगस्त में न के बराबर मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से 31 जुलाई तक प्रदेश में औसत 28 इंच बारिश हो गई, लेकिन 1 से 7 अगस्त के बीच सिर्फ 0.8 इंच पानी ही गिरा। दूसरे सप्ताह में ही तेज बारिश के आसार वैज्ञानिकों के अनुसार, अगस्त के दूसरे सप्ताह में तेज बारिश का दौर शुरू होगा, जो आखिरी तक चलता रहेगा। ऐसे में बारिश का कोटा अगस्त में ही पूरा हो जाएगा। हालांकि, अब तक ग्वालियर समेत 9 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है, लेकिन इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों की तस्वीर बेहतर नहीं है। पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में औसत से 38% और पश्चिमी हिस्से यानी, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में 39% बारिश अधिक हुई है। जुलाई में बने थे बाढ़ के हालात जुलाई में प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने थे। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। आखिरी दिनों में रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया था। खेत-मंदिर और पुल डूब गए थे।वहीं, डैम ओवरफ्लो हो गए थे।

देश की राजधानी में बारिश का कहर: कई इलाके डूबे, उड़ानों में देरी, सांसदों के फ्लैट्स के पास भी भरा पानी

नईदिल्ली  आज रक्षाबंधन है और दिल्ली-एनसीआर में सुबह हुई भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. बारिश ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के कई इलाकों को जलमग्न कर दिया. सड़कों पर घुटनों तक पानी आ गया. जगह-जगह ट्रैफिक जाम के हालात बन गए. उड़ान संचालन पर भी असर पड़ा है. बड़ी संख्या में उड़ानें लेट भी लेट हुई हैं. दिल्ली में जलभराव से हालात खराब हैं. बीडी मार्ग पर सांसदों के फ्लैट हैं. यहां नर्मदा अपार्टमेंट के ठीक सामने जलभराव देखा जा रहा है. दिल्ली में तेज बारिश होने पर इस हिस्से में जलभराव आम बात बन गई है. जब पानी का स्तर बढ़ता है तो निकासी के लिए नालियां खोली जाती हैं. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली-एनसीआर में रेड अलर्ट जारी किया है. दिनभर मध्यम से भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है. खासकर पूर्वी और सेंट्रल दिल्ली में तेज बारिश होने की संभावना है. दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने यात्रियों को उड़ानों की जानकारी के लिए अपनी-अपनी एयरलाइन से संपर्क करने की सलाह दी. एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा कि मौसम प्रतिकूल है. हालांकि परिचालन इस समय सामान्य है. इंडिगो और स्पाइसजेट ने यात्रियों को शहर में ट्रैफिक जाम को लेकर अलर्ट रहने के लिए कहा. दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने स्पष्ट किया है कि बारिश के कारण IGI एयरपोर्ट पर कोई फ्लाइट डायवर्जन नहीं हुआ है. एयरपोर्ट और यात्रियों के लिए एडवाइजरी एक यात्री ने आजतक को बताया, मेरी फ्लाइट त्रिवेंद्रम से रात 11:45 बजे लैंड हुई, लेकिन घर (मयूर विहार) पहुंचने में तीन घंटे से ज्यादा लग गए. जबकि दूरी सिर्फ 25 किमी है. सराय काले खा के पास एक घंटे का जाम था और कम से कम चार जगह पानी भरा था. सुबह 5:30 से 8:30 बजे के बीच कितनी बारिश हुई? – सफदरजंग: 49.6 मिमी – पूसा: 47.0 मिमी – मयूर विहार: 42.0 मिमी – प्रगति मैदान: 40.6 मिमी कई इलाकों में पानी भरने से मुश्किलें आईटीओ, मुनीरका मेट्रो स्टेशन गेट नंबर-1, मोती बाग, एपीएस कॉलोनी, अकबर रोड, साउथ एवेन्यू, रंजीत सिंह फ्लाईओवर, मंडी हाउस, मिंटो रोड, संगम विहार, वसंत कुंज, आरके पुरम, कनॉट प्लेस, पंचकुइयां मार्ग समेत कई जगहों पर जलभराव की स्थिति है. यमुना का जलस्तर सुबह 8 बजे 204.4 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 204.5 मीटर से 10 सेमी कम है. खतरे का स्तर 205.33 मीटर है. यानी नदी फिलहाल बाढ़ स्तर से करीब 93 सेमी नीचे बह रही है. गाजियाबाद में भी बारिश का असर सुबह से हो रही बारिश के कारण एनएच-9 विजय नगर अंडरपास और रेलवे स्टेशन जाने वाली मुख्य सड़क पर पानी भर गया. वाहन पानी में से गुजरते नजर आए. नोएडा में घुटनों तक पानी नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई सड़कें जलभराव की चपेट में हैं. सूरजपुर कस्बे में घुटनों तक पानी भर गया. जलभराव से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है और प्राधिकरण के दावों की पोल खुल गई. मौसम का पूर्वानुमान IMD ने बताया कि अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. दिल्ली में 12 अगस्त तक गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. हिमाचल में भी बारिश का अलर्ट पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का पूर्वानुमान है. 3 जिलों के लिए 11 और 12 अगस्त को ऑरेंज अलर्ट और बाकी के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. 20 जून से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 202 मौतें हो चुकी हैं. अगस्त में यहां सामान्य से 35% ज्यादा बारिश हुई है, जबकि शिमला और मंडी जिलों में यह औसत से 65% तक ज्यादा है.    

मध्यप्रदेश में झमाझम बारिश का दौर, कई जिलों में रिकॉर्ड टूटा; ग्वालियर-मुरैना में अलर्ट जारी

 भोपाल  मध्यप्रदेश में इस समय मानसून की सक्रियता कम हो गई है। फिलहाल प्रदेश में कोई प्रभावी मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं है, जिससे ज्यादातर जिलों में तेज बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि, लोकल वेदर सिस्टम के कारण कुछ इलाकों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। खासकर ग्वालियर-चंबल संभाग में अगले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश की संभावना जताई जा रही है। मध्यप्रदेश में इस मानसूनी सीजन में 28.6 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक सामान्य से 47 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर चुका है। यह कोटे का 77% है। पूर्वी हिस्से में बादल जमकर बरसे हैं। हालांकि, अगले 4 दिन तक प्रदेश में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव नहीं है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि ग्वालियर, दतिया, भिंड और मुरैना जिलों में अगले 24 घंटे में भारी बारिश (Heavy Rainfall Alert) हो सकती है। वहीं रीवा और सतना में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात को तेज वर्षा के आसार हैं। अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर जैसे शहरों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की फुहारें पड़ सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय देश के उत्तरी हिस्सों में मानसून की प्रमुख प्रणाली सक्रिय है, जिससे मध्यप्रदेश में इसका असर सीमित हो गया है। इस कारण प्रदेश के कई जिलों में बारिश की तीव्रता कम है। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त के दूसरे सप्ताह में तेज बारिश का दौर शुरू होगा, जो आखिरी तक चलेगा। ऐसे में बारिश का कोटा अगस्त में ही पूरा हो जाएगा। हालांकि, अब तक ग्वालियर समेत 9 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है लेकिन इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों की तस्वीर बेहतर नहीं है। मंगलवार को ग्वालियर, मुरैना और भिंड में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। वहीं, भोपाल में सुबह से धूप खिली है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में औसत से 51% और पश्चिमी हिस्से यानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में 43% बारिश अधिक हुई है। सोमवार को दिनभर के दौरान प्रदेश के कुछ शहरों में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई। दतिया में 14 मिमी, खजुराहो में 5 मिमी, नौगांव में 3 मिमी, इंदौर में 1 मिमी, उज्जैन में 0.4 मिमी, रीवा और सतना में 1-1 मिमी और सिवनी में 0.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। कम बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में भी हल्की वृद्धि देखी जा रही है। प्रदेश के प्रमुख शहरों में तापमान कुछ इस प्रकार रहा-     भोपाल: अधिकतम 31.0°C, न्यूनतम 24.2°C     इंदौर: अधिकतम 30.2°C, न्यूनतम 21.7°C     ग्वालियर: अधिकतम 31.2°C, न्यूनतम 26.4°C     जबलपुर: अधिकतम 32.8°C, न्यूनतम 24.4°C अगले 24 घंटे विशेष रूप से ग्वालियर, दतिया, भिंड और मुरैना के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन जिलों के नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जिन इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां प्रशासन ने भी निगरानी बढ़ा दी है। एमपी में बाढ़ से 2 माह में 275 मौतें पूरे मध्यप्रदेश की बात करें तो बाढ़ के दौरान हुए हादसों में 275 लोगों की जान जा चुकी है। मानसून की आमद के बाद से जून और जुलाई के ये आंकड़े सरकार ने खुद विधानसभा में बताए हैं। 1657 पशुओं की भी मौत हुई है। बारिश के चलते ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (RRDA) की 254 से अधिक सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। 293 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए जबकि 3 हजार 687 मकानों में आंशिक नुकसान हुआ है। कुल 3980 मकानों को नुकसान पहुंचा है। पिछले सप्ताह बने थे बाढ़ के हालात पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने थे। खासकर पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा नदी ने विकराल रूप ले लिया था। खेत-मंदिर और पुल डूब गए थे। वहीं, डैम ओवरफ्लो हो गए थे। उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के उफान पर आने से चित्रकूट में कई दुकानों में पानी भर गया था। गुना में सबसे ज्यादा 45 इंच पानी गिरा इस बार सबसे ज्यादा पानी गुना में गिरा है। यहां 45.8 इंच बारिश हो चुकी है। निवाड़ी में 45.1 इंच, मंडला-टीकमगढ़ में 44 इंच और अशोकनगर में 42 इंच के करीब बारिश हो चुकी है।  

मध्यप्रदेश में फिर बरसेगा बादल: 9 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, राजधानी में भी हल्की बूंदाबांदी के संकेत

भोपाल  मध्य प्रदेश में 6 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने वाला है। खास करके अगले 48 घंटों के लिए ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यहां अगले 24 घंटे में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। भोपाल-इंदौर समेत एक दर्जन जिलों में बूंदाबांदी का दौर जारी रहेगा। 1 जून से 2 अगस्त तक औसत से 52% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी में औसत से 56% अधिक और पश्चिमी में औसत से 49% अधिक वर्षा हुई है।अब तक औसत 30 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। आज रविवार को इन जिलों में बारिश का अलर्ट     ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में भारी बारिश     अशोकनगर, गुना,रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सागर, दमोह, पन्ना में हल्की से मध्यम हालांकि, दो दिन तक उत्तरी हिस्से में तेज बारिश हो सकती है। इससे पहले टीकमगढ़, गुना, नर्मदापुरम, छतरपुर के नौगांव, रीवा, सागर, सतना, सीधी, उमरिया समेत कई जिलों में हल्की बारिश का दौर चला। टीकमगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिर गया। पिछले सप्ताह बने थे बाढ़ के हालात पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने थे। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया। खेत-मंदिर और पुल डूब गए। दो दिन से बारिश थमी रही, लेकिन नर्मदा नदी उफान पर है। वहीं, डैम ओवरफ्लो है। इनके गेट खोले गए। 1 जून से 1 अगस्त तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में 1 जून से 2 अगस्त तक दीर्घावधि औसत से 52% अधिक वर्षा हुई है। इसमें पूर्वी मध्य प्रदेशऔसत से 56% अधिक और पश्चिमी मध्य प्रदेश औसत से 49% अधिक वर्षा हुई है।अब तक औसत 30 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है।प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है।     प्रदेश के ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। यहां सामान्य से 50% तक ज्यादा पानी गिर चुका है।इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, भोपाल, बुरहानपुर, जबलपुर और आगर-मालवा अभी भी कम पानी गिरा है। इंदौर और उज्जैन संभाग में कम ही वर्षा हुई है। एक्टिव सिस्टम और साइक्लोनिक दबाव वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन प्रदेश के उत्तर हिस्से को प्रभावित कर रही है। नतीजा ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में अगले दो दिन तक बारिश रुकने वाली नहीं है। (MP Weather) भोपाल में फिलहाल राहत, लेकिन जल्द एक्टिव होगा मानसून राजधानी में बारिश थमी जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि नए सिस्टम के असर से यहां भी बारिश लौटेगी। अरेरा हिल्स और कोलार में पुराने शहर के मुकाबले चार इंच ज्यादा पानी गिरा है। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसत से 52% ज्यादा बारिश हो चुकी है। भोपाल में सीजन का कोटा आधे से ज्यादा पूरा हो चुका है अब तक 700.1 मिमी बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य 548.4 मिमी होती है। (MP Weather Update)

3-4 अगस्त को एमपी में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बारिश का पूर्वानुमान

भोपाल  मध्यप्रदेश में बीते एक सप्ताह से हो रही झमाझम बारिश के बाद शुक्रवार को लोगों ने राहत की सांस ली। राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में दोपहर के समय सूरज धूप खिली। लोगों को लंबे समय से जारी वर्षा से कुछ राहत मिली है। शनिवार को भी ऐसा ही मौसम रहेगा, लेकिन मौसम विभाग की माने तो 3 और 4 अगस्त को मध्यप्रदेश में एक बार फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विज्ञान के मुताबिक, मानसून द्रोणिका फिलहाल एमपी के सीधी जिले से होकर गुजर रही है। 24 घंटे बाद सिस्टम का असर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में देखने को मिल सकता है। ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में तेज बारिश(Heavy Rain Alert) हो सकती है। लोकल वेदर सिस्टम की वजह से कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश गिर सकती हैं। इस दौरान अधिकांश जिलों में धूप और बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, जिससे मौसम सुहावना बना रहेगा। पिछले 24 घंटों में सीधी, नरसिंहपुर और मलाजखंड में एक से दो सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहा। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, अभी साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ प्रदेश के ऊपर है। 24 घंटे बाद सिस्टम का असर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में देखने को मिल सकता है। ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में तेज बारिश हो सकती है। इससे पहले शुक्रवार को भी भारी बारिश का दौर थमा रहा। ग्वालियर, गुना, श्योपुर, दमोह, मंडला और उमरिया में हल्की बारिश हुई। भिंड के बाढ़ग्रस्त गांव से बीमार बुजुर्ग का रेस्क्यू बारिश के कारण भिंड जिले में शुक्रवार को भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही। सिंध और चंबल नदियां खतरे के निशान से 6 से 7 मीटर ऊपर बही। जिससे कई गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट गया। शुक्रवार को बाढ़ग्रस्त मुसावली गांव से एक बीमार बुजुर्ग की सूचना मिलते ही NDRF की टीम ने त्वरित कार्रवाई की। टीम ने बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकालकर चिकित्सालय पहुंचाया। बचाव कार्य के दौरान भारौली थाना प्रभारी गिरीश शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने नागरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में NDRF की टीमें तैनात कर दी हैं। टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी रख रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल बचाव कार्य कर रही हैं। 3 अगस्त को इन जिलों में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, 3 अगस्त को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, निवाड़ी और टीकमगड़ में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। यहां अगले 24 घंटे में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं बाकी जिलों में भी गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। 4 अगस्त को अति भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार 4 अगस्त को ग्वालियर, दतिया और मुरैना में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट(Heavy Rain Alert) है जारी किया गया है। यहां अगले 24 घंटे में साढ़े 8 इंच तक पानी गिर सकता है। श्योपुर, निवाड़ी, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर और छतरपुर में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं बाकी बचे जिलों में भी गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इंदौर: मानसून के 2 माह में बारिश 32% कम मानसून के दो माह (जून-जुलाई) में इंदौर में 32 फीसदी कम बारिश हुई है। जुलाई में शुरू के दो सप्ताह में लोकल सिस्टम सरि य नहीं होने से बादल कम बरसे। जिले में दो माह में 11 इंच बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि तक यह आंकड़ा 16 इंच था। 1 जून से 30 सितंबर तक जिले में बारिश का औसत 38 इंच है, लेकिन दो माह में औसत की 29% बारिश ही हुई। अब दो माह में 62% पानी बरसने पर ही औसत पूरा होगा। मौसम विभाग भोपाल की वैज्ञानिक डॉ. दिव्या सुरेंद्रन ने बताया, अगस्त में बारिश के साथ दिन-रात के तापमान में जुलाई की अपेक्षा कमी रहेगी। ग्वालियरः बारिश में 18 लोगों की मौत, 800 कच्चे व पुराने घर गिरे ग्वालियर मानसून की बारिश से इस बार शहर सहित जिले में जनजीवन प्रभावित हो गया। मानसून जनजीवन पर भारी पड़ा है। आसमानी बिजली व कच्चे पक्के घर, पानी में डूबने से इस बार 18 लोगों ने अपनी जान गंवाई है, वहीं 30 पशुओं की भी मौत हुई और 800 कच्चे व पक्के घर ढह गए। प्रशासन ने बारिश से हुई जनहानि व नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। शंकरपुर में तेज आंधी की वजह से टीन शेड उड़ गया। इसकी चपेट में आकर चार लोगों की मौत हो गई। तीन लोगों की मौत मकान ढह जाने से हुई है। पिछले सप्ताह कुछ जिलों में बाढ़ के हालात बने पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया। खेत-मंदिर और पुल डूब गए। दो दिन से बारिश थमी रही, लेकिन नर्मदा नदी उफान पर है। वहीं, डैम ओवरफ्लो है। इनके गेट खोले गए।

बारिश का सिलसिला जारी रहेगा! अगले दो महीने तक कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में इस साल मॉनसून में अब तक अच्छी बारिश हुई है। गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के तमाम इलाकों में इस साल अच्छी बारिश हुई है। कई मोहल्ले और सोसायटियों में तो लगातार पानी भरने की शिकायतें आती रहती हैं। इस बीच मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त और सितंबर में भी सामान्य से अधिक बारिश होगी। इसका अर्थ है कि दिल्ली-एनसीआर, यूपी, हरियाणा समेत समूचे उत्तर भारत को अधिक बारिश के लिए पहले से तैयारी कर लेनी चाहिए। मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त में सामान्य बारिश रहेगी। इसके अलावा सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा का अनुमान है। इस तरह लॉन्च पीरियड एवरेज को देखें तो दो महीने में 106 फीसदी बारिश होगी, जो सामान्य से 6 फीसदी अधिक है। हालांकि ऐसा देश के सभी हिस्सों में नहीं होगा। इस साल उत्तर पश्चिम भारत यानी यूपी, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड में अच्छी बारिश होगी। इसके अलावा पूर्वी भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत के ज्यादातर राज्यों में बारिश सामान्य से कम रहेगी। महत्वपूर्ण तथ्य है कि इस साल बिहार, बंगाल और ओडिशा में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। आमतौर पर उत्तर बिहार में अच्छी बारिश होती रही है। इस बीच मौसम विभाग ने ब्लॉक स्तर पर भी बारिश का अनुमान जताने की व्यवस्था की है। पूरे देश के 7,200 ब्लॉकों का मौसम कैसा रहेगा, कब बारिश होगी और कब आसमान साफ रहेगा, यह पूरी जानकारी दी जाएगी। इसकी व्यवस्था ब्लॉक-वाइज रेनफॉल मॉनिटरिंग स्कीम (BRMS) के माध्यम से की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि इसके जरिए रियलटाइम जानकारी मिलेगी। अब तक मौसम विभाग की ओर से जिलावार जानकारी ही दी जाती थी। माना जा रहा है कि अब मौसम विभाग का अनुमान अधिक सटीक हो सकेगा। अब ब्लॉक स्तर पर मौसम का आएगा अनुमान आमतौर पर जिला स्तर के अनुमान में किसी एक हिस्से में बारिश होती थी और कहीं नहीं होती थी। इसे लोग मौसम विभाग के अनुमान से जोड़ते थे कि वह गलत साबित हुआ। अब ब्लॉक लेवल पर अनुमान दिया जाएगा। मौसम विभाग ने जून और जुलाई की मॉनसून बारिश का भी आंकड़ा दिया है। मौसम विभाग का कहना है कि जून और जुलाई में ज्यादातर राज्यों में सरप्लस बारिश हुई है, लेकिन मध्य, पश्चिम और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अनुमान से कम बारिश हुई है।

मौसम अपडेट: एमपी में भारी बारिश से राहत, कुछ इलाकों में हल्की फुहारें; रायसेन अभी भी प्रभावित

भोपाल  मध्यप्रदेश में इस मानसूनी सीजन में 28 इंच बारिश हो चुकी है, जो कोटे की 74 प्रतिशत है। पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। इस वजह से बाढ़ के हालात भी बन गए। हालांकि, अब भारी बारिश का दौर थम गया है।  इससे पहले गुरुवार को 15 से अधिक जिलों में हल्की बारिश का दौर जारी रहा। इनमें भोपाल, बैतूल, दतिया, गुना, ग्वालियर, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, दमोह, जबलपुर, मंडला, रीवा, बालाघाट, शाजापुर, सीहोर, देवास शामिल हैं।कहीं भी अति भारी या भारी बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में हल्की बारिश का दौर रह सकता है। कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। पूर्वी हिस्से में ज्यादा गिरा पानी मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी हिस्से में अब तक 62 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 55 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर चुका है। रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया, खेत-मंदिर और पुल डूब गए     पिछले दो से तीन दिन तक रायसेन जिले में अति भारी बारिश का दौर रहा। गुरुवार को बारिश थमी, लेकिन हालात गंभीर नजर आए। बेतवा नदी ने विशाल रूप ले लिया। आसपास के खेत, मंदिर और पुल डूब गए। हर तरफ सिर्फ पानी ही नजर आया।     श्योपुर में पार्वती नदी की बाढ़ में बहे चाचा-भतीजे के शव खेत में एक-दूसरे से लिपटे हुए मिले। शिवपुरी में माधव टाइगर रिजर्व की सांख्य सागर झील ओवरफ्लो हो गई। सागर के देवरीकलां में संजय नगर स्थित रामघाट नाले में एक महिला बह गई। एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम पहुंची, जो सर्चिंग करती रही। वंदना साहू मंगलवार को सुबह 9 बजे नाग पंचमी पर रामघाट मंदिर में पूजन करके घर लौट रही थी। पुल पर से गुजरने के दौरान पानी के तेज बहाव में बह गई थी।     खंडवा में इंदिरा सागर बांध के 12 गेटों से पानी छोड़ा गया। इनमें 8 गेट 4 मीटर और 4 गेट साढ़े तीन मीटर तक खोले गए। पावर स्टेशन पर पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन किया जा रहा है। इसके चलते नर्मदा में बाढ़ के हालात हैं।     खंडवा के मोरटक्का में प्राचीन जाबरेश्वर महादेव मंदिर में पानी पहुंच गया। लोगों का कहना है कि बरसों से देखते आ रहे हैं कि नर्मदा मैया हर साल जबरेश्वर महादेव का जलाभिषेक करने आती हैं। अभी भारी बारिश का अलर्ट नहीं सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि गुरुवार को कुछ जिलों में बारिश का दौर रहा, लेकिन अगले चार दिन तक कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। सिस्टम एक्टिव होने के बाद फिर से तेज बारिश का दौर चलेगा।

कलेक्टर श्रीमती चौहान ने सभी एसडीएम को 24 घंटे टीमों को सतर्क रखने के दिए निर्देश

डबरा के नंदू का डेरा से 50 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थलों पर पहुँचाया अतिवृष्टि से हुए जल भराव वाली बसाहटों के लिये पर्याप्त राहत शिविर बनाए कलेक्टर श्रीमती चौहान ने सभी एसडीएम को 24 घंटे टीमों को सतर्क रखने के दिए निर्देश बड़ेरा गाँव के नजदीक स्टॉप डैम पर पैर फिसलने से पानी में बहे प्रीतम की तलाश में जुटी टीम ग्राम खेड़ीरायमल में भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी डबरा  ग्वालियर जिले में अतिवृष्टि से हुए जल भराव से प्रभावित गाँवों के लोगों के लिये एहतियात बतौर पर्याप्त राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। साथ ही जहाँ पर अत्यधिक जल भराव हुआ है वहाँ के लोगों को जिला प्रशासन की टीमों द्वारा एसडीआरएफ की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने जिले के सभी एसडीएम को जल प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल नजदीकी राहत शिविर में आश्रय दिलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल व प्राथमिक चिकित्सा के पुख्ता इंतजाम रखने के भी निर्देश दिए। शनिवार को डबरा विकासखंड के ग्राम नंदू का डेरा में अत्यधिक जल भराव होने की सूचना मिलने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की कार्रवाई की गई। ग्राम खेड़ीरायमल में भी रेस्क्यू ऑपरेशन कर लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। एसडीएम दिव्यांशु चौधरी ने बताया कि नंदू का डेरा से एसडीआरएफ की मदद से 50 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। इनमें से 23 लोगों को डबरा के कम्युनिटी हॉल व रैन बसेरा में बनाए गए राहत शिविरों में पहुँचाया गया है। ग्राम खेड़ीरायमल के लोगों को एसडीआरएफ की मदद से रेस्क्यू कर ग्राम पंचायत खेड़ी रायमल के पंचायत भवन में बनाए गए राहत शिविर में पहुँचाया गया है। जिले के मुरार विकासखंड के अंतर्गत ग्राम टिहौली के पीछे स्थित बड़ेरा निवासी 55 वर्षीय प्रीतम सिंह कुशवाह के बैसली नदी पर बने रपटे को पार करते समय पैर फिसलने से बहने की सूचना मिलने पर एसडीएम ग्वालियर ग्रामीण सूर्यकांत त्रिपाठी बचाव टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुँचे। एसडीआरएफ की टीम प्रीतम कुशवाह को खोजने में लगी है। एसडीएम त्रिपाठी ने बताया कि मदद के लिये एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया है। उन्होंने बताया कि मुरार विकासखंड के अंतर्गत हस्तिनापुर व बेहट में विशेष राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। अन्य स्थलों पर भी एहतियात बतौर राहत शिविर स्थल चिन्हित कर लिए गए हैं। एसडीएम भितरवार संजीव जैन ने बताया कि भितरवार क्षेत्र में लगातार हो रही वर्षा को ध्यान में रखकर लगातार सतर्कता बरती जा रही है। निचले क्षेत्रों में स्थित जिन पुल-पुलियों पर पानी बढ़ा है उनको बैरीकेट्स लगाकर आवागमन के लिये बंद कर दिया गया है। छीमक–भितरवार मार्ग व देवरा – भानगढ़ पुल पर पानी बढ़ने से आवागमन के लिये बंद करा दिया गया है। इसी तरह क्षेत्र के अन्य पुल-पुलियों पर भी लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। निचले क्षेत्र के गाँवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क कर दिया गया है। जैन ने बताया कि एहतियात बतौर भितरवार नगर में पाँच राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। जिले की हर ग्राम पंचायत के अंतर्गत पंचायत भवन व स्कूलों को जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों के लिये चिन्हित कर आवश्यक इंतजाम कराए गए हैं।