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मध्य प्रदेश में नई सड़कें बनाने का बड़ा अभियान, 50 अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर तैयार

ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने तीन महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। कुल 5.80 किलोमीटर लंबाई वाली इन सड़कों पर करीब 7 करोड़ 17 लाख रुपए की लागत आएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अप्रैल माह से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार ये सड़कें मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही हैं। निर्माण कार्य के दौरान सडक़ों पर मौजूद करीब 50 अतिक्रमणों को चिह्नित कर हटाया जाएगा, जिससे सड़कें चौड़ी और सुरक्षित बन सकें। ये हैं प्रस्तावित तीन सड़कें नयागांव रायरू बायपास से रेडियो रूम तक लंबाई: 0.50 किमी अनुमानित लागत: 104.95 लाख रुपए सिकरवार मार्केट से पुरानी छावनी चौराहा मार्ग (नाला निर्माण सहित) लंबाई: 1.30 किमी अनुमानित लागत: 232.95 लाख रुपए रायरू गांव से बॉडन का पुरा होते हुए जोर वाले बाबा गंगापुर वाया प्यारा सिंह का पुरा तक लंबाई: 4.00 किमी अनुमानित लागत: 362.55 लाख रुपए कुल लंबाई 5.80 किमी और कुल अनुमानित लागत 7.17 करोड़ रुपए है। यातायात और जल निकासी में सुधार इन सड़कों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। व्यापारिक गतिविधियों, स्कूल-कॉलेज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। विशेष रूप से सिकरवार मार्केट से पुरानी छावनी मार्ग पर नाला निर्माण से जल निकासी की समस्या भी दूर होगी। 5.80 किमी लंबाई वाली तीन सड़कों को सात करोड़ से ज्यादा की लागत से बनाया जाएगा। अभी सड़कों को लेकर टेंडर लगाए जा चुके हैं, टेंडर ओपन होते ही अप्रैल से निर्माण कार्य शुरू होगा। – देवेंद्र भदौरिया, कार्यपालन यंत्री पीडब्ल्यूडी  

प्रधानमंत्री मोदी ने दी मंजूरी, मध्य प्रदेश में 80 किमी फोरलेन प्रोजेक्ट शुरू होगा

भोपाल  मोदी कैबिनेट ने मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात दी है। मोदी कैबिनेट की बैठक में बदनावर-पेटलावाद-थंदला-तिमारवानी खंड से 80.45 किलोमीटर लंबे चार लेन के कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी है, जिसकी कुल पूंजी लागत 3,839.42 करोड़ रुपये है। स्वीकृत कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा। इस खंड को अपग्रेड करने से उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज तक सीधी 4-लेन कनेक्टिविटी पूरी हो जाएगी, जिस पर गति 80-100 किमी प्रति घंटा होगी। 50 गांवों से होकर 80 किमी लंबा फोरलेन बदनावर से पेटलावद व्हाया टिमरवानी इंटरचेंज नया फोरलेन 80.45 किमी लंबा है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 3839.42 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। संभावना जताई जा रही है कि अगले दो साल में इस प्रोजेक्ट का काम पूरा होगा। शासन-प्रशासन स्तर पर तैयारियां चल रही है। यह फोरलेन करीब 50 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा। जिनमें बदनावर क्षेत्र के 14 गांव भी शामिल हैं। इस फोरलेन रोड के बनने के बाद यात्रा का समय करीब एक घंटे तक कम होने की उम्मीद है। प्रशासनिक सर्वे पूरा, जल्द अवॉर्ड मिलेगा बदनावर से पेटलावद व्हाया टिमरवानी इंटरचेंज फोरलेन निर्माण में कई जगह सरकारी जमीन के साथ ही निजी जमीन का उपयोग होना है। इसके लिए सभी सरकारी विभागों द्वारा एक ज्वाइंट सर्वे किया गया है।  बदनावर एसडीएम प्रियंका मिमरोट द्वारा सभी विभागों के साथ एक मीटिंग की गई है। इसमें सर्वे पर विस्तृत चर्चा हुई। तहसीलदार सुरेश नागर ने बताया कि सड़क निर्माण के संबंध में सभी शासकीय और निजी जमीन का अधिग्रहण होना है। किस गांव में कितनी जमीन का भू-अर्जन किया जाना है। इसकी रिपोर्ट बनाई गई है। किसानों के खेत, कुएं, पेड़-पौधों के साथ बोरिंग आदि की जानकारी जुटाई गई है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट का प्रकाशन किया जाएगा और दावे-आपत्ति बुलाए जाएंगे। ये होगा फायदा     यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) पर स्थित टिमरवानी इंटरचेंज से सीधे जोड़ेगा।     इस फोरलेन के बनने से यात्रा के समय में लगभग एक घंटे की कमी आने की उम्मीद है।     यह मार्ग धार और झाबुआ जिलों के आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिससे अंतरराज्यीय संपर्क मजबूत होगा और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।     इस कॉरिडोर के अपग्रेडेशन से अप्रैल-2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाले यातायात को संभालने में भी मदद मिलेगी।

रीवा अमहिया मार्ग के चौड़ीकरण के लिए 165 अतिक्रमणकारियों को नोटिस, सिरमौर से अस्पताल चौराहा तक कार्रवाई तय

रीवा रीवा के व्यस्त अमहिया मार्ग को चौड़ा करने की कवायद अब तेज हो गई है। प्रशासन ने सिरमौर चौराहे से अस्पताल चौराहे तक चिन्हित किए गए 165 अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी कर दिया है। इस मार्ग पर कभी भी अतिक्रमण गिराने की कार्यवाही की जा सकती है। इस मार्ग के चोड़ीकरण के लिए पिछले दिनों सड़क की नापजोख की गई थी और नापजोख के बाद अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। संयुक्त टीम द्वारा राजस्व रिकार्डों के अनुसार की गई। इस नाप में कई जगह 5-6 मीटर तक कब्जा पाया गया है।  राजस्व रिकार्ड के मुताबिक सिरमौर चौराहा से लेकर अमहिया नाले तक सड़क की चौड़ाई 18 मीटर दर्ज है। इसके बाद गोस्वामी एक्सरे से लेकर गुरुद्वारा तक इस सड़क की चौड़ाई राजस्व नक्शे में 22 मीटर से लेकर 28 मीटर तक दर्ज है। इसके अलावा गुरुद्वारा से लेकर अस्पताल चौराहा तक सड़क की चौड़ाई 18 मीटर नक्शे में दर्ज है।  अतिक्रमणकारियों को लेकर विवाद सिरमौर चौराहा से अस्पताल चौराहा तक चिन्हित किये गये अतिक्रमणकारियों की भी समझ में आ चुका है कि अंतत: उन्हें खाली करना ही पड़ेगा। लिहाजा अब अतिक्रमण करने वाले एवं अतिक्रमित जमीन में दुकानों एवं मकानों को खरीदने वाले लोग सूची में अपना नाम होने की पुष्टि करने में लगे हुए हैं।  चिन्हित की गई अतिक्रमण की कई दुकानों को खरीदा एवं बेचा जा चुका हे जिससे अब उन दुकानों के मालिकान मालिकान बदल गये हैं लेकिन सूची में उनका नाम नहीं है। ऐसे लोग अब सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए तहसील एवं नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।  नापजोख के दौरान यह बात भी सामने आई कि कई दुकानदारों द्वारा 5-6 मीटर तक सड़क की जमीन पर कब्जा किया गया है। नापजोख के दौरान सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के सामने की सभी दुकाने अतिक्रमण में पाई गई है।  छोटी दरगाह परिसर में निर्मित दुकानों भी 5 फिट बढ़ाकर बनाई गई हैं। इसके अलावा अमहिया मोड़ के पास तिराहे में सर्वाधिक अतिक्रमण पाया गया है। कलेक्टर के आदेश पर सिरमौर चौराहे से अस्पताल चौराहे तक सड़क विस्तारीकरण के लिए अतिक्रमण टूटना तय हो गया है। 

48 सड़क परियोजनाओं में देरी, वन विभाग से मंजूरी मिलने में 117 से 1838 दिन तक का समय लगा

भोपाल  सड़क निर्माण कार्यों में वन विभाग से आवश्यक स्वीकृति समय पर नहीं मिलने के कारण प्रदेश में 48 परियोजनाओं में बड़ी देरी हुई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इसे प्लानिंग समन्वय की कमी का परिणाम बताया गया है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 से जून 2024 के बीच 16 संभागों में समीक्षा के दौरान पाया गया कि वन विभाग से अनुमति, भूमि विवाद, अतिक्रमण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी के कारण 48 कार्यों को पूरा होने में 117 से लेकर 1,838 दिनों तक का अतिरिक्त समय लगा। यानी कई दिनों तक काम लटका रहा। इसमें अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, जिन्होंने बिना अनुमति के ही काम शुरू कर दिया। इससे समय ज्यादा लगने के साथ ही लागत भी बढ़ी।   वन विभाग की पूर्व मंजूरी जरूरी मध्यप्रदेश निर्माण विभाग नियमावली और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत वन भूमि के डायवर्जन के लिए भारत सरकार से पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है। इसके बावजूद कई कार्य आवश्यक मंजूरी सुनिश्चित किए बिना शुरू कर दिए गए। ऑडिट रिपोर्ट में साफ किया कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न केवल समय और लागत में वृद्धि हुई, बल्कि परियोजनाओं की प्रभावशीलता भी प्रभावित हुई। रिपोर्ट के अनुसार भोपाल नगर निगम सम्मेलन (जून 2025) में शासन ने राजस्व और वन विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र के स्पष्ट नहीं होने की बात स्वीकार की और जांच के बाद सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना पूर्व स्वीकृति कार्य शुरू करना प्लानिंग की कमी को दर्शाता है। भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए सख्त अनुपालन जरूरी है। 

लखनऊ और आसपास के जिलों के लिए खुशखबरी: यूपी में 69 किमी फोरलेन सड़क का प्रस्ताव हरी झंडी पर

लखनऊ   उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़े तीन जिलों को राहत देने वाली 69 किलोमीटर लंबी नई फोरलेन सड़क परियोजना को मंजूरी मिल गई है। यह राजमार्ग लखनऊ के चिनहट क्षेत्र से शुरू होकर बाराबंकी, सीतापुर और आगे बहराइच तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की महत्वाकांक्षी एनएच-727 योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से चहलारी घाट (बहराइच) तक निर्बाध संपर्क स्थापित होगा। यातायात दबाव होगा कम यह हाईवे कुर्सी रोड और अयोध्या-लखनऊ किसान पथ से जुड़कर सीतापुर, लखीमपुर और बहराइच की ओर जाने वाले यातायात का दबाव कम करेगा। औद्योगिक क्षेत्र देवा और तहसील फतेहपुर को जोड़ते हुए यह मार्ग सीतापुर के महमूदाबाद और घाघरा तटवर्ती क्षेत्रों तक आवागमन को सुगम बनाएगा। री परियोजना को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। परियोजना का तीन चरणों में होगा निर्माण     देवा से फतेहपुर (20 किमी)     इस खंड के निर्माण पर लगभग 660 करोड़ रुपये खर्च होंगे।     मार्ग सलारपुर, विशुनपुर, इसरौली, बसारा और रसूलपुर पनाह औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरेगा।     करीब 16 गांव सीधे इस फोरलेन से जुड़ेंगे। अब तक 85 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है और 2,000 से अधिक किसानों को मुआवजा प्रक्रिया से जोड़ा गया है।     फतेहपुर से महमूदाबाद (22 किमी)     इस हिस्से के फोरलेन निर्माण से सीतापुर तक सीधा और सुगम मार्ग उपलब्ध होगा।     चिनहट से देवा व कुर्सी मार्ग (27.35 किमी) इस खंड के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण पर 468.48 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह मार्ग किसान पथ से जुड़कर लखनऊ से सीधा संपर्क स्थापित करेगा। बाइपास और पुलों का निर्माण परियोजना में तीन नगरों के लिए बहुउद्देशीय बाइपास शामिल हैं, विशुनपुर में 2 किमी लंबा बाइपास, फतेहपुर में लगभग 3 किमी लंबा बाइपास, देवा में भी बाइपास का निर्माण प्रस्तावित है। इन बाइपास से रेलवे क्रॉसिंग और बाजार क्षेत्रों में लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। साथ ही, कल्याणी नदी और शारदा सहायक नहर पर चार नए पुलों सहित कुल सात पुलों का निर्माण किया जाएगा। ये सभी प्रावधान विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में शामिल हैं। क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा परियोजना पूरी होने के बाद लखनऊ, बाराबंकी और सीतापुर के बीच आवागमन तेज़ और सुविधाजनक होगा। इससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, निवेश आकर्षित होगा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

विकास का डबल इनाम: जबलपुर में 34 नई सड़कें, 1,000 करोड़ की निवेश राशि जारी

जबलपुर   देश शासन के बजट में जबलपुर को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई सौगाते मिली हैं। सड़कों का निर्माण होगा। शहर और ग्रामीण क्षेत्र में 34 सड़कों का निर्माण यातायात को सुगम सुगम बनाने का काम करेगा। जिले में पर्यटन की बेहतर संभावनाएं लंबे समय से हैं। कोई बड़ा पैकेज तो नहीं दिया लेकिन भेड़ाघाट में दूसरे रोपवे का प्रावधान कहीं न कहीं पर्यटकों को आकर्षित करेगा। उद्यानिकी क्षेत्र में जबलपुर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सब्जियों के साथ ही औषधियों की खेती में किसान रुचि ले रहे हैं। ऐसे में उद्यानिकी विद्यालय की स्थापना इस क्षेत्र के लिए मददगार बनेगा। उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों को बड़ी ग्रांट मिलेगी। सरकार दूध के उत्पादन पर फोकस कर रही है। इसके लिए जिले में सहकारी समितियो की संख्या बढ़ाने के लिए भी मदद मिलेगी। कक्षा आठवीं तक के बच्चों को अब ट्रेट्रा पैक में दूध मिलेगा। इसका लाभ जिले के सवा लाख विद्यार्थियों को होगा। जिले में किसानों को सोलर पंप का लाभ मिलेगा। इसी प्रकार जैविक खेती का रकबा बढ़ाने का फायदा भी जबलपुर को मिलेगा।  मिलेगा फायदा 399 करोड़ रुपए से होगा जिले की नहरों का उन्नयन: बरगी बांध की दायीं और बायीं तट नजर जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। हाल में सगड़ा-झपनी में नहर फूटने से बड़े क्षेत्र में सिंचाई प्रभावित हो गई। राज्य सरकार ने दोनों नहरों की मरम्मत व उन्नयन के लिए बजट में 399 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है। बहोरीबंद माइनर उद्वहन सिंचाई योजना के तहत 100 करोड़ रुपये राशि का प्रावधान किया है। किसानों को बिल से राहत: बजट में कृषि तथा सम्बद्ध क्षेत्र के लिए बड़ा बजट दिया गया है। जिले में ढाई लाख किसान हैं। ज्यादा के पास बिजली से चलने वाले पंप हैं। एक लाख किसानों को सोलर पम्प देने की योजना बनाई गई है। इससे उन्हें बिजली बिल से राहत मिलेगी। वर्तमान में दो लाख हेक्टेयर में खेती होती है। किसानों को बिजली बिल के कारण काफी परेशानी बिल के कारण काफी परेशानी होती है। ई-बसों की जल्द मिलेगी सौगात: नगर को शीघ्र ई बसों की सौगात मिलेगी। बजट में इसकी जानकारी दी गई। पहले लॉट में 40 बस की सौगात मिल सकती है। इससे यातायात व्यवस्था सुधरेगी। वर्तमान में नगर में सिटी बस की संख्या घटकर 50 के लगभग रह गई है। हर रूट में यात्रियों को ई बस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। चौंसठयोगिनी मंदिर तक बनेगा रोपवे भेड़ाघाट के चौसठयोगिनी मंदिर में पर्यटकों की पहुंच आसान बनाने के लिए रोपवे का निर्माण होगा। राज्य सरकार ने बजट में रोपवे निर्माण की योजना का संकेत दिया है। चौसठयोगिनी मंदिर तक पहुंचने के लिए 108 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। बड़ी संख्या में पर्यटक, विशेषकर बुजुर्ग और शारीरिक रूप से असमर्थ लोग, सीढ़ियां नहीं चढ़ पाने के कारण मंदिर तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में रोपवे बनने से पर्यटन को नया विस्तार मिलेगा और श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। यह भेड़ाघाट क्षेत्र में बनने वाला दूसरा रोपवे होगा। अभी धुआंधार से न्यू भेड़ाघाट छोर तक रोपवे पहले से संचालित है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक सफर करते हैं। भेड़ाघाट की ऊंचाई पर स्थित चौसठयोगिनी मंदिर परिसर में बाबा वैद्यनाथ महादेव विराजमान है। यह मंदिर करीब 870 वर्ष पुराना बताया जाता है और इसे कलचुरी काल की अद्वितीय कृति माना जाता है। इतिहासकार राजकुमार गुप्ता के अनुसार, मंदिर में सात चक्र भेदन और नाड़ी शोधन से जुड़ी योगनियां गर्भगृह बनने से लगभग 200 वर्ष पहले ही स्थापित हो चुकी थीं। लेबर चौक-अहिंसा चौक के बीच 17 करोड़ से हाईटेक रोड जिले में सड़क नेटवर्क को विस्तार देने के लिए सरकार ने हाइब्रिड एन्युटी मॉडल की घोषणा की है। यह योजना निजी भागीदारी के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण निर्माण और निर्धारित अवधि तक रखरखाव सुनिश्चित करेगी ताकि टिकाऊ और आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार हो सके। इसमें जिले के लिए 382 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से जिले में 34 नई सड़को का निर्माण और उन्नयन किया जाएगा। इनमें शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक की सड़कें शामिल है। इससे यातायात व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें मेहता पेट्रोल पम्प से अहिंसा चौक के बीच तीन किलोमीटर लम्बी सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिस पर करीब 17 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

ग्वालियर एलिवेटेड रोड अपडेट: 28 इमारतें हटेंगी, खाली जमीन का अधिग्रहण तय

ग्वालियर शहर को ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत देने के लिए स्वर्ण रेखा नदी पर बन रही 14.2 किमी लंबी एलिवेटेड रोड परियोजना का काम फिर शुरू तो हुआ है, लेकिन बाधाएं अब भी खत्म नहीं हुईं। प्रथम चरण में लूप निर्माण दोबारा चालू किया गया है लेकिन पड़ाव स्थित गंगादास की शाला के पास 28 भवन और खाली प्लॉट अभी भी अतिक्रमण के रूप में रुकावट बने हुए हैं। करीब 1373.21 करोड़ रुपए की इस परियोजना का पहला चरण ट्रिपल आईटीएम से महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक 6.5 किमी में बन रहा है। जिला प्रशासन, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त कार्रवाई के बाद काम आगे बढ़ा है, लेकिन अतिक्रमण हटे बिना गति मिलना मुश्किल माना जा रहा है। एएसआई अनुमति में फंसा मामला जहां लूप निर्माण में तकनीकी दिक्कतें हैं वहां पीडब्ल्यूडी ने एएसआई को दोबारा पत्र भेजा है, लेकिन पहले अनुमति से इनकार हो चुका है। इससे कानूनी और प्रशासनिक उलझनें बढ़ गई हैं और टाइमलाइन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निरीक्षण ज्यादा प्रगति कम केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, मंत्री प्रद्यु्न सिंह तोमर और प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट कई बार निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में अतिक्रमण और अधूरा निर्माण अब भी जस का तस है। क्या कहते है एक्सपर्ट शासन और संबंधित विभागों को सख्ती के साथ शेष अतिक्रमण हटाकर निर्धारित समय सीमा में ट्रिपल आईटीएम से महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक प्रथम चरण को जल्द चालू करना चाहिए, ताकि आमजन को शीघ्र राहत मिल सके। – ज्ञानवर्धन मिश्रा, सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी सेतु संभाग अतिक्रमण और अधिग्रहण अभि अधूरा करीब 35 करोड़ रुपए का जमीन अधिग्रहण अवार्ड बांटा जा चुका है, फिर भी रानीपुरा, मानपुर, रमटापुरा और पड़ाव क्षेत्र में अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हट पाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वर्ण रेखा में चैंबर तोड़े जाने से गंदा पानी घरों में भर रहा है और धूल-जाम से परेशानी बढ़ रही है। ये है वर्तमान स्थिति लंबाई : 6.5 किमी चौड़ाई : 16 मीटर लूप : 13 लागत : 446.92 करोड़ अब तक खर्च: 308 करोड़ कार्य प्रगति : 75% साढ़े तीन साल में तीन बार बढ़ी समय सीमा कार्य शुरू : 23 जून 2022 पहली डेडलाइन : 17 फरवरी 2025 बढ़ाकर : 31 दिसंबर 2025 फिर : जून 2026 अब नई तारीख : 31 दिसंबर 2026 अब तक करीब 75% काम और 308 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा है। निर्माण का जिम्मा श्रीमंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्रा. लि. के पास है।

बिहार की सड़कों में लगेगा ठेकेदारों का 70% पैसा

पटना. बिहार में सड़क बनाने वाले ठेकेदारों के लिए नियम अब बदलने वाले हैं. पथ निर्माण विभाग एक नई नियमावली तैयार कर रहा है, जिससे काम में पारदर्शिता और जिम्मेदारी दोनों बढ़ेंगी. अभी तक ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन साल 2007 की नियमावली के तहत होता था, लेकिन अब उसकी जगह बिहार संवेदक निबंधन नियमावली 2026 लाने की तैयारी चल रही है. सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि ठेकेदारों की एक नई कैटेगरी बनाई जाएगी. इसे केटेगरी-1 कहा जाएगा. इस केटेगरी में वही कंपनियां शामिल हो सकेंगी जो 50 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा के प्रोजेक्ट में हिस्सा लेना चाहती हैं. अभी ऐसी कोई अलग केटेगरी नहीं थी, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं बन पाती थी. देना होगा जुर्माना नई नियमावली में यह भी साफ-साफ लिखा जाएगा कि अगर कोई कंपनी काम में लापरवाही करती है तो उसे कितना जुर्माना देना होगा. कितने समय तक उसे ब्लैकलिस्ट में रखा जाएगा, इसका भी स्पष्ट प्रावधान रहेगा. अभी तक इन मामलों में साफ नियम नहीं थे. इससे कई बार कार्रवाई में दिक्कत आती थी. विभाग की कोशिश जल्द लागू हो नियमावली विभाग की कोशिश है कि नई वित्तीय वर्ष में यह नियमावली लागू कर दी जाए. इसके साथ ही विभाग अपने मॉडल बिडिंग डॉक्यूमेंट में हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल भी जोड़ने जा रहा है. इस मॉडल को अक्टूबर 2025 में बिहार कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है. इस मॉडल के तहत सड़क परियोजना में कुल लागत का 70 प्रतिशत पैसा कंपनी लगाएगी, जबकि बाकी 30 प्रतिशत सरकार देगी. जरूरत के हिसाब सेटेंडर में खास शर्तें भी जोड़ी जा सकेंगी. विभाग की योजना है कि कुछ चुनिंदा सड़कों पर इस मॉडल से काम शुरू किया जाए.

यमुनानगर में किसान सड़क खराब होने से भड़के, स्टेट हाईवे जाम और सरकार के खिलाफ नारेबाजी

यमुनानगर  यमुनानगर-कुरुक्षेत्र स्टेट हाईवे पर सहारनपुर-पंचकूला नेशनल हाईवे से लेकर दामला तक टूटी सड़क को लेकर भारतीय किसान यूनियन (रतनमान) के बैनर तले किसानों ने आज जाम लगा दिया। किसानों का जाम करीब 30 मिनट से लगा हुआ है। किसान सड़क पर बैठे रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।  इस दौरान किसानों से बात करने के लिए एसडीएम जगाधरी विश्वनाथ व रादौर डीएसपी आशीष चौधरी बात करने के लिए मौके पर पहुंचे। लेकिन किसान उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। अधिकारी सड़क की अस्थायी मरम्मत करने का आश्वासन देने में लगे हैं। जाम लगने से यमुनानगर-कुरुक्षेत्र मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। फिलहाल जाम खोलने को लेकर किसानों व अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है। भाकियू के जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा कि दामला से लेकर यमुनानगर जाते हुए पंचकूल हाईवे तक करीब एक किलोमीटर तक सड़क की हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। सड़क पर इतने बड़े गड्ढे हैं कि उनसे निकलना मुश्किल हो गया है। बारिश होने पर गड्ढों में पानी भरने से परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। रोजाना गड्ढों की वजह से कोई न कोई चोटिल हो रहा है। सड़क को ठीक करने के लिए किसानों नेताओं ने बहुत पहले अधिकारियों को सड़क को ठीक करने का निवेदन किया था। परंतु हर बार अधिकारी अनदेखी करते रहे। जिस पर किसानों ने गत सप्ताह चेतावनी दी थी कि यदि सड़क ठीक नहीं हुई तो वह जाम लगाएंगे। इसलिए आज किसानों ने दामला में सड़क पर जाम लगा दिया। जाम के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इससे पहले पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन ने गत वर्ष 15 अगस्त तक वह सड़क को पूरी तरह से ठीक करने का आश्वासन दिया था, लेकिन मौके पर कुछ नहीं हुआ। मौके पर किसान नेता प्रदीप नगला, दीप राणा नंबरदार, मान सिंह मजाफत, महेंद्र कांबोज, चमरोड़ी, यादविंद्र कांबोज जयपुर, सुभाष शर्मा, सतपाल मानकपुर, जसवीर नंबरदार, स. सुखदेव सिंह, अशोक डांगी, कुलविंद्र सिद्धू, रविंद्रपाल, सुभाष हरतौल समेत अन्य उपस्थित रहे।

देश की खूबसूरत लाल सड़क पर संकट, जानवरों की सुरक्षा में चोरों का हस्तक्षेप, एलईडी साइन बोर्ड और फेंसिंग चोरी

जबलपुर  नेशनल हाईवे-12 वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन के लिए की गई रेड कलर की टेबल टॉप रेड मार्किंग की वजह से चर्चा में है. देश के कई इलाकों से इस तरह के सड़क बनाने के लिए जबलपुर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पास इंक्वारी भी आई है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी का कहना है कि, उनका यह प्रयोग सफल रहा है, लेकिन वे अब चोरों से परेशान हैं, क्योंकि चोर सड़क पर लगे एलईडी साइन बोर्ड चुरा रहे हैं. सड़क किनारे लगी लोहे की जाली को भी कई जगह चुरा लिया गया है. एक बार फिर चर्चाओं में लाल सड़क जबलपुर से भोपाल तक के लिए नेशनल हाईवे 12 बनाया गया है. यह सड़क लगभग 300 किलोमीटर लंबी है. इस हाईवे का लगभग 12 किलोमीटर का क्षेत्र नौरादेही टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है. इसी में से लगभग 2 किलोमीटर इलाके में टेबल टॉप रेड मार्किंग की गई है, जिसकी वजह से यह सड़क चर्चा में बनी हुई है. इस 2 किलोमीटर इलाके में लाल कलर के बड़े-बड़े निशाना बनाए गए हैं. यह लगभग 2 मिलीमीटर मोटे हैं. देश के कई इलाकों से आई इंक्वायरी नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी अमृतलाल साहू का कहना है, "हमारा यह प्रयोग पूरे भारत में सराहा जा रहा है. इस सड़क के बनने के बाद देश के कई इलाकों से इसी तरह की सड़क बनाने के लिए जानकारियां मांगी गईं हैं. चेन्नई और पंजाब के सड़क निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने इस निर्माण कार्य की जानकारी ली है. वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन के लिए पहला प्रयोग अमृतलाल साहू ने बताया, "यह आइडिया पूरी दुनिया में नया है. हालांकि, सड़कों पर लाल कलर कई जगह पर लगाया जाता है. दुबई में कुछ सड़कें ऐसी हैं, जहां वाहनों की गति धीमी करने के लिए पूरी सड़क को ही लाल कर दिया जाता है. हालांकि, यह लंबाई मात्र 100 मीटर तक होती है. इसी तरह साइकिल ट्रैक बनाने के लिए भी सड़क लाल की जाती है, लेकिन वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सड़क पर टेबल टॉप रेड मार्किंग पहली बार की गई." बीते 1 साल में एक भी जानवर की नहीं हुई मौत अमृतलाल साहू ने बताया कि "हमारा यह प्रयोग सफल रहा है. सड़क पर केवल लाल कलर के निशान ही नहीं बनाए गए हैं, बल्कि इस सड़क में जंगल के पूरे इलाके में तार की फेंसिंग भी की गई है. 25 जगह पर जानवरों को सड़क पार करने के लिए अंडरपास भी बनाए गए हैं. जब इस सड़क पर यह सभी सुविधाएं नहीं थी, तो 2 साल में लगभग 300 जानवरों की एक्सीडेंट से मौत हुई थी, लेकिन इस कार्य के पूरे हो जाने के बाद बीते 1 साल में कोई भी जानवर सड़क दुर्घटना से इस क्षेत्र में नहीं मरा है." चोरों से परेशान नेशनल हाईवे अथॉरिटी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने इस सड़क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से तैयार किया था, इसलिए सड़क पर कई जगह पर एलईडी साइन बोर्ड लगाए गए थे. टेबल टॉप रेड मार्किंग पर लगे उपकरणों की वजह से जानवरों की मौतों में बहुत गिरावट आई है, लेकिन अब ये उपकरण चोरों के निशाने पर हैं. अमृतलाल साहू ने बताया कि "वे चोरों से बहुत परेशान हैं. हाईवे से कई एलईडी साइन बोर्ड चोरी कर लिए गए, कुछ जगह पर वायर फेसिंग भी चोरी हो गई. इस सड़क पर हमने रखवाली के लिए पेट्रोलिंग गाड़ी रखी है, लेकिन इतनी लंबी सड़क की पूरे समय सुरक्षा नहीं की जा सकती. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने चोरों के खिलाफ थाने में शिकायत भी करवाई है."