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107 लोगों की मौत का मामला: SIR के खिलाफ बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव मंजूर

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि राज्य में विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर फैली घबराहट और चिंता के कारण 107 लोगों की जान चली गई है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए SIR की प्रक्रिया चल रही है। सत्ताधारी दल TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया ने आम जनता के बीच भारी डर पैदा कर दिया है। लोगों को लग रहा है कि यह NRC का ही एक दूसरा रूप है, जिसके माध्यम से उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए जाएंगे और उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े होंगे। नियम 169 के तहत प्रस्ताव पेश करते हुए राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से मतदाताओं को परेशान किया गया और मानसिक तनाव के कारण 107 लोगों की मौत हो गई। निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग 'परेशान करने का आयोग बन गया है। विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए विधानसभा इस पर विचार-विमर्श नहीं कर सकती। इस मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है: ममता बनर्जी का पक्ष: हाल ही में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में हर दिन 3-4 लोग इस 'SIR के डर' के कारण अपनी जान दे रहे हैं। उन्होंने इसे पिछले दरवाजे से NRC लाने की कोशिश करार दिया है। BJP का पलटवार: विपक्षी दल बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि टीएमसी सरकार लोगों के बीच जानबूझकर अफवाहें और डर फैला रही है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके। उन्होंने इन मौतों को निजी त्रासदियों का राजनीतिकरण बताया है। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इस मामले में चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। इससे एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की जारी कवायद में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि 'लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।' उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य को निशाना बनाया जा रहा है और इसके लोगों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ममता बनर्जी बुधवार को उच्चतम न्यायालय में बहस करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन गईं। SIR क्या है और डर क्यों है? SIR चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। हालांकि, बंगाल में विपक्ष और सरकार के बीच चल रहे टकराव के कारण यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। लोगों में डर है कि अगर उनके पास 1971 या पुराने दस्तावेज नहीं हुए, तो उन्हें अवैध घुसपैठिया घोषित कर दिया जाएगा, जैसा कि असम में NRC के दौरान देखने को मिला था। हालांकि चुनाव आयोग के अपने तर्क हैं।

SIR मुद्दे पर ममता का दर्द: CJI से बोलीं— ‘न्याय के लिए भटक रही हूं, हाल बंधुआ मजदूर जैसा’

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तब अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दलीलें रखने के लिए पेश हुईं। उन्होंने एसआईआर का विरोध करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने कहा कि हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा, हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखी हैं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। उन्होंने चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। 'बार एंड बेंच' वेबसाइट के अनुसार, ममता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान भी पेश हुए और कहा कि अपमैप्ड वोटर 32 लाख हैं। लॉजिकल गड़बड़ी वाली लिस्ट में 1.36 करोड़ हैं। 63 लाख सुनवाई पेंडिंग है अभी। उन्होंने बड़ी संख्या में अनमैप्ड वोटर्स का जिक्र करते हुए कहा कि सुधार के उपायों के लिए बहुत कम समय बचा है। ममता के वकील की तरफ से कुछ उदाहरण भी पेश किए गए, जिसमें बताया गया कि कैसे नामों में गड़बड़ी आई। वकील ने कहा कि हमने आपको असली वोटर्स के उदाहरण दिए हैं। कृपया अपेंडिक्स एक देखें.. चिराग टिबरेवाल। उनकी गड़बड़ी पिता के नाम में मिसमैच थी क्योंकि पिता के नाम में बीच में कुमार आता है। मुझे नोटिस देकर बुलाया गया था। फिर आते हैं अजीमुद्दीन खान…पिता का नाम बंगाली में अलाउद्दीन खान दिखाता है… तो बंगाली से इंग्लिश में… इसमें गलती हो सकती है। 'मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा' सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने भी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा, ''मैं आपकी दया के लिए आभारी हूं। जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा था, तब हमें लगा कि हमें कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा। हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखीं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। मैं यही पसंद करती हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं।'' पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मैं आपको फोटो दिखाती हूं और यह तस्वीर मेरी नहीं है। यह बड़े अखबारों ने छापी है। एसआईआर प्रक्रिया सिर्फ डिलीट करने के लिए है। मान लीजिए शादी के बाद एक बेटी ससुराल जाती है। सवाल किए जाते हैं कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है। ये लोग यही कर रहे हैं। कुछ बेटियां जो ससुराल चली गई, उनके नाम डिलीट कर दिए गए। गरीब लोग कभी कभी फ्लैट खरीदते हैं, कभी-कभी वे शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे के भी नाम डिलीट कर दिए गए। चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा उन्होंने आरोप लगाया कि यह गलत मैपिंग हो रही है। चुनाव से ठीक पहले सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। वे दो महीने में ही वह काम करना चाहते हैं, जिसमें दो साल लग जाते हैं। बीएलओ ने आत्महत्या कर ली और उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर यह आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया, असम को क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है। सोमवार को इस मामले की फिर से सुनवाई होगी। बता दें कि बनर्जी अपने वकीलों के साथ कोर्ट रूम नंबर एक में मौजूद रहीं। मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम पर एक गेट पास जारी किया गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने बनर्जी और तीन अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं को मोस्तारी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ने दायर किया है।  

7 लाख मतदाता और अजीबोगरीब डेटा: पिता, बेटे और 6 संतानों के रिकॉर्ड में खटास

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान डेटा में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्होंने निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। जिले में करीब 7 लाख मतदाताओं के डिजिटल रिकॉर्ड में तार्किक त्रुटियां (Logical Errors) पाई गई हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाले मामले वे हैं जहां तकनीकी गड़बड़ी के कारण माता-पिता की उम्र उनकी संतान से भी कम दर्ज हो गई है। डेटा में मिलीं ये 6 बड़ी विसंगतियां बीएलओ (BLO) एप के जरिए की गई छंटनी में भोपाल और मध्यप्रदेश स्तर पर लाखों गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं:     उम्र का गणित फेल: भोपाल में 1.19 लाख और प्रदेश में 39 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनकी उम्र उनके माता-पिता से महज 15 साल कम या उससे भी कम दर्ज है।     असंभव आयु अंतर: करीब 18 हजार मामलों में माता-पिता की उम्र मतदाता से 50 साल से भी ज्यादा बड़ी दिखाई गई है।     रिश्तों में उलझन: दादा-दादी की उम्र पोते-पोतियों से 40 साल कम दर्ज होने के 15 हजार से ज्यादा मामले भोपाल में मिले हैं।     संतानों का रिकॉर्ड: जिले के 46 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड में 6 या उससे अधिक संतानें दर्ज पाई गई हैं।     नाम और जेंडर: पिता के नाम में मिसमैच और जेंडर की गड़बड़ी के भी लाखों मामले सामने आए हैं। क्यों हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी? डिजिटलाइजेशन के दौरान पुराने रिकॉर्ड को नए सॉफ्टवेयर से जोड़ने पर ये चार प्रमुख कारण सामने आए हैं:     शॉर्ट नाम का उपयोग: पुराने रिकॉर्ड में 'डीके' लिखा था, जिसे सॉफ्टवेयर ने नए नाम 'देवेंद्र कुमार' से मैच नहीं किया।     उपनाम (सरनेम) का छूटना: सरनेम न होने पर एप ने उसे अलग व्यक्ति मानकर सूची से बाहर कर दिया।     लिंक की समस्या: एक मामले में पिता ने बेटों का लिंक खुद से और बेटियों का लिंक दादा के रिकॉर्ड से जोड़ दिया, जिससे डेटा मिसमैच हो गया।     अधूरा डेटा: पिता या माता का नाम गलत टाइप होने से सॉफ्टवेयर ने रिकॉर्ड रिजेक्ट कर दिया। अब क्या होगा? 14 फरवरी तक का अल्टीमेटम     इन विसंगतियों के कारण चुनाव आयोग को डेटा जमा करने की समय-सीमा कई बार बढ़ानी पड़ी है। अब भोपाल कलेक्टर ने 14 फरवरी तक सभी त्रुटियों को सुधारने का लक्ष्य दिया है।     2 लाख मतदाताओं को नोटिस: जिले के 181 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शेष बचे 2 लाख मतदाताओं को नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।     घर बैठे सुधार: यदि बीएलओ आपके घर आता है और मौके पर ही दस्तावेजों के आधार पर सुधार हो जाता है, तो आपको दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी।

फरवरी-मार्च में शुरू होगा SIR, पंजाब सहित 12 राज्यों में 6.59 करोड़ वोटर नामों की जांच

लुधियाना/चंडीगढ़   पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। राज्य में फरवरी और मार्च के महीने में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों से फर्जी नाम हटाना और योग्य मतदाताओं के विवरण को अपडेट करना है। CEO पंजाब के सख्त निर्देश : सुधारें 'इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट' पंजाब के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) ने राज्य के सभी जिला चुनाव अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन पोलिंग बूथों पर 'इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट' 50 फीसदी से कम है, वहां तत्काल सुधार किया जाए। क्या है इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट? इसका अर्थ है कि मतदाता सूची में दर्ज लोगों का विवरण (नाम, पता, उम्र, फोटो) डिजिटल सिस्टम से कितना सही तरह से जुड़ा और सत्यापित है। यह प्रतिशत जितना अधिक होगा, मतदाता सूची उतनी ही सटीक मानी जाएगी। SIR के लिए पंजाब CEO ने 2 बड़ी हिदायतें दीं..     इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट सुधारें: CEO पंजाब ने जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन पोलिंग बूथों पर इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट 50 फीसदी से कम है उनकी मतदाता सूचियों की गलियों तो ठीक करवाएं और उनका मैपिंग परसेंट सुधारें। SIR से शुरू होने से पहले मतदाता सूचियों को ज्यादा से ज्यादा करेक्ट करवा दें।     BLO को 5 दिन का टाइम: BLO आज यानी 30 जनवरी से 3 फरवरी तक मतदाता सूचियों की गलतियों को ठीक करेंगे। इसके लिए उन्हें पांच दिन के लिए उनके डिपार्टमेंट से रिलीव कर दिया गया है। इन पांच दिनों में बीएलओ उन गलतियों को ठीक करेंगे जो उन्होंने रंगीन मतदाता सूची बनाते समय की थी। BLO ने कुछ मतदाताओं की ब्लैक एंड वाइट फोटो लगाई तो कुछ की फोटो सूचियों में ब्लर हैं। इसके अलावा कुछ फोटो तिरछी लगी हैं। नाम व अन्य जानकारियां भरते समय टाइपिकल गलतियां हैं। बीएलओ को इन पांच दिनों में ये सभी गलतियां दूर करनी हैं। इस बारे में राष्ट्रीय चुनाव आयोग (ECI) ने एक दिन पहले सभी राज्यों से वर्चुअल मीटिंग में पंजाब में SIR फरवरी मार्च में शुरू करने की बात कही। केंद्रीय चुनाव आयोग की हिदायत के बाद सीईओ पंजाब ने मतदाता सूचियों की गड़बड़ी को ठीक करने के आदेश दे दिए हैं। इससे पहले 12 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में SIR का पहला फेज कंप्लीट हो चुका है। जिसमें 6.59 करोड़ वोटरों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गए हैं। इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट क्या होता है, जानिए इलेक्टोरल मैपिंग परसेंट से पता चलता है कि किसी क्षेत्र की मतदाता सूची में से कितने मतदाताओं का विवरण सही तरीके से वैरिफाइड और डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा चुका है। इसमें मतदाता का नाम, पता, उम्र, फोटो और संबंधित मतदान केंद्र की सही मैपिंग शामिल होती है। यह प्रतिशत जितना अधिक होता है, मतदाता सूची उतनी ही ठीक और भरोसेमंद मानी जाती है। कम इलेक्टोरल मैपिंग प्रतिशत का अर्थ है कि सूची में गलतियां मौजूद हैं। इसी कारण चुनाव आयोग समय-समय पर SIR करवाकर मतदाता सूचियों को सुधारता है। मैपिंग परसेंट बढ़ाने पर फोकस लुधियाना के अतिरिक्त जिला चुनाव अफसर व ADC राकेश कुमार ने कहा कि SIR का उद्देश्य नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ना, मृत या ट्रांसफर हो चुके मतदाताओं के नाम हटाना और डुप्लीकेट एंट्री को साफ करना है। अभी मैपिंग परसेंट बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों में जो टाइपिंग की गलतियां हैं या फिर फोटो सही नहीं लगे हैं उनको ठीक किया जा रहा है। 12 राज्यों में SIR हुआ, वोटर्स की ड्राफ्ट लिस्ट में 13% वोटर घटे 2 राज्यों में SIR का पहला फेज खत्म हो गया। वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए 28 अक्टूबर, 2025 से शुरू हुई मुहिम 2 महीने 11 दिन चली। SIR से पहले इन राज्यों में 50.97 करोड़ मतदाता थे। वैरिफिकेशन के बाद 44.38 करोड़ रह गए। करीब 6.59 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गए हैं। यह 12 राज्यों के कुल मतदाताओं का 12.93% है, यानी हर 100 वोटर्स पर करीब 13 नाम कट गए। हालांकि ये फाइनल लिस्ट नहीं है, जिन लोगों के नाम कटे हैं, वे दावे-आपत्तियां कर सकते हैं। फॉर्म 6 या 7 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। BLO को मिला 5 दिन का विशेष जिम्मा मतदाता सूचियों में सुधार के लिए बीएलओ (BLO) को उनके मूल विभागों से 5 दिनों के लिए रिलीव किया गया है। 3 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में बीएलओ गलतियों को ठीक करेंगे। फोटो सुधार : ब्लैक एंड व्हाइट, धुंधली (Blur) या तिरछी लगी फोटो को बदला जाएगा। टाइपिंग त्रुटियां : नाम, पिता का नाम या पते में हुई स्पेलिंग की गलतियों को दुरुस्त किया जाएगा। रंगीन सूचियां : नई रंगीन मतदाता सूचियों में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करना। फर्जी वोटों पर चलेगी कैंची SIR प्रक्रिया के दौरान मृत व्यक्तियों, शहर छोड़कर जा चुके लोगों और एक ही व्यक्ति के दो जगह बने (डुप्लीकेट) वोटों को हटाया जाएगा। इससे चुनाव के दौरान होने वाली धांधली की गुंजाइश खत्म होगी। मतदाता खुद भी कर सकते हैं जांच निर्वाचन आयोग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट electoralsearch.eci.gov.in पर जाकर अपना नाम चेक करें। यदि नाम नहीं है, तो फॉर्म-6 भरकर आवेदन करें। यदि विवरण में गलती है, तो फॉर्म-8 के जरिए सुधार करवाएं। अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी राकेश कुमार के अनुसार, वर्तमान में पूरा फोकस टाइपिंग और फोटो संबंधी त्रुटियों को सुधारकर मैपिंग प्रतिशत बढ़ाने पर है, ताकि आगामी चुनावों के लिए एक विश्वसनीय डेटाबेस तैयार किया जा सके। 1. राजस्थान: 41.85 लाख वोटर्स के नाम कटे राजस्थान में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में 41.85 लाख वोटर्स के नाम काटे गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट से पहले राज्य में 5.48 करोड़ थे, ड्राफ्ट लिस्ट में 5.06 करोड़ वोटर्स का नाम शामिल किया गया। काटे गए वोटर्स का प्रतिशत 7.6 है, यानी हर 100 से में लगभग 8 वोटर्स का नाम हटाया गया है। हालांकि, 41.85 लाख वोटर्स में से 8.75 लाख मृत पाए गए, 3.44 लाख डुप्लीकेट या फर्जी थे, तो वहीं 29.6 लाख वोटर्स शिफ्ट, लापता और अन्य थे। 2. … Read more

मतदाता सूची विवाद ने पकड़ा तूल, पूर्व पार्षद की शिकायत पर पुलिस में मामला दर्ज

जयपुर राजस्थान में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 89 में मतदाता सूची से नाम हटाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। पूर्व पार्षद अकबरद्दीन ने पुलिस थाना लालकोठी (जयपुर पूर्व) में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके नाम को वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फर्जी फॉर्म-7 भरकर झूठी घोषणा की गई। अकबरद्दीन ने बताया कि उनका नाम वार्ड 89, बूथ संख्या 107 (सांगानेरी गेट) की मतदाता सूची में EPIC नंबर MCM 3202645 के साथ दर्ज है। उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत नियमानुसार बीएलओ द्वारा दिया गया परिगणना प्रपत्र भी जमा कराया था। पूर्व पार्षद के अनुसार, 15 जनवरी को जब वे बूथ पर पहुंचे तो बीएलओ पुष्पा ने उन्हें बताया कि अशोक नामक व्यक्ति ने उनके नाम, मकान नंबर और EPIC नंबर का उपयोग कर फर्जी फॉर्म-7 जमा कराया। फॉर्म में झूठी घोषणा की गई कि अकबरद्दीन स्थायी रूप से स्थानांतरित हैं, जबकि वे जन्म से उसी पते पर अपने परिवार के साथ निवास कर रहे हैं। अकबरद्दीन ने बताया कि उनका मकान संख्या 188 उनके पिता द्वारा 50 वर्ष पहले खरीदा गया था और वर्षों तक वही उनका पार्षद कार्यालय भी रहा। इसके बावजूद उन्हें उनके संवैधानिक मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फॉर्म-7 भरने वाला अशोक, भाजपा BLA सुनील का भाई है और दोनों ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। आरोप है कि बूथ संख्या 107 पर दर्जनों फर्जी फॉर्म-7 जमा कराए गए। पूर्व पार्षद ने कहा कि आरोपियों ने जानबूझकर बीएलओ को मिथ्या सूचना और साक्ष्य दिए, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दंडनीय है। उन्होंने पुलिस से मांग की कि दोषियों के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

सॉफ्टवेयर मैचिंग में 5.70 लाख वोटर्स के पिता और जन्मतिथि व नाम में मिली गड़बड़ी

इंदौर. इंदौर जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावे-आपत्ति की सुनवाई जारी है, लेकिन इस बीच मतदाता सूची को लेकर अजीब स्थिति सामने आई है। जिले में करीब 5.70 लाख मतदाता तार्किक त्रुटि श्रेणी में सामने आए हैं, जिनके रिकार्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैप तो हो गए हैं, लेकिन विवरणों में विसंगतियों के कारण वे संदेह के घेरे में हैं। यह संख्या उन 1.33 लाख मतदाताओं से अलग है, जिनकी वर्ष 2003 से मैपिंग नहीं हुई। दरअसल, निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा रिकॉर्ड मिलान के दौरान पांच प्रकार की तार्किक त्रुटियां चिह्नित की गई हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है, जिनके पिता का नाम 2003 की सूची से मेल नहीं खा रहा। नाम की स्पेलिंग में गलती, नाम का अधूरा होना, सरनेम में बदलाव और जन्मतिथि में अंतर जैसी त्रुटियां भी सामने आई हैं। इन मतदाताओं को आयोग ने संदेह के घेरे में रखा है। हालांकि, इस श्रेणी के मतदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि इनको किसी तरह से नोटिस जारी नहीं होंगे यानी यह सूची से बाहर नहीं होंगे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पंवार का कहना है कि आयोग ने कुछ मतदाताओं को तार्किक त्रुटि में शामिल किया है। इनका सुधार बीएलओ द्वारा अपने मोबाइल लॉगिन से किया जाएगा। बीएलओ घोषणा पत्र भरकर उक्त मतदाता की पुष्टि करेंगे। यदि इसमें गलत मैपिंग हुई है तो उसमें सुधार कर नोटिस जारी होंगे। 24.20 मतदाताओं ने भरे फार्म इंदौर जिले की मतदाता सूची में शामिल 28.67 लाख मतदाताओं के फार्म भरने का कार्य चार नवंबर से 11 दिसंबर तक किया गया। इस दौरान 24 लाख 20 हजार 171 मतदाताओं के फार्म भरकर आए, इसलिए इनको प्रारंभ मतदाता सूची में शामिल किया गया है। इसमें एक लाख 33 हजार 696 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई थी और अब इनसे दस्तावेज लिए जा रहे हैं। वहीं चार लाख 47 हजार 123 मतदाताओं के फार्म नहीं आने से इनका नाम प्रारंभ मतदाता सूची से हटाया गया है। इसमें स्थानांतरित, मृतक और पते पर नहीं मिलने वाले मतदाता शामिल हैं। ये त्रुटियां सामने आईं नाम में त्रुटि : वर्तमान मतदाता सूची में मतदाता का नाम रामलाल दर्ज है, जबकि 2003 की सूची में नाम राम था। पिता का नाम बेमेल : 2003 की सूची में पिता के नाम के साथ सरनेम नहीं था, लेकिन अब नाम के साथ सरनेम दर्ज है। मैपिंग की परेशानी : एक पालक की छह से अधिक नामों से मैपिंग नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ मामलों में अधिक हुई है। उम्र की परेशानी : बच्चों और पिता की उम्र में 15 साल से कम और 50 साल से अधिक का अंतर सामने आ रहा है। दादा की उम्र : कई मतदाताओं के दादा की उम्र में 40 साल से कम का अंतर दिखाई दे रहा है।

भोपाल में 1 लाख 16 हजार 925 मतदाता नो मैपिंग श्रेणी में, 1.15 लाख नोटिस जारी

 भोपाल भोपाल जिले में (विशेष गहन पुनरीक्षण) एसआईआर के दूसरे चरण में नो मैपिंग श्रेणी के मतदाताओं को नोटिस देने का काम किया जा रहा है। इसके लिए अब तक एक लाख 15 हजार 820 नोटिस जारी हो चुके हैं, जबकि एक हजार 105 अब भी बाकी है। वहीं एक हजार 452 नो मैपिंग मतदाताओं के दस्तावेज अपलोड किए जा चुके हैं। यह कार्य सभी विधानसभा क्षेत्र में बीएलओ द्वारा घर -घर जाकर किया जा रहा है। अभी बीएलओ नोटिस वितरण करने के साथ ही मतदाताओं को सुनवाई की तारीख बता रहे हैं, जिसके बाद पांच जनवरी से सुनवाई शुरू होगी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि सात विधानसभा क्षेत्र बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर में एक लाख 16 हजार 925 नो मैपिंग श्रेणी के मतदाता हैं। इन मतदाताओं व इनके स्वजनों का वर्ष 2003 में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है, अब इन सभी को नोटिस देते हुए सुनवाई का मौका दिया जा रहा है। साथ ही बीएलओ द्वारा इनका रिकॉर्ड मिलने पर दस्तावेज भी अपलोड किए जा रहे हैं। एसआईआर के दूसरे चरण में अब तक कुल एक लाख 15 हजार 820 नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिनको बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर वितरित किया जाना है। बीएलओ द्वारा एक हजार 452 नो मैपिंग मतदाताओं के दस्तावेज अपलोड किए हैं, जबकि बुधवार को कुल 367 नोटिस का वितरण किया गया है। नाम जुड़वाने और संशोधन के लिए आए 30 हजार फार्म सात विधानसभा क्षेत्र में करीब 30 हजार फार्म छह व आठ जमा हुए हैं। इनमें से फार्म छह 14 हजार 201 जमा करते हुए मतदाताओं ने सूची में नाम जुड़वाने का दावा पेश किया है तो वहीं 16 हजार चार फार्म आठ देते हुए मतदाताओं ने संशोधन, शिफ्टिंग आदि के लिए आपत्ति पेश की है। इन सभी की सुनवाई भी रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष होगी। नो मैंपिंग में मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा     एसआईआर के दौरान दावा-आपत्ति का कार्य समय सीमा में त्रुटि रहित ढंग से संपादित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत अभी नोटिस जारी कर वितरित करने का काम किया जा रहा है। जल्द ही सुनवाई शुरू कर नो मैपिंग मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। जिससे कि कोई भी पात्र मतदाता सूची में सम्मिलित होने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  

राजधानी चुनाव अपडेट: नो मैपिंग श्रेणी के मतदाताओं के लिए नोटिस अभियान, सुनवाई होगी तहसील और वार्ड कार्यालय में

भोपाल   मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जिन लोगों के परिजन या खुद का रिकॉर्ड 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिला है। अब उन लोगों को अपनी नागरिकता के प्रमाण पेश करने का समय आ गया है। इसके लिए निर्वाचन शाखा द्वारा जिलेभर में घर-घर नोटिस जारी कर संबंधित दस्तावेज पेश करने की बात कही जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये जानकारी उत्तर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मतदान केंद्र क्रमांक-16 की बीएलओ उजमा इकबाल ने मंगलवार को नोटिस देते हुए मतदाताओं से कही। इसी तरह विभिन्न मतदान केंद्र के बीएलओ ने नो मैपिंग श्रेणी के मतदाताओं को नोटिस देते हुए सुनवाई की तारीख देते हुए दस्तावेज समेत पेश होने को कहा जा रहा है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता का कहना है कि, जिले की 7 विधानसभा क्षेत्रो में कुल 1 लाख 16 हजार 925 मतदाताओं को नो मैपिंग श्रेणी में रखा गया है। इनमें से अबतक 92 हजार 16 मतदाताओं के नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिन्हें बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर वितरित किया जा रहा है। संबंधित नोटिस के साथ एक तारीख भी दी जा रही है। इनकी सुनवाई विधानसभा क्षेत्र के एसडीएम, तहसील न्यायालय, नगर निगम के वार्ड कार्यालयों में करीब 90 अधिकारी की मौजूदगी में होगी। सातों विधानसभा क्षेत्रों के लिए एसडीएम को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) नियुक्त किया गया है। सातों विधानसभाओं में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में संशोधन करवाने के लिए भी करीब 15 हजार 371 फार्म-8 जमा किए गए हैं। इस फार्म के तहत शिफ्टेड, संशोधन आदि का कार्य किया जा सकेगा। इनमें सबसे अधिक फार्म-8 गोविंदपुरा में 3923, नरेला में 2915, हुजूर में 2588 जमा किए गए हैं। विधानसभा क्षेत्र—–नो मैपिंग मतदाता——कुल नोटिस वितरण -बैरसिया————–2,134———————2,134 -उत्तर—————-10,080——————–4,901 -नरेला—————-23,790——————–16,767 -दक्षिण-पश्चिम—–16,596———————15,045 -मध्य—————-10,088———————9,332 -गोविंदपुरा———–30,188——————–19,788 -हुजूर—————–23,049——————–24,049 -कुल——————1,16,925—————–92,016 इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि, सभी विधानसभा क्षेत्रों में 70 फीसदी से अधिक नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस दिए जा चुके हैं। नए साल के पहले हफ्ते में इनकी सुनवाई की जाएगी। इस दौरान उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों के आधार पर ही सूची में नाम जोड़ने पर निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा फार्म-8 और 5 पर भी सुनवाई होगी।

चुनाव से पहले बड़ा मौका: वोटर लिस्ट विवाद पर SIR की सुनवाई शुरू, 32 लाख मतदाता हो सकते हैं शामिल

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में भी एसआईआर की प्रक्रिया जारी है और शनिवार से लोगों की शिकायतों और दावों पर सुनवाई होने जा रही है। इसके लिए राज्य में 3234 केंद्र स्थापित किए गए हैं। 2022 की वोटर लिस्ट से जिन लोगों का लिंक नहीं मिला है, उन 32 लाख लोगों को पहले चरण में बुलाया गया है। वोटर 12 में से कोई भी एक डॉक्युमेंट जमा करके अपना नाम लिस्ट में जुड़वा सकते हैं। इसमें आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र भी शामिल है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि केवल आधार से लिस्ट में नाम नहीं जुड़ेगा। उसके साथ कोई सपोर्टिंग डॉक्युमेंट भी देना होगा।   अधिकारियों ने कहा है कि बिहार में बनाई गई लिस्ट को भी वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। हालांकि किसी तरह के फर्जी दस्तावेज देने पर सजा भी हो सकती है। राज्य में निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा है कि सुनवाई की सारी तैयारियों हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 4500 माइक्रो ऑब्जर्वर्स की देखरेख में यह पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी। वहीं सेंटर पर सुनवाई के लिए केवल ईआरओ, बीएलओ और एआरओ को ही अनुमति दी गई है। सुनवाई केंद्रों पर जरूरी प्रक्रिया हो जाने के बाद कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना मुख्य उद्देश्य है। चुनाव आयोग ने हर ईआरओ के लिए 150 मामलों की सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य तय कर दिया है। सुनवाई की शुरुआत उन अनमैप्ड वोटर्स की सुनवाई की जाएगी जिनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट से लिंक नहीं है। पश्चिम बंगाल में 2002 में भी एसआईआर किया गया था।एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान कई तरह के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक जो लोग 15 साल की उम्र से पहले ही पिता बन गए हैं. 40 साल की उम्र में दादा बन गए हैं, या फिर माता और पिता के नाम एक ही हैं, उनकी पहचान की गई है। 16 दिसंबर को वोटर लिस्ट पब्लिश की गई थी। वही फाइनल लिस्ट 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का भी ऐलान कर सकता है।  

SIR के बाद अब जनगणना पर फोकस, 2026 में हर घर तक पहुंचेगी सरकारी टीम

देहरादून  हिमालयी राज्य उत्तराखंड में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच जनगणना की तैयारी भी शुरू हो गई। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जनगणना के लिए 19 विभिन्न श्रेणियों में मंडल, जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश दे दिए। मंडल स्तर पर संपूर्ण क्षेत्र के नोडल अफसर कमिश्नर होंगे। जबकि जिलों में नगर निगम क्षेत्रों को छोडकर बाकी पूरे क्षेत्र के प्रमुख जनगणना अधिकारी संबंधित जिले के डीएम होंगे।   सचिव-जनगणना दीपक कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार ने जनगणना का कार्यक्रम जारी करते हुए अहम दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके लिए अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। इसके तहत अगले वर्ष अप्रैल से सितंबर के बीच किसी एक महीने में 30 दिन तक प्रदेश भर में सघन अभियान चलाकर मकानों की गणना की जाएगी। सारी प्रक्रिया आधुनिक उपकरण की मदद से केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए साफ्टवेयर पर की जाएगी। कुमार ने बताया कि उत्तराखंड समेत सभी पर्वतीय राज्यों के एक महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। सचिव-जनगणना दीपक कुमार ने बताया कि जनगणना की तैयारी शुरू की जा रही है। 19 विभिन्न श्रेणियों में जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश कर दिए गए हैं। जल्द ही अधिकारियों और कार्मिकों के प्रशिक्षण शुरू किए जाएंगे। इसकी अधिसूचना भी जारी की जा रही है। 2027 में दस दिन तक होगी जनगणना की रिहर्सल मकानों की गणना के बाद फरवरी 2027 में किसी भी दस दिन तय कर जनगणना का अभियान चलाया जाएगा। इसमें पूर्व में मकानों की गणना का सत्यापन भी होगा। साथ ही इस अवधि में नए बने या छूटे भवनों को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार के स्तर पर जनगणना का अंतिम कार्यक्रम जारी होने पर विधिवत रूप से राष्ट्रीय स्तर पर अभियान शुरू कर दिया जाएगा। चकराता-हरिद्वार में जनगणना का एक पायलट चक्र पूरा जनगणना की विधिवत शुरूआत से पहले हर स्तर पर रिहर्सल शुरू हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड में चकराता में 22 गांवों में मकानों का सर्वेक्षण कर गणना की जा चुकी है। मैदानी जिलों में जनगणना के लिए हरिद्वार को चुना गया था। यहां हरिद्वार नगर निगम के एक वार्ड में मकानों का ब्योरा तैयार किया जा चुका है। नई जनगणना में सामने आएगी तस्वीर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की जनंसख्या महज 1.01 करोड़ आंकी गई थी। राज्य के विकास से जुड़ी योजनाएं, विभिन्न कल्याणकारी पेंशन, सब्सिड़ी आदि योजनाओं का आंकलन भी इसी के आधार पर किया जा रहा है। जबकि पिछले 14 साल में राज्य की जनसंख्या काफी ज्यादा बढ़ चुकी है। प्रमाणिक संख्या आने से राज्य में विकास योजनाओं का आकार और लक्ष्य तय करना आसान हो जाएगा। वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान राज्य में कुल परिवार-घरों की संख्या को 19 से 20 लाख के करीब दर्ज किया गया था। हालिया कुछ वर्षों में उत्तराखंड में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है।