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वास्तु के अनुसार किस दिशा में सोना है सबसे सही? जानिए पूरा नियम

क्या आपने कभी सोचा है कि सोते समय आपके सिर और पैरों की दिशा क्या होनी चाहिए? हम रोज की जिंदगी में सोते हैं, जागते हैं, खाना खाते हैं और फिर सो जाते हैं. लेकिन अक्सर इस बात पर ध्यान नहीं देते कि हमारी सोने की दिशा भी हमारे स्वास्थ्य और ऊर्जा पर असर डालती है. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का नजरिया ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस दिशा में हम अपने पैर रखते हैं, उसी दिशा में ऊर्जा का प्रवाह होता है. इसलिए सही दिशा में सोना बेहद जरूरी माना गया है. आपको हमेशा अपने सिर को दक्षिण दिशा की ओर और पैरों को उत्तर दिशा की ओर करके सोना चाहिए. इसका कारण यह है कि पृथ्वी की चुंबकीय तरंगें उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर प्रवाहित होती हैं. जब हम इसी दिशा के अनुरूप सोते हैं, तो शरीर और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहता है. इस दिशा में सोने से सुख-समृद्धि, सेहत और आयु में वृद्धि होती है. वास्तु शास्त्र में दिशाओं के देवताओं का विशेष महत्व है. दक्षिण दिशा को 'यम' (मृत्यु और न्याय के देवता) और 'पितरों' की दिशा माना गया है. वहीं, उत्तर दिशा को 'कुबेर' (धन के देवता) की दिशा माना जाता है. जब हम दक्षिण की तरफ सिर करके सोते हैं, तो हमारे पैर उत्तर यानी कुबेर की दिशा की तरफ होते हैं. शास्त्र कहते हैं कि सोते समय पैरों के जरिए सकारात्मक ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है. कुबेर की दिशा से आने वाली ऊर्जा जब पैरों के माध्यम से शरीर में जाती है, तो यह व्यक्ति की बुद्धि, स्वास्थ्य और समृद्धि को बढ़ाती है. यही कारण है कि इस दिशा में सोने वाले घरों में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है और अकाल मृत्यु का भय टल जाता है. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और हमारा शरीर हमारी पृथ्वी एक बहुत बड़े चुंबक (Giant Magnet) की तरह काम करती है. इसका अपना एक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) है, जिसमें चुंबकीय तरंगें लगातार उत्तर ध्रुव (North Pole) से दक्षिण ध्रुव (South Pole) की ओर प्रवाहित होती हैं. ठीक इसी तरह, मानव शरीर का भी अपना एक चुंबकीय प्रवाह होता है. हमारा सिर 'उत्तरी ध्रुव' और पैर 'दक्षिणी ध्रुव' की तरह काम करते हैं. तो हमारे शरीर का चुंबकीय प्रवाह और पृथ्वी का चुंबकीय प्रवाह एक ही दिशा में आ जाते हैं. इससे प्रकृति और शरीर के बीच एक बेहतरीन संतुलन (Harmony) बनता है. इस दिशा में सोने से हमारे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) बिल्कुल सामान्य रहता है. दिल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता, जिससे हार्ट हेल्थ अच्छी रहती है और सुबह उठने पर व्यक्ति खुद को ऊर्जावान महसूस करता है. गलत दिशा में सोने के गंभीर नुकसान यदि आप इसके विपरीत, यानी उत्तर दिशा में सिर करके सोते हैं, तो विज्ञान और वास्तु दोनों इसे बेहद खतरनाक मानते हैं. जब शरीर का उत्तरी ध्रुव (सिर) और पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव एक साथ आते हैं, तो वे एक-दूसरे को ढकेलते हैं . इस खिंचाव के कारण शरीर का खून दिमाग की तरफ तेजी से भागता है. चूंकि दिमाग की नसें बहुत पतली होती हैं, इसलिए इस दिशा में लंबे समय तक सोने से अनिद्रा, डरावने सपने आना, लगातार सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और भविष्य में ब्रेन हैमरेज या पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. जीवन में सफलता का आधार है 'सही नींद' आप जीवन में कितना कमाएंगे, आपका करियर कैसा रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका दिमाग कितना शांत और एक्टिव है. दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोने से मिलने वाली गहरी नींद (Deep Sleep) आपके मानसिक तनाव को जड़ से खत्म करती है. जब आप सुबह बिना किसी भारीपन के उठते हैं, तो आपकी कार्यक्षमता (Productivity) दोगुनी हो जाती है.

गुरु का पुष्य नक्षत्र गोचर, 4 राशियों की बदलेगी किस्मत

 18 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति का शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र में प्रवेश ज्योतिषीय दृष्टिकोण से एक बेहद महत्वपूर्ण घटना है. पुष्य को नक्षत्रों का राजा माना जाता है, जो पोषण, समृद्धि और विकास का प्रतीक है. गुरु और पुष्य नक्षत्र का यह संयोग कई राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा. पुष्य नक्षत्र में गुरु का गोचर शुभ कार्यों, निवेश और नए बदलावों के लिए एक अत्यंत पवित्र समय माना जाता है. इन चार राशियों के जातकों को इस सकारात्मक ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए अपने प्रयासों को और तेज कर देना चाहिए. इस गोचर से मुख्य रूप से 4 राशियों के जीवन में बड़ा और सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है. आइए जानते हैं वे भाग्यशाली राशियां कौन सी हैं. मेष राशि (Aries) गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के जातकों के लिए आर्थिक और व्यावसायिक मोर्चे पर सुनहरे अवसर लेकर आएगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई नौकरी के बेहतरीन ऑफर मिल सकते हैं. व्यावसायिक क्षेत्र में अटके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. आय के नए स्रोत बनेंगे. पुराना फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है. निवेश के लिए यह समय बेहद अनुकूल है. समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि वालों के लिए यह गोचर मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली लेकर आ रहा है. परिवार में चल रहे आपसी मतभेद समाप्त होंगे और सौहार्द बढ़ेगा. मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है. छात्रों और ज्ञानार्जन से जुड़े लोगों के लिए यह समय वरदान साबित होगा. आपकी निर्णय क्षमता और बौद्धिक कौशल की सराहना होगी. लंबे समय से चली आ रही किसी स्वास्थ्य समस्या से राहत मिलने के योग हैं. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए गुरु का पुष्य नक्षत्र में जाना भाग्य में वृद्धि और आत्मविश्वास की सौगात लाएगा. लंबे समय से रुके हुए प्रोजेक्ट्स और सरकारी काम इस अवधि में बिना किसी बाधा के पूरे हो जाएंगे. आपका झुकाव धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की तरफ बढ़ेगा, जिससे मानसिक सुकून मिलेगा. व्यापार या शिक्षा के सिलसिले में की गई यात्राएं अत्यधिक लाभकारी और सुखद रहेंगी. तुला राशि (Libra) तुला राशि वालों के लिए यह गोचर भौतिक सुख-सुविधाओं और करियर में स्थिरता लाने वाला रहेगा. नया मकान, जमीन या वाहन खरीदने के प्रबल योग बन रहे हैं. पैतृक संपत्ति से भी लाभ हो सकता है. यदि आप बिजनेस पार्टनरशिप में हैं, तो आपसी तालमेल बेहतर होगा और मुनाफा बढ़ेगा. जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और उनका भरपूर सहयोग मिलेगा.

शराबबंदी पर सरकार सख्त: 100 से ज्यादा शराब माफियाओं की अवैध संपत्ति होगी जब्त

पटना बिहार में शराबबंदी और शराब माफिया दोनों ही अहम मुद्दा है। सरकार यह दावा करती रही है कि राज्य में कई सालों से लागू शराबबंदी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए वो कटिबद्ध है। दूसरी तरफ शराब माफिया राज्य में शराबबंदी का माखौल बनाने में जुटे रहते हैं। पुलिस-प्रशासन समय-समय पर इन माफियााओं पर नकेल कसती है और माफियाओं को उनके अंजाम तक पहुंचाती है। अब सम्राट चौधरी सरकार ने शराब माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई का प्लान तैयार कर लिया है। जिसके तहत 100 से ज्यादा माफियाओं की संपत्ति जब्त कर ली जााएगी। बिहार में शराब से अवैध संपत्तियां बनाने वाले 127 माफिया को चिह्नित कर लिया गया है। मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने इन शराब माफिया की संपत्तियां जब्त करने को लेकर बीएनएसएस की धारा 107 के तहत न्यायालय को प्रस्ताव भेजा है। प्रत्येक माह औसतन 3,50,677 लीटर शराब बरामद की मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के डीआईजी अजय कुमार पांडेय ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर बताया कि बिहार की विभिन्न जिलों की पुलिस ने 2026 में प्रत्येक माह औसतन 3,50,677 लीटर शराब बरामद की है, जो वर्ष 2025 के मासिक औसत (3,14,610 लीटर) से 11 फीसदी अधिक है। इसी तरह, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने वर्ष 2026 में औसत प्रतिमाह 1,06,237 लीटर शराब बरामद की, जो वर्ष 2025 के मासिक औसत (85,645 लीटर) से 24 फीसदी अधिक है। 2026 में माह मई तक राज्य पुलिस द्वारा कुल 38,474 लीटर स्पिरिट जब्त की गयी है। मई महीने तक कुल छह ऑपरेशन चलाए गए मद्य निषेध डीआईजी ने यह भी बताया है कि शराब माफिया के खिलाफ 2026 में मई तक कुल छह ऑपरेशन चलाए गए। इनमें पांच ऑपरेशन यूपी में जबकि एक झारखंड में चला। इन ऑपरेशन में पांच करोड़ रुपये से अधिक की शराब और वाहन जब्त हुए। 57 हजार व्यक्तियों की मद्य निशेष अधिनियम के तहत गिरफ्तारी हुई डीआईजी ने इसके साथ ही यह भी जानकारी दी है कि इस साल अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों को अरेस्ट किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि बिहार पुलिस ने इस साल मई तक 19,877 कारोबारी समेत कुल 57 हजार व्यक्तियों की मद्य निशेष अधिनियम के तहत गिरफ्तारी हुई है। इनमें 37,027 पीने वाले रहे। इस दौरान राज्य के अंदर से 569 कारोबारी जबकि अन्य राज्यों से पांच बड़े कारोबारी गिरफ्तार किए गए। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2016 से मई 2026 तक कुल बरामद शराब का 97 फीसदी हिस्सा नष्ट किया जा चुका है।

AI स्किल्स से लैस होंगे यूपी के युवा, रोजगार के बढ़ेंगे अवसर

लखनऊ यूपी में कौशल विकास का प्रशिक्षण ले रहे डेढ़ लाख युवाओं को मुफ्त प्रोफेशनल एआई ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। उप्र कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) व आईबीएम स्किल फाउंडेशन के बीच एमओयू किया गया है। यूपीएसडीएम व दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के 1000 केंद्रों पर प्रशिक्षण ले रहे युवा इससे लाभान्वित होंगे। यूपीएसडीएम के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि आईबीएम स्किल फाउंडेशन के साथ हुए एमओयू का लाभ युवाओं को रोजगार हासिल करने में मिलेगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के लिए मेगा जॉब फेयर लगाए जाएंगे और प्लेसमेंट ड्राइव भी चलाई जाएगी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान ही रोजगार सहभागिता गतिविधियां आयोजित की जाएगी। जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को उद्योग जगत की कार्य प्रणाली, रोजगार बाजार व करियर के अवसरों को बेहतर ढंग से समझाया जाएगा। इंटरव्यू की भी कराएंगे तैयारी रोजगार आसानी से मिले इसके लिए उन्हें इंटरव्यू की तैयारी कराई जाएगी। करियर वर्कशॉप के माध्यम से संचार कौशल, पेशेवर व्यवहार, आत्मविश्वास व कार्यस्थल की अपेक्षाओं से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। युवाओं को सिर्फ पारंपरिक ज्ञान ही नहीं बल्कि एआई जैसी उभरती तकनीकी का ज्ञान देकर उन्हें दक्ष बनाया जाएगा। एमओयू कार्यक्रम के दौरान सोमवार को राजधानी स्थित यूपीएसडीएम मुख्यालय में एआई फॉर पब्लिक सर्विस एंड गुड गवर्नेंस कार्यशाला का आयोजन कर अधिकारियों व कर्मचारियों को एआई के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को 10 मानक लागू कर बनाया जाएगा निपुण वहीं, परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थियों को भी निपुण बनाने के लिए अभियान शुरू किया जाएगा। 10 मानकों को लागू कर विद्यार्थियों को निपुण बनाया जाएगा। अभी प्री-प्राइमरी से कक्षा दो तक निपुण मिशन चलाया जा रहा था। अब इसका विस्तार किया जा रहा है। विद्यार्थियों के सामाजिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए कक्षा के वातावरण को सहज, सुरक्षित व सकारात्मक बनाया जाएगा। नियमित अभ्यास कार्य दिया जाएगा और उसके आधार पर फीडबैक लिया जाएगा, बच्चों की समझ को परखने के लिए शिक्षक यह देखेंगे कि वह कितना समझ पा रहे हैं और उनका नाम लेकर कक्षा में सवाल पूछे जाएंगे, बच्चों के सीखने के स्तर के नियमित आंकलन के साथ कमजोर बच्चों के लिए कैच-अप अभियान चलेगा, बच्चों को कक्षा में चर्चा में शामिल किया जाएगा, शिक्षण योजना ऐसी तैयार करनी होगी जिससे सीखने के समय को बढ़ाने में मदद मिले। शिक्षक बच्चों को स्वतंत्र रूप से लेखन के लिए अभ्यास कार्य देंगे, छोटे-छोटे छात्र समूह बनाकर उन्हें टास्क दिया जाएगा और गणित के कठिन सूत्रों को समझने के लिए टीएलएम का नियमित प्रयोग होगा। अपर मुख्य सचिव, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव: बिहार सरकार 33 मेडिकल कॉलेजों का संचालन निजी हाथों को सौंपने की तैयारी में

पटना बिहार के सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में जल्द ही प्राइवेट कंपनियों की एंट्री होगी। जी हां, राज्य सरकार जल्द ही कई मेडिकल कॉलेजों की अहम जिम्मेदारियां निजी हाथों में सौंपने के प्लान पर काम कर रही है। इसके लिए बिहार के मेडिकल कॉलेज एंड अस्पतालों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल अपनाने का प्लान बनाया गयाा है। राज्य की सम्राट चौधरी सरकार ने 33 सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के संचालन और उनके विकास के लिए हितधारकों से परामर्श मांगा है। सरकार का मकसद मुख्य निजी स्वास्थ्य सेवा और इस क्षेत्र से जुड़े खिलाड़ियों को बिहार के सार्वजनिक क्षेत्र में लाना है ताकि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और भी बेहतर किया जा सके। राज्य सरकार की योजना है कि 17 नए मेडिकल कॉलेज ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत और 16 मौजूदा या आगामी संस्थानों को ब्राउनफील्ड के तहत विकसित किया जाए। इसके बाद इन सभी का संचालन वैसे निजी संस्थाओं को सौंपा जाए जिन्हें मेडिकल कॉलेजों और अस्पताल श्रृंखलाओं के प्रबंधन का अनुभव हो। इस संबंध में 17 जून को पटना में एक अहम बैठक भी होगी। स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि बिहार को वैसे नामचीन प्राइवेट प्लेयरों से भागीदारी की उम्मीद है जिन्हें मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों को चलाने में पूर्व का अनुभव हासिल है। ब्राउनफील्ड मॉडल के तहत हम उन्हें 16 मेडिकल कॉलेज देंग जहां या तो आधारभूत संरचनाओं का निर्माण हो चुका है या फिर अगले छह महीने या एक साल में हो जाएगा। इसी तरह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट में 17 नए वैसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल हैं जिनके लिए सरकार 60 साल की लीज पर जमीन देगी। ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट में वैसे 16 संस्थानों आएंगे जो अभी चालू हैं, नवनिर्मित हैं या निर्माणाधीन हैं, जिन्हें 30 साल की रियायत अवधि के लिए संचालन और प्रबंधन के लिए दिया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि सरकार ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों ही प्रोजेक्ट के लिए अपने विचार रखेगी और संभावित बोलीदाताओं से विभिन्न विषयों पर उनका फीडबैक मांगेगी। इनमें जमीन की आवश्यकता, एकल-खिड़की मंजूरी तंत्र और प्रमाणन समेत अन्य विषय शामिल हैं। राज्य सरकार इन विषयों पर मिले परामर्श के आधार पर इस सेक्टर में अपनाए गए बेहतरीन प्रक्रियाओं जिसमें केद्र सरकार द्वारा पीपीपी को लेकर जारी गाइडलाइन भी शामिल है का गहन अध्य्यन करेगी। इसके बाद ही सरकार अपने दस्तावेज तैयार करेगी। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने आगे बताया कि इसके बाद सरकार एक सलाहकार नियुक्त करेगी जो नियम और शर्तों से संबंधित विस्तृत दस्तावेज तैयार करेंगे। इसमें रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इलाज शुल्क को लेकर अस्पतालों को छूट दी जाएगी कि वो मार्केट आधारित रेट पर इसका संचालन करें। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज के लिए सब्सिडी दिए जाने को लेकर बाद में फैसला लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि प्राइवेट-सेक्टर के विशेषज्ञों की एंट्री और इनवेस्टमेंट से मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में तेजी आएगी। इससे अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगीं और एडवांस हेल्थकेयर को बल मिलेगा।

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र गोचर, 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य देव का नक्षत्र परिवर्तन एक बेहद महत्वपूर्ण घटना माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 22 जून 2026, दिन सोमवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र से निकलकर राहु के नक्षत्र आर्द्रा में प्रवेश करने जा रहे हैं. सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में जाना 'मकर संक्रांति' की तरह ही बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत भी होती है. राहु के नक्षत्र में सूर्य का यह गोचर सभी 12 राशियों पर गहरा असर डालेगा, लेकिन 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिनके लिए यह गोचर किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है. इस दौरान इन राशियों को भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा और करियर से लेकर आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहने वाला है. आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि होगी. करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप क्वालिटी की सराहना होगी. सीनियर अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा. आर्थिक लाभ: अटके हुए काम पूरे होने से धन लाभ के योग बनेंगे. निवेश के लिए यह समय उत्तम है. मिथुन राशि (Gemini) चूंकि सूर्य आपकी ही राशि में गोचर करते हुए आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, इसलिए इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर दिखेगा. मान-सम्मान: समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. आपकी वाणी का प्रभाव लोगों पर पड़ेगा. भाग्य का साथ: जो काम लंबे समय से रुके हुए थे, वे अचानक गति पकड़ेंगे. कारोबारी यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी. सिंह राशि (Leo) सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए आपके लिए यह नक्षत्र परिवर्तन विशेष रूप से फलदायी होने जा रहा है. आर्थिक पक्ष: आपकी आमदनी के स्रोतों में वृद्धि होगी. पुराना कर्ज चुकाने में आप सफल रहेंगे. सफलता: नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति (Promotion) या इंक्रीमेंट की खुशखबरी मिल सकती है. सरकारी क्षेत्रों से जुड़े कामों में बड़ी सफलता हाथ लगेगी. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में आना भाग्य के द्वार खोलने जैसा होगा. वैवाहिक जीवन व साझेदारी: व्यापार में नए पार्टनर्स जुड़ सकते हैं, जिससे भविष्य में बड़ा मुनाफा होगा. जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे. भाग्य का सहयोग: किस्मत का पूरा साथ मिलने से आपके सोचे हुए प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होंगे. पैतृक संपत्ति से भी लाभ होने के संकेत हैं.

वास्तु के अनुसार घर के लिए शुभ पौधे और सही दिशा

 वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के भीतर पेड़-पौधों का सही चयन जीवन में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लाता है. सही दिशा में रखे गए पौधे न केवल घर के वातावरण को शुद्ध रखते हैं, बल्कि सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत का भी प्रतीक माने जाते हैं. घर के लिए सबसे शुभ पौधे और उनकी दिशा तुलसी (Tulsi): इसे घर में सबसे पवित्र माना जाता है. इसे हमेशा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए.  इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मनी प्लांट (Money Plant): आर्थिक उन्नति के लिए इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना सबसे अच्छा माना जाता है. यह धन के नए स्रोत खोलता है. लकी बैम्बू (Lucky Bamboo): सौभाग्य के लिए इसे पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें. यह घर के सदस्यों की समृद्धि बढ़ाता है. स्नेक प्लांट (Snake Plant): यह पौधा हवा को शुद्ध करता है और तनाव दूर करता है. इसे दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने से लाभ होता है. जेड प्लांट (Jade Plant): यदि आप इसे घर के प्रवेश द्वार पर (पूर्व दिशा में) रखते हैं, तो यह व्यापार और सफलता को आकर्षित करता है. एलोवेरा (Aloe Vera): स्वास्थ्य और शांति के लिए इसे पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए. अरेका पाम (Areca Palm): इसे उत्तर या पूर्व दिशा में रखने से घर में शांति और ताज़गी बनी रहती है. पीस लिली (Peace Lily): घर में शांति और प्यार के लिए इसे बेडरूम की खिड़की के पास रखना बहुत शुभ है. किन पौधों से बचें? वास्तु शास्त्र कुछ पौधों को घर के लिए नकारात्मक मानता है. कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) से घर के भीतर तनाव पैदा हो सकता है.  इसी तरह, बोनसाई (Bonsai) पौधे प्रगति में बाधक माने जाते हैं, इसलिए इन्हें घर में लगाने से परहेज करना चाहिए. कॉटन प्लांट और इमली जैसे पौधों को भी वास्तु के अनुसार घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए. पौधों की देखभाल के जरूरी टिप्स वास्तु का लाभ तभी मिलता है जब पौधे स्वस्थ हों. हमेशा सुनिश्चित करें कि गमलों के आसपास सफाई रहे और कोई भी पौधा सूखने न पाए. यदि कोई पौधा मुरझा गया है, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि मृत पौधे नकारात्मकता फैलाते हैं. इसके अलावा, पौधों को सही दिशा में रखने के साथ-साथ उन्हें पर्याप्त धूप और पानी देना भी जरूरी है.

जेवर एयरपोर्ट की पहली उड़ान से राजधानी आए किसानों ने सीएम योगी से साझा किए अपने अनुभव

‘बाबाजी’ का राज है, कोई कैसे पैसे छीन लेगा जेवर एयरपोर्ट की पहली उड़ान से राजधानी आए किसानों ने सीएम योगी से साझा किए अपने अनुभव जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों ने कहा- विकास की डोर सीधे 'आदित्य' के हाथ में हज से लौटे बुजुर्ग किसान ने मुख्यमंत्री को दिया आशीर्वाद, किसानों ने कहा- मोदी जी ने भारत और योगी जी ने उत्तर प्रदेश बदल दिया लखनऊ,   जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद में विकास, कानून-व्यवस्था पर खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की डोर सीधे ‘आदित्य’ के हाथ में है। यह ‘बाबाजी’ का राज है, जेवर में आज किसी की हिम्मत नहीं कि किसान या आमजन से पैसे छीन ले। हज से लौटे एक बुजुर्ग किसान ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सबसे बड़ा एयरपोर्ट, फिल्म सिटी और बड़े प्रोजेक्ट जेवर की नई पहचान बने हैं। पहली बार हवाई जहाज में बैठकर लखनऊ पहुंचे किसानों ने मुख्यमंत्री से कहा कि जिस जमीन पर कभी वे खेती करते थे, आज उसी जमीन से उड़ान भरते विमान उत्तर प्रदेश के बदलते भविष्य की कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने कहा, "मोदी जी ने भारत और योगी जी ने उत्तर प्रदेश बदल दिया।" मुस्लिम भी बोलते हैं,  कैसे कोई पैसा छीन लेगा किसान हंसराज ने कहा कि जैसे ही वह सुबह एयरपोर्ट पहुंचे, उनके साथ आए अधिसंख्य किसानों के लिए यह अनुभव विशेष था। उनके साथ आए 99 प्रतिशत किसान ऐसे हैं, जिन्होंने आज तक हवाई जहाज को केवल आसमान में उड़ते हुए देखा था, लेकिन मुख्यमंत्री के आशीर्वाद से उन्हें उसमें बैठकर यात्रा करने का अवसर मिला। हंसराज ने वर्ष 2017 से पहले की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक वृद्ध महिला पेंशन निकाल कर गांव लौट रही थी। मोटरसाइकिल सवार दो बदमाश आए और उसके पैसे छीनकर फरार हो गए। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2019 की एक घटना सुनाई। बताया कि भूमि मुआवजे का वितरण हो रहा था। उनके गांव में स्थित बैंक से एक मुस्लिम भाई ने 25 लाख रुपये निकाले और उन्हें तौलिया में बांधकर सिर पर रख लिया। दोपहर करीब 12 बजे वह इसी तरह पैसा लेकर जा रहे थे। हंसराज ने उनसे पूछा कि इतने पैसे इस तरह सिर पर रखकर ले जा रहे हो, कोई छीन लेगा। इस पर उन्होंने जवाब दिया, "कैसे कोई छीन लेगा, यह बाबाजी का राज है।" हंसराज ने कहा कि इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्ष 2017 से पहले क्या स्थिति थी और अब क्या स्थिति है। उन्होंने कहा कि वह भगवान से प्रार्थना करते हैं कि सीएम योगी फिर से मुख्यमंत्री बनें। हज से लौटकर योगी जी को आशीर्वाद देने आया: जफरू खां बुजुर्ग किसान जफरू खां ने कहा कि प्रदेश के मुसलमान भी कह रहे हैं कि "बाबा का शासन बहुत शानदार है।" आज मैं चप्पल पहनकर हवाई जहाज में बैठा। यह मेरे लिए एक विशेष अनुभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में क्षेत्र के लोगों को काफी तरक्की देखने को मिली है। सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना है। अनेक कंपनियां और फिल्म सिटी भी क्षेत्र में स्थापित हो रही है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तैयार हो रहे हैं, जिससे लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। बच्चों के भविष्य के लिए बहुत अच्छे कार्य हुए हैं। मैं हज से लौटकर मुख्यमंत्री जी को आशीर्वाद देने आया हूं। सीएम योगी ने बनाया उत्तम प्रदेश: जयवीर सिंह मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान किसान जयवीर सिंह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी जमीन से बहुत प्रेम था। लेकिन, मेरे भैया ने कहा कि जरूरत पड़ने पर योगी जी के सहयोग के लिए जान तक अर्पित कर देंगे। मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के विकास के लिए बहुत मेहनत की है। उन्होंने कहा था कि मैं उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बना दूंगा, जिसे आज हम सच होता देख रहे हैं।  तो अधूरा रह जाता एमबीबीएस का सपना: डॉ. हिरा राशिद एएमयू से एमबीबीएस करने वाली जेवर के किसान की बेटी डॉ. हिरा राशिद ने कहा कि अगर योगी जी का राज नहीं होता तो मेरा एमबीबीएस डॉक्टर बनने का सपना कभी पूरा नहीं हो पाता। मुझे यह कहते हुए बड़ा गर्व महसूस हो रहा है कि जिस भूमि पर मेरे पिता अन्न उगाते थे, आज उसी भूमि से उड़ान भरकर मैं मुख्यमंत्री से मिलने आई हूं। एक समय ऐसा था जब क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे और स्कूल जाने के लिए बस की सुविधा भी ठीक से नहीं थी। लेकिन सीएम योगी जी के नेतृत्व में जैसे-जैसे विकास हुआ,  क्षेत्र में तरक्की बढ़ी और शिक्षा के अवसर बेहतर हुए। वर्ष 2021 में मैंने बिना किसी कोचिंग के नीट परीक्षा उत्तीर्ण की। मुझे इसके लिए जो भी बुनियादी सुविधाएं मिलीं, वह सब योगी जी के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों की वजह से संभव हो पाया। पुराने और नए जेवर में जमीन-आसमान का अंतर: रीता संवाद के दौरान रीता ने जेवर क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने और नए जेवर में जमीन आसमान का अंतर है। वर्ष 1997 में उनकी शादी हुई थी। उस समय क्षेत्र में कुछ भी नहीं था। पढ़ाई के लिए लोगों को खुर्जा या अन्य स्थानों पर जाना पड़ता था। 2017 के बाद क्षेत्र में एकदम से कनेक्टिविटी बढ़ी। इसकी वजह से बच्चों को इतनी सुविधाएं मिली हैं कि वे वहीं रहकर उच्च शिक्षा तक प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जेवर के किसी किसान को कभी ऐसा अवसर नहीं मिला था कि वह विमान में बैठकर यहां पहुंच सके। जब वे लोग विमान की खिड़की से बाहर देख रहे थे तो एक-दूसरे से कह रहे थे, "यह तुम्हारा खेत है, यह हमारा खेत है।" इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए हम लोग मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हैं। इतना बड़ा प्रोजेक्ट बिना किसी विरोध-प्रदर्शन के साकार हुआ है, जिसमें हम सभी लोगों की भागीदारी रही है।  एयरपोर्ट से क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई दिशा: महेंद्र शर्मा किसान महेंद्र शर्मा ने कहा कि योगी जी के प्रयासों से आज उनके क्षेत्र … Read more

मारवाड़ को बड़ी राहत, सेई टनल की क्षमता 4 गुना बढ़ाने का काम अंतिम चरण में

 जयपुर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने सोमवार को उदयपुर जिले के कोटड़ा का दौरा किया। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बहुप्रतीक्षित सेई बांध की टनल (सुरंग) की चौड़ाई बढ़ाने के चल रहे निर्माण कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। श्री कुमावत ने टनल के भीतर जाकर निर्माण कार्य की प्रगति देखी और अधिकारियों से अब तक हुए कार्य, बची हुई खुदाई और कंक्रीट लाइनिंग के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी ली। योजना के लिए ₹100 करोड़ का बजट, 95% काम पूरा कुमावत ने बताया कि सेई बांध से अतिरिक्त पानी को जवाई बांध तक पहुँचाने के लिए बनी 6.7 किलोमीटर लंबी सुरंग को चौड़ा करने के लिए सरकार ने बजट में कुल ₹100 करोड़ का प्रावधान किया है। पिछले तीन साल से चल रहे इस कार्य का करीब 95 फीसदी हिस्सा पूरा हो चुका है। अब केवल 90 मीटर टनल का कार्य बाकी है, जिसे आगामी 15 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिमी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है और निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। साथ ही, उन्होंने टनल के अंदर काम कर रहे श्रमिकों और इंजीनियरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने की हिदायत दी। जल निकासी क्षमता होगी 4 गुना, 22 दिन में भरेगा जवाई बांध कुमावत ने बताया कि इस टनल का विस्तार होने से पानी की निकासी क्षमता 328 क्यूसेक से बढ़कर 1376 क्यूसेक हो जाएगी। 4 गुना  क्षमता बढ़ने से मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी व्यर्थ बहकर गुजरात नहीं जाएगा। इससे पाली, सिरोही और जालोर जिलों को भरपूर पानी मिल सकेगा। उन्होंने आगे बताया कि वर्तमान में टनल की चौड़ाई कम होने के कारण सेई बांध से जवाई बांध तक पानी पहुँचने में 45 से 50 दिन का समय लगता है लेकिन यह कार्य पूरा होने के बाद मात्र 22 दिन में ही जवाई बांध को 74 एमसीएफटी पानी मिलने लगेगा, जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। मारवाड़ के लिए संजीवनी है यह परियोजना सेई बांध और इसकी टनल मारवाड़ क्षेत्र विशेषकर पाली जिले के लिए जीवनदायिनी मानी जाती है। कोटड़ा के सेई बांध से पानी को इस टनल के जरिए जवाई बांध में डाइवर्ट किया जाता है। जवाई बांध पाली और जोधपुर के कई इलाकों की प्यास बुझाता है। वर्तमान में टनल की क्षमता कम होने के कारण मानसून के दौरान सेई बांध का अतिरिक्त पानी बहकर गुजरात चला जाता है। टनल की चौड़ाई बढ़ने से पानी का प्रवाह (डिस्चार्ज क्षमता) तेजी से बढ़ेगा। मानसून का अतिरिक्त पानी व्यर्थ बहने से बचेगा। जवाई बांध कम समय में और अधिक मात्रा में भरा जा सकेगा। पाली सहित पूरे मारवाड़ क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई संकट का स्थाई समाधान होगा। इको-टूरिज्म और सौंदर्यकरण योजना   कुमावत ने कहा कि अब इस बांध क्षेत्र को इको-टूरिज्म और स्थानीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत बांध की प्राकृतिक सुंदरता का उपयोग कर पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इस दौरान किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह गलथनी, अनोप सिंह राठौड़, पूनम सिंह परमार, निम्बेश्वर महादेव ट्रस्ट के अध्यक्ष जगत सिंह, शिवराज सिंह बिठिया, श्री रविकांत रावल भी मौजूद रहे।  

48 टीमों के वर्ल्ड कप में भी भारत बाहर! जानिए भारतीय फुटबॉल आखिर कहां पिछड़ गया

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा और मेक्सिको की सह-मेजबानी में खेला जा रहा है. दुनिया के 48 देश फुटबॉल के इस महाकुंभ में शिरकत कर रहे हैं, मगर अपना भारत वर्ल्ड कप से एक बार फिर गायब है. जब भी फीफा वर्ल्ड कप का आगाज होता है, तो भारत के करोड़ों प्रशंसक उस जुनून से इस टूर्नामेंट को देखते हैं, मानो उनका देश भी इसमें भाग ले रहा हो. सोशल मीडिया पर बहस होती है, घरों में पसंदीदा टीमों के लिए जश्न मनाया जाता है और पूरा देश फुटबॉल के रंग में रंग जाता है. कोई लियोनेल मेसी की टीम को चीयर करता नजर आता है, तो कोई रोनाल्डो के देश पुर्तगाल का समर्थक होता है. लेकिन इस उत्साह के बीच एक सवाल हर बार सामने आ खड़ा होता है- आखिर सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? यह सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि भारत का फुटबॉल से रिश्ता नया नहीं है. देश में लाखों बच्चे फुटबॉल खेलते हैं, करोड़ों लोग इसे देखते हैं और कई राज्यों में यह खेल क्रिकेट जितना ही लोकप्रिय है. इसके बावजूद भारतीय टीम आज तक विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच तक नहीं पहुंच सकी. फीफा के सदस्य देशों की संख्या 211 है, जिसमें भारत भी शामिल है. आपको जानकर ये दुख होगा कि भारत फिलहाल फीफा रैंकिंग में 138वें स्थान पर हैं. केप वर्डे और कुराकाओ जैसे छोटे देश भी फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं. भारत फीफा वर्ल्ड कप तो कभी खेल नहीं पाया, एशिया में भी उसकी स्थिति अच्छी नहीं हैं. भारतीय टीम अगले साल होने वाले एएफसी एशियन कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर सकी, जो किसी शर्मिंदगी से कम नहीं है. वैसे भारत फीफा वर्ल्ड कप खेलने के सबसे करीब 1950 में पहुंचा था. ब्राजील में आयोजित उस वर्ल्ड कप के लिए भारत ने बिना कोई क्वालफाइंग मैच खेले ही क्वालिफाई कर लिया था. एशियाई क्वालिफाइंग ग्रुप की टीमें- बर्मा (अब म्यांमार), इंडोनेशिया और फिलीपींस प्रतियोगिता से हट गई थीं, जिससे भारत को तब डायरेक्ट एंट्री मिल गई. स्वीडन, इटली और पराग्वे जैसी टीमों के साथ भारत को ग्रुप में रखा गया था, लेकिन टीम ब्राजील पहुंच ही नहीं सकी. लंबे समय तक यह कहानी सुनाई जाती रही कि फीफा ने भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं दी, इसलिए टीम ने टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया. हालांकि पूरा सच यह नहीं था. असल वजह आर्थिक और प्रशासनिक थी. आजादी के बाद देश संसाधनों की कमी से जूझ रहा था. टीम को ब्राजील भेजने में काफी ज्यादा खर्च लगता और पर्याप्त तैयारी का समय भी नहीं था. साथ ही उस समय अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ओलंपिक को वर्ल्ड कप से ज्यादा महत्वपूर्ण मानता था. नतीजा यह हुआ कि भारत ने सबसे बड़ा मौका गंवा दिया. 1950 के बाद भारत ने कई बार फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर में हिस्सा लिया, लेकिन कभी भी अंतिम स्टेज तक नहीं पहुंच सका. कई बार टीम ने उम्मीद जगाई, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में अनुभव और गुणवत्ता की कमी साफ नजर आई. बाइचुंग भूटिया, सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ियों ने 21वीं सदी में भारतीय फुटबॉल को नई पहचान दी. टीम ने एशियाई स्तर पर कुछ अच्छी जीतें भी दर्ज कीं, लेकिन जापान, साउथ कोरिया, ईरान, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों से भारत अब भी काफी पीछे है. एक समय भारतीय टीम कम से कम एशिया में तो अपना दबदबा बनाने में जरूर सफल रही थी. 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स ने भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को 2-1 के अंतर से हराकर गोल्ड मेडल जीता था. चुन्नी गोस्वामी, पीके बनर्जी और तुलसीदास बलराम की तिकड़ी की वजह से ही भारतीय टीम ने ये ऐतिहासिक सफलता अर्जित की थी. फिर बैंकॉक में आयोजित 1970 के एशियाई खेलों में भारतीय फुटबॉल टीम ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही. इसके बाद से जो भारतीय फुटबॉल में गिरावट आनी शुरू हुई, वो अब तक जारी है. क्या क्रिकेट जिम्मेदार है? भारत के फुटबॉल वर्ल्ड कप से दूर रहने की बड़ी वजह क्रिकेट को माना जाता है, लेकिन पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है. यह सच है कि क्रिकेट भारतीय स्पोर्ट्स पर लगभग एकाधिकार रखता है. पैसा, प्रायोजक, मीडिया कवरेज और लोकप्रियता- सब कुछ क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमता है. ऐसे में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी फुटबॉल की बजाय क्रिकेट चुन लेते हैं. लेकिन सिर्फ क्रिकेट को दोष देना भी गलत होगा. जापान, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया जैसे देशों में दूसरे खेल भी लोकप्रिय हैं, फिर भी उन्होंने मजबूत फुटबॉल संस्कृति विकसित की है. ऑस्ट्रेलिया तो क्रिकेट में भी हमेशा से एक मजबूत शक्ति रहा है. असली फर्क योजनाओं, निवेश और दीर्घकालिक सोच का है. भारतीय फुटबॉल लंबे समय से प्रशासनिक विवादों से भी जूझता रहा है. एआईएफएफ में नेतृत्व परिवर्तन, कानूनी विवाद और नीतिगत अस्थिरता के कारण कई योजनाएं अधूरी रह गईं. यहां तक इंडियन सुपर लीग (ISL) का 12वां सीजन किसी तरह इस बार आयोजित करवाया जा सका. आखिर कहां पिछड़ गया भारत? भारतीय फुटबॉल में सबसे बड़ी समस्या प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमी है. दुनिया की सफल फुटबॉल टीमें खिलाड़ियों को 8-10 साल की उम्र से तैयार करना शुरू कर देती हैं. उनके पास मजबूत स्कूल लीग, स्थानीय टूर्नामेंट, हजारों कोच और आधुनिक एकेडमी होती हैं. बच्चे हर साल दर्जनों प्रतिस्पर्धी मैच खेलते हैं और धीरे-धीरे प्रोफेशनल लेवल तक पहुंचते हैं. भारत में यह ढांचा अभी भी कमजोर है. कई राज्यों में बच्चों को नियमित रूप से प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका तक नहीं मिलता. कोचिंग की कमी, कमजोर स्काउटिंग सिस्टम और सीमित सुविधाएं भी बड़ी बाधाएं हैं. बिना स्थिर और पेशेवर प्रशासन के किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना मुश्किल है. वैसे उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है. 2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई. इससे एशियाई देशों के लिए अधिक स्लॉट उपलब्ध हुए हैं. सैद्धांतिक रूप से भारत की संभावनाएं पहले से बेहतर हुई हैं, लेकिन सिर्फ अतिरिक्त स्थान मिल जाने से बात नहीं बनेगी. भारत को स्कूल स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना होगा, हजारों नए कोच तैयार … Read more