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नई सड़कों और पुलों को लेकर योगी सरकार की बड़ी तैयारी, बजट और टेंडर प्रक्रिया तेज

लखनऊ  अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार विकास कार्यों को रफ्तार देने में जुट गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलीय दौरा शुरू कर दिए हैं। इन दौरों में मुख्यमंत्री जन प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। जन प्रतिनिधियों से उनके विधान सभा क्षेत्र में इस वर्ष नई सड़कें व पुल-पुलियों की प्राथमिकता की जानकारी ले रहे हैं। विभाग की तैयारी जुलाई से ही नई योजनाओं के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को वाराणसी मंडल में जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक मंडलीय दौरे की शुरूआत कर दी। मुख्यमंत्री रविवार को गोरखपुर में गोरखपुर मंडल के जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री का मंडलीय दौरा इसी महीने पूरा हो जाने की उम्मीद है। निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं की जा रहीं तय मंडलीय बैठकों के माध्यम से इस साल विभागीय बजट से नई सड़कें व पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। जिसके आधार पर पीडब्ल्यूडी निर्माण कार्यों को तेजी से शुरू कराएगा। विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान के मुताबिक जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर सभी जिलों की कार्ययोजना आ गई है। मुख्यमंत्री की मंडलीय बैठकें पूरी हो जाने के बाद चयनित कार्यों का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि जुलाई से ही विभाग चयनित कार्यों के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया का काम शुरू कर देगा। जिससे सितंबर से धरातल पर युद्धस्तर पर काम शुरू कराया जा सके। आवंटित किए 35156 करोड़ इस वित्तीय वर्ष में पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्यो के लिए 35,156 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जिसमें से 11,718 करोड़ रुपये से नई सड़कें व पुल-पुलिया बनाई जाएंगी। शेष बजट पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर खर्च किया जाएगा। लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई सड़कें व पुल-पुलियों का काम इस वर्ष शुरू किया जाना है। विभाग ने तय किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच करोड़ रुपये तक की लागत वाली योजनाओं को 50 प्रतिशत धनराशि तथा इससे बड़ी योजनाओं के लिए 20 से 30 प्रतिशत तक बजट जारी किया जाएगा।  

महाभारत युद्ध के 18 दिन: हर दिन की प्रमुख घटनाओं का क्रम

 महाभारत इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है, जिसमें असंख्य लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 18 दिनों तक चले इस युद्ध में हर दिन नई घटनाएं हुईं और अनेक महान योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए. योगेश्वर श्रीकृष्ण ने हर परिस्थिति में धर्म की रक्षा की और हर दिन जय-पराजय के नए उदाहरण सामने आए. युद्ध शुरू होने से पहले भीष्म पितामह के सुझाव पर कौरवों और पांडवों ने मिलकर कुछ नियम बनाए. जैसे युद्ध सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही होगा, समान श्रेणी के योद्धा आपस में युद्ध करेंगे, निहत्थे या शरण में आए व्यक्ति पर प्रहार नहीं किया जाएगा और एक योद्धा पर एक से अधिक योद्धा एक साथ आक्रमण नहीं करेंगे. पहला दिन युद्ध आरंभ से पहले अर्जुन मोह में पड़ गए थे, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता का उपदेश दिया था. युयुत्सु कौरवों का साथ छोड़कर पांडवों में शामिल हो गया था. पहले दिन पांडवों को भारी हानि हुई थी. दूसरा दिन भीष्म, द्रोण, अर्जुन और सात्यकि के बीच भयंकर युद्ध हुआ था. भीम ने हजारों सैनिकों का वध किया. इस दिन पांडवों को बढ़त मिली. तीसरा दिन भीम और घटोत्कच ने कौरव सेना को पीछे धकेला. भीष्म के प्रकोप को देखकर कृष्ण स्वयं हस्तक्षेप करने आगे बढ़े, लेकिन अर्जुन ने उन्हें रोका. चौथा दिन भीम ने कौरव सेना में भय फैला दिया और गज सेना का संहार किया. कौरवों को भारी नुकसान हुआ. पांचवां दिन भीष्म ने पांडव सेना में हाहाकार मचा दिया. सात्यकि के पुत्रों की मृत्यु हुई. दोनों पक्षों को भारी हानि हुई. छठा दिन मकर और क्रौंच व्यूह में युद्ध हुआ था. भीष्म ने पांचाल सेना का संहार भी किया था. सातवां दिन अर्जुन ने कौरव सेना को तहस-नहस किया. दुर्योधन को पराजय का सामना करना पड़ा. आठवां दिन भीम ने दुर्योधन के कई भाइयों का वध किया था. इरावान मारा गया था. कौरवों को अधिक क्षति हुई. नौवां दिन भीष्म के प्रचंड आक्रमण से पांडवों को भारी नुकसान हुआ. कृष्ण को शस्त्र उठाने की नौबत आ गई. दसवां दिन शिखंडी की सहायता से अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या पर लिटा दिया था. जिसके कारण कौरवों ने अपना सबसे बड़ा योद्धा खो दिया था. ग्यारहवां दिन द्रोणाचार्य सेनापति बने. उन्होंने युधिष्ठिर को बंदी बनाने का प्रयास किया, लेकिन अर्जुन ने उन्हें बचा लिया. बारहवां दिन कौरवों की योजना फिर असफल रही. अर्जुन ने युधिष्ठिर को बचाया. तेरहवां दिन चक्रव्यूह रचा गया. अभिमन्यु वीरता से लड़ा, लेकिन अंततः अनेक योद्धाओं ने मिलकर उसका वध कर दिया. यह पांडवों के लिए सबसे बड़ी क्षति थी. चौदहवां दिन अर्जुन ने सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की थी. पंद्रहवां दिन अश्वत्थामा की झूठी खबर फैलाकर द्रोण को निराश किया गया और धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया. सोलहवां दिन कर्ण सेनापति बने. उन्होंने भीषण युद्ध किया, लेकिन घटोत्कच को मारने के लिए अपनी अमोघ शक्ति का प्रयोग करना पड़ा. सत्रहवां दिन अर्जुन ने कर्ण का वध किया. कौरव सेना का मनोबल पूरी तरह टूट गया. अठारहवां दिन अंतिम दिन अश्वत्थामा ने रात में पांडव शिविर पर हमला कर द्रौपदी के पुत्रों का वध किया. अंततः भीम ने दुर्योधन का वध किया और पांडवों को विजय प्राप्त हुई थी.

केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन पर बड़ा अपडेट, 8वें पे कमीशन से बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली 8वें पे कमीशन को लेकर अब प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। वित्त आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें कर रहा है। कर्मचारी संगठनों से लगातार राय मांगी जा रही है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाह वित्त आयोग की बैठकों और इससे जुड़ी जानकारी पर बनी हुई है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की फिटमेंट फैक्टर पर सबसे अधिक निगाह है। 6वें और 7वें वित्त आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर ही केंद्र में रहा था। इसी से सैलरी संशोधन, डीए अन्य सभी कैलकुलेट किया जाएगा। बता दें, 28 फरवरी 2014 को 7वें वित्त आयोग का गठन किया गया था। लेकिन इसके लागू होने में 21 महीने का समय लगा था। 19 नवंबर 2015 को 7वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट जमा की थी। 8वें वित्त आयोग की बात करें तो इसका गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग के पास रिपोर्ट जमा करने के लिए 18 महीने का समय है। रिपोर्ट्स के अनुसार पे कमीशन 25 जुलाई 2027 तक सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर तय रिपोर्ट को जमा कर सकता है। जिसपर अंतिम फैसला सरकार की तरफ से लिया जाएगा। क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? एक तरह से फॉर्मूला होता है जिसके कैलकुलेशन के आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी का पता चलता है। इसी फॉर्मूला के जरिए पुराने बेसिक पे की जगह नया रिवाइज बेसिक सैलरी तय किया जाता है। कैसे प्रयोग होता है फॉर्मूला? मौजूदा बेसिक पे x फिटमेंट फैक्टर = नया बेसिक पे सातवें बेसिक पे के वक्त पर फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। जिसके बाद मिनिमम बेसिक सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों की 7000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये के स्तर पर पहुचं गया। बता दें, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी में हर 10 साल में एक बार इजाफा होता है। इस बार कितना फिटमेंट फैक्टर रह सकता है? अभी तक 8वें पे कमीशन के लिए कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर का ऐलान नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2.28 से 3.83 फिटमेंट फैक्टर इस बार तय किया जा सकता है। पहले के समय में फिटमेंट फैक्टर नहीं हुआ करता था। जिसकी वजह से पे कमीशन की तरफ से सैलरी रिवीजन के लिए अलग-अलग फैक्टर्स को आधार बनाया जाता था। जिसके बाद कोई फैसला होता था। हालांकि, तब भी मूल में कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और भत्ता ही होते थे। जिसे मार्केट के अनुसार बढ़ाया जाता था। बता दें, 8वें पे कमीशन के फैसलों का असर 1.1 केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को होगा।

RBI का DEA Fund: 10 साल से निष्क्रिय खातों का पैसा ऐसे करें वापस क्लेम

नई दिल्ली क्या आपके या आपकी फैमिली के किसी मेंबर का पुराना बैंक अकाउंट लंबे टाइम से यूज नहीं हुआ है? या फिर किसी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD की मैच्योरिटी के बाद उसकी रकम को किसी ने भी क्लेम नहीं किया है, तो ऐसे मामलों में आपका ये डिपाजिट हमेशा के लिए गायब नहीं होता बल्कि आप इस पैसे को वापस पा सकते हैं। जी हां, भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के पास ऐसी रकम को सुरक्षित रखने की खास व्यवस्था है और सही प्रोसेस अपनाकर इसे दोबारा हासिल किया जा सकता है। RBI ने ऐसे निष्क्रिय और बिना दावे वाले एकाउंट्स की रकम को संभालने के लिए Depositor Education and Awareness यानी DEA Fund बना रखा है। मई 2014 में शुरू किए गए इस फंड में उन एकाउंट्स का पैसा ट्रांसफर किया जाता है, जो लगातार 10 साल तक इनएक्टिव हैं या जिनकी जमा राशि पर कोई दावा नहीं किया गया है कब 'अनक्लेम्ड डिपॉजिट' बन जाती है आपका पैसा? RBI के रूल्स के अनुसार अगर किसी सेविंग्स या करंट अकाउंट में 10 साल तक कोई लेनदेन नहीं होता या किसी FD की मैच्योरिटी के 10 साल बाद तक रकम नहीं निकाली जाती, तो उस पैसे को इस Unclaimed Deposit में रखा जाता है। इसके बाद बैंक उस राशि को DEA Fund में भेज देता है। हालांकि सबसे अच्छी बात ये है कि बैंक अकाउंट होल्डर या उसके कानूनी उत्तराधिकारी बाद में भी इस रकम को ले सकते हैं। ब्याज वाले अकाउंट के मामले में लागू रूल्स के मुताबिक ब्याज भी दिया जाता है। UDGAM Portal से कैसे ढूंढे अपना भुला हुआ पैसा? इस काम को आसान बनाने के लिए RBI ने UDGAM यानी Unclaimed Deposits-Gateway to Access Information पोर्टल काफी पहले लॉन्च किया था। आज आप इस पोर्टल के जरिए एक ही जगह पर कई बैंक अकाउंट में मौजूद अनक्लेम्ड डिपॉजिट की डिटेल्स देख सकते हैं। सबसे पहले तो इसके लिए आपको अपना नाम और मोबाइल नंबर एंटर करके रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा। इसके बाद अकाउंट होल्डर का नाम, बैंक का नाम और PAN, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या जन्मतिथि जैसी डिटेल्स देकर सर्च करना होगा। अगर आपके पास इनमें से कोई डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं है तो भी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। आप अकाउंट होल्डर का एड्रेस एंटर करके भी सर्च कर सकते हैं। कैसे वापस मिलेगा Unclaimed पैसा? अनक्लेम्ड पैसा वापस लेने के लिए सबसे पहले तो अकाउंट होल्डर या कानूनी उत्तराधिकारी को संबंधित बैंक में दावा करना होगा। इसके बाद बैंक वेरिफिकेशन प्रोसेस को पूरा करेगा। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ग्राहक को रकम और लागू ब्याज दिया जाएगा। क्लेम करना है काफी आसान     सबसे पहले अपने बैंक की किसी भी ब्रांच में जाएं।     आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे KYC डाक्यूमेंट्स के साथ क्लेम फॉर्म जमा करें।     डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होने के बाद बैंक आपकी राशि वापस कर देगा। किन अकाउंट का पैसा DEA Fund में जाती है? दरअसल DEA Fund में सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट, FD, RD, कैश क्रेडिट अकाउंट, अनक्लेम्ड डिमांड ड्राफ्ट, बैंकर चेक, NEFT क्रेडिट बैलेंस, प्रीपेड कार्ड बैलेंस और कई तरह के अन्य इनएक्टिव अकॉउंटस की राशि इसमें शामिल की जाती है।  

ग्राम पंचायत स्तर पर बड़े बदलाव, IAS–RAS अधिकारियों को मिली विशेष शक्तियां

 जयपुर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याओं, विशेषकर जमीन से जुड़े मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जनकल्याण शिविर के अन्तर्गत प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दिनांक 12 जून से 15 जुलाई तक 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। संभागीय आयुक्त और जिला कलक्टरों को मिले विशेष अधिकार इस महा-अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है। अभियान की अवधि के लिए समस्त संभागीय आयुक्तों और जिला कलक्टरों को विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया है। इसके तहत वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में 'नॉन-फील्ड' (कार्यालयों/गैर-क्षेत्रीय पदों पर) कार्यरत तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को तुरंत प्रभाव से तहसीलों या उप-तहसीलों के रिक्त पदों पर पदस्थापित कर सकेंगे राज्यभर में 12 जनवरी से शुरू हो रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' अभियान में मौके पर ही समस्या समाधान के लिए राज्य सरकार ने कई अधिकारियों की शक्तियों को शिविर प्रभारियों व अन्य अधिकारियों को डेलीगेट कर दी है। ये आदेश 12 जून से 15 जुलाई तक प्रभावी होंगे। शिविर प्रभारी आईएएस, आरएएस को मिली ये शक्तियां आदेशों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने एवं राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने की जिला कलक्टर की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दे दी गई हैं।   राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी की शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251-ए व उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने या नया मार्ग खोलने या विद्यमान मार्ग को चौड़ा करने के लिये उपखण्ड अधिकारियों को प्रदत्त शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्व अभिलेख की त्रुटियों के शुद्धिकरण के प्रकरणों के निस्तारण हेतु उपखण्ड अधिकारी की  शक्तियां भी शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दी गई हैं। शिविरों में नियुक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार को मिली शक्तियां राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 53 की उप-धारा (1) व (2) एवं उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत भूमि के बंटवारे की तहसीलदार की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को दी गई हैं। राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 251 (1) के तहत रास्ते तथा अन्य निजी सुखाचार के अधिकार के तहत तहसीलदार की शक्तियां शिविरों के लिए नियुक्त  समस्त नायब तहसीलदारों को प्रदान की गई हैं। नामान्तरकरण के मामलों की ग्राम पंचायत की शक्तियां और राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम 18 के अन्तर्गत तहसीलदार की शक्ति व राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (अधिनियम संख्या 15, वर्ष 1956) की धारा 128 के परन्तुक एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/36 दिनांक 04.09.1982 के तहत अविवादित सीमा ज्ञान के मामलो को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां शिविर में नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को प्रदत्त की गई हैं। ऐसे तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को  राज्य सरकार राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251 एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/34 दिनांक 14.09.1982 के तहत मार्गाधिकार या अन्य सुखाचार के वास्तविक उपयोग में विघ्न डाले जाने के मामलों को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां भी दे दी गई हैं। समय अवधि 15 दिन से 7 दिन की राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम के खण्ड (ख) के द्वितीय परन्तुक में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये भूमि आवंटन के लिये आवेदन प्रस्तुत किये जाने के लिये जारी उद्घोषणा के लिये निर्धारित पन्द्रह दिवस की कालावधि को कम कर सात दिन कर दिया गया है। भूमि आवंटन की राज्य सरकार की पॉवर कलेक्टर को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 102क के अन्तर्गत आबादी विस्तार हेतु आरक्षित भूमि को स्थानीय निकायों के अधीन किये जाने की राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियां  जिला कलक्टर को दी गई है।  

रेस कोर्स स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड पर सरकार का कब्जा, कानूनी लड़ाई की तैयारी

नई दिल्ली लगभग 15.20 एकड़ में फैला जयपुर पोलो ग्राउंड रेस कोर्स इलाके में स्थित है। जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय ने 1930 के आसपास दिल्ली पोलो क्लब को यह भूमि उपहार स्वरूप दी थी। वे खुद भी पोलो के मशहूर खिलाड़ी थे। तब से यह मैदान पोलो की धड़कन बना रहा। बेशक, दिल्ली का यह ग्राउंड उनके सपनों का विस्तार था। एक ऐसा मैदान, जो बिलियर्ड टेबल जितना चिकना हो। यहां राजकुमारों, सेना अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की टापें गूंजी। 1975 में ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स (अब किंग चार्ल्स) ने यहां मैच खेला। लेकिन इतिहास सिर्फ विजयों का नहीं, दर्द का भी गवाह है। नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी सीनियर यहां 5 जनवरी 1952 को पोलो खेलते हुए घोड़े से गिर गए थे और उनकी मृत्यु हो गई थी। उस दिन उनके बेटे, क्रिकेट लीजेंड मंसूर अली खान पटौदी का 11वां जन्मदिन था। वे वहां मौजूद थे। यह घटना दिल्ली के पटौदी की त्रासदी से प्रिंस चार्ल्स के मैच तक, अनगिनत किस्सों का मैदान खेल इतिहास की एक दुखद कड़ी बनी। फिर भी मैदान खिलाड़ियों का आकर्षण बना रहा। जिंदल पैंथर्स, पद्मनाभ सिंह जैसी टीमों ने यहां रोमांचक मुकाबले खेले। सांसों का हिस्सा  यह ग्राउंड सिर्फ खेल का मैदान नहीं, दिल्ली की सांसों का हिस्सा रहा। हरे-भरे पेड़ों और खुली हवा से घिरा जयपुर पोलो ग्राउंड प्रदूषण की मार झेलती राजधानी को थोड़ी राहत देता था। जयपुर पोलो ग्राउंड अब स्मृतियों की धूल में सिमट जाएगा। फिर भी, जो विरासत एक बार रची जाती है, वह कभी पूरी तरह मिटती नहीं। वह हवा में, कहानियों में और उन दिलों में बसती है, जिन्होंने कभी यहां घोड़ों की गति महसूस की। जयपुर के और भी प्रतीक  इस बीच, राजधानी में में जयपुर के कई अन्य महत्वपूर्ण प्रतीक भी मौजूद हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर में जयपुर स्तंभ है। यह करीब 145 फीट ऊंचा है। जब देश की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित हुई, उस खुशी में जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय ने इसे ब्रिटिश सरकार को भेंट किया था। नई दिल्ली के निर्माण के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने रायसीना क्षेत्र को चुना था। उन दिनों यह क्षेत्र जयपुर राज्य की संपत्ति था। महाराजा ने यह क्षेत्र ब्रिटिश सरकार को सौंपा और इस भेंट को जीवंत बनाए रखने के लिए वायसराय हाउस (वर्तमान राष्ट्रपति भवन) में जयपुर स्तंभ का निर्माण करवाया गया। इस पर महाराजा द्वारा भेजा गया चांदी का शुभकामना प्रतीक लगा है, जिस कारण इसे जयपुर स्तंभ कहा जाता है। जयपुर से कनॉट प्लेस तक जयपुर रियासत के राजा जय सिंह द्वितीय ने कनॉट प्लेस में राजधानी के सबसे प्राचीन हनुमान मंदिर का 1724 में जीर्णोद्धार करवाया था। उन्होंने हनुमान मंदिर से सटे शिव मंदिर की महत्ता को देखते हुए उसका भी जीर्णोद्धार कराया। जय सिंह द्वितीय ने ही कनॉट प्लेस के पास संसद मार्ग पर जंतर मंतर का निर्माण करवाया था। यह एक खगोलीय वेधशाला है, जिसका निर्माण 1724 में हुआ था। राजस्थान मामलों के जानकार और लेखक गोपेन्द्र नाथ भट्ट ने बताया कि कनॉट प्लेस के पास स्थित राजा बाजार भी जयपुर महाराजा के अधिकार क्षेत्र में था। IPA ने कहा, कानूनी लड़ाई जारी रहेगी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएडडीओ) ने शनिवार को दिल्ली के रेस कोर्स क्षेत्र स्थित 15.20 एकड़ के जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा अपने हाथ में ले लिया। यह कार्रवाई 20 मई को जारी बेदखली आदेश के बाद की गई, जिसमें एलएंडडीओ ने जमीन को वृहद सार्वजनिक उद्देश्य और जनहित के लिए आवश्यक बताते हुए कब्जा मागा था। हालांकि, आदेश में जमीन के प्रस्तावित उपयोग का उल्लेख नहीं किया गया था। इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) ने इस कार्रवाई को गलत, मनमाना और कानून के विपरीत बताया है। आईपीए के वकील मेजर (सेवानिवृत्त) निर्विकार सिह ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए एसोसिएशन फिलहाल कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करेगी।  

सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 80% लाभुकों का वेरिफिकेशन पूरा

पटना  राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के 95 लाख 82 हजार पेंशनधारियों ने अब तक जीवन प्रमाणीकरण कराया है। समाज कल्याण मंत्री डाॅ.श्वेता गुप्ता के मुताबिक अब तक राज्य के करीब 80 प्रतिशत लाभुकों ने जीवन प्रमाणीकरण करा लिया है। मंत्री ने शेष पेंशनधारियों से जल्द जीवन प्रमाणीकरण कराने की अपील की उन्होंने राज्‍य के शेष पेंशनधारियों से पंचायत स्तरीय शिविर या नजदीकी काॅमन सर्विस सेंटर के माध्यम से निशुल्क जीवन प्रमाणीकरण कराने की अपील की है, ताकि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि उन्हें निर्बाध रूप से मिलती रहे। समाज कल्याण विभाग द्वारा सभी पात्र लाभुकों तक संबंध‍ित योजनाओं को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इन योजनाओं की प्रखंड व पंचायत स्तर तक निगरानी ककायी जा रही है, ताकि सही लाभुक को योजना लाभ मिल सके। वहीं 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग जिन्हें पेंशन नहीं मिलती है, विभाग ने उनसे शीघ्र ही आवेदन करने की अपील की है। सबसे अधिक पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्वी चंपारण में लाभुक विभाग के आंकड़े के मुताबिक सबसे अधिक मधुबनी जिले में 4 लाख 78 हजार लाभुकों ने जीवन प्रमाणीकरण कराया है। इसके बाद पूर्वी चंपारण में 4 लाख 47 हजार, पटना में 4 लाख 43 हजार, मुजफ्फरपुर में 4 लाख 24 हजार लाभुकों ने प्रमाणीकरण कराया है।   इसी तरह समस्तीपुर में 4 लाख 10 हजार और दरभंगा जिले में 3 लाख 80 हजार लाभुकों ने अपना जीवन प्रमाणीकरण कराया है। सबसे कम शेखपुरा जिले में 62 हजार लाभुकों ने जीवन प्रमाणीकरण कराया है। इसके बाद शिवहर में 67 हजार, अरवल में 76 हजार और लखीसराय में 96 हजार लोगो ने जीवन प्रमाणीकरण कराया है।  

पश्चिमी विक्षोभ के असर से बदला मौसम, 4–5 दिन और बारिश के आसार

 लखनऊ प्रदेश में आंधी बारिश का दौर लगातार जारी है.  बरसात के बीच लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है.  शनिवार को भी राज्य के कई स्थानों में बरसात हुई.  राजस्थान में प्री मानसून अच्छी बरसात हो रही है. कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई. बरसात के कारण कई जगहों के तापमान में गिरावट हुई.  प्रदेश में जैसलमेर में तापमान सर्वाधिक 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि शुक्रवार की तुलना में करीब 3.4 डिग्री सेल्सियस कम हुआ.   राजधानी जयपुर में भी सुबह से ही सूरज और बादल की आंख मिचौली चल रही है.  लोगों का उमस से हाल बेहाल है.  लेकिन तापमान में पिछले दिनों की तुलना गिरावट हुई है.   बदला मौसम का मिजाज मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम का मिजाज बदला हुआ है.  वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ हरियाणा और आसपास के क्षेत्र में परिसंचरण तंत्र के रूप में सक्रिय है.  इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नम हवाओं के कारण प्रदेश में आंधी-बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं. तेज मेघगर्जन के साथ आंधी-बारिश पिछले 24 घंटे में बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में तेज मेघगर्जन, आंधी के साथ बारिश दर्ज की गई.  सीकर के दांतारामगढ़ में सबसे ज्यादा 50 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई. आज भी बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, जोधपुर और कोटा संभाग के कुछ क्षेत्रों में तेज आंधी के साथ बारिश की संभावना जताई गई है.  इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं.  अगले 4 से 5 दिन तक प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है.

प्रति प्रसव 600 रुपये की दर से बढ़ा भुगतान, 25 हजार ममता कार्यकर्ताओं को फायदा

 पटना चालू वित्तीय वर्ष में ममता कार्यकर्ताओं को बतौर प्रोत्साहन राशि 6.60 करोड़ रुपये मिलेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अंतिम पूरक अनुदान में भी प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था हो सकती है। उल्लेखनीय है कि बिहार की ममता कार्यकर्ता को अभी प्रति प्रसव 600 रुपये दिए जा रहे हैं। उसे ही प्रोत्साहन राशि कहा जाता है। राज्य के मेडिकल कालेज, सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और रेफरल अस्पतालों के साथ ममता कार्यकर्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवा दे रही हैं। राज्‍य में 25 हजार ममता कार्यकर्ता संस्थागत प्रसव, सुरक्षित मातृत्व, और प्रसवोत्तर देखभाल में वे सहायता कर रहीं। अभी उनकी संख्या लगभग 25000 है। उनके सहयोग से स्वास्थ्य मानकों में सुधार हुआ है और संस्थागत प्रसव के प्रति रुझान बढ़ा है। प्रतिदान यह कि इस योजना से हजारों ग्रामीण महिलाओं को नियमित रोजगार मिला है। यह योजना वर्ष 2008 में शुरू हुई थी। तब ममता कार्यकर्ता को प्रति प्रसव 100 रुपये मिलते थे। 2016-17 से 2024-25 के मध्य तक यह राशि 300 रुपये रही। विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2025 में छह अगस्त को स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प जारी कर प्रोत्साहन राशि 600 रुपये कर दी गई। प्रोत्साहन राशि का इतिहास यह योजना वर्ष 2008 में शुरू हुई थी। उस समय ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 100 रुपये मिलते थे। वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक यह राशि 300 रुपये रही। विधानसभा चुनाव से पहले 6 अगस्त 2025 को स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प जारी कर इसे बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया। ममता कार्यकर्ता की तीन प्रमुख भूमिकाएं     प्रसव में सहयोग : गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रेरित करना और प्रसव के दौरान सहायता करना।     जच्चा-बच्चा देखभाल : प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां और नवजात की देखभाल, पोषण और स्वच्छता की जानकारी देना।     जागरूकता फैलाना : ग्रामीण महिलाओं को सुरक्षित प्रसव, स्तनपान और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करना। 2026-27 में जिला/संस्था वार प्रोत्साहन राशि (रुपये में) सिविल सर्जन कार्यालय-राश‍ि गया (1): 14,57,000 गया (2): 23,91,000 पूर्वी चंपारण: 16,93,000 सारण: 25,04,000 समस्तीपुर: 25,04,000 मधुबनी: 23,56,000 दरभंगा: 20,07,000 पश्चिम चंपारण: 21,82,000 कटिहार: 28,08,000 सीतामढ़ी: 23,56,000 भागलपुर: 25,04,000 बक्सर: 15,84,000 जमुई: 14,11,000 बांका: 16,23,000 औरंगाबाद: 10,02,000 सहरसा: 20,07,000 पूर्णिया: 25,31,000 नवादा: 13,65,000 अरवल: 5,66,000 शिवहर: 12,29,000 खगड़िया: 14,83,000 किशनगंज: 15,85,000 लखीसराय: 13,20,000 नालंदा: 15,40,000 बेगूसराय: 18,89,000 सिवान: 13,65,000 रोहतास: 13,65,000 वैशाली: 20,64,000 मुजफ्फरपुर: 22,38,000 कैमूर: 18,89,000 सुपौल: 11,91,000 मधेपुरा: 11,91,000 गोपालगंज: 12,96,000 भोजपुर: 13,20,000 शेखपुरा: 7,40,000 जहानाबाद: 6,70,000 मुंगेर: 11,91,000 अररिया: 11,45,000 मेडिकल कॉलेज व अस्पताल मेडिकल कॉलेज, बेतिया: 8,14,000 भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान, पावापुरी: 99,000 जेएलएनएमसीएच, भागलपुर: 3,49,000 एएनएमएमसीएच, गया: 6,98,000 राजकीय मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, पूर्णिया: 2,93,000 प्रभावती अस्पताल, गया: 1,05,000 गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल, पटना सिटी: 80,000  

83 लाख की चोरी के खुलासे के बाद बिजली विभाग सख्त, टीमों का होगा गठन

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बिजली विभाग की चेकिंग टीम घर-घर पहुंचेंगी। प्लान तैयार है। जिले में बिजली चोरी पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए बड़े अभियान की तैयारी है। चार दिन पहले ‘हिन्दुस्तान’ अखबार ने बिजली चोरी को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद से जिम्मेदार अधिकारी हरकत में आ गए हैं। बिजली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द ही टीमों का गठन कर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, पॉवर कॉरपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार, जिले में एक दिन में दो लाख 78 हजार और एक महीने में तकरीबन 83 लाख रुपये की बिजली चोरी की जा रही है। बिजली चोरी का यह आंकड़ा चौकाने वाला है क्योंकि बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए तमाम प्रयास करने के बाद भी अगर ऐसा हो रहा है तो कहीं न कहीं व्यवस्था में सेंध लगाने जैसा है। इस मामले को ‘हिन्दुस्तान’ अखबार की ओर से ‘क्यों बत्ती गुल’ अभियान के तहत 9 जून को जिले में एक महीने में हो रही 83 लाख की बिजली चोरी शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर छपने के बाद जिम्मेदारों ने बिजली चोरी को रोकने के लिए नई रणनीति बनानी शुरू कर दी है। अधीक्षण अभियंता प्रशांत कुमार के अनुसार, बिजली चोरी को लेकर महकमा पहले से काफी गंभीर है। समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है, मगर इस बार और सख्ती के साथ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्रवाई करने के लिए टीमों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषकर कार्रवाई का फोकस उन इलाकों में रहेगा, जहां पर अधिक बिजली चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। बिजली चोरी के लिए चर्चित हैं शहर के ये मुख्य इलाके महकमे के आंकड़ों के अनुसार, शहर के गोड़ियाबाग, घोसी की पुलिया, दौलतबाग, नवाबपुरा, लालबाग, पुराना दसवां घाट, वारसी नगर, मुगलपुरा, बरवलान, सीतापुरी की टीचर्स कॉलोनी, मियां कॉलोनी, जयंतीपुर, रहमतनगर, पीतल बस्ती, असालतपुरा, चक्कर की मिलक हैं, जहां पर सबसे ज्यादा बिजली चोरी के मामले सामने आए हैं, मगर इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि बिजली चोरी के लिए चर्चित इतने क्षेत्र होने के बाद भी पिछले महीने कार्रवाई सिर्फ दो स्थानों पर हुई थी, इससे कहीं न कहीं जिम्मेदारों की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।