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राजस्थान में प्रमोशन की दौड़ बनी जानलेवा, 2 किलोमीटर दौड़ के बाद ASI दुर्गाराम को आया हार्ट अटैक

जोधपुर राजस्थान के जोधपुर से बड़ी खबर सामने आई है। एसआई पद पर प्रमोशन के लिए फिजिकल टेस्ट देने आए एएसआई की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतक एएसआई दुर्गाराम (50) बाड़मेर जिले के नेतराड़ गांव के रहने वाले थे। वे शुक्रवार सुबह मंडोर स्थित राजस्थान पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में प्रमोशन के लिए आयोजित फिजिकल परीक्षा देने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि दो किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के बाद उनके सीने में अचानक दर्द उठा। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को जोधपुर के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। जानकारी के अनुसार एएसआई दुर्गाराम शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे फिजिकल टेस्ट में शामिल होने के लिए जोधपुर के मंडोर स्थित राजस्थान पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे थे। यहां एसआई पद पर प्रमोशन के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही थी। दुर्गाराम ने परीक्षा के तहत दो किलोमीटर की दौड़ पूरी कर ली थी। इसके बाद उन्हें शारीरिक परीक्षा के अन्य चरणों में शामिल होना था। दौड़ पूरी करने के कुछ समय बाद दुर्गाराम की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। सुबह करीब 8:30 बजे उनके सीने में तेज दर्द हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी हालत बिगड़ती देख उन्हें तुरंत उपचार के लिए नजदीकी मंदिर हॉस्पिटल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान ही उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके चलते उनकी मौत हो गई। प्रमोशन के लिए आए थे दुर्गाराम एएसआई दुर्गाराम बाड़मेर जिले के नेतराड़ गांव के रहने वाले थे और वर्तमान में वे गिराब पुलिस थाने में एएसआई के पद पर कार्यरत थे। वे एसआई पद पर प्रमोशन पाने के लिए आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने जोधपुर आए थे। परीक्षा के दौरान अचानक हुई इस घटना से पुलिस महकमे में शोक का माहौल है। एएसआई दुर्गाराम की मौत की सूचना मिलते ही पैतृक गांव नेतराड़ में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सिनेमा हॉल में महंगे पानी की वसूली पर कंज्यूमर कोर्ट सख्त, सिनेपोलिस और कोका-कोला पर कार्रवाई

पटना बिहार की राजधानी पटना में सिनेमा हॉल के अंदर खाद्य सामग्रियों और पानी की बोतलों पर ली जाने वाली मनमानी कीमत के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट ने सख्त कदम उठाया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने सिनेपोलिस थिएटर और कोका-कोला कंपनी पर दोहरी मूल्य प्रणाली (ड्यूअल एमआरपी) अपनाने के लिए 85 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। आयोग ने कहा कि दर्शकों को बाहर से पानी लाने से रोककर अंदर महंगे दामों पर उत्पाद खरीदने के लिए विवश करना पूरी तरह गैर-कानूनी और उपभोक्ता अधिकारों का हनन है। अदालत के इस फैसले से थिएटर्स में होने वाली मनमानी वसूली पर लगाम लगेगी। 20 की बोतल 50 में बेचना पड़ा भारी ये मामला 23 सितंबर 2016 का है, जब एक परिवादी सिनेपोलिस थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे थे। थिएटर प्रशासन ने बाहर से पानी ले जाने पर प्रतिबंध लगा रखा था, जिसके कारण परिवादी को मजबूरी में हॉल के अंदर से पानी खरीदना पड़ा। खुले बाजार में जो पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर 20 रुपये में मिलता है, उसके लिए हॉल में 50 रुपये वसूले गए। 85 हजार रुपये जुर्माने का आदेश पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए इस कृत्य को अनुचित और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार माना। अदालत ने सिनेपोलिस और कोका-कोला कंपनी को भुगतान करने का निर्देश जारी किया। उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति: परिवादी को मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी। वाद व्यय: केस लड़ने में हुए खर्च के तौर पर उपभोक्ता को 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। कल्याण कोष में जमा: 50 हजार रुपये की बड़ी राशि राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करानी होगी। भुगतान की समय-सीमा: 45 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन न करने पर निर्धारित राशि पर 9% वार्षिक ब्याज लागू होगा। दोहरी कीमत वसूलने पर पूर्ण रोक उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि खुले बाजार की प्रचलित दर से अधिक पर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर या कोई अन्य उत्पाद नहीं बेचा जा सकता। इसके अलावा, बोतलों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) साफ और पठनीय रूप से लिखा होना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि आम ग्राहकों से अतिरिक्त वसूली न हो सके। उपभोक्ता मंत्रालय को कार्रवाई के निर्देश आयोग ने इस तरह के अनुचित व्यापार व्यवहार को जड़ से खत्म करने के लिए विधिक माप विज्ञान विभाग और उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय को भी पत्र भेजा है। आयोग ने दोनों विभागों को सिनेमा हॉलों और मॉल में चल रही मनमानी दोहरी कीमत प्रणाली को रोकने के लिए पूरे राज्य में कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

झारखंड को मिली नई रेल कनेक्टिविटी, जसीडीह बाईपास से इंजन रिवर्सल की परेशानी होगी खत्म

देवघर  हावड़ा-दिल्ली मेन रेल लाइन पर नई रेल कनेक्टिविटी के तहत जसीडीह रेल बाईपास का शुक्रवार को गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने उद्घाटन किया। इस अवसर पर नई रेल लाइन पर स्पेशल ट्रेन को सांसद के साथ पूर्व रेलवे की जीएम चेतना नंद सिंह (या संबंधित अधिकारी) एवं डीआरएम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने कहा कि जसीडीह रेल बाईपास से एक नए रूट का विकल्प मिला है। अब शंकरपुर स्टेशन पर यार्ड विकसित किया जाना चाहिए, जिससे जसीडीह स्टेशन पर दबाव घटेगा और इंजन के रिवर्सल (दिशा बदलने) का झंझट समाप्त हो जाएगा। सांसद ने कहा कि यह पिछड़ा इलाका आज तेजी से रेल कनेक्टिविटी में आगे बढ़ रहा है और इसके लिए रेल बाईपास बेहद जरूरी था। उन्होंने जामा और हंसडीहा रेल बाईपास की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देवघर अब गोड्डा रेल लाइन से सीधा जुड़ गया है। जल्द ही गोड्डा-पाकुड़ रेल लाइन को कैबिनेट से स्वीकृति मिल जाएगी। सांसद ने यह भी कहा कि हंसडीहा के आसपास मालगाड़ियों (फ्रेट) के लिए दो-तीन स्टेशन विकसित किए जाने चाहिए ताकि कोयले की डंपिंग हो सके। इसके अलावा झाझा-जसीडीह के बीच तुलसीटांड़ के पास माल ढुलाई के लिए मल्टी-मॉडल हब बनाया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि बिहार, बंगाल और संताल परगना क्षेत्र के पहले जसीडीह रेल बाईपास पर ट्रेनों का आवागमन जल्द ही शुरू होने वाला है। संताल परगना पहला ऐसा क्षेत्र है जहां रेल बाईपास का जाल बिछाया जा रहा है, जिसकी पहली कड़ी जसीडीह रेल बाईपास है। इस रेल बाईपास से संताल परगना के सुदूर इलाकों—गोड्डा, दुमका तथा भागलपुर-बांका को नया मार्ग मिल गया है। जसीडीह रेल बाईपास देवघर लिंक केबिन से 4.8 किमी का नया रेल ट्रैक है, जिस पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों का परिचालन होगा। इससे रांची व हावड़ा जाने वाली ट्रेनों का लगभग एक घंटा समय बचेगा। देवघर, दुमका, गोड्डा और बांका से खुलकर हावड़ा, रांची, धनबाद, गिरिडीह तथा कोडरमा की ओर जाने और लौटने वाली ट्रेनों को अब जसीडीह स्टेशन पर इंजन बदलने (रिवर्सल) की आवश्यकता नहीं होगी। रेलवे बोर्ड से अंतिम अनुमति मिलते ही इस नए रूट पर नियमित परिचालन शुरू हो जाएगा।

Jharkhand Education : शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में रिक्त पद जल्द भरने का निर्देश, केंद्र ने जताई चिंता

रांची केंद्र ने राज्य के जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में शिक्षकों के पद रिक्त होने पर चिंता जताई है। साथ ही झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) में भी फैकल्टी के रिक्त पदों का उल्लेख किया है। केंद्र ने कहा है कि इन शैक्षिक संस्थानों को सृदृढ़ कर तथा फैकल्टी की समुचित व्यवस्था कर ही राज्य में शिक्षा प्रशिक्षण को मजबूत बनाया जा सकता है। इससे उत्कृष्ट शिक्षक तैयार होंगे तथा विद्यालयों में शिक्षकों की कमी नहीं होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हाल ही में हुई एक बैठक में बताया गया कि जेसीईआरटी में 11 स्वीकृत पदों के विरुद्ध चार पदों पर ही फैकल्टी कार्यरत हैं। शेष पद रिक्त हैं। राज्य स्तरीय इस संस्थान में 65 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इसी तरह, जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के स्वीकृत 312 पदों के विरुद्ध 157 (50 प्रतिशत) पद रिक्त हैं। केंद्र ने कहा है कि यह देखा गया कि पिछले तीन वर्षों से रिक्त पदों की संख्या अधिक है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने उत्कृष्ट शिक्षकों के चयन के लिए इन संस्थानों की अहम भूमिका बताते हुए रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने के निर्देश दिए हैं। केंद्र के अनुसार, इन संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था खत्म कर नियमित शिक्षकों की भर्ती करने की आवश्यकता है। केंद्र ने यह भी कहा है कि स्कूलों के शिक्षकों के डायट्स में प्रतिनियुक्ति का असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ सकता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को रिक्त पदों की समीक्षा कर हर हाल में इस वर्ष तक भरने को कहा है। सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित होने हैं डायट राज्य के सभी जिलों के डायट को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाना है। इन संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरने का असर इस योजना पर भी पड़ सकता है। इसके लिए केंद्र से अनुदान भी मिलता है। डीएलएड पाठ्यक्रम संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका डीएलएड पाठ्यक्रम संचालित करने में डायट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विद्यालयों में कक्षा एक से पांच के बच्चों को पढ़ाने के लिए डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों की नियुक्ति होती है। इधर, राज्य सरकार डायट में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नियमावली गठित करने जा रही है। कैबिनेट की इसपर स्वीकृति मिलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हाे सकती है।  

एयरफोर्स की वर्दी पहनकर रौब झाड़ रहा था युवक, हैदराबाद में पुलिस ने पकड़ा; धोखाधड़ी की जांच शुरू

हैदराबाद हैदराबाद में भारतीय वायुसेना का अधिकारी बनकर घूम रहे एक शख्स को पुलिस ने हिरासत में लिया है. आरोपी सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में एयरफोर्स की वर्दी पहनकर तस्वीरें खिंचवा रहा था. वहां तैनात सैन्य सुरक्षा कर्मियों को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उससे पूछताछ की गई. जांच में कथित तौर पर पता चला कि वह भारतीय वायुसेना का अधिकारी नहीं है. इसके बाद सैन्य कर्मियों ने उसे बेगमपेट पुलिस के हवाले कर दिया।  पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान नीतेश कुमार पाल के रूप में हुई है. वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और फिलहाल हैदराबाद के नेरेडमेट इलाके में रहता है. बताया गया है कि वह पेशे से डिलीवरी एजेंट है. आरोप है कि उसने एयरफोर्स अधिकारी की झूठी पहचान बना रखी थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किस तरह और किन उद्देश्यों के लिए किया।  यह घटना 7 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:45 बजे की बताई जा रही है. उस समय सैन्य सुरक्षा कर्मियों ने सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में एक शख्स को फ्लाइंग ऑफिसर की वर्दी में घूमते और तस्वीरें लेते देखा. उसकी गतिविधियां सामान्य नहीं लगीं, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोककर पूछताछ की. पूछताछ के दौरान उसकी पहचान और वर्दी को लेकर संदेह गहरा गया. इसके बाद जांच में उसके वायुसेना का अधिकारी नहीं होने की बात सामने आई।  जांच के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर पता चला कि आरोपी ने इंस्टाग्राम पर भी अपनी प्रोफाइल एयरफोर्स अधिकारी के तौर पर पेश की थी. संदेह है कि वह इस पहचान का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर युवतियों से दोस्ती करने और उन्हें आकर्षित करने के लिए करता था. जांचकर्ताओं को यह भी शक है कि वह परेड ग्राउंड पर ऐसी तस्वीरें खिंचवाने पहुंचा था, जिन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड कर अपनी फर्जी पहचान को मजबूत दिखा सके. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।  सैन्य सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी को बेगमपेट पुलिस को सौंप दिया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी. अब आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट और इंस्टाग्राम प्रोफाइल की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उसने कहीं और भी युवतियों को अपनी कथित फर्जी पहचान के जरिए धोखा दिया या ऐसा करने की कोशिश की. इसके अलावा, इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका होने की आशंका की भी जांच की जा रही है।  फिलहाल, पुलिस की जांच का मुख्य फोकस आरोपी की सोशल मीडिया गतिविधियों, एयरफोर्स अधिकारी बनकर तस्वीरें खिंचवाने के मकसद और संभावित पीड़ितों की पहचान पर है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

बजाज फाइनेंस FD में निवेश का मौका, वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा 8.15% सालाना तक ब्याज

बजाज फाइनेंस ने फिक्स्ड डिपॉजिट की दरों में 40 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी की; वरिष्ठ नागरिक 8.15% सालाना तक कमा सकते हैं; रिन्यूअल पर अतिरिक्त 0.10% सालाना • 12 से 60 महीने की सभी अवधियों के लिए FD दरों में 15-40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी, 7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी • सामान्य जमाकर्ता (नए डिपॉजिट) अब 7.75% सालाना तक कमा सकते हैं; वरिष्ठ नागरिक 8.15% सालाना तक कमा सकते हैं मुंबई/पुणे  बजाज फाइनेंस लिमिटेड, भारत का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का गैर-बैंक, ने आज 12 से 60 महीने की सभी अवधियों के लिए अपने फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में 15 से 40 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी की। संशोधित दरें आज से प्रभावी हैं और नए डिपॉजिट तथा रिन्यूअल, दोनों पर लागू होती हैं। सबसे बड़ी बढ़ोतरी लंबी अवधियों पर है। 31 से 60 महीने के लिए दरों में सामान्य जमाकर्ताओं के लिए 35 बेसिस प्वाइंट और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई है। नया डिपॉजिट बुक करने वाले सामान्य जमाकर्ता अब 31 से 60 महीने के लिए संचयी आधार पर 7.75% सालाना तक कमा सकते हैं, जो पहले 7.40% था। 12 से 17 महीने के लिए दरें 6.60% से बढ़कर 6.80% सालाना और 18 से 30 महीने के लिए 6.85% से बढ़कर 7.00% सालाना हो गई हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अब सभी अवधियों में सामान्य दरों के ऊपर अतिरिक्त 0.40% सालाना मिलेगा, जो पहले 0.35% था। नए वरिष्ठ नागरिक डिपॉजिट पर 31 से 60 महीने के लिए दरें 8.15% सालाना तक हैं, जो पहले 7.75% थीं। 12 से 17 महीने के लिए दरें अब 7.20% सालाना और 18 से 30 महीने के लिए 7.40% सालाना हैं। रिन्यूअल पर अतिरिक्त लाभ मैच्योर हो रहे डिपॉजिट को रिन्यू करने वाले जमाकर्ताओं को अतिरिक्त 0.10% सालाना मिलेगा। इससे सामान्य जमाकर्ताओं के लिए दर 7.85% सालाना और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 8.25% सालाना तक हो जाएगी, जो संशोधित संरचना में सबसे अधिक है। जमाकर्ता संचयी विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें ब्याज का भुगतान मैच्योरिटी पर किया जाता है, या गैर-संचयी विकल्प, जिसमें मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना भुगतान होता है। गैर-संचयी दरों को भी उसी अनुरूप संशोधित किया गया है। उदाहरण के लिए, 31 से 60 महीने के डिपॉजिट पर मासिक भुगतान का विकल्प चुनने वाले वरिष्ठ नागरिक को अब 7.86% सालाना मिलेगा, जो पहले 7.49% था। सचिन सिक्का, सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट – डिपॉजिट्स एंड वेल्थ मैनेजमेंट, बजाज फाइनेंस, ने कहा, “फिक्स्ड डिपॉजिट संतुलित बचत पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए जो अनुमानित रिटर्न चाहते हैं। हमने अपनी दर वृद्धि को लंबी अवधियों के लिए अधिक रखा है, ताकि जमाकर्ता पांच साल तक के लिए उच्च रिटर्न लॉक कर सकें, एक ऐसे AAA-रेटेड डिपॉजिट पर जिसे वे कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन खोल सकते हैं। रिन्यूअल पर अतिरिक्त लाभ उन ग्राहकों को धन्यवाद देने का हमारा तरीका है जो अपनी बचत के लिए हम पर भरोसा बनाए रखते हैं।” ग्राहक बजाज फाइनेंस की वेबसाइट और ऐप के माध्यम से ऑनलाइन डिपॉजिट बुक या रिन्यू कर सकते हैं, या कंपनी की शाखाओं और पार्टनर चैनलों के माध्यम से कर सकते हैं। बजाज समूह की सदी पुरानी विरासत, लाखों ग्राहकों के भरोसे और AAA-रेटेड फिक्स्ड डिपॉजिट से समर्थित, बजाज फाइनेंस ग्राहकों को स्थिरता, प्रतिस्पर्धी रिटर्न और पूर्वानुमेयता का आकर्षक संयोजन प्रदान करता है। बजाज फाइनेंस फिक्स्ड डिपॉजिट क्यों बजाज फाइनेंस फिक्स्ड डिपॉजिट प्रोग्राम को CRISIL द्वारा AAA/Stable और ICRA द्वारा AAA/Stable रेटिंग प्राप्त है, जो वित्तीय दायित्वों की समय पर सर्विसिंग के लिए उच्चतम स्तर की सुरक्षा को दर्शाती है। निवेशक कम से कम ₹15,000 से शुरुआत कर सकते हैं, संचयी या गैर-संचयी भुगतान (मासिक, तिमाही, छमाही और सालाना) चुन सकते हैं और पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस प्रक्रिया के माध्यम से निवेश कर सकते हैं। लोन-अगेंस्ट-एफडी सुविधा एफडी को समय से पहले तोड़े बिना तरलता उपलब्ध कराती है। दर में बदलाव इस प्रकार हैं: सामान्य जमाकर्ता सामान्य FD: ₹15,000 से ₹3,00,00,000 (7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी) — तालिका 1 अवधि    मैच्योरिटी पर संचयी    मासिक    तिमाही    छमाही    सालाना 12 – 17 महीने    6.80    6.60    6.63    6.69    6.80 18 – 30 महीने    7.00    6.79    6.82    6.88    7.00 31 – 60 महीने    7.75    7.49    7.53    7.61    7.75 वरिष्ठ नागरिक सामान्य FD: ₹15,000 से ₹3,00,00,000 (7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी) — तालिका 2 अवधि    मैच्योरिटी पर संचयी    मासिक    तिमाही    छमाही    सालाना 12 – 17 महीने    7.20    6.97    7.01    7.08    7.20 18 – 30 महीने    7.40    7.16    7.20    7.27    7.40 31 – 60 महीने    8.15    7.86    7.91    7.99    8.15 रिन्यूअल रिन्यूअल — सामान्य जमाकर्ता सामान्य FD: ₹15,000 से ₹3,00,00,000 (7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी) — तालिका 1 अवधि    मैच्योरिटी पर संचयी    मासिक    तिमाही    छमाही    सालाना 12 – 17 महीने    6.90    6.70    6.73    6.79    6.90 18 – 30 महीने    7.10    6.89    6.92    6.98    7.10 31 – 60 महीने    7.85    7.59    7.63    7.71    7.85   रिन्यूअल — वरिष्ठ नागरिक सामान्य FD: ₹15,000 से ₹3,00,00,000 (7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी) — तालिका 2 अवधि    मैच्योरिटी पर संचयी    मासिक    तिमाही    छमाही    सालाना 12 – 17 महीने    7.30    7.07    7.11    7.18    7.30 18 – 30 महीने    7.50    7.26    7.30    7.37    7.50 31 – 60 महीने    8.25    7.96    8.01    8.09    8.25   बजाज फाइनेंस लिमिटेड के बारे में बजाज फाइनेंस लिमिटेड (‘BFL’, ‘बजाज फाइनेंस’, या ‘कंपनी’), बजाज फिनसर्व लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ पंजीकृत डिपॉजिट लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC-D) है और इसे NBFC-Investment and Credit Company (NBFC-ICC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। BFL ऋण देने और डिपॉजिट स्वीकार करने के कारोबार में है। इसका रिटेल, SME और कमर्शियल ग्राहकों के बीच विविध ऋण पोर्टफोलियो है तथा शहरी … Read more

Bihar Teacher Transfer: 5 लाख शिक्षकों का इंतजार बढ़ा, चुनाव के बाद ही शुरू होंगे सामान्य तबादले

पटना बिहार में विधान परिषद (MLC) चुनाव तक शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है। चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के बीच टीचर ट्रांसफर की अनुमति नहीं दी है। इसके बाद शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर प्रक्रिया को फिलहाल के लिए रोक दिया है। अब एमएलसी चुनाव होने के बाद ही शिक्षकों के सामान्य ट्रांसफर के आवेदन का पोर्टल खुलेगा। ऐसे में ट्रांसफर की राह देख रहे सरकारी शिक्षकों का इंतजार और बढ़ गया है। शिक्षा विभाग ने गुरुवार को अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी। विभाग के उप सचिव अजय सतीश भेंगरा ने अधिसूचना में कहा कि बिहार के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के स्थानांतरण की गतिविधियों को स्थगित कर दिया गया है। विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही टीचर ट्रांसफर की नई समय सीमा जारी की जाएगी। दो चरण के ट्रांसफर पूरे, तीसरे में सामान्य तबादले बिहार के सरकारी स्कूलों में तैनात 5 लाख से अधिक शिक्षकों के ऐच्छिक तबादले किए जाने हैं। ट्रांसफर के दो चरण पूरे किए जा चुके हैं। पहले चरण में स्कूलों में तैनात सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया गया, जबकि दूसरे चरण में म्युचुअल तबादले किए गए। समायोजन और म्युचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पिछले दिनों शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों की संशोधित सूची जारी की थी। इसके आधार पर ही तीसरे चरण में सामान्य तबादले की प्रक्रिया पूरी की जानी है। 4 अक्टूबर को खुलना था ट्रांसफर पोर्टल शिक्षा विभाग ने 4 अक्टूबर से सामान्य ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू करने की तारीख तय की थी। बीते रविवार से ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी। हालांकि, इससे पहले ही विभाग ने इस पर रोक लगा दी थी। बिहार में एमएलसी चुनाव के चलते आचार संहित लागू है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर चुनाव के बीच ट्रांसफर कराने के लिए अनुमति मांगी थी। चुनाव आयोग नहीं दी अनुमति राज्य निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को शिक्षा विभाग को लिखे पत्र में कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया जाए और एमएलसी चुनाव होने के बाद ही इसे आगे बढ़ाया जाए। इसके बाद शिक्षा विभाग ने भी शाम तक ट्रांसफर स्थगित करने की अधिसूचना जारी कर दी। बाढ़ की वजह से भी टल चुके हैं ट्रांसफर यह पहली बार नहीं है जब बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया को स्थगित किया गया है। इससे पहले बाढ़ की वजह से भी तबादले की प्रक्रिया को टाला जा चुका है। मॉनसून के दौरान बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में थे। पहले 17 सितंबर से सामान्य ट्रांसफर के लिए पोर्टल खुलने वाला था, लेकिन बाढ़ की वजह से उसे स्थगित कर अक्टूबर में तारीख तय की गई थी। अब चुनाव की वजह से इन्हें टाल दिया गया है।

गौरव गुप्ता के कॉमेडी शो पर विवाद, महिला को ‘यादवनी’ कहने पर सोशल मीडिया पर घिरे

कॉमेडी की दुनिया में आए दिन कोई ना कोई स्टैंड-अप कॉमेडियन ट्रोल होता रहता है. कई बार मुद्दे इतने बड़े हो जाते हैं कि कंट्रोवर्सी बन जाती है. अब इस लिस्ट में स्टैंड-अप कॉमेडियन गौरव गुप्ता का नाम शुमार हो चुका है. सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में वो ऑडियंस में बैठी एक महिला से उसके यादव सरनेम पर चुटकी लेते दिख रहे हैं. महिला को “यादवनी” कहने पर उसे ट्रोल किया जा रहा है. चलिए जानते हैं कि पूरा मामला है क्या. विवादों में गौरव गुप्ता वायरल वीडियो में गौरव ऑडियंस में बैठी महिला से उनका नाम पूछते हैं और फिर उन्हें “यादवनी” कहते हैं. जवाब में महिला कहती हैं कि उन्हें इस तरह बुलाया जाना पसंद नहीं है. गौरव हैरानी जताते हुए पूछते हैं कि ये आपकी सांस्कृतिक जड़ें हैं, है ना? महिला उनसे कहती है कि मुझे यह सुनने में अच्छा नहीं लगता. महिला के असहमति जताने के बाद भी गौरव नहीं रुकते हैं. वो कहते हैं कि तुम्हारा पति बनिया है. इसके बाद वो महिला के बोलने के तरीके और भाषा का भी मजाक बनाते हैं. उन्होंने महिसा की भाषा का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वो विदेश से आई हैं, जो इस तरह बात कर रही हैं. जब गौरव को पता चला कि महिला गुरुग्राम से है, तो वो उससे कहते हैं कि गुरुग्राम से हो, तो इतना एटीट्यूड किस बात का है? आपका लहजा तो ऐसा है जैसे सीधे ऑक्सफोर्ड से यहां उतरकर आई हों. गौरव ने महिला से ये भी कहा कि उसे कॉल सेंटर में काम करना चाहिए और गृहिणी बनकर वो अपना टैलेंट बर्बाद कर रही हैं. कॉमेडी पर उठे सवाल कॉमेडियन के जोक की आलोचना करते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने कहा- अगर आपकी कॉमेडी इस बात पर निर्भर है कि आप दर्शकों में किसी एक को अपमानित करें, ताकि बाकी लोग हंसें, तो यह समझदारी भरी कॉमेडी नहीं है. लोगों को हंसाने के लिए हुनर चाहिए. किसी एक व्यक्ति को मजाक बना देना आसान है. बेहतरीन हास्य ऐसा होता है, जिसमें उस व्यक्ति समेत सभी लोग हंसें, जिसके बारे में मजाक किया जा रहा है. कई लोगों ने कहा कि कहा आखिर क्यों हर बार जाति, धर्म और समुदाय पर निशाना साधा जाता है. कुछ ने कहा कि लगता है कि ऐसी कॉमेडी करके विवादों में आने का शौक है. एक यूजर ने लिखा कि जाति पर जोक करना शर्मनाक है.

राजस्थान में गिवअप अभियान का दूसरा चरण, अक्टूबर से दिसंबर तक घर-घर जाकर होगी जांच

 कोटपूतली-बहरोड़ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में अपात्र लाभार्थियों को चिन्हित कर योजना से बाहर करने तथा पात्र एवं वंचित परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ने के उद्देश्य से गिवअप अभियान के द्वितीय चरण के तहत जिले में अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, जयपुर के निर्देशानुसार एवं जिला कलेक्टर के निर्देशन में अभियान के तहत डोर-टू-डोर सर्वे कर पात्र एवं अपात्र लाभार्थियों की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। अभियान के तहत विशेष रूप से ऐसे शहरी वार्डों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां जनगणना-2011 के अनुसार 80 प्रतिशत से अधिक आबादी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर रही है। प्रथम चरण में पावटा क्षेत्र एवं नारायणपुर की ग्राम पंचायत जोधपुरा में सर्वे कार्य प्रारंभ किया जाएगा। सर्वे के दौरान ऐसे व्यक्ति एवं परिवारों को चिन्हित किया जाएगा, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार बहिष्करण श्रेणी में आते हैं। इनमें आयकर दाता, सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति तथा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले लाभार्थी शामिल हैं। अधिकारियों एवं सर्वे दलों द्वारा ऐसे अपात्र लाभार्थियों को स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा योजना से अपना नाम हटवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्वेच्छा से नाम नहीं हटवाने की स्थिति में नियमानुसार नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अभियान को प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए दैनिक सर्वे लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं। पात्र एवं जरूरतमंद परिवार लाभ से नहीं रहे वंचित सर्वे के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र एवं जरूरतमंद परिवार खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित नहीं रहे। सर्वे में चिन्हित पात्र एवं वंचित परिवारों के आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करवाए जाएंगे, ताकि पात्र परिवारों को नियमानुसार खाद्यान्न का लाभ उपलब्ध कराया जा सके। पात्रता के अनुरूप किया जा रहा लाभार्थियों का सत्यापन जिला रसद अधिकारी निकिता राठौड़ ने बताया कि गिवअप अभियान के माध्यम से खाद्य सुरक्षा योजना में पात्रता के अनुरूप लाभार्थियों का सत्यापन किया जा रहा है। पारदर्शी डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से अपात्र लाभार्थियों को योजना से हटाने तथा वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे राज्य के खाद्यान्न बजट पर पड़ने वाले अनावश्यक भार को कम करने के साथ-साथ सरकार की कल्याणकारी योजना का लाभ वास्तविक पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों तक सुनिश्चित किया जा सकेगा।

UFC Fight Rules: ऑक्टागन में कैसे जीतते हैं फाइटर्स, नॉकआउट से लेकर पॉइंट सिस्टम तक पूरी जानकारी

नई दिल्ली  UFC, जिसका मतलब है अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप। यह एक ऐसी संस्था है, जो मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) को प्रमोट करता है। एमएमए में दो फाइटर्स केज के अंदर पूरी दम से जीतने के लिए एक-दूसरे का खून बहाने से भी पीछे नहीं हटते हैं। एमएमए में एथलीट्स को स्ट्राइकिंग और ग्रैपलिंग का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। स्ट्राइकिंग का मतलब है कि फाइटर्स अपने हाथ और पैर का इस्तेमाल करते हुए पंचेस,किक्स,घुटने और कोहनी से एक-दूसरे को घायल करने की कोशिश करते हैं। बात करें ग्रैपलिंग की तो, इसमें फाइटर्स एक-दूसरे को रेसलिंग,ज्यू-जित्सू जैसे स्किल्स का उपयोग करते हुए सबमिशन के तहत टैप आउट कराने की कोशिश करते हैं।अगर कोई फाइटर्स टैप आउट कर देता है तो,वो फाइट हार जाता है। यूएफसी कैस काम करता है? यूएफसी फाइट ऑक्टोगन के अंदर होता है। यह एक 30 फीट चौड़ा, आठ तरफ वाला जालीदार पिंजरा होता है। ऑक्टोगन शुरुआत से ही यूएफसी का हिस्सा रहा है।यूएफसी के ज्यादातर फाइट तीन राउंड के होते हैं। हर एक राउंड पांच मिनट का होता है। वहीं मेन इंवेंट्स और चैंपियनशिप फाइट्स पांच राउंड के होते हैं। दो एथलीट्स के बीच फाइट, नॉकआउट, टेक्निकल नॉकआउट, सबमिशन या फिर जजेस के स्कोर के साथ खत्म होती है। अगर फाइट अंत तक जाता है यानी कोई भी फाइटर टैप आउट नहीं करता है या फिर नॉकआउट नहीं होता, तो ही जजेस के स्कोर के हिसाब से विजेता तय किया जाता है। जजेस हर राउंड में 10 अंको का स्कोरिंग सिस्टम फॉलो करते हैं।उनका ध्यान मुख्यत: चार चीजों पर होती है, जिसमें असरदार स्ट्राइकिंग और ग्रैपलिंग, अग्रेसन और ऑक्टोगन कंट्रोल शामिल है। हर मैच में तीन जज होते हैं, सभी जज केज के नजदीक बैठ कर अपना फैसला तय करते हैं। यूएफसी का नियम क्या है? यूएफसी फाइट में एमएमए के ही नियम लागू होते हैं, हालांकि समय के साथ इसमें भी कई बदलाव आए हैं।यूएफसी में फाइटर्स को कमर के नीचे और ऊपर मारने की अनुमति होती है। मगर इसके लिए भी कुछ स्पेशल रूल्स होते हैं। फाइटर्स सिर के पीछे वाले हिस्से और रीढ़ की हड्डी पर वार नहीं कर सकते।इसके अलावा आंख में उंगली करना, काटना, अपने सिर से विरोधी पर हमला करना, ग्रोइन पर मारना या ऐसी किसी मूव का इस्तेमाल करना, जो खतरनाक और हानि पहुंचाने वाले हों, यूएफसी के नियमों के खिलाफ है। अगर कोई खिलाड़ी नियमों का उल्लंघन करता है तो, उसके अंक काटे जा सकते हैं या फिर उसे मैच से बाहर भी किया जा सकता है। फाइट के दौरान अगर कोई फाइटर मुकाबला जारी रखने की हालत में न हो या वो अपने आप को सही से डिफेंड नहीं कर पा रहा हो तो, ऑक्टोगन के अंदर मौजूद रेफरी कभी भी फाइट को खत्म या रोक सकता है, क्योंकि फाइटर्स का सुरक्षित रहना यूएफसी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और संस्था हर इवेंट से पहले सख्त मेडिकल नियमों का पालन करती है।