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झारखंड में SIR-2026 की डेडलाइन बढ़ी, 30 नवंबर को होगा मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन

रांची  झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 की समय-सीमा बढ़ा दी गयी है. भारत निर्वाचन आयोग की स्वीकृति के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी-सह-सचिव के. रवि कुमार ने 8 अक्टूबर को सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्तों को संशोधित कार्यक्रम जारी कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है. अब मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 30 नवंबर 2026 को होगा. SIR के लिए अर्हता तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित है. पुनरीक्षण का लक्ष्य है कि कोई पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल नहीं हो. 22 अक्टूबर तक नोटिस वाले मामलों का निपटारा संशोधित कार्यक्रम के अनुसार नो-मैपिंग और लॉजिकल विसंगतियों से जुड़े मामलों में जारी पहले और दूसरे नोटिस का निपटारा 22 अक्टूबर तक किया जायेगा. वहीं, BLO के घर-घर सत्यापन और दूसरे नोटिस के बाद भी दस्तावेज नहीं देने वाले मतदाताओं का सत्यापन तथा गैर-नोटिस वाले अन्य श्रेणी के मामलों का निपटारा 31 अक्टूबर तक करना होगा. इसी अवधि में फॉर्म-6, 6A, 7 और 8 से संबंधित सभी दावों और आपत्तियों का डिजिटलीकरण भी पूरा किया जायेगा. नवंबर में होगा होम-टू-रोल सत्यापन 1 से 12 नवंबर तक छूटे हुए योग्य नागरिकों का होम-टू-रोल सत्यापन किया जायेगा और फॉर्म-6 का डिजिटलीकरण होगा. 1 से 21 नवंबर तक DEO, रोल ऑब्जर्वर और CEO स्तर से निपटाये गये मामलों की जांच और सुपर-चेकिंग की जायेगी. वहीं 1 से 23 नवंबर तक ECINET पर नोशनल मकान नंबर, नजरी नक्शा, की-मैप, गूगल मैप और मतदान केंद्रों की तस्वीरों को अपडेट किया जायेगा. 23 नवंबर तक दावे-आपत्तियों का अंतिम निपटारा सभी प्राप्त दावों और आपत्तियों का अंतिम निष्पादन 23 नवंबर तक पूरा करना है. इसके बाद 24 से 29 नवंबर के बीच मतदाता सूची के स्वास्थ्य मानकों की जांच, निर्वाचन आयोग से अंतिम प्रकाशन की अनुमति और मतदाता सूची की छपाई की प्रक्रिया पूरी होगी. 30 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 30 नवंबर 2026, सोमवार को झारखंड की SIR के तहत तैयार मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जायेगा. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने संशोधित कार्यक्रम की प्रति राज्य के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों, प्रमंडलीय आयुक्तों और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को भी भेजी है.  

झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का होगा विस्तार, CHC-PHC में ESIC बीमितों का इलाज; 6 लाख लोगों को फायदा

रांची राज्य सरकार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में भी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईएस) से बीमित कामगाराें का इलाज होगा। वहीं, ईएसआईएस के अस्पतालों में आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना तथा अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत इलाज हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसे लेकर पहल की है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इस पहल को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बुधवार को श्रम विभाग एवं कर्मचारी राज्य बीमा निगम के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि ईएसआइसी की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अधिक से अधिक बीमित कामगारों एवं उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। बैठक में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रांची एवं जमशेदपुर स्थित ईएसआइसी केंद्रों में अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना एवं आयुष्मान भारत के लाभुकों के इलाज की संभावना पर भी चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद इन योजनाओं के लाभुकों के इलाज के लिए दावा की राशि झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। बताते चलें कि वर्तमान में झारखंड में ईएसआइसी की 21 डिस्पेंसरी संचालित हैं, जहां बीमित व्यक्तियों एवं उनके परिवारों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब राज्य सरकार के सीएचसी एवं पीएचसी के नेटवर्क को ईएसआइसी चिकित्सा सेवाओं से जोड़कर इसकी पहुंच राज्य के अधिकाधिक क्षेत्रों तक विस्तार किया जाएगा। बैठक में श्रम सचिव जितेंद्र कुमार सिंह, अपर सचिव संदीप कुमार दोराईबुरू, संयुक्त सचिव अनुज कुमार प्रसाद तथा ईएसआइसी, झारखंड के क्षेत्रीय निदेशक शिवेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। प्रति बीमित व्यक्ति एक हजार रुपये प्रतिवर्ष की मिलेगी वित्तीय सहायता प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईएसआईसी द्वारा संबद्ध प्रति बीमित व्यक्ति को एक हजार रुपये प्रतिवर्ष की दर से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लगभग 1.50 लाख बीमित व्यक्तियों तथा उनके परिवारों सहित करीब छह लाख लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलने की संभावना है। ईएसआईसी के अंतर्गत पात्र बीमित व्यक्तियों एवं उनके परिवार के सदस्यों को नियमानुसार चिकित्सा लाभ, बीमारी हितलाभ, मातृत्व हितलाभ, दिव्यांगता हितलाभ, आश्रित हितलाभ सहित अन्य वैधानिक सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त होते हैं।

छठ पर घर लौटने वालों की जेब पर बड़ा असर, दरभंगा की हवाई टिकट ₹30 हजार के पार

दरभंगा  दीपावली और छठ में अभी करीब एक माह का वक्त है। लेकिन दरभंगा एयरपोर्ट से हवाई टिकटों का दाम आसमान छू रहा है। यह हाल दरभंगा से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जाने वाली सभी उड़ानों में है। अन्य दिनों में दरभंगा एयरपोर्ट से विभिन्न हवाई मार्ग पर टिकटों का दाम सामान्य रहता है। लेकिन जैसे ही दीपावली और छठ का नजदीक पहुंचने लगता है। एयरलाइंस कंपनियां टिकटों के दाम में तीन से चार गुणा वृद्धि कर देती है। इससे त्योहार पर घर लौटने की चाह रखने वाले यात्रियों की खुशियों पर पानी फिरने लगता है। कई यात्री तो टिकटों की कीमत सुनकर भौचक रह जाते हैं। ऐसे में हवाई सफर की योजना त्याग ट्रेन या अन्य साधन से घर लौटने की जुगत में हैं। हवाई मार्ग पर टिकटों की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल दीपावली आठ नवंबर और छठ महापर्व 14 व 15 नवंबर को है। पांच से 13 नवंबर के बीच दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु हवाई मार्ग पर टिकटों की कीमत अप्रत्याशित उछाल है। खासतौर पर मुंबई से दरभंगा आनेवाले यात्रियों की जेब को ज्यादा चपत लग रही है। दीपावली और छठ के दौरान मुंबई से दरभंगा के लिए स्पाइसजेट में 30,196 रुपये, अकासा में 27,600 रुपये और इंडिगो में 24,871 से लेकर 25,801 रुपये में एक टिकट उपलब्ध हो रहा है। इस अवधि में दरभंगा से लौटने पर स्पाइसजेट, इंडिगो और अकासा के विमान में सात से लेकर नौ हजार रुपये में टिकट है। हैदराबाद से दरभंगा के लिए इंडिगो में 22,894 रुपये दिल्ली से दरभंगा के लिए स्पाइसजेट में 16,593 से लेकर 21,430 रुपये, इंडिगो में 17,557 से लेकर 19,498 रुपये और अकासा में 18,542 से लेकर 20,042 रुपये प्रति टिकट लिए जा रहे हैं। वापसी में स्पाइसजेट, इंडिगो और अकासा में पांच से आठ हजार रुपये लग रहा है। बेंगलुरु से दरभंगा आने पर अकासा में 23,527 रुपये लग रहा है। जबकि बेंगलुरु वापसी में 7,374 रुपये खर्च हो रहा है। हैदराबाद से दरभंगा के लिए इंडिगो में 22,894 रुपये लिए जा रहे हैं। दरभंगा से हैदराबाद जाने पर इंडिगो में 7,872 रुपये में टिकट उपलब्ध है। जबकि दरभंगा और कोलकाता के बीच कोई सीधी फ्लाइट उपलब्ध नहीं है। यात्रियों से कनेक्टिंग फ्लाइट के लिए 26,601 रुपये की वसूली की जा रही है। छह नवंबर से शुरू मुंबई की उड़ान में सीटें फुल छह नवंबर से दरभंगा से मुंबई के लिए अकासा क्यूपी 2011 की उड़ान की शुरुआत होगी, लेकिन अभी से ही मुंबई से उड़ान भरकर दरभंगा पहुंचने वाली अकासा की फ्लाइट में सीटें फुल होने लगी हैं। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, छह से 10 नवंबर तक मुंबई दरभंगा हवाई मार्ग पर अकासा के विमान फुल चल रहे हैं। हाल के दिनों में दरभंगा मुंबई हवाई मार्ग पर अकासा की उड़ान में विस्तार की घोषणा के साथ ही एक टिकट की बुकिंग 14 हजार में हो रही थी। लेकिन अब अकासा के विमान में छह नवंबर से एक टिकट की खरीदारी करने पर 27,600 रुपये चुकाना पड़ रहा है। जबकि दरभंगा और मुंबई के बीच अकासा के उड़ान की विस्तार की घोषणा से यात्रियों में पर्व त्योहार के मौके पर टिकट दाम में राहत की उम्मीद जगी थी। लेकिन उनकी उम्मीदों पर तुषारापात हो सकता है।

Bihar Technical Education में बड़ा बदलाव, इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक प्लेसमेंट 12 गुना बढ़ा, नामांकन 98%

 पटना  बिहार के सरकारी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पिछले पांच वर्षों में प्लेसमेंट और नामांकन दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 से 2025-26 के बीच प्लेसमेंट पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या 1700 से बढ़कर 20477 हो गई। पांच साल में प्लेसमेंट ने लगाई बड़ी छलांग 2020-21 में पालिटेक्निक के 1002 और इंजीनियरिंग के 698 विद्यार्थियों समेत कुल 1700 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ था। 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 4681 और 2022-23 में 4944 पहुंच गई। इसके बाद 2023-24 में 8197 और 2024-25 में 11178 विद्यार्थियों को रोजगार मिला। 2025-26 में 20 हजार से ज्यादा को रोजगार प्लेसमेंट के आंकड़ों में सबसे बड़ी छलांग 2025-26 में देखने को मिली। इस वर्ष कुल 20477 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ। यानी पांच वर्षों में रोजगार पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या करीब 12 गुना बढ़ गई। विभाग इसे तकनीकी शिक्षा में रोजगारपरक बदलाव का अहम संकेत मान रहा है। इंजीनियरिंग में 94% से ज्यादा नामांकन प्लेसमेंट के साथ तकनीकी संस्थानों में विद्यार्थियों का रुझान भी बढ़ा है। इंजीनियरिंग में नामांकन दर 2022-23 में 65.86 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में 72.71, 2024-25 में 81.33 और 2025-26 में 81.52 प्रतिशत हुई। 2026-27 में यह बढ़कर 94.39 प्रतिशत पहुंच गई। पॉलिटेक्निक में भी रिकॉर्ड नामांकन पॉलिटेक्निक संस्थानों में नामांकन दर 2022-23 में 84.37 प्रतिशत थी। 2023-24 में यह 84.20 और 2024-25 में 82.40 प्रतिशत रही। इसके बाद 2025-26 में नामांकन 93.60 प्रतिशत और 2026-27 में 98.08 प्रतिशत तक पहुंच गया। 38 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 14331 दाखिले वर्तमान सत्र में 38 इंजीनियरिंग महाविद्यालयों की कुल 15183 बीटेक सीटों में से 14331 सीटों पर नामांकन हुआ है। वहीं 46 पालिटेक्निक संस्थानों की 17227 सीटों में से 16897 सीटों पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिला हुआ है। सिर्फ 10 रुपये सालाना फीस में इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार सरकारी संस्थानों में बेहद कम शुल्क भी विद्यार्थियों के बढ़ते भरोसे की एक वजह है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई का वार्षिक शुल्क महज 10 रुपये और पालिटेक्निक का शुल्क पांच रुपये है। आधुनिक पाठ्यक्रम, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सेंटर आफ एक्सीलेंस से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। आधुनिक पढ़ाई से बढ़े रोजगार के मौके विभाग रोजगारपरक आधुनिक पाठ्यक्रमों को तेजी से लागू कर रहा है। शैक्षणिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण में सुधार, आधुनिक प्रयोगशालाओं और सेंटर आफ एक्सीलेंस की सुविधा से विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। बीटेक में छात्राओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण भी है।     मंत्री बोलीं- शिक्षा को रोजगार और नवाचार से जोड़ना लक्ष्य     सरकार का उद्देश्य सिर्फ विद्यार्थियों को तकनीकी संस्थानों में प्रवेश दिलाना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसी शिक्षा देना है, जो ज्ञान, कौशल, रोजगार और नवाचार से जुड़ी हो। लगभग 98 प्रतिशत नामांकन, बढ़ते प्लेसमेंट, एनबीए मान्यता, आधुनिक प्रयोगशालाएं, उभरते पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां इस दिशा में हो रहे बदलाव को दर्शाती हैं     शीला कुमारी, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी मंत्री वर्षवार प्लेसमेंट के आंकड़े 2020-21     1700 2021-22     4681 2022-23     4,944 2023-24     8197 2024-25     11178 2025-26     20477

राजस्थान में सक्रिय होगा नया पश्चिमी विक्षोभ, बीकानेर-शेखावाटी में बारिश; 12 अक्टूबर बाद बढ़ेगी ठंड

जयपुर  राजस्थान में अक्टूबर की गर्मी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। दिन में जहां कई शहरों में तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, वहीं रात के तापमान में गिरावट शुरू हो गई है। मौसम केन्द्र जयपुर के अनुसार प्रदेश में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। इसके असर से 10 से 12 अक्टूबर के बीच बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र के कुछ जिलों में बादल छाने और मेघगर्जन के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद तापमान में गिरावट से मौसम में सर्दी का असर बढ़ना शुरू हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 10 अक्टूबर के बाद प्रदेश के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। ऐसे में दिन की गर्मी से कुछ राहत मिलने के साथ रातें भी ठंडी होने लगेंगी। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव प्रदेश के सभी हिस्सों में नहीं रहेगा। अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। 11 अक्टूबर को बीकानेर संभाग में बारिश की संभावना है, जबकि 12 अक्टूबर को जयपुर सहित बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। 8 से 13 अक्टूबर तक प्रदेश के अधिकांश अन्य हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। 11 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार 11 अक्टूबर को बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, डीडवाना-कुचामन, सीकर, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, अलवर और डीग में कुछ-कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बादल छाने और मेघगर्जन की स्थिति भी बन सकती है। पिलानी सबसे गर्म, माउंट आबू सबसे ठंडा बुधवार को राजस्थान में दिन का तापमान कई शहरों में 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। पिलानी में अधिकतम तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक रहा। वहीं फलोदी में न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य से 5.2 डिग्री अधिक था। दूसरी ओर माउंट आबू में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री रहा, जो सामान्य से 2.6 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य से 2.4 डिग्री कम है। इस तरह जयपुर में दिन और रात के तापमान में करीब 14 डिग्री का अंतर रहा। 10 अक्टूबर से बढ़ेगा सर्दी का असर राजस्थान में दिन के समय गर्मी बनी हुई है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के असर के बाद तापमान में गिरावट से मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। 10 अक्टूबर के बाद गर्मी से राहत और सर्दी की शुरुआत के संकेत मिलने लगेंगे।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि बढ़ी, अब 31 दिसंबर 2026 तक मिलेगा लाभ

31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि राजनांदगांव क्षेत्र में 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को 19.46 करोड़ की राहत  रायपुर  छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड के राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत चार जिलों में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत पुराने बिजली बिलों के बकाये से जूझ रहे 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को लाभ मिला है। योजना के अंतर्गत अब तक मूल बकाया राशि एवं अधिभार (सरचार्ज) में कुल 19 करोड़ 46 लाख रुपये की छूट प्रदान की जा चुकी है। उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब इस योजना की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है। चार जिलों में व्यापक क्रियान्वयन       राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तथा मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में इस योजना का बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके माध्यम से बीपीएल, घरेलू एवं कृषि श्रेणी के पात्र उपभोक्ताओं को पुराने बकाये के निपटारे पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार छूट दी जा रही है। अब तक योजना के तहत 65,062 उपभोक्ता लाभान्वित हो चुके हैं। लाभान्वित उपभोक्ताओं की कुल संख्या       उपभोक्ता अपने नजदीकी वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में पहुंचकर बकाया राशि का निपटारा कर सकते हैं। बकाया बिजली बिलों का निपटारा कर उपभोक्ता न केवल स्वयं को आर्थिक बोझ से मुक्त कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में निर्बाध बिजली सेवा भी सुनिश्चित कर सकते हैं। समय पर बिल का भुगतान और बकाया का निपटारा कर उपभोक्ता बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान कर एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अन्नदाताओं को संबल प्रदान करना है, ताकि वे बिना किसी पुराने बोझ के बिजली सेवाओं का लाभ उठा सकें।  प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से 31,392 निष्क्रिय उपभोक्ता तथा 33,669 पात्र सक्रिय उपभोक्ता शामिल हैं। लाभान्वित उपभोक्ताओं द्वारा अब तक लगभग 5 करोड़ 89 लाख रुपये की बकाया राशि बिजली कंपनी में जमा कराई जा चुकी है, जिससे कंपनी के राजस्व संग्रहण को भी गति मिली है। विभिन्न संभागों में सक्रिय भागीदारी       राजनांदगांव क्षेत्र के सात विद्युत संभागों में उपभोक्ताओं ने इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। कवर्धा संभाग के 24,415 उपभोक्ता, पंडरिया संभाग के 21,234 उपभोक्ता, राजनांदगांव संभाग के 6,023 उपभोक्ता, डोंगरगढ़ संभाग के 5,351 उपभोक्ता, खैरागढ़ संभाग के 3,670 उपभोक्ता, मोहला संभाग के  3,076 उपभोक्ता और डोंगरगांव संभाग के 1,293 उपभोक्ताआंे को लाभान्वित किया गया है। 66 वितरण केंद्रों और 3 जोनों में विशेष अभियान       राजनांदगांव क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री हर्ष कुमार मेश्राम ने बताया कि योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए क्षेत्र के 66 वितरण केंद्रों और 03 जोनों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जाकर उपभोक्ताओं को पात्रता, छूट और बकाया निपटारे की प्रक्रिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं। 31 दिसंबर 2026 तक उठाएं लाभ      मुख्य अभियंता श्री मेश्राम ने 31 मार्च 2023 से पूर्व के बकाया बिजली बिल वाले पात्र बीपीएल, घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे विलंब न करें। उपभोक्ता 31 दिसंबर 2026 तक अपने निकटतम विद्युत वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में संपर्क कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। पुराने बकाये का यह समाधान न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक बोझ से मुक्त करता है, बल्कि उनकी विद्युत सेवाओं को भी सुचारू रखता है।

126 वर्षों से कायम अनोखी परंपरा, हरियाणा में मुस्लिम परिवार की 5वीं पीढ़ी बना रही रावण के पुतले

 पानीपत  पानीपत में मुस्लिम परिवार दशकों से रामलीला के पुतले बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहा है। यमुनानगर में रावलपिंडी से चली कारीगरी चार दशक बाद भी जारी है। कुरुक्षेत्र में कैथल से शुरू हुआ हुनर पांचवीं पीढ़ी के हाथों तक पहुंच गया है, जबकि भिवानी में वर्ष 1902 से चली आ रही परंपरा आज भी 100 फीट के रावण का चेहरा गढ़ रही है। इन परिवारों के लिए पुतले बनाना केवल रोजगार नहीं। यह उनके बुजुर्गों से मिला हुनर, परिवार की पहचान और उस सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प है, जिसमें दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ समाज को जोड़ने का संदेश भी देता है। बदलते समय में पुतलों के आकार और डिजाइन बदले, सामग्री महंगी हुई, काम का तरीका बदला, लेकिन बांस मोड़ने, कागज साधने और रावण के चेहरे में भाव भरने की कला पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रही। मुस्लिम परिवार की गंगा-जमीनी तहजीब पानीपत में दशहरा सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी तस्वीर पेश करता है, जिसमें मुस्लिम परिवार के हाथों से रामलीला के रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण आकार लेते हैं। असगर अली का परिवार दशकों से इस काम में जुटा है। उनके पिता हाजी अशरफ अली ने पानीपत में पुतले बनाने का काम शुरू किया था। अब असगर अली के साथ उनके बेटे भी इस विरासत को आगे बढ़ा है। खास बात यह है कि एमसीए पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर इमरान और बीटेक सिविल इंजीनियर सोहेल भी नौकरी -पेशा दुनिया के विकल्पों के बावजूद पिता के साथ पुतले बनाने में हाथ बंटा रहा है 50 कारीगरों की टीम रामलीला मैदानों के लिए पुतले कर रही तैयार हर वर्ष दशहरे से करीब डेढ़-दो माह पूर्व परिवार पानीपत पहुंचता है। इस बार करीब 50 कारीगरों की टीम अलग-अलग रामलीला मैदानों के लिए पुतले तैयार कर रही है। सेक्टर-25 के लिए 100 फीट, सेक्टर-13-17 के लिए 90 फीट तथा श्री देवी मंदिर और माडल टाउन के लिए 70-70 फीट ऊंचे रावण के पुतले बनाए जा रहे हैं। पुतलों का ढांचा बांस की खपच्चियों से तैयार होता है। खुले मैदान में धूप, बारिश और तेज हवा के बीच कारीगर दिन-रात जुटे रहते हैं। असगर परिवार के लिए यह काम केवल कमाई नहीं, बल्कि पानीपत की रामलीला परंपरा और सामाजिक भाईचारे का हिस्सा है। यमुनानगर: रावलपिंडी से चली कारीगरी, चार दशक से जारी श्री सनातन धर्म मंदिर में इन दिनों रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले आकार ले रहे हैं। इन्हें तैयार कर रहा है महेंद्र मनचंदा का परिवार, जिसके बुजुर्गों ने पाकिस्तान के रावलपिंडी में इस कला की हैं। अब उनके बेटे पंकज भी साथ हैं। इस बार रावण 70 फीट, कुंभकर्ण 60 फीट और मेघनाद 50 फीट का होगा। महंगाई ने इस बार पुतलों की लागत बढ़ा दी है। पिछले वर्ष 160 से 170 रुपये किलो मिलने वाली सुतली 300 रुपये किलो हो गई है। करीब 500 रुपये में मिलने वाली कौड़ी 1000 रुपये से अधिक की है, जबकि कपड़े की कीमत भी लगभग दोगुनी हो चुकी है। दशहरा ग्राउंड की 70 साल पुरानी परंपरा यमुनानगर के दशहरा ग्राउंड में रावण दहन की परंपरा 1950 के दशक से जुड़ी है। पुराने रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1952 में यहां दशहरा दहन हुआ था। इसके बाद यह स्थान दशहरा ग्राउंड के नाम से पहचाना जाने लगा। कुरुक्षेत्र में रावण के पुतले बनाने वाले परिवार की कहानी कैथल से शुरू हुई और अब पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच गई है। परिवार की चौथी पीढ़ी से जुड़े शमां खान बताते हैं कि उनके दादा छज्जु राम ने 1962-63 में कैथल में पुतले बनाने शुरू किए थे। इसके बाद उनके पिता मोहम्मद इस्लाम खान ने करीब 1985 में कुरुक्षेत्र में इस काम को आगे बढ़ाया। अब शमां खान और उनके बड़े भाई हाजी इसरार इस कारीगरी में जुटे हैं। चौथी पीढ़ी के शाहरुख और सादिक खान भी काम सीख रहे हैं, जबकि पांचवीं पीढ़ी के अजमत और अब्बूजर खान भी इस हुनर से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार कुरुक्षेत्र में 101 फीट ऊंचा रावण तैयार किया जा रहा है। परिवार कुरुक्षेत्र के साथ कैथल, चीका, पाथड़ा, पिहोवा और खनौरी के लिए भी पुतले तैयार कर रहा है। भिवानी: 1920 में दादा ने पुतला बनाना शुरू किया भिवानी में रावण के पुतले बनाने की कहानी एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है। महेंद्रगढ़ के बास मोहल्ला निवासी 76 वर्षीय मोहनलाल बताते हैं कि उनके दादा शिवदास ने वर्ष 1902 में पुतले बनाने शुरू किए थे। फिर उनके पिता मंगलसेन और उसके बाद उन्होंने इस हुनर को आगे बढ़ाया। अब उनके बेटे श्यामलाल, मनीष और हरीश भी इसी काम में जुटे हैं। पांचवीं पीढ़ी का कपिल भी बांस पकड़ना सीख रहा है। इस बार भिवानी में 100 फीट का रावण तथा 80-80 फीट के मेघनाद व कुंभकर्ण तैयार किए जा रहे हैं। परिवार हरियाणा के अलावा हिमाचल, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में पुतले बनाता है। एक बड़े सेट को तैयार करने में चार लाख रुपये से अधिक खर्च आता है। इस परिवार की कारीगरी को 100 से अधिक मेडल मिल चुके हैं।

Air Force Day 2026: काशी में एयर शो की खास तैयारी, हवा-गंगा-जमीन पर अलग रिस्पॉन्स प्लान

लखनऊ चेन्नई एयर शो में अक्टूबर 2024 में सामने आई स्थिति से सबक लेते हुए काशी में एयरफोर्स डे एरियल डिस्प्ले की तैयारी की जा रही है। यहां किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए हवा, गंगा और जमीन, तीनों स्तर पर अलग रिस्पॉन्स प्लान रहेगा। एनडीआरएफ की विशेषज्ञता भी ली जाएगी। तैयारियों का पूरा खाका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा गया है। प्रजेंटेशन देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए स्टेट इवेंट है। उत्तर प्रदेश डिफेंस एक्सपो और महाकुंभ में अपनी शक्ति और तैयारी दिखा चुका है। उन्होंने उसी स्तर पर एयर शो की तैयारी करने के निर्देश दिए। वाराणसी में 22, 24 और 25 अक्टूबर को एयरफोर्स डे एरियल डिस्प्ले प्रस्तावित है। तैयारियों के प्रजेंटेशन में चेन्नई एयर शो के दौरान भीड़ की स्थिति को अलग से रखा गया। इसके बाद काशी के लिए तैयार क्राउड मैनेजमेंट प्लान बताया गया है। इससे साफ है कि चेन्नई में सामने आई स्थिति को ध्यान में रखकर यहां आपात इंतजाम किए जा रहे हैं। हवा में हादसा हो या गंगा में, पहले से तय रहेगा रिस्पॉन्स एयर शो के दौरान किसी आपात स्थिति में अलग-अलग विभागों को मौके पर व्यवस्था तय करने का इंतजार नहीं करना होगा। कार्ययोजना में हवा, पानी और जमीन पर होने वाली संभावित घटनाओं के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट और कंटिंजेंसी प्लान बनाने की बात है। इसके लिए एनडीआरएफ की विशेषज्ञता ली जाएगी। यानी हवा में कोई आपात स्थिति बने, गंगा में घटना हो या जमीन पर अचानक हालात बिगड़ें, तीनों के लिए पहले से रिस्पॉन्स तय रहेगा। इसके लिए एयरफोर्स, रेलवे, रोडवेज, जलमार्ग, जिला प्रशासन और पुलिस को आपस में जोड़ा जाएगा। कार्ययोजना में इन एजेंसियों के बीच समन्वय को प्रमुख जरूरत के रूप में रखा गया है। जरूरत पर दूसरे जिलों से मजिस्ट्रेट बुलाने और अतिरिक्त संसाधन जुटाने का भी प्रस्ताव है। तीन कंट्रोल रूम, अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर इमरजेंसी में सूचना मिलने से मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए इंटीग्रेटेड, सीएमओ और इमरजेंसी लाइन के तीन कंट्रोल रूम होंगे। अस्पताल तक एंबुलेंस की निर्बाध आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की योजना है। सरकारी और निजी अस्पतालों में 170 इमरजेंसी और 44 आईसीयू बेड चिह्नित किए गए हैं मेडिकल बैकअप में आयोजन स्थल से 20 किमी के दायरे के सात सरकारी अस्पताल और 15 किमी के दायरे के सात निजी अस्पताल शामिल किए गए हैं। 23 ब्लड बैंक भी चिह्नित हैं। वाराणसी में 58 एंबुलेंस उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा दूसरे जिलों से 39 एंबुलेंस मंगाई जाएंगी। इस तरह जरूरत पड़ने पर 97 एंबुलेंस उपलब्ध होंगी। 21 समितियों को अलग-अलग जिम्मा एयर शो की तैयारियों के लिए 21 समितियां बनाई गई हैं। किसी समिति को घाट संभालने हैं तो किसी को कंट्रोल रूम और मेडिकल कवर। आयोजन स्थल, पीए सिस्टम, आमंत्रण और पास, स्वागत और आवास, परिवहन, वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी और मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी भी अलग-अलग बांटी गई है। नमो घाट से अस्सी और रविदास घाट तक के लिए एक घाट प्रबंधन समिति और रामनगर-डोमरी क्षेत्र के लिए दूसरी समिति बनाई गई है। पक्षियों पर नजर रखने के लिए भी अलग कमेटी तैयारी में एक अलग ‘बर्ड कंट्रोल कमेटी’ भी बनाई गई है। एयर शो के दौरान पक्षियों से जुड़ी चुनौती पर यह समिति काम करेगी। सड़क और गंगा के रास्ते आवाजाही के लिए अलग ‘ट्रांसपोर्ट कमेटी (लैंड एंड रिवर)’ बनाई गई है। कंट्रोल रूम के संचालन और मेडिकल कवर की जिम्मेदारी भी अलग-अलग समितियों को दी गई है।  

JSSC CGL केस में हाई कोर्ट का फैसला सुरक्षित, JPSC मामले पर कल होगी अहम सुनवाई

रांची झारखंड हाईकोर्ट में जेएसएससी-सीजीएल नियुक्ति रद करने के मामले में राज्य सरकार की ओर से बहस पूरी कर ली गई है। सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं, JPSC से संबंधित मामले में कल फिर सुनवाई जारी रहेगी। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा। नियुक्ति रद करने के फैसले को सरकार ने ठहराया था सही JSSC CGL नियुक्ति रद करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट अदालत में पेश की गई थी। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने नियुक्ति रद करने के फैसले को उचित ठहराया था। सरकार की ओर से परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितता और वित्तीय लेन-देन का हवाला दिया गया था। सरकार की ओर से बताया गया था कि मामले में 28 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच अभी जारी है। सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई थी कि ऐसी स्थिति में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं है। राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात CID की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर CGL समेत अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद करने के फैसले का पक्ष रखा था। याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा रद करने का किया विरोध वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद करने का विरोध किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा था कि प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं है। उनके अनुसार किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने नहीं आई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि मामला संभावित प्रश्नों की परीक्षा से पहले जानकारी मिलने का हो सकता है। नेपाल में 28 अभ्यर्थियों द्वारा संभावित प्रश्नों को याद किए जाने और उनमें से 10 के सफल होने का भी उल्लेख किया गया था। इन अभ्यर्थियों का परिणाम हाई कोर्ट के आदेश से रोका गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने की दलील याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील भी दी गई कि पहले की न्यायिक कार्यवाही में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने की बात कही गई थी। नियुक्ति को आपराधिक मामले की स्थिति के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि SIT की जांच दो साल से अधिक समय से चल रही है, लेकिन अब तक चार्जशीट नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष। अन्य अधिवक्ताओं की ओर से भी कहा गया कि CGL मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से पहले ही आदेश दिए जा चुके हैं। उनके अनुसार दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने तथा आपराधिक मामले के आधार पर नियुक्ति को लेकर निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद सरकार की ओर से पूरी प्रक्रिया को फिर रद किया गया। अब सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने JSSC CGL नियुक्ति रद करने के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं, JPSC से संबंधित मामले में कल फिर सुनवाई होगी और राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।

पंचायत चुनावों को लेकर स्वीप अभियान तेज, पंचायत समिति स्तर पर होगा प्रत्याशी प्रबोधन कार्यक्रम

जयपुर  राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने निर्देश दिए कि आगामी पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव को देखते हुए पंचायत समिति स्तर पर 10 अक्टूबर को *प्रत्याशी प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों को नामांकन प्रक्रिया, पात्रता एवं योग्यता, आवश्यक दस्तावेज, नामांकन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों तथा किन परिस्थितियों में नामांकन पत्र निरस्त हो सकता है, सहित चुनाव प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जाए, ताकि अभ्यर्थी पूरी जानकारी के साथ अपना नामांकन प्रस्तुत कर सकें। सिंह राज्य निर्वाचन आयोग के सभागार में आज गुरुवार को आयोजित मतदाता जागरूकता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अध्यक्षता कर रहे थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के दौरान की गई स्वीप गतिविधियों की जानकारी ली तथा आगामी पंचायती राज चुनावों में की जाने वाली मतदाता जागरूकता गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने मतदाता साक्षरता क्लब के कैंपस एम्बेडसर छात्र, छात्राओं से संवाद कर उनके द्वारा की गई स्वीप गतिविधियों की भी जानकारी ली। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने 'एक शाम लोकतंत्र के नामक, 'एक पेड़ लोकतंत्र के नाम', ‘एक दीप लोकतंत्र के नाम’, 'एक खेल लोकतंत्र के नाम' कार्यक्रम आयोजित करने, आदर्श मतदान केंद्र स्थापित कर वहां मतदाता संदेश बोर्ड लगाने, नुक्कड़ नाटक, चुनाव चौपाल, युवा मतदाता संवाद एवं महिला मतदाता संवाद आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक पंचायत समिति क्षेत्र में कम से कम एक हरित एवं स्वच्छ बूथ स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही मेहंदी प्रतियोगिता, मोटरसाइकिल एवं साइकिल रैली, सतरंगी सप्ताह तथा मैराथन  तथा मतदाता प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत ग्रामीण स्थानीय शासन की महत्वपूर्ण इकाई है। इन चुनावों में एक लाख 55 हजार जनप्रतिनिधि चुने जाने है। सरपंच एवं अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधि सीधे ग्रामीणों से जुड़े होते हैं और गांव की स्थानीय आवश्यकताओं एवं विकास कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए पंचायती राज चुनावों में मतदाताओं के साथ-साथ चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों को भी चुनाव प्रक्रिया एवं नियमों की सही और पूरी जानकारी होना आवश्यक है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव में अधिक से अधिक मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर मतदाता जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएं। उन्होंने युवा, महिला एवं पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को विशेष रूप से जागरूक करने के निर्देश दिए। वीसी के प्रारंभ में राजेश वर्मा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग ने स्वागत उद्बोधन किया। वीसी में सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य, महाविद्यालयों के ईएलसी नोडल अधिकारी एवं कैंपस एम्बेडसर जुड़े।