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रोज सुबह एक कीवी खाने से मिलते हैं कई जबरदस्त हेल्थ फायदे

आजकल लोग अपनी हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए डाइट में कई तरह के फलों को शामिल करते हैं. इन्हीं में से एक है कीवी जो दिखने में छोटा जरूर होता है लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. अगर आप रोज सुबह खाली पेट या नाश्ते में सिर्फ एक कीवी खाते हैं तो इससे शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं. विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर कीवी इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. आइए जानते हैं रोज सुबह एक कीवी खाने से शरीर को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं. इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है कीवी में भरपूर मात्रा में विटामिन C पाया जाता है जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. रोजाना सुबह कीवी खाने से मौसमी बीमारियों और संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. डाइजेशन को बेहतर बनाता है कीवी में एक्टिनिडिन नाम का एंजाइम होता है जो प्रोटीन को पचाने में मदद करता है. इससे पेट फूलने, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है. स्किन हेल्दी होती है विटामिन C और E से भरपूर कीवी चेहरे को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने में मदद करता है. यह कोलेजन प्रोडक्शन बढ़ाकर बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने में भी मदद करता है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने में मदद करता है कीवी में मौजूद पोटैशियम शरीर में सोडियम के असर को बैलेंस करने में मदद करता है, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और दिल की सेहत भी बेहतर बनी रहती है. वेट लॉस में मददगार कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होने की वजह से कीवी खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है. इससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है. आंखों के लिए फायदेमंद कीवी आंखों के लिए भी काफी फायदेमंद है. इसमें ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो आंखों को नुकसान से बचाने और उसे हेल्दी रखने में मदद करते हैं. बॉडी को डिटॉक्स करने में मदद करता है कीवी बॉडी को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है. इसमें पानी और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है जो शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने और गट हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करता है.

डीलर्स की हड़ताल से राजस्थान में ईंधन संकट की आशंका

 जयपुर राजस्थान में 1 जून से आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के संकट का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा नहीं है कि प्रेट्रोल-डीजल की आवक रुकने वाली है, बल्कि प्रदेशभर के पेट्रोल-पंप संचालकों ने 1 जून से अनिश्चितकालीन पंप को ठप करने की चेतावनी दी है. पंप संचालकों ने सरकार और तेल कंपनियों की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दे दिया है. इसे लेकर पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर समस्याओं से अवगत कराया है. इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश के सभी पेट्रोल पंप पर ताले लटक जाएंगे और पूरे प्रदेश में पहिया थम सकता है. WhatsApp और मौखिक आदेश से तेल देने की सीमा निर्धारित बताया जा रहा है कि इस हड़ताल का कारण पेट्रोल-डीजल को लेकर तेल कंपनियों द्वारा लगाई गई पाबंदियां है. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी का आरोप है कि प्रदेश के कई इलाकों में पेट्रोल पंप तेल खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे हैं. जबकि इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों ने WhatsApp मैसेज और मौखिक आदेशों के जरिए ग्राहकों तेल देने की सीमा निर्धारित कर दी है. भाटी ने बताया कि अगर तेल कंपनी के नियमों के खिलाफ अगर कोई पंप ग्राहक को एक बार में 50 हजार रुपये से अधिक का डीजल और 5000 रुपये से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया जा सकता है. दूसरी ओर भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी अपनी सप्लाई बेहद सीमित कर दी है. अगर जरूरतमंद को सीमा से ज्यादा तेल दिया जाता है तो कंपनियां एकतरफा कार्रवाई करते हुए सप्लाई रोक देती है. जो नियमों का सरासर उल्लंघन है. वहीं तेल नहीं देने पर अनावश्यक लोगों में भ्रम फैलता है और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. VAT कम करने की मांग एसोसिएशन की ओर से राजस्थान में ईंधन पर लगाए जा रहे भारी VAT का भी विरोध किया है. इस वजह से पूरे देश में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल राजस्थान में बिक रहा है. डीलरों की मांग है कि राजस्थान में भी अन्य राज्यों की तरह 5 प्रतिशत VAT कटौती की जाए. इसके अलावा अलग-अलग जिलों में कीमतों के भारी अंतर और हरियाणा-पंजाब की तुलना में राज्य में CNG की अत्यधिक कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं और डीलर्स में भारी असंतोष है. किसानों के लिए स्थिति होने वाली है गंभीर डीलरों का कहना है कि संकट अभी और बढ़ने वाली है जिससे किसान परेशान होने वाले हैं. क्योंकि आगामी बुवाई के सीजन को देखते हुए खेतों में डीजल की मांग बढ़ने वाली है. जबकि तेल कंपनियां नियमों का हवाला देकर ड्रमों में डीजल देने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है. ऐसे में किसान अपने बड़े कृषि उपकरणों को बार-बार शहरों के पंप तक नहीं ला सकते और अब हालात गंभीर हो सकते हैं. पीएम दौरे और सरकारी रैलियों के उधार लिया गया लाखों का ईंधन डीलर्स ने तेल वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए तेल डिपो और पेट्रोल पंपों पर आधुनिक 'फ्लोमीटर' लगाने की मांग भी दोहराई है, ताकि हर बूंद का सही हिसाब मिल सके और कमी के लिए केवल डीलर्स को जिम्मेदार न ठहराया जाए. एसोसिएशन ने तेल कंपनियों द्वारा महंगे 'ब्रांडेड फ्यूल' को जबरन बेचने के दबाव और राज्य में चल रहे अवैध बायोडीजल के काले कारोबार पर सरकार की चुप्पी को लेकर भी तीखी नाराजगी जताई है. आर्थिक मोर्चे पर घिरे डीलर्स ने यह मुद्दा भी उठाया है कि प्रधानमंत्री के दौरों और सरकारी रैलियों के दौरान गाड़ियों में जो लाखों रुपये का ईंधन उधार दिया गया था, उसका भुगतान सरकार ने लंबे समय से अटका रखा है, जिससे उन पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है. मामले की गंभीरता के बावजूद, एसोसिएशन का आरोप है कि शीर्ष नौकरशाही का रवैया बेहद उदासीन बना हुआ है. लगातार ईमेल और पत्र भेजने के बाद भी प्रमुख शासन सचिव स्तर पर कोई बैठक नहीं बुलाई जा रही है और न ही अधिकारी उनके फोन कॉल्स का जवाब दे रहे हैं. अब देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मामले में खुद हस्तक्षेप कर 1 जून से पहले कोई बीच का रास्ता निकालते हैं, या फिर राजस्थान एक बड़े चक्काजाम और ईंधन संकट की तरफ बढ़ने को मजबूर होगा.

सफाई कर्मचारियों से गैर-कार्य न कराएं: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने साफ कहा कि सफाई कर्मचारियों से दफ्तर के अन्य काम कराने के बजाय सिर्फ सफाई का मूल काम ही लिया जाए. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में गंदगी मिली, तो सीधे संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय होगी. इसके साथ ही, जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेरिटेज शहर बनाए रखने के लिए कोर्ट ने खुले में कचरा फेंकने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाने और पर्याप्त डस्टबिन रखने के निर्देश दिए हैं. उचित स्थानों पर डस्टबिन लगाने के निर्देश अदालत ने सफाई की एक निश्चित प्रक्रिया तय करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आवासीय कॉलोनियों के निकट उचित स्थानों पर पर्याप्त डस्टबिन लगाए जाएं और उनकी नियमित सफाई की जाए. कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि किसी क्षेत्र में नियमित सफाई नहीं पाई जाती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी. खंडपीठ ने याद दिलाया कि जयपुर एक ऐतिहासिक हेरिटेज शहर है और इसे इस तरह साफ रखा जाना चाहिए कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर सके. चूंकि पर्यटन उद्योग राजस्थान का सबसे बड़ा उद्योग है, इसलिए अदालत ने इस तरह के स्वच्छता प्रयासों को प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करने की आवश्यकता जताई है. अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को मिली दिशा-निर्देश की जिम्मेदारी इस संबंध में प्रदेश के सभी नगर निगमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की जिम्मेदारी अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को सौंपी गई है. साथ ही, अदालत ने आम शहरवासियों और स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) से भी अपनी-अपनी कॉलोनियों को साफ रखने और नगर निगम की मदद करने की अपील की है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता विमल चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि सालों पहले हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए 16 बिंदुओं के निर्देशों की नगर निगम ने आज तक पालना नहीं की है, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने यह नया आदेश पारित किया.

वास्तु टिप्स: मंदिर में ये 5 चीजें रखने से घर में बढ़ सकती है नकारात्मकता

 क्या आप भी रोज भगवान की पूजा करते हैं, मंत्र पढ़ते हैं, दीपक जलाते हैं. लेकिन, फिर भी कभी-कभी ऐसा क्यों लगता है कि घर में बरकत नहीं हो रही है? काम में रुकावटें आ रही हैं और मन बेचैन रहता है? क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी वजह आपके मंदिर में रखी कुछ गलत चीजें भी हो सकती हैं? वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर सिर्फ घर का एक कोना नहीं होता है. यह वो स्थान होता है, जहां भगवान के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है. इस स्थान पर आपका मन शांत होता है और खुद से जुड़ता भी है. लेकिन, अगर यही जगह गलत दिशा में हो या उसमें अशुभ चीजें रखी हों, तो यही मंदिर शांति की जगह घर में नकारात्मकता भी ला सकता है. मंदिर में भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें 1. टूटी-फूटी मूर्तियां या तस्वीरें अगर किसी देवी-देवता की मूर्ति टूट जाए या फोटो खराब हो जाए, तो उसे तुरंत हटा दें. ऐसी मूर्तियां नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं. 2. पूर्वजों की तस्वीरें पितरों की तस्वीर मंदिर में नहीं, अलग स्थान पर रखें. देवताओं और पितरों का स्थान अलग-अलग माना गया है. 3. खड़ी हुई मां लक्ष्मी की मूर्ति वास्तु के अनुसार, खड़ी लक्ष्मी अस्थिरता का प्रतीक है. हमेशा बैठी हुई लक्ष्मी जी की पूजा करें. 4. गणेश जी की कई मूर्तियां वास्तु शास्त्र के मुताबिक, गणेश जी की एक या दो मूर्ति ठीक हैं, लेकिन ज्यादा मूर्तियां रखना अशुभ माना जाता है. 5. मुरझाए या बासी फूल पूजा में कभी भी पुराने फूल नहीं चढ़ाने चाहिए. दरअसल, पुराने फूल नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं. उन्हें रोज बदलें और मिट्टी में दबा दें. मंदिर में जरूर रखें ये 5 चीजें मिट्टी का दीपक- यह शुद्धता और धरती से जुड़ाव का प्रतीक है. शंख- शंख की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है. कलश- जल, आम के पत्ते और नारियल वाला कलश समृद्धि का प्रतीक है. घंटी- इसकी आवाज वातावरण को शुद्ध करती है और मन को एकाग्र करती है. गोमती चक्र- इसे लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, जो धन को स्थिर रखता है. पूजा करते समय ध्यान रखने वाली बातें – पूजा करते समय मोबाइल का इस्तेमाल न करें. – बिना नहाए मूर्ति को स्पर्श न करें. – बीच में आरती न छोड़ें. – मंत्र सही और शांत मन से बोलें. – जमीन पर सीधे न बैठें, आसन का उपयोग करें. मंदिर की सही दिशा मंदिर हमेशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में होना चाहिए. पूजा करते समय मुख पूर्व दिशा में रखें. मंदिर कभी भी बाथरूम या बेडरूम के पास न हो.

दरभंगा के BDO चंद्रमोहन पासवान के खिलाफ कार्रवाई, 89 लाख की अवैध संपत्ति का आरोप

पटना बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की ओर से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में केवटी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) चंद्रमोहन पासवान के विरूद्ध बुधवार को बड़ी कार्रवाई की गई है। विशेष न्यायालय से अनुमति मिलने पर कार्रवाई ईओयू को विश्वस्त सूत्रों से (बीडीओ) चंद्रमोहन पासवान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। प्राप्त जानकारी के सत्यापनोपरान्त केवटी(दरभंगा) के बीडीओ चन्द्रमोहन पासवान के विरूद्ध ज्ञात आय से अधिक सम्पति अर्जित करने के मामले में 26 मई को आर्थिक अपराध इकाई थाना में कांड संख्या-09/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले में धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) भ्र0नि0अधि0 1988 (यथा संशोधित 2018) के मामला दर्ज कर विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर से तलाशी की अनुमति ली गई। डीएसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में छापेमारी विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर से अनुमति मिलने के बाद ईओयू की टीम की ओर से उनके 06 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की गई। पुलिस उपाधीक्षक स्तर के पदाधिकारियों के नेतृत्व मे तलाशी की कार्यवाई की जा रही है। 89,13,500 रुपये आय से अधिक सम्पति अर्जित करने का मामला आर्थिक अपराध इकाई थाना कांड संख्या-09/26, में प्राथमिकी अभियुक्त चन्द्रमोहन पासवान, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, केवटी(दरभंगा) के विरूद्ध सत्यापन के क्रम में कुल 89,13,500 रुपये आय से अधिक सम्पति अर्जन करने का प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाया गया है, जो उनके ज्ञात आय से लगभग 81.03 प्रतिशत अधिक है। पैतृक और सरकारी आवास-कार्यालय समेत 6 ठिकाने पर छापेमारी इस क्रम में आज 27मई को प्रातः चन्द्रमोहन पासवान, के दरभंगा के बहादुरपुर, अवस्थित आवास एवं व्यवसायिक भवन, बाबूबरही(मधुबनी) के पैतृक आवास एवं व्यवसायिक भवन तथा केवटी(दरभंगा) स्थित कार्यालय और सरकारी आवास सहित कुल 06 ठिकानों पर अलग-अलग टीम की ओर से तलाशी कार्रवाई प्रारम्भ की गई है।  

बंगाल की राजनीति में हलचल, TMC के 18 दिग्गज नाराज बताए जा रहे

कलकत्ता ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही बरकरार हैं। कहा जा रहा है कि एक दर्जन से ज्यादा विधायक खुलकर पार्टी की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं। वहीं, अटकलें ये भी हैं कि करीब 15 सांसद जल्द ही टीएमसी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। इसके अलावा पार्टी नंदीग्राम में होने वाले उप चुनाव को लेकर उम्मीदवार खोजने में भी परेशानी का सामना करती नजर आ रही है। विधायक हो रहे हैं नाराज टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 18 बड़े नेता ऐसे हैं, जो खुलकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। इनमें सुखेंदु शेख रॉय, सांसद काकोली घोष दस्तीदार, देव अधिकारी, कल्याण बनर्जी, रचना बनर्जी, विधायक कुणाल घोष, रिताब्रता बनर्जी, अरुणव सेन, संदीपन साहा, नियामत शेख, पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी, मनोज तिवारी, रविंद्रनाथ घोष, पूर्व विधायक अतीन घोष, खगेश्वर रॉय, सौरव चक्रवर्ती, रत्ना चटर्जी, तपन चटर्जी का नाम शामिल है। 20 सांसद बदल सकते हैं पाला संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा है कि 12 टीएमसी सांसदों ने भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की तैयारी कर ली है। इसके अलावा दल बदलने की तैयारी कर रहे सांसदों की लिस्ट में 5 से 6 नाम और हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि ये सांसद कौन होंगे और कब तक दल बदल की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 12 से ज्यादा सांसदों से चर्चा चल रही है और आंकड़ा 20 तक पहुंच सकता है। 100 से ज्यादा पार्षद दे चुके इस्तीफा खबर है कि बीते कुछ दिनों में 100 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं। खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब निकाय चुनाव में कुछ ही समय बाकी है। इतना ही नहीं पार्षद अब खुलकर टीएमसी नेतृत्व और सांसद अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर मॉडल पर सवाल उठा रहे हैं। ममता बनर्जी ने पार्षदों से एकजुट रहने की अपील की है। नंदीग्राम में उम्मीदवार नहीं मिल रहा ममता बनर्जी के सामने एक और बड़ी चुनौती नंदीग्राम से खड़ी होती दिख रही है। कहा जा रहा है कि टीएमसी को इस सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहा है। कई बड़े नेता यहां से चुनाव लड़ने से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। इस सीट पर उन्हें साल 2021 में शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 2026 में भी अधिकारी ने यहां से जीत दर्ज की, लेकिन भवानीपुर सीट से विधायक रहते हुए नंदीग्राम को छोड़ने का फैसला किया था।

अल-अक्सा को लेकर नई साजिश के आरोप, जानिए क्या है अमेरिका-इजरायल का पूरा मामला

 यरुशलम फिलिस्तीन के यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को लेकर एक नई राजनीतिक और धार्मिक लड़ाई छिड़ती दिखाई दे रही है. दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर एक ऐसे नए प्लान पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत अल-अक्सा मस्जिद पर जॉर्डन की दशकों पुरानी संरक्षक यानी कस्टोडियन की भूमिका को खत्म किया जा सकता है।  रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर और इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी आगे बढ़ा रहे हैं. हालांकि कुशनर फिलहाल अमेरिकी प्रशासन में किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि वह पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।  इस कथित प्रस्ताव के तहत जॉर्डन समर्थित इस्लामिक वक्फ की शक्तियां खत्म कर दी जाएंगी और उसकी जगह इजरायल सरकार की निगरानी में एक नया निकाय बनाया जाएगा. मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया सिस्टम अल-अक्सा मस्जिद को "मल्टी-फेथ सेंटर" यानी बहुधार्मिक स्थल घोषित कर सकता है।  रिपोर्ट्स में दावा है कि इसके बाद बड़े समूहों में यहूदियों को मस्जिद परिसर में प्रवेश और प्रार्थना करने की औपचारिक अनुमति दी जा सकती है. इतना ही नहीं, इजरायल को इमामों, धार्मिक उपदेशकों और मस्जिद प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति में भी बड़ा अधिकार मिल सकता है. यहां तक कि शुक्रवार के खुत्बों यानी धार्मिक भाषणों की सामग्री पर भी इजरायली दखल की बात कही जा रही है।  मीडिया ईस्ट आई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका ने अल-अक्सा के भविष्य को लेकर एक ड्राफ्ट पेपर भी तैयार किया है. इसमें कथित तौर पर मस्जिद परिसर को उसकी मौजूदा मुस्लिम पहचान से अलग कर एक बड़े पर्यटन और धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने का विजन रखा गया है, जहां तीनों अब्राहमिक धर्मों – इस्लाम, ईसाई और यहूदी की मौजूदगी दिखाई जाए।  इस पूरे विवाद के बीच जॉर्डन की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ी हुई है. जॉर्डन का हाशमाइट शाही परिवार 1924 से यरुशलम के मुस्लिम और ईसाई धार्मिक स्थलों का संरक्षक माना जाता है. 1994 की जॉर्डन-इजरायल शांति संधि में भी इस भूमिका को मान्यता दी गई थी।  फिलहाल अल-अक्सा मस्जिद एक पुराने "स्टेटस क्वो" समझौते के तहत संचालित होती है. 1967 की जंग के बाद तय व्यवस्था के मुताबिक मस्जिद के अंदरूनी मामलों को इस्लामिक वक्फ संभालता है, जबकि बाहरी सुरक्षा इजरायल के हाथ में रहती है. गैर-मुस्लिमों को सीमित समय के लिए परिसर में आने की इजाजत है, लेकिन वहां प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है।  लेकिन बीते कुछ वर्षों में इजरायली पुलिस की कार्रवाई, दक्षिणपंथी यहूदी समूहों की बढ़ती मौजूदगी और यहूदी प्रार्थना अधिकारों की मांग ने माहौल को लगातार तनावपूर्ण बनाया है. फिलिस्तीनी और जॉर्डन के अधिकारी आरोप लगाते रहे हैं कि इजरायल धीरे-धीरे मौजूदा व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहा है।  रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बहरीन, मिस्र, मोरक्को और यूएई को इस अमेरिकी प्रस्ताव की जानकारी दी गई है. हालांकि सऊदी अरब ने कथित तौर पर इस योजना पर आपत्ति जताई है. खाड़ी देशों के सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब मानता है कि अगर अल-अक्सा की मौजूदा संरक्षक व्यवस्था से छेड़छाड़ हुई तो पूरा पश्चिम एशिया भड़क सकता है।  जॉर्डन सरकार ने साफ कहा है कि यरुशलम और उसके धार्मिक स्थलों को लेकर उसका रुख नहीं बदला है. उसने दोहराया कि हाशमाइट संरक्षकता अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संधियों से मान्यता प्राप्त है और इसे खत्म करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।  इस बीच फिलिस्तीनी पक्ष ने भी इस कथित प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि अल-अक्सा सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि मुस्लिम दुनिया की पहचान और क्षेत्रीय स्थिरता का अहम स्तंभ है।  अब सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ कूटनीतिक दबाव की रणनीति है या फिर असल में अल-अक्सा मस्जिद की मौजूदा स्थिति बदलने की बड़ी तैयारी चल रही है. क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो इसका असर सिर्फ यरुशलम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मुस्लिम जगत और पश्चिम एशिया की राजनीति में भूचाल ला सकता है। 

UPSSSC की नई तैयारी, कम पदों वाली भर्तियों के लिए अलग-अलग एग्जाम खत्म होंगे

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अब कम पदों वाली भर्तियों के लिए नई परीक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। आयोग समान प्रकृति और समान अर्हता वाले पदों के लिए अलग-अलग परीक्षा कराने की बजाय संयुक्त मुख्य परीक्षा आयोजित करने की योजना बना रहा है। नई व्यवस्था सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर होगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया तेज होने के साथ अभ्यर्थियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। आयोग की ओर से प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) 2025 के आधार पर अब तक 13 भर्ती विज्ञापन जारी किए जा चुके हैं। जल्द ही विभिन्न विभागों में सहायक लेखाकार के करीब 1600 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन आने वाला है। अलग-अलग परीक्षाएं कराने की जरूरत नहीं आयोग पीईटी अंकों के आधार पर विभिन्न विभागों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अलग-अलग मुख्य परीक्षाएं आयोजित करता है। प्रत्येक परीक्षा का अलग पाठ्यक्रम निर्धारित होता है। इससे कम पदों वाली भर्तियों में नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पा रही थी। नई प्रणाली के तहत समान पाठ्यक्रम और समान कार्य वाले पदों को एक साथ जोड़कर मुख्य परीक्षा कराई जाएगी। इससे कम पदों वाली भर्तियों के लिए अलग-अलग परीक्षाएं कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभ्यर्थियों को आर्थिक खर्च से राहत आयोग का मानना है कि इससे अभ्यर्थियों को बार-बार फार्म भरने और अलग-अलग परीक्षाओं पर होने वाले आर्थिक खर्च से राहत मिलेगी। साथ ही बड़ी संयुक्त परीक्षाएं होने से परीक्षा केंद्रों के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा। अभ्यर्थियों को अलग-अलग सिलेबस और परीक्षा पैटर्न की तैयारी नहीं करनी पड़ेगी। पीईटी के आधार पर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में समूह ‘ग’ के पदों पर भर्ती कराता है। इनमें राजस्व लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ), ग्राम पंचायत अधिकारी, कनिष्ठ सहायक, आशुलिपिक, कंप्यूटर आपरेटर, वन रक्षक, आबकारी सिपाही, विधान भवन रक्षक, नलकूप चालक, एएनएम, फार्मासिस्ट, लैब तकनीशियन, कृषि प्राविधिक सहायक, नक्शानवीस, प्लाटून कमांडर, ब्लाक आर्गेनाइजर, प्रवर्तन सिपाही, पूर्ति निरीक्षक, विपणन निरीक्षक, अधिशासी अधिकारी, सहायक सांख्यिकी अधिकारी, सहायक शोध अधिकारी और गन्ना पर्यवेक्षक जैसे कई पद शामिल हैं।  

बांदा में 47.4°C तापमान, कई जिलों में तूफान और बारिश; यूपी में मौसम का बड़ा बदलाव

लखनऊ यूपी में मौसम के दो रंग दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ रुहेलखंड से लेकर पूर्वांचल तक तेज आंधी और बारिश से जहां गर्मी से थोड़ी राहत मिली तो वहीं बुन्देलखंड में बांदा का पारा फिर 47.4 डिग्री पहुंच गया। पश्चिमी यूपी में भी गर्मीं से लोग बेहाल रहे। आगरा में तापमान 45.3 दर्ज किया गया तो मथुरा में आंधी व बारिश से तापमान में गिरावट आई। मौसम के ऐसे ही कई रंग यूपी के अलग-अलग हिस्सों में दिख रहे हैं। आने वाले 48 घंटों में तपिश से झुलस रहे जिलों में एक पश्चिमी विक्षोभ फिर तूफानी हवा संग बारिश लाने वाला है। आईएमडी लखनऊ के अनुसार इसके कारण पारा 8 डिग्री तक गिर सकता है। बंगाल की खाड़ी से होकर आ रही पुरवा का असर यूपी में न्यूनतम है। ऐसे में हवा में नमी कम हो गई है। लखनऊ में मंगलवार को हवा की आर्द्रता न्यूनतम 14 फीसदी तक रही। इस स्थिति में दिन के समय पारा तेजी से ऊपर चढ़ता है। प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में राजस्थान की तरफ से गर्म और सूखी पछुआ हवाएं चल रही हैं। माैसम का यह मिजाज तापमान में बढ़ोत्तरी कर रहा है और गर्म हवाएं पहले से तप रहे यूपी की गर्माहट और बढ़ा दे रही हैं। आंधी-बारिश के कारण यूपी में 10 लोगों की मौत भी हो गई। संतकबीरनगर व बस्ती में दो-दो, दीवार गिरने से सीतापुर में वृद्धा समेत दो और शाहजहांपुर में एक की मौत हो गई। खीरी में खेत में फंसे सीतापुर के एक किसान की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। गोंडा में छप्पर से दबकर वृद्धा, व पेड़ से दबकर बुजुर्ग की मौत हो गई। क्या हैं पांच कारण 1-गर्म हवाओं से बढ़ रहा पारा आईएमडी लखनऊ के अनुसार मध्य भारत के ऊपर हवा में एक ऐसा सिस्टम (चक्रीय चक्रवात) बना है, जो गर्म हवाओं को ऊपर से नीचे की तरफ धकेल रहा है। इससे तपिश बढ़ रही है। 2-सक्रिय मौसम तंत्र न होने से तपिश यूपी के ऊपर किसी सक्रिय मौसमी तंत्र जैसे पश्चिमी विक्षोभ, प्रति चक्रवात या चक्रवात का न होना तपिश की बड़ी वजह बना। आसमान साफ होने के कारण धूप सीधे जमीन पर पड़ रही है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है। 3-भीषण तपिश आंधी की वजह बनी जम्मू कश्मीर के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय था। इधर यूपी में भीषण तपिश की वजह से गर्म हवा तेजी से ऊपर उठने लगीं। उधर से आ रही नम और ठंडी पछुआ हवा से टकराव के कारण एक ट्रफ बना जिससे मध्य यूपी से पूर्वांचल तक आंधी आई और बारिश हुई। 4-राजस्थान से होकर आ रही हवा प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में राजस्थान की तरफ से गर्म और सूखी पछुआ हवाएं चल रही हैं। माैसम का यह मिजाज तापमान में बढ़ोत्तरी कर रह है और गर्म हवाएं पहले से तप रहे यूपी की गर्माहट और बढ़ा दे रही हैं। 5-पुरवा का कमजोर होना बंगाल की खाड़ी से हो कर आ रही पुरवा का असर यूपी में न्यूनतम है। ऐसे में हवा में नमी कम हो गई है। उदाहरण के लिए लखनऊ में मंगलवार को हवा की आर्द्रता न्यूनतम 14 फीसदी तक रही। इस स्थिति में दिन के समय पारा तेजी से ऊपर चढ़ता है।

बिहार के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश का कहर, 5 लोगों की मौत

पटना बिहार में पिछले एक सप्ताह से मौसम के दो रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ रिकॉर्ड तोड़ गर्मी तो दूसरी और आंधी-बारिश जनजीवन को प्रभावित कर रही है। सोमवार को दोपहर बाद से मंगलवार की सुबह तक 25 जिलों में भारी से हल्के स्तर की बारिश हुई। इस दौरान कटिहार के प्राणपुर में 132.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पुरवा का प्रवाह होने के बावजूद मंगलवार को राज्य के चार जिलों का अधिकतम पारा 40 डिग्री से ऊपर रहा। भभुआ में 43.6, डेहरी में 42.4, औरंगाबाद में 40.8 और छपरा में 40.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वहीं मधेपुरा का अधिकतम तापमान 31.2, पूसा में 32.5, अगवानपुर में 31.3 तो दरभंगा में 32.05 डिग्री सेल्सियस अधिकतम पारा रहा। सोमवार की रात राज्य के कई हिस्सों में 61 किमी की रफ्तार तक आंधी चली। वहीं बुधवार के लिए भी जो पूर्वानुमान जारी किया‌ गया है, उसमें भी सूबे में मौसम के दो रंग होंगे। दक्षिण-पश्चिम भाग के 8 जिले में मौसम शुष्क बने रहने से भीषण गर्मी पड़ेगी तो बाकी हिस्सों में तेज हवा और बारिश के के आसार हैं। आज 24 जिलों में बारिश के आसार बिहार के 24 जिलों में बुधवार को बारिश के आसार हैं। वदीं दक्षिण-मध्य भाग के आठ जिलों में भी एक-दो स्थाानों पर बारिश की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम बाग के छह जिलों में मौसम शुष्क बना रहेगा। मधेपुरा और पूर्णिया में गरज-चमक के साथ भारी बरिश और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पटना में कैसा रहेगा मौसम पटना में बुधवार को आसमान साफ रहेगा। वहीं गुरुवार से तीन दिनों तक जिले के एक या दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस दौरान ज्यादातर जगहों पर बादल छाए रहेंगे। कहीं तेज बारिश तो मध्यम बारिश हो सकती है। लोगों को थोड़ी राहत मिली पटना में पिछले कई दिनों से पछुआ का प्रवाह जारी था। सोमवार शाम से राजधानी में लगातार पुरवा का प्रभाव जारी रहने के कारण लोगों को गर्मी से आंशिक तौर पर राहत मिली है। वहीं राजधानी पटना के न्यूनतम तापमान में 2.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट और अधिकतम तापमान में 0.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई। पटना जिले का अधिकतम तापमान 38.4 और न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तर पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल में तबाही उत्तर और पूर्वी बिहार समेत कोसी, सीमांचल में सोमवार रात आई आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। वहीं आंधी-तूफान की चपेट में आने से भागलपुर में तीन, सुपौल व सीवान में एक-एक और नेपाल के रौतहट क्षेत्र में महिला की मौत हो गई, जबकि पूर्वी चंपारण में दीवार गिरने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी व पश्चिम चंपारण, दरभंगा, मधुबनी और मुजफ्फरपुर, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार और भागलपुर में पेड़, बिजली पोल और तार गिरने से जनजीवन प्रभावित हो गया। कई जगहों पर सड़क संपर्क बाधित रहा और घंटों बिजली आपूर्ति ठप रही। आंधी और ओलावृष्टि से आम, लीची, मक्का, मूंग व सब्जियों की फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। फूस, चदरा, टीन और एस्बेस्टस से बने घरों को भी भारी क्षति पहुंची है।