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बालेन सरकार की कार्रवाई का भारत पर असर? नेपाल सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी

गोरखपुर  नेपाल में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर कब्जे के खिलाफ चल रहे बुलडोजर अभियान के बाद भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।  उत्तर प्रदेश पुलिस की अभिसूचना इकाई नेपाल बार्डर (एनबी) शाखा की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि नेपाल में बढ़ते दबाव और कार्रवाई के चलते वहां रह रहे रोहिंग्या मुसलमान रोजगार और शरण के लिए अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सरकार पूरे देश में अवैध निर्माण, झुग्गी-झोपड़ियों और सरकारी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ अभियान चला रही है। इस कार्रवाई के तहत बुलडोजर से ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। नेपाली सेना ने भी संबंधित निकायों से अवैध बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तृत आंकड़ा मांगा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि काठमांडू के कपन क्षेत्र समेत नेपाल के विभिन्न हिस्सों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हिंदूवादी संगठनों द्वारा नेपाल में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की बस्तियों को हटाने की मांग की जा रही है। नेपाल सरकार की कार्रवाई, सेना के डाटा संकलन और हिंदूवादी संगठनों के विरोध के कारण रोहिंग्या के सामने रोजगार, आवास और आजीविका का संकट गहराने लगा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश रोहिंग्या मुसलमान उर्दू के साथ नेपाली भाषा भी सीख चुके हैं। कई लोगों द्वारा अवैध तरीके से पहचान पत्र बनवाने की जानकारी भी सामने आई है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों में उनकी पहचान कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नेपाल में बलरामपुर जिले की सीमा से सटे गढ़वा गांव पालिका के कोईलावास वार्ड नंबर-8 में अवैध बस्तियों का चिन्हांकन भी शुरू कर दिया गया है।वहां के वर्तमान प्रधान अब्दुल खालिक सिद्दीकी इस कार्रवाई का विरोध कर रहा है और अवैध रुप से रहने वालों को कानूनी अधिकार व जमीन के दस्तावेज देने की मांग कर रहा है। खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि नेपाल में प्रतिकूल हालात बनने पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी सीमावर्ती रास्तों का इस्तेमाल कर भारतीय सीमा में प्रवेश की कोशिश कर सकते हैं। इसी को देखते हुए सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया नेटवर्क को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।  

झारखंड में 60 लाख महिलाओं को मंईयां सम्मान योजना से मिल रही आर्थिक मदद

रांची झारखंड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आधी आबादी को मुख्यधारा में शामिल किए बिना राज्य का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। वर्तमान में राज्य की लगभग 60 लाख महिलाओं को झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति माह वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि इस योजना का पांच से दस प्रतिशत लोग गलत तरीके से लाभ ले रहे हों, लेकिन ऐसे लोगों को रोकने के लिए 90 प्रतिशत लोगों को प्रभावित नहीं किया जा सकता। हेमंत सोरेन सोमवार को झारखंड मंत्रालय में आयोजित नवनियुक्त इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों का नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अवसर न केवल नवनियुक्त अभ्यर्थियों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि राज्य के समग्र और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि इस योजना का लाभ लेने वाली बेटियां आज कलेक्टर जैसे पदों तक पहुंच रही हैं। महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का कार्य भी निरंतर हो रहा है। अब वह समय बीत चुका है, जब महिलाओं को चाहरदीवारी के भीतर सीमित रखा जाता था। आज उन्हें आगे आना है और समाज को भी उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेना है। इस अवसर पर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता सचिव उमा शंकर सिंह, प्राथमिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार रंजन सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। महिलाओं-बच्चों का तैयार करना है भविष्य राज्य सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी, दलित और पिछड़ा वर्ग बाहुल्य है, जो कई कारणों से विकास की गति में पीछे छूट गया था। नवनियुक्त कर्मी गांव-गांव और घर-घर जाकर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करें। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं है, बल्कि आपके माध्यम से सरकार गांव-गांव, घर-घर और हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहती है। खासकर महिलाओं और बच्चों तक, जिन्हें हमें आने वाले भविष्य के लिए तैयार करना है। सीमित दायरे में जीवन जीने वाले इन लोगों को बदलते परिवेश के अनुरूप आगे बढ़ाना, उनका सशक्तिकरण करना, यह बड़ी चुनौती आपके कंधों पर होगी। सरकार निष्पक्ष तरीके से रोजगार देने को प्रतिबद्ध नियुक्ति पत्र वितरण समारोह सभागार उत्साह, उमंग एवं गौरवपूर्ण माहौल से सराबोर रहा। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और राज्य के विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं, वहीं महिला पर्यवेक्षकाएं समाज में महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने तथा महिला एवं बाल विकास योजना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं।

पश्चिमी सिंहभूम में बड़ा एनकाउंटर, कोबरा 209 बटालियन और नक्सलियों में मुठभेड़

 चक्रधरपुर  पश्चिमी सिंहभूम जिले के पोड़ाहाट जंगल में केड़ाबीर के पास मंगलवार तड़के पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में हुई है। सूचना है कि मुठभेड़ के दौरान नक्सली मारे गए हैं। हालांकि अभी तक अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि कितने नक्सली मारे गए हैं। घटना सोनुवा थाना क्षेत्र के केड़ाबीर इलाके में हुई। तड़के साढ़े छह बजे हुई मुठभेड़ पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोबरा 209 बटालियन के जवान पिछले दो दिनों से सोनुवा, गोइलकेरा थाना क्षेत्र के घने जंगलों में सर्च अभियान चला रहे थे। तड़के करीब छह बजे कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान जवानों का नक्सलियों से आमना-सामना हो गया। इसके बाद दोनों ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। रुक-रुक कर चली गोलीबारी में एक या दो नक्सली मारे गए हैं। सूचना है कि पुलिस ने उसके पास से हथियार समेत अन्य सामान बरामद किया है। एसपी ने की पुष्टि, हाई अलर्ट जारी पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इलाके में ऑपरेशन जारी है। मुठभेड़ के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षाबलों की सतर्कता बढ़ा दी गई है और सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। पूरे सारंडा क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। मिसिर बेसरा के नेतृत्व में सक्रिय नक्सली सूत्रों के अनुसार इलाके में माओवादी नेता मिसिर बेसरा के नेतृत्व में नक्सली अब भी सक्रिय हैं। हाल ही में गोईलकेरा थाना क्षेत्र में एक पूर्व नक्सली रमेश चांपिया की हत्या के बाद संकेत मिल रहे थे कि नक्सली सारंडा से निकलकर कोल्हान और पोड़ाहाट जंगल में आसपास के इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। इसके बाद 29 अप्रैल को सुरक्षा बल के साथ मुठभेड़ में मारे गए 1 लाख के इनामी नक्सली इसराइल पूर्ति उर्फ अमृत को मार गिराया था। इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि नक्सलियों के खिलाफ जल्द बड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जंगल क्षेत्रों में पुलिस और नक्सलियों के बीच लुकाछिपी का खेल जारी है। सुरक्षाबल हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

RERC के आदेश से राजस्थान को मिलेगी 24 घंटे स्थिर बिजली आपूर्ति की राह

जयपुर राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) के आदेश ने ऊर्जा नीति और भविष्य की बिजली व्यवस्था को लेकर रास्ता साफ कर दिया है. आयोग ने 15 मई को आदेश में दीर्घकालिक थर्मल पावर खरीद की अनुमति दे दी है. इसका मतलब है कि राजस्थान को अब सिर्फ सौलर या पवन ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना होगा. बल्कि स्थायी और लगातार उपलब्ध रहने वाली बिजली के लिए कोयला आधारित उत्पादन भी जारी रहेगा. दरअसल, राजस्थान में बड़े स्तर पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट विकसित हो रहे हैं. इन दोनों प्रोजेक्ट में चुनौती भी कम नहीं है. क्योंकि रात में सोलर बिजली उपलब्ध नहीं रहती और कई बार हवा की कमी से विंड एनर्जी उत्पादन भी प्रभावित होता है. ऐसे में ग्रिड को स्थिर बनाए रखने और चौबीस घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 'बेसलोड पावर' की जरूरत पड़ती है, जिसे थर्मल पावर प्लांट लगातार उपलब्ध कराते हैं. इससे क्या होगा फायदा, वो भी जानिए ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान में आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी. औद्योगिक विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डेटा सेंटर, शहरीकरण और कृषि क्षेत्र में बढ़ती बिजली जरूरतों के कारण राज्य को स्थायी बिजली स्रोतों की आवश्यकता होगी. ऐसे में यह आदेश सिर्फ थर्मल पावर खरीद की मंजूरी नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इस ऑर्डर से राजस्थान आने वाले दशक में ऊर्जा सुरक्षा, ग्रिड स्थिरता और चौबीस घंटे बिजली उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए “हाइब्रिड पावर मॉडल” की दिशा में आगे बढ़ सकता है.   आयोग ने बिजली खरीद के लिए दिए ये विकल्प केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने वर्ष 2035-36 तक राजस्थान के लिए 4440 मेगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता की आवश्यकता बताई थी. इसी के आधार पर RERC ने  कहा कि राज्य की डिस्कॉम्स थर्मल पावर की खरीद कर सकती है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और कंपनियां MoU, ज्वाइंट वेंचर या फिर बोली के जरिए बिजली खरीद कर सकती है.   बोली का टीबीसीबी ऑप्शन भी खुला बोली के लिए 'टैरिफ बेस्ड कम्पेटिटिव बिडिंग' (TBCB) मॉडल अपनाया जा सकता है. इसमें अलग-अलग कंपनियां बिजली सप्लाई के लिए बोली लगाएंगी. सबसे कम दर और बेहतर शर्तों पर बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनी को टेंडर दिया जाएगा. इससे बिजली खरीद की लागत कम रखने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी.

तेज चलने से बढ़ सकती है उम्र: लीसेस्टर स्टडी में बड़ा खुलासा

हेल्दी रहने के लिए पैदल चलना सबसे आसान तरीका है। यह आपके पूरे शरीर की फिटनेस को सही रखने में मदद करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके चलने की स्पीड से उम्र की लंबाई पर असर पड़ता है। लीसेस्टर बायोकेमिकल रिसर्च सेंटर की स्टडी ने पता लगाया कि तेज चलने वालों या धीमा चलने वालों में से कौन ज्यादा जीते हैं? इसी सेंटर की दूसरी रिसर्च इसके पीछे का कारण भी बताती है। तेज या धीमी गति, कैसे चलने वाले लोग जीते हैं लंबा? लीसेस्टर सेंटर की रिसर्च ने यूके बायोबैंक के 474,919 लोगों के चलने की आदत का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि तेज स्पीड से चलने की आदत वाले लोगों की संभावित उम्र (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) धीमा चलने वालों के मुकाबले ज्यादा होती है। उन्होंने यह पता भी लगाया कि संभावित उम्र का शारीरिक वजन से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से गहरा नाता है। उन्होंने पाया कि जो अंडरवेट (जरूरत से ज्यादा पतले) लोग धीमी स्पीड से चलते हैं, उनकी उम्र सबसे कम देखी जाती है। धीमा चलने वाले अंडरवेट पुरुषों की संभावित उम्र औसतन 64.8 साल और ऐसी अंडरवेट महिलाओं की औसतन उम्र 72.4 साल होती है। शारीरिक वजन से बेहतर है ये इंडिकेटर इस रिसर्च के प्रमुख लेखक प्रोफेसर टॉम येट्स कहते हैं कि हमारा शोध यह साफतौर पर दिखाता कि संभावित उम्र को देखने के लिए बॉडीवेट स्टेटस से ज्यादा बेहतर इंडिकेटर फिजिकल एक्टिविटी स्टेटस है। हमारा शोध लोगों को तेज चलकर अपनी उम्र बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। आपको बता दें कि यह शोध साल 2019 में प्रकाशित हुआ था। दूसरा शोध: टेलोमेयर है कारण 2022 में कम्युनिकेशन बायोलॉजी पर प्रकाशित लीसेस्टर के दूसरे शोधकर्ताओं की रिसर्च तेज चलने और लंबी उम्र के कारण के बारे में बताती है। इसमें यूके बायोबैंक के 405,981 लोगों का अध्ययन किया गया। जिसमें पाया कि चलने की स्पीड हेल्थ के बारे में जानने का मजबूत संकेत है। अध्ययन में तेज गति से चलने वाले लोगों के ल्यूकोसाइट टेलोमेयर की लंबाई धीमा चलने वालों के मुकाबले ज्यादा मिली। इसी की वजह से उनकी संभावित उम्र में बढ़ोतरी का संबंध पाया गया। टेमोमेयर और लंबी उम्र का रिश्ता कई सारे शोधों के बाद टेलोमेयर को लाइफ एक्सपेक्टेंसी और उम्र संबंधी बीमारियों के साथ मजबूती से जोड़कर देखा गया। साइंस डायरेक्ट पर मौजूद शोध बताता है कि टेलोमेयर लीनियर क्रोमोजोमल डीएनए के आखिरी सिरे पर मौजूद कैप होती है। जो क्रोमोजोम को डैमेज होने से बचाती है और इनकी स्टेबिलिटी को बढ़ाती है। 100 साल से ज्यादा जीने वाले लोगों में टेलोमेयर की लंबाई कम उम्र में किसी बीमारी से मरने वाले लोगों की तुलना में अधिक पाई गई है।  

सुपरकॉप दमयंती सेन फिर पावर में, महिलाओं-बच्चों के अपराध जांच आयोग की बनीं मेंबर सेक्रेटरी

कलकत्ता सीनियर आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन की पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था में वापसी हो गई है. उन्होंने साल 2012 के पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की जांच से खूब सुर्खियां बटोरी थीं. लेकिन तत्कालीन TMC सरकार में नो हाशिए पर धकेल दी गई थीं।  दमयंती सेन को शुभेंदु सरकार ने एक विशेष आयोग में नियुक्त किया है. ये आयोग महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच के लिए बनाया है.  श्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद इस नियुक्ति का ऐलान किया।  सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि आईपीएस दमयंती सेन को उस जांच आयोग का 'मेंबर सेक्रेटरी' नियुक्त किया गया है, जो टीएमसी के 15 साल के शासनकाल के दौरान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अत्याचारों की जांच करेगा. ये आयोग अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और बच्चों के साथ हुए अपराधों की जांच करेगा।  कौन हैं आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन? बता दें कि साल 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन कोलकाता पुलिस की पहली महिला ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) थीं. 6 फरवरी 2012 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक नाइट क्लब से निकली महिला के साथ चलती कार में सामूहिक बलात्कार हुआ था. तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को उनकी नई सरकार को बदनाम करने के लिए रचा गया एक 'सजायनो घटना' (मनगढ़ंत कहानी) करार दिया था।  सच का साथ देने पर हुआ था तबादला दमयंती सेन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच की और कुछ ही दिनों में आरोपियों को दबोच लिया. पुलिस जांच ने साबित कर दिया कि बलात्कार की घटना सच थी, जो सरकार के राजनीतिक दावों के बिल्कुल उलट था. केस सुलझने के तुरंत बाद ही दमयंती सेन का तबादला लालबाजार क्राइम ब्रांच से बैरकपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कर दिया गया था।  सरकार ने इसे रूटीन ट्रांसफर बताया था, लेकिन विपक्ष और आलोचकों का मानना था कि सरकार के रुख के खिलाफ जाकर सच सामने लाने की वजह से उन्हें सजा दी गई. इसके बाद टीएमसी के पूरे कार्यकाल में उन्हें किसी बड़े की जिम्मेदारी नहीं दी गई।  हाईकोर्ट ने जताया था भरोसा प्रशासनिक हलकों में दमयंती सेन की ईमानदारी हमेशा चर्चा में रही. साल 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायपालिका का भरोसा जताते हुए उन्हें राज्य के चार बलात्कार मामलों और चर्चित रसिका जैन मौत मामले की जांच सौंपी थी. इसके बाद 2023 में उन्हें एडीजी (ट्रेनिंग) बनाया गया था। 

दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों में बढ़ेंगी सुविधाएं, पर्यटकों को मिलेगा डिजिटल सपोर्ट

नई दिल्ली  भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) अब पर्यटकों की सुविधाआें पर अधिक ध्यान दे रहा है । इसके तहत जहां स्मारकों में मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट लगाए गए हैं, वही आने वाले समय में स्मारकों में वाई-फाई की सुविधा भी शुरू किए जाने की योजना है। छायादार वृक्षों के नीचे व छाया वाले अन्य स्थानों पर बेंच लगाए जा रहे हैं। स्मारकों में पर्याप्त पीने के ठंडे पानी के साथ-साथ बेहतर शौचालय की व्यवस्था पर भी काम किया गया है और इन्हें अपग्रेड भी किया जा रहा है। मोबाइल चार्जिंग की सुविधा इससे पर्यटकों के सामने मोबाइल की बैटरी खत्म होने पर समस्या नहीं होगी। मोबाइल चार्जिंग की सुविधा 11 टिकट वाले 11 स्मारकों में की जा रही है। इन्हें स्मारक के प्रवेश द्वार के पास लगाया गया है। जिन में एक बार में एक से अधिक लोग अपना मोबाइल चार्ज कर सकते हैं। इनमें लाल किले में सबसे ज्यादा 8 चार्जिंग पॉइंट लगाए गए हैं। इन्हें चारों संग्रहालयों के प्रवेश और बाहर निकलने वाले गेट के पास लगाया गया है। कुतुब मीनार, पुराना किला और हुमायूं के मकबरे में तीन-तीन चार्जिंग प्वाइंट लगाए गए हैं। फिरोजशाह कोटला, सफदरजंग मकबरा और हाैज खास में दो-दो प्वाइंट लगाए गए हैं। इन जगहों पर मिलेंगी सुविधाएं हौज खास चिल्ड्रन म्यूजियम, दिल्ली मंडल कार्यालय और तिलक मार्ग पर धरोहर भवन में एक-एक चार्जिंग प्वाइंट की सुविधा दी गई है। खान ए खाना, सुल्तान गारी, तुगलकाबाद किला में भी चार्जिंग प्वाइंट लगाए जाने की प्रक्रिया जारी है। इसी तरह लाल किला, कुतुब मीनार हुमायूं का मकबरा में वाई -फाई की सुविधा शुरू करने की भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की योजना है। हालांकि लाल किले में पूर्व में वाई-फाई की सुविधा शुरू की जा चुकी है। मगर वह सफल नहीं रह सकी थी। इसलिए अब व्यवस्थित तरीके से इसे शुरू किया जाने की योजना पर काम हो रहा है। सभी स्मारकों में पीने के पर्याप्त ठंडे पानी के उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। एएसअइ की तरफ से जारी निर्देश में यह भी कहा गया है कि कर्मचारी समय-समय पर पेयजल स्थित का निरीक्षण करते रहेंगे, ताकि पानी खत्म ना हो पाए। जिससे इस भीषण गर्मी में पर्यटकों को परेशानी से बचाया जा सके।  

बिहार: मंदिर से चोरी हुई मूर्तियां रहस्यमय तरीके से सड़क किनारे मिलीं

पटना  बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी से आस्था से जुड़ी एक अनोखी खबर सामने आई है। दो महीने पहले छाता ठाकुरबाड़ी मंदिर से करीब 6 करोड़ रुपये मूल्य की अष्टधातु की प्राचीन मूर्तियां चोरी हो गई थीं। अब ये मूर्तियां रहस्यमय तरीके से करीब 67 दिन बाद वापस मिल गई हैं। इन मूर्तियों को खोजने में पुलिस नाकाम रही थी। सोमवार की रात अष्टधातु की प्राचीन मूर्तियां सड़क किनारे कपड़े में लपेटकर लावारिस हालत में छोड़ गया। ग्रामीण इसे भगवान का चमत्कार और चोरों पर दैवीय भय का असर मान रहे हैं। 16 मार्च को चोरी हुई थीं राम, जानकी और लक्ष्मण की मूर्तियां मिली जानकारी के मुताबिक, मसौढ़ी के छाता ठाकुरबाड़ी मंदिर से बीते 16 मार्च की रात करीब 100 साल पुरानी भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण की अष्टधातु की तीन मूर्तियां चोरी हो गई थीं। इसके साथ ही चांदी के दो मुकुट भी गायब कर दिए गए थे। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था। चोरी को लेकर मसौढ़ी थाना में मामला दर्ज कराया गया था। तीन गांव के बाहर सड़क किनारे छोड़ी गईं मूर्तियां चांदी के मुकुट पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी और जांच की, लेकिन दो महीने तक मूर्तियों का कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच छाता गांव, शाहाबाद और लखनौर गांव के सीमावर्ती इलाके में सड़क किनारे कपड़े में लिपटी हालत में तीनों मूर्तियां और चांदी के मुकुट बरामद हुए। भगवान के डर से मूर्तियां छोड़ गए चोर: ग्रामीण मूर्तियों के मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में खुशी और भक्ति का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि 'भगवान की महिमा ऐसी है कि चोर भी डर गए और मूर्तियां छोड़कर भाग निकले।' मसौढ़ी थानाध्यक्ष विवेक भारती मूर्तियां मिलने की खबर पाते ही मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जरूरी कागजी कार्रवाई कर मूर्तियां मंदिर प्रबंधन समिति को सौंप दी। मूर्तियां चोरी होने के बाद पुलिस लगातार जहानाबाद, मसौढ़ी सहित अन्य जगहों पर छापेमारी कर रही थी। इस वजह से चोर मूर्तियों को बाजार में खपा नहीं पाए और पकड़े जाने के डर से मूर्तियां रखकर भाग गए। ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली शोभायात्रा, फूल बरसाकर लोगों ने किया स्वागत इसके बाद ग्रामीणों ने गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण जी की भव्य शोभायात्रा निकाली। श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया और पूरे विधि-विधान के साथ छाता ठाकुरबाड़ी मंदिर में पुनः स्थापना की गई। मंदिर परिसर 'जय श्रीराम' और 'सियावर रामचंद्र की जय' के नारों से गूंज उठा।  

BPSC परीक्षा नियमों में बदलाव, अब अनिवार्य होगा ‘विकल्प E’ और मिलेगा अतिरिक्त समय

पटना  तीन जून को आयोजित 33वीं बिहार न्यायिक सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के पांचवें विकल्प की व्यवस्था लागू होगी। बीपीएससी की यह पहली परीक्षा होगी, जो परिवर्तित उत्तर प्रणाली के साथ आयोजित होगी। साथ ही इस परीक्षा के लिए क्षतिपूरक (अतिरिक्त) समय देने का निर्णय लिया है। 33वीं न्यायिक सेवा परीक्षा की प्रथम पाली (सामान्य अध्ययन) के लिए 10 मिनट अतिरिक्त देते हुए नया समय 10:00 से 11:40 बजे निर्धारित किया गया है। द्वितीय पाली (विधि विषय) के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय बढ़ाकर इसे 02:00 से 04:15 बजे तक कर दिया गया है। उत्तर नहीं देने पर विकल्प ई का चयन करें नई व्यवस्था के तहत अब प्रश्न पत्र में चार के बजाय पांच विकल्प (ए, बी, सी, डी, ई) दिए जाएंगे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बदलाव विकल्प ई को लेकर है, जिसका अर्थ प्रयास नहीं किया गया होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अभ्यर्थी किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता, तो उसे अनिवार्य रूप से विकल्प ई का चयन करना होगा। यदि कोई अभ्यर्थी किसी भी विकल्प (ए से ई तक) को खाली छोड़ देता है, तो उस स्थिति में एक तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग की जाएगी। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि यह अतिरिक्त समय केवल इसी परीक्षा के लिए मान्य है। इसे भविष्य की अन्य परीक्षाओं के लिए आधार न माना जाए।

दिल्ली रोड चौड़ीकरण के लिए 70 भवनों का अधिग्रहण, 56 करोड़ मुआवजा जारी

मेरठ शहर में दिल्ली रोड पर जगदीश मंडप से ट्रांसपोर्ट नगर के गेट तक रैपिड रेल काॅरिडोर के कारण जाम की समस्या बनी है। इसके समाधान के लिए सड़क को दोनों ओर तीन-तीन मीटर चौड़ा किया जाएगा। इस चौड़ीकरण के लिए जिला प्रशासन ने 70 भवनों और भूखंडों से भूमि का अधिग्रहण किया है। भूमि मालिकों को मुआवजा भुगतान के साथ ही अधिग्रहण का यह कार्य अब पूरा कर लिया गया है। जिसके बाद लोगों ने खुद ही भवनों के उस हिस्से को हटाना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन जल्द अधिग्रहीत की गई भूमि को एनसीआरटीसी को सौंप देगा। दिल्ली रोड पर सड़क चौड़ीकरण के लिए ध्वस्त किया निर्माण नमो भारत (Namo Bharat) और मेरठ मेट्रो (Meerut Metro) रेल काॅरिडोर दिल्ली रोड पर जगदीश मंडप के पास भूमिगत हो रहा है। सड़क के बीचोबीच कारिडोर निर्माण के कारण सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण यहां जाम की समस्या बन गई है। जिससे शहर की जनता के साथ साथ यहां से गुजरने वाले लोग लंबे समय से परेशान हैं। इसके समाधान के लिए एनसीआरटीसी ने सड़क के दोनों ओर नालों को तीन-तीन मीटर पीछे स्थानांतरित करके सड़क का चौड़ीकरण करने की तैयारी की है। इस चौड़ीकरण के लिए दोनो और 70 दुकानों, भवनों और भूखंडों से जमीन का अधिग्रहण किया गया है। जिला प्रशासन ने अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा करके भूमि मालिकों के खातों में मुआवजा राशि भेज दी है। 67 भूमि मालिकों को मिले 56 करोड़ तीन भूखंडों पर विवाद सामने आया है। इनमें से ली जाने वाली भूमि की राशि को जिला प्रशासन कोर्ट में जमा कराएगा। अन्य 67 भूमि मालिकों को 56 करोड़ से ज्यादा राशि का भुगतान किया जा चुका है। भुगतान मिलने के बाद भूमि मालिकों ने इस हिस्से में हुए निर्माण को हटाना भी शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन का कहना है कि निर्माण हटने के बाद इस जमीन को अब एनसीआरटीसी को सौंप दिया जाएगा, जिसपर वह निर्माण शुरू करेगी। छूटे खसरों से होगी सीधी खरीद बीएसएनएल कार्यालय वाली साइड में चार खसरों की भूमि का अधिग्रहण नहीं हो सका है। एनसीआरटीसी के प्रस्ताव में यह खसरा संख्या छूट गए थे। अब इन खसरों की जमीन की सीधी खरीद करने का दावा किया जा रहा है। चौड़ीकरण को लेकर खास तथ्य 800 मीटर लंबाई में दोनों ओर चौड़ी होगी सड़क 03 मीटर दोनों ओर होना है सड़क का चौड़ीकरण 70 दुकानों और भवनों की जमीन का हुआ अधिग्रहण 56 करोड़ रुपये बंट गया मुआवजा इन्होंने कहा…     दिल्ली रोड के जाम के समाधान के लिए भूमि अधिग्रहण कर लिया गया है। इस भूमि को जल्द एनसीआरटीसी को सौंपकर सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूर्ण कराया जाएगा।     -डा. वीके सिंह, जिलाधिकारी।