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झारखंड में बालू आपूर्ति सुधार की कवायद, 6 घाटों से खनन शुरू करने की तैयारी

रांची झारखंड में बालू की आपूर्ति सामान्य करने के लिए खान विभाग ने नीतिगत बदलाव के बाद अब सभी जिलों को निर्देश देना शुरू कर दिया है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि बालू खनन पर रोक हटने के साथ ही शनिवार होने के बावजूद छह बालू घाटों से संबंधित कागजी प्रक्रियाओं को पूर्ण कर दिया गया है। इन्हीं घाटों से कई करोड़ सीएफटी बालू का प्रबंध हो जाएगा। राज्य में 29 और बालू घाटों से संबंधित कागजी कार्रवाई को अनुमति मिलने के बाद पूरे राज्य में उपभोक्ताओं के लिए बालू की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। दुमका समेत कई और जिलों के बड़े बालू घाटों से संबंधित कागजी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। सरकार के लिए राहत की बात यह भी है कि अधिसंख्य बड़े घाटों को ईसी मिल चुकी है और कहीं भी बालू की कमी नहीं है। अनुमान के मुताबिक झारखंड के बालू घाटों पर नौ करोड़ घन फीट से अधिक बालू का स्टाक है जिसे आने वाले दिनों में आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस बार सरकारी कार्यों के लिए भी बालू खरीदने पर चालान कटाने का नियम लागू किया गया है। पहले चरण में जिन छह घाटों को खनन की स्वीकृति प्रदान की गई है उनमें दो रांची में स्थित हैं, दो बोकारो और दो जमशेदपुर में। इसके अलावा तमाम कागजी पूर्ण कर चुके बालू घाटों में दुमका में पांच, खूंटी में दो, जामताड़ा में तीन, हजारीबाग में छह, रांची में एक, गोड्डा में चार को अनुमति मिल जाएगी। इसी तरह पूर्वी सिंहभूम में एक, रामगढ़ में तीन एवं लातेहार में चार बालू घाटों को एक-दो दिनों में अनुमति प्रदान किए जाने की उम्मीद है।  

नीमच में आक्रोशित भीड़ ने किया हंगामा, कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे लोग

 मनासा/महागढ़ (नीमच) महागढ़ के एक ग्रामीण की मौत के बाद आक्रोशित भीड़ व स्वजनों ने नगर के मनासा नाके पर शव रखकर जाम कर दिया। लगभग 4 घंटे से अधिक चले जाम के दौरान स्वजनों और भीड़ ने दूसरे पक्ष के लोगों पर ग्रामीण की हत्या के आरोप लगाए हैं। साथ ही पूर्व की शिकायत पर पुलिस द्वार कार्रवाई में अनदेखी करने का दावा भी किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती है तो ग्रामीण की जान नहीं जाती। एसडीएम के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। एसडीएम ने ग्रामीण के स्वजनों को आर्थिक सहायता देने का भरोसा भी दिया है।

PMCH में 200 छात्रों की आंतरिक परीक्षा रद्द, नई तारीखें जारी

पटना देश में NEET की परीक्षा रद्द होने के बाद अब पटना में एमबीबीएस की परीक्षा रद्द कर दी गई है।पटना मेडिकल कॉलेज के औषधि विभाग के वर्ष 2022 बैच के एमबीबीएस छात्रों की प्रथम आंतरिक परीक्षा रद्द कर दी गई है। इसमें लिखित, मौखिक और प्रायोगिक परीक्षा शामिल हैं। कदाचार की आशंका को देखते हुए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। परीक्षा में औषधि विभाग के करीब 200 छात्र शामिल हुए थे। इसकी सूचना पटना मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने औषधि विभाग के विभागाध्यक्ष को दी है। साथ ही कार्रवाई के लिए मेडिकल एजुकेशन यूनिट को भी सूचित किया गया है। परीक्षा 11 और 12 मई को आयोजित की गई थी। 11 मई को लिखित परीक्षा हुई थी, जबकि 12 मई को मौखिक और प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा रद्द करने के साथ ही पटना मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नई तिथियां भी जारी कर दी हैं। नई तिथि के अनुसार लिखित परीक्षा 20 मई को दोपहर एक बजे से दो बजे तक आयोजित की जाएगी। लिखित परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र का पैटर्न भी कॉलेज प्रशासन ने जारी किया है। वहीं 21 मई को मौखिक और प्रायोगिक परीक्षा होगी, जो सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगी। परीक्षा में औषधि विभाग के सभी फैकल्टी सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई है। नीट पर्चा लीक में एनटीए की विशेषज्ञ गिरफ्तार इधर नीट यूजी-2026 में बायोलॉजी का प्रश्नपत्र लीक कराने में लिप्त कथित मास्टरमाइंड मनीषा गुरुनाथ मंधारे को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। मनीषा पुणे के एक कॉलेज में बॉटनी की लेक्चरर हैं। उसे एनटीए ने नीट यूजी-2026 में विशेषज्ञ बनाया था। जांच में सामने आया है कि परीक्षा के बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्नपत्रों तक उसकी पूरी पहुंच थी। सीबीआई के अनुसार, बीते अप्रैल में मनीषा मंधारे ने पुणे की मनीषा वाघमारे (जिसे 14 मई को गिरफ्तार किया गया) के जरिये नीट अभ्यर्थियों को जमा किया और उनके लिए पुणे स्थित अपने आवास पर विशेष कक्षाएं चलाईं। इनमें छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी के कई सवाल बताए गए। इनमें से अधिकांश प्रश्न तीन मई को आयोजित नीट यूजी के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। मनीषा की गिरफ्तारी लातूर के शिक्षक पीवी कुलकर्णी के बाद हुई है। कुलकर्णी भी नीट के प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समितियों में था। सीबीआई जांच में पता चला है कि केमिस्ट्री व बायोलॉजी पर्चा लीक का स्रोत परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग ही थे और कुछ बिचौलियों ने लाखों में पर्चे बेचे और छात्रों को विशेष कोचिंग कक्षाओं तक पहुंचाया। वहां, परीक्षा में आने वाले सवाल बताए गए।

मनी प्लांट लगाने की सही दिशा और फायदे: घर में बढ़ेगी सुख-समृद्धि

 घर में पौधे लगाना सिर्फ सजावट नहीं होती है, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार यह आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति लाने का एक माध्यम माना जाता है. सही दिशा और सही पौधों का चयन आपके घर की ऊर्जा को पूरी तरह बदल सकता है. ऐसे में अगर आप कम देखभाल वाला इनडोर पौधा ढूंढ रहे हैं, जो घर में ताजगी भी लाए, तो वास्तु के अनुसार मनी प्लांट एक बेहतरीन विकल्प है. यह न सिर्फ घर की हवा को बेहतर बनाता है, बल्कि आर्थिक सुख-समृद्धि लाने में भी मददगार माना जाता है. तो आइए जानते हैं इसे घर में लगाने की सही दिशा. मनी प्लांट लगाने के वास्तु फायदे 1. धन और समृद्धि में वृद्धि मनी प्लांट का सीधा संबंध आर्थिक उन्नति से जोड़ा जाता है. इसे घर या ऑफिस में लगाने से आय के स्रोत बढ़ने और धन संचय में मदद मिलने की मान्यता है. 2. सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह यह पौधा घर के वातावरण में पॉजिटिव वाइब्स बढ़ाता है और नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है, जिससे घर का माहौल शांत व सुखद रहता है. 3. रिश्तों में मधुरता वास्तु के अनुसार, मनी प्लांट घर में आपसी संबंधों को बेहतर बनाता है और तनाव को कम करता है. 4. आसान देखभाल (Low Maintenance) यह पौधा कम देखभाल में भी अच्छी तरह बढ़ता है, इसलिए व्यस्त जीवनशैली वाले लोगों के लिए भी उपयुक्त है. मनी प्लांट रखने की सही दिशा दक्षिण-पूर्व (South-East): मनी प्लांट लगाने की सबसे शुभ दिशा मानी जाती है दक्षिण पू्र्व. यह दिशा भगवान गणेश और शुक्र ग्रह से जुड़ी होती है, जो धन और सुख के कारक हैं. पूर्व दिशा (East): मनी प्लांट यहां रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और तरक्की के योग बनते हैं. इस बात का भी रखें ध्यान मनी प्लांट को उत्तर-पूर्व (North-East) में नहीं रखना चाहिए. पौधे की बेल ऊपर की ओर बढ़नी चाहिए. मनी प्लांट की नीचे लटकती बेल को अशुभ माना जाता है. मनी प्लांट से जुड़ी जरूरी सावधानियां सूखा या पीला पौधा न रखें- यह आर्थिक नुकसान का संकेत माना जाता है. जमीन को न छुए- बेल का जमीन पर फैलना शुभ नहीं माना जाता है. दूसरों से मनी प्लांट न लें- मान्यता है कि इससे धन का नुकसान हो सकता है. नियमित देखभाल करें- पौधा जितना हरा-भरा होगा, उतना ही शुभ फल देगा. वास्तु शास्त्र में मनी प्लांट को घर की आर्थिक स्थिति, सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा गया है. सही दिशा और सही देखभाल के साथ यह पौधा न केवल घर की खूबसूरती बढ़ाता है, बल्कि आपकी तरक्की और समृद्धि के रास्ते भी खोल सकता है.

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, निवेशकों के लिए अहम होगा आने वाला सप्ताह

नई दिल्ली  भारतीय शेयर बाजार (Stock Market Outlook) के लिए अगला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई की चाल और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल निर्धारित करेंगे। आने वाले सत्रों में निवेशकों की निगाहें अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर होंगी। दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। वहीं, ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नया प्लान पेश करने वाला है। दूसरी तरफ अमेरिका भी ईरान के लेकर आक्रामक बना हुआ है। कच्चे तेल पर निवेशकों की निगाहें बनी हुई हैं। तेल के दाम उछले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री के बयानों के बाद शुक्रवार को तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाजों पर हमलों और जब्ती को रोकने के लिए संभावित समझौते की उम्मीदें कमजोर हो गई हैं। इस सप्ताह के दौरान, ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के चलते ब्रेंट क्रूड में 7.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि डब्ल्यूटीआई में 10.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विदेशी निवेशक भी खफा विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भी भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी अहम होने वाले हैं। एफआईआई ने इस महीने में अब तक (16 मई तक) 27,177 करोड़ रुपए की बिकवाली की है। वहीं, 2026 में अब तक 2,31,486 करोड़ रुपए सेकेंडरी इक्विटी बाजार से निकाल चुके हैं। वहीं, प्राइमरी बाजार के माध्यम से वर्ष के दौरान कुल निवेश 12,468 करोड़ रुपए रहा है। इस वर्ष एफपीआई द्वारा की गई कुल बिक्री पिछले वर्ष दर्ज की गई कुल निकासी को पार कर चुकी है। दूसरी तरफ घरेलू आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। 21 मई को एचएसबीसी पीएमआई का डेटा जारी होगा। वहीं, 22 मई को बैंक लोन, बैंक डिपॉजिट और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे आंकड़े जारी होंगे। भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता हफ्ता नुकसान वाला रहा। कैसा रहा पिछला हफ्ता? पिछले हफ्ते सेंसेक्स 2,090 अंक या 2.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,237 और निफ्टी 532 अंक या 2.20 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,643 पर बंद हुआ। इस दौरान सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी 8.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप गेनर था। निफ्टी आईटी 5.71 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 4.71 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 4.36 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.16 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 4.12 प्रतिशत, निफ्टी ऑयलएंडगैस 3 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 2.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा 2.18 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.17 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।  

इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2 रिव्य,क्राइम और एक्शन का धमाका

उत्तर प्रदेश के बैकग्राउंड पर बनी वेब सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश' अपने दूसरे सीजन के साथ एक बार फिर कॉप-थ्रिलर की दुनिया में लौट आई है. नीरज पाठक के डायरेक्शन में बनी यह सीरीज अपराध, राजनीति और पर्सनल संघर्षों का एक ऐसा मेल है, जो दर्शकों को कुर्सी से बांधे रखने की कोशिश करती है. 10 एपिसोड की इस सीरीज में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अविनाश मिश्रा के उसी बेखौफ अंदाज को आगे बढ़ाया गया है, जिसे रणदीप हुड्डा ने अपनी दमदार अदाकारी से फिर जान फूंक दी है. हालांकि, कॉप ड्रामा में अक्सर देखी जाने वाली कुछ घिसी-पिटी बातें यहां भी मौजूद हैं, लेकिन कलाकारों की परफॉर्मेंस और कहानी में आने वाले जज्बाती मोड़ इसे एक बार देखने लायक जरूर बनाते हैं. सस्पेंस और एक्शन के शौकीनों के लिए यह सीजन काफी मसालेदार साबित होने वाला है. अपराध और परिवार के बीच फंसा 'अविनाश' सीरीज की कहानी इस बार सिर्फ अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंस्पेक्टर अविनाश के पर्सनल लाइफ में आए तूफान को भी दिखाती है. इस सीजन में अविनाश का मुकाबला 'शेख' (अमित सियाल) और 'देवी' (अभिमन्यु सिंह) के खतरनाक हथियारों के गिरोह से है. लेकिन कहानी तब गंभीर मोड़ लेती है जब अविनाश के खुद के बेटे पर हत्या का गलत आरोप लग जाता है. घर में पत्नी की नाराजगी और बाहर दुश्मनों की साजिशों के बीच अविनाश किस तरह कानून और अपने परिवार की गरिमा को बचाता है, यही इस सीजन का मेन अट्रैक्शन है. रणदीप हुड्डा का एक बार फिर चला जादू इस पूरी सीरीज की सबसे मजबूत कड़ी रणदीप हुड्डा हैं. उन्होंने अविनाश मिश्रा के किरदार में जान फूंक दी है. चाहे वह अपराधियों से टकराने वाला गुस्सा हो या अपने परिवार के लिए उनकी आंखों में दिखने वाला दर्द, रणदीप ने हर इमोशन को बखूबी जिया है. उनके वन-लाइनर्स और एक्शन करने का अंदाज इतना सहज है कि वह स्क्रीन पर पूरी तरह छा जाते हैं. रणदीप की यह खासियत है कि वह गंभीर दृश्यों के बीच में भी हल्के-फुल्के हास्य और रोमांस का तड़का लगाना जानते हैं, जो दर्शकों को बोरियत महसूस नहीं होने देता. इसके साथ ही अविनाश का कभी-कभी सीधे दर्शकों से बात करना, बहुत अच्छा असर डालता है. वहीं सीरीज में रणदीप के अलावा बाकी कलाकारों ने भी बेहतरीन काम किया है. उर्वशी रौतेला ने अविनाश की पत्नी पूनम के रूप में एक सेंसटिव परफॉर्मेंस दी है, जो अपने पति के खतरनाक पेशे और परिवार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं. उर्वशी रौतेला की एक्टिंग के लिए तो आपको ये सीरीज देखना ही चाहिए. विलेन के रूप में अभिमन्यु सिंह काफी खौफनाक नजर आते हैं, वहीं अमित सियाल ने 'शेख' के किरदार को अपनी चिर-परिचित खामोशी और क्रूरता के साथ निभाया है. शालिन भनोट दोस्ती और वफादारी के सीन में जंचते हैं, जबकि फ्रेडी दारूवाला और रजनीश दुग्गल जैसे कलाकारों ने भी कहानी के माहौल को और गंभीर बनाने में मदद की है. कहानी की कुछ कमजोर कड़ियां एक्टिंग के मामले में सीरीज जितनी मजबूत है, राइटिंग के मामले में कई मौकों पर उतनी ही कमजोर पड़ जाती है. कहानी के कुछ सब-प्लॉट्स, जैसे डॉ. सुमन का ट्रैक, थोड़े खींचे हुए और बनावटी लगते हैं. कुछ किरदारों के फैसले रियलिटी से परे नजर आते हैं, जो आपको थोड़ा खटक सकते हैं. साथ ही, बीच के एपिसोड में कहानी थोड़ी धीमी हो जाती है और कॉप-थ्रिलर की वही पुरानी घिसी-पिटी बातों का सहारा लेती है, जिससे सस्पेंस का ग्राफ थोड़ा नीचे गिर जाता है. डायलॉग भी कुछ खास असर नहीं छोड़ते, जिससे कई बार जरूरत से ज्यादा ये फिल्मी लगने लगती है. वहीं अविनाश के पंडित जी की कहानी को इस सीजन में भी नहीं बताया गया है यानी उस किरदार को जानने के लिए अगले सीजन का इंतजार करना पड़ सकता है. अब अगर आप रणदीप हुड्डा के फैन हैं और आपको कॉप-थ्रिलर फिल्में या सीरीज पसंद हैं, तो 'इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2' आपको निराश नहीं करेगी. हालांकि इसमें कुछ नयापन कम है, लेकिन दमदार एक्टिंग, यूपी का स्वैग और ढेर सारा ड्रामा इसे एक एंटरटेन बनाता है. आप इसे देखना शुरू करेंगे तो अंत तक इसके साथ जुड़ जाएंगे.

रांची के BIT मेसरा में विकसित हुई AI तकनीक, चंद्रयान-2 डेटा से चंद्र सतह का विश्लेषण आसान

रांची  BIT मेसरा के शोधकर्ताओं ने चंद्रमा की सतह पर मौजूद क्रेटरों (गड्ढों) की पहचान और विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है। यह शोध भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-2 अनाउंसमेंट आफ आर्पच्युनिटी (AO) प्रोग्राम के अंतर्गत प्रायोजित किया गया है। इस महत्वपूर्ण शोध कार्य का संचालन प्रमुख अन्वेषक डॉ. संचिता पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग तथा सह-प्रमुख अन्वेषक डॉ. मिली घोष, एसोसिएट प्रोफेसर, रिमोट सेंसिंग एंड जियोइंफार्मेटिक्स विभाग के मार्गदर्शन में किया गया। इस परियोजना में मीमांसा सिन्हा, पीएचडी शोधार्थी, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चंद्रायन-2 के डेटा का हुआ इस्तेमाल शोधकर्ताओं ने चंद्रयान-2 के टीएमसी-2 डीईएम डेटा का उपयोग करते हुए चंद्र सतह के छोटे एवं जटिल क्रेटरों की पहचान के लिए एक अनुकूलित डीप लर्निंग फ्रेमवर्क विकसित किया। अध्ययन में विभिन्न डीप लर्निंग माडल का परीक्षण किया गया, जिसमें मास्क आर-सीएनएन विद रेसनेट-101 बैकबोन ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। शोध में पाया गया कि डिजिटल एलिवेशन माडल (डीईएम) आधारित तकनीक पारंपरिक इमेज आधारित पद्धतियों की तुलना में अधिक सटीक और भू-आकृतिक रूप से प्रभावी है। इससे क्रेटरों की सीमाओं, गहराई और क्षतिग्रस्त क्रेटरों की पहचान बेहतर तरीके से संभव हुई। हाई-रिजॉल्यूशन कैटलॉग तैयार इस परियोजना के अंतर्गत शोधकर्ताओं ने टीएमसी-2, लोला, सेलीन और एनएसी जैसे बहु-सेंसर डेटा का एकीकृत उपयोग कर क्रेटर डिटेक्शन की नई कार्यप्रणाली तैयार की। साथ ही, व्यास, गहराई, ढाल, वृत्ताकारता और सतही खुरदरापन जैसे मापदंडों के स्वचालित विश्लेषण के लिए एक विशेष मार्फोमेट्रिक एक्सट्रैक्शन फ्रेमवर्क विकसित किया गया। टीम ने क्रेटर मार्फो नामक एक विशेष आर्क जीआइएस प्रो-टूलबाक्स भी तैयार किया है, जो आटोमेटिक क्रेटर विश्लेषण में सहायक होगा। इसके माध्यम से एक किलोमीटर आकार के क्रेटरों का उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैटलाग तैयार किया गया है। डेटा कलेक्शन में मिलेगा मदद शोध में यह भी सामने आया कि केवल एक डेटा सेट पर निर्भर रहने से सेंसर रिजॉल्यूशन और कवरेज से संबंधित व्यवस्थित त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए बहु-स्रोत डेटा आधारित विश्लेषण को अधिक विश्वसनीय माना गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में चंद्र अन्वेषण, ग्रहों की भू-आकृतिक अध्ययन और आटोमेटिक ग्रह सतह मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आगामी दिनों इस प्रणाली को पूर्णतः स्वचालित रीयल-टाइम क्रेटर विश्लेषण पाइपलाइन के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि तकनीक का भरपूर उपयोग हो सके और डेटा संग्रहण की प्रक्रिया भी आसान हो पाए। यह तकनीक भविष्य में चंद्र अन्वेषण, ग्रहों की भू-आकृतिक अध्ययन और आटोमेटिक ग्रह सतह मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में इस प्रणाली को पूर्णतः स्वचालित रीयल-टाइम क्रेटर विश्लेषण पाइपलाइन के रूप में विकसित करने की योजना है। -डॉ. संचिता पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, बीआइटी मेसरा।  

नई स्टडी में खुलास,6–7 घंटे से कम या ज्यादा नींद लेने से बढ़ती है शरीर की उम्र तेजी से

 रात में बहुत कम या जरूरत से ज्यादा सोना सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि ये बॉडी के कई जरूरी अंगों की उम्र भी तेजी से बढ़ा सकता है. नेचर जर्नल में 13 मई को पब्लिश हुई एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद ब्रेन, हार्ट, फेफड़ों और इम्यून सिस्टम पर बुरा असर डाल सकती है. रिसर्च के मुताबिक सबसे कम खतरा उन लोगों में देखा गया जो रोज करीब 6.4 से 7.8 घंटे की नींद लेते हैं. नींद क्यों है हमारे लिए जरूरी? इस स्टडी को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ रेडियोलॉजी जुनहाओ वेन ने लीड किया. उन्होंने कहा कि हमारी रिसर्च दिखाती है कि बहुत कम और बहुत ज्यादा दोनों तरह की नींद शरीर के लगभग हर अंग की उम्र बढ़ने की रफ्तार तेज कर सकती है. इससे ये साफ होता है कि अच्छी नींद ब्रेन और पूरी बॉडी को हेल्दी रखने में बेहद जरूरी है. रिसर्च में क्या पता लगाया गया? रिसर्चर्स ने एजिंग को मापने के लिए मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया. टीम ने 17 अलग-अलग ऑर्गन सिस्टम्स के लिए 23 बायोलॉजिकल क्लॉक्स तैयार किए. इन क्लॉक्स में मेडिकल स्कैन, ब्लड टेस्ट और बॉडी प्रोटीन से जुड़ी जानकारी शामिल की गई, जिससे पता लगाया गया कि किसी इंसान के अंग उसकी असली उम्र के मुकाबले कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं. किन लोगों की उम्र तेजी से बढ़ती है? इस स्टडी में यूके बायोबैंक के करीब पांच लाख लोगों के हेल्थ डेटा का एनालिसिस किया गया. रिसर्च में एक यू-शेप पैटर्न सामने आया. यानी जो लोग रोज 6 घंटे से कम सोते थे और जो 8 घंटे से ज्यादा सोते थे, दोनों में एजिंग की स्पीड ज्यादा पाई गई. सबसे हेल्दी स्लीप रेंज करीब 7 घंटे मानी गई. कम नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा देखा गया. वहीं कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद फेफड़ों की बीमारियों जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा से भी जुड़ी मिली. इसके अलावा एसिड रिफ्लक्स जैसी पेट की समस्याओं का रिस्क भी बढ़ता पाया गया. कम नींद लेने के क्या होते हैं नुकसान? जुनहाओ वेन के मुताबिक नींद सिर्फ दिमाग से जुड़ी चीज नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी बॉडी पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि स्लीप ड्यूरेशन हमारी पूरी फिजियोलॉजी से जुड़ी होती है और इसका असर शरीर के लगभग हर हिस्से पर दिखाई देता है. रिसर्च टीम ने बुजुर्ग लोगों में डिप्रेशन पर भी असर देखा. एनालिसिस में सामने आया कि कम नींद सीधे तौर पर डिप्रेशन को बढ़ा सकती है, जबकि ज्यादा नींद ब्रेन और बॉडी फैट में होने वाले बदलावों के जरिए इसका असर डाल सकती है. रिसर्चर्स का मानना है कि कम और ज्यादा सोने वाले लोगों के लिए अलग-अलग तरह की हेल्थ केयर की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि स्टडी ये साबित नहीं करती कि सिर्फ नींद ही तेजी से बूढ़ा होने की वजह है, लेकिन रिसर्चर्स का कहना है कि सही स्लीप हैबिट्स बढ़ती उम्र में हेल्थ को बेहतर बनाए रखने का अहम हिस्सा हो सकती हैं.

डिविडेंड के साथ आया Power Grid का Q4 रिजल्ट, निवेशकों को राहत

नई दिल्ली  सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने तिमाही नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने दी जानकारी में कहा है कि सालाना आधार पर नेट प्रॉफिट 9.7 प्रतिशत बढ़ा है। जनवरी से मार्च 2026 के दौरान इस कंपनी का कुल नेट प्रॉफिट 4546 करोड़ रुपये रहा है। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 4143 करोड़ रुपये रहा था। बता दें, कंपनी ने तिमाही नतीजों के साथ-साथ डिविडेंड का भी ऐलान किया है। रेवन्यू में गिरावट पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के रेवन्यू में गिरावट दर्ज की गई है। मार्च तिमाही के दौरान कंपनी का कुल रेवन्यू 11666 करोड़ रुपये रहा था। एक साल पहले मार्च क्वार्टर में 12275 करोड़ रुपये कंपनी का रेवन्यू रहा था। कंपनी के EBITDA में भी मार्च तिमाही के दौरान 11.30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का EBITDA जनवरी से मार्च क्वार्टर के दौरान 9066 करोड़ रुपये रहा था। साल भर पहले इसी तिमाही में यह 10224 करोड़ रुपये रहा था। तिमाही नतीजों के साथ-साथ कंपनी के बोर्ड ने 5000 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दे दी है। कितना डिविडेंड दे रही है कंपनी सरकारी कंपनी ने 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले एक शेयर पर योग्य निवेशकों को 1.25 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनी इससे पहले फरवरी के महीने में एक्स-डिविडेंड ट्रेड की थी। तब योग्य निवेशकों को एक शेयर पर 3.25 रुपये का डिविडेंड मिला था शेयरों का प्रदर्शन कैसा? शुक्रवार को बाजार के बंद होने के समय पर पावर ग्रिड कारपोरेशन के शेयर 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 305.85 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। पिछले 6 महीने में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 12 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली है। वहीं, एक साल में यह स्टॉक पोजीशनल निवेशकों को 2 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बता दें, कंपनी का 52 वीक हाई 324.80 रुपये और 52 वीक लो लेवल 250.05 रुपये है। इस कंपनी का मार्केट कैप 2.84 लाख करोड़ रुपये का है। तीन साल में Power Grid के शेयरों की कीमतों में 67 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। वहीं, 5 साल में पीएसयू स्टॉक का भाव 137 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, बीते 10 साल में पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया के शेयरों का भाव 276 प्रतिशत बढ़ा है। कंपनी में सरकार की कितनी हिस्सेदारी? Trendlyne के डाटा के अनुसार इस कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 51.30 प्रतिशत थी। वहीं, सिंगापुर सरकार के पास 2.1 प्रतिशत हिस्सा है।

एप्लीकेशन वायरल CG में शराब को लेकर अनोखी मांग, सोशल मीडिया पर छाई अजीब एप्लीकेशन

भटगांव  जिला बेमेतरा के विकासखंड नवागढ़ अंतर्गत ग्राम कुंवारा निवासी सतीश मारकंडे का एक अनोखा आवेदन इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सुशासन तिहार के दौरान आबकारी विभाग को दिए गए इस आवेदन ने लोगों के बीच नई बहस छेड़ दी है। आवेदन में रखी गई अनोखी मांग प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदन में मांग की गई है कि जिस तरह शासन की विभिन्न योजनाओं और प्रचार सामग्री में मुख्यमंत्री तथा प्रभारी मंत्री की तस्वीरें लगाई जाती हैं, उसी प्रकार शासन द्वारा बेची जाने वाली शासकीय शराब की बोतलों पर भी मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री की फोटो अंकित की जाए।