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NEET UG 2026 विवाद: पेपर लीक के शक में 14 गिरफ्तार, 30 लाख से 30 हजार में बिके सवाल, 120 प्रश्न मैच

 नईदिल्ली / जयपुर  देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर राजस्थान में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा में कथित गड़बड़ी, गेस पेपर और संभावित पेपर लीक की आशंका के बीच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और एंटी टेरर स्क्वॉड (ATS) लगातार जांच में जुटी हैं। मामले में अब तक 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि कई लोगों से पूछताछ जारी है। जांच के केंद्र में राजस्थान का सीकर जिला है, जहां परीक्षा से पहले छात्रों के बीच एक कथित “गेस पेपर” वायरल हुआ था।  हालांकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने शुरुआती स्तर पर पेपर लीक से इनकार किया है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने आए तथ्यों ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि वायरल गेस पेपर के 100 से अधिक सवाल वास्तविक NEET UG 2026 परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते थे। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या करीब 125 बताई गई है। 2 मई की रात वायरल हुआ गेस पेपर जानकारी के अनुसार, नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यानी 2 मई की रात कुछ छात्रों तक एक गेस पेपर पहुंचा। यह गेस पेपर व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए साझा किया गया था और बाद में इसकी फोटोकॉपी भी कई जगहों पर बांटी गई। राजस्थान एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने खुद इस बात की पुष्टि की कि “गेस पेपर आया था। यह व्हाट्सएप पर आया और फोटोकॉपी की दुकान पर मिला। इसकी जांच चल रही है।” पहले 5-5 लाख तो परीक्षा से एक दिन पहले 30 हजार में बिका गेस पेपर जांच एजेंसियों के अनुसार, शुरुआत में यह गेस पेपर कथित तौर पर 2 से 5 लाख रुपये में कुछ छात्रों तक पहुंचाया गया था। बाद में यही सामग्री 30 हजार रुपये तक में बेचे जाने की बात सामने आई। हालांकि, एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रकम किस स्तर पर और किन लोगों के बीच ली गई। केरल से आया था सैंपल पेपर: रिपोर्ट्स कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राजस्थान एसओजी की जांच में खुलासा हुआ है कि केरल से एक सैंपल पेपर सीकर आया था, जिसमें करीब 150 प्रश्न वही थे जो परीक्षा में पूछे गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 मई को राकेश मंडारिया नाम के काउंसलर के पास केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक चुरू के लड़के ने गेस पेपर भेजा। लड़के ने बताया कि दक्षिण भारत में ये गेस पेपर बिक रहे हैं। इस प्रकार यह पेपर कोचिंग संस्थानों, फॉटो कॉपी की दुकानों तक और छात्रों तक पहुंचा। हालांकि, मामले की जांच जारी है और एनटीए के आधिकारिक बयान के बाद ही स्थिति साफ होगी।   जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के सवाल सबसे ज्यादा मैच जांच में सामने आया कि वायरल गेस पेपर में शामिल बड़ी संख्या में सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। खासकर बायोलॉजी और केमिस्ट्री विषयों में समानता अधिक पाई गई। सूत्रों के मुताबिक, 400 से अधिक प्रश्नों के एक सेट में से करीब 125 प्रश्न वास्तविक परीक्षा में आए सवालों जैसे थे। यही वजह है कि मामला सामान्य “गेस पेपर” से आगे बढ़कर संभावित पेपर लीक और संगठित रैकेट की दिशा में जांच का विषय बन गया। एनटीए ने कहा- परीक्षा पूरी सुरक्षा के बीच हुई नीट यूजी 2026 विवाद बढ़ने के बाद एनटीए ने आधिकारिक बयान जारी किया। एजेंसी ने कहा कि 3 मई को परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार और पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आयोजित हुई थी। एनटीए ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए यह नोटिस जारी किया: एनटीए के मुताबिक, प्रश्नपत्र जीपीएस ट्रैकिंग वाले वाहनों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए थे। प्रश्नपत्रों पर यूनिक वॉटरमार्क लगाए गए थे। परीक्षा केंद्रों की निगरानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से की गई और उम्मीदवारों का बायोमेट्रिक सत्यापन भी कराया गया। केंद्रों पर 5G जैमर भी सक्रिय थे। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्वीकार किया कि 7 मई को उसे अनियमितताओं से जुड़े इनपुट मिले थे, जिन्हें जांच के लिए संबंधित एजेंसियों को भेजा गया। सीकर के हॉस्टलों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए एसओजी की टीमें सीकर पहुंचीं। यहां कई हॉस्टलों में छात्रों और युवकों से पूछताछ की गई। जांच अधिकारियों ने मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले हैं। एसओजी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह गेस पेपर आखिर कहां से आया, इसे किसने तैयार किया और इतनी बड़ी संख्या में सवाल वास्तविक परीक्षा से कैसे मेल खा गए। क्या 600 नंबर के सवाल पहले ही पहुंच गए एसओजी की जांच में ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं जिन्होंने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नीट यूजी के 720 नंबर में से 600 नंबर के सवाल कुछ छात्रों तक पहले ही पहुंच गए थे। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) विशाल बंसल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'नीट यूजी परीक्षा को लेकर फैली तरह-तरह की भ्रांतियों के बारे में मैं आपको बताऊं, तो एक गेस पेपर है, जिसमें करीब 410 सवाल हैं। उन 410 सवालों में से तकरीबन 120 सवाल केमिस्ट्री में आए हुए बताए जाते हैं। बताया जा रहा है कि यह गेस पेपर स्टूडेंट्स के बीच काफी पहले से सर्कुलेट हो रहा था। यह असली एग्जाम से 15 दिन पहले, एक महीने पहले ही उन तक पहुंचना शुरू हो गया था। इसलिए, हमारी इन्वेस्टिगेशन का अभी इस बात पर फोकस है कि क्या इस गेस पेपर के आधार पर कोई चीटिंग या क्रिमिनल एक्टिविटी हुई है। हम इस मामले की एक्टिवली जांच कर रहे हैं और अभी इन्वेस्टिगेशन प्रोसेस में लगे हुए हैं।' क्या गेस पेपर 5-5 लाख रुपये में बिका? इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि गेस पेपर परीक्षा से दो दिन पहले 5-5 लाख रुपये में बिका लेकिन परीक्षा से एक रात पहले इसकी 30-30 हजार रुपये में बिक्री हुई। एसओजी ने यह भी बताया है कि हिरासत में लिए गए लोगों … Read more

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, 15 मई से लगेंगे विशेष सहायता कैंप

लखनऊ  ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई से 30 जून तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इस संबंध में पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। पूर्वांचल के उपभोक्ता 8010968292, मध्यांचल के 7669003409, पश्चिमांचल के 7859804803, दक्षिणांचल के 8010957826 तथा केस्को कानपुर के 8287835233 मोबाइल नंबर पर अपना बिजली कनेक्शन नंबर वाट्सअप कर बिल हासिल कर सकते हैं। अब नया बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के पोस्टपेड मोड में ही मिलेगा। प्रदेशभर में अब तक 83 लाख से अधिक प्रीपेड मोड में किए जा चुके स्मार्ट मीटर को फिर से पोस्टपेड मोड में करने के साथ ही उपभोक्ताओं को पहले की तरह जून से बिल देने के संबंध में पावर कारपोरेशन के एमडी ने सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए हैं। मई में उपभोग की गई बिजली का बिल उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से भेजा जाएगा। उपभोक्ताओं को अगले 15 दिन में बिल जमा करने की सुविधा मिलेगी। 15 दिन में बिल न जमा करने पर अगले सात दिन में कनेक्शन काट दिया जाएगा। 30 अप्रैल तक के बकाए बिल का घरेलू उपभोक्ता 10 किस्तों में जबकि अन्य श्रेणियों के उपभोक्ता तीन किस्तों में विलंब अधिभार सहित जमा कर सकेंगे। तकनीकी दिक्कतों के चलते स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने चार मई को प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की थी। चार दिन बाद गुरुवार को कारपोरेशन के एमडी नितीश कुमार ने पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल डिस्काम व केस्को के प्रबंध निदेशकों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए। सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड में परिवर्तित करने संबंधी निर्णय के बारे में बताते हुए निर्देश दिए गए हैं कि अब सभी नए कनेक्शन स्मार्ट मीटर के माध्यम से पोस्टपेड मोड में ही दिए जाएंगे। मई में बिजली खपत संबंधी बिल पोस्टपेड पद्धति में उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएं। स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि स्मार्ट मीटर की आटोमैटिक रीडिंग न उपलब्ध होने पर मैनुअल रीडिंग कर अनिवार्य रूप से 10 तक बिल उपलब्ध कराया जाए। उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन नंबर रजिस्टर्ड न हो या गलत हो तो उसे डिस्काम के संबंधित वाट्सएप नंबर पर कनेक्शन संख्या के माध्यम से अपडेट कराने के बारे में बताया जाए। 1912 के माध्यम से भी बिल हासिल किया जा सकेगा

बिहार में विकास पर जोर, मंत्रियों को नीतीश कुमार ने दिए सख्त निर्देश

 पटना बिहार सीएम की पद छोड़ने से पहले नीतीश कुमार ने कहा था कि वे राज्यसभा जा रहे हैं पर बिहार नहीं छोड़ेंगे। राज्य का विकास और जनता की सुख सुविधाओं का ख्याल रखेंगे। इसका असर दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सरकार की सभी योजनाओं का असर सीधे जनता तक दिखना चाहिए। सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रियों ने नीतीश कुमार ने निर्देश दिया है कि सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने विभाग के कार्यों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन मंत्री अनिवार्य रूप से करें। नीतीश कुमार से रविवार को मिलने गये मंत्रियों को उन्होंने सरकार के आगे के कार्यकलापों को लेकर कई दिशा-निर्देश दिये। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि सभी मंत्री अपने विभाग की योजनाओं को समय पर पूरा करायें। नियमित रूप से योजनाओं की निगरानी करें और जिलों में वह धरातल पर पूरी तरह से उतरे, इसे भी सुनिश्चित करायें। खासकर जदयू के नवनियुक्त मंत्री अपने-अपने विभागों में पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने उनके आवास सात सर्कुलर रोड में रविवार को गये थे। इसके साथ ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी वहां पहुंचे थे। हालांकि, कई मंत्री शनिवार को भी अपने नेता नीतीश कुमार से मिले थे। रविवार को मिलने वालों में मंत्री अशोक चौधरी, लेशी सिंह और शीला कुमारी आदि शामिल रहीं। इस दौरान केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार न बीस सालों के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार की नई दिशा दी। विकास की नई इबारत लिखी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत हर क्षेत्र में उनके सीएम रहते काफी काम हुआ। सात निश्चय योजना के तहत रोजगार, नागरिक सुविधाएं और पार्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। सम्राट चौधरी भी कहते हैं के नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम करेगी। उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। नीतीश कुमार ने भी जदयू नेताओं के साथ मीटिंग में बिहार में एक नई यात्रा का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि राज्यसभा का कार्यों के बाद वे बिहार को ही समय देंगे। रविवार को मंत्रियों ने अपने नेता नीतीश कुमार से मुलाकात की। नीतीश कुमार के बेटे और बिहार से स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी कहते हैं कि पिता के कार्यों को जन जन तक पहुंचाएंगे। निशांत बिहार की सद्भाव यात्रा की शुरुआत बाल्मीकिनगर से कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा सरकार के अभिभावक नीतीश कुमार हैं। उनके मार्गदर्शन का पालन किया जाएगा।

सरकार के तर्कों पर अदालत ने जताई कड़ी नाराजगी

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव टालने के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. राज्य सरकार ने बीते दिनों हाईकोर्ट में दलील देते हुए समय मांगा था. हालांकि, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच दलीलों से सहमत नहीं दिखी. बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फटकार भी लगाई. हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उसे पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है. फिर दी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की दलील सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से देरी हुई. जबकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय नहीं हो पाया. बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा, "आदेश निकायों को लेकर था तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे सामने नहीं है." कोर्ट ने सरकार के तर्क किए खारिज कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है. जून में हीटवेव चलती है और जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है. ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा. लेकिन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. सुनवाई के बाद अदालत ने जजमेंट रिजर्व रख लिया है. 18 मई को अवमानना याचिका दायर हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला देते हुए 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. वहीं, परिसीमन पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक की डेडलाइन दी गई थी. अब सरकार और चुनाव आयोग ने समय मांगा है. जबकि इस मुद्दे पर अवमानना याचिका भी दायर है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी.

बरेली दूसरे और पीलीभीत तीसरे स्थान पर रहे

 लखनऊ  योगी सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में एक बार फिर रामपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। रामपुर ने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है जबकि बरेली ने दूसरा और पीलीभीत ने तीसरा स्थान हासिल किया है। रामपुर ने 10 में से 9.42 अंक प्राप्त कर बाजी मारी मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं। रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खासतौर पर जनशिकायतों के समाधान में जिले ने बेहतर कार्य करते हुए शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया। शिकायतों के निस्तारण के बाद प्राप्त सकारात्मक फीडबैक ने भी जिले की रैंकिंग को मजबूत किया। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.42 अंक प्राप्त हुए। इसके साथ ही रामपुर ने पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं, बरेली ने 9.41 अंक के साथ दूसरा और पीलीभीत ने 9.36 अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। टॉप टेन जिलों में इटावा, हमीरपुर, महराजगंज ने स्थान प्राप्त किया सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें इटावा ने 9.35 अंक हासिल कर चौथा, हमीरपुर ने 9.33 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह महराजगंज ने 9.31 अंक हासिल कर छठवां, शाहजहांपुर ने 9.30 अंक हासिल कर सांतवां, सीतापुर ने 9.29 अंक हासिल कर आठवां, हरदोई ने 9.27 अंक हासिल कर नौवां और औरैया ने 9.26 अंक हासिल कर दसवां स्थान प्राप्त किया है। इन सभी जिलों ने जनशिकायतों के समाधान, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रदेश के जिलों के बीच बेहतर कार्य करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड योगी सरकार का एक महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की नियमित समीक्षा की जाती है। इस डैशबोर्ड को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके माध्यम से योगी सरकार को जिलों के प्रदर्शन की वास्तविक समय में जानकारी मिलती है। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है। जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर होता है, वहां प्रशासन को सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

कोयला चोरी और ओवररिपोर्टिंग पर लगेगी लगाम, डिजिटल सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता

 धनबाद कोयला स्टाक की मैन्युअल जांच में लगातार सामने आ रही ओवररिपोर्टिंग, गलत आकलन और कोयले की हेराफेरी की शिकायतों के बाद कोल इंडिया लिमिटेड ने नई हाईटेक व्यवस्था लागू कर दी है। संशोधित 'न्यू येलो बुक' के तहत पहली बार थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर और आधुनिक डिजिटल तकनीक से कोयला स्टाक की जांच पूरी कर ली गई है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई में विभिन्न परियोजनाओं में यह जांच कर रिपोर्ट भी कोल इंडिया मुख्यालय को सौंप दी गई है। नई तकनीक लागू होने से स्टाक की ओवररिपोर्टिंग, कोयला चोरी और हेराफेरी पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हुआ है। इसके साथ ही उत्पादन, डिस्पैच और उपलब्ध स्टाक के आंकड़ों में पारदर्शिता बढ़ी है तथा भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में मदद मिली है। अप्रैल 2026 से संशोधित नियम लागू होने के बाद अब खदानों में स्टाक की माप पूरी तरह वैज्ञानिक और डिजिटल प्रणाली से की जा रही है। हेरफेर की बनी रहती थी आशंका अब तक अधिकांश खदानों में कोयला स्टाक की माप पारंपरिक सर्वे और मानवीय अनुमान के आधार पर की जाती थी। इस प्रक्रिया में त्रुटि और हेरफेर की आशंका बनी रहती थी। कई परियोजनाओं में वास्तविक स्टाक से अधिक कोयला दिखाने, रिकॉर्ड में अंतर और चोरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही थीं। सूत्रों के अनुसार कई बार स्टाक के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिलने के बावजूद सटीक सत्यापन संभव नहीं हो पाता था। नई येलो बुक लागू होने के बाद पहली बार कोयला स्टाक की जांच थ्रीडी लेजर स्कैनर से की गई। जांच के दौरान पूरे कोयला स्टाक की त्रिआयामी डिजिटल स्कैनिंग कर वास्तविक आयतन और घनत्व का सटीक आकलन किया गया। इसके बाद विशेष साफ्टवेयर के माध्यम से सीधे स्टाक और वाल्यूम की गणना की गई। अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई में विभिन्न परियोजनाओं में यह प्रक्रिया पूरी की गई। अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक से प्राप्त आंकड़े पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक सटीक और पारदर्शी पाए गए हैं। इसके बाद अब इसे सभी परियोजनाओं और ओपनकास्ट खदानों में लागू कर दिया गया है।  

नगर निगम चुनाव के बीच विवाद: 1 घंटा 50 मिनट कैमरा बंद, प्रत्याशियों का प्रदर्शन

 पंचकूला  पंचकूला नगर निगम चुनाव के बीच आज सुबह यानी सोमवार (11 मई, 2026) उस समय हड़कंप मच गया, जब सेक्टर-14 स्थित स्टेट गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा करीब 1 घंटा 50 मिनट तक बंद रहने की सूचना सामने आई। इस घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने मौके पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि नगर निगम चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम मशीनें इसी स्ट्रांग रूम में रखी गई हैं। कैमरा बंद होने की जानकारी मिलते ही कांग्रेस मेयर प्रत्याशी सुधा भारद्वाज सहित कई दलों के और निर्दलीय वार्ड प्रत्याशी मौके पर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ सख्त नाराजगी जताई। प्रत्याशियों ने आरोप लगाया कि करीब दो घंटे तक कैमरा बंद रहना बेहद गंभीर मामला है और इससे ईवीएम सुरक्षा को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। प्रत्याशियों ने जिला प्रशासन, इलेक्शन ऑब्जर्वर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। मौके पर मौजूद नेताओं और प्रत्याशियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कैमरा बंद होने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। घटना की सूचना मिलते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालात का जायजा लेने के लिए पंचकूला के विधायक चौ चंद्रमोहन भी मौके पर पहुंचे। वहीं, मामला बढ़ता देख इलेक्शन ऑब्जर्वर और प्रशासनिक अधिकारी भी स्ट्रांग रूम स्थल पर पहुंचे और प्रत्याशियों को समझाने का प्रयास किया। फिलहाल प्रशासन की ओर से कैमरा बंद होने के कारणों को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है, जबकि प्रत्याशी लगातार ईवीएम सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अपराध मुक्त बिहार का लक्ष्य, सीएम ने पुलिस को खुली छूट देने की बात कही

पटना बिहार में अब अपराधियों की खैर नहीं है। पुलिस लगातार अपराधियों पर नकेल कस रही है तो वहीं अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी लॉ एंड ऑर्डर को लेकर साफ-साफ कर दिया है कि पुलिस को चुनौती देने वालों को 48 घंटे के अंदर जवाब दिया जाएगा। सीएम सम्राट चौधरी ने अपराध मुक्त बिहार का जिक्र करते हुए कहा है कि अब कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। यहां बता दें कि मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद सम्राट चौधरी लगातार अपराधियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते आ रहे हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री ने पटना में मंदिरी नाला पर बने सड़क का उद्घाटन किया और फिर अपने संबोधन में अपराधियों को कड़े लहजे में चेताया।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि हमने पुलिस के हाथ खोल दिए हैं। पुलिस को कोई चुनौती देता है तो उसे 48 घंटे में जवाब मिलेगा। कोई अपराधी बच नहीं सकता है। उद्योग को लाना है तो बिहार में सुशासन को और बेहतर ढंग से स्थापित करना है। हमें अपराध मुक्त बिहार बनाना है, इसके लिए हम कुछ भी करेंगे। इससे समझौता नहीं करेंगे। सीएम ने कहा कि कौन अपराधी किस जाति का है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। एनकाउंटर में ढेर हो रहे अपराधी बता दें कि एक तरफ जहां विपक्ष बिहार में अपराध के मुद्दे पर रह-रह कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ एनडीए सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि बिहार में अपराधियों पर जोरदार प्रहार जारी है। सम्राट सरकार के पहले 18 दिन में ही मगध से अंग और सारण तक पुलिस ने पांच एनकाउंटर किए थे। इसमें तीन हाफ एनकाउंटर शामिल थे तो वहीं दो मुठभेड़ में पुलिस ने अपराधियों को मार गिराया था कुछ ही दिनों पहले गया में एक कार्यक्रम में मौजूद सीएम सम्राट चौधरी ने कहा था कि बिहार में अपराधियों का पिंडदान किया जाएगा। सीएम ने कहा था, ‘बिहार में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाए जााएंगे। गया जी तो पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है। पिंडदान भी होगा। कुछ लोगों का पिंडदान शुरू हो गय है। बिहार में सुशासन स्थापित करने के लिए ऐसे कई अपराधियों का पिंडदान हमारी सरकार करती रहेगी।’ मंदिरी नाले पर सड़क निर्माण से कई फायदे बहरहाल बता दें कि करीब 115 करोड़ रुपये की लागत से पटना के मंदिरी नाले पर बनी सड़क का उद्घाटन होने के बाद लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। मंदिरी नाले के निर्माण एवं विकास कार्य क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था अधिक सुचारू और व्यवस्थित होगी। नाले के ऊपर सड़क निर्माण से नेहरू पथ से जेपी गंगा पथ, अशोक राजपथ, डबल डेकर, पीएमसीएच तक जाने के लिए स्थानीय नागरिकों को एक नया मार्ग मिलेगा। इस पथ के निर्माण से प्रमुख रूप से वार्ड संख्या 25, 26 और 27 समेत उतरी बिहार जाने वाले लाखों की आबादी को सुगम सड़क संपर्कता मिलेगी। साथ ही पटना के बेली रोड पर होने वाले ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी। राज्य सरकार ने इस सड़क का नाम दिवंगत विधायक नवीन किशोर सिन्हा के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। इस सड़क से उत्तर बिहार से भी कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।

सोमनाथ संकल्प महोत्सव में बोले सीएम योगी, विदेशी आक्रांताओं की कोशिशें रहीं नाकाम

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि 'विदेशी आक्रांताओं' ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने के प्रयास किए लेकिन वह नाकाम रहे क्योंकि सनातन भारत की चेतना में बसता है और इसे मिटाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी ने 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के तहत वाराणसी में आयोजित 'सोमनाथ संकल्प महोत्सव' को संबोधित करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सनातन को खत्म करने की कोशिश की लेकिन वह भारत की आत्मा को तोड़ नहीं सके। उन्होंने कहा कि मोहम्मद गौरी से लेकर मुगलों तक कई विदेशी आक्रांताओं ने हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर दिया और यहां गुलामी का प्रतीक एक ढांचा खड़ा कर दिया लेकिन वे भारत की आत्मा को तोड़ नहीं सके। वे यह नहीं समझ सके कि सनातन केवल मंदिरों की दीवारों के भीतर नहीं, बल्कि स्वयं भारत की चेतना में बसता है। भारत अपनी आत्मा को शाश्वत और अमर मानता है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन्होंने सनातन को मिटाने की कोशिश की, वे खुद ही धूल में मिल गए और आज उन आक्रमणकारियों को कोई याद नहीं करता, लेकिन काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर भारत के स्वाभिमान की गाथा को आगे बढ़ा रहे हैं। लोगों ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था उन्होंने कहा कि आज भी ऐसी ताकतें मौजूद हैं जो भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के पुनरुत्थान का विरोध करती हैं। मुख्यमंत्री ने किसी भी राजनीतिक दल या नेता का नाम लिए बगैर कहा कि जिन लोगों ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था, उन्हीं लोगों ने बाद में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में भी बाधाएं खड़ी कीं। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि सोमनाथ महादेव मंदिर की पुनर्स्थापना के कार्यक्रम के दौरान बाधाएं खड़ी करने वाले लोग कौन थे। ये वही लोग थे जिन्होंने बाद में राम मंदिर के निर्माण और इस मुद्दे के समाधान में बार-बार रुकावट डालने की कोशिश की। आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश को 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विज़न की ओर ले जाने और पूरे भारत में प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों के पुनरुद्धार का नेतृत्व करने का श्रेय दिया और इसके लिए उनके प्रति आभार प्रकट किया। नए वैभव के साथ विकास की एक नई यात्रा पर आगे बढ़ रहे मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि चाहे वह सौराष्ट्र में सोमनाथ मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण हो, काशी में काशी विश्वनाथ धाम हो, उज्जैन में महाकाल महालोक हो, या अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो; सनातन परंपरा से जुड़े कई पवित्र केंद्र नए वैभव के साथ विकास की एक नई यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये पहल प्रधानमंत्री से प्रेरित हैं और उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से, मैं उन्हें बधाई देता हूं। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी जनसभा को संबोधित किया।

5000 से अधिक लंबित पदों पर जल्द बहाली के संकेत

पटना बिहार सरकार के नए योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने सोमवार को पटना के घंटाघर स्थित कार्यालय में विभाग का कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण के दौरान विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यभार संभालने के बाद मंत्री को विभाग की योजनाओं, सांख्यिकी गतिविधियों और विकास कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही विभाग की मौजूदा स्थिति और आगामी कार्ययोजना पर भी प्रस्तुतीकरण किया गया। नौकरी और बहाली को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता कार्यभार संभालते ही मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि विभाग में लंबित बहालियों को पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। मंत्री ने कहा कि बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि लंबे समय से अटकी नियुक्तियों पर जल्द फैसला लिया जाएगा। 5000 से ज्यादा पदों की बहाली पर फोकस मंत्री कुशवाहा ने विभाग में लंबित करीब पांच हजार से अधिक पदों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और कोर्ट के आदेश आने के बावजूद अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे को वे पहले बिहार विधानसभा और विधान परिषद में भी उठा चुके हैं। अब विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद वे इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएंगे। LAEO और जिला योजना पदाधिकारियों पर नजर मंत्री ने कहा कि योजना एवं विकास विभाग बिहार के विकास कार्यों में बेहद अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि जिले स्तर पर LAEO-1, LAEO-2 और जिला योजना पदाधिकारी योजनाओं को लागू करते हैं। विभाग की कार्यप्रणाली और जमीनी स्तर की स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग को और मजबूत बनाया जाएगा। अधिकारियों को भी दिखाई सख्ती भगवान सिंह कुशवाहा ने साफ कहा कि सिर्फ सरकार की इच्छा से काम नहीं चलेगा, अधिकारियों को भी गंभीरता दिखानी होगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार हमेशा रोजगार देने के पक्ष में रही है। लेकिन विभागीय स्तर पर तेजी और जवाबदेही जरूरी है, तभी नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी होगी। मंत्री ने कहा कि खाली पदों का आकलन कर जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। तकनीक आधारित मॉनिटरिंग पर जोर अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि विभाग विकास योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि तकनीक आधारित कार्यप्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मंत्री ने भी भरोसा दिलाया कि जो काम अब तक अधूरे रह गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधायिका और कार्यपालिका के बेहतर समन्वय से ही बिहार के विकास को नई गति मिलेगी।