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खाते में 551 करोड़ दिखते ही मचा हड़कंप, यूपी में ऐप ग्लिच या साइबर साजिश की जांच शुरू

सीतापुर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक साधारण परिवार के साथ ऐसा वाकया हुआ कि उनकी रातों की नींद उड़ गई। मछरेहटा इलाके में परिवार के लोग उस वक्त खुशी से झूम उठे जब उन्होंने अपने 'जियो पेमेंट बैंक ऐप' (Jio Payment Bank App) के खाते में 5.5 अरब (551 करोड़) रुपये से अधिक की राशि देखी। पहले तो उन्हें लगा कि उनकी किस्मत खुल गई है, लेकिन जल्द ही यह खुशी भारी चिंता और घबराहट में बदल गई। इतनी बड़ी रकम कहां से आई, किसने भेजी और क्यों, इन सवालों ने उन्हें परेशान कर दिया। अंततः, उन्होंने पुलिस से संपर्क कर सुरक्षा की गुहार लगाई है। साइबर क्राइम पुलिस जांच में जुट गई है। ऐप में अरबों की रकम, पर खाते में नहीं मछरेहटा थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुरुआती पड़ताल की। थाना प्रभारी (एसओ) ने बताया कि जांच में एक बेहद अजीब बात सामने आई है। पीड़ितों के बैंक खाते में वास्तव में एक रुपया भी नहीं आया है; अरबों की यह भारी-भरकम राशि सिर्फ मोबाइल ऐप पर ही दिखाई दे रही है। यह ऐप की कोई तकनीकी खराबी (Glitch) है या कोई साइबर धोखाधड़ी की साजिश, इसकी जांच अब साइबर क्राइम सेल (Cyber Crime Cell) को सौंपी गई है। दस्तावेज लेने वाले युवक पर संदेह पीड़ितों ने पुलिस को दी गई तहरीर में एक स्थानीय युवक, सर्वेश, पर संदेह जाहिर करते हुए शिकायत की है। बारेपारा गांव की रूपा और उनके भतीजे गजराज ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले सर्वेश नाम के युवक को अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज दिए थे। गजराज के मुताबिक, पत्नी की मृत्यु के बाद 'मृतक आश्रित लाभ', पिता मेढ़ई की 'पेंशन' और 'किसान सम्मान निधि' के आवेदन के लिए ये दस्तावेज दिए गए थे। पेंशन की जगह दिखा अरबों का बैलेंस सर्वेश ने हाल ही में उन्हें बताया था कि पेंशन का काम हो गया है। इसके बाद जब गजराज ने अपना जियो पेमेंट बैंक ऐप चेक किया, तो वह सन्न रह गया। खाते में ₹5,51,00,00,000/- (5.51 अरब) रुपये से अधिक का बैलेंस दिखा रहा था। गजराज ने बताया कि पहले वह बहुत खुश हुआ, लेकिन बाद में इतनी बड़ी रकम देखकर घबरा गया। उसे अनहोनी की आशंका सताने लगी। उसने सर्वेश से अपना खाता बंद कराने को भी कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की सतर्कता और साइबर सेल की भूमिका 5.5 अरब रुपये आने की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी । पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि मोबाइल ऐप में अरबों की राशि कैसे दिख रही थी और क्या सर्वेश नाम के युवक ने दस्तावेजों का कोई गलत इस्तेमाल किया है। साइबर एक्सपर्ट्स इस मामले के डिजिटल पहलुओं को खंगाल रहे हैं ताकि इस रहस्य से पर्दा उठ सके।

योगी सरकार ने बदल दी बाढ़ प्रबंधन की रणनीति, नदियों से गाद निकालने पर जोर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रही है। सरकार बाढ़ नियंत्रण की पारंपरिक विधियों की जगह कुछ नए तरीके अपना रही है, जिससे करोड़ों रुपये की बचत होगी। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए किसानों की जमीनों का बार-बार अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों से लगभग 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया और 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को इससे फायदा मिला। इसके बाद बाढ़ नियंत्रण के नए तरीकों को विस्तार देने की तैयारी चल रही है। अब तक बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन के लिए पत्थर की बड़ी मेड़, गैबियन दीवारें (लोहे की तार के बक्सों में पत्थर की दीवार), बड़े-बड़े बांध और तटबंध बनाने का ध्यान दिया जा रहा था। वहीं दूसरे तरीके में कई जगहों पर संवेदनशील क्षेत्रों में नदी और बड़े नालों से गाद निकालने, कीचड़ हटाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ताकि नदी के मार्ग और मोड़ को पानी की अधिक क्षमता वहन करने लायक बनाया जा सके। लखीमपुर खीरी में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत इस नए तरीके को अपनाया गया। इंजीनियरों ने नदी की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकाली, जिस पर महज 22 करोड़ रुपये खर्च हुए। पहले यहीं बाढ़ नियंत्रण की तैयारी में 180 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के आस-पास और सरयू क्षेत्र में भी नए तरीके से महज 5 करोड़ रुपये का खर्च आया, जिस पर पहले अन्य उपायों के जरिए 115 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान था। नदियों से 16 किलोमीटर तक निकाली गई गाद इसी क्रम में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों ने इंजीनियरों के साथ मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के कई हिस्सों में बड़ा बदलाव किया। इन नदियों के मार्ग में करीब 9 से 16 किलोमीटर तक गाद निकालकर उनकी क्षमता में विस्तार किया गया है। इस मॉडल से हर मानसून में तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में कृषि भूमि का अधिग्रहण कम होगा, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। योगी सरकार में 8 से ज्यादा वर्षों में लगभग 1,665 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गईं हैं। साथ ही अब तक 60 नदियों से गाद निकालने और कई नहरों का निर्माण भी किया गया है। वहीं वर्ष 2026 में बाढ़ नियंत्रण के नए मॉडल के तहत उच्च जोखिम वाली नदियों-नालों की ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी होगी। साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर रखा जाएगा। योगी सरकार का प्रयास है कि अब तक स्पुर (नदी के किनारों पर बड़े पत्थर रखना), जियो बैग्स (रेत से भरे बड़े थैले), पुराने ढांचों की मरम्मत, पत्थरों को बदलने और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण कार्यों में होने वाले खर्चों को नए तरीकों से कम किया जाए। पुराने तरीकों को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा, हालांकि इनके विकल्प तलाशे जाएं।

भीषण गर्मी में स्वास्थ्य विभाग का फैसला, अब शाम 5 से 7 बजे तक भी मिलेगा इलाज

 जयपुर राजस्थान में भीषण गर्मी और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने OPD (आउटडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) का 1 अप्रैल से बढ़ा दिया है. इस नए शेड्यूल से उन हजारों मरीजों को सीधे तौर पर राहत मिल रही है, जिन्हें तेज धूप में लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था. लेकिन शुक्रवार को सबसे बड़ी राहत जयपुर के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) में आने वाले मरीजों को दी गई है, जहां अब शाम की ओपीडी भी शुरू कर दी गई है. इवनिंग OPD का समय क्या रहेगा? अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अब मरीज शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक भी डॉक्टर से परामर्श ले सकेंगे. पहले चरण में यह व्यवस्था 'जनरल मेडिसिन' विभाग में लागू की गई है. इस नई पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सुबह के समय होने वाली भारी भीड़ काफी हद तक कम हो जाएगी. साथ ही, नौकरीपेशा लोग भी अपने काम के बाद आसानी से अस्पताल जाकर इलाज करा सकेंगे. रविवार को भी मिलेगी 2 घंटे की OPD गर्मी के ध्यान में रखते हुए 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों का समय बदला गया है. राजस्थान के सभी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी (CHC) और पीएचसी (PHC) में अब ओपीडी सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक संचालित हो रही है. मरीजों की परेशानी को समझते हुए सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि रविवार और अन्य सरकारी छुट्टियों के दिन भी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं रहेंगी. अवकाश वाले दिनों में भी मरीज सुबह 9:00 बजे से 11:00 बजे के बीच अस्पताल पहुंचकर अपना इलाज करवा सकते हैं. आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में दो शिफ्ट की व्यवस्था शहरी क्षेत्रों में बने 'आयुष्मान आरोग्य मंदिरों' (जिन्हें पहले जनता क्लिनिक कहा जाता था) में भी मरीजों की सहूलियत के लिए समय में अहम बदलाव किए गए हैं. अब इन केंद्रों पर मरीजों को दो अलग-अलग शिफ्ट में सेवाएं दी जा रही हैं. पहली शिफ्ट में मरीज सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आ सकते हैं, जबकि दूसरी शिफ्ट शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक संचालित की जा रही है. लंबी कतारों से बचें, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें सरकार ने मरीजों को अस्पताल की भीड़ और लाइनों से बचाने के लिए एक बेहतरीन डिजिटल सुविधा भी दी है. अब आप अस्पताल जाने से पहले IHMS (Integrated Health Management System) पोर्टल के जरिए घर बैठे अपने मोबाइल से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं. ऑनलाइन पर्ची कटवाने से आपका समय बचेगा और आप सीधे अपने निर्धारित समय पर डॉक्टर से परामर्श ले सकेंगे.

हरियाणा में किसानों और महिलाओं को बड़ी सौगात, 205 करोड़ रुपये खाते में भेजे गए

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार (08 मई, 2026) को चंडीगढ़ में आयोजित एक विशेष राज्य स्तरीय कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम से करोड़ों रुपये की लाभ राशि वितरित की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लाडो लक्ष्मी योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, और फसल मुआवजा समेत कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभार्थियों को संबोधित भी किया लाडो लक्ष्मी योजना की सातवीं किस्त जारी मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि लाडो लक्ष्मी योजना की सातवीं किस्त आज जारी कर दी गई है। उन्होंने 9 लाख 76 हजार लाभार्थी बहनों के खाते में कुल 205 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की। इसके अलावा, गैस सिलेंडर सब्सिडी के रूप में 11 लाख 23 हजार बहनों के खातों में 38 करोड़ 54 लाख रुपये भी भेजे गए। वहीं, अन्नदाताओं को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने खरीफ 2025 की फसल नुकसान के लिए 1,50,583 किसानों को 370 करोड़ 52 लाख रुपये की मुआवजा राशि वितरित की। जे-फॉर्म अब वॉट्सऐप पर सीएम नायब सैनी ने इस दौरान एक नई ऐप की शुरुआत की, जिससे अब किसानों को अपनी फसल का जे-फॉर्म लेने के लिए आढ़तियों के पास नहीं जाना होगा। यह फॉर्म सीधे उनके वॉट्सऐप पर आएगा। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 82 लाख 55 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है और किसानों को 16,481 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सामाजिक सुरक्षा को मजबूती देते हुए मुख्यमंत्री ने 18 विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 35 लाख 62 हजार लाभार्थियों के खातों में 1146 करोड़ 73 लाख रुपये की राशि डाली। वहीं, अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (BC) के 64,923 विद्यार्थियों को 100 करोड़ 45 लाख रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया।

कालीबाई और देवनारायण स्कूटी योजना में DBT लागू, 70 हजार रुपये सीधे ट्रांसफर

जयपुर राजस्थान सरकार ने छात्राओं के लिए चलाई जा रही अपनी महत्वाकांक्षी स्कूटी योजनाओं में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया है. अब मेधावी छात्राओं को स्कूटी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि सरकार सीधे उनके बैंक खाते में स्कूटी की रकम ट्रांसफर करेगी. कालीबाई भील और देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत लिया गया यह फैसला न केवल सरकारी टेंडर और खरीद की जटिलताओं को खत्म करेगा, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश को भी पूरी तरह समाप्त कर देगा. 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर चलते हुए सरकार का लक्ष्य अब छात्राओं को यह आजादी देना है कि वे अपनी पसंद की गाड़ी खुद चुन सकें और योजना का लाभ बिना किसी देरी के सीधे उनके हाथों में पहुंचे. छात्राओं को मिलेगा DBT के जरिए लाभ भजनलाल सरकार के फैसले के बारे में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से सभी छात्राओं को योजना का लाभ दिया जाएगा. हमने योजना में यह महत्वपूर्ण बदलाव किया है. इसका उद्देश्य लोगों तक योजना का फायदा सीधे पहुंचना है. बीच में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को खत्म करना भी इसका उद्देश्य है. राज्य सरकार ने कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना और देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने के बजाय उनके बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करेगी. स्कूटी के लिए सरकार की तरफ से छात्राओं को 70 हजार रुपये बैंक खाते में जमा किए जाएंगे. इससे विभाग को टेंडर प्रक्रिया, खरीद, भंडारण और वितरण जैसी जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी. पहले 26 हजार छात्रों के खाते में भेजा जाएगा पैसा मंत्री अविनाश गहलोत का कहना है कि इस नए बदलाव के तहत सबसे पहले 2024-25 सत्र की 26 हजार छात्राओं के खाते में राशि भेजी जाएगी. इसके बाद 2025-26 सत्र की 25 हजार से अधिक छात्राएं लाभान्वित होंगी. कुल मिलाकर इन योजनाओं के तहत करीब 350 करोड़ रुपये छात्राओं के खातों में डाले जाएंगे.  उन्होंने कहा कि योजना को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह से चरणबद्ध प्लानिंग की गई है. यह पैसा बालिकाओं के खाते में वाउचर के माध्यम से ही दिया जाएगा. ताकि बालिकाएं अपनी पसंद की स्कूटी खरीद सकें. साथी भ्रष्टाचार पर भी जीरो टॉलरेंस की नीति हमारी बनी रहेगी. छात्राओं को क्या करना होगा काम इस बड़े बदलाव के लिए कॉलेज शिक्षा विभाग में छात्रवृत्ति के संयुक्त निदेशक ने सभी प्राचार्य और जिला नोडल अधिकारी को पत्र लिखा है. जिसमें निर्देश दिया गया कि वर्ष 2024-25 की स्थाई वरीयता सूची में चयनित 25977 छात्राओं के आनलाइन आवेदन पत्रों को निम्न सूचनाएं आनलाइन आवेदन पत्र पर अपडेट किये जाने के लिए सम्बन्धित छात्राओं के स्तर पर फॉरवर्ड किया जायेगा.     खाताधारक का नाम     बैंक नाम     खाता संख्या     IFSC कोड     मोबाइल नंबर     छात्रा द्वारा आनलाइन आवेदन पत्र में Passbook/ Cancel Cheque अपलोड किया जायेगा. छात्रा द्वारा उपरोक्त सूचना अंकित करने के बाद आवेदन पत्र जिला नोडल महाविद्यालय को फारवर्ड किये जायेंगें. सभी प्राचार्य/नोडल अधिकारी उक्त सूचनाओं की जांच चयनित छात्राओं के आनलाइन आवेदन पत्र में अपलोड किये गये पासबुक/कैन्सिल चैक से की जायेगी. ध्यान दें कि आवेदन पत्र में अंकित खाता सम्बन्धित छात्रा का ही हो.

55 करोड़ की पार्किंग बनी विवाद का केंद्र, बैंक गारंटी और राजनीति में फंसा प्रोजेक्ट

 गुरुग्राम  गुरुग्राम शहरवासियों को राहत देने के उद्देश्य से तैयार की गई सदर बाजार क्षेत्र की बहुचर्चित मल्टीलेवल पार्किंग एक बार फिर विवादों में घिर गई है। करीब 55.20 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह पार्किंग पांच दिन भी सुचारु रूप से नहीं चल सकी और बुधवार को इस पर ताला लग गया। निगम अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी द्वारा बैंक गारंटी जमा नहीं करवाने के कारण पार्किंग को अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे दो भाजपा नेताओं के बीच उद्घाटन को लेकर चली खींचतान का परिणाम माना जा रहा है। उद्घाटन के बाद भी शुरू नहीं हो सकी व्यवस्था मुख्यमंत्री द्वारा 30 दिसंबर को मल्टीलेवल पार्किंग का उद्घाटन किया गया था, लेकिन इसके बाद भी पार्किंग आम लोगों के लिए शुरू नहीं हो सकी। नगर निगम चार महीने तक इसके संचालन और रखरखाव के लिए एजेंसी तय नहीं कर पाया। इसके बाद एक मई को विधायक मुकेश शर्मा ने नारियल फोड़कर पार्किंग को दोबारा शुरू कराया और 15 दिन तक मुफ्त पार्किंग सुविधा देने की घोषणा की गई। हालांकि व्यवस्था पांच दिन भी ठीक से नहीं चल सकी और बुधवार को पार्किंग बंद कर दी गई। बैंक गारंटी काे भी बताया एक वजह नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि पार्किंग निर्माण करने वाली एजेंसी अमर बिजनेस ने 55 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा नहीं करवाई है। इसी कारण एजेंसी को पूर्ण रूप से संचालन की अनुमति नहीं दी गई। अधिकारियों का दावा है कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी होते ही पार्किंग को दोबारा खोल दिया जाएगा। मेयर बोलीं-सेंसर और हैंडओवर प्रक्रिया अभी अधूरी मेयर राजरानी मल्होत्रा ने कहा कि पार्किंग में सेंसर और अन्य तकनीकी कार्यों का हैंडओवर अभी पूरा होना बाकी है। एजेंसी के साथ एलओआइ (आशय पत्र) जारी हो चुका है और जल्द ही सभी प्रक्रियाएं पूरी कर पार्किंग दोबारा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम शहरवासियों को बेहतर पार्किंग सुविधा देने के लिए प्रयासरत है। 206 कारों और 190 बाइकों की क्षमता नगर निगम द्वारा सदर बाजार के समीप बनाई गई यह छह मंजिला मल्टीलेवल पार्किंग शहर के सबसे बड़े पार्किंग प्रोजेक्ट्स में शामिल है। भवन में भूतल और पहली मंजिल पर दुकानों का निर्माण किया गया है, जिन्हें निगम लीज पर देगा। इसके अलावा तीन भूमिगत तल पार्किंग के लिए बनाए गए हैं। यहां एक साथ 206 कार और 190 बाइक खड़ी करने की क्षमता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को अभी तक स्थायी रूप से पार्किंग सुविधा नहीं मिल पाई है।  

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता, AK-47 बरामद

लातेहार झारखंड में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। प्रतिबंधित झारखंड जन मुक्ति परिषद से जुड़े दो माओवादियों को हथियार और गोला-बारूद के साथ लातेहार जिले के कुरुखेता जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है।पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव ने बताया कि मंगलवार को एक खुफिया सूचना के बाद जंगल में चलाए गए एक अभियान के दौरान मनोज लोहरा (26) और महादेव सिंह (24) को पकड़ा गया। इस तरह झारखंड को नक्सलमुक्त बनाने में सुरक्षाबलों ने एक कदम और बढ़ा दिया है। भारी मात्रा में हथियार भी मिला बयान के आधार पर हमने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। संगठन के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। अधिकारी ने बताया कि बरामद की गई वस्तुओं में एक एके-47 राइफल, 318 कारतूस, मोबाइल फोन और सिम कार्ड शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह कार्रवाई कुटमखेता जंगल क्षेत्र में छापामारी के दौरान की गई, जहां पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने एसपी के गुप्त सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस को देखते ही उग्रवादी भागने लगे, लेकिन सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर दो लोगों को पकड़ लिया। गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान 26 वर्षीय मनोज लोहरा, पिता भुनेश्वर लोहरा, ग्राम जोबला (ताल पांकी, पलामू) और 24 वर्षीय मनोज महादेव सिंह, पिता स्व. आदन सिंह, ग्राम सिमरियाटांड़, लातेहार के रूप में हुई है। पुलिस ने क्या बताया पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने प्रेस वार्ता कर बताया किनक्सल विरोधी अभियान में लगातार सफलता मिल रही है और माओवादी व जेजेएमपी जैसे संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं। एसपी ने बताया कि मनोज लोहरा के पास से एसएलआर राइफल, मैगजीन, गोली, मोबाइल फोन सहित अन्य सामग्री बरामद की गई है। वहीं छापेमारी के दौरान झाड़ियों से एके-47 राइफल, मैगजीन, गोली, मोबाइल और वायरलेस सेट भी बरामद हुआ है। बरामद हथियारों और सामग्रियों से स्पष्ट है कि उग्रवादी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। इस संबंध में मनिका थाना कांड संख्या 41/26, दिनांक 05 मई 2026 दर्ज कर दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस शंकर राम नामक अन्य उग्रवादी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अभियान में पुलिस अधिकारियों के साथ सशस्त्र बल के जवानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसमें पुलिस पदाधिकारी प्रभात कुमार दास, यकीन अंसारी, सेट-42 कुमंडीडी पिकेट, सेट-137 आईआरबी-04 छिपादोहर के जवान और मनिका थाना के रिजर्व गार्ड शामिल थे।

प्रदूषण रोकने के लिए पटना प्रशासन सख्त, बड़े संस्थानों पर नई जिम्मेदारी

 पटना बिहार की राजधानी पटना में बढ़ते वायु प्रदूषण और गंदगी को कंट्रोल करने के लिए प्रशासन ने अब बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। अगर आप भी अब तक घर या मोहल्ले का कचरा सड़क किनारे, किसी खाली प्लॉट में खुले में फेंक देते थे या फिर उसे एक जगह इकट्ठा कर आग लगा देते थे, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है। पटना में अब खुले में कचरा फेंकने और उसे जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इन नियमों की अनदेखी करने वालों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ सीधे FIR भी दर्ज किया जाएगा। बड़े संस्थानों, मॉल और अपार्टमेंट्स पर कसेगा शिकंजा प्रदूषण नियंत्रण पर्षद का यह नया आदेश विशेष रूप से बड़े कचरा उत्पादकों को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। नए नियमों के तहत शहर के बड़े शॉपिंग मॉल, व्यावसायिक संस्थान, और बड़े आवासीय अपार्टमेंट्स अब अपना कचरा यूं ही खुले में या केवल नगर निगम के भरोसे नहीं छोड़ सकेंगे। इन सभी बड़े संस्थानों को अनिवार्य रूप से अपने स्तर पर ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोज करना होगा। कचरे को अलग-अलग कर उसे डिस्पोज करने की पूरी जिम्मेदारी अब खुद संस्थानों की होगी, जिससे शहर की सड़कों पर कचरे का अंबार न लगे। ईपीआर प्रमाण पत्र लेना जरूरी इस नई और सख्त व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए पर्षद ने सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को भी अनिवार्य कर दिया है। अब कचरा प्रबंधन के तहत सभी बड़े संस्थानों, मॉल्स और अपार्टमेंट्स को संबंधित स्थानीय निकाय (जैसे- पटना नगर निगम) से ईपीआर (Extended Producer Responsibility) प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। जिन संस्थानों के पास कचरा निस्तारण का उचित प्रबंध और यह ईपीआर सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त पटना की दिशा में बड़ा कदम बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारियों ने इसे 'स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त पटना' बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया है। अक्सर देखा जाता है कि ठंड के मौसम में लोग जगह-जगह कचरा जलाते हैं, जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं शहर के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को खतरनाक स्तर पर पहुंचा देता है। इस नई सख्ती से शहर की आबोहवा में सुधार होने की पूरी उम्मीद है।

दिल्ली को मिलेगा नया मेडिकल कॉलेज, 250 MBBS सीटों के साथ बढ़ेगी सुविधा

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने राजधानी के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए द्वारका में नया सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल कॉलेज बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी गई। इस महत्वाकांक्षी योजना पर 805.99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज के निर्माण को वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसके बनने से हर साल 250 एमबीबीएस सीटों पर दाखिले बढ़ेंगे। 150 छात्रों के साथ शुरू की जाएगी पढ़ाई उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में 150 छात्रों के साथ पढ़ाई शुरू की जाएगी। परियोजना के पहले चरण में अकैडमिक ब्लॉक, स्टूडेंट्स के अलग हॉस्टल और फैकल्टी के लिए रेजिडेंशल ब्लॉक बनाए जाएंगे। इसके निर्माण से स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को मेडिकल एजुकेशन का प्रमुख केंद्र बनाना है। 1.17 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में किया जाएगा निर्माण सीएम ने बताया कि मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल और रेजिडेंशल ब्लॉक का निर्माण करीब 1.17 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में होगा, जिसमें बेसमेंट पार्किंग और अन्य सुविधाएं भी रहेंगी। प्रोजेक्ट में ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन किया जाएगा।     परिसर में सोलर पावर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, वॉटर रीसाइक्लिंग, प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बिल्डिंग को भूकंपरोधी और दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जाएगा।  सरकार के मुताबिक, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। लोक निर्माण विभाग (PWD) निर्माण कार्य करेगा, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग परियोजना की मॉनिटरिंग करेगा। दिल्ली को एक नया मेडिकल कॉलेज मिलने से बड़ा फायदा होगा। पहला, छात्रों के लिए MBBS की सीटों में इजाफा होगा। दूसरा, दिल्ली सरकार के अस्पतालो में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। द्वारका के जिस इंदिरा गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल परिसर में यह कॉलेज बनेगा, वहां भी डॉक्टर्स की कमी है। इसके चलते अस्पताल पूरी क्षमता से काम नही कर रहा है। मेडिकल कॉलेज बनने, एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई शुरू होने के साथ अस्पताल को भी पूरी क्षमता के साथ चलाने में भी मदद मिलेगी। द्वारका के साथ-साथ दिल्ली के आसपास के इलाकों, बाहरी दिल्ली के इलाकों से आने वाले लोगों के लिए मेडिकल सुविधाएं बढ़ेगी।  

जशपुर का ‘वेस्ट टू बेस्ट’ इको पार्क: कबाड़ को नवाचार और संरक्षण में बदलकर बना छत्तीसगढ़ में मॉडल

​कबाड़ में जान फूंक दी जशपुर के 'वेस्ट टू बेस्ट' इको पार्क ने, नवाचार और संरक्षण का बना छत्तीसगढ़ में मॉडल ​रायपुर      ​छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले ने स्वच्छता और नवाचार की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश की है। जिले के दुलदुला जनपद पंचायत के समीप विकसित किया गया "इको पार्क" आज न केवल स्थानीय पर्यटन का केंद्र बना हुआ है, बल्कि "वेस्ट टू बेस्ट" (कबाड़ से जुगाड़) की अवधारणा को धरातल पर उतारने वाला एक उत्कृष्ट मॉडल भी बन गया है। अनुपयोगी और बेकार समझी जाने वाली सामग्रियों से सजी इस सुंदर संरचना ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई सोच जागृत की है। ​कबाड़ से तैयार हुई कलाकृतियां     ​इस पार्क की सबसे बड़ी विशेषता इसका निर्माण है। यहाँ फेंके गए पुराने टायरों, लोहे के कबाड़ और अन्य बेकार वस्तुओं का इस्तेमाल कर अत्यंत आकर्षक कलाकृतियां बनाई गई हैं। लोहे के बेकार पार्ट्स से घोड़ा, मयूर और तितली जैसी सजीव आकृतियां गढ़ी गई हैं। इसी तरह पुराने टायरों को रंग-बिरंगे झूलों में तब्दील कर दिया गया है, जो बच्चों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। ​स्वास्थ्य और मनोरंजन का संगम      ​इको पार्क को केवल सजावट तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक संपूर्ण सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए आधुनिक ओपन जिम की सुविधा दी गई है। इसी तरह बच्चों के लिए झूलों और विभिन्न खेल सामग्रियों का प्रबंधन किया गया है। यह स्थान परिवारों के लिए शाम बिताने और मनोरंजन का पसंदीदा स्पॉट बनकर उभरा है। ​प्रशासन ने सराहा नवाचार, दिए हरियाली बढ़ाने के निर्देश    ​   हाल ही में जिला प्रशासन ने पार्क का बारीकी से निरीक्षण किया। कबाड़ के इस रचनात्मक उपयोग की प्रशंसा करते हुए ​परिसर में व्यापक पौधरोपण कर इसे और अधिक हरित बनाने का निर्णय लिया गया। ​नियमित साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ​आमजन के लिए सुविधाओं में निरंतर विस्तार करने के साथ यह पार्क समाज को स्वच्छता, पुनर्चक्रण (Recycling) और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा देता है।       ​स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का मानना है कि दुलदुला का यह इको पार्क राज्य के अन्य विकासखंडों के लिए एक पथप्रदर्शक का कार्य करेगा। यह साबित करता है कि कम लागत और रचनात्मक सोच के साथ हम पर्यावरण संरक्षण और जन-सुविधाओं का बेहतर समन्वय कैसे कर सकते हैं।