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समग्र शिक्षा 3.0 बैठक में बड़ा फैसला, KGBV शिक्षकों की सैलरी बढ़ाई गई

लखनऊ   शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के बाद अब कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़़ाने वाले अंशकालिक शिक्षकों के लिए खुशखबरी है। इन शिक्षकों की सैलरी (मानदेय) भी जल्द ही बढ़ेगी। इन्हें 17,000 रुपये का मानदेय मिलेगा। गुरुवार को दिल्ली में हुई समग्र शिक्षा 3.0 की उच्चस्तरीय बैठक में अंशकालिक शिक्षकों के वेतन में वृद्धि का निर्णय किया गया है। वर्तमान में कस्तूरबा के अंशकालिक शिक्षकों को ईपीएफ काट प्रतिमाह 9961 रुपये मानदेय मिलते हैं, जो जल्द 17000 रुपये कर दिया जाएगा। इससे प्रदेश भर के करीब 2,000, देशभर के 5500 से अधिक अंशकालिक शिक्षक लाभांवित होंगे। इनके वेतन का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार, शेष 40 फीसदी राज्य सरकार देती है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत अंशकालिक शिक्षकों को परिषदीय विद्यालयों के अनुदेशक के समकक्ष माना जाता है और वेतन भी उन्हीं के बराबर दिया जाता था। अप्रैल 2026 से योगी सरकार ने अनुदेशकों का वेतन बढ़ाकर 17000 कर दिया है। अनुदेशकों का वेतन बढ़ने पर भी अंशकालिक शिक्षकों को लाभ नहीं मिला था। उनके लिए अब गुड न्यूज आई है। शिक्षा मित्रों-अनुदेशकों की कितनी बढ़ी है सैलरी यूपी सरकार ने एक अप्रैल से शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का वेतन बढ़ा दिया है। इस संबंध में योगी कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया था। शिक्षा मित्रों को 10 हजार की जगह 18 हजार रुपये वेतन मिलेगा। वर्तमान में यूपी के प्राथमिक विद्यालयों में 1 लाख 42 हजार 929 शिक्षा मित्र कार्यरत हैं। वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आरटीई के तहत अनुदेशकों की तैनाती की गई है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर 24 हजार 717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। उन्हें 9 हजार रुपये महीने मानदेय दिया जाता था। इसे बढ़ाकर अब 17 हजार रुपये कर दिया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल पांच सितंबर यानी शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया था। कस्तूरबा विद्यालयों की खासियत बता दें कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) मुख्य रूप से शैक्षिक रूप से पिछड़े विकासखंडों में वंचित और कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए शिक्षा और आवासीय सुविधा प्रदान करते हैं। पहले ये विद्यालय कक्षा 6 से 8 तक के लिए थे, लेकिन अब इन्हें चरणबद्ध तरीके से कक्षा 12 तक उच्चीकृत किया जा रहा है। इन विद्यालयों में छात्राओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा, भोजन, और अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है। उत्तर प्रदेश में 746 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। सभी को 12वीं कक्षा तक उच्चीकृत किया जा रहा है।

चेन्नई की उम्मीदें टिकीं MS Dhoni पर, वापसी पर आखिरी फैसला खुद माही का

आईपीएल 2026 में आज (2 मई) चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का मुकाबला मुंबई इंड‍ियंस (MI) से है. यह मैच चेन्नई में ही है, जहां CSK की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. टीम पिछले एक महीने से अपने सबसे अनुभवी खिलाड़ी एमएस धोनी के बिना मैदान पर उतर रही है, और अब मुंबई इंडियंस के खिलाफ होने वाले बड़े मुकाबले से पहले उनकी उपलब्धता को लेकर फिर से सस्पेंस गहरा गया है. सीएसके के बल्लेबाजी कोच माइकल हसी ने प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी की फिटनेस पर अहम अपडेट दिया. उन्होंने साफ किया कि धोनी अभी पूरी तरह मैच फिट नहीं हैं और उनकी वापसी पर अंतिम फैसला खुद खिलाड़ी की फीलिंग पर निर्भर करेगा. हसी ने कहा- MS काफी बेहतर हो रहे हैं. उम्मीद है वो जल्द वापसी करेंगे. लेकिन ये कल (2 मई) होगा या अगले मैच में, ये कहना मुश्किल है. जैसे ही उन्हें अपने काल्फ पर भरोसा होगा, वो खुद संकेत देंगे. फिलहाल हम उन्हीं के फैसले का इंतजार कर रहे हैं… और सिर्फ टीम ही नहीं, पूरी चेन्नई इंतजार में है. दरअसल, धोनी लंबे समय से काल्फ इंजरी से जूझ रहे हैं. शुरुआत में उम्मीद थी कि वो दो हफ्तों में वापसी कर लेंगे, लेकिन उनकी रिकवरी उम्मीद से ज्यादा लंबी खिंच गई. टीम के हेड कोच स्टीफन फ्लेम‍िंग ने भी हाल ही में बताया था कि वॉर्म-अप सेशन के दौरान धोनी को फिर हल्की चोट लग गई थी, जिससे उनकी वापसी और टल गई. सीएसके के लिए ये सीजन अब तक उतार-चढ़ाव भरा रहा है. टीम ने 8 मैचों में सिर्फ 3 जीत हासिल की हैं, -1.121 का खराब नेट रन रेट उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रहा है.     सीजन की शुरुआत में टीम को लगातार तीन हार झेलनी पड़ी थी. हालांकि, इसके बाद उन्होंने द‍िल्ली और कोलकाता के खिलाफ अहम जीत दर्ज की, लेकिन हैदराबाद के खिलाफ हार ने उनकी लय बिगाड़ दी. मुंबई इंडियंस के खिलाफ 103 रन की बड़ी जीत उनका हाई पॉइंट रहा, लेकिन पिछला मैच गुजरात के खिलाफ 8 विकेट से हारकर उन्होंने फिर से मोमेंटम गंवा दिया. दूसरी ओर मुंबई इंड‍ियंस की हालत और भी खराब है. टीम 8 मैचों में सिर्फ 2 जीत के साथ पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे है. ऐसे में प्लेऑफ की उम्मीदें जिंदा रखने के लिए यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए 'करो या मरो' जैसा बन गया है. आमतौर पर प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए 16 अंकों की जरूरत होती है, ऐसे में एक और हार दोनों टीमों के लिए भारी पड़ सकती है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या धोनी इस अहम मुकाबले में वापसी कर पाएंगे या फैंस को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा.

लखनऊ में मई का तापमान 2 साल के निचले स्तर पर, पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम

लखनऊ दो दिन हल्की बारिश और तेज हवाओं की वजह से दिन के साथ रात का तापमान भी नीचे आया। यूपी की राजधानी लखनऊ में मई माह के दौरान दो वर्ष बाद न्यूनतम तापमान इतना नीचे आया है। अधिकतम तापमान में भी ठीक गिरावट रही। मौसम विभाग के अनुसार अब पछुआ फिर जोर पकड़ेगी और तापमान में बढ़ोतरी होगी। इसके बाद 4 से 5 मई को एक और पश्चिमी विक्षोभ प्रदेश को प्रभावित करेगा। इससे बादलों की आवाजाही, हल्की बारिश या बूंदाबांदी होगी। तेज हवा भी चलेगी। मौसम में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आए बदलाव ने न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री गिराया। न्यूनतम तापमान 21.3 डिग्री दर्ज किया गया। शुक्रवार को मई माह में दो साल बाद न्यूनतम तापमान इतना नीचे आया। 2024 में इस माह के दौरान 20.4 डिग्री न्यूनतम तापमान रहा था। पिछले वर्ष मई माह का न्यूनतम पारा 21.5 तक आया था। इस साल 0.2 डिग्री और नीचे आ गया। आईएमडी लखनऊ के अनुसार दो दिन बाद फिर मौसम बदलने के आसार हैं। वहीं आज अधिकतम तापमान सामान्य से 6.1 डिग्री कम 33.3 दर्ज किया गया। पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने से शनिवार को हल्की तपिश बढ़ेगी । दिन का पारा 40 डिग्री से नीचे रहने का पूर्वानुमान है। फिर आंधी और बारिश का अलर्ट यूपी में आंधी, बारिश, ओलों की मार का सिलसिला खत्म होने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में भी ऐसा देखना पड़ेगा। मौसम विभाग ने फिर चेतावनी जारी की है। इसके मुताबिक सोमवार से फिर बदलाव की आहट है। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार तक आसमान सामान्यत: साफ रहेगा। हालांकि बादलों की आवाजाही चलती रहेगी। इससे धूप और छांव का सिलसिला भी चलेगा। तापमान में अधिक बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन तीन मई से मौसम में बदलाव की शुरुआत हो सकती है। बादल छाए रहेंगे और बूंदाबांदी हो सकती है। जबकि चार और पांच मई को दोबारा तेज रफ्तार आंधी, तूफान, बारिश के साथ ओलावृष्टि होने की आशंका जताई गई है। इस दौरान बिजली गरजने और गिरने का खतरा भी बताया गया है। लिहाजा इस दौरान बाहर निकलने की मनाही की गई है। लोगों को सुरक्षित और पक्के स्थानों में शरण लेने की सलाह दी गई है। पेड़ों, जर्जर भवन या दीवारों, बिजली के खंभों, पुलों, होर्डिंग्स, टिनशेड के नीचे शरण लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विभाग के मुताबिक 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी आ सकती है। पश्चिम यूपी में 35.8 डिग्री रहा दिन का पारा गुरुवार को दिनभर हुई बारिश के बाद अधिकतम तापमान में कमी आई है। पश्चिम यूपी में यह 35.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.0 डिग्री कम होकर 21.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। रात का पारा कम होने के कारण शाम से रात तक नमी का एहसास हो रहा है। आर्द्रता का अधिकतम प्रतिशत 67 दर्ज किया गया। 13.7 एमएम रिकॉर्ड हुई बारिश मौसम विभाग ने गुरुवार से लेकर शुक्रवार सुबह 8:30 बजे तक हुई बारिश को 13.7 मिलीमीटर रिकॉर्ड किया है। दिन में कई बार तेज और मध्यम स्तर की बारिश होती रही। देर रात भी तेज रफ्तार बारिश हुई। हालांकि इससे कई स्थानों पर जलभराव हो गया। यह शुक्रवार सुबह तक भरा रहा। लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

बंगाल में 15 केंद्रों पर री-पोलिंग जारी, सुबह 9 बजे तक 16.23% मतदान

 कोलकाता पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हो रहा है. इन केंद्रों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे. इनमें से 11 बूथ मगराहाट पश्चिम और 4 बूथ डायमंड हार्बर में हैं. निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक री पोलिंग के दौरान सुबह 9 बजे तक 16.23% मतदान दर्ज किया गया है. मगराहाट पश्चिम सीट के चार बूथों पर सुबह 9 बजे तक 16.88% और डायमंड हार्बर सीट के 11 बूथों पर सुबह 9 बजे तक 15.83% मतदान हुआ है।  बीजेपी ने इन मतदान केंद्रों पर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे, जिसका संज्ञान लेते हुए निर्वाचन आयोग ने इन सभी जगहों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला किया है. बीजेपी ने आरोप लगाया था कि फलता इलाके में एक मतदान केंद्र पर ईवीएम में कमल के फूल निशान वाले बटन पर टेप लगाकर उसे छिपाने की कोशिश की गई. इसका फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस संबंध में मतदाताओं और राजनीतिक दलों की ओर से शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं, जिनमें ईवीएम से छेड़छाड़, बूथ कैप्चरिंग और धांधली के आरोप लगाए गए।  सूत्रों के मुताबिक, फलता विधानसभा क्षेत्र के 30 और बूथों पर भी पुनर्मतदान हो सकता है, जिस पर चुनाव आयोग का फैसला आना बाकी है. इन बूथों पर मतदान 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में हुआ था, लेकिन चुनाव आयोग ने अब जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 58(2) के तहत इसे रद्द कर दिया है. यह प्रावधान चुनाव आयोग को अधिकार देता है कि अगर किसी मतदान केंद्र पर गंभीर गड़बड़ी- जैसे ईवीएम में खराबी, बूथ कैप्चरिंग, हिंसा या प्रक्रिया में उल्लंघन होता है, तो वह मतदान को निरस्त कर दोबारा मतदान करा सकता है।  बाहिरापुरा कुरकुरिया एफपी स्कूल स्थित मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं. मतदाताओं का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इन तीन बूथों पर दोबारा मतदान क्यों कराया जा रहा है. कुछ लोगों का दावा है कि दूसरे चरण के मतदान के दौरान किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी या बाधा नहीं हुई थी. वहीं, कई मतदाता सरकार से नाराज नजर आए. उनका कहना है कि इलाके की सड़कें बेहद खराब हालत में हैं, जिससे लोगों में गुस्सा है. गांवों और आसपास के क्षेत्रों में पानी और नलों की कमी से लोग परेशान हैं. स्थानीय लोगों ने इस समस्या को लेकर चिंता भी जताई।  मतगणना कर्मियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच मतगणना से जुड़े कर्मचारियों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। टीएमसी ने चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को तैनात करने की बात कही गई है। इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमाया हुआ है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो मतगणना की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। यह पूरा मामला वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाएगा। टीएमसी इस फैसले का विरोध कर रही है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर शामिल किया जाना चाहिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए टीएमसी ने अर्जी दी है, जिस पर जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नियमों को लेकर क्या स्पष्ट किया?       मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों को लेकर स्थिति साफ की।     उन्होंने कहा कि नियमों में यह विकल्प पूरी तरह से खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र सरकार के भी हो सकते हैं और राज्य सरकार के भी।     कोर्ट ने कहा कि जब यह विकल्प खुला हुआ है, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग का यह नोटिफिकेशन नियमों के खिलाफ है।     जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह कह सकता है कि दोनों अधिकारी केंद्र सरकार के ही होंगे।  कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या दलील दी?      टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर (परिपत्र) पर सवाल उठाए।     सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में खुद ऐसा स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी ही होंगे।     टीएमसी का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गिनती से दूर रखने के लिए उठाया गया है।       सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों पर क्या जवाब दिया? वकील सिब्बल की दलीलों पर जस्टिस बागची ने तुरंत अपना पक्ष रखा। उन्होंने ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने ऐसा कहा भी होता, तब भी हम उन्हें इस बात के लिए गलत नहीं ठहरा सकते थे। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम साफ तौर पर कहते हैं कि मतगणना के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है।    फलता में EVM के साथ छेड़छाड़ के आरोप पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान के दौरान काफी हंगामा और राजनीतिक विवाद देखने को मिला. बीजेपी ने आरोप लगाया कि ईवीएम में उनके उम्मीदवारों से जुड़े बटन को जानबूझकर टेप से ढक दिया गया था ताकि मतदाता उनके नाम न देख सकें. बता दें कि फलता से अभिषेक बनर्जी के करीबी जहांगिर खान चुनाव मैदान में हैं. बीजेपी नेताओं ने ऐसे वीडियो भी साझा किए, जिनमें ईवीएम पैनल पर बीजेपी और सीपीएम उम्मीदवारों के नाम के पास टेप लगे दिखाए गए।  इस पूरे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि … Read more

IPL 2026 Match 44: चेन्नई vs मुंबई—दोनों दिग्गज टीमों के लिए ‘करो या मरो’ मुकाबला

चेन्नई  इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में आज (शनिवार) यानी 2 मई को चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और मुंबई इंडियंस (एमआई) के बीच मुकाबला खेला जाएगा। सीजन का 44वां मैच एमए चिदंबरम स्टेडियम में आयोजित होगा, जिसमें दोनों ही टीमें अपनी किस्मत बदलकर जीत की राह पर लौटना चाहेंगी। छठे नंबर पर है चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स 8 में से 5 मैच गंवाकर पॉइंट्स टेबल में छठे पायदान पर है। छह दिन के ब्रेक के बाद चेन्नई सुपर किंग्स मैदान पर वापसी कर रही है। चेपॉक में गुजरात टाइटंस ने इस टीम को 8 विकेट से हराया था। उस मुकाबले में सीएसके के बल्लेबाज अनुभवी गेंदबाजी आक्रमण के सामने बेबस नजर आए थे। 9वें पायदान पर है मुंबई इंडियंस दूसरी ओर, मुंबई इंडियंस भी सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के हाथों चौंकाने वाली हार झेलने के बाद इस मुकाबले में उतर रही है। एसआरएच को 244 रन का टारगेट देने के बावजूद यह टीम 6 विकेट से मैच गंवा बैठी थी। 8 में से 6 मुकाबले गंवाने के बाद फिलहाल यह टीम प्वाइंट्स टेबल में 9वें पायदान पर मौजूद है। अपने सीजन को बुरे अंजाम से बचाने के लिए उन्हें जीत की सख्त जरूरत है। चेन्नई और मुंबई का हेड टू हेड रिकॉर्ड चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस ने 5-5 बार आईपीएल खिताब अपने नाम किए हैं। दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 40 मैच खेले गए हैं, जिसमें 21 मुकाबले एमआई के पक्ष मे रहे, जबकि 19 मैच सीएसके ने जीते हैं। मैच के लिए दोनों टीमें इस प्रकार हैं चेन्नई सुपर किंग्स: ऋतुराज गायकवाड़ (कप्तान), एमएस धोनी (विकेटकीपर), डेवोन कॉन्वे, राहुल त्रिपाठी, शेख रशीद, वंश बेदी (विकेटकीपर), आंद्रे सिद्धार्थ, रचिन रवींद्र, रविचंद्रन अश्विन, विजय शंकर, सैम करन, अंशुल कंबोज, दीपक हुड्डा, जेमी ओवरटन, कमलेश नागरकोटी, रामकृष्ण घोष, रवींद्र जडेजा, शिवम दुबे, खलील अहमद, नूर अहमद, मुकेश चौधरी, डेवाल्ड ब्रेविस, नाथन एलिस, श्रेयस गोपाल। मुंबई इंडियंस: हार्दिक पंड्या (कप्तान), रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, रॉबिन मिंज, रयान रिकेल्टन (विकेटकीपर), श्रीजीत कृष्णन (विकेटकीपर), बेवोन जैकब्स, तिलक वर्मा, नमन धीर, विल जैक्स, केशव महाराज, राज अंगद बावा, विग्नेश पुथुर, कॉर्बिन बॉश, ट्रेंट बोल्ट, कर्ण शर्मा, दीपक चाहर, अश्वनी कुमार, रीस टॉपले, वीएस पेनमेत्सा, अर्जुन तेंदुलकर, मुजीब उर रहमान, जसप्रीत बुमराह।

राजस्थान के घर में DC ने किया IPL का सबसे बड़ा रन चेज़

नई दिल्ली  आईपीएल 2026 में शुक्रवार को दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेले गए मुकाबले में रोमांच अपने चरम पर रहा. दिल्ली ने 226 रन का बड़ा लक्ष्य हासिल कर टूर्नामेंट में अपनी अब तक की सबसे बड़ी रनचेज दर्ज की।  मैच में बल्लेबाजों का दबदबा देखने को मिला, जहां पहले राजस्थान ने विशाल स्कोर खड़ा किया, लेकिन दिल्ली के बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता के साथ मुकाबला अपने नाम कर लिया।  टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान की शुरुआत अच्छी नहीं रही. शुरुआती झटकों के बाद कप्तान रियान पराग और ध्रुव जुरैल ने पारी को संभाला. दोनों के बीच शानदार शतकीय साझेदारी हुई. पराग ने 90 रन बनाए, जबकि जुरैल ने 42 रनों का योगदान दिया. अंत में डोनावन फरेरा ने तेज बल्लेबाजी करते हुए टीम को 225 के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।  दिल्ली की मजबूत शुरुआत लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली की शुरुआत बेहद शानदार रही. केएल राहुल और पथुम निसांका ने पहले विकेट के लिए तेजी से रन जोड़े. दोनों ने शुरुआती ओवरों में ही गेंदबाजों पर दबाव बना दिया. कुछ ही ओवरों में टीम का स्कोर तेजी से बढ़ा और साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया।  मध्यक्रम का अहम योगदान निसंका के आउट होने के बाद भी दिल्ली की गति धीमी नहीं हुई. नीतीश राणा ने तेज 33 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में रखा. इसके बाद केएल राहुल ने भी शानदार बल्लेबाजी जारी रखते हुए 75 रन बनाए. उनके आउट होने के बावजूद टीम का आत्मविश्वास बरकरार रहा और जीत की उम्मीद मजबूत बनी रही।  फिनिशर्स ने दिलाई जीत अंतिम ओवरों में ट्रिस्टन स्टब्स और आशुतोष शर्मा ने जिम्मेदारी संभाली. दोनों ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया. बिना किसी दबाव के उन्होंने मैच को खत्म किया और दिल्ली को शानदार जीत दिलाई. यह जीत टीम के लिए ऐतिहासिक साबित हुई।  राजस्थान की गेंदबाजी रही फीकी इतने बड़े स्कोर के बावजूद राजस्थान की गेंदबाजी प्रभावी नहीं दिखी. टीम को बीच-बीच में विकेट जरूर मिले, लेकिन वे मैच का रुख बदलने के लिए काफी नहीं थे. गेंदबाजों की असफलता के कारण दिल्ली के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका मिला, जिसका उन्होंने पूरा फायदा उठाया। 

बंगाल में BJP की सत्ता से होगा भूचाल, बांग्लादेशी MP ने दी शरणार्थियों को लेकर चेतावनी

ढाका  पश्चिम बंगाल में आगामी 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक खलबली मची हुई है। हाल ही में एक बांग्लादेशी सांसद ने नतीजों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर 4 मई को भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो यह बांग्लादेश के लिए बुरी स्थिति होगी क्योंकि बीजेपी सैकड़ों लोगों को सीमा पार धकेल देगी। MP ने कहा कि इससे बांग्लादेश में शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है। नेशनल सिटीजन पार्टी के संसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद से ही अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश की तरफ भेज दिया जाएगा, जो देश के लिए चिंता की बात है। हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP को जीतते हुए दिखाया जाता है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी बांग्लादेशियों को इस तरफ धकेल देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” मुसलमानों को लेकर जताई चिंता सांसद ने आगे कहा, "BJP प्रवासियों के एक सैलाब को बांग्लादेश पहुंचा देगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।" बता दें कि बंगाल चुनाव में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अहम रहा था और भाजपा ने वादा किया है कि वह घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से बाहर कर देगी। निशिकांत दुबे ने शेयर किया वीडियो बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शेयर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर उन्होंने यह वीडियो शेयर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने लिखा, "बांग्लादेश के सांसद अख़्तर हुसैन ने आज बांग्लादेश के संसद में कहा कि भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत घुसपैठ को रोकेगी और बांग्लादेशी मुसलमानों को भगाएगी, यह खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस के मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।” एग्जिट पोल में भाजपा की दिख रही जीत इस बीच बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें भाजपा को जीत मिलती दिख रही है। 'पोल डायरी' के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वे के आंकड़ों की मानें तो, टीएमसी को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं 'मैट्रिज' एग्जिट पोल में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से बाहर हो सकती है। हालांकि कुछ पोल में ममता बनर्जी की टीएमसी की जीत का भी अनुमान है। 'पी-मार्क' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को 150 से 175 सीटें मिल सकती हैं तो टीएमसी को 118-138 सीटें मिलने का अनुमान है। 'पीपुल्स प्लस' के सर्वे के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस 177 से 187 सीटें हासिल करके अपनी सत्ता बरकार रख सकती है। वहीं भाजपा को 95 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस को एक से तीन सीट मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा 'जनमत पोल्स' के एग्जिट पोल के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस को 195 से 205 सीटें मिल सकती हैं तो वहीं भाजपा को 80 से 90 सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल में आगामी 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक खलबली मची हुई है। हाल ही में एक बांग्लादेशी सांसद ने नतीजों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर 4 मई को भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो यह बांग्लादेश के लिए बुरी स्थिति होगी क्योंकि बीजेपी सैकड़ों लोगों को सीमा पार धकेल देगी। MP ने कहा कि इससे बांग्लादेश में शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है। नेशनल सिटीजन पार्टी के संसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद से ही अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश की तरफ भेज दिया जाएगा, जो देश के लिए चिंता की बात है। हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP को जीतते हुए दिखाया जाता है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी बांग्लादेशियों को इस तरफ धकेल देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” मुसलमानों को लेकर जताई चिंता सांसद ने आगे कहा, "BJP प्रवासियों के एक सैलाब को बांग्लादेश पहुंचा देगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।" बता दें कि बंगाल चुनाव में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अहम रहा था और भाजपा ने वादा किया है कि वह घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से बाहर कर देगी। निशिकांत दुबे ने शेयर किया वीडियो बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शेयर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर उन्होंने यह वीडियो शेयर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने लिखा, "बांग्लादेश के सांसद अख़्तर हुसैन ने आज बांग्लादेश के संसद में कहा कि भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत घुसपैठ को रोकेगी और बांग्लादेशी मुसलमानों को भगाएगी, यह खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस के मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।” एग्जिट पोल में भाजपा की दिख रही जीत इस बीच बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें भाजपा को जीत मिलती दिख रही है। 'पोल डायरी' के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वे के आंकड़ों की मानें तो, टीएमसी को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं 'मैट्रिज' एग्जिट पोल में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से … Read more

अमेरिका ने इजरायल को भेजे 6500 टन हथियार, ईरान पर संभावित हमले की अटकलें तेज

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरपर्सन ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की योजनाओं पर लगभग 45 मिनट तक ब्रीफिंग दी. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में ईरान पर छोटा लेकिन शक्तिशाली हमलों की योजना बताई गई. इसमें बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों को निशाना बनाने की बात है, ताकि मौजूदा संघर्ष विराम में अटकी बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।  अन्य दो महत्वपूर्ण योजनाएं भी ट्रंप को बताई गईं. हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों पर कब्जा करके उसे व्यावसायिक जहाजों के लिए दोबारा खोलना. ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए स्पेशल फोर्सेस का ऑपरेशन.यह ब्रीफिंग उस समय हुई जब ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर कमजोर स्थिति में है और बातचीत आगे नहीं बढ़ रही है।  इजराइल को अमेरिका से भारी सैन्य सहायता     इसी बीच अमेरिका ने इजराइल को मात्र 24 घंटे में 6,500 टन हथियार और सैन्य उपकरण भेज दिए. इसमें हवाई और जमीनी गोला-बारूद, सैन्य ट्रक, जॉइंट लाइट टैक्टिकल व्हीकल्स (JLTV) और अन्य उपकरण शामिल हैं.दो बड़े कार्गो जहाज और कई विमानों के जरिए यह सामान इजराइल पहुंचाया गया।      जहाज अश्दोद और हाइफा बंदरगाहों पर लंगर डाले. इजराइली रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सामान सैकड़ों ट्रकों से देश भर के सैन्य ठिकानों पर पहुंचाया गया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ऑपरेशन रोरिंग लायन शुरू होने के बाद से इजराइल को अब तक 1,15,600 टन से ज्यादा सैन्य उपकरण मिल चुके हैं।      इस जखीरे में 403 एयरलिफ्ट और 10 सीलिफ्ट शामिल हैं. इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने कहा कि देश अपने दुश्मनों के खिलाफ हर पल कार्रवाई करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि हथियारों की सप्लाई जारी रहेगी और आने वाले हफ्तों में और बढ़ेगी।  अमेरिका का क्या है रुख? ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान पर नाकेबंदी बमबारी से ज्यादा प्रभावी है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की चिंताओं का समाधान नहीं करता तो दबाव और बढ़ाया जाएगा. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से बातचीत में कहा कि अमेरिका पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर दो बार हमला किया है और आगे भी ऐसा हो सकता है. पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए मतभेद सुलझाने के पक्ष में रहा है, लेकिन अमेरिका की कार्रवाइयों ने विश्वास तोड़ दिया है. दोनों तरफ से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और होर्मुज संकट सुलझने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा।     

गंगा एक्सप्रेसवे के टोल रेट में लगातार बदलाव, 3 दिन में तीसरी बार हुआ संशोधन, नई दर जानें

 प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाला प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे आखिरकार शुरू हो चुका है. अब मेरठ से प्रयागराज सिर्फ 5-6 घंटे में पहुंचा जा सकता है. मगर, बताया जा रहा था कि इस एक्सप्रेसवे पर जितनी सुविधा मिल रही, उतना ही मोटा टोल टैक्स भी देना पड़ेगा. हालांकि, अब यात्री को उलझन में डालने वाली खबर सामने आ रही है. उद्घाटन से पहले और बाद में टोल दरों को लेकर यूपीडा उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में भारी उलझन रही. सिर्फ 3 दिन में तीन बार टोल दरें बदल दी गईं. हर कोई जानना चाहता है कि अब कितना टोल रेट देना पड़ेगा. आइए जानते हैं… 15 दिन तक फ्री सफर, पर क्यूं? गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को हरदोई में पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था. अब यह एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए शुरू हो गया है और इसपर गाड़ियां फर्राटे भरने लगी हैं. फिलहाल किसी को कोई टोल नहीं चुकाना पड़ेगा. इसका कारण है मजदूर दिवस पर योगी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर आप 15 दिन तक फ्री में सफर कर सकते हैं, यानी आपको कोई टोल नहीं देना पड़ेगा।  क्या है खासियत? करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ को सीधे प्रयागराज से जोड़ेगा. साल 2021 में दिसंबर महीने में इस एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया गया था. 5 वर्षों की मेहनत के बाद आज इस पर वाहन दौड़ने के लिए तैयार है. पहले जहां 10 से 12 घंटे का समय पहुंचने में लगता था अब वह घटकर 5 से 6 घंटे हो गया है. 120 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से अब आप इस पर सफर कर सकेंगे. गंगा एक्सप्रेस-वे 6 लेन का है. मेरठ से प्रयागराज जाने तक कुल 12 जिले पड़ेंगे।  इतना किया था टोल दर तय इसकी पहले टोल दरें 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर के आधार पर तय की गई थीं. पूरे एक्सप्रेसवे पर कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहनों (LMV) के लिए कुल टोल 1,514 रुपये तय हुआ था. यह दरें दिसंबर 2025 के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर तय की गई थीं. मगर, उद्घाटन से ठीक पहले 29 अप्रैल को यूपीडा ने नई दरें जारी कीं. हल्के वाहनों के लिए एक तरफ का टोल बढ़ाकर 1,800 रुपये कर दिया गया. दोपहिया, तीनपहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर चालकों को 905 रुपये चुकाने पड़ते. तब यूपीडा (UPEIDA) ने स्पष्ट किया था कि ये दरें एक्सप्रेसवे के पहले टोल प्लाजा से आखिरी टोल प्लाजा तक की पूरी एकल यात्रा पर लागू होंगी।  अब हुआ ये यह दरें यहां ही तय नहीं हुईं बल्कि एक बार फिर बुधवार को 1,800 रुपये तय होने के बाद गुरुवार 30 अप्रैल को फिर संशोधन कर दिया गया. अब कार जैसे हल्के वाहनों के लिए टोल 1,765 रुपये कर दिया गया. इसमें से 1,365 रुपये अडानी एंटरप्राइजेज और 440 रुपये आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेंगे. एक्सप्रेसवे अभी प्रायोगिक दौर ट्रायल रन में चल रहा है. इसलिए उद्घाटन के बाद बुधवार रात 12 बजे से जनता के लिए खुलने के बावजूद किसी भी वाहन से टोल नहीं लिया जा रहा है।  यूपीडा अधिकारियों का कहना है कि टोल दरों में मामूली बदलाव WPI और अन्य तकनीकी गणनाओं के आधार पर किया गया है. अंतिम दरें जल्द ही स्थिर हो जाएंगी और टोल वसूली शुरू हो जाएगी. 24 घंटे के अंदर वापसी पर 20% डिस्काउंट की सुविधा भी यात्रियों को राहत देगी. फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे का फ्री में मजा उठा सकते हैं। 

हाईकोर्ट ने खारिज किया केस: सगी बहनें पतियों का आदान-प्रदान करना चाहती थीं, बड़ी बहन को हुआ छोटी के पति से प्यार

ग्वालियर एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर सभी लोग हैरान हैं। ये मामला दो बहनों का है, जो आपस में अपनी पतियां बदलना चाहती हैं। बड़ी बहन को छोटी बहन के पति से प्यार हो गया है। वहीं, छोटी का दिल भी अपने जीजा पर आ गया है। इसके बाद यह मामला पूरी तरह से उलझ गया है। दतिया निवासी ने लगाई थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दरअसल, दतिया के रहने वाले गिरिजा शंकर ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मायाराम नाम के व्यक्ति ने मेरी पत्नी और बेटी को बंधक बना रखा है। इसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि महिला को कोर्ट में पेश किया जाए। महिला की एंट्री से केस में ट्विस्ट वहीं, एमपी हाईकोर्ट के निर्देश पर महिला कोर्ट में पेश हुई है। इसके बाद पूरे मामले में ट्विस्ट आ गया। महिला ने कोर्टरूम में कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ है। मैं अपनी मर्जी से मायाराम के साथ गई हूं। मायाराम महिला की छोटी बहन का पति है। साथ ही महिला ने कहा कि हमने अपने पति से तलाक के लिए याचिका लगा रखी है। छोटी बहन ने नहीं जताई आपत्ति यह मामला सुनवाई के दौरान तब और दिलचस्प हो गया, जब मायाराम की पत्नी और उस महिला की छोटी बहन ने कोई आपत्ति नहीं जताई। उसने कह दिया कि हमारी बड़ी बहन हमारे पति के साथ रहना चाहती है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मुझे भी अपने जीजा के साथ रहने की अनुमति दें। अपने-अपने पतियों के साथ नहीं रहना चाहती हैं महिलाएं     ग्वालियर हाईकोर्ट में हैरान करने वाला मामला सामने आया     दो सगी बहनें आपस में बदलना चाहती हैं पति     दोनों को एक-दूसरे के पति से हो गया है प्यार     हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं हैं दोनों बताया जा रहा है कि दोनों बहनें अपनी शादीशुदा जिंदगी से संतुष्ट नहीं हैं। दोनों सहमति और मर्जी से एक-दूसरे के पति के साथ वैवाहिक जीवन शुरू करना चाहती हैं। वहीं, दोनों बहनों के बच्चे भी हैं लेकिन बच्चे को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज वहीं, दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कह दिया है कि यह अपहरण का मामला नहीं है। यह पूरी तरह से पारिवारिक विवाद का मामला है। दोनों महिलाएं बालिग हैं, अपनी मर्जी से फैसला ले रही हैं।