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शुभमन गिल की टाइटंस तैयार, लेकिन भुवनेश्वर कुमार-हेजलवुड की जोड़ी बनेगी सबसे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली  आईपीएल 2026 का रोमांच अपने चरम पर है और गुरुवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एक हाई-वोल्टेज मुकाबला होने जा रहा है। गुजरात टाइटंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार आमने-सामने होंगे। शुभमन गिल की कप्तानी वाली टाइटंस पिछली हार का हिसाब चुकता करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, क्योंकि पिछली भिड़ंत में RCB ने 206 रनों के विशाल लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया था। गुजरात टाइटंस के लिए बदले का मौका गुजरात टाइटंस ने पिछले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से करारी शिकस्त देकर अपनी हार का सिलसिला तोड़ दिया है। यह जीत टीम के मनोबल के लिए संजीवनी साबित हुई है। हालांकि, बेंगलुरु के खिलाफ जीत दर्ज करने के लिए उन्हें अपनी पुरानी गलतियों से सीखना होगा। विशेष रूप से, टाइटंस को अपनी सुरक्षित बल्लेबाजी की रणनीति को बदलकर थोड़ा और आक्रामक रुख अपनाना होगा। RCB का विजय रथ, गेंदबाजी और बल्लेबाजी में बेजोड़ संतुलन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु इस समय शानदार फॉर्म में है। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ पिछले मुकाबले में उनके गेंदबाजों ने जो कहर बरपाया, उससे पूरी लीग में खौफ है। पूरी दिल्ली की टीम को मात्र 75 रनों पर समेटकर बेंगलुरु ने अपनी गेंदबाजी की ताकत का लोहा मनवाया है। भुवनेश्वर और हेजलवुड का डबल अटैक बेंगलुरु की सफलता का एक बड़ा श्रेय उनके अनुभवी तेज गेंदबाजों को जाता है। 36 साल के भुवनेश्वर कुमार और 35 साल के जोश हेजलवुड ने साबित कर दिया है कि टी20 क्रिकेट में अनुभव से बढ़कर कुछ नहीं है। पिछले मैच में इन दोनों ने मिलकर सिर्फ 17 रन दिए और 7 महत्वपूर्ण विकेट झटके। टाइटंस के बल्लेबाजों के लिए इस जोड़ी की सटीक लाइन-लेंथ से पार पाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। 200 का आंकड़ा अब बच्चों का खेल RCB की बल्लेबाजी इस समय फीयरलेस मोड में है। फिल साल्ट जैसे विस्फोटक खिलाड़ी की गैरमौजूदगी में भी जैकब बेथेल ने टीम के आक्रमण को कमजोर नहीं होने दिया। बेंगलुरु के लिए अब 200 से अधिक का लक्ष्य पीछा करना या बनाना बेहद आसान नजर आ रहा है। उनकी गहराई भरी बल्लेबाजी लाइन-अप किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने की क्षमता रखती है।  

योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना

गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी, जिसने लिखी विकास की महागाथा योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा गया एक सपना बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के रूप में देश को समर्पित हो गया। यह कहानी सिर्फ एक सड़क बनने की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां स्पष्ट नीति, मजबूत इच्छाशक्ति, तकनीक और प्रशासनिक दक्षता ने कच्ची मिट्टी पर विकास की महागाथा लिख दी। गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बुलंद इरादों और प्रभावी क्रियान्वयन से कुछ भी संभव है। गंगा एक्सप्रेसवे, निर्णय से निर्माण तक की वह कहानी है, जो उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ की दिशा में नई गति देगी। 2017–2019: सुनियोजित विकास की रूपरेखा वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार संभाला और ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे विकसित करने का फैसला किया गया। 2018–19 में डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और टेक्नो-इकोनॉमिक स्टडी पूरी की गई। यही वह चरण था, जहां प्रदेश के समावेशी विकास तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस एक्सप्रेसवे की डिजाइन तैयार की गई और इसे अमली जामा पहनाने के लिए डेडिकेटेड टीम तैयार की गई। 2020–2021: नीति से क्रियान्वयन तक वर्ष 2020 गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब परियोजना को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हुईं और इसके वित्तीय ढांचे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अंतिम रूप दिया गया। इससे न केवल निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि परियोजना के समयबद्ध और पेशेवर क्रियान्वयन की मजबूत नींव भी रखी गई। इसके बाद वर्ष 2021 में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से पूरा करते हुए पूरे प्रोजेक्ट को 4 प्रमुख ग्रुप/पैकेज में विभाजित किया गया। इन पैकेजों का कार्यान्वयन देश की अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, आईआरबी, अडानी, एचजी इंफ्रा और एलएंडटी जैसी एजेंसियों को सौंपा गया। यह मल्टी-पैकेज रणनीति परियोजना के लिए गेम चेंजर साबित हुई, क्योंकि इससे अलग-अलग हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सका। 2021–2025: नींव से निर्माण तक 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया, जिसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने जमीन पर वास्तविक गति पकड़ी। शिलान्यास के तुरंत बाद 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के अलग-अलग पैकेजों में निर्माण कार्य शुरू किया गया। नतीजतन, जहां पहले ऐसी मेगा परियोजनाएं वर्षों तक खिंच जाती थीं, वहीं इस रणनीतिक योजना के कारण गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण ने अभूतपूर्व गति पकड़ी और यह प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने लगा। 2026: सपना बना हकीकत ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और अंतिम तकनीकी जांच पूरी होने के बाद 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस परियोजना का 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया था, उसी का उद्घाटन भी उनके कर-कमलों से संपन्न हुआ, जो समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।  चुनौतियां आईं, लेकिन रुकी नहीं रफ्तार भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय संतुलन, कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और जटिल तकनीकी कार्यों जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कभी थमा नहीं। लगभग एक लाख किसानों से भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी मुआवजा और डीबीटी के माध्यम से तेज और विवाद-मुक्त बनाया गया, वहीं पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए अलाइनमेंट को संतुलित ढंग से विकसित किया गया। कोविड काल में श्रमिकों और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच भी स्थानीय संसाधनों के उपयोग और चरणबद्ध निर्माण रणनीति से कार्य निरंतर चलता रहा। सीएम योगी की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता रही निर्णायक इस पूरे प्रोजेक्ट की गति बनाए रखने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता निर्णायक रही। उन्होंने नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से हर चरण की प्रगति पर नजर रखी, जबकि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की सक्रिय भूमिका ने जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति दी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप, यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल चुनौतियों को पार करता हुआ आगे बढ़ा, बल्कि तय समयसीमा में पूरा होकर प्रभावी प्रशासन और मजबूत नेतृत्व का उदाहरण भी बना।

मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा में बदलाव, 64 कॉलेजों के बंद होने से शिक्षा पर असर

भोपाल  मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। प्लेसमेंट के घटते अवसर और पारंपरिक ब्रांचों में छात्रों की कम होती रुचि ने कई कॉलेजों के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि इस साल भी कई इंजीनियरिंग कॉलेज सीटें सरेंडर करने की तैयारी में हैं। पिछले साल प्रदेश में 754 सीटें सरेंडर की गई थीं। हाल इतने बुरे हैं कि बीते 10 सालों में प्रदेश के 64 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), मशीन लर्निंग (एमएल) और ई-मोबिलिटी जैसी आधुनिक ब्रांचों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके चलते कॉलेज इन क्षेत्रों में सीटें बढ़ाने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेज रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि अब छात्र और अभिभावक केवल उन्हीं संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां बेहतर प्लेसमेंट की गारंटी हो। इससे छोटे और कम पहचान वाले कॉलेजों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश के इंजीनियरिंग क्षेत्र में जबर्दस्त बदलाव आ रहा है। एक ओर जहां इंजीनियरिंग कॉलेजों में ताला लग रहा है, 5 दर्जन से ज्यादा कॉलेज बंद हो चुके हैं वहीं नए कोर्सेस की डिमांड बढ़ भी रही है। प्लेसमेंट के दबाव से यह स्थिति बन रही है। नई ब्रांच में रुचि, पुरानी में गिरावट प्रदेश में इंजीनियरिंग की कुल 75722 सीटों में से पिछले साल सबसे ज्यादा 20 हजार से अधिक एडमिशन केवल कंप्यूटर साइंस (सीएसई) में हुए। इसके विपरीत, कई पारंपरिक और विशेष ब्रांचों की हालत बेहद खराब रही। एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, बायोटेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, ई व्हीकल्स जैसी 12 ब्रांचों में पिछले दो साल से सीटें लगभग खाली रहीं। बदलती प्राथमिकताएं: 2015-16 में जहां प्रदेश में 200 इंजीनियरिंग कॉलेज और करीब 95 हजार सीटें थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 138 कॉलेज और 74722 सीटों तक सिमट गई है। यह गिरावट स्पष्ट संकेत देती है कि इंजीनियरिंग शिक्षा अब केवल संख्या का खेल नहीं रह गया, बल्कि गुणवत्ता और रोजगार से सीधे जुड़ गई है। प्रमुख बिंदु इंजीनियरिंग क्षेत्र में जबर्दस्त बदलाव एमपी के इंजीनियरिंग कॉलेजों में लग रहा ताला एक दशक में 5 दर्जन से ज्यादा कॉलेज बंद हुए प्लेसमेंट के दबाव से स्थिति बदली स्टूडेंट का नई ब्रांच की ओर रुझान एआइ की सबसे ज्यादा डिमांड इंजीनियरिंग की पुरानी सीटें सरेंडर कर रहे कॉलेज नए कोर्सेस के लिए भेजे प्रस्ताव दस साल में स्थिति सत्र -कॉलेज- सीट 2025-26- 138- 74722 2024-25- 142- 63338 2023-24- 140- 71400 2022-23- 143- 69966 2020-21- 150- 56008 2019-20- 162- 59000 2018-19- 160- 65000 2017-18- 197- 79899 2016-17- 194- 90303 2015-16- 200- 94980  

हरी खाद से खेती में बढ़ेगा उत्पादन, मिट्टी की सेहत में सुधार की उम्मीद

हरी खाद- खेती में बढ़ेगा उत्पादन, मिट्टी की सेहत होगी बेहतर              रायपुर आज के दौर में टिकाऊ खेती की ओर बढ़ना समय की मांग है। रसायनों के बोझ तले दबती मिट्टी को राहत देने के लिए हरी खाद एक बेहतरीन समाधान बनकर उभरी है। यह न केवल फसलों की पैदावार बढ़ाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन की उर्वरता को भी सुरक्षित रखती है। मिट्टी बचेगी, तो किसान बचेगा और किसान बचेगा, तो देश समृद्ध होगा।          कृषि विभाग द्वारा किसानों को खेती में हरी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और उत्पादन में सुधार लाने में मदद मिल सके। विभाग के अनुसार धान के खेतों में लगातार रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की गतिविधियां कम हो रही हैं और मिट्टी की संरचना भी प्रभावित हो रही है। क्या है हरी खाद?        हरी खाद वह सहायक फसल है जिसे मुख्य फसल बोने से पहले खेत में उगाया जाता है और फूल आने की अवस्था में ही उसे हल चलाकर मिट्टी में दबा दिया जाता है। ढैंचा, सनई, लोबिया, मूंग और उड़द जैसी फसलें हरी खाद के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। हरी खाद के तहत कई फसलों का उपयोग किया जाता है जिनमें दलहनी और बिना दलहनी फसलें शामिल होती हैं। हरी खाद के लिए झाड़ियों और पेड़ों की पत्तियों, टहनियों को भी उपयोग में ला सकते हैं, लेकिन इसके लिए विशेष रूप से ढैंचा फसलों का उपयोग किया जाता है। इन फसलों को खेतों में लगाकर भूमि में सुधार किया जाता है। मिट्टी की सेहत में सुधार       हरी खाद का सबसे बड़ा प्रभाव मिट्टी की भौतिक और रासायनिक संरचना पर पड़ता है। यह मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों (ह्यूमस) की मात्रा को तेजी से बढ़ाती है। हरी खाद मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, जिससे हवा का संचार बढ़ता है और पौधों की जड़ें गहराई तक जा पाती हैं। इसके उपयोग से मिट्टी की पानी सोखने की शक्ति बढ़ जाती है, जो सूखे के समय फसलों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है। उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी         जब मिट्टी स्वस्थ होती है, तो उत्पादन का बढ़ना निश्चित है। हरी खाद के प्रयोग से पैदावार में 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। यूरिया और अन्य रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो जाती है, जिससे किसान की फसल की लागत घटती है। मित्र कीटों से फसल का संरक्षण करता है। यह जमीन के भीतर लाभकारी सूक्ष्मजीवों और केंचुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करती है। हरी खाद बनाने की सही विधि       क्षेत्र की जलवायु के अनुसार सनई या ढैंचा का चुनाव करें। बुवाई का समय मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) इसके लिए सबसे उपयुक्त है। जब फसल लगभग 40-50 दिन की हो जाए और उसमें फूल आने लगें, तब उसे पाटा लगाकर या रोटावेटर की मदद से मिट्टी में मिला दें। पलटने के बाद 10-15 दिनों तक खेत में नमी बनाए रखें ताकि खाद अच्छी तरह सड़कर मिट्टी का हिस्सा बन जाए। हरी खाद के प्रयोग से  बढ़ेगी आय         हरी खाद केवल एक उर्वरक नहीं है, बल्कि यह मिट्टी का उपचार है। यदि किसान हर दूसरे या तीसरे साल अपने खेत में हरी खाद का प्रयोग करें, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि हम समाज को रसायनों से मुक्त, शुद्ध और पौष्टिक अनाज भी उपलब्ध करा पाएंगे। कृषि के लिए एक वरदान हरी खाद            हरी खाद का उपयोग कृषि के लिए एक ष्वरदानष् के समान है। वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है, ऐसे में हरी खाद (ळतममद डंदनतम) प्राकृतिक तरीके से मिट्टी को पुनर्जीवित करने का सबसे सुलभ विकल्प है।                कृषि विभाग द्वारा खरीफ फसल से पूर्व हरी खाद के बीज उपलब्ध कराने की भी पहल की जा रही है। इसके लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से किसानों से मांग लेकर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।               धनंजय राठौर         संयुक्त संचालक जनसंपर्क 

भारत की आर्थिक ताकत में तेजी, वैश्विक शांति में अहम भूमिका निभा सकता है: वैश्विक विशेषज्ञ

नई दिल्ली   भारत तेजी से एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है और वैश्विक स्तर पर छवि विश्व शांति व्यवस्था को आकार देने वाले, आर्थिक स्थिरता और टेक्नोलॉजी को बढ़ाने वाले देश की बन रही है। यह बयान बुधवार को ग्लोबल एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी में इकोनॉमिस्ट एंटरप्राइज के 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026' के साइडलाइन के दौरान आईएएनएस से ​​बातचीत में उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निपटने, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और एआई और उभरती टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को बढ़ावा देने में भारत के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में अर्थशास्त्र के ली का शिंग प्रोफेसर डैनी क्वाह ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद की बदलती प्रकृति और व्यापारिक गतिशीलता में आए बदलावों ने विश्व अर्थव्यवस्था में काफी अनिश्चितता पैदा कर दी है। क्वाह ने कहा कि व्यापारिक व्यवधानों से परे, एक गहरी चिंता वैश्विक विश्वास में कमी और बहुपक्षीय प्रणालियों का कमजोर होना है, जो पारंपरिक रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आधार रही हैं। उन्होंने आईएएनएस को बताया,“भारत इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है और अगर भारत कोशिश करे तो शांति कायम होगी। लोग शांति लाने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। मुझे लगता है कि लोग उचित नेतृत्व के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। उचित नेतृत्व क्या होगा, यह तय करना अभी भारत पर निर्भर है।” वहीं, लंदन के विज्ञान संग्रहालय के निदेशक इयान ब्लैचफोर्ड ने एआई के प्रति भारत के विशिष्ट और आशावादी दृष्टिकोण का जिक्र किया। ब्लैचफोर्ड ने कहा, “अगर आप अमेरिका और यूरोप के सार्वजनिक सर्वेक्षणों को देखें, तो अधिकांश आबादी एआई को लेकर चिंतित है। भारत में स्थिति इसके विपरीत है। भारत एआई केंद्रों के लिए क्षमता निर्माण कर रहा है और साथ ही इसके प्रभावों पर गहराई से विचार भी कर रहा है।” ब्लैचफोर्ड ने वैश्विक दक्षिण की व्यापक उपलब्धियों, विशेष रूप से भारत की विकास यात्रा की सराहना की। ब्लैचफोर्ड ने आईएएनएस को बताया, “देश आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है, जबकि वह ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों से भी जूझ रहा है।”उन्होंने आगे कहा, “यह पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत है, जिन्हें दशकों से समृद्धि का लाभ मिल रहा है।”

महाकाल मंदिर के अन्न क्षेत्र में ऑनलाइन दान की सुविधा, आरती में शामिल होकर प्रसाद चढ़ाने का विकल्प

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है. अब बाबा के भक्त दुनिया के किसी भी कोने से मंदिर के अन्न क्षेत्र में दान कर सकेंगे. मंदिर समिति पहली बार अन्नदान की पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन करने जा रही है. मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह डिजिटल सेवा संभवतः अगले सोमवार से लागू हो सकती है।  क्या है अन्नक्षेत्र की नई डिजिटल व्यवस्था? अक्सर लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या अपनों की पुण्यतिथि पर अन्नदान करना चाहते हैं. शास्त्रों में अन्नदान को ‘महादान’ कहा गया है. पहले इसके लिए भक्तों को मंदिर आकर रसीद कटवानी पड़ती थी. लेकिन, अब मंदिर समिति ने इसे डिजिटल बना दिया है. अब भक्त महाकाल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसी विशेष दिन को बुक कर सकेंगे. वहां निर्धारित सहायता राशि जमा करके अन्नदान का पुण्य लाभ लिया जा सकता है।  महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव के अनुसार, मंदिर का विशाल अन्नक्षेत्र पूरी तरह से जन-सहयोग और दान पर टिका है। इस नई डिजिटल पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और दूर-दराज के भक्त भी सेवा कार्य से जुड़ सकेंगे। सोमवार से लागू होगी नई व्यवस्था     मंदिर प्रशासन के अनुसार, ऑनलाइन दान की यह नई व्यवस्था आगामी सोमवार से विधिवत शुरू हो जाएगी।     श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट      http://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in पर जाकर "Donation" सेक्शन के माध्यम से आसानी से राशि जमा कर सकते हैं। अन्नक्षेत्र: प्रतिदिन 10,000 श्रद्धालु ग्रहण करते हैं प्रसादी महाकाल मंदिर का अन्नक्षेत्र अपनी सेवा और शुद्धता के लिए जाना जाता है। यहाँ:     प्रतिदिन दो शिफ्ट में भोजन प्रसादी का वितरण होता है।     रोजाना लगभग 10,000 श्रद्धालु नि:शुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं।     पहले केवल ऑफलाइन (मंदिर पहुंचकर) दान की सुविधा होने के कारण कई इच्छुक भक्त इस सेवा का लाभ नहीं उठा पाते थे। भोजन प्रसादी और दान राशि  सेवा का प्रकार    निर्धारित दान राशि दोनों समय के भोजन के लिए    ₹1,10,000 एक समय के भोजन के लिए    ₹51,000 मीठे प्रसाद (मिठाई) के लिए    ₹21,000 साल भर पहले से कर सकेंगे एडवांस बुकिंग इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब श्रद्धालु पूरे वर्ष में किसी भी तारीख के लिए अग्रिम (Advance) बुकिंग कर सकेंगे। लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या परिजनों की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर पहले से ही भोजन प्रसादी सुरक्षित कर सकते हैं। भगवान को स्वयं लगा सकेंगे भोग डिजिटल दान करने वाले भक्तों के लिए मंदिर समिति ने एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव की भी योजना बनाई है। दानदाताओं को भोग आरती के समय मंदिर में आमंत्रित किया जाएगा और उनके स्वयं के हाथों से भगवान महाकाल को भोग अर्पित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिदिन लगता है विशेष भोग बाबा महाकाल को प्रतिदिन सुबह 10 बजे विशेष भोग लगाया जाता है। इसमें शुद्ध घी की रोटियां, दाल-चावल और दो प्रकार की मौसमी सब्जियां शामिल होती हैं। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर मिठाई भी अर्पित करते हैं। भगवान को भोग लगाने के पश्चात ही अन्नक्षेत्र में आम श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी शुरू की जाती है। बाबा को भोग लगाने का विशेष अवसर इस डिजिटल पहल की सबसे बड़ी विशेषता ‘भोग’ से जुड़ी है. सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि ऑनलाइन दान करने वाले भक्तों को बाबा महाकाल को भोग अर्पित करने का अवसर मिलेगा. दानदाता अपने परिवार के साथ मंदिर आ सकते हैं. मंदिर के कर्मचारी उन्हें बाबा महाकाल के पास लेकर जाएंगे. वहां भक्त अपने हाथों से बाबा को भोग लगा सकेंगे और इस अनूठी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।  दान से चलता अन्न क्षेत्र सिम्मी यादव ने बताया, महाकाल मंदिर का अन्न क्षेत्र पूरी तरह से दानदाताओं के सहयोग से संचालित होता है. यहां प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु निशुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं. भोजन व्यवस्था रोजाना दो अलग-अलग शिफ्ट में चलती है. सहायक प्रशासक के अनुसार, अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को मंदिर के सेवा कार्यों से जोड़ने के उद्देश्य से यह नवाचार किया गया है. जो भक्त किन्हीं कारणों से उज्जैन नहीं आ पाते हैं, वे अब घर बैठे ही अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकेंगे. यह डिजिटल माध्यम उनके खास पलों को और भी यादगार बनाएगा। 

सुरक्षाबलों की सफलता, घने जंगलों में मुठभेड़ में नक्सली ढेर

 चाईबासा/गुवा  झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले अंतर्गत टोंटो और गोइलकेरा के सीमावर्ती घने जंगलों में बुधवार की सुबह सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है. प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के दौरान कोबरा 209 बटालियन के जवानों ने एक नक्सली को मार गिराया है. मारे गए नक्सली के पास से आधुनिक हथियार और कई संदिग्ध सामग्रियां बरामद हुई हैं. हालांकि, अभी तक मारे गए नक्सली की आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है, जिसे लेकर पुलिस पड़ताल कर रही है. इनामी नक्सली मिसिर बेसरा की सूचना पर शुरू हुआ था अभियान पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी कि भाकपा माओवादी का शीर्ष नेता और एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ रुटुगुटू, बोरोई और तूनबेड़ा के पहाड़ी क्षेत्रों में शरण लिए हुए है. इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कोबरा बटालियन, झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त दलों ने इलाके की घेराबंदी शुरू की. पिछले दो दिनों से इस दुर्गम क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा चप्पे-चप्पे पर बारीकी से तलाशी अभियान चलाया जा रहा था. जंगलों में छिपे नक्सलियों ने की अंधाधुंध फायरिंग जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह जब सुरक्षाबल जंगल के भीतर तलाशी अभियान चला रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे माओवादियों ने जवानों को देखते ही उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. जवानों ने भी तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की. घंटों चली इस मुठभेड़ के बाद नक्सली घने जंगलों और झाड़ियों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे, लेकिन घटनास्थल की तलाशी के दौरान एक माओवादी का शव बरामद हुआ. सुरक्षाबलों का मानना है कि इस फायरिंग में कुछ अन्य नक्सली भी घायल हुए हैं. पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी, बढ़ाई गई सुरक्षा मुठभेड़ के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है. चाईबासा एसपी ने बताया कि नक्सलियों के खिलाफ यह अभियान थमेगा नहीं और मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी तक जंगलों में घेराबंदी जारी रहेगी. सुरक्षाबलों ने आसपास के ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की है और घायलों की तलाश में डॉग स्क्वायड की भी मदद ली जा रही है.

गायक, शायर और आरजे के लिए बड़ा मौका: Voice of U.P. टैलेंट हंट की हुई लॉन्च

लखनऊ फीवर एफएम नेटवर्क और हिन्दुस्तान ने उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े वॉयस टैलेंट हंट 'Voice of U.P.' की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यूपी के गायक, शायर और आरजे जैसे कलाकार लाइव हिन्दुस्तान के ऐप पर इस टैलेंट हंट में हिस्सा ले सकते हैं। 'Fever in U.P.: Ab Machega Bhaukaal' के बैनर तले इस टैलेंट हंट का लॉन्च इवेंट लखनऊ में रखा गया था, जिसमें U.P. के कलाकारों, क्रिएटर्स और इंडस्ट्री के दिग्गजों का जमावड़ा दिखा। इस मौके पर पद्मश्री मालिनी अवस्थी, यूपी के सीएम के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, Bigg Boss के अनाउंसर विजय विक्रम सिंह, एक्टर शारिब हाश्मी, कथाकार लक्ष माहेश्वरी और डिजिटल क्रिएटर्स मारूफ कलमेन, छोटी फिलिम, अपेक्षा गुरनानी, और द फीमेल बैंड मौजूद रहे। आज की युवा पीढ़ी के बारे में बात करते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा कि यह पीढ़ी आत्मविश्वासी है, मंच पर खड़े होने से घबराती नहीं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ सामने आना काफी नहीं है, अब क्रिएटर्स को अपने कंटेंट में गंभीरता चाहिए। मालिनी ने कहा 'मैं हर कलाकार में वही देखती हूं, जो मैं थी। बदायूँ, फर्रुखाबाद, कन्नौज- ये वो इलाके हैं, जहां दुनिया के सबसे कमाल के कलाकार पैदा हुए, लेकिन वहां कोई नहीं पहुँचता। प्रतिभा की कमी नहीं है- बस पहुंचाने वाला कोई नहीं था। जिस तरह रेडियो ने कभी कलाकारों को आवाज़ दी- 'Voice of UP' वही काम करेगा।' सीएम योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा, 'पहले लोग बताते नहीं थे कि वो UP के हैं, आज वही लोग गर्व से कहते हैं कि हम U.P. के हैं। अयोध्या और वाराणसी आज दुनिया के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले शहरों में हैं। यह U.P. का नया दौर है, और इस दौर में गांव-देहात के कलाकारों को एक असली मंच मिलना चाहिए। 'Voice of U.P.' वही मंच है।' विजय विक्रम सिंह ने कहा कि UP की आवाज़ों में वो दम है जो पूरे देश को सुनाई देना चाहिए। शारिब हाश्मी और लक्ष माहेश्वरी ने भी नए क्रिएटर्स को कंटेंट और निरंतरता पर ध्यान देने की सलाह दी। हिंदुस्तान के चीफ ऑपरेटिंग अफसर रजत कुमार ने कहा, ‘101 साल पुराना Hindustan Times, 90 साल का Hindustan और 20 साल का Fever FM- यह तीनों मिलकर UP में जो Voice Of U.P. लाने जा रहे हैं, वो काबिले तारीफ होगा।’ HT मीडिया ग्रुप के रेडियो बिज़नेस के सीईओ रमेश मेनन ने कहा, 'Fever Network आज UP का सबसे बड़ा रेडियो नेटवर्क है- और 'Voice of U.P.' उसी का अगला कदम है। हमारा मानना है कि U.P. में वही जीतेगा, जो यहां के लोगों तक सिर्फ पहुंचे नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बने। 'Voice of U.P.' के जरिये हम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनना चाहते हैं, क्यूंकि जो आवाज़ यहां से उठेगी, वो पूरे देश को सुनाई देगी।' इस मौके पर मालिनी अवस्थी, विजय विक्रम सिंह, मारूफ कलमेन, छोटी फिलिम, अपेक्षा गुरनानी, और मेरी जिंदगी- द फीमेल बैंड को पहले Voice of U.P. के अवार्ड से नवाज़ा गया। साथ ही उत्तर प्रदेश के जाने-माने उद्योगपति और मीडिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी बड़ी तादाद में मौजूद रहे। राज्य के बड़े कारोबारी और एजेंसियों को उनके काम और योगदान के लिए भी 'Voice of U.P.' के खिताब से नवाज़ा गया। Voice of U.P. क्या है? Voice of U.P. उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा वॉयस टैलेंट हंट है, जो Fever FM और Hindustan मिलकर लाए हैं। इस मुहिम का मकसद सीधा है- उत्तर प्रदेश के हर उस इंसान को एक मंच देना, जिसकी आवाज़ में दम है, लेकिन मौका नहीं मिला। चाहे आप गाते हों, या शायरी लिखते हों, कॉमेडी करते हों या RJ बनने का सपना देखते हों- Voice of UP में सबकी जगह है। वॉयस ऑफ यूपी में कैसे हिस्सा लें? वॉयस ऑफ यूपी में भाग लेना बेहद आसान है। इसके लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें, वीडियो के साथ एंट्री सबमिट करें और अपनी आवाज को वो मंच दें, जिसका वो हकदार है। Voice of UP के लिए रजिस्ट्रेशन 1 मई, 2026 को खुलेगा कैसे Voice of UP में शामिल हो सकते हैं     सबसे पहले हिंदुस्तान ऐप को गूगल प्लेस्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड करें     Voice of UP को सेलेक्ट करें     रजिस्टर करें 1 मई के बाद     अपना वीडियो अपलोड करें     ऐप कैसे डाउनलोड करें

हरमू से चिरौंदी तक सफर होगा आसान, करोड़ों की लागत से बनेंगे फ्लाईओवर

रांची  राजधानी रांची में लंबे समय से लोगों को परेशान कर रही ट्रैफिक जाम की समस्या अब काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। सरकार ने दो महत्वपूर्ण फ्लाईओवर परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इसके निर्माण के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर आवागमन तेज, सुगम और समय बचाने वाला हो जाएगा। खासतौर पर हरमू–अरगोड़ा – डिबडीह और करमटोली–साइंस सिटी–चिरौंदी रूट पर लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हरमू से अरगोड़ा चौक होते हुए डिबडीह ब्रिज तक   हरमू से अरगोड़ा चौक होते हुए डिबडीह ब्रिज तक 3.804 किमी लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा, जिसकी लागत करीब 469.62 करोड़ रुपये है। यह फ्लाईओवर कटहल मोड़(चापुटोली) और अशोक नगर तक भी जुड़ेगा। करमटोली से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक वहीं, करमटोली से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक 3.216 किमी लंबा फ्लाईओवर बनेगा, जिस पर लगभग 351.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके साथ मोरहाबादी को जोड़ने के लिए लिंक रोड भी तैयार किया जाएगा। छह महीनों से चल रहा था लगातार सर्वे इन परियोजनाओं को लेकर पिछले छह महीनों से लगातार सर्वे किया जा रहा था। इस दौरान ट्रैफिक लोड, सड़क की स्थिति, जमीन अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और भविष्य की जरूरतों जैसे कई पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इसके बाद डीपीआर तैयार कर मंजूरी के लिए भेजा गया, जिसे स्वीकृति भी मिल गई। यह वीडियो भी देखें तीन फ्लाईओवर के बनने से मिली है बड़ी राहत राजधानी में पहले बने कांटाटोली, सिरमटोली-मेकान और रातू रोड फ्लाईओवर ने ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया है। अब इन नई परियोजनाओं से शहर को और राहत मिलने की उम्मीद है। कांटाटोली और मेकान सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके बनने से कांटाटोली फ्लाईओवर से वाहन चढ़ने के बाद मेकान चौक पर उतरेगी। समय की बचत में बड़ा बदलाव इन फ्लाईओवर के बनने के बाद अरगोड़ा से कडरू-हरमू तक पहुंचना आसान होगा। काव से डिबडीह ब्रिज तक करीब 15 मिनट की बचत होगी, जबकि चिरौंदी से करमटोली की दूरी 30 मिनट के बजाय सिर्फ 5 से 10 मिनट में तय हो सकेगी। जाम से मिलेगी राहत अरगोड़ा रोड, हरमू, कडरू, कटहल मोड़, बरियातू और मोरहाबादी जैसे इलाकों में रोजाना लगने वाले जाम से निजात मिलेगी। ट्रैफिक का दबाव कम होगा और वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारू होगी। स्कूल, कालेज और आफिस जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। आपातकालीन सेवाओं की रफ्तार भी बढ़ेगी और शहर की कुल यातायात व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बन सकेगी।

SOG की बड़ी कार्रवाई: अजमेर में फर्जी डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी का रैकेट फेल

 अजमेर अजमेर में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी पाने के चर्चित मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रूल को गिरफ्तार कर लिया है. इससे पहले इस मामले में पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा को भी पकड़ा जा चुका है, जिनसे पूछताछ के आधार पर यह कार्रवाई की गई. अब तक 11 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार एसओजी के एडिशनल एसपी श्याम सुंदर विश्नोई के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. बताया जा रहा है कि आरोपी को जयपुर से पकड़कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के रिमांड पर भेजा गया है.. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जी डिग्रियों पर अंतिम साइन भी आरोपी ही करता था और वह कमीशन के आधार पर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था. पुलिस अब पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. RPSC भर्ती में फर्जी डिग्री का खेल मामले की जांच लोकसेवा आयोग की शिकायत के बाद शुरू हुई थी. आयोग ने बताया था कि स्कूल लेक्चरर (हिंदी) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में चयनित दो युवतियों ने आवेदन के समय वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की डिग्री बताई, लेकिन बाद में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की डिग्री प्रस्तुत की. जांच में सामने आया कि दोनों ने एमए की फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल की. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि उन्हें ये डिग्रियां उनके परिजनों के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थीं. इसके बाद एसओजी ने सरकारी शिक्षक दलपत सिंह और डॉक्टर सुरेश विश्नोई सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित गिरोह है जो फर्जी डिग्रियों के जरिए सरकारी नौकरियां दिलाने का काम कर रहा था. मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.