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वाराणसी के मंदिरों और गंगा में आस्था की डुबकी लगाने वालों को अब नहीं होगी सामान खोने की चिंता

वाराणसी के मंदिरों में दर्शन और गंगा में आस्था की डुबकी लगाने वालों को अब अपने सामान के खोने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी  योगी सरकार विश्वनाथ मंदिर और घाट के आसपास लगाएगी डिजिटल लगेज लॉकर  चार साइज़ के 225 डिजिटल लॉकर की होगी सुविधा, मोबाइल से लेकर सूटकेस तक रखा जा सकेगा सुरक्षित  दशाश्वमेध प्लाजा ,गोदौलिया ,टाउन हॉल,और बेनियाबाग पार्किंग में डिजिटल लॉकर लगाया जाना प्रस्तावित है वाराणसी श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा का दर्शन और गंगा में आस्था की डुबकी लगाने वालों को अब अपने सामान की  चिंता नहीं करनी पड़ेगी, कपड़े हों या मंहगे सामान, इन सबको सुरक्षित रखने के लिए योगी सरकार विश्वनाथ मंदिर और घाट के आसपास डिजिटल लगेज लॉकर लगवाने जा रही है। डिजिटल लॉकर में मोबाइल से लेकर सूटकेस तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। डिजिटल लॉकर के इस्तमाल के लिए डिजटल पेमेंट की सुविधा रहेगी।  डिजिटल भारत की बानगी देखना हो तो इतिहास से भी प्राचीन शहर काशी में आइये। काशी में अब आपको डिजिटल लगेज लॉकर की सुविधा मिलेगी। जहां अपने कीमती सामानों और कपड़ों को रख कर आप बेफिक्र घाटों पर घूम सकेंगे और गंगा स्नान कर काशीपुराधिपति समेत अन्य मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के आस-पास और दशाश्वमेध घाट के पास भी डिजिटल लगेज लॉकर की सुविधा जल्द मिलेगी।  नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए डिजिटल लगेज लॉकर की व्यवस्था दशाश्वमेध घाट के पास दशाश्वमेध प्लाजा ,गोदौलिया, टाउन हॉल और बेनियाबाग पार्किंग में डिजिटल लॉकर लगाया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने जानकारी दी कि 225 डिजिटल लॉकर की सुविधा रहेगी जिसमे छोटे, मध्यम ,बड़े और एक्स्ट्रा लार्ज चार तरह के डिजिटल लॉकर उपलब्ध होंगे। इसमें  मोबाइल,छोटे बैग, बड़े और सबसे बड़े लॉकर में दो सूटकेस रखे जा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीद में किसानों को दी महत्वपूर्ण राहत

मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीद में किसानों को दी बड़ी राहत फार्मर रजिस्ट्री के बिना भी सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेच सकेंगे किसान सभी जिलाधिकारियों को तत्काल व्यवस्था लागू करने के निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गेहूं खरीद में किसानों को बड़ी राहत प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने किसानों को हो रही असुविधा के दृष्टिगत बड़ा फ़ैसला लेते हुए घोषणा की कि फार्मर रजिस्ट्री के बिना भी किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे।  तत्काल व्यवस्था लागू करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान पूर्व की भांति ही अपना गेहूं बेच सकेंगे। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को तत्काल इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने कहा कि क्रय केंद्रों पर गेहूं बिक्री के लिए आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बेतहाशा गर्मी को देखते हुए सभी क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए पानी, पंखा, छाजन समेत सभी मूलभूत आवश्यकताओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए।  42 हजार से अधिक किसानों से अब तक 2.38 लाख मीट्रिक टन खरीद खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक, 20 अप्रैल दोपहर 11 बजे तक 42 हजार से अधिक किसानों से 2.38 लाख मीट्रिक टन से गेहूं खरीद की जा चुकी है। गेहूं बिक्री के लिए अब तक 4.77 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण भी कर लिया है। अब तक प्रदेश में 5400 से अधिक क्रय केंद्र स्थापित कर लिए गए हैं।

स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को योगी सरकार से मिली राहत, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत जीरो बैलेंस होने की स्थिति में भी अधिकतम 3 दिन या 200 रुपये तक (2 किलोवाट भार तक) विद्युत आपूर्ति बाधित नहीं होगीः एके शर्मा स्मार्ट मीटर पर बड़ा फैसला: तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने तक स्मार्ट मीटर पर रोक 5-स्तरीय एसएमएस अलर्ट प्रणाली से उपभोक्ताओं को किया जाएगा सूचित- मंत्री एके शर्मा रविवार और अवकाश में नहीं कटेगा कनेक्शन, मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश- मंत्री एके शर्मा लखनऊ उत्तर प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ऊर्जा विभाग सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन युद्धस्तर पर प्रयास कर रहा है। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है कि जीरो बैलेंस होने की स्थिति में भी अधिकतम 3 दिन या 200 रुपये तक (2 किलोवाट भार तक) विद्युत आपूर्ति बाधित नहीं होगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। ऊर्जा मंत्री ने लखनऊ स्थित शक्ति भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में विद्युत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उपभोक्ता हितैषी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये। 45 दिन तक बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए कहा कि जहां स्मार्ट मीटर अभी हाल में लगे हैं, वहां लगभग 15 दिन की कन्वर्जन अवधि और उसके बाद 30 दिन यानी कुल 45 दिन तक किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।  रिपोर्ट आने तक पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया पर रोक ऊर्जा मंत्री ने विशेष रूप से स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा में निर्देश देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर गठित तकनीकी समिति जब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती और उसकी जांच नहीं हो जाती, तब तक पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक रहेगी। उपभोक्ताओं को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 5-स्तरीय एसएमएस अलर्ट प्रणाली लागू की जाएगी, जिसके तहत बैलेंस 30 प्रतिशत होने पर पहला, 10 प्रतिशत पर दूसरा, बैलेंस समाप्त होने पर तीसरा, डिस्कनेक्शन से एक दिन पूर्व चौथा और डिस्कनेक्शन के बाद पांचवां संदेश भेजा जाएगा।  स्मार्ट मीटर की तकनीकी गुणवत्ता की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित इसके अतिरिक्त ऊर्जा मंत्री ने निर्देश दिए कि रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में बैलेंस नेगेटिव होने पर भी किसी भी स्थिति में बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके। वहीं ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं यूपी पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्मार्ट मीटर की तकनीकी गुणवत्ता की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इसमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर के प्रोफेसर अंकुश शर्मा, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर के ही प्रोफेसर प्रबोध बाजपेयी, इलेक्ट्रिकल रिसर्च एवं डेवलपमेंट एसोसिएशन वडोदरा के अनुभाग प्रमुख तेजस मिस्त्री और यूपी पावर कारपोरेशन लि. के निदेशक (वितरण) जीडी द्विवेदी को शामिल किया गया है। समिति 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप रिपोर्ट आने तक प्रदेश में पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। आगे का निर्णय समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। वहीं उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ता मार्गदर्शिका (FAQ) जारी की गई है, जिसमें स्मार्ट मीटर से जुड़े लाभ और भ्रांतियों का तथ्यात्मक विवरण दिया गया है। इसके साथ ही सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इन नम्बरों पर शिकायत के लिए कर सकते हैं संपर्क ऊर्जा विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के लिए टोल फ्री नंबर 1912 पर विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा www.uppcl.org⁠ वेबसाइट और व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मध्यांचल-766-900-3409/पश्चिमांचल-785-980-4803/पूर्वांचल-801-096-8292/दक्षिणांचल-801-095-7826/केस्को-828-783-5233 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतों की दैनिक मॉनिटरिंग कर उनका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को गिराने पर विपक्ष के खिलाफ भड़कीं महिलाएं

नारी शक्ति वंदन संशोधन विधयेक गिराने वाले विपक्ष पर भड़कीं महिलाएं विपक्षी दलों पर महिलाओं का हक छीनने का आरोप लगाया क्या सिर्फ डिम्पल यादव को संसद जाने का हक है: बेबी रानी मौर्य लखनऊ  संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधयेक गिरने के बाद उत्तर देश भर में विरोध देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश की महिलाएं भी इसे नारी विरोधी बता रहीं हैं। यह विधेयक लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से जुड़ा था, ऐसे में विपक्ष पर महिलाओं का हक मारने का आरोप लग रहा है। विपक्षी दलों ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधयेक को पारित नहीं होने दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में राजनीति से लेकर तमाम क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने इसे विपक्ष की चुनावी हार की शुरुआत बताया। भाजपा महिला नेताओं का कहना है कि सपा-कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष केवल अपने घर की महिलाओं को ही लोकसभा और विधानसभा में देखना चाहता है। ये सभी परिवारवाद से ग्रस्त हैं और विपक्ष को आगामी चुनावों में आधी आबादी का हक छीनने का नुकसान उठाना पड़ेगा। महिला नेताओं के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की महिलाओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से विपक्ष घबराया हुआ है। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से आजादी मिली। कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी का महिला विरोधी चेहरा सामने आ गया है। आखिर अखिलेश यादव महिलाओं को संसद में क्यों नहीं देखना चाहते? क्या सिर्फ यादव परिवार की डिम्पल यादव को ही संसद में जाने का अधिकार है? क्या ये अधिकार देश और उत्तर प्रदेश की आम महिलाओं को नहीं मिलना चाहिए? बेबी रानी मौर्या, मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार आज देश की राष्ट्रपति एक महिला हैं, देश के कई उच्च पदों पर महिलाएं काम कर रहीं हैं और देश के विकास में अपना योगदान दे रहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के हित में जितना काम किया है, उतना इतिहास में कभी नहीं हुआ। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी निंदनीय कुप्रथा से आजादी मिली। अब जब देश की संसद में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी को सुनिश्चित करने का वक्ता आया तो विपक्ष ने अपना महिला विरोधी चेहरा दिखा दिया। विजय लक्ष्मी गौतम, मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी ने जिस भारत का सपना देखा है और जिस पर वे लगातार काम कर रहे हैं, उसमे अड़ंगा लगाना जैसे विपक्ष का मूल व्यवहार बन गया है। समाजवादी पार्टी मुख्यमंत्री योगी की महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं से वैसे ही घबराई हुई है और ऐसे में अगर महिलाओं को आरक्षण मिलता है तो प्रधानमंत्री ने जिस सशक्त भारत का सपना देखा है, वह पूरा होता। इसे विपक्ष और अखिलेश यादव पूरा होते देखना नहीं चाहते। रजनी तिवारी, मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार एक महिला के सशक्त होने से सिर्फ परिवार ही सशक्त नहीं होता बल्कि समाज सशक्त होता है, उसका चौमुखी विकास होता है। देश की संसद में महिलाओं का योगदान बढ़ेगा तो देश के विकास को अतुलनीय रफ्तार मिलेगी, ये भला अखिलेश यादव और विपक्ष को कैसे स्वीकार होगा? फिर इनके परिवारवाद का क्या होगा? इसीलिए ये लोग विरोध कर रहे हैं। अदिति सिंह, विधायक, भाजपा

BCCI करने जा रहा है बड़ा बदलाव, श्रेयस अय्यर को T20 कप्तानी, वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा मौका

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट में अगले कुछ महीनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मजबूत लाइन ने चयनकर्ताओं को बड़ा सोचने का मौका दिया है. आईपीएल लगातार मैच के लिए तैयार खिलाड़ी तैयार कर रहा है. ऐसे में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) 30-35 खिलाड़ियों का एक पूल बनाने की योजना बना रहा है, जो एक साथ दो मजबूत टी20 टीमें मैदान में उतार सके. एक ही मुख्य टीम से आगे की योजनाएं तुरंत बनानी होंगी क्योंकि इस साल के अंत में भारत को एक साथ कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने हैं, जिसमें एशियन गेम्स और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज एक ही समय पर होंगी।  बीसीसीआई के एक अधिकारी ने एनडीटीवी से कहा, “एशियन गेम्स और भारत बनाम वेस्टइंडीज टी20 सीरीज एक ही समय पर होंगी. इसलिए हमें दो टी20 टीमें उतारने के बारे में सोचना होगा. अभी से 30-35 खिलाड़ियों का पूल बनाना जरूरी है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए बुलाया जा सके. आने वाले आयरलैंड दौरे के लिए, यूके के ज्यादातर दौरों की तरह, टीम में ज्यादा खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा. यही व्यवस्था एशियन गेम्स तक जारी रहेगी।  बोर्ड इस साल और भविष्य में भी एक साथ कई टूर्नामेंट के लिए योजना बना रहा है. अब क्रिकेट भी मल्टी-डिसिप्लिन स्पोर्टिंग इवेंट्स का हिस्सा बन गया है, जिसमें 2028 के ओलंपिक गेम्स भी शामिल हैं. फोकस गहराई, लचीलापन और तैयार रहने पर है. ये वे खूबियां हैं, जिनकी आज के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में सबसे ज्यादा जरूरत है।  आगामी आयरलैंड दौरा एक टेस्टिंग ग्राउंड के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे दौरों का इस्तेमाल आमतौर पर नए खिलाड़ियों को मौका देने के लिए किया जाता है. इस बार टीम में ज्यादा खिलाड़ियों को शामिल किया जा सकता है, जो एशियन गेम्स तक बढ़े हुए टैलेंट पूल की लंबी योजना को दर्शाता है. भारत सितंबर में अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की टी20 सीरीज भी खेलेगा, हालांकि इसका शेड्यूल अभी तय नहीं हुआ है।  चयनकर्ताओं के विचार में जिन खिलाड़ियों के नाम हैं, वे आईपीएल के बढ़ते प्रभाव को दिखाते हैं. बल्लेबाजी में वैभव सूर्यवंशी, यशस्वी जायसवाल, प्रियंश आर्य और अंगकृष रघुवंशी ने अपने बेखौफ खेल से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है. रजत पाटीदार और आयुष बडोनी भी चयनकर्ताओं की नजर में हैं. शशांक सिंह और अनुकूल रॉय जैसे खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है। 

पानी बचाना हमारी जरूरत भी है और जिम्मेदारी भी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से प्रदेश में जल संरक्षण को मिली नई गति राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंचा मध्यप्रदेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। पानी बचाना बेहद जरूरी है। यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के इस अनमोल वरदान से कभी भी कमी महसूस नहीं करें। इसके लिए हमें अपने वर्तमान जल स्रोतों के साथ सूख चुके जल स्रोतों को संरक्षित करना ही होगा। उन्होंने कहा कि पानी बचाने के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। सरकार और समाज के साझा प्रयासों से हो रहे इस अभियान में बीते एक माह में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है। प्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ ने अल्प समय में ही उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विगत 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ यह अभियान जल संरक्षण, जल संरचनाओं के संवर्धन और जनभागीदारी का एक व्यापक जन-आंदोलन बनता जा रहा है। इस अभियान के प्रभाव से ही मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग सुधारकर अब तीसरे स्थान पर आ गया है। अभियान से पहले मध्यप्रदेश नेशनल रैंकिंग में छठवें स्थान पर था। राज्य सरकार द्वारा आगामी 30 जून तक चलाए जा रहे इस अभियान में 16 विभागों की 58 गतिविधियां नियत की गई हैं। इसके लिए लगभग 6 हजार 278 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य तय किया गया है। इस अभियान में कुल 2 लाख 44 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों को चिन्हित कर लगभग 6 हजार 236 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। अभियान की मॉनिटरिंग एकीकृत डैश बोर्ड से आयुक्त, मनरेगा ने बताया कि अभियान की एक ही प्लेटफार्म पर नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक एकीकृत डैश बोर्ड तैयार किया गया है, जिससे सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों की प्रगति दर्ज कर रहे हैं। इस डैश बोर्ड से जिलेवार रैंकिंग भी सुनिश्चित की जा रही है। इस डैश बोर्ड से प्रशासनिक एवं विभागीय पारदर्शिता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान अंतर्गत 39 हज़ार 977 खेत तालाबों का निर्माण, 59 हज़ार 577 कूप-रीचार्ज संरचनाओं तथा 21 हज़ार 950 से अधिक पहले से निर्मित जल संरचनाओं को पुनर्जीवित भी किया गया है। इसके साथ ही अमृत सरोवरों के निर्माण और उनके उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण नगरीय क्षेत्रों में भी जल संरक्षण को लेकर व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा तालाब, कुएं और पुरानी बावड़ियों के संवर्धन, नालों की सफाई और सौंदर्यीकरण तथा रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त तेज़ गर्मी को देखते हुए नगरीय निकायों द्वारा विभिन्न स्थानों पर प्याऊ की स्थापना भी की गई है। म.प्र. जन अभियान परिषद चला रही जनजागरूकता गतिविधियाँ म.प्र. जन अभियान परिषद के माध्यम से राज्य में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 5 लाख 25 हजार से अधिक व्यक्तियों की सक्रिय सहभागिता दर्ज की गई। साथ ही प्रदेश के विभिन्न विकासखंडों में 2 हज़ार 682 जल मंदिर (प्याऊ) स्थापित किए गए हैं। स्कूलों में जागरूकता गतिविधियां स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी इस अभियान में व्यापक तौर पर भागीदारी की जा रही है। राज्य के हजारों विद्यालयों में जल रैलियां, निबंध, पोस्टर प्रतियोगिताएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों और अभिभावकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया है। तकनीकी नवाचार अंतर्गत वॉटरशेड विकास कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन स्वीकृति और मोबाइल ऐप आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है। वन और पर्यावरण विभाग द्वारा भी जल संरक्षण के साथ पारिस्थितिकीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फील्ड गतिविधियां की जा रही हैं। नदियों के जल की गुणवत्ता का परीक्षण, जल संरचनाओं का निर्माण तथा पौधरोपण की तैयारी जैसे कार्य इसमें शामिल किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा सतत् मॉनिटरिंग और नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। इससे धरातल पर मौजूद व्यावहारिक कमियों को दूर करने में भी मदद मिल रही है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में ठोस परिणाम मिलने शुरू हो गए है। मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल देश के दूसरे राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनती जा रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का रीवा में हुआ आत्मीय स्वागत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लखनऊ से विमान द्वारा रीवा एयरपोर्ट पहुंचे। रीवा एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया गया। रीवा एयरपोर्ट पर विधायक त्योंथर श्री सिद्धार्थ तिवारी, कमिश्नर बीएस जामोद, आईजी गौरव राजपूत, डीआईजी हेमंत सिंह चौहान, प्रभारी कलेक्टर सपना त्रिपाठी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री रीवा में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीवा एयरपोर्ट से सुबह 10:05 बजे रीवा से तमिलनाडु के कोयंबटूर के लिए रवाना होंगे।  

मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का हो रहा है निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

फिरोजिया ट्रॉफी विजेताओं के लिये अतिरिक्त पुरस्कार की घोषणा की फिरोजिया ट्रॉफी का फाइनल मैच देखा, खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। शासन का प्रयास है कि खिलाड़ियों को हर स्तर पर आधुनिक खेल संरचना, प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों। शासन के इन प्रयासों से मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाएं विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उज्जैन में भी विभिन्न खेल मैदानों में खेल व्यवस्थाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उज्जैन के क्षीर सागर मैदान को भी नगर निगम और खेल विभाग द्वारा विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को देर रात उज्जैन में फिरोजिया ट्रॉफी का फाइनल मैच देखा और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने इस अवसर पर फिरोजिया ट्रॉफी की विजेता टीम को रुपए 1 लाख और उप विजेता टीम को 51 हजार रुपए के अतिरिक्त नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। फिरोजिया ट्रॉफी का आयोजन 12 अप्रैल से 19 अप्रैल तक उज्जैन के क्षीर सागर मैदान पर किया गया। फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के बीच रोमांचक संघर्ष देखने को मिला, जिससे दर्शक अंत तक मैच का आनंद लेते रहे। सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का फिरोजिया ट्रॉफी में प्रत्येक वर्ष पधारने और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने पर आभार व्यक्त किया। फिरोजिया ट्रॉफी सांसद श्री अनिल फिरोजिया के पिता स्व. भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में विगत 21 वर्षों से हर वर्ष आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार रुपए 5 लाख 51 हजार है और द्वितीय पुरस्कार 2 लाख 51 हजार रुपये है। प्रतियोगिता में इस वर्ष नारी शक्ति वंदन की भावना को साकार करते हुए महिला क्रिकेट मैच और मातृशक्ति सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री रवि सोलंकी और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।  

विजय इंदर सिंगला का आरोप, महिला आरक्षण की आड़ में BJP कर रही है भेदभाव

मानसा महिला आरक्षण की आड़ में BJP भेदभाव कर रही है। इसलिए, 16 अप्रैल 2026 को 131वें संविधान संशोधन बिल को इंडियन नेशनल कांग्रेस और उसके साथियों ने पूरी तरह से सही कारणों से खारिज कर दिया था। पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है। यह 2023 में पास हुए 106वें संविधान संशोधन के तहत पहले से ही देश का कानून है। इसे कांग्रेस का पूरा समर्थन था। यह 131वां संशोधन बिल 16 अप्रैल 2026 को लाया गया था। इससे महिला आरक्षण की आड़ में भेदभाव और सीट बढ़ाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि 2023 में कानून पास करने के बाद, BJP की सरकार ने इसे लागू करने में करीब 30 महीने की देरी की। लेकिन अब 16 अप्रैल, 2026 को कानून नोटिफाई किया गया और उसी दिन लोकसभा का विस्तार करने, संसदीय क्षेत्रों को फिर से बांटने और रिप्रेजेंटेशन बदलने के लिए नए बिल पेश किए गए। यह यहां लागू करने में देरी करने, फिर इसे डिलिमिटेशन के साथ जोड़ने और आखिर में कुछ राज्यों के पक्ष में राजनीतिक ताकत को फिर से बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करने की एक साफ रणनीति दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में 13 लोकसभा सीटें हैं। पुराने आंकड़ों के आधार पर डिलिमिटेशन के तहत इसका हिस्सा कम हो जाएगा। इससे MSP, फाइनेंशियल डिस्ट्रीब्यूशन और मानसा और पंजाब के हर जिले के किसानों, मजदूरों और परिवारों को प्रभावित करने वाले हर राष्ट्रीय फैसले पर राज्य का असर सीधे तौर पर कम हो जाएगा। पंजाब एक बॉर्डर राज्य है। राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र और भारत की खाद्य सुरक्षा की रीढ़। इसने जिम्मेदारी से जनसंख्या स्थिरता का पालन किया है और फिर भी इसे सही काम करने की सजा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत की महिलाएं असली एम्पावरमेंट और राजनीतिक पैंतरेबाजी के बीच का अंतर समझती हैं। वे देरी, कमजोरी और भटकाव को पहचानती हैं। यह सिर्फ़ रिज़र्वेशन का सवाल नहीं है। यह राज्यों की आवाज़ और हमारी डेमोक्रेसी की ईमानदारी का सवाल है। कांग्रेस पंजाब, मानसा और हर उस नागरिक के साथ खड़ी रहेगी जो यह मानता है कि संवैधानिक अधिकार राजनीतिक फ़ायदे के लिए सौदेबाज़ी की चीज़ नहीं हैं।

रेलवे ने कबाड़ बेचकर ₹6,800 करोड़ की कमाई की, 168% की वृद्धि से तोड़े सभी रिकॉर्ड

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने अपनी वित्तीय सुदृढ़ता की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. वित्त वर्ष 2025-26 के समापन पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने स्क्रैप (कबाड़) की बिक्री से कुल 6,813.86 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है. यह आंकड़ा रेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित 6,000 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य से लगभग 13.5 प्रतिशत अधिक है।  लगातार दूसरे वर्ष लक्ष्य से अधिक प्रदर्शन रेलवे की यह सफलता कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह संसाधनों के कुशल मुद्रीकरण की दिशा में चल रहे व्यवस्थित प्रयासों का परिणाम है. पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में भी रेलवे ने 5,400 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 6,641.78 करोड़ रुपये की कमाई की थी. अधिकारियों के अनुसार, अनुपयोगी रेल पटरियों, पुराने इंजनों, कोचों और वैगनों के पारदर्शी ई-ऑक्शन के कारण राजस्व में यह निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।  गैर-किराया राजस्व (NFR) में 168% की भारी वृद्धि रेलवे के लिए स्क्रैप की बिक्री न केवल आय का स्रोत बनी है, बल्कि इसने गैर-किराया आय) को भी मजबूती दी है. रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन, स्टेशन पुनर्विकास और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय वित्त वर्ष 2021-22 के 290 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 777.76 करोड़ रुपये हो गई है. यह पांच वर्षों में लगभग 168 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है. इस वर्ष के लिए NFR का लक्ष्य 720.85 करोड़ रुपये रखा गया था, जिसे रेलवे ने सफलतापूर्वक पार कर लिया है।  बिना टिकट यात्रियों से वसूले 148 करोड़ रुपये बिना टिकट यात्रा करने वालों पर सख्ती बढ़ाकर 148 करोड़ रुपये वसूल किए गए हैं. माल ढुलाई में भी जोन ने 21 मिलियन टन से ज्यादा माल पहुंचाकर नया रिकॉर्ड बनाया है। उत्तर मध्य रेलवे के रेलवे यार्ड, वर्कशॉप और ट्रैक के किनारे पड़ी पुरानी लोहे की चीजें, पुराने सामान और बेकार माल को नीलामी के जरिए बेचा गया, रेलवे ने इसे “कबाड़ से जुगाड़” का नाम दिया है. इस अभियान से सिर्फ पैसे ही नहीं आए, बल्कि रेलवे के स्टेशन और यार्ड साफ-सुथरे भी हो गए हैं।  इसके अलावा, रेलवे ने बिना टिकट यात्रा पर बड़ी सख्ती की. विशेष टिकट चेकिंग ड्राइव चलाकर बिना टिकट यात्रा करने वालों से 148 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया. अब रेलवे नियम तोड़ने वालों पर नजर रखने की व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है।  पर्यावरण और संचालन को लाभ स्क्रैप मुद्रीकरण की इस प्रक्रिया ने न केवल खजाने को भरा है, बल्कि परिचालन दक्षता में भी सुधार किया है. यार्डों, वर्कशॉप और डिपो में सालों से पड़े कबाड़ के हटने से बहुमूल्य जगह खाली हुई है, जिससे रेलवे परिसरों में सुरक्षा और स्वच्छता बढ़ी है. साथ ही, स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से रेलवे अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों (Waste-to-Wealth) को भी पूरा कर रहा है।  यात्रियों पर बिना बोझ डाले ढांचागत विकास सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त आय का उपयोग रेल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा. टिकट की दरों में वृद्धि किए बिना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं, जैसे आधुनिक स्टेशन आउटलेट, बेहतर सुरक्षा प्रणालियां और डिजिटल सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर 22 प्रीमियम ब्रांडेड आउटलेट्स आवंटित किए जा चुके हैं, जो भविष्य में आय के नए द्वार खोलेंगे।