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दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सम्राट चौधरी, बिहार के विकास रोडमैप पर अहम चर्चा

नई दिल्ली बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिनों बाद सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार मुलाकात की। सीएम बनने के बाद पहली बार सम्राट चौधरी राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे और प्रधानमंत्री से मुलाकात की है। इस दौरान 'समृद्ध बिहार' पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी गई। पीएमओ की तरफ से पीएम मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच हुई मुलाकात की तस्वीरों को भी साझा किया गया है। वहीं, सम्राट चौधरी ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आज नई दिल्ली में शिष्टाचार मुलाकात की। 'विकसित भारत और समृद्ध बिहार' के विजन पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री का स्नेह एवं सहयोग बिहार की प्रगति को नई गति प्रदान कर रहा है।'' सूत्रों के मुताबिक, बिहार सीएम के इस दिल्ली दौरे के दौरान राज्य में होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा हो सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसमें भाजपा कोटे से मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है। वर्तमान में बिहार सरकार का मंत्रिमंडल अधूरा है और इसे जल्द से जल्द विस्तार देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। राज्य में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ने ही शपथ ली थी। जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया, जबकि भाजपा कोटे से अभी तक किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। बिहार में कुल 33 मंत्रियों का प्रावधान है, लेकिन अभी तक एक भी पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो सका है। ऐसे में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द कैबिनेट का विस्तार कर राज्य के विकास को गति देना है। बता दें कि 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करेंगे और अपनी सरकार के बहुमत को साबित करने की कोशिश करेंगे।

चुनाव से पहले बंगाल में बैन: बाइक रैली और डबल राइडिंग पर रोक, जानें वजह

कोलकाता पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने मोटरसाइकिल के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाये हैं। आयोग द्वारा 20 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार की बाइक रैली की अनुमति नहीं होगी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह देखा गया है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी राजनीतिक दल बाइक रैलियां निकालते हैं, जिनके जरिए कई मामलों में मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs), पुलिस कमिश्नरों और पुलिस अधीक्षकों को संबोधित एक आदेश में CEO ने कहा कि मोटरसाइकिल रैलियों पर पूरी तरह से बैन है, इसमें कोई छूट नहीं है। एक चुनाव अधिकारी ने कहा, "आयोग मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा, इसलिए बाइक रैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।" इसके अलावा, इस अवधि में शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक मोटरसाइकिलों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी, सिवाय आपात स्थितियों जैसे चिकित्सा या जरूरी पारिवारिक कारणों के। बाइक पर पीछे बैठने पर भी रोक इस आदेश में कहा गया है कि सुबह छह बजे से शाम छह बजे के बीच भी पिलियन राइडिंग (पीछे बैठकर सफर) पर रोक रहेगी, हालांकि चिकित्सा आपात स्थिति या आवश्यक कार्य जैसे स्कूल बच्चों को ले जाने की स्थिति में छूट दी जा सकती है। चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक, हालांकि, मतदान के दिन सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक सीमित छूट दी जाएगी, जिसमें परिवार के सदस्यों को मतदान और आवश्यक कार्यों के लिए दोपहिया वाहन पर यात्रा की अनुमति होगी। संकरी गलियों से कैश या शराब ले जाने पर लगेगी रोक CEO के दफ़्तर के एक अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक पार्टियां कभी-कभी संकरी गलियों और उप-गलियों से कैश या शराब ले जाने के लिए मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करती हैं, जहाँ आमतौर पर मुख्य सड़कों पर चार-पहिया वाहनों पर नजर रखने वाली चौकियाँ नहीं होतीं। उनके अनुसार, "इन पाबंदियों का मकसद मतदाताओं को प्रलोभन देने के इस तरीके को खत्म करना और बिना किसी हिंसा के चुनाव का माहौल सुनिश्चित करना है।" अधिकारियों को इन निर्देशों का व्यापक प्रचार करने और जिला पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिये गये हैं। यह कदम मतदान से पहले के 48 घंटे के मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की डराने-धमकाने की गतिविधियों, अवैध जुटान और चुनाव प्रक्रिया में बाधा को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। ऐप-आधारित डिलीवरी करने वालों के लिए मुश्किल चुनाव आयोग के इस आदेश से ऐप-आधारित डिलीवरी करने वालों पर इसके लागू होने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इनमें से कई लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए मोटरसाइकिलों पर निर्भर हैं और पूरी रात काम करते हैं। इस निर्देश में बाइक चलाने वालों की इस श्रेणी का कोई खास ज़िक्र नहीं है। आदेश में DEOs और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के साथ-साथ ज़िला और ब्लॉक-स्तर के प्रचार तंत्र के ज़रिए इन पाबंदियों का व्यापक प्रचार करें, और इनके सख़्त पालन और निगरानी के लिए आपस में तालमेल बिठाएँ। आदेश में कहा गया है, "किसी भी ऐसे उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में कोई रुकावट या बाधा पैदा हो।"

चिप मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने की प्लानिंग, सरकार ला सकती है ISM 2.0

नई दिल्ली केंद्र सरकार देश में तेजी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार के लिए मई तक इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 'आईएसएम 2.0' लाने की तैयारी कर रही है। इसका प्रस्तावित परिव्यय एक लाख करोड़ रुपए से 1.2 लाख करोड़ रुपए के बीच रहने का अनुमान है। एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसएम 2.0 को लेकर मंत्रालयों के बीच बातचीत चल रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, वित्त मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि आईएसएम 2.0 में प्रस्तावित परिव्यय पहले चरण से काफी अधिक होने का अनुमान है, जो कि पहले 76,000 करोड़ रुपए था। सूत्रों ने आगे बताया कि आईएसएम 2.0 के तहत, सरकार का लक्ष्य कार्यक्रम के दायरे को चिप निर्माण और डिजाइन से आगे बढ़ाकर सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल और अन्य महत्वपूर्ण इनपुट के लिए समर्थन को शामिल करना है, साथ ही पूर्ण-स्टैक बौद्धिक संपदा के निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलता को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित करना है। सरकार यह कदम ऐसे समय पर उठा रही है, जब वैश्विक अस्थिरता के कारण ग्लोबल आपूर्ति श्रृंखलाओं में लगातार व्यवधान देखने को मिल रहे हैं। गैस आपूर्तिकर्ता, विशेष रसायन निर्माता, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्य इकोसिस्टम के भागीदार जैसे सहायक खिलाड़ी इस संशोधित ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। दूसरे चरण की एक प्रमुख विशेषता संशोधित डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई 2.0) योजना है, जिसके तहत विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ देश के भीतर सेमीकंडक्टर रिसर्च और डेवलपमेंट में साझेदारी करने की अनुमति मिलने की संभावना है। इस पहल से इनोवेशन को गति मिलने और आने वाले वर्षों में 50 तक फैबलेस सेमीकंडक्टर डिजाइन फर्मों के उदय को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। मार्च 2025 में भारत के पहले 'नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स रोडशो' में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा था कि घरेलू सेमीकंडक्टर मांग बाजार 2030 तक 110 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है।

सीएम योगी की बैठक: होमगार्ड भर्ती परीक्षा और कानून व्यवस्था पर होगा विस्तृत विचार

होमगार्ड भर्ती परीक्षा और कानून व्यवस्था पर सीएम योगी करेंगे समीक्षा बैठक बुधवार रात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेशभर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ होगी बैठक सभी जोन के एडीजी, पुलिस कमिश्नर, मंडलायुक्त, डीएम-एसपी होंगे बैठक में शामिल 25 से 27 अप्रैल के बीच होने वाली परीक्षा को लेकर मुख्यमंत्री देंगे आवश्यक दिशा निर्देश लखनऊ  प्रदेश में होने वाली होमगार्ड भर्ती परीक्षा को लेकर प्रदेश सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार रात 9 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ व्यापक समीक्षा करेंगे, जिसमें परीक्षा की तैयारियों के साथ-साथ कानून व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री महत्वपूर्ण निर्देश देंगे। बैठक में प्रदेश के सभी अपर पुलिस महानिदेशक (जोन), पुलिस आयुक्त, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, आईजी/डीआईजी रेंज, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक और जिला विद्यालय निरीक्षक समेत संबंधित अधिकारी शामिल होंगे। 25 से 27 अप्रैल तक होनी है भर्ती परीक्षा गौरतलब है कि प्रदेश में 25, 26 और 27 अप्रैल को होमगार्ड भर्ती परीक्षा आयोजित की जानी है। परीक्षा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, अभ्यर्थियों की सुविधा और नकलविहीन परीक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता में है। मुख्यमंत्री बैठक के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा करेंगे। संवेदनशील जिलों, परीक्षा केंद्रों और संभावित भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जा सकते हैं। नकल व गड़बड़ी पर जीरो टॉलरेंस नीति योगी सरकार का पूरा जोर परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने पर है। नकल, पेपर लीक या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। इसी क्रम में सभी अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पूरी तैयारी के साथ प्रतिभाग करने के लिए निर्देशित किया गया है।

MG Windsor EV का नया Commute वेरिएंट लॉन्च, कीमत और फीचर्स पर एक नजर

मुंबई  JSW MG Motor India ने अपनी नई MG Windsor EV रेंज का विस्तार करते हुए, एक नया 'Commute' वेरिएंट जोड़ा है. कंपनी ने इस वेरिएंट की कीमत 13.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी है. इस नए वेरिएंट को मौजूदा Excite ट्रिम से नीचे रखा जाएगा, जिसकी कीमत उससे लगभग 61,000 रुपये कम है. हालांकि यह मुख्य रूप से फ्लीट ऑपरेटरों के लिए है, लेकिन इसे निजी इस्तेमाल के लिए भी रजिस्टर कराया जा सकता है।  MG Windsor EV Commute वेरिएंट का डिजाइन Windsor EV के नए Commute वेरिएंट में LED प्रोजेक्टर हेडलाइट्स, ORVM पर लगे टर्न इंडिकेटर्स और फ्लश डोर हैंडल्स बरकरार रखे गए हैं. हालांकि, इसमें अलॉय व्हील्स की जगह 17-इंच के स्टील व्हील्स का इस्तेमाल किया गया है, जिन पर कोई कवर नहीं मिलता है।  MG Windsor EV Commute वेरिएंट का इंटीरियर इंटीरियर की बात करें तो नए Commute वेरिएंट में एक आसान केबिन लेआउट मिलता है. इस नए वेरिएंट में Excite वेरिएंट में मिलने वाली 10.1-इंच की सेंट्रल टचस्क्रीन नहीं है. इसके बजाय, इसमें 7-इंच का LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है, जो मुख्य डिस्प्ले का काम करता है।  केबिन में मिलने वाली बेसिक फ़ैब्रिक अपहोल्स्ट्री, मैनुअल सीट एडजस्टमेंट और एक मिनिमल डैशबोर्ड लेआउट मिलता है, जबकि गोल्डेन कलर के हाइलाइट्स सिर्फ़ इसके डोर की ट्रिम्स पर ही मिलते हैं. कार में एयर-कंडीशनिंग मैनुअल है, और ORVMs भी मैनुअली एडजस्ट करने वाले हैं।  इसके अलावा, इस वेरिएंट में स्टीयरिंग-माउंटेड गियर सेलेक्टर, क्रूज़ कंट्रोल और डिस्प्ले सेटिंग बटन वाला 2-स्पोक स्टीयरिंग व्हील, और कपहोल्डर व स्टोरेज वाला एक सेंटर कंसोल मिलता रहेगा।  अन्य दिखाई देने वाले एलिमेंट्स में पावर विंडो स्विच, हेडलाइट बीम की हाइट एडजस्ट करने के कंट्रोल, ट्रैक्शन कंट्रोल, आगे की फॉग लाइट्स, ऑटो होल्ड और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक शामिल हैं. इसके अलावा, पीछे की सीटों में भी ऊपर के वेरिएंट्स की तरह ही रिक्लाइनिंग फ़ंक्शन मिलता है।  MG Windsor EV Commute वेरिएंट का बैटरी पैक और रेंज नए Commute वेरिएंट के बैटरी पैक की बात करें तो इसमें वही 38 kWh का बैटरी पैक इस्तेमाल किया गया है, जो इसके निचले ट्रिम्स – Excite, Exclusive और Essence में भी मिलता है. एक बार फुल चार्ज करने पर यह कार 332 km तक की रेंज प्रदान करता है।  इस बैटरी पैक को 7.4 kW AC चार्जर से चार्ज करने पर 10 से 100 प्रतिशत तक चार्ज करने में लगभग 7 घंटे लगते हैं, जबकि 45 kW DC फास्ट चार्जर से यह लगभग 45 मिनट में 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज हो जाता है। 

जबलपुर में खराब रिजल्ट पर 33 शिक्षकों को नोटिस, तीन दिन का अल्टीमेटम दिया, जनशिक्षकों ने किया विरोध

 जबलपुर  कक्षा पांचवीं और आठवीं के हाल ही में घोषित परीक्षा परिणामों को लेकर जिले में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में 33 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें 14 जनशिक्षक और 19 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। नोटिस में क्या कहा गया जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को पहले ही पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने, छात्रों से नियमित अभ्यास कराने और बेहतर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई स्कूलों के परिणाम जिले में सबसे कमजोर पाए गए। प्रशासन का मानना है कि इस लापरवाही के कारण जबलपुर जिला राज्य स्तर पर पिछड़े जिलों की श्रेणी में आ गया है, जो चिंता का विषय है। इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित शिक्षकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। लापरवाही पर सख्त रुख शिक्षा विभाग ने इसे केवल सामान्य चूक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी में कमी माना है। अधिकारियों के अनुसार, छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। इसलिए कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों और उनसे जुड़े शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जनशिक्षकों का विरोध, निर्णय पर सवाल दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर जनशिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अभी घोषित परीक्षा परिणाम अंतिम नहीं हैं। वर्तमान में री-टोटलिंग और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है, जिससे कई छात्रों के अंक बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थी मात्र एक-एक अंक से असफल हुए हैं, ऐसे में पुनर्मूल्यांकन के बाद परिणाम में सुधार संभव है। इसके अलावा 15 जून के बाद आयोजित होने वाली द्वितीय परीक्षा को भी अंतिम परिणाम में शामिल किया जाना चाहिए, तभी वास्तविक स्थिति सामने आएगी। कार्रवाई पर उठे सवाल जनशिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया है कि कार्रवाई केवल जनशिक्षकों और कुछ प्राथमिक शिक्षकों तक ही सीमित क्यों रखी गई है। उनका कहना है कि ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (BRC) और संकुल प्राचार्य स्तर के अधिकारियों को इस दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सामूहिक होती है। शिक्षकों का तर्क है कि यदि जवाबदेही तय करनी है तो सभी संबंधित स्तरों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। अतिरिक्त कार्यों से प्रभावित हुई पढ़ाई शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले चार महीनों के दौरान उन्हें एसआइआर जैसे प्रशासनिक कार्यों में प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक व्यस्त रखा गया। इससे नियमित कक्षा शिक्षण प्रभावित हुआ। उनका कहना है कि जब शिक्षक कक्षा में पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, तो छात्रों के प्रदर्शन पर असर पड़ना स्वाभाविक है। फिलहाल शिक्षा विभाग पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है। शिक्षकों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि छात्रों के हित में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

अमित शाह का बड़ा बयान—बंगाल में सत्ता मिली तो घुसपैठियों की होगी छुट्टी

आसनसोल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का प्रचार करने पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री ने कुल्टी विधानसभा क्षेत्र से जनसभा को संबोधित करते हुए जनता से अपनी पार्टी के वादों को दोहराया। इसके साथ ही टीएमसी सरकार पर जुबानी हमला बोला। अमित शाह ने कहा, "कुल्टी की जमीन का इस्तेमाल कभी ब्लास्ट फर्नेस के लिए किया जाता था। यहां से लोहा पूरे भारत में भेजा जाता था और दुनिया के कई देशों में निर्यात भी किया जाता था। ममता बनर्जी के कुशासन के कारण कुल्टी के वे फर्नेस बंद हो गए हैं। हम 'आयरन सिटी' का दर्जा एक बार फिर बहाल करने के लिए काम करेंगे। अवैध खनन को रोका जाएगा।" उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल का चुनाव बंगाल को घुसपैठिया मुक्त बनाने का चुनाव है। भाजपा सरकार बना दीजिए, बंगाल से एक-एक घुसपैठियों को निकालने का काम करेंगे। ममता के गुंडे कान खोलकर सुन लें, 23 अप्रैल को मतदान में जरा भी खलल डाला, तो 4 मई के बाद उल्टा लटकाकर सीधा करने का काम करेंगे। ममता के गुंडों की बंगाल की जनता के सामने कोई मजाल नहीं है। ममता को बंगाल के युवाओं की चिंता नहीं है, वो अपनी जगह भतीजे को बैठाना चाहती हैं, लेकिन उनका सपना पूरा नहीं होगा। यह झूठ फैलाती हैं कि बंगाल में बाहर का मुख्यमंत्री आएगा। बंगाल का मुख्यमंत्री बंगाल में जन्मा, बंगाली बोलने वाला ही होगा। अमित शाह ने कहा, एसआईआर प्रक्रिया में ममता दीदी और उनके प्रशासन ने कुछ गोरखाओं के नाम भी काट दिए हैं। कोई बात नहीं। सीटें तो वैसे भी हमारे पास ही आ रही हैं। जैसे ही चुनाव खत्म होंगे, भारतीय जनता पार्टी धीरे-धीरे हर एक गोरखा को वापस मतदाता सूची में शामिल कर लेगी।" उन्होंने कहा, "चाय बागानों में स्कूल खोलना, चाय बागान श्रमिकों को उनकी ज़मीन का मालिकाना हक देना, आवास पट्टे उपलब्ध कराना और दो वर्षों के भीतर चाय बागान श्रमिकों की मज़दूरी में 500 रुपये से अधिक की वृद्धि भारतीय जनता पार्टी द्वारा की जाएगी। उत्तरी बंगाल में हम चार नए औद्योगिक शहर स्थापित करेंगे। भारतीय जनता पार्टी यह भी सुनिश्चित करेगी कि सभी सरकारी कर्मचारियों को 45 दिनों के भीतर 7वें वेतन आयोग के लाभ मिलेंगे। अगर आप भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाते हैं, तो हम यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लाएंगे।" उन्होंने कहा, " भाजपा सरकार महिलाओं और बेरोजगारों को प्रतिमाह 3000 रुपये, गर्भवती माताओं को 21 हजार रुपये और महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 33 फीसद आरक्षण देगी। इसके साथ ही महिलाओं को मुफ्त बस सफर कराएगी। किसानों की धान की फसल की एमएसपी 3100 रुपये प्रति क्विंटल करेगी। साथ ही किसान सम्मान निधि को 6000 रुपये की जगह 9000 रुपये सालाना करेगी।" उन्होंने कहा, "दार्जिलिंग और उत्तरी बंगाल में हो रहे अन्याय को भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से खत्म करेगी। यह चुनाव सिर्फ़ हमारे दो उम्मीदवारों को विधायक बनाने के लिए नहीं है। यह चुनाव दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर गंगा सागर तक, और गंगा सागर से लेकर बंगाल की राजधानी कोलकाता तक, हमारी माताओं और बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। यह चुनाव उत्तरी बंगाल पर सालों-साल से हो रहे अन्याय और उपेक्षा का जवाब है। ममता दीदी को शर्म आनी चाहिए कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद, साल-दर-साल संदेशखाली में घुसपैठियों ने हमारी माताओं और बहनों पर अत्याचार किए हैं। ममता दीदी के शासन में नौकरियां बेची गई हैं। हम हर साल एक लाख युवक-युवतियों को एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से, बिना किसी पैसे या सिफारिश के नौकरियां देंगे।"

ईरान युद्ध का असर: बांग्लादेश में मोबाइल नेटवर्क पर पड़ी मार, इंटरनेट ठप होने का खतरा

ढाका  ईरान युद्ध की वजह से कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच अब भी संघर्ष चल रहा है और हाल फिलहाल में कोई राहत भी मिलती नहीं दिख रही है। ऐसे में कई देशों में हालात बाद से बदतर होते जा रहे हैं। भारत के पड़ोस में बांग्लादेश में तो अब इंटरनेट ठप पड़ने के हालात बन पड़े हैं। ईंधन की भारी कमी के चलते बांग्लादेश में मोबाइल नेटवर्क पर बड़े स्तर पर बंद होने के खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि करीब 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश के लिए हालात इसीलिए बिगड़ गए हैं क्योंकि वह अपनी तेल और गैस जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसमें से ज्यादातर तेल मिडिल ईस्ट से ही आता है। अब होर्मुज में शिपिंग रूट बाधित होने से बांग्लादेश में हाहाकार मच गया है। गारमेंट उद्योग पहले ही प्रभावित ढाका समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर 12-12 घंटे लंबी कतारें लग रही हैं। हालात को संभालने के लिए सरकार ने हाल ही में डीजल की कीमतों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की है। बिजली संकट के कारण गारमेंट उद्योग पहले ही प्रभावित हो चुका है, जहां उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। अब इसकी आंच इंटरनेट तक पहुंच गई है। डेटा सेंटर के लिए चाहिए डीजल रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते सोमवार को बांग्लादेश के मोबाइल टेलीकॉम ऑपरेटर्स के संगठन (AMTOB) ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो मौजूदा हालात में सेवाओं को जारी रखना संभव नहीं रह जाएगा। बता दें कि टेलीकॉम कंपनियां बिजली कटौती के दौरान अपने डेटा सेंटर और नेटवर्क टावर (BTS) चलाने के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भर रहती हैं। लेकिन अब रोजाना 5 से 8 घंटे की बिजली कटौती हो रही है, जिससे स्थिति बिगड़ गई है। SMS-बैंकिंग सेवाएं भी ठप हो जाएंगी AMTOB के अनुसार, केवल डेटा सेंटर ही हर घंटे करीब 500 से 600 लीटर डीजल खपत करते हैं। संगठन के महासचिव मोहम्मद जुल्फिकार ने कहा, “डेटा सेंटर ऑपरेटर का दिमाग होता है। अगर यह बंद हो गया, तो पूरा नेटवर्क ठप हो जाएगा।” अगर नेटवर्क बंद हुआ, तो सिर्फ कॉल और इंटरनेट ही नहीं, बल्कि SMS और बैंकिंग सेवाएं भी ठप हो सकती हैं। इसका असर आम लोगों से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक पड़ेगा। बांग्लादेश में मोबाइल फाइनेंशियल सर्विसेज (MFS) रोजमर्रा के लेन-देन का अहम हिस्सा हैं, और रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

नेपाल में नई सरकार ने सैलरी सिस्टम में किया बड़ा बदलाव, कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

काठमांडू  नेपाल सरकार ने एक बड़ा और अलग फैसला लिया है, जिसके तहत अब सरकारी कर्मचारियों को हर महीने की बजाय हर 15 दिन में सैलरी दी जाएगी। Nepal में यह पहली बार होगा जब सैलरी का भुगतान महीने में दो बार (फोर्टनाइटली) किया जाएगा। यह फैसला 17 अप्रैल को वित्त मंत्रालय स्तर पर लिया गया और इसे लागू करने के लिए संबंधित सरकारी विभागों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से कब से लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, अगर कर्मचारियों को बार-बार पैसे मिलेंगे तो वे नियमित रूप से खर्च करेंगे, जिससे बाजार में पैसा तेजी से घूमेगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। दुनिया के ज्यादातर देशों में, खासकर दक्षिण एशिया में, सरकारी कर्मचारियों को मासिक सैलरी ही दी जाती है। India, Pakistan, Bangladesh, Bhutan, Sri Lanka और Maldives में अभी भी महीने में एक बार सैलरी देने की परंपरा है। हालांकि, इस नए फैसले को लागू करने में कुछ कानूनी अड़चनें आ सकती हैं। नेपाल के मौजूदा कानून के अनुसार सरकारी कर्मचारियों को हर महीने के अंत में सैलरी देने का प्रावधान है। इसलिए इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कानून में बदलाव करना पड़ सकता है।  फाइनेंशियल कंट्रोलर जनरल ऑफिस के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी रूप से सैलरी हर 15 दिन में देना संभव है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। सरकार इस पर विचार कर रही है कि अध्यादेश (Ordinance) लाकर इसे जल्दी लागू किया जाए। कुल मिलाकर, नेपाल का यह फैसला आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

यूपी बना आयुष्मान भारत योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य, एनएचए ने किया सम्मान

आयुष्मान भारत का लाभ देने में यूपी देश में अव्वल, एनएचए ने किया सम्मानित   नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी ने पुणे में आयोजित दो दिवसीय शिविर में किया सम्मानित   प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के उत्कृष्ट संचालन को मिला पुरस्कार   प्रदेश में डिजिटलीकरण और व्यापक नेटवर्क से मरीजों को मिल रही बेहतर सुविधा लखनऊ  योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। योगी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का लाभ शत-प्रतिशत लाभार्थियों को देने एवं धरातल पर उतारने में पूरे देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। इसके लिए नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी (एनएचए) द्वारा पुणे में 17 और 18 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के उत्कृष्ट संचालन के लिए सम्मानित किया गया। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी और साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और डिजिटलीकरण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों का नतीजा है। आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों में मिल रही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सुविधा साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 6,433 अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध हैं, जिनमें 3,521 निजी और 2,912 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि योगी  ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान शामिल हैं, जहां एबीडीएम-इनेबेल्ड एचएमआईएस(हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) की सुविधा उपलब्ध है, जिससे मरीजों को डिजिटल और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं। पिछले एक वर्ष में प्रदेश ने उच्च गुणवत्ता वाले अस्पतालों को प्राथमिकता देते हुए सूचीबद्ध करने की नीति अपनाई है।  गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा हुई बेहतर स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि हाल ही में 100 या उससे अधिक बेड वाले 55 बड़े अस्पतालों को योजना से जोड़ा गया है। इन अस्पतालों के शामिल होने से प्रदेश में द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है, जिससे गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा और बेहतर हुई है। योगी सरकार ने केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया है। न्यूरोसर्जरी, नियोनेटल केयर, ऑन्कोलॉजी, रेडियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी और बर्न मैनेजमेंट जैसी विशेष सेवाओं को प्राथमिकता देकर प्रदेश ने स्वास्थ्य सुविधाओं को नई ऊंचाई दी है। इन सुविधाओं के विस्तार से उन मरीजों को भी राहत मिली है, जिन्हें पहले इलाज के लिए बड़े शहरों या अन्य प्रदेश का रुख करना पड़ता था। इसका सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिल रहा है। पहले जहां इन क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं, वहीं अब आयुष्मान भारत योजना के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है, बल्कि गरीब और कमजोर वर्गों के लिए इलाज का आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।