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चलती कार में अर्धनग्न स्टंट का वीडियो वायरल, पुलिस ने की कार्रवाई

हापुड़ हापुड़ पुलिस ने दिल्ली-लखनऊ हाईवे NH-9 पर चलती कार की सनरूफ से बाहर निकलकर अर्धनग्न हालत में स्टंट करने वाले एक युवक के खिलाफ 21,500 रुपये का ऑनलाइन चालान काटकर कार्रवाई की है. गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र में युवक ने तेज रफ्तार कार में गाने बजाकर हंगामा किया, जिसका वीडियो पीछे चल रहे राहगीर ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. यातायात पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेकर तत्काल एमवी एक्ट के अंतर्गत गाड़ी का चालान किया. चलती कार की सनरूफ से किया स्टंट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि नेशनल हाईवे-9 पर एक कार तेजी से दौड़ रही है. इसी दौरान एक युवक कार की सनरूफ से आधा बाहर निकलकर खतरनाक तरीके से स्टंट कर रहा है. कार के भीतर तेज आवाज में गाने बज रहे थे और युवक लगातार हंगामा कर रहा था. राहगीरों द्वारा बनाए गए इस वीडियो के इंटरनेट पर फैलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया और गाड़ी के नंबर के आधार पर कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने सिखाया सबक, काटा भारी चालान वीडियो का संज्ञान लेते हुए हापुड़ यातायात पुलिस ने इसे यातायात नियमों का गंभीर उल्लंघन माना. पुलिस ने बिना देरी किए एमवी एक्ट के तहत संबंधित वाहन का कुल 21,500 रुपये का ऑनलाइन चालान काट दिया. पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे स्टंटबाजों को कड़ा संदेश देना है जो सड़क पर अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं. पुलिस अब वायरल वीडियो के आधार पर मामले की आगे की जांच कर रही है. यातायात पुलिस की जनता से अपील हापुड़ के यातायात निरीक्षक नरेश कुमार ने इस घटना के बाद जिलेवासियों से विशेष अपील की है. उन्होंने कहा कि लोग यातायात नियमों के अनुरूप ही अपने वाहन का प्रयोग करें और ऐसी कोई हरकत न करें जिससे किसी की जान को खतरा हो. पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई भी चालक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर विधिक कार्यवाही की जाएगी.

2026 में आएगा अधिकमास, जानें कब से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास

 कई सालों में एक बार हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. साल 2026 में भी ऐसा ही खास साल आने वाला है. इस महीने को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. यह समय त्योहारों से ज्यादा पूजा, साधना और आत्मचिंतन के लिए माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार, हिंदू कैलेंडर चंद्रमा के हिसाब से चलता है, जो सूर्य के साल से करीब 11 दिन छोटा होता है. इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है. 2026 में अधिकमास कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा. इस बार यह ज्येष्ठ महीने में पड़ रहा है, जिसकी वजह साल 2026 में 1 महीना ज्यादा बढ़ गया है. यानी यह साल 13 महीने को होगा. एक साल में दो ज्येष्ठ महीने विक्रम संवत 2083 में एक खास बात यह भी होगी कि दो ज्येष्ठ मास पड़ेंगे. एक होगा सामान्य ज्येष्ठ मास और दूसरा होगा अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम) मास. अधिकमास के कारण ज्येष्ठ महीना लगभग 58-59 दिनों तक चलेगा और दोनों महीने कुछ समय के लिए आपस में मिलेंगे. इस बार अधिक ज्येष्ठ मास की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा. वहीं, सामान्य ज्येष्ठ मास की शुरुआत 22 मई 2026 से होगी और समापन 29 जून 2026 को होगी. इसी वजह से यह साल पंचांग और खगोलीय दृष्टि से बहुत खास माना जा रहा है. अधिकमास में क्या करें? – दान-पुण्य करें- अधिकमास में गरीबों को भोजन, कपड़े या जरूरत की चीजें दान करना बहुत शुभ माना जाता है. – दीपदान करें- हर दिन या खास दिनों पर दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है. – मंत्र जाप करें- 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ होता है. – धार्मिक ग्रंथ सुनें या पढ़ें- इस महीने में श्रीमद्भागवत कथा सुनना या पढ़ना लाभकारी माना जाता है. – पवित्र स्नान करें- गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है. अधिकमास में क्या न करें? अधिकमास में किसी नए काम की शुरुआत न करें. शादी या सगाई जैसे मांगलिक कार्य टालें. गृह प्रवेश या जमीन-घर से जुड़े बड़े फैसले न लें. मुंडन या जनेऊ जैसे संस्कार न करें. बड़े निवेश या लेन-देन से बचें. व्रत की शुरुआत या उद्यापन न करें.

लखनऊ समेत पूरे यूपी में पारा चढ़ा, मौसम विभाग ने दी और गर्मी की चेतावनी

लखनऊ  यूपी में पड़ रही गर्मी अब अपने पूरे तेवर दिखाने लगी है। अभी अप्रैल का महीना आधा ही बीता है और तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में कुछ शहरों का पारा 40 डिग्री सेल्सियस और कुछ का इसके भी पार पहुंच गया है। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल इस चुभती गर्मी से किसी तरह की राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। आने वाले अगले कुछ दिनों में ये गर्मी और सितम ढा सकती है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को यूपी के पांच जिले ऐसे रहे, जिनमें तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। इनमें 42.6 डिग्री सेल्सियस के साथ बांदा जिला यूपी में सबसे ज्यादा गर्म रहा। इसके साथ ही झांसी में 40.5 डिग्री, प्रयागराज में 40.4 डिग्री, वाराणसी में 40.1 डिग्री और सुल्तानपुर में 40 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं, आगरा में 39.8 डिग्री और यूपी की राजधानी लखनऊ में भी मंगलवार को पारा 38.1 डिग्री तक पहुंच गया। दिनभर चली गर्म हवाओं ने लोगों को एहसास करा दिया कि इस बार यूपी में गर्मी जमकर पसीने छुड़ाएगी। मौसम विभाग के सीनियर वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया कि अगले चार से पांच दिनों में इस गर्मी भरे मौसम में किसी तरह के बदलाव के संकेत नहीं है। फिलहाल कोई एक्टिव वेदर सिस्टम बनता हुआ नहीं दिख रहा है। यूपी में चलती रहेंगी पछुआ हवाएं मोहम्मद दानिश ने बताया कि अभी अगले चार-पांच दिन शुष्क पछुआ हवाएं चलती रहेंगी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित प्रायद्वीपीय इलाकों के ऊपर एक एंटीसाइक्लोन बना हुआ है, जो मध्य भारत की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में अगले एक हफ्ते के भीतर, यूपी के अलग-अलग जिलों में तापमान 3 से 4 डिग्री तक बढ़ सकता है। यूपी में अगले 7 दिनों की मौसम रिपोर्ट अनुमान है कि 18 अप्रैल के बाद यूपी के अलग-अलग जिलों में पारा तेजी से ऊपर चढ़ेगा। मौसम विभाग की तरफ से बुधवार को जारी की गई 7 दिनों की वेदर रिपोर्ट में भी बताया गया है कि 15 अप्रैल से 21 अप्रैल तक पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मौसम शुष्क ही बना रहेगा। हालांकि, मौसम विभाग की इस रिपोर्ट में किसी तरह की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।  

बरखा बिष्ट का एग्जिट कंफर्म, शो से खत्म हुआ वैम्प ट्रैक

टेलीविजन सीरियल्स के दर्शकों के लिए एक अच्छी खबर है और एक बुरी. 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में शांति निकेतन की शांति फिर से लौटने वाली है. नोइना अपने बुरे मकसद में कामयाब होती उससे पहले तुलसी ने उसके झूठे कैंसर का पर्दाफाश कर दिया है. नोइना का सच सामने आने के बाद शो से बरखा बिष्ट की विदाई हो जाएगी. यानि शो से एक वैम्प का किरदार खत्म कर दिया जाएगा. हो सकता है कि आने वाले समय में इसका असर शो की टीआरपी पर पड़े. नोइना का सच आया सामने नोइना कैंसर होने का बहाना करके मिहिर से शादी करने जा रही थी, लेकिन तुलसी ने ऐसे नहीं होने दिया. नोइना और मिहिर का गठबंधन जुड़ने से पहले ही तुलसी ने उसका सच सबके सामने ला दिया. तुलसी ने खुलासा किया कि असल में नोइना को अल्सर है, कैंसर नहीं. इस खुलासे के बाद शो से नोइना का ट्रैक खत्म हो जाएगा. बरखा बिष्ठ ने कंफर्म किया है कि शो से उनका ट्रैक खत्म हो चुका है. अपना ट्रैक खत्म होने के बाद बरखा ने इंस्टाग्राम पर लंबा नोट लिखा. उन्होंने लिखा- हमने इस शो से हिस्ट्री बनाई है और मैं सबको इतने प्यार और भरोसे के लिए काफी शुक्रिया कहती हूं. बिष्ट ने ये भी बताया कि लोग नोइना से नफरत करते-करते प्यार करने लगे थे. इससे ज्यादा कुछ और चाहिए भी नहीं था. बरखा ने टीम को धन्यवाद दिया. वो लिखती हैं कि टीम को बहुत-बहुत थैंक्यू, जो हर कदम पर मेरे साथ खड़ी रही. बरखा ने नोइना के रोल के लिए एकता कपूर को भी धन्यवाद कहा. वो लिखती हैं कि थैंक्यू नोइना देने के लिए और मुझ पर भरोसा करने के लिए. अभी के लिए साइन ऑफ मिलते हैं फिर कभी. बरखा का एग्जिट कंफर्म होते ही दर्शकों ने उनके स्ट्रॉन्ग रोल की तारीफ की, कहा कि किरदार भले ही नफरत का पात्र था, लेकिन परफॉर्मेंस कमाल की थी. एक यूजर ने लिखा, नोइना से नफरत कितनी भी हो, लेकिन इग्नोर नहीं कर सकते. क्या कमाल का कैरेक्टर प्ले किया. शो में तुम्हारी कमी खलेगी. ये भी देखना होगा कि नोइना का कैरेक्टर खत्म होने के बाद शो की टीआरपी पर कितना फर्क पड़ता है. क्योंकि अब तक नोइना और मिहिर की शादी की ट्रैक की वजह दर्शक शो से जुड़े हुए दिख रहे थे. दूसरी बात ये भी है कि शो में जब तक विलेन परेशानियां ना खड़ी करे, तब उसे देखने में भी मजा नहीं आता. कहना गलत नहीं होगा कि नोइना का कैरेक्टर जाते-जाते शो का चार्म ले गया.

सम्राट चौधरी ने संभाली कमान, एनडीए सरकार में बड़ा बदलाव

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शपथ ग्रहण करने के बाद कहा, “मैं आज से ही बिहार के लिए काम करना शुरू कर दूंगा। बिहार में सिर्फ मोदी-नीतीश मॉडल ही चलेगा।” बता दें कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की कमान आज से भाजपा के हाथों में है और सम्राट चौधरी ने सीएम पद की शपथ ले ली है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सम्राट चौधरी ने कामकाज संभाल लिया है। पटना स्थित लोकभवन के बाहर सम्राट चौधरी के सामने बुलडोजर बाबा जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। लेकिन सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि बिहार में सिर्फ और सिर्फ मोदी-नीतीश मॉडल ही चलेगा। नीतीश का सपना पूरा करेंगे सम्राट केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "जैसी सरकार  नीतीश कुमार ने 20 साल तक चलाई, हम समझते हैं कि यदि कोई कमी रही भी होगी तो उसे पूरा करके सम्राट चौधरी बिहार को आगे ले जाएंगे। जो जीतन मांझी आज है, उसे नीतीश कुमार ने ही बनाया है। अगर 2014 में उन्होंने मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनाया होता तो हमारी इतनी चर्चा नहीं होती। सबसे बड़ी बात कि एक दलित के बच्चे को उन्होंने पद दिया तो स्वाभाविक है कि मेरी आंखों से आंसू कैसे न आते। वहीं, बीजेपी नेता दिलीप जायसवाल ने कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है। आज सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। जिस तरह से हमारे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकसित बिहार का सपना देखा है, सम्राट चौधरी उनके मार्गदर्शन में बिहार को विकसित बिहार की ओर ले जाएंगे।" पहली बार बिहार में भाजपा का सीएम बना बिहार में एनडीए की सरकार है, लेकिन सत्ता में शामिल भाजपा ने पहली बार राज्य में अपना सीएम बनाया है। विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद सीएम नीतीश कुमार को ही बनाया गया, लेकिन बदले हालात में उनके राज्यसभा जाने के बाद अब भाजपा को सरकार का नेतृत्व करने का मौका मिला है। सम्राट चौधरी नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम के पद पर थे। अब डिप्टी सीएम के तौर पर जदयू नेता विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र कुमार यादव ने शपथ ली है। सम्राट चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पसंदीदा रहे हैं। नीतीश कुमार पहले से ही कहते रहे थे कि अब बिहार इन्हें ही संभालना है।  

गर्मी में कितना पानी पीना चाहिए? उम्र के हिसाब से जानें सही मात्रा

गर्मी का मौसम आते ही शरीर में पानी की जरूरत कई गुना बढ़ जाती है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर से पसीने के रूप में पानी तेजी से निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अगर समय पर और सही मात्रा में पानी नहीं पिया जाए, तो इसका असर सीधे सेहत पर पड़ता है। दरअसल, कई लोग अपनी उम्र और शरीर की जरूरत के अनुसार पानी नहीं पीते, जिससे थकान, चक्कर, सिरदर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी उम्र, वजन और दिनभर की गतिविधियों के अनुसार पानी का सेवन करें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किस उम्र के लोगों को कितना पानी पीना चाहिए और क्यों यह आपकी सेहत के लिए बेहद जरूरी है।  बच्चे (5–12 साल) इस उम्र में बच्चों का शरीर तेजी से एक्टिव रहता है और वे ज्यादा खेलकूद करते हैं, जिससे उनके शरीर से पसीने के रूप में पानी जल्दी निकलता है। इसलिए बच्चों को रोजाना 1 से 1.5 लीटर पानी देना जरूरी होता है। अगर बच्चा बाहर खेलता है या गर्मी ज्यादा है, तो पानी की मात्रा और बढ़ानी चाहिए। ध्यान रखें कि बच्चों को जूस या कोल्ड ड्रिंक के बजाय सादा पानी या प्राकृतिक पेय जैसे नारियल पानी देना ज्यादा फायदेमंद होता है। किशोर (13–18 साल) किशोरावस्था में शरीर का विकास तेजी से होता है, इसलिए पानी की जरूरत भी बढ़ जाती है। इस उम्र में 1.5 से 2.5 लीटर पानी पीना जरूरी है। स्कूल, स्पोर्ट्स और फिजिकल एक्टिविटी के कारण शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है। अगर पानी की कमी हो जाए तो थकान, ध्यान में कमी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वयस्क (18–50 साल) वयस्कों के लिए रोजाना 2.5 से 3.5 लीटर पानी पीना जरूरी माना जाता है। जो लोग धूप में काम करते हैं या ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करते हैं, उन्हें इससे भी ज्यादा पानी की जरूरत हो सकती है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, पाचन तंत्र सही काम करता है और शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं। बुजुर्ग (50+ साल) बढ़ती उम्र में प्यास लगने की क्षमता कम हो जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत कम हो जाती है। बुजुर्गों को रोजाना कम से कम 2 से 2.5 लीटर पानी पीना चाहिए। पानी की कमी से उन्हें चक्कर, कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए उन्हें समय-समय पर पानी पीने की आदत डालनी चाहिए, भले ही प्यास न लगे।

खेल नर्सरियों की संख्या में बढ़ोतरी, युवाओं का रुझान नए खेलों की ओर

 चंडीगढ़ हरियाणा लंबे समय से कुश्ती और कबड्डी खेल के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब प्रदेश में खेलों का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है और खिलाड़ियों की एक नई पौध तैयार हो रही है। नए सत्र 2026-27 के लिए खेल विभाग की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक खेलों के साथ-साथ फुटबॉल और वॉलीबाॅल का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इन खेलों की नर्सरियों की संख्या भी लगातार बढ़ाई जा रही है और युवा खिलाड़ियों का रुझान इनकी ओर साफ दिखाई दे रहा है। प्रत्येक नर्सरी में 25 खिलाड़ी खेलते हैं। प्रदेशभर में इस बार 1063 खेल नर्सरियां अलॉट की गई हैं, जो पिछले साल की 976 नर्सरियों से 87 ज्यादा हैं। लेकिन सरकार की ओर से कुल 2 हजार नर्सरियों के संचालित करवाने का लक्ष्य है। इन नर्सरियों के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही ट्रेनिंग दी जाएगी। अब भी कबड्डी 148 नर्सरियों के साथ टॉप पर है, लेकिन फुटबॉल (69) और वॉलीबाॅल (64) तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। कुश्ती की 74 नर्सरियां हैं। अन्य खेलों की बढ़ती संख्या बताती है कि युवाओं की पसंद और नजरिया अब बदल रहा है। फुटबॉल-वॉलीबाॅल के क्रेज बढ़ने के मुख्य वजह हरियाणा में फुटबॉल कोच हरविंदर सिंह के मुताबिक इस बदलाव के पीछे सबसे पहली वजह प्रदेश के स्कूल और कॉलेज स्तर पर इन खेलों को ज्यादा बढ़ावा मिलना है। गांवों में भी अब फुटबॉल और वॉलीबाॅल के मैदान आसानी से तैयार हो जाते हैं। इससे बच्चों की भागीदारी बढ़ी है। इसी तरह दूसरी वजह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के लिए तेजी से बढ़ते मौके भी है। फुटबॉल और वॉलीबाॅल में करियर के विकल्प बढ़ने से युवा इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और टीवी पर बड़े टूर्नामेंट देखने से भी बच्चों में इन खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। वहीं, तीसरी अहम वजह इन खेलों में कम खर्च और आसान संसाधन है, जहां कुश्ती के लिए अखाड़ा और विशेष व्यवस्था चाहिए, इसी तरह दूसरे खेलों में संसाधनों की व्यवस्था पर भारी खर्च है। वहीं फुटबॉल और वॉलीबाॅल कम संसाधनों में भी खेले जा सकते हैं। जिलों में भी दिखा नया ट्रेंड खेल नर्सरियों के आंकड़ों में भी यह बदलाव साफ नजर आता है। हिसार 119 नर्सरियों के साथ सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बनकर उभरा है, जबकि जींद 108 के साथ दूसरे स्थान पर है। कैथल, भिवानी, करनाल और रोहतक जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नर्सरियां अलॉट की गई हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला अभी पीछे हैं, जबकि सबसे पीछे नूंह है। इन जिलों में इतनी नर्सरियां अलॉट हिसार –     119 जीद –        108 कैथल –        82 भिवानी –      67 करनाल –     75 रोहतक –     65 सोनीपत –     65 झज्जर –        28 यमुनानगर –   28 दादरी –         25 अंबाला –        22 पंचकूला –      18 नूंह –             12  

अजमेर में पानी सप्लाई बहाल, कई इलाकों को राहत

अजमेर अजमेर में बीसलपुर पाइपलाइन मरम्मत का काम पूरा हो गया. 30 घंटे का शटडाउन खत्‍म हो गया. कई इलाकों में सप्लाई बहाल हो गई. कल तक जलापूर्ति पूरी तरह पटरी पर आने की उम्मीद है. अब लोगों को पानी की समस्‍या नहीं होगी. पहले की तरह से पानी की सप्‍लाई शुरू हो जाएगी. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने बीसलपुर-अजमेर पेयजल परियोजना के अंतर्गत 30 घंटे का शटडाउन लिया था. 30 घंटे का शटडाउन अजमेर में 12 अप्रैल रात 12 बजे से 14 अप्रैल सुबह 6 बजे तक 30 घंटे पेयजल सप्लाई बंद थी. इस दौरान 1600 एमएम और 1500 एमएम पाइपलाइन पर जरूरी तकनीकी कार्य किए गए. इन इलाको में सप्लाई बाधित शटडाउन के कारण अजमेर शहर के साथ-साथ ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, सरवाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित रही. शहर के प्रमुख इलाकों में वैशाली नगर, पंचशील, आदर्श नगर, माकड़वाली रोड, धोलाभाटा, क्रिश्चियनगंज, केसरगंज, रामगंज, सिविल लाइंस, फॉयसागर रोड और दरगाह क्षेत्र सहित कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई बंद थी. लोगों को हुई परेशानी? 30 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहने से नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. घरों में पानी स्टोरेज सीमित होने से खाना बनाना, नहाना और साफ-सफाई जैसी दैनिक जरूरतें प्रभावित हुई. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ी. होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर भी इसका असर पड़ा.

मायावती का बयान: महिला आरक्षण बिल का BSP ने किया समर्थन, SC, ST और OBC को अलग से कोटा मिलना चाहिए

 लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का स्वागत किया है. उन्होंने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसमें SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा देने की मांग की. मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण के पक्ष में है।  मायावती ने कहा- "हमारी पार्टी देश की संसद, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित 33% आरक्षण का और इसे आगे बढ़ाने के लिए उठाए गए सही और उचित कदम का स्वागत करती है. हालांकि इसमें काफी देरी हुई है, लेकिन देरी के बावजूद, हमारी पार्टी इसका स्वागत करती है. यदि वास्तव में शोषित और हाशिए पर पड़ी महिलाओं के लिए, विशेष रूप से SC, ST और OBC समुदायों की उन महिलाओं के लिए, जिन्हें सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से लगातार हाशिए पर धकेला जा रहा है, अलग से आरक्षण प्रदान किया जाता है, तो यह उचित और ऐतिहासिक दोनों होगा।  बकौल मायावती- "जीवन के हर पहलू में महिलाओं को समानता और आत्म-सम्मान का अधिकार देने के साथ-साथ, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 'हिंदू कोड बिल' के माध्यम से उन्हें मजबूत कानूनी अधिकार देने का भी प्रयास किया था. तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपने संकीर्ण जातिवाद से प्रभावित होकर इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और बाद में इसे टुकड़ों-टुकड़ों में पारित किया. इस प्रकार, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को OBCs के लिए आरक्षण की कमी और महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और बेहतरी के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में देश के पहले कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।  बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि हमारी पार्टी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के वर्तमान केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करती है. हालांकि, हमारी पार्टी हमेशा से महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में रही है. हमारी पार्टी 33 प्रतिशत आरक्षण का भी स्वागत करती है। 

एसडीएम संजय कुमार की पहल से शिक्षकों के साथ संवाद, शिक्षा व्यवस्था पर फोकस

 गढ़वा  गढ़वा में सदर एसडीएम संजय कुमार की खास पहल ‘कॉफी विद एसडीएम’ की हर हफ्ते चलने वाली श्रृंखला में आज यानी बुधवार (15 अप्रैल) को शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विशेष बैठक होगी. अनुमंडल कार्यालय के सभागार में अपराह्न 3:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में जिले की शिक्षा व्यवस्था, चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की जाएगी. डेढ़ वर्ष से जारी है संवाद की परंपरा ध्यान देने वाली बात यह है कि ‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है. इस पहल के माध्यम से एसडीएम हर सप्ताह समाज के अलग-अलग वर्गों (जैसे युवा, किसान, उद्यमी आदि) से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनते हैं. इसी कड़ी में इस बार शिक्षकों को आमंत्रित किया गया है जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था को धरातल पर और मजबूत किया जा सके. एसडीएम ने की सहभागिता की अपील सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने सभी कोटि के आमंत्रित शिक्षक प्रतिनिधियों से इस संवाद में सक्रिय रूप से भाग लेने का अनुरोध किया है. उन्होंने बताया कि शिक्षकों के सुझावों के आधार पर स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक सुधारों को लागू करने का प्रयास किया जाएगा.   इन मुख्य बिंदुओं पर होगा विमर्श इस संवाद कार्यक्रम में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक प्रतिनिधि शामिल होंगे. इन मुख्य विषय पर चर्चा होगी:     विद्यालयों की दैनिक व्यवस्था और अनुशासन.     नवाचारी शिक्षा को बढ़ावा देना.     छात्रों के ड्रॉप-आउट दर को कम करने के उपाय.     शिक्षकों की स्थानीय समस्याएं और संसाधनों का बेहतर उपयोग.